पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी (Punjab CM CharanJeet Singh Channi) को पर उनकी पार्टी के प्रमुख नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ (Sunil Jakhar) ने एक और MeToo का आरोप लगाकर सनसनी मचा दी है। उन्होंने कहा कि चन्नी सफेद चादर लेकर घूम रहे हैं, लेकिन उन्होंने महिला पत्रकार के साथ भी घटिया हरकत की है।
जाखड़ ने कहा कि पूर्व सीएम चन्नी के खिलाफ पहले एक IAS ऑफिसर का MeToo का केस बना और अब एक महिला पत्रकार के साथ ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा कि उस महिला पत्रकार का वह नाम सामने नहीं लाने चाहते हैं, लेकिन अगर वो महिला सामने आकर सच्चाई बताती है तो प्रदेश की लड़कियों पर बड़ा उपकार होगा।
जाखड़ ने कहा कि वह जो भी कह रहे हैं पूरी गंभीरता के साथ कह रहे हैं। चन्नी ने जो किया, वह पार्टी और समाज के लिए शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि वह चन्नी को बहुत अच्छी तरह जानते हैं और चन्नी अपने चाल-चलन और चरित्र समेत किसी बात पर खरे नहीं उतरते। जाखड़ ने कहा कि जब चन्नी को सीएम बनाया गया था, तभी उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वे चन्नी को अपना नेता नहीं मानते।
बता दें कि चन्नी पर साल 2018 में एक महिला IAS अधिकारी को रात में आपत्तिजनक मैसेज भेजने का आरोप लगा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चन्नी को माफी माँगने के लिए कहा और मामले को खत्म बता दिया। यह मामला पिछले साल भी खूब उछला।
यहीं नहीं, जब वह पंजाब के तकनीकी शिक्षा मंत्री थे तब कहा जाता है कि वह सिक्का उछालकर मनचाहा पोस्टिंग देते थे। कहा जाता है कि पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट में भर्ती के बाद दो आवेदक एक ही जगह पोस्टिंग चाहते थे। उस दौरान चन्नी ने टॉस किया और जिसका टेल आया उसे मनमर्जी वाली पोस्टिंग दी गई।
बिहार के रोहतास जिले से छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आय़ा है, जहाँ जेडीयू (JDU) के श्रमिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष 56 वर्षीय मोद नारायण सिंह ने एक महिला को अपने घर बुलाकर उसके साथ छेड़छाड़ कर दी। इसके बाद तो नेताजी की सारी नेतागीरी उतार दी गई। महिलाओं ने लात-घूँसे और चप्पलों से उन्हें जमीन पर पटक-पटक कर कूटा। नेताजी की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मामला रोहतास जिले के डेहरी शहर के वार्ड नंबर 16 मोहन बिगहा मोहल्ले का बताया जा रहा है। गुरुवार (17 मार्च 2022) को इसी मोहल्ले की एक महिला सब्जी लेकर अपने घर जा रही थी। रास्ते में जेडीयू नेता मोद नारायण का घर है। उन्होंने महिला को घर के अंदर बुला लिया।
नाम- जेडीयू नेता, ‘काम’- महिलाओं से छेड़खानी! VIDEO – रोहतास का है. ‘नेताजी’ की पहचान जनता दल यूनाइटेड के श्रमिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मोद नारायण सिंह के रूप में हुई है. छेड़छाड़ का आरोप लगा है. किसी तरह महिला थाने में गिरते-पड़ते भागे और जान बचाई.रोहतास से रंजन की रिपोर्ट. pic.twitter.com/cAvhSIHTaS
आरोप है कि महिला जैसे ही घर के अंदर गई तो उन्होंने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया और उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। खुद को बचाने की कोशिश में महिला भागकर छत पर चली गई और वहीं से उसने चिल्ला-चिल्लाकर आसपास के लोगों से मदद माँगी। महिला की आवाज सुनकर लोग इकट्ठे हो गए। उन्होंने किसी तरह से उसे वहाँ से बचाया। इसके बाद गुरुवार को ही पीड़िता महिला थाने में अपने साथ हुई वारदात की शिकायत करने जा रही थी।
महिला थाने के गेट पर ही मोद नारायण अपने दो गुर्गों के साथ उसे मिल गए। जेडीयू नेता ने फिर से पीड़िता को धमकाया। बस फिर क्या था गुस्से में महिलाओं ने आरोपित नेता की लात, जूतों और घूसों से जमकर पिटाई शुरू कर दी। वारयल हो रहे वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि महिलाएँ मोद नारायण को जमीन पर पटक-पटक कर लात और चप्पलों से पीट रही हैं। इस बीच किसी तरह से खुद को बचाकर वो गिरते-पड़ते महिला थाने में घुस गए।
महिला थानाध्यक्ष सुमन सारिका के मुताबिक, पीड़ित महिला की शिकायत पर आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने की दिशा में केरल हाई कोर्ट ने एक निर्णायक फैसला दिया है। अदालत ने फिल्म प्रोडक्शन कंपनियों में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 यानी POSH एक्ट लागू करने का निर्देश दिया। इसके तहत उन सभी प्रोडक्शन कंपनियों में 10 या उससे अधिक लोग काम करते हैं, आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के गठन का आदेश दिया है। यह फैसला वीमेन इन सिनेमा कलेक्टिव (WCC) की याचिका पर आया है।
बार एन्ड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाली की खंडपीठ ने यह आदेश सुनाया है। याचिका में राजनैतिक दलों को भी इस संबंध में निर्देशित करने की अपील की गई थी। लेकिन पीठ ने कहा कि जो राजनैतिक दल कर्मचारी नहीं रखते या कर्मचारियों का पार्टी सदस्यों से सीधा संबंध नहीं है उनको आईसीसी का गठन करने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन, बड़े प्रोडक्शन हाउस के अलावा फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े वे सभी संगठन जिन्होंने दफ्तर खोल रखे हैं, जहाँ कम से कम 10 लोग काम करते हैं या फिर जहाँ महिला कर्मचारी हैं उन्हें ICC का गठन करना होगा। पीठ ने कहा कि POSH एक्ट के सेक्शन 6 और 9 के तहत शिकायतों के निपटारे के लिए यह जरूरी है।
इससे पहले केरल महिला आयोग ने हाई कोर्ट को बताया था कि उसने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में आईसीसी गठित करने और कानून की पालना सुनिश्चित कराने के लिए राज्य सरकार से कहा था। POSH एक्ट (Prevention of Sexual Harassment) कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन शोषण के अपराधों के खिलाफ बनाया गया है। हाई कोर्ट के मुताबिक ICC का गठन किसी भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ावा देगा।
केंद्र सरकार ने कश्मीर फाइल्स फिल्म निर्देशक और प्रोड्यूसर विवेक अग्निहोत्री को ‘वाई’ कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ अपनी कड़वी सच्चाई की वजह से कट्टरपंथियों के लिए मुसीबत बनी हुई है। इस फिल्म को जनता का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, वहीं कई दूसरे माध्यमों से कश्मीरी पंडितों का दर्द भी सामने आ रहा है। यही वजह से कई मुस्लिम और कट्टरपंथी समूहों की तरफ से लगातार विवेक अग्निहोत्री को धमकियाँ मिल रहीं थी।
फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को पूरे भारत में CRPF कवर के साथ 'Y' श्रेणी की सुरक्षा दी गई है: सूत्र
जिसको देखते हुए मोदी सरकार ने निर्देशक को सुरक्षा प्रदान की है। ANI ने सरकार के सूत्रों के हवाले से बताया है, “विवेक अग्निहोत्री को Y कैटेगरी की यह सुरक्षा सीआरपीएफ कवर के साथ दी गई है। यह सुरक्षा पूरे भारत के लिए है।”
बता दें कि हाल ही में आई उनकी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की जहाँ तारीफ हो रही है, वहीं वह कट्टरपंथियों के निशाने पर भी आ गए हैं। इंटरनल रिपोर्ट में हमले की आशंका को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह सुरक्षा देने का फैसला किया है।
वहीं दूसरी ओर फिल्म को मुस्लिम समूहों द्वारा कई देशों में बैन करने के लिए वहाँ की सरकारों पर दबाव डाला जा रहा है। सिंगापुर, क़तर जैसे कई देशों में पहले से ही फिल्म बैन है।
अब विवेक रंजन अग्निहोत्री में एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए ट्वीट किया, “कुछ सांप्रदायिक समूह #TheKashmirFiles पर प्रतिबंध लगाने के लिए न्यूज़ीलैंड के सेंसर बोर्ड पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मैं सभी भारतीयों से एकजुट होने और कट्टरपंथियों द्वारा इस अलोकतांत्रिक रणनीति का अत्यंत विनम्रता के साथ विरोध करने और मानवता और मानवाधिकारों की रक्षा हेतु इस फिल्म को रिलीज करने का अनुरोध करता हूँ।”
IMPORTANT & URGENT: Some communal groups are trying to put pressure on New Zealand Censor to ban #TheKashmirFiles. I request all Indians to be united and oppose this undemocratic tactic by radicals with utmost humility and release this film about HUMANITY and HUMAN RIGHTS. #FOEpic.twitter.com/bXX1TxoXYN
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) March 18, 2022
इसके साथ ही उन्होंने उन्होंने #एफओई अर्थात फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन का हैस टैग भी लगाया।
गौरतलब है कि कश्मीरी पंडितों की कहानी पर आधारित फिल्म ‘The Kashmir Files’ में साल 1990 में हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के एक छोटे हिस्से को दिखाया गया है। देश-विदेश के ज्यादातर शहरों के सिनेमाघरों में शो हाउसफुल चल रहे हैं। फिल्म के माध्यम से विवेक अग्निहोत्री ने कश्मीरी पंडितों पर हुए हिंसा की दास्तान को घर-घर तक पहुँचा दिया है।
इस फिल्म के माध्यम कई दूसरी कहानियाँ भी सामने आई हैं। जिससे आतंकवादी ताकतें बेनकाब हो चुकी हैं। जिसके बाद कश्मीरियत और कश्मीर में शांति की बात करने वाले वामपंथी और एकतरफा नैरेटिव फैलाने वाले लोग इस कदर जल उठे हैं कि निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को लगातार गालियाँ और धमकियाँ दे रहे हैं।
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) March 18, 2022
आपको बता दें कि इस फिल्म की रिलीज को एक हफ्ते हो चुके हैं। फिल्म थमने के मूड में बिल्कुल नहीं है बल्कि हर दिन के साथ इसकी कमाई में भी उछाल आता जा रहा है। फिल्म अब 100 करोड़ क्लब में शामिल हो गई है। जिसकी बधाई खुद निर्देशक ने ट्वीट करके दी।
बांग्लादेश (Bangladesh) की राजधानी ढाका के वारी इलाके में लालमोहन साहा स्ट्रीट पर स्थित इस्कॉन मंदिर (ISKCON Temple) पर मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ द्वारा हमला करने की घटना सामने आई है। 17 मार्च (गुरुवार) को हुए हमले का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में कट्टरपंथियों की भीड़ ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह हु अकबर’ के उन्मादी नारे लगा रही है। हमले में मंदिर को काफी नुकसान हुआ है।
‘वॉइस ऑफ़ बांग्लादेशी हिन्दू’ नाम के ट्विटर हैंडल ने इस घटना को लेकर कई वीडियो और तस्वीरें साझा की हैं। बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक के मुद्दे उठाने वाले इस हैंडल ने कहा, “ढाका में राधाकांता इस्कॉन मंदिर पर हमला जारी है। श्रद्धालुओं ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।”
The attack on the Radhakanta ISKCON temple in Dhaka is ongoing. The Devotees informed the police but the police are not taking any action. (17-03-22)#savebangladeshihinduspic.twitter.com/QGOuoygmGs
— Voice Of Bangladeshi Hindus ?? (@VoiceOfHindu71) March 17, 2022
इस घटना में कुछ श्रद्धालुओं को भी चोटें आई हैं। एक श्रद्धालु वीडियो में पूरी घटना के बारे में बताता दिख रहा है। इस वीडियो में पीड़ित निहाल ने कहा, “लौटते हुए उन्होंने (भीड़) ने मुझे पकड़ लिया। मेरा फोन छीन लिया गया। मेरी पीठ पर घाव हो गए थे।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना में 150-200 मुस्लिम हमलावर शामिल थे। हमलावरों की इस भीड़ का नेतृत्व हाजी सफीउल्लाह कर रहा था। घटना में घायल हुए लोगों में सुमंत्रा चंद्र श्रवण, निहार हलदर, राजीव भद्रा शामिल हैं।
घटना को लेकर ‘हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशनट ने कहा, “17 मार्च की रात लगभग 8 बजे 62 वर्षीय हाजी सैफुल्लाह के नेतृत्व में लगभग 150 मुस्लिमों की भीड़ ने वारी थाना अंतर्गत इस्कॉन मंदिर पर हमला किया। उन्होंने मंदिर को क्षतिग्रस्त किया और मूर्तियों को तोड़ दिया। मंदिर में रखे पैसे और अन्य कीमती सामान को भी लूट लिया। इस घटना में हिन्दू समाज के 3 श्रद्धालु घायल हुए हैं।”
हमले के शिकार मंदिर के प्रशासन ने ऑपइंडिया को दी पूरी जानकारी
ऑपइंडिया ने हमले के शिकार हुए श्री श्री राधाकांता मंदिर बांग्लादेश के प्रशासनिक सदस्यों से सम्पर्क किया। अपना नाम न जाहिर करने की माँग के साथ उन्होंने आभार प्रकट करते हुए कहा कि अगर हमें मीडिया का सपोर्ट नहीं मिलेगा तो हम हिन्दू यहाँ रह नहीं पाएँगे। उन्होंने आगे बताया, “इस मंदिर की जमीन पर चरमपंथियों की बहुत पहले से नजर है। इससे पहले भी उन्होंने यहाँ कब्जा करने का प्रयास किया है, जिसकी शिकायत हमने दर्ज करवाई थी। कल शाम को उन्होंने मंदिर पर हमला कर के यहाँ लूटपाट की है।”
कुछ समय बाद फोन इस हमले में घायल हुए निहाल हलदर को दे दिया गया। निहाल ने इस घटना की पुलिस में दी गई शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया को भेजा। शिकायत के मुताबिक, “इस हमले के मुख्य साजिशकर्ता 31 साल के मोहम्मद इसराफ़ सूफी और 62 साल के हाजी सफीउल्लाह हैं। हमलावरों के हाथों में डंडे, रॉड और हथौड़े थे। मंदिर की दक्षिणी दीवाल को गिरा दिया गया। वहाँ पुराने निर्माण थे, उनको भी ढहा दिया गया। वो सभी हमलावर दंगे जैसे हालात बना रहे थे।”
शिकायत
इसी शिकायत में आगे कहा गया, “हमलावरों को आगे बढ़ता देखकर मंदिर के श्रद्धालुओं ने मुख्य गेट को बंद कर दिया। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया। पुलिस आने पर भी निहाल हलदर को पीटा गया और उनका फोन छीन लिया गया। हमला निहाल की हत्या की मंशा से किया गया था। मंदिर से लगभग ₹5 लाख की लूट हुई। मंदिर पर पत्थरबाजी हुई और अंदर मौजूद सभी श्रद्धालुओं को जिन्दा जला देने के लिए उकसाया गया।”
गौरतलब है कि बांग्लादेश में मंदिरों पर हमले की ये पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अक्टूबर 2021 में बांग्लादेश में कई जगहों पर हिन्दू मंदिरों, दुकानों और घरों को इस्लामी भीड़ द्वारा निशाना बनाया गया था। इन हमलों में 10 हिन्दुओं की हत्या और 23 महिलाओं का बलात्कार किया गया था। इसके अलावा, 17 हिन्दू लापता हो गए थे। हमला कर 160 पूजा पंडाल और मंदिरों को नुकसान पहुँचाया गया था। मामले को बांग्लादेश सरकार ने छिपाने की हर संभव कोशिश की थी।
फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ में 1990 के इस्लामिक जिहाद और कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार एवं पलायन को दिखाया गया है। यह फिल्म आजकल काफी चर्चा में है। इस फिल्म के कंटेंट पर जारी विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) शेष पॉल वैद ने गुरुवार (17 मार्च 2022) को बड़ा खुलासा किया। वैद ने देश में आतंकवाद के पनपने के लिए 1989 में केंद्र में रही कॉन्ग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
एसपी वैद ने ट्विटर के जरिए कहा कि शायद बहुत ही कम लोगों को ये पता होगा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) द्वारा प्रशिक्षित 70 आतंकियों के पहले जत्थे को गिरफ्तार कर लिया था। पूर्व पुलिस अधिकारी ने सनसनीखेज खुलासे में कहा कि फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार के राजनीतिक फैसले के कारण उन्हें छोड़ना पड़ा था। बाद में इन आतंकियों ने राज्य में कई आतंकी संगठनों का नेतृत्व किया।
Many people in the country do NOT know this #KashmirFiles fact: first batch of 70 terrorists trained by ISI were arrested by J&K Police but ill-thought political decision had them released & same terrorists later on lead the many terrorist organizations in J&K. #KashmirFilesTruth
राज्य के पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद ने उन आतंकवादियों के नामों का भी खुलासा किया, जिन्हें फारूक अब्दुल्ला सरकार ने छोड़ दिया था। बाद में इन्हीं आतंकियों ने घाटी में कई सारी आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया। गौरतलब है कि फारूक अब्दुल्ला 1987 से 1990 तक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री थे। उसी दौरान घाटी में इस्लामिक जिहादियों ने हिंदुओं का नरसंहार किया था।
इसके अलावा उस दौरान केंद्र में राजीव गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर उंगली उठाते हुए पूर्व डीजीपी ने सवाल किया, “क्या यह 1989 की केंद्र सरकार की जानकारी के बिना संभव था?”
पूर्व डीजीपी ने जिन आतंकियों के नामों का उल्लेख किया है, उनमें त्रेहगाम का मोहम्मद अफजल शेख, रफीक अहमद अहंगर, मोहम्मद अयूब नजर, फारूक अहमद गनी, गुलाम मोहम्मद गुजरी, फारूक अहमद मलिक, नजीर अहमद शेख और गुलाम मोही-उद-दीन तेली शामिल हैं।
बता दें कि साल था 1989 में जुलाई और दिसंबर के बीच फारूक अब्दुल्ला की सरकार ने 70 कट्टर इस्लामी आतंकियों को छोड़ दिया था। बाद में ये पाकिस्तान का समर्थन पाकर खूंखार आतंकी बने और हिंदुस्तान में कई आतंकी वारदातों को अंजाम दिया। घाटी में हिंदुओं के खिलाफ विरोध और इस्लामिक उग्रवाद को बढ़ावा देने में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
हिंदुओं के खिलाफ गढ़े गए नैरेटिव के कारण 1990 में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार बढ़े, जो कि बाद में इस समुदाय के नरसंहार की हद तक पहुँच गया है। इसका परिणाम यह हुआ कि घाटी में मदरसा समर्थित कट्टरपंथी इस्लामी जिहादियों ने लाखों कश्मीरी हिंदुओं को घाटी छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।
मार्च 1990 तक कश्मीर में हजारों हिंदू महिलाओं का रेप, हत्या और उनके साथ लूटपाट इस्लामिक आतंकियों ने की। कश्मीरी हिंदू अपने देश में ही शरणार्थी बनने को मजबूर हो गए। जम्मू के शिविरों में अमानवीय परिस्थितियों में उनका पुनर्वास किया गया।
द कश्मीर फाइल्स मूवी ने रिलीज के साथ ही कट्टरपंथी इस्लामी आतंकियों द्वारा कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर सालों से दबी बहस को फिर से जिंदा कर दिया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे उस दौरान केंद्र और राज्य ने कश्मीरी हिंदुओं की पीड़ा पर अपनी आँखें मूँद ली थी।
विवेक अग्निहोत्री की ‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ की शूटिंग के दौरान हुई घटना इन दिनों सोशल मीडिया में चर्चा में है। यह वाकया देहरादून का है। देश विरोधी नारों को सुनने के बाद लोगों ने इस फिल्म की शूटिंग बंद करवा दी थी। शूटिंग दोबारा तभी शुरू हो पाई जब लोगों को फिल्म से जुड़े लोग यह विश्वास दिलाने में सफल रहे कि यह फिल्म भारत विरोधी नहीं है। इस दौरान फिल्म में इस्लामी आतंकी फारूक मलिक डार उर्फ बिट्टा कराटे (Farooq Malik Dar alias Bitta Karate) की भूमिका निभाने वाले चिन्मय मंडेलकर से लोगों ने ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगवाए।
एक ट्विटर यूजर के इस दावे की पुष्टि फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) ने भी की है। उन्होंने लिखा है, “सच्ची कहानी। कश्मीर फाइल्स।” इसके साथ ही पोस्ट में हिंदू सीक्रेट्स नाम के इंस्टाग्राम हैंडल से ली गई इमेज को भी जोड़ा गया है। इसमें लिखा है कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ का शुरुआती सीन याद है जहाँ फारूक अहमद बिट्टा भारत विरोधी नारे लगा रहा था! उस सीन की शूटिंग देहरादून में हुई थी। एक्टर चिन्मय मंडलेकर ने बिट्टा का रोल किया है। वहीं देहरादून के स्थानीय लोग उसके साथ आतंकियों के रूप में खड़े थे।
— Vivek Ranjan Agnihotri (@vivekagnihotri) March 17, 2022
इसमें बताया गया है, “शुरुआत में स्थानीय लोग इसमें खुशी से शामिल हुए, लेकिन स्क्रिप्ट में जब उन्होंने भारत विरोधी नारों को सुना तो फिल्म निर्माताओं को शूटिंग रोकने पर मजबूर कर दिया। बाद में स्थानीय लोगों को यह समझाना पड़ा कि ये फिल्म भारत विरोधी नहीं है। साथ ही चिन्मय मंडलेकर की वो मराठी फिल्म भी स्थानीय लोगों को दिखाई गई, जिसमें उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमिका निभाई थी।”
लगवाए ‘भारत माता की जय’ के नारे
आखिरकार स्थानीय लोगों ने कड़ी शर्तों के साथ फिल्म की शूटिंग को दोबारा शुरू करने की इजाजत दी। शूटिंग के बाद चिन्मय मंडलेकर को ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने को भी कहा गया। उल्लेखनीय है कि चिन्मय मडलेकर फेमस मराठी एक्टर होने के साथ ही स्क्रीन राइटर और डायरेक्टर हैं। वो एनएसडी से ग्रेजुएट हैं औऱ कई सारी फिल्मों में एक्टिंग कर चुके हैं। फारझंड, फट्टे शिक्षा औऱ पवनखिंद फिल्मों में छत्रपति शिवाजी महाराज के उनके रोल को काफी सराहा गया था। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित उनकी तीनों फिल्में निर्देशक दिग्पाल लांजेकर की आठ फिल्मों की सीरीज है।
फिल्म में बिट्टा की भूमिका को लेकर मंडलेकर ने पिछले दिनों बताया था,“जब मैंने पहली बार स्क्रिप्ट पढ़ी तो मैं चौंक गया था। द कश्मीर फाइल्स को देखने के बाद लोग अब जो महसूस कर रहे हैं, वही मैंने स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद अनुभव किया। मैंने विवेक से पूछा- क्या यह सब सच है? क्या वास्तव में ऐसा हुआ है? उन्होंने बहुत ही शांत स्वर में मुझसे कहा- स्क्रिप्ट में जो कुछ भी लिखा गया है, वह वास्तव में जो हुआ है उसका सिर्फ 35 प्रतिशत है। वास्तव में जो हुआ है वह कहीं अधिक क्रूर है।”
बहरहाल विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को उत्तर प्रदेश, गोवा, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, असम, बिहार और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसमें जम्मू-कश्मीर में 1990 के दशक में इस्लामिक आतंकियों द्वारा हिंदुओं के नरसंहार के बाद उनके पलायन को दिखाया गया है।
केरल (Kerala) के पठानमथिट्टा जिले में एक चर्च के पादरी ने काउंसलिंग के बहाने नाबालिग का यौन शोषण (Sexual Molestation) किया। 35 वर्षीय आरोपित पादरी (Pastor) पोंडसन जॉन को पुलिस ने गुरुवार (17 मार्च 2022) को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक घटना पठानमथिट्टा जिले के कूडल की है। पीड़िता की उम्र 17 साल है। उसका पढ़ाई से ध्यान भटक रहा था। इसी को लेकर उसकी माँ ने बेटी की काउंसलिंग के लिए पादरी से संपर्क किया था। रिपोर्ट के अनुसार इसके बहाने पादरी ने दो अलग अलग जगहों पर नाबालिग का यौन शोषण किया।
रिपोर्ट के अनुसार नाबालिग का पहली बार यौन शोषण उसके ही घर पर हुआ। काउंसलिंग के लिए आया पादरी उसे एक कमरे में ले गया और दरवाजे को अंदर से बंद कर इस दुष्कृत्य को अंजाम दिया। इस घटना के बाद भी जब पीड़िता चुप रही तो उसकी हिम्मत बढ़ गई। अगली बार उसने नाबालिग को अपने घर पर बुलाया और फिर से वही हरकत की।
इसके बाद पीड़िता ने यह बात अपनी एक दोस्त को बताई। दोस्त ने स्कूल को घटना की जानकारी दी, जहाँ से चाइल्ड लाइन को खबर दी गई। इसके बाद शिकायत मिलने पर पुलिस ने आरोपित पादरी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपित ने पीड़िता के साथ 12 और 13 मार्च को यौन दुर्व्यवहार किया था।
बीते साल नवंबर में आंध्र प्रदेश के जिला कुरनूल में चट्टीवेदु ग्राम चगल्लामारी मंडल के पादरी उप्पलपति रवींद्र प्रसन्ना कुमार को चर्च में दो नाबालिग अनुसूचित जाति की लड़कियों का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में शिकायत दर्ज की थी। इस मामले में ऑपइंडिया को एससी-एसटी महिला एवं बाल अधिकार कार्यकर्ता और दलित शोधकर्ता प्रेरणा तिरुवैपति ने बताया था कि उन्होंने एनसीपीसीआर से संपर्क किया था, क्योंकि पुलिस मामला दर्ज नहीं कर रही थी और कथित तौर पर मामले को अदालत के बाहर निपटाने की कोशिश कर रही थी।
झारखंड के हजारीबाग के बरही में 10 फ़रवरी 2022 को हुए रुपेश पांडेय की हत्या के मामले में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने हेमंत सोरेन सरकार से जवाब माँगा है। आयोग ने झारखंड पुलिस से अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट माँगी है। इसके लिए 10 दिनों का समय दिया गया है। NCPCR ने यह पत्र 17 मार्च (गुरुवार) को जारी किया है।
Jharkhand | National Commission for Protection of Child Rights (NCPCR) issues an inspection report, along with recommendations, to the state govt on the complaint on the death of a minor in Barhi, Hazaribagh district; asked for an action report within 10 days. pic.twitter.com/NHX1njGpZw
इस पत्र में NCPCR ने अपनी पुरानी नोटिस का हवाला देते हुए झारखंड के DGP से कार्रवाई को लेकर जवाब माँगा है। आयोग के मुताबिक उन्हें अभी तक इस मामले में हुई कार्रवाई को लेकर कोई भी रिपोर्ट नहीं प्राप्त हुई है। आयोग ने नोटिस में NCPCR सदस्यों द्वारा रुपेश पांडेय के घर के दौरे का भी जिक्र किया है। इसमें आयोग के सदस्यों ने पीड़ित परिवार के साथ जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी बात की थी।
पीड़ित परिवार ने लौटा दी कॉन्ग्रेस विधायक द्वारा दी गई सहयोग राशि
पीड़ित परिवार के रिश्तेदार सुमन सौरव ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया, “इस घटना में पुलिस 5 से अधिक लोगों को गिरफ्तार ही नहीं करना चाहती, क्योंकि उन पर मॉब लिंचिंग कानून लगाना पड़ेगा। CBI जाँच की माँग को भी झारखंड सरकार में संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने विधानसभा में ठुकरा दिया है। मृतक रुपेश पांडेय के चाचा ने कॉन्ग्रेस विधायक उमाशंकर यादव ‘अकेला’ द्वारा दी गई 50 हजार रुपए की सहायता राशि को भी लौटा दिया है, क्योंकि उन्हें पैसा नहीं बल्कि सिर्फ न्याय चाहिए।”
सुमन सौरव ने आगे बताया, “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रुपेश की माँ को एक सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया था। संभवतः ये नौकरी चतुर्थ श्रेणी की होगी। वो आदेश प्रक्रिया में चल रहा है।’
कश्मीरी हिंदुओं की त्रासदी को लेकर 11 मार्च 2022 को फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द कश्मीर फाइल्स रिलीज हुई। इसके बाद से देशभर के कश्मीरी हिंदू एक-एक कर सामने आ रहे हैं और अपने साथ हुई बर्बरता की कहानी को दुनिया के सामने रख रहे हैं। इसी क्रम में एक्ट्रेस संदीपा धर ने भी अपनी कहानी दुनिया के सामने रखी है। फिल्म देखने के बाद एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर उस समय को याद किया है, जब नब्बे के दशक में उनके परिवार को कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
संदीपा धर ने इंस्टाग्राम पर शेयर स्टोरी में अपने पुश्तैनी घर की तस्वीर के साथ ही उस घटना के बारे में बताया है। उन्होंने लिखा है, “उस दिन उन लोगों ने ऐलान किया कि कश्मीरी पंडित अपनी महिलाओं को यहीं छोड़कर चले जाएँ। मेरे परिवार ने तुरंत अपनी मातृभूमि छोड़ने का फैसला किया। हम एक ट्रक के पीछे छिप गए, मेरी चचेरी बहन को पीछे वाली सीट के नीचे मेरे पापा के पैरों के पास छिपा दिया गया। चुपचाप आधी रात में हम वहाँ से भाग निकले।”
आगे उन्होंने कहा है, “कश्मीर फाइल्स के दृश्य ने मेरे दिल को झकझोर दिया, क्योंकि यह मेरी अपनी कहानी है। अपने घर, अपनी जमीन लौटने के इतंजार में मेरी दादी की मौत हो गई। मेरे परिवार के लिए ये बहुत ही बुरा रहा। मेरा परिवार इस पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर (PTSD) से अभी तक उबरने की कोशिश कर रहा है। ये वो महत्वपूर्ण कहानी है, जिसे बताने में बहुत अधिक समय लग गया। याद रखिए, ये केवल एक फिल्म है, अभी तक हमें न्याय नहीं मिला है।”
गौरतलब है कि एक टीवी कार्यक्रम में द कश्मीर फाइल्स के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने बताया था कि इस फिल्म के लिए रिसर्च करते वक्त उन्होंने 700 से अधिक कश्मीरी हिंदुओं का इंटरव्यू लिया, जिनमें से सभी की कहानियाँ एक ही तरह की थीं। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि लोगों के लिए अपना दर्द और उनके चोट को बताने का समय बीत चुका है। अगर इस दर्द को दबा दिया जाए तो कोई इलाज नहीं होगा।”
गिरिजा टिक्कू के साथ हुई क्रूरता का जिक्र करते हुए कहा कि यह फिल्म देश और दुनिया के हर बच्चे को दिखाई जानी चाहिए। यह घटना पूरी मानवता के लिए कलंक है। विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग खुद को दोषी महसूस करें, लोग इस मुद्दे पर चर्चा करें और बहस करें ताकि भविष्य में भारत में एक और कश्मीर न बनें।