Home Blog Page 2765

गुपचुप मुलाकात, चीन का चंदा, कम्युनिस्ट पार्टी से गुप्त समझौता: कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर पहले भी चीनी हाथों में खेलने के लग चुके हैं आरोप

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने काठमांडू के एक नाइटक्लब में पार्टी की। वीडियो में उनके साथ एक महिला भी नजर आ रही हैं। दावा किया जा रहा है कि विदेशी महिला नेपाल में चीन की राजदूत होउ यांकी हैं। वैसे यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस और उसके नेता पर इस तरह किसी चीनी अधिकारी से मिलने या चीन के सुर में बात करने के आरोप लगे हैं।

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस चाटुकार, समर्थक पहले भी चीनी प्रोपेगेंडा को हवा देने की कोशिश कर चुके हैं। पिछले दिनों भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया था कि राहुल गाँधी ने चीन के उस दावे को सहमति दे दी, जिसमें उसने अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताया था। इसके अलावा राहुल गाँधी अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में चीन द्वारा गाँव बसाने के दावे वाली खबर को शेयर करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने का प्रयास किया था, लेकिन उनका खेल उलटा पड़ गया था। बीजेपी चीफ जेपी नड्डा ने बताया था कि जिन लोकेशन्स का वह जिक्र कर रहे थे उन पर चीन ने कॉन्ग्रेस के शासन काल में कब्जा कर लिया था।

इसी तरह चीनी प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाते हुए राहुल गाँधी ने जवानों के खाने पर भेदभाव को लेकर सवाल किया था, वह भी तब जब चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के मुख्य संपादक ने ट्विटर पर भारत को इसी मुद्दे के ऊपर घेरना चाहा था। इससे पहले भी चीन ने मोदी सरकार के ख़िलाफ़ टिप्पणी करने के लिए कॉन्ग्रेस के आरोपों को ही आधार बनाया था।

इसके अलावा जून 2020 में सीमा विवाद शुरू होने के बाद कॉन्ग्रेस और चीन के बीच हुए कई गुप्त समझौतों का खुलासा हुआ था। इनमें मालूम चला था कि 7 अगस्त 2008 को सोनिया गाँधी की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। उस समझौता ज्ञापन को राहुल गाँधी ने सोनिया गाँधी की उपस्थिति में साइन किया था। डोकलाम विवाद के बीच में भी राहुल गाँधी के चीनी अधिकारियों से मिलने की बात सामने आई थी।

इसके अलावा 2005-06 में राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीनी दूतावास और चीन की ओर से 3 लाख डॉलर बतौर चंदे के रूप में मिले थे। चीनी दूतावास पर उपलब्ध एक दस्तावेज़ के अनुसार, वर्ष 2006 में भारत में तत्कालीन चीनी राजदूत सुन युक्सी ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 10 लाख रुपए दान दिए थे, जो कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ है और कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा चलाया जाता है। मोदी सरकार को घेरने के लिए भी कॉन्ग्रेस चीन का सहारा लेती रही है। एक बार चीनी FDI का फर्जी डाटा शेयर करते हुए भी पार्टी पकड़ी जा चुकी है।

अहमदाबाद में भगवान परशुराम की तस्वीर फाड़ी, महाआरती के लिए बने बोर्ड-बैनर तोड़े, नाबालिग समेत चार गिरफ्तार

गुजरात के अहमदाबाद के वासना इलाके में 3 मई, 2022 की तड़के सुबह कुछ बदमाश भगवान परशुराम की महाआरती की घोषणा वाले बैनर फाड़ते कैमरे में कैद हुए हैं। यहाँ तक कि भगवान परशुराम की तस्वीर पर भी लाठियों से हमला किया गया और उसे तोड़ दिया गया। इसके पास लगे करीब चार बैनर भी फाड़ दिए गए। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए श्री समस्त गुजरात ब्रह्मसमाज के अहमदाबाद जिले के अध्यक्ष हितेश त्रिवेदी ने कहा कि इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। त्रिवेदी ने कहा कि परशुराम जयंती के अवसर पर उन्होंने वासना के जीवराज पार्क के पास अंबाजी मंदिर में एक समारोह का आयोजन किया था। दोपहर करीब ढाई बजे सभी अपना काम खत्म कर घर चले गए। वहीं करीब साढ़े तीन बजे उन्हें फोन आया कि कुछ बदमाश पोस्टर फाड़ रहे हैं और तोड़फोड़ कर रहे हैं।

तोड़ा गया बोर्ड

उपद्रवियों ने ‘भगवान श्री परशुराम चौक’ लिखे साइनबोर्ड को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था। इसके चारों ओर लगे बैनर भी फाड़ दिए गए थे।

पुलिस ने मंगलवार सुबह करीब नौ बजे चार बदमाशों को गिरफ्तार किया। आरोपियों में एक नाबालिग भी है। त्रिवेदी ने ऑपइंडिया को सूचित किया कि भगवान परशुराम जन्मोत्सव के उत्सव के बाद, बदमाशों को वहाँ लाया जाएगा और सार्वजनिक रूप से माफी मँगवाई जाएगी।

हाल ही में, रामनवमी और हनुमान जयंती पर, हिंदुओं द्वारा निकाले गए जुलूस पर, ज्यादातर जगहों पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमले किए गए थे। वहीं ‘लिबरल’ मीडिया और इस्लामिक समर्थक हिंदुओं पर दोष मढ़ते नजर आए और उन पर ही जब जुलूस ‘मुस्लिम इलाकों’ से गुजर रहे थे तब जय श्री राम के ‘भड़काऊ नारे’ लगाने का आरोप लगाते रहे।

नोट: यह रिपोर्ट मूल रूप से गुजराती में प्रकाशित हुई। आप इसे यहाँ पढ़ सकते हैं।

‘बॉलीवुड में यौन शोषण आम, जिन महिलाओं का किया समर्थन वो सब गायब हो गईं’: कंगना रनौत ने ‘लॉक अप’ में इंडस्ट्री के काले सच को किया उजागर

बॉलीवुड की बेबाक एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) इन दिनों रिएलिटी शो ‘लॉक अप’ (Lock Upp) को होस्ट करने को लेकर खासा सुर्खियों में हैं। इस शो में आए दिन कोई न कोई नया खुलासा होता रहता है। हाल ही में ‘लॉक अप’ के जजमेंट डे एपिसोड में कंगना ने भी बॉलीवुड के ‘काले सच’ पर बात करते हुए हैरान करने वाले खुलासे किए।

नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित एक्ट्रेस ने बताया कि बॉलीवुड में मीटू मूवमेंट (MeToo Movement) के बाद उन्हें इंडस्ट्री में बैन कर दिया गया था। कंगना ने कहा, “मैंने जिन महिलाओं का समर्थन किया था, बाद में वह सभी गायब हो गईं। इसके बाद मैं साल 2020 में अभिनेत्री पायल घोष के समर्थन में आई, जिन्होंने फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।” फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर अपने संघर्ष के बारे में बात करने वाली एक्ट्रेस ने शो की कंटेस्टेंट सायशा शिंदे को बताया कि इस इंडस्ट्री में यौन शोषण आम बात है। यह खुलासा उन्होंने उस वक्त किया जब शो में जजमेंट डे के दौरान सायशा शिंदे ने अपनी लाइफ से जुड़ा सीक्रेट शेयर किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘लॉक अप’ में कंटेस्टेंट ने बताया, “मेरे फेवरेट फैशन डिजाइनर से जब मैं मिली तो मैं उनसे बहुत प्रभावित हुई। उन्होंने मुझे अपने होटल के कमरे में बुलाया। मैं वहाँ गई और उन्हें गले लगाया और इसके बाद उनके साथ संबंध भी बनाए, लेकिन मुझे बाद में पता चला कि उसी फैशन डिजाइनर ने 7-8 अन्य लड़कों के साथ भी ऐसा ही किया है।” सायशा का सीक्रेट सुनने के बाद शो के सभी कंटेस्टेंट शॉक्ड रह गए।

इसके बाद ‘लॉक अप’ की होस्ट कंगना कहती हैं, “मुझे लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री और फैशन इंडस्ट्री में युवाओं का यौन शोषण करना बहुत आम बात है। हम इस इंडस्ट्री का कितना भी बचाव कर लें, लेकिन यही इसका काला सच है। माना कि ये इंडस्ट्री हमें कई अवसर देती है, लेकिन यहाँ कई लोगों के सपनों को चकनाचूर भी किया जाता है, जो उन्हें अंदर से तोड़ देता है।”

बता दें कि हाल ही में बॉलीवुड की क्वीन कंगना रनौत की अपकमिंग फिल्म ‘धाकड़’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज हुआ, जो उनके फैंस को काफी पसंद आया है। धाकड़ के ट्रेलर में कंगना जबरदस्त एक्शन करती हुई दिखाई दे रही हैं। रजनीश घई के निर्देशन में बानी इस फिल्म में कंगना स्पाई एजेंट का किरदार निभा रही हैं, जिसका नाम अग्नि है। इस फिल्म में कंगना के अलावा अर्जुन रामपाल और दिव्या दत्ता भी अहम भूमिका में हैं। कंगना की यह फिल्म 20 मई 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी।

अरुंधति रॉय की फैन, जामिया उपद्रवियों की समर्थक… जिस ‘दोस्त’ की शादी के लिए नेपाल गए राहुल गाँधी, वह भारत और मोदी घृणा में सनी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का एक वीडियो तेज़ी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वो नेपाल में चीन की राजदूत होउ यांकी के साथ पार्टी करते हुए दिख रहे हैं। होउ यांकी वही है, जिस पर हनीट्रैपिंग का सहारा लेकर अपने देश का हित साधने के आरोप लगते रहे हैं। राहुल गाँधी जिस कार्यक्रम में दिख रहे हैं, वो सुमनिमा उदास का आयोजन था। सुमनिमा उदास उनकी दोस्त हैं, जिनके निमंत्रण पर राहुल गाँधी नेपाल पहुँचे।

राहुल गाँधी सोमवार (2 मई, 2022) को नेपाल पहुँचे। शाम के 4:40 बजे ‘विस्तारा एयरलाइन्स’ की एक फ्लाइट से उन्होंने वहाँ लैंड किया। एयरपोर्ट पर उनके साथ तीन अन्य लोग भी थे। राहुल गाँधी पिछले कई दिनों से भारत में नहीं हैं। काठमांडू के नक्सल में स्थित मैरियट होटल में राहुल गाँधी और उनके दोस्त ठहरे हुए थे। सुमनिमा उदास की शादी में वो वहाँ शरीक होने गए थे। सुमनिमा के पिता भीम उदास ने इसकी पुष्टि की कि उन्होंने राहुल गाँधी को इस विवाह कार्यक्रम में आने के लिए निमंत्रण भेजा था।

भीम उदास म्यांमार में नेपाल के राजदूत रहे हैं। जहाँ तक सुमनिमा उदास का सवाल है, वो अक्सर भारत विरोधी एजेंडे के कारण सुर्ख़ियों में रहती हैं। जब नेपाल और भारत के बीच नक़्शे को लेकर तनाव चल रहा था, तब भी उन्होंने उस दौरान भड़काऊ बातें की थीं। दरअसल, नेपाल ने मई 2020 में एक नया नक्शा जारी कर के भारत के कुछ हिस्सों को अपना करार दिया था। तब सुमनिमा ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि ये काम तो दशकों पहले हो जाना चाहिए था।

सुमनिमा उदास मीडिया संस्थान CNN में बतौर ‘इंटरनेशनल कॉरेस्पोंडेंट’ काम कर चुकी हैं। उन्होंने नेपाल में एक ‘लुम्बिनी म्यूजियम’ की स्थापना की है। बता दें कि लुम्बिनी भगवान बुद्ध की जन्मस्थली भी है। सुमनिमा उदास ने कोरोना महामारी के दौरान भी वैक्सीन को लेकर भारत सरकार के खिलाफ अफवाह फैलाया था। जबकि सच्चाई ये है कि अब तक कोरोना वैक्सीन की 180 करोड़ डोज दे दी है, जबकि 86 करोड़ लोग दोनों डोज ले चुके हैं।

इतना ही नहीं, कोरोना की तीसरी प्रीकॉशनरी डोज भी पौने 3 करोड़ लोगों को दी जा चुकी है। जबकि सुमनिमा उदास ने उस आर्टिकल को आगे बढ़ाया था, जिसमें दावा किया गया था कि पीएम मोदी सही समय पर वैक्सीन की पर्याप्त मात्रा में खरीद में नाकामयाब रहे और यही कई देशों में वैक्सीन की कमी की जड़ समस्या है। जबकि सच्चाई ये है कि भारत ने खुद अपनी स्वदेशी वैक्सीन बनाई और 90 से भी अधिक देशों को वैक्सीन देकर मानवता की मिसाल कायम की।

सुमनिमा उदास को उनकी ‘पत्रकारिता’ के लिए अमेरिका में ‘जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर’ का सम्मान दिया गया था। अमेरिका के ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म और ऑक्सफ़ोर्ड से मास्टर की डिग्री लेने वाली सुमनिमा उदास को ‘सिने गोल्डन ईगल अवॉर्ड’ भी मिल चुका है। उन्होंने 2001 में CNN में काम करना शुरू किया था। सुमनिमा ने कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश के ट्वीट को रीट्वीट किया था। उन्होंने ‘द वायर’ के उस लेख को शेयर किया था, जिसमें लिखा था कि पीएम मोदी वास्तविकता से दूर हैं और उन्होंने सभी संस्थाओं को ख़त्म कर दिया है।

उन्होंने भारत विरोधी वामपंथन अरुंधति रॉय के उस लेख को भी शेयर किया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘खतरनाक’ बताते हुए कहा गया था कि भारत सरकार लोगों को महामारी से बाहर निकालने में असफल रही है। जब केंद्रीय विदेशी मंत्री एस जयशंकर ने गौतम बुद्ध को भारत के महान व्यक्तित्वों में गिना था, तब सुमनिमा उदास ने इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने जामिया के उपद्रवियों का भी समर्थन किया था। साथ ही वो भारत में महिलाओं के साथ भेदभाव का दावा करने वाले आर्टिकल को भी आगे बढ़ा चुकी हैं।

‘जर्जर दीवार या मंच को मस्जिद का दर्जा नहीं दिया जा सकता’: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि डेडिकेशन या उपयोग के किसी भी सबूत के अभाव में, एक जर्जर दीवार या मंच को नमाज़ या नमाज़ अदा करने के उद्देश्य से मजहबी स्थान (मस्जिद) का दर्जा नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने वक्फ बोर्ड राजस्थान बनाम जिंदल सॉ लिमिटेड मामले में सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

बार एंड बेंच रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की खंडपीठ ने राजस्थान राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय के सितंबर 2021 के फैसले को चुनौती देने वाली एक अपील को खारिज कर दिया, जिसके द्वारा उसने जिंदल सॉ लिमिटेड को खनन के लिए आवंटित भूखंड से एक संरचना को हटाने की अनुमति दी गई थी। जिस पर वक्फ बोर्ड, राजस्थान ने दावा किया था कि यह एक धार्मिक स्थल है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं था कि खनन साइट पर एक मस्जिद थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “किसी भी समय इस बात का कोई सबूत नहीं है कि संरचना का इस्तेमाल मस्जिद के रूप में किया जा रहा था। डेडिकेशन, उपयोग या अनुदान का कोई आरोप या सबूत नहीं है जिसके आधार पर इसे वक्फ अधिनियम 1995 के तहत वक्फ बोर्ड की संपत्ति कहा जा सकता है। किसी भी सबूत के अभाव में, एक जर्जर दीवार या एक मंच को प्रार्थना / नमाज़ अदा करने के उद्देश्य से मजहबी स्थान (मस्जिद) का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।”

मीडिया रिपोर्ट अनुसार, राजस्थान राज्य के वक्फ के सर्वेक्षण आयुक्त ने 1963 में एक सर्वेक्षण किया था और एक संरचना को ‘तिरंगा की कलंदरी मस्जिद’ के रूप में वक्फ की प्रॉपर्टी के रूप में अधिसूचित किया था।

2012 में, अंजुमन समिति ने अपीलकर्ता-बोर्ड के अध्यक्ष को इस सम्बन्ध में एक पत्र लिखते हुए बताया था कि तिरंगा पहाड़ी पर, तथाकथित कलंदरी मस्जिद पर एक दीवार और चबूतरा (मंच) है लेकिन हाल के दिनों में वहाँ कोई आता-जाता नहीं और न ही किसी को वहाँ नमाज अदा करते देखा गया है।

बोर्ड ने बाद में स्थानीय अधिकारियों और पुलिस अधीक्षक को भी सूचित किया कि अंजुमन समिति ने व्यक्तिगत लाभ के लिए काम किया है। उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और समिति से पैसा भी बरामद किया गया।

इसके बाद, जिंदल सॉ लिमिटेड ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसने यह निर्धारित करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया कि खनन के लिए आवंटित भूखंड पर मस्जिद था या नहीं।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, उच्च न्यायालय ने बाद में जिंदल सॉ लिमिटेड को दिसंबर 2010 में ढेडवास गाँव, भीलवाड़ा, राजस्थान के पास पट्टा दिया गया था। अदालत ने उसी पट्टे के अनुसार खनन की अनुमति दी, जिससे के लिए तत्काल अपील की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह दिखाने के लिए कोई राजस्व रिकॉर्ड नहीं था कि संरचना एक मस्जिद है। इसके अलावा, यह नोट किया गया कि संरचना बिना छत के जीर्ण-शीर्ण आकार में है और पेड़ पौधों से ढकी हुई है, और इस बात का कोई सबूत नहीं था कि उस स्थान का उपयोग नमाज़ अदा करने के लिए किया जा रहा था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया।

राहुल का अमेठी में पत्ता साफ कर अब स्मृति ईरानी ने किया वायनाड की ओर कूच, यूजर्स ने कहा- बच्चे को महासागर में भेजोगी क्या

उत्तर प्रदेश के अमेठी में राहुल गाँधी को हरा कर इतिहास रचने वाली भाजपा नेता स्मृति ईरानी आज 3 मई को केरल के वायनाड का दौरा करने गई हैं। वायनाड वही संसदीय क्षेत्र है जहाँ से राहुल गाँधी पिछले चुनावों में सांसद चुने गए थे।

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने 2 मई को ट्वीट करके जानकारी दी थी, “नमस्ते वायनाड! मैं जल्द ही जिले के विकास से संबंधित बैठकों और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए वहाँ रहूँगी। कल मिलते हैं।”

स्मृति ईरानी के इस ट्वीट के बाद नेटीजन्स इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने लगे। किसी ने कहा कि स्मृति ईरानी ‘इस लड़के’ को यहाँ से भी भगा कर मानेंगी तो किसी ने उनसे कहा, “मैडम ये ठीक नहीं है। आपने हमारे पप्पू महाराज को खदेड़ा अब वायनाड पर आपकी आँख है।” एक यूजर ने लिखा- बच्चे की जान लोगे क्या अब कहाँ महासागर में राहुल गाँधी को भेजना चाहती हो।

अमेठी से राहुल गाँधी को खदेड़ा

गौरतलब है कि राहुल गाँधी और स्मृति ईरानी के बीच की लड़ाई 2014 लोकसभा चुनावों से ही शुरू है। साल 2014 के चुनावों में स्मृति ईरानी ने अमेठी में राहुल गाँधी को कड़ी टक्कर दी थी। और हार का मुँह देखने के बाद भी वहाँ अपनी कैंपेनिंग करनी नहीं छोड़ी। उन्होंने जमीन पर काम किया जिसका असर पाँच साल बाद 2019 के लोकसभा चुनावों में देखने को मिला। जहाँ ईरानी ने राहुल गाँधी को उन्हीं के गढ़ में 55 हजार वोटों को फर्क से हराकर इतिहास रच दिया। 1981 के बाद से ये सीट कॉन्ग्रेस पर ही थी। सिर्फ 1998 में यहाँ संजय सिंह ने बाजी मारी थी वरना उससे पहले और उसके बाद कॉन्ग्रेस का बोल बाला था।

राहुल गाँधी की वायरल वीडियो

स्मृति ईरानी की जीत के पीछे उनके जमीनी कार्यों को वजह माना जाता है और इसीलिए जब उन्होंने वायनाड को लेकर ट्वीट किया तो कयास लगने लगे कि इस बार उनकी नजर राहुल गाँधी की अगली इस संसदीय सीट पर है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि स्मृति ईरानी का वायनाड जाने का प्लॉन उसी बीच बना जब राहुल गाँधी की सोशल मीडिया पर एक पार्टी वीडियो वायरल है। नेटीजन्स का दावा है कि राहुल जिस महिला के साथ पार्टी करते वीडियो में नजर आ रहे वह नेपाल में चीन की राजदूत हैं।

सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी, ‘फ्री कश्मीर’ का नारा: अनंतनाग में ईद की नमाज के बाद मस्जिद से निकली थी मुस्लिम भीड़

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में ईद की नमाज के बाद मस्जिद से निकली भीड़ ने भारतीय सुरक्षा बलों के जवानों पर जम कर पत्थरबाजी की है। दक्षिणी कश्मीर में हुई इस घटना के बाद अधिकारियों ने अपने बयान में कहा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें मुस्लिम भीड़ को सुरक्षा बलों के जवानों पर पत्थरबाजी कर के भागते हुए देखा जा सकता है। इसमें अधिकतर युवक ही शामिल दिख रहे हैं।

इतना ही नहीं, मस्जिद के पास जमा भीड़ ने ईद-उल-फितर की नमाज के दौरान ‘फ्री कश्मीर’ का नारा भी लगाया, यानी देश को खंडित करने की बात की। जब सुरक्षा बल उन्हें शांत कराने पहुँचे तो जवानों पर और उनकी गाड़ी पर जम कर पत्थरबाजी की गई। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कुछ ग़लतफ़हमी के कारण ये घटना हुई है और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने इसे ‘मामूली नोंकझोंक’ करार दिया है।

फ़िलहाल स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुँचे हुए हैं। बता दें कि मंगलवार (3 मई, 2022) को मुस्लिम ईद का त्यौहार मना रहे हैं। उधर मध्य प्रदेश के खरगोन में भी इस क्र मौके पर कर्फ्यू में ढील न दिए जाने का फैसला लिया गया है। कुछ दिनों पहले वहाँ भी इस्लामी भीड़ ने हिंसा की थी। जोधपुर वाली घटना में फ़िलहाल 3 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

बता दें कि कुछ इसी तरह की घटना कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान के जोधपुर में भी हुई है। ये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह जिला भी है।  घटना जालौरी गेट की है जहाँ पूरे जोधपुर की सबसे बड़ी मस्जिद है। जानकारी के मुताबिक वहाँ देर रात कुछ मुस्लिम युवक चौराहे पर अपना झंडा लगा रहे थे जब दूसरे पक्ष की ओर से विरोध किया गया तो मारपीट शुरू हो गई, पथराव होने लगे। हालातों के मद्देनजर इलाके से इंटरनेट सेवा को बंद किया गया है और करीब 10 थानों की पुलिस समेत आरएसी जवान वहाँ तैनात हैं।

नाइटक्लब, महिला और राहुल गाँधी: जिस महिला के चीनी राजदूत होने का किया जा रहा दावा, उसके ‘हनी ट्रैप’ में कितना उलझा है नेपाल

नेपाल का एक जाना माना अखबार है- द काठमांडू पोस्ट (The Kathmandu Post)। इसका दावा है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) इस समय नेपाल की राजधानी काठमांडू में हैं। कहा गया है कि वे अपनी दोस्त सुमनिमा उदास (Sumnima Udas) की शादी में शामिल होने को आए हैं। साथ ही कॉन्ग्रेस नेता का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वे नाइटक्लब में एक महिला के साथ कनफूसकी करते दिख रहे हैं। नेटिजन्स का दावा है कि यह महिला नेपाल में चीन की राजदूत होउ यांकी (Hou Yanqi) है।

जो वीडियो वायरल हो रहा उसमें राहुल गाँधी तेज संगीत के बीच पार्टी करते दिख रहे हैं। राहुल गाँधी बीच-बीच में एक महिला के कान में कुछ कहते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के बेटे अक्सर विदेश यात्रा पर निकल जाते हैं। उनकी विदेश यात्रा को लेकर तरह-तरह की बातें भी होती हैं। लेकिन इस वीडियो के सामने आने के बाद राहुल गाँधी कई तरह के सवालों के घेरे में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स सवाल कर रहे हैं कि कहीं ये राहुल की चीनी कनेक्शन तो नहीं है?

नेटिजन्स का दावा है कि राहुल गाँधी के साथ दिखने वाली महिला चीनी राजदूत होऊ यांकी जैसी दिखती है। होऊ यांकी 2018 से नेपाल में चीन की राजदूत हैं। उनके लिए दावा किया जाता है कि नेपाल की सत्ता के गलियारों से लेकर सेना के मुख्यालय तक उनकी घुसपैठ है। जुलाई 2020 में नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हनी ट्रैप में फँसाने की खबरें सामने आई थी। कहा गया था कि यांकी कहने पर ही ओली ने एक नक्शा पास करवाया था, जिसमें उत्तराखंड के तीन जगह कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को अपना हिस्सा बताया था। इसके अलावा नेपाल के कुछ इलाकों पर चीन द्वारा अतिक्रमण करने की भी खबरें आई थी। कहा गया था कि ‘सेक्स टेप‘ की वजह से ओली इस अतिक्रमण को लेकर चुप हैं।

मिड डे मील में बच्चों को देते रहिए मीट-चिकन: सुप्रीम कोर्ट का लक्षद्वीप प्रशासन को निर्देश, केंद्र सरकार को नोटिस

मुस्लिम बहुल केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के स्कूली बच्चों को मिड डे मील में मीट-चिकन मिलता रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने लक्षद्वीप प्रशासन से इस संबंध में केरल हाई कोर्ट के अं​तरिम आदेश को जारी रखने को कहा है। हाई कोर्ट ने मध्याह्न भोजन के मेन्यू में माँसाहारी उत्पादों को शामिल रखने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 मई 2022) को मेन्यू से चिकन सहित अन्य माँस उत्पादों को हटाने और डेयरी फार्म बंद करने संबंधी लक्षद्वीप प्रशासन के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए।

शीर्ष अदालत की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने ये निर्देश देते हुए याचिका पर केंद्र सरकार, लक्षद्वीप प्रशासन व अन्य को नोटिस भी जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट में अब गर्मियों की छुट्टियों के बाद इस मामले की सुनवाई होगी। इस बीच, हाई कोर्ट द्वारा 22 जून 2021 को दिया गया अंतरिम आदेश जारी रहेगा।

हाई कोर्ट ने 22 जून 2021 को लक्षद्वीप प्रशासन के डेयरी बंद करने और स्कूली बच्चों के मिड डे मील से चिकन, अंडे सहित अन्य माँस उत्पादों को हटाने के फैसले को अमल में लाने पर रोक लगा दी थी। हाई कोर्ट ने कवरत्ती के मूल निवासी अजमल अहमद की जनहित याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया था। यह याचिका सितंबर 2021 में दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रफुल्ल खोड़ा पटेल के लक्षद्वीप प्रशासक बनने के बाद से उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता पशुपालन विभाग द्वारा चलाए जा रहे डेयरी फार्म को बंद करना और प्राचीन काल से चली आ रही स्थानीय लोगों के भोजन की आदतों पर ‘हमला’ करना है।

अहमद ने पशुपालन निदेशक के 21 मई 2021 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सभी डेयरी फार्म को बंद करने के निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ता ने लक्षद्वीप में स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन के मेन्यू से चिकन और अन्य माँस उत्पादों को हटाने संबंधी प्रशासन के फैसले को भी चुनौती दी है।

स्वतंत्रता सेनानी की प्रतिमा पर लगा रहे थे इस्लामी झंडे, मना करने पर पत्थरबाजी: CM गहलोत के गृह जिले जोधपुर में अल्लाह-हू-अकबर के नारों के साथ हिंसा

राजस्थान के करौली के बाद प्रदेश सीएम अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर से दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई हैं। घटना जालौरी गेट की है जहाँ पूरे जोधपुर की सबसे बड़ी मस्जिद है। जानकारी के मुताबिक वहाँ देर रात कुछ मुस्लिम युवक चौराहे पर अपना झंडा लगा रहे थे जब दूसरे पक्ष की ओर से विरोध किया गया तो मारपीट शुरू हो गई, पथराव होने लगे।

बाद में पुलिस ने मौके पर पहुँच स्थिति संभाली और लाठीचार्ज करके दोनों पक्ष के लोगों को खदेड़ा। हालातों के मद्देनजर इलाके से इंटरनेट सेवा को बंद किया गया है और करीब 10 थानों की पुलिस समेत आरएसी जवान वहाँ तैनात हैं। घटना में 1 दर्जन से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हिंसक माहौल के बाद मुफ्ती आजम शेर मोहम्मद ने अपील की कि मुसलमान अपने घरों की नजदीक वाली मस्जिद में ही नमाज अदा करें।

बता दें कि राजस्थान के जोधपुर की इस हिंसा पर हमने पुलिस से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। मीडिया में इस हिंसा को लेकर रिपोर्ट किया जा रहा है कि देर रात चौराहे पर लगाए जा रहे झंडे, बैनर और लाउडस्पीकर पर सारा विवाद हुआ था। दूसरे पक्ष के विरोध करने पर पत्थरबाजी की गई। जबकि जोधपुर वेस्ट की भाजपा मेयर कुछ और कह रही हैं।

जोधपुर मेयर का आरोप

ऑपइंडिया ने इस संबंध में जोधपुर पश्चिम की मेयर वनीता सेठ से भी संपर्क किया। उन्होंने बताया, “जालौरी गेट पर 11:30-12:00 बजे के करीब मुसलमान ईद के हिसाब से अपने झंडे लगा रहे थे। इससे पहले परशुराम जयंती थी वहाँ उसके झंडे लगे हुए थे। पुलिस ने आकर कहा कि आज उनका त्योहार है, तो कुछ पत्रकारों ने और वहाँ के लोगों ने खुद से उन (भगवा) झंडों को हटा दिया। सिर्फ एक झंडा रहने दिया गया जो कि स्वतंत्रता सेनानी बिस्सा जी के ऊपर था। रात को मुसलमान लड़के आए तो उन्होंने बिस्सा जी की मूर्ति के ऊपर टेप चिपका दी और अपना इस्लामी झंडा लगाने लगे तब वहाँ दूसरे पक्ष ने मना किया कि बाकी जो करना है करो, लेकिन ये सब क्या कर रहे हो। इस पर उन लोगों ने पाकिस्तान के और अल्लाह-हू-अकबर नारे लगाए और सवाल पूछने पर पत्थरबाजी होने लगी। दूसरे पक्ष के लोग भी जुटे लेकिन तभी मुस्लिम बस्ती से 200-300 लोग आ गए। पुलिस ने उन्हें हटाने की बजाय लाठी चार्ज किया जिसमें कई लोग घायल हुए। इसके बाद बैरिकेडिंग की गई।” मेयर का आरोप है कि उनके ऊपर भी लाठी चलाई गई। जब उन्होंने इस बाबत सवाल पूछे तो कहा गया कि उन्हें जयपुर से ऑर्डर हैं। दूसरी ओर एसीपी ने भी उन्हें उलटा जवाब दिया कि वो यहीं नौकरी करेंगी कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मेयर के अनुसार अभी तक इस संबंध में शिकायत नहीं दी गई है क्योंकि दोनों समुदायों के त्योहार हैं।