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अल्लू अर्जुन ने तंबाकू का विज्ञापन ठुकराया, कंपनी दे रही थी भारी-भरकम रकम: खुद भी नहीं करते हैं सेवन

अपनी फिल्म ‘पुष्पा द राइज’ को लेकर चर्चा बटोर रहे दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) एक बार फिर से चर्चा में हैं। इस बार वो एक तंबाकू ब्रांड का टीवी प्रचार करने से इनकार करने को लेकर चर्चा में हैं। इसके लिए उन्होंने तंबाकू कंपनी ने भारी-भरकम फीस ऑफर की थी, लेकिन एक्टर ने कहा कि इससे गलत संदेश लोगों में जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, सर्बिया से हाल ही में अपना 40वाँ जन्मदिन मना के लौटे अल्लू अर्जुन के करीबी सूत्रों ने इसका खुलासा किया है। उनके करीबियों का कहना है कि अल्लू अर्जुन फिटनेस के प्रति काफी सचेत रहते हैं। ऐसे में जब एक लोकप्रिय तंबाकू कंपनी ने उनसे अपने प्रोडक्ट के प्रचार की पेशकश की तो उन्होंने बिना कुछ सोचे-समझे इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। वो नहीं चाहते हैं कि उनके फैन उनसे प्रेरित होकर इस तरह के प्रोडक्ट का सेवन करें। अभिनेता व्यक्तिगत रूप से तंबाकू का सेवन नहीं करते हैं। इसलिए, वह नहीं चाहते कि उनके प्रशंसक प्रेरित हों और उत्पाद का सेवन शुरू करें।

अल्लू अर्जुन पर्यावरण के प्रति सतर्कता और अच्छी आदतों का समर्थन करते रहे हैं। वो तंबाकू के खिलाफ मुखर रहे हैं औऱ समय-समय पर अपने लोगों से इस नशे की लत को छोड़ने की अपील करते रहे हैं। उनका मानना है कि तंबाकू लत का कारण बन सकता है। बहरहाल अगर उनकी आगामी फिल्मों को लेकर बात की जाय तो अल्लू अर्जुन की अगली फिल्म निर्देशक सुकुमार की ‘पुष्पा द रूल’ है, जिसकी शूटिंग इसी जून से शुरू हो सकती है।

पहले भी साउथ के एक्टर कर चुके हैं ऐसा

गौरतलब है कि ये कोई पहली बार नहीं है जब साउथ फिल्मों के एक्टर ने ऐसा काम किया हो। इससे पहले अभिनेत्री साई पल्लवी ने साल 2019 में एक फेयरनेस कंपनी के विज्ञापन को यह कहकर ठुकरा दिया था कि वो भारतीय हैं और उनका रंग सही है। उस विज्ञापन के लिए साई पल्लवी को 2 करोड़ रुपए का ऑफर दिया गया था।

4 दिन की रिमांड पर भेजा गया सोनू चिकना उर्फ़ यूनुस, शोभा यात्रा में की थी गोलीबारी: परिचित से ली थी पिस्तौल, जवाबों से पुलिस संतुष्ट नहीं

जहाँगीरपुरी हिंसा में गोलीबारी करने वाले सोनू चिकना उर्फ इमाम उर्फ यूनुस को रोहिणी कोर्ट ने चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। सोनू चिकना को मंगलवार (19 अप्रैल 2022) को दिल्ली पुसिल द्वारा कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद कोर्ट ने उसे पुलिस हिरासत में भेजा है। 28 वर्षीय सोनू को दिल्ली पुलिस ने सोमवार (18 अप्रैल 2022) को गिरफ्तार किया था। उस पर आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। वह जहाँगीरपुरी के सी-ब्लॉक का रहने वाला है।

पुलिस पूछताछ में सोनू ने हिंसा के दौरान गोली चलाने की बात कबूल ली है। साथ ही पुलिस ने वह पिस्तौल भी बरामद कर ली है जिससे उसने हिंसा के दौरान गोली चलाई थी। पुलिस ने बताया ये पिस्तौल उसने दिल्ली में ही अपने किसी जानने वाले शख्स से ली थी। हालाँकि वह कौन है इसके बारे में अभी तक पता नहीं चला है, इसी का जवाब पुलिस तलाश रही है। हालाँकि अभी तक पूछताछ में सोनू ने जो बताया है दिल्ली पुलिस उससे संतुष्ट नहीं है इसलिए पुलिस ने कोर्ट से उसकी रिमांड की माँग की थी।

पुलिस ने पूछताछ के लिए सात दिन की पुलिस कस्टडी की माँग की थी। हालाँकि रोहिणी कोर्ट द्वारा सुनवाई करते हुए चार दिन की पुलिस कस्टडी पर सोनू चिकना को भेजा गया, जिसमें अब क्राइम ब्रांच कई अहम पहलुओं पर पूछताछ करेगी।

हनुमान जयंती के दिन शोभायात्रा पर पथराव और हिंसा के दौरान गोली चलाते हुए एक सोनू शेख उर्फ सोनू चिकना का वीडियो वायरल हुआ था। सोनू पत्थरबाजों के बीच में आकर सीधे पुलिसकर्मी और शोभायात्रा निकाल रहे लोगों पर गोली चलाता हुआ दिखा था, वह नीले रंग के कुर्ते में था। पुलिस लगातार इस व्यक्ति की पहचान करने में जुटी थी।

अब तक की जाँच के आधार पर दंगे में सोनू की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। बता दें कि सोनू वही शख्स है जिसके बारे में उसकी अम्मी ने हाल ही में कई चैनलों से बातचीत में कहा था कि उसका बेचा सीधा-साधा है। वह पाँच वक्त का नमाजी है। उसने सिर्फ अपने समुदाय के लोगों की रक्षा के लिए बंदूकें चलाई थी। वह तो बस लोगों को डराना चाहता था। वहीं परिवार की एक महिला का कहना है कि उसने मस्जिद की रक्षा के लिए गोली चलाई थी।

श्रीलंका के बाद नेपाल पर छाया आर्थिक संकट: बैन करना पड़ा फल-सब्जियों का आयात, बचे हैं सिर्फ 6 महीने के पैसे

श्रीलंका में आर्थिक संकट आने के बाद वहाँ के स्थानीयों का क्या हाल हो रहा है, ये दुनिया से छिपा नहीं है। खाने से लेकर गैस, सब्जियों से लेकर दूध और दवाइयों से लेकर मामूली कागज-दवात तक की कीमत श्रीलंका में आसमान छू रही है। नागरिक परेशान होकर मौजूदा सरकार के खिलाफ़ सड़कों पर हैं। एक पड़ोसी देश की ऐसी विकट स्थित में भारत अपनी तरफ से हर संभव मदद भेजने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इसी बीच खबर है कि भारत का एक और पड़ोसी देश यानी कि नेपाल श्रीलंका की तरह आर्थिक मोर्चे पर नीचे की ओर फिसलने लगा है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि नेपाल की आर्थिक स्थिति इस वित्तीय वर्ष से ही खस्ता थी, लेकिन इसकी चर्चा अब मीडिया में ज्यादा इसलिए है क्योंकि वहाँ अर्थव्यवस्था बचाने के लिए हो रहे फैसले इसे जगजाहिर करने लगे हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो जुलाई 2021 से जुलाई 2022 वाली फाइनेंशियल ईयर में लगातार विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई है। स्थिति ऐसी है कि उनके पास केवल सिर्फ 6 महीने तक सामान इंपोर्ट करने का पैसा बचा है जबकि माना ये है जाता है कि किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार हमेशा इतना तो रहना चाहिए कि वो कम से कम 7 माह आयात का प्रबंध कर सकें।

नेपाल में विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

ये विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आने से हालात कैसे होते हैं इसका अंदाजा आप श्रीलंका को देख लगा सकते हैं। वहाँ 2019 में 7.5 बिलियन डॉलर विदेशी मुद्रा भंडार था जो 2021 में मात्र 1.58 बिलियन डॉलर रह गया। इसके बाद वहाँ महंगाई की मार आई और लोगों को हजार रुपए किलो तक दूध खरीदना पड़ा, पेपर कैंसिल हो गए क्योंकि सरकार कागज-दवात लेने में समर्थ नहीं थी।

ऐसे में सोचिए, जब 2.19 करोड़ आबादी वाले श्रीलंका का हाल विदेशी मुद्रा भंडार के कारण ये हो सकता है तो 3 करोड़ आबादी वाले नेपाल में विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से कितनी हलचल होगी। खबर बताती हैं कि नेपाल में पिछले 8 माह में मुद्रा भंडार में करीब 16% कमी आई है, मार्च 2022 तक ये मात्र 975 करोड़ डॉलर (1.17 लाख करोड़ नेपाली रुपए) रह गया है और इसी के चलते उन्होंने बाहरी देशों से सामान इम्पोर्ट करने पर बैन लगा दिया है।

नेपाल में महंगाई

नेपाल की सरकार ने ऐसा कठोर कदम तब उठाया है जब ये बात सब जानते हैं कि उनकी आधी जरूरतें इंपोर्ट के जरिए पूरी होती थीं। दरअसल, नेपाल की भौगोलिक स्थिति के कारण वो खुद उन बुनियादी चीजों का उत्पादन करने में सक्षम नहीं हैं। अब वैसे तो नेपाल इम्पोर्ट बैन करके अपने देश के हालातों को सुधारने के प्रयास कर रहा है लेकिन इसी बीच नेपाल में महंगाई ने दस्तक दे दी है जिसके कारण आम जन प्रभावित हैं। खाने-पीने के दाम बढ़ गए हैं

नेपाल फ्रूट होलसेलर्स एसोसिएशन के हवाले से मीडिया में खबरें आ रही हैं कि वहाँ 12 केले का थोक भाव ही 150 रुपए से 165 रुपए तक पहुँच गया है। खुदरा मूल्य 200 रुपए प्रति दर्जन तक पहुँच गया है। इसी तरह अंगूर 19 मार्च को 110 रुपए प्रति किलो थे और अब 145 रुपए किलो हैं। इसके अलावा नेपाल में नींबू व्यापारियों को ही 160-180 रुपए के बीच बीच मिल रहे हैं। बींस की कीमत 95 रुपए किलो है और हरी प्याज 70 रुपए किलो हो गया है।

अर्थव्यवस्था को संभालने में जुटा NRB

बता दें कि देश की गिरती अर्थव्यवस्था के संबंध में NRB ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर हालातों के बारे में सचेत कराया था और पेट्रोलियम आदि को नियंत्रित करने की सलाह दी थी। जिसके बाद अब नेपाल की सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडा के सही प्रबंधन के लिए लक्जरी आइटम्स के आयात पर बैन लगा दिया है। वर्तमान में नेपाल सरकार के पास चुनौती यही है कि वो विदेशी मुद्रा भंडार का ढंग से प्रयोग करें और सही फैसले लें। खुद NRB ने भी देश के हालात ठीक करने के लिए कई कड़े फैसले लिए हैं। उन्होंने बैंको को बेवजह लोन देने से इंकार कर दिया है। अन्य बैंको को भी निर्देश हैं कि गैर जरूरी कर्ज देने से बचा जाए।

स्थानीय वहाँ घबराए हुए हैं। पेट्रोल पंप के बाहर सैंकड़ों तादाद में लोग लाइन लगाकर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन सरकार से 2 दिन सरकारी अवकाश घोषित करने की अपील कर रहा है। नेपाल सरकार ने अपने मंत्रालयों और राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों के ईंधन भत्ते में 20 फीसद की कटौती करने की शुरुआत कर दी है। लेकिन दूसरी नेपाल के वित्त मंत्री मंत्री आश्वस्त कर रहे हैं कि नेपाल की अर्थव्यवस्था श्रीलंका की तरह नहीं गिरेगी क्योंकि उन पर श्रीलंका जितना कर्जा नहीं है।

नेपाल में इम्पोर्ट के लिए प्रतिबंधित हुई चीजों की लिस्ट

जिन चीजों के आयात पर नेपाल ने बैन लगाया है उनमें साइकिल, डिजाइनदार गाड़ियाँ, मोपेट, मोटर उपकरण, चावल, कपड़ा, मशीनरी, स्पेयर पार्ट्स, सोना, बिजरी के उपकरण, रेडीमेड कपड़े, सोना, चांदी, धागा, सीमेंट, खिलौने, जार, खेल से जुड़ी वस्तुएँ, पत्थर को सजाने की सामग्री, चिमनी वाले बर्तन, लकड़ी, बालों के शैंपू, क्रीमें, सेंट, जूते, मेकअप,कोयला, फर्नीचर, छाता आदि बैन हैं। इनके अलावा पौधे, मिर्च, मछली, सब्जियों, मूँगफलियों, डेरी सामान, सुपारी, शहद, अंडे, केले, चिप्स, मीट, मेडिकल वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

कर्जे मं श्रीलंका और नेपाल

गौरतलब है श्रीलंका की तरह ही नेपाल की आय का एक प्रमुख स्रोत पर्यटक होते हैं। पिछले दो साल में कोरोना महामारी के चलते जैसा असर श्रीलंका पर पड़ा, वैसा ही नेपाल पर पड़ा। दोनों ही देशों को पर्यटन रुकने से काफी नुकसान झेलना पड़ा। इसके बाद जो कर्जा लिया था उसकी वजह से भी इन देशों को परेशानी है। रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंकार पर जहाँ 51 बिलियन डॉलर का कर्ज है। वहीं नेपाल पर 20 बिलियन डॉलर का कर्ज है। श्रीलंका तो खुद को विदेशी कर्ज का भुगताने करने में असमर्थ घोषित कर चुका है। मगर नेपाल अभी अपनी स्थिति को सुधारने की कोशिशों में है।

चीन का हस्तक्षेप नेपाल में

पर्यटन या कर्जे के अलावा इन दोनों देशों की स्थिति में जो समान है वो इनका चीन के साथ कनेक्शन है। श्रीलंका को चीन ने अपने कर्ज जाल में कैसे फँसाया ये सब जानते हैं। ऐसे में इस बात को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है कि चीन का हस्तक्षेप लंबे समय से नेपाल में भी बराबर रहा है। चीन ने कई बार नेपाल के फैसलों में अपनी टांग घुसाकर निर्णयों को प्रभावित करने का प्रयास किया है

इतना ही नहीं कुछ समय पहले चीनी सुरक्षाबलों ने नेपाली इलाके में धार्मिक गतिविधियाँ बंद करवाने का काम किया था, किसानों के चारागाह को सीमित करने की कोशिश की थी, बॉर्डर पिलर पर अपने बाड़ बनाने लगा था, नहर के साथ सड़क निर्मित करने की कोशिश की थी।

उसकी विस्तारवादी नीतियों से वाकिफ हाल में नेपाल के एक अर्थशास्त्री ने चीन से कर्ज लेने के विचार पर नेपाल को आगाह भी किया था। ये बयान अर्थशास्त्री बिश्वंभर प्यकुरयाल ने तब दिया था जब चीन के विदेश मंत्री काठमांडू यात्रा करने वाले थे और यहाँ उसी बेंल्ड एंड रोड इनिशिएटिव के नाम पर समझौते पर हस्ताक्षर होने थे जैसे श्रीलंका के साथ हुए थे।

‘अक्षय तृतीया पर पूरे महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर से महा आरती’: राज ठाकरे का ऐलान, कभी बालासाहेब ने भी अपनाया था यही तरीका

महाराष्ट्र में अजान और हनुमान चालीसा का विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 3 मई को अक्षय तृतीया के अवसर पर राज्य भर के अपने स्थानीय मंदिरों में ‘महा आरती’ करने का ऐलान किया है। मनसे नेता नितिन सरदेसाई ने कहा कि MNS के कार्यकर्ता 3 मई को अक्षय तृतीया के अवसर पर राज्य भर के स्थानीय मंदिरों में महाआरती करेंगे। मनसे ने दावा किया है कि ये आरती लाउडस्पीकर से की जाएगी।

इससे पहले महाराष्ट्र के गृहमंत्री दिलीप वाल्से पाटिल ने कहा था कि एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, महाविकास अघाड़ी सरकार ने राज्य के सभी धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए पुलिस की अनुमति अनिवार्य कर दी है। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति धार्मिक स्थलों या धार्मिक समारोहों में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वहीं मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि राज ठाकरे पार्टी के बड़े नेताओं के साथ बैठक कर मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाने के लिए तीन मई के अल्टीमेटम, औरंगाबाद में 1 मई को पार्टी की बैठक और जून में अयोध्या यात्रा के मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा करेंगे।

डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के मुद्दे पर मुंबई पुलिस के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है कि मुंबई में करीब 72 फीसदी मस्जिदों ने सुबह की अजान को खुद ही बंद कर दिया है।

बता दें कि इससे पहले राज ठाकरे ने 17 अप्रैल को अपने बयान में कहा था कि हम महाराष्ट्र में दंगे नहीं चाहते। नमाज अदा करने का किसी ने विरोध नहीं किया। लेकिन अगर आप (मुस्लिम) लाउडस्पीकर पर अजान करते हैं, तो हमलोग भी इसके लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करेंगे। मुस्लिमों को समझना चाहिए कि धर्म कानून से बड़ा नहीं है। 3 मई के बाद, मैं देखूँगा कि क्या करना है? गौरतलब है कि कभी मुस्लिमों और अज़ान के विरोध में बाल ठाकरे ने भी यही तरीका अपनाया था। जिसे आज मनसे दोहरा रही है।

‘नहीं चाहिए FREE बिजली-पानी, बस योगी आदित्यनाथ जैसा CM मिल जाए’: बोले जहाँगीरपुरी के लोग – राशन भी लूट लेते हैं

हनुमान जयंती के मौके पर दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हुई हिंसा के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज का तरीका और सख्त कानून व्यवस्था चर्चा में है। जहाँगीरपुरी के लोगों योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए दिल्ली की केजरीवाल सरकार द्वारा फ्री में दी जा रही बिजली, पानी की सुविधा को ठुकराने की बात की। लोगों का कहना है कि उन्हें फ्री में बिजली-पानी की जगह सीएम योगी जैसा प्रशासन चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से योगी यूपी में गुंडों पर बुलडोजर चलवा रहे हैं, उसी तरह से यहाँ भी होना चाहिए।

जहाँगीरपुरी के जिस इलाके में हनुमान जयंती पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हिंसा की थी, वहाँ के लोगों ने YouTube चैनल ‘हेडलाइंस इंडिया’ से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें दिल्ली में भी सीएम योगी आदित्यनाथ जैसा प्रशासन चाहिए। एक महिला ने बताया कि उस दिन करीब 6:15 से 6:30 बजे का वक्त रहा होगा। करीब 15-16 साल के लड़के हाथों में नंगी तलवारें लेकर आ गए। उन्होंने मोहल्ले में खड़े होकर गंदी-गंदी गालियाँ दी और खूब पत्थरबाजी की, गाड़ियों को तोड़ दिया, सरकारी राशन आया था, जिसे लूटकर ले गए। हमें यहाँ पर भी योगी राज ही चाहिए। जिस तरह से उन्होंने वहाँ गुडों-माफियाओं का सफाया किया है, उसी तरह का योगी राज हमें यहाँ पर भी चाहिए।

एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि दिल्ली में भी एक्शन तो योगी स्टाइल में ही होना चाहिए कि जो भी दंगा करता है और संपत्तियों को नुकसान करता है, उसकी भरपाई उसी से ही होनी चाहिए। वहीं एक स्थानीय महिला दिल्ली के सीएम केजरीवाल की पोल खोलते हुए कहती हैं कि केजरीवाल ने किया ही किया है? बस, बिजली और पानी दे दिया बस। हमारे यहाँ तोड़फोड़ हुई। वो हमें देखने तक नहीं आए। हमें तो योगी ही चाहिए। दूसरे स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 800 जगहों पर रैली निकली, लेकिन सब शांत रहा। यहाँ तो एक रैली निकली थी, हनुमान जी की मूर्ति को तोड़ दिया गया। मोहर्रम में ताजिया निकालते वक्त वो लोग नंगी तलवारें लेकर चलते हैं, पुलिस का उनको सपोर्ट होता है। लेकिन उस दिन क्या हुआ।

स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि हमें योगी राज ही चाहिए। हमें नहीं चाहिए, बिजली-पानी फ्री। कमा के भर देंगे हम, पहले भी तो भरते थे, एक रोटी कम खा लेंगे, लेकिन हमें नहीं चाहिए, बिजली-पानी फ्री। एक व्यक्त ने तो यहाँ तक कहा कि ये लोग केजरीवाल के पाले हुए हैं। ये गुंडागर्दी उन्होंने ने ही फैला रखी है। ये लोग हिंदुस्तान के पाकिस्तान बनाना चाहते हैं। एक स्थानीय महिला ने कहा कि केजरीवाल दंगा होने पर कहते हैं शांति बनाए रखो, तो शांति का पाठ उन्हें पढ़ाओ, जो दंगाई करते हैं।

‘मस्जिद की रक्षा के लिए चलाई गोली’: सोनू चिकना उर्फ़ यूनुस ने कबूला जुर्म, पिस्तौल भी बरामद

जहाँगीरपुरी हिंसा में गिरफ्तार हुए सोनू चिकना उर्फ यूनुस से पुलिस की टीम लगातार पूछताछ कर रही है। पूछताछ में सोनू ने गोली चलाने की बात कबूल की है। पुलिस ने सोनू के पास वो पिस्तौल भी बरामद कर ली है जिससे उसने गोली चलाई थी।

इस बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सोनू के मुहल्ले वाले उसका बचाव कर रहे हैं। टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट में एक महिला ने कहा, “वो लोग (दूसरे पक्ष के लोग) जो लेकर आ रहे थे, वह कोई नहीं दिखा रहा है। सब लोग बस सोनू को दिखा रहे हैं। सब सिर्फ मुस्लिमों को ब्लेम कर रहे हैं।” वहीं परिवार की एक अन्य महिला ने कहा, “सोनू ने फायरिंग नहीं किया है, उसने तो बस मस्जिद की रक्षा के लिए गोली चलाई।”

इससे पहले सोनू चिकना और सलीम चिकना की अम्मी ने कहा था कि उसने तो हिंसा के दौरान सिर्फ ‘अपने समुदाय का समर्थन’ करने के लिए बंदूकें उठाई थी। जब रिपोर्टर ने सवाल किया कि उनका बेटा दंगाइयों के बीच क्या कर रहा था। तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा, “मेरे बेटे की चिकन की दुकान है। वह रोजा खोलने ही वाले थे कि हिंदू-मुस्लिमों के बीच तनाव पैदा हो गया और वे बाहर चले गए। उसके पास बंदूक नहीं है। गुस्से में आकर उसने किसी से बंदूक छीन ली और गोली चला दी। कोई घायल नहीं हुआ। वे हमें धमकी दे रहे थे। मेरा बेटा बस उन्हें डराना चाहता था। किसी ने व्यक्तिगत रंजिश की वजह से वीडियो शूट कर लिया और इसे वायरल कर दिया।”

वहीं अभी तक की पूछताछ में सोनू ने जो बातें बताई है उसे पुलिस वेरिफाई कर रही है पुलिस सोनू के जवाबो से संतुष्ट नहीं है। यहीं वजह है कि कोर्ट में सोनू को पेश करने के बाद पुलिस उसकी रिमांड की माँग करेगी ताकि उससे सच उगलवाया जा सके। जहाँगीरपुरी हिंसा के मामले में पुलिस अब तक 4 FIR दर्ज कर चुकी है।

हनुमान जयंती के दिन दिल्ली में क्या हुआ?

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में शनिवार की शाम हनुमान जयंती की शोभायात्रा पर पथराव और आगजनी की घटना हुई। उत्तरी पश्चिमी दिल्ली के जहाँगीरपुरी में दो समुदायों के लोग आमने-सामने आ गए। भारी हंगामा हुआ और फिर पत्थरबाजी और हथियार भी चले। शोभायात्रा जहाँगीरपुरी के कुशल सिनेमा के पास से गुजर रही थी, उसी समय शोभायात्रा पर पथराव शुरू हो गया। सड़कों पर काफी दूर से पत्थर फेंके जा रहे थे। उपद्रवियों ने कई गाड़ियों को भी नुकसान पहुँचाया और कई गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए। वहीं कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। जब गाड़िया जलाई गई तब लोग सड़कों पर इधर-उधर भागते दिखे।

फिलहाल, जहाँगीरपुर हिंसा के बाद से क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। दिल्ली पुलिस ने अमन कमेटी के सदस्यों के साथ इलाके में शांति मार्च निकाला। पुलिस और अमन समिति ने लोगों से अपील की है कि वे शांति और सद्भाव बनाए रखें। दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। शाह ने कहा कि मामले में ऐसी कार्रवाई की जाए, ताकि फिर से इस तरह की घटना न हो और लोगों के लिए एक मिसाल बने। गृह मंत्री ने पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना को फोन कर कहा कि मामले में जो भी जरूरी कदम हों वो उठाए जाएँ।

दृष्टिहीन सूरज सिंह जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के नए सरकारी वकील: मुश्किलों से जूझ पाया मुकाम, ब्रेल लिपि में ही शिक्षा-दीक्षा

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में दृष्टिहीन सूरज सिंह (Suraj Singh) को सरकारी वकील के रूप में नियुक्त किया गया है। वकील सूरज सिंह वही हैं, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में दिव्यांग लोगों से सम्बंधित कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की माँग को लेकर हाई कोर्ट के बाहर धरना दिया था। सूरज सिंह दृष्टिहीन होने के बावजूद जम्मू में बतौर वकील प्रैक्टिस कर रहे हैं।

सिंह की नियुक्ति को लेकर सरकार के सचिव आंचल सेठी ने आदेश में पारित किया था। सरकारी वकील के रूप में सूरज सिंह की नियुक्ति एक वर्ष की अवधि के लिए होगी और अदालत में उनके बेहतर कार्य को देखते हुए इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

अतिरिक्त सचिव आशीष गुप्ता द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, “सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जो दृष्टिहीन वकील सूरज सिंह को नियुक्त कर दिव्यांग लोगों में भेदभाव को दूर करेगा, उनकी सहायता करेगा, प्रोत्साहित करेगा और उनका मार्ग प्रशस्त करेगा।”

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में अभ्यास करने वाले एकमात्र दृष्टिहीन वकील सूरज सिंह एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने आँखें ना होते हुए भी अपने सपनों को साकार किया। वह सिंह ही थे, जो जम्मू में हाई कोर्ट के बाहर लंबे समय तक धरने पर बैठे थे और दिव्यांग लोगों के लिए अधिनियम 2016 के तहत मान्यता प्राप्त अधिकारों को लागू करने की माँग कर रहे थे। इसके अलावा वह जम्मू में ऐसे वकीलों में शुमार हैं, जो बाकी वकीलों की तरह बड़े-बड़े मुकदमे लड़ने की ताकत रखते हैं।

बताया जाता है कि सूरज सिंह का जन्म कठुआ की तहसील लोहाई मलाल में हुआ था। उनके माता-पिता गाँव में जमींदारी करते हैं। उन्हें कभी भी इस बात का मलाल नहीं हुआ कि उनके पास दुनिया को देखने के लिए आँखे नहीं हैं। उन्होंने अच्छी शिक्षा पाने के लिए जम्मू का रुख किया और वहीं रह कर लॉ की पढ़ाई की। इस दौरान उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।

सूरज सिंह ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए देश भर में एक वकील के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। वह इस क्षेत्र में 2011 से हैं। सिंह ने अपनी शिक्षा ब्रेल लिपि में पूरी की है। मालूम हो कि इस लिपि के आविष्कार ने दृष्टिबाधित लोगों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया है। सूरज सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मुझे खुद पर गर्व है कि दृष्टिहीन होने के बावजूद मुझे अपने सपनों को साकार करने में कभी भी कोई भी दिक्कत नहीं आई।

वकील के साथ-साथ सिंह की एक राजनेता बनने की भी इच्छा है। सिंह कहते हैं, “मैंने वकील बनने के लिए जी तोड़ मेहनत की। अपने आपको यहाँ तक लेकर आया। उसी प्रकार मेरी इच्छा है कि मैं राजनीति के क्षेत्र में भी आऊं, मैं यहाँ खुद को एक बेहतर मंत्री रूप में देखना चाहता हूँ।

‘बालाजी की मूर्ति को तोड़ा गया, तिरंगे का भी हुआ अपमान’: जहाँगीरपुरी हिंसा पर VHP नेता ने किया बड़ा खुलासा

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हिंसा के बाद अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे हैं। जहाँ पुलिस ने कहा था कि शोभा यात्रा के लिए अनुमति नहीं ली गई थी लेकिन विश्व हिंदू परिषद (VHP) के स्थानीय नेता प्रेम शर्मा ने मंगलवार (19 अप्रैल 2022) को दावा किया कि शनिवार (16 अप्रैल 2022) को शोभा यात्रा निकालने के लिए अनुमति ली गई थी। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा झड़प के दौरान मूर्तियों और तिरंगे झंडे को नुकसान पहुँचाया गया था। प्रेम शर्मा ने इंडिया टुडे से बातचीत में ये बातें कही हैं।

बता दें कि दिल्ली के जहाँगीरपुरी में शनिवार को शोभायात्रा के दौरान दो पक्षों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इसमें 9 लोग घायल हो गए थे। वहीं इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। स्थानीय नेता प्रेम शर्मा को भी पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया था। लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया। प्रेम शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने शनिवार को बिना अनुमति के जहाँगीरपुरी इलाके से शोभा यात्रा निकाली थी।

अब प्रेम शर्मा ने पुलिस के दावे को खारिज किया है। इंडिया टुडे से बातचीत में शर्मा ने कहा “हमने दो थानों महेंद्र पार्क और जहाँगीरपुरी से अनुमति ली थी। यह जुलूस हर साल बिना किसी परेशानी के निकाला जाता है। हमने पुलिस को बताया था कि 400 से ज्यादा लोग मौजूद रहेंगे और म्यूजिक सिस्टम होगा। हमने उन्हें रास्ते के बारे में भी बताया था।” आगे उन्होंने यह भी कहा, “अगर हमने पहले से पुलिस को नहीं बताया होता, तो 15-20 पुलिस वाले और उनके वाहन हमारे साथ कैसे तैनात थे? हमने पुलिस को सब कुछ बता दिया था।” शर्मा ने कहा कि उन्होंने एक पत्र जमा किया था। जिस पर पुलिस ने हस्ताक्षर भी किया था।

प्रेम शर्मा ने यह भी दावा किया कि शनिवार को झड़प के दौरान भगवान बालाजी की मूर्ति और राष्ट्रीय ध्वज को भी नुकसान पहुँचाया गया था। उन्होंने कहा, “हमें क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है? जो पत्थर और तलवार चला रहे थे कार्रवाई उनके खिलाफ होनी चाहिए। चारों तरफ से पत्थर फेंके जा रहे थे। हम अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।”

प्रेम शर्मा ने इस संबंध में एक वीडियो भी जारी किया है। इसमें वह कहते हैं, “हनुमान जयंती की शोभा यात्रा आज पहली बार नहीं निकली है। यह हर साल निकलती है। हम तीन सालों से परमिशन लेकर यात्रा निकाल रहे हैं। पुलिस ने हमें परमिशन दी, लेकिन सुरक्षा प्रदान नहीं करवाई। हम लोग शांतिपूर्ण तरीके से जा रहे थे, तभी मस्जिद की तरफ से आवाजें आने लगी- इनको मार, मारो, मारो… इसके तुरंत बाद तीसरी मंजिल से पत्थरों से हम पर हमला करना शुरू कर दिया और 25-300 लोग तो तलवारें लेकर आए थे। आप एक बात बताइए कि 10 मिनट के अंदर कौन तीसरी मंजिल पर हजारों पत्थर भर लेगा। हमारे 20 से 25 कार्यकर्ता घायल हैं।”

गौरतलब है कि 16 अप्रैल को जहाँगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती के अवसर पर एक शोभायात्रा निकाली गई थी। इसी दौरान पत्थरबाजी शुरू हो गई और दो समुदाय के बीच झड़प में 9 लोग घायल हो गए, जिसमें दो पुलिसवाले भी शामिल थे। FIR में कहा गया कि अंसार नाम का शख्स अपने 4 से 5 साथियों के साथ आया और शोभायात्रा में शामिल लोगों से बहस करने लगा। जिसके बाद हिंसा भड़की। अंसार को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह पहले भी आपराधिक घटनाओं मे शामिल रहा है।

100 दिन में 50 हजार, 6 महीने में 1 लाख: बेघर पशुओं को ऐसे आश्रय देगी योगी सरकार, 65000 हेक्टेयर जमीन चारे के लिए

अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के एक महीने बाद ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने बेघर पशुओं के आश्रय की दिशा में काम शुरू कर दिया है। बेघर पशुओं की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार एक योजना लाने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सरकार बनने पर इस समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया था।

बताया जा रहा है कि यूपी सरकार अगले 6 महीने के अंदर बेघर पशुओं के लिए बने शेल्टर होम्स की संख्या एक लाख तक पहुँचाने की योजना पर काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना में 50000 बेघर पशुओं के लिए 100 दिनों के भीतर शेल्‍टर की व्यवस्था कारण शामिल है। आने छह महीने में इसे 1 लाख तक बढ़ाया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, राज्य सरकार ने काफी सोच-विचार कर यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि बेघर पशुओं को बाड़े में बंद करने की जगह प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे खुले में घूम सकेंगे। ऐसी 50 गौशालाओं का निर्माण राज्य सरकार कराएगी। इसके लिए प्रत्येक जिला मजिस्ट्रेट को 15 अप्रैल से प्रति दिन कम से कम 10 बेघर गायों के लिए शेल्‍टर सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया गया है। राज्य सरकार 65,000 हेक्टेयर भूमि इन पशुओं के चारागाह के लिए मुहैया कराएगी।

सरकार के एजेंडे में अगला कदम बायोगैस संयंत्र स्थापित करना है। गाय के गोबर का इस्तेमाल करके सीएनजी बनाना, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की दिशा में काम करना होगा। इसके लिए किसानों से गाय का गोबर खरीदा जाएगा। पीएम मोदी ने किसानों से यह भी वादा किया था, जब उनकी गायें दूध देना बंद कर देंगी तो किसान उनके गोबर से भी आय अर्जित कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के निदेशक इंद्रमणि ने बताया कि इस काम में शहरी विकास और पंचायती राज विभाग को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ऐसे आश्रय स्थल उन जगहों के आसपास विकसित करने की योजना है जहाँ अधिक से अधिक भूमि हो। वनों की उपलब्धता हो। इन जगहों पर जरूरत पड़ने पर जल स्रोतों का विकास किया जाएगा। साथ ही बाड़ लगाने और चारे के भंडारण की व्यवस्था भी की जाएगी।

नर्मदा नहर परियोजना को पूरा करने के लिए बनासकांठा की महिलाओं के आशीर्वाद से भावुक हुए पीएम मोदी, देखें वीडियो

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीन दिवसीय गुजरात दौरे का आज दूसरा दिन है। वहीं पीएम मोदी ने आज मंगलवार (19 अप्रैल, 2022) को गुजरात के बनासकांठा जिले के दियोदर में बनास डेयरी संकुल में कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस दौरान पीएम मोदी ने विभिन्न परियोजनाओं का जिक्र करते हुआ कहा कि इससे आत्मानिर्भर भारत अभियान को ताकत मिलेगी। वहीं अब एक वीडियो क्लिप सामने आया है जिसमें मंच से जब पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया जा रहा है तो वो भावुक होते नजर आए।

अपने गृह राज्य गुजरात आए पीएम मोदी का नर्मदा नहर परियोजना के लिए बनासकांठा की महिलाओं ने स्वागत किया। मंगलवार को शहर में पीएम मोदी की रैली में कई महिलाएँ भी पहुँची थीं और गुजरात के सबसे उत्तरी जिले बनासकांठा जिले में पीने और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के वादे को पूरा करने के लिए उन्हें आशीर्वाद दिया।

जैसे ही महिलाओं ने उनका उत्साह बढ़ाया और आशीर्वाद दिया, रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी भावुक हो गए।

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पीएम मोदी को 30 सेकंड के इस क्लिप में 20 सेकंड पर इमोशनल होते देखा जा सकता है। ऐसा समय उस समय हुआ जब पीएम मोदी द्वारा उत्तरी गुजरात के जिलों में पानी पहुँचाने के लिए महिलाओं ने उनका आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में पीएम मोदी के जनहितकारी कार्यों की जनता ने बेहद जोशीले अंदाज में स्वागत किया।

बता दें कि पीएम मोदी ने आज बनासकांठा के दियोदर में डेयरी परिसर, आलू प्रॉसेसिंग यूनिट और चीज़ और व्हे प्लांट के अलावा कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह के बाद उन्होंने वहाँ मौजूद लोगों को संबोधित भी किया। पीएम मोदी ने कहा कि शायद जीवन में पहली बार अवसर आया होगा कि एक साथ डेढ़, दो लाख माताएँ बहनें आज मुझे यहाँ आशीर्वाद दे रही हैं। हम सबको आशीर्वाद दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि बनास डेयरी स्थानीय समुदायों, विशेषकर किसानों और महिलाओं को सशक्त बनाने का केंद्र बन चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा, “बनास डेयरी में विकास पहल किसानों को सशक्त बनाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी। हम यहाँ देख सकते हैं कि कैसे सहकारी आंदोलन आत्मानिर्भर भारत अभियान को ताकत दे सकता है।”

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत प्रति वर्ष 8.5 लाख करोड़ रुपए कीमत के दूध का उत्पादन करता है और दुग्ध उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रति वर्ष गेहूँ और चावल की पैदावार भी 8.5 लाख करोड़ रुपए के दूध उत्पादन का मुकाबला नहीं कर पाती।

लोगों को सम्बोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “गुजरात आज सफलता की जिस ऊँचाई पर है, विकास की जिस ऊँचाई पर है वो हर गुजराती को गर्व से भर देता है। इसका अनुभव मैंने कल गांधीनगर के विद्या समीक्षा केंद्र में किया। गुजरात के बच्चों के भविष्य को, हमारी आने वाली पीढ़ियों को सँवारने के लिए विद्या समीक्षा केंद्र एक ताकत बन रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में विद्या समीक्षा केंद्र पूरे देश को दिशा दिखाने वाला केंद्र बन गया है। इस केंद्र की वजह से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 26% बढ़ गई है। शिक्षा के क्षेत्र में ये केंद्र पूरे देश में बड़े परिवर्तन ला सकता है।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों और अधिकारियों से भी कहूँगा कि विद्या समीक्षा केंद्र का अवश्य अध्ययन करें। विद्या समीक्षा केंद्र जैसा आधुनिक व्यवस्था का लाभ देश के जितने ज्यादा बच्चों को मिलेगा, उतना ही भारत का भविष्य उज्ज्वल बनेगा।”