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‘तमिल राष्ट्रवाद’ के नाम पर तमिलनाडु को अशांत करने की प्लानिंग, LTTE को फिर से खड़ा करने के लिए फंडिंग: NIA ने दायर की चार्जशीट

लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE/ लिट्टे) नामक आतंकी संगठन को फंडिग देने के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने 6 लोगों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की है। 29 मार्च 2022 को जारी प्रेस रिलीज में एनआईए ने यह जानकारी दी।

चेन्नई में सीआईडी की क्यू शाखा द्वारा दर्ज FIR NO 1/2021 की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने 18 जनवरी 2022 को संभाली थी। ये पूरा मामला आतंकी संगठन LTTE को को धोखाधड़ी के जरिए दोबारा से जीवित करने से जुड़ा है। बताया गया है कि इस काम को करने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर खाते में पैसे जमा किए गए ताकि गैरकानूनी और आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जा सके।

कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि भले ही श्रीलंका आधारित इस संगठन को पुनर्जीवित करने के प्रयास हुए लेकिन ये काम उस उद्देश्य से नहीं था जिसके चलते इस अलगाववादी संगठन ने जन्म लिया था। इस बार इनकी कोशिश ये थी कि ये तमिलनाडु को अशांत करने के लिए भारत में ‘तमिल राष्ट्रवाद’ की आग को भड़काएँ। मालूम हो कि लिट्टे संगठन से जुड़े मामलों की जाँच ने तेजी पकड़ ली है। इंटेलिजेंस ब्यूरो ने भी इसे लेकर चेतावनी दी है।

रिलीज के मुताबिक, इन छह आतंकियों के नाम लेचुमानन मैरी फ्रांसिस्का, केनिस्टन फर्नांडो, बस्करन, जॉनसन सैमुवेल, जी धर्मेंद्रन और ई मोहन हैं। एनआईए के अनुसार, जाँच के दौरान, यह भी पता चला कि लेचुमानन मैरी फ्रांसिस्का, टी केनिस्टन फर्नांडो और के भास्करन ने लिट्टे को दोबारा से पुनर्जीवित करने और उसे संगठित करने के लिए विदेशी संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने अवैध ढंग से प्राप्त भारतीय पहचान वाले दस्तावेजों की मदद से अपने इस काम को अंजाम दिया।

पूरा मामला

बता दें कि ये मामला उस समय प्रकाश में आया था जब श्रीलंकाई नागरिक लेचुमानन मैरी (50) को चेन्नई एयरपोर्ट पर पकड़ा गया। ये महिला टूरिस्ट वीजा पर 1 साल से भारत में थी। फिर ये यहाँ कोविड महामारी के चलते रुकी। इसने अन्ना नगर शक्ति कॉलोनी में एक प्रॉपर्टी खरीदी। एक रेंट एग्रीमेंट बनवाया और अपने नाम से एलपीजी कनेक्शन पाने के लिए पहचान दबाए रखी। धीरे-धीरे इसने भारतीय पासपोर्ट और वोटर आईडी भी हासिल किया। मगर एयरपोर्ट पर पकड़ी गई जब पुलिस ने इसके पास जाली दस्तावेजों को देखा। 

मामला हाल में एनआईए को दिया गया जिसने इस केस में बड़ी साजिश समेत कई संभावनाओं के साथ केस को जाँचा। कथिततौर पर आरोपितों ने इंडियन ओवरसीज बैंक की मुंबई फोर्ट शाखा से पैसे निकाले थे। ये पैसे लिट्टे की गतिविधियों को पुनर्जीवित करने और उसे दोबारा से संगठित करने के लिए निकाला गया था। इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी ने बताया कि श्रीलंका द्वारा दबाए जाने के बाद से ये संगठन खामोश था। मगर पिछले कुछ समय में संकेत मिले कि ये लोग वापसी करने की फिराक में हैं।

उल्लेखखीय है कि ltte श्रीलंका का वही आतंकी संगठन है जिसपर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या का इल्जाम है। इसके अलावा इस संगठन ने श्रीलंका के राष्ट्रपति प्रेमादासा की भी हत्या का इल्जाम हैं।

TMC के जिस MLA ने बीजेपी समर्थकों को धमकाया, उस पर चुनाव आयोग सख्त: 6 अप्रैल तक नहीं कर सकेंगे किसी भी तरह से प्रचार

पश्चिम बंगाल के पांडवेश्वर से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती पर चुनाव आयोग ने कार्रवाई की है। आयोग ने वोटरों को धमकाने के लिए उन पर प्रतिबंध लगाया है। चक्रवर्ती को पश्चिम बंगाल में चल रहे उप चुनाव को लेकर कोई भी सार्वजनिक सभा, रैली, रोड शो या साक्षात्कार के लिए 30 मार्च से 6 मार्च 2022 तक प्रतिबंधित किया गया है।

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया है कि मतदाताओं को डराने के लिए तृणमूल विधायक चक्रवर्ती के खिलाफ आरपी एक्ट की धारा 123(2) और आईपीसी की धारा 171-C एवं 171-F के तहत FIR दर्ज की जाए।

उल्लेखनीय है कि टीएमसी विधायक नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे बीजेपी समर्थकों को धमकी दे रहे थे। वीडियो में टीएमसी विधायक ने कहा था, “कट्टर भाजपा समर्थक, जिन्हें प्रभावित नहीं किया जा सकता – उन्हें धमकाया जाना चाहिए। उन्हें बता दीजिए कि अगर उन्होंने अपना वोट डाला, तो हम यही समझेंगे कि उन्होंने भाजपा को ही वोट दिया है।”

उन्होंने वीडियो में कहा था, “जब चुनाव ख़त्म हो जाएगा, उसके बाद भाजपा समर्थक अपने रिस्क पर राज्य में रहेंगे। हाँ, अगर उन्होंने वोट ही नहीं डाला तो हम समझेंगे कि उन्होंने हमारा समर्थन किया है। तभी वो पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्वक रह पाएँगे। तब आप लोग अपने कारोबार और नौकरियाँ यहाँ रह के कर सकते हैं। स्पष्ट है?” शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि कैसे नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती का विधानसभा क्षेत्र आसनसोल लोकसभा में ही आता है, जहाँ दो हफ़्तों में चुनाव होने हैं। भाजपा ने इस वीडियो को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत की थी। राज्य भाजपा के सहप्रभारी अमित मालवीय ने कहा था कि चक्रवर्ती को सलाखों के पीछे होना चाहिए। ममता बनर्जी उन्हें संरक्षण दे रही हैं।

गौरतलब है कि बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट पर 12 अप्रैल को उपचुनाव होना है। इसके अलावा चार विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव हो रहे हैं।

‘आर्थिक जिहाद है हलाल मीट, हिंदुओं के लिए जूठन’: कर्नाटक में भाजपा नेता ने कहा- पहले मुस्लिम गैर-हलाल मीट खाएँ

कर्नाटक हिजाब पर विवाद (Karnataka Burqa/Hijab Controversies) के बाद मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं को नववर्ष (उगाडी) पर हलाल मीट (Halal Meat) बेचे जाने पर बवाल खड़ा हो गया है। मुस्लिमों के इस कार्य को ‘इकोनॉमिक जिहाद’ करार देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने हिंदुओं से इसका इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है।

सीटी रवि ने कहा कि ‘हलाल’ का इस्तेमाल जिहाद की तरह किया जाता है, ताकि मुस्लिम दूसरों के साथ व्यापार न करें। बीजेपी नेता ने कहा, “जब वे (मुस्लिम) सोचते हैं कि हलाल मांस का इस्तेमाल होना चाहिए तो यह कहने में क्या गलत है कि इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।” वो कहते हैं कि हो सकता है कि हलाल मांस मुस्लिमों के लिए बहुत प्रिय है, लेकिन हिंदुओं के लिए यह किसी का बचा हुआ (जूठा) है। हलाल को कुछ इस तरीके से पूरी प्लानिंग के साथ डिजाइन किया गया है कि इस प्रोडक्ट को लोग केवल मुस्लिमों से ही खरीदें, दूसरों से नहीं।

बिजनेस हमेशा दोतरफा होना चाहिए

भाजपा नेता का कहना है कि अगर मुस्लिम हिंदुओं से मांस खरीदने से इनकार करते हैं तो आप हिंदुओं से ये क्यों कहते हैं कि वो मुस्लिमों से हलाल मीट खरीदें। अगर मुस्लिम गैर-हलाल मांस खाते हैं तो हिंदू भी हलाल मीट का इस्तेमाल करेंगे। बिजनेस एकतरफा नहीं होता, दोतरफा होता है।

क्या है मामला

दरअसल, कर्नाटक में बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया के जरिए उगाडी पर मुस्लिमों से हलाल मीट नहीं खरीदने को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। उगाडी हिंदुओं का त्योहार है, जिसे हिंदुओं का नया साल माना जाता है। इस दिन मांसाहारी लोग मांस चढ़ाते हैं।

इस बीच राज्य के पूर्व सीएम एचडी कुमारास्वामी (Ex CM HD Kumaraswamy) ने हिंदू युवकों से कर्नाटक का माहौल खराब नहीं करने की अपील की है। कुमारस्वामी ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इसके लिए कॉन्ग्रेस जिम्मेदार है और उसी के कारण ऐसी राजनीति हो रही है। कॉन्ग्रेस के प्रताड़ना के कारण राज्य के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

श्रीलंका आर्थिक संकट: दवाएँ नहीं मिल रहीं, जरूरत की सामान हुईं महँगी, तेल-गैस के लिए घंटों लाइन में लगे लोग, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ 

चीनी (China) कर्ज के जाल में फँसकर श्रीलंका (Sri Lanka) में हालत हर बीतते दिन के साथ बदतर होते जा रहे हैं। विदेश मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है और महँगाई इतिहास के सभी रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है। डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई मुद्रा बुरी तरह से टूट चुकी है। पड़ोसी देश इन दिनों अपने इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय संकट से जूझ रहा है। ऐसे में भारत एक बार फिर मदद के लिए सामने आया है।

सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका (Central Bank Of Sri Lanka) के अनुसार, जनवरी में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2.36 अरब डॉलर रह गया था। करीब 2.2 करोड़ आबादी वाले इस देश में पेट्रोल-डीजल समेत अन्य ईंधन की भारी किल्ल्त हो चुकी है। महँगाई में बेहिसाब बढ़ोत्तरी के कारण श्रीलंका के लोगों के सामने खाने का भीषण संकट पैदा हो गया है।

देश के विदेशी मुद्रा संकट के बीच पेट्रोलियम की कीमतें आसमान छू रही हैं। श्रीलंका की सरकार के पास पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा नहीं बची है, जिससे यह संकट और भी गहरा गया है। कुछ दिनों पहले श्रीलंका से ऐसी तस्वीरें आईं कि लोग पेट्रोल खरीदने के लिए पेट्रोल पंप पर टूट पड़े हैं और लोगों को नियंत्रित करने के लिए सेना बुलानी पड़ी। हजारों लोग घंटों तक कतार में लग कर तेल के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। देश में डॉलर की कमी ने सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है। फरवरी में श्रीलंका में महँगाई 17.5 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई, जो कि पूरे एशिया में सबसे ज्यादा है। 

श्रीलंका में संकट कितना गहरा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपया सिर्फ मार्च महीने में भी अब तक 45 फीसदी टूट चुका है। दिवालिया होने की कगार पर पहुँच चुका श्रीलंका अपनी जरूरत की अधिकांश चीजें आयात करता है। इनमें दवा से लेकर तेल तक शामिल हैं। मंगलवार (29 मार्च 2022) को खबर आई कि श्रीलंका के एक अस्पताल ने दवाइयों की किल्लत की वजह से पहले से निर्धारित सर्जरी को टाल दिया है। सिर्फ इमरजेंसी सर्जरी की जा रही है। इसके बाद भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त को अस्पताल की तत्काल मदद करने के लिए कहा। बता दें कि भारत पहले ही श्रीलंका को मदद के तौर 1 अरब डॉलर (₹76,33,61,50,000) ऋण दे चुका है।

हालात इस कदर खराब हैं कि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) के नेतृत्व वाली सरकार दूध पाउडर और डीजल खरीदने के लिए भारत, चीन और यहाँ तक कि बांग्लादेश जैसे देशों से क्रेडिट लाइन माँग रही है। स्थिति इतनी विकट है कि केंद्रीय बैंक चाय की पत्तियों की अदला-बदली करके ईरान से तेल खरीदने को मजबूर है। दूध की कीमत करीब 2,000 रुपए हो गई हैं। देश में पेपर-इंक की कमी के कारण कक्षा 9, 10 औ 11 के बच्चों की परीक्षा स्थगित कर दी गई है। बाहर से पेपर या इंक मँगाने के लिए देश के पास डॉलर नहीं है। ऐसे में परीक्षा को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया गया है।

खुद को बेगुनाह साबित करने को फंदे से झूल गई महिला डॉक्टर, छोड़ गई झकझोर देने वाली सुसाइड नोट: प्रसव के दौरान मौत पर दर्ज हुआ था हत्या का केस

राजस्थान में महिला डॉक्टर अर्चना शर्मा ने खुद की बेगुनाही साबित करने के लिए आत्महत्या कर ली है। उन्होंने मंगलवार (29 मार्च 2022) को अपने घर में ही फाँसी लगा ली। एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। वे राजस्थान के दौसा जिले का लालसोट कस्बे की एक निजी अस्पताल में डॉक्टर थीं। प्रसव के दौरान एक महिला की मौत होने के बाद उसके परिजनों ने महिला डॉक्टर के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. अर्चना (42) और उनके पति डॉ. सुनीत उपाध्याय (45) का लालसोट कस्बे में आनंद नाम का अस्पताल है। पास में खेमवास गाँव है। वहीं के रहने वाले लालूराम बैरवा की पत्नी आशा गर्भवती थी और सोमवार को उन्हें प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। दोपहर में महिला की डिलीवरी कराई जाने लगी तो बहुत अधिक ब्लीडिंग होने के कारण मौत हो गई। हालाँकि, नवजात को बचा लिया गया। इसके बाद मृतक महिला के परिजनों ने मुआवजे की माँग को लेकर अस्पताल के बाहर धरना दिया। साथ ही डॉ. अर्चना के खिलाफ लालसोट थाने में हत्या की धारा 302 के तहत केस दर्ज कराया।

गायनेकॉलिजस्ट थीं डॉ अर्चना

डॉ. अर्चना शर्मा गायनेकॉलिजिस्ट थीं और 8 सालों से प्रैक्टिस कर रही हैं। उनके परिजन वंदना के अनुसार मंगलवार की सुबह करीब 11 बज वो जब घर की तीसरी मंजिल पर स्थित डॉ. अर्चना के कमरे में गई तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक आवाज लगाने के बाद भी उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद अर्चना के पति ने धक्का मारकर दरवाजा खोला तो पाया कि वह फंदे से लटकी हुई थीं। लालसोट पुलिस थाना अधिकारी अंकेश चौधरी ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव स्वजनों को सौंप दिया गया है।

‘मेरा मरना शायद मेरी बेगुनाही साबित कर दे’

डॉ. अर्चना शर्मा ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। इसमें उन्होंने लिखा, “मैं अपने पति, बच्चों से बहुत प्यार करती हूँ। प्लीज मेरे मरने के बाद इन्हें परेशान मत करना। मैंने कोई गलती नहीं की। किसी को नहीं मारा। पीपीएच कॉम्प्लिकेशन है। इसके लिए डॉक्टर को इतना प्रताड़ित करना बंद करो। मेरा मरना शायद मेरी बेगुनाही को साबित कर दे। बेगुनाह डॉक्टरों को प्रताड़ित करना बंद करो प्लीज।”

इस बीच मृतक डॉक्टर के पति ने भी पुलिस में शिकायत कर आरोप लगाया है कि दबाव में पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया था। इस मामले में राजस्थान के डीजीपी एमएल लाठर ने कार्रवाई की बात कही है। वहीं जिले के एसपी अनिल कुमार का कहना है कि राजस्थान में फ्री रजिस्ट्रेशन पॉलिसी है। जाँच के बाद अगर सबूत नहीं मिलते तो धाराएँ हटा दी जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, ऐसे मामलों में 302 नहीं लगता।

इस बीच डॉक्टरों के संगठन फेडरेशन ऑफ रेसीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (FORDA) ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखकर डॉ. अर्चना शर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने औऱ उन्हें मुआवजा देने की माँग की है।

वहीं राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कॉन्ग्रेस को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि कॉन्ग्रेसी नेताओं के दबाव में पुलिस ने संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर दी है।

महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार पर नया संकट: कॉन्ग्रेस के 25 MLA हुए ‘बागी’, सोनिया गाँधी से माँगा समय; कहा- पार्टी के मंत्री भी जवाब नहीं देते

आंतरिक कलह से जूझ रही कॉन्ग्रेस की महाराष्ट्र ईकाई में भी सब कुछ ठीक नहीं है। पार्टी के 25 विधायकों ने बागी तेवर दिखाते हुए सोनिया गाँधी से मिलने का समय माँगा है। इनके तेवर ने राज्य में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में चल रही महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के लिए नया संकट पैदा कर दिया है। इस सरकार में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और शरद पवार की एनसीपी शामिल है। गठन के बाद से ही तीनों साझेदारों के मतभेद समय-समय पर सामने आते रहते हैं।

द इकॉनॉमिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक कॉन्ग्रेस के 25 विधायकों ने महाराष्ट्र सरकार में अपनी ही पार्टी के मंत्रियों के खिलाफ शिकायत करने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मिलने का समय माँगा है। इन कॉन्ग्रेस विधायकों का कहना है कि पार्टी के मंत्री भी उनकी बात नहीं सुनते। उनकी चिंताओं का जवाब नहीं देते हैं। विधायकों ने सोनिया गाँधी को भेजे पत्र में उनसे हस्तक्षेप करने और चीजों को सही करने का आग्रह किया है।

कुछ विधायकों ने ET से कहा है कि महाविकास अघाड़ी सरकार के मंत्री, विशेष रूप से कॉन्ग्रेस के मंत्री, उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। उनमें से एक ने कहा, “अगर मंत्री विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में काम को लागू करने के अनुरोधों की अनदेखी करते हैं, तो पार्टी चुनावों में अच्छा प्रदर्शन कैसे करेगी?”

पार्टी में कोऑर्डिनेशन की कमी का संकेत देते हुए विधायकों ने कहा कि उन्हें पिछले सप्ताह ही पता चला कि कॉन्ग्रेस के प्रत्येक मंत्री को पार्टी विधायकों से जुड़े मसलों का तरीके से समाधान करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत हर मंत्री के जिम्मे तीन पार्टी विधायक आते हैं। एक कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा, “हमें इसके बारे में तब पता चला जब एचके पाटिल ने हाल ही में एक बैठक की थी। इसमें बताया गया कि कॉन्ग्रेस मंत्रियों को तीन-तीन विधायक आवंटित किए गए हैं। राज्य मे एमवीए की सरकार बनने के कुछ महीने बाद ही ऐसा किया गया था। लेकिन हमें इसके बारे में सरकार बनने के ढाई साल बाद पता चल रहा है। अब भी कोई नहीं जानता कि कौन सा मंत्री हमसे जुड़ा हुआ है।”

इसके अलावा कॉन्ग्रेस के विधायकों का यह भी कहना है कि इस तरह की परिस्थिति के कारण राज्य में पार्टी एनसीपी से भी पिछड़ रही है। विधायकों ने चिट्ठी में लिखा है कि एनसीपी के नेता और उद्धव सरकार में डिप्टी सीएम अजित पवार लगातार अपनी पार्टी के विधायकों से मिलते हैं, उनकी बात सुनते हैं और योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था भी कराते हैं। उन्होंने ये भी लिखा है कि एनसीपी लगातार कॉन्ग्रेस पर निशाना साधती है। अगर अभी कदम नहीं उठाया गया, तो कॉन्ग्रेस बाकी राज्यों की तरह महाराष्ट्र में हाशिए पर चली जाएगी। विधायकों ने कहा कि पंजाब में पार्टी की हार के बाद तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर पार्टी का महाराष्ट्र में ऐसा ही रवैया रहता है तो पंजाब जैसा परिणाम आ सकता है। बता दें कि हालिया विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में करारी हार मिली है।

13 साल की लड़की ने सपने में देखी ईशनिंदा-मिला जान से मारने का हुक्म, फिर 3 महिलाओं के साथ मिल मदरसे में महिला शिक्षिका का गला रेता

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान में एक मदरसा शिक्षिका की मंगलवार (29 मार्च 2022) को हत्या कर दी गई। वजह 13 साल की एक लड़की ने सपने में देखा कि शिक्षिका ने ईशनिंदा की है। सपने में ही उसे जान से मारने का हुक्म मिला। इसके बाद नाबालिग ने तीन अन्य महिलाओं के साथ मिल शिक्षिका की हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि चारों ने शिक्षिका पर धारदार हथियार से हमला किया और मदरसे के दरवाजे के पास सिर काटकर उसकी हत्या कर दी।

हत्या अंजुमाबाद इलाके में हुई। हत्या की आरोपित तीनों महिला भी जामिया इस्लामिया फलाहुल बिनात मदरसा में शिक्षिका थी। मृतका भी इसी मदरसे में पढ़ाती थी। हत्या में वह 13 साल की लड़की भी शामिल थी जिसने ‘ईशनिंदा का सपना’ देखा था। डीपीओ कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि पूछताछ में आरोपितों ने ईशनिंदा का आरोप लगाया और कहा कि वह धार्मिक विद्वान मौलाना तारिक जमील की अनुयायी थी, जिसे वह नापसंद करती थीं।

बयान के अनुसार तीनों आरोपित महिलाओं ने खुलासा किया कि उनकी 13 साल की रिश्तेदार ने एक सपना देखा था। ख्वाब में में ही उसे ईशनिंदा करने वाली शिक्षिका की हत्या का हुक्म मिला था। बयान में बताया गया है कि नाबालिग के देखे सपने के आधार पर ही तीनों महिलाओं ने हत्या कर दी।

मामले में दक्षिण वजीरिस्तान जिले में महसूद जनजाति से ताल्लुक रखने वाले लाल शाह के बेटे जाहिद ने FIR दर्ज करवाई। इसमें कहा गया कि उसकी 21 वर्षीय भतीजी सफूर बीबी मदरसातुल फलाहुल बनात इस्लामिया में शिक्षिका के तौर पर कार्यरत थी। उसने पुलिस को बताया कि 24 वर्षीय आरोपित उमरा अमन (दीन बादशाह की बेटी), 21 साल की रजिया हनफी (अल्लाह नूर की बेटी), 17 साल की आयशा नोमानी (अल्लाह नूर की बेटी) और शाह नूर की 13 साल की बेटी ने सफूर बीबी पर हमला किया। मंगलवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे जब वह मदरसे में पहुँची तो उन पर चाकुओं और धारदार हथियारों से हमला किया गया।

मौके पर पहुँची पुलिस ने सभी आरोपितों के गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने वारदात को अंजाम देने में इस्तेमाल किए गए हथियार को भी बरामद कर लिया है। उन्होंने बताया कि सभी आरोपित मूल रूप से दक्षिण वजीरिस्तान जिले के रहने वाले हैं, लेकिन डेरा इस्माइल खान शहर के अंजुमाबाद इलाके में रह रहे हैं। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

मिठाई बाँटने पर हुई जिस बाबर अली की हत्या, उसकी अम्मी से CM योगी ने की बात, कहा- मैं आपका दूसरा बेटा

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में मार डाले गए बाबर अली की अम्मी से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फोन पर बात की। संवेदना जाहिर करते हुए सीएम ने बाबर की अम्मी जैबुननिशा से कहा, “मैं आपका दूसरा बेटा हूँ।” साथ ही सभी आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया। बीजेपी की जीत पर मिठाई बाँटने से नाराज लोगों ने बाबर की हत्या कर दी थी।

इसके अलावा सीएम योगी ने बाबर अली की बीवी फातिमा से बात कर उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा भी दिया। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपए का मुआवजा देने का भी ऐलान किया। इस बीच यूपी पुलिस ने सोमवार (28 मार्च 2022) को इस मामले के दो आरोपित अज़ीमुल्लाह और सलमा को भी गिरफ्तार कर लिया। ताहिद और आरिफ की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबर की हत्या के मामले में लापरवाही बरतने को आरोप में SHO पर एक्शन लेते हुए उनका ट्रांसफर पुलिस लाइन में कर दिया गया है। रामकोला थाना प्रभारी पर आरोप है कि शिकायत के बाद भी उन्होंने लापरवाही दिखाई और पीड़ित को सुरक्षा नहीं दी थी। इस मामले में बाबर अली की बीवी फातिमा ने आरोपितों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

क्या है पूरा मामला

कुशीनगर जिले के कटघरही गाँव के रहने वाले बाबर भाजपा का समर्थन करते थे और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में बीजेपी का प्रचार कर रहे थे। बाबर के परिजनों के मुताबिक विधानसभा चुनाव में बाबर भाजपा के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। उन्होंने 10 मार्च को नतीजे घोषित होने के बाद मिठाई भी बाँटी थी। मुस्लिम होने के बाद भी बीजेपी को समर्थन देना उनके पट्टीदारों को नागवार गुजरा और मौका देख उन्होंने बाबर के साथ निर्मम ढंग से मारपीट की। बताया जा रहा है कि 20 मार्च को जब उन पर हमला हुआ तब उन्होंने जय श्रीराम का नारा लगा दिया था। इसी को सुनकर उनके आसपास रहने वाले परिजन बिदक गए और अजीमुल्लाह, आरिफ, ताहिद, परवेज ने साथियों के साथ मिलकर उनपर हमला किया। जब जान बचाने के लिए बाबर छत पर भागे तो ये लोग वहाँ भी पहुँच गए और बुरी तरह पीटने के बाद उन्हें छत से फेंक दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

मारा गया वह रईस अहमद जो आतंकी बनने से पहले न्यूज पोर्टल का था ‘एडिटर इन चीफ’, बुर्का पहन CRPF बंकर पर फेंका पेट्रोल बम

जम्मू-कश्मीर में बुधवार (30 मार्च 2022) तड़के सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया। श्रीनगर में हुए इस मुठभेड़ में मारे गए एक आतंकवादी की पहचान रईस अहमद भट के तौर पर हुई है। वह कभी पत्रकार हुआ करता था। ‘वैली न्यूज सर्विस’ नामक वेबसाइट का वह एडिटर इन चीफ रहा था। एक अन्य घटना में बारामुला जिले के सोपोर में सीआरपीएफ के बंकर पर बुर्का में आए व्यक्ति ने पेट्रोल बम फेंका। यह घटना मंगलवार शाम की है और इसका वीडियो वायरल है।

रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीनगर के रैनावारी इलाके में मार गिराए गए आतंकियों के पास से हथियार भी मिले हैं। मुठभेड़ तब हुआ जब इलाके में पुलिस और सीआरपीएफ की टीम ज्वाइंट सर्च ऑपरेशन चला रही थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजीपी विजय कुमार ने बताया, “लश्कर ए तैयबा और टीआरएफ के दो स्थानीय आतंकियों को श्रीनगर एनकाउंटर में मार गिराया गया है। दोनों आम लोगों की हत्याओं में शामिल रहे हैं।”

पुलिस अधिकारी ने कहा, “मारे गए आतंकियों में से एक रईस अहमद भट आतंकी बनने से पहले एक पत्रकार था और अनंतनाग जिले में ‘वैली न्यूज सर्विस’ नाम से एक ऑनलाइन पोर्टल चलाता था।” पुलिस ने उसका प्रेस पहचान पत्र भी जारी किया है। वहीं मुठभेड़ में मारा गया दूसरा आतंकी हिलाल अह राह है। वह ‘सी’ कैटेगरी का आतंकी था और बिजबेहरा का रहने वाला था।

सीआरपीएफ बंकर पर पेट्रोल बम से हमला

इससे पहले मंगलवार (29 मार्च 2022) को बारामुला जिले के सोपोर इलाके में शाम के वक्त एक मुख्य चौक पर बुर्का पहने एक संदिग्ध ने सीआरपीएफ बंकर पर पेट्रोल बम से हमला कर दिया। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।

ये घटना सीसीटीवी में भी कैद हो गई। जाँच एजेंसी इलाके का घेराव कर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। वैसे सीसीटीवी फुटेज से यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि बुर्के में हमला करने वाला पुरुष था या महिला।

लंदन जा रही थीं राना अय्यूब, एयरपोर्ट पर रोकी गईं: कोविड के नाम पर चंदा लेकर खुद पर खर्च करने के हैं आरोप

कट्टर इस्लामी गिरोह के पत्रकारों में शामिल राना अय्यूब को विदेश जाने से रोक दिया गया है। उन पर कोविड फंड्स का दुरुपयोग करने के आरोप हैं। राना अय्यूब ने मंगलवार (29 मार्च 2022) को खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “आज मुझे मुंबई में लंदन जाने से रोक दिया गया। जब मैं International Journalism Festival में भारतीय लोकतंत्र और पत्रकारों को डराने-धमकाने पर अपना भाषण देने के लिए लंदन के लिए अपनी फ्लाइट पकड़ने वाली थी। मैंने इसके बारे में कुछ हफ्ते पहले ही सार्वजनिक रूप से कहा था, फिर भी मुझे रोके जाने के बाद ईडी का समन मेरे इनबॉक्स में आ गया।”

फोटो साभार: ट्विटर

उन्होंने लिखा, “मेरे सोशल मीडिया अकाउंट पर इस बारे में कई हफ्तों से ट्वीट किया जा रहा है। फिर भी, मुझे प्रवर्तन निदेशालय का समन उस वक्त मेल किया जाता है, जब मुझे मेरे देश में विदेश जाने से रोक दिया जाता है। आप किससे डरते हैं?”

मालूम हो कि लोगों की मदद के नाम पर धन की उगाही और उस पैसे की गड़बड़ी करने के मामले में प्रोपेगेंडा पत्रकार राना अय्यूब (Rana Ayyub) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत फरवरी 2022 में बड़ी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने अय्यूब की 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति को कुर्क कर लिया था। ईडी ने कहा था कि राना अय्यूब ने एक साजिश के तहत आम जनता को धोखा दिया है।

प्रवर्तन निदेशालय के आदेश में कहा गया था कि राना अय्यूब के घोटाले की शुरुआत तभी से शुरू हो गई थी, जब उन्होंने पैसा इकट्ठा करने के बाद उसे अपने और अपने परिवार के सेविंग अकाउंट से निकालना शुरू कर दिया था। ईडी के मुताबिक, अयूब के 50 लाख रुपए के फिक्स्ड अमाउंट नेट बैंकिंग से बुक किए गए और एक अलग करेंट अकाउंट खोला गया। बाद में उसके बचत बैंक खाते और उसकी बहन और पिता के बैंक खाते से फंड का ट्रांसफर किया गया। लेकिन Ketto.org के जरिए जिस उद्देश्य के लिए धन की उगाही की गई थी, उसके लिए इसका इस्तेमाल नहीं हुआ।

राना अय्यूब के खिलाफ दर्ज किए गए केस

गौरतलब है कि प्रोपागैंडा पत्रकार राना अय्यूब के खिलाफ गाजियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में 7 सितंबर 2021 को आईपीसी की धारा 403, 406, 418, 420, आईटी अधिनियम की धारा 66 डी और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट-2002 की धारा 4 के तहत प्राथमिकी दर्ज किया गया था। इसमें राना अय्यूब पर ये आरोप लगाया गया था है कि उसने चैरिटी के नाम पर गलत तरीके से आम जनता से धन की वसूली की थी। हिंदू आईटी सेल के विकास शाकृत्यायन ने अगस्त 2021 में ये एफआईआर दर्ज करवाया था। प्राथमिकी में राना द्वारा चलाए गए तीन अभियानों का जिक्र किया गया है।