चीन के कर्ज के जंजाल में फँसे श्रीलंका में एक बार फिर से लगाए गए राष्ट्रीय आपातकाल के बाद वहाँ बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाएँ हो रही हैं। देश के खराब होते हालात और दबावों के आगे झुकते हुए श्रीलंकाई प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे ने सोमवार (9 अप्रैल 2022) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस हिंसा में अब तक 5 की मौत औj 200 से अधिक घायल हुए हैं। वहाँ खाने-पीने के सामानों के साथ ही ईंधन, बिजली और ट्रांसपोर्ट सब महँगा हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, महिंद्रा राजपक्षे (76 साल) ने अपना इस्तीफा अपने छोटे भाई और देश के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को सौंप दिया। हालाँकि, उनके इस्तीफे से देश में हिंसा की घटनाएँ रुकी नहीं। श्रीलंकाई पीएम के इस्तीफे के कुछ घंटों के बाद ही सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हंबनटोटा स्थित उनके पैतृक घर ‘मेदामुलाना वालवा’ को जला दिया। इससे उनका घर जलकर खाक हो गया। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं। इसके अलावा कुरुनेगला में भी आंदोलकारियों ने महिद्रा राजपक्षे के घर को आग के हवाले कर दिया।
महिंद्रा राजपक्षे ने अपना इस्तीफा देते हुए कहा कि वो अपने पद से इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं ताकि सर्वदलीय अंतरिम सरकार का गठन किया जा सके। अपने इस्तीफे के पत्र में उन्होंने कहा कि वो लोगों और सरकार को इस संकट से निकालने के लिए किसी भी तरह का बलिदान देंगे। इसी के साथ उन्होंने कैबिनेट को भंग कर दिया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि मौजूदा सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक और समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने संसद के सभी दलों के सदस्यों को राष्ट्रीय एकता सरकार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। बहरहाल देशभर में सोमवार शाम 7 बजे से बुधवार सुबह 7 बजे तक के लिए कर्फ्यू लगाया गया है।
सांसद ने खुद को मारी गोली
सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसक भीड़ ने सत्ताधारी पार्टी के सांसद अमरकीर्ति अतुकोराला (57 साल) को पश्चिमी शहर नितम्बुआ में घेर लिया था। दावा है कि उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। हालाँकि, दावा ये भी है कि पहले सांसद की कार से प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई थी, जिसके बाद लोगों ने उन्हें रोक कर कार से नीचे उतार लिया।
फ्री कल्चर ले डूबा
हाल ही में श्रीलंका के वित्त मंत्री अली साबरी ने इस बात का खुलासा किया था कि अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए साल 2019 में राजपक्षे सरकार द्वारा की गई व्यापक कर कटौती के बाद देश में करदाताओं की संख्या लगभग 10 लाख कम हो गई थी। जबकि, देश में कुल टैक्सपेयर्स की संख्या ही 1550000 थी, जो कि साल 2021 के अंत तक घटकर 412000 रह गए थे।
गौरतलब है कि इसके पहले देश में 1 अप्रैल को आपातकाल लागू किया गया था। हालाँकि, कुछ दिन बाद ही 5 अप्रैल को इसे हटा लिया गया था।
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग शहर में स्थित 8 वीं शताब्दी के मार्तंड सूर्य मंदिर में हाल में वर्षों बाद पूजा-अर्चना करके श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव के नारे लगाए थे। इसके बाद प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी नवग्रह अष्टमंगलम हवन व पूजा में सम्मिलित हुए थे और उनकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आई थी। अब उसी पूजा अर्चना को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने नियमों का उल्लंघन बताया है। साथ ही गवर्नर द्वारा इस मंदिर में पूजा करने पर अपनी आपत्ति जहिर की है। एएसआई ने इस मुद्दे को जिला प्रशासन से शिकायत करके उठाया है।
पीटीआई की खबर के अनुसार, एएसआई अधिकारियों ने कहा नियमानुसार राज्यपाल को एएसआई द्वारा संरक्षित स्थान पर पूजा अर्चना करने से पहले मंजूरी लेनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस पूजा के लिए अन्य राज्यों से पुरोहितों को बुलाया गया।
‘Pooja’, attended by Jammu and Kashmir Lt Governor Manoj Sinha at premises of Archaeological Survey of India-protected Martand Sun temple in Anantnag, was in violation of rules and issue has been raised with UT administration: ASI officials
गौरतलब है कि एएसआई कि आपत्ति इस बात पर है कि जब प्राचीन स्मारक संबंधी कानून के मुताबिक केंद्र सरकार की लिखित अनुमति के बिना संरक्षित स्मारकों में बैठक, दावत, मनोरंजन या कुछ और नहीं किया जा सकता। फिर वहाँ बिन अनुमति लिए पूजा का आयोजन क्यों हुआ। उन्होंने इस मामले को जिला प्रशासन के साथ उठाया है। एएसआई का कहना है कि भले ही पूजा मंदिर के बाहर की गई मगर तब भी ये नियमों का उल्लंघन है।
Government is committed to protect and develop ancient sites of cultural & religious significance, transforming them into vibrant centers that will guide us on the path of righteousness and blesses this beautiful land with peace, happiness and prosperity.
बता दें कि 8 मई को कश्मीर के मार्तंड सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद मनोज सिन्हा ने इसे दिव्य अनुभव बताया था। साथ ही अपने ट्वीट में मंदिर में हुई पूजा से जुड़ी तस्वीरों को शेयर कर लिखा था, “सरकार सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के प्राचीन स्थलों की रक्षा और विकास के लिए प्रतिबद्ध है, उन्हें जीवंत केंद्रों में बदलना जो हमें धार्मिकता के मार्ग पर ले जाएंगे और इस खूबसूरत भूमि को शांति, खुशी और समृद्धि का आशीर्वाद देंगे।”
मार्तंड सूर्य मंदिर
गौरतलब है कि कश्मीर का मार्तंड सूर्य मंदिर अनंतनाग शहर से पूर्व दिशा में 3 किलोमीटर की दूरी पर है। ये एक किस्म के पठार पर स्थित है। उस समय इसकी कलाकृतियाँ देख कर लोग अचंभे से भर जाते थे। सिकंदर शाह मीरी ने उनमें से कई मंदिरों को ध्वस्त कर के उन्हीं ईंट-पत्थरों का इस्तेमाल कर मस्जिदें बनवाई। उसने इसकी जड़ों को खोदना शुरू किया और उनमें से पत्थर निकाल कर लकड़ियाँ भर देता था। इसके बाद उन लकड़ियों में वो आग लगवा देता था। इस तरह उसने मार्तंड सूर्य मंदिर को ध्वस्त कर डाला।
ये भी जानने लायक बात है कि इस मंदिर को नष्ट करने की सलाह उसे एक ‘सूफी फकीर’, जिसे आजकल ‘सूफी संत’ भी कहते हैं, उसने दी थी। उसका नाम था – मीर मुहम्मद हमदानी। वो कश्मीर के समाज को इस्लामी बनाना चाहता था। वो इलाके में ब्राह्मणों के वर्चस्व को तोड़ कर सारी संपदा हथियाना चाहता था। इसके बाद कई भूकंप भी आए, जिनमें मंदिर को क्षति पहुँची। जिस पठार पर इसे बनाया गया था, वहाँ से तब अधिकतर कश्मीर घाटी को देखा जा सकता था।
वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को श्रीराम वल्लभा देवी माँ सीता का प्रकाट्य हुआ था। इसलिए इस तिथि को जानकी नवमी और सीता नवमी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह आज मंगलवार 10 मई, 2022 को है। माँ सीता को माँ लक्ष्मी का भूमि अवतार माना जाता है। भूमि से उत्पन्न होने के कारण उन्हें भूमात्मजा और राजा जनक की पुत्री होने से उन्हें जानकी भी कहा जाता है।
आज उनके प्राकट्य दिवस के अवसर पर उनके जन्म से जुड़ी उन पौराणिक कथाओं पर बात करते हैं जो अपने आप में कई रहस्यों से भरी है। माँ सीता के बारे में वाल्मीकि रामायण और कई अन्य ग्रंथों में जो उल्लेख मिलता है उसके अनुसार मिथिला के राजा विदेहराज जनक के राज में कई वर्षों से वर्षा नहीं हो रही थी। इससे चिंतित होकर राजा जनक ने जब ऋषियों से सलाह ली और उन्होंने उपाय के रूप में बताया कि जब महाराज स्वयं हल चलाएँ तो इन्द्र देव की कृपा से वर्षा हो सकती है।
राजा जनक द्वारा हल चलाने का प्रसंग (साभार-detechter.com)
मान्यता है कि बिहार स्थिति सीममढ़ी का पुनौरा गाँव वह स्थान है जहाँ राजा जनक ने हल चलाया था। हल चलाते समय हल एक धातु से टकराकर अटक गया। तब जनक ने उस स्थान की खुदाई का आदेश दिया। कहा जाता है कि उस स्थान से एक कलश निकला जिसमें एक सुंदर सी कन्या थी। चूँकि, राजा जनक निःसंतान थे। उन्होंने कन्या को ईश्वर की कृपा मानकर पुत्री बना लिया। हल का फल जिसे सीत कहते हैं उससे टकराने के कारण कलश से कन्या प्रकट हुई थी इसलिए कन्या का नाम सीता रखा गया।
इस घटना से इतना तो पता चलता है कि माँ सीता राजा जनक की अपनी पुत्री नहीं थी। जहाँ जमीन के अंदर से कलश से प्राप्त होने के कारण सीता स्वयं को पृथ्वी की पुत्री मानती थी। वहीं वास्तव में सीता के पिता कौन थे और कलश में सीता कैसे आईं इसका उल्लेख अलग-अलग भाषाओं में लिखे गए रामायण और दूसरी कथाओं से प्राप्त होता है।
वेदवती कैसे बनीं रावण के विनाश का कारण
जहाँ एक प्रसंग के अनुसार, मिथिला नरेश जनक ने धरती से प्राप्त सीता को अपनी पुत्री मानकर पालन-पोषण किया और स्वयंवर के जरिए वह श्रीराम की अर्धांगिनी बनीं। वहीं अद्भुत रामायण में सीता को रावण और मंदोदरी की बेटी बताया गया है। रावण के अपने विनाश के बीज भी तार्किक रूप से इन्हीं कथाओं में गुथे गए हैं।
अद्भुत रामायण की इस घटना से पहले जो कथा जुड़ती है वह है वेदवती की। दरअसल, ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह कथा आती है जहाँ से रावण के अंत की कथा भी जुड़ती है। कहते हैं रावण के अंत के पीछे सबसे बड़ी वजह बनीं भगवान विष्णु की उपासक वेदवती। माँ सीता इन्हीं वेदवती का पुनर्जन्म थीं। वेदवती के बारें में कहा जाता है कि वह बेहद सुंदर, सुशील और धार्मिक कन्या थीं। वह भगवान विष्णु की उपासक होने के साथ उनसे ही विवाह करना चाहती थीं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, वेदवती अपनी इच्छा पूर्ति के लिए सांसारिक जीवन छोड़कर जंगल में कुटिया बनाकर तपस्या में लीन थीं। इसी दौरान एक दिन जब रावण हिमालय का भ्रमण करते हुए एक ऋषि कन्या वेदवती को देखा तो मोहित हो गया। वह कन्या के निकट गया और अभी तक उसके अविवाहित रहने का कारण पूछा।
तब वेदवती ने बताया कि उसके पिता उसका विवाह विष्णु से करना चाहते थे। परन्तु एक राक्षस के मुझ पर मोहित होने के कारण उसने मेरे पिता का वध कर दिया। पति के वियोग में माता का भी देहावसान हो गया। पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए ही उन्होंने तपस्या का मार्ग अपनाया।
रावण ने शुरु में वेदवती को बहकाने की कोशिश की, परन्तु उसके नहीं मानने पर उसने वेदवती के केश पकड़ लिए तब कहा जाता है कि वेदवती ने रावण के द्वारा पकड़े गए बालों को काट दिया और दौड़ते हुए अग्नि कुंड मे कूद कर अपनी जान दे दी। मगर मरने से पहले उन्होंने रावण को श्राप दिया कि वो खुद रावण की पुत्री के रूप में जन्म लेकर उसकी मृत्यु का कारण बनेंगी। वही वेदवती अगले अगले जन्म में एक कन्या के रुप में जन्मी और रावण के विनाश का कारण बनीं।
वेदवती के इस प्रसंग को फिल्म सीता स्वयंबर में फिल्माया गया था तो उसकी छोटी सी क्लिप आप यहाँ देख सकते हैं।
रावण और मंदोदरी की बेटी सीता – कहाँ है प्रसंग?
अद्भुत रामायण में ही उल्लेख है, “रावण कहता है कि जब मैं भूलवश अपनी पुत्री से प्रणय की इच्छा करूँ तब वही मेरी मृत्यु का कारण बने।”
अद्भुत रामायण के प्रसंग के अनुसार ही, दण्डकारण्य में गृत्स्मद नाम का एक ब्राह्मण था जो माँ लक्ष्मी को पुत्री रूप मे पाने की कामना से, प्रतिदिन एक कलश मे कुश के अग्र भाग से मंत्रोच्चारण के साथ दूध की बूंदें समर्पित करता था। कहते हैं उस समय देव-असुरों के बीच संग्राम चलता रहता था। कभी असुर देवों पर तो देव असुरों पर आक्रमण करते रहते थे। उसी बीच किसी दिन रावण उस ब्राह्मण की कुटिया पर पहुँच गया। उस समय गृत्समद वहाँ उपस्थित नहीं थे। इसका फायदा उठा कर रावण ने आश्रम के अन्य ब्राह्मणों और ऋषियों को मारकर उनके रक्त को उसी कलश में भर लिया।
कहते हैं कि रावण उस रक्त कलश को अपने साथ लेकर लंका चला गया। जहाँ उसने अपनी पत्नी मंदोदरी को उस कलश को सम्भाल कर रखने को कहा। वहीं मंदोदरी को उस कलश में क्या है? इसके बारे में बताते हुए उसने कहा कि यह बहुत ही तीक्ष्ण विष से भरा है। जब कुछ दिनों के बाद रावण विहार के उद्देश्य से सह्याद्रि पर्वत पर चला गया जो मंदोदरी को पसंद नहीं थी। कहते हैं अपनी उपेक्षा से खिन्न मंदोदरी ने मृत्यु को वरण करने के उद्देश्य से कलश में रखा पदार्थ पी लिया।
वहीं देवी लक्ष्मी को पुत्री के रूप में प्राप्त करने के लिए मंत्रोचारित दूध का ऐसा प्रभाव पड़ा कि मंदोदरी गर्भवती हो गईं। तत्पश्चात, मंदोदरी ने सोचा कि जब मेरे पति मेरे पास नहीं है। ऐसे में जब उन्हें इस बात का पता चलेगा। तो वह क्या सोचेंगे। यही सब सोचते हुए मंदोदरी तीर्थ यात्रा के बहाने कुरुक्षेत्र चली गई। कहा जाता है कि वहीं पर उसने गर्भ को निकालकर भ्रूण को एक घड़े में रखकर भूमि में दफन कर दिया और सरस्वती नदी में स्नान कर वह वापस लंका लौट गई। कहते हैं कि कालांतर में इसी भ्रूण से सीता का जन्म हुआ। मान्यता है कि वही घड़ा हल चलाते वक्त मिथिला के राजा जनक को मिला था, जिसमें से सीता जी प्रकट हुईं थी।
लोकजीवन में सीता राजा-जनक और सुनयना की पुत्री के रूप में विख्यात भले रहीं हों लेकिन यह भी प्रचलित था कि वे दोनों केवल पालक माता-पिता ही थे। वाल्मिकी रामायण के अलावे कम्पन रचित रामायण, जैन रामायण, थाई रामायण और लोक-कथाओं में भी माँ सीता के जन्म और जीवन को लेकर अलग-अलग ढंग से वर्णन है।
जहाँ तक बात अद्भुत रामायण की है तो बता दूँ कि एक बार ऋषि भारद्वाज ने ऋषि वाल्मीकि से रामायण के कुछ गुप्त और रहस्यमय पहलुओं को बताने के लिए कहा और कहा जाता है कि इसी के परिणामस्वरूप, वाल्मीकि द्वारा अद्भूत रामायण लिखी गई। यह संस्कृत भाषा में है जो 27 सर्गों में रचित एक विशेष कविता है। जबकि वाल्मीकि रामायण को इस ग्रन्थ का प्रेरणास्रोत भी बताया जाता है।
रावण ने सीता को अशोक वाटिका में क्यों रखा?
यहाँ एक और प्रसंग का जिक्र तो बनता ही है जो सीता के अपहरण के बाद उन्हें लंका के अशोक वाटिका में रखने से जुड़ा है। कई बार सवाल उठता है कि रावण की कैद में एक लंबा समय गुजारने के दौरान जनकनंदनी सीता ने कभी रावण को अपने समीप भी नहीं आने दिया। क्या वह सीता के क्रोध से डरता था या फिर भगवान राम के? वह किसी वचन में बँधा था या फिर वह श्राप था जिससे वह सीता से दूर रहने के लिए बाध्य था। आलीशान महल सोने की लंका को छोड़कर उसने क्यों सीता को अशोक वाटिका में रखा?
इस सवाल का जवाब भी पुराणों मिलता है। कहते हैं रावण की सोने की लंका का निर्माण कुबेर ने किया था, यह भव्य और विशाल तो था ही लेकिन इतना आकर्षक भी था कि जो इसे देखता, बस देखता ही रह जाता। लेकिन, फिर भी सीता का हरण करने के बाद रावण ने उन्हें लंका के किसी महल में नहीं बल्कि वाटिका में इसलिए रखा क्योंकि वह नलकुबेर के श्राप से भयभीत था।
इस श्राप से जुड़ा जो प्रसंग है, उसके अनुसार, स्वर्ग की खूबसूरत अप्सरा रंभा, कुबेर के पुत्र नलकुबेर से मिलने धरती पर आई थी। और कहते हैं कि जब रावण की दृष्टि रंभा पर पड़ी तो वह उसके सौंदर्य पर मुग्ध हो गया। रंभा ने उसे कहा भी कि वह नलकुबेर की होने वाली पत्नी हैं लेकिन फिर भी रावण ने उनका सम्मान नहीं किया और रंभा के साथ दुर्व्यवहार किया।
जब इस बात की खबर नलकुबेर को मिली तो उसने रावण को श्राप दे दिया कि जब भी वह कभी किसी स्त्री को बिना उसकी स्वीकृति के छुएगा या फिर अपने महल में जबरदस्ती रखने की कोशिश करेगा तो वह उसी क्षण भस्म हो जाएगा। कहते हैं कि इसी श्राप की वजह से रावण ने बिना सीता की स्वीकृति के ना तो उन्हें स्पर्श किया और ना ही उन्हें अपने महल में रखा।
उत्तराखंड (Uttarakhand) में स्थित केदारनाथ मंदिर में इस बार ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन करने पहुँच रहे हैं। यही कारण है कि इस बार केदारनाथ यात्रा (Kedarnath Yatra) ने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। बताया जा रहा है कि पिछले चार दिनों में अब तक 75 हजार के करीब तीर्थयात्रियों ने बाबा केदार के दर्शन कर लिए हैं। पिछले साल की तुलना में यह कहीं अधिक है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार हजारों की संख्या में हर दिन भोले के दरबार में भक्त पहुँच रहे हैं। वर्ष 2019 की यात्रा में जहाँ पहले दिन 9000 व दूसरे दिन 7000 हजार और तीसरे दिन 8000 के करीब श्रद्धालु पहुँचे थे। वहीं इस बार केदारनाथ धाम में पहले दिन 23,512 दूसरे दिन 18,212 और तीसरे दिन 17,749 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए, जबकि चौथे दिन यानी सोमवार दोपहर तक 16 हजार से अधिक तीर्थयात्री केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकल गए थे।
प्रसिद्ध चारधाम में शुमार #केदारनाथ धाम के कपाट विधि विधान के साथ सुबह 6 बजकर 25 मिनट पर खोल दिए गए हैं. करीब 20 हजार श्रद्धालु कड़ाके की ठंड में श्रद्धालु कपाट खुलने के साक्षी बने. केदारधाम में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचे हुए हैं. #KedarnathTemple#CharDham#Kedarnathpic.twitter.com/LvZqZQppX0
इस साल 6 मई को सुबह 6 बजकर 25 मिनट पर केदारनाथ धाम के कपाट खुले थे। इन चार दिनों में लगभग 75 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन कर लिए हैं। हर दिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देख यात्रा पड़ावों में व्यवसाय कर रहे व्यापारी भी काफी खुश नजर आ रहे हैं। केदारघाटी की 60 प्रतिशत आबादी केदारनाथ यात्रा पर निर्भर रहती है। पिछले दो साल तक कोरोना महामारी (Corona) के कारण चार धाम यात्रा पर बुरा असर पड़ा है।
बता दें कि चार धामों के कपाट शीतकालीन अवकाश में बंद कर दिए जाते हैं और इसके बाद अप्रैल-मई में भक्तों के लिए खोल दिए जाते हैं। पिछले दो सालों से कोरोना महामारी के कारण मंदिर में यात्रियों के आने पर रोक लगाई गई थी।
राजस्थान में जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी के खिलाफ रेप केस की जाँच अब दिल्ली पुलिस करेगी। इस मामले में कभी भी उसकी गिरफ्तारी हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के सदर बाजार पुलिस थाने में सोमवार (9 मई 2022) को रोहित जोशी के खिलाफ रेप का केस दर्ज कर लिया गया है। अब इस मामले की जाँच महिला पुलिस अधिकारी करेंगी।
दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार, आज मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता के 164 बयान दर्ज किए गए हैं। रोहित जोशी के खिलाफ रेप, अननेचुरल सेक्स, ब्लैकमेलिंग, मारपीट करने सहित गंभीर आराेपों में सात धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। बताया जा रहा है कि सदर बाजार पुलिस स्टेशन में 338 नंबर की एफआईआर में 376, 377, 366, 312, 506, 509 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है।
#UPDATE | An investigation has been taken up in PS Sadar Bazar on the alleged rape on the pretext of marriage and a further process has been started to convert the same into a regular FIR: Delhi Police https://t.co/sZdiVfFy3o
पीड़िता ने दिल्ली पुलिस को अपनी शिकायत में बताया कि उसे मंत्री महेश जोशी से जान का खतरा है। महिला ने मंत्री के प्रभाव के कारण राजस्थान में निष्पक्ष जाँच पर संदेह भी जताया था। अब इस मामले की जाँच में राजस्थान पुलिस का कोई दखल नहीं रहेगा।
बता दें कि रोहित जोशी पर 23 साल की एक लड़की को शादी का झाँसा देकर रेप करने का आरोप लगा है। उत्तरी दिल्ली की पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर मामले को माधोपुर के एसपी को ट्रांसफर कर दिया है, क्योंकि पहली बार उसके साथ वहीं पर रेप किया गया था। पीड़िता का आरोप है कि रोहित जोशी ने उसके साथ कई मौकों पर रेप किया। उसने उसकी माँग में सिंदूर भरकर कहा कि अब तुम मेरी पत्नी हो गई हो और हम जल्द ही शादी कर लेंगे। इसके बाद वो उसे हनीमून पर ले गया और उसके साथ रेप किया। आरोप है कि जब वो गर्भवती हो गई तो उसका गर्भपात भी करा दिया।
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मेयर मुकेश सूर्यान ने सोमवार (9 मई 2022) को आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिखा। ‘आप’ के विधायक अमानतुल्लाह खान पर आरोप है कि उन्होंने अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में बाधा पहुँचाई है। उन्होंने लिखा, “मेरे संज्ञान में यह आया है कि वहाँ के विधायक अमानतुल्लाह खान और निगम पार्षद अब्दुल वाजिद खान, वार्ड संख्या 102 एस ने सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाई है।”
— निहाल सिंह/NIHAL SINGH (@nihaljilive) May 9, 2022
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान शाहीन बाग में चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। शाहीन बाग इलाके में MCD द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में लोग सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके चलते लोगों ने बुलडोजर को सड़क पर ही रोक दिया।
#WATCH दिल्ली: आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन में शामिल हुए।
शाहीनबाग इलाके में MCD द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में लोग सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों ने बुलडोजर को सड़क पर ही रोक दिया गया है। pic.twitter.com/icnstGG0mw
इससे पहले दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने मेयर मुकेश सूर्यान को पत्र लिखकर राजनीतिक दलों के नेताओं के खिलाफ एक्शन लेने की अपील की थी। आदेश गुप्ता ने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी के कुछ नेता, विधायक और पार्षदों ने शाहीन में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने दी। कुछ लोग बुल्डोजर के सामने लेट गए। इसलिए सरकार काम में बाधा पहुँचाने समेत अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाए।
आज शाहीन बाग में निगम की कार्रवाई निर्धारित थी किन्तु AAP व कॉंग्रेस के कुछ नेताओं ने बुलडोजर के आगे लेटकर इसे बाधित किया।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “आज शहीन बाग में निगम द्वारा की जा रही कार्रवाई को रोकने के लिए काँग्रेस और आप नेताओं ने बुलडोजर के आगे लेटकर रास्ता रोककर उसे सांप्रदायिकता का रंग दे दिया। आतंक फैलाने वाला एक आतंकी होता है किसी धर्म या मजहब का नहीं, बुलडोजर के आगे लेटने वालों तुम्हें जनता लिटाएगी।”
आज शहीन बाग में निगम द्वारा की जा रही कार्रवाई को रोकने के लिए काँग्रेस और आप नेताओं ने बुलडोजर के आगे लेटकर रास्ता रोककर उसे सांप्रदायिकता का रंग दे दिया।
आतंक फैलाने वाला एक आतंकी होता है किसी धर्म या मजहब का नही, बुलडोजर के आगे लेटने वालों तुम्हें जनता लिटाएगी।
वहीं, SDMC सेंट्रल जोन के स्थायी समिति के अध्यक्ष राजपाल ने कहा कि अवैध रूप से बने अतिक्रमण की पहचान कर कार्रवाई होगी। इस कार्रवाई में होने वाला खर्चा भी उन्हीं लोगों से वसूला जाएगा। जनता के हक का पैसा खर्च किया जा रहा है, वह ऐसे लोगों को बढ़ावा देने के लिए नहीं है। यह पैसा भी हम इनसे वसूल करेंगे।
पूर्व पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी द्वारा पाकिस्तानी पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया पर ‘दुश्मन देश’ (भारत) की मीडिया से बात करने का आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद, दानिश ने अफरीदी को किसी भी भारतीय चैनल से बात न करने की सलाह दी है।
बता दें कि इससे पहले दानिश कनेरिया ने अफरीदी पर धर्मांतरण और इस्लाम कबूल करने के लिए राजी करने का भी आरोप लगाया था। सोमवार 9 मई, 2022 को कनेरिया ने ट्वीट किया, “भारत हमारा दुश्मन नहीं है। हमारे दुश्मन वो हैं जो मजहब के नाम पर लोगों को भड़काते हैं। यदि आप भारत को अपना दुश्मन मानते हैं, तो कभी भी किसी भारतीय मीडिया चैनल पर न जाएँ।”
India is not our enemy. Our enemies are those who instigate people in the name of religion.
दानिश कनेरिया ने आगे खुलासा किया कि पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन की दुर्दशा पर उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने लिखा, “जब मैंने जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाई तो मुझे धमकी दी गई कि मेरा करियर तबाह कर दिया जाएगा।”
When I raised my voice against forced conversion, I was threatened that my career would be destroyed.
दानिश कनेरिया ने यह भी कहा कि शोएब अख्तर अपनी समस्याओं के बारे में सार्वजनिक रूप से बोलने वाले पहले व्यक्ति थे। अख्तर ने खुलकर कहा था कि कैसे कनेरिया के साथ हिंदू होने की वजह से टीम में बुरा बर्ताव किया जाता था। दानेश कनेरिया ने कहा कि बाद में कई अधिकारियों ने अख्तर पर दबाव बनाया, जिसके बाद अख्तर ने इस बारे में बात करना ही बंद कर दिया।
विवाद की जड़
इस साल 29 अप्रैल को दानिश कनेरिया ने टीम के अपने पूर्व साथी शाहिद अफरीदी पर हिंदू होने के कारण दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। उन्होंने अफरीदी को चरित्रहीन, जालसाज और झूठा बताया था।
कनेरिया ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “शाहिद अफरीदी ने हमेशा मुझे निराश किया। वह मुझे बेंच पर रखते थे और मुझे वनडे इंटरनेशनल मैच नहीं खेलने देते थे। वह नहीं चाहते थे कि मैं टीम में रहूँ।”
उन्होंने आगे कहा कि शाहिद अफरीदी चरित्रहीन और झूठे व्यक्ति हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी को यह भी बताया कि शाहिद अफरीदी को उनके अच्छे प्रदर्शन से जलन होती थी और उन्होंने अन्य खिलाड़ियों को उनके खिलाफ उकसाया था। कनेरिया ने कहा कि इन सब बातों को नजरअंदाज करते हुए वह सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान देते थे।
बाद में 4 मई को ज़ी न्यूज़ के साथ एक अन्य साक्षात्कार में, दानिश कनेरिया ने बताया, “हाँ, अफरीदी अक्सर मुझे इस्लाम कबूल करने के लिए कहते थे। लेकिन, मैं उसे कभी सीरियसली नहीं लेता था। मैं अपने धर्म में विश्वास करता हूँ और यह क्रिकेट पर निर्भर नहीं करता है।”
6 मई को द न्यूज इंटरनेशनल से बात करते हुए, शाहिद अफरीदी ने गाली दी और कनेरिया पर ‘चरित्र पर दृढ़’ नहीं होने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया, “कनेरिया मेरे छोटे भाई की तरह थे और मैं उनके साथ कई सालों तक खेला। अगर मेरा रवैया खराब था तो उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड या जिसके लिए खेल रहे थे, उससे शिकायत क्यों नहीं की।”
अफरीदी ने दानिश कनेरिया पर ‘दुश्मन राष्ट्र’ भारत को इंटरव्यू देने का आरोप लगाते हुए कहा, “वह मुझ पर सस्ती प्रसिद्धि पाने और पैसा कमाने के लिए आरोप लगा रहे हैं। वह हमारे दुश्मन देश को इंटरव्यू दे रहे हैं जो धार्मिक भावनाओं को भड़का सकते हैं। उनके बारे में सभी जानते हैं।”
स्पिनर ने अब भारत को ‘दुश्मन देश’ कहने के लिए अफरीदी की खिंचाई की है।
हिंदू विरोधी रुख और शाहिद अफरीदी की भारत विरोधी टिप्पणी
बता दें कि दिसंबर 2019 में, अफरीदी के पुराने साक्षात्कार की एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। जिससे एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। उस वीडियो में उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने उस समय अपना टेलीविजन सेट तोड़ दिया था जब उन्होंने अपने एक बच्चे को एक भारतीय सीरियल में ‘आरती’ का दृश्य देखते हुए देखा था।
This is reality of secularism in Pakistan, TVs are broken for showing Hindu rituals & people applaud it pic.twitter.com/PXKcs5wcyf
गौरतलब है कि पूर्व पाकिस्तानी कप्तान को हाल ही में तालिबान का समर्थन करते देखा गया था। उनका कहना था कि तालिबान बहुत ही पॉजिटिव माइंड के साथ आए हैं। वे महिलाओं को काम करने दे रहे हैं। पाकिस्तान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान ने यह भी कहा कि तालिब मज़ेदार, क्रिकेट-प्रेमी लोग हैं।
वहीं, 2020 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की अपनी यात्रा के दौरान, शाहिद अफरीदी ने भारत के खिलाफ टिप्पणी की थी। इसके बाद, भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह और हरभजन सिंह, जिन्होंने उनके एनजीओ का समर्थन करने के लिए वीडियो पोस्ट किया, को आगे आना पड़ा और अफरीदी का समर्थन करने के लिए माफी माँगनी पड़ी थी।
काशी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के बाद अब मथुरा स्थित शाही ईदगाह विवादित ढाँचे में वीडियोग्राफ़ी और सर्वे के लिए प्रार्थना-पत्र दायर किया गया है। इस प्रार्थना पत्र के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थिर ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में कोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट जनरल की निगरानी में चल रहे सर्वे और वीडियोग्राफ़ी के विवरण भी सौंपे गए हैं। कहा गया है कि इसी तर्ज पर यहाँ भी एडवोकेट जनरल नियुक्त कर के प्रक्रिया पूरी की जाए।
ये प्रार्थना-पत्र अधिवक्ता महेंद्र प्रताप ने दायर किया है। उन्होंने कहा है कि शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का अवलोकन कर के कमल, शंख, गदा, ॐ और स्वास्तिक जैसे हिन्दू प्रतीक-चिह्नों के सबूत अदालत के समक्ष पेश किए जाएँ। इस मामले की सुनवाई मंगलवार (10 मई, 2022) को होगी। इससे पहले भी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप अदालत के समक्ष इस तरह की माँग रख चुके हैं। दिसंबर 2021 में मथुरा में एक याचिका दायर की गई थी।
इस याचिका में माँग की गई थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद में नमाज पढ़ने पर रोक लगाई जाए। ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति’ ने ये याचिका दायर की थी। अधिवक्ता महेंद्र प्रताप इस संगठन के अध्यक्ष हैं, जिनका कहना है कि ईदगाह में नमाज नहीं पढ़ी जाती थी, लेकिन यहाँ जानबूझ कर पाँच वक्त की नमाज अदायगी शुरू कर दी गई है। उन्होंने इसे हिन्दुओं की संपत्ति करार दिया था।
#BreakingNow: मथुरा में भी सर्वे के लिए याचिका दाखिल, ज्ञानवापी की तर्ज पर सर्वे कराने की मांग
जबकि ‘शाही ईदगाह मस्जिद इंतजामियाँ कमिटी’ का कहना है कि जिस 13.37 एकड़ जमीन पर हिन्दू पक्ष दावा कर रहा है, उससे जुड़े कोई भी दस्तावेज अदालत में पेश नहीं किए गए हैं। उसने दावा किया कि ये वाद सुने जाने योग्य नहीं है। अब सभी की निगाहें कल होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। मथुरा मामले में 19 मई को स्थानीय अदालत का बड़ा फैसला भी आ सकता है। वकील रंजना अग्निहोत्री ने औरंगजेब द्वारा बनवाए गए शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग की थी।
प्रारंभिक ‘शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर’ (RSS द्वारा संचालित) विद्यालय में होने के कारण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी क्रांतिदूतों के बारे में अच्छी खासी जानकारी प्राप्त हो गई थी। घर में पिताजी किताबों और संगीत के शौक़ीन थे तो शायद पढ़ना और संगीत सुनना विरासत में मिला। क्रांतिकारियों में मुख्यतः आज़ाद से संबंधित अनेक वाक़ये पिताजी सुनाते थे। शायद स्कूल और घर के इस माहौल ने ही देश के प्रति और आज़ादी की बलिवेदी पर प्राणों की आहुति देने वाले इन सेनानियों के प्रति मन को अगाध श्रद्धा से भर दिया।
आज इस भीड़भाड़ और भागमभाग भरी जिंदगी में कई सालों बाद लेखक मनीष श्रीवास्तव की किताब ‘क्रांतिदूत’ ने पुनः उसी दौर को मन के दरवाजे पर ला खड़ा किया। वास्तव में मनीष श्रीवास्तव से जुड़ने और उनके द्वारा लिखित ‘क्रांतिदूत’ पढ़ने का सौभाग्य मेरे लिए ‘बिनु हरि कृपा मिलहि नहीं संता’ को चरितार्थ करने जैसा है।
झाँसी स्वतंत्रता संग्राम का प्रारंभिक और मुख्य केंद्र रहा है। लेखक ने अपनी ‘क्रांतिदूत’ श्रृंखला के ‘झाँसी फाइल्स’ में इसी को सामने लाने का प्रयास किया है। व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए सबसे सौभाग्य की बात यह है कि मैं ऐसे व्यक्ति को पढ़ रही हूँ जिनके नाना मास्टर रुद्रनारायण सिंह जी ही झाँसी में आज़ाद, भगवान दास, सदाशिव, बलवंत (भगत सिंह), शचीन्द्रनाथ जैसे महान क्रांतिकारियों के गतिविधियों के नियंत्रक रहे थे।
‘झाँसी फाइल्स’ की शुरुआत चंद्रशेखर आज़ाद, अशफ़ाक़ उल्लाह खान, रामप्रसाद बिस्मिल और राजगुरु की बातचीत से शुरू होती है। ये अपने संगठन के लिए अर्थ और अस्त्र जुटाने के लिए चिंतित होते हैं क्योंकि इन दोनों के बिना संगठन के उद्देश्यों की पूर्ति होना कठिन था। बातों-बातों में ही इनके क्रांतिकारी दिमाग में एक क्रांतिकारी योजना का जन्म हुआ जो इतिहास में ‘काकोरी कांड’ के नाम से जाना गया।
‘क्रांतिदूत’ की इस श्रृंखला में मुख्य रूप से आज़ाद के झाँसी में गुप्त रूप से प्रवास और इस दौरान अपने मातृभूमि को स्वतंत्र कराने की योजनाओं पर प्रकाश डाला गया है। वहाँ उनके लिए संसाधन और गुप्त ठिकानों को उपलब्ध कराने की ज़िम्मेदारी मास्टर रुद्रनारायण जी ने सँभाली। क्योंकि, उन्हें पता था कि काकोरी कांड के बाद जिस तरह अंग्रेजी पुलिस क्रांतिकारियों की तलाश में कुत्तों की तरह घूम रही है। ऐसे में इनका सुरक्षित और गुप्त रहना बेहद ज़रूरी था। क्रांति की इन मशालों को हवाओं से बचाना था। इस संघर्ष में ऐसे अनगिनत नाम हैं जिन्होंने परोक्ष रूप में आज़ादी में अपनी महती भूमिका निभाई। लेखक ने ऐसे ही गुमनाम नामों को परिचित कराने का सफल प्रयास किया है ‘क्रांतिदूत’ में।
‘झाँसी फाइल्स’ में आज़ाद के कई अनछुए पहलुओं और रुद्रनारायण और मुन्नी भाभी (लेखक के नाना और नानी जी ) से पारिवारिक संबंध को भी बहुत ही स्नेहिल अंदाज में बताया गया है। यह विवरण सोचने के लिए मजबूर कर देता है कि ऊपर से इतने कठोर दिखने वाले इन युवा क्रांतिदूतों के अंदर भी चुहल व हँसी-मजाक और प्रेम जैसी संवेदनशील भावना बसती थीं, जो पारिवारिक माहौल मिलने पर स्वाभाविक रूप ने स्वतः ही उजागर हो उठती थी। ख़ैर इन क्रांतिदूतों ने तो पूरे भारतवर्ष को ही अपना परिवार मान लिया था और परिवार को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने की शपथ उठा रखी थी।
किताब में कई जगह आज़ाद से जुड़े बहुत ही रोचक प्रसंग का चित्रण किया गया है जो अनायास ही होठों पर मुस्कुराहट और हृदय में उत्कंठा उत्पन्न करता है कि अब क्या होगा ! क्या आज़ाद और उनसे जुड़े लोगों का भेद खुल जायेगा!
ऐसा ही एक प्रसंग है ‘दम्बूक’ शीर्षक में। हालांकि हम सबको पता है कि आज़ाद आजीवन आज़ाद ही रहे। अंग्रेजी हुकूमत की किसी गोली में इतनी हिम्मत न थी कि आज़ाद को छू भी पाती। लेकिन, ये लेखक के कलम का ही जादू है कि ऐसे कई प्रसंगों में मन आशंका से भर उठता है।
— Padhega India (Bodhi Tree Knowledge Services) (@PadhegaIndia_) May 8, 2022
‘क्रांतिदूत’ श्रृंखला ऐसे समय में आई है जब युवा पीढ़ी आज़ादी की बलिवेदी पर स्वयं को न्योछावर कर देने वाले इन क्रांतिवीरों के इतिहास के ज्ञान से लगभग अनभिज्ञ है। ऐसे समय पर ऐसी ज्ञानवर्धक किताबों की श्रृंखला प्रस्तुत करके मनीष जी ने समाज, खासकर युवा वर्ग के लिए पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाई है। पाठ्यक्रम में शामिल करने योग्य ‘क्रांतिदूत’ सीरीज की अन्य पुस्तकें भी रोचक और ज्ञानवर्धक होंगी – ऐसा विश्वास है।
किताब में प्रिंट और कहीं कहीं वाक्यों के समायोजन संबधी त्रुटियाँ अवश्य हैं, लेकिन विषयवस्तु के आगे वे गौण हो जाती हैं। अंत में ‘क्रांतिदूत’ श्रृंखला की सभी किताबों को हर भारतीय को अवश्य पढ़ना चाहिए। आशा है कि इस पुस्तक को लोग हाथोंहाथ लेंगे।
अपडेट: नाबालिग के अपहरण और पिता द्वारा डीएम कार्यालय के बाहर आत्मदाह का प्रयास करने के इस मामले में ताजा अपडेट के अनुसार मधुबन बापूधाम कोतवाल और सेक्टर 23 चौकी प्रभारी रंजीत कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है।
नाबालिग बेटी के मुस्लिम युवक द्वारा बहला फुसला कर ले जाने से आहत पिता ने गाजियाबाद DM ऑफिस पर 9 मई 2020 (सोमवार) को आत्मदाह करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसको पकड़ कर किसी अनहोनी को टाल दिया। पीड़ित पिता पुलिस पर भी संतोषजनक कार्रवाई न करने का आरोप लगाता सुनाई दिया। पुलिस पीड़ित पिता को पूछताछ के लिए थाने ले गई है। दर्ज FIR के मुताबिक पीड़ित की नाबालिग बेटी को ले जाने वाले आरोपित का नाम वहाब उर्फ़ जीशान है। पुलिस को शक है कि पीड़ित की बेटी घर से नाराज हो कर गई है और वहाब से पूछताछ में कोई ख़ास जानकारी हासिल नहीं हुई है। हालाँकि पुलिस ने अंतिम निष्कर्ष तक आने के लिए जाँच जारी होना बताया।
वीडियो में पीड़िता पिता को कहते सुना गया, “साहब मैं SSP और SHO को बार-बार मिल चुका हूँ। वो (विपक्षी) मुझे 10 लाख रुपए की धमकी देते हैं। उन्होंने 10 लाख रुपए में चौकी इंचार्ज को खरीद लिया है। वो कहते तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता। तुम्हारी लड़की को नहीं बरामद कर सकते। मैंने अपने ऊपर पेट्रोल डाला है। मैं मरना चाहता हूँ। मेरी बहुत बेइज्जती हो चुकी है सर। मुस्लिम पक्ष के लोग आ कर धमकी दे कर जाते हैं। उन लोगों ने मेरे ऊपर पिस्टल भी तान दी थी।”
वही इस मामले में गाजियाबाद के एसएसपी IPS मुनिराज ने कहा, “मामला थाना बापूधाम का है। लगभग 20 दिन पहले लड़की अपने पापा से नाराज हो कर घर से निकली थी। उसके बाद पुलिस को सूचना मिली तो पुलिस ने फ़ौरन ही FIR दर्ज करवा दिया। इसके बाद लड़की को बरामद करने के लिए SHO, DSP और चौकी प्रभारी की टीम गठित की गई। लड़की को बरामद करने के प्रयास जारी हैं। इस मामले में एक लड़के पर आरोप लगाया गया था जिस से पूछताछ के बाद उस से कोई ज्यादा इनपुट नहीं मिल पाए। लड़की के जाने के सभी संभावित स्थानों पर पुलिस तलाश कर रही है। सभी CCTV फुटेज भी तलाशे जा रहे हैं।”
IPS मुनिराज ने आगे बताया, “अभी हमने SP सिटी के नेतृत्व में फिर से टीम को निर्देश दिया है। वो अपनी पूरी टीम के साथ लगे हुए हैं। लड़की के पास मोबाईल नहीं है इसलिए हमें थोड़ी दिक्कत आ रही है। हम लड़की को जल्द से जल्द बरामद करने की दिशा में काम कर रहे हैं। लड़की के पिता जब भी आए तब हमने उनको समझाया और पुलिस टीम को निर्देश दिए। उन्होंने अपने ऊपर ज्वलशील पदार्थ क्यों डाला ये हम नहीं बता सकते।”
FIR Copy
नाबालिग बेटी को वहाब द्वारा बहला फुसला कर ले जाने की शिकायत पिता ने दर्ज करवाई है। पीड़ित पिता के मुताबिक, “मेरी बेटी 17 साल 4 माह की नाबालिग है। वो 18 अप्रैल 2022 से ही घर से लापता है। उस दिन वो स्कूल से घर नहीं आई। बेटी के इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर भेजे मैसेज और फोटो से मुझे पता चला है कि उसे वहाब उर्फ़ जीशान अपने साथ कहीं बहला फुसला कर ले गया है। मेरी बेटी को बरामद करते हुए वहाब पर कड़ी कार्रवाई करने की कृपा करें।” पुलिस ने यह मामला अपहरण की धाराओं 363 और 366 IPC में दर्ज किया है।
ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित पिता ने कहा, “अभी मुझे थाने के बाहर पूछताछ के लिए बिठाया गया है। मैं पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हूँ। मैं मजदूर हूँ और मजदूरी कर के ही अपने परिवार का पेट पालता हूँ। आज मेरे पेट्रोल छिड़कने के दौरान या उसके बाद पुलिस ने मेरे साथ कोई दुर्व्यहार नहीं किया है।”