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मैरिटल रेप पर नहीं आ सका फैसला, दो फाड़ हुए HC के जज: ‘वेश्या’ वाली दलील पर भी हुई थी सुनवाई, गेंद अब SC के पाले

मैरिटल रेप को अपराधिक बनाने के लिए आज (11 मई 2022) दिल्ली हाईकोर्ट से फैसला आने वाला था, लेकिन न्यायधीशों के अलग-अलग मत होने की वजह से ऐसा नहीं संभव हो पाया। जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस हरिशंकर ने इस मुद्दे पर अलग-अलग राय दीं। अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश राजीव शकधर ने कहा– “ये IPC की धारा 375 और आर्टिकल 14 का उल्लंघन है। इसलिए पत्नी से जबरन संबंध बनाने पर पति को सजा दी जानी चाहिए।” वहीं जस्टिस सी हरिशंकर ने इस मुद्दे पर कहा वो राजीव शकधर से सहमत नहीं है और नहीं मानते हैं कि ये अपवाद असंवैधानिक है।

बता दें कि दोनों जजों की राय अलग-अलग होने के कारण इस विवाद पर कोई फैसला नहीं आ सका। अब आगे याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में अपील डाल सकते हैं।

मैरिटल रेप को लेकर माँग

मैरिटल रेप को आपराधिक घोषित किए जाने के लिए 2015 से आवाज उठती रहीं। माँग की गई कि मैरिटल रेप को आपराधिक घोषित करने के लिए धारा 375 के उस अपवाद को खत्म किया जाए, जो कहता है कि अगर पत्नी 15 साल से ऊपर है तो मैरिटल रेप अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा।

दिल्ली कोर्ट ने ऐसी याचिकाओं पर गौर करते हुए इसी वर्ष की शुरुआत में आरआईटी फांउडेशन और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन्स एसोसिएशन की याचिकाओं पर संज्ञान लिया था। कोर्ट ने कहा था कि आखिर विवाहित महिलाओं को अपने पति को न कहने के अधिकार से कैसे वंचित रखा जा सकता है जबकि अन्य सभी गैर-सहमति वाले मामले में रेप का केस दर्ज हो सकता है।

सुनवाई के दौरान भी नहीं मिला था जजों का मत

केस की सुनवाई के शुरुआत में ही जस्टिस राजीव शकधर ने इस दलील को माना था कि एक वेश्या को भी हक होता है कि वो अपने ग्राहक को मना करे तो आखिर महिला जो कि पत्नी है उसे पति को मना करने के अधिकार से कैसे दूर किया जा सकता है। जबकि जस्टिस सी हरि शंकर ने एक वेश्या और ग्राहक के रिश्ते की तुलना पति-पत्नी के रिश्ते से करने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि ग्राहक की जो उम्मीद सेक्स वर्कर से होती है उसे वैवाहिक रिश्ते के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो ये आप बहुत गलत है। इस मामले पर सुनवाई पूरी होने के बाद 21 फरवरी को फैसला पीठ ने सुरक्षित रखा था।

महिला को पटक कर चाकू से ताबड़तोड़ वार, स्कूल यूनिफॉर्म में था हमलावर: लंदन में चिकन शॉप के बाहर घटना, काफी देर पड़ी रही बेसुध

लंदन से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ बीच सड़क पर स्कूल की ड्रेस पहने एक लड़के ने दिन-दहाड़े महिला को चाकू घोंपकर घायल कर दिया। हमले के बाद महिला काफी देर तक बेसुध सड़क पर ही पड़ी रही। घटना के समय आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई, लेकिन किसी की भी हिम्मत नहीं हुई कि वह इस कातिल को रोक सकें। लड़के ने जिस वक्त इस घटना को अंजाम दिया, उस समय स्कूल के बच्चे भी वहाँ पर मौजूद थे। सड़क के बीचोंबीच यह सब देखकर वह काफी डर गए थे। ‘द सन’ की रिपोर्ट के अनुसार, लड़का चिकन की दुकान के बाहर दिन-दहाड़े इस घटना को अंजाम देने के बाद भाग गया था।

प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि लंदन के साउथ नॉरवुड में हमले से कुछ क्षण पहले ही पीड़िता और एक लड़की के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे महिला को स्कूल की वर्दी में हमलावर ने डराया और उसे सड़क पर गिरा कर ताबड़तोड़ चाकू से वार किए।

घटनास्थल पर मौजूद एक माँ ने कहा, “एक महिला 7 साल की एक लड़की के साथ बहस कर रही थी।” वीडियो में स्कूली बच्चे चिकन की दुकान के बाहर खड़े होकर हमलावर और पीड़ित महिला को देखते हुए नजर आ रहे हैं। इसके अलावा लड़कियों को अपने सिर पर ड्रिंक डालते हुए देखा गया, जबकि एक शख्स स्थिति को नियं​त्रित करने की कोशिश करता हुआ दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि महिला अपना सामान उठा रही थी, तभी स्कूली बच्चों के सामने उस पर हमला कर दिया गया। हमलावार ने महिला को पहले सड़क पर धक्का देकर गिरा दिया फिर इसके बाद वह बेरहमी से महिला पर चाकू से ताबड़तोड़ वार करता रहा।

एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने बताया, “एक 11 साल के लड़के ने इस महिला को चाकू मार दिया। मैंने उस भयावह वीडियो को देखा है कि कैसे वह लड़का उस महिला पर ता​बड़तोड़ चाकू से वार कर रहा है।”

लंदन एम्बुलेंस सर्विस के प्रवक्ता ने कहा, “हमें साउथ नॉरवुड हाई स्ट्रीट, SE25 में एक घटना की रिपोर्ट के लिए मंगलवार (10 मई, 2022) को शाम 4.39 बजे बुलाया गया था। हमने घटनास्थल पर एक एम्बुलेंस भेजी और महिला को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया।” बता दें कि वीडियो में चाकू मारने वाले को बाद में अन्य लड़कें खींचते हुए दिखाई दे रहे हैं।

‘बहन’ से रेप का आरोपित जावेद ‘हीरो’, कोरोना पीड़ित के लिए बलिदान देने वाले RSS कार्यकर्ता को ‘फैक्ट चेक’ के नाम पर किया गया था बदनाम

आज एक खबर सामने आई जिसमें जावेद खान नाम के एक ऐसे व्यक्ति पर भोपाल में 10 मई, 2022 को ‘बहन’ से बलात्कार के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। यह वही जावेद खान है जिसे मीडिया गिरोह ने कभी अपने ऑटो को एक अस्थायी एम्बुलेंस में बदलने के लिए एक कोविड योद्धा का दर्जा देते हुए स्टार बना दिया था। तब जावेद खान ने दावा किया था कि उसने कम से कम 15 लोगों को नजदीकी अस्पताल ले जाकर बचा लिया। जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों, लिबरलों और मशहूर वामपंथी हस्तियों सहित अनगिनत मीडिया संगठनों ने न सिर्फ स्वागत किया बल्कि खूब कवरेज भी दिया।

News9 ने एक ट्वीट में कहा था, “भोपाल के ऑटो चालक जावेद खान ने अपने ऑटो को एम्बुलेंस में बदल दिया है और मरीजों को मुफ्त अस्पताल ले जाते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने एम्बुलेंस बनाने के लिए अपनी पत्नी के गहने बेचे ताकि वह जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकें क्योंकि मध्य प्रदेश में एम्बुलेंस की भारी कमी है।”

टीम एसओएस इंडिया ने लिखा था, ‘भोपाल निवासी ऑटो चालक जावेद खान ने अपनी पत्नी के जेवर बेचकर अपने ऑटो को एंबुलेंस बना दिया है। जावेद जी मरीजों को मुफ्त में अस्पताल ले जाते हैं। हम उसे सलाम करते हैं।”

वहीं एशियानेट ने जावेद खान पर एक वीडियो स्टोरी प्रकाशित की थी। उन्होंने एक वीडियो दिखाया जिसमें जावेद बता रहा था कि कैसे उसने अपने ऑटो को एम्बुलेंस में बदल दिया।

ग्रीन बेल्ट एंड रोड इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष एरिक सोलहेम ने कहा, “भारत में बहुत सारे कोविड नायक हैं! भोपाल में इस ऑटो-रिक्शा चालक जावेद खान ने अपने वाहन को ऑक्सीजन से भरपूर एम्बुलेंस में बदल दिया है और वह लोगों की मुफ्त में सेवा करता है। खान रोजाना करीब 600 रुपए ऑक्सीजन भरने में खर्च करते हैं।”

अमेरिका में संदिग्ध भारत विरोधी संगठन इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने भी जावेद पर शेयर किए गए एक ट्वीट में लिखा, “भारत के मध्य प्रदेश राज्य के एक शहर भोपाल के मोहम्मद जावेद खान ने भारी ऑक्सीजन संकट के बीच COVID रोगियों की मुफ्त में मदद करने के लिए अपने ऑटो-रिक्शा को एक छोटी सी एम्बुलेंस में बदल दिया।”

एएफपी न्यूज एजेंसी ने भी जावेद की कहानी को कवर करते हुए लिखा, “जब भोपाल में ऑटो-रिक्शा चालक मोहम्मद जावेद खान ने लोगों को कोरोना से पीड़ित अपने माता-पिता को अस्पताल ले जाते देखा क्योंकि वे एम्बुलेंस का खर्च उठाने में सक्षम नहीं थे, तो उन्होंने अपना तिपहिया वाहन एक ऑक्सीजन सिलेंडर, एक ऑक्सीमीटर और अन्य चिकित्सा उपकरण फिट करके एक एम्बुलेंस में बदल दिया।”

विवादास्पद मकतूब मीडिया ने लिखा, “भोपाल के एक ऑटोरिक्शा चालक जावेद खान के बारे में खबर के अगले ही दिन, जिसने COVID-19 रोगियों के लिए अपने ऑटोरिक्शा को एम्बुलेंस में बदलने के लिए अपनी पत्नी के गहने बेच दिए और इंटरनेट पर छा गए, आज अस्पताल ले जाते हुए उन्हें मध्य प्रदेश पुलिस ने रास्ते में हिरासत में ले लिया।”

बीबीसी संवाददाता मेघा मोहन ने भी जावेद खान की तारीफ की थी।

हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी उन पर एक वीडियो स्टोरी करते हुए लिखा, “मध्य प्रदेश के भोपाल में एक शख्स ने अपने तिपहिया वाहन को एंबुलेंस जैसी गाड़ी में बदल दिया है। ऑटो चालक जावेद खान कोविड मरीजों को नि:शुल्क एंबुलेंस सेवा मुहैया करा रहे हैं। खान का ऑटो ऑक्सीजन सिलेंडर, पीपीई किट, सैनिटाइजर और ऑक्सीमीटर से लैस है।”

विवादास्पद मीडिया हाउस मिल्ली गजट के संस्थापक जफरुल-इस्लाम खान ने भी लिखा था, “बड़े दिल वाला आदमी: ऑटो रिक्शा से एम्बुलेंस बनाया, जावेद खान भोपाल में मुफ्त सेवा प्रदान करते हैं। खान ने परिवार के सदस्यों के आग्रह पर की पहल, आजकल शहर के चारों ओर कोविड मरीजों को मुफ्त में सेवा दे रहे हैं। ”

अलजज़ीरा ने लिखा, “जैसा कि भारत कोरोनोवायरस महामारी की दूसरी लहर के तहत संघर्ष कर रहा है, मोहम्मद जावेद खान ने अपने ऑटो-रिक्शा को एक छोटी एम्बुलेंस में बदल दिया है, जो आशा की किरण है।”

जावेद खान एक नायक थे, लेकिन आरएसएस के नारायण दाभाडकर मीडिया गिरोह के लिए ‘संदिग्ध’

यहाँ किसी किसी भी मीडिया हाउस, मशहूर हस्ती, पत्रकार आदि ने जावेद खान की मंशा पर सवाल नहीं उठाया। हालाँकि, उसी दौरान एक और रिपोर्ट सामने आई थी कि आरएसएस के एक स्वयंसेवक ने एक और कोविड मरीज को बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।

पूरा मामला यूँ है कि एक आरएसएस स्वयंसेवक नारायण दाभाडकर, जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज की सेवा में बिताया, महामारी की दूसरी लहर के बीच कोविड से संक्रमित होते हैं। जैसे ही उनका SPO2 का स्तर गिरा, उनकी बेटी ने उन्हें शहर के किसी हॉस्पिटल में बेड दिलाने की कोशिश की। उनकी बेटी किसी तरह इंदिरा गाँधी अस्पताल में उनके लिए बेड दिलाने में कामयाब रही। हालाँकि, जब वे अस्पताल पहुँचे, दाभाडकर काका जैसा कि उन्हें प्यार से जाना जाता था, ने देखा कि 40 साल की एक महिला अपने बच्चों के साथ रो रही थी और अस्पताल के अधिकारियों से अपने पति को भर्ती करने के लिए बेड के लिए मिन्नतें कर रही थी, जो गंभीर स्थिति में थे।

दाभाडकर काका ने बिना कुछ सोचे-समझे शांति से डॉक्टरों को सूचित किया कि उनका बेड महिला के पति को दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं अब 85 वर्ष का हूँ, मैंने अपना जीवन जी लिया है, इसके बजाय आप इस आदमी को बेड दे दें, इनके बच्चों को इसकी आवश्यकता है।”

उसने अपने परिवार के सदस्यों से उन्हें घर वापस ले जाने के लिए कहा, जहाँ उन्होंने अगले तीन दिनों तक बहादुरी से वायरस से लड़ाई लड़ी, जिसके बाद उन्होंने अपना शरीर छोड़ दिया।

आरएसएस कार्यकर्ता नारायण दाभाडकर के बलिदान पर मीडिया संगठनों ने जताया संदेह

जबकि मेनस्ट्रीम मीडिया और लेफ्ट-लिबरल उनके बलिदान से स्पष्ट रूप से हैरान थे और उन्होंने इसमें में फैक्ट चेक करने का फैसला किया। जहाँ लोकसत्ता ने पुणे के एक तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता शिवराम थावरे की नागपुर के इंदिरा गाँधी अस्पताल के अधीक्षक अजय प्रसाद के साथ बातचीत के आधार पर इसका फैक्ट चेक किया। इंदिरा गाँधी अस्पताल ने उन्हें सूचित किया था कि उनके अस्पताल में भर्ती नारायण धाबड़कर के नाम का कोई मरीज नहीं है। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं था कि ‘सामाजिक कार्यकर्ता’ ने नागपुर नगर निगम द्वारा संचालित इंदिरा गाँधी अस्पताल से संपर्क किया, जहाँ नारायण दाभाडकर भर्ती थे। बता दें कि इंदिरा गाँधी सरकारी अस्पताल, जो महाराष्ट्र सरकार द्वारा संचालित है, जहाँ उन्हें स्पष्ट रूप से एक मरीज के रूप में भर्ती नहीं किया गया था।

गौरतलब है कि दाभाडकर काका की बेटी ने एक वीडियो जारी कर इस बारे में बताया। वीडियो में, उन्होंने कहा कि उनका इंदिरा गाँधी म्युनिसिपल अस्पताल में इलाज चल रहा था, और उनकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती हालत की जानकारी दी थी। इलाज के दौरान, उन्होंने अपने प्रियजनों के लिए बेड तलाशते लोगों की अफरा-तफरी सुनी। तभी धाबडकर काका ने यह कहते हुए अपना बिस्तर खाली करने का फैसला किया कि वह पहले से ही एक पूर्ण जीवन जी चुके हैं, और किसी भी अस्पताल में उनके लिए रिज़र्व बेड का इस्तेमाल किसी और के इलाज के लिए किया जा सकता है।

इंडियन एक्सप्रेस ने भी फैक्ट चेक किया था, जहाँ उन्होंने इस स्टोरी को सच पाया। तब हॉस्पिटल के इंचार्ज डॉक्टर ने कहा कि उन्हें कारण तो नहीं पता, लेकिन उन्हें बेहतर अस्पताल में ले जाने के लिए ज़रूर कहा गया था। उनके दामाद अमोल पाचपोर ने डिस्चार्ज लेटर पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया था। लेकिन ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की भी इस खबर में हॉस्पिटल के बयान के बावजूद भ्रम फैलाया गया और दाभाडकर के एक परिजन से बयान के लिए दबाव बनाया गया, जबकि वो खुद कोरोना संक्रमित थे।

जब दीपिका पादुकोण के साथ लिप-लॉक में इतने मगन हो गए थे रणवीर सिंह, बताया – ईंट से खिड़की टूट गई, पर नहीं टूटा किस

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण पति-पत्नी हो चुके हैं, लेकिन उन दोनों की लव लाइफ की शुरुआत कैसे हुए इसका खुलासा एक्टर ने किया है। एक्टर ने बताया है कि उनकी डेटिंग की शुरुआत ‘गोलियों की रासलीला राम लीला’ फिल्म से हुई है। रणवीर सिंह ने फिल्म के एक सीन का जिक्र करते हुए कहा कि वो उस दौरान दीपिका के साथ कुछ इस तरह से लिप लॉक हुए कि ईंट फेंकने के बाद भी उन दोनों का ध्यान भंग नहीं हुआ।

फिल्म कंपेनियन को दिए इंटरव्यू में रणवीर सिंह ने बताया कि वो वक्त जब आप उन विजुअल्स से दूर नहीं होना चाहते हैं तो आपको ‘कट’ शब्द काफी परेशान करता है। उनका कहना है कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप उस विशेष क्षण में पूरी तरह से खो जाते हैं। ‘गोलियों की रासलीला’ फिल्म के एक सीन का जिक्र करते हुए एक्टर ने बताया कि फिल्म में एक क्षण ऐसा था जब वो और दापिका, यानी कि ‘राम और लीला’ बिस्तर पर एक-दूसरे को किस कर रहे होते हैं। इसी दौरान एक ईंट उड़ती आकर खिड़की के काँच से टकराती है, जिससे काँच चकनाचूर हो जाता है, लेकिन लिप लॉक में तल्लीन दोनों एक्टर का ध्यान जरा सा भी भंग नहीं होता।

क्या था वो सीन

गौरतलब है कि ‘गोलियों की रासलीला – राम लीला’ में ‘राम’ और ‘लीला’ के परिवार में दुश्मनी होती है। लेकिन ये दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं। इसीलिए ये दोनों शादी कर लेते हैं। इसके बाद दोनों वहाँ से भाग जाते हैं, ताकि एक सुरक्षित भविष्य की तलाश कर सकें। इसके बाद फिल्म में होटल का एक विजुअल्स आता है, जिसमें रणवीर सिंह (राम) और दीपिका पादुकोण (लीला) बिस्तर पर एक दूसरे को किस करते हैं। इसी दौरान उनके कमरे में एक ईंट उड़ती हुई आती है, जो खिड़की के शीशे को चकनाचूर कर देती है। रणवीर के अनुसार, उनमें से एक टेक के दौरान, ईंट पहले ही शीशे को तोड़ चुकी थी और माना जाता है कि इससे उनका चुंबन टूट गया था। लेकिन इसके बावजूद दोनों ने किस करना जारी रखा। एक्टर के मुताबिक, उसी दौरान फिल्म डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को भी दोनों एक्टर्स की नजदीकियों का अहसास हुआ था।

उल्लेखनीय है कि दोनों एक्टर्स ने साल 2018 में शादी कर ली थी, लेकिन उससे पहले कभी भी दोनों ने अपने रिश्ते को लेकर पब्लिक में बात नहीं की थी। रणवीर सिंह के मुताबिक, गोलियों की रासलीला राम लीला के दौरान फिल्म के सेट से ही दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया था। यह फिल्म साल 2013 में आई थी, जो कि हिट हुई थी। इसके अलावा रणबीर औऱ दीपिका पादुकोण साथ में ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘पद्मावत’ भी कर चुके हैं।

फिलहाल रणवीर सिंह के काम की बात करें तो उनकी आने वाली फिल्म ‘जयेश भाई जोरदार’ जिसमें उनके अपोजिट शालिनी पांडे हैं। ये शालिनी पांडे की बॉलीवुड में डेब्यू फिल्म है। इसके 13 मई 2022 को रिलीज होने की उम्मीद है। वहीं दीपिका पादुकोण की अगली फिल्म सिद्धार्थ आनंद की फिल्म पठान है, जिसमें वो शाहरुख खान के अपोजिट नजर आएँगीं। इसके अलावा ऋितिक रौशन के साथ फाइटर, प्रभास के साथ ‘द इंटर्न’ भी पाइपलाइन में है।

जब खुद को ‘तेलुगू फिल्मों के प्रिंस’ बताते हुए बोले थे महेश बाबू – ‘बॉलीवुड में काम कर के भिखारी क्यों बनूँ?’, ₹80 करोड़ करते हैं चार्ज

साउथ इंडस्ट्री के सुपरस्टार महेश बाबू इन दिनों खासा सुर्खियों में हैं। ‘प्रिंस’ महेश बाबू के हाल में दिए गए ‘हिंदी फिल्में करके अपना समय बर्बाद नहीं कर सकता’ बयान के बाद से उनका 5 साल पुराना इंटरव्यू तेजी से वायरल हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि 4 साल की उम्र से तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे महेश बाबू आज एक फिल्म के लिए 80 करोड़ रुपए चार्ज करते हैं। यही कारण है कि उन्हें तेलुगू फिल्मों का ‘प्रिंस’ कहा जाता है।

5 साल पहले Cine Buster बेवसाइट को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मुझे कितना भी लुभावना ऑफर मिले, मैं बॉलीवुड में काम करने नहीं जाऊँगा।” दरअसल, महेश बाबू से पूछा गया था कि रजीनकांत, कमल हासन और धनुष से लेकर साउथ के कई स्टार्स बॉलीवुड में काम कर चुके हैं। ऐसे में आप बॉलीवुड में जाने से क्यों हिचकिचा रहे हैं? इस सवाल के जवाब में महेश बाबू ने कहा था, “मेरी कोई इच्छा या इंटेंशन नहीं है कि मैं बॉलीवुड में काम करूँ। तेलुगू फिल्मों में मेरे पास बहुत काम है। जिंदगी भर तक का काम है यहाँ। चाहे कितना भी लुभावना ऑफर क्यों न मिले, मैं कभी बॉलीवुड फिल्म में काम नहीं करूँगा।”

जब महेश बाबू से यह सवाल भी किया गया था कि आपने खुद बड़े बॉलीवुड डायरेक्टर्स के साथ काम करने की इच्छा जताई थी और आपने ही कहा था कुछ एक्साइटिंग ऑफर मिलेगा तो आप बॉलीवुड में जरूर काम करेंगे। महेश बाबू ने एक वक्त यह कहा था, “हाँ मैं मानता हूँ कि मैंने कहा था कि मैं बॉलीवुड फिल्म में काम करने के लिए तैयार हूँ, लेकिन यह उस प्रोजेक्ट और डायरेक्टर पर निर्भर करता है। जब कोई मेरे पास एक्साइटिंग आइडिया के साथ आएगा तो मैं जरूर ऑफर स्वीकार करूँगा।”

बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री नम्रता शिरोडकर के पति महेश बाबू ने आगे कहा था, “आप सभी को मैं यह भी क्लियर कर देना चाहता हूँ कि उस इंटरव्यू में मैंने वह बात सिर्फ उन खबरों पर विराम लगाने के लिए कही थी, ताकि कयासों का दौर खत्म हो जाए। आज मैं जो बोल रहा हूँ, उस पर अडिग हूँ। मैं बॉलीवुड में चूहे की दौड़ में कभी शामिल नहीं होना चाहूँगा। मैं तेलुगू फिल्मों का प्रिंस हूँ। मैं भला बॉलीवुड फिल्मों में भिखारी क्यों बनूँ?”

गौरतलब है कि तेलुगू सुपरस्टार महेश बाबू ने हाल ही में अभिनेता और डायरेक्टर अदिवि शेष (Adivi Sesh) की फिल्म ‘मेजर’ (Major) के ट्रेलर लॉन्च के दौरान बॉलीवुड में अपने डेब्यू को लेकर रिएक्शन दिया था। महेश बाबू ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि बॉलीवुड उन्हें अफॉर्ड नहीं कर सकता है, इसलिए वह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में फिल्में करने में अपना समय बर्बाद नहीं करेंगे।

15-19 की उम्र में प्रेगनेंट होने में मुस्लिम लड़कियों ने सबको पिछाड़ा, पीरियड के दौरान नहाने में खुद हुईं पीछे: सर्वे रिपोर्ट

भारत में कम उम्र की युवतियों का बच्चे पैदा करना भले ही कोई अचंभे वाली बात न हो, लेकिन हकीकत में महिला स्वास्थ्य की दृष्टि में ये चिंता का विषय है। कम उम्र की लड़की जब गर्भधारण करती हैं तो केवल उनके शरीर पर असर नहीं पड़ता बल्कि मानसिक जद्दोजहद से भी उन्हें गुजरना पड़ता है। पहले के मुकाबले आज के समय में ये स्थिति बदली है। शिक्षा के सुधरते स्तर के साथ महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुई हैं। लेकिन कई जगह हालात अब भी वैसे ही हैं।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5) की एक रिपोर्ट बताती है कि 15-19 साल की उम्र में गर्भधारण करके पहले बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं की दर में 2015-16 के मुकाबले 2019-2021 तक में 1 फीसद कमी आई। यानी 2015-16 में जो दर 8% थी अब 7% है।  जाहिर है कि देश की बढ़ती जनसंख्या की चिंता के बीच इन आँकड़ों में ये 1% का जो बदलाव दिख रहा है वो शिक्षा के कारण ही आया होगा। जहाँ महिलाएँ ज्यादा शिक्षित होने की दिशा में आगे बढ़ी होंगी वहाँ ये आँकड़े कम हो गए होंगे और जहाँ ऐसा नहीं हुआ होगा वहाँ हालात पहले जैसे ही होंगे।

शिक्षा में कमी के कारण कम उम्र में होते हैं बच्चे पैदा

रिपोर्ट को देखें तो पता चलता है कि आज भी ग्रामीण महिलाएँ युवावस्था में बच्चे पैदा करने में शहरी औरतों से आगे हैं। इसका एक सबसे बड़ा कारण शिक्षा में कमी ही है। NFHS की रिपोर्ट के अनुसार 15-19 साल की लड़कियाँ जो कभी स्कूल नहीं गईं उनकी 18 फीसद ने इस उम्र में गर्भधारण किया, बच्चे को जन्म दिया जबकि इस सूची में पढ़ी-लिखी लड़कियाँ (12 साल तक शिक्षा पाने वाली लड़कियाँ) केवल 4 फीसद थीं जो कम उम्र में पहली बार गर्भवती हुईं और बच्चे को जन्म दिया।

शिक्षा के अलावा परिवार की संपन्नता भी कम उम्र में लड़कियों के प्रेगनेंट होने की संभावना घटती है। इसका खुलासा भी इसी रिपोर्ट से होता है। आँकड़ों के मुताबिक, जिन परिवारों की माली हालत ठीक थी उस परिवार में केवल 2 फीसद युवतियों ने अपनी युवावस्था में बच्चा पैदा किया जबकि कम पैसे वाले घरों में ये दर 10 फीसद तक पहुँची मिली।

अन्य धर्म की महिलाओं के मुकाबले मस्लिम महिलाएँ हुईं ज्यादा प्रेगनेंट

इस विषय को यदि और वर्गीकृत करके देखें तो पाएँगे कि अनुसूचित जनजाति की महिलाएँ अन्य पिछड़ी जातियों की सूची की महिलाओं से ज्यादा (9% तक) प्रेगनेंट हुई। वहीं धर्म के आधार पर देंखें तो इस उम्र में प्रेगनेंट होने के मामले में मुस्लिम महिलाओं ने बाकी सारी धर्म की महिलाओं को पीछे छोड़ दिया। 

नीचे दिए आँकड़ों में देख सकते हैं कि 15-19 साल की उम्र में गर्भधारण की दर मुस्लिम औरतों में 8.4 फीसद देखने को मिली। इसके बाद अगला नंबर ईसाइयों में 6.8%, हिंदुओं में 6.5%, बौद्धों में 3.7%, सिखों में 2.8 देखने को मिला।

किस राज्य में कम उम्र में ज्यादा प्रेगनेंट हुई महिलाएँ

राज्यवर ढंग से टीनेजर प्रेगनेंसी को देखें तो आँकड़ों से पता चलेगा कि युवावस्था में प्रेगनेंट होने वाली महिलाएँ त्रिपुरा में 22 % के साथ सबसे ज्यादा हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में ये आँकड़ा 16% का है, आंध्र प्रदेश में 13%, असम में 12 %, बिहार में 11% और झारखंड में 10% का है।

कम उम्र में प्रेगनेंट होने के आँकड़े सबसे कम केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ में (0.8%) देखने को मिलते हैं। इससे थोड़ा ऊपर जम्मू-कश्मीर (1.0%), लक्षद्वीप(1.1%) है। प्रदेश की बात करें तो उत्तराखंड अकेला प्रदेश है जहाँ 15-19 साल की लड़कियों के प्रेगनेंट होने की दर 3% है।

मुस्लिम महिलाओं का फर्टिलिटी रेट, कम उम्र में प्रेगनेंट होने की दर, दूसरे बच्चे की इच्छा ज्यादा

बता दें कि इससे पहले हमने इसी सर्वे रिपोर्ट के हवाले से महिलाओं के घटे फर्टिलिटी रेट के बारे में आपको जानकारी दी थी। जिसमें आँकड़ों से निष्कर्ष निकला था कि बच्चे पैदा करने में आज भी (समुदाय की महिलाओं में पहले के मुकाबले फर्टिलिटी रेट घटने के बावजूद) मुस्लिम महिलाएँ अन्य धर्म की महिलाओं से आगे हैं। अब ये रिपोर्ट भी यही जानकारी देती है कि कम उम्र में प्रेगनेंट होने वाली लड़कियाँ मुस्लिम समुदाय में ज्यादा हैं। इसी तरह सर्वे में ये भी बताया गया है कि कितनी महिलाएँ अधिक बच्चे नहीं चाहती। जिसमें सबसे कम प्रतिशत (64%) मुस्लिम महिलाओं का आया। जबकि 72% सिख महिलाओं और 71% हिंदू महिलाओं ने कहा कि वो अब अतिरिक्त बच्चे नहीं चाहतीं।

मासिक धर्म के दौरान स्नान

इन सबसे अलावा महिलाओं की हाइजिन पर भी सर्वे में सवाल किए गए। पूछा गया कि मासिक धर्म के दौरान वो नहाने पर कितना ध्यान देती हैं। रिपोर्ट के अनुसार 96 फीसदी शहरी महिलाएँ और 91 फीसदी ग्रामीण महिलाएँ मासिक धर्म के दौरान नहाती हैं और उसी बाथरूम में नहाती हैं जिसमें घर के अन्य लोग नहाते हैं। आँकड़ों से पता चलता है कि पढ़ी-लिखी औरतें इस दौरान अपने स्वच्छता का ख्याल ज्यादा रखती हैं। स्कूल न जाने वाली जहाँ 94% नहाती हैं वहीं स्कूल जाने वाली लड़कियों का आँकड़ा 97% हैं।

धार्मिक आधार पर देखें मासिक धर्म के दौरान नहाने वाली हिंदू महिलाएँ 99% हैं। इसके बाद जैन (98%) हैं और अंत में मुस्लिम महिलाएँ हैं जिनका फीसद 88% हैं। आगे रिपोर्ट बताती हैं कि संपन्न परिवार के घर की 97% महिलाएँ इस दौरान स्नान करती हैं वहीं कम संपन्न परिवार की औरतों का फीसद 85% है। राज्यों के दृष्टि से ज्यादातर प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश की 90% महिलाएँ इस दौरान स्नान करती हैं। जबकि लद्दाख में ये आँकड़ा 37% है, जम्मू-कश्मीर में 43% है।

NFHS-5

गौरतलब है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे का काम भारत में दो बार में हुआ। पहला चरण जून 2019 से 2020 में जिसने 17 राज्य और 5 केंद्रशासित राज्यों को कवर किया, फिर अगला चरण जनवरी 2020 से अप्रैल 2021 तक चला जिसमें 11 प्रदेश और 3 केंद्रशासित प्रदेश कवर किए गए। ये सर्वे 6.3 लाख परिवारों द्वारा दिए गए फीडबैक पर आधारित है। 7.2 लाख इसमें महिलाएँ शामिल हुईं और 1.01 आदमी। इससे पहले ये रिपोर्ट 2016 में जारी की गई थी। 2019-2021 की रिपोर्ट कुछ दिन पहले केंद्रीय मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया द्वारा जारी की गई।

लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने काशी विश्वनाथ और हिन्दू संतों पर की अभद्र टिप्पणी: FIR दर्ज, विश्वविद्यालय ने माँगा स्पष्टीकरण

उत्तर प्रदेश की लखनऊ यूनिवर्सिटी (Lucknow University) में हिंदी विभाग के प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। आरोप है कि मंगलवार (10 मई, 2022) को एक बहस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर और हिंदू संतों के खिलाफ अपमानजनक बयान दिया था। जिसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों ने प्रोफेसर रविकांत चंदन के खिलाफ मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन किया।

प्रोफेसर के खिलाफ हसनगंज थाने में धार्मिक भावनाएँ भड़काने और सोशल मीडिया के जरिए दुष्प्रचार कर विश्विद्यालय की छवि खराब करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी प्रोफेसर से स्पष्टीकरण माँगा है और छात्रों की शिकायतों का लिखित जवाब देने को कहा है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र अमन दुबे ने प्रोफेसर के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। अमन दुबे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि हिंदी विभाग के प्रोफेसर रविकांत चंदन ने एक वीडियो में अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने रविकांत ने हिंदू छात्रों की भावनाओं को आहत किया और उन्होंने विश्विवद्यालय के सद्भाव को बिगाड़ने का भी प्रयास किया। अमन दुबे ने आरोप लगाया कि जब वीडियो लीक होने के बाद छात्रों ने उनका विरोध किया गया, तो प्रोफेसर ने गुंडों को बुलाया, जिन्होंने मारपीट करने का प्रयास किया। इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से भी गलत बातें फैलाई जा रही हैं, जिससे विश्वविद्यालय और छात्रों की छवि खराब हो रही है। 

इसलिए उन्होंने पुलिस से इस संबंध में कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। अब इस मामले में हसनगंज पुलिस ने धारा 153-ए, 504 और 505(2) और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम की धारा 166 के तहत लखनऊ विश्विद्यालय रविकांत चंदन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक प्रोफेसर रविकांत ने भी एबीवीपी के कुछ छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए शिकायत दर्ज करवाई है। इसमें उन्होंने जाति सूचक टिप्पणी करने, अपशब्दों का प्रयोग और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।

बोले विवेक अग्निहोत्री – ‘यासीन मलिक का गुनाह कबूलना कॉन्ग्रेस-अर्बन नक्सलियों के लिए मातम का दिन, अब भी नेल फाइल्स बनाएँगी स्टार की पत्नी?’

यासीन मलिक ने NIA कोर्ट के समक्ष आतंकवाद के अपने गुनाह को कबूल किया है, जिसके बाद ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने वहाँ हुए पंडितों के नरसंहार को नकारने वालों पर निशाना साधा है। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तिरुवनंतपुरम से कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर और पूर्व अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना पर भी निशाना साधा। बता दें कि कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में भी आतंकी यासीन मलिक का हाथ था।

विवेक अग्निहोत्री ने एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें आतंक यासीन मलिक तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिल रहा है और पूर्व पीएम मुस्कुरा रहे हैं। ये तब की बात है, जब इन्हें ‘अलगाववादी’ कहा जाता था और इन्हें सत्ताधीश अपने अतिथि बनाते थे। इसी तस्वीर में एक फोटो है तब की, जब ‘इंडिया टुडे’ ने यासीन मलिक को ‘यूथ आइकॉन’ का अवॉर्ड दिया था। तीसरी फोटो है भारत विरोधी एक्टिविस्ट अरुंधति रय के साथ, जिसमें बताया गया है कि कैसे वो ‘आज़ादी गिरोह’ का दोस्त था।

चौथी तस्वीर फारूक अब्दुल्ला की है, जो यासीन मलिक की पीठ ठोकते हुए दिख रहे हैं। विवेक अग्निहोत्री ने इस ट्वीट के जरिए बताने की कोशिश की है कि आज आतंकवाद के गुनाह कबूल कर रहा व्यक्ति पहले कैसे इन लोगों का ‘प्यारा’ था। विवेक अग्निहोत्री ने इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर और AAP के मुखिया अरविंद केजरीवाल से पूछा कि क्या वो अब भी हँसना चाहते हैं? बता दें कि दिल्ली विधानसभा में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर ठहाके लगे थे।

फिल्म निर्देशक ने इस दौरान अप्रत्यक्ष रूप से अभिनेता अक्षय कुमार की पत्नी और लेखिका ट्विंकल खन्ना पर भी निशाना साधा, जिन्होंने एक लेख लिख कर ‘द कश्मीर फाइल्स’ का मजाक बनाया था। उन्होंने पूछा, “प्रिय स्टार की पत्नी, क्या आप अब भी ‘नेल फाइल्स’ बनाना चाहती हैं?” उन्होंने इस नरसंहार को झूठा ठहराने वालों से पूछा कि क्या वो अब भी इसे ‘अर्ध सत्य’ या फिर इस्लामोफोबिया का नाम देना पसंद करेंगे?

ट्विंकल खन्ना पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए विवेक अग्निहोत्री ने पूछा, “Unfunnybones के लिए अब ‘जेल फाइल्स’ बनाने का समय आ गया है। हम देखेंगे।” बता दें कि ट्विंकल खन्ना की ट्विटर आईडी ‘MrsFunnyBones’ है। निर्देशक ने कहा कि कश्मीरी के पीड़ितों के लिए आज जश्न का दिन है, जबकि अर्बन नक्सलियों, नरसंहार को झूठा ठहराने वालों, कॉन्ग्रेस और ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ पर प्रतिबंध का जश्न मनाने वालों के लिए आज मातम का दिवस है।

छोटे भाई से बहस हुई, बड़े भाई के सीने में चाकू घोंप हत्या: मुस्लिम समुदाय से हैं आरोपित, राजस्थान की घटना पर हिन्दू संगठनों में आक्रोश

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में लगातार सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएँ सामने आ रही हैं। ताजा मामला भीलवाड़ा में मंगलवार (10 मई, 2022) की देर रात एक हिंदू युवक की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। जिसके बाद इलाके में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। हालात को देखते हुए तुरंत हरकत में आए पुलिस प्रशासन ने घटना स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया है।

इस बीच इस वारदात के विरोध में विश्व हिंदू परिषद, बीजेपी और हिंदू जागरण मंच ने बुधवार (11 मई, 2022) को भीलवाड़ा बंद का अह्वान किया है। किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं को अगले 24 घंटे के लिए बंद कर दिया है।

क्या है पूरा मामला

रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार की रात को शास्त्री नगर इलाके में स्थित ब्रम्हाणी स्वीट्स के पास मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ आदर्श के छोटे भाई की बहस हुई थी। इसके बाद करीब रात 11 बजे आदर्श तापड़िया उधर से अपनी स्कूटी से गुजर रहा था तो बाइक सवार दो लोगों ने उसे रोका और उसके सीने में चाकू घुसा दिया। उसे महात्मा गाँधी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। जाँच से पता चला है कि मरने से पहले हमलावरों ने सरिए से मारकर आदर्श के पैर को भी तोड़ दिया था।

घटना के बाद नाराज परिजनों ने शव को लेने से इनकार कर दिया। परिजनों ने सरकार से तुरंत सभी आरोपितों को गिरफ्तार करने और आदर्श के परिवार को 50,00,000 रुपए का मुआवजा देने की माँग की है।

भीलवाड़ा में लगातार हो रही सांप्रदायिक हिंसा

इस मामले पर विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री गणेश प्रजापति समेत बीजेपी के नेताओं ने पुलिस को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि समुदाय विशेष के आरोपितों ने ये हत्या की है। इसमें 8-10 हमलावर शामिल थे।

इस मुद्दे पर राजस्थान सरकार को घेरते हुए बीजेपी नेता नीरज जैन ने ट्वीट किया, “#गहलोतराज_मुग़लराज शांतिदूत पत्थर मारते-मारते अब चाकू मारने पर आ गए हैं..आज आधा दर्जन ज़िलों में सांप्रदायिक तनाव फैला हुआ है! लेकिन राजस्थान सरकार कह रही है यहाँ पे सब शांति-शांति है और इन घटनाओं के लिए बहुसंख्यक दोषी हैं !!”

बहरहाल पुलिस ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है। एएसपी रघुवीर शर्मा के मुताबिक, ये घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है। इससे पहले हाल ही में भीलवाड़ा के ही सांगानेर में भी इसी तरह की हिंसा हुई थी।

Rajasthan Bhilwara Youth stabbed to death Hindu organizations called off Internet shuts

विदेश जाना चाहती हैं ₹200 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में फँसी जैकलीन फर्नांडिस, अदालत से माँगी अनुमति: एयरपोर्ट से लौटा दी गई थीं

बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) ने दिल्ली की एक अदालत से विदेश जाने की इजाजत माँगी है। उन्होंने अबूधाबी में होने वाले आईफा अवॉर्ड्स (IIFA 2022) में शिरकत करने और फ्रांस, नेपाल की यात्रा करने के लिए अदालत में अर्जी देकर 15 दिन देश से बाहर जाने की अनुमति माँगी है।

दरअसल महाठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrasekhar) के 200 करोड़ की उगाही के मामले में जैकलीन फर्नांडिस के खिलाफ भी जाँच की जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय ने जैकलीन के खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया है। इसके चलते जैकलीन ने अब कोर्ट का रुख किया है। इससे पहले बिना इजाजत विदेश जाते वक्त इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने जैकलीन को मुंबई एयरपोर्ट पर ही रोक दिया था और उन्हें घर वापस भेज दिया था। पिछले महीने जाँच एजेंसी ने जैकलीन फर्नांडिस की 7 करोड़ 27 लाख रुपए की संपत्ति भी जब्त की थी। ये रकम अभिनेत्री ने फिक्स डिपॉजिट के नाम पर अपने पास रखी हुई थी।

बता दें कि सुकेश चंद्रशेखर की ठगी केस में जाँच करते हुए जैकलीन का नाम भी सामने आया था। दोनों के करीबी रिश्तों को बयाँ करती कई तस्वीरें भी मीडिया में लीक हुई थीं। इसके बाद ठग सुकेश चंद्रशेखर द्वारा एक्ट्रेस को दिए गए तोहफों की लिस्ट ने लोगों को चौंका दिया। ED की चार्जशीट के मुताबिक, सुकेश ने जैकलीन को एक विदेशी घोड़ा, गुच्ची के तीन डिजाइनर बैग, शेनल और गुच्ची (Gucci) के कपड़े, लुई वीटॉन (Louis Vuitton) के शूज, दो डायमंड ईयररिंग, मल्टीस्टोन ईयररिंग और दो हरमेस ब्रेसलेट गिफ्ट किए थे, जिनकी कीमत करोड़ों रुपए में हैं।

सुकेश ने जैकलीन को एक मिनी कूपर कार भी गिफ्ट की थी, जो उन्होंने वापस कर दी थी। सुकेश ने जैकलीन के जीजा वारेन फर्नांडिस के अकाउंट में भी 15,00,000 रुपए ट्रांसफर किए थे, जो ऑस्ट्रेलिया में रहता है। जैकलीन ने बताया कि इसके अलावा सुकेश ने जैकलीन को 15 लाख रुपए कैश भी भेजे थे।