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अलवर में मंदिर तोड़े जाने के बाद 3 पर गिरी गाज: SDM-नगरपालिका बोर्ड अध्यक्ष-EO सस्पेंड, कॉन्ग्रेस MLA पर कार्रवाई कब

राजस्थान सरकार ने अलवर जिले के राजगढ़ अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) केशव कुमार मीणा, राजगढ़ नगर पालिका बोर्ड के अध्यक्ष सतीश दुहरिया और स्थानीय नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) बनवारी लाल मीणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बुलडोजर से मंदिर तोड़े जाने के बाद इन अधिकारियों की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे थे। SDM और EO के खिलाफ शिकायत भी की गई थी।

महंत प्रकाश दास ने राजगढ़ SDM केशव कुमार मीणा और स्थानीय नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) बनवारी लाल मीणा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। इसमें धार्मिक भावनाओं को आहत करने और अधिकारियों द्वारा मंदिर परिसर में जूते पहनकर घुसने का आरोप लगाया था। साथ ही मूर्तियों को ड्रिल मशीन और हथौड़े से भी तोड़ने की बात कही गई थी।

मंदिर तोड़े जाने में अधिकारियों के साथ ही कॉन्ग्रेस विधायक की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। ब्रज विकास परिषद ने मामले में शिकायत करते हुए SDM और EO के साथ ही कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक जौहरी लाल मीणा पर भी आरोप लगाया गया था। बृज विकास परिषद के अध्यक्ष और शिकायतकर्ता पंकज गुप्ता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा था कि इस घटना के मुख्य जिम्मेदार कॉन्ग्रेस विधायक जौहरी मीणा हैं। उनका और उनके बेटे का आपराधिक इतिहास है। भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने भी मंदिर तोड़े जाने के लिए कॉन्ग्रेस विधायक को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने अब तक अपने विधायक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

वहीं मंदिर तोड़े जाने के कुछ दिन बाद ही अलवर के पूर्व कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया को पाँच लाख रुपए की घूस लेते गिरफ्तार किया गया था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने पूर्व कलेक्टर के साथ आरएएस अधिकारी अशोक सांखला और दलाल नितिन को भी गिरफ्तार किया था। तलाशी में आईएएस पहाड़िया के बंगले से महँगी शराब की 17 बोतलें भी बरामद हुई थी।

नन्नूमल पहाड़िया का 14 अप्रैल को ही तबादला हो गया था। सरकार ने उन्हें जिला कलेक्टर के पद से हटाकर विभागीय जाँच आयुक्त नियुक्त किया था। इस पद पर बैठा अफसर सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों की गड़बड़ियों की जाँच करता है, हालाँकि इससे पहले ही वह रिश्चतखोरी के मामले में गिरफ्तार हो गए।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान के अलवर जिले के राजगढ़ में वर्षों पुराने हिंदू मंदिर को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया था। मास्टर प्लान का हवाला देते हुए नगरपालिका प्रशासन ने तथाकथित 35 अतिक्रमण हटाए थे। इसी दौरान 300 साल पुराने मंदिर पर भी बुलडोजर चला था। साथ ही आसपास के घरों को भी अतिक्रमण बताकर तोड़ा गया था। कई मूर्तियाँ खंडित हो गई थीं।

ट्विटर की नौकरी बस 6 महीने ही सेफ: रिपोर्ट में दावा- कर्मचारियों को इमरजेंसी मीटिंग में मिला संदेश, एलन मस्क के हाथों बिकने के बाद बदलावों पर भी ब्रेक

दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क के हाथों ट्विटर के बिकने के बाद खबर आ रही है कि कंपनी ने प्लेटफॉर्म पर शुक्रवार तक बदलावों पर ब्रेक लगा दिया है। यानी माइक्रोब्लॉगिंग साइट के कर्मचारियों के लिए प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रकार का अनाधिकृत बदलाव करना संभव नहीं होगा। यह फैसला सुरक्षा लिहाज से लिया गया है। आशंका है कि इस डील से नाराज कोई कर्मचारी खुन्नस में किसी तरह का अनुचित बदलाव न कर दे। मस्क ने यह कंपनी 43 अरब डॉलर (3.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा) में खरीदी है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर खुलासा किया कि ट्विटर फिलहाल कोई प्रोडक्ट अपडेट को अनुमति नहीं देगा जब तक कि वो बिजनेस से जुड़े नहीं होते। प्रोडक्ट अपडेट के लिए कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट से अनुमति लेना अनिवार्य है। रिपोर्ट की मानें तो ये फैसला उन कर्मचारियों की दुष्टता से बचने के लिए लिया गया है जो डील से नाराज होकर कंपनी के लिए दिक्कत खड़ी कर सकते हैं।

गौरतलब है कि एलन मस्क द्वारा ट्विटर खरीदे जाने के बाद कंपनी के कई कर्मचारियों में इस डील को लेकर गुस्सा है। सामान्य जन भी ये सोच रहे हैं कि आखिर दुनिया का सबसे अमीर आदमी इतनी बड़ी कीमत में ये प्लेटफॉर्म लेकर करेगा क्या? या वो इसमें क्या बदलाव करेगा? कहीं पुराने कर्मचारियों की नौकरी तो नहीं जाएगी।

तो, बता दें कि, मस्क और ट्विटर के बीच हुई इस डील के बाद ये प्लेटफॉर्म प्राइवेट प्लेटफॉर्म बनेगा। एलन मस्क संभव है साल भर के अंदर ही इस कंपनी के अधिकारिक तौर पर मालिक बन जाएँ। पहले उन्होंने ट्विटर की 9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की बात की थी। लेकिन अब उनके पास 100 फीसदी स्टॉक होने जा रहा है।

ट्विटर कंपनी में हुई इस उथल-पुथल के बीच कंपनी की इमरजेंसी मीटिंग हुई और ट्विटर के स्टाफ को बताया गया कि उन सबकी जॉब 6 महीने तक सुरक्षित है जब तक कि मस्क पूरी तरह कंपनी टेक ओवर नहीं करते। कंपनी के सीईओ पराग अग्रवाल और चेयरमैन ब्रेट टेलर ने मीडिया से बात करते हुए ट्विटर में होने वाले बदलाव पर बात की। उन्होंने इस दिन को बेहद भावुक दिन बताया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी 6 माह में जब तक ये डील क्लोज नहीं होती तब तक वहाँ के स्टाफ की नौकरी पर कोई खतरा नहीं है

उल्लेखनीय है कि ट्विटर के साथ डील पक्की होने के बाद एलन मस्क ने इस बारे में बात की और कहा कि लोकतंत्र के लिए फ्री स्पीच बहुत जरूरी है। उनका मकसद है कि ट्विटर प्रोडक्ट को आगे बढ़ाया जाए और नए फीचर्स के साथ इसे सबसे बेस्ट स्पेस बनाया जाए। वह बोले कि लोगों का भरोसा जीतने के लिए ट्विटर को और बेहतक बनाने की आवश्यकता है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने अपने धुर विरोधियों को भी इस ट्विटर पर रहने को कहा। वह बोले कि उम्मीद है कि उनके विरोधी में ट्विटर पर बने रहेंगे क्योंकि यही तो स्वतंत्र अभिव्यक्ति है।

‘मदरसों की बढ़ती संख्या, सरकारी संपत्ति पर कब्ज़ा, डेमोग्राफी चेंज’: पढ़िए क्या कहती है जहाँगीरपुरी पर फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी की रिपोर्ट

दिल्ली के जहाँगीरपुरी (Jahangirpuri Violence) में हनुमान जयंती के मौके पर 16 अप्रैल को हुई हिंसा पर फैक्ट फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट को बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों के समूह (जीआईए) द्वारा तैयार किया गया है। वर्ष 2015 में इसकी स्थापना की गई थी। जीआईए (GIA) पेशेवर महिलाओं, उद्यमियों, मीडियाकर्मियों और शिक्षाविदों का एक समूह है, जो सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। बताया जा रहा है कि बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों के समूह ने हिंसा के अगले तीन दिनों तक जहाँगीरपुरी में रहकर वहाँ की जमीनी हकीकत और हिंसा से जुड़े तथ्यों का पता लगाया है

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया, “जब हम घटनास्थल पर पहुँचे तो हमें कई ऐसी जानकारी मिली, जो अभी तक किसी के सबके सामने नहीं आई है। हम देखते हैं कि इस इलाके में अवैध गतिविधियाँ, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और कट्टरता अपने चरम पर है। सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। यहाँ अवैध तरीके से निर्माण कार्य हो रहे हैं। अतिक्रमण को नियंत्रित करने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।” उन्होंने अपनी रिपोर्ट में सिलसिलेवार ढंग से निम्नलिखित पाँच बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की है।

  1. सार्वजनिक भूमि का अतिक्रमण
  2. कबाड़ इकट्ठा करना और उसे बेचना
  3. अवैध पार्किंग
  4. अवैध निर्माण कार्य
  5. जनसांख्यिकीय परिवर्तन, मदरसों की संख्या में इजाफा

उन्होंने एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें जहाँगीरपुरी के डीसी ब्लॉक की रोड पर अवैध पार्किंग दिखाई दे रही है। यहाँ वाहन चालकों से पार्किंग के लिए बहुत अधिक पैसा वसूला जाता है, जिसके चलते यहाँ जबरन वसूली और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा बढ़ा है। यह इलाका आम नागरिकों के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।

फोटो साभार: GIA

अवैध पार्किंग

इसी तरह की अवैध पार्किंग जहाँगीरपुरी के डीसी ब्लॉक में सरकारी स्कूल के पास भी देखी जा सकती है।

फोटो साभार: GIA

सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा

जहाँगीरपुरी के एफ ब्लॉक में डीडीए फ्लैट के पास एक पार्क का उपयोग कबाड़ को इकट्ठा करने के लिए किया जाता है। यह एक तरह से सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा है। यहाँ कई युवाओं को नशा करते हुए भी देखा जा सकता है। वे भी कबाड़ को इकट्ठा करने और उसका गैरकानूनी तरीके से व्यवसाय करने वाले नेटवर्क का हिस्सा हैं।

फोटो साभार: GIA

जहाँगीरपुरी में मकानों का अवैध निर्माण

यहाँ एक लाइन से घर बने हुए हैं, जो सी ब्लॉक में मस्जिद से सटे हुए हैं। इन्हीं घरों से 16 अप्रैल, 2022 को हनुमान जयंती की शोभा यात्रा पर पथराव शुरू हुआ था। ये ग्रीन लैंड पर अवैध घर हैं।

फोटो साभार: GIA

मदरसों की संख्या बढ़ी

बताया जा रहा है कि इस इलाके में पिछले कुछ वर्षों में मदरसों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यह जाँच का विषय है कि क्या ये मदरसे ही इस इलाके में महिलाओं और बच्चों को कट्टरपंथी बनाने के लिए जिम्मेदार हैं। 16 अप्रैल 2022 को हुए दंगों की फुटेज में बड़ी संख्या में बच्चों को पथराव में पुलिस और शोभा यात्रा पर पथराव करते हुए देखा गया था।

हनुमान जयंती पर हमला

गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2022 को हनुमान जयंती के मौके पर हिंदुओं ने शोभा यात्रा निकाली थी, जिसमें कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हमला कर दिया था। कट्टपंथियों ने शोभा यात्रा पर पथराव और काँच की बोतलों से हमला किया था। इस हिंसा में कई लोग बुरी तरह घायल हुए थे। दंगाइयों के द्वारा चलाई गई गोली में एक पुलिसकर्मी भी घायल हो गया था। खास बात ये है कि जहाँगारपुरी की हिंसा में आरोपित अंसार के आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता होने का शक है। उसने दिल्ली चुनाव के दौरान पार्टी के लिए सक्रिय रूप से प्रचार किया था। इस मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपित की पहचान गुलाम रसूल उर्फ गुल्ली के तौर पर हुई है

‘हम दादागिरी तोड़ना जानते हैं’: लाउडस्पीकर विवाद पर भड़के CM उद्धव, विरोध करने वालों को बताया ‘घंटाधारी हिन्दू’

महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा पर जारी सियासत के बीच राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पहली बार बयान दिया है। उन्होंने सांसद नवनीत राणा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर कोई हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहता है तो घर आए, लेकिन अगर दादागीरी करेगा तो शिवसेना प्रमुख बाला साहब ने हमें इसे तोड़ना सिखाया है।

सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो जल्द ही एक जनसभा आयोजित कर फर्जी हिंदू समर्थक कार्यकर्ताओं से बात करना चाहते हैं। शिवसेना प्रमुख कहते हैं कि मेरी कमीज तुम्हारी कमीज से अधिक भगवा कैसे है? इसको लेकर जल्द ही एक बैठक कर इनका मुखौटा उतारूँगा। हिंदुत्व की अनदेखी के आरोप पर ठाकरे कहते हैं कि क्या हिंदुत्व कोई धोती है। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान की गदा की तरह गदाधारी है। अगर आप हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहते हैं तो फोन कर घर आइए, अगर आप दादागीरी की सहारा लेते हैं तो हम जानते हैं कि इसे कैसे तोड़ना है।

उन्होंने ये भी कहा कि वो गदाधारी हिंदू हैं और बाकी घंटाधारी हिंदू हैं और उनके कार्यकर्ताओं को घंटाधारियों से हिंदुत्व सीखने की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने का एक तरीका होता है। शिवसेना प्रमुख ने पूछा कि क्या वो केवल मुंबई के लोगों के लिए काम करते हैं और मुंबई का विकास करेंगे? उनका ये भी कहना है कि कुछ लोगों के पेट में एसिडिटी हो गई है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था, जिसके बाद 23 अप्रैल, 2022 को मुंबई की खार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उन पर मुंबई पुलिस ने राजद्रोह (आईपीसी की धारा 124 A) और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा उन पर आईपीसी की धारा 353 (सरकार काम में बाधा) के तहत केस दर्ज किया गया था।

ट्विटर को मिलेगा नया ‘मालिक’! एलन मस्क के ऑफर को स्वीकार करने के कगार पर बोर्ड, ₹3.2 लाख करोड़ में डील: रिपोर्ट

दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क सोमवार (25 अप्रैल, 2022) की रात माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) के मालिक बन सकते हैं। खबरों की माने तो ट्विटर इंक एलन मस्क (Elon Musk) के प्रस्तावित 54.20 (4183.84 रुपए) डॉलर प्रति शेयर नकद में खरीदने के सौदे के बेहद करीब है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एलन मस्क ने 43 अरब डॉलर (3.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा) में ट्विटर को 100 फीसदी खरीदने का ऑफर दिया है।

मस्क ने कहा था कि यह उनका ‘सर्वश्रेष्ठ और अंतिम’ ऑफर है। सोमवार (25 अप्रैल 2022) को ट्विटर बोर्ड ने अपने शेयरधारकों से लेनदेन की सिफारिश करने के लिए मुलाकात की है। ऐसे में उम्मीद है कि ट्विटर आज रात तक इस सौदे के लिए राजी हो सकता है। ट्विटर के शेयर प्रीमार्केट ट्रेडिंग में भी उछाल देखने को मिला है। न्यूयॉर्क में ट्रेडिंग शुरू होते ही ट्विटर के शेयर 3.9% बढ़कर 50.84 डॉलर पर पहुँच गए।

शेयरों की ये कीमत चुकाने को तैयार मस्क

इस डील के लिए टेस्ला के सीईओ एलन मस्क हर शेयर का 54.20 डॉलर नकद में देने को तैयार हैं। हाल ही में ट्विटर बोर्ड ने मस्क के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इसके बाद भी मस्क ने इस डील को लेकर कई ट्वीट किए और अब इस रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत पहले से ज्यादा बेहतर है। बीते दिनों टेस्ला के सीईओ ने कहा था कि उन्होंने इस डील के लिए 46.5 अरब डॉलर की रकम इकठ्ठा कर ली है।

ट्विटर को खरीदने के लिए एलन मस्क ने कंपनी बोर्ड को जो पत्र लिखा था, उसमें उन्होंने कहा था कि ट्विटर में ‘राइट टू स्पीच’ की असीमित क्षमता है, लेकिन वर्तमान हालात में कंपनी अपनी इस क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि ट्विटर को एक निजी कंपनी में बदलने की जरूरत है और वो इसे अनलॉक करना चाहते हैं। उन्होंने वैनक्यूबर में टीईडी कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए डील पूरी होने के बाद के अपने प्लान के बारे में भी जिक्र किया था।

मोदी सरकार ने 16 YouTube चैनलों को किया बैन, इनमें 6 पाकिस्तानी: फैला रहे थे भारत विरोधी एजेंडा, 68 करोड़ व्यूअरशिप

केंद्र सरकार (Central Government) ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फेक न्यूज फैलाने के आरोप में 16 यूट्यूब चैनलों (YouTube Channel Banned) पर प्रतिबंध लगा दिया है। बैन किए गए चैनलों में 6 पाकिस्तानी थे और बाकी के 10 भारत के ही हैं। सरकार का कहना है कि ये यूट्यूब चैनल भारत में दहशत पैदा करने, सांप्रदायिक विद्वेश फैलाने और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए फेक न्यूज फैला रहे थे। इन्हें भारत में 68 करोड़ से अधिक लोग देखते हैं।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि इन यूट्यूब चैनलों के द्वारा प्रकाशित किए गए कंटेंट में एक समुदाय को आतंकवादी के तौर पर दिखाया गया है। इसके अलावा ये धार्मिक समुदायों के बीच नफरत को बढ़ावा दे रहे थे। इसके जरिए सरकारी व्यवस्था और साम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ा गया। इतना ही नहीं, कोरोना लॉकडाउन को लेकर भी इन यूट्यूब चैनलों ने खूब फेक न्यूज फैलाई, जिससे प्रवासी मजदूरों के लिए खतरा पैदा हुआ।

सरकार का इस मामले में कहा है कि जिन यूट्यूब चैनलों को बैन किया है इन सभी ने इंडियन आर्मी, रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत की स्थिति और जम्मू-कश्मीर जैसे मामलों पर झूठी खबरें चलाई, जिससे देश की संप्रभुता को चोट पहुँचाने का प्रयास किया गया। इससे पहले 23 अप्रैल 2022 को भारत सरकार ने एक एडवायजरी जारी कर इन यूट्यूब चैनलों को झूठे दावे करने से बचने को आगाह किया था।

इससे पहले भी बैन किए जा चुके हैं यूट्यूब चैनल

गौरतलब है कि इससे पहले इसी महीने 5 अप्रैल, 2022 को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित दुष्प्रचार फैलाने के आरोप में 22 YouTube चैनलों और कुछ सोशल मीडिया हैंडल को ब्लॉक कर दिया था। इन सभी पर आईटी एक्ट-2021 के तहत कार्रवाई की गई थी।

इसके अलावा 1 फेसबुक अकाउंट, 3 ट्विटर अकाउंट और 1 वेबसाइट को ब्लॉक करने के संबंध में एक नोटिस जारी किया गया था, जो लगातार भारत के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने में लगे हुए थे। इन चैनलों की व्यूअरशिप 260 करोड़ थी।

‘सार्वजनिक स्थान पर धार्मिक छंदों को पढ़ना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन’: बॉम्बे HC ने राणा दंपति की याचिका ठुकराई, FIR रद्द नहीं

महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा पढ़ने के कारण गिरफ्तार किए गए सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा की दूसरी FIR को रद्द करने से बॉम्बे हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। याचिका पर सोमवार (25 अप्रैल, 2022) को सुनवाई हाई कोर्ट के जस्टिस पीबी वराले और एसएम मोदक की बेंच ने की। कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाएँ अलग-अलग हैं और ये सुनवाई करने के लायक नहीं है।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी दूसरे के घर या फिर धार्मिक छंदों को सार्वजनिक स्थानों पर पढ़ने से इस तरह के ऐलान से किसी दूसरे व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है। राज्य को इस बात की आशंका है कि ऐसे कृत्यों से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ेगी। कोर्ट ने ये भी कहा कि वो याचिकाकर्ताओं की जमानत याचिका पर अपने गुण और दोषों के आधार पर सुनवाई करेगा। बॉम्बे हाई कोर्ट ने नवनीत राणा द्वारा सीएम उद्धव ठाकरे के घर के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने के ऐलान पर नाराजगी जाहिर की।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता जो राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं, उनसे जिम्मेदारी से व्यवहार करने की उम्मीद की जाती है। बड़ी शक्ति बड़ी जिम्मेदारी के साथ आती है। सक्रिय जीवन वाले लोगों के जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा है।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि लाउडस्पीकर और हनुमान चालीसा पर जारी सियासत के बीच अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था, जिसके बाद 23 अप्रैल, 2022 को मुंबई की खार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उन पर मुंबई पुलिस ने राजद्रोह (आईपीसी की धारा 124 A) और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा उन पर आईपीसी की धारा 353 (सरकार काम में बाधा) के तहत केस दर्ज किया गया था। इसी एफआईआर को कोर्ट ने खारिज करने से इनकार कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि इस बीच नवनीत राणा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा, “मुझे 23 तारीख को पुलिस स्टेशन ले जाया गया। 23 अप्रैल को मुझे पूरी रात पुलिस स्टेशन में ही गुजारनी पड़ी। रात को मैंने कई बार पीने के लिए पानी माँगा, लेकिन रातभर मुझे पानी नहीं दिया गया।” नवनीत ने आगे बड़ा आरोप लगाते हुए कहा, “मौके पर मौजूद पुलिस स्टाफ ने कहा कि मैं अनुसूचित जाति की हूँ, इसलिए वह मुझे उसी ग्लास में पानी नहीं दे सकते, जिसमें वे लोग पीते हैं। मतलब मुझे मेरी जाति की वजह से पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया। मैं यह जोर देकर कहना चाहती हूँ कि मेरी जाति की वजह से मुझे बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित रखा गया।”

नवनीत राणा का ये भी आरोप था कि जब रात में उन्हें वॉशरूम जाना था तो पुलिस वालों ने इससे इनकार करते हुए कहा कि वे नीची जाति वालों को अपना बाथरूम इस्तेमाल नहीं करने दे सकते।

जमानत मिलने के कुछ ही देर बाद फिर गिरफ्तार किए गए MLA जिग्नेश मेवाणी, अधिकारियों पर हमला का मामला: असम पुलिस की कार्रवाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में असम से गिरफ्तार हुए गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी को असम की कोकराझार कोर्ट ने सोमवार (25 अप्रैल, 2022) को जमानत दे दी। हालाँकि, असम पुलिस ने जमानत मिलने के कुछ ही देर बाद, ‘अधिकारियों पर हमला करने’ के आरोप में फिर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि कॉन्ग्रेस समर्थित विधायक मेवाणी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले जिग्नेश मेवाणी को पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ किए गए एक ट्वीट के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने अपने ट्वीट में आपत्तिजनक दावा करते हुए लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाथूराम गोडसे की विचारधारा में मानते हैं इसलिए वे देश में शांति की अपील नहीं करेंगे। इसको लेकर उनके खिलाफ असम शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मेवाणी को पुलिस गुवाहाटी के रास्ते कोकराझार ले गई और न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। उन्हें तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था।

मेवाणी पर आपराधिक साजिश के आरोप में सेक्शन 120 बी, सेक्शन 259ए, वैमनस्यता फैलाने के आरोप में धारा 153A, शांति भंग करने के लिए किसी का अपमान करने आरोप में सेक्शन 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके अलावा ट्वीट पोस्ट के लिए उन पर ये आरोप लगे थे, इसलिए आईटी एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश किया गया था और फिर कोर्ट ने उन्हें तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।

जिसके बाद कॉन्ग्रेस ने असम में मेवाणी की रिहाई के लिए विरोध प्रदर्शन भी किया। रविवार (24 अप्रैल, 2022) देर शाम मेवाणी को कोर्ट में पेश किया गया था। देर रात तक इस मामले में जिरह चलती रही। इसके बाद सीजेएम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत से जमानत मिल गई, लेकिन उन्हें कुछ मिनटों के अंदर ही एक अन्य मामले में अरेस्ट कर लिया गया।

हिन्दू विवाह की रीति-रिवाजों का मजाक बनाता है बॉलीवुड, सोशल मीडिया में तस्वीरें बेच कमाते हैं पैसे भी: जानिए इस पवित्र बंधन का महत्व

हिंदू सनातन धर्म में विवाह को बहुत ही पवित्र बंधन माना गया है। विवाह वर एवं वधू के बीच एक अनुबंध, करार या समझौता ना होकर एक पवित्र आध्यात्मिक संबंध है, लेकिन बॉलीवुड वालों के लिए विवाह के मायने कुछ और ही हैं। हाल ही में 5 सालों से रिलेशनशिप में रहे आलिया भट्ट और रणबीर कपूर (Alia Bhatt & Ranbir Kapoor Wedding) हिंदू-पंजाबी रीति रिवाज से शादी के बंधन में बँधे। इसके बाद कपूर हाउस में जमकर पार्टी हुई और दूल्हा-दुल्हन ने केक काटकर जश्न मनाया।

साथ ही बाहों में बाहें डालकर वाइन भी पी। इसके बाद फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी के डिजाइन किए गए कपड़ों में आलिया भट्ट और रणबीर कपूर ने मीडिया वालों को कई पोज देकर अपनी तस्वीरें दी। खैर, ऐसा करके वह लाइम लाइट में तो आ गए, लेकिन इन लोगों ने सनातन धर्म को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

यही नहीं, इससे पहले कैटरीना कैफ, विक्की कौशल, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह जैसे कई कलाकारों ने भी हिंदू विवाह और इससे जुड़े रीति-रिवाजों का केवल मजाक ही उड़ाया है। उन्होंने अपने विवाह को केवल फैशन और ट्रेंड से जोड़कर देखा। फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी का डिजाइन किया हुआ लहंगा और कपड़े ​पहने बिना तो इनकी शादी मानो पूरी ही नहीं होती है। सिंदूर, बिंदी, चूड़ियाँ, लहँगा, साड़ी, पगड़ी, हल्दी, मेहंदी की रस्म इनके लिए केवल सुर्खियाँ बटोरने से ज्यादा और कुछ नहीं है। यही नहीं, अपने सोशल मीडिया पर शादी, मेहंदी और संगीत सेरेमनी की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर ये लोग करोड़ों रुपए कमाते हैं।

हिंदू सनातन धर्म में विवाह का महत्व

हिंदू सनातन धर्म में विवाह को बहुत ही पवित्र बंधन माना गया है। हिंदू धर्म में विवाह और इससे जुड़ी रस्मों का भी विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में हमारे सोलह संस्कार बताए गए हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण विवाह संस्कार होता है। अन्य मजहबों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है, जिसे किसी विशेष परिस्थिति में तोड़ा भी जा सकता है, लेकिन हिंदू विवाह में पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का संबंध होता है, जिसे किसी भी तरह से तोड़ा नहीं जा सकता है। ​अग्नि के सामने सात फेरे लेने के बाद पति-पत्नी तन, मन और आत्मा से पवित्र बंधन में बँध जाते हैं। यानी कि हिंदू धर्म में विवाह के जरिए वर-वधू का, जिनके पास दो शरीर, दो मन, दो हृदय, दो प्राण और दो आत्माएँ होती हैं उनका आपस में मिलन हो जाता है। इसे बेहद अटूट मिलन कहा गया है।

विवाह पवित्र संस्कार

भारतीय संस्कृति में कई तरह के विवाह प्रचलित हैं। इनमें ब्रम्ह, देव, प्रजापत्य, असुर, गंधर्व प्रमुख हैं। इनमें गठबंधन को विवाह का प्रतीक माना जाता है। हिंदू विवाह में गठबंधन के समय वर के पल्लू में सिक्का, हल्दी, अक्षत, पुष्प, दूब इत्यादि रखकर वधू के पल्लू से गाँठ बाँधी जाती है। सिक्के मतलब यह होता है कि धन पर केवल एक शख्स का ही अधिकार नहीं होगा, बल्कि घर में आने वाले धन के पति और पत्नी दोनों समान रूप से अधिकारी होंगे। फूल इस बात का प्रतीक होता है कि दोनों सदैव एक-दूसरे को देखकर प्रसन्न रहेंगे। वहीं, हल्दी सेहत, दूब हरियाली और अक्षत अन्न को दर्शाती है। यानी, यह गठबंधन इस बात का प्रतीक होता है कि वर-वधू जीवनभर के लिए एक-दूसरे के हो गए हैं। वर-वधू पर भी इस बात की जिम्मेदारी होती है कि वे इस गठबंधन को कभी भी टूटने नहीं देंगे। इन्हीं परंपराओं के कारण विवाह को पवित्र संस्कार माना गया है। इसके अलावा हिंदू विवाह में सिंदूर, सात फेरों, चूड़ियों और कन्यादान का विशेष महत्व होता है।

विवाह की धार्मिक महत्ता मनु ने इस प्रकार लिखी है-

दश पूर्वांन् परान्वंश्यान् आत्मनं चैकविंशकम्।
ब्राह्मीपुत्रः सुकृतकृन् मोचये देनसः पितृन्।।

अर्थात, ‘ब्राह्मविवाह’ से उत्पन्न पुत्र अपने कुल की 21 पीढ़ियों को पाप से मुक्त करता है- 10 अपने आगे की, 10 अपने से पीछे और एक स्वयं अपनी। भविष्य पुराण में लिखा है कि जो किसी लड़की से ब्राह्मविधि से विवाह करते हैं, वे निश्चय ही अपने सात पूर्वजों और सात वंशजों को नरक में जाने से बचा लेते हैं।

‘शबाब मिलता है’: मैनेजर जहीर ने HDFC बैंक में कराया नमाज और रोजा-इफ्तारी, सपा नेता ओसामा भी हुए शामिल, बोले हिन्दू संगठन – ‘गजवा-ए-हिन्द’

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक बैंक के अंदर नमाज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो HDFC बैंक की शहर शाखा का बताया जा रहा है। बाद में बैंक के ही अंदर रोज़ा-इफ्तारी का कार्यक्रम करवाया गया। इफ्तारी कार्यक्रम करवाने वाले ब्रांच मैनेजर का नाम ज़हीर अब्बास है। यह आयोजन शुक्रवार (22 अप्रैल, 2022) को हुआ था। हिन्दू संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की माँग की है।

रोज़ा इफ्तारी के आयोजकों में डिप्टी मैनेजर अनवर रिज़वी भी

एक स्थानीय पोर्टल के मुताबिक, इस आयोजन में बैंक के मुस्लिम खाताधारकों को बुलवाया गया था। नमाज़ बैंक के काउंटर के आगे हुई। इफ्तारी के लिए पूरी तैयारी की गई थी। खाने में बिरयानी का इंतज़ाम था। बैंक स्टाफ ने खाने के साथ रोज़ेदारों के लिए उपहार भी दिए। इस दौरान सभासद मुजीब अंसारी, सपा नेता ओसामा अंसारी के अलावा बैंक की तरफ से ब्रांच मैनेजर जहीर अब्बास, डिप्टी ब्रांच मैनेजर अनवर रिजवी और अब्दुल अंसारी शामिल हुए।

बैंक काउंटर पर नमाज़

“इफ्तारी अच्छी चीज”: ब्रांच मैनेजर जहीर अब्बास

बैंक के ब्रांच मैनेजर जहीर अब्बास ने इस इफ्तारी के बाद बयान दिया, “यह हर साल होता था। 2 साल से कोविड के चक्कर में हम ये करा नहीं पा रहे थे। ये लोगों से कनेक्ट करने के लिए अच्छा है। हम लोगों के इस्लाम मजहब में रोजा इफ्तारी एक अच्छी चीज होती है। रोज़ा इफ्तारी करवाने से शबाब (पुण्य) मिलता है।”

बजरंग दल ने उठाई कार्रवाई की माँग

बाराबंकी से बजरंग दल के प्रान्त विद्यार्थी प्रमुख अखिलेश सिंह ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया, “बैंक परिसर में नमाज़ के आरोपितों के खिलाफ हम प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं। ये अनजाने में नहीं किया गया है, बल्कि इसके पीछे गज़वा-ए-हिन्द की सोच है।” बजरंग दल के ही अवध प्रान्त संयोजक सुनील सिंह ने कहा, “आज बैंक ने नमाज़ पढ़ी गई गई। कल कहीं और पढ़ी जाएगी। प्रशासन इन सभी पर कार्रवाई करे।’

“प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत नहीं” : बाराबंकी जिला प्रशासन

पुलिस अधीक्षक बाराबंकी के PRO (जनसम्पर्क अधिकरी) ने ऑपइंडिया को बताया, “घटना लगभग 4 दिन पुरानी है। बैंक के अंदर नमाज का प्रकरण हमारे संज्ञान में आया था। लेकिन, इस मामले में पुलिस के हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं थी।” जबकि DM बाराबंकी ने कहा, “मामला बैंक के अंदर का था। कार्रवाई आदि उनका आंतरिक विषय है। हम लोगों की जानकारी में ये प्रकरण कल ही आया है। अभी तक हमारी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।”

ऑपइंडिया ने इस पूरे प्रकरण पर ब्रांच मैनेजर ज़हीर अब्बास का पक्ष जानने के लिए उनके नंबर पर फोन मिलाया, लेकिन ज़हीर का फोन उठा नहीं।