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गलती से दगी सुपरसोनिक मिसाइल घुस गई पाकिस्तान में, वारहेड न होने से बची जान: भारत ने जताया खेद, दिया कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का आदेश

पाकिस्तान ने गुरुवार (10 मार्च 2022) को ये आरोप लगाया कि भारत ने उसके ऊपर मिसाइल से हमला किया। हालाँकि, इस मामले में शुक्रवार (11 मार्च 2022) को भारत सरकार ने एक बयान जारी कर इस बात को माना कि 9 मार्च 2022 को नियमित रखरखाव के दौरान टेक्निकल फॉल्ट के कारण मिसाइल फायर हो गया। ये पाकिस्तान के एक क्षेत्र में गिरा। हालाँकि, इससे किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

इस घटना को भारत के रक्षा मंत्रालय ने गंभीरता से लेते एक बयान जारी कर कहा है कि यह बेहद खेदजनक है। इसके लिए हाई लेवल कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का आदेश दिया है।

पाकिस्तान ने लगाया हवाई क्षेत्र के उल्लंघन का आरोप

10 मार्च को पाकिस्तानी सेना की ओर से कहा कि भारत के हिसार से एक मिसाइल फायर हुई, जो कि पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन है। बताया जाता है कि यह मिसाइल पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के खानेवाल जिले के मियाँ चन्नू शहर में गिरी थी।

पाकिस्तानी आर्मी की डीजीआईएसपीआर के मुताबिक, मिसाइल में वारहेड नहीं था औऱ यह पब्लिक एयरलाइंस के पास पाकिस्तान के 124 किलोमीटर के अंदर तक आ गई थी। पाकिस्तान आर्मी के जनरल मेजर बाबर इफ्तिखार ने कहा, “यह सुपरसोनिक स्पीड से उड़ने वाली चीज थी, शायद एक मिसाइल थी, लेकिन इसमें वारहेड नहीं था। जब यह गिरा तो इसने लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया।”

डीजीआईएसपीआर के मुताबिक, ये फ्लाइंग ऑब्जेक्ट भारत के सिरसा से उड़कर 124 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान के मियाँ चन्नू शहर में गिरा। जेनेरा बाबर ने ये भी कहा कि इसे मारकर नहीं गिराया ये खुद ही गिर गई।

पाकिस्तान के मुताबिक, इसमें को मनुष्य तो हताहत नहीं हुआ, लेकिन एक दीवार गिर गई।

अपूर्वा पुराणिक को बनाया अरफ़ा बानू, 3 बच्चों के अब्बू एजाज ने कुल्हाड़ी से किए 23 वार: शौहर ने छिपाई थी पहली बेगम की बात

कर्नाटक के गडग जिले में लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ मोहम्मद एजाज है नाम के एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी को बेरहमी से मारने का आरोप लगा है। पीड़िता का नाम अपूर्वा पुराणिक है जिसने एजाज से शादी करके धर्म परिवर्तन कर लिया था। धर्म परिवर्तन के बाद उनका नाम अरफ़ा बानू हो गया था। हमले के लिए कुल्हाड़ी का प्रयोग किया गया था जिससे 23 वार किए गए हैं। अपूर्वा का इलाज GIMS जिला अस्पताल गडग में चल रहा है जहाँ उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। घटना गुरुवार (10 मार्च) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक निकाह के कुछ दिन बाद ही अपूर्वा और एजाज में अनबन शुरू हो गई थी। एजाज लगातार अपूर्वा पर मांसाहारी खाना बनाने, बुर्का पहनने और अन्य इस्लामी तौर तरीकों को अपनाने का दबाव बना रहा था। अपूर्वा ने ऐसा करने से मना कर दिया। हालात और बिगड़े तो अपूर्वा एजाज से अलग रहने लगी। आख़िरकार उसने एजाज से तलाक लेने का फैसला कर लिया था। लगातार प्रताड़ना के चलते पीड़िता 4 महीने पहले अपने माता – पिता के साथ रहने चली गई थी। वहीं से उन्होंने कोर्ट में तलाक का केस दायर किया था।

बताया जा रहा है कि घटना के दिन अपूर्वा बाईक चलाना सीख रही थी। तभी अचानक ही वहाँ एजाज आया। उसके हाथ में कुल्हाड़ी थी जिस से उसने अपूर्वा के सिर, कंधे और चेहरे पर वार किए। हमले के बाद वह भाग गया था।। वहीं पर उसने कुल्हाड़ी से अपूर्वा पर हमला कर दिया। गडग जिले के पुलिस अधीक्षक शिवप्रकाश देवराजू ने आरोपित की जल्द गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी शुक्रवार (11 मार्च) सुबह 3 बजे की गई है।

पीड़िता पढ़ाई में ग्रेजुएट है। दोनों की मुलाकत साल 2018 में हुई थी। अपूर्वा की उम्र लगभग 26 और मोहम्मद एजाज की उम्र लगभग 30 साल है। आरोपित एजाज ऑटो चलाता है। वहीं वह पहले से शादीशुदा है और उसके तीन बच्चे भी हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उसने यह बात अपूर्वा से छिपा ली थी। जिसका पता उसे निकाह के बहुत बाद चला था। आरोप यह भी है कि उसकी नजर अपूर्वा की दौलत पर थी क्योकि वो अपने माँ – बाप की एकलौती बेटी थी। मज़बूरी में अपूर्वा का परिवार भी इस शादी के लिए तैयार हो गया था।

‘एक कॉमेडियन वहाँ और एक यहाँ… पंजाब को भगवान बचाए’: भगवंत मान की जीत पर ट्रेंड हुए जेलेंस्की, खतरे में पड़ी अर्चना पूरन सिंह की कुर्सी

रूस औऱ यूक्रेन में जारी युद्ध (Russia Ukraine War) के बीच 10 मार्च 2022 को भारत में पाँच राज्यों के चुनावी रिजल्ट भी आए। इसमें पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। आम आदमी पार्टी का ऐसा झाड़ू चला कि कॉन्ग्रेस (Congress) पूरी तरह से साफ हो गई। यहाँ तक कि नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ‘ठोको ताली’ कहने के लायक नहीं रहे। इस बीच आप के मुख्यमंत्री चेहरे भगवंत मान (Bhagwant Mann) की जीत पर य़ूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) ट्रेंड करने लगे हैं। जबकि सिद्धू की हार के बाद द कपिल शर्मा शो का हिस्सा एक्ट्रेस अर्चना पूरन (Archna Pooran Singh) सिंह भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रही है।

दरअसल, भगवंत मान पंजाब के भावी मुख्यमंत्री हैं। वो और यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की दोनों नेताओं ने ही अपने कैरियर की शुरुआत एक हास्य कलाकार (कॉमेडियन) के तौर पर की थी। दोनों का शुरुआती पेशा अपनी एक्टिंग के जरिए लोगों का मनोरंजन करना था। दोनों नेताओं के पैदा होने के दशक भी एक ही हैं। मान 1973 में जन्में तो जेलेंस्की 1978 में पैदा हुए। बहरहाल मान की जीत पर भारत में व्लोडिमिर जेलेंस्की सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं।

भगवंत मान पर निशाना साधते हुए लोकेंद्रनाथ नाम के यूजर ने कहा, “हमारे पास यूक्रेन में एक कॉमेडियन है, @ZelenskyyUa जो अपरिपक्व राजनीति के कारण अपने देश को तबाह कर रहा है और अब हमारे पास पंजाब में एक है। इस राज्य को केवल भगवान ही बचा सकते हैं।”

एक अन्य यूजर ने भगवंत मान को लेकर कहा, “एक ही पेशा है, लेकिन अलग चरित्र। फर्क देखें। व्लोडिमिर ज़ेलेंस्की रूस (एक शक्तिशाली देश) के खिलाफ खड़ा है। भगवंत मान दिल्ली (आधा राज्य) की तरफ देख रहे हैं।”

सचिन पटेल कहते हैं कि दोनों ने कॉमेडी से शुरुआत की और अब असली परफॉर्मेंस दे रहे हैं।

वहीं नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब विधानसभा चुनाव में हारने के बाद कपिल शर्मा के शो में जज अर्चना पूरन सिंह ट्रेंड हो रही हैं। इसी क्रम में इमरान खान नाम के यूजर ने कहा, “अर्चना पूरन सिंह आप तैयारी कर लीजिए, क्योंकि चन्नी (चरणजीत सिंह चन्नी) के बाद अब आपकी कुर्सी की बारी है।”

एक अन्य यूजर ने तंज कसा कि पंजाब में कॉन्ग्रेस के डूबने के बाद सिद्धू जल्द ही कपिल शर्मा शो ज्वाइन करेंगे।

शरद कुमार कहते हैं, “आज सबसे ज्यादा चिंतित व्यक्ति राहुल गाँधी, दीदी या एके नहीं, बल्कि अर्चना पूरन सिंह हैं।”

गौरतलब है कि नवजोत सिंह सिद्धू पॉलिटिक्स से पहले कपिल शर्मा के शो का हिस्सा थे।

अब चीन के चांगचुन शहर में फैला ‘जानलेवा वायरस’, 90 लाख लोगों को किया घरों में कैद: ट्रासपोर्ट और दुकानें भी बंद, तीन दौर की टेस्टिंग के आदेश

पूरी दुनिया में कोरोना फैलाने के लिए बदनाम चीन में एक बार फिर से इस जानलेवा वायरस का कहर देखने को मिल रहा है। भयावह होते हालातों को देखते हुए चीनी सरकार ने शुक्रवार (11 मार्च 2022) को कड़ा फैसला लेते हुए देश के औद्योगिक शहर चांगचुन में 9 मिलियन (90 लाख) लोगों को लॉकडाउन में डाल दिया। चीनी सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश में लोगों के घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही अब यहाँ के लोगों को तीन दौर की टेस्टिंग करानी होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, हालात की गंभीरता को देखते हुए चीनी अधिकारियों ने शहर के सभी गैर जरूरी व्यवसायों को बंद कर दिया है, साथ ही ट्रांसपोर्ट सेवा को भी सस्पेंड कर दिया है। चीनी सरकार ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया है जब राष्ट्रीय प्रशासन ने देशभर से कोरोना को स्थानीय स्तर पर 397 मामलों को रजिस्ट किया है। इन मामलों में 98 संक्रमित जिलिन प्रान्त में चांगचुन के आसपास के थे। हालाँकि, शुक्रवार को वहाँ केवल दो ही मामले मिले।

चीनी प्रशासन ने ये फैसला लिया है कि देश में जहाँ कहीं भी एक या उससे अधिक संक्रमित मिलेंगे, वहाँ पर तुरंत लॉकडाउन लगा दिया जाएगा। चीनी लॉकडाउन कोरोना महामारी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत अपना रहे हैं। जिलिन शहर में तो चीनियों ने पहले से ही आंशिक लॉक़डाउन लगा रखा है। इतना ही नहीं इस शहर की आसपास के शहरों के साथ कनेक्टिविटी को भी खत्म कर दिया गया है। शुक्रवार को शहर में 93 संक्रमित मिले।

कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट की भयावहता को देखते हुए शंघाई फाइनैंशियल सेंटर में स्कूलों को भी मजबूरन बंद करना पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 की शुरुआत में चीन में COVID-19 के शुरुआती प्रकोप के बाद से अब सबसे अधिक 1,000 से अधिक ताजा मामले मिले हैं।

गौरतलब है कि ऐसी कई रिपोर्टें सामने आ चुकी हैं, जिनमें ये दावा किया गया था कि कोरोना का वायरस चीन की वुहान स्थिति बायो लैब में बनाया गया था।

‘दिल्ली MCD का ₹13000 करोड़ दबा के बैठी रही AAP’: स्मृति ईरानी का केजरीवाल पर पलटवार, पूछा- आखिर सात साल से क्यों रोक रखा फंड?

दिल्ली नगर निगम चुनावों (Delhi MCD Election) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के उस बयान पर पलटवार किया है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने केंद्र के दबाव में एमसीडी के चुनाव टालने की घोषणा कर दी है। केजरीवाल ने कहा कि शायद देश के 75 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ होगा कि केंद्र सरकार ने सीधे किसी राज्य के चुनाव आयोग को चुनाव टालने के लिए कहा होगा।

स्मृति ईरानी ने मुख्यमंत्री केजरीवाल से सवाल किया है कि आखिर सात साल एमसीडी का फंड क्यों रोका। उन्होंने कहा कि पार्कों, अस्पतालों और कम्युनिटी सेंटर का पैसा क्यों रोका। एससीडी सुधार को केजरीवाल ने मंजूरी क्यों नहीं दी। एमसीडी को 13 हजार करोड़ रुपए से वंचित रखा। साथ ही विकास कार्यों का पैसा जानबूझकर रोका। इतना ही नहीं सफाईकर्मियों का पैसा भी रोका।

इस सबके अलावा स्मृति ईरानी ने तंज कसते हुए कहा कि जो चुनावों में लहर की बात करते हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि यूपी चुनाव में उन्हें नोटा से भी कम वोट मिले हैं। लोकसभा चुनाव में भी वह जहाँ से लड़े थे, उन्हें हार मिली थी। उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी की 70 में से 55 सीट पर जमानत जब्त हो चुकी है।

बता दें कि बीजेपी की तरफ से ये पलटवार सीएम केजरीवाल के एक बयान के बाद आया है। अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा था कि दो दिन पहले राज्य चुनाव आयोग दिल्ली नगर निगम चुनावों की घोषणा करने को लेकर सूचना दिया। मगर 5 बजे घोषणा से एक घंटे पहले 4 बजे केंद्र सरकार की तरफ से चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी जाती है। उसमें कहा जाता है कि वह दिल्ली के तीनों नगर निगमों को एक साथ एक निगम बनाने जा रहे हैं, इसलिए चुनाव टाल दीजिए। चुनाव आयोग केंद्र सरकार के कहने पर चुनाव घोषणा की तिथियाँ टाल भी देता है।

केजरीवाल ने कहा कि चुनाव की तिथि टालने से लोगों के मन में कई बातें चल रही हैं। पहली केंद्र की सत्ता में भाजपा 7-8 साल से काबिज है। अगर तीनों एमसीडी को एक साथ करना था तो आठ साल में क्यों नहीं किया गया। चुनाव की तारीख की घोषणा होने से एक घंटे पहले याद आया कि निगमों को एक करना है तो चुनाव टाल दिया जाए। उन्होंने कहा कि यहाँ मकसद चुनाव टालना नहीं है। ऐसा लगता है कि भाजपा हार के डर से एमसीडी को एक करने के बहाने चुनाव टालना चाह रही है।

केजरीवाल ने इस दौरान राज्य चुनाव आयुक्त पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता वह एक घंटे में ही क्यों चुनाव टालने को तैयार हो गए? क्या राज्य के चुनाव आयुक्त पर दबाव डाला गया या फिर आयकर और ईडी की कार्रवाई की धमकी दी गई? क्या यही कारण है कि वह एक घंटे के अंदर चुनाव टालने को तैयार हो गए। उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है। क्या कार्यकाल खत्म होने पर उन्हें कोई और पद का लालच दिया गया है। अपने राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त से कहना चाहता हूँ कि ऐसा करेंगे तो जनतंत्र ही नहीं बचेगा।”

बता दें कि (9 मार्च 2022) को दिल्ली नगर निगम चुनाव की तारीखों का ऐलान होने वाला था, जो कि फिलहाल टल गया है। इसके बाद राज्य चुनाव आयुक्त एसके श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र सरकार ने कुछ बातें उठाई हैं जिन्हें वह देख रहे हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि चुनाव किसी भी हाल में 18 मई तक हो जाएँगे।

गौरतलब है कि 2011 में शीला दीक्षित की सरकार ने राजनीतिक कारणों से दिल्ली नगर निगम का तीन हिस्सों में विभाजन किया था। कॉन्ग्रेस को अनुमान था कि इससे वह तीनों में से कुछ नगर निगम में अपनी सत्ता बरकरार रखने में कामयाब हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उलटे, कॉन्ग्रेस को और अधिक सियासी नुकसान उठाना पड़ा। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य के लिए अलग-अलग अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ती है जिससे कार्य प्रभावित होते हैं।

‘द कश्मीर फाइल्स’ से हटेगा स्क्वॉड्रन लीडर रवि खन्ना से जुड़ा सीन, कोर्ट का आदेश: 25 जनवरी 1990 को यासीन मलिक ने करवाई थी हत्या

‘द कश्मीर फाइल्स’ से भारतीय वायु सेना के अधिकारी रहे स्क्वॉड्रन लीडर रवि खन्ना से जुड़ा सीन हटाया जाएगा। जम्मू की एक अदालत ने बलिदानी अधिकारी की पत्नी निर्मल खन्ना की याचिका पर यह आदेश दिया है। खन्ना उन वायु सैनिकों में शामिल थे, जिनकी हत्या 25 जनवरी 1990 को आतंकियों ने कर दी थी। ‘द कश्मीर फाइल्स’ नब्बे के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार और घाटी से उनके पलायन पर केंद्रित है।

सितंबर 2019 में स्क्वॉड्रन लीडर रवि खन्ना का नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में दर्ज करने का फैसला किया गया था। निर्मल खन्ना ने अदालत से फिल्म से उन दृश्यों को हटाने का आदेश देने की अपील की थी, जिनमें उनके पति सहित 4 वायु सेना कर्मियों की हत्या को दिखाया गया है। उनका कहना था कि ये दृश्य वास्तविक तथ्यों से अलग हैं। वायु सैनिकों पर हुए आतंकी हमले का जिम्मेदार जेकेएलएफ का सरगना यासीन मलिक माना जाता है।

भारतीय वायुसेना के जवानों की हत्या तब की गई जब उनके पास कोई भी हथियार नहीं था और वे एयरपोर्ट जाने के लिए बस का इन्तजार कर रहे थे। वहाँ भारतीय वायुसेना के 14 जवान थे। तभी अचानक से एक मारुति जिप्सी और एक बाइक से 5 आतंकी पहुँचे और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उन्होंने एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवानों के अलावा 2 कश्मीरी महिलाओं की भी हत्या कर दी गई, जो बस का इंतजार कर रही थीं। आतंकियों ने ख़ून से लथपथ जवानों के सामने डांस करते हुए जिहादी नारे भी लगाए थे।

1990 में इस मामले में सीबीआई ने टाडा कोर्ट के समक्ष 2 चार्जशीट दायर की थी। 1995 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने ट्रायल पर रोक लगा दी थी। यासीन मलिक टेरर फंडिंग के मामले में भी आरोपित है और फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। उसे पुलवामा हमले के बाद गिरफ़्तार किया गया था। साल 2020 में कोर्ट ने इस मामले में पर्याप्त सबूतों के आधार पर यासीन मलिक और इस मामले में बाकी सभी दोषियों पर आरपीसी की धारा 302, 307, टाडा एक्ट 1987 और आर्म्स एक्ट 1959 समेत अन्य धाराओं में अलग-अलग आरोप तय करने के आदेश दिए थे।

सैय्यदा खातून की जीत पर सपा ने निकाला विजय जुलूस, ‘पाकिस्तान और इस्लाम जिंदाबाद’ के लगे नारे: हारे हुए BJP उम्मीदवार को दी माँ की गालियाँ

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे के दावे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक भीड़ नारेबाजी करती नजर आ रही है। वीडियो को डुमरियागंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी सैय्यदा खातून की जीत के बाद का बताया जा रहा है। सिद्धार्थनगर पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच करवाई जा रही है।

11 मर्च (शुक्रवार) को यह वीडियो शेयर करते हुए @OfficialTeamPs हैंडल ने लिखा, “सिद्धार्थनगर डुमरियागंज सीट से सपा प्रत्याशी सैय्यदा खातून की जीत के बाद पाकिस्तान जिंदाबाद व इस्लाम जिंदाबाद के नारे लगाए गए। कृपया वीडियो की उचित जाँच कर देशविरोधी तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।”

वही एक अन्य वीडियो के इसी विधानसभा का होने का दावा किया जा रहा है। वीडियो में कुछ लोग समाजवादी पार्टी की टोपी पहने दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो में हारे हुए भाजपा प्रत्याशी राघवेंद्र सिंह को माँ की गाली देते हए सुना जा सकता है।

इस घटना में धारा 143 और 188 के तहत FIR दर्ज की गई है। FIR के मुताबिक घटना 10 मार्च (गुरुवार) की रात लगभग 10.35 की है। जहाँ ये नारे लगे वहाँ से थाना महज आधा किलोमीटर दूर था। मामले में शिकायतकर्ता खुद पुलिस ही है। शिकायत के मुताबिक, “कुछ पुलिसकर्मी गश्त करने के दौरान हो रहे शोरगुल को सुन कर डुमरियागंज के सपा कार्यालय पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि सड़क पर सपा प्रत्याशी सैयदा खातून एवं लगभग 200-250 समर्थकों के साथ नारेबाजी कर रहीं थीं। इन्हे हटाने की कोशिश की गई और बाद में अतिरिक्त फ़ोर्स भी बुलानी पड़ी। इनका जमावड़ा भी गैरकानूनी था।”

FIR

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में SHO डुमरियागंज से बात की। उन्होंने बताया, “लगभग 200 से 250 लोगों मुकदमा दर्ज करके जाँच की जा रही है। इस मुकदमे में समाजवादी पार्टी की विधायक सैय्यदा खातून भी शामिल हैं। वीडियो के अनुसार पुलिस नारेबाजी करने वालों को चिन्हित कर रही है।” इस मामले की जाँच सब इंस्पेक्टर सुरेश यादव को सौंपी गई है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में डुमरियागंज विधानसभा से समाजवादी पार्टी की सैय्यदा ख़ातून ने 85098 (41.19%) वोटों के साथ जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी भाजपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह को 771 वोटों से हराया। राघवेंद्र को 84327 (40.82%) वोट प्राप्त हुए थे। साल 2017 में यहाँ से राघवेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की थी

कश्मीरी हिंदुओं की ‘जुबान और चेहरा’ बने अनुपम खेर, कहा- जिहादियों के लिए आधी रात में खुलने वाली अदालत ने हमें सुनने से भी मना कर दिया

फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री की ‘द कश्मीर फाइल्स’ इन दिनों चर्चा में है। यह फिल्म नब्बे के दशक में कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार और पलायन पर केंद्रित है। इस​ फिल्म में अनुपम खेर की भी भूमिका है। खेर ने सोशल मीडिया के जरिए कश्मीरी हिंदुओं का आवाज और चेहरा बनने की बात कही है। साथ ही बताया है कि कैसे देश की व्यवस्था ने कश्मीर के हिंदुओं की उपेक्षा की।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘कू’ और ट्विटर पर उन्होंने एक वीडियो साझा किया है। वीडियो शेयर करते हुए अनुपम खेर ने लिखा है, “आज मैं सिर्फ अभिनेता नहीं रहा। मैं गवाह हूँ और द कश्मीर फाइल्स मेरी गवाही है। वो सब कश्मीरी हिंदू, जो या तो मार डाले गए या जीते जी एक शव की तरह जीने लगे। अपने पुरखों की जमीन से उखाड़ कर फेंक दिए गए। आज भी न्याय को तरस रहे हैं। अब मैं उन सब कश्मीरी हिंदुओं की जुबान और चेहरा हूँ।”

वीडियो की शुरुआत में अनुपम कहते हैं, “ईश्वर की कृपा और आप सबके प्यार व आर्शीवाद से, मैं 522 फिल्में कर चुका हूँ। अनुपम खेर हूँ। पात्र बनता हूँ। अभिनय करता हूँ। हँसाता हूँ। रुलाता हूँ। यही मेरा सारांश है। लेकिन इस बार मैं कोई पात्र नहीं बना। मैंने अभिनय नहीं किया और द कश्मीर फाइल्स कोई डायलॉग भरी कहानी भी नहीं है।”

कश्मीरी पंडितों की बात करते हुए कहा है, “32 साल पहले लाखों कश्मीरी हिंदू तहस-नहस कर दिए गए थे। मेरे हाथ, पाँव, बाजू, ये शरीर जैसे रातों-रात जिहाद ने रौंद डाला। 90 करोड़ का यह भरा-पूरा देश बेखबर रहा। पुलिस मानों गायब हो गई। मीडिया गूँगी-बहरी हो गई। सेना छावनियों में पड़ी रही और कश्मीर हम हिंदुओं से खाली करा लिया गया।”

वे आगे कहते हैं, “कश्मीरी पंडितों के पलायन पर कोई जाँच नहीं हुई। आज तक कोई आयोग नहीं बैठा। कोई मुकदमा नहीं चला। कोई दोषी नहीं पाया गया। किसी को सजा नहीं हुई। हाँ मुद्दा जरूर उछाला गया। लेकिन जिहादियों के लिए आधी रात में खुलने वाली अदालत ने हमें सुनने से भी मना कर दिया।” 

अनुपम खेर ने अपने लिए इस फिल्म का महत्व बताते हुए कहा है, “द कश्मीर फाइल्स फिल्म से कहीं बढ़कर, आप सबकी की अंतरात्मा की अदालत में हम कश्मीरी हिंदुओं की एक दस्तक है। मैं अनुपम खेर नहीं हूँ। मैं अब पुष्कर नाथ हूँ। आप सब तक पहुँचने के लिए छटपटा रहा हूँ। मुझसे मिलिए… द कश्मीर फाइल्स में।”

कुछ समय पहले अनुपम खेर ने इस फिल्म को लेकर अपनी माँ की भावनाओं को भी लोगों के साथ साझा किया था। उस वीडियो में उनकी माँ दुलारी कहती हुई नजर आईं थी, “मुझे सब कुछ पता है क्या किया उन्होंने। जिसने भी ये फिल्म बनाई उसने बहुत अच्छा किया। हम हिंदुओं के लिए बहुत अच्छा किया। मोदी तो बेचारा कर ही रहा है। लेकिन इस फिल्म से पता चलेगा कश्मीरियों के साथ क्या हुआ। अब तक बाहर वालों को क्या पता कि हमारे साथ क्या हुआ था। वो लोग तो हमारी दौलत, हमारा सामान सब कुछ ले गए। सबको ऐसे निकाला जैसे फकीर हों।”

केरल से इस्लामिक स्टेट खुरासान में शामिल होने गया था एमटेक का छात्र नजीब, अफगानिस्तान में आत्मघाती हमले में खुद को उड़ाया

इस्लामिक कट्टरपंथ से प्रभावित होकर बर्बर आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रॉविन्स (ISKP) में शामिल होने के लिए केरल से अफगानिस्तान गया एक मुस्लिम इंजीनियर मारा गया। उसने खुद को ही बम विस्फोट कर उड़ा लिया। इसका खुलासा खुद चरमपंथी इस्लामिक संगठन ने किया है।

आतंकी संगठन आईएसकेपी की एक मैगजीन है ‘वॉयस ऑफ खुरासान’। इसी मैगजीन में आत्मघाती हमला करने वाले भारतीय शख्स के बारे में जानकारी दी गई है। मरने वाले का नाम नजीब अल हिंदी (23) था, जो कि केरल के ही एक इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक कर रहा था। अपने लेख में आईएसकेपी ने नजीर की तुलना पैगंबर मुहम्मद के साथियों में से एक रहे हंजाला इब्न अबी से की गई है। दरअसल, माना जाता है कि उहुद की लड़ाई में जाते वक्त हंजाला की मौत 24 साल की उम्र में ही हो गई थी। वो अपने निकाह की रात ही जंग के लिए रवाना हो गए थे। यही हाल नजीब का हुआ उसने भी एक पाकिस्तानी महिला से निकाह किया था औऱ उसके बाद उसकी मौत हो गई।

बहरहाल, अपने लेख में आतंकी संगठन ने नजीब की मौत को लेकर अधिक खुलासा नहीं किया। हाँ इतना जरूर बताया गया है कि वह हमेशा शांत रहता था औऱ बहुत कम बोलता था। उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट रहती थी। नजीब निकाह नहीं करना चाहता था, लेकिन उसके दोस्तों ने उसे इसके लिए मजबूर किया था।

क्या है इस्लामिक स्टेट खुरासान

ISIS-K या इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) – ISIS या इस्लामिक स्टेट का क्षेत्रीय सहयोगी है, जिसकी स्थापना ईराक और सीरिया में हुई थी। इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत, या ISKP, इस्लामिक स्टेट आतंकी समूह की अफगान शाखा है। यह अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में सक्रिय है। इस्लामिक आतंकी संगठन के अधिकतर रंगरूट अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मदरसों से निकलते हैं।

आईएसकेपी अफगानिस्तान के सभी जिहादी आतंकवादी समूहों में सबसे अधिक कट्टरपंथी और हिंसक है। बताया जाता है कि अकेले अफगानिस्तान में इसके करीब 2,000-3,000 लड़ाके हैं।

न अब वे ‘दादी जैसी नाक’ देखने आते हैं, न लड़कियाँ बस लड़ने को कूद सकतीं: 2022 के चुनावों का एक रिजल्ट यह भी

“हे लुक मैन देट्स पूअर। हे मैन, टुम इडर कैसे रहता है…”

एक वक्त था जब अंग्रेज भारत में गरीबी देखने आते थे। ऐसा ही एक वर्ग होता है जो वक्त काटने के लिए किटी पार्टी करता है। उनको मैं गलत नहीं मानती। लेकिन जो महिलाएँ दोपहर को किटी के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए कपड़े पहन कर जाती हैं, वही थोड़ा और अपग्रेड होकर चैरिटी के लिए पूअर चिल्ड्रेन या गरीब वर्ग के बीच खिलौने-कपड़े बाँटने जाती हैं। लेकिन अंदर ही अंदर उन्हें अपने नेलपेंट की चिंता ज्यादा सताती रहती है।

इनके फन का शिकार होना भले गरीब तबके की मजबूरी होती है, लेकिन वह समझता सब है। आपका सब एलीट क्लास के हिसाब से चलता रहता है। उसमें से जब आप छाँटकर, ‘चलो कुछ दिन जनता की मौज ले लो’ टाइप में रैली के कपड़े खरीदते हैं, रैली के लिए साड़ियाँ डिजाइन करते हैं, तो जनता भी एक लेवल तक ही बर्दाश्त करती है।
जरा गंगा किनारे के संवाद देखिए;

ये क्या हो रहा है।
मैडम आरती हो रही है।
अच्छा, यहाँ रोज होती है

नेक्स्ट सीन में वही एक कलाकार के घर जाकर बैठ गईं। सामने 10 लोग खड़े थे। किसी ने याद दिलाया तो सामने वाले को बैठने के लिए कहा।

‘पब्लिक से कनेक्ट अच्छा है’, कहकर भले ‘रणनीतिकार’ खुश होते रहें, लेकिन पब्लिक से कनेक्ट सेलिब्रिटी और फैन वाला ही है। और अब तो वो फैन भी नहीं रहे। लोग बेहतर आँकते हैं भाई की तुलना में बहन को। अब बताइए, भला ये भी कोई पैमाना हुआ किसी को चुनने का। लोग अब ‘दादी जैसी नाक’ देखने नहीं आते हैं। यकीन मानिए, छोटे शहरों की लड़कियाँ आपको देखकर कौतूहलवश यही सोचती हैं- ड्राई फ्रूट्स खाती होगी, महँगा वाला फेशियल कराती होगी, कितनी अच्छी स्किन है…

‘लड़की हूँ-लड़ सकती हूँ’, के लिए बैकअप चाहिए होता है। बिना बैकअप लड़कियाँ बस लड़ने के लिए कूद नहीं सकतीं। बस वही बैकअप जहाँ मिलता दिख रहा है, वो उनको चुन रही हैं। जैसे कुछ लोगों के लिए आप एक लाइन में बात खत्म कर देते हैं कि वो दिल का बहुत अच्छा इंसान है। भाई वो शायद एआर रहमान बन सकते थे, लेकिन जीवन भर आपने उन्हें रामानुजम बनने के लिए फोर्स किया। वे रोहित शेट्टी हो सकते थे, लेकिन आप उन्हें नीरज चोपड़ा बनाने पर तुले रहे। जब भाला उठाना ही नहीं जानते तो फेकेंगे कहाँ से? इसलिए लक्ष्य तक ना पहले कभी पहुँच पाए हैं और ना आगे की कोई संभावना है। वो बस अपनी क्यूटनेस और फन फैक्टर पर सर्वाइव करते रहे हैं।

पहले तो वे गरीबी बर्दाश्त करें, फिर आप उनकी गरीबी की नुमाइश कर, सबके सामने रखकर, सबको दिखा-दिखाकर, उनकी बेइज्जती करा-कराकर कमाते रहें। गरीब हैं, मूर्ख नहीं। इसे मोदी-योगी की जीत मानकर उनसे मत कुढ़िए। जिस दिन आप बिना रैली वाला सूट सिलाए, ‘चलो आज लखनऊ की फ्लाइट पकड़ते हैं’ वाला एटीट्यूड त्यागकर, ईश्वर को हमेशा ही हाजिर नाजिर जानकर, स्कूटी का प्रलोभन दिए बिना, एक लड़की का घर से बाहर निकलना और घर से कॉलेज तक का सफर समझ लेंगी तब फर्क समझ में आएगा

खैर अभी भी आपके पास पार्टी अध्यक्ष बनने की असीम संभावनाएँ हैं। सेम टू सेम टीपू भैया पर भी लागू है। जब नेता युवा हो तो लोग उससे शालीनता, संस्कार और सुरक्षा की उम्मीद करते हैं। जिस अकड़ में आप रहते हैं, लोगों के प्रति आपका जो रवैया है, आपकी रैलियों में जो दिखता है, अगर आपके पास अपने पिता की राजनीतिक विरासत की पूँजी ना हो तो यकीन मानिए यदि आप किसी चौराहे पर कड़ी हों, तो लड़कियाँ वहाँ से बच कर ही निकलेंगी। क्योंकि भले ‘लड़के हैं, गलती हो जाती है’, पर बहुएँ समझदारी से समय को भाँप लेती हैं।