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मौलाना के भड़काने पर थाने और अस्पताल पर हमला, जिले भर में भड़के दंगे: कमिश्नर की कार पर चढ़ दिया था भाषण, 120+ गिरफ्तार

हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर कर्नाटक के हुबली पुलिस स्टेशन पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमले को लेकर नया खुलासा हुआ है। ‘विजयवाणी’ की रिपोर्ट में दावा किया है कि है कि शनिवार को मौलाना वसीम मोबालिक उर्फ पठान ने ओल्ड हुबली पुलिस स्टेशन के बाहर भड़काऊ भाषण देते हुए मुस्लिमों को उकसाया, जिसके कारण हुबली पुलिस थाने पर हमला किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, मौलाना वसीम को ओल्ड हुबली पुलिस स्टेशन के बाहर हुबली के पुलिस कमिश्नर की कार पर चढ़कर भड़काऊ भाषण देते देखा गया था। अब पुलिस को इस बात का शक है कि मौलाना के भड़काने पर ही मुस्लिम कट्टरपंथियों की उन्मादी भीड़ ने ही हुबली पुलिस स्टेशन के पास स्थित एक मंदिर और अस्पताल में भी पत्थरबाजी की थी। पठान की तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं, जिसमें नीले रंग का कपड़ा पहने मौलाना एक ऊँची जगह पर खड़ा होकर लोगों को भड़का रहा था। इसी के बाद जिले में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क उठे।

पुलिस ने कमिश्नर की कार पर चढ़कर भड़काऊ भाषणबाजी करने वाले मौलाना के वीडियो को एकत्र कर लिया है। इस वीडियो में वसीम के बगल में स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता अल्ताफ हल्लूर को भी उसे भड़काऊ भाषण देने के लिए प्रोत्साहित करते देखा जा सकता है।

मौलाना ने दरगाह पर दिया था भड़काऊ भाषण

बाताया जाता है कि मौलाना वसीम ने पहले हुबली की एक दरगाह पर उन्मादी भाषण दिया और इसके बाद उसने पुलिस स्टेशन के बाहर भी यही किया। उसके भड़कावे में आकर हुबली पुलिस स्टेशन के बाहर 200 से अधिक कट्टरपंथी मुस्लिम इकट्ठे हो गए थे। वहीं भीड़ को उकसाने के बाद मौलाना खुद फरार हो गया। अब पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

इस बीच, पुलिस ने हिंसा के सिलसिले में 120 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस अभियान के लिए 8 स्पेशल टीमों को गठित किया गया है। वहीं पुलिसिया कार्रवाई के बाद कई आरोपित गायब हो गए हैं।

वीडियो सोशल मीडिया पर मत डालना: मौलवी

एक ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक मौलवी मुस्लिम कट्टरपंथियों को सम्बोधित करते हुए उन्हें भड़काऊ वीडियो को सोशल मीडिया पर नहीं शेयर करने की नसीहत देता है। उसे इस बात का डर था कि इसके जरिए पुलिस दंगाइयों की पहचान कर लेगी।

ऑडियो में मौलवी को कहते हुए सुना जा सकता है, “पुलिस हमारे लोगों को पहचान लेगी और वे उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे। हमारे लोगों को निशाना बनाया जाएगा और जेल भेजा जाएगा। कल जो कुछ भी हुआ वह अल्लाह के आशीर्वाद के कारण हुआ।”

मुस्लिम भीड़ पुलिसवालों को भी मारना चाहती थी

हुबली हिंसा के मामले में पुलिस निरीक्षक जगदीश की शिकायत पर हुबली थाने पर हमले के मामले में मुस्लिम भीड़ के खिलाफ दो केस दर्ज किए गए थे। जगदीश के मुताबिक, मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ ने उनके ऊपर हमला कर दिया, जिस कारण उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। उन्हें ओल्ड हुबली थाने के कर्मियों को बचाने के लिए तैनात किया गया था।

उन्होंने कहा, “भीड़ ने हमें घेर लिया था औऱ हम जीप के अंदर बैठ गए। मुस्लिम भीड़ ने हमें हमारा काम करने से रोका और हत्या की भी धमकी दी। ओल्ड हुबली महिला थाने के बाहर भीड़ जमा हो गई थी। हमें उच्च अधिकारियों से वहाँ जाने के आदेश मिले। रात 10.30 बजे हम अरविंद नगर के लिए निकले। 100-150 लोगों की भीड़ ने हमें रोक दिया। भीड़ के पास धारदार हथियार, रॉड और पत्थर थे।”

उल्लेखनीय है कि हुबली में इस्लामिक कट्टरपंथियों ने एक व्हाट्सएप पोस्ट को लेकर हिंसा की थी

हमले से एक रात पहले जहाँगीरपुरी में लाठी-डंडे और पत्थर-बोतल लिए युवक क्या कर रहे थे? पहले से थी दंगे की साजिश, देखिए

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में जिस तरह से हनुमान जन्मोत्सव शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी और गोलीबारी हुई, उससे स्पष्ट था कि पहले से इसके लिए तैयारी थी। दिल्ली पुलिस तो लगातार इसका जवाब ढूँढ ही रही है कि दंगा के पीछे क्या आपराधिक साजिश थी। पुलिस एक-एक कर 200 वीडियोज खँगालने में लगी हुई है। घटना से एक रात पहले का जो वीडियो सामने आया है, जिससे ये आशंका बलवती होती है कि हिंसा की तैयारी पहले से ही थी।

2 मिनट के इस वायरल वीडियो में 6 लड़के खड़े दिख रहे हैं। कुछ देर बाद तीन और लोग वहाँ आ जाते हैं, जो बनियान पहने हुए होते हैं। एक लड़के के हाथ में बोतल या पत्थर भी दिख रहा है। साथ ही एक अन्य व्यक्ति के बाद में बोतल दिखाई दे रही है। सीसीटीवी फुटेज में कुछ युवक लाठी-डंडे लिए भी दिख रहे हैं। ये वही जगह थी, जहाँ से हनुमान जन्मोत्सव शोभा यात्रा निकलने वाली थी। सफ़ेद, लाल, नीले और काले टीशर्ट्स में ये लड़के लाठी-डंडे ढूँढ़ते हुए दिख रहे हैं।

इसके अगले ही दिन 16 अप्रैल, 2022 को अचानक जो इस्लामी भीड़ जुटी, उनके हाथों में लाठी-डंडे थे और उन्होंने तलवारों से भी वार किया था। पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट भी किसी साजिश की ओर इशारा कर रही है। घरों की छतों से बड़ी मात्रा में पत्थरों-बोतलों का आना भी ये संकेत है कि पहले से इन्हें इकट्ठा कर के रखा गया था। पुलिस वीडियो की जाँच कर रही है। वहाँ मौजूद घायल पुलिसकर्मियों ने भी भीड़ के पास हथियार होने की बात कही थी।

कुछ स्थानीय लोगों का भी कहना है कि रात को जब ये लड़के लाठी-डंडे इकट्ठा कर रहे थे तो उन्होंने ऐसे तत्वों का विरोध भी किया था। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी भी हो गई थी। स्थानीय लोगों के बयान दर्ज करने के बाद पुलिस वीडियो में दिख रहे लड़कों को चिह्नित करेगी। ‘पाँच वक्त के नमाजी’ सोनू चिकना का भी इस हिंसा में बड़ा हाथ है। आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज किया गया है। उसे गिरफ्तार करने गई पुलिस पर पत्थरबाजी करने के आरोप में सलमा पर आरोप लगा है।

जिस वसीम के दोनों कटे हाथ दिखा खरगोन में बुलडोजर को घेर रहे थे लिबरल, उसका न घर टूटा-न गुमटी: बोला- मेरे नाम पर अफवाह न फैलाएँ

मध्य प्रदेश के खरगोन में हिंसा भड़कने के बाद प्रशासन ने अपराधियों की संपत्तियों पर जो कार्रवाई की, उससे वामपंथी काफी उखड़े थे। इसीलिए उन्होंने प्रशासन को गलत साबित करने के लिए एक नैरेटिव चलाया जिसमें ये बताया गया कि कैसे प्रशासन उन लोगों के विरुद्ध अपनी कार्रवाई कर रहा है जिनका इससे लेना-देना नहीं है। अपने दावों को साबित करने के लिए वो जिस वीडियो को शेयर कर रहे थे वो वीडियो और तस्वीर वसीम की थी जिसके दोनों हाथ नहीं हैं।

ये तस्वीर शेयर करके वामपंथी ये सवाल उठा रहे थे कि पुलिस ने खरगोन हिंसा में अपराधियों के ऊपर अगर कार्रवाई की है, तो उनमें एक दिव्यांग वसीम है उसकी भी तो दुकान को तोड़ा गया है। तस्वीर और दावे के साथ इन लोगों का मकसद था कि ये बताया जाए कि पुलिस निर्दोषों पर कार्रवाई कर रही है क्योंकि अगर वसीम के हाथ ही नहीं है तो वो पत्थरबाजी कैसे कर सकता है और पत्थरबाजी नहीं कर सकता है उसकी गुमटी को क्यों तोड़ा गया।

शिवसेना की महिला नेता प्रियंका चतुर्दी ने भी वसीम की तस्वीर को शेयर किया था। उन्होंने लिखा था, “क्या आप खरगोन के पत्थरबाज से मिले हैं जिन्हें मध्य प्रदेश सरकार ने चिह्नित किया है। वसीम की दुकान बुलडोजर द्वारा गिरा दी गई जैसे प्रधानमंत्री जन आवास योजना के तहत बना घर हो।” प्रियंका की तरह तमाम लोगों ने वसीम शेख के आधार पर प्रशासन पर सवाल उठाए। आप ट्विटर पर #wasimshaikh सर्च करेंगे तो आपको एक साथ वो सारे ट्वीट देखने को मिलेंगे जिसमें वसीम की तस्वीर शेयर है।

अब सवाल है कि ये दावा किया किस आधार पर गया? तो बता दें कि प्रशासन पर जो इल्जाम लगने शुरू हुए उनका आधार वसीम का पिछला बयान था, जिनसे अब वो पलट गया है। पुरानी वीडियो में वो बता रहा है कि कैसे उसके दोनों हाथ कटे हैं और वो अपनी गुमटी से पैसे कमाकर परिवार का भरण-पोषण करता था। मगर प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाए जाने के बाद उस पर आय का कोई स्रोत नहीं रह गया। अपनी वीडियो में वसीम ने माँ से लेकर बच्चों तक को दिखाकर ये दुख जाहिर किया था।

और नई वीडियो में प्रशासन के सामने स्वीकार कर रहा है कि उसके पिछले दावे गलत हैं। नई वीडियो में वसीम कहता है, “मैं शहर की जनता से ये विनती करता हूँ कि मेरी पोस्ट पर अफवाह न फैलाएँ न तो मेरा घर टूटा है और न ही गुमटी प्रशासन द्वारा तोड़ी गई है। झूठी अफवाहों से सावधान रहे। शांति का माहौल बनाएँ। मेरे लिए और अपन लिए दुआ करें कि शहर दोबारा से वैसा ही हो जाए जैसे पहले था। हर त्योहार हँसी-खुशी से मनाएँ। धन्यवाद।”

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ वसीम की फोटो शेयर करके अब भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। वामपंथी धड़ा इस झूठ को आगे बढ़ा रहा है। उस बीच खरगोन की जिलाधिकारी ने बयान दिया है कि प्रशासन ने संपत्तियों पर कार्रवाई कि लेकिन इसमें वसीम की दुकान को कोई नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने हर किसी से अफवाहों से बचने को कहा और चेतावनी दी कि झूठी खबर फैलाने पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

ताज़ा अपडेट्स: वसीम ने फिर से अपना बयान बदलते हुए अलग-अलग बातें की है। अब उसने बयान दिया है कि प्रशासन ने उसे रुपए देकर उससे कहा था कि वो मीडिया में ये बयान दे कि उसकी गुमती को प्रशासन ने नहीं तोड़ा है।

पश्चिम बंगाल में मजदूरी कर परिवार का पेट पालते थे 40 साल के नाग, BJP का करते थे समर्थन: घर के बाहर पेड़ से लटके मिले

पश्चिम बंगाल में एक बीजेपी कार्यकर्ता का शव संदिग्ध स्थितियों में पेड़ से लटका मिला। मृतक की पहचान पूर्ण चंद्र नाग के तौर पर हुई है। व​ह मजदूरी कर अपना घर चलाते थे। बीरभूम जिले के मल्लारपुर कस्बे में मंगलवार (19 अप्रैल 2022) तड़के अपने ही घर के बाहर वह पेड़ से लटका मिले।

वीडियो कृप्या अपने विवेक से देखें।

नाग सोमवार को अपने घर नहीं लौटे थे। जब परिजन उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराने जा रहे थे, तभी उन्होंने उनका शव घर के पास एक पेड़ से लटका हुआ पाया। 40 वर्षीय पूर्ण चंद्र दिहाड़ी मजदूर थे। वह ममता बनर्जी सरकार की नीतियों के खिलाफ थे और भाजपा के कट्टर समर्थक थे। हालाँकि, रिपोर्ट्स बताती हैं कि वे राजनीतिक गतिविधियों में इतना सक्रिय नहीं थे।

मल्लारपुर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक इस मामले में कोई भी शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। बीजेपी कार्यकर्ता ने आत्महत्या की है या फिर यह सुनियोजित राजनीतिक हत्या है, इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं हैं। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि हो सकता है कि पूर्ण चंद्र की हत्या राजनीतिक कारणों से की गई हो। वहीं, मृतक के परिवार वालों ने भी यह दावा किया है कि वह गाँव में भाजपा कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे, इसलिए टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें मारकर शव पेड़ से लटका दिया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2021 के नतीजे घोषित होने के बाद जबरदस्त राजनीतिक हिंसा हुई थी। विपक्षी दलों खासकर बीजेपी समर्थकों और उनकी संपत्तियों को निशाना बनाने के आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगे थे। इसके बाद राज्य से बड़े पैमाने पर पलायन भी हुआ था। काफी संख्या में लोग असम चले गए थे जहाँ बीजेपी ने उनकी मदद की थी। उनके रहने और भोजन की व्यवस्था की गई थी।

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद बड़े पैमाने पर हुई हिंसा को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी अपनी फाइनल रिपोर्ट में कलकत्ता हाई कोर्ट को बताया था, “राज्य में ‘कानून का शासन’ नहीं बल्कि ‘शासक का कानून’ है। करीब 50 पेज की NHRC की इस रिपोर्ट में राज्य प्रशासन की कड़ी आलोचना की गई थी और कहा गया था कि राज्य प्रशासन ने जनता में अपना विश्वास खो दिया है।”

त्रिपुरा में फैला ‘स्वाइन फीवर’, बड़ी संख्या में सूअरों को मारने का दिया गया आदेश: कई टीमों का गठन, मिजोरम में पहले से कहर

सूअरों को होने वाली बुखार अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) पूर्वोत्तर भारत में तेजी से फैल रहा है। मिजोरम में कहर मचाने के बाद अब यह बीमारी त्रिपुरा में भी पहुँच गई है। त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले के देवीपुर स्थित पशु संसाधन विकास विभाग (ARDD) द्वारा संचालित सरकारी प्रजनन फार्म में पशुधन में ASF के मामलों का पता चला है। हालात को देखते हुए सरकार ने बड़ी संख्या में सुअरों को मारने का आदेश दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बीमारी का पता चलते ही अगरतल्ला रोग जाँच केंद्र की टीम ने इस बीमारी से ग्रस्त फार्म का दौरा किया। इसके अलावा बीमारी को और अधिक फैलने से रोकने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमों का गठन किया गया है। पशुपालन विभाग द्वारा संचालित रोग जाँच लैब के एक अधिकारी ने कहा कि बीते 7 अप्रैल 2022 को जाँच के लिए तीन सैंपलों को भेजा गया था, जिनकी 13 अप्रैल को रिपोर्ट आने के बाद सभी नमूने पॉजिटिव मिले हैं। इसके अलावा खेतों में रहने वाले सुअरों में भी इस बीमारी के लक्षण देखे गए हैं।

सुअरों के दफनाने के लिए खोदे गए गड्ढे

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी को रोकने के लिए पहले चरण में सुअरों को बड़े पैमाने पर मारने के बाद उन्हें दफनाने के लिए टीम ने 8-8 फीट के गड्ढे खोदे हैं। कोशिश ये है कि शुरुआती चरण में एक वर्ग किलोमीटर के दायरे में सभी सुअरों को मार दिया जाएगा और बीमारी को फैलने से रोकने के लिए उन्हें दफन किया जाएगा। ताकि इसे खेत की परिधि के अंदर ही रोका जा सके।

रिपब्लिक टीवी के सूत्रों के मुताबिक, सुअरों को दफनाने के बाद राज्य प्रयोगशाला के अधिकारी केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगे और मुख्य केंद्रीय सचिव को हालातों से रूबरू कराएँगे। इसके अलावा, सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रयोगशाला अधिकारी भारत सरकार को एक पत्र लिखेंगे और केंद्र मुख्य सचिव को मामले से अवगत कराएगा। पशु संसाधन विभाग के फॉर्म में कुल 265 सुअर थे, जिनमें से 63 की मौत हो गई है। ऐसे में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।

गौरतलब है कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर मिजोरम में पहले ही कहर बरपा चुकी है। यहाँ संक्रमण बढ़ने के बाद 770 पशुओं को मार दिया गया है। बीमारी से आइजोल, चम्फाई, लुंगलेई और सैतुअल जिलों के कम से कम 17 गाँव प्रभावित हैं।

क्या है अफ्रीकन स्वाइन फीवर

यह सुअरों में पाई जाने वाली संक्रामक बीमारी है। स्वाइन फ्लू और अफ्रीकन स्वाइन फीवर अलग हैं। यह बीमारी सुअरों में काफी तेजी से फैलती है। हालाँकि, राहत भरी खबर ये है कि इसका इंसानों पर असर नहीं होता

परिसर के बाहर न जाए लाउडस्पीकर की आवाज, जुलूस निकालने से पहले लेनी होगी अनुमति: CM योगी ने 4 मई तक अफसरों की छुट्टियाँ भी निरस्त की

हिंदू नववर्ष, रामनवमी और हनुमान जन्मोत्सव पर देश के अलग-अलग राज्यों में शोभायात्राओं पर हुए हमलों के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई कड़े निर्देश दिए हैं। यूपी में बिना अनुमति के कोई भी जुलूस और धार्मिक यात्रा निकालने पर रोक लगा दी गई है। आयोजकों को जुलूस के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखने के संबंध में शपथ पत्र भी देना होगा। नियमों का उल्लंघन होने पर कठोर कार्रवाई की बात भी कही गई है।

सीएम ने अफसरों को ये निर्देश भी दिए हैं कि धार्मिक जुलूस की अनुमति उन्हीं आयोजनों में दिए जाएंँ जो पारंपरिक हों। नए आयोजनों को अभी अनवाश्यक रूप से अनुमति न दी जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। दिशा-निर्देश में कहा गया है कि माइक का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित हो कि माइक की आवाज़ संबंधित परिसर से बाहर न जाए। इससे अन्य लोगों को कोई असुविधा नहीं हो। नए स्थलों पर माइक लगाने की अनुमति नहीं देने को कहा है।

इस दिशा निर्देश को सख्ती से लागू करवाने के लिए योगी सरकार ने थानाध्यक्ष, सीओ और पुलिस कप्तान से लेकर जिलाधिकारी मंडलायुक्त तक सभी प्रशासनिक/पुलिस अधिकारियों का 4 मई तक का अवकाश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। जो अधिकारी वर्तमान में अवकाश पर हैं, उन्हें अगले 24 घंटे के भीतर तैनाती स्थल पर वापस लौटने को कहा गया है।

यूपी सरकार ने कहा कि आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व-त्योहार हैं। रमजान का महीना चल रहा है। ईद और अक्षय तृतीया एक ही दिन संभावित है। ऐसे में वर्तमान परिवेश को देखते हुए पुलिस को अतिरिक्त संवेदनशील रहना होगा। सर्कुलर जारी करते हुए योगी सरकार ने कहा कि हर एक पर्व शांति और सौहार्द के बीच संपन्न हों, इसके लिए स्थानीय जरूरतों के दृष्टिगत सभी जरूरी प्रयास किए जाएँ। शरारतपूर्ण बयान जारी करने वालों के साथ कड़ाई से पेश आएँ। माहौल खराब करने की कोशिश करने वाले अराजक तत्वों के साथ पूरी कठोरता की जाए।

आदेश दिया गया है कि धार्मिक कार्यक्रम, पूजा-पाठ आदि निर्धारित स्थान पर ही हों। यह सुनिश्चित करें कि सड़क मार्ग, यातायात बाधित कर कोई धार्मिक आयोजन न हो। तहसीलदार, एसडीएम, थानाध्यक्ष, सीओ आदि को अपनी तैनाती के क्षेत्र में ही रात्रि विश्राम करने के लिए कहा गया।

सिलसिलेवार बम धमाकों से दहला काबुल, शिया बहुल क्षेत्र में ट्रेनिंग सेंटर और स्कूल पर आत्मघाती हमला, 25 बच्चों की मौत, कई घायल

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मंगलवार (19 अप्रैल, 2022) को ट्रेनिंग सेंटर और स्कूल को निशाना बनाकर सिलसिलेवार तीन बम विस्फोट हुए। जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहला धमाका पश्चिमी काबुल में मुमताज स्कूल के पास और दूसरा अब्दुल रहीम शाहिद स्कूल के सामने हुआ। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार इन धमाकों में 25 बच्चे मारे गए हैं। काबुल के दश्त-ए-बर्ची इलाके में ये धमाका उस वक्त हुआ जब स्कूली बच्चे स्कूल से बाहर निकल रहे थे।

अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने अब्दुल रहीम शहीद हाई स्कूल के पास विस्फोट की पुष्टि की है। मंत्रालय ने कहा कि घटना की जाँच शुरू कर दी गई है। वहीं मीडिया रिपोर्ट में अफगानिस्तान के हवाले से कहा जा रहा है कि हमारे शिया भाइयों को निशाना बनाया गया है। स्कूल पर तीन से पाँच आत्मघाती हमलावरों ने हमला किया। उनमें से तीन ने बम विस्फोट किए हैं। वहीं मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि पहला हमला काबुल के पश्चिम में मुमताज ट्रेनिंग सेंटर के पास भी विस्फोट हुआ। हमले में 25 की मौत के साथ के साथ कई लोगों के घायल होने की बात सामने आई है।

स्थानीय अफगानिस्तान समाचार को कवर करने वाले एक पत्रकार ने घटना को लेकर ट्वीट किया, “एक आत्मघाती हमलावर ने काबुल के एक स्कूल पर हमला किया, जो मुख्य रूप से शिया बहुल है। विस्फोट अब्दुल रहीम शाहिद स्कूल के मुख्य एग्जिट गेट में हुआ जहाँ छात्रों की भीड़ थी, एक शिक्षक ने जो आश्चर्यजनक रूप से हमले से बच गया उसने मुझे बताया कि कई लोगों के हताहत होने की आशंका है।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, काबुल पुलिस प्रवक्ता खालिद जादरान ने तीन धमाकों की पुष्टि की है, लेकिन जान-माल के नुकसान और धमाके पर और अधिक डिटेल साझा नहीं किए हैं। वहीं इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी भी संगठन ने नहीं ली है।

राजस्थान में 1 ही गाय/भैंस पालने की होगी इजाजत, हर साल लेना होगा लाइसेंस: कॉन्ग्रेस सरकार का नया कानून 213 शहरों में प्रभावी, ₹10000 जुर्माना भी

अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने पशुपालकों के लिए एक नया कानून लागू किया है। इसके अनुसार शहरी क्षेत्र में एक ही गाय या भैंस पालने की इजाजत होगी। इसके लिए भी वार्षिक लाइसेंस लेना होगा। पशु पालने पर 100 वर्ग गज जमीन अतिरिक्त रखना होगा।

नए नियम नगर निगमों और परिषदों के तहत आने वाले क्षेत्रों पर लागू होंगे। यानी इसके दायरे में राज्य के करीब 213 शह​र आएँगे। नए नियमों के अनुसार अगर गोवंश खुले में घूमते पाए गए तो मालिकों को 10000 रुपए का जुर्माना देना होगा। लाइसेंस मिलने के बाद पशु के कान में टैग बाँधा जाएगा। इस पर मालिक का नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज होगा। प्रत्येक 10 दिन पर गोबर शहर शहर से बाहर ले जाकर डालना होगा। रास्ते या खुले स्थान पर पशु को बांधने की मनाही होगी। इन नियमों का पालन नहीं होने पर 1 माह के नोटिस पर लाइसेंस रद्द किया जाएगा। इसके बाद बाद संबंधित व्यक्ति फिर से पशु नहीं पाल सकेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नए मानदंडों के तहत लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदक को उचित स्वच्छता के साथ मवेशियों को रखने के लिए प्रस्तावित स्थान के लिए विवरण प्रस्तुत करना होगा। 1000 रुपए वार्षिक लाइसेंस शुल्क लिया जाएगा। वहीं, जनहित में काम करने वाले शैक्षणिक, धार्मिक व अन्य संस्थानों को आधी राशि देनी होगी।

साथ ही जिस स्थान पर मवेशियों को रखा जाएगा, उसे स्वच्छ रखना जरूरी है। स्वच्छता के साथ किसी भी तरह का समझौता करने पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर बिना परमिट मवेशियों के चारे की बिक्री की अनुमति नहीं होगी। बिना लाइसेंस के चारा बेचने पर भी 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट की माने तो इन नियमों के बाद शहरी क्षेत्र की 95 फीसदी आबादी गाय-भैंस नहीं पाल सकेगी।

मालूम हो कि गोशाला अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए नीति आयोग गोबर के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर एक रोडमैप पर काम कर रहा है। इसके तहत पेट्रोल के विकल्प के तौर पर गोबर से बायो-सीएनजी की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद का कहना है कि इससे आवारा पशुओं की समस्या से निपटा जा सकेगा।

बता दें कि शहरी क्षेत्रों में आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए गुजरात विधानसभा द्वारा इस साल मार्च में एक विधेयक पारित किया गया था। गुजरात विधानसभा ने छह घंटे की बहस के बाद 31 मार्च को गुजरात मवेशी नियंत्रण विधेयक पारित किया था, लेकिन कॉन्ग्रेस और मालधारी समुदाय के कड़े विरोध के बाद गुजरात सरकार ने इस विधेयक को लागू नहीं करने का निर्णय लिया।

ईशनिंदा का आरोप लगा ज़िंदा जलाने के मामले में 6 को मौत की सज़ा, 9 को उम्रकैद, 73 अन्य को भी जेल: Pak में हुई थी मॉब लिंचिंग

श्रीलंकाई नागरिक प्रियंथा कुमारा की मॉब लिचिंग (Priyantha Kumara Lynching case) और जिंदा जलाकर उनकी हत्या करने के मामले में पाकिस्तान (Pakistan) की आतंकवाद रोधी अदालत (ATC) ने सोमवार (18 अप्रैल 2022) को 89 आरोपितों को दोषी करार देते हुए 6 को मौत की सजा (Death sentence) सुनाई और 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी। बाकी के 72 हत्यारों को भी 2-2 वर्ष की जेल हुई है। एक अन्य को पाँच साल की कैद हुई, जबकि एक को बरी कर दिया गया।

इसकी जानकारी खुद पंजाब अभियोजन विभाग के सचिव नदीम सरवर ने लाहौर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। इस मामले में मृतक प्रियंथा के कानूनी वारिसों को दो लाख रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया गया है। वहीं उम्रकैद की सजा पाने वाले दोषियों पर कोर्ट ने दो-दो लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। उल्लेखनीय है कि मामले की सुनवाई ATC अदालत की जस्टिस नताशा नसीम ने की।

सरवर के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने सभी आरोपितों के खिलाफ अपराध को साबित करने के लिए कोर्ट में 43 गवाहों को पेश किया गया। इसके अलावा मामले में गवाहों की गवाही को फास्ट ट्रैक तरीके से एक महीने में पूरा किया गया। कोर्ट ने आरोपितों अपना बचाव करने के लिए भी समय दिया। 12 मार्च 2022 को मामले में आरोप तय किए गए। बाद में सोमवार (18 अप्रैल) को आतंकवाद निरोधी अदालत ने 88 दोषियों को सजा सुनाई।

कब हुई थी ये वारदात

गौरतलब है कि ये घटना पिछले साल 3 दिसंबर 2021 की है। श्रीलंकाई मूल के प्रियंथा कुमारा पाकिस्तान के सियालकोट स्थित एक फैक्ट्री में जनरल मैनेजर थे। अपने काम के प्रति काफी ईमानदार प्रियंथा के कड़क स्वभाव के कारण कंपनी के कर्मचारी पहले से ही उनसे नाराज थे। उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

हत्या से पहले उन्हें काफी प्रताड़ित किया गया था। उनके शरीर की हड्डियों को तोड़ दिया गया था। मामले में पाकिस्तान पीनल कोड (PPC) की धारा 302, 297, 201, 427, 431, 157, 149 और एंटी-पाक विरोधी धारा 7 व 11 के तहत 900 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

मामले में आरोपितों ने एक वीडियो जारी कर कहा था, “हमने अपने साथियों से कहा कि ये गलत हुआ है। हमने अपने मैनेजमेंट से बात की। हम सब मिल कर इकट्ठे हुए और उस पर तेल डाल कर जला दिया। जो भी ऐसा करेगा, हमारे रसूल के नाम पर तो जान भी कुर्बान है। हमारे हदीस में लिखा है कि जो भी नबियों की शान में गुस्ताखी करेगा, उसका सिर तन से जुदा कर दिया जाएगा।”

‘चारधाम यात्रा में सभी गैर-हिन्दुओं का होगा वेरिफिकेशन, धर्म-संस्कृति के लिए ज़रूरी’: CM धामी का ऐलान, साधु-संतों ने की थी माँग

अब चारधाम यात्रा में सभी यात्रियों का वेरिफिकेशन होगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार (19 अप्रैल, 2022) को मीडिया से बात करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आने वाले संदिग्धों पर पैनी नजर रखी जाएगी। इतना ही नहीं मिल रही शिकायतों के आधार पर सरकार जल्द ही इस क्षेत्र में बाहरी लोगों का और सत्यापन ड्राइव भी कराएगी।

दरअसल उनसे पिछले दिनों संतों द्वारा की गई माँग के बारे में सवाल किया गया था। जिसमें साधुओं ने माँग की थी कि चारधाम यात्रा क्षेत्र में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए। इस पर सीएम धामी ने कहा, हमारा प्रदेश शांत रहना चाहिए। हमारे प्रदेश की धर्म-संस्कृति बची रहनी चाहिए। उसको लेकर सरकार अपने स्तर पर भी ड्राइव चलाएगी और हम कोशिश करेंगे कि जिन लोगों के यहाँ पर ठीक प्रकार से वेरिफिकेशन नहीं है, उनके भी वेरिफिकेशन हों। कोई भी इस प्रकार का व्यक्ति उत्तराखंड के अंदर न आए, जिससे स्थिति खराब हो।

उल्लेखनीय है कि एक लंबे समय से चारधाम के तीर्थपुरोहितों द्वारा ये माँग की जा रही है कि चारधाम में केवल हिंदुओं का ही प्रवेश हो। हरिद्वार की धर्म संसद में भी चार धाम यात्रा में केवल हिंदुओं के ही प्रवेश का मुद्दा उठा था। शंकराचार्य परिषद के अध्यक्ष और शाम्भवी धाम पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने भी उत्तराखंड सरकार से ये माँग की थी।

इस संबंध में उन्होंने सीएम धामी को पत्र भी लिखा था। उनका कहना था देवभूमि उत्तराखंड हिंदुओं की जन्मभूमि, कर्मभूमि और ऋषियों की तपस्थली है। देवभूमि की रक्षा करना उनका धर्म है इसलिए उनकी माँग है कि उत्तराखंड सरकार चारधाम यात्रा के दौरान गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए। गैर हिंदुओं के चिन्हीकरण के लिए सरकार, लाइसेंस और परिचय पत्र जारी करे।

3 मई से शुरू होगी चारधाम की यात्रा

बता दें उत्तराखंड में 3 मई को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम की यात्रा शुरू हो जाएगी। 6 मई को बाबा केदारनाथ के कपाट खुलेंगे। इस बार बड़ी संख्या में यात्रियों के आने की उम्मीद जताई जा रही है। सीएम धामी खुद ये कह चुके हैं कि इस बार पिछली सभी यात्राओं के रिकॉर्ड टूट जाएँगे। इसके साथ ही इस बार चारधाम की यात्रा करने के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। ये पहली बार है जब पर्यटन विभाग ने तीर्थ यात्रियों के पंजीकरण को जरूरी किया है।