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‘AAP सत्ता में आती है तो खालिस्तान के समर्थन में पंजाब विधानसभा में पारित करेंगे प्रस्ताव’: केजरीवाल के खास राघव चड्ढा का वादा, SFJ की चिट्ठी में दावा

पंजाब विधानसभा चुनाव-2022 में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) की ऐतिहासिक जीत के अभी 24 घंटे भी नहीं बीते हैं कि अब प्रतिबंधित चरमपंथी खालिस्तानी आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने राघव चड्ढा को लेकर सनसनीखेज दावा किया है। एक लेटर जारी कर आम आदमी पार्टी ने पंजाब में जीत हासिल करने के लिए खालिस्तान समर्थक वोटों और खालिस्तान समर्थक फंड का इस्तेमाल किया था। एसएफजे के मुताबिक, इन फंड्स में खालिस्तान का समर्थन करने वाले लोगों से की गई विदेशी फंडिंग भी शामिल है।

एसएफजे के द्वारा जारी किया गया पत्र

एसएफजे द्वारा जारी पत्र में एक बड़ा दावा किया गया है। आतंकी संगठन के पत्र में ये आरोप लगाए गए हैं कि 17 फरवरी 2022 को AAP ने उसके नाम से एक फर्जी पत्र जारी कर दावा किया था कि सिफ फॉर जस्टिस पंजाब के विधानसभा चुनाव में AAP का समर्थन कर रहा है। बता दें कि बाद में एक वीडियो जारी कर एसएफजे के प्रमुख गुरुपतवंत सिंह पन्नू ने आप के इस दावे को खारिज किया था।

अपने लेटेस्ट पत्र में खालिस्तानी संगठन ने द्वावा किया है कि 18 फरवरी को जब उसने इस फर्जी लेटर का खंडन किया था, तो उसके बाद आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्ढा के रूप में पहचाने जाने वाले एक व्यक्ति ने एसएफजे को फोन कर उससे फर्जी पत्र की जिम्मेदारी लेने को कहा था। इसके अलावा राघव चड्ढा के तौर पर पहचाने गए व्यक्ति ने इसके लिए न केवल पैसे देने की बात की, बल्कि उसने ये भी वादा किया था कि अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में आती है तो वे खालिस्तान जनमत संग्रह के समर्थन में पंजाब विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करेंगे।

गौरतलब है कि सिख फॉर जस्टिस प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन है, जो कि हमेशा भारत को तोड़ने वाली गतिविधियों में संलिप्त पाया गया है। इस संगठन का कर्ता-धर्ता गुरपतवंत सिंह पन्नू है। इसे भारत में खालिस्तानी अलगाववादी कार्यों के कारण बैन किया गया है। इसका एकमात्र लक्ष्य पंजाब में ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ करवाकर पंजाब को भारत से अलग करने का है।

‘हिंदू राष्ट्र के लिए कर दिया मतदान’: BJP की जीत के बाद दलितों पर भड़के इस्लामी कट्टरपंथी, सोशल मीडिया पर दिखा रहे जहर

विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में सत्ता बरकरार रखी। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 255 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं गोवा में 20, मणिपुर में 32 और उत्तराखंड में 47 सीटों पर जीत दर्ज की। भारतीय जनता पार्टी की इस जीत के बाद इस्लामी कट्टरपंथी सोशल मीडिया पर दलितों को बुरा-भला कह रहे हैं, गालियाँ दे रहे हैं।

ट्विटर आईडी @tamashbeen_ ने दलितों को निशाने पर लेते हुए कहा, “दलितों ने सामाजिक न्याय आधारित जाति के दावे से खुद को हिंदुत्व आधारित दलित राजनीति की ओर स्थानांतरित कर लिया है। यह भाजपा के लिए सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली चुनावी फायदा है।”

ट्विटर आईडी @MogalAadil ने लिखा, “दलितों का सही है, संवैधानिक संरक्षण और आरक्षित शिक्षा के कारण वे मुस्लिमों पर अपने सामाजिक विशेषाधिकार से अनभिज्ञ हैं और ‘हिंदू राष्ट्र’ के लिए मतदान कर रहे हैं।”

इस ट्वीट के बाद शुक्रवार (11 मार्च 2022) को एक और ट्वीट किया। इसमें उसने लिखा, “कुछ अंडर कास्ट एलीट महिला मुझ पर भड़क रही है क्योंकि मैंने कहा था कि दलित और महिलाओं ने बीजेपी को यूपी में जीत के लिए वोट दिया था। क्यों मुस्लिमों को दोष करने का मौका नहीं मिल रहा है इसलिए गुस्सा आ रहा है? सच तो यह है कि कोविड, प्रवासी संकट, बेरोजगारी, बलात्कार के बाद भी बीजेपी को वोट मिला।”

ड्रंक जर्नलिस्ट नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, “सिद्दीकी कप्पन एक दलित लड़की के साथ हुए जघन्य बलात्कार और हत्या की रिपोर्ट करने के लिए हाथरस जा रहा था। आज भी वह पिछले 1.5 साल से जेल में है। जबकि हाथरस ने बीजेपी को चुनकर वोट किया है।”

@shalluchandla ने ट्विटर पर लिखा, सबसे बड़ा मिथक भारत के दलित हैं। वे अंदर से सबसे ज्यादा सांप्रदायिक हैं। यूपी में उन्होंने भाजपा को वोट दिया और पंजाब में उन्होंने AAP को वोट दिया जो RSS का प्रोडक्ट है।

जगदीश पटेल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “वाह, अगर दलित कॉन्ग्रेस को वोट करे तो सब ठीक, लेकिन कोई और पार्टी को करे तो दलित बुरा। इतनी चाटुकारिता आती कहाँ से है भाई, दलित भी इंसान हैं और वह भी अच्छा जीवन जीना चाहता है जो कॉन्ग्रेस 70 साल में उनको एक वोट बैंक ही समझती रही, उनका शोषण किया, अब नहीं।”

दलित को टारगेट करने को लेकर रौशन राज ने ट्वीट करते हुए लिखा, “मेरी टाइमलाइन पर कॉन्ग्रेसी दलितों को भद्दे शब्दों में गाली दे रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने बीजेपी और यूपी को वोट दिया था। सुनो पप्पू के ट्टू, तुम्हारे बाप का गुलाम नहीं है दलित, जहाँ मन करेगा वहाँ वोट डालेगा अपना फायदा देखेगा, 10 जनपथ का नहीं।”

4 राज्य-573 सीट, अकेले BJP को 354: जिन 5 राज्यों में हुए चुनाव, उनमें से चार में बढ़ गए वोट शेयर भी

उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं। पंजाब को छोड़ अन्य चारों राज्यों में बीजेपी सत्ता में लौटी है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403, पंजाब में 117, उत्तराखंड में 70, मणिपुर में 60 और गोवा में 40 सीटें हैं। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल करने में कामयाब रही है। गोवा में वह बहुमत से चूक गई है, लेकिन छोटे दलों और निर्दलीयों के साथ उसकी सरकार बन रही है। चुनावी राज्यों में से चार प्रदेश ऐसे हैं जहाँ पार्टी अपना वोट प्रतिशत बढ़ाने में भी कामयाब रही है।

उत्तर प्रदेश में योगीराज बरकरार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों पर पूरे देश की निगाह थी। भारतीय जनता पार्टी ने 403 में से 255 सीटें जीतकर यूपी की राजनीति में नया इतिहास जोड़ दिया है। योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के 71 सालों के राजनीतिक इतिहास में पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो 5 साल सरकार चलाने के बाद लगातार दूसरी बार सत्ता सँभालेंगे। उत्तर प्रदेश में अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी के साथ भाजपा का गठबंधन है। अपना दल के 17 उम्मीदवारों में से 12 उम्मीदवारों को जीत मिली है। वहीं निषाद पार्टी के 6 उम्मीदवारों को जीत मिली है। प्रदेश में दूसरे नंबर पर रही समाजवादी पार्टी 111 सीटों पर सिमट गई। कॉन्ग्रेस को 2 और मायावती की बसपा को 1 सीट से संतोष करना पड़ा। 2017 के मुकाबले भाजपा की सीटें भले कम रही हो पर वोट प्रतिशत में उछाल दर्ज की गई है। चुनाव आयोग के आँकड़ों के मुताबिक 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट प्रतिशत 39.67% था, जो बढ़कर 41.29 प्रतिशत हो गया है।

साभार : चुनाव आयोग

उत्तराखण्ड में भी वापसी

भाजपा ने उत्तराखण्ड की 70 विधानसभा सीटों में से 47 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी कर ली है। कॉन्ग्रेस के खाते में 19 सीटें गई है। वहीं बसपा को दो सीटों से संतोष करना पड़ा है। भाजपा की इस जबरदस्त जीत के बाद भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट नहीं बचा सके। भारतीय जनता पार्टी का वोट प्रतिशत 44.33% रहा, वहीं कॉन्ग्रेस को 37.91% वोट मिले ।

साभार : चुनाव आयोग

मणिपुर में भाजपा को पूर्ण बहुमत

मणिपुर की 60 विधानसभा सीटों में से 32 सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा सरकार बनाने जा रही है। जेडीयू को 6 सीटों पर सफलता मिली है। वहीं कांग्रेस को पाँच सीटें, एनपीपी को सात, एनपीएफ को पाँच, केपीए को दो और निर्दलीय ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा ने ना सिर्फ सीट, बल्कि अपने वोट प्रतिशत में भी बढ़ोतरी की है। 2017 में भाजपा का वोट प्रतिशत 36.38% था जो बढ़कर 37.83% हो गया है।

साभार : चुनाव आयोग

पंजाब में चला झाड़ू

पंजाब में आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। AAP पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 92 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाने जा रही है। यूपी की तरह पंजाब में भी कॉन्ग्रेस पार्टी की बुरी दशा जारी है। कॉन्ग्रेस को महज 18 सीटों पर जीत मिली है। भाजपा को 2, अकाली दल को 3 और बसपा को 1 सीट मिली है। बता दें कि 2017 के चुनाव की तुलना में भाजपा ने अपने वोट प्रतिशत को बढ़ाया है। चुनाव आयोग के आँकड़ों के मुताबिक 2017 में भाजपा को 5.39% वोट मिले थे जो इस बार बढ़कर 6.60% हो गया है।

साभार : चुनाव आयोग

गोवा में भाजपा का जलवा बरकरार

गोवा की 40 विधानसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने 20 पर जीत दर्ज की है। यह बहुमत के आँकड़े से बस एक कम है। मुख्य विपक्षी कॉन्ग्रेस ने 11 सीटों पर जीत दर्ज की है। 2017 में हुए चुनाव की तुलना में भाजपा ने सीट और वोट प्रतिशत दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की है। 2017 में भाजपा को महज 13 सीटें मिली थी। 2017 में वोट प्रतिशत 32.48% था। इस बार बढ़कर 33.31% हो गया है।

साभार : चुनाव आयोग

गोवा में भाजपा की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। 3 निर्दलीयों ने भाजपा को समर्थन देने का फैसला किया है।

‘AAP ने लिया है खालिस्तानी फण्ड और वोट, अब खालिस्तान बनाने में दो साथ’: SFJ के पन्नू की भगवंत मान को चिट्ठी, पूर्व CM बेअंत सिंह को मारने का भी जिक्र

पंजाब विधानसभा चुनाव परिणाम में स्पष्ट बहुमत पाने वाली आम आदमी पार्टी द्वारा घोषित मुख्यमंत्री उम्मीदार भगवंत मान को प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन SFJ (सिख फॉर जस्टिस) ने पत्र जारी किया है। इस चिट्ठी में पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत में खालिस्तान की फंडिंग का योगदान बताया गया है। साथ ही आप पार्टी को अपनी विचारधारा के लोगों का वोट वहाँ भी मिलना बताया गया है जहाँ पार्टी ने प्रचार भी नहीं किया। पत्र में पंजाब की नई सरकार को खुद से मिल कर चलने की भी नसीहत दी गई है। लेटर पर 10 मार्च (गुरुवार) की तारीख पड़ी हुई है।

SFJ letter to Bhagwant Mann

लेटर गुरपतवंत एस पन्नू के हवाले से जारी किया गया है। इसमें लिखा गया है, “आम आदमी पार्टी को खालिस्तान समर्थकों का वोट और फंडिंग दोनों मिला है। यह फंडिंग अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रलिया, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के सिखों ने दी है। आप पार्टी को मिली इस फंडिंग और समर्थन की वजह वो फर्जी लेटर है जो 10 मार्च से पहले वायरल हुआ था। इस पत्र में SFJ द्वारा आप पार्टी को समर्थन देने की बात कही गई थी। इस पत्र में आप पार्टी को पंजाब को अलग खालिस्तान देश बनाने में आम आदमी पार्टी को उम्मीद के तौर पर बताया गया था। इसी के बाद इन्हें पंजाब के 70% उन ग्रामीण क्षेत्रों से भी वोट मिला है जहाँ इन्होने प्रचार भी नहीं किया।”

पन्नू के पत्र के मुताबिक, “खालिस्तान समर्थकों के ये वोट आप पार्टी द्वारा उसी फर्जी लेटर के धोखे से लिए गए हैं। जब मैंने इस पत्र का खंडन किया तब 18 फरवरी को एक व्यक्ति का फोन आया जो खुद को राघव चड्ढा का प्रवक्ता बता रहा था। उसने सिख फॉर जस्टिस से वायरल फर्जी पत्र को सही बताने और बाद में चुनाव जीतने पर पंजाब विधानसभा में ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ का ऑफर दिया था।

इसी पत्र में आगे भगवंत मान को चेतावनी देते हुए लिखा गया, “खालिस्तान आंदोलन को रोकने की कोशिश में गोलियाँ चलवाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह को साल 1995 में मौत के घाट उतार दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी खालिस्तान आंदोलन को रोकने की कोशिश की तो उनके राजनैतिक कैरियर को ही खत्म कर दिया गया। भगवंत मान अपने पूर्व मुख्यमंत्रियों से कुछ सीखें। खालिस्तान सिखों के लिए एक जरूरी मुद्दा है। आप हमारी इस लड़ाई में पक्षकार मत बनिएगा। साथ ही खालिस्तान के लिए जनमत संग्रह में सहयोग भी करिए।”

SFJ ने अगले दिन जारी की प्रेसनोट में भी दोहराई यही बात

11 मार्च (शुक्रवार) को SFJ ने एक प्रेसनोट जारी करके अपनी उन्हीं बातों को दोहराया जो उन्होंने भगवंत मान से कही थी। इस पत्र की हेडिंग में है, “खालिस्तान वोट और खालिस्तानी फंड ने AAP को पंजाब जीतने में सहायता की।” साथ ही दूसरी लाइन में है, “पंजाब में सुचारू रूप से चलेगा खालिस्तान जनमत संग्रह।” यह पत्र एसएफजे के जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नू के हवाले से जारी हुआ है।

इस पत्र में आगे कहा गया, “आप पार्टी ने विश्वासघात करके फर्जी लेटर वायरल करवाते हुए वोट ले कर पंजाब में जीत दर्ज की है। इस पत्र से आप पार्टी को उनके वोट मिले है जो खालिस्तान की इच्छा रखते हैं। बादल और कैप्टन अमरिंदर खालिस्तान विरोधी थे इसलिए उनको हरा दिया गया है। अब आप पार्टी सत्ता में है। वो पंजाब में खालिस्तान के लिए जनमत संग्रह करे।”

SFJ Press Note

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी पर खालिस्तान का समर्थक होने का आरोप केजरीवाल के पूर्व सहयोगी कुमार विश्वास ने भी लगाया था। कुमार विश्वास ने अरविन्द केजरीवाल पर आज़ाद खालिस्तान देश के पहले प्रधानमंत्री बनने तक की सोच रखने का आरोप लगाया था। साथ ही उन्होंने केजरीवाल को खालिस्तान के खिलाफ बयान देने की चुनौती भी दी थी। इन आरोपों के जवाब में केजरीवाल ने खुद को स्वीट आतंकी कहा था।

अब पुतिन को दे सकेंगे ‘मौत की धमकी’: रूस-यूक्रेन युद्ध में फेसबुक-इंस्टाग्राम ने बदली पॉलिसी, हिंसक पोस्ट की भरमार

यूक्रेन के साथ जारी युद्ध (Russia Ukraine War) के बीच अमेरिकी सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta Inc) प्लेटफॉर्म्स इंक एकतरफा कार्रवाई कर रही है। कंपनी ने कुछ देशों में फेसबुक और इंस्टाग्राम (Facebook And Instagram) यूजर्स को रूस और उसके सैनिकों के खिलाफ हिंसा (Violence) को भड़काने के लिए अपनी हेट स्पीच की पॉलिसी को लचीला कर दिया है।

रॉयटर्स द्वारा गुरुवार (10 फरवरी 2022) को एक्सेस किए गए एक इंटर्नल ईमेल से इसका खुलासा हुआ। इसमें लिखा था कि मेटा इंक ने अस्थाई तौर पर अपनी हेट स्पीच की पॉलिसी में कुछ बदलाव किए हैं, ताकि लोग हिंसा भड़काने वाली पोस्ट कर सकें। इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन औऱ बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की हत्या करने के लिए भी उकसाया गया है।

इस पर मेटा के स्पोक्सपर्सन का कहना है, “यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद हमने अस्थायी तौर पर राजनीतिक अभिव्यक्ति को लचीला किया है, जैसे रूसी हमलावरों की मौत और हिंसक भाषण सामान्यतया हमारे नियमों का उल्लंघन होते हैं। हम अभी भी रूसी नागरिकों के लिए हिंसा का आह्वान नहीं करेंगे।” ईमेल के मुताबिक, मेटा उन सभी पोस्ट को अपने प्लेटफॉर्म पर जगह देगा, जिसमें व्लादिमीर पुतिन और अलेक्जेंडर लुकाशेंको की हत्या की बात कही जाएगी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट कहती है कि मेटा की हिंसा वाली ये पॉलिसी आर्मेनिया, अजरबैजान, एस्टोनिया, जॉर्जिया, हंगरी, लातविया, लिथुआनिया, पोलैंड, रोमानिया, रूस, स्लोवाकिया और यूक्रेन जैसे देशों में मान्य होगी।

मेटा के ईमेल हेट स्पीच प़ॉलिसी में बदलावों को हाईलाइट किया गया है। इसमें लिखा गया है, “हम T1 हेट स्पीच की इजाजत देने के लिए स्पिरिट-ऑफ-द-पॉलिसी छूट जारी कर रहे हैं। अन्यथा इस हेट स्पीच पॉलिसी के तहत हटा दिया जाएगा, जब (A) रूसी सैनिकों और यूद्ध बंदियों को टार्गेट करना। (B) यूक्रेन पर रूसी हमले के मुद्दे पर रूसियों को निशाना बनाना।” यहीं नहीं ईमेल में यह भी कहा गया है कि मेटा सामान्य तौर पर वर्जित माने जाने वाले नाज़ी समर्थक आज़ोव बटालियन की प्रशंसा भी करने देगा।

अपनी हेट स्पीच की नीति में बदलाव के फैसले के बचाव में मेटा का तर्क है कि रूसी सेना का इस्तेमाल रूसी सैनिकों के लिए प्रॉक्सी के तौर पर किया जाता है। मेटा का यह दावा है कि उसकी पॉलिसी में बदलाव से रूसियों पर हमले को दिखाया जा सकेगा।

इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद कहा है, “फेसबुक ने कहा कि यूक्रेन पर आक्रमण के कारण उसने ‘रूसी आक्रमणकारियों को मौत’ जैसे बयानों की इजाजत देने के लिए हेट स्पीच के मामले में अपने नियमों को अस्थायी रूप से आसान कर दिया है, लेकिन नागरिकों के खिलाफ खतरे को नहीं।”

खास बात ये है कि मेटा ने ये फैसला ऐसे वक्त में किया है जब रूसी मीडिया को बैन किए जाने के बाद रूसी सरकार ने देश में फेसबुक को ही बैन कर दिया था। मेटा के प्रवक्ता जो ओसबोर्न कहते हैं, “कुछ समय के लिए यूक्रेन की रक्षा के संदर्भ में या यूक्रेन नेशनल गार्ड के हिस्से के रूप में उनकी भूमिका में आज़ोव रेजिमेंट की प्रशंसा के लिए एक संकुचित अपवाद बनी रही है।”

एक फूल से मणिपुर में खिला कमल: जानिए कैसे बीजेपी ने पाटी मैतेई और नागा के बीच की खाई, कभी इन्हें बाँटकर राज करती थी कॉन्ग्रेस

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा के साथ ही 10 मार्च 2022 को मणिपुर के भी नतीजे आए थे। राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में बीजेपी 32 सीटें हासिल कर बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। पार्टी को करीब 38 फीसदी वोट भी मिले हैं।

मणिपुर उन राज्यों में से है जहाँ कुछ साल पहले तक बीजेपी का कोई खासा असर नहीं था। 2017 विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी भलेसरकार बनाने में सफल रही थी, लेकिन उसे केवल 21 सीटें हासिल हुई थी। NPP और निर्दलीयों के समर्थन से एन बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने सरकार का गठन किया था। बीरेन सिंह भी चुनावों से ठीक पहले कॉन्ग्रेस से बीजेपी में आए थे।

ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि 5 साल में बीजेपी ने ऐसा क्या किया, जिसकी वजह से इस बार चुनावों में एंटी इनकंबेंसी फैक्टर निष्प्रभावी हो गया। आपको शायद हैरत हो पर यह एक फैक्ट है कि बीजेपी सरकार के एक फूल महोत्सव ने न केवल राज्य में पार्टी को मजबूती दी, बल्कि 2022 में बहुमत के साथ सत्ता में उसकी वापसी करवाने में भी बड़ी भूमिका निभाई है।

जानकारों का मानना है कि 2017 के चुनाव में ट्राइबल बिल की वजह से भाजपा को मणिपुर में लाभ मिला था। सत्ता में आने के बाद भौगोलिक तौर पर दो हिस्सों में बँटे मणिपुर में एन बीरेन सरकार ने ‘Go to hills’ की नीति अपनाई। इस कदम ने पार्टी को राज्य में स्थापित होने में मदद की। 

दरअसल, राज्य में घाटी और जंगल दो हिस्से हैं। घाटी में मैतेई रहते हैं और जंगल में नागा। दोनों राज्य की प्रमुख जनजाति हैं। लेकिन दोनों हिस्सों में तनाव अक्सर तनाव बना रहता था। राज्य में अरसे तक सत्ता में रहने वाली कॉन्ग्रेस ने कभी इस तनाव को भरने का काम नहीं किया। इसके उलट उसके शासनकाल में दोनों जनजातियों के बीच दूरी बढ़ती ही गई। खुद को राज्य में स्थापित करने के लिए बीजेपी की सरकार ने इस दूरी को भरने का काम किया।

इसी कड़ी में बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री बनने के दो महीने बाद मई 2017 में मणिपुर के उखरूल जिले में पाँच दिवसीय ‘शिरुई लिली महोत्सव’ का उद्घाटन किया। यह त्योहार मुख्य रूप से विलुप्त होने के कगार पर पहुँच चुके मणिपुर के स्टेट फ्लॉवर शिरुई लिली के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए आयोजित किया गया था। हालाँकि उखरुल की तंगखुल नागा पहाड़ियों में इसका उद्देश्य कुछ और भी था। यह कार्यक्रम इम्फाल घाटी और मणिपुर के आदिवासी पहाड़ी क्षेत्रों के बीच संबंध को सुधारने के उद्देश्य से भी किया गया था। इसका असर भी नजर आया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया है कि इस महोत्सव की वजह से बड़ी संख्या में उखरूल की घाटी मैतेई लोग भी आए थे। वहीं उखरूल के एक पत्रकार के हवाले से बताया गया है कि उसने अपने 20 साल के करियर में इससे पहले ऐसा कुछ नहीं देखा था।

दोनों जनजातियों के बीच इस दौरान सामंजस्य बनाने में खुद मुख्यमंत्री बिरेन सिंह लगे थे। उद्घाटन के दौरान उन्होंने तंगखुल नागा टोपी पहन रखी थी और सामुदायिक बंधनों और समान विकास के महत्व की बात की। इसके अगले साल बीरेन सरकार ने पहाड़ी जिलों में कैबिनेट बैठकें आयोजित करने का फैसला किया। मई 2018 में,उनकी पहाड़ी-घाटी सुलह परियोजना को ‘गो टू हिल्स’ नाम दिया गया था, जिसका मकसद नागरिकों से संपर्क बनाने के लिए उनके दरवाजे तक पहुँचना था। रिपोर्ट के अनुसार इन कदमों की वजह से आज राज्य में दोनों जनजाति के बीच की दूरी काफी हद तक कम हो चुकी है। रिपोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ताओं के हवाले से कहा गया है, “कॉन्ग्रेस के मंत्री मुश्किल से कभी पहाड़ियों में आते थे। लेकिन 2017 से हर दूसरे महीने यहाँ कोई न कोई कैबिनेट या केंद्रीय मंत्री आते हैं। लोग इसे पसंद करते हैं।”

क्या है शिरुई लिली

उखरूल, मणिपुर के सबसे ऊँचाई पर बेस जिलों के रूप में प्रसिद्ध है। यह मणिपुर की राजधानी इंफाल से लगभग 83 किलोमीटर दूर पूर्व में स्थित है। शिरुई लिली फूल सिर्फ शिरुई चोटी पर ही उगता, जो उखरूल जिले की सबसे ऊँची चोटियों में से एक है। समुद्र तल से लगभग 5000 फीट की ऊँचाई पर उगने वाला यह फूल दुनिया भर में सिर्फ मणिपुर में ही पाया जाता है। स्थानीय लोग इस फूल को काशॉन्ग टिमरावन के रूप में जानते हैं। स्थानीय लोग इसे दयालु शक्ति मानते हैं, जो शिरुई की चोटी पर रहती है।

चार राज्यों में महाविजय के बाद PM मोदी का मिशन गुजरात: अहमदाबाद एयरपोर्ट से 9 किमी लंबा रोड शो, 4 लाख लोगों का उमड़ा हुजूम, सरपंचों की रैली को करेंगे संबोधित

यूपी समेत चार राज्यों में बड़ी जीत हासिल करने के बाद भाजपा अपने अगले मिशन गुजरात के लिए जुट गई है। PM मोदी 11 और 12 मार्च, दो दिन के दौरे पर शुक्रवार को गुजरात पहुँच गए हैं। जहाँ आज 11 मार्च, 2022 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से गांधीनगर स्थित बीजेपी दफ्तर कमलम (गांधीनगर स्थित बीजेपी मुख्यालय) तक उनका बड़ा रोड शो हो रहा है। इस रोड शो में करीब 4 लाख लोग शामिल होकर उनका स्वागत कर रहे हैं।

पीएम मोदी बीजेपी दफ्तर में सांसदों, विधायकों, पदाधिकारियों और राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ बातचीत करेंगे। इस साल के आखिरी में गुजरात विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसकी जमकर तैयारियाँ अभी से शुरू हो चुकी हैं। बीजेपी ने अभी से ही यहाँ पर चुनाव प्रचार का शंखनाद कर दिया है।

बता दें कि एयरपोर्ट से BJP ऑफिस ‘कमलम’ तक की दूरी करीब 9 किमी है। रोड शो में भाजपा कार्यकर्ता पहली बार केसरिया टोपी पहने नजर आ रहे हैं। खुद पीएम मोदी भी यही टोपी पहने हुए हैं, जिसमें कमल और गुजराती में BJP लिखा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कमलम में पीएम मोदी बीजेपी सांसदों, विधायकों और राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों से बात करेंगे। इसके बाद वह जीएमडीसी मैदान में महा पंचायत सम्मेलन-मारु ग्राम, मारु गुजरात को संबोधित करेंगे। इसमें तालुक और जिला पंचायत के सदस्यों व नगर निगम पार्षदों समेत 1.38 लाख से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

सरपंच सम्मेलन में डेढ़ लाख लोग होंगे शामिल

आज शाम को प्रधानमंत्री मोदी सरपंच सम्मेलन में मौजूद रहेंगे, जिसमें करीब 1.50 लाख लोग शामिल होंगे। कोरोना काल के बाद यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री मोदी गुजरात में किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। वहीं 4 राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोआ की प्रचंड जीत के बाद गुजरात में बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोश भी चरम पर दिखाई दे रहा है।

वहीं शनिवार 12 मार्च की सुबह पीएम मोदी राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होंगे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे। साथ ही पीएम मोदी शनिवार शाम को ही खेल महाकुंभ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इसमें 47 लाख से अधिक लोगों ने रजिस्टर कराया है।

खेल महाकुंभ के लिए 47 लाख से अधिक लोगों ने कराया पंजीकरण

शनिवार 12 मार्च शाम को प्रधानमंत्री मोदी नवरंगपुरा के सरदार पटेल स्टेडियम में खेल महाकुंभ का प्रारंभ करेंगे। सरदार पटेल स्टेडियम में 1100 कलाकारों के साथ भव्य लाइटिंग का कार्यक्रम भी होगा। इसमें एथलीट के अलावा अन्य खेलों से जुड़े लोग भी मौजूद रहेंगे। सरदार स्टेडियम के अलावा खेल महाकुंभ राज्य में 500 से ज्यादा जगहों पर होगा। इसके लिए 47 लाख से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

‘कपिल शर्मा शो’ में प्रमोशन के लिए विवेक अग्निहोत्री से माँगे थे ₹25 लाख? कश्मीर फाइल्स पर बोला KRK- कोई मुग़ल-ए-आज़म नहीं बनाई है…

​’द कपिल शर्मा शो’ में विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ का प्रमोशन नहीं होने से जुड़ा विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अब अभिनेता से फिल्म क्रिटिक बने कमाल राशिद खान (KRK) भी इसमें कूद पड़े है। केआरके ने एक वीडियो में कपिल शर्मा का बचाव करते हुए कहा है कि शो के निर्माताओं और सोनी टीवी ने प्रमोशन के लिए 25 लाख रुपए माँगे होंगे जो अग्निहोत्री ने देने से इनकार कर दिया होगा।

7 मिनट 42 सेकेंड का यह वीडियो KRK ने 9 मार्च 2022 को जारी किया है। वीडियो में उसने कहा है, “द कपिल शर्मा शो, कपिल का नहीं है। कपिल उस शो में सिर्फ एंकर हैं जो हर एपिसोड के पैसे लेकर एक्टिंग के बाद अपने घर चला जाता है। इस शो में कौन आए और क्या हो, ये कपिल के हाथ में नहीं है। इस पर किसी भी फिल्म का प्रमोशन करने के लिए सोनी वाले 25 लाख रुपए लेते हैं। हुआ ये होगा कि विवेक अग्निहोत्री की फिल्म का प्रमोशन करने वालों ने कपिल शर्मा को अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए एप्रोच किया होगा। तब सोनी वालों ने रुपए माँगे होंगे। विवेक ने पैसे देने में असमर्थता जताई होगी। इसी बात पर विवेक ने मीडिया में न्यूज़ दे दी कि कपिल शर्मा ने उन्हें अपने शो पर बुलाने से मना कर दिया। कोई भी फालतू नहीं बैठा। सभी पैसे लेंगे। आपको जिस TV पर जिस भी शो में प्रमोशन करवाना है, आप मुझे बताइए और उन्हें पैसे दीजिए। वो गारंटी के साथ आपकी फिल्म का प्रमोशन करेंगे।”

KRK ने आगे कहा है, “आपने शोले या मुगल-ए-आज़म नहीं बनाई है। मैं ऐसी फ़िल्में नहीं देखता और न ही इसे भी देखूँगा। अगर आपने बहुत कमाल की फिल्म भी बनाई है तो भी इसका ये मतलब नहीं कि कपिल शर्मा आपकी फिल्म का फ्री में प्रमोशन करे। आपके निर्माता अभिषेक अग्रवाल को फिल्म बनाने का शौक था, इसलिए उसने बना कर पैसे लगाए। अब पैसे नहीं आ रहे तो इसमें किसी की भी गलती नहीं है। ये तो होना ही था। बाहर से प्रोड्यूसरों को कपड़े उतारने के लिए ही लाया जाता है।”

गौरतलब है कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म की कहानी 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन और उनकी निर्मम हत्याओं के बारे में है। एक ट्विटर यूजर को जवाब देते हुए अग्निहोत्री ने कहा था, “मैं भी उनका (कपिल शर्मा) फैन हूँ। लेकिन यह फैक्ट है कि उन्होंने हमें उनके शो पर बुलाने से मना कर दिया क्योंकि इसमें कोई बड़ा स्टार नहीं है। बॉलीवुड में नॉन स्टार निर्देशक, लेखक और अच्छे कलाकारों को कोई नहीं पूछता है।” इसके बाद में कपिल शर्मा ने सफाई देते हुए कहा था कि एकतरफा आरोपों पर विश्वास न किया जाए।

राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह नहीं, इन्होंने बनाया है सबसे बड़ी अंतर से विधानसभा चुनाव में जीत का रिकॉर्ड: UP में जो भी 1 लाख से अधिक के मार्जिन से जीते, सारे BJP के

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अंतिम परिणाम आ चुके हैं। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) फिर से पूर्ण बहुमत हासिल करने में कामयाब रही है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने 273 सीटों पर सफलता पाई है। इसमें 255 सीटें अकेले भाजपा की है। समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को कुल 125 सीटों पर जीत मिली है। कॉन्ग्रेस को 2 और बहुजन समाज पार्टी को 1 सीट मिली है।

साभार: चुनाव आयोग

खास बात ये है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में इस बार 1 लाख से अधिक मतों के अंतराल से जिनकी भी जीत हुई है, सभी बीजेपी से हैं। इनमें गोरखपुर शहर से खुद मुख्यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ, गाजियाबाद से अतुल गर्ग, ललितपुर से रामरतन कुशवाहा, म‍थुरा से श्रीकान्‍त शर्मा और हाथरस से अन्जुला सिंह माहौर का नाम भी शामिल है। इनके अलावा बीजेपी के कुछ उम्मीदवारों ने जीत की मार्जिन का नया रिकॉर्ड ही बना दिया है।

सबसे ज्यादा मार्जिन से जीतने वाले टॉप 5 उम्मीदवार

  1. सुनील शर्मा (भाजपा, साहिबाबाद): गाजियाबाद जिले की साहिबाबाद विधानसभा सीट से सुनील शर्मा ने सबसे बड़े जीत दर्ज की है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को 2,15,123 वोटों से हराया है। सुनील शर्मा को कुल 322882 (67.03%) वोट मिले हैं, जबकि सपा के अमरपाल शर्मा 107759 (22.43%) वोट हासिल कर पाए। सुनील शर्मा की ये जीत न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश में विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी मार्जिन से जीत का नया रिकॉर्ड है।

2. पंकज सिंह (भाजपा, नोएडा): वोटों के अंतराल से दूसरी सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड भाजपा के पंकज सिंह ने नोएडा से बनाया है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के सुनील चौधरी को 181369 वोटों से हराया। पंकज सिंह इसी सीट से 2017 में भी भाजपा के विधायक बने थे। वो केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बेटे हैं। पंकज सिंह को कुल 244319 (70.16%) वोट मिले हैं। वहीं सुनील चौधरी को 62722 (18.04%) वोट ही मिल पाए। सोशल मीडिया पर काफी चर्चित कॉन्ग्रेस की पंखुड़ी पाठक यहाँ 13485 (3.88%) वोटों के साथ चौथे नंबर पर रहीं।

3. तेजपाल नागर (भाजपा, दादरी): प्रदेश में तीसरी सबसे बड़ी जीत हासिल करने वाले प्रत्याशी तेजपाल सिंह नागर हैं जो भाजपा से दादरी विधानसभा से विजयी हुए हैं। तेजपाल नागर ने समाजवादी पार्टी के राजकुमार भाटी को 138218 वोटों से हराया है। तेजपाल नागर को कुल 218068 (61.64%) वोट मिले। राजकुमार भाटी 79850 (22.57%) वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

4. अमित अग्रवाल (भाजपा, मेरठ कैंट): रिकॉर्ड मतों से जीतने वाली लिस्ट में चौथे नंबर पर मेरठ कैंट से भाजपा प्रत्याशी अमित अग्रवाल रहे। उन्होंने RLD की मनीषा अहलावत को 118072 वोटों से हराया। अमित अग्रवाल को 162032 (66.27%) वोट मिले। अहलवात 43960 (17.98%) वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहीं।

5. मनोहर लाल (भाजपा, मेहरौनी): रिकॉर्ड मतों से जीत के अंतराल में पाँचवे नंबर पर मेहरौनी विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी मनोहर लाल हैं। उन्होंने बसपा की किरन रमेश खटीक को 110451 वोटों से हराया। मनोहर लाल को कुल 184778 (54.86%) वोट मिले। वहीं किरन रमेश खटीक को 74327 (22.07%) वोट मिल पाए।

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करेगी BJP: खुद चुनाव हारे, पर नतीजों के बाद CM धामी ने बता दिया रास्ता

उत्तराखंड की सत्ता में वापसी कर बीजेपी ने नया इतिहास रचा है। हालाँकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट हार गए हैं। इसके बावजूद राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने को लेकर उन्होंने बीजेपी की प्रतिबद्धता दोहराई है। विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी ने सत्ता में लौटने पर इसे लागू करने का वादा किया था।

नतीजों के बाद देहरादून में धामी ने जनता का आभार जताते हुए यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा, “सरकार बनाने के बाद हम एक उच्च स्तरीय समिति बनाएँगे। समिति एक ड्राफ्ट तैयार करेगी और हम इसे उत्तराखंड में लागू करेंगे, जैसा कि हमने राज्य के लोगों से वादा किया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि शपथ ग्रहण के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कमेटी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस कमेटी में न्यायविदों, सेवानिवृत्त लोगों और प्रबुद्धजन को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के बाद किसी भी धर्म व जाति के लोगों के साथ अन्याय नहीं होगा। सभी को समान नागरिकता का अधिकार मिलेगा।

बता दें कि विधानसभा चुनाव प्रचार के आखिरी दिन रुद्रपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता से इसका वादा किया था। उन्होंने कहा था कि राज्य में भाजपा के दोबारा सत्ता में आने के बाद सबसे पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जाएगा। इससे सभी धर्मों के नागरिकों के लिए समान कानून लागू हो जाएगा।

फोटो साभार: ECI

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत हुई। भाजपा ने 47 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं कॉन्ग्रेस के खाते में महज 19 सीटें आई। बसपा को 2 सीटें मिली है। उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि कोई पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार बनाएगी। हालाँकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खटीमा विधानसभा सीट से करारी हार का सामना करना पड़ा है। उनको कॉन्ग्रेस के भुवन कापड़ी ने 6,000 से ज्यादा वोटों से हराया।