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अब राजस्थान के भरतपुर में भड़की हिन्दू-मुस्लिम हिंसा, छतों से मिली काँच की बोतलें और पत्थर: 100 जवान तैनात, 2013 में भी भड़के थे दंगे

राजस्थान में एक बार फिर से हिंसा की आग भड़क उठी है। इस बार भरतपुर जिले में सोमवार (9 मई 2022) की देर रात दो समुदायों में भिड़ंत हो गई। इस दौरान पत्थरबाजी के साथ ही काँच की बोतलें भी फेंकी गई। इसमें घायल हुए एक व्यक्ति को आरबीएम हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह हिंसा की घटना मथुरा गेट इलाके के अंतर्गत बुद्ध की हाट स्थित कसाई गली की है। हिंसा की घटना की जानकारी मिलते ही बुधवार (10 मई, 2022) की सुबह राज्यमंत्री डॉ सुभाष गर्ग पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुँचे और लोगों से बातचीत कर उनसे शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। मंत्री ने पत्थरबाजी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए हर संभव मदद की बात कही है।

वहीं इस मामले में पुलिस ने अभी तक दोनों पक्षों के करीब 15 लोगों को हिरासत में लिया है। जिले के एसपी श्याम सिंह के मुताबिक, पूरी सड़क पर काँच और पत्थर बिखरे थे। पहले भी इस इलाके में दोनों समुदायों के बीच झगड़े और पत्थरबाजी हुई थी। फिलहाल कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हिंसा वाली जगह पर 100 पुलिस जवानों को तैनात किया गया है। यहीं नहीं पुलिस ने दोनों ही समुदायों के घरों की छतों की तलाशी भी ली। इस दौरान कई घरों की छतों से काँच की बोतलें और पत्थर मिले है। अभी तक मथुरा गेट थाने में इस मामले में किसी तरह की कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है।

2013 में भी हुए थे दंगे

गौरतलब है कि इससे इसी इलाके में वर्ष 2013 में दंगे हुए थे। पत्थरबाजी में खासा नुकसान भी हुआ था। इसको लेकर मथुरा गेट थाने में 2 केस दर्ज किए गए थे। हाल ही में जुर्माना लेकर कोर्ट ने एक समुदाय के लोगों को बरी कर दिया था, जिसके बाद वे डीजे पर डाँस कर जश्न मना रहे थे और इसी को लेकर विवाद हुआ था।

करौली, जोधपुर में भी हुई थी हिंसा

इससे पहले 2 अप्रैल, 2022 को करौली जिले के फूटा कोट इलाके में हिंदू नव वर्ष के मौके पर हिंदुओं की बाइक रैली पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हमला कर दिया था। उस दौरान पत्थरबाजी और तलवारों से हमले भी किए गए थे। इसी तरह से हाल ही में जोधपुर में भी ऐसी ही घटना हुई थी। मुस्लिमों ने हिंदुओं पर हमले कर दिए थे। उस दौरान विवाद झंडे लगाने के लिए हुआ था। बाद में पता चला था कि दंगाइयों ने पहले से ही जेब में पत्थर भर रखे थे। वे जहाँ से भी निकलते थे, वहीं पर हिंसा करते थे।

मुस्लिम काउंसिल में शामिल हुए 150 देशों के प्रतिनिधि, बोले विशेषज्ञ – अपने देश से वफादार रहें मुस्लिम, कट्टरवादियों का करें विरोध

संयुक्त अरब अमीरात में वर्ल्ड मुस्लिम कम्युनिटीज़ काउंसिल (TWMCC) के चौथे वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस बैठक में 150 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस सम्मेलन में इस्लामिक दुनिया की एकता को लेकर चर्चा की गई, जिसमें मुस्लिम देशों के 500 से अधिक धार्मिक, राजनीतिक, विद्वानों और समाजिक नेताओं ने हिस्सा लिया। इस बैठक की थीम- इस्लामिक एकता की अवधारणा, अवसर और चुनौतियाँ थी।

इसका आयोजन यूएई के सहिष्णुता और सह-अस्तित्व मंत्री शेख नाह्यान बिन मुबारक अल नाह्यान की अगुवाई में किया गया। ये TWMCC की ये चौथी वर्षगाँठ थी। बैठक का आयोजन आठ और नौ मई को अबू धाबी राष्ट्रीय प्रदर्शनी केंद्र में हुआ।

इस दौरान सहिष्णुता मंत्री शेख नाह्यान बिन मुबारक ने कहा कि मुस्लिम दुनिया का आधार विज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं विशेषज्ञ नहीं हूँ लेकिन इस्लाम विज्ञान और ज्ञान का मजहब है। इसलिए ये जरूरी है कि विज्ञान और शोध मुस्लिम एकता की नींव बने।”

इस दौरान मिस्र के धार्मिक मामलों से जुड़े मंत्री डॉक्टर मोहम्मद मुख़्तार गोमा ने इस बात पर जोर दिया कि मुस्लिम दुनिया दो श्रेणियों में बँटी हुई है। एक दुनिया तार्किक है जबकि दूसरी काल्पनिक जिसका दुरुपयोग चरमपंथियों और आतंकवादी कर रहे हैं।

विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि देशभक्ति और अपने देश के प्रति वफादारी मुस्लिमों को एक झंडे के नीचे एक ‘खिलाफत’ में एकजुट करने की अवधारणा को तोड़ना चाहिए, जैसा कि विस्तारवादी, अति-हिंसक आतंकवादी समूह ISIS बनाने की माँग कर रहा है।

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टर मोहम्मद मोख़्तार गोमा ने कहा, “एक मुस्लिम दुनिया की अवधारणा पर दो विचार हो सकते हैं। पहला तार्किक, जिसका प्रतिनिधित्व इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किया जा रहा है और दूसरा असंभव और काल्पनिक, जिसका दुरुपयोग चरमपंथियों और आतंकवादी समूह कर रहे हैं, जिनका मक़सद पूरी मुस्लिम दुनिया को एक झंडे और एक देश के अंदर लाना है।”

उन्होंने कहा, “आज के समय में, एक नवनिर्मित देश के अंदर असंभव एकता की कामना करने से ज़्यादा अपने राष्ट्र, उसकी धरती और झंडे के प्रति वफ़ादार होना ज़रूरी है। ये कोशिश एक राष्ट्र और गैर-मुस्लिम समुदायों के बीच रह रहे मुस्लिम अल्पसंख्यकों को कमज़ोर करने के लिए की जा रही है।”

उन्होंने कहा, “ये भी ज़रूरी है कि क़ुरान की आयतों को उसके उसी संदर्भ में समझा जाए, जैसे उन्हें लिखा गया है न कि जिस तरह आतंकवादी समूह अपने हित साधने के लिए उसका इस्तेमाल कर रहे हैं।”

मोहम्मद मोख़्तार ने कहा, ”एक मुस्लिम को उस देश का सम्मान करना चाहिए, जहाँ वह रहता है, चाहे मुस्लिम बहुल देश हो या वहाँ मुस्लिम अल्पसंख्यक हों। इसके अलावा फ़तवा हालात, जगह और समय से बदलना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय फोरम पर हमें समन्वय के जरिए इस्लामिक एकता दिखानी चाहिए। जो भी क़ुरान जला रहे हैं, उनका सामना हम मजबूती से करेंगे। हमारे मजहब का लोग तब तक आदर नहीं करेंगे जब तक हम अपने जीवन में सफल नहीं होंगे। हमें उन अतिवादियों से भी लड़ना होगा जो इस्लाम का गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं। यह असंभव है कि सभी देशों के मुस्लिम एक ध्वज, एक देश और शासक के अधीन हों।”

इसके अलावा उन्होंने ईशनिंदा के अपराधीकरण पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया और साथ में चरमपंथी और आतंकी गुटों के खिलाफ एकजुट होने की भी अपील की। उन्होंने इस्लाम के विद्वानों और विशेषज्ञों से अपील की कि वे इन चरमपंथी समूहों की सच्चाई सबके सामने लाएँ। उन्होंने ये भी कहा कि जगह और समय के अनुसार ही फतवे जारी किए जाने चाहिए। वहीं इस काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल मोहम्मद बेचारी ने कहा, “इस्लामी दुनिया कई हिस्सों में बँटी है और इन दूरियों को पाटने की जरूरत है।”

UGC ने शारदा यूनिवर्सिटी से तलब की रिपोर्ट, हिंदुत्व पर पूछे गए थे आपत्तिजनक सवाल: कहा- भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सोमवार (9 मई, 2022) को शारदा विश्वविद्यालय से एक परीक्षा में हिंदुत्व और फासीवाद के बीच समानता पर पूछे गए “आपत्तिजनक” प्रश्न के बारे में एक रिपोर्ट माँगी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा नियामक (The higher education regulator) ने ग्रेटर नोएडा स्थित निजी विश्वविद्यालय को विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट में यह बताने के लिए कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों, यह सुनिश्चित करने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं?

यूजीसी ने शारदा विश्वविद्यालय को लिखे पत्र में कहा, “यह देखा गया है कि छात्रों ने सवाल पर आपत्ति जताई और विश्वविद्यालय में शिकायत दर्ज कराई। कहने की जरूरत नहीं है कि छात्रों से इस तरह का सवाल पूछना हमारे देश की भावना और लोकाचार के खिलाफ है, जो समावेशिता और एकरूपता के लिए जाना जाता है और इसलिए इस तरह के सवाल नहीं पूछा जाए।”

बीए प्रथम वर्ष के पेपर राजनीति विज्ञान (ऑनर्स) के प्रश्न पत्र में छात्रों से “हिंदुत्व-फासीवाद” के बारे में पूछा गया था। सात अंकों के प्रश्न में पूछा गया, “क्या आप फासीवाद/नाज़ीवाद और हिंदू दक्षिणपंथी (हिंदुत्व) के बीच कोई समानता पाते हैं? तर्कों के साथ विस्तृत करें।”

बता दें कि यह विवादित प्रश्न पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल होने के बाद बवाल मच गया था। उसके बाद विश्वविद्यालय ने प्रश्नों में पूर्वाग्रह की संभावना को देखने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया।

शनिवार (7 मई, 2022) को जारी एक बयान में विश्वविद्यालय ने कहा कि समिति ने प्रश्न को आपत्तिजनक पाया है। उसके बाद वकास फारूक कुट्टे नामक असिस्टेंट प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसने ये सवाल बनाया था। कमिटी ने अपनी शुरुआती जाँच में ये भी पाया है कि उक्त सवाल आपत्तिजनक था। वहीं ये भी फैसला लिया गया कि कॉपी की जाँच और मार्किंग के समय इस सवाल को नज़रअंदाज़ किया जाएगा और इससे मार्क्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

गौरतलब है कि यह पूरा विवाद तब उठा था, जब भाजपा नेता विकास प्रीतम सिन्हा ने इसकी फोटो कॉपी ट्वीट करते हुए उसमें पूछे गए एक सवाल को आपत्तिजनक बताया। यह प्रश्न पत्र BA के राजनीति विज्ञान के साल 2021-2022 सत्र का था। विकास प्रीतम के मुताबिक पेपर को कथित रूप से एक मुस्लिम शिक्षक ने बनाया है।

रिलीज हुआ ‘अवतार 2’ का टीजर ट्रेलर, पानी में दिखेंगे पैंडोरा उपग्रह के अद्भुत नज़ारे: भारत में 5 भाषाओं में रिलीज होगी फिल्म, विन डीजल भी होंगे

हॉलीवुड फिल्म अवतार का सीक्वल ( अवतार 2: द वे ऑफ वाटर) का टीजर ट्रेलर रिलीज हो गया है। फिल्म का निर्देशन हॉलीवुड निर्देशक जेम्स कैमरून ने किया है। दिसंबर 2022 में रिलीज होने वाली इस फिल्म में पैंडोरा ग्रह के खूबसूरत नजारों को दिखाया जाएगा। इसके पहले भाग में ही बताया गया था कि पैंडोरा अल्फा सेंचुरी के चाँद जैसा एक उपग्रह है।

इस ग्रह धरती की तरह ही जीवन जीने लायक पर्यावरण है। पूरी फिल्म एक परिवार के जीवन पर फोकस है। पिछली बार की तरह ही इस बार भी इस फिल्म में सैम वर्दिंगटन, नावी जेक सुली और जोई सल्डाना, नेतिरी का रोल प्ले करते दिखेंगे। हालाँकि, इस बार उनके बच्चे भी होंगे। फिल्म के ट्रेलर में नावी एक डायलॉग बोलता है कि ‘हम जहाँ भी जाएँ, ये परिवार ही हमारा किला है।’

रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म के निर्देशक जेम्स कैमरून ने कहा कि पहले ‘अवतार’ में हम बड़े पर्दे की सीमाओं को तोड़कर आगे निकले थे। नए अवतार में हम इन सीमाओं को 3डी के इस्तेमाल से हाई डायनमिक रेंजस हाई रिजोल्यूशन और हाई प्रेम रेट के साथ और आगे बढ़ा रहे हैं। इस बार इस सीरीज में पिछले एक्टर्स के साथ ही मिशेल यिहो, कैट विंसलेट, विन डीजल और डेविड थ्वेलिस भी नजर आएँगे। यह फिल्म भारत में इंग्लिश, तेुलगू, तमिल, हिंदी, कन्नड़ और मलयालम में रिलीज की जाएगी। इस फिल्म की पहली झलक लॉस वेगास के सिनेमाकॉन में 27 अप्रैल को दिखाई गई थी। अब इसका ऑनलाइन ट्रेलर रिलीज हुआ था।

दुनिया की सबसे अधिक कमाई वाली फिल्मों में शुमार है अवतार

अवतार सीरीज की पहली फिल्म साल 2009 में रिलीज हुई थी। उस दौरान इस वैश्विक बॉक्स ऑफिस यानि कि वर्ल्डवाइड पर $2.84 बिलियन (21,935 करोड़ भारतीय रुपए) के साथ दुनिया की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों में शुमार रही है। 1997 में आई फिल्म टाइटैनिक इसके बाद दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कमाई वाली फिल्म बन गई थी।

हनुमान चालीसा पर धमकी देने वाले सिराज की अवैध संपत्ति पर चला गुजरात सरकार का बुलडोजर, कहा था – मंदिर से माइक उतरवा लो, वरना…

गुजरात राज्य प्रशासन ने सिराज उर्फ ‘सिरो डॉन’ उर्फ ‘डॉन हुसैन खलयानी बोटादवाला’ अवैध संपत्ति को ध्वस्त कर दिया है। बुलडोजर से अवैध संपत्ति को ध्वस्त करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। सिराज को पुलिस ने 8 मई को गिरफ्तार किया था।

सिराज ने 5 मई को ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के नेता एवं कारोबारी महेन्द्रभाई लालजीभाई माली उर्फ मुन्नाभाई माली को धमकी दी थी। मुन्नाभाई को जान से मारने की धमकी देते हुए सिराज डॉन ने कहा था, “तुम्हें भी किशन भारवाड़ जैसा परिणाम भुगतना होगा।”

इस संबंध में मुन्नाभाई माली ने 7 मई 2022 को बोटाद पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपित सिरो डॉन का एक लंबा आपराधिक इतिहास है और उसके खिलाफ अतीत में कई अपराधों के खिलाफ शिकायतें दर्ज की गई हैं।

आरोपित ने मुन्नाभाई माली को धमकी देते हुए कहा था, “गाँव में तुमने हनुमान जी के मंदिर पर एक लाउडस्पीकर लगा रखा है। उस लाउडस्पीकर को जल्द से जल्द उतरवा लो, वरना तुम्हारा वही हाल होगा जो किशन भरवाड़ का हुआ था। आखिर तुम हमारा क्या कर लोगे? अगर मैं तुम्हें कार में खींच लूँ और तुम्हारा अपहरण कर लूँ, तुम कुछ नहीं कर पाओगे।”

गुंडे सिराज ने कारोबारी को धमकी देते हुए आगे कहा, “हमलोग तुम सब पर नजर रख रहे हैं। अपनी हद में रहो, वरना मैं तुम्हारी हत्या कर दूँगा।” इसके बाद उसने सड़क पर ही चिल्लाते हुए कारोबारी मुन्नाभाई माली को फिर से मार डालने की धमकी दी। बता दें कि सिराज डॉन के खिलाफ अवैध जुआ और हत्या के प्रयास सहित 34 मामले दर्ज हैं।

यहाँ याद दिला दें कि किशन भरवाड़ की हत्या 25 जनवरी, 2022 को कर दी गई थी। 2 बाइक सवारों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया। हत्या की वजह सोशल मीडिया पर मोहम्मद पैगम्बर को ले कर डाली गई एक पोस्ट थी जिसे हत्यारोपितों ने ईशनिंदा माना था। ये मामला संसद में भी गूँजा था। ATS ने पाया था कि मौलाना शब्बीर ने किशन की हत्या करने वाले आरोपितों को 11 लोगों की हत्या करने का ठेका दिया था। मौलाना अय्यूब को अहमदाबाद के जमालपुर से आरोपितों को हथियार उपलब्ध करवाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

अमन चोपड़ा की गिरफ़्तारी पर जोधपुर HC ने लगाई रोक, राजस्थान पुलिस को बड़ा झटका: मंदिरों पर चले बुलडोजर तो किया था शो

‘न्यूज 18’ के पत्रकार अमन चोपड़ा (Aman Chopra) को राजस्थान के जोधपुर हाई कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अब कोर्ट इस मामले पर आगे की सुनवाई बुधवार (11 मई, 2022) को करेगा। कोर्ट ने कहा कि अगले आदेश तक अमन चोपड़ा की गिरफ्तारी नहीं हो सकती। 

हाई कोर्ट ने यह आदेश अमन चोपड़ा पर डूंगरपुर के बिछवाड़ा थाने में दर्ज एफआईआर के खिलाफ पेश की गई याचिका पर पर सुनवाई के बाद दिया है। बता दें कि उनके खिलाफ राजस्थान में धार्मिक भावनाएँ भड़काने का मामला दर्ज किया गया है। राजस्थान के अलवर में जिस तरह से मंदिरों पर बुलडोजर चलाया गया और प्रतिमाएँ फेंक दी गईं, उस पर शो करने के कारण उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। शिकायत में कहा गया कि अमन चोपड़ा ने अपने शो में झूठ और काल्पनिक जानकारी देकर यह साबित करना चाहा था कि अलवर में जो मंदिर गिराया गया, उसके पीछे राज्य सरकार का हाथ था और ऐसा जहाँगीरपुरी हिंसा का बदला लेने के लिए किया गया था।

कोर्ट में बहस के दौरान चोपड़ा पर लगाई धाराओं के मामले में उनके वकील ने पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी तरफ से किसी प्रकार से कोई देशद्रोह नहीं किया गया। वह केवल एक डिबेट प्रोग्राम था, न कि कोई सांप्रदायिक हिंसा को बढ़ाने की प्रेरणा थी। सुनवाई के दौरान सभी धाराओं को चुनौती देते हुए एक-एक धारा पर पूरी तरीके से बहस हुई।

इस दौरान कोर्ट ने कहा कि वह इस शो को देखने के बाद ही अंतिम फैसले पर पहुँचेंगे। इसलिए कोर्ट के अगले आदेश तक अमन चोपड़ा को गिरफ्तार न किया जाए। कोर्ट मामले में बुधवार को अपना फैसला देगी।

बता दें कि अमन चोपड़ा के प्रोग्राम को लेकर उनके खिलाफ लेकर तीन अलग-अलग जिलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। ये एफआईआर अलवर के कोतवाली, बूंदी के सदर और डूंगरपुर के बिछवाड़ा थाने में दर्ज की गई थी। इनमें अलवर और बूंदी थाने में दर्ज एफआईआर के खिलाफ पेश याचिका पर सुनवाई करते हुए जयपुर बेंच कोर्ट ने अमन चोपड़ा को राहत देते हुए अग्रिम आदेश तक पहले ही गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। अब तीसरी एफआईआर में भी अमन चोपड़ा को राहत मिल गई है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान पुलिस रविवार (8 मई 2022) को अमन चोपड़ा को गिरफ्तार करने नोएडा पहुँची थी। इससे पहले शनिवार (7 मई 2022) को राजस्थान पुलिस उस सोसाइटी में घुस गई, जहाँ अमन चोपड़ा रहते हैं और उनके दरवाजे पर वॉरंट चिपका दिया। ये सब तब हुआ, जब राजस्थान उच्च-न्यायालय ने ‘न्यूज़ 18’ के एडिटर अमन चोपड़ा के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से पुलिस को रोक रखा था। उनके घर के दरवाजे पर गिरफ़्तारी का वॉरंट चिपकाने के बाद राजस्थान पुलिस को यूपी पुलिस थाने लेकर गई। इस दौरान अमन चोपड़ा के घर का ताला बंद था।

इससे पहले राजस्थान पुलिस ने ‘न्यूज़ 18’ के दफ्तर में जाकर भी इस तरह की हरकतें की थीं और बाद में बयान दिया था कि अमन चोपड़ा उन्हें नहीं मिले। उनके खिलाफ राजस्थान में धार्मिक भावनाएँ भड़काने का मामला दर्ज किया गया है।

सिंगापुर में The Kashmir Files पर बैन को लेकर शशि थरूर ने कसा तंज, विवेक अग्निहोत्री ने The Leela Hotel Files से दिया जवाब

साल 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन पर आधारित विवेक अग्निहोत्री की ब्लॉकबस्टर फिल्म द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) ने सिनेमाघरों में खूब धूम मचाया। इस फिल्म को लेकर दुनिया भर में काफी चर्चा हुई, हो रही है। अब खबर आ रही है कि सिंगापुर में इस फिल्म के दिखाने पर बैन लगाया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्विटर पर इस खबर को शेयर करते हुए चुटकी ली है। उन्होंने लिखा कि भारत की सत्ताधारी पार्टी ने जिस फिल्म को प्रमोट किया है, उसे सिंगापुर में बैन कर दिया जाएगा। शशि थरूर ने इसके साथ चैनल न्यूज एशिया की रिपोर्ट का लिंक और खबर का स्क्रीशॉट शेयर किया है। 

न्यूज एशिया के मुताबिक सिंगापुर में ‘द कश्मीर फाइल्स’ को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसका कारण फिल्म में दिखाई गई बर्बरता को माना जा रहा है क्योंकि रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि इसे सिटी और स्टेट की फिल्म गाइडलाइंन्स से परे माना जा रहा है। रिपोर्ट में अधिकारियों ने कहा कि फिल्म में मुस्लिमों का उत्तेजक और एकतरफा चित्रण किया गया है। इसके साथ ही कश्मीर में चल रहे हिंदू-मुस्लिम संघर्ष में हिंदुओं को सताया जाना भी एक तरफा है, जिसे वहाँ के नियमों के अनुसार नहीं माना जा रहा है।

अधिकारियों ने रिपोर्ट में कहा कि फिल्म में जिस तरह की गतिविधियाँ दर्शाई गई हैं, वह अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने और उनके एकजुट और बहु-धार्मिक समाज की सामाजिक एकता को तोड़ने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि फिल्म क्लासिफिकेशन गाइडलाइंस के तहत, सिंगापुर में नस्लीय या धार्मिक समुदायों को बदनाम करने वाले किसी भी कंटेंट को दर्शकों तक पहुँचाने के लिए मना कर दिया जाएगा।

शशि थरूर के ट्वीट पर फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने थरूर को ‘मूर्ख’ और ‘हमेशा हर चीज की शिकायत’ करने वाले के रुप में संबोधित करते हुए कहा कि सिंगापुर में दुनिया का सबसे पिछड़ा हुआ सेंसर है। इसने ‘द लास्ट टेम्पटेशन ऑफ जीसस क्राइस्ट’ पर भी प्रतिबंध लगा दिया (अपनी मैडम से पूछ लें)। यहाँ मैडम से मतलब हुआ कॉन्ग्रेस की बॉस सोनिया गाँधी से।

विवेक अग्निहोत्री ने इसके अलावा एक काल्पनिक फिल्म ‘द लीला होटल फाइल्स (The Leela Hotel Files)’ का नाम गढ़ते हुए भी थरूर पर निशाना साधा। दरअसल इसी होटल में थरूर की पत्नी की लाश मिली थी। विवेक अग्निहोत्री ने लिखा कि ‘द लीला होटल फाइल्स’ को भी बैन किया जाएगा। इसलिए कृप्या कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार का मजाक उड़ाना बंद करें।

बता दें कि शशि थरूर की मैडम (पत्नी) सुनंदा पुष्कर की 17 जनवरी, 2014 को दिल्ली के होटल लीला पैलेस में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। अपनी मौत से कुछ दिनों पहले सुनंदा ने आरोप लगाया था कि उनके पति थरूर के एक पाकिस्तानी पत्रकार के साथ संबंध हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने शशि थरूर के खिलाफ धारा 306 और धारा 498-A के तहत केस दर्ज किया था। थरूर पर पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने और उनके साथ क्रूरता से पेश आने का आरोप लगाया गया था। हालाँकि अगस्त 2021 में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में शशि थरूर को सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

उल्लेखनीय है कि कश्मीर फाइल्स में साल 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ हुए नरसंहार और अत्याचार का मार्मिक व दिल को गमगीन कर देने वाला चित्रण हैं। इसमें कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जो चुभती भी है और दुखी भी करती हैं। इसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। खासकर कश्मीरी पंडित इस फिल्म को देख अपनी दर्द को याद कर काफी गमगीन हुए। उन्होंने फिल्म के निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की प्रशंसा करने के साथ उन्हें दिल से दुआएँ भी दीं। लोगों ने अनुपम खेर, दर्शन कुमार, मिथुन चक्रवर्ती,पल्लवी जोशी अन्य सभी कलाकारों के बेमिसाल अभिनय के लिए उनकी सराहना भी की।

बीना झा ने ऑटो मिस्त्री हारिष खान से किया था प्यार, बिना शादी साथ भी रहे… अब गर्दन में कई बार चाकू घुसाए जाने से मौत

दिल्ली के महरौली इलाके से हत्या का मामला प्रकाश में आया है, जहाँ सोमवार (9 मई 2022) को हारिष खान नाम के एक शख्स ने 19 साल की अपनी प्रेमिका की चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपित को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक बीना झा को भूलभुलैया में खून से लथपथ हालत में पाया गया था, जिसके बाद उसे एम्स के ट्रामा सेंटर ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में डीसीपी (दक्षिण जिला) बनिता मैरी जैकर ने कहा कि आरोपित को पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने मौके से गिरफ्तार कर लिया है। बहरहाल मृतिका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उसका मंगलवार (10 मई 2022) को पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसके बाद शव को परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

पुलिस के मुताबिक, कंट्रोल रूम को शाम करीब 6:40 बजे एक फोन आया था, जिसमें भगवती अस्पताल के पास ही एक महिला को चाकू मारे जाने की जानकारी मिली। इसके तुरंत बाद पेट्रोलिंग कर रहा स्टॉफ मौके पर पहुँचा। वहाँ पर पुलिस को देखते ही आरोपित ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे पकड़ लिया गया। पुलिस को आरोपित के पास से चाकू बरामद हुआ है।

पूछताछ के दौरान आरोपित ने पुलिस को बताया कि वो पीड़िता के साथ बीते तीन साल से रिलेशनशिप में था और अभी दो महीने पहले से ही वो दोनों एक साथ रहने लगे थे। डीसीपी बिनीता मैरी जैकर के मुताबिक, आरोपित ऑटोरिक्शॉ मिस्त्री है। लेकिन, कोरोना के कारण वो बीते एक साल से बेरोजगार था। ऐसे में पैसे की तंगी को लेकर दोनों के बीच आए दिन लड़ाई-झगड़े होते रहते थे। करीब 5 दिन पहले लड़की (बीना झा) झगड़े के बाद अपने माता-पिता के पास चली गई थी।

इसके बाद आरोपित ने उसे सोमवार यह कहकर मिलने के लिए बुलाया कि दोनों बैठकर आपसी सहमति से मामले को सुलझाएँगे। इस दौरान लड़की को उसने अपनी आर्थिक हालत के बारे में बताया और उससे अपने पास वापस आने को कहा। लेकिन जब लड़की ने मना किया तो दोनों के बीच इसी को लेकर खूब झगड़े हुए। खान ने पीड़िता को बर्बाद कर देने की धमकी दी। इस बीच लड़की ने जब वहाँ से बचकर भागने की कोशिश की तो आरोपित ने उसे पीछे पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर चाकू से कई वार किए। पीड़िता को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसे मृत घोषित कर दिया गया।

पाकिस्तान में इतने भी मजे नहीं हैं: कट्टरपंथियों को केरल हाईकोर्ट ने समझाया, कहा- भारत ने कभी मुस्लिमों को नहीं बनाया बंधक

भारत के खिलाफ जंग छेड़ने व कश्मीर में कैंप लगाकर आतंकियों की भर्ती करने के मामले में 10 आरोपितों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए केरल हाई कोर्ट ने इस्लामी कट्टरपंथियों पर अपनी टिप्पणी की। कोर्ट ने इशारा किया कि जिन उग्र विचार वालों को लगता है पाकिस्तान ही उनके लिए सही जगह है वो जान लें कि भारत में उनके साथ कभी कुछ गलत नहीं हुआ।

अदालत ने कट्टरपंथियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कट्टरपंथी और उग्र विचार वाले लोग विभाजन के बाद से भारत के इतिहास को देखें और महसूस करेंगें कि बाड़ के दूसरी तरफ (पाकिस्तान में) स्थिति इतनी भी ठीक नहीं है जितनी वो लोग समझ के बैठे हैं। न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति सी जयचंद्रन ने मामले की सुनवाई के दौरान बताया कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष के दौरान भी हिंदू बहुल भारत में मुसलमानों को बंधक बनाने की घटनाएँ विभाजन के बाद से नहीं हुई हैं।

गौरतलब है कि साल 2013 में भारत के खिलाफ आतंकियों की भर्ती करने के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी की अदालत ने केरल के कुछ आरोपितों को पकड़कर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी मामले पर केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की और हुए लश्कर-ए-तैयार के तदियंतविडे नजीर समेत 10 की सजा जस की तस रखी। लेकिन 3 को बरी कर दिया गया। बताया जाता है कि नजीर ही लश्कर ए तैयबा का केरल कमांडर था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आतंकियों को पड़ने के लिए एनआईए और केरल पुलिस की प्रतिबद्धता की तारीफ की। साथ ही लैरी कॉलिन्स और डोमिनिक लैपिएरे की किताब ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के अध्याय 5 का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि भारत में मुसलमान एक ‘हिंदू समुद्र में द्वीप’ जैसे होंगे और देशों के बीच संघर्ष का शिकार होंगे…। कोर्ट ने कहा कि न तो इतने सालों में ऐसी कोई घटना हुई जहाँ बंधक बनाने की हालत आई और न ही कभी उनकी ओर से अच्छा व्यवहार किया गया। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपितों की भर्ती केरल से केवल मजहबी आधार पर हुई थी। बाद में इन्हें पाकिस्तान भेजा गया ताकि ये वहाँ से ट्रेनिंग लेकर आएँ और भारत में आतंक मचाएँ। भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में इनमें से तीन मर गए थे जबकि एक ने भर्ती की बात स्वीकार कर ली थी।

न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन ने अपने आदेश में कहा, “ऐसी जन्नत की चाह में, जो सिर्फ इंसानों को मार कर और देश के नागरिकों को मार कर मिलती है, पाँच लोगों ने धरती पर ऐसी जन्नत का सफर किया….अब वो वहाँ जन्नत के मजे ले रहे हैं या नहीं ये एक सवाल है लेकिन उन्होंने अपने परिवारजनों के लिए जीवन को जहन्नुम बना दिया जो शर्म से दुख में डूबते जा रहे हैं।”

भगवान राम के ससुराल में ‘समधी साला है’: वो गाली जिसे सुन जगद्गुरु हुए भाव-विभोर, वायरल वीडियो पर बड़े-बड़े लोग कर रहे कॉमेंट

भगवान श्री राम का विवाह राजा जनक की पुत्री माता सीता के साथ हुआ था। राजा जनक जनकपुर के निवासी थे, जो नेपाल में है। विश्व प्रसिद्ध कथा वाचक जगद्गुरु रामभद्राचार्य हाल ही में जनकपुर (नेपाल) पहुँचे थे, जिसका एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जनकपुर की महिलाएँ पारंपरिक अंदाज में गाली सुनाकर उनका स्वागत करती नजर आ रही हैं। महिलाएँ उनको ‘समधी’ के रूप में संबोधित कर उनसे हास्य-विनोद करती दिख रही हैं।

जनकपुरी की माताओं ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य का इस तरह से स्वागत कर लगभग विलुप्त हो चुकी विधाओं को जैसे जीवंत कर दिया। जगतगुरु रामभद्राचार्य ने भी इस कलयुग में त्रेता युग के गुरु वशिष्ठ के परंपराओं का निर्वहन किया। यहाँ रामभद्राचार्य स्वयं को भगवान राम (लड़के वाले) की ओर से मानते हैं और सीताजी नेपाल की थीं, इस तरह से नेपाल भगवान राम का ससुराल है। इसीलिए नेपाल की महिलाएँ इन्हें ‘समधी’ मानकर यह गीत सुना रही हैं।

हास्य व्यंग करने की चली आ रही है परंपरा

महिलाएँ जगद्गुरु को समधी कह संबोधित कर रही हैं, इसके पीछे भी एक प्रसंग है। दरअसल रामचरित मानस में वर्णन है कि जब भगवान श्री राम की बारात मिथिला पहुँची तो साथ में गुरु वशिष्ठ भी थे, तो वहाँ की महिलाओं ने बारातियों और गुरु वशिष्ठ से हास्य-व्यंग्य किया और उनको ‘गालियाँ’ सुनाईं। हालाँकि यह प्रथा विलुप्त सी होती जा रही है, लेकिन मिथिला में अभी भी बारातियों, दूल्हे और समधियों को ‘गाली’ दिए बिना विवाह को संपन्न नहीं माना जाता है।

शादी के लिए आए बाराती को गाली देना शुभ शगुन माना जाता है और घर में भी रौनक बनी रहती है। बाराती भी इसे गलत तरीके से नहीं लेते हैं। वह भी इसका आनंद लेते हैं। इसके पीछे उनका अपार प्रेम छुपा होता है। मिथिला में जमाइ (दूल्हा) और समधी (दूल्हे के पिता) को सम्मान भी उतना ही दिया जाता है।

जनकनगरी मिथिला ये परंपरा आज तक चली आ रही है। यही वजह है कि जब गुरु रामभद्राचार्य जनकपुर पहुँचे तो वहाँ की महिलाएँ उनका स्वागत करने पहुँचीं और समधी (गुरुदेव वशिष्ठ) के भाव से पारंपरिक गाली ‘समधी साला है’ सुनाने लगीं। गुरुवर भी वीडियो में प्रसन्न मुद्रा में दिख रहे हैं।

जिस अंदाज में माताओं ने जगदगुरु रामभद्राचार्य के सामने पारम्परिक गारी (गाली को ही गारी कहते हैं उस क्षेत्र में) ‘समधी साला है’ गाया, उसको सुनने के बाद उनके चेहरे पर जो भाव उभरे, वो अपने आप में अद्भुत है। एक बार तो वो हल्का सा शर्माते हुए भी दिखाई देते हैं। इस पर वो अपने दोनों हाथों से चेहरे को ढक लेते हैं। रामभद्राचार्य जी का यह वीडियो ट्विटर और फेसबुक पर खूब तेजी से वायरल हो रहा है। इस पर मशहूर कवि कुमार विश्वास सहित कई यूजर्स ने कमेंट किए हैं।

उन्होंने लिखा, “अनिर्वचनीय आनंद। पूज्य महाराज जी मुख पर वैसी ही सलज्ज मंद मुस्कान है जैसी गुरु वशिष्ठ के मुख पर रही होगी। महाराज जी के साथ हम जैसे कोई लखन लाल (भगवान लक्ष्मण) गए होते तो देते जमकर ऐसा जवाब। “कोउ नहिं उपजे मात पिता बिन अस है जग की नीति, तुम्हरी बिटिया महि ते उपजीं अस हमरी नहिं रीति।”

कौन हैं कथा वाचक रामभद्राचार्य

जगद्गुरु रामभद्राचार्य एक विश्व विख्यात कथा वाचक हैं और मूल रूप से जौनपुर (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। रामभद्राचार्य भारत के चार प्रमुख जगद्गुरु में से एक हैं और उनको 1988 में इस उपाधि से नवाजा गया।

राम भद्राचार्य तुलसीपीठ के संस्थापक और प्रमुख हैं। तुलसीपीठ संत तुलसीदास के नाम पर चित्रकूट में एक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान है। रामभद्राचार्य चित्रकूट में जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन चांसलर भी हैं।