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खुद ₹10 करोड़ की डाइनिंग टेबल, कर्मचारियों को कॉफी पीने पर धमकी: अशनीर और उनकी पत्नी को लेकर Bharat pe के कर्मचारियों ने खोले राज

शार्क टैंक के गुस्सैल जज व यूपीआई पेमेंट ऐप Bharat pe के सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर पिछले कुछ समय से विवादों में थे और कुछ दिन पहले खबर आई कि उन्होंने कंपनी से इस्तीफा दे दिया है। ट्विटर पर वायरल ऑडियो के अलावा कंपनी ने उनके ऊपर फंड चोरी का इल्जाम भी मढ़ा था जिसे ग्रोवर ने निजी दुश्मनी और नीच सोच का नतीजा बताया था। उनकी रईसी को लेकर जो मीडिया में खबरें आईं उनपर भी ग्रोवर ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि उनके बारे में लैविश बात सिर्फ उनके सपने और उन्हें हर मुश्किल के बावजूद पूरा करने की क्षमता है। 

तमाम इल्जामों के कारण कंपनी छोड़ चुके अशनीर ग्रोवर की मुश्किलें अब भी कम नहीं हुई हैं। अब कंपनी के वर्तमान और पूर्व कर्मचारी सामने आकर उनके बारे में बातें कर रहे हैं और नए खुलासे हो रहे हैं। एक महिला एग्जिक्यूटिव ने जानकारी दी कि साल 2020 में कोरोना टाइम उन्होंने कंपनी को ज्वाइन किया और ये देखकर हैरान हो गई कि वहाँ मास्क पहनना कोई अनिवार्य नहीं है। सिर्फ कुछ लोग ही वहाँ मास्क पहन रहे थे। उन्होंने आवाज उठाई तो ग्रोवर ने उनके खिलाफ़ एक्शन लिया और जॉब पाने के कुछ दिन बाद उन्हें उन्हें उस जॉब से ग्रोवर ने ये कहकर निकलवा दिया कि वो कोविड को मसला बना रही हैं।

कर्मचारियों की शिकायत केवल ग्रोवर से ही नहीं है बल्कि कर्मचारी बताते हैं कि उनकी पत्नी माधुरी ग्रोवर भी कुछ कम नहीं थी।  कंपनी का हिस्सा रहे 10 से ज्यादा कर्मचारियों ने बताया कि माधुरी स्टाफ को ज्यादा कॉफी पीने पर और प्रिंट आउट लेने पर सैलरी काटने के लिए धमकाती थीं। इसके अलावा छोटी-छोटी बातों पर सवाल करके कर्मचारियों को तंग करना भी उनके स्वभाव में था। 

इन दोनों पति-पत्नी के बारे में कुछ हैरान करने वाले बयान भी मीडिया में सामने आए हैं, जो कि भारत पे कंपनी के कर्मचारियों के हवाले से हैं। कर्मचारी बताते हैं कि फंड के दुरुपयोग के इल्जाम में कंपनी से निकाले गए अशनीर ग्रोवर ने कंपनी में रहते हुए पोर्श कार की खरीद की थी और उन्होंने खुद अपने स्टाफ को इस बारे में बताया था कि उन्होंने 1 लाख 30 हजार डॉलर यानी कि 9 करोड़ 93 लाख रुपए की सिर्फ डाइनिंग टेबल खरीदी है। इतना ही नहीं उन्होंने एक पेंटहाउस को किराए पर लिया था और साथ ही अपनी प्रॉपर्टी का आधुनिक रेनोवेशन भी कराया था।

उल्लेखनीय है कि भारत पे ऐप के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर पर कई इल्जाम लंबे समय से लग रहे थे। ऐसे में उस बीच उनका बयान आया था कि अगर कंपनी में उनकी हिस्सेदारी के लिए 4,000 करोड़ रुपए मिल जाते हैं तो वह कंपनी छोड़ने के लिए तैयार हैं। हालाँकि, विवाद बहुत बढ़ने के बाद उन्हें कंपनी से कुछ दिन पहले इस्तीफा देना ही पड़ा। उनसे पहले उनकी पत्नी माधुरी को भी फंड से छेड़छाड़ करने के इल्जाम में कंपनी ने निकाला था। बहुचर्चित शार्क टैंक के जजों में एक ग्रोवर पर धोखाधड़ी, दुर्व्यवहार और कॉरपोरेट गवर्नेंस के आरोप हैं।

जुमे की नमाज के लिए बंद हो जाती है बिहार विधानसभा… इस बार नहीं हुई तो हो गया हंगामा… ओवैसी के MLA के साथ खड़ी हुई कॉन्ग्रेस-कम्युनिस्ट-RJD

बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) में शुक्रवार (11 मार्च) को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नमाज़ के लिए सदन बंद न करने पर हंगामा हो गया। यह हंगामा AIMIM के विधायक अख्तरुल ईमान और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा माले) के महबूब आलम ने शुरू किया। दोनों विधायक जुमे के दिन विधानसभा दोपहर 12.30 तक ही चलाने की माँग पर अड़े थे। उनकी इस माँग का कॉन्ग्रेस और RJD ने भी समर्थन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को बजट सत्र का 10वाँ दिन था। दोपहर के समय प्रश्नकाल चल रहा था। इस दौरान स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने जुमे की नमाज के लिए सदन की कार्रवाई नहीं रोकी। इस बात पर नाराज होकर बलरामपुर विधानसभा से कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक महबूब आलम और अमौर से AIMIM के विधायक अखरुल ईमान ने आपत्ति जताई। दोनों ने जुमे (शुक्रवार) को सदन 12.30 पर बंद कर देना पुरानी परंपरा बताई।

इन दोनों की माँग को कॉन्ग्रेस विधायक विजय शंकर दुबे और राजद विधायक ललित यादव ने भी समर्थन दिया। उन्होंने भी 12.30 बजे सदन बंद करने को कहा। इस हंगामे के बीच स्पीकर ने समय कम होने के चलते सदन की कार्रवाई रोकने में असमर्थता जताई। उन्होंने ये भी कहा कि जिसे नमाज़ पढ़ना हो वो सदन से बाहर जाकर पढ़ सकता है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, “परम्परा और नियम समय के अनुसार बदलती है। जिन विधायकों को जुमे की नमाज़ पढ़नी है, उनको पहले ही बोलने का मौका दे दिया गया है।” हालाँकि, उनके तमाम प्रयासों के बाद भी विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा।

इस दौरान भाजपा विधायक प्रदीप कुमार गौशाला की जमीन पर माफियाओं के कब्ज़े का मुद्दा उठाया। लेकिन, कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक महबूब आलम ने राजनीति और सदन की कार्रवाई एक साथ न चलने की बात कहते हुए हंगामा जारी रखा। उनके साथ इस हंगामे में अख्तरुल ईमान भी शामिल रहे। आखिरकार स्पीकर ने सदन की कार्रवाई सोमवार (14 मार्च) तक के लिए स्थगित कर दी। बाद में बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के कार्यक्रम में भी बदलाव करते हुए 21 मार्च को होने वाली कार्यवाही 26 मार्च को आयोजित करने का फैसला कार्यमंत्रणा समिति की बैठक के बाद लिया गया।

माथे पर तिलक, मुँह में भगवान… हसनैन अंसारी ऐसे बना अमन महतो और किया दलित लड़की से रेप, वीडियो वायरल कर धमकी भी

झारखंड के रामगढ़ जिले के कुंदरुकला गाँव में रहता है हसनैन अंसारी। इसने एक दलित लड़की से रेप किया… वो भी अमन महतो बन कर। आरोप यह भी है कि हसनैन अंसारी ने पीड़िता की अश्लील वीडियो बना कर वायरल भी कर दी है।

हसनैन अंसारी खुद की पहचान अमन महतो के तौर पर कराने के लिए तिलक लगाता था और कलावा भी पहनता था। पुलिस में मामले की शिकायत 8 मार्च (मंगलवार) को की गई है। पुलिस ने इस मामले में रेप का केस दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरू कर दी है।

पीड़िता के मुताबिक, “वो टीका भी लगाता था और ब्रेसलेट भी पहनता था। मुझे लगा कि दोस्ती करने में कोई हर्ज नहीं है। भगवान का नाम ले कर उन्हीं की कसम खाता था। मुझे लगा कि वो हिन्दू है। वो होटल में मुझे नाश्ता कराने ले जाता था। वहाँ वो मुझे चुपके से नशा दे देता था। फिर वो बगल में आराम कराने के लिए ले गया। वहाँ मुझे पता ही नहीं कि मेरे साथ क्या-क्या हुआ। बाद में उसने वीडियो बना लिया और मुझे ब्लैकमेल करने लगा। मुझे उसके मुस्लिम होने का पता चला तो मैंने उससे बातचीत बंद कर दी।”

पीड़िता ने आगे कहा, “मैंने उससे (अंसारी) धर्म छिपाने की शिकायत की। तब उसने जवाब दिया कि अगर मैं बता देता तो तुम मुझसे दोस्ती नहीं करती। जब तक मुझे सच समझ में आया तब तक वो मेरा वीडियो बना चुका था। हम डर गए और किसी से कुछ नहीं बताए। मेरे फोन बंद करने के बाद उसने मेरा वीडियो वायरल कर दिया। वो वीडियो वायरल होते हुए मेरे भाइयों तक पहुँच गया।”

पीड़िता के पिता रांची में मजदूरी का काम करते हैं। पत्नी (पीड़िता की माँ) बीमार है, जिनका इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी को उसने (हसनैन अंसारी) हिन्दू बन कर फँसाया। जब मेरी बेटी को पता चल गया तब वो वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। और बाद में उसने ऐसा कर दिया।” पीड़िता के भाई का कहना है, “हम लोग अपने गाँव में मुँह दिखाने लायक भी नहीं रहे। हमें सिर्फ न्याय चाहिए।”

रामगढ़ के हिन्दू कार्यकर्ता और हिन्दू समाज पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपक सिसोदिया के मुताबिक, “ये घटना लव जिहाद है। मैंने खुद रामगढ़ के थाना प्रभारी से बात की है। उन्होंने जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार करने का भरोसा दिया है। अगर 24 घंटे में आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया तो हम अपने स्तर से प्रयास करेंगे।”

वहीं इस मामले में पुलिस ने कहा, “लड़की ने हसनैन अंसारी पर शादी का झाँसा देकर रेप करने की शिकायत दर्ज करवाई है। आवेदन में मुस्लिम आदि की जानकारी नहीं होने जैसी कोई बात दर्ज नहीं है। वायरल किए गए वीडियो की जाँच की जाएगी। अगर आरोप सही पाए गए तो इस केस में IT एक्ट की धाराओं को भी जोड़ा जाएगा। अभी इस केस में रेप (376) में FIR दर्ज की गई है।”

‘… तो हिंसा से अपनी माँगें मनवाएँगे किसान’: बोले राज्यपाल सत्यपाल मलिक – ‘मोदी से पंगा ले सकता हूँ, फिर होगा किसान आंदोलन’

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने किसानों को हिंसा के लिए भड़काते हुए केंद्र की मोदी सरकार को धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर किसानों की माँगें नहीं मानी गईं तो वो उन्हें मनवाने के लिए हिंसा का रास्ता अपना सकते हैं। उन्होंने कहा, “दिल्ली को मेरी सलाह है कि उनके साथ न भिड़े, वे खतरनाक लोग हैं। किसानों का मुद्दा उठाने के कारण मुझे अपना राज्यपाल का पद खोने का कोई डर नहीं है। किसान जो चाहते हैं, उसे हासिल कर के रहेंगे।”

सत्यपाल मलिक ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अगर किसानों को लड़ कर उन्हें जो चाहिए वो नहीं मिला, तो फिर वो हिंसा के माध्यम से ले लेंगे। बता दें कि दिल्ली की सीमाओं को घेर तक एक साल तक चले उपद्रव के बाद केंद्र सरकार ने कृषि सुधर की दिशा में आए तीनों कानूनों को वापस ले लिया था। सत्यपाल मलिक ने कहा कि किसानों का मुँह बंद नहीं किया जा सकता, क्योंकि उन्हें पता है कि उन्हें अपनी माँगें कैसे मनवानी है।

साथ ही उन्होंने माँगें न मानने पर दोबारा ‘किसान आंदोलन’ के शुरू होने की धमकी भी दी। साथ ही उन्होंने कहा कि जब भी वो किसानों के मुद्दे उठाते हैं तो उन्हें आशंका रहती है कि कभी भी दिल्ली से फोन आ सकता है। उनका आशय राज्यपाल पद से उन्हें हटाए जाने की संभावना को लेकर था। सत्यपाल मलिक ने खुद के दिल्ली में डेढ़ कमरे के मकान में रहने का दावा करते हुए कहा कि वो किसानों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पंगा ले सकते हैं।

साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से उनकी कोई दुश्मनी नहीं है, लेकिन किसानों के लिए वो अपना पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपने इस दावे को भी दोहराया कि जब वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे तो मात्र 5 मिनट में ही उनसे लड़ाई हो गई थी। जोधपुर में मारवाड़ जाट महासभा के एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुँचे मेघालय के राज्यपाल ने कहा कि जाट और सिख कुछ नहीं भूलते, आपको उन्हें कुछ देकर भेजना चाहिए था।

उन्होंने परोक्ष रूप से इंदिरा गाँधी और जनरल वैद्य की हत्याओं की याद दिलाई। इससे पहले भी वो दोनों का नाम लेकर ऐसा कह चुके हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था, “इतने किसानों की मौत हो गई, इसके बाद भी कोई शोक संदेश नहीं आया है। हम माँग लेते हैं तो भिखमंगा समझ लेते हैं। यह सरकार हमारी नहीं है। मोदी गुजरात में थे, तब MSP (मैक्सिमम सपोर्ट प्राइस) पर चिट्‌ठी लिखी थी। अब दिल्ली ने उनको खराब कर दिया। दिल्ली जगह ही ऐसी है। दिल्ली जाने के बाद वह बदल गए।”

योगी सरकार की वापसी करते ही ऐक्शन में आई UP पुलिस: 25000 के इनामी डकैत मोनू का एनकाउंटर, चोरी की बाइक व पिस्टल बरामद

सत्ता में वापसी करते ही अपने वादे के अनुसार उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी सरकार (Yogi Government) ने कानून-व्यवस्था को लेकर किसी तरह की नरमी नहीं बरतने का संकेत दे दिया है। प्रदेश में योगी आदित्यानाथ की दूसरी बार जीत के साथ ही पुलिस ऐक्शन मोड में दिखने लगी है। लखनऊ पुलिस ने शुक्रवार (11 मार्च 2022) को एनकाउंटर में 25 हजार के इनामी बदमाश मोनू पंडित को गिरफ्तार कर लिया है। एनकाउंटरम में गोली लगने के बाद मोनू घायल हो गया।

दरअसल, लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने गुडंबा इलाके के भाखामऊ गाँव के पास वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बिना नंबर की बाइक से जा रहे एक शख्स को पुलिस ने रोकने की कोशिश तो वह भागने लगा। इसके बाद पुलिस ने उसका पीछा करना शुरू किया तो वह फायरिंग करने लगा। पुलिस ने जवाब में गोली चलाई, जो उसके बाएँ पैर में जा लगी और वह बाइक से गिर गया। आरोपित के पास से पुलिस ने एक तमंचा और कारतूस बरामद किया है। यह पाया गया कि जिस बाइक को वह चला रहा था, वह भी लूट की है।

ADCP प्राची सिंह के अनुसार, इनामी डकैत मोनू पंडित औरैया के अजीतमल स्थित अनंतराम सोनाली का रहने वाला है और उन्नाव जिले के काशीगंज में भी रहता था। पिछले साल अप्रैल में उसने चार साथियों के साथ जानकीपुरम स्थित अंजनी ज्वैलर्स में लूट की घटना को अंजाम दिया था। उन्होंने आगे बताया कि मोनू अपने तीन साथियों के साथ अंगूठी लेने के बहाने दुकान में घुसा और तमंचा तानकर वारदात की। इस दौरान विरोध करने वाले पड़ोस के किराना दुकानदार पीयूष को गोली मार दी थी और सोने-चांदी के जेवर लेकर भाग निकला था।

पुलिस ने तहरीर पर हत्या के प्रयास व लूट का मुकदमा दर्ज किया था। प्रभारी निरीक्षक गुडंबा सतीश चंद्र साहू ने बताया कि मोनू पंडित पर उत्तरी जोन के DCP ने 25,000 रुपए का इनाम रखा था। उसके खिलाफ इस केस के अलावा उन्नाव, सीतापुर और औरैया जिले में लूट एवं हत्या के प्रयास के करीब 10 मुकदमे दर्ज हैं।

‘जब कोई जलता है तो मवाद निकलता है’ – The Kashmir Files यही पूछता है – सच को स्वीकार करोगे या पर्दा डालने की राजनीति?

कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) – दमदार, उद्देश्यपूर्ण और एक सशक्त फिल्म।

आज ही सिनेमा के परदे पर रिलीज़ हुई इस फिल्म को देखने हम और सीमा वसंत कुंज के पीवीआर पहुँच गए। बुक माई शो पर रात आठ बजे की टिकट आज ही बुक कराई। उससे पहले के शो खाली नहीं थे। हमने सोचा था कि आठ बजे का शो है तो फिल्म साढ़े दस बजे तक तो ख़त्म हो ही जाएगी। उसके बाद वहीं किसी रेस्टोरेन्ट में पेट-पूजा करके घर लौटेंगे। इसलिए घर पर खाना नहीं बनवाया।

लेकिन फिल्म 11 बजे के बाद ख़त्म हुई। सारे रेस्टोरेन्ट बंद हो चुके थे। वो तो भला हो प्रोमिनाड और एम्बिएंस मॉल के बीच बेल्जियमफ्राई नाम के फ़ूड ट्रक के मैनेजर नीरज का कि उन्होंने शायद तरस खाकर हमें दो बर्गर मुहैया करवा दिए। नहीं तो आज पेट पर चुन्नी बाँध कर सोने की नौबत आ सकती थी।

जो फिल्म दर्शकों के दिल को छू जाए फिर उसके लिए किसी और तारीफ की ज़रुरत नहीं होती। इसने दिलों को छुआ, ये हम कैसे कह सकते हैं? हुआ यूँ कि पीवीआर के ऑडी-7 की जिस दीर्घा में हम थे, उसके पीछे कई लड़के बैठे हुए थे। कद-काठी से कॉलेज जाने की उम्र के लगते थे। बीच में आपस में बतिया भी रहे थे। वैसे भी सिनेमा हॉल में अधिकतर दर्शक युवा ही थे। उनमें से एक-दो कह भी रहे थे कि फिल्म थोड़ी लम्बी है। फिल्म नादिमार्ग नरसंहार के अत्यंत मार्मिक दृश्य पर ख़त्म होती है। इसमें एक-एक करके 24 कश्मीरी पंडितों को लाइन में खड़ा करके आतंकवादी सरगना सीधे माथे में गोली मारता है। मरने वाला अंतिम कश्मीरी पंडित कम उम्र का एक बच्चा है।

नरसंहार की इस दिल दहलाने वाली सत्य घटना में असल में 23 मार्च 2003 को लश्करे तैयबा के आतंकियों ने 11 महिलाओं और दो बच्चों समेत 24 पंडितों को मार डाला था। फिल्म के हीरो कृष्णा पंडित (दर्शन कुमार) का भाई शिवा उनमें से ही एक बच्चा है। फिल्म के अंतिम दृश्य में जैसे ही ये बच्चा गोली खाकर खाई में पड़ी अन्य लाशों के ढेर पर गिरता है तो पहले तो एक गहरी खामोशी हॉल में छा जाती है। उसके बाद ज्यों ही टाइटल की पहली प्लेट आती है तो अनायास ही हमारे पीछे वाली दर्शक दीर्घा से एक लड़का उस गंभीर ख़ामोशी को तोड़ पहली ताली बजाता है। फिर तो पूरे हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट गूँजने लगती है।

तालियों के साथ ही फिल्म समाप्ति की सूचना के तौर पर हॉल की बत्तियाँ जलने पर जो दृश्य मैंने देखा, वह असाधारण था। नेटफ्लिक्स के इस दौर में दर्शक अपने घर के टीवी पर 10-15 सेकण्ड के टाइटल को झेलने को तैयार नहीं हैं। उसे स्किप करना जैसे अपना परम धर्म समझते हैं। ऐसे समय में फिल्म समाप्ति पर बिना किसी के कहे अपने आप दर्शक तालियाँ बजाएँ यह तो अद्धभुत ही हुआ न! नई दिल्ली के एक संपन्न इलाके के एक सिनेमा हॉल में शुक्रवार की रात मनोरंजन की तलाश में अपना पैसा खर्च करके आए दर्शक ताली बजाएँ, इससे बड़ा सैल्यूट फिल्मकार के लिए क्या हो सकता है?

किसी निर्देशक और फिल्मकार के लिए इससे बड़ा और कोई इनाम नहीं हो सकता। डाइरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार की कहानी को पूरी फिल्म में पकड़ के रखा है। उसे कहीं ढीला नहीं होने दिया। अनुपम खेर, पल्लवी जोशी, दर्शन कुमार और मिथुन चक्रवर्ती का अभिनय जोरदार है। फिल्म के डायलॉग कई बार आपको सुन्न कर जाते हैं। फिल्म के कई दृश्य विचलित भी कर जाते हैं। खून और हिंसा के कुछेक दृश्य कई बार वीभत्स लगते हैं। कुछ दृश्यों पर दर्शकों को ये कहते भी हमने सुना – “अब बहुत हो गया”।

कश्मीरी पंडितों के नरसंहार, उन पर हुए मज़हबी अत्याचार, जिहादी धर्मांध पाशविकता यथार्थ में तो और भी अधिक अमानुषिक रही होगी। उसके ऊपर से सेकुलरवाद जनित उपेक्षा भी तो अपने ही घर और देश में निर्वासित कश्मीरी हिन्दुओं ने झेली है। इन दृश्यों की कड़वाहट और उससे उत्पन्न जुगुप्सा एक कसमसाहट पैदा करती है। यह विवेक अग्निहोत्री की सफलता है।

मुझे ध्यान है कि कोई तीन-एक साल पहले विवेक अग्निहोत्री से दिल्ली-मुंबई की फ्लाइट के दौरान इस फिल्म के कथानक पर लम्बी चर्चा हुई थी। तब उनकी फिल्म ‘ताशकंद फाइल्स’ प्रदर्शित हो चुकी थी। मुझे उनकी उस फिल्म में डॉक्यूमेंट्री का तत्व अधिक लगा था। उस समय वे कश्मीर फाइल्स पर रिसर्च पूरी करने के बाद प्रोड्यूसर की तलाश में थे।

कहना पड़ेगा कि कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्म बनाना एक जिगरे का काम है। पुष्करनाथ पंडित और उनके जैसे लाखों कश्मीरी पंडितों की जीवंत गाथा है ये फिल्म, जिन्हें एक रात में अपना सब कुछ छोड़ कर घाटी से भागना पडा, क्योंकि इस्लामिक जिहादियों ने उन्हें केवल तीन ही विकल्प दिए थे – रालिव, त्सालिव या गालिव अर्थात, धर्मपरिवर्तन करो, भाग जाओ, या मर जाओ | राजनीतिक समझौतों से भावशून्य हो चुके बाकी भारतीय समाज की पाषाण हो गई संवेदना पर भी एक तीखी टिप्पणी है कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)।

यह एक ज़बरदस्त फिल्म है जो स्वतंत्र भारत की सबसे गहरी मानवीय त्रासदी के घावों को कुरेदती ही नहीं बल्कि उन्हें उघाड़ कर हमारे सामने रख कर हमसे पूछती है – ‘क्या अब भी तुम कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार को भुलाने की राजनीति करोगे या सच को स्वीकार करोगे?’

फिल्म में एक डायलॉग है। ‘जब कोई जलता है तो मवाद निकलता है।’ धर्मांध जिहादी आतंक के शिकार कश्मीरी हिन्दुओं के सीनों में दशकों से जमे उस अवसाद को बाहर लाने के लिए साधुवाद विवेक रंजन अग्निहोत्री!

पाकिस्तानी सेना ने कहा – हम न्यूट्रल हैं, PM इमरान खान ने कहा – ‘अल्लाह के अनुसार सिर्फ जानवर तटस्थ, इंसान नहीं’

क्रिकेटर से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने इमरान खान और पाकिस्तान के सेना के बीच की तल्खी सामने आ गई है। इमरान खान ने पाकिस्तानी सेना पर तंज कसते हुए शुक्रवार (11 मार्च) को कहा कि जानवर सिर्फ तटस्थ हो सकता है, इंसान नहीं। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “अल्लाह ने हमें तटस्थ रहने की इजाजत नहीं दी है, क्योंकि केवल जानवर तटस्थ रह सकता है।” उन्होंने कहा कि जानवर के पास बुद्धि नहीं होती है, इसलिए वह ऐसा करता है।

वरिष्ठ पत्रकार आदित्य राज कौल का कहना है, “पाकिस्तान सेना और इमरान खान नियाजी के बीच खुला युद्ध छिड़ गया। नियाजी पाकिस्तानी सेना की तुलना ‘जानवर’ से कर रहे हैं। कहते हैं, जानवर तटस्थ हो सकता है, इंसान नहीं। जानवर अच्छे या बुरे में फर्क नहीं कर पाते। पाक सेना ने कहा था कि वे तटस्थ हैं।”

जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फाजी (JUIF) सहित विपक्षी दलों के निशाने पर आए इमरान खान ने कहा को लेकर पाकिस्तान की सेना ने 10 मार्च को कहा था कि वह राजनीति में तटस्थ में है और इससे उसे कोई लेना-देना नहीं है। महानिदेशक इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने कहा था, “मैंने पहले भी कहा है कि सेना का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। इस मामले पर अनावश्यक अटकलों से बचना हम सभी के लिए बेहतर है।”

इमरान खान के इस बयान को लेकर पाकिस्तान की पत्रकार महरीन जाहरा मलिक ने कहा, “हाल के दिनों में कहा गया है कि पाकिस्तान की सेना, जिसके बारे में माना जाता है कि उसने पीएम इमरान खान के सत्ता में आने का समर्थन किया था, ‘तटस्थ’ हो गई है। आज रैली में इमरान खान कहते हैं कि जानवर तटस्थ होते हैं, इंसान ‘अच्छे’ के साथ खड़े हैं।”

द न्यूज के अनुसार, इमरान खान ने अपने भाषण में यह भी कहा कि सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने उन्हें कहा कि जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फाजी (JUIF) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान को ‘डीजल’ ना कहें। इमरान ने कहा कि मौलाना को डीजल नाम उन्होंने नहीं, बल्कि लोगों ने दिया है।

बता दें कि इमरान खान ने 23 जनवरी 2022 को विपक्षी दलों को खुली धमकी दी थी। इमरान खान ने कहा था कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया तो वह और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएँगे। उन्होंने कहा था, “अगर मैं सड़कों पर आ गया तो आप (विपक्ष) सबको छिपने की कोई जगह नहीं मिलेगी।” 

इसके पहले जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख सिराज-उल-हक ने 16 जनवरी 2022 को इमरान खान को अंतरराष्ट्रीय भिखारी था। हक ने दावा किया था कि पाकिस्तान की सभी आर्थिक समस्याओं का एक ही हल है कि पीएम इमरान खान की विदाई कर दी जाए।

हक ने कहा था, “इमरान खान और पाकिस्तान एक साथ काम नहीं कर सकते। इस मुल्क में राजनीति में प्लस माइनस के लिए जगह नहीं है। सिर्फ इमरान खान की विदाई ही इसका एक मात्र उपाय है।” अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ पाकिस्तान के विवादास्पद सौदे पर उन्होंने इमरान खान के लिए कहा कि वो अब अंतरराष्ट्रीय भिखारी बन गए हैं।

‘योगी के भगवा के नीचे लाल लंगोट की जाँच…’ – UP का सरकारी टीचर अजीत यादव सस्पेंड, सपा रैली में दिया था ‘जहरीला’ भाषण

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में सहायक अध्यापक अजीत यादव को सस्पेंड कर दिया गया है। अजीत यादव ने समाजवादी पार्टी की जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था।

अध्यापक अजीत यादव पर सरकारी कर्मचारी होने के बाद भी चुनावी जनसभा में समाजवादी पार्टी के लिए वोट माँगने का आरोप है। उन्हें 5 मार्च 2022 को नोटिस जारी कर के जवाब देने के लिए कहा गया था। जवाब न मिलने के चलते 11 मार्च (शुक्रवार) को निलंबित कर दिया गया।

निलंबन आदेश

अजीत यादव प्रयागराज के बहरिया क्षेत्र में आने वाले कम्पोजिट विद्यालय, सराय ख्वाजा में पढ़ाते थे। जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार तिवारी ने उनके आचरण को अध्यापक आचरण सेवा नियमावली के विरुद्ध पाया है। उनके विरुद्ध जाँच बिठाई गई है। यह जाँच खंड विकास अधिकारी कर रहे हैं।

लगभग सप्ताह भर पहले अजीत यादव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। तब वो समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी संदीप यादव के पक्ष में जनसभा कर रहे थे। उस वीडियो में वो नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ और अमित शाह की तुलना सांड से कर रहे थे। तब उन्होंने कहा था, “कोई काला सांड अमित शाह के रूप में घूम रहा है। कोई भूरा सांड है जो नरेंद्र मोदी के रूप में घूम रहा है। जब समाजवादी पार्टी की सरकार आएगी तो आप देख लेना योगी बाबा, जो आप भगवा पहन कर लुंगी के नीचे लाल लंगोट पहनते हो, उसकी भी जाँच कराएगी।”

यह वीडियो वायरल होने के बाद अजीत यादव के खिलाफ लगातार कार्रवाई की माँग हो रही थी। प्रयागराज पुलिस ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए थाना जॉर्जटाउन को अजीत यादव के विरुद्ध जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए थे।

बॉलीवुड गैंग के विरोध के बावजूद कश्मीर फाइल्स ने पहले दिन की जबरदस्त कमाई, हरियाणा सरकार ने फिल्म को किया टैक्स फ्री

जम्मू-कश्मीर के घाटी (Kashmir Valley) में हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) को हर तरह से नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। इस्लामवादी से लेकर बॉलीवुड के एजेंडा सेटर तक नहीं चाहते है कि 90 के दशक के इस इस्लामिक नरसंहार की सच्चाई को जनता की सामने लाया जाए। फिल्म के प्रोड्यूसर और निर्देशक के मनोबल तोड़ने के लिए आर्थिक बहिष्कार कर रहे हैं। इसके बावजूद दर्शकों की भारी भीड़ इस फिल्म को देखने पहुँच रही है और फिल्म जबरदस्त कमाई भी कर रही है।

अपनी रिलीज के पहले दिन यानी 11 मार्च को ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने जबरदस्त कमाई है, वो भी तब जबकि बॉलीवुड गैंग के दबाव में यह सिर्फ 550 स्क्रीन पर रिलीज हो पाई। बताया जा रहा है कि पहले दिन इस फिल्म 2.5 करोड़ से 3 करोड़ रुपए की बीच कमाई की है। यह हाल में रिलीज हुई बॉलीवुड की कई फिल्मों की पहले दिन की कमाई से बेहतर है। इस फिल्म ने निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की पिछली फिल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ की पहले दिन की कमाई से 6-7 गुना अधिक कमाई की है। बता दें कि ‘द ताशकंद फाइल्स’ ने पहले दिन सिर्फ 40 लाख रुपए की कमाई की थी।

बीतने वाले हर एक दिन के साथ फिल्म की कमाई बढ़ने की उम्मीद है। जिस तरह से यह लोगों के दिल और दिमाग को झकझोर रही है, लोग इसे लंबे समय तक भूल नहीं पाएँगे। फिल्म देखकर निकले एक दर्शक ने कहा कि यह फिल्म हर भारतीय और हिंदुओं को देखना चाहिए। एक अन्य दर्शक ने कहा कि यह फिल्म दिखाती है कि आज से 30 साल पहले कश्मीर में वास्तव में क्या हुआ था, इस फिल्म के जरिए समझा जा सकता है।

वहीं, कुछ सिनेमाघरों में फिल्म के कुछ हिस्सों को म्यूट (आवाज बंद करना) करने की भी कोशिश गई। महाराष्ट्र के भिवंडी स्थित PVR सिनेमा में फिल्म के एक हिस्से में आवाज को बंद कर दिया गया। दर्शकों का आरोप है कि चिन्मय मंडेलकर के हिस्से वाले के संवाद को जानबूझकर बंद कर दिया गया। इसके बाद दर्शक भड़क उठे।

वहीं, मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग के एक सिनेमाघर में दर्शक फिल्म का इंतजार करते रहे, लेकिन इसे विवादास्पद बताकर प्रदर्शित नहीं किया गया। सनबीर सिंह रनहोत्रा ने इसको लेकर ट्वीट किया, “@vivekagnihotri जी, आज शिलॉन्ग के गैलेरिया सिनेमा में द कश्मीर फाइल्स के शो के लिए गए थे। हाउसफुल सिनेमा हॉल के दर्शकों को बताया गया कि उन्हें ‘फाइल नहीं मिली’ और शो रद्द कर दिया गया। सिनेमा हॉल के मैनेजर को को यह कहते हुए सुना गया कि फिल्म ‘विवादास्पद’ है।”

बता दें कि अग्निहोत्री ने बताया कि एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म ने द कश्मीर फाइल्स को रिलीज करने के लिए साल 2020 में उनसे संपर्क किया था। विवेक के अनुसार, प्लेटफॉर्म के मुखिया का कहना था कि वे फिल्म में इस्लामिक आतंकवाद जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। उनसे स्पष्ट शब्दों में कहा गया, “हमारी एक वैश्विक नीति है कि हम अपनी किसी भी फिल्म में इस्लामिक आतंकवाद शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं। मुझे आशा है कि आप इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं।”

इतना ही नहीं, कपिल शर्मा ने अपने शो के माध्यम से ‘द कश्मीर फाइल्स’ का प्रमोशन करने से इनकार कर दिया था। कपिल शर्मा ने तर्क दिया था कि इस फिल्म में कोई बड़ा हीरो नहीं है। पिछले दिनों निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने फिल्म समीक्षक अनुपमा चोपड़ा को ‘शूर्पणखा’ बताते हुए फिल्म को नुकसान पहुँचाने की कोशिश का आरोप लगाया था। उन्होंने वीडियो जारी कर चोपड़ा की कारस्तानी के बारे में विस्तार से बताया था। साथ ही उनलोगों के नाम भी बताए थे जो कथित तौर पर बॉलीवुड को चलाते हैं। उसके नियम-कायदे सेट करते हैं। यह फिल्म लगातार कट्टरपंथियों के भी निशाने पर है।  

दूसरी तरफ, हरियाणा में इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया गया है। एक्ससाइज एंड टैक्सेशन विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा कि फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को राज्य में टैक्स फ्री कर दिया है।

गौरतलब है कि इस फिल्म को रिलीज से रोकने के लिए निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को हर तरह से घेरने की कोशिश की गई थी। अग्निहोत्री को जान से मारने की धमकी दी गई थी। जब वो नहीं माने तो इस फिल्म को रोकने के लिए कोर्ट में याचिका दी गई कि इससे मुस्लिमों की भावनाएँ आहत होती हैं। हालाँकि, फिल्म पर रोक नहीं लगी, लेकिन जम्मू की अदालत ने सैन्य अधिकारी रवि खन्ना से जुड़ा सीन हटाने को कहा। सेंसर बोर्ड ने कुछ सीन को कट करने और नाम बदलने के लिए कहा। उसके बाद फिल्म में JNU का नाम बदलकर ANU कर दिया गया।

5 राज्यों में शर्मनाक हार के बाद G-23 खेमा गुपचुप तरीके से हुआ एक्टिव, की नए अध्यक्ष की माँग; फिर भी राहुल गाँधी की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे कॉन्ग्रेसी

देश की सबसे पुरानी पार्टी को आज ये भी दिन देखना पड़ेगा! शायद उसने ये कभी भी नहीं सोचा होगा। 10 मार्च 2022 को आए पाँच राज्यों के चुनावी नतीजों में कॉन्ग्रेस पूरी तरह से साफ हो गई। पंजाब में आप की आँधी और यूपी में पीएम मोदी और सीएम योगी की जोड़ी का ऐसा जलवा दिखा कि विपक्षी पानी माँगते दिखे। इन राज्यों में कॉन्ग्रेस की शर्मनाक हार के बाद पार्टी का असंतुष्ट खेमा G-23 एक्टिव हो गया है। इस ग्रुप के नेताओं ने शुक्रवार (11 मार्च 2022) को गुलाम नबी आजाद के घर पर मीटिंग की।

बैठक में कॉन्ग्रेस की आपातकालीन बैठक बुलाकर पार्टी में नए अध्यक्ष के लिए चुनाव कराने की माँग की गई। इस दौरान कपिल सिब्बल से लेकर मनीष तिवारी तक शामिल रहे। इससे पहले ये असंतुष्ट नेता सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर पार्टी के स्थाई अध्यक्ष के चुनाव का सुझाव दे चुके हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि कॉन्ग्रेस को अपनी दुर्गति का आभास पहले से ही हो गया था।

ऐसा इसलिए कि रिपोर्ट के मुताबिक, 10 मार्च को रिजल्ट आने से पहले ही इसके नतीजों को लेकर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के घर पर एक बैठक हुई थी, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, प्रियंका गाँधी वाड्रा और संगठन के महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल रहे। इसमें पार्टी के अध्यक्ष पद को लेकर यह तय किया गया कि सितंबर 2022 तक पार्टी के नए अध्यक्ष का चयन किया जाएगा। इतनी बड़ी हार के बाद भी कॉन्ग्रेसी राहुल गाँधी का गुणगान करने में लगे हुए हैं।

एआईसीसी के जनरल सेक्रेट्री और गुजरात के प्रभारी रघु शर्मा का कहना है कि पूरे देश में केवल राहुल गाँधी ही भाजपा का मुकाबला कर रहे हैं। वो कहते हैं कि केवल राहुल और प्रियंका ही जनता के मुद्दों पर बात करते हैं।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस की केवल 2 सीटें आई हैं औऱ उसका वोट शेयर केवल 2 प्रतिशत ही रहा। जबकि पंजाब में आप की आँधी के सामने कॉन्ग्रेस 11 सीटों पर सिमट गई। उसके मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी तक हार गए।