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27 मंदिरों को तोड़कर बनाई गई दिल्ली की कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद, कुतुब मीनार पर बोले पुरातत्वविद के के मुहम्मद

इतिहासकार और पुरातत्वविद (आर्कियोलॉजिस्ट) के. के. मोहम्मद ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद का निर्माण 27 हिन्दू-जैन मंदिरों को तोड़कर किया गया। उन्होंने बताया कि मंदिरों को तोड़कर निकाले गए पत्थरों से ही कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद बनाई गई। उस जगह पर अरबी में पाए गए अभिलेखों में इस बात का उल्लेख भी किया गया है।

उन्होंने कहा कि कुतुबमीनार के पास जिन मंदिरों के अवशेष मिले हैं उनमें गणेश की एक नहीं कई मूर्तियाँ हैं। इससे सिद्ध होता है कि वहाँ गणेश मंदिर थे। उन्होंने बताया कि बताया कि ताजूर मासिर नामक किताब में भी इसका जिक्र है।

बता दें कि के. के. मोहम्मद विश्व धरोहर दिवस पर पुरातत्व विभाग द्वारा भोपाल में आयोजित परिसंवाद कार्यक्रम में पहुँचे थे। उन्होंने कहा कि वह चौहानों की राजधानी थी। हिन्दू राजा पृथ्वीराज चौहान की राजधानी रही। वहाँ लगभग 27 मंदिर को कुवत उल इस्लाम मस्जिद बनाने के लिए पूरी तरह नष्ट किया गया। मंदिरों को तोड़ने के बाद जो पत्थर निकले उससे कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद बनाई गई। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है।

न्होंने बताया कि कुतुब मीनार सिर्फ भारत में ही नहीं बनाया गया बल्कि इससे पहले समरकंद और गुफारा में भी बनाया गया था। कुतुब मीनार का कॉन्सेप्ट इस्लामिक है। कुतुब मीनार बनाने से पहले इन्होंने काजासिया पोश, सियापोस, काजा में बनाया था।

गौरतलब है कि के.के. मोहम्मद आर्कियोलाजी सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व रीजनल डायरेक्टर भी रह चुके हैं। उन्होंने सबसे पहले इस बात का पता लगाया था कि बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष हैं। उनका रिसर्च पहली बार 1990 में प्रकाशित हुआ था। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का जो फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया उसमें के.के. मोहम्मद का शोध पुरातात्विक प्रमाणों की महत्वपूर्ण भूमिका का रही है।

38 साल बाद 63 बांग्लादेशी हिंदू परिवारों का पुनर्वास: CM योगी ने दी घर और जमीन की सौगात

साल 1970 में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से भारत आए हिंदू शर्णार्थियों को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जमीन और घर की सौगात दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज (अप्रैल 19, 2022) लखनऊ में 63 हिंदू बांग्लादेशी परिवारों के लिए पुनर्वास परियोजना को लागू किया। इसके तहत इन लोगों को 2 एकड़ जमीन और आवास योजना के तहत 1 लाख 20 हजार रुपए दिए जाएँगे।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 63 हिंदू बांग्लादेशी शरणार्थी परिवारों को आवासीय और कृषि भूमि के कागजों वितरित करते हुए कहा, “63 हिंदू बांग्लादेशी शरणार्थी परिवारों के पुनर्वास परियोजना को लागू कर दिया गया है। 2 एकड़ भूमि और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 1 लाख 20 हजार रूपए मिलेगा। एक शौचालय का भी निर्माण करवाया जाएगा।” 

सीएम योगी ने इस परियोजना को लागू करते हुए कहा कि इतने सालों में किसी ने विस्थापित हिंदुओं के दर्द को नहीं समझा। मगर अब इस फैसले के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा। आगे यूपी मुख्यमंत्री ने बताया कि साल 1970 में बांग्लादेश से करीब 407 परिवार भारत के उत्‍तर प्रदेश में आए थे। उस समय उन सबको मेरठ के हस्तिनापुर में एक सूत मिल में नौकरी दी गई थी। लेकिन 1984 में जब वो सूत मिल बंद हुई तो वो बेसहारा हो गए। कुछ परिवारों का पुनर्वास अलग-अलग जगहों पर हुआ लेकिन इनमें से 65 परिवार के लोग 1984 से अब तक अपने पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे थे। इंतजार करते-करते दो परिवार तो पूरी तरह समाप्‍त हो गए। बचे बस 63।

सीएम ने कहा कि इन 38 वर्षों में न जाने कितने लोग चले गए। जब पीएम ने इन शर्णार्थियों को नागरिकता देने का एक्ट पास किया तो प्रदेश ने पुराने कागज ढूँढने शुरू किए। इसी दौरान मालूम चला कि 63 परिवारों की हालात बहुत खराब है। ये लोग खानाबदोशों की तरह जीवन जी रहे थे। मगर अब खुशी इस बात की है कि प्रदेश सरकार ने 63 परिवारों के व्यवस्थित पुनर्वास की कार्ययोजना लागू कर दी है।

उन्होंने कहा कि ये लोग जहाँ के मूल निवासी थे वहाँ इन्हें शरण नहीं मिली। आजादी के बाद भी इन्हें दर्द झेलना पड़ा। मगर भारत ने इन्हें स्वीकार कर न केवल शरण दी बल्कि इनके पुनर्वास की योजना को भी आगे बढ़ा रहा है। ये भारत की मानवता के प्रति सेवा का एक अभूतपूर्व उदाहरण है।

जहीर पाशा ने पाँचों बच्चों के सामने ही बीवी को चाकू गोद कर मार डाला, पोर्न फिल्मों में काम करने का था शक: अक्सर करता था पिटाई

बेंगलुरू (Bengaluru) में एक महिला की उसके पति ने अश्लील फिल्म (Porn Film) में काम करने के शक में चाकू मारकर हत्या (Murder) कर दी। जानकारी के मुताबिक, शख्स ने कथित तौर पर अपनी बीबी को बच्चों के सामने ही चाकू मार दिया। घटना रविवार (17 अप्रैल 2022) तड़के 12:40 रामनगर शहर की है। आरोपित की पहचान जहीर पाशा (40) के रूप में हुई है। वह एक ऑटो ड्राइवर है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब दो महीने पहले आरोपित पाशा ने एक पोर्न फिल्म देखी थी। इसके बाद उसे शक होने लगा कि उसकी बीवी मुबीना ने इसमें काम किया है। फिर, उसने कथित तौर पर अपनी बीबी की वफादारी पर संदेह करके उसे परेशान करना शुरू कर दिया। उसके साथ मारपीट करने लगा। पाशा ने कथित तौर पर दो महीने पहले भी कोलार में एक पारिवारिक समारोह में इसी बात पर मुबीना की पिटाई की थी। इसी दौरान परिवार के सदस्यों को पाशा के शक के बारे में पता चला था। करीब 20 दिन पहले पाशा ने अपनी बीवी को इतनी बुरी तरह से पीटा कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

रविवार की घटना के बारे में बताते हुए जाँच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “कपल घटना के चार दिन पहले ही रामनगर शिफ्ट हुआ था। रविवार को दोपहर 12:40 बजे, कपल का बड़ा बेटा अपने नाना गौस पाशा के आवास पर गया, जो कि पास में रहते हैं, और उन्हें बताया कि उसकी अम्मी को उसके अब्बू ने चाकू मार दिया।”

इसके बाद गौस पाशा अपने बेटी के घर पहुँचे, जहाँ उन्होंने मुबीना को मृत पाया। मुबीना हाउसवाइफ थी। वह बीएम रोड पर रहमानिया नगर की रहने वाली थीं, जबकि पाशा बेंगलुरु के शम्मन्ना गार्डन का रहने वाला था। दोनों की 15 साल पहले शादी हुई थी। पाशा और मुबीना के पाँच बच्चे हैं।

कैंपस यूनिवर्सिटी की, बन गई मस्जिद: सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान के जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन वापस लेने पर लगाई रोक

उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को आवंटित जमीन वापस लेने पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 अप्रैल 2022) को रोक लगा दी। मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की याचिका पर शीर्ष अदालत ने यह अंतरिम आदेश पारित किया। सपा नेता आजम खान (Azam Khan) इस ट्रस्ट के अध्यक्ष है। याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें यूनिवर्सिटी को आवंटित जमीन वापस लेने की प्रशासनिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया गया था।

ट्रस्ट पर यूनिवर्सिटी के लिए आवंटित जमीन पर मस्जिद बनाने व अन्य अनधिकृत निर्माण का आरोप है। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने अं​तरिम आदेश पारित किया है। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 12.5 एकड़ छोड़ कर बाकी जमीन पर नियंत्रण लेने के यूपी सरकार के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया था।

हाई कोर्ट ने क्या कहा था

दरअसल, विश्वविद्यालय निर्माण के लिए करीब 471 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी। जिला प्रशासन ने कहा कि केवल 12.50 एकड़ जमीन ही ट्रस्ट के अधिकार में रहेगी। सपा नेता जौहर ट्रस्ट ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में गुहार लगाई। पर हाई कोर्ट ने निर्णय दिया कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट रामपुर द्वारा अधिग्रहित 12.50 एकड़ जमीन के अतिरिक्त जमीन को राज्य में निहित करने के एडीएम वित्त का आदेश सही था। कोर्ट ने एसडीएम की रिपोर्ट और एडीएम के आदेश की वैधता को चुनौती देने वाली ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी थी। 

हाई कोर्ट ने कहा था कि अनुसूचित जाति की जमीन बिना जिलाधिकारी की अनुमति के अवैध रूप से ली गई। अधिग्रहण शर्तों का उल्लंघन कर शैक्षिक कार्य के लिए निर्माण के बजाय मस्जिद का निर्माण कराया गया। ग्राम सभा की सार्वजनिक उपयोग की चक रोड जमीन व नदी किनारे की सरकारी जमीन ले ली गई। किसानों से जबरन बैनामा करा लिया गया, जिसमें 26 किसानों ने पूर्व मंत्री एवं ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खान के खिलाफ FIR दर्ज कराई। विश्वविद्यालय का निर्माण पाँच साल में होना था, जिसकी वार्षिक रिपोर्ट नहीं दी गई। कानूनी उपबंधों व शर्तों का उल्लंघन करने के आधार पर जमीन राज्य में निहित करने के आदेश पर हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

भगवा रंग, माथे पर टीका, गले में हनुमान माला: RRR की सफलता के बाद जूनियर NTR ने भी ली दीक्षा, 21 दिन जिएँगे सात्विक जीवन

RRR फेम राम चरण के बाद अब इसी फिल्म के दूसरे स्टार जूनियर NTR भी धर्म के प्रति अपनी आस्था के कारण चर्चा बटोर रहे हैं। हाल में एनटीआर को हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर भगवा कपड़े पहने और माथे पर टीका लगाए देखा गया। बताया जा रहा है कि जैसे राम चरण ने अयप्पा दीक्षा ली थी वैसे ही NTR ने हनुमान दीक्षा ली है। ये 41 दिन की न होकर, 21 दिन की होती है, मगर इसमें भी सात्विक भोजन किया जाता है और सादा जीवन व्यतीत किया जाता है।

उनकी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें वह ऊपर से लेकर नीचे तक भगवा रंग में है। उनके माथे पर हनुमान जी का टीका है। गले में माला है। चेहरे पर हँसी है। लोग इन तस्वीरों को देख कह रहे हैं कि साउथ एक्टर्स हमेशा भारतीय संस्कृति और परंपरा का सम्मान करते हैं। ये लोग बॉलीवुड वालों की तरह नहीं है। बॉलीवुड कलाकारों को इन्हें आदर्श मानकर सीखना चाहिए।

बता दें कि आरआरआर की अपार सफलता के बाद अब जूनियर एनटीआर कोरताला सिवा में नजर आएँगे। इसके अलावा केजीएफ निर्माता की नई फिल्म सलार में भी वही हीरो के तौर पर दिखेंगे। फिलहाल इस समय उन्हें और राम चरण को RRR के लिए जगह-जगह से सरहाना मिल रही है।

मालूम हो कि कुछ दिन पहले राम चरण भी अपनी धार्मिक पोशाक पहने और नंगे पैर दिखने के कारण मीडिया लाइट में आए थे। बाद में पता चला था कि राम चरण भगवान अयप्पा स्वामी का 41 दिन का महाव्रत कर रहे हैं जो कि यह दक्ष‍िण भारत की एक परंपरा है, जिसे अयप्‍पा दीक्षा (Ram Charan Ayyappa Deeksha) कहते हैं। यह 41 दिनों तक चलती है। इसमें 41 दिनों तक न चप्‍पल पहनते हैं और ना ही नॉनवेज खाते हैं। जमीन पर सोते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, राम चरण हर साल यह महाव्रत करते हैं।

मुंबई की आरे कॉलोनी में कलश यात्रा के दौरान पथराव, मंदिर को ढक लाउडस्पीकर पर लगाई रोक

मुंबई (Mumbai) की आरे कॉलोनी में कलश यात्रा के दौरान दो समूहों के बीच पथराव (Stone pelting) की घटना हुई, जिसमें 8-10 लोग घायल हो गए। एक पुलिस अधिकारी ने सोमवार (18 अप्रैल 2022) को यह जानकारी दी। घटना रविवार (17 अप्रैल 2022) रात की है। आरे कॉलोनी के गौतम नगर इलाके में शिव मंदिर से कलश यात्रा निकाले जाने के बाद यह झड़प हुई।

पुलिस ने बताया कि हंगामा रविवार रात करीब 8.00 बजे उस वक्त शुरू हुआ जब एक समूह शिव मंदिर से कलश यात्रा लेकर निकल रहा था। जैसे ही यह समूह बुद्ध नगर से गुजरने लगा तो कुछ निवासियों ने इसका विरोध किया और जुलूस को आगे नहीं जाने दिया। इसके बाद दोनों समूहों में बहस होने लगी। धीरे-धीरे बहस ने हिंसा का रूप ले लिया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव शुरू कर दिया।

पुलिस ने इस मामले में अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर प्रवीण पड़वाल ने कहा, “हमने 25 लोगों को गिरफ्तार किया है और अब स्थिति शांतिपूर्ण है। संघर्ष का कारण समूहों के बीच की गलतफहमी थी। कुछ लोगों को मामूली चोटें आई हैं। हमने मामला दर्ज कर लिया है।” डीसीपी सोमनाथ घारगे ने बताया कि दोनों समूहों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। मामले में और अधिक गिरफ्तारियाँ हो सकती है। वहीं इस घटना के बाद एहतियातन मंदिर को ढक दिया गया है और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है।

इससे पहले महाराष्ट्र के अमरावती जिले के अचलपुर शहर में दो समुदायों के बीच टकराव की खबर सामने आई थी। यह हिंसक झड़प धार्मिक झंडा हटाने को लेकर हुआ था। दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर पथराव किया। उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले दागे थे। हिंसा के बाद इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया था।

जहाँगीरपुरी के दंगाइयों को हामिद शेख ने सप्लाई की काँच की बोतलें, छतों से औरतों ने की बरसात: पत्थरबाजों के बीच से गोली चलाने वाला चिकना भी गिरफ्तार

जहाँगीरपुरी हिंसा मामले में लगातार कार्रवाई करते हुए कल (अप्रैल 18, 2022) दिल्ली पुलिस ने गोली चलाने वाले युनूस सोनू को गिरफ्तार किया था और उसके बाद खबर आई कि एक शेख हामिद नाम का व्यक्ति भी पकड़ा गया है। पुलिस का दावा है कि इस शेख हामिद ने पूछताछ में इस बात को स्वीकार कर लिया है कि हिंसा में इस्तेमाल की गई बोतलें उसी ने सप्लाई की थी।

डीसीपी उषा रंगनानी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “जहाँगीरपुरी हिंसा की जाँच के दौरान, 36 साल का एक शेख हामिद को गिरफ्तार किया गया है। वह कबाड़ी है। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसने हिंसा के दौरान फेंकी गई बोतलों को सप्लाई किया था।”

गौरतलब है कि एक ओर जब दिल्ली पुलिस ने शेख हामिद को पकड़ा है, उसी दौरान कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं जिसमें स्थानीय बताते दिख रहे हैं कि कैसे जहाँगीरपुरी हिंसा में दंगाइयों के साथ-साथ औरतों ने इन बोतलों का प्रयोग किया। कथिततौर पर ज्यादातर लोगों के पास पहले से काँच की बोतलें मौजूद थी और औरतें छतों पर चढ़-चढ़ कर इन्हें शोभा यात्रा में शामिल हुए लोगों पर फेंक रही थीं।

नीचे वीडियो में स्थानीय बताते दिख रहे हैं-  “बांग्लादेशी जब पीछे से भागते-भागते आए तब हमने किसी किसी के हाथ काँच की बोतलें देखी थीं। उन लोगों ने ये बोतल पन्नी में लपेटी हुई थी और एक-दो लोगों के हाथ में पिस्तौल भी थी।”

इनके अलावा विश्व हिंदू परिषद के उमा शंकर ने भी यह जानकारी दी कि दिल्ली के जहाँगीरपुरी में जब हमला हुआ तो नियत लोगों को मारने की थी। वह खुद उस रैली का हिस्सा थे और दावा करते हैं कि दूसरे समुदाय को उन लोगों को किसी तरह नहीं उकसाया। मगर फिर भी लोग हथियार लेकर आ निकले। उनकी औरतें छतों से काँच की बोतलें फेंकने लगीं।

एक्शन में गृहमंत्री अमित शाह

बता दें कि दिल्ली के जहाँगीरपुरी हिंसा मामले में अब तक यूनुस सोनू चिकना सहित 23 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपितों को पकड़ने का प्रयास कर रही है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी एक्शन में हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस अधिकारियों को आरोपितों के खिलाफ़ ऐसी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए ताकि एक उदाहरण स्थापित हो और ऐसी घटनाएँ दोहराने की दोबारा कोई जुर्रत न करे।

झूठी खबरें फैलाने पर होगी कार्रवाई

वहीं पुलिस भी हिंसा के बाद फैल रही अफवाहों को अपनी ओर से खारिज करने का काम कर रही है। दिल्ली पुलिस कमीशनर राकेश अस्थाना ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे इस दावे को नकारा है कि जहाँगीरपुरी हिंसा में पहले मस्जिद के ऊपर जाकर भगवा झंडा लगाया गया, इसके बाद भीड़ भड़की। उन्होंने झूठी खबरों का खंडन करते हुए फर्जी बातें फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी।

सेना प्रमुख बनने वाले पहले इंजीनियर हैं मनोज पांडे, चीन सीमा पर काम का तगड़ा अनुभव: ‘ऑपरेशन पराक्रम’ का रहे हैं हिस्सा

देश के सैन्य नेतृत्व में बड़ा बदलाव होने वाला है। लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे (Manoj Pande) देश के नए सेनाध्यक्ष होंगे। सोमवार (18 अप्रैल, 2022) रक्षा मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति का ऐलान किया। पांडे 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे की जगह लेगें। भारतीय सेना के 29वें प्रमुख बने लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ऐसे पहले इंजीनियर हैं, जो सेना अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। उन्हें इसी साल 1 फरवरी, 2022 को सेना का वॉइस चीफ बनाया गया था।

लेफ्टिंनेंट जनरल मनोज पांडे भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर के ऐसे पहले अधिकारी हैं, जो इस पद तक पहुँचे हैं। उन्हें चीन सीमा पर काम करने का अच्छा खासा अनुभव है। वो इंडियन आर्मी की ईस्टर्न कमांड में कमांडर और ब्रिगेडियर के तौर पर काम कर चुके हैं। वो लद्दाख एरिया के माउंटेन डिवीजन में इंजीनियर ब्रिगेड के ब्रिगेडियर थे। उन्होंने उत्तर-पूर्व में कई सारे ऑपरेशन को अंजाम दिया था। परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित मनोज पांडे अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी इंडियन आर्मी के कमांडर रह चुके हैं।

कौन हैं भारत के नए आर्मी चीफ बनने वाले मनोज पांडे

महाराष्ट्र के नागपुर के रहने वाले मनोज पांडे शुरुआती स्कूलिंग के बाद 1982 में एनडीए में सेलेक्ट हुए। ट्रेनिंग के बाद उन्होंने इंडियन मिलिट्री एकेडमी ज्वाइन की और ऑफिसर के तौर पर कमीशन लिया। इसके बाद दिसंबर 1982 में सेना की इंजीनियरिंग कॉर्प्स बॉम्बे सैपर्स में उन्हें कमीशन मिला। वो ब्रिटेन के कैमबर्ले कॉलेज का भी हिस्सा रहे। वहाँ से लोटने के बाद नॉर्थईस्ट में उन्हें ब्रिगेडियर बनाया गया। मनोज पांडे इथियोपिया और इरीट्रिया में यूएन के मिशन चीफ भी रहे। 3 मई 1987 को पांडे ने सरकारी डेंटल कॉलेज की गोल्ड मेडलिस्ट अर्चना सल्पेकर के साथ सात फेरे लिए।

इसके अलावा लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के साथ पल्लनवाला सेक्टर में ऑपरेशन पराक्रम के दौरान एक इंजीनियर रेजिमेंट की कमान संभाली। 2001 में संसद पर हुए हमले के बाद सेना ने ऑपरेशन पराक्रम चलाया था। इसके तहत पाकिस्तान से आतंकियों को होने वाले हथियारों की सप्लाई के नेक्सस को ध्वस्त कर दिया गया था।

‘…तो मंदिर के सामने बैठ कर कुरान पढ़ेंगी सैकड़ों मुस्लिम महिलाएँ’: सपा नेता की धमकी, हिजाब पर की थी ‘हाथ काटने’ की बात

मस्जिदों से लाउडस्पीकर (Mosque Loudspeaker) उतरवाने का मुद्दा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में तूल पकड़ता जा रहा है। हाल ही में राज ठाकरे की मनसे और कुछ हिन्दू संगठनों द्वारा मस्जिद के सामने हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करने का ऐलान किया है। इसको लेकर समाजवादी पार्टी की वि​वादित छवि वाली महिला नेता रुबीना खानम हिन्दुओं को धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर मुस्लिम मजहब को निशाना कर मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर उतरवाने की कोशिश की तो मंदिरों के सामने बैठ कर सैकड़ों मुस्लिम महिलाएँ कुरान पढ़ेंगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलीगढ़ में हिंदूवादी संगठनों ने 21 चौराहों पर लाउडस्पीकर लगाकर हनुमान चालीसा पढ़ने का एलान किया था, जिसके बाद सपा महानगर अध्यक्ष रुबिना खानम ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

खानम ने कहा कि भाजयुमो और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से लाउडस्पीकर विवाद को खड़ा किया जा रहा है और रमजान महीने में अराजकता पैदा करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे तत्वों पर रोक लगाए जाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने भी दूसरे धर्म और लोगों की आस्था पर चोट पहुँचाई तो सैकड़ों मुस्लिम महिलाएँ मंदिरों के सामने लाउडस्पीकर पर कुरान पढ़ेंगी।

बता दें कि इससे पहले वह कर्नाटक हिजाब मामले में विवादित बयान देने के बाद चर्चा में आई थीं। उन्होंने धमकी देते हुए कहा था कि जो कोई भी हिजाब पर हाथ डालेगा, उसके हाथ काट दिए जाएँगे।

रुबिना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वो कहती है, मैं रुबिना खानुम, अलीगढ़ की वरिष्ठ सपा नेता हूँ। कर्नाटक हिजाब प्रकरण का जो मुद्दा है ये हमारे देश की बहन-बेटियों पर हमला है। हमारे हिजाब पर, आंचल पर हाथ डालने वालों के हम हाथ काट देंगे। भारत विभिन्नताओं का देश है। यहाँ पर माथे का तिलक हो, पगड़ी हो, हिजाब हो… ये सब भारत की संस्कृति का हिस्सा हैं। इस पर राजनीति करना मतलबीपन की पराकाष्ठा है। अब ये कलयुगी रावण हमारे आंचल का, हिजाब का चीरहरण करेंगे। मैं इनसे कहना चाहती हूँ महिलाओं को कमजोर समझने की भूल न करें। अरे सरकार जिस पार्टी की भी हो। अगर महिलाओं के आँचल या हिजाब पर हाथ डालने का प्रयास करोगे तो हम झांसी की रानी और रजिया सुल्तान बनकर तुम्हारे हाथ काट डालेंगे।”

‘बंद करो, अंजाम बुरा होगा’: अंसार ने हनुमान चालीसा पर दी थी धमकी, घायल VHP कार्यकर्ता ने बताया जहाँगीरपुरी में क्या हुआ

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में हनुमान जन्मोत्सव पर हुई हिंसा (Delhi Jahangirpuri Riot) में 8 पुलिसकर्मी सहित कई नागरिकों के घायल होने की खबर है। इस मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच अब तक 23 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें पुलिस पर गोली चलाने वाला यूनुस सोनू, असलम और दंगा भड़काने का आरोपित अंसार भी शामिल है। इस बीच खबर आई है कि हनुमान जयंती पर शोभा यात्रा का नेतृत्व कर रहे उमाशंकर दुबे की गर्दन पर हिंसक भीड़ ने तलवार से वार किया था, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई हैं।

उनका दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। उमाशंकर दुबे ने उस दिन उनके साथ क्या-क्या हुआ था और कैसे अंसार ने हनुमान चालीसा के पाठ के दौरान अंजाम भुगतने की धमकी दी थी, उसके बारे में ‘आज तक’ को सिलसिलेवार ढंग से बताया।

उन्होंने बताया, “मैं 16 अप्रैल को हनुमान जयंती पर शोभा यात्रा का नेतृत्व कर रहा था। दंगा शाम को करीब साढ़े 5 बजे शुरू हुआ था। शुरुआत में 70 से 80 लोग इसका विरोध कर रहे थे। उसके बाद भीड़ बढ़ती गई। अचानक छत से पत्थर और बोतलें फेंकी जाने लगीं। अंसार उस वक्त 60-70 लोगों के साथ सी-ब्लॉक में मस्जिद के सामने मौजूद था। अंसार को उसी के ग्रुप के लोगों ने कहा कि इन लोगों को छोड़ना मत, जाने मत देना। मैंने अंसार से कहा कि ये लोग निहत्थे हैं, इन्हें मत मारना। इस पर अंसार ने कहा कि जो किया वो भुगतना पड़ेगा।”

दुबे के शब्दों में, “दो से तीन महीने पहले बजरंग दल की हनुमान चालीसा के पाठ के दौरान जहाँगीरपुरी में अंसार ने उनके कार्यकर्ताओं को धमकी दी थी। उसने कहा था कि ये सब करना बंद कर कर दो, नहीं तो अंजाम बुरा होगा।”

उमाशंकर ने बताया, “हिंसा के दौरान मुन्ना बंगाली, आरिफ, रफी और आलम के नाम भी लिए जा रहे थे। बाहर से भी लोगों को बुलाया गया था। विवाद के दौरान मेरी गर्दन पर तलवार से वार किया गया। मैं खून से लथपथ हो गया था। पुलिसवालों ने मुझे अपनी तरफ खींचा और गाड़ी में बैठाया, लेकिन मैं गाड़ी से कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए फिर उतरा। मैं अपने कार्यकर्ताओं को पीछे की गली से लेकर वहाँ से निकला, लेकिन तभी छत से पत्थर फेंके जाने लगे। केमिकल्स से भरी बोतलें फेंकी जा रही थीं। इस दौरान कई राउंड फायरिंग भी की गई। मैं लोगों को बचाने में जुटा था। हमला करने वाले ज्यादातर बंगाली मुस्लिम थे। पुलिस के आने के बाद यह मामला शांत हुआ।”

बता दें कि जहाँगीरपुरी इलाके में हिंसा (Delhi Jahangirpuri Riot) के दौरान पुलिस पर फायरिंग करने वाले यूनुस सोनू को गिरफ्तार कर लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो में मोहम्मद सोनू उर्फ यूनुस सोनू हिंसा के दौरान गोली चलाते हुए दिख रहा है। वह हिस्ट्रीशीटर सलीम चिकना का भाई है। वीडियो में वह नीले रंग का कुर्ता और जालीदार टोपी पहना हुआ है। स्पेशल कमिश्नर दीपेंद्र पाठक ने उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।