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‘दिमाग घर छोड़ कर आए हो?’: The Kashmir Files की चर्चा से भड़के जॉन अब्राहम, पत्रकार को बता दिया ‘Dumb’

बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम (John Abraham) और जर्नलिस्ट के बीच की तू-तू-मैं-मैं खासा चर्चा में है। दरअसल, जॉन अब्राहम ने अपनी अपकमिंग फिल्म ‘अटैक’ (Attack) के प्रमोशनल इवेंट के दौरान गुस्से में एक जर्नलिस्ट को न केवल ‘डम्ब’ (Dumb) कहकर बुलाया, बल्कि उसे ये भी कहा कि लगता है आप अपना दिमाग घर पर छोड़कर आए हैं।

इसके अलावा जर्नलिस्ट ने जब निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर अभिनेता की राय माँगी, तो पहले उन्होंने उसे अनसुना कर दिया। फिर जॉन ने कहा कि उन्होंने यह फिल्म नहीं देखी है और उनके पास इसके बारे में कहने के लिए कुछ नहीं है। बाद में उन्होंने इवेंट में मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा कि वह यहाँ अटैक के बारे में बात करने आए थे और उनको फिल्म से जुड़े सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा, “न्यूज डेस्क पर आपसे कंट्रोवर्सी लाने के लिए कहा जाता है, फिर आप यहाँ आकर कहते हैं – ‘हमें कश्मीर फाइल्स के बारे में कुछ बताएँ।’ मैं ऐसा क्यों करूँगा?”

जर्नलिस्ट ने इसके बाद जॉन से आगे पूछा कि आपकी फिल्मों में एक्शन का ओवरडोज होता है। जब तक आप 4-5 लोगों से फाइट करते हो तब तक ये ठीक लगता है, लेकिन जब आप अकेले ही 200 लोगों से फाइट करते हुए नजर आते हो तो ये ज्यादा हो जाता है। खासकर, अपने हाथों से बाइक फेंक देना और चॉपर रोक देना।

इसी बीच एक्टर जर्नलिस्ट की बात बीच में ही काटते हुए पूछते हैं कि क्या वो ‘अटैक’ के बारे में बात कर रहे हैं? इस पर जर्नलिस्ट कहता है कि वो सवाल उनकी ‘सत्यमेव जयते’ फिल्म के लिए था। इस बात पर जॉन कहते हैं, “सॉरी, मैं तो ‘अटैक’ की बात कर रहा हूँ, अगर आपको इससे प्रॉब्लम है तो मुझे माफ करिए।” फिर अपनी को एक्टर्स की तरफ देखकर जॉन कहते हैं, “बेचारा, मुझे लगता है कि ये बहुत फ्रस्ट्रेटेड है।” बता दें कि विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘धन धना धन गोल (2007)’ में जॉन अब्राहम काम भी कर चुके हैं, जिसका गाना ‘बिल्लो रानी’ खासा लोकप्रिय हुआ था।

जॉन अब्राहम की फिल्म ‘अटैक’ को डायरेक्टर लक्ष्य राज आनंद (Lakshya Raj Anand) ने डायरेक्ट किया है। इस फिल्म में जॉन के अलावा रकुल प्रीत सिंह (Rakul Singh) जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) मुख्य भूमिकाओं में हैं। ‘अटैक’ 1 अप्रैल, 2022 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

नेताजी बोस के हमउम्र ‘पद्म श्री’ शिवानंद बाबा, भूख से चल बसे थे माता-पिता और बहन: सुबह 3 बजे योग और पूजा, कर रहे अध्यात्म का प्रसार

राष्ट्रपति भवन में सोमवार (21 मार्च, 2022) को पद्म पुरस्कार से हस्तियों को सम्मानित करने के दौरान ऐसा कुछ हुआ कि हर कोई भावुक हो गया। वाराणसी के 126 वर्षीय स्वामी शिवानंद नंगे पैर पद्मश्री लेने पहुँचे और सम्मानित होने से पहले वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नमस्कार करने घुटनों के बल बैठ गए। शिवानंद बाबा की यह मुद्रा देख पीएम मोदी भी अपनी कुर्सी से उठकर उनके सम्मान में झुक गए। इस दौरान पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।

उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। रविवार (27 मार्च, 2022) को ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने भी उनका जिक्र किया। इसके बाद से लोग उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं।

बता दें कि 126 साल की उम्र के शिवानंद बाबा वाराणसी के कबीर नगर इलाके में रहते हैं और इस उम्र में भी एकदम स्वस्थ हैं। बाबा शिवानंद की फुर्ती ऐसी कि देखने वाले दंग रह जाएँ। वाराणसी के दुर्गाकुंड इलाके में स्थित आश्रम में तीसरी मंजिल पर स्थित कमरे में निवास करने वाले बाबा शिवानंद दिन में तीन से चार बार बिना किसी सहारे के सीढ़ियाँ चढ़ते और उतरते हैं।

बंगाल में जन्मे बाबा शिवानंद के हमउम्र थे सुभाष चंद्र बोस

शिवानंद बाबा का जन्म बंगाल के श्रीहट्टी जिले में 8 अगस्त 1896 में हुआ था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वह स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के काफी करीब रहे हैं। दोनों के बीच बेहद ही अच्छा रिश्ता था। बताया जाता है कि दोनों हमउम्र थे और एक ही एरिया में रहते थे। इसके अलावा यह भी दावा किया जाता है कि उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को काफी करीब से देखा है।

भूख से हो गई थी माता-पिता और बहन की मौत

बाबा चार वर्ष की उम्र में अपने परिवार से अलग हो गए थे। उनके माता-पिता भीख माँगकर गुजारा करते थे। चार साल की उम्र में माता-पिता ने बेहतर भविष्य के लिए उन्हें नवद्वीप निवासी बाबा ओंकारनंद गोस्वामी को समर्पित कर दिया। शिवानंद छह साल के थे, तभी उनके माता-पिता और बहन का भूख के चलते निधन हो गया। तब से लेकर बाबा ने केवल आधा पेट भोजन करने का संकल्प लिया, जिसे वे अब तक निभा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने काशी में गुरु के सानिध्य में आध्यात्म की दीक्षा लेनी शुरू की और योग को अपने जीवन का अहम हिस्सा बना लिया। 1925 में अपने गुरु के आदेश पर वह दुनिया के भ्रमण पर चले गए थे। करीब 34 साल तक देश-विदेश को उन्होंने नाप डाला।

1979 से वाराणसी में बसेरा, करते हैं माँ चंडी और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ 

आश्रम में दीक्षा लेने के बाद 1977 में वृंदावन चले गए। दो साल वृंदावन में रहने के बाद 1979 में वाराणसी आ गए। तब से यहीं रह रहे हैं। बाबा कई देशों की यात्रा कर चुके हैं। एयरपोर्ट पर भी इतनी उम्र में बिना किसी सपोर्ट उन्हें देख लोग हैरान भी होते हैं। बाबा प्रतिदिन तड़के तीन बजे उठ जाते हैं और एक घंटे योग का अभ्यास करते हैं। इसके बाद पूजा-पाठ करने के बाद वो अपने दिन की शुरुआत करते हैं। वे कृष्ण मंत्र साधना, माँ चंडी और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करते हैं। भोजन को लेकर वे बार-बार कहते हैं कि शुद्ध और शाकाहारी भोजन करने के कारण ही वो पूरी तरह से निरोगी हैं। इसके अलावा वह सेक्स और मसालों से दूरी को अपनी लंबी आयु का राज बताते हैं।

आश्रम में आने वाले को खुद परोसते हैं खाना

वहीं बाबा के आश्रम एक खास बातों को लेकर भी चर्चा में रहता है। जानकारी के मुताबिक यहाँ पर आपको खाली हाथ ही जाना होगा, लेकिन आप वहाँ से खाली हाथ लौट नहीं सकते हैं। वहाँ से आपको खाना खिलाने के बाद ही विदा किया जाएगा। बताया जाता है कि यहाँ आने वाले हर शख्स को बाबा खुद अपने हाथों से खाना परोस कर खिलाते हैं। यही वजह है कि उनकी विनम्रता का हर कोई कायल हो जाता है।

वैक्सीनेशन के समय भी रहे चर्चा में

शिवानंद बाबा कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके हैं. पिछले दिनों वाराणसी में ही जब वैक्सीन लगवाने बाबा पहुंचे थे तो रजिस्ट्रेशन के लिए उनसे आधार मांगा गया। आधार कार्ड पर उनका जन्म आठ अगस्त 1896 देख सभी चौंक गए थे। उन्हें देखकर मेडिकल स्टाफ भी काफी उत्साहित हुए थे। बाबा ने टीका लगवाने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों को आशीर्वाद भी दिया था।

माँग रहे थे मुआवजा, पर मिली लाठी: AAP सरकार की पुलिस ने किसानों को पीटा, बोला प्रशासन – किसान झूठे, फसल को नुकसान नहीं हुआ

पंजाब में आंदोलन कर रहे किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया है। इस दौरान 7 किसान घायल हो गए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 6 किसानों की हालत गंभीर बताई जा रही है। राज्य में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार आने के बाद पहली बार किसानों पर लाठीचार्ज हुआ है। ये किसान ‘भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां)’ के बैनर तले तबाह हो चुकी कपास की फसल के मुआवजे की माँग कर रहे थे। बीकेयू उगराहां ने आरोप लगाया है कि लांबी में हुए लाठीचार्ज के दौरान सात किसान घायल हो गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां) की अगुआई में किसानों ने लांबी के नायब तहसीलदार समेत अन्य स्टाफ को दफ्तर में बंधक बना लिया था। पुलिस ने सोमवार (28 मार्च, 2022) देर रात 12 बजे किसानों पर लाठीचार्ज कर नायब तहसीलदार और स्टॉफ को छुड़ाया। नायब तहसीलदार अरजिंदर सिंह और स्टाफ के बाहर आने के बाद अब पूरे प्रदेश के तहसीलदार हड़ताल पर चले गए हैं।

मलोट के एसडीएम प्रमोद सिंगला ने किसानों की माँग को गलत ठहराते हुए कहा कि 10 गाँव के लोग यहाँ आकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके द्वारा 50 फीसदी कपास खराब होने का झूठा दावा किया जा रहा है।

वहीं, बीकेयू उगराहां के नेता गुरपक्ष का कहना है कि पुलिस के लाठी चार्ज में सात किसानों को चोटें आई हैं और उन्हें लांबी के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। गुरपक्ष ने यह भी दावा किया है कि किसानों की फसल गुलाबी सुंडी की वजह से खराब हो गई थी। किसानों का आरोप है कि गुलाबी सुंडी से खराब हुई नरमा की फसल के मुआवजे के मामले में मुक्तसर जिले को नजरअंदाज किया गया है। मुक्तसर जिले में अधिकतर नरमा की खेती लांबी ब्लॉक में ही होती है। गिरदावरी में लांबी ब्लॉक के केवल छह गाँवों को ही शामिल किया गया और उन्हें भी अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया, जबकि अन्य करीब 30 गाँवों को गिरदावरी में शामिल ही नहीं किया।

‘PM मोदी की तस्वीर हटाओ’: किराएदार ने बताया – धमकी दे रहे मकान मालिक शरीफ, याकूब और सुल्तान, माँ को आया हार्ट अटैक

मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को लेकर एक मामला सामने आया है। एक किराएदार ने आरोप लगाया है कि पीएम मोदी की तस्वीर लगाने पर उसका मकान मालिक उसे धमकी दे रहा है और लगातार वो तस्वीर हटाने के लिए उससे कह रहा है। उसने बताया कि मकान मालिक ने उसे दो विकल्प दिए हैं – या तो प्रधानमंत्री की तस्वीर हटाए, या फिर घर खाली करे। पीड़ित का नाम युसूफ है। ये मामला इंदौर का है।

उसने बताया कि मकान मालिक की धमकी के कारण उसकी अम्मी को हार्ट अटैक आ गया है और वो अस्पताल में भर्ती हैं। उनका इलाज चल रहा है। पुलिस कमिश्नर की साप्ताहिक जन-सुनवाई में मंगलवार (29 मार्च, 2022) को ये मामला सामने आया। दोपहर में युसूफ नाम का व्यक्ति अपनी अर्जी लेकर पहुँचा। वो वहाँ की पीर गली में किराए पर रहता है। मोहम्मद युसूफ खान ने कहा कि वो शरीफ मंसूरी, याकूब मंसूरी और सुल्तान मंसूरी के मकान में रहता है।

वो कई वर्षों से वहाँ रहता आ रहा है। तीनों भाइयों ने उसे पीएम मोदी की तस्वीर हटाने की धमकी दी है, न करने पर सामान फेंकने की धमकी भी दी। युसूफ खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विचारधारा से प्रेरित बताते हैं। उन्होंने कहा कि वो पीएम मोदी के आर्टिकल पढ़ते रहते हैं और RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की गतिविधियों में शामिल होते रहे हैं। साथ ही आरोप लगाया कि पुलिस भी उन्हें परेशान कर रहा है। इस मामले में थाना प्रभारी को वरिष्ठ अधिकारियों ने जाँच का आदेश दिया है।

मोहम्मद युसूफ खान का कहना है कि पिछले 35 वर्षों से उनका परिवार यहीं पर रहता आ रहा है। उनके साथ उनके अब्बू-अम्मी और दो बच्चे भी हैं। ये लोग रेडीमेड के व्यापार में हैं। उन्होंने बताया कि 15 दिनों से मकान मालिक उन्हें परेशान कर रहा है। उन्होंने बताया कि उनका RSS से जुड़ा होना मकान मालिक को पसंद नहीं। एडिशनल डीसीपी मनीषा पाठक ने इसे ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ के खिलाफ बताते हुए कहा कि जाँच के बाद उचित कार्यवाही होगी।

‘अली मर्चेंट ने बाथरूम में मास्टरबेशन कर दिया, सब कुछ वहीं पर पड़ा हुआ था’: बोलीं अभिनेत्री – इतनी लड़कियों के साथ रहते हो…

रिएलिटी शो ‘लॉक अप’ (Lock Upp) के लेटेस्ट एपिसोड में मंदाना करीमी (Mandana Karimi) ने होस्ट कंगना रनौत के सामने अली मर्चेंट पर बड़ा आरोप लगाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जजमेंट डे (रविवार) एपिसोड के दौरान, मंदाना ने सभी के सामने अली (Ali Merchant) पर बाथरूम में मास्टरबेशन करने का आरोप लगाया। यह सब सुनने के बाद वहाँ मौजूद लोग शॉक्ड हो गए। इस दौरान कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने मंदाना को बीच में ही रोकते हुए उनकी क्लास लगाई, लेकिन बाद में उनसे पूरी बात जानने की कोशिश की।

मंदाना ने बताया, “बाथरूम में कुछ तो ऐसा होता है, जिसके बारे में सिर्फ मुझे और सायशा को पता है। यह काफी बुरा है। अगर आप इतनी लड़कियों के साथ रहते हो और एक ही बाथरूम इस्तेमाल करना हो तो आप यह सब करोगे क्या… इससे आपकी पर्सनालिटी का पता चलता है।”

इसके बाद मंदाना रुक जाती हैं और प्राइवेट स्पेस में जाकर पूरी बात बताने के लिए करती हैं, लेकिन शो की होस्ट कंगना उनसे सभी के सामने अपनी बात साफ करने के लिए कहती हैं। इस पर मंदाना करीमी कहती हैं, “एक दिन मैं बाथरूम में गई थी, मेरे बाद सायशा को जाना था। वह पूरे दिन परेशान रही। मेरे बाद एक ही इंसान ने बाशरूम का इस्तेमाल किया था। वो अली ही था, किसी ने वहाँ पर मास्टरबेशन किया था और सब कुछ वहीं पर था।”

इस बात पर अली मर्चेंट मंदाना करीमी पर आग बबूला हो जाते हैं और मंदाना को खरी-खोटी सुनाने लगते हैं। इस बीच, कंगना ने दोनों का बीच बचाव किया। कंगना ने मंदाना को समझाया कि अगर उन्होंने ऐसा देखा था, तो इसका मुद्दा बनाने की बजाय इस मामले से कैसे निपटा जाए यह बताना चाहिए था।

बता दें कि मंदाना करीमी (Mandana Karimi) ने इस शो में वाइल्ड कार्ड की मदद से एंट्री ली है। शो लॉक अप (Lock Upp) दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है।

वो मौके, जब लाखों मौतों के बावजूद फेल रहा संयुक्त राष्ट्र: रूस-यूक्रेन युद्ध और UN की ‘कड़ी निंदा’ का इतिहास

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध (Russia-Ukraine War) शुरू हुए एक महीने से अधिक समय हो गया है। लाखों लोग इस युद्ध की विभीषिका से बचने के लिए अपना देश छोड़कर जा चुके हैं। युद्ध थमने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता भी हुई, लेकिन उसका कोई पॉजिटिव असर नहीं निकला है। इस बीच सारी दुनिया की निगाहें उस वैश्विक संस्था पर टिकी हुई हैं, जिसकी स्थापना ही विश्व शांति के लिए हुई थी। हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र (United Nation) वैश्विक शांति स्थापित करने में सफल नहीं हो सका है।

संयुक्त राष्ट्र का जन्म द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के साथ हुआ। घटनाक्रम कुछ यूँ है कि 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागाशाकी पर परमाणु बम से हमला कर दिया। इसके परिणाम स्वरूप लाखों लोग अकाल ही काल के ग्रास बन गए। इसी के साथ जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया। विश्व युद्ध की विभीषिका को देखते हुए एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय संगठन की जरूरत महसूस की गई, जो कि दुनिया भर में शांति की स्थापना करने का जिम्मा ले सके। इसी उद्देश्य के साथ 24 अक्टूबर 1945 को अमेरिका, रूस समेत 51 देश सेन फ्रांसिस्को में इकट्ठे हुए। इसी के बाद यूएन का गठन किया गया। इसमें ये देश अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने, राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने और सामाजिक प्रगति, बेहतर जीवन स्तर और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध थे।

यूएन की सुरक्षा परिषद के कुल 20 सदस्य हैं। इनमें से पाँच अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन औऱ चीन परमानेंट मेंबर हैं। आइए अब ये जानते हैं कि क्या संयुक्त राष्ट्र अपनी स्थापना के उद्देश्यों को पूरा कर पाया है या नहीं। ऐसे कुछ युद्ध की बात करते हैं, जब यूएन विफल रहा।

वियतनाम-अमेरिका युद्ध (Vietnam-America War)

1954 में वियतनाम औऱ अमेरिका के बीच भीषण युद्ध शुरू हुआ, जो करीब 10 सालों तक चला। इस युद्ध में 20 लाख लोगों की मौत हो गई थी। 30 लाख से अधिक लोग बुरी तरह से घायल हुए। इस युद्ध में अमेरिका को अपने 55 हजार सैनिक खोने पड़े थे। ये युद्ध यूएन की स्थापना के 10 साल बाद ही हुआ, जिसे रोकने में वो पूरी तरह से विफल रहा।

ईराक-ईरान युद्ध में भी फेल रहा यूएन

1980 के दशक में ईराक और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ, जो 8 सालों तक चलता रहा। इसमें अनुमान लगाया जाता है कि करीब 10 लाख लोगों की मौत हुई थी। इस बार भी संयुक्त राष्ट्र शांति की स्थापना कर पाने में विफल रहा।

रवांडा नरसंहार

अफ्रीकी देश रवांडा में 1994 में हुतु-तुत्सी वार हुआ। इस युद्ध में भीषण नरसंहार हुआ था। इसमें खुलकर फ्रांस ने वहाँ के बहुसंख्यक समुदाय हुतु का साथ दिया और तुत्सी लोगों का जमकर नरसंहार किया गया। 100 दिनों में ही 8 लाख लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। लोग यूएन की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहे थे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र फेल हुआ। इस मामले में पिछले साल मई 2021 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रवांडा से इस नरसंहार के लिए माफी भी माँगी थी।

इस तरह से संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से कई युद्ध हो चुके हैं, लेकिन ये संस्था अंतरराष्ट्रीय संस्था वैश्विक शांति और सामूहिक विकास के अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल रही है। रूस-यूक्रेन की बीच बीते एक महीने से अधिक समय से जारी युद्ध में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका केवल ‘कड़ी निंदा’ तक सीमित रह गई है। युद्ध के शुरू होने के बाद से संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, अब तक 3.7 मिलियन यूक्रेनियन लोग पलायन कर चुके हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस युद्ध को रोकने के लिए कोई भी सकारात्मक पहल नहीं कर सका है। इससे ये स्पष्ट है कि संयुक्त राष्ट्र ‘विश्व शांत और स्थायित्व’ के अपने मूल उद्देह्यों को पूरा करने में विफल रहा है।

‘मदरसे से बरामद हुआ हथियारों का जखीरा, हजारों बंदूकें और तलवार’: सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल, यूपी पुलिस ने बताया क्या है मामला

उत्तर प्रदेश के बिजनौर को लेकर सोशल मीडिया पर हाल में एक खबर आई जिसमें दावा था कि बिजनौर के एक मदरसे से हथियारों का जखीरा बरामद हुआ है। इसमें हजारों गन हैं और कई तलवारें है। ये दावा सोशल मीडिया पर अब भी वायरल है। जब हमने इसके बारे में पता लगााया तो सोशल मीडिया पर वैसे ही कुछ ट्वीट और भी मिले। ट्वीट में पुलिस और उनकी गिरफ्त में कुछ लोग और सोफे पर पड़े हथियार दिखाए गए। लोगों ने ये ट्वीट शेयर करके माँग उठाई थी कि सभी मदरसे बंद होने चाहिए। लेकिन इस खबर की सच्चाई क्या है ये बिजनौर पुलिस के ट्वीट से चली।

दरअसल, ये बात सच है कि बिजनौर के मदरसे में हथियार मिले थे। लेकिन ये घटना 2022 की नहीं है। 2019 की है। बिजनौर पुलिस ने बताया कि ये घटना बिजनौर के थाना शेरकोट की है जहाँ पुलिस ने दबिश देकर साल 2019 में 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था और पुलिस ने उनके पास से 1 पिस्टल, 4 तमंचे, 49 जिंदा कारतूस व 1 स्विफ्ट गाड़ी बरामद की थी। ऐसे में वायरल दावे के साथ जो तस्वीर साझा हो रही है कि भारी मात्रा में हथियार व तलवार मिले वे भ्रामक हैं। बिजनौर पुलिस ने इसका खंडन किया।

बता दें कि बिजनौर के मदरसे से बरामद हथियारों की खबरें समय समय पर सोशल मीडिया पर शेयर हुई 2019 में तो इसे लोगों ने शेयर किया ही, लेकिन 2020, 2021 और 2022 में भी ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब शेयर की गई। हाल में बिजनौर पुलिस ने इस खबर का खंडन करने के लिए अपना पुराना ट्वीट रीट्वीट किया ताकि फिर स्पष्ट हो कि ये घटना अब की नहीं है और साझा तस्वीरें भी सही नहीं हैं।

शराब और सिगरेट की ऐसी लत! 14 साल से एयरपोर्ट पर ही रह रहा है ये शख्स, कहा – ‘घर में नहीं चलती मेरी मर्जी’

लोग किस हद तक अपनी लतों के आदी होते हैं, इसका उदाहरण चीनी व्यक्ति वेई जियानगुओ (Wei Jianguo) के रूप में देख सकते हैं। इन्हें शराब और स्मोकिंग की ऐसी लत लगी है कि यह 14 सालों से एयरपोर्ट पर जिंदगी गुजार रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि यहाँ पर अपनी मर्जी के हिसाब से स्मोकिंग और ड्रिंकिंग कर सकते हैं। यहाँ उन्हें रोक-टोक करने वाला कोई नहीं है।

चाइना डेली के मुताबिक, वह अपने घर लौटना भी नहीं चाहते हैं, क्योंकि वहाँ पर रहने के लिए उन्हें यह सबकुछ छोड़ना पड़ेगा। शख्स ने 2018 में ‘चाइना डेली’ से कहा था, “मैं घर वापस नहीं जाऊँगा, क्योंकि मुझे वहाँ कोई आजादी नहीं है। मेरे परिवार ने कहा कि अगर मुझे घर में रहना है, तो सिगरेट और शराब छोड़नी होगी। अगर मैं ऐसा नहीं करता तो मुझे हर महीने मिलने वाला 1000 युआन का सरकारी भत्ता उन्हें देना होगा। लेकिन फिर मैं अपने लिए सिगरेट और शराब कैसे खरीद सकूँगा?” बता दें, शख्स का घर एयरपोर्ट से लगभग 12 किलोमीटर दूर वांगजिंग में है है।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 में उनका घर पर परिवार वालों के साथ किसी बात को लेकर मनमुटाव हो गया। इसके बाद उन्होंने एयरपोर्ट को आशियाना बना लिया। उन्होंने कई रातें रेलवे स्टेशनों पर भी सोकर बिताई है। फिलहाल उनका बसेरा टर्मिनल 2 पर है, पर वह कभी-कभी टर्मिनल 3 पर भी जाते हैं। टर्मिनल के वेटिंग एरिया में वेई के पास उनके भोजन, पेय पदार्थ, सामान और स्लीपिंग बैग का एक सेट है।

वेई जब 40 साल के थे, तभी उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया और अब उन्होंने नई नौकरी ढूँढनी भी छोड़ दी है, क्योंकि उन्हें लगता है कि अब उनकी उम्र काफी ज्यादा हो गई है। बता दें कि वह 60 साल के हैं। वेई ने कहा कि उन्हें अक्सर पुलिस और सुरक्षाकर्मी वांगजिंग स्थित उनके घर ले जाते हैं। लेकिन किसी तरह वह हमेशा किसी न किसी तरह से हवाई अड्डे पर वापस आने में कामयाब हो जाते हैं। चाइना डेली ने बताया कि वेई एयरपोर्ट पर रहने वाले अकेले इंसान नहीं है। दुनिया के सबसे प्रसिद्ध हवाई अड्डे के निवासी ईरानी मेहरान करीमी नासेरी हैं, जो 1988 से 2006 तक पेरिस चार्ल्स डी गॉल के टर्मिनल वन पर 18 साल तक रहे थे।

‘वरुण धवन ने बुरे वक्त में दिया था साथ, चुपचाप की थी मेरी मदद’: The Kashmir Files के निर्देशक ने कहा – वो बहुत नेक इंसान

‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) की सफलता के बाद डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) के सितारे बुलंदी पर हैं। उनकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ता​बड़तोड़ कमाई कर रही है। कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी फिल्म ने अब तक 250 करोड़ की कमाई कर ली है, लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब विवेक अग्निहोत्री मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। उस समय जब कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया, तब बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन (Varun Dhawan) ने उनकी मदद की थी। डायरेक्टर ने बुरे वक्त में साथ देने के लिए वरुण धवन को अब शुक्रिया कहा है।

उन्होंने (विवेक अग्निहोत्री) हाल ही में आरजे सिद्धार्थ कन्नन को दिए एक इंटरव्यू में वरुण धवन की प्रशंसा की और उन्हें एक नेक इंसान बताया। इस दौरान वरुण द्वारा की गई मदद के बारे में बात करते हुए विवेक भावुक हो गए। साल 2005 में क्राइम थ्रिलर ‘चॉकलेट’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाले विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि वह अभिनेता वरुण धवन ही थे, जिन्होंने उनके जीवन के सबसे कठिन समय में उनकी मदद की थी। साथ ही उन्होंने साफ किया कि वह ‘जुड़वा 2’ अभिनेता की तारीफ इसलिए नहीं कर रहे कि वो उनके साथ काम करें।

विवेक ने सिद्धार्थ कन्नन से आगे कहा, “मैं वरुण से प्यार करता हूँ। मैं वरुण का बहुत ऋणी हूँ और मैं यह बात कैमरे पर नहीं कहना चाहता, यह उनके और मेरे बीच की बात है। उन्होंने उस समय मेरी चुपचाप मदद की, जब दुनिया में कोई भी मेरी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा था। वो बहुत नेक इंसान हैं। मैं स्टारडम और इन सब चीजों के बारे में नहीं जानता, लेकिन मैं उनके लिए प्रार्थना करता हूँ कि वो हमेशा खुश और बहुत सफल रहें। मेरी आँखे भी नम हो रही हैं, क्योंकि उन्होंने ऐसे समय में मेरी मदद की थी जब मैं बिल्कुल भी उम्मीद नहीं कर सकता था कि उनके जैसा कोई व्यक्ति मेरी मदद करेगा।”

बता दें कि हाल ही में वरुण धवन ने सोशल मीडिया पर विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की तारीफ की थी। उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर लिखा था, “अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक। हर कलाकार ने दमदार प्रदर्शन किया है। अनुपम खेर सभी पुरस्कारों के हकदार हैं।”

बता दें कि विवेक अग्रिहोत्री के निर्देशन में कश्मीरी पंडितों पर बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ कई राज्यों में टैक्स फ्री कर दी गई है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने फिल्म की सराहना की है।

बेटी से जिसने की ​छेड़खानी, पिता ने किए उसके टुकड़े-टुकड़े: सिर, धड़ और पैर काटकर नदी में बहा दिया, MP की घटना

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक पिता ने अपनी नाबालिग बेटी से छेड़छाड़ करने वाले अधेड़ की धारदार हथियारों से हत्या कर दी। उसका सिर, धड़ और पैर काटकर नदी में फेंक दिया। नदी में शव के तैरते टुकड़े मिलने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। घटना खंडवा जिले के सकतापुर गाँव की है।

रिपोर्टों के अनुसार नरेंद्र नाम का एक व्यक्ति नदी किनारे पहुँचा। उसने नदी में शव के टुकड़े देखे। आनन-फानन में सरपंच को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद सरपंच ने पुलिस को सूचना दी। सूचना के बाद एसपी विवेक सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे और गोताखोरों की मदद से सिर, धड़ और पैर नदी से बाहर निकलवाए। पुलिस ने मृतक की लाश को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा। इससे हत्या में कुल्हाड़ी और हँसिए के इस्तेमाल की जानकारी मिली।

मृतक की पहचान बोडानी गाँव निवासी त्रिलोकचंद (55) के रूप में हुई। त्रिलोकचंद का पिता पूर्व सरपंच है। हत्या के आरोपित ने बताया कि त्रिलोकचंद उसकी नाबालिग बेटी के साथ छेड़छाड़ करता था। दो बार छेड़छाड़ करने पर उन्होंने उसे समझाया भी था। लेकिन वह नहीं माना। इस बात पर उनका विवाद भी हुआ था।

शनिवार (26 मार्च 2022) रात को वह फिर गाँव में आ गया और उसने नाबालिग से छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया। इससे उसका खून खौल गया और त्रिलोक को ठिकाने लगाने की ठान ली। नाबालिग के पिता ने अपने साले की मदद ली और दोनों त्रिलोकचंद को बाइक पर बैठाकर नदी के पास ले गए। वहाँ दोनों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी और शव को टुकड़ों में काटकर नदी में फेंक दिया। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में इसी तरह रेप की शिकार हुई एक नाबालिग बच्ची के पिता ने जमानत पर बाहर घूम रहे दरिंदे दिलशाद हुसैन की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पीड़िता के पिता ने पिस्टल से उसके सिर में गोली मारी थी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दिलशाद हुसैन रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपित था और जमानत पर बाहर था।