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BJP में चले गए पार्टी के सभी विधायक तो मुकेश सहनी ने आलापा आरक्षण राग, बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा

विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्‍थापक और बिहार सरकार में पशुपालन मंत्री मुकेश सहनी (Mukesh Sahani) को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, उनकी पार्टी के सभी तीन विधायक बीजेपी में शामिल हो गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने वीआईपी पार्टी के तीनों विधायक राजू सिंह, मिश्री लाल और स्वर्णा सिंह को मान्यता दी है। इसके साथ ही भाजपा बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। वहीं दूसरी ओर मुकेश सहनी की पार्टी अब बिना विधायकों की बन गई है।

तीनों विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद अकेले पड़े मुकेश सहनी का पहला रिएक्शन सामने आया है। एबीपी के मुताबिक, मंत्री मुकेश सहनी ने कहा, “मंत्रिमंडल में रखना या हटाना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। हम संघर्ष करेंगे। बीजेपी ने जेडीयू के भी छह विधायकों को तोड़ा था। हमारे चार गए हैं तो चालीस जीतेंगे। आरक्षण के लिए अंतिम साँस तक लड़ेंगे।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर यही स्थिति रही तो उनका (मुकेश सहनी) मंत्री पद भी खतरे में पड़ सकता है। मालूम हो कि 30 जून 2022 को सहनी की विधानपरिषद की सदस्यता की अवधि भी समाप्त हो रही है।

बता दें कि बिहार में 24 सीटों पर विधान परिषद का चुनाव भी होना है। इस चुनाव के लिए मुकेश सहनी की पार्टी ने बीजेपी के खिलाफ 7 सीटों पर अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा की है। इसके अलावा मुजफ्फरपुर की बोचहां विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। इसके लिए 12 अप्रैल को वोट डाले जाएँगे और 16 अप्रैल को नतीजे घोषित होंगे।

मुस्लिमों की हत्याओं के बाद लिबरल गिरोह को दिखने लगा बंगाल का ‘जंगलराज’, BJP कार्यकर्ताओं के नरसंहार पर कर रहे थे बचाव

पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के कुछ घंटे बाद राज्य के कई इलाकों में भड़की राजनीतिक हिंसा में भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के अलावा कई हिंदू मारे गए थे। बंगाल में इस तरह के भयावह हालात पैदा हो गए थे कि वहाँ के हिन्दुओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा था, लेकिन उस वक्त कोई भी लिबरल पत्रकार ममता सरकार के खिलाफ नहीं बोला, बल्कि इन लोगों ने तृणमूल कॉन्ग्रेस का बचाव करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था।

वहीं कुछ महीनों बाद ही गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले लिबरल पत्रकारों ने मुस्लिमों के मरने के बाद अपने सुर बदल लिए हैं। अब उन्हें पश्चिम बंगाल में ‘जंगलराज’ नजर आने लगा है। पश्चिम बंगाल के बीरभूम के रामपुरहाट में सत्ताधारी पार्टी के नेता भादू शेख की बम हमले में मौत के बाद TMC समर्थकों ने जमकर हिंसा मचाई। उपद्रवियों ने टीएमसी नेता की मौत का बदला लेने के लिए इलाके के कई घरों को आग के हवाले कर दिया, जिसमें कुल 12 लोगों के जलकर मरने का दावा किया जा रहा है। वहीं पुलिस मृतकों की संख्या 8 बता रही है। देखें लिबरल गिरोह के कुछ ट्वीट्स:

पत्रकार अभिजीत मजूमदार और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी का दावा है कि बंगाल में एक हफ्ते में 26 राजनैतिक हत्याएँ हुई हैं। अब नई घटना में 12 लोगों को जिंदा जला दिया गया है। अभिजीत यह भी दावा करते हैं कि बंगाल अब जिहादी आतंक और कम्युनिस्ट युग के अपराधियों का अड्डा बन गया है, जहाँ हिंदुओं पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है।

फोटो साभार : ट्विटर

वहीं, तथाकथित बुद्धिजीवियों के पसंदीदा समाचार पत्र टेलीग्राफ की खबर/हैडिंग में इस बार कोई भी रचनात्मकता नहीं दिखी। यहाँ तक कि टेलीग्राफ ने तृणमूल का नाम तक लेना उचित नहीं समझा और, ‘Feud (कलह)’ पर ठीकरा फोड़ दिया। इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स खासा नाराज नजर आ रहे हैं, उन्होंने टेलीग्राफ के पहले पेज को एडिट करके ट्विटर पर शेयर किया है।

दरअसल, बंगाल से छपने वाले समाचार पत्र ने ममता के शासनकाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या, मजहबी दंगों और राज्य में हो रहे तमाम अपराधों हमेशा चुप्पी साधी है। ऐसे कई मौके हैं, जब इन्होंने अपनी बेहूदा हेडलाइन में मोदी सरकार और बीजेपी नेताओं को जानबूझकर अपना निशाना बनाया है। इनकी हेडलाइंस में केवल जातिवादी घृणा, हिन्दुओं से धार्मिक घृणा ही नजर आती है। बता दें कि बंगाल की घटना पर केंद्र ने उनसे 72 घंटे में जवाब माँगा है। NCPCR ने भी रिपोर्ट देने के लिए 3 दिन का समय दिया है

ड्राइवर उमेद ने ‘राहुल’ बन नाबालिग लड़की को फाँसा, मुस्लिम बनने को तैयार नहीं हुई तो अपहरण की कोशिश: MP पुलिस ने दबोचा

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में लव जेहाद का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसा ही एक मामला इंदौर से फिर आया है। यहाँ मोहम्मद उमेद खान नाम एक शख्स ने खुद को राहुल बताकर एक नाबालिग हिंदू लड़की से दोस्ती की, फिर उसे शादी के लिए उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। पीड़िता जब शादी के लिए तैयार नहीं हुई तो उमेद उसके साथ मारपीट करने लगा। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित उमेद को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला मध्य प्रदेश के इंदौर का है। यहाँ बेटमा के शांतिनगर इलाके का रहने वाला मोहम्मद उमेद ड्राइवर की नौकरी करता है। उसने उसी इलाके की एक 16 साल की नाबालिग लड़की मार्च 2021 में दोस्ती की और उसका फोन नंबर ले लिया। उमेद राहुल बनकर नाबालिग से फोन पर बातें करने लगा। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

नाबालिग को अपनी जाल में फँसता देख उमेद ने उससे शादी करने की इच्छा जाहिर की। इस पर लड़की तैयार हो गई। लड़की को शादी के लिए तैयार देखकर उसने कहा कि इसके लिए धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बनना पड़ेगा। राहुल की बात सुनकर नाबालिग को पता चला कि वह राहुल नहीं, एक मुस्लिम है। खोजबीन पर उसे पता चला कि राहुल का असली नाम मोहम्मद उमेद है।

उमेद अक्सर फोन कर लड़की को परेशान करने लगा। इस बात की जानकारी जब लड़की के घरवालों को हुई तो उन्होंने लड़की को उसके मामा के यहाँ भेज दिया। इधर वह लड़की के परिवार को परेशान करता रहा। कुछ दिन पहले जब लड़की वापस घर आई तो आरोपित उसके घर आ गया। उसने लड़की को जबरदस्ती अपने ले जाने की कोशिश करने लगा। वह कई बार लड़की के साथ मारपीट कर चुका है।

आरोपित की हिम्मत और हिमाकत को देखते हुए परिवार ने हिंदूवादी संगठनों से संपर्क साधा और मामले की जानकारी दी। हिंदूवादी संगठनों के सहयोग से नाबालिग ने मामले की पूरी जानकारी पुलिस को देते हुए शिकायत की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो ऐक्ट और छेड़छाड़ के आरोप में केस दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

खंडवा में भी राहुल बन अमजद ने हिंदू लड़की को फँसा किया यौन शोषण

प्रदेश के खंडवा में मोहम्मद अमजद ने राहुल बनकर एक हिंदू युवती को अपने जाल में फँसाया और शादी का झांसा देकर पाँच साल तक यौन शोषण किया। बाद में पता चला कि जिसे वह राहुल समझ रही थी, उसका असली नाम अमजद है। इसके बाद महिला ने पुलिस में शिकायत की और लव जिहाद की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है।

मोघट रोड थाने क्षेत्र के दुबे कॉलोनी में रहने वाली 42 वर्षीया पीड़िता ने बताया कि वह एक अस्पताल में नर्स का करती है। कंप्यूटर को सुधारने के लिए घासपुरा का रहने वाला अमजद साल 2017 में अस्पताल आया था। वहाँ पीड़िता की उससे पहचान हुई और उसने अपना नाम राहुल शर्मा बताया। धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हो गई। अमजद पीड़िता को लगातार फोन करता। धीरे-धीरे उसने अपने प्रेमजाल में फँसा लिया।

इसके बाद आरोपित उसे शादी का झाँसा दे यौन शोषण करने लगा। यह सिलसिला लगातार लगभग पाँच साल तक चला। जब महिला ने उस पर शादी का दबाव बनाया तो वह शादी के लिए के लिए आनाकानी करने लगा। इसके बाद पीड़िता ने अहमद के बारे में पता किया तो उसकी असलियत सामने आई।

‘वो डायन मेरे बेटे को मार डालती’: हत्यारी माँ ने चलती वॉशिंग मशीन में डाल कर 2 माह की बच्ची को मार डाला, ओवन में भी रखा

दक्षिणी दिल्ली (South Delhi) के मालवीय नगर इलाके में दो महीने की बच्ची की हत्यारी माँ ने इस मामले में एक नया खुलासा किया है। आरोपित माँ ने पुलिस को बताया कि उसे लगता था कि उसकी बेटी अनन्या कौशिक डायन है और उसके बेटे को मार डालेगी। इसके चलते उसने चलती वाशिंग मशीन में बच्ची को डालकर उसकी हत्या कर दी थी।

यही नहीं, 9 महीने अपनी कोख में रखने वाली हत्यारी माँ ने यह भी खुलासा किया कि मासूम को मौत की नींद सुलाने के बाद उसके शव को 16 घंटे तक पलंग पर लिटाकर रखा था। हत्या के बारे में किसी को पता ना चल जाए इस डर से बच्ची के शव को उसने करीब एक घंटे पहले ओवन में छिपा दिया था।

वहीं, पुलिस का कहना है कि बच्ची की हत्या चलती वाशिंग मशीन में डालकर नहीं, बल्कि मुँह दबाकर की गई है। दक्षिण जिला डीसीपी बेनीटा मेरी जैकर ने बताया कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची की हत्या मुँह दबाकर हुई है। उसके शरीर पर चोट के निशान भी मिले हैं।

दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि डिंपल दूसरा बच्चा लड़की होने से परेशान थी, इसलिए उसने अनन्या की बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपित महिला को गुरुवार (24 मार्च, 2022) को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लेगी, ताकि इस मामले से जुड़ा सच बाहर आ सके।

आरोपित डिंपल गुलशन कौशिक की पत्नी है। गुलशन का परिवार भैरो चौक चिराग दिल्ली गाँव में रहता है। परिवार में पत्नी डिंपल कौशिक के अलावा उसका चार वर्ष का बेटा और दो महीने की बेटी अनन्या कौशिश थी। साथ में गुलशन की माँ व भाई भी रहते हैं। उनकी दूसरी मंजिल पर पड़ोसी के घर में कैमरा लगा हुआ है, लेकिन आरोपित डिंपल ने उसको घुमा दिया था, ताकि बच्ची को ले जाते हुए वह कैमरे में कैद न हो पाए।

क्या है पूरा मामला

21 मार्च की दोपहर करीब तीन बजे डिंपल ने बच्ची की हत्या करने के बाद उसे दूसरी मंजिल पर रखे एक खराब ओवन में डाल दिया था। इसके बाद वह पहली मंजिल पर आकर कमरा बंद कर लेती है और अपने चार वर्ष के बेटे को पीटने लगी। ग्राउंड फ्लोर पर किराना की दुकान पर बैठे पति, सास व देवर ने जब शोर की आवाज सुनी तो वे ऊपर गए, उन्होंने देखा कि डिंपल अपने बेटे को पीट रही थी। उन लोगों ने दरवाजा तोड़ा और अंदर जाकर बेटे को बचाया। इसके बाद डिम्पल बेहोश हो गई।

उसे अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल जाकर पता लगा कि उसने बेहोश होने का नाटक किया था। तभी परिजनों ने बच्ची को ढूँढना शुरू किया। काफी कोशिशों के बाद बच्ची उन्हें दूसरी मंजिल पर रखे माइक्रोवेब ओवन में मिली थी।

‘ऐसी वारदात को अंजाम देने वालों और उनका हौसला बढ़ाने वालों को माफ न करें लोग’: बीरभूम हिंसा पर PM मोदी ने जताया दुख

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के बीरभूम में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के पंचायत उप-प्रधान की मौत के बाद भड़की हिंसा में लगभग 10 लोगों की मौत और उसके बाद स्थानीय लोगों के पलायन पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की हर तरफ किरकिरी हो रही है। इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने दुख जाहिर किया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं पश्चिम बंगाल के बीरभूम में हुई हिंसक वारदात पर दुख व्यक्त करता हूँ, अपनी संवेदना व्यक्त करता हूँ। मैं आशा करता हूँ कि राज्य सरकार बंगाल की महान धरती पर ऐसा जघन्य पाप करने वालों को जरूर सजा दिलवाएगी।”

उन्होंने कहा, “मैं बंगाल के लोगों से भी आग्रह करूँगा कि ऐसी वारदात को अंजाम देने वालों को, ऐसे अपराधियों का हौसला बढ़ाने वालों को कभी माफ न करें। केंद्र सरकार की तरफ से मैं राज्य को इस बात के लिए आश्वस्त करता हूँ कि अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलवाने में जो भी मदद वो चाहेगी, उसे मुहैया कराई जाएगी।”

हिंसा की चौतरफा आलोचना होने के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार (24 मार्च) को स्वत: संज्ञान लिया और केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CSFL) को घटनास्थल से साक्ष्य के नमूने एकत्र करने और चश्मदीदों की सुरक्षा करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही घटनास्थल पर चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कहा। कोर्ट ने राज्य सरकार को गुरुवार दोपहर 2 बजे तक मामले में रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया।

बीरभूम हिंसा पर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि अगर अदालत आदेश देती है तो एजेंसी इसकी जाँच करने के लिए तैयार है। हिंसा में दो बच्चों के जिंदा जलने पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने बीरभूम के पुलिस अधीक्षक (SP) और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है।

इस हिंसा की जाँच के लिए राज्य सरकार ने SIT का गठन किया गया है। इसमें सीआईडी एडीजी ग्यानवंत सिंह, एडीजी वेस्टर्न रेंज संजय सिंह और डीआईजी सीआईडी ऑपरेशन मीरज खालिद को शामिल किया गया है। हिंसा के मामले रामपुरहाट के में SDPO को हटा दिया गया है और कुल 23 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की बात कही जा रही है।

TMC नेता भादू शेख की मौत के शुरू हुई हिंसा

बता दें कि सोमवार (20 मार्च 2022) को एक बम हमले में TMC नेता भादू शेख के मारे जाने की खबर आई, जिसके बाद उपद्रवी भड़क गए। आक्रोशित उपद्रवी भीड़ ने कई घरों को ध्वस्त कर दिया और जम कर लूटपाट की। कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया।

उधर TMC प्रवक्ता कुणाल घोष का कहना है कि आग से मौतें हुई हैं और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जिन TMC नेता की हत्या की गई, उसको लेकर लोगों में गुस्सा था। उन्होंने रात में आग लगने से मौतों की बात कही। पश्चिम बंगाल में कुछ ही सप्ताह पहले दो पार्षदों की भी गोली मार कर हत्या की खबर सामने आई थी।

कोरोना को पूरी तरह हराने की ओर भारत, 2 साल बाद सरकार ने हटाए कोरोना से जुड़े सभी प्रतिबंध: अब तक 182 करोड़ वैक्सीन की खुराक

देशभर में कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण में लगातार गिरावट आ रही है, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार (Central Government) ने दो साल के बाद अब 31 मार्च 2022 से सभी तरह के कोरोना रोकथाम दिशानिर्देशों को खत्म करने का ऐलान किया है। हालाँकि, अभी भी लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने के नियम का पालन करना होगा।

उल्लेखनीय है कि कोरोना की शुरुआत के बाद दो साल पहले 24 मार्च 2020 को सरकार ने कोविड के संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने महामारी एक्ट 2005 के तहत दिशा निर्देशों को जारी किया था। समय के साथ इसमें संशोधन भी किए गए। इसको लेकर केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि बीते 24 महीनों में महामारी रोकने के विभिन्न पहलुओं जैसे, इलाज, निगरानी, अस्पतालों का बुनियादी ढाँचा और टीकाकरण आदि को लेकर लोगों में काफी जागरूकता आ गई है।

उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी क्षमताओं का विकास करते हुए महामारी प्रबंधन के लिए अपनी विस्तृत योजनाओं को लागू किया है। बीते सात हफ्तों में महामारी में भारी गिरावट देखने को मिली है। 22 मार्च 2022 के आँकड़ों के मुताबिक अब देश में केवल 23,913 संक्रमित हैं और दैनिक पाजिटिविटी दर घटकर 0.28 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा अब तक कुल 181.56 करोड़ लोगों को वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है।

गृह सचिव भल्ला ने कहा, “महामारी से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों औऱ सुधारों को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने निर्णय लिया है कि COVID रोकथाम उपायों के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट के प्रावधानों को लागू करने की कोई आवश्यकता नहीं है।” उन्होंने कहा कि 31 मार्च को वर्तमान आदेशों के खत्म होने के बाद अब किसी भी तरह के आदेश जारी नहीं होंगे। हालाँकि, महामारी को देखते हुए भल्ला ने लोगों से सतर्क रहने की अपील जरूर की है।

NFT बेच कर अमिताभ बच्चन ने कमाए थे ₹7.15 करोड़, नोटिस मिलने के बाद दिया टैक्स: चलती रहेगी IT विभाग की जाँच

बॉलीवुड के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन ने 1.09 करोड़ रुपए का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) जमा कराया है। दरअसल पिछले साल नवंबर में नीलामी के जरिए उन्होंने 7.15 करोड़ रुपए के Non-fungible tokens (NFTs) की बिक्री की थी। इस पर उन्होंने जीएसटी नहीं भरा था। इसी को लेकर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स इंटेलिजेंस (DGGI) ने उन्हें नोटिस भेजा था। जिसके बाद उन्होंने GST जमा कराया।

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक हालाँकि, अमिताभ बच्चन ने टैक्स की रकम जमा कर दी है, लेकिन टैक्स अधिकारियों द्वारा जाँच जारी है। बताया गया कि बच्चन ने नीलामी के माध्यम से अपने कंटेंट को NFT में बदलने के लिए रीति एंटरटेनमेंट पीटीई लिमिटेड, सिंगापुर के साथ एक एग्रीमेंट किया था। सूत्रों ने कहा कि इन NFT में मधुशाला का पाठ शामिल है, जो उनके पिता द्वारा लिखी गई कविताओं का एक प्रसिद्ध संग्रह, पोस्टर और चित्र हैं।

NFT की बिक्री से अभिनेता को 7.15 करोड़ रुपए मिले थे और इस पर 18 फीसदी IGST लगेगा। बिक्री से कर देनदारी 1.09 करोड़ रुपए है, जो कि अमिताभ बच्चन ने जमा कर दिया है।

क्या होता है NFT

एनएफटी एक डिजिटल संपत्ति है जो वास्तविक दुनिया की वस्तुओं जैसे पेंटिंग, फोटो, म्यूजिक, वीडियो और अन्य वस्तुओं का प्रतिनिधित्व करती है। डेटा की यह इकाई एक डिजिटल लेजर पर संग्रहित होती है जिसे ब्लॉकचेन कहा जाता है, जो इसे अद्वितीय और अपरिवर्तनीय बनाता है। कई बॉलीवुड अभिनेता और मशहूर हस्तियाँ जैसे सलमान खान, मनीष मल्होत्रा, क्रिकेटर जहीर खान और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों ने एनएफटी प्लेटफॉर्म पर वस्तुओं की नीलामी कर खूब कमाई की है। बच्चन एनएफटी का समर्थन करने वाले पहले अभिनेताओं में से एक थे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा एनएफटी को आभासी डिजिटल संपत्ति के रूप में वर्गीकृत करने वाले आयकर अधिनियम में बदलाव का प्रस्ताव देने के बाद कर अधिकारियों ने क्रिप्टोकरेंसी और एनएफटी में व्यापार करने वाले निवेशकों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है।

BRAKING NEWS: रमजान, रोजा, ईद पर ब्रेक – पाकिस्तान में बचा है सिर्फ 14 दिन का कड़ुआ तेल, 10 दिन का घी

2 अप्रैल से रमजान का महीना शुरू होने वाला है। इस्लाम मानने-चाहने वालों के लिए यह महीना गजब का होता है। यहाँ तक कि आतंकी लोग भी शांति की चाह में सीजफायर वाली ‘घोषणा’ कर देते हैं। इस बार दिक्कत आ गई। विश्व को शायद ‘शांति’ नहीं मिलेगी। कारण है पाकिस्तान।

पाकिस्तान वैसे तो इस्लामिक मुल्क है लेकिन इस्लाम के मानने-चाहने वालों के लिए यह ‘पाक’ नहीं है। ईद में जो देश गोश्त-सेवइयों का इंतजाम न कर सके, वो क्या खाक इस्लामिक मुल्क है! यह बात मैं भारत में बैठे-बैठे बात बनाने के लिए नहीं कर रहा। पुख्ता सबूत लेकर आया हूँ।

रोजे-रमजान पर होगी रोक? पाकिस्तान में नहीं मनेगी ईद?

कंफ्यूजन से बचने के लिए एक-एक सवाल लेकर उसका जवाब जानते हैं। समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर इस्लाम के नाम पर खड़ा हुआ मुल्क इस्लामी तौर-तरीके-त्योहारों को कैसे छोड़ सकता है?

सवाल #1 – रोजा रखने पर रोक क्यों लगाएगी पाकिस्तान सरकार?

जवाब – रोजेदार हर दिन सुबह (एकदम भोर में) 3-4 बजे के आसपास शुरू हो जाते हैं। अपनी किताब/कुरान के अनुसार कुछ खा-पीकर दिन भर भूखे रहने के लिए पेट को तैयार करते हैं। फिर शाम में फल-शरबत-गोश्त-पकौड़ी आदि से पेट भरते हैं। उसके बाद रात में भी खाते हैं।

खाने की बात करें तो कड़ुआ तेल ही भारतीय रसोई (पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान आदि हमारे ही अंग हैं, भाई हैं) की जान है। पूड़ी-कचौड़ी के लिए रिफाइंड चलता है लेकिन उंगली-चाट खाना कड़ुआ तेल ही देता है। यहीं पर पाकिस्तान फँस गया है।

उद्योग और उत्पादन मंत्रालय (MoIP: Ministry of Industries & Production) है पाकिस्तान में। यहाँ के मंत्री-अधिकारी मुल्क के वित्त मंत्री शौकत तरीन से मिलते हैं। साथ में पाकिस्तान वनस्पति उत्पादक एसोसिएशन और फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू वाले लोग भी होते हैं। 24 फरवरी 2022 को यह मीटिंग हुई। जिस आफत से बचने के लिए यह मीटिंग हुई थी, आखिर में 20 मार्च को वह रायता बन कर न्यूज में फैल गया। पाकिस्तान में सिर्फ 4 अप्रैल तक का कड़ुआ तेल (रिफाइंड भी जोड़ सकते हैं) बचा है।

2 अप्रैल से रमजान का महीना शुरू… तेल सिर्फ 4 अप्रैल तक का! ये है पाकिस्तान का हाल। बिना तेल का घास-फूस खाकर आखिर लोग रोजा रखें तो कैसे रखें? हर कोई इस्लाम का सच्चा सिपाही जुल्फिकार अली भुट्टो बने तो कैसे बने?

पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू वाले इस्लाम का साथ छोड़ चुके हैं। उन्हें धंधे से मतलब है। मुस्लिम नाम वाले वहाँ के मंत्री भी इस्लामी जनता को अल्लाह के भरोसे छोड़ दिए। सच्चाई क्या है लेकिन? सच्चाई यह है कि तेल या किसी भी चीज का उत्पादन/आयात-निर्यात इंसान करते हैं, अल्लाह नहीं। बलूच-विरोध, शिया-सून्नी, खुद के आतंकी… इन सब से परेशान पाकिस्तान अब रमजान का रिस्क नहीं लेना चाहती। इसलिए वहाँ की आर्मी ने इमरान खान को सबसे बड़ा उदाहरण दिया – मोहम्मद अली जिन्ना का, उनके सूअर खाने का… फिर भी इस्लामिक मुल्क के क़ायदे-आज़म यानी महान नेता और बाबा-ए-क़ौम कहलाने का। इमरान मान गए, रमजान पर रोक लगा दी (सूत्रों के हिसाब से)।

सवाल #2- पाकिस्तान में नहीं मनेगी ईद?

जवाब – पहला सवाल सरकार से संबंधित था। सरकार (मतलब ‘पाक’ आर्मी) ने उसका समाधान हराम कहलाने वाले सूअर से भी निकाल लिया। जनता क्या करे लेकिन? वो तो मौलवियों-मौलानाओं के बीच फँसी है। मौलवियों-मौलानाओं ने बता रखा है कि किताब/कुरान में ईद के दिन सेवई बनेगी… मतलब बनेगी! यही समस्या की जड़ भी है।

सेवई और समस्या… वो कैसे भला? समस्या इसलिए क्योंकि पाकिस्तान वनस्पति उत्पादक एसोसिएशन ने 20 मार्च 2022 को यह भी बताया कि उनके मुल्क में घी सिर्फ 10 दिन के लिए बचा है। मतलब रोजा शुरू होने से 2-3 दिन पहले ही स्टॉक खत्म! बिना घी के सेवई बने तो बने कैसे?

इंडोनेशिया। दुनिया का सबसे बड़ा तेल (रसोई वाला) निर्यातक देश। दुनिया का सबसे बड़ा इस्लामी मुल्क। अगर आप इस इंडोनेशिया की ओर देख रहे हैं तो आप गलत हैं। इस्लाम के नाम पर यह पाकिस्तान को घंटा भी नहीं देने जा रहा। क्यों? क्योंकि इसने अपने देश के स्थानीय तेल उत्पादकों से कह रखा है – 30% तेल लोकल मार्केट में बेचना है। ऐसा क्यों किया? क्योंकि वहाँ खुद खाने वाले तेल की किल्लत हो गई है। 2 लोग तो इसके लिए लड़ कर मर भी गए।

पाकिस्तानी जनता इतना सब कुछ जानती है? बिल्कुल। इंटरनेट का जमाना है। वहाँ TikTok भी चल रहा है। यह आपने आप में एक ‘क्रांति’ है। इस्लामी बुर्के को मानने वाले लोग इसी TikTok के सहारे अकेली लड़की का कपड़ा फाड़ कर वीडियो बनाते हैं और शांति कायम करते हैं। अब यही जनता घी को लेकर क्रांति करने का मन बना चुकी है।

“बिना घी के सेवई नहीं बनेगी, ईद मनानी है तो घी दो” – यह मैसेज हर पाकिस्तानी के वॉट्सऐप पर घूम रहा है (सूत्रों के अनुसार)। घी है कहाँ लेकिन? सर्च कर लीजिए उत्तर मिलेगा नहीं कहीं से। यही उत्तर वहाँ की जनता को भी गूगल ने दे दिया है। ऐसे में पाकिस्तान की जनता ने मन बना लिया है – “ईद जरूरी है लेकिन सेवई के बिना नहीं।”

“ईद जरूरी है लेकिन सेवई के बिना नहीं” – आप इसे डिकोड कर सकते हैं। रीड बिटवीन द लाइन्स भी पढ़ लीजिए। इस्लाम से विरोध, पाकिस्तान के विरुद्ध, घी/सेवई से प्यार… फैसला आपको करना है।

‘काल्पनिक फिल्म है कश्मीर फाइल्स, राज्यसभा जाने को बेताब हैं विवेक अग्निहोत्री और अनुपम खेर’: बोले सज्जाद लोन, महबूबा भी भड़कीं

फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ को लेकर जारी विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (JKPC) के अध्यक्ष सज्जाद लोन (Sajjad Lone) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) को राज्यसभा भेज दें, नहीं वो ऐसी ही फिल्म बनाते रहेंगे। वहीं, पीपुल्स डोमेक्रेटिक पार्टी (PDP) के चीफ महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर फिल्म को लेकर अपना डर जाहिर किया है।

सज्जाद लोन ने कहा कि यह कश्मीर फाइल्स एक काल्पनिक फिल्म है। कश्मीरी पंडितों की पीड़ा से इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन कश्मीरी मुस्लिमों को भी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को कश्मीरी पंडितों की तुलना में 50 गुना अधिक नुकसान हुआ है।

निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को ‘अतुल अग्निहोत्री’ बताते हुए लोन ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री से अपील करता हूँ कि उन्हें राज्यसभा सांसद बना दे, वरना पता नहीं वह और क्या बनाएँगे। अब एक नया चलन है कि विवेक और अनुपम खेर जैसे लोग राज्यसभा जाने के लिए बेताब हैं। उन्हें राज्यसभा भेजा जाना चाहिए, नहीं तो वे इस देश को नफरत में डुबो देंगे।”

लोन ने आगे कहा, “कश्मीरी पंडितों के साथ अन्याय को लेकर कोई संदेह नहीं है। कश्मीरी मुस्लिमों ने पंडितों की तुलना में 50 गुना अधिक पीड़ा झेला है। आप सिर्फ एक समुदाय के दर्द का दस्तावेजीकरण नहीं कर सकते। हम सब इसमें एक साथ हैं। मैंने भी अपने पिता को खो दिया है।”

महबूबा की पीड़ा

उधर महबूबा मुफ्ती फिल्म को लेकर नाराज हैं कि इसका सारा दोष भाजपा पर मढ़ रही हैं। महबूबा ने कहा कि भाजपा (BJP) देश को लड़ाना चाहती है। जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) पाकिस्तान गए थे तो कश्मीर में 7 हिंदुओं की हत्या हुई थी। उन्होंने कहा, “मेरे पिता के मामा जी और उनके चचेरे भाई को मार दिया गया था। हम लोगों ने बहुत कुछ भुगता है।”

परोक्ष रूप से भारतीय सेना पर सवाल उठाते हुए महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के सुरनकोट में एक ही घर के 19 लोगों को मारा गया था। गलतियाँ किसी से भी हो सकती हैं, सेना से भी हो जाती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सभी सैनिक गलत हैं।”

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि खून-खराबा बंद होना चाहिए, लेकिन भाजपा चाहती है कि पाकिस्तान के साथ झगड़ा होता रहे। उन्होंने कहा, “वे हमेशा जिन्ना की बात करते हैं। अब बाबर और औरंगजेब की बातें करने लगे हैं।” महबूबा ने कहा कि सरकार कश्मीरियों को पाकिस्तान से लड़ाना चाहती है। इतना ही नहीं, देश में हिंदू तथा मुसलमान और दलित तथा ब्राह्मण तक को लड़ाने में वह यकीन रखती है।

कॉन्ग्रेस से हमदर्दी दिखाते हुए महबूबा ने कहा कि इस पार्टी ने भले ही 50 सालों तक तमाम गलत काम किए होंगे, लेकिन इसने देश को संभाल कर रखा। जिन्ना ने तो एक पाकिस्तान बनाया था, लेकिन भाजपा कई पाकिस्तान बनाना चाहती है। उन्होंने कहा, “ये लोग आज मुस्लिम बच्चियों को हिजाब पहनने से रोकते हैं। कल कहेंगे कि भगवा पहनो। ये लोग यह भी कह सकते हैं कि तिरंगा की जगह भगवा लहराएँ।” 

महबूबा मुफ्ती ने बुधवार (16 मार्च) को ट्वीट कर कहा था, “भारत सरकार जिस तरह कश्मीर फाइल्स को आक्रामक रूप से बढ़ावा दे रही है और कश्मीरी पंडितों के दर्द को हथियार बना रही है, उससे उनकी मंशा साफ हो जाती है। पुराने घावों को भरने और दो समुदायों के बीच अनुकूल माहौल बनाने के बजाय जानबूझकर खाई पैदा कर रही है।”

इससे पहले कश्मीर फाइल्स फिल्म को लेकर फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) के बेटे उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने कहा था, “द कश्मीर फाइल्स फिल्म में कई झूठी बातें दिखाई गई हैं। उस दौरान फारूक अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के सीएम नहीं थे। वहाँ राज्यपाल शासन था। देश में वीपी सिंह की सरकार थी, जिसे बीजेपी का समर्थन हासिल था।”

‘एक बार घर आकर माँ से मिल लीजिए’: गाँव में छोटी सी दुकान चला रहीं CM योगी की बहन, कहा – हमें नहीं पसंद परिवारवाद

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aadityanath) लगातार दूसरी बार सीएम पद के लिए 25 मार्च 2022 को शपथ लेंगे। लेकिन, उससे पहले उनकी बड़ी बहन शशि सिंह (Shashi Singh) ने बुधवार (23 मार्च 2022) को घर आकर माँ से मिलने की अपील की। योगी आदित्यनाथ की बहन उत्तराखंड में अपने गाँव के पास एक छोटी सी दुकान चलाती हैं।

टाइम्स नाऊ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कुछ अनकही बातों को साझा किया। योगी आदित्यनाथ की बहन ने बताया, “एक बार तो भाई ने पिताजी को भी टोक दिया था कि पिताजी क्या केवल अपना ही परिवार पालते हैं आप। कभी जनता की भी सेवा किया करो। इस पर पिताजी बोले कि बेटा मेरी तो 85 रुपए की सैलरी है। इतने में तुमको ही पाल लूँ यही बहुत है। देखता हूँ, तू क्या करता है। ” सीएम योगी की बहन बताती हैं कि ये बातें उन्होंने करीब 15-16 वर्ष की उम्र में कही थी।

जब शशि सिंह से पूछा गया कि वो लोग छोटी सी दुकान चलाते हैं, जबकि उनके भाई तो राज्य के सीएम हैं। इस सवाल के जबाव में उन्होंने कहा, “जैसे दूसरी पार्टियों में हर नेता का परिवार और उसके रिश्तेदार तक नेता बनना चाहते हैं। लेकिन, हमारे परिवार को परिवारवाद पसंद नहीं है। यह हमारे परिवार में नहीं है..भाई का भी यही बोलना है कि कमाओ-खाओ और मेहनत करो।”

योगी के संन्यास लेने को लेकर उनकी बहन ने कहा कि भाई तो घर से नौकरी करने की बात कहकर निकले थे, लेकिन बाद में पता चला कि वो महात्मा बन गए। आगे रोते हुए उन्होंने कहा कि पहले कोई भी साधु-संत निकलते थे तो उनमें वो उनमें अपने भाई को ढूँढती थीं। उन्होंने ये भी कहा कि अगर वो उत्तराखंड के सीएम होते तो यहाँ काफी विकास हो जाता। आखिर में सीएम योगी की बहन ने उनसे एक बार घर आकर माँ से मिलने की अपील की।