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‘गिरिजा जी पर हँसने वालों, शर्म करो’: CM आवास के बाहर कश्मीरी पंडितों का विरोध प्रदर्शन, बोले- माफी माँगें केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) के खिलाफ बुधवार (30 मार्च 2022) को कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) ने विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली विधानसभा में अरविंद केजरीवाल के ‘कश्मीर फाइल्स’ पर दिए बयान से कश्मीरी पंडित नाराज हैं। इस विरोध प्रदर्शन में कश्मीरी हिंदू समाज के लोग शामिल थे, जिसे इंडिया फोर कश्मीर (India 4 kashmir) नाम की संस्था ने ऑर्गेनाइज किया। 

दरअसल, अरविद केजरीवाल ने ‘कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को टैक्स फ्री करने की बजाय यूट्यूब पर डालने का बयान दिया था। कश्मीरी पंडितों का आरोप है कि केजरीवाल ने यह बयान हँसते हुए दिया था। इससे कश्मीरी पंडित आहत हैं। बयान के विरोध में बुधवार को कश्मीरी पंडितों ने हाथ में तख्ती-बैनर और राष्ट्रीय ध्वज लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। पोस्टरो पर राखी बिड़ला की भी तस्वीर है। बता दें कि राखी बिड़ला डिप्टी स्पीकर हैं और जब अरविंद केजरीवाल कश्मीर फाइल्स को लेकर असंवेदनशील बयान दे रहे थे, तब वह ठहाके लगाकर हँस रही थीं।

इस दौरान प्रदर्शनकर्ताओं ने ‘गिरिजा जी पर हँसने वालों- शर्म करो, शर्म करो’, ‘7 लाख भगाए थे, 70 लाख बसाएँगे’, ‘WE WANT JUSTICE’, ‘कुछ काटे गए, कुछ जलाए गए, अपने घर से भगाए गए’, ‘जहाँ हुई बलिदान गिरिजा की, वो कश्मीर हमारा है’, ‘जहाँ हुई बलिदान टपलू जी की, वो कश्मीर हमारा है’ जैसे नारे लगाए। 

विरोध प्रदर्शन की वजह के बारे में बात करते हुए कश्मीरी पंडित शिल्पा ने ऑपइंडिया से कहा, “अरविंद केजरीवाल ने हमारे नरसंहार को झूठा बताते हुए उसका मजाक बनाया, उस पर हँसा, जो कि बेहद ही निंदनीय है। हम इसी बात को लेकर यहाँ विरोध प्रदर्शन करने आए हैं।”

वहीं, कुसुम पंडिता नाम की एक अन्य कश्मीरी पंडित ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “अभी हाल ही में केजरीवाल साहब ने जो कश्मीरी पंडितों का मजाक उड़ाया है, हम उसी के लिए यहाँ पर इकट्ठा हुए हैं। हमें उनसे यह उम्मीद नहीं थी कि केजरीवाल साहब ऐसा मजाक उड़ाएँगे। उनको ये समझना चाहिए कि हम पिछले 32 सालों से जिस दर्द से गुजर रहे हैं, हम अपना घर छोड़कर आए हैं, तो उनको ये सब नहीं करना चाहिए था। हमलोग सिर्फ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि वह हमारे पूरे समाज से एक बार माफी माँगें।”

यह पूछे जाने पर कि केजरीवाल कह रहे हैं कि उन्होंने कश्मीरी पंडितों को नौकरी दी है, कुसुम ने कहा कि यह झूठ है। ये बातें वे अपनी सीट बचाने के लिए बोल रहे हैं। राखी बिड़ला की तस्वीर लगाने पर कुसुम कहती हैं कि एक महिला होने के नाते उनको महिला का दर्द समझना चाहिए। उनका हँसना बेहद ही अशोभनीय था।

इसके अलावा, उन्होंने फिल्म का बिना मतलब का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि केजरीवाल ने कई फिल्मों को टैक्स फ्री किया है, लेकिन कश्मीर फाइल्स को यूट्यूब पर डालने की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने आगे यह भी कहा कि फिल्म में वही सब सच दिखाया गया है, जो कश्मीरी पंडितों के साथ हुआ है।

बता दें कि कश्मीरी पंडितों को सीएम आवास से 100 मीटर दूर ही रोक दिया गया। इसके बाद अंत मे उन्होंने फूल ले लेने की विनती की, लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया। पुलिसवालों ने कहा कि उन्हें फूल लेने का आदेश नहीं आया है। मजबूरी में फूल को बैरिकेड्स पर लगाने पड़े। इसके साथ ही उन्होंने केजरीवाल के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

प्रदर्शनकर्ता साक्षी ने कहा, “यह नरसंहार कोई मजाक नहीं है, कोई फेक स्टोरी नहीं है, कोई प्रोपेगेंडा नहीं है, कॉमेडी भी नहीं है, जिस पर आपके सदन में सभी ठहाके लगाकर हँस रहे थे। GET WELL SOON केजरीवाल जी और फिर पॉलिटिक्स का चश्मा उतार कर हमारे न्याय की मुहिम में शामिल हों। हम आपके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।”

बता दें कि आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने ‘द कश्मीर फाइल्स‘ (The Kashmir Files) को झूठी फिल्म बताते हुए राज्य में टैक्स फ्री करने से इनकार कर दिया है। गुरुवार (24 मार्च 2022) को विधानसभा में उन्होंने फिल्म को टैक्स फ्री करने की बजाय यूट्यूब पर डालने की सलाह भी दी थी।

सरिस्का में आग के बाद भी सचिन तेंदुलकर की पत्नी को टाइगर रिजर्व दिखाने में बिजी थे अधिकारी: छत्तीसगढ़ में 10536 जगहों पर आग, गाजीपुर के धुएँ से दिल्ली भी बेदम

दिल्ली के गाजीपुर में कुड़े का एक पहाड़ है। यहाँ लगी आग अब तक पूरी तरह नहीं बुझी है। यहाँ से निकल रहे जहरीले धुएँ के कारण आसपास के लोगों को साँस लेने भी दिक्कत हो रही है। राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व में भी आग लगी हुई है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में भी आग से कई एकड़ में वन संपदा नष्ट होने की खबर है।

सरिस्का जंगल की आग

राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का वन्य अभ्यारण्य क्षेत्र स्थित है, जिसे सरिस्का टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस टाइगर रिजर्व में आग लगे तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक इसे कंट्रोल नहीं किया जा सका है। इस आग ने 20 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह से जलाकर राख कर दिया। करीब 300 वनकर्मी और भारतीय वायुसेना के दो हेलीकॉप्टर लगातार आग बुझाने की कोशिशें कर रहे हैं। इस टाइगर रिजर्व में 27 टाइगर समेत कई और वन्यजीव रहते हैं, जो कि आग के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। सरिस्का की पहाड़ियों पर बसे डाबली गाँव को भी खाली कराया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आग की भयावहता को देखते हुए राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत से बात की। उन्होंने राज्य सरकार को हर संभव मदद का भरोसा दिया है। इस बीच सरिस्का की सुरक्षा में तैनात वन्य अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई है। सरिस्का के जंगलों में लगी भीषण आग को बुझाने के बजाय टाइगर रिजर्व के निदेशक आरएन मीणा पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की पत्नी अंजलि तेंदुलकर को जंगल घुमाने के लिए ले गए थे। रिपोर्ट के अनुसार रविवार (27 मार्च 2022) को अंजलि तेंदुलकर सरिस्का आई थीं। अधिकारी और निदेशक वीआईपी ड्यूटी में लगे थे, जबकि उससे पहले वायरलेस पर आग की खबर आ चुकी थी।

छत्तीसगढ़ में 10 हजार से अधिक जगहों पर आग

छत्तीसगढ़ के जंगलों में भी भीषण आग लगी हुई है। प्रदेश में 10,536 जगहों पर आग की बात कही गई है। लेकिन, वनकर्मी बीते एक हफ्ते से हड़ताल पर हैं। इस बीच अब अपनी जान बचाने के लिए वन्य जीव जंगल से बाहर शहरों की तरफ जाने लगे हैं। मुंगेली-कवर्धा में बीते दिनों एक हिरण की आग से जलकर मौत हो गई थी।

गाजीपुर की आग से साँस लेना दूभर

राजधानी दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर डंपिंग यार्ड है। यहाँ सोमवार (28 मार्च 2022) को भीषण आग लगी थी। इसे बुझाने की कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन कचरे के इस पहाड़ में लगातार आग धधक रही है। इससे निकलने वाले जहरीले धुएँ के कारण आसपास के इलाकों में लोगों को साँस लेने में भी दिक्कतें हो रही है। इस आग के कारण एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। दमकल विभाग के मुताबिक, पिछले साल इसी मौसम में आग लगने की 16 घटनाएँ हुई थीं।

पहाड़न है, कितना देती है… यूट्यूबर भुवन बाम की अश्लील कॉमेडी सुनी क्या, नेटिजन्स बोले- कार्रवाई करे NCW

यूट्यूब के जरिए पूरी दुनिया में मशहूर हो चुके भुवन बाम की हालिया वीडियो पर विवाद हो गया है। आरोप है कि भुवन ने वीडियो में पहाड़न महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी करते हुए हास्य परोसा। अब उनकी इस वीडियो की छोटी क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल है और लोग इसे देखकर उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई से लेकर उनके चैनल को बंद कराने की माँग कर रहे हैं।

भुवन बाम की विवादित वीडियो

बता दें कि 25 मार्च 2022 को बीबी की वाइन्स नाम के अपने यूट्यूब चैनल पर भुवन बाम ने यह वीडियो अपलोड की थी। ‘ऑटोमैटिक गाड़ी’ वाले टाइटल के साथ अपलोड की गई इस वीडियो को अब तक 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देख लिया है। वहीं इसे 1.9 मिलियन लाइक्स मिल चुके हैं। भुवन बाम का चैनल भी भारत के जाने माने यूट्यूब चैनल्स में से एक है। उनके खुद 25.3 मिलियन सब्सक्राइबर हैं। हालिया वीडियो उनकी 7 मिनट 15 सेकेंड की है। इसमें पहाड़न महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी को 5 मिनट 39 सेकेंड के बाद सुन सकते हैं। यही वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रही है।

वीडियो में भुवन बाम को पिता के कैरेक्टर में गाड़ी के नाम पर दुअर्थी बातें करते सुना जा सकता है। वे कहते हैं- “दो लाख का बजट है मेरा। कोई मॉडल बढ़िया बताइए।” इसके बाद सामने से सवाल -जवाब होते हैं और पहाड़न शब्द आता है और फिर वीडियो में ‘कितना देती है’… ‘पीछे से भी ले सकते हैं’ … ‘जिगोलो’ जैसे शब्द यूज करते सुना जा सकता है।

भुवन बाम की NCW में शिकायत

पहाड़ी पांडा चैनल के आशीष नौटियाल ने इस क्लिप को साझा करते हुए महिला आयोग अध्यक्ष रेखा शर्मा से सवाल किया है कि क्या वो इस तरह महिला विरोधी टिप्पणी करने वाले भुवन बाम के ख़िलाफ़ कार्रवाई के निर्देश दे सकती हैं। उनकी माँग है कि ऐसे लोगों को युवाओं तक पहुँचने से रोका जाए और संभव हो तो चैनल भी डिलीट हो।

पहाड़ी लोग और उनकी अस्मिता पर बात करते हुए उत्तराखंड के नवयुवक आशीष ने कहा, “जिस तरह से कॉमेडियन आजकल ‘रशियन’ लिख या बोल देने का अर्थ सिर्फ ‘पोर्न’ मानने लगते हैं, क्या कल के दिन भुवन बाम जैसे लोगों के ऐसे कारनामों से ‘पहाड़न’ शब्द भी एक गाली नहीं बन जाएगा? और जिस तरह से कॉमेडीयंस की एक पूरी जमात ही आज ‘संस्कारी’ होने को गाली बना चुकी है, इस बात की क्या गारंटी है कि भुवन बाम ऐसा ही करने का प्रयास नहीं कर रहा है?” 

उनके अलावा तमाम अन्य यूजर्स भी इस तरह कॉमेडी के नाम पर पहाड़ी महिलाओं को निशाना बनाए जाने से नाराज हैं। बॉलीवुड लेखिका अद्वैता काला ने इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराते हुए रेखा शर्मा को टैग किया है। उन्होंने वीडियो में इस्तेमाल शब्दों को लिखते हुए कहा- “कितना देती है- कहाँ से लेती है जैसे शब्द पहाड़ी या अन्य महिलाओं के लिए अस्वीकार्य हैं और रेप कल्चर को बढ़ावा देते हैं।” उन्होंने इस तरह की कॉमेडी को घटिया और नारीविरोधी बताया है।

पत्रकार किशोर जोशी ने इस वीडियो को घटिया बताते हुए कहा निहायत ही घटिया वीडियो और टिप्पणी है। कभी ऐसे लोगों को भी विल स्मिथ जैसा घूंसा पड़ेगा। इस तरह के बेहूदा वीडियो बनाने पर। सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर खुद पहाड़ी राज्य से आते हैं उनसे ऐसे लोगों के चैनल और कंटेंट पर पर ऐक्शन लेने की अपेक्षा तो रख ही सकते हैं।

गौरतलब है ट्विटर पर जाहिर किए जा रहे विरोध पर अभी तक यूट्यूबर की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके अलावा जो शिकायत महिला आयोग से की गई है उस पर भी संज्ञान लेना अभी बाकी है।

कोर्ट में फिर खुली इस्लामी आतंकी बिट्टा कराटे की फाइल, 40 कश्मीरी पंडितों को मारने वाले का 16 अप्रैल को होगा हिसाब

कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) की नृशंस हत्या करने वाले इस्लामिक आतंकवादी फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे (Farooq Ahmed Dar alias Bitta Karate) पर 31 साल बाद केस चलने जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिजनेसमैन सतीश टिकू के परिवार ने श्रीनगर सेशंस कोर्ट में एक याचिका दायर कर आतंकी फारूक अहमद डार के खिलाफ फिर से सुनवाई करने की माँग की है।

टिकू के परिवार की ओर से वरिष्ठ वकील उत्सव बैंस ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। वहीं, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सतीश टिकू के परिवार से याचिका की हार्ड कॉपी पेश करने को कहा है। अब इस मामले में 16 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी।

साल 1990 में कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार करने वालों में शामिल बिट्टा कराटे ने एक लाइव टीवी इंटरव्यू में कबूल किया था कि उसने ही सतीश कुमार टिकू को मारा था। साथ ही आतंकी कराटे ने दावा किया था कि उसे टिकू को मारने के लिए ऊपर से आदेश मिला था।

बताया जाता है कि फारूक अहमद डार ने इंटरव्यू में निर्दोष लोगों को खत्म का आदेश देने वाले जिस अज्ञात शख्स का नाम लिया था, वह जेकेएलएफ (JKLF) का शीर्ष कमांडर अशफाक मजीद वानी था। उसने ही घाटी में रहने वाले निर्दोष कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार करने का आदेश दिया था। वानी वह शख्स था, जो बिट्टा कराटे और अन्य को आतंकियों को प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान ले गया था।

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का नेतृत्व करने वाले बिट्टा ने 42 लोगों को बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। उसने अपना जुर्म कबूलते हुए कहा था कि 1990 में कम से कम 20 या ‘शायद 30-से 40 कश्मीरी पंडितों की हत्या’ की थी। उसने यह भी बताया था कि सतीश टिकू उसका करीबी दोस्त था।

आतंकी ने कहा था, “मैंने हिंदुओं को मारने के लिए 20 से 30 गज की दूरी से पिस्तौल का इस्तेमाल किया था। कभी-कभी, मैंने सुरक्षाकर्मियों पर गोली चलाने के लिए एके-47 राइफल का भी इस्तेमाल किया।” कराटे का कहना था कि वह इसलिए आतंकवादी बना, क्योंकि उसे स्थानीय प्रशासन द्वारा परेशान किया गया था।

पाकिस्तान के निर्देश पर निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाले बिट्टा की पहली बार गिरफ्तारी 1990 में हुई थी। उस पर कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का आरोप लगाया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में उसे 17 साल बाद ​रिहा कर दिया गया था। इसके बाद अमरनाथ भूमि विवाद उपद्रव मामले में उसे 2008 में गिरफ्तार किया गया, लेकिन इसके आठ महीने बाद उसकी रिहाई हो गई। साल 2019 में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने उसे आतंकी फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया।

बता दें कि विवेक अग्रिहोत्री के निर्देशन में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को काफी पसंद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस फिल्म की सराहना की है।

कोई टीचर, कोई कॉन्स्टेबल तो कोई कंप्यूटर ऑपरेटर… सबके आतंकी कनेक्शन: जम्मू-कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकियों से लिंक होने की वजह से 5 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। उन पर संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (c) के तहत कार्रवाई की गई है। जिन सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, उनमें पुलवामा से पुलिस कॉन्सटेबल तवसीफ अहमद मीर, श्रीनगर से कंप्यूटर ऑपरेटर घुलम हसम पेरे, अवंतीपोरा से शिक्षक अर्शीद अहमद दास, बारामूला से पुलिस कॉन्सटेबल शाहिद हुसैन और कुपवाड़ा से शराफत ए खान का नाम शामिल है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में हाल में आतंकियों से कनेक्शन को लेकर कई सरकार कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है। आतंकियों के साथ मिलीभगत की सूचना मिलने पर सरकारी कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाता है। नौकरी से निकाले जाने के साथ-साथ उन पर सुरक्षा अधिनियम के तहत केस भी चलाया जाता है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने हाल ही में आदेश जारी कर ऐसे कर्मचारियों को चेताया भी था। 

इससे पहले सितंबर 2021 में आतंकियों के साथ मिलकर काम करने के आरोपित 6 कर्मचारियों पर राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। ये ओवर ग्राउंड वर्कर के रूप में काम कर रहे थे। बर्खास्त किए गए कर्मियों में अनंतनाग का शिक्षक हमीद वानी भी शामिल था। वह आतंकी संगठन अल्लाह टाइगर के जिला कमांडर के तौर पर काम कर रहा था।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में देश विरोधी गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए सरकार ने 30 जुलाई 2020 को 6 सदस्यीय एक समिति का गठन किया था। इस समिति का गठन को संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (c) के तहत मामलों की जाँच और सिफारिश करने के लिए किया गया था।

वहीं जम्मू कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है। बुधवार (30 मार्च 2022) सुबह ही सेना ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया और 2 लोकल आतंकियों को मार गिराया। इन आतंकियों की पहचान रईस अहमद भट और हिलाल-अह-राह के रूप में हुई। इसमें से आतंकी रईस अहमद भट के पास से एक प्रेस का आईडी कार्ड भी बरामद हुआ। वह अनंतनाग में वैली न्यूज सर्विस नाम से एक न्यूज पोर्टल चलाता था। पुलिस ने ये भी बताया था कि ये दोनों आतंकी आम नागरिकों पर हमले समेत कई अपराधों में शामिल थे। 

इससे पहले मंगलवार (29 मार्च 2022) को बारामुला जिले के सोपोर इलाके में शाम के वक्त एक मुख्य चौक पर बुर्का पहने एक संदिग्ध ने सीआरपीएफ बंकर पर पेट्रोल बम से हमला कर दिया। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।

‘गरीब नवाज चाह लें तो हिंदुस्तान का पता नहीं चलेगा’: कव्वाली की आड़ ले नवाज शरीफ ने मोदी-योगी को दी धमकी, रीवा की घटना-कानपुर का कव्वाल

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में है मनगवाँ कस्बा। यहाँ उर्स पर सोमवार (28 मार्च 2022) को कव्वाली का आयोजन हुआ, जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसमें कानपुर का कव्वाल नवाज शरीफ देश विरोधी बातें कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जहर उगल रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस कार्यक्रम में मनगवाँ से बीजेपी के विधायक पंचू लाल प्रजापति भी मौजूद थे। इस संबंध में जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने मोबाइल पर स्थानीय विधायक से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

सीधे-सीधे भारत को समाप्त करने की बातें करने वाला कव्वाल नवाज शरीफ वीडियो में मोदी, शाह और योगी को चुनौती देते हुए कह रहा है कोई भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस वक्त पर मंच से कव्वाल देश देश तोड़ने की बातें कर रहा था, उस दौरान वहाँ पर बीजेपी विधायक प्रजापति समेत कई पदाधिकारी भी मौजूद थे। लेकिन, किसी ने उसे रोका तक नहीं।

वायरल वीडियो में कव्वाल नवाज शरीफ कह रहा है, “मोदी जी कहते हैं हम हैं, अमित शाह जी कहते हैं और योगी जी कहते हैं हम हैं…लेकिन ये लोग हैं कौन? कौन हैं ये लोग? ये लोग कुछ भी नहीं कर सकते हैं। अगर गरीब नवाज चाह लें तो पता ही नहीं चलेगा कि हिंदुस्तान कहाँ बसा था। कहाँ पर था? ये वलियों का वो मकाम है कि अगर नजर फेर लेते हैं तो पूरे के पूरे शहर को वीरान कर देते हैं। जरा सा इतिहास पढ़ लो तो पता चल जाएगा।”

बहरहाल इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोग आरोपित कव्वाल पर कार्रवाई की माँग की है। उल्लेखनीय है कि प्रति वर्ष मनगवाँ कस्बे में उर्स मेले का आयोजन होता है। इस दौरान अनवर शाह की मजार पर चादर चढ़ाई जाती है।

हिंदी सिनेमा उद्योग में बड़ा बदलाव: राष्ट्रवाद और देशभक्ति वाली फिल्मों को दर्शक कर रहे पसंद, मोदी सरकार में ऐसी फिल्मों को प्रोत्साहन

पिछले एक दशक में बॉलीवुड (Bollywood) में काफी बदलाव आया है। खासतौर पर पिछले पाँच वर्षों में हिंदी सिनेमा का कंटेंट जिस तरह से बदला है, वह काबिल-ए-तारीफ है। इंडस्ट्री में लेखन से लेकर अभिनय, एक्शन और फिल्म मेकिंग के तरीकों में तमाम सकारात्मक बदलाव आए हैं। साथ ही मल्टीप्लेक्स की संख्या बढ़ी और दर्शकों का फिल्म को देखने का नजरिया भी बदला है। भारतीय सिनेमा की शुरुआत में जो फिल्में बनीं वो अधिक मसालेदार न होकर समाज का आईना थीं, लेकिन दौर बदला और फिल्मों में मसाला का तड़का लगाया जाने लगा। हालाँकि, एक बार फिर मोदी सरकार (Modi Government) में भारतीय सिनेमा ने करवट ली है और विगत पाँच वर्षों से देश भर में देशभक्ति का माहौल बना हुआ है। हर ओर देशप्रेम झलक रहा है।

बॉलीवुड में हर साल कॉमेडी, रोमांस, ड्रामा, ऐक्‍शन और थ्रिलर बेस्ट सैकड़ों फिल्में बनाई जाती हैं, लेकिन भारत जैसे देश में जहाँ राष्ट्र ही सर्वोपरि समझा जाता है, वहाँ राष्ट्रवाद और देशप्रेम की भावना से जुड़ी फिल्में काफी पसंद की जाती हैं और यह अच्छा बिजनेस भी करती हैं। वर्ष 2015 के बाद से सिनेमाघरों में रिलीज हुईं राष्ट्रवाद और देशभक्ति से जुड़ी फिल्मों को न केवल दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी उन्होंने ताबड़तोड़ कमाई की।

हाल ही में निर्देशक वि​वेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के बीच रिलीज हुई ‘बाहुबली’ फिल्म के डायरेक्टर एसएस राजामौली की फिल्म राईज रोअर रिवॉल्ट (RRR) को दर्शकों ने काफी सराहा। फिल्म में राम चरण (Ram Charan) और जूनियर एनटीआर (Jr NTR) मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म रियल लाइफ के दो हीरो और प्रसिद्ध क्रांतिकारी अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम की जिंदगी पर आधारित है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत और हैदराबाद के निजाम के से लोहा लिया था। देशभक्ति से लबरेज यह फिल्म दर्शकों को बेहद पसंद आई है, जिसके चलते फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर मात्र दो दिनों में ही 371 करोड़ रुपए की कमाई का आँकड़ा पार कर लिया।

‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झाँसी’

इससे पहले जनवरी 2019 में रिलीज हुई अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) की फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झाँसी’ (Manikarnika: The Queen of Jhansi) में रानी लक्ष्मीबाई के साहस और शौर्य को बड़े पर्दे पर दिखाया गया था। झाँसी की रानी को अंग्रेजों के सामने सिर झुकाना कभी गवारा नहीं था, इसलिए उन्होंने आखिरी दम तक उनसे जंग जारी रखी। कंगना रनौत ने फिल्म में दमदार एक्टिंग की है। उनकी परफॉर्मेंस दर्शकों को खासा पसंद आई। जैसे झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का रोल उन्हीं के लिए बना था। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

अक्षय कुमार की फिल्म ‘केसरी’

21 मार्च 2019 को अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की फिल्म ‘केसरी’ रिलीज हुई थी। यह फिल्म 12 सितंबर 1897 को भारत के सारागढ़ी में हुए महान युद्ध पर आधारित है। इसमें हवलदार ईशर सिंह सारागढ़ी की लड़ाई में 21 सिखों की एक सेना के साथ 10,000 अफगानों के खिलाफ जंग लड़ते हैं। फिल्म का गाना ‘तेरी मिट्टी में मिल जावां’ के लिए गायक बी प्राक को सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक सिंगर के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस गाने को सुनकर आज भी हर देशवासी की आँखें नम हो जाती हैं।

‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’

विक्की कौशल (Vicky Kaushal) की फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ वर्ष 2016 में उरी आतंकवादी हमले का जवाब देते हुए भारत ने जो सर्जिकल स्ट्राइक की थी, उस पर आधारित है। इस फिल्म में भारतीय आर्मी अफसर की बहादुरी दिखाई गई है। फिल्म का फेमस डायलॉग, ‘हाउ इज द जोश’ आज भी हर देशवासी में अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना पैदा करता है।

इसके अलावा ‘राजी’, ‘गुंजन सक्सेनाः द कारगिल गर्ल’ ने देशभक्ति के इस दौर में सपनों के पंख लगा कर उड़ने वाली लड़कियों को प्रेरित किया है। इन फिल्मों को दर्शकों ने बेहद पसंद किया है, क्योंकि इन फिल्मों में सच के साथ राष्ट्रवाद और देशप्रेम की भावना को दिखाया गया है। केंद्र की मोदी सरकार ने भी इन फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से किरदार में जान फूँक देने वाले कलाकारों को नेशनल अवॉर्ड देकर प्रोत्साहित किया है। कंगना रनौत को मर्णिकर्णिका के लिए नेशनल अवॉर्ड मिलना यह साबित करता है कि देश में ऐसे कलाकारों को सम्मानित किया जा रहा है, जो देश में राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना को जोड़ने का काम कर रहे हैं।

यही वजह है कि दर्शकों का मिजाज समझते हुए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री अपने कंटेंट का विस्तार कर रहा है। जल्द ही सिनेमाघरों में महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के जीवन पर बनी फिल्म को भी रिलीज किया जाएगा। इसका नाम ‘स्वातंत्र वीर सावरकर’ है, जिसे महेश मांजरेकर ने निर्देशित किया है। इसमें ‘सरबजीत’ फिल्म के अभिनेता रणदीप हुड्डा लीड रोल में होंगे।

सैफ अली खान को 2005 में नेशनल अवॉर्ड

ध्यान दें, यूपीए के शासनकाल के दौरान ‘हम तुम’ जैसी फिल्म के लिए सैफ अली खान को 2005 में नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था, जबकि इस फिल्म की कहानी एक आम लव स्टोरी थी। वहीं, इसी साल डायरेक्टर केतन मेहता की देशभक्ति से ओत-प्रोत फिल्म ‘मंगल पांडे’ रिलीज हुई थी, जो देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम के वीर सिपाही मंगल पांडे के जीवन पर आधारित है। इस फिल्म में मंगल पांडे के भारतीय विद्रोह (1857) में उनकी भूमिका को दिखाया गया है, लेकिन इस फिल्म को कोई अवॉर्ड नहीं दिया गया। जिसके चलते उस समय डायरेक्टर भी ऐसी फिल्में बनाने से कतराते थे।

इसके अलावा उस दौर में मुगलों को राष्ट्र निर्माता बताने वाले कबीर खान जैसे निर्देशक अपनी फिल्मों में पाकिस्तान को शांतिप्रिय देश बताने से भी गुरेज नहीं करते थे। वर्ष 2012 में आई फिल्म ‘एक था टाइगर’ में पाकिस्तान को लेकर जो नजरिया सामने आया था, वह भी पिछले कुछ सालों से बदला है और देश के लोगों को सच्ची घटनाओं से रूबरू करवाया जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण आज ‘द कश्मीर फाइल्स’ के रूप में हम सभी के समक्ष है। इस फिल्म में पाकिस्तान कैसे हमारे कश्मीर में बसे मुसलमानों को आतंकवाद के रास्ते पर ले जा रहा है और उन्हें उनके ही देश के खिलाफ तैयार कर अपना हित साध रहा है इसका पूरा सच दिखाया गया है। वहीं, पहले इसी सच को छिपाया जाता था। इसे लोगों के सामने लाने से बचा जाता था।

‘भारत सरकार से तुलना कर रहे?’ – देश का कानून नहीं, कंपनी के नियम वाले तर्क पर ट्विटर को कोर्ट की लताड़, अकाउंट सस्पेंड करने का मामला

ट्विटर, फेसबुक जैसी सोशल मीडिया कंपनियाँ आए दिन किसी न किसी का अकाउंट बिना तर्क के सस्पेंड करती रहती हैं। राष्ट्रवादी आवाज उठाने वाले अकाउंट इस मामले में सबसे ज्यादा पीड़ित हैं। केंद्र सरकार ने इस मामले में अकाउंट सस्पेंड होने वाले लोगों की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट में हलफनामा दायर किया है।

दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई है। केंद्र सरकार ने हलफनामा देकर बताया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को हरेक यूजर्स को उचित मौका देना चाहिए। साथ ही कहा कि ये कंपनियाँ किसी के भी अकाउंट को बिना तर्क या फर्जी आधार पर सस्पेंड नहीं कर सकते।

ट्विटर यूजर्स मेघ बुलेटिन (Megh Bulletin) और वोकफ्लिक्स (Wokeflix) के अकाउंट सस्पेंशन से जुड़ा यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहा है। इन दोनों अकाउंट को ट्विटर ने बिना कोई कारण बताए सस्पेंड कर दिया था। लॉ बीट के अनुसार ट्विटर यूजर भारद्वाज स्पिक्स (Bharadwajspeaks) भी इस मामले में एक अपीलकर्ता हैं।

13 अप्रैल 2022 को इस मामले में अंतिम जिरह-बहस होगी। फिलहाल कोर्ट की एक टिप्पणी गौर करने लायक है। यह टिप्पणी तब आई जब सरकारी वकील के देश के कायदे-कानून के अनुसार कंपनी को चलने के तर्क को काटते हुए ट्विटर के वकील ने कहा – “हम एक प्राइवेट कंपनी हैं, हमारे अपने कायदे-कानून हैं।” इस पर जज ने तीखी टिप्पणी की – “आप भारत सरकार से अपनी तुलना कर रहे हैं।”

ट्विटर ने 23 फरवरी 2022 को अपनी नीतियों का तर्क देते हुए और कथित ‘उल्लंघन’ का आरोप लगा कर कुछ खास राष्ट्रवादी ट्विटर अकाउंटों को मनमाने ढंग से सस्पेंड कर दिया था।

जिन अकाउंटों को मनमाने ढंग से सस्पेंड किया गया था, उनमें कुछ प्रमुख नाम ये हैं: समाचार और करंट अफेयर्स से संबंधित खबरें देने वाला हैंडल – मेघ बुलेटिन (Megh Bulletin), फेमस फैक्ट-चेकिंग ट्विटर अकाउंट – बिफिटिंग फैक्ट्स (Befitting Facts), व्यंग्य भरी बातें लिखने वाला अकाउंट – द स्किन डॉक्टर (The Skin Doctor), राजनीतिक व्यंग्य के लिए फेमस वोकफ्लिक्स (Wokeflix)।

बिग टेक कंपनियों की मनमानी का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि ट्विटर ने जिन राष्ट्रवादी अकाउंटों को सस्पेंड किया था, उन्हें उसके पीछे का कारण भी नहीं बताया। “हमारी नीतियों के खिलाफ है” और “कथित उल्लंघन” बता कर अकाउंट सस्पेंड।

ट्विटर की इसी मनमानी के खिलाफ इन सोशल मीडिया हैंडलों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके जवाब में कोर्ट ने ट्विटर और केंद्र सरकार दोनों को नोटिस भेजा था। इस मामले में भारत सरकार ने कोर्ट को बताया कि वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत देश के प्रत्येक नागरिक के अधिकारों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY: Ministry of Electronics and Information Technology) ने कोर्ट में कहा:

“इन प्लेटफार्मों (सोशल मीडिया) पर यूजर्स के अधिकारों को भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत सुरक्षित रखना है। आम जनता के कार्यों का निर्वहन करने वाले ऐसे प्लेटफॉर्म यह सुनिश्चित करने के लिए कर्तव्यबद्ध हैं कि नागरिकों के इन अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं हो।”

ट्विटर अकाउंट मेघ बुलेटिन (Megh Bulletin) की याचिका के जवाब में, केंद्र सरकार ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और नवीनतम सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता, Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) नियम 2021 के तहत मनमाने ढंग से यूजर के अकाउंट को सस्पेंड करने की मंजूरी नहीं है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि कानून और नियम बनाने का दृष्टिकोण निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित है: इंटरनेट सभी के लिए खुला (ओपन, पक्षपात के बिना) हो, सुरक्षित और भरोसेमंद हो। यूजर के प्रति प्लेटफॉर्म ही जवाबदेह हो, और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 सहित अन्य अधिकारों के तहत नागरिकों के किसी भी अधिकार का उल्लंघन करने की अनुमति किसी भी मंच या मध्यस्थ को तब तक नहीं, जब तक कि इससे मौजूदा नियमों का उल्लंघन न हो।

सुनवाई की शुरुआत में ही ट्विटर को दिल्ली हाई कोर्ट ने चेतावनी के लहजे में कहा कि वो समय आ गया है जब ट्विटर जैसी सोशल मीडिया कंपनियाँ “जाग” जाएँ। जज यशवंत वर्मा ने यह टिप्पणी तब कि जब यूजर द्वारा दायर याचिका “सुनने लायक ही नहीं है” जैसा तर्क ट्विटर के वकील ने कोर्ट में दिया।

मनमानी से नहीं, देश के कानून से चलेंगी बिग-टेक कंपनियाँ

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने 2-3 दिन पहले ही कहा था कि सोशल मीडिया कंपनियों को देश के कानून का उल्लंघन करने की आजादी नहीं है। कंपनियों द्वारा अपने कायदे-कानून के नाम पर यूजर की स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जा सकता है।

मीडिया से बात करते हुए मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा था कि भारतीय इंटरनेट को बिग-टेक कंपनियों के मनमाने फैसले और उससे होने वाले खतरों से मुक्त करना होगा। इसके लिए देश के कानूनों पर पुनर्विचार करने और बिग टेक कंपनियों को देश के ही खिलाफ माहौल बनाने से बचाना होगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री की यह टिप्पणी रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के संदर्भ में थी। इस युद्ध की शुरुआत के बाद कई बिग-टेक कंपनियों ने मनमाने ढंग से रूस में अपनी सर्विस को आंशिक या पूर्ण रूप से बंद कर दिया है।

शाकाहारी बता फ्लाइट में खिलाई मछली: जैन दंपत्ति ने AirIndia के मुस्लिम कर्मचारियों को बताया जिम्मेदार

एयर इंडिया फ्लाइट में एक जैन दंपत्ति को शाकाहारी बताकर मछली खिलाने का मामला प्रकाश में आया है। दंपत्ति का आरोप है कि एयर इंडिया के दो मुस्लिम स्टाफ ने उनसे कहा कि उन्हें जो दिया गया है वो वेज खाना है और वो बिन चिंता के इसका आनंद लें। हालाँकि, बाद में किसी अन्य स्टाफ से फिर कन्फर्म पर सामने आया कि उन्हें मछली परोसी गई है। जैन व्यक्ति ने इस घटना का वीडियो यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाला है। इसके बाद एयर इंडिया ने उनसे इस मामले की जाँच के लिए उनकी टिकट आदि माँगी है।

इस वीडियो के साथ साझा जानकारी के अनुसार, राघवेंद्रं जैन ने अपने यूट्यूब पर लिखा कि टोक्यों से दिल्ली आने के दौरान उन्होंने AI 307 में सफर किया। इस यात्रा में उन्होंने ग्लूटन फ्री वेज, जैन खाना माँगा था। ये ऑर्डर प्री बुक और कन्फर्म था। लेकिन फातिमा मुन्नी और यमन खान ने उन्हें नॉन वेज खाना वेज बताकर दे दिया। जब उन्होंने ये खोला तो उन्हें मछली की बू आई। वे फातिमा के पास गए। जहाँ फातिमा और यमन दोनों ने वेरीफाई किया कि ये शाकाहारी खाना है और इस बारे में वे कोई चिंता न करें। उन लोगों ने हँस कर यात्री से खाना खाने को कहा।

वह लिखते हैं, “मैंने और मेरी पत्नी ने कुछ निवाले गए पर जैसे ही कोई और स्टाफ सदस्य वहाँ से गुजरा हमने फिर कन्फर्म किया। उन्होंने सूँघकर कहा कि ये तो मछली है और ग्लूटन फ्री खाना बड़ी मुश्किल से शाकाहारी होता है। इसके बाद मैंने कैबिन क्रू से शिकायत करने की कोशिश की। पहली दोषी फातिमा मुन्नी है जिसने हँसकर बात टाली और दूसरा नाम विकास चोपड़ा है जिसने जवाब दिया- अब क्या नाक रगड़ें तुम्हारे सामने। सॉरी बोल तो दिया।”

आगे राघवेंद्र ने लिखा, “वो दिन हमारी जिंदगी का सबसे घटिया दिन था। मेरी पत्नी अब भी उस घटना की वजह से बीमार हैं और हम इमोशनल स्ट्रेस में हैं। हमने तमाम धमकियों के बाद पूरा मामला रिकॉर्ड करने की कोशिश की। यमन खान पूरी फ्लाइट में हमसे वीडियो डिलीट करने को कहता रहा। केवल सुपरवाइजर जोशी मैम ने हमसे संवेदना दिखाई और माफी माँगी।”

वीडियो में क्या है?

इस वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे जैन व्यक्ति लगातार फ्लाइट कर्मियों से उनके किए की शिकायत कर रहे हैं मगर वे लोग बार बार दोहरा रहे हैं कि क्या उनको लगता है कि वे ये सब जान कर करेंगे। फातिमा मुन्नी के चेहरे पर किसी तरह का पछतावा नहीं है। जैन आदमी बार बार कहता है, “मेरे पूछने के बाद भी आपने मुझे मीट खिला दिया। मैं जैन हूँ मैंने जिंदगी में नॉनवेज खाया नहीं। मुझे नहीं पता कि नॉन वेज दिखता कैसा है।” वह कहते हैं कि इतनी शिकायत करने के बाद भी फातिमा के चेहरे पर मुस्कान थी। उन्होंने बिलकुल गंभीर होकर माफी तक नहीं माँगी। बल्कि जब उन्होंने फातिमा से कहा कि अगर वो खुद मछली खाती हैं तो क्या उन्हें नहीं पता कि मछली कैसी दिखती है। इस पर फातिमा ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वो मछली खाती ही नहीं हैं। 

घटना पर अफसोस जताने की बजाय वो कहती हैं कि वो इस मामले में कंप्लेन करें और शांत बैठे। लेकिन राघवेंद्र कहते हैं, “शिकायत तो मैं करूँगा ही। आपने मेरा धर्म भ्रष्ट किया है। अगर कोई आपका करे आपको भी अच्छा नहीं लगेगा।” इसके बाद यमन खान ने माफी माँगने की बजाय उनसे ये कहना शुरू किया कि वो वीडियो डिलीट करें क्योंकि हवाई जहाज में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। जैन पूछते हैं कि नॉन वेज खिलाकर जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ वो कुछ नहीं। घटना की वीडियो लेकर नहीं बना सकते क्योंकि एयर इंडिया के नियमो के विरुद्ध है। इस वीडियो के कैप्शन में बताया गया है कि कैसे घटना के बाद राघवेंद्र की पत्नी ने दिन भर में 5 बार उलटी की और वे खुद पूरे दिन में कुछ नहीं खा पाए। उन्हें अब तक घिन आ रही है।

केरल में होटल के पीछे गर्भवती बकरी के साथ तीन लोगों ने किया रेप, फिर कर दी हत्या: एक गिरफ्तार, दो फरार

केरल (Kerala) से एक बेहद ही घृणित और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक गर्भवती बकरी का तीन लोगों ने यौन उत्पीड़न किया और फिर उसे मौत के घाट उतार दिया। होसदुर्ग पुलिस ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि कोट्टाचेरी के एलीट होटल की बकरी चार महीने की गर्भवती थी और अगले महीने जन्म देने वाली थी।

होसदुर्ग पुलिस ने इस अपराध के सिलसिले में होटल के एक कर्मचारी सेंथिल को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने कहा, “दो अन्य लोग मौके से भागने में सफल रहे।” दरअसल कर्मचारियों ने होटल के पीछे में एक बकरा और एक गर्भवती बकरी को रखा था। बुधवार (30 मार्च 2022) तड़के करीब 1.30 बजे होटल के कर्मचारियों ने होटल के पीछे से शोरगुल सुना। जब वे वहाँ पहुँचे तो उन्होंने देखा कि तीन लोग दीवार फाँद कर भाग रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने सेंथिल को पकड़ लिया।

इसके बाद जब वो उस जगह पर गए तो उन्होंने गर्भवती बकरी को मृत पाया। बकरी के शरीर पर यौन शोषण के संकेत मिले। जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुँची होसदुर्ग पुलिस ने सेंथिल को हिरासत में ले लिया। होटल के मालिक ने पुलिस को बताया कि तमिलनाडु का रहने वाला सेंथिल साढ़े तीन महीने पहले नौकरी की तलाश में उसके पास आया था।

पुलिस के अनुसार, आरोपितों पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के तहत अप्राकृतिक अपराधों के आरोप लगाए जाएंँगे। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पुलिस ने कहा कि आरोप सिद्ध होने पर दोषियों को आजीवन कारावास या 10 साल तक की सजा हो सकती है।

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तराखंड के चमोली जिले में आलम अंसारी नाम का व्यक्ति गाय के साथ रेप करते हुए पकड़ा गया था। लोगों ने उसको पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने IPC की धारा 377, 511 के साथ पशु क्रूरता एक्ट 1960 के सेक्शन 11 (3) के तहत उसे गिरफ्तार कर लिया था।

वहीं, 2021 में पाकिस्तान में एक बकरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था। बकरी घर के बाहर बँधी हुई थी, तभी 5 लोग आए और उसे किडनैप करके घर से कुछ किलोमीटर दूर जंगली इलाके में ले गए। वहाँ आरोपितों ने बकरी के साथ दुष्कर्म किया, जिससे उसने दम तोड़ दिया। जब मालिक उसे ढूँढते हुए जंगल पहुँचा तो बकरी मरी थी। मृत बकरी को बाद में पशु चिकित्सालय भी ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसके साथ हुए दुष्कर्म की पुष्टि की।