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शिकायत करने आई लड़की पर भड़के CM बघेल, आम लोगों को भी लगे डाँटने: वीडियो वायरल हुआ तो बोले – मुझे इसका दुःख

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के ‘भेंट मुलाकात’ कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस कार्यक्रम के दौरान एक युवती को कड़े शब्दों में टोकने और नेतागिरी नहीं करने की सलाह देने पर सोशल मीडिया पर आलोचना हो रही है। 

वीडियो में मुख्यमंत्री भीड़ में से एक लड़की की तरफ इशारा करते हुए कह रहे हैं, इस लड़की को दे दो। इसके बाद युवती नमस्कार बोलकर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपनी शिकायत बोलना शुरू करती है। इसी समय एक पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री के कान में कुछ कहते हैं। इसके बाद युवती जैसे ही बोलना शुरू करती है, मुख्यमंत्री से टोक कर उसका नाम पूछते हैं। सवाल-जवाब के इसी दौर में भीड़ शोर मचाती है और वह नाराज होकर कहने लगते हैं- ये क्या तमाशा है? क्या हो गया?…इसके बाद वह युवती को डाँटते हुए कहते हैं कि वह नेतागिरी न करे।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने वीडियो के इस हिस्से को ट्वीट कर इस व्यवहार की आलोचना की है। उन्होंने लिखा, “यह भेंट मुलाकात है या बदतमीजी और डाँट है! एक महिला की शिकायत का निराकरण करने की बजाय उससे इस तरह अभद्रता से बात करना कहाँ तक जायज़ है? भूपेश बघेल जी जिस जनता पर आप झल्ला रहे हैं, चिल्ला रहे हैं, उसी ने आपको मुख्यमंत्री बनाया है, भूलिए मत। याद रखना! यह अहंकार जल्द टूटेगा।”

नेटिजन्स ने भी इस वीडियो पर आपत्ति जताई और सवाल उठाए। मुकेश पाठक ने लिखा, “यदि भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता ने इस तरह का अपमानजनक व्यवहार किया होता तो लोग आसमान सर पर उठा लेते।”

राजेश गौर ने लिखा, “वोट लेने के वक्त जनता भगवान और मुख्यमंत्री बनने के बाद ये भगवान।”

शिवाजी सिंह नाम के यूजर ने लिखा, “तख्तेताऊत पर बैठे मुगलिया सल्तनत के सुल्तान एक फरियादी औरत को इंसाफ देते हुए। इतनी अकड़ औरंगज़ेब में भी नही रही होगी।”

विरेंद्र सिंह राणा ने लिखा, “ये जनता से लगाव का झूठा दिखावा करते है और सबके सामने जनता को फटकारते है।”

छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी के प्रभारी और दिल्ली के विधायक संजीव झा ने भी इस व्यवहार की आलोचना की है। संजीव झा ने अपने ट्वीट में लिखा, “एक मुख्यमंत्री और जनता के जनप्रतिनिधि का एक शिकायतकर्ता के प्रति यह भाषा बहुत अशोभनीय है। सामाजिक जीवन में यह भाषा कहीं भी उचित नहीं है। याद रखिए भूपेश बघेल जी इसी जनता ने आप को वोट देकर मुख्यमंत्री बनाया और यही जनता आपको अर्श से फर्श तक लाने में तनिक भी देर नही करेगी।”

चौतरफा आलोचना होने पर सीएम भूपेश बघेल ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “वह महिला अपनी बात कर रही थी, वो दुःखी थी अपनी पीड़ा बता रही थी। मुझे उस वक्त डाँटना नहीं चाहिए था, मुझे इस बात का दुख है। BJP इस तरह की वीडियो प्रचार कर निम्न स्तर की राजनीति कर रही है।”

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन दिनों 90 विधानसभा के दौरे पर है और वे जनता से सीधे रूबरू हो रहे हैं। जनता की समस्या सुन रहे हैं और अधिकारियों को निराकरण के आदेश दे रहे हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रही योजनाओं के बारे में लोगों को बता रहे हैं और उसका लाभ जनता तक पहुँच रहा है कि नहीं इसका जायजा भी ले रहे हैं।

कोरोना के दौरान जलती चिताओं की तस्वीरें क्लिक करने वाले दानिश सिद्दीकी को फिर मिला पुलित्जर प्राइज, तालिबान की गोलीबारी में गँवाई थी जान

अफगानिस्तान में मारे गए दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी समेत चार भारतीयों को फीचर फोटोग्राफी श्रेणी में प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार 2022 से सम्मानित किया गया है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी के फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को उनके सहयोगियों अदनान आबिदी, सना इरशाद मट्टू और अमित दवे के साथ भारत में कोरोना के कारण हुई मौतों की तस्वीरें खींचने के लिए सम्मानित किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित पुरष्कारों में से एक पुलित्जर पुरस्कार 2022 के विजेताओं की घोषणा सोमवार (9 मई, 2022) को देर शाम की गई। न्यायाधीशों ने दानिश सिद्दीकी के काम को ब्रेकिंग फोटोग्राफी कैटेगरी से हटा दिया था। समिति ने लिखा कि उनका काम लोगों में गहरा सेंस पैदा करता है। हालाँकि, दानिश सिद्दीकी को यह पुरस्कार दूसरी बार मिला है। इससे पहले 2018 में रोहिंग्या पर फोटोग्राफी के लिए उन्हें पुलित्जर पुरस्कार से नवाजा गया था।

बता दें कि 38 वर्षीय दानिश सिद्दीकी की पिछले साल जुलाई में कंधार शहर के स्पिन बोल्डक जिले में अफगान सैनिकों और तालिबान के बीच हुई झड़पों को कवर करने के दौरान बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इससे पहले भी दानिश सिद्दीकी ने पुलित्जर पुरस्कार जीता है। रोहिंग्या संकट के कवरेज के लिए रॉयटर्स टीम के हिस्से के रूप में उन्हें 2018 में इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इन तस्वीरों में सिद्दीकी ने म्यामांर के रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या को दिखाया था।

गौरतलब है कि दानिश सिद्दीकी ने दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से अर्थशास्त्र में स्नातक किया था। इसके बाद उन्होंने जामिया के ही एजेके मास कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर से 2007 से डिग्री ली थी। हालाँकि, उन्होंने अपना करियर टेलीविजन न्यूज के संवाददाता के रूप में शुरू किया था, बाद में वह फोटो पत्रकारिता की ओर मुड़ गए और 2010 में उन्होंने इंटर्न के रूप में रॉयटर्स ज्वाइन किया था।

बता दें कि इस बार का पुलित्ज़र पुरष्कार जहाँ भारत में कोरोना के दौरान हुई मौतों और जलती चिताओं को दिखाने के कारण रॉयटर्स के फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी और उनकी टीम को मिला है। वहीं यदि मौतों की बात करें तो अमेरिका में कोरोना से भारतकी तुलना में कहीं ज़्यादा मौतें हुई हैं। लेकिन अमेरिका में वहाँ के पत्रकारों को दूसरी श्रेणी में पुलित्ज़र पुरष्कारों से नवाजा गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन पोस्ट ने सार्वजनिक सेवा पत्रकारिता में पुलित्जर पुरस्कार जीता है, जिसने यूएस कैपिटल में 6 जनवरी 2021 के विद्रोह को कवर किया था। वहीं मियामी हेराल्ड को सर्फसाइड कोंडो के ढहने पर ब्रेकिंग न्यूज रिपोर्टिंग के लिए पुलित्जर अवार्ड से सम्मानित किया गया, जबकि न्यूयार्क टाइम्स ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग दोनों में ही पुरस्कार जीता है।

रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयार्क टाइम्स ने सीरिया, इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी हवाई हमलों से नागरिकों की मौत की रिपोर्टिंग के लिए अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टिंग श्रेणी में पुलित्ज़र पुरष्कार हासिल किया है।

बता दें कि पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता के क्षेत्र का अमेरिका का सर्वोच्च पुरस्कार है, जिसकी शुरुआत 1917 में हुई थी। जोसेफ पुलित्‍जर ने अपनी वसीयत में इस पुरस्‍कार को शुरू करने की बात कही थी। जानकारी के लिए बता दें कि पुलित्‍जर पुरस्‍कार को 21 कैटेगरी में दिया जाता है। जिसमें पत्रकारिता, रिपोर्टिंग, फोटोग्राफी सहित कई अन्य विधाएँ भी शामिल होती हैं।

इसमें 15 पत्रकारिता श्रेणियाँ और सात कला श्रेणियाँ हैं। इसके साथ ही पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले को 15,000 अमेरिकी डालर दिए जाते हैं।‌ वहीं पुलित्जर की पब्लिक सर्विस कैटेगरी के विजेता को गोल्‍ड मेडल से नवाजा जाता है।

2015 के बाद महिला शिक्षा का सुधरा स्तर, मुस्लिम महिलाएँ अब भी बच्चा करने में आगे : NFHS की रिपोर्ट ने बताया- 32% शादीशुदा औरतों पर होता है अत्याचार

समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके विकास का आँकलन हमेशा से तरह-तरह के सर्वेक्षणों से होता आया है। सरकार अपनी ओर से तमाम योजनाएँ लागू करके स्थिति सुधारने के प्रयास करती है, मगर उनसे जमीनी बदलाव कितना आता है ये जब आँकड़े दिखते हैं तभी पता चलता है। जाहिर है ये निष्कर्ष सटीक नहीं होते। मगर इनके तुलनात्मक अध्य्यन से ये अंदाजा जरूर लग जाता है कि हमारा समाज और हमारे समाज की महिलाएँ किस गति से आगे बढ़ने या पिछड़ने की कगार पर हैं। 

हाल में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS 5) द्वारा जारी रिपोर्ट ने भी एक ऐसी तस्वीर दिखाई है। रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे महिलाओं की लिटरेसी रेट, फर्टिलिटी रेट में तो पिछले कुछ सालों में बदलाव आया है, मगर आज भी उनके खिलाफ होने वाली हिंसा थमी नहीं है। घर-परिवार में उसका शोषण जारी है और सबसे ज्यादा महिलाओं का शोषण करने वाला कोई बाहर का नहीं, बल्कि अपना पति है।

आइए इन सभी बिंदुओं पर चर्चा करें और रिपोर्ट में दिए आँकड़ों से समझें समाज में महिलाओं की हालत…

सबसे पहले बात शिक्षा पर। एक तरह से देखा जाए तो समाज हित में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने का काम हमेशा से होता आया। मगर इसे लेकर जागरूकता उतनी सक्रियता से नहीं फैलाई गई जितनी जरूरत थी। इसकी महत्वता से जन-जन को अवगत कराने के लिए साल 2015 में मोदी सरकार ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना, एक अभियान की तरह चलाई और नतीजा क्या रहा ये एनएफएचएस के आँकड़ों में नजर आता है। 

NFHS की इस हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2015-16 के बाद पुरुषों के साथ-साथ 15-49 उम्र वाली उन महिलाओं की संख्या में औचक वृद्धि हुई जिन्होंने अपनी स्कूल की शिक्षा पूरी की और उस शिक्षा क्षेत्र में अपने दर को ऊपर बढ़ाया। इन वर्षों में स्कूल न जाने वाली महिलाएँ 5 फीसद घटीं जबकि विद्यालय न जाने वाले पुरुषों की गिनती केवल 2 फीसद घट पाई। इतना ही नहीं 12 साल तक स्कूली शिक्षा लेने वाली महिलाएँ भी इस अंतराल में 4 फीसद बढ़ीं और पुरुषों में 3 फीसद सुधार आया। 

इसी तरह शहरी और ग्रामीण महिलाओं की शिक्षा को अगर देखें तो अब भी वहाँ 27 फीसद महिलाएँ ऐसी बची हैं जिन्होंने कभी स्कूल का चेहरा नहीं देखा जबकि शहर में ये संख्या 13 फीसद की है। आँकड़े बताते हैं कि गाँव की भी 20 फीसद महिलाएँ अब ऐसी हो चुकी है जो 12वीं तक शिक्षा पूरी कर रही हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के शिक्षा दर में सुधार होने का परिणाम रोजगार स्तर पर भी देखने को मिलता है। साल 2015-16 के बाद महिलाओं में रोजगार करने का आँकड़ा 24 फीसद बढ़ा जो 2019-21 की रिपोर्ट के मुताबिक भी 25 फीसद तक है।

कुल भारत की बात करें तो महिलाओं की शिक्षा का दर 71.5 फीसद है। 26.9% ऐसी महिलाएँ हैं जिन्होंने 12 साल शिक्षा को पूरे दिए। 15.2% ऐसी महिलाएँ हैं जो 10-11 साल पढ़ सकीं। 8-9 साल पढ़ने वाली महिलाएँ 17.8% हैं, 5-7 वर्ष पढ़ने वाली औरतों का प्रतिशत 13.4 है और स्कूल कभी न जाने वाली अब भी 22.6% महिलाएँ है।

फर्टिलिटी रेट (बच्चे को जन्म देने की दर)

बता दें कि जिस प्रकार देशहित के लिए महिलाओं की शिक्षा का ग्राफ लगातार ऊपर उठना महत्वपूर्ण है उसी प्रकार बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना भी समय की माँग है। सरकार कई प्रयास करके इसकी जरूरत जन-जन समझा रही है। ऐसे में महिलाओं का फर्टिलिटी रेट ये बताता है हम इस राह पर आगे बढ़ने को कितने प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, महिलाओं का फर्टिलिटी रेट समय के साथ कम हुआ है। जो दर 1992-93 में 3.7 फीसद था वो अब 2019-21 में 2.1 रह गया है। ग्रामीण महिलाएँ भले ही अब भी शहरी महिलाओं के मुकाबले ज्यादा बच्चों को जन्म देती हैं मगर पहले के मुकाबले यहाँ भी फर्टिलिटी रेट घटा है। 1992-1993 में ये 2.7 फीसद था जो अब 1.6 रह गया है।

आपको बता दें कि NFHS की ये रिपोर्ट आने के बाद मीडिया में ये चर्चा और भी गर्म है कि कैसे कुछ सालों में मुस्लिम महिलाओं का फर्टिलिटी रेट घट गया है जबकि ओरिजनल रिपोर्ट देखें तो पता चलता है कि ये तुलना वर्गों को लेकर नहीं बल्कि मुस्लिम महिलाओं से जुड़े पहले के आँकड़ों पर है। वर्तमान के नंबर तो यही बताते हैं कि अब भी मुस्लिम महिलाएँ अन्य वर्ग की महिलाओं के मुकाबले सबसे ज्यादा बच्चों को जन्म देती हैं। लेकिन हाँ! उन्हें लेकर जो दर 2015-16 में 2.62 थी वो अब 2.36 रह गई है। रिपोर्ट के अनुसार अपेक्षित दर का आँकड़ा कोई भी समुदाय की महिलाएँ नहीं छू पाई हैं। हिंदुओं और ईसाइयों में ये दर 1.9 है, मुस्लिमों में 2.4, सिखों में 1.6, बौद्धों में 1.4, जैनों में 1.6 है और अन्य में फर्टिलिटी रेट 2.1 है।

मुस्लिम महिलाएँ (64%) अब भी सबसे कम हैं जो चाहती हैं कि वो दोबारा बच्चा न पैदा करें जबकि अधिकांश सिख (72%) और हिंदू महिलाएँ (71%) अधिक बच्चों के खिलाफ हैं। रिपोर्ट ये भी दिखाती है कि शिक्षा के बढ़ते ग्राफ के कारण फर्टिलिटी रेट में पहले से कम हुआ है। स्कूल न जाने वाली महिलाओं में जहाँ बच्चे को जन्म देने की दर 2.2 पाई गई है। वहीं 12 वर्ष शिक्षा पाने वाली महिलाएँ में ये दर 1.6 की है।

महिला विरोधी हिंसा

उल्लेखनीय है कि देश में महिलाओं को सशक्त बनाने के क्रम में उन्हें शिक्षित करने के पुरजोर प्रयास हो रहे हैं। उन्हें तकनीक से जोड़ने की अपार कोशिशें की जा रही हैं। उनके कौशल को बाहर लाने के लिए सरकारी योजनाएँ चल रही हैं। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से छुटकारा दिलाने के लिए अभियान चला चला कर जागरूकता फैलाई जा रही है लेकिन इन सबके बीच समाज की कड़वी सच्चाई ये है कि घरेलू स्तर पर महिलाएँ अब भी हाशिए पर हैं। उनके खिलाफ होने वाली हिंसा जारी है। सर्वे के अनुसार 18 से 49 साल की उम्र वाली शादीशुदा महिलाओं में 32 फीसदी फिजिकली, सेक्सुअली और इमोशनली पार्टनर की हिंसा का शिकार होती हैं। इसमें सबसे ज्यादा फिजिकल वायलेंस होता है। इस हिंसा में धक्का-मुक्की, सामान फेंकना, कलाई मरोड़ना, झापड़ मारना, किसी चीज से हमला करना, मुक्के मारना, खींचतान, गला दबाना, जलाने की कोशिश करना, चाकू-बंदूक जैसे जानलेवा हथियारों से हमला करना, बिन मर्जी के सेक्स करना, सेक्स के दौरान ऐसी गतिविधियाँ करवाना जो महिला की इच्छा के विरुद्ध हो, सेक्स के दौरान उसे बाँधना, मारना आदि शामिल है।

एनएफएचएस की रिपोर्ट बताती है कि फिजिकल वायलेंस का सबसे ज्यादा शिकार ग्रामीण महिलाएँ होती हैं वो भी उस श्रेणी की महिलाएँ जो शिक्षा से अछूती रहती हैं। सर्वे दर्शाता है कि महिलाओं पर हाथ अब भी ज्यादातर मामलों में पति द्वारा ही उठाया जाता है। बस शिक्षा के हिसाब से इनके आँकड़े ऊपर नीचे होते हैं। जैसे जिन्होंने स्कूल जाकर 12 साल शिक्षा ली है उनमें से 21% पुरुष ऐसी हिंसा करते हैं जबकि स्कूल नहीं गए 43% अपनी पत्नियों पर हाथ उठाते हैं। सर्वे ये भी बताता है 70% महिलाएँ हैं जिनके पति शराब पीते हैं और उन्हें शारीरिक या यौन हिंसा का शिकार होना पड़ता है जबकि 23 % वो महिलाएँ भी हैं जिनके पति नशा नहीं करते मगर फिर भी हिंसक हैं।

गर्लफ्रेंड नाज़िला सीताशी के साथ पार्टी करता दिखा मुनव्वर फारूकी, अब मिला ‘खतरों के खिलाड़ी’ और ‘बिग बॉस OTT’ का ऑफर

विवादित स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी लॉकअप जीतने के बाद एक लड़की के साथ पार्टी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। बताया जाता है कि वो उसकी गर्लफ्रेंड नाजिला सीताशी है। वह कंटेस्टेंट्स के लिए आयोजित आफ्टर पार्टी के लिए आई थीं। नाज़िला सीताशी एक गुजराती मॉडल और प्रभावशाली व्यक्ति हैं।

मुनव्वर फारुकी का कहना है कि कानूनी तलाक चल रहा है। वो एक बेटे के पिता भी हैं। स्टैंड अप कॉमेडियन के फैंस ने नाजिला सीताशी को भाभी कहकर संबोधित करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा उन्हें ‘मुंजली’ भी कहा जाने लगा था। हालाँकि, नाजिला का नाम सामने आने के बाद लोगों ने अंजली अरोड़ा के बारे में पूछना शुरू कर दिया है। लॉक अप विनर मुनव्वर फारूकी की लेडी लव नाजिला सीताशी एक फैशन इन्फ्लुएंसर हैं।

इसके साथ ही नाजिला सिताशी एक यूट्यूबर भी हैं। यूट्यूब पर उनके 11,000 सब्सक्राइबर हैं। इसके अलावा उनका एक इंस्टाग्राम अकाउंट भी है, जिसमें नाजिला के 2 लाख 58 हजार फॉलोवर हैं। मुनव्वर फारूकी के साथ तस्वीरें वायरल होने के बाद नाजिला के फॉलोवर्स की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।

लॉकअप से मुनव्वर फारुकी की हुई चाँदी

लॉकअप शो जीतने के बाद कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी की चाँदी हो गई है। खबर है कि फारुकी को बिग बॉस ओटीटी-2 के लिए साइन किया गया है। इस शो की शुरुआत कोरोना काल में हुई थी। इसके होस्ट करण जौहर हैं। इसके अलावा फारुकी पहले से ही खतरों के खिलाड़ी 12 में एँट्री को लेकर भी चर्चा में रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि अपनी कॉमेडी के जरिए हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने के लिए कुख्यात कॉमेडियन का नाम ‘Lock Upp’ शो की ही प्रतिभागी अंजलि अरोड़ा के साथ भी जुड़ा था। जब वो लॉक अप शो जीतकर डोंगरी स्थित अपने घर पहुँचे तो उनका एक स्टार की तरह जोर शोर से स्वागत किया गया।

एलन मस्क ने ताजमहल को बताया ‘खूबसूरत अजूबा’ तो लोगों ने दिखा दिए एक से एक हिन्दू मंदिर: करा दी मोढेरा से सुचित्रम तक की सैर

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (Elon Musk) का ताजमहल को लेकर एक ट्वीट तेजी से वायरल हो रहा है। हाल में माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को खरीदने वाले टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने ताजमहल को लेकर सोमवार (9 मई, 2022) को ट्वीट करके कहा, “यह आश्चर्यजनक है, मैंने 2007 में भारत का दौरा किया और ताजमहल भी देखा था। यह वास्तव में दुनिया का एक अजूबा है।” दरअसल, एलन मस्क ने यह ट्वीट एक फोटो के रिप्लाई में किया था, जिसे आगरा का लाल किला बताया जा रहा था। इसके बाद तो सोशल मीडिया पर यूजर्स एलन मस्क को ट्वीट कर देश के मंदिरों की खूबसूरती के बारे में बताने लगे।

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने एलन मस्क को रिप्लाई करते हुए लिखा, “चालुक्य राजा भीम-I द्वारा 1026 के आसपास बनाया गया शानदार ऐतिहासिक मोढेरा सूर्य मंदिर, जो लगभग 125 वर्ष पुराने प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर से पहले का है। लेकिन इसे बनाने वाले कारीगरों के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया। भारत आओ एलन मस्क।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “लक्सर ने मुझे प्रभावित किया। एक बेहद प्राचीन और खूबसूरत जगह।”

रघु नाम के यूजर लिखते हैं, “क्या आप मुझ पर विश्वास करेंगे। एलोन मस्क सर, अगर मैं आपसे कहूँ कि इस मंदिर के अंदर 1 लाख से अधिक नक्काशियाँ हैं, तो कुछ लोग कहेंगे कि यह एलियंस द्वारा बनाया गया था! सुचिन्द्रम मंदिर, तमिलनाडु। मंदिर के शिलालेख 9वीं शताब्दी के हैं।”

जॉली नाम के यूजर लिखते हैं, “अंकल ताजमहल ओवर रेटेड हो गया है। अगली बार आपको अक्षरधाम मंदिर जाने की जरूरत है।”

गौरतलब है कि इन दिनों दुनिया के 7 अजूबों में से एक यानी ताजमहल को लेकर विवाद गहराया हुआ है। इलाहबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ बेंच में आगरा स्थित ताजमहल को लेकर एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में ताजमहल में स्थित 20 तालाबंद कमरों को खोलने के लिए ‘भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI)’ को निर्देश देने की माँग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि इन 20 तालाबंद दरवाजों के अंदर हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ और प्राचीन सनातन साहित्य पुरालेख स्थित हैं। इस याचिका को डॉक्टर रजनीश ने दायर किया था।

रजनीश अयोध्या जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मीडिया इंचार्ज हैं। अदालत में उनका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता रूद्र विक्रम सिंह कर रहे हैं। इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने के बाद वो अपनी दलीलें पेश करेंगे। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक समिति गठित किए जाने की माँग की गई है, जो ताजमहल के तालाबंद कमरों में हिन्दू इतिहास के अवशेषों का पता लगाए। भाजपा नेता ने कहा कि इन कमरों को हमेशा लॉक्ड ही रखा जाता है और किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जाती।

जिसके संगीत से ताली बजाना भूल जाते थे मगन श्रोता, थम गया 67 सालों से बज रहा संतूर: मात्र ₹500 लेकर मुंबई आए थे शिव कुमार शर्मा

संगीतकार और मशहूर संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का मुंबई में दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे और पिछले 6 महीने से किडनी संबंधी समस्याओं से पीड़ित थे और डायलिसिस पर थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पं. शिव कुमार शर्मा का निधन आज (10 मई, 2022) प्रातः 8 से 8.30 बजे के करीब हुआ था। वहीं उनका अंतिम संस्कार उनके आवास पाली हिल, बांद्रा पर होगा।

बता दें कि पंडित शिव कुमार शर्मा का सिनेमा जगत में अहम योगदान रहा। वहीं पंडित शिवकुमार शर्मा ने संतूर को एक नए म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट के तौर पर पहचान दिलाई थी। शिवकुमार शर्मा ने कई फिल्मों में पंडित हरि प्रसाद चौरसिया के साथ मिलकर संगीत भी दिया था। बॉलीवुड में ‘शिव-हरी’ नाम से मशहूर शिव कुमार शर्मा और हरि प्रसाद चौरसिया की जोड़ी ने कई सुपरहिट गानों में संगीत दिया था। इसमें से सबसे प्रसिद्ध गाना फिल्म ‘चाँदनी’ का ‘मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियाँ’ रहा, जो दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी पर फिल्माया गया था। इसके अलावा भी सिलसिला और लम्हे जैसी फिल्मों से इस जोड़ी ने तहलका मचा दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, पंडित शिव कुमार शर्मा का 15 मई को कॉन्सर्ट होने वाला था। पर अफसोस की इवेंट से कुछ दिन पहले ही उन्होंने आज इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। वहीं उनके निधन पर संगीत जगत के कई दिग्गजों के साथ प्रधानमंत्री मोदी सहित कई नेताओं ने भी उनके निधन पर दुःख व्यक्त किया।

पंडित शिवकुमार शर्मा को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “पंडित शिवकुमार शर्मा जी के निधन से हमारी सांस्कृतिक दुनिया पर गहरा असर पड़ा है। उन्होंने संतूर को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया। उनका संगीत आने वाली पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध करता रहेगा। मुझे उनके साथ अपनी बातचीत अच्छी तरह याद है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। शांति।”

बता दें कि पंडित शिव कुमार शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1938 को जम्मू में हुआ था। उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में संतूर को एक विशेष पहचान दिलाई। बाद में जहाँ उन्होंने बॉलीवुड के लिए संगीत तैयार किया, जिसकी शुरुआत शांताराम की ‘झनक झनक बाजे पायल’ के बैकग्राउंड स्कोर से हुई थी। उन्हें साल 1986 में प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 1991 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। पंडित शर्मा को साल 2001 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।

जीवनपर्यन्त संगीत के आराधक रहे शिवकुमार शर्मा ने एक बार संगीत पर बात करते हुए कहा था, “मेरे लिए, संगीत मनोरंजन के लिए नहीं है। ऐसा संगीत बजाना मेरा आजीवन सपना था जब श्रोता ताली बजाना भूल जाएँ, जो उन्हें चुप करा दे। मेरा सपना सच हो गया, एक बार। मैंने एक राग बजाया, जबकि श्रोता गहरे ध्यान में डूबे हुए थे और मैंने विचारहीनता की स्थिति का अनुभव किया। यह मौन इतना पौष्टिक, इतना तृप्त करने वाला था, अब और कुछ भी बजाने की आवश्यकता नहीं थी।”

कश्मीर के एक संगीत की तरफ झुकाव रखने वाले कश्मीरी परिवार में जन्मे और कम उम्र में अपने पिता के साथ संगीत की स्वरलहरियों में दीक्षित, पंडितजी ने जहाँ संतूर में महारत हासिल की वहीं 6 साल की उम्र तक तबला भी बजाया। DNA की एक रिपोर्ट के अनुसार, 15 साल की उम्र में, उन्होंने जम्मू रेडियो में नौकरी की शुरुआत भी कर दी।

शिव कुमार शर्मा की प्रसिद्धि का पहला बड़ा अवसर 1955 में आया, जब उन्हें मुंबई में वादन के लिए आमंत्रित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, पंडित जी याद करते हुए बताते हैं, “मैंने तबला और संतूर दोनों बजाने पर जोर दिया।” ऐसे में आयोजकों को लगा कि दोनों परफॉर्म करने में मामला बिगड़ सकता है। लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। एक 17 वर्षीय किशोर आधे घंटे तक संतूर और ढोल बजाता रहा। भीड़ पूरे उत्साह में थी। और आयोजकों की सोच के विपरीत, युवा बालक पर लोगों द्वारा ज़बरदस्त प्यार लुटाया।

कहते हैं कि इसके बाद जैसे-जैसे साल बीतते गए, पंडित शिव कुमार शर्मा ने महसूस किया कि वह संतूर के लिए हैं, और उन्होंने अपने जुनून को जीने का फैसला किया और जल्द ही मुंबई चले गए।

वह उस इंटरव्यू में बताते हैं, “मैं अपनी जेब में केवल 500 रुपए लेकर मुंबई आया था, वह मेरे जीवन का दूसरा सबसे बड़ा जुआ था (पहला तबला बजाना छोड़ दिया था)।” उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा वह संगीत की दुनियाँ में विश्वभर में भारत की पताका फहराते रहे।

मीडिया में चली मोहाली में 24 घंटे में दूसरे बम ब्लास्ट की खबर, पंजाब पुलिस ने नकारा: NIA और भारतीय सेना भी मौके पर

पंजाब के मोहाली में सोमवार को हुए पुलिस इंटेलीजेंस के हेडक्वार्टर्स पर किए गए धमाके के बाद मंगलवार को भी मीडिया ने खबर चलाई कि 24 घंटे के अंदर दूसरी बार हुए विस्फोट हुआ है। हालाँकि, अब इन खबरों को खारिज किया जा रहा है। इसके साथ ही पंजाब पुलिस द्वारा गलत न्यूज चलाने वाले मीडिया चैनलों के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही गई है।

रिपब्लिक टीवी ने दावा किया क, दूसरे धमाके बाद एनआईए और सेना की टीम मौके पर पहुँच गई है। इसमें यह भी बताया गया है कि इस खबर की पुष्टि अभी तक पंजाब के पुलिस अधिकारियों ने नहीं की है।

इसी तरह के आज तक ने बकायदा इसे ब्रेकिंग बताकर चलाया था।

फोटो साभार: आज तक

हालाँकि, मोहाली के एसएसपी विवेक सोनी ने दूसरे ब्लास्ट से इनकार किया है। इसी तरह से मानव यादव नाम के पत्रकार ने ट्वीट किया, “मोहाली में दूसरे ब्लास्ट की खबर को पंजाब पुलिस ने गलत बताया है और ऐतराज जताया है।”

गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को मोहाली के सेक्टर 77 में पंजाब पुलिस की इंटेलीजेंस विंग की हाई सिक्योरिटी वाली बिल्डिंग में आरपीजी (रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड) से हमला किया गया था। हालाँकि, अच्छी बात ये रही कि इसमें धमाका ही नहीं हुआ, जिससे किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ। ग्रेनेड इमारत की तीसरी मंजिल पर गिरा। इससे काँच के दरवाजे जरूर टूट गए थे। यह हमला पंजाब हरियाणा के करनाल में आईईडी के साथ चार संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी के तीन दिन बाद ही हुआ है। इस मामले में 6 संदिग्धों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

क्या होता है आरपीजी

आरपीजी रॉकेट की तर्ज पर काम करने वाले विस्फोटक होता है। इसे कंधे पर रखकर भी दागा जा सकता है। इसमें मोटर लगे होते हैं और जैसे ही इसे दागा जाता है तो इसके विंग खुल जाते हैं और ये हवा में अपने टार्गेट की ओर तेजी से आगे बढ़ता है। आरपीजी को एँटी टैंक हथियार भी माना जाता है।

मोहाली ब्लास्ट के बाद SFJ की हिमाचल CM को धमकी – शिमला में भी हो सकता है; ISI हैंडलर हरिंदर सिंह रिंदा का नाम आया सामने, TNT का इस्तेमाल

पंजाब के मोहाली में इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर सोमवार (9 मई 2022) को हुए हमले के बाद खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) की तरफ से अब हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को धमकी दी गई है। इसमें कहा गया है कि मोहाली में इंटेलिजेंस दफ्तर पर हुए हमले से सीखें, यह शिमला में भी हो सकता है। इसमें आगे कहा गया है कि धर्मशाला में सिख फॉर जस्टिस ने झंडे लगाए है, इस समुदाय को न भड़काए नहीं तो आपका इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। 

बता दें कि हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में विधानसभा के गेट पर बीते दिनों खालिस्तानी झंडे लगे मिले थे और दीवार पर खालिस्तान समर्थक नारे लिखे हुए थे। खालिस्तान के झंडे लगाने के मामले में जयराम ठाकुर ने कहा था कि ऐसा करने वालों को उनकी सरकार नहीं बख्शेगी। पुलिस ने कठोर यूएपीए कानून के तहत इस मामले में केस भी दर्ज किया है। धमकी में यह भी कहा गया कि आपरेशन ब्‍लू स्टार के 38वें साल में पावंटा साहिब में जून के महीने में अलग खालिस्तान की माँग पर हिमाचल में वोटिंग होगी।

उल्लेखनीय है कि अगस्त 2021 में SFJ आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर को धमकी दी थी कि वह उन्हें 15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराने देगा। ऑडियो संदेश में ये भी कहा गया था कि पंजाब के बाद वे हिमाचल में भी कब्जा करेंगे, क्योंकि हिमाचल का कुछ क्षेत्र पहले पंजाब का हिस्सा था।

वहीं मोहाली स्थित पंजाब पुलिस की खुफिया विभाग की इमारत पर हुए RPG हमले की जाँच जारी है। पंजाब पुलिस आतंकवादी हमले की एंगल से भी जाँच कर रही है। इस बीच, बताया जा रहा है कि पुलिस हमले में हरिंदर सिंह रिंदा के कनेक्शन की भी जाँच कर रही है। रिंदा पहले एक गैंगस्टर था, जो बाद में आतंकवादी बन गया। पुलिस का कहना है कि पिछले दिनों करनाल में जो चार संदिग्ध आतंकवादी गिरफ्तार हुए उनमें से एक गुरप्रीत रिंदा के संपर्क में था। 

आईएसआई का हैंडलर है रिंदा

रिंदा को भारत में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हैंडलर माना जाता है। वह पाकिस्तान से ही अपनी गतिविधियाँ चलाता है। यही नहीं, पिछले दिनों पंजाब पुलिस ने जो तरनतारन से आरडीएक्स बरामद किया उसका भी लिंक रिंदा से जुड़ा है। ऐसे में पुलिस को लगता है कि मोहाली हमले में भी रिंदा का हाथ हो सकता है। पूछताछ में गुरप्रीत ने बताया है कि उसने रिंदा के कहने पर अन्य जगहों पर विस्फोटक पहुँचाए। सूत्रों का कहना है कि मोहाली ब्लास्ट पर एनआईए की नजर है और वह घटनास्थल का दौरा करेगी। मोहाली हमला बड़ी साजिश का  हिस्सा हो सकता है।

पंजाब पुलिस के डीजीपी ने कहा कि रॉकेट लॉन्चर हमले मे TNT (ट्राइनाइट्रो टोलीन) पदार्थ का प्रयोग हुआ था। मोहाली में विभिन्न विंगों के अधिकारियों के साथ खुफिया दफ्तर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए डीजीपी ने कहा कि इस हमले को वह चैलेंज के रूप में ले रहे हैं। पुलिस को हमले से जुड़ी कई लीड मिली हैं। जिन पर पुलिस की टीम काम कर रही हैं। उम्मीद है कि जल्दी ही यह केस हल कर लिया जाएगा।

वहीं हमले के मामले में मुख्यमंत्री बगवंत मान ने भी कुछ कदम उठाए। उन्होंने मंगलवार (10 मई 2022) को राज्य के डीजीपी समेत अन्य अफसरों के साथ अपने आवास पर अहम बैठक की। इस दौरान घटना के बारे में जानकारी ली और जाँच संबंधी निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में मीडिया से बात करते हुए कहा, “जो लोग पंजाब का माहौल खराब करना चाहते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। मैंने डीजीपी और अन्य खुफिया अधिकारियों से मोहाली में कल रहात हुए विस्फोट पर रिपोर्ट तलब की है। गुनहगारों को सजा दी जाएगी। शाम तक स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। मामले में जाँच जारी है।”

बता दें कि यह धमाका सोमवार की शाम करीब 7.45 बजे मोहाली के सेक्टर 77 स्थित कार्यालय में हुआ। विस्फोट के कारण इमारत की एक मंजिल की खिड़की के शीशे टूट गए। मोहाली पुलिस ने एक बयान में कहा, ”शाम 7.45 बजे सेक्टर 77, एसएएस नगर में पंजाब पुलिस खुफिया मुख्यालय परिसर में एक मामूली विस्फोट की सूचना मिली। किसी नुकसान की सूचना नहीं है। वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर हैं और मामले की जाँच की जा रही है। फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया है।”

कुतुब मीनार के पास हिन्दू संगठनों ने किया हनुमान चालीसा का पाठ, नाम बदल कर ‘विष्णु स्तंभ’ करने की माँग: कहा – 27 मंदिर ध्वस्त कर बनाया

दिल्ली में मंगलवार (10 मई 2022) को ऐतिहासिक इमारत कुतुब मीनार (Qutub Minar) के पास कुछ हिन्दू संगठनों के सदस्यों द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इस दौरान हिन्दू संगठनों ने विरोध जताते हुए कुतुब मीनार का नाम बदलकर विष्णु स्तंभ करने की माँग की है। समाचार एजेंसी एएनआई ने इसका वीडियो भी शेयर है। यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज सुबह से ही कुतुब मीनार के पास हिन्दू संगठनों का प्रदर्शन जारी है। हिंदू संगठन ‘महाकाल मानव सेवा’ के सदस्यों ने कुतुब मीनार के पास हनुमान चालीसा का पाठ कर विरोध जताया। जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने हनुमाना चालीसा कर रहे कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया है। बताया जा रहा है कि विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की माँग है कि भारत एक सनातन भूमि है, इसलिए कुतुब मीनार के साथ ही सभी मुगलकालीन इमारतों और सड़कों का नाम भी बदला जाना चाहिए

इसके अलावा ‘यूनाइटेड हिंदू फ्रंट’ की तरफ से कुतुब मीनार का नाम विष्णु स्तंभ रखने की अपील की गई है। यूनाइटेड हिंदू फ्रंट कहना है कि कुतुब मीनार वास्तव में विष्णु स्तंभ है। इस मीनार का निर्माण 27 जैन और हिंदू मंदिरों को ध्वस्त करके किया गया था।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल सहित संगठन के अन्य नेता भी सरकार से माँग कर चुके हैं कि वह कुतुब मीनार परिसर में 27 प्राचीन मंदिरों का पुनर्निर्माण करें। इसके साथ ही वहाँ हिंदू अनुष्ठानों को फिर से शुरू करने की इजाजत दें। विहिप नेता ने यह माँग 9 अप्रैल 2022 को कुतुब मीनार परिसर का दौरा करने के बाद की थी।

उन्होंने कहा था, “हमने स्मारक के प्रमुख हिस्सों का दौरा किया, “जहाँ हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों की हालत देखने लायक भी नहीं थी। कुतुब मीनार को 27 मंदिरों को ध्वस्त करने के बाद प्राप्त सामग्री से बनाया गया था।”

विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने हिंदुओं की पीड़ा को व्यक्त करते हुए यह भी कहा था, “कुतुब मीनार वास्तव में ‘विष्णु स्तम्भ’ था। कुतुब मीनार का निर्माण 27 हिंदू-जैन मंदिरों को तोड़कर प्राप्त सामग्री से किया गया था। हिंदू समुदाय को तंग करने के लिए सुपरइम्पोज्ड स्ट्रक्चर (Superimposed Structure) बनाया गया था।”

गौरतलब है कि विहिप प्रवक्ता से पहले पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय भी कुतुब मीनार परिसर में एक जगह भगवान गणेश की उल्टी प्रतिमा और एक जगह उनकी प्रतिमा को पिंजरे में बंद कर हिंदू भावनाओं को अपमानित करने का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक को पत्र लिख कर इन प्रतिमाओं को राष्ट्रीय संग्रहालय में रखवाने की माँग भी की थी।

HC ने गिरफ़्तारी से दी राहत तो गरजे तजिंदर बग्गा – ‘मैं झुकूँगा नहीं,100 FIR दर्ज करो’, लोगों ने कहा ‘AAP का बाप’

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मंगलवार (10 मई, 2022) को दिल्ली के भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tajinder Pal Singh Bagga) को बड़ी देते हुए 5 जुलाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। बग्गा पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ टिप्पणी करने के मामले में IT एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत आज बग्गा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने मोहाली कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी होने पर इसे चुनौती देते हुए पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया था।

हाई कोर्ट ने मंगलवार को बग्गा की याचिका पर सुनवाई की और 5 जुलाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। बग्गा को कोर्ट से बड़ी राहत मिलने पर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स बेहद खुश नजर आ रहे हैं।

स्वयंसेवक अभिमन्यु त्यागी ने हाई कोर्ट के फैसले के बाद बग्गा का एक वीडियो पर ट्विटर पर शेयर किया है। वीडियो में बीजेपी नेता कहते हैं, “सौ जूते भी खाए और सौ प्याज भी। आज ये कहावत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सही साबित होती है। देश के न्यायालय ने आज अपने फैसले से बता दिया कि किसी भी व्यक्ति को अपने आपको कानून से ऊपर नहीं समझना चाहिए। वो पंजाब पुलिस जिसने अपनी वीरता से आतंकवाद को परास्त किया, उस पंजाब पुलिस को अगर किसी ने उसे डिफेम करने का काम किया है, तो उसके लिए अकेला एक व्यक्ति जिम्मेदार है। वह अरविंद केजरीवाल है। मैं आज ​अरविंद केजरीवाल को फिर चुनौती देता हूँ। अगर आपमें हिम्मत है, तो आप मेरे खिलाफ एक नहीं सौ एफआईआर दर्ज कीजिए। हम आपके सामने झुकने वाले नहीं हैं। मैं आपसे रोज सवाल करूँगा।”

उन्होंने केजरीवाल को आड़े हाथों लेते हुए आगे कहा, “आपने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को 24 घंटे के अंदर जेल में क्यों नहीं डाला था? मैं आपसे सवाल करूँगा कि आपने कहा था कि सत्ता में आने के बाद ड्रग्स माफियाओं को जेल में डालेंगे, लेकिन अभी तक क्यों नहीं डाला? मैं आपसे रोज सवाल करूँगा कि पंजाब को तोड़ने की मंशा रखने वाले खालिस्तानियों को आपने जेल में क्यों नहीं डाला? मैं आपसे ऐसे सवाल करता रहूँगा, फिर चाहे आप इसके लिए मेरे खिलाफ कितनी भी एफआईआर करवाते रहें।”

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने उनकी गिरफ्तारी के बाद लिखा था, “आप का बाप।”

गौरतलब है कि पंजाब पुलिस द्वारा भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा की गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ एक और वारंट जारी हुआ था। ये वारंट मोहाली कोर्ट द्वारा जारी किया गया था, जिसमें पंजाब पुलिस को आदेश दिए गए हैं कि वो बग्गा को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेंश करें। उनकी गिरफ्तारी के विरोध में सीएम केजरीवाल के आवास के बाहर इकट्ठा हुए भाजपा नेताओं को हिरासत में लिया गया था।