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राहुल गाँधी नेपाल में, सबसे ‘बड़ा और बढ़िया नाइट क्लब’ में पार्टी के 2 वीडियो वायरल: ‘चीन वाली लड़की’ को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा

राहुल गाँधी का एक नहीं 2 वीडियो वायरल हो रहा है। नेपाल के काठमांडू में रहने वाले भूपेन कुंवर ने इन दोनों वीडियो को फेसबुक पर 2-3 मई 2022 की रात को डाला। एक वीडियो में राहुल गाँधी शराब की बोतलों के आगे फोन देख रहे हैं। दूसरी वीडियो में वो एक लड़की के साथ खड़े हैं और उनसे कानाफूसी करके बात भी करते हैं।

भूपेन कुंवर के अनुसार राहुल गाँधी का यह दोनों वीडियो काठमांडू के LOD मतलब Lord of the Drinks नाम के पब के भीतर का है। इसके फेसबुक पेज पर लिखा है – The biggest and the best Night club in Nepal – मतलब नेपाल का सबसे बड़ा और बढ़िया नाइट क्लब।

सोशल मीडिया पर इन दोनों वीडियो को लेकर काफी लोग कयास लगा रहे हैं। कुछ राहुल गाँधी की पुरानी तस्वीर निकाल रहे और उसमें उनके साथ बैठी लड़की की तुलना काठमांडू के Lord of the Drinks वाली लड़की के साथ कर रहे हैं।

कुछ नेटिजन्स एक कदम आगे जाकर राहुल गाँधी नेपाल में चीनी राजदूत हाउ यांकी (Rahul Gandhi partying with Hou Yanqi) के साथ कर रहे पार्टी तक की संभावना पर लिख रहे हैं।

आपको बता दें कि राहुल गाँधी पर उनकी पार्टी को बीच मझधार में छोड़ हर-हमेशा विदेश चले जाना का आरोप लगता रहा है।

ईद मनाने के लिए पैसे नहीं थे तो छिनतई करने निकल पड़े आरिफ, मोनिस और समीर: पुलिस ने दबोचा, रिकॉर्ड में आदतन अपराधी

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने चार लुटेरों को पकड़ा है। इनमें से तीन को कौशांबी से और एक को इंदिरापुरम से पकड़ा गया। मामला सोमवार (2 मई 2022) का है। कौशांबी में पकड़े गए लुटेरों की पहचान आरिफ, मोनिस और समीर के रूप में हुई है। आरिफ और मोनिस नूरानी मस्जिद वाली गली खोड़ा का रहने वाला है, जबकि समीर आदर्श नगर खोड़ा का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि इनके पास ईद मनाने के लिए पैसे नहीं थे तो ये लूटपाट करने निकल गए।

जानकारी के मुताबिक तीनों लुटेरे बाइक पर सवार थे और उन्होंने एक व्यक्ति की मोबाइल छीनने की कोशिश भी की। हालाँकि इसकी सूचना मिलते ही कौशांबी पुलिस सक्रिय हो गई और वेब सिनेमा कट के पास ये पकड़े गए। आरोपितों के पास से तीन चाकू और एक बाइक बरामद हुई है। पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्हें ईद मनाने के लिए पैसों की जरूरत थी, इसलिए लूटपाट करने निकले थे। इंदिरापुरम के पुलिस क्षेत्राधिकारी अभय कुमार मिश्र ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि तीनों शातिर लुटेरे हैं। एनसीआर में लूटपाट करते थे। आरोपितों का आपराधिक रिकॉर्ड खँगाला जा रहा है।

गाजियाबाद में मोबाइल छीनने वाला गिरोह सक्रिय

इसके अलावा इसी तरह की गिरफ्तारी गाजियाबाद पुलिस ने सोमवार को ही इंदिरापुरम के साहिबाबाद में गगन कॉलोनी में की। पुलिस ने बताया कि बेताब को गिरफ्तार किया गया है। उसका साथी आसिफ फरार है। इन्होंने इंदिरापुरम में एक मोबाइल छीनी थी और कविनगर से एक बाइक चोरी की थी। दोनों को पुलिस ने बरामद कर लिया है। इनके खिलाफ 15 मामले दर्ज हैं। आसिफ की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

एलन मस्क करेंगे ट्विटर CEO पराग अग्रवाल की छुट्टी, ट्रंप को बैन करवाने वाली विजया की भी होगी विदाई: रिपोर्ट में दावा- रिप्लेसमेंट की तलाश जारी

टेस्ला कंपनी के मालिक व दुनिया के सबसे अमीर आदमियों की सूची में शामिल एलन मस्क के हाथ में ट्विटर के जाने के बाद अब कंपनी में होने वाले बदलावों को लेकर खबरें मीडिया में हैं। बताया जा रहा है कि ट्विटर पर मस्क का आधिकारिक तौर पर मालिकाना हक होने के बाद कंपनी के सीईओ यानी कि पराग अग्रवाल की कंपनी से छुट्टी हो सकती है। उनके अलावा ट्विटर में लॉ मामलों की देखरेख करने वाली व ट्रंप के अकॉउंट बैन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली लॉ हेड विजया गड्डे भी काम से जाएँगी।

बता दें कि इससे पहले मस्क को लेकर खबरें आई थीं कि वह ट्विटर कंपनी के शीर्ष प्रबंधन से खुश नहीं है और शायद इसमें बदलाव करें। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियों को अपनी नौकरी जाने का डर सताने लगा। लेकिन उन्हें इस बात का आश्वासन दिया गया कि अभी कंपनी के कागजी कार्रवाई पूरी होने में 6 माह का समय है और कम से कम तब तक उनकी नौकरी सेव है।

अब इन्हीं खबरों के बीच रॉयटर्स ने रिपोर्ट की है कि एलन मस्क कंपनी के लिए नया सीईओ खोजने में जुट गए हैं जिसका मतलब है कि अग्रवाल का सीईओ पद से जाना तय है। इससे पहले अग्रवाल को लेकर बताया गया था कि अगर मस्क अपनी नई कंपनी से उसके पुराने सीईओ, जो कि पराग अग्रवाल हैं, को 12 महीने से पहले हटाते हैं तो उन्हें 43 करोड़ डॉलर (₹33,00,93,80,000) उन्हें देने पड़ेंगे।

वहीं लीगल हेड विजया गड्डे की बात करें तो उनके पद पर भी गाज गिर सकती है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार विजया गड्डे ने पिछले साल बतौर ट्विटर लीगल हेड 17 मिलियन डॉलर यानी कि 130 करोड़ रुपए की कमाई की थी। कथिततौर पर गड्डे को निकालने पर मस्क को उन्हें 12.5 मिलियन डॉलर (₹95,95,75,000) देने होंगे।

गौरतलब है कि ट्विटर में पराग अग्रवाल ने पिछले वर्ष ही जैक डॉर्सी को रिप्लेस किया था। वही विजया गड्डे इस कंपनी से 2011 से साथ जुड़ी हुई हैं। हाल में उन्हें लेकर खबर आई थी कि ट्विटर के बिकने के बाद उन्होंने एक टीम मीटिंग की थी जिसमें उन्होंने कंपनी के भविष्य को लेकर चिंता जताई थी और फूट-फूट कर रोई भी थीं। वह ट्विटर वही विवादित अधिकारी हैं जिनका नाम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति का ट्विटर बैन करवाने और हंटर बाइडेन की स्टोरी सेंसर करवाने वालों में लिया जाता है।

CM हेमंत पर खुद को ही खनन पट्टा आवंटित करने का आरोप, चुनाव आयोग ने नोटिस भेज कर पूछा – क्यों न हो कार्रवाई?

चुनाव आयोग ने सोमवार (2 मई 2022) को झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन (Jharkhand CM Hemant Soren) को नोटिस भेजकर उनसे जवाब माँगा है। आयोग ने उनसे यह बताने के लिए कहा है कि खुद को खनन पट्टा जारी करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए? जो आरपी अधिनियम की धारा 9ए का उल्लंघन करती है। धारा 9ए सरकारी अनुबंधों के लिए किसी सदन से अयोग्यता से संबंधित है।

चुनाव आयोग पहले से इस मामले की जाँच कर रहा है कि क्या मुख्यमंत्री ने अपने पद का इस्तेमाल लाभ के लिए किया है? चुनाव आयोग ने बीते दिनों झारखंड के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को पत्र लिख कर ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ पर जवाब माँगा था। मुख्यमंत्री सोरेन पर अपने पद का दुरूपयोग करते हुए खुद को ही खदान आवंटित करने का आरोप याचिकाकर्ता शिव शंकर वर्मा ने लगाया था।

हाईकोर्ट ने की थी टिप्पणी

शिवशंकर शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने खनन पट्टा अपने नाम करने को लेकर सोरेन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उस याचिका पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन और न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा था कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

याचिका में कहा गया था कि सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री और वन एवं पर्यावरण विभाग के विभागीय मंत्री हैं। उनके पास खनन विभाग भी है। ऐसे में उन्होंने खुद ही पर्यावरण क्लीयरेंस के आवेदन दिया और क्लीयरेंस लेकर खुद ही खनन पट्टा हासिल कर लिया। ऐसा करना पद का दुरुपयोग और जनप्रतिनिधि कानून का उल्लंघन है

क्या है मामला?

मुख्यमंत्री सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने नाम पर पत्थर खदान का पट्टा लिया। यह खदान राँची जिले के अनगड़ा मौजा, थाना नं-26, खाता नं- 187, प्लॉट नं- 482 में स्थित है। भाजपा ने आरोप लगाया था कि इस पट्टे की स्वीकृति के लिए सोरेन 2008 से ही प्रयास कर रहे थे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद पत्रांक संख्या 615/M, दिनांक 16-06-2021 के जरिए पट्टा की स्वीकृति का आशय का पत्र (LOI) विभाग द्वारा जारी कर दिया है। यह विभाग मुख्यमंत्री के पास ही है। स्टेट लेबल इंवायरमेंट इंपेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) ने 14-18 सितम्बर 2021 को अपनी 90वीं बैठक में पर्यावरण स्वीकृति की अनुशंसा भी कर दी।

नन्हे अली ने दोस्त रोहिद अली से कराया अपनी ही बीवी का बलात्कार, विरोधियों को फँसाना चाहता था: पहले से है पेशेवर अपराधी

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले से सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के सहसवान क्षेत्र में विरोधियों को फँसाने के लिए शौहर नन्हे अली (अब्बा का नाम कासिम अली) ने अपने ही दोस्त रोहिद अली (अब्बा का नाम ऐशर अली) से अपनी बीवी का बलात्कार करवाया। पुलिस ने आरोपित शौहर को गिरफ्तार कर लिया है। बदायूँ पुलिस ने ट्वीट कर मामले की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “इस सम्बन्ध में थाना सहसवान ने उचित धाराओं के तहत आरोपित शौहर को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जाँच जारी है।”

जानकारी के मुताबिक, रविवार (1 मई, 2022) की रात सहसवान कोतवाली क्षेत्र के एक गाँव में रहने वाली महिला ने पुलिस में अपने शौहर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उसने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसका शौहर उसे खेत में घुमाने की बात कहकर बाइक से जंगल में ले गया और वहाँ फोन करके अपने दोस्त रोहिद अली को बुलाया, जिसने बाद में उसके साथ दुष्कर्म किया।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि दुष्कर्म के एक घंटे बाद भी जब उसके शौहर का मन नहीं भरा, तो उसने फिर अपने दोस्त को बुलाया और उसका दोबारा बलात्कार करवाया। बताया जा रहा है कि यह सब महिला के शौहर ने अपने विरोधियों को फँसाने के लिए किया था। इसके बाद उसने फोन करके पुलिस को बुलाया और अपने विरोधी दो लोगों पर उसकी बीवी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला की शिकायत पर पुलिस पीड़िता और उसके शौहर को कोतवाली ले आई। पूछताछ में महिला ने बताया कि उसका पति गाँव के दो अन्य लोगों को फँसाने का प्रयास कर रहा था, जबकि दुष्कर्म उसके द्वारा बुलाए गए दोस्त ने ही किया था। महिला ने यह भी बताया कि वह अपने शौहर के दोस्त को पहचान सकती है। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सिद्धार्थ वर्मा ने कहा कि पीड़िता की ​शिकायत पर शौहर व उसके दोस्त के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आरोपित नन्हें को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके साथी की तलाश की जा रही है।

बता दें कि अपनी ही बीवी का रेप करवाने वाला शौहर नन्हे अली पेशेवर अपराधी है। उसके खिलाफ पुलिस में कई मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर 2016 में टाटा सफारी कार में इंजन चोरी करने के आरोप में पुलिस ने नन्हें अली के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

जब दिल्ली में हुआ था दक्षिण भारतीय सिनेमा का अपमान: मेगास्टार चिरंजीवी ने याद किए वो दिन, कहा- उन्होंने हिंदी सिनेमा को ही दिखाया भारतीय सिनेमा

मेगास्टार चिरंजीवी ने अपने जीवन के एक ऐसे पल का खुलासा किया जब उन्होंने खुद को ‘अपमानित’ महसूस किया। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें चिरंजीवी अपने उस अपमानजनक दौर को याद करते हुए 1989 की एक घटना का जिक्र करते हैं। दिल्ली में फिल्म आचार्य के पूर्व-रिलीज़ के कार्यक्रम बोलते हुए, अभिनेता चिरंजीवी ने बताया कि उन्हें 1989 दिल्ली बुलाया गया था क्योंकि उनकी फिल्म रुद्रवीणी को नरगिस दत्त पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा था।

उन्होंने कहा कि पुरस्कार समारोह से एक दिन पहले, सरकार ने एक हाई टी का आयोजन किया, जिसके दौरान वह भारतीय सिनेमा के इतिहास को प्रदर्शित करने वाली एक हाल में टहल रहे थे। उन्हें याद आया कि दीवार में पृथ्वीराज कपूर से लेकर अमिताभ बच्चन तक और उनके बारे में एक संक्षिप्त विवरण के साथ चित्रित किए गए थे।

चिरंजीवी ने खुलासा किया, “मैं दक्षिण की फिल्मों पर कुछ देखने की उम्मीद में आगे बढ़ता रहा। हालाँकि, जयललिता के साथ एमजीआर और प्रेम नजीर की एक तस्वीर ही थी। उन्होंने इसे साउथ फिल्म्स का नाम दिया। यहाँ तक कि वे राज कुमार या विष्णुवर्धन या एनटी रामाराव या नागेश्वर राव या शिवाजी गणेशन या यहाँ तक ​​कि हमारे फिल्म उद्योग के दिग्गज फिल्म निर्माताओं को नहीं पहचानते थे। उस पल मैं बहुत अपमानित महसूस कर रहा था। यह अपमान जैसा था। उन्होंने हिंदी सिनेमा को भारतीय सिनेमा के रूप में चित्रित किया था। जबकि अन्य फिल्मों को ‘क्षेत्रीय फिल्मों’ के रूप में वर्गीकृत किया गया था और उन्हें सम्मान नहीं दिया गया था।”

चिरंजीवी ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में तब बात की थी लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। हालाँकि, बाहुबली या आरआरआर के साथ, उन्हें गर्व महसूस होता है कि अब देश दक्षिण भारत के निर्देशकों, अभिनेताओं और लेखकों को पहचान रहा है। उन्होंने कहा कि फिल्मों ने क्षेत्रीय बाधाओं को तोड़ दिया है और सम्मानपूर्वक अखिल भारतीय फिल्म होने का टैग अर्जित किया है।

चिरंजीवी ने आगे कहा, “बाहुबली ने मुझे गौरवान्वित किया क्योंकि इसने क्षेत्रीय और हिंदी सिनेमा के बीच के बैरियर को तोड़ा और साबित कर दिया कि हम सभी भारतीय फिल्म उद्योग का हिस्सा हैं। इन फिल्मों ने तेलुगु दर्शकों को गौरवान्वित किया है। हमें बाहुबली और आरआरआर जैसी फिल्में देने के लिए एसएस राजामौली को सलाम। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।” चिरंजीवी ने उन्हें ‘भारतीय सिनेमा के देवता’ का टैग दिया।

चिरंजीवी ने यश की KGF 2 और अल्लू अर्जुन की पुष्पा की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन फिल्मों की सफलता से प्रभास सहित कई अभिनेता अखिल भारतीय अभिनेता बन गए हैं।

आगे बात बोलते हुए अभिनेता ने यह भी उल्लेख किया कि कैसे एसएस राजामौली भी एक कारण है कि आचार्य जैसी फिल्म संभव हो सकता है। बता दें कि चिरंजीवी का रोल सबसे पहले उनके बेटे को ऑफर हुआ था। उन्होंने इस बात का खुलासा भी किया कि आचार्य में उनके रोल करने की पहली पेशकश उनके बेटे राम चरण को की गई थी।

यति नरसिंहानंद ने डासना मंदिर पर हुए हमलों को गिनाया, कहा – पिछले सभी महंत मार डाले गए या भगा दिए गए, मुस्लिमों के प्रभाव में पुलिस निष्क्रिय

गाजियाबाद स्थित डासना मंदिर के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने 1 मई, 2022 (रविवार) को UP के अलीगढ़ में हुई धर्म संसद में पुलिस और प्रशासन पर अपनी सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि उनके साथ खड़े होने वाले हजारों लोग न होते तो अब तक उनका काफी नुकसान हो चुका होता। इस धर्म संसद के मामले में यति नरसिंहानंद ने जितेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व में वसीम रिज़वी) के 4 महीने से जेल में होने पर निराशा जताई।

यति नरसिंहानंद को उत्तराखंड में हुई धर्म संसद मामले में गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अलावा उनके खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में केस भी दर्ज हैं। ऑपइंडिया ने यति नरसिंहानंद गिरी से मिल कर यह जानने का प्रयास किया कि जिन मामलों में वो शिकायतकर्ता है, उन केसों की क्या स्थिति है। इसी के साथ डासना क्षेत्र और मंदिर के इतिहास के बारे में भी जानने का प्रयास किया।

कभी ये इलाका था हिन्दू बहुल

यति नरसिंहानंद ने बताया, “कभी ये डासना इलाका हिन्दू बहुल हुआ करता था। लेकिन अब यहाँ हिन्दू नाममात्र के लिए बचे हैं। हिन्दुओं का पलायन हुआ। इन्होंने (मुस्लिमों) ने अपनी जनसंख्या भी तेजी से बढ़ाई। यहाँ के हिन्दू व्यापारी गाजियाबाद, पिलखुआ और नॉएडा जा कर बस गए हैं। अब यहाँ 95% लोग मुस्लिम हैं। मेरे मंदिर में आने वाली भीड़ पूरे देश के लोगों की होती है।”

मुस्लिम आक्रामकारी तोड़ चुके हैं मंदिर को

मंदिर के इतिहास के बारे में यति नरसिंहानंद ने कहा, “डासना देवी मंदिर भारत के सबसे प्राचीन शक्तिपीठों में से एक है। इतिहास में इस मंदिर को मुस्लिम आक्रमणकारी तोड़ चुके हैं जिसके बाद ये फिर से बना। इसको दुबारा बने लगभग 300 साल हो चुके हैं।”

मुझ से पहले के सभी महंत या तो मार दिए गए या भगा दिए गए

महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा, “मेरी हत्या के प्रयास के साथ इस मंदिर डकैतियाँ भी डाली जा चुकी हैं। मुझ से पहले यहाँ जितने भी संत आए वो या मार डाले गए या भगा दिए गए। यहाँ पर मौनी बाबा नाम से एक बड़े प्रसिद्ध संत रहे थे जिनका नाम रामानंद गिरी था। वो जूना अखाड़े के महंत थे। उन्हें भगाने के लिए 3 बार मारपीट की गई और मंदिर में डकैती डाली गई। इस दौरान उनकी पूरी जमापूँजी को लूट लिया गया। अंतिम डकैती में उन्हें इतना मारा गया कि उनकी पसलियाँ टूट गईं और वो साल 2003 के आसपास मंदिर छोड़ कर चले गए।”

यति नरसिंहानंद के मुताबिक, “मौनी बाबा के बाद उनके शिष्य गणेश गिरी यहाँ आये पर उनके साथ भी इतनी मारपीट हुई कि वो भी मंदिर छोड़ कर चले गए। मौनी बाबा के पहले जो संन्यासी यहाँ रहते थे, उनका नाम ब्रह्मानंद था। आज तक ब्रह्मानंद का पता ही नहीं चला कि वो कहाँ गए। बस इतनी जानकारी मिली कि मंदिर में डकैती पड़ी और सामान की तोड़फोड़ हुई। तब ये भी नहीं पता चल पाया कि महंत ब्रह्मानंद का क्या हुआ? ऐसे और भी कई मामले हुए हैं।”

हमारी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं करती पुलिस

यति नरसिंहानंद गिरी ने पुलिस पर उनकी शिकायतों को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया, “यहाँ मुस्लिमों की बहुत बड़ी जनसंख्या है। इसलिए, यहाँ जिला पंचायत और नगर पंचायत जैसे पदों पर मुस्लिम जीतते हैं। पुलिस उनके राजनीतिक प्रभाव में रहती है। अगस्त 2021 में बिहार से आ कर इसी मंदिर में रुके स्वामी नरेशानंद पर हमला कर के उनके पेट को फाड़ दिया गया था। लेकिन आज तक उस केस में एक भी अपराधी को नहीं पकड़ा गया है जबकि वो CCTV कैमरे में दिख रहा है। मुस्लिमों की आबादी का इतना बड़ा भय है यहाँ प्रशासन में कि सरकार किसी की भी रही हो, इस मंदिर से जुड़े विवाद में सुनवाई हमेशा मुस्लिमों की ही हुई है। कई लोगों को तो हमने खुद पकड़ कर पुलिस को दिए हैं।”

मंदिर में डकैतियों और चरमपंथी हमलों की लम्बी श्रृंखला, लेकिन गिरफ्तारी एक भी नहीं

यति नरसिंहानंद ने आगे कहा, “2007-2008 में मैं इस मंदिर का महंत बना। 10 जुलाई 2010 में इस मंदिर में भीषण डकैती पड़ी थी। यहाँ मौजूद सभी लोगों के साथ मारपीट की गई थी। उस दिन मेरी हत्या का प्रयास किया गया लेकिन मैं रात को ही मंदिर से चला गया था। हर किसी से मेरे बारे में पूछा गया। इस केस में भी आज तक किसी को नहीं पकड़ा गया और केस भी नहीं खुला। इसके बाद 23 जुलाई’ 2010 को इस मंदिर को ध्वस्त करने के लिए मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इस केस में पुलिस रिपोर्ट के बाद भी एक भी हमलावर आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया। इस हमले के बाद 17 सितंबर, 2014 को मंदिर में भीषण डकैती डाली गई। इस डकैती में गोला बारी तक हुई थी। आज तक उस डकैती का भी कोई एक आरोपित पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाने के बाद भी नहीं पकड़ा गया।”

मेरी हत्या के फतवे देने वालों पर आज तक नहीं हुई कार्रवाई

अपने ऊपर हुए हमलों और साजिशों के बारे में यति नरसिंहानंद ने बताया, “हम पर हमला करने के लिए जैश के आतंकी आए लेकिन सिर्फ एक को पकड़ कर केस बंद कर दिया गया। पता भी नहीं चला कि उसे किसने भेजा था। मेरी हत्या के लिए हर दिन मौलाना फतवे देते हैं जो गूगल और सोशल मीडिया पर देखे जा सकते हैं। इन फतवा देने वालों में से पुलिस किसी को नहीं पकड़ती। पकड़ना तो दूर, उनकी चर्चा भी नहीं होती है। 2 जून 2021 को मंदिर में हिन्दू से मुस्लिम बने जीजा – साले सर्जिकल ब्लेड ले कर मेरी हत्या करने आए थे। उनका चालान बहुत मामूली धाराओं में हुआ और अब वो जमानत पर छूट चुके हैं। कल वो फिर मेरे खिलाफ कोई प्लान बना रहे होंगे। उसके बाद बहुत बड़ा गिरोह पकड़ा गया धर्मांतरण वालों का, जिनके पास साइनाइड तक था। लेकिन, पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया और साइनाइड की कहीं चर्चा भी नहीं की। इस हमले की चर्चा खुद योगी आदित्यनाथ ने की थी पर कार्रवाई तो अधिकारियों को ही करनी होती है।”

सपा विधायक असलम चौधरी का बेटा पकड़ा गया था लड़कियाँ छेड़ते, पर छोड़ दिया गया

यति नरसिंहानंद ने आगे बताया, “पिछली बार जो यहाँ से समाजवादी पार्टी का विधायक असलम चौधरी था, उसका बेटा साल 2019-2020 में मंदिर के पास एक श्रद्धालु लड़की से बदतमीजी कर रहा था। हमने उसको पकड़ लिया और ऐसा करने से रोका। इस पर उसने खुद को विधायक असलम का बेटा बताया। इस पर हमारे मंदिर में मौजूद लड़कों ने उसकी अच्छे से पिटाई की। बाद में हमने उस लड़के को पुलिस के हवाले किया। लेकिन इस मामले में भी पुलिस ने कोई भी कार्रवाई करना तो दूर, रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की।”

हमलावरों की जमानत के लिए काम करता है एक बड़ा गिरोह

महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद के मुताबिक, “हमारे यहाँ सर्जिकल ब्लेड ले कर घुसे लोगों की जमानत करवाई गई। आतंकियों का केस जमीयत उलेमा ए हिन्द लड़ती है। आप समझ सकते हैं कि इनके पीछे कौन है। इन्हें बचाने वाले बड़े-बड़े लोग हैं। आज नहीं तो कल ये मुझे मार ही देंगे। उनके प्रयास लगातार जारी हैं।”

मंदिर से नफरत की वजह इस जगह का सनातन केंद्र होना है

यति नरसिंहानंद ने कहा, “पहले भी ये मंदिर सनातन का बहुत बड़ा केंद्र रहा है। अब हमलावरों को फिर से लगने लगा है कि कहीं ये दुबारा उसी रूप में न आ जाए। इसीलिए यहाँ से उन्हें इतनी चिढ़ है। साथ ही मंदिर की जमीन आदि पर भी उनकी नजर है। मंदिर की बाउंड्री भी कई बार गिराई गई है। हम मूर्तियों को कड़ी सुरक्षा और निगरानी में रखते हैं इसलिए अभी तक वहाँ कोई नहीं पहुँच पाया है। हालाँकि, उनकी (विपक्षियों) की सबसे बड़ी समस्या धार्मिक है।”

मुझे मृत्यु का भय नहीं

यति नरसिंहानंद ने कहा, “मुझे और मेरे मंदिर को मिली सुरक्षा का मतलब ये नहीं है कि मुझे मृत्यु का भय है। मेरी मृत्यु मेरी देवी माँ ने स्वयं लिखी होगी। फिर भी हम एहतियात रखते हैं। इसी सुरक्षा को भेद कर नरेशानंद जी पर हमला हुआ है। इसी सुरक्षा को भेद कर ही सर्जिकल ब्लेड ले कर मुझे 2 लोग मारने आए थे। इसलिए मेरे खुद के साथी मेरी सुरक्षा में रहते हैं। डासना के लगभग सभी मुस्लिम मेरे खिलाफ हैं।”

मुर्तजा अब्बासी को भेजा गया था योगी आदित्यनाथ के राजनैतिक कैरियर को खत्म करने के लिए

गोरखनाथ मंदिर पर हमले वाली घटना पर यति नरसिंहानंद ने कहा, “मुर्तजा अब्बासी केमिकल इंजीनियर और IIT था। फिर भी उसने गोरखनाथ मंदिर पर हमला किया। उसे योगी आदित्यनाथ के राजनैतिक कैरियर को बर्बाद करने के लिए वहाँ भेजा गया था। उसने जानबूझ कर पुलिस पर हमला किया। यदि पुलिस पलट कर मुर्तजा को गोली मार देती तो दुनिया भर में खबर चल रही होती कि पिता वकील, बाबा जज और IIT के एक होनहार इंजीनियर को योगी की पुलिस ने गोरक्ष पीठ में मार डाला। जब वो जिन्दा बच गया तो उसको पागल घोषित किया जाने लगा। हिन्दुओं के मंदिरों पर हमला करने वालों को या नाबालिग घोषित किया जाता है या पागल। असल में ये बहुत बड़ी साजिश है। ये पागल हैं तो मंदिरों पर हमले क्यों करते हैं। इसी प्रकार से मेरे मंदिर में नाबालिग सोची समझी साजिश से भेजे जाते हैं।”

सिद्धू पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी में कॉन्ग्रेस आलाकमान, सोनिया गाँधी तक पहुँची शिकायत: PK से दिखाई थी नजदीकी, अभी भी बगावती मूड में

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से नजदीकी बढ़ाकर पंजाब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष नवजाेत सिंह सिद्धू बुरे फँस गए हैं। पंजाब कॉन्ग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा सिद्धू के खिलाफ कॉन्ग्रेस अनुशासन कमेटी को शिकायत भेजने की खबर है। वहीं, सिद्धू प्रशांत किशाेर को लेकर एक के बाद एक ट्वीट कर रहे हैं।

सोमवार (2 मई 2022) को उन्होंने प्रशांत किशोर द्वारा बिहार में अपनी राजन‍ीतिक पार्टी के गठन का संकेत देने के बाद बधाई दी। सिद्धू ने ट्वीट किया, “पहला कदम आधी लड़ाई होता है मेरे दोस्‍त, अच्‍छी शुरूआत हमेशा अच्‍छा अंत लेकर आती है। संविधान की भावना का सम्‍मान करने के आपके प्रयास हमेशा से सर्वश्रेष्‍ठ रहे हैं। लोगाें की शक्ति निश्चित उनके पास लौटनी चाहिए।”

इसको लेकर पंजाब कॉन्ग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी ने सोनिया गाँधी और पार्टी की अनुशासनात्‍मक कमेटी को सिद्धू के खिलाफ शिकायत भेजकर कॉन्ग्रेस को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है। चौधरी ने कमेटी से अनुरोध किया है कि वह सिद्धू के खिलाफ कार्रवाई करें।

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले प्रशांत किशोर ने कॉन्ग्रेस को झटका दिया था, जिससे पार्टी उनसे खासा नाराज थी। लेकिन पंजाब में कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने उनसे नजदीकियाँ बढ़ानी शुरू कर दी। यही नहीं ठीक उसी दिन नवजोत सिंह सिद्धू ने उनके साथ अपनी फोटो भी शेयर की थी।

तस्वीर के साथ सिद्धू ने लिखा था, “पुराना सोना और पुराने दोस्त हमेशा बेहतर होते हैं।” सिद्धू के इस पोस्ट के बाद से ही इस बात के भी संकेत मिले थे कि उनकी बदली रणनीति के पीछे पीके हो सकते हैं। 2017 में सिद्धू को कॉन्ग्रेस में लाने में पीके ने अहम भूमिका अदा की थी।

बता दें कि हरीश चौधरी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को पत्र में लिखा , “पंजाब प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा ने नवजोत सिंह की पार्टी विरोधी गतिविधियों के बारे में नोट लिखा है। नवंबर से लेकर अब तक राज्य में पार्टी का इंचार्ज होने के नाते मैंने भी पाया है कि सिद्धू लगातार कॉन्ग्रेस के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। इसके अलावा नवजोत सिंह पर पार्टी के खिलाफ गलत माहौल तैयार करने की बात भी कही गई है।”

इमरान खान पर दर्ज हुआ ईशनिंदा का मुकदमा, हो सकते हैं गिरफ्तार: नए वाले PM को मस्जिद में चोर और भिखारी बताने का मामला

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान के खिलाफ ईशनिंदा की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। वहीं, इमरान खान की पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमे को गैर-कानूनी बताया है, लेकिन रिपोर्ट है कि इमरान खान के खिलाफ मौजूदा सरकार कड़ी कार्रवाई कर सकती है।

क्या है मामला

दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सऊदी अरब दौरे के दौरान मदीना मस्जिद में ‘चोर-चोर’ और ‘भिखारी-भिखारी’ के नारे लगाए गए, जिसको लेकर सऊदी अरब की तरफ से काफी सख्त प्रतिक्रिया दी गई है और पाक मस्जिद का इस्तेमाल राजनीति के लिए करने के आरोप में कई पाकिस्तानियों को सऊदी अरब से वापस पाकिस्तान भेज दिया गया है।

वहीं, इस्लामी मौलानाओं ने भी मदीना मस्जिद में नारेबाजी को नापाक बताया है। जिसको लेकर पाकिस्तान में इमरान खान समेत 150 से ज्यादा लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएस-एन का कहना है कि इमरान खान के इशारे पर ही पाक मस्जिद में इतनी घटिया हरकत की गई है, जिससे सऊदी अरब की प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ा है। इमरान खान के अलावा, फवाद चौधरी, नेशनल असेंबली के पूर्व डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी समेत 150 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

FIR में क्या हैं आरोप?

इमरान खान के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, उसमें उनपर गुंडागर्दी करने और पैगंबर का अपमान करने का आरोप लगाया गया है। ये आरोप फैसलाबाद के रहने वाले नईम भट्टी ने दर्ज करवाई है, जिसमें कहा गया है कि, इमरान खान ने शहबाज शरीफ के खिलाफ नारेबाजी कराने के लिए 100 से ज्यादा लोगों को सऊदी अरब स्थिति पवित्र मदीना मस्जिद में भेजा था, जिन्होंने मस्जिद के अंदर नापाक नारेबाजी की, जिससे मस्जिद को अपवित्र करने की कोशिश की गई और पैगंबर का अपमान किया गया है। जिसके बाद पाकिस्तान पुलिस ने इमरान खान के खिलाफ धारा 295A, 295-A, 296 और 109 के तहत मुकदमा दर्ज किया है, जो ईशनिंदा का मुकदमा है।

इमरान की पार्टी गई हाईकोर्ट

वहीं, पीटीआई नेता और पूर्व सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने सोमवार (मई) को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) में एक रिट याचिका दायर कर ईशनिंदा कानूनों के तहत पार्टी नेतृत्व के खिलाफ दर्ज मामलों को “अवैध” करार देने की याचिका लगाई है। पीटीआई नेताओं ने कहा कि यह घटना एक सहज प्रतिक्रिया थी और जनता के गुस्से को दर्शाती है, जबकि, सरकार का दावा है कि यह पीटीआई नेतृत्व द्वारा नियोजित और सुनियोजित थी। वहीं, उच्च न्यायालय के सहायक रजिस्ट्रार असद खान ने पुष्टि की कि याचिका मिल गई है। फवाद की ओर से पीटीआई की कानूनी टीम एडवोकेट फैसल फरीद और एडवोकेट अली बुखारी ने याचिका दायर की है।

सबक सिखाने के लिए FIR

फवाद चौधरी ने अपनी याचिका में शहबाज शरीफ सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और याचिका में फवाद चौधरी ने कहा कि नवनियुक्त गृह मंत्री पीटीआई नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की ”खुली धमकी” भी दी गई है। उन्होंने कहा कि “विश्वसनीय स्रोतों” के माध्यम से उन्हें पता चला था कि, मौजूदा सरकार ने उन्हें और पीटीआई के अन्य नेताओं को “सबक सिखाने का फैसला किया है जो वो जिंदगी भर ना भूले।”

ईशनिंदा है पाकिस्तानियों का हथियार

पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून राजनेताओं के हाथ का एक सबसे धारदार हथियार माना जाता है और जब इमरान खान खुद प्रधानमंत्री थे, तो उन्होंने इस हथियार से कई विपक्षी नेताओं को हलाल कर दिया। जबकि, पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान सरकार को ईशनिंदा कानून खत्म करने पर विचार करने को कहा था, लेकिन इमरान खान ने ईशनिंदा कानून को खत्म करने के बजाए इसे और धारदार बना दिया। लेकिन, अब इसी कानून के जरिए इमरान खान के पर भी कतरने की कोशिश की जा रही है।

फिर टली रवि और नवनीत राणा की जमानत याचिका पर सुनवाई, तबीयत खराब होने के बावजूद सांसद को नहीं ले जाया गया अस्पताल

महाराष्ट्र के अमरावती से सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा की जमानत पर सुनवाई फिर से टल गई है। बीते एक सप्ताह से जेल में बंद राणा दंपत्ति की जमानत याचिका पर मुंबई की विशेष अदालत आज शाम 5 बजे फैसला सुनाने वाली थी, लेकिन अन्य मामलों की सुनवाई और समय के अभाव के चलते आज इसे टाल दिया गया। अब इस मामले में दो दिन बाद यानी 4 मई को अदालत अपना फैसला सुनाएगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राणा दंपत्ति की जमानत मामले में बचाव पक्ष और सरकारी वकील की तरफ से बहस का सिलसिला पूरा हो चुका है। अदालत के फैसले पर फिलहाल सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि क्या राणा दंपत्ति को जमानत मिलेगी या उन्हें कुछ और दिन सलाखों के पीछे गुजारने होंगे।

खबर है कि नवनीत राणा के वकील ने भायखला जेल के सुपरिटेंडेंट को एक पत्र लिखकर बताया है, “नवनीत राणा को स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या है और जेल में लगातार फर्श पर बैठने और लेटने की वजह से उन्हें और भी ज्यादा दिक्कत हो रही है। इसके मद्देनजर राणा को 27 अप्रैल के दिन मुंबई के जेजे अस्पताल भी ले जाया गया था, जहाँ डॉक्टरों ने उनका सिटी स्कैन करना था। ताकि यह पता चल सके कि स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या कितनी गंभीर है। इन सबके बावजूद अभी तक अथॉरिटी ने कोई एक्शन नहीं लिया है।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि लाउडस्पीकर और हनुमान चालीसा पर जारी सियासत के बीच अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था, जिसके बाद 23 अप्रैल, 2022 को मुंबई की खार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उन पर मुंबई पुलिस ने राजद्रोह (आईपीसी की धारा 124 A) और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा उन पर आईपीसी की धारा 353 (सरकार के काम में बाधा) के तहत केस दर्ज किया गया था। इसी एफआईआर को कोर्ट ने खारिज करने से इनकार कर दिया है।