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UP के एटा में DM आवास से सटे दरगाह पर चला बुलडोजर: लगातार बढ़ता जा रहा था कब्जा, गुरुवार को लगता था मेला

उत्तर प्रदेश के एटा जिले में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत मुल्लेशाह दरगाह पर किए गए अतिक्रमण पर बुलडोजर चला है। यह कार्रवाई 15 मई 2022 (रविवार) को की गई। सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की तारीफ की जा रही है। वहीं समाजवादी पार्टी प्रशासन के इस एक्शन का विरोध कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एटा जिला के ADM प्रशासन ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, “दरगाह सुरक्षित रखी जाएगी, लेकिन उसके ऊपर जो कमरे बन रहे हैं उसे तोड़ा गया है। इस कमरे में लोग रहना शुरू कर दिए थे।” वहीं समाजवादी पार्टी ने प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध किया है। दिबियापुर से सपा विधायक प्रदीप यादव ने कहा, “हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले की जाँच की है। हम इस कार्रवाई का विरोध करते हैं। इसकी जाँच रिपोर्ट अखिलेश यादव को सौंपी जाएगी। साथ ही इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाएगा।”

समाजवादी पार्टी के एटा जिलाध्यक्ष परवेज जुबैरी ने भी इस कार्रवाई को गलत बताया है। उन्होंने कहा, “बहुत गलत काम हुआ है ये। ऐसा नहीं होना चाहिए। ये हमारी एकता को तोड़ने का प्रयास है।”

गुरुवार को लगता था मेला

गौरतलब है कि मुल्लेशाह की दरगाह पर हर गुरुवार को मेला लगता था। मेले में चादर आदि बिकती थी जिसको चढ़ाने और अगरबत्ती जलाने पर मन्नत पूरी होने जैसी बातें कही जाती थी। यहाँ का केयर टेकर सोनू कुमार नाम के व्यक्ति को बनाया गया था। यह दरगाह कितनी पुरानी है, आज स्पष्ट नहीं है। लेकिन केयरटेकर इसे 100 साल पुराना बता रहे हैं।

DM बंगले से सटी हुई थी मजार

ऑपइंडिया से बातचीत में स्थानीय निवासियों ने बताया, “मुल्लेशाह की दरगाह एटा में जिला जज के आवास के ठीक सामने बनी थी। यह दरगाह DM बंगले की बॉउंड्री से भी सटी हुई थी। पहले दरगाह छोटी सी थी जो बाद में आसपास अवैध निर्माण कर बड़ी हो गई थी। यहाँ पर कभी DM एटा के ड्राइवर रहे और अब रिटायर्ड प्रेमपाल सिंह ने अतिक्रमण कर के मकान आदि बनाना शुरू कर दिया था। बाद में यहाँ मेला लगने लगा था। दरगाह सुरक्षित है और उसके बगल अतिक्रमण को हटाया गया है।”

विराजमान थे राम-जानकी, मंदिर की एक-एक ईंट निकाल खोल ली बिरयानी रेस्टोरेंट: पाकिस्तानी आबिद रहमान की कानपुर में पंक्चर बनाने वाले मुख्तार से ये कैसी डील

उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में जो जगह राम-जानकी मंदिर के तौर पर दर्ज है, वहाँ आज बिरयानी की रेस्टोरेंट की चल रही है। शत्रु संपत्तियों की तलाश के दौरान यह बात सामने आई है।

रिपोर्टों के अनुसार यह जगह कानपुर के बेकनगंज स्थित डॉक्टर बेरी चौराहा पर है। भवन संख्या 99/14ए रिकॉर्ड में राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट का है। यहाँ भगवान श्रीराम का मंदिर था। बताया जाता है कि अस्सी के दशक तक यहाँ पूजा हुआ करती थी। लेकिन अब मंदिर का कुछ ही हिस्सा बचा हुआ है। वह भी जर्जर हाल में है। मंदिर के अन्य हिस्सों को तोड़कर उसका इस्तेमाल रेस्टोरेंट की रसोई के तौर पर किया जा रहा है।

रेस्टोरेंट चलाने वाले व्यक्ति का दावा है कि उसने यह संपत्ति आबिद रहमान से खरीदी थी। रिपोर्ट के अनुसार आबिद रहमान 1962 में पाकिस्तान चला गया था, जहाँ उसका परिवार पहले से ही रह रहा था। 1982 में उसने यह संपत्ति मंदिर परिसर में साइकिल मरम्मत की दुकान चलाने वाले मुख्तार बाबा को बेच दी।

मुख्तार के बेटे महमूद उमर का दावा है कि उसके पास इससे संबंधित सभी आवश्यक कागजात मौजूद हैं और वह जल्द ही प्रशासन के नोटिस का जवाब देगा। यह भी बताया जा रहा है कि रेस्टोरेंट बनाने के लिए मंदिर ट्रस्ट के आगे हिंदुओं की जो 18 दुकानें थीं उसे भी एक-एक कर तोड़ दिया गया।

ईटीवी भारत ने शत्रु संपत्ति प्रभारी व एसीएम-सात दीपक पाल के हवाले से बताया है कि उनके पास इस जमीन को लेकर पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में शिकायत आई थी। एसडीएम की जाँच में पता चला कि इशहाक बाबा नाम का व्यक्ति इस मंदिर का केयरटेकर था। बाद में उसका बेटा मुख्तार बाबा यहीं साइकिल मरम्मत और पंक्चर बनाने का काम करने लगा।

शत्रु संपत्ति संरक्षक कार्यालय के मुख्य पर्यवेक्षक और सलाहकार कर्नल संजय साहा ने कहा कि इस मामले में लोगों को नोटिस भेजा गया है। उन्हें जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। कर्नल संजय साहा ने बताया, “हमने उन्हें पाँच विशिष्ट सवालों के साथ नोटिस भेजा है और उनके जवाबों का हमें इंतजार हैं। हालाँकि, अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।”

मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल शत्रु संपत्ति संरक्षण संघर्ष समिति द्वारा शिकायत दर्ज किए जाने के बाद इस मामले में जाँच शुरू की गई थी। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि जो जमीन राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट के नाम से दर्ज है, जहाँ कभी मंदिर था, उसे कोई मुस्लिम व्यक्ति कैसे बेच या खरीद सकता है?

शत्रु संपत्ति अधिनियम

शत्रु संपत्ति अधिनियम (Enemy Property Act), 1968 पाकिस्तान से 1965 में हुए युद्ध के बाद पारित हुआ था। इस अधिनियम के अनुसार, जो लोग 1947 के विभाजन या 1965 में और 1971 में लड़ाई के बाद पाकिस्तान चले गए और वहाँ की नागरिकता ले ली, उनकी सारी अचल संपत्ति ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित कर दी गई और भारत सरकार ने उसे जब्त कर लिया। यह अधिनियम शत्रु की संपत्ति की देखभाल का अधिकार संपत्ति के लीगल वारिस या लीगल प्रतिनिधि को देता है।

इस कानून में संशोधन के बाद शत्रु संपत्ति अधिनियम, 2017 आया। इसने शत्रु संपत्ति की परिभाषा बदल दी है। इसके मुताबिक, अब वे लोग भी शत्रु हैं, जो भले ही भारत के नागरिक हो, लेकिन उन्हें विरासत में ऐसी संपत्ति मिली है जो कि किसी पाकिस्तानी नागरिक के नाम है। इस संशोधन ने ऐसी सम्पतियों का मालिकाना हक भी भारत सरकार को दे दिया है।

इस्लामी जिहाद के खिलाफ अब धर्म संसद नहीं करेंगे यति नरसिंहानंद: सार्वजनिक जीवन से संन्यास, कहा- सनातन और गीता के प्रचार-प्रसार में लगाऊँगा जीवन

गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के महंत और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने एक चौंकाने वाली घोषणा की है। उन्होंने सार्वजानिक जीवन से संन्यास लेकर पूरी तरह अपना जीवन धार्मिक कार्यों में लगाने की बात कही है। उन्होंने इस्लामी जिहाद के खिलाफ अपनी लड़ाई और धर्म संसद के आयोजन से खुद को अलग करने की भी घोषणा की है।

यति नरसिंहानंद ने ये बातें 19 मई 2022 (गुरुवार) को कही। जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व वसीम रिज़वी) के खिलाफ हुई कार्रवाई के लिए भी खुद को दोषी बताया है। एक वीडियो जारी कर यति नरसिंहानंद ने कहा, “हम सभी जितेंद्र नारायण त्यागी को जेल में से लेने आए थे। उनकी रिहाई हो गई है। वे हमसे मिलने से पहले ही चले गए हैं। उनसे हमारा यहीं तक का साथ था। उनके साथ हमारे सुखद या दुखद अनुभव का पूर्णतया दोषी मैं हूँ। उनकी कोई गलती नहीं है। उन्होंने केवल सच बोला। मेरी कमजोरी के चलते उन्हें 4 महीने से ज्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा। इसके लिए मैं उनसे क्षमाप्रार्थी हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं हिन्दू समाज से कहना चाहता हूँ कि मैंने अपना जीवन जितना भी था उसे इस्लाम के जिहाद से लड़ने में लगाया। लेकिन अब बचा हुआ जीवन मैं माँ और महादेव के यज्ञ के साथ योगेश्वर की गीता के प्रचार-प्रसार में लगाना चाहता हूँ। मैं अब तक अपने से हुई गलतियों के लिए माफी माँगता हूँ। आज के बाद मैं सार्वजानिक जीवन में नहीं हूँ। मेरे जीवन में अब नया अध्याय केवल एक धार्मिक व्यक्ति के तौर पर शुरू होता है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यति नरसिंहानंद ने यह फैसला हिन्दू समाज की उदासीनता के चलते लिया है। उन्होंने कहा, “वर्ष 2012 से मैंने देवबंद के इस्लामी जिहाद के खिलाफ धर्म संसद शुरू की थी। लेकिन वो आज समाप्त हो रही। धर्म संसद में जेल गए साथियों के लिए संघर्ष में हिन्दू समाज ने हमारा साथ नहीं दिया। हिन्दू समाज के योद्धाओं की दुर्गति हो रही है।”

गौरतलब है कि कि हरिद्वार में 17-20 दिसंबर को धर्म संसद का आयोजन हुआ था। इस धर्म संसद में भड़काऊ बयान का आरोप लगाते हुए मुस्लिम पक्ष द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई थी। शिकायत के बाद यति नरसिंहानंद गिरी और जितेंद्र नारायण त्यागी की गिरफ्तारी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट तक में इस धर्म संसद के विरुद्ध याचिका दाखिल हुई थी।

जमीन दो, रेलवे में जॉब लो: लालू यादव ऐंड फैमिली के 17 ठिकानों पर CBI की रेड, दिल्ली से लेकर बिहार तक जाँच एजेंसी एक्टिव

भ्रष्टाचार के मामले में राजद सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की मुश्किलें फिर बढ़ गईं हैं। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार (20 मई 2022) को उनसे जुड़े 17 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई दिल्ली से लेकर बिहार के अलग-अलग जगहों पर की गई। यह मामला जमीन लेकर रेलवे में नौकरी देने से जुड़ा बताया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-1 की सरकार में लालू यादव रेल मंत्री हुआ करते थे।

सीबीआई की टीम ने लालू यादव, उनकी पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी और बेटी मीसा भारती के आवास सहित बिहार और दिल्ली में भी कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की। इस दौरान सीबीआई की एक टीम राबड़ी देवी के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड पर भी पहुँची।

सीबीआई सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि यह घोटाला उस वक्त हुआ था, जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे। उन्होंने कहा, “जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे, तब कुछ लोगों से नौकरी के बदले जमीन ली गई थी।” रिपोर्ट्स के मुताबिक, राबड़ी आवास पर पहुँची सीबीआई की टीम में कुल 10 लोग हैं। इसमें महिला और पुरुष अधिकारी दोनों ही शामिल हैं। ये सभी राबड़ी के आवास में जाँच कर रहे हैं। इस दौरान आवास में किसी को भी आने-जाने से रोक दिया गया है। राबड़ी देवी के पटना आवास के बाहर पुलिस बल मौजूद है।

जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की टीम लालू यादव, उनकी बेटी मीसा के अलावा अन्य रिश्तेदारों के यहाँ पड़ताल कर रही है। चारा घोटाला (Fodder Scam) में राजद नेता को जमानत मिलने के कुछ हफ्ते बाद ही यह मामला सामने आया है।

गौरतलब है कि अप्रैल 2022 में झारखंड हाई कोर्ट (Jharkhand High Court) ने लालू यादव को 10 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी। लालू की तरफ से डोरंडा कोषागार में सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। अपनी बढ़ती उम्र और 17 प्रकार की बीमारी के अलावा आधी सजा जेल में काटने का हवाला देते हुए लालू ने जमानत माँगी थी। वहीं, सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े मामले में लालू की आधी सजा अभी पूरी नहीं हुई है तो ऐसे में उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए।

गंगा तट पर फिर दिखे समाधि दिए गए दर्जनों शव: कोरोना की दूसरी लहर में यही दिखाकर मीडिया गिरोह ने रची थी भारत को बदनाम करने की साजिश

संगम नगरी कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj, Uttar Pradesh) में गंगा के किनारे रेत में समाधी दिए गए शव बड़ी संख्या में फिर सामने आए हैं। यह दृश्य कोरोना काल की याद दिला रहा है, जिसमें कुछ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संगठनों और प्रोपगेंडानिस्टों ने इसे कोरोना से हुई मौतें बताकर राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) को बदनाम करने की कोशिश की थी।

सामने आए दर्जनों शव प्रयागराज के फाफामऊ घाट की है। यहाँ पर शवों को समाधि देने के बाद उनके ऊपर लाल या गेरुआ रंग का कपड़ा लटका दिया जाता है। आमतौर यह काम वैसे हिंदू करते हैं, जिनके पास दाह-संस्कार के लिए पैसे नहीं होते। वहीं, कुछ लोग परंपरा की वजह से इन्हें समाधि देते हैं।

शवों को समाधि देने वाले लोग चाहते हैं कि उनके प्रियजनों को भी इस नश्वर संसार से मुक्ति मिले, इसलिए गंगा के तट पर वे शवों को समाधिस्थ कर देते हैं। हिंदू धर्म शवों को जलाने की परंपरा है, लेकिन कई इलाकों, खासकर गंगा के किनारे के क्षेत्रों में शवों को समाधि देने की भी परंपरा है।

लोगों का मानना है कि बरसात के दिनों में जब गंगा नदी में पानी का स्तर बढ़ेगा तब ये सारे शव में उसमें प्रवाहित हो जाएँगे। इसके बाद उनके प्रियजनों को मुक्ति मिल जाएगी। इसलिए वे अस्थायी तौर पर शवों को गंगा के किनारे समाधि देते हैं। उनका मानना है कि रेत में समाधि देने से खर्च का भार उन पर नहीं पड़ता। शायद इसीलिए फाफामऊ घाट पर यूपी के कई जिलों के लोग शवों को लेकर आते हैं।

बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दुनिया भर के देशों के साथ-साथ भारत में इसका काफी असर हुआ था। लेकिन, जिस तरह अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इन समाधि वाले शवों को छापकर भारत को बदनाम करने की कोशिश की थी, वह स्पष्ट रूप से प्रोपगेंडा था। उस सरकार तथा कई संस्थानों ने स्पष्ट किया था शवों को दफन करने की हिंदू धर्म में भी परंपरा है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मीडिया अपना ही प्रोपगेेंडा चलाता है। यही वजह है कि कोरोना के बाद राष्ट्रीय या अंतराष्ट्रीय मीडिया ने इसकी जाँच करने की कोशिश नहीं की।

बता दें कि गंगा तट पर शवों को समाधि देने पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) और जिला प्रशासन ने रोक लगा रखी है। इसके बावजूद लोग खर्च से बचने और परंपरा के कारण शवों को रेत में समाधि दे रहे हैं। प्रयागराज के निगम कमिश्नर रवि रंजन ने ANI को बताया कि इसे रोकने के लिए जल्दी ही घाटों पर इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनाए जाएँगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गंगा तट पर रेत में शवों को समाधि ना दें।

दलित दूल्हे की बारात पर मस्जिद के सामने हुई थी पत्थरबाजी, राजगढ़ प्रशासन ने आरोपितों के घरों पर चलाया बुलडोजर: मध्य प्रदेश का मामला

मध्य प्रदेश के राजगढ़ में दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठने और मस्जिद के सामने डीजे बजाने को लेकर उपद्रवियों द्वारा किए गए हमले के मामले में प्रशासन ने ऐसी कार्रवाई की है कि दोबारा ऐसी हरकत करने से पहले ऐसे लोग कई बार सोचेंगें। प्रशासन ने दलित दूल्हे पर पथराव करने वालों के घरों पर बुलडोजर चला दिया है। उनके घरों को ढहा दिया गया है।

इस मामले में पुलिस ने 8 लोगों को चिन्हित कर केस दर्ज किया था। गुरुवार (19 मई 2022) की सुबह से ही प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए आरोपितों के घरों को जमीदोज कर दिया। अब इस मामले में कॉन्ग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति भी शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने की है। उन्होंने आरोपितों को निर्दोष बताते हुए कहा कि निर्दोषों के घरों तोड़ना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि आरोपित गिरफ्तार तो हो गए हैं, ऐसे में निर्दोषों के घरों पर ये कार्रवाई सही नहीं है।

फोटो साभार: ट्विटर

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि राजगढ़ जिले के जीरापुर में मंगलवार (17 मई 2022) को एक दलित के घर बारात आई थी। इस बारात में डीजे बज रहा था और दूल्हा घोड़ी पर बैठकर आ रहा है। बारात जैसे ही माता जी मोहल्ले में मस्जिद के सामने से निकली, कुछ मुस्लिम युवकों ने बारातियों पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान बैंड और ढोल बजाने पर दूल्हे के साथ-साथ बारातियों से भी जमकर मारपीट की गई।

पीड़ित के पक्ष के अंकित मालवीय ने बताया कि उसकी चचेरी बहन अंजू की बारात सुसनेर के सुरेश चौहान के यहाँ से आई थी। वे सब बारात का स्वागत करने के लिए गेट पर खड़े थे। बारात जैसे ही मस्जिद के पास पहुँची, मुस्लिमों ने बैंड और ढोल बंद करवा दिए और कहा कि इस गाँव में मस्जिद के सामने बैंड बाजे बजाने की मनाही है।

इसके बाद बारात आगे बढ़ी और शीतला माता मंदिर के पास पहुँची और फिर बैंड और ढोल बजने लगे और बारात में शामिल महिला-पुरुष नाचने लगे। तभी मुस्लिम समुदाय के 20-25 लोगों ने हंगामा करते हुए ढोल वाले की जमकर पिटाई कर दी। उन लोगों ने बरातियों पर पथराव भी किया। मामले में पुलिस ने फरहान, जुनैद, सोहैल, साबिर, अनस कसाई सहित सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

ओडिशा सरकार ने माता तारा तारिणी मंदिर का कराया जीर्णोद्धार: देश की प्राचीन शक्तिपीठों में से है एक, पुराणों में भी वर्णन

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (Odisha CM Naveen Patnayak) ने बुधवार (18 मई 2022) को राज्य के गंजम जिले में पुनर्निर्मित माँ तारा तारिणी मंदिर परिसर का उद्घाटन किया और मंदिर में पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने इसके निर्माण में भाग लेने वाले कारीगरों एवं कलाकारों की प्रशंसा की और माँ तारा तारिणी के मंदिर के नए रूप को ‘ओडिशा की कला, वास्तुकला और मूर्तिकला का अनूठा उदाहरण’ बताया।

मुख्यमंत्री ने राज्य में ऋषिकुल नदी के तट पर कुमारी पहाड़ियों पर स्थित सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक माँ तारा तारिणी मंदिर के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए 100 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। इससे पहले 17 मई को मुख्य सचिव सुरेश चंद्र महापात्र, सचिव वीके पांडियन और अन्य अधिकारियों ने एक सप्ताह के उत्सव “प्रतिष्ठा महोत्सव” से पहले विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए देश के प्राचीन शक्तिपीठों में से एक तारा तारिणी मंदिर का दौरा किया।

इस दिव्य मंदिर की अपनी यात्रा के बाद ओडिशा के सीएम पटनायक ने ट्वीट किया, “#ओडिशा सरकार के निरंतर प्रयासों और #गंजम के लोगों के अटूट समर्थन के साथ #मातारातारिणी मंदिर आधुनिक समय की उत्कृष्ट कृति बन गया है। नए मंदिर की वास्तुकला पवित्रता की भावना देता है और परंपराओं से दृढ़ता से जुड़ा हुआ है।”

यहाँ यह बताना आवश्यक है कि मंदिर परिसर के डिजाइन में पारंपरिक ओडिया सौंदर्यशास्त्र, मूर्तिकला और कलात्मक परंपराओं को प्रमुखता दी गई है।

नीचे बाईं ओर हमने मंदिर के पुराने स्वरूप को साझा किया है और दाईं ओर अपने वर्तमान पुनर्निर्मित रूप में माँ तारा तारिणी मंदिर का हवाई दृश्य है।

माँ तारा तारिणी मंदिर के पहले और बाद का दृश्य

इस शक्ति पीठ को एक शानदार मंदिर के रूप में बहाल किया गया है, जो ओडिया विरासत का प्रतीक है और ओडिया भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। शक्ति पीठ की परिधि को पूरी तरह से बदल दिया गया है, जिसमें सिंहद्वार प्रवेश द्वार का नवीनीकरण के साथ-साथ तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के लिए पेयजल की सुविधा, व्याख्या केंद्र, मुंडन हॉल, प्रसाद सेवन मंडप, सार्वजनिक शौचालय आदि का विकास शामिल हैं।

पुनर्निर्मित सिंहद्वार प्रवेश द्वार (सिंहद्वार) को प्रसिद्ध मुक्तेश्वर संरचना की तरह डिजाइन किया गया है।

साभारछ pragativadi.com

मंदिर के प्रांगण में की गई रोशनी से मंदिर का आकर्षण और बढ़ जाता है। सोशल मीडिया यूजर्स ने मंदिर परिसर के रात के दृश्य की कुछ चौंकाने वाली तस्वीरें साझा कीं। पुनर्निर्मित मंदिर में अब पारंपरिक ओडिया मूर्तियाँ हैं। इन्हें राज्य के प्राचीन मंदिरों की तरह डिजाइन किया गया है, जो मास्टर शिल्प कौशल से सजाए गए हैं।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर

ओडिशा के माँ तारा तारिणी मंदिर का इतिहास

माँ तारा तारिणी मंदिर ओडिशा के गंजम जिले में ब्रह्मपुर शहर के पास ऋषिकुल नदी के तट पर कुमारी पहाड़ियों पर 17वीं शताब्दी में स्थापित एक प्राचीन मंदिर है। यह प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है और इसे स्थान तीर्थ (स्थान पीठ) और आदि शक्ति के रूप में पूजा जाता है। मंदिर के गर्भगृह तक पहुँचने के लिए 999 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।

माँ तारा तारिणी को कलिंग साम्राज्य के शासकों की प्रमुख देवी कहा जाता था। इस मंदिर में माँ तारा और तारिणी की पत्थर की मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। माता की मूर्तियों को सोने और चाँदी के अलंकरणों के साथ-साथ कीमती पत्थरों से सजाया गया है। दो पीतल के सिर, जिन्हें उनकी चलंती प्रतिमा या जीवित छवि के रूप में जाना जाता है, रखे जाते हैं।

प्राचीन पुराणों के अनुसार, माँ तारा तारिणी की उत्पत्ति सीधे सतयुग में दक्ष प्रजापति के जगन से हुई है। बिमला, तारा-तारिणी, दक्षिण कालिका और कामाक्षी के प्रसिद्ध शाक्त पीठों की उत्पत्ति देवी सती की दिव्य लाश के अंगों से हुई थी। शिव पुराण, कालिका पुराण और देवी भागवत जैसे प्राचीन ग्रंथ इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। दक्षिणी ओडिशा के अधिकांश घरों में माता तारा-तारिणी उनकी अधिष्ठात्री देवी हैं।

‘रेप और हत्या के बाद सिर काटा, शरीर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा’: 16 साल बाद CBI कोर्ट ने सुनाई सुरेंद्र कोली को मौत की सजा, एक अन्य को 7 साल की जेल

देशभर में चर्चा का विषय रहे नोएडा के निठारी हत्याकांड के मुख्य दोषी सुरेंद्र कोली को सीबीआई की कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है, जबकि दूसरे अभियुक्त मोनिंदर सिंह पंढेर को 7 साल कैद की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने कोली पर 40 हजार रुपए और पंढेर पर 4 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। दोनों पहले से ही डासना जेल में बंद हैं और किसी दूसरे मामले में सजा काट रहे हैं।

इससे पहले कोली को 13 मामलों में मौत की सजा और तीन मामलों में सबूतों की कमी होने के कारण बरी कर दिया गया था। उसके एक मामले में राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका खारिज कर दी गई थी, लेकिन फाँसी में देरी होने के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने उसे कैंसिल कर दिया था। उल्लेखनीय है कि सीबीआई कोर्ट से फाँसी की सजा मिलने के बाद से अधिकतर मामले हाई कोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

ताजा मामले में सीबीआई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पब्लिक प्रॉसीक्यूटर दर्शन लाल ने अदालत के सामने रौंगटे खड़े कर देने वाली कहानी को बयाँ किया। दर्शन लाल के मुताबिक, लड़की (जिसका रेप हुआ) काम ढूँढ रही थी। उसी दौरान सुरेंद्र कोली ने उसके साथ बलात्कार किया, फिर उसी की चुन्नी को उसके गले से लपेटकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। लड़की की मौत होने के बाद वो उसके शव को बाथरूम में ले गया और वहाँ पहले उसका सिर काटकर अलग कर दिया। इसके बाद बॉडी के कई टुकड़े कर उसे पॉलीथिन में बाँधकर रख दिया। बाद में जो हड्डियाँ बची उन्हें कोठी के पीछे के नाले में फेंक दिया।

कब का है ये मामला

गौरतलब है कि ये मामला करीब 16 साल पहले 29 दिसंबर 2006 को निठारी में मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे बह रहे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे। इसके बाद ही इस मामले का खुलासा हुआ था। इसके बाद मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया गया था।

ज्ञानवापी में कमल, डमरू, त्रिशूल और स्वास्तिक भी मौजूद, प्राचीन भारतीय मंदिर जैसा विवादित ढाँचा: दूसरी सर्वे रिपोर्ट लीक

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवादित ढाँचे पर कोर्ट की सुनवाई लगातार जारी है। विवादित ढाँचे के वीडियोग्राफी सर्वे की पहली रिपोर्ट के बाद दूसरी सर्वे रिपोर्ट लीक हो गई है। वहीं कहा जा रहा है कि 12 पन्ने की इस सर्वे रिपोर्ट को कमिश्नर विशाल सिंह ने आज गुरुवार (19 मई, 2022) को कोर्ट में पेश किया था। लीक हुई रिपोर्ट के आधार पर दावा किया जा रहा है कि विवादित ढाँचे के अंदर से कमल, त्रिशूल और डमरू समेत कई और सनातन सभ्यता के चिन्ह मिले हैं। जिसकी एक कॉपी ऑपइंडिया के भी पास है। हालाँकि, हम इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करते।

वहीं लीक हुई सर्वे की दूसरी रिपोर्ट में शिवलिंग का भी जिक्र किया गया है, जिसे मुस्लिम समुदाय फव्वारा बता रहा है। इसके साथ ही दावा किया गया है कि विवादित ढाँचे के अंदर से कमल, त्रिशूल, डमरू समेत दूसरे प्रतीक चिन्ह भी मिले हैं। इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, विवादित ढाँचे की दीवारों पर घण्टी, कलश और फूल की आकृतियाँ चारों तरफ बनी हुई थीं। विवादित ढाँचे के अंदर कई तहखाने भी मिले हैं, जहाँ से 2-3 ट्रॉली मलबा और 100 नई ईंट मिली।

सर्वे रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

इसके अलावा विवादित ढाँचे की पश्चिमी दीवार पर हाथी की सूँड़ की टूटी हुई आकृतियों के साथ-साथ पूरी दीवार पर भारी मात्रा में पान के पत्ते का चिन्ह, स्वास्तिक, त्रिशूल बने हुए थे। ये सभी कलाकृतियाँ प्राचीन भारतीय मंदिर निर्माण शैली से मेल खाती हैं, जो कि काफी पुरानी हो चुकी हैं। इनमें से अधिकतर टूट चुकी हैं। इसके साथ ही हिन्दू पक्ष ने दावा किया कि विवादित ढाँचे के उत्तर में भैरव और दक्षिण में गणेश मंदिर था। यहाँ काफी मलबा पड़ा हुआ है, जिसे हटाने की माँग की गई है।

रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

वहीं पश्चिमी दीवार के बाहर 3 चौकोर आकृतियाँ बनी हुई मिली हैं, जिसे मुस्लिम पक्ष कब्र कह रहा है तो हिन्दू पक्ष इसे पुराना चबूतरा बता रहा है। विवादित ढाँचे में बने गुंबद के अंदर भी पत्थर पर फूल, पत्ती और कमल के फूल की कलाकृति बनी मिली। शंकुकार शिखरनुमा एक आकृति मिली, जिसे हिन्दू पक्ष ने प्राचीन मंदिर का शिखर बताया। विवादित ढाँचे में स्थित बड़ी मीनार में कुछ लिखा मिला, जिसे मंत्र बताया जा रहा है। यहाँ विवादित ढाँचे के अंदर दीवार पर भी त्रिशूल और स्वास्तिक मिला।

सर्वे रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

इमाम के बैठने वाली जगह के ऊपर मंदिर जैसी आकृतियाँ

रिपोर्ट में बताया गया है कि विवादित ढाँचे में गुंबद के अंदर जाते ही इमाम के बैठने वाली जगह के ऊपर बनी कलाकृतियों को लेकर हिन्दू पक्ष का दावा है कि ये आकृतियाँ मंदिरों में बनी आकृतियों जैसी प्रतीत हो रही हैं। वहाँ भी त्रिशूल बना मिला है। काशी विश्वनाथ मंदिर के एडवोकेट रवि कुमार पांडेय और हिन्दू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी के मुताबिक, वजू करने के स्थान पर एक कुण्ड बना हुआ है। यहाँ तीन फिट पानी भरा हुआ है। उसमें हाथ डालकर छूने से गोलाकार आकृति प्रतीत होती है।

सर्वे रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा की रिपोर्ट

गौरतलब है कि इससे पहले इससे पूर्व एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा ने अपनी रिपोर्ट फाइल की थी। इसमें खुलासा किया गया है कि ज्ञानवापी ढाँचे की पश्चिमी दीवार पर शेषनाग और हिंदू देवी-देवताओं की कलाकृति साफ रूप से नजर आ रही है। दीवार के उत्तर से पश्चिम की ओर शिलापट्ट पर सिंदूरी लेप की उभरी हुई कलाकृति है। इसमें देवों के रूप में चार मूर्तियों की आकृति दिखाई दे रही है। इस रिपोर्ट को भी न्यायालय ने रिकॉर्ड में ले लिया है।

पंजाब में सरकारी आवास में नहीं रहेंगे पालतू कुत्ते, भगवंत मान ने दिया बाहर निकालने का आदेश, बग्गा ने कहा- ‘लाचार CM अब कुत्तों के पीछे पड़ गए हैं’

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने सरकारी कर्मचारियों को क्वार्टरों में पालतू कुत्तों को रखने पर रोक लगा दी है। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने सरकारी बंगलों और क्वार्टरों में रहने वाले पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर अपने पालतू कुत्तों को घर से बाहर निकालने का आदेश दिया है।

13 मई को एक आदेश में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पटियाला (ADGP) ने पुलिस अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि उन्हें सरकारी आवास में पालतू कुत्तों को रखने की अनुमति नहीं है, तो उन्हें अपने घरों से बाहर निकाल दें।

पत्र में कहा गया था कि जिन कर्मचारियों ने अपने घरों में पालतू कुत्तों को रखा हुआ है, क्या उनके पास इसकी अनुमति है?” ADGP ने कहा था कि जिन अधिकारियों ने इस आदेश का अभी तक पालन नहीं किया है, वे अपने पालतू कुत्तों को एक सप्ताह के भीतर क्वार्टर से बाहर कर दें। आदेश के मुताबिक, अगर कोई भी कर्मचारी ऐसा करने से मना करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी क्वार्टरों से कुत्तों को हटाने को लेकर एडीजी पटियाला ने जारी किया आदेश (फोटो साभार: दैनिक ट्रिब्यून)

इस आदेश को लेकर भाजयुमो (भारतीय जनता युवा मोर्चा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तजेंदर पाल सिंह बग्गा ने पंजाब की ‘आप’ सरकार पर निशाना साधा है उन्होंने ट्वीट किया, “पंजाब में सब मुद्दे खत्म हो गए हैं, जो लाचार सीएम भगवंत मान कुत्तों के पीछे पड़ गए हैं। जब आप घर में कोई जानवर लाते हैं, तो कुछ समय में वो परिवार की तरह बन जाता है। लेकिन ये कहना की सभी पुलिसकर्मी अपने घर से उन कुत्तों को 1 हफ़्ते के अंदर निकाल दे। ऐसा कोई असंवेदनशील व्यक्ति ही कर सकता है।”

आपको बता दें मुख्यमंत्री भगवंत मान, जहाँ पालतू कुत्तों से छुटकारा पाने पर ध्यान दे रहे हैं। वहीं आप के सत्ता में आने के बाद से राज्य में कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की प्रचंड जीत के बाद से राज्य के अलग-अलग इलाकों में हिंसा हो रही है। यहाँ तक कि प्रसिद्ध कबड्डी खिलाड़ी भी हिंसा से अछूते नहीं हैं। ड्रग्स की खुली बिक्री के वीडियो राज्य में वायरल हो रहे हैं और राज्य में कई वर्षों के बाद सांप्रदायिक हिंसा भी देखी गई है।

गौरतलब है कि पंजाब के पटियाला में पिछले महीने हिंसा के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 6 एफआईआर दर्ज की थी। इस एफआईआर में 25 लोग नामजद थे, जिनमें से 3 को गिरफ्तार किया गया था। इनमें शिवसेना द्वारा निष्कासित किए गए हरीश सिंघला भी शामिल थे, जिन्हें कोर्ट ने दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। इनके अलावा कुलदीप सिंह और दलजीत सिंह भी पकड़े गए थे।

बता दें कि इस पूरी हिंसा का मास्टरमाइंड बरजिंदर सिंह परवाना को बताया गया था। पटियाला के आईजी एमएस चिन्ना ने बताया था, “पटियाला में कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ हुआ, जिसके संबंध में 6 प्राथमिकी दर्ज की हैं और हरीश सिंघला सहित 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य आरोपित व मास्टरमाइंड बरजिंदर सिंह परवाना को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”