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मस्जिद में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, माइक पर अजान की इजाजत देने से इनकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लाडस्पीकर से अजान की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा है कि लाडस्पीकर से अजान देना मौलिक अधिकार नहीं है। इसको लेकर पहले ही कानून पास हो चुका है। जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और जस्टिस विकास बुधवार की खंडपीठ ने इरफान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के बदायूँ के रहने वाले इरफान ने एसडीएम तहसील बिसौली, जिला बदायूं द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था। इसमें अजान के समय गाँव की मस्जिद में लाउडस्पीकर/माइक के इस्तेमाल की अनुमति माँगी गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति की माँग करने वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि कोई भी धर्म पूजा या इबादत के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता। इरफान का कहना था कि एसडीएम द्वारा पारित आदेश पूरी तरह से अवैध था और मस्जिद से लाउडस्पीकर बजाने पर रोक उसके मौलिक और कानूनी अधिकारों का उल्लंघन है। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसकी दलीलें खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि अब यह कानून पास हो गया है कि मस्जिद से लाउडस्पीकर का इस्तेमाल मौलिक अधिकार नहीं है। इस तरह से याचिका स्पष्ट रूप से गलत है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।

गौरतलब है कि 2020 में एक फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना था कि लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध वैध है, क्योंकि यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा था कि अजान इस्लाम का हिस्सा है, लेकिन लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं हो सकता। इसके लिए कोर्ट ने तर्क दिया था कि लाउडस्पीकर के आने से पहले मस्जिदों से मानव आवाज में अजान दी जाती थी। मानव आवाज में मस्जिदों से अजान दी जा सकती है। गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी ने इस संबंध में याचिका डाली थी।

तेजिंदर पाल बग्गा को पंजाब पुलिस ने किया गिरफ्तार: BJP नेता के बुजुर्ग पिता ने बताया- पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे में ले गए और हाथापाई की

भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के दौरान लगभग 50 पुलिसकर्मी मौजूद थे। वे लगभग 1 दर्जन वाहनों से आए थे। बग्गा की गिरफ्तारी दिल्ली के उनके घर से की गई। भाजपा के कई नेताओं ने इसकी जानकारी ट्विटर पर साझा की है।

इस घटनाक्रम पर तेजिंदर बग्गा के पिता ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया, “पहले मेरे घर में 2 पुलिसकर्मी घुसे। वो मुझ से सामान्य ढंग से बात कर रहे थे। उस समय घर पर तेजिंदर और उनके अलावा कोई नहीं था। उसी समय तेजिंदर कपड़े पहन कर बाहर आए। थोड़ी बातचीत के बाद कई पुलिसकर्मी मेरे घर में जबरन घुस गए। उनके इस काम की मैं वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी मुझे खींच कर कमरे की तरफ ले गया और मुझ से हाथापाई की।”

तेजिंदर के पिता ने आगे बताया, “इसके बाद वो तेजिंदर को खींच कर बाहर ले गए और हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने बग्गा को उनकी पगड़ी तक नहीं पहनने दी, जबकि उसने इसे पहनने की गुजारिश की। पुलिसवाले बग्गा का फोन भी अपने साथ ले गए।” बग्गा की गिरफ्तारी के बाद ट्विटर पर #IStandWithTajinderBagga और #PunjabPolice ट्रेंड कर रहा है।

1 माह पहले भी पहुँची थी पंजाब पुलिस

इससे पहले 2 अप्रैल 2022 को भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव तेजिंदर पाल बग्गा ने बताया था कि पंजाब पुलिस उनके दिल्ली स्थित घर पर गिरफ्तारी के लिए आई थी। तब बग्गा ने कहा था कि पुलिस ने यह कदम बिना किसी पूर्व सूचना के और बिना FIR की कॉपी दिए ही उठाया था जो कायदे के हिसाब से अनुचित है। तब पंजाब पुलिस की कार का नंबर स्ट करते हुए बग्गा ने लिखा था, “पंजाब पुलिस PB 65 AK 1594 नंबर की कार से मेरे घर मुझे गिरफ्तार करने पहुँची है। इन्होने स्थानीय पुलिस को भी इसकी सूचना नहीं दी है। अब ये लोग मेरे दोस्तों और उनके घरों को तलाश रहे हैं। मुझे FIR, थाना और धाराओं की कोई जानकारी नहीं दी गई है।”

बग्गा ने केजरीवाल के खिलाफ क्या कहा था?

30 मार्च 2022 को तेजिंदर पाल बग्गा का बयान इंडिया TV ने दिखाया था। वह बयान अरविंद केजरीवाल के घर के आगे प्रदर्शन के दौरान दिया गया था। तब बग्गा ने कहा था, “पूरे देश के सबसे बड़े नरसंहार का दिल्ली विधानसभा में मज़ाक उड़ाया गया। अरविंद केजरीवाल के मुताबिक द कश्मीर फाइल्स फिल्म में दिखाया गया कश्मीरी पंडितों का नरसंहार झूठ है। मुझे लगता है कि 100 करोड़ हिन्दू इसे कभी नहीं भूलेंगे।”

बग्गा ने आगे कहा था, “सोनिया गाँधी ने भगवान राम के अस्तित्व को नकार दिया था और आज उनकी खुद की पार्टी के अस्तित्व पर संकट है। इसलिए मैं अरविंद केजरीवाल को बता देना चाहता हूँ कि देश का हिंदू तुम्हें तुम्हारी जगह दिखाएगा। केजरीवाल को अपने बयान पर माफ़ी माँगनी चाहिए। अगर वो माफ़ी नहीं माँगते तो भाजपा कार्यकर्ता उन्हें चैन से रहने नहीं देंगे। हमारा विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा।”

पंजाब पुलिस ने इस बयान के आधार पर पटियाला में FIR दर्ज की थी। अगले दिन बग्गा ने ट्वीट कर उस FIR के वापस लिए जाने की जानकारी दी थी। बाद में इस मामले में SIT का गठन किया गया था। SIT को यह तय करना था कि तेजिंदर पाल बग्गा के ट्वीट से अरविंद केजरीवाल को नुकसान या नुकसान पहुँचाने का प्रयास तो नहीं हुआ।

‘पापा रोज मेरे साथ गंदी हरकतें करते’: समस्तीपुर में टीचर बाप का Video लेकर थाने पहुँची बेटी, बुलंदशहर में भी नाबालिग बेटी से रेप

बिहार के समस्तीपुर जिले और उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से कलयुगी पिता की शर्मनाक करतूत सामने आई है। समस्तीपुर में एक 18 साल की युवती से उसका पिता हर दिन दुष्कर्म करता था। मामले में आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं बुलंदशहर में अपनी नाबालिग बेटी से रेप का आरोपित पिता फरार है।

जानकारी के मुताबिक समस्तीपुर में पिता द्वारा किए जाने वाले इस गंदी हरकत में युवती की माँ भी अपने पति का साथ देती थी। जब भी बेटी इसका विरोध करती थी तो दोनों डरा-धमका कर उसे चुप करा देते थे। इससे तंग आकर आखिरकार लड़की ने पिता की इस करतूत का वीडियो बनाया और थाने पहुँच गई। इसके बाद आरोपित पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पीड़िता ने बताया कि उसका पिता पेशे से शिक्षक है। 50 वर्षीय पिता हर दिन उसके साथ दुष्कर्म करता। जब वह इसकी शिकायत माँ से करती, तो वह युवती को ही दोषी बताने लगती। पीड़िता ने बताया कि जब वह अपने पिता की गंदी हरकतों से तंग आ गई तो उसने इसका वीडियो बना लिया और रोसड़ा थाने पहुँच गई। 

युवती का आरोप है कि पहले पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज नहीं की और थाने से उसे भगा दिया। लेकिन जब मामला उच्च अधिकारियों की जानकारी में आया तो युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित पिता को गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में एसडीपीओ सहरियार अख्तर ने बताया कि सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें एक युवती के साथ अधेड़ के छेड़छाड़ करने का दृश्य है। उसमें दिख रहा आरोपित कथित तौर पर पीड़िता का पिता बताया जा रहा है। वायरल वीडियो पर पुलिस ने संज्ञान लेकर उसे गिरफ्तार कर लिया है। विस्तृत जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं बुलंदशहर के जहाँगीरपर थानक्षेत्र में एक पिता 15 दिनों से अपनी बेटी के साथ रेप कर रहा था। विरोध करने पर बेटी और उसकी माँ दोनों को जान से मारने की धमकी दी जाती थी। दोनों को गोली मारने की धमकी देकर चुप करा देता था। एक दिन महिला मौका पाकर घर से बाहर निकली और किसान यूनियन नेताओं के साथ मिलकर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई। सीओ संग्राम सिंह ने महिला की शिकायत मुकदमा दर्ज कर लिया है और आगे की जाँच की जा रही है। फिलहाल आरोपित पुलिस की गिरफ्त से दूर है। उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। 

बुलंदशहर पुलिस ने ट्वीट कर बताया है, “इस मामले में अभियोग पंजीकृत किया गया है। हालाँकि बेटी ने ऐसी किसी भी घटना से इनकार किया है। पति-पत्नी में विवाद है। कथित पीड़िता को CWC व कोर्ट में पेश कर बयान कराया जाएगा। उसके बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

मुस्लिम से शादी पर मार डाले गए नागराजू को 1 महीने से खोज रहे थे हमलावर: गिड़गिड़ाती रही अशरीन, रॉड और चाकू से वार करते रहे हत्यारे

तेलंगाना के हैदराबाद में घटना बुधवार (4 मई, 2022) को मुस्लिम लड़की से शादी करने वाले एक दलित युवक नागाराजू की हत्या कर दी गई थी। हत्या लड़की के भाई ने अपने अन्य रिश्तेदारों और साथियों के साथ मिल कर की थी। पुलिस ने इस मामले में अब तक 2 आरोपित गिरफ्तार किए हैं। हमले के दौरान मृतक की पत्नी ने वहाँ मौजूद लोगों से हाथ-पैर जोड़े। हर किसी से मदद की गुहार लगाई। लेकिन कोई उसकी मदद को आगे नहीं आया। अब पीड़िता ने इस घटना का आँखों देखा हाल बताया है।

पहले से सिग्नल पर खड़े थे हमलावर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अशरीन (पीड़िता) ने कहा, “वह रात में स्कूटर से अपने पति के साथ सरूरनगर जा रही थी। तभी सिग्नल पर उसका भाई 4 और हमलावरों के साथ खड़ा था। अचानक ही उन्होंने लोहे की रॉड से मेरे पति पर हमला कर दिया। मैं लगातार उनके आगे चीखती और रहम की भीख माँगती रही। लेकिन हमलावरों पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा।”

हमलावरों की मर्जी से शादी करने की भी लगाई गुहार

पीड़िता के मुताबिक, “जब मेरे पति नागाराजू को मेरी आँखों के आगे मारा जा रहा था तब मैंने हमलावरों के आगे उनकी मर्जी से निकाह करने की भी मिन्नत की। लेकिन उनकी संख्या बहुत अधिक थी। वो मेरी एक नहीं सुने और मेरे पति को पीटते रहे।”

कोई नहीं आया मदद करने

अशरीन के मुताबिक, “घटना के समय वहाँ कई लोग मौजूद थे। मैं उनसे चीख-चीख कर अपने पति को बचाने की मदद माँगती रही लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। अंत में मैंने हमलावरों के पैर पकड़ कर कहा कि अगर इसे मारा तो मैं खुद भी मर जाऊँगी। पर इस बात का भी उन पर कोई असर नहीं पड़ा। मुझे इंसाफ चाहिए और कुछ नहीं।”

हमलावर 1 महीने से खोज रहे थे नागाराजू को: पुलिस

इस मामले की जाँच कर रही पुलिस ने बताया कि अब तक मुबीन और मसूद नाम के 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, “30 जनवरी 2022 को अशरीन अपना मोबाइल फोन घर में छोड़ कर चली गई थी। अगले दिन दोनों ने हैदराबाद के ही आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली थी। 1 फरवरी को उसके परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। हमलावर 1 महीने से नागाराजू की तलाश कर रहे थे। वो नागराजू को किसी भी हाल में मारना चाह रहे थे। हमले के बाद वो तब मौके से फरार हुए जब उन्हें नागाराजू के मरने का यकीन हो गया। हमले में प्रयोग हुई चाकू और लोहे की रॉड पुलिस ने बरामद कर ली है। आरोपितों पर धारा 302 IPC के साथ SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।”

यदि हिन्दू भी ऐसा करना शुरू कर दे तो मच जाएगा कोहराम : भाजपा विधायक

हैदराबाद से भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने दोनों आरोपितों की फोटो ट्वीट की है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “हम जब लव जिहाद की बात करते है तो लोग हमें गुंडा कहते हैं। आज देश मे कई हिन्दू लड़कियों को इन मुसलमानों ने धोखे से फँसा रखा है। अगर हम हिन्दू भी इस घटना के हिसाब से काम करने लगे तो पूरे देश मे कोहराम मच जाएगा। ये वो दो इस्लामिक जिहादी हैं, जिन्होंने हिन्दू युवक नागराजू की हत्या की थी।”

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, 19 मई को सुनाया जाएगा फैसला, विवादित स्थल पर खुदाई की माँग

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में सुनवाई करने के बाद मथुरा की अदालत ने अपने फैसले को सुरक्षित रख लिया है। 13.37 एकड़ की भूमि को लेकर चल रहे विवाद पर कोर्ट अब 19 मई को अपना फाइनल जजमेंट देगा। कोर्ट में दायर याचिका में कोर्ट की देखरेख में विवाद स्थल पर खुदाई की भी माँग की गई है। दावा है कि अगर खुदाई होती है तो वहाँ पर वही कारागार मिलेगा, जहाँ पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।

रिपोर्ट के मुताबिक, मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्म स्थली पर बने शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने के लिए लंबे समय से माँग की जा रही है। कोर्ट में इसको लेकर भी याचिका दायर की गई थी, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था। मामले में याचिकाकर्ताओं ने अदालत से विवाद स्थल की खुदाई कर उसकी जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग की है। गौरतलब है कि इस याचिका के जरिए 13.37 एकड़ जमीन पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मालिकाना हक माँगा जा रहा है। इसमें ईदगाह भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट में भी दायर है याचिका

कृष्ण जन्मभूमि विवाद को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में भी एक याचिका दायर की गई है, जिसमें कृष्ण जन्मभूमि की जमीन को समझौते के जरिए मस्जिद को देने का विरोध किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि इस मामले में हिंदुओं के साथ धोखा करके कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की जमीन को बिना किसी समझौते के शाही ईदगाह को दे दी गई थी। अदालत से माँग की गई है कि कोर्ट ये घोषित करे कि श्रीकृष्ण जन्म सेवा संस्थान द्वारा 12 अगस्त 1968 शाही ईदगाह के साथ किया गया समझौता बिना किसी क्षेत्राधिकार के किया गया था।

कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर कोर्ट लगा चुकी है जुर्माना

गौरतलब है कि इससे पहले मथुरा की कोर्ट ने ‘ठाकुर केशव देव महाराज बनाम शाही मस्जिद ईदगाह इंतजामिया कमेटी’ की सुनवाई को रोकने की माँग पर याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना ठोंका था। सीनियर डिवीजिन की सिविल जज ज्योति सिंह ने याचिकाकर्ताओं को ढाई सौ रुपए जुर्माना लगाया था।

ईद का दिन, अल्लाह-हू-अकबर के नारे और मिनी पाकिस्तान: कर्नाटक के मैसूर का वीडियो वायरल, CM बोम्मई ने कहा- होगी कार्रवाई

कर्नाटक (Karnataka) का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति ईद के दिन नमाज पढ़कर लौटे मुस्लिमों के समूह का वीडियो रिकॉर्ड करता और अपने गाँव को ‘मिनी पाकिस्तान’ (Mini Pakistan) बताता है। वीडियो वायरल होने के बाद तनाव बढ़ गया है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) ने जिले के SP को मामले की जाँच करने का आदेश दिया है।

वायरल वीडियो को लेकर लोगों के आक्रोश को देखते हुए पत्रकारों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री बोम्मई से सवाल किया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं एसपी से बात करूँगा और इस मामले जाँच और कार्रवाई के लिए कहूँगा।”

कहा जा रहा है कि यह वीडियो मैसूर जिले के नंजनगुड तालुक के कवलांडे गाँव का है। वीडियो 3 मई ईद के दिन का बनाया गया है। वीडियो में दिख रहा है कि मुस्लिमों की भारी भीड़ सड़क के किनारे खड़ी है और ‘नारे ए तकबीर, अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगा रही है।

इस दौरान वीडियो बनाने वाला व्यक्ति कहता है, “मजमा देखो अभी, हमारे गाँव का”। इसके बाद उसका साथी कहता है, “ये मिनी पाकिस्तान है, छोटा पाकिस्तान”। इसके बाद वीडियो बनाने वाला शख्स कहता है, “कोवलांडे बोले तो छोटा पाकिस्तान।”

कोरोना खत्म होते ही लागू करेंगे CAA, भ्रष्टाचार, अत्याचार का सिंडिकेट चला रही हैं ममता बनर्जी: बंगाल में गरजे गृहमंत्री अमित शाह, कहा- ‘यहाँ कानून का राज नहीं’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने गुरुवार ( 5 मई 2022) को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू करने को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerajee) पर आरोप लगाया कि वो अफवाह फैलाती हैं कि सीएए कानून कभी जमीन पर लागू नहीं होगा। लेकिन कोरोना खत्म होते ही सीएए को लागू किया जाएगा। शाह ने कहा कि सीएए एक सच्चाई थी, है और रहेगी।

गृहमंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं। उन्होने सिलीगुड़ी स्थित रेलवे के खेल के मैदान में रैली के दौरान ममता बनर्जी पर जमकर जुबानी हमले किए। सीएम ममता पर राज्य में अत्याचार, भ्रष्टाचार और कट मनी का सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक ये सब खत्म नहीं होगा। बीजेपी लड़ती रहेगी। ममता को 3 बार चुना गया, लेकिन वो सुधर नहीं रही हैं।

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद की गई राजनीतिक हिंसा का जिक्र करते हुए शाह ने दावा किया कि अब तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी ये मान चुका है कि बंगाल में कानून का नहीं, बल्कि यहाँ जो सत्ता है, उसकी इच्छा का राज चलता है।

बंगाल को ममता ने किया कंगाल

गृह मंत्री ने राज्य में महंगी बिजली को लेकर राज्य सरकार को घेरते हुए दावा किया कि पूरे देश में यहाँ बिजली सबसे अधिक है। वहीं बंगाल में पेट्रोल का दाम 115 रुपए है, जो सबसे अधिक है, जबकि बीजेपी की सरकारों में 105 रुपए ही दाम हैं। उन्होंने कहा कि ममता दीदी ने पश्चिम बंगाल की आर्थिक रूप से कमर को तोड़कर रख दिया है। देश की आजादी के समय देश की जीडीपी में राज्य का योगदान करीब 30% था, जो कि घटकर अब 3.3 प्रतिशत पर आ गया है।

गोरखाओं का जिक्र करते हुए शाह ने ममता बनर्जी पर गोरखा लोगों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया और कहा कि भाजपा ने सदा गोरखाओं का सम्मान किया है। उन्होंने गोरखाओं को धन्यवाद दिया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की सीटें 3 से बढ़ाकर 77 कर दीं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच 545 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शुरू हो गया है। इस पर 31,000 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं।

झूठ एवं घृणा का सौदागर ‘इंकलाब इंडिया’: दावे- CM केजरीवाल की बेटी ने ₹45800 करोड़ का पैकेज ठुकराया, पैसे सीरिया में दान दिए

सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम (Instagram) पर एक अकाउंट ‘इंकलाब_इंडिया’ द्वारा 5 मई 2020 को एक ऐसा मनोरंजक पोस्ट किया गया जो वायरल हो रहा है। हालाँकि, अब इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया है। इस पोस्ट में कहा गया था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) की बेटी ने $6 बिलियन (करीब 45,800 करोड़ रुपए) की माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी को ठुकरा दिया है। इसकी बजाय वो इस पूरे पैकेज को सीरिया के भूखे बच्चों को दान करना चाहती हैं।

भले ही इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया हो, लेकिन इसका स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा है। इसी क्रम में ट्विटर यूजर शिव मिश्रा ने कहा, “$6 बिलियन का पैकेज? कौन हैं ये लोग? कहाँ से आते हैं ये लोग?”

कॉलमनिस्ट साकेत ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “माइक्रोसॉफ्ट ने उन्हें छह अरब डॉलर का पैकेज दिया था। उन्होंने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। बावजूद इसके उन्हें पैकेज का अग्रिम भुगतान किया गया। उन्होंने ठुकराए हुई नौकरी के लिए मिले पैकेज को सीरिया के बच्चों को दिया, क्योंकि पहले से ही समृद्ध भारत के लिए उस पैसे का कोई उपयोग नहीं है।”

इसी क्रम में देबाशीष त्रिपाठी नाम के एक अन्य ट्विटर यूजर ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को मिलने वाली सैलरी का खुलासा किया। यूजर ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को सिर्फ 2.5 मिलियन डॉलर का वार्षिक मूल वेतन मिलता है। पिछले साल उनका कुल वेतन 50 मिलियन डॉलर से भी कम था और यह सारी जानकारी सार्वजनिक डोमेन में है। यूजर ने ये भी कहा कि पहले प्रोपेगेंडा तो ठीक से कर लो। इंकलाब बाद में लाना।

जब ऑपइंडिया ने इस पोस्ट को खंगालने की कोशिश शुरू की तो यह मिला ही नहीं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि उक्त पोस्ट वास्तव में इंकलाब के अकाउंट से ही हुआ था या नहीं। लेकिन, जब हमने इस अकाउंट को और गहराई से जानने की कोशिश की तो हमें वहाँ पर बहुत सारी फर्जी खबरें और नफरत भरी पोस्ट मिलीं।

रामनवमी और हनुमान जयंती हिंसा के लिए हिंदुओं ठहराया जिम्मेदार

इंकलाब इंडिया की छानबीन करते वक्त हमने पाया कि 23 अप्रैल को हैंडल ने एक पोस्ट प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था ‘ये रमजान भारतीय मुस्लिमों के लिए सबसे बुरी यादें लेकर आया’। इसके साथ ही ‘टूटा हुआ दिल’ की इमोजी भी लगाई गई है। इसमें कुछ ऐसे मुस्लिमों की तस्वीरें थी, जिनके घरों को अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान ध्वस्त कर दिया गया था। तस्वीरें अलग-अलग राज्यों की थीं।

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

खास बात ये है कि इस पोस्ट में हिंदू पीड़ितों का तो जिक्र तक नहीं किया गया। इसमें उस शिवम तक का जिक्र नहीं किया गया, जिस पर खरगोन में हिंसा के दौरान मुस्लिमों की भीड़ ने हमला किया था। जहाँगीरपुरी हिंसा के दौरान मुस्लिमों के दंगे को भी दरकिनार कर दिया गया। इसमें उस घटना का भी जिक्र नहीं किया गया, जिसमें रामनवमी औऱ हनुमान जयंती पर हिंदुओं की शोभा यात्रा पर मुस्लिमों ने मांस के टुकड़े फेंके और पत्थरबाजी की थी।

वसीम शेख का अजीबोगरीब मामला

इसी तरह से 20 अप्रैल को इंकलाब इंडिया ने ‘नया भारत’ कैप्शन के साथ एक पोस्ट शेयर किया। इसमें बाईं तरफ एक व्यक्ति को मस्जिद पर भगवा झंडा लगाते दिखाया गया, जबकि दाईं ओर खरगोन के एक शारीरिक दिव्यांग व्यक्ति वसीम शेख की तस्वीर लगाई गई। यह वही वशीम शेख है, जिस पर खरगोन दंगों के दौरान पत्थरबाजी के आरोप में उसकी दुकान को कथित रूप से ध्वस्त कर दिया गया था।

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

हालाँकि, इंकलाब इंडिया इन कहानियों की पीछे की सच्चाई का जिक्र नहीं किया। बाईं ओर की तस्वीर बिहार की एक पुरानी तस्वीर है और सरकार इस मामले में पहले ही कार्रवाई कर चुकी है। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दाईं ओर वसीम शेख की कहानी किसी हाईवोल्टेज ड्रामा से कम नहीं है। शेख ने एक बयान में कहा था कि पथराव करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान उनकी दुकान को गिरा दिया गया। चूँकि वह एक शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति है, इसलिए पथराव में शामिल होने का कोई रास्ता नहीं था। उनके बयान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खूब शेयर किया गया।

बाद में उसने अपने आरोप से यू-टर्न लेते हुए कहा था कि उसके घर या दुकान को प्रशासन ने नहीं तोड़ा है। इसके अगले दिन फिर से उसने अपने बयान बदल दिए और बिना नाम लिए प्रशासन पर आरोप लगाया। यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में क्या हुआ था। यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी दुकान वैध थी या वह अतिक्रमण थी। हालाँकि, लेफ्ट-लिबरल मीडिया और इंकलाब_इंडिया सोशल मीडिया अकाउंट्स ने हिंदुओं और भाजपा के नेतृत्व वाली एमपी सरकार को निशाना बनाया।

यूपीएससी अध्यक्ष पर भी साधा निशाना

अपनी अगली इंस्टा पोस्ट में अकाउंट ने यूपीएससी के चेयरपर्सन मनोज सोनी की नियुक्ति पर सवाल उठाया। उसने कैप्शन में लिखा, ”यूपीएससी बन गया यूनियन प्रचारक संघ कमीशन” और इसके बयान के लिए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को संदर्भित किया गया है।

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

वहीं, सोशल हैंडल ने इस बात को सिरे से दरकिनार कर दिया कि डॉ मनोज सोनी एक हाई क्वालिफाईड शिक्षाविद हैं और 2017 से ही यूपीएससी से जुड़े हुए हैं। वो दो विश्वविद्यालयों के कुलपति थे और उन्होंने तीन कार्यकालों तक सेवा की। उनकी कई किताबें छप चुकी हैं और इस क्षेत्र के सम्मानित व्यक्ति हैं।

द कश्मीर फाइल्स पर बीबीसी का प्रोपेगेंडा

फिल्म द कश्मीर फाइल्स बनाने के बाद से फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री मीडिया और लेफ्ट-लिबरल वर्ग के टार्गेट पर हैं। कई मीडिया हाउस ने इस फिल्म को दुष्प्रचार करार देते हुए इसे झूठा बताया है। विकिपीडिया ने तो कश्मीरी पंडितों के पलायन को साजिश करार दिया।

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

इंकलाब इंडिया ने भी मौके पर चौका मारते हुए फिल्म के बारे में कई फर्जी खबरें साझा कीं। उसने बीबीसी के उस प्रोपेगेंडा वीडियो को शेयर किया, जिसमें उसने कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं का इंटरव्यू लिया था। इसको लेकर ऑपइंडिया ने खुलासा किया था कि किस तरह से बीबीसी ने सेलेक्टिव इंटरव्यू लेकर प्रोपेगेंडा फैलाया था।

क्रिप्टो करेंसी पर फैलाई फेक न्यूज

इसी तरह 12 फरवरी 2022 को किए एक अन्य पोस्ट में इंकलाब_इंडिया ने क्रिप्टो करेंसी पर झूठ फैलाया कि भारत सरकार या आरबीआई ने क्रिप्टो करेंसी को मुद्रा के तौर पर मान्यता नहीं दी है, लेकिन वो उस पर टैक्स जरूर लगाएगी। अकाउंट ने कैप्शन में लिखा, “मुद्रा को वैध किए बिना उस पर टैक्स लगाना।”

फोटो साभार: इंस्टाग्राम

ये पोस्ट गलत जानकारियों से पटी पड़ी थी। सबसे पहले भारत सरकार ये स्पष्ट कर चुकी है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी कभी भी कानूनी टेंडर नहीं बनेगी। इसे एक परिसंपत्ति माना जाएगा, वह भी आरबीआई द्वारा नियम बनाए जाने के बाद। लेकिन क्रिप्टोकरेंसी और एनएफटी समेत किसी भी क्रिप्टो संपत्ति से होने वाले लाभ पर 30% का टैक्स लगेगा।

सोना (Gold) भारत में लीगल टेंडर नहीं है, लेकिन इसे संपत्ति माना जाता है। सोना से कुछ भी नहीं खरीदा जा सकता है। सबसे पहले इसे भुनाना होगा। सोना के लेनदेन से होने वाली किसी भी आय पर कर लगता है। इसी तरह रियल स्टेट एक संपत्ति है। ऐसे ही कीमती धातुएँ और अन्य वस्तुएँ हैं। इन संपत्तियों से होने वाली इनकम पर नियम के अनुसार टैक्स लगता है। जैसे कि भारत में जुआ गैर-कानूनी है, लेकिन इससे होने वाली आय पर टैक्स लगता है।

हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक अन्य मुद्दे पर बात की थी। वह बात ये थी कि क्रिप्टो करेंसी का टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए संभावित इस्तेमाल। सरकार ने क्रिप्टो से होने वाली आय पर 30% कर में से स्रोत पर 1% कर लगाया है। इसको लेकर वित्त मंत्री ने कहा था कि इससे इस पर नजर बनाए रखने पर मदद मिलेगी कि कहीं इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग के लिए नहीं किया जा रहा है।

सीएए दंगाई को टिकट देने पर कॉन्ग्रेस को सराहा

14 जनवरी 2022 को इंकलाब इंडिया ने सीएए विरोधी दंगों की आरोपित सदफ जफर को टिकट देने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को बधाई दी थी।

साभार फोटो: इंस्टाग्राम

सीएए विरोधी दंगों में शामिल होने के आरोपी जफर को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर बने नए कानून के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक रिकवरी नोटिस जारी किया था। सदफ जफर चुनाव हार गई थीं।

‘द कश्मीर फाइल्स’ और इस्लामोफोबिया- आतंक के समर्थन में वामपंथी मीडिया ने फैलाया प्रोपेगेंडा: विवेक अग्निहोत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया बेनकाब

फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने गुरुवार (5 मई 2022) को भारतीय लिबरल मीडिया द्वारा उठाए गए ‘इस्लामोफोबिया के भूत’ को एक सिरे से खारिज कर दिया। बता दें कि फिल्म पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अग्निहोत्री ने कहा कि जब से फिल्म रिलीज हुई है, लिबरल भारतीय मीडिया इसे इस्लामोफोबिया से जोड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि वह इस्लामोफोबिक फिल्मों के बारे में खुलकर बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “चिंता असल में आतंकवाद को लेकर है। फिल्म में मुस्लिम शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। फिल्म में पाकिस्तान या पाकिस्तानी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है।” उन्होंने आगे सवाल किया कि उनकी फिल्म को टेररफोबिक क्यों नहीं कहा गया क्योंकि यह आतंकवाद के खिलाफ बात करती है।

अग्निहोत्री ने सवाल किया कि फिजा आदि जैसी फिल्में आतंकवाद पर आधारित थीं, लेकिन उन्हें कभी इस्लामोफोबिक नहीं कहा गया। उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि शायद कोई अलिखित कानून है कि अगर आप आतंकवादी को सही ठहराते हैं, तो आप मानवता के मसीहा हैं, लेकिन अगर आप आतंकवाद के खिलाफ बात करते हैं, तो आप इस्लामोफोबिक हैं।”

उन्होंने कहा कि फिल्म का पहला दृश्य हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच भाईचारे को दर्शाता है। अग्निहोत्री ने कहा, “एक हिंदू लड़के शिव को बुरे लोग पीटे जा रहे हैं। अब्दुल ने आकर जान बचाई। उसके बाद पुष्कर नाथ ने अब्दुल की जान बचाई। दरअसल, फिल्म का सबसे अहम प्रोड्यूसर एक मुस्लिम है। क्या यह इस्लामोफोबिक है?” 

दो बार रद्द हुई विवेक अग्निहोत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस

हाल ही में, अग्निहोत्री ने ट्विटर पर बताया था कि कैसे विदेशी संवाददाता क्लब द्वारा उनकी निर्धारित प्रेस कॉन्फ्रेंस को रद्द कर दिया गया था क्योंकि कुछ सदस्यों ने क्लब के प्रशासन को प्रेस कॉन्फ्रेंस होने पर सामूहिक इस्तीफा देने की धमकी दी थी। बाद में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) में शिफ्ट कर दिया। PCI ने भी स्लॉट उपलब्ध न होने की बात कहकर बुकिंग स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद अग्निहोत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को 5 मई के लिए एक होटल में शिफ्ट किया।

‘नहीं पता था फेसबुक राक्षस बन जाएगा, यूजर्स का डाटा खाकर पैसे उगलेगा’: जिस नीरज अरोड़ा ने कराई Whatsapp की डील, छलका उनका दर्द

व्हाट्सएप (WhatsApp) के पूर्व चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) नीरज अरोड़ा का कहना है कि उन्हें कंपनी को 22 अरब डॉलर में फेसबुक (Facebook) को बेचने पर पछतावा हो रहा है। उन्होंने ट्वीट की एक सीरीज में बताया कि कैसे व्हाट्सएप उस दिशा से भटक गया है, जिस दिशा में उसके संस्थापकों ने मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) के नेतृत्व वाले समूह द्वारा अधिग्रहण के बाद सेवा की कल्पना की थी। बता दें कि व्हाट्सएप और फेसबुक के बीच डील करवाने में नीरज अरोड़ा की अहम भूमिका थी।

अरोड़ा के अनुसार, व्हाट्सएप की संस्थापक टीम ने अधिग्रहण के समय सर्विस को लेकर फेसबुक के सामने तीन प्रमुख माँगें रखी थीं। ये माँगें थीं- किसी यूजर का डेटा नहीं इकट्ठा किया जाएगा, कभी कोई विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा, क्रॉस-प्लेटफॉर्म ट्रैकिंग नहीं होगी। फेसबुक और उसका मैनेजमेंट इन शर्तों पर तैयार हो गया और उन्हें लगा कि वह उनके मिशन में भरोसा करते हैं, मगर ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। 2014 में फेसबुक ने 22 अरब डॉलर (कैश और स्टॉक) में वाट्सऐप का अधिग्रहण किया, लेकिन 2017-2018 तक चीजें काफी अलग दिखने लगीं। अरोड़ा ने कहा कि उन्होंने वाट्सऐप को जिस लक्ष्य के साथ तैयार किया था, अब यह उसकी छाया भर रह गया है।

वह बताते हैं कि फेसबुक ने एक बार नहीं बल्कि दो बार व्हाट्सएप से अधिग्रहण के लिए संपर्क किया। पहली बार जुकरबर्ग ने 2013-2014 में व्हाट्सएप के सामने यह प्रस्ताव रखा था, मगर उस समय व्हाटेसएप ने इसे ठुकरा दिया था। हालाँकि फेसबुक ने दोबारा 2014 में संपर्क किया और ऑफर दिया। अरोड़ा का कहना है कि फेसबुक का यह ऑफर व्हाट्सएप की टीम को पार्टनरशिप जैसा लगा। इसमें एंड-टू-एंड इनक्रिप्शन को पूरा सपोर्ट, कभी भी कोई विज्ञापन नहीं, प्रोडक्ट के फैसले पर पूर्ण स्वतंत्रता, जैम कुम के लिए बोर्ड में जगह और माउंटेन व्यू में खुद के ऑफिस जैसी बातें कही गई थीं।

उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, अगर आपने व्हाट्सएप को पुराने वक्त में भी इस्तेमाल किया है तो आपको याद होगा कि इसे क्या स्पेशल बनाता था। अंतरराष्ट्रीय कम्युनिकेशन। मेरे जैसे लोगों के लिए, जिनके परिवार अलग-अलग देशों में हैं, व्हाट्सएप उनसे जुड़े रहने का एक शानदार तरीका था। वहीं उन्हें लंबी दूरी के लिए SMS और कॉलिंग फीस भी नहीं देनी पड़ती थी। व्हाट्सएप ने ऐप डाउनलोड करने के लिए सिर्फ 1 डॉलर लेकर कमाई की और फेसबुक ने कहा कि उसने हमारे मिशन और विजन को सपोर्ट किया है। ब्रायन ने तो एक फेमस नोट भी लिखा।

उन्होंने कहा कि 2018 आते-आते फेसबुक/कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल सामने आया। ब्रायन एक्टन ने एक ट्वीट किया, जिसने सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया। ब्रायन एक्टन ने लिखा था- It is time #deletefacebook. यानी ये फेसबुक को डिलीट करने का वक्त है। 

नीरज ने लिखा, “आज व्हाट्सएप फेसबुक का दूसरा सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है, यहाँ तक कि इंस्टाग्राम और फेसबुक मैसेंजर से भी बड़ा है। लेकिन अब यह उस प्रोडक्ट की महज परछाई जैसा रह गया है, जिसके लिए हमने अपनी जान लगा दी थी और चाहते थे कि इसे दुनिया के लिए बनाया जाए। मैं अकेला नहीं हूँ, जो फेसबुक का हिस्सा बन जाने के लिए पछता रहा हूँ। टेक कंपनियों को यह स्वीकार करने की जरूरत है कि कब उन्होंने कुछ गलत किया। शुरुआत में किसी को पता नहीं था कि फेसबुक एक राक्षस बन जाएगा, जो यूजर्स का डेटा खाएगा और पैसे (Dirty Money) उगलेगा। हमें भी इस बात का अंदाजा नहीं था।”

उन्होंने आगे कहा कि टेक ईकोसिस्टम के इवॉल्व होने के लिए इसको लेकर बात करने की जरूरत है कि कैसे खराब बिजनस मॉडल अच्छे-अच्छे प्रोडक्ट, सर्विस और आइडिया को गलत बना देते हैं। अरोड़ा ने ट्विटर थ्रेड को हलो ऐप (HalloApp) को लेकर द वॉलस्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट का लिंक शेयर करते हुए समाप्त किया। अरोड़ा ने माइकल डोनोह्यू के साथ मिलकर पिछले साल हलो ऐप लॉन्च किया। माइकल डोनोह्यू 2019 तक व्हाट्सएप के इंजीनियरिंग निदेशक थे।