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सपा के स्वामी को नहीं मिला जीत का प्रसाद: 25000 से अधिक वोटों से मिली हार, पहली बार लड़ रहे भाजपा के शिक्षक उम्मीदवार ने दी मात

कुशीनगर के फाजिलनगर विधानसभा सीट से स्वामी प्रसाद मौर्य चुनाव हार गए हैं। भाजपा के सुरेंद्र कुमार कुशवाहा ने इस सीट से जीत दर्ज की है। वो पेशे से शिक्षक रहे हैं। यहाँ से सुरेंद्र कुशवाहा को 50,214 (53.4%) वोट प्राप्त हुए, जबकि सपा के स्वामी प्रसाद मौर्य 23,825 (25.33%) वोटों पर अटक गए। इस तरह उनकी हार का अंतर 26,000 से भी ज्यादा रहा। तीसरे स्थान पर 14708 वोटों के साथ बसपा के इलियास (16.31%) रहे।

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य के कुशीनगर के ही पडरौना से जीत दर्ज की थी, लेकिन तब वो भाजपा के टिकट पर लड़े थे। उससे पहले वो इसी सीट पर बसपा के टिकट पर भी विधायक रह चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में लगभग 5 साल मंत्री रहने के बाद चुनाव के ऐन वक्त पर पाला बदल कर अखिलेश यादव की सपा का दामन थाम लिया था। उन्होंने 93,649 (44.79%) मत पाकर बसपा के जावेद इकबाल को बड़े अंतर से हराया थे, जिन्हें 53,097 (25.4%) वोट मिले थे।

अगर फाजिलनगर सीट की बात करें तो यहाँ से भाजपा के गंगा सिंह कुशवाहा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में 10,2778 (48.57%) वोट पाकर जीत दर्ज की थी, जब दूसरे स्थान पर रहे विश्वनाथ सिंह को 60,856 (28.76%) और तीसरे स्थान पर रहे बसपा के जगदीश सिंह को 34250 (16.19%) मत प्राप्त हुए थे। विश्वनाथ सिंह 5 बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। जबकि गंगा सिंह कुशवाहा ने 2017 से पहले 2012 में भी भाजपा की तरफ से जीत दर्ज की थी।

इस बार गंगा सिंह कुशवाहा के शिक्षक पुत्र और साफ़-सुथरे छवि के सुरेंद्र सिंह कुशवाहा को भाजपा ने मौका दिया था, जिनका मुकाबला स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ-साथ कॉन्ग्रेस के सुनील उर्फ़ मनोज सिंह और बसपा के इलियास से था। छठे चरण में कुशीनगर की इस सीट पर मतदान हुआ था। उनके बेटे अशोक पर वोटिंग के दौरान पैसे बाँटने के आरोप लगे थे, जिसके बाद पुलिस ने 8 घंटे थाने में रखने के बाद उन्हें जिले से बाहर निकाल दिया था।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। बहुमत का आँकड़ा 202 है। 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटें जीती थी। उसे 39.67% मत मिले थे। कॉन्ग्रेस और सपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। सपा को 21.82% वोट के साथ 47 तो कॉन्ग्रेस को 6.25% वोटों के साथ 7 सीटें मिली थी। 22.23% वोट हासिल करने के बावजूद बसपा 19 सीटों पर सिमट गई थी। अन्य के खाते में 5 सीटें गई थी। उससे पहले 2012 में सपा और 2007 के विधानसभा चुनावों में बसपा को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ था।

‘रवीश कुमार ने शोक सभा आयोजित की है, आप आएँगे न?’: NDTV के स्क्रीन पर चेहरा देख नतीजों का अंदाज़ा लगाते रहे लोग, पंजाब ने दी ‘हल्की ख़ुशी’

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम आ रहे हैं और ताज़ा स्थिति ये है कि भाजपा फ़िलहाल 243 सीटों पर आगे चल रही है। भले ही बाकी दिनों में NDTV चैनल की टीआरपी ठीक न रहती हो और इस चैनल को दर्शन न मिलते हों, लेकिन मतगणना के दिनों में ऐसा नहीं होता। उस दिन भाजपा की जीत की स्थिति में लोग रवीश कुमार का चेहरा देखने के लिए NDTV ही लगाते हैं। इस बार दुःखी रवीश कुमार को पंजाब ने ज़रूर हँसने का मौका दे दिया है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की जीत से रवीश कुमार दुःखी दिखे। वहीं मणिपुर और उत्तराखंड में भाजपा को मिल रहे बहुमत ने उनके ‘घाव पर नमक’ का काम किया। ऊपर से गोवा में भी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभर रही है, उसका दुःख भी रवीश कुमार के चेहरे पर साफ़ देखने को मिला। हाँ, पंजाब में जरूर अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP 92 सीटें जीत कर स्वीप की तरफ बढ़ रही है, इसीलिए जब-जब पंजाब की बात आई, रवीश कुमार के चेहरे पर ख़ुशी नजर आई।

यही कारण है कि NDTV पर अधिकतर समय पंजाब में ही चर्चा चलती रही और राघव चड्ढा जैसे AAP नेता यहाँ बैठ कर अपनी बात रखते रहे। दिनेश प्रताप सिंह चौहान नाम के यूजर ने लिखा, “सार्वजनिक सूचना – रवीश कुमार ने आज शाम 6 बजे शोक सभा आयोजित की है। ज़रूर पधारें।”

एक अन्य यूजर ने लिखा कि दिन भर रवीश कुमार इसी बात का विश्लेषण कर रहे हैं कि पंजाब में कैसे भाजपा हार रही है। बता दें कि पंजाब में भाजपा जीत की दौड़ में पहले भी नहीं थी और उसे बस अपना वोट प्रतिशत सुधारना था।

एक अन्य यूजर ने दावा किया कि आजकल ‘भक्त’ लोग एग्जिट पोल पर विश्वास करने की बजाए रवीश कुमार का चेहरा ही देख लेते हैं। लोगों का कहना है कि रवीश के चेहरे के हाव-भाव से पता चल जाता है कि भाजपा चुनाव जीत रही है या फिर हार रही है।

एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ महसूस कर सकते हैं आपके दर्द को, मौलाना रवीश कुमार।”

धर्मेंद्र सिन्हा नाम के यूजर ने लिखा, “रवीश कुमार बार बार एक ही लाइन गा रहा है, उत्तर प्रदेश में गिनती बहुत धीमी चल रही है। इसका उद्देश्य एक ही है, आग लगवाना।” बता दें किरवीश कुमार बार-बार इस बात पर जोर दे रहे थे कि मतगणना धीमी चल रही है और अपने रिपोर्टर्स से भी पूछ रहे थे कि मतगणना की स्पीड क्या है।

बता दें कि रवीश कुमार अक्सर अपने भाजपा विरोधी रुख के कारण चर्चा में रहते हैं और इस दौरान वो अजीबोगरीब बातें भी करते हैं। उन्हें चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश यादव के साथ भी देखा गया था। पिछले चुनाव में उन्हें मायवती के मंच पर पीछे खड़े भी देखा गया था।

गोवा में भी सरकार बचाने में सफल रही बीजेपी: CM सावंत का ऐलान- MGP और निर्दलीयों के साथ बनाएँगे सरकार

साल 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों की मतगणना में भारतीय जनता पार्टी रुझानों में आगे चल रही है। वहीं दूसरे नंबर पर कॉन्ग्रेस है। ऐसे में गोवा के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता प्रमोद सावंत ने दावा किया है कि वो अपनी सरकार बनाने जा रहे हैं और उनके साथ एमजीपी और निर्दलीय प्रत्याशी भी होंगे।

अभी तक आए रुझानों में भाजपा लगातार 17 सीटों पर लीड कर रही है वहीं 3 सीट पर विजय हासिल कर चुकी है। कॉन्ग्रेस का नंबर दूसरा है। उनके खाते में कुल 11 सीट हैं। उन्हें भी 3 सीट पर तो जीत मिल गई है। आम आदमी पार्टी इस रेस में 2 सीटों पर आगे चल रही है जबकि MAG 2 सीट पर आगे हैं।

पणजी में हारते-हारते जीती भाजपा

शुरुआती रुझानों में कॉन्ग्रेस भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला दिखाया जा रहा था। लेकिन दूसरे घंटे में तस्वीर बदल गई। भाजपा की बढ़त ने जहाँ सबको चौंकाया वहीं भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली पणजी पर भी पार्टी जीत हासिल करती दिखी। इस सीट पर इस बार निर्दर्लीय चुनाव लड़ने वाले उत्पल पार्रिकर की हार से सब हैरान हैं। उत्पल भाजपा नेता मनोहर पार्रिकर के बेटे हैं। शुरुआती रुझानों में भाजपा के अतानासियों मोंसेराते को उन्होंने पछाड़ा हुआ था मगर आखिर में भाजपा बाजी मार गई। उत्पल यहाँ दूसरे नंबर पर हैं। ये हार-जीत बेहद कम मार्जिन पर तय हुई।

गोवा विधानसभा चुनाव

40 सीट वाली गोवा विधानसभा में इस बार 14 फरवरी 2022 को 79.61% मतदान हुआ था। जिसके बाद एग्जिट पोल ने यहाँ कॉन्ग्रेस को 15-20 सीटें जीतकर सत्ता में आता दिखाया था। पिछले चुनावों की यदि बात करें तो 2012 के विधानसभा चुनाव में गोवा में भाजपा को 21 सीटें मिली थीं और 2017 में उनकी सीटों की संख्या 13 हो गई थी। वहीं कॉन्ग्रेस जिसे साल 2012 में 9 सीटें मिली थीं उसने 2017 में 17 सीट पाई लेकिन लोकसभा चुनावों में भाजपा को फिर 26 सीट मिली और कॉन्ग्रेस को 14 पर संतुष्ट रहना पड़ा।

यूपी में कॉन्ग्रेस के 1 सीट पर सिमटने के आसार: प्रियंका गाँधी के खासमखास अजय कुमार लल्लू तीसरे नंबर पर, क्या प्रमोद तिवारी की बेटी बचा लेगी लाज

उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी 403 सीटों पर मतगणना जारी है। नतीजे पूरी तरह गुरुवार शाम तक स्पष्ट होंगे। खबर लिखे जाने तक आधिकारिक तौर पर सभी सीटों के रूझान सामने आ गए थे। इसके अनुसार बीजेपी आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी।

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार बीजेपी खुद 246 और उसकी सहयोगी दल अपना दल सोनेलाल 11 सीटों पर आगे हैं। सपा 124 सीटों पर आगे चल रही है। बसपा और कॉन्ग्रेस के डबल डिजिट में पहुँचने के आसार नहीं दिख रहे। कॉन्ग्रेस केवल एक सीट पर आगे चल रही है।

कॉन्ग्रेस को जो एकमात्र सीट मिलने की उम्मीद दिख रही है वह है प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा सीट है। यहाँ से आराधना मिश्रा कॉन्ग्रेस पार्टी की उम्मीदवार हैं। आराधना मिश्रा 30 हजार से ज्यादा वोटों से आगे हैं। उनका सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नागेश प्रताप सिंह उर्फ छोटे सरकार से है। बता दें कि अराधना कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। इस सीट पर बीते 41 साल से प्रमोद तिवारी का दबदबा है।

कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तीसरे नंबर पर

उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस के खराब प्रदर्शन का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी अपनी सीट हारते दिख रहे हैं। वे कुशीनगर जिले के तमकुहीराज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। खबर लिखे जाने तक वे तीसरे नंबर पर चल रहे थे। इस सीट पर बीजेपी के असीम कुमार लीड बनाए हुए हैं। सपा उम्मीदवार उदय नारायण उनसे काफी पीछे हैं। लल्लू कॉन्ग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गॉंधी के बेहद खास माने जाते हैं। उन्होंने 2017 में तमकुहीराज में 61,211 वोट हासिल किए थे।

गोवा में बुरी तरह हार रही TMC : ममता बनर्जी के राजनीतिक रणनीतिकार बने रहेंगे प्रशांत किशोर, नहीं देंगे पार्टी के अंदरूनी मामलों में दखल, कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू

गोवा विधानसभा चुनावों में एक बार फिर से भाजपा सबसे आगे चल रही है। लेकिन राज्य में दम भरने वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस वहाँ बुरी तरह से हार रही है। वहीं टीएमसी ने एक बार फिर से प्रशांत किशोर के साथ चुनावी सलाहकार के तौर पर अपना कॉन्ट्रैक्ट को जारी रखने का फैसला किया है। हालाँकि, इसके साथ ही पीके को राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में पार्टी के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देने का निर्देश दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी ने किशोर से कहा है कि वह अपनी टीम I-PAC की सिफारिशों को सीधे सीएम ममता बनर्जी को भेजें। दरअसल, किशोर की टीम ने ममता बनर्जी की इजाजत के बिना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया था। इसमें सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कई समर्थक भी शामिल थे। इसके बाद से ममता सरकार काफी परेशान थीं।

टीएमसी के एक सीनियर लीडर का कहना है, “वह I-PAC के इस कार्य से परेशान थीं और इसी के कारण उन्होंने किशोर के साथ पहले अपने कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ने पर विचार किया था। हालाँकि, बाद में वो रुक गईं, क्योंकि ये प्रशांत किशोर ही थे, जिनकी वजह से पिछले साल के विधानसभा चुनावों में पार्टी मतदाताओं, विशेष रूप से महिलाओं को प्रभावित कर पाई थी।”

टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि किशोर को पार्टी के फेरबदल में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया गया था। गौरतलब है कि ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने 2019 में प्रशांत किशोर को नियुक्त किया था।

उल्लेखनीय है कि गोवा में टीएमसी ने बीजेपी को टक्कर देने की कोशिश की थी, लेकिन एक बार फिर से बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

‘सुप्रीम कोर्ट… ल*ड़ा पकड़ के झूल जा’ – कुणाल कामरा पर आपराधिक मुकदमा मामले में अब यह भी शामिल, अटॉर्नी जनरल ने दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा पर सुप्रीम कोर्ट के अपमान पर आपराधिक मुकदमा चलाने की अनुमति पहले से ही थी। अब इसमें कामरा के नए ट्वीट और गाली वाली वीडियो भी शामिल होगी। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इसकी अनुमति दे दी है। इस आदेश का एक पत्र 7 मार्च (सोमवार) को जारी हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2020 में कुणाल कामरा को एक लिबरल ‘हीरो’ या ‘शहीद’ बनने की कोशिश में न्यायपालिका के खिलाफ अवमानना वाली ​​टिप्पणी करने के बाद कार्रवाई को लेकर एक नोटिस जारी किया था। अपने एक ट्वीट में कामरा ने तत्कालीन सीजेआई अरविंद बोबडे को अपनी मध्यमा उंगली दिखाई थी और दूसरे ट्वीट में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भगवा रंग में रंगते हुए आरोप लगाया था कि यह एनडीए सरकार की कठपुतली बन गई है।

कामरा ने आगे कहा था, “देश का सर्वोच्च न्यायालय, जिसे मैं भी नहीं मानता… मैं एक शॉपिंग मॉल के फूड कोर्ट का अधिक सम्मान करता हूँ… कम से कम यह विभिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करता है। देश का सर्वोच्च न्यायालय ‘ब्राह्मण-बनिया’ का मामला है। मैं इसका सम्मान नहीं करता।”

सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही चल रहे अपने अवमानना केस को लेकर कामरा ने इसी साल मार्च महीने में कहा, “प्रिय सुप्रीम कोर्ट! कल की बातें भूल जा, ल*ड़ा पकड़ के झूल जा।” कामरा यहीं नहीं रुके। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और जजों के खिलाफ लगातार ट्वीट किए।

पहले ट्वीट में कामरा ने सुप्रीम कोर्ट की तुलना सुप्रीम जोक से की। अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “जिस गति से सुप्रीम कोर्ट ‘राष्ट्रीय हितों’ के मामलों में काम करता है, अब समय आ गया है कि हम महात्मा गाँधी की तस्वीर को हरीश साल्वे की तस्वीर से बदल दें।”

अपने तीसरे ट्वीट में उन्होंने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तुलना ‘प्रथम श्रेणी के यात्रियों को शैंपेन परोसने वाले फ्लाइट अटेंडेंट’ से की, जो तेज सेवा देता है। जबकि आम लोगों को यह नहीं पता था कि वे कभी सवार होंगे या बैठे होंगे, सेवा की तो बात ही छोड़िए।” आखिरी ट्वीट में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट या उसके जजों का जिक्र करते हुए वकीलों को उनके लिए ‘माननीय’ का इस्तेमाल बंद करने के लिए उकसाया। उन्होंने कहा, “यहाँ सम्मान ने बहुत पहले साथ छोड़ दिया है।”

कामरा ने सुप्रीम कोर्ट की इमारत की एक मॉर्फ्ड तस्वीर भी पोस्ट की थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के प्रवेश द्वार पर बीजेपी का झंडा फहराया गया था। मुंबई के वकील रिजवान सिद्दीकी ने कहा कि अगर अदालत ने कामरा द्वारा दिए गए अपमानजनक बयानों पर कार्रवाई नहीं की तो उनके लाखों अनुयायी उन्हीं के रास्ते पर चलेंगे और जब फैसला उनके पक्ष में नहीं होगा तो इसी तरह के आरोप लगाएँगे।

‘जनता ही BJP के साथ मिल कर गणतंत्र को उखाड़ रही है’: YoYa ने मतदाताओं को ही दिया दोष, आरफा ने ‘मोदी Vs योगी’ को बनाया नैरेटिव

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम देख कर ‘The Wire’ की पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी और फ़िलहाल ‘किसान नेता’ का किरदार अदा कर रहे योगेंद्र यादव किसी तरह अपने पिछले बयानों को सही ठहराने में लगे हैं। आरफा खानुम शेरवानी अब इस बात पर शो कर रही हैं कि जिस तरह का ‘आक्रोश’ लोगों में था, वो नतीजों में परिलक्षित नहीं हो रहा है। वहीं NDTV पर आए योगेंद्र यादव ने भी अजोबोगारब बातें की।

योगेंद्र यादव ने जनता पर ही भाजपा के साथ मिल कर ‘गणतंत्र को उखाड़ने’ के आरोप लगा दिए। अब लोग उनसे पूछ रहे हैं कि जिस लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है, वहाँ जनता पर ही कैसे सिर्फ इसीलिए दोष मढ़ा जा सकता है क्योंकि उसने किसी पार्टी के पक्ष में मतदान किया। योगेंद्र यादव ने मतदाताओं को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। कल को कहीं ऐसा न हो कि वो पूरे देश और फिर संविधान को ही गाली देने लगें। शायद उन्हें योगी आदित्यनाथ की जीत का झटका लगा है।

अगर आरफा खानुम शेरवानी की बात करें तो वो लगातार ये अफवाह फैलाने में लगी थीं कि मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ सिर्फ ‘मुस्लिम डॉन’ सब के पीछे ही पड़े रहे, जबकि सच्चाई ये है कि ‘योगी का बुलडोजर’ माफियाओं का जाति-धर्म देखे बिना ही उनकी संपत्ति पर चला। आरफा ने दावा किया कि उन्होंने काफी नजदीक से यूपी को पिछले चुनाव में भी कवर किया था और सपा ने कड़ी टक्कर दी थी। ताज़ा रुझान पर उन्होंने कहा कि

उन्होंने दावा किया कि भाजपा के नेता ही ऐसा कह रहे थे कि योगी आदित्यनाथ को वो दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में आगे नहीं रखना चाहते। उन्होंने कहा कि सपा और रालोद ने एक नया विपक्ष तैयार किया है। उन्होंने एक ‘विशेषज्ञ’ से सवाल पूछा कि जब RSS 100 वर्षों से भारत में है, फिर एक खास विचारधारा को चेहरा मिला और कॉन्ग्रेस के लिए दुःख भरे दिन आ गए हैं, तो ‘योगी बनाम मोदी’ की प्रतियोगिता का क्या मकसद है?

पंजाब के पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह की हार, AAP के अजित पाल सिंह कोहली ने दी मात, धुरी सीट से जीते भगवंत मान

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पटियाला सिटी से चुनाव हार गए हैं। उन्हें 22868 वोटें मिलीं। अमरिंदर सिंह को AAP के उम्मीदवार अजीत पाल सिंह (Ajit Pal Singh Kohli) ने मात दी है। उन्होंने 36645 वोट हासिल किए। पटियाला शहरी पंजाब के 117 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पिछली बार इस सीट से प्रदेश में सबसे बड़े मार्जिन 52,407 से जीत हासिल की थी। वह इस सीट पर चार बार विधायक रह चुके हैं। वहीं पंजाब की धुरी सीट से भगवंत मान जीत गए हैं।

फोटो साभार: ECI

पिछले साल सितंबर में कॉन्ग्रेस द्वारा सीएम पद से हटाए जाने के बाद, पटियाला के मौजूदा विधायक कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी नवगठित पंजाब लोक कॉन्ग्रेस पार्टी से चुनाव लड़े थे। कैप्टन के खिलाफ कॉन्ग्रेस उम्मीदवार विष्णु शर्मा और AAP उम्मीदवार अजीत पाल सिंह कोहली थे।

वहीं पंजाब के दिग्गज नेता अपनी सीटों पर पिछड़ते नजर आ रहे हैं। इनमें CM चरणजीत चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू, सुखबीर सिंह बादल और मालविका सूद शामिल हैं। अमृतसर ईस्ट सीट पर AAP के जीवन ज्योत कौर 1203 वोटों से आगे चल रहे हैं। जबकि दूसरे नंबर पर विक्रम सिंह मजीठिया 4796 वोटों के साथ बने हुए हैं। वहीं कॉन्ग्रेस के नवजोत सिंह सिद्धू मजीठिया से मात्र 53 वोटों से पीछे चल रहे हैं।

सिद्धू ने ट्वीट करते हुए लिखा, “जनता की आवाज ईश्वर की आवाज है… पंजाब की जनता के जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करें… AAP को बधाई!!!” मोगा से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार और अभिनेता सोनू सूद की बहन मालविका सूद भी पीछे चल रही हैं।

इधर सीएम चरणजीत सिंह चन्नी चमकौर साहिब और भदौड़ दोनों जगह से पीछे चल रहे हैं। AAP के सीएम चेहरे भगवंत मान धुरी सीट पर जीत गए हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के दलवीर सिंह गोल्डी पर 50 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है।

जलालाबाद से अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पिछड़ गए हैं। हालाँकि वह AAP के जगदीप कंबोज से मात्र 827 वोटों से पीछे चल रहे हैं। इसी तरह लांबी से अकाली दल संरक्षक प्रकाश सिंह बादल भी AAP के गुरमीत सिंह से 1416 वोटों से पीछे हैं।

पंजाब में 117 विधानसभा चुनाव (Punjab Elections) क्षेत्र हैं। विधानसभा चुनाव जीतने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 59 सीटों का आँकड़ा हासिल करना होता है। पंजाब में 20 फरवरी को एक ही चरण में मतदान हुआ था। इस दौरान सभी 117 सीटों पर वोट डाले गए थे। पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में कुल 1304 उम्‍मीदवारों ने राज्‍य में चुनाव लड़ा। राज्य में करीब 2.14 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्‍तेमाल किया। इनमें से पुरुष मतदाता 1,12,98,081, महिला मतदाता 102,00,996 और थर्ड जेंडर मतदाता 727 रहे। इस बार राज्‍य में करीब 71.95 फीसदी मतदान हुआ है, जो पिछले 15 साल में सबसे कम मतदान प्रतिशत है।

‘हम सबसे ह#मी थे हमको फिर से मिले बाबा’: योगी लहर में मुनव्वर राणा की बिगड़ी तबीयत, नेटिजन्स पूछ रहे तारीख

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणामों में CM योगी सरकार की वापसी के साथ लोग मशहूर शायर मुनव्वर राणा को सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिए हैं। वहीं यूपी चुनाव में दोबारा भाजपा की जीत होने पर उत्तर प्रदेश छोड़कर चले जाने की बात कहने वाले मुनव्वर राणा की तबीयत खराब होने की खबर भी आ रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में योगी सरकार बनने पर मुनव्वर राणा ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि उनकी एग्जिट पोल में बीजेपी की सरकार बनते रुझानों को देखकर ही तीन दिन से तबीयत खराब है और कहा जा रहा है कि वह घर पर ही रहकर अपना इलाज करवा रहे हैं।

दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने लिखा, “मुनव्वर राणा जी यूपी छोड़ने की तैयारी है?” उन्होंने जो ट्वीट शेयर किया है, उस पर लिखा है, “किसी को काशी मिला तो किसी को मिला काबा… हम सबसे हR!मी थे हमको फिर से मिले बाबा।”

वहीं शेफाली वैद्य ने लिखा, “ये सब छोड़िए, ये मुनव्वर राणा उत्तर प्रदेश कब त्याग रहा है?

अंजलि सिंह राजपूत ने ट्वीट किया, “इतिहास में पहली बार यूपी में कोई पार्टी अपनी सरकार दोबारा बनाने जा रही है। @myogiadityanath जी पर इतना भरोसा किया जनता ने। सबसे लोकप्रिय नेता बन गए हैं योगी जी। हाँ, तो मुनव्वर राणा भाग लो अभी भी वक़्त है नहीं तो पार्टी के कार्यकर्ता तुम्हें यूपी बॉर्डर पर खुद ही छोड़ आएँगे।”

छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रबल प्रताप सिंह जुदेव ने ट्वीट किया, “अगर योगी दोबारा मुख्यमंत्री बने तो मैं उत्तर प्रदेश छोड़ दूँगा: मुनव्वर राणा, अच्छा चलता हूँ, दुवाओं में याद रखना: मुनव्वर राणा, 10 मार्च, 2022 को! वहीं ब्रेकेट में लिखा (राणा जी की 2017, 2019 के बाद 2022 हैट-ट्रिक-देखते हैं, इस बार जाते हैं की नहीं)”

इसके अलावा कुछ और भी ट्वीट्स में देखिए, कैसे लोग उनके मजे ले रहे हैं।

बता दें कि यूपी चुनाव से पहले मुनव्वर राणा ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि अगर यूपी में फिर से भाजपा आ जाती है तो उत्तर प्रदेश छोड़ देंगे। शायर के इसी बयान को लेकर लोग सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे हैं। अभी तक के रुझानों में चूँकि यूपी में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मुनव्वर राना अपने वादे पर कायम रहेंगे।

गौरतलब है कि मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने कहा था, “पाँच साल में तो हम बच गए, मगर अगले 5 साल के लिए योगी आ गए तो हम जिंदा नहीं बचेंगे। मरना तो वैसे ही है लेकिन बेमौत नहीं मरना चाहता। बीजेपी के नेता पलायन करने वाले को पश्चिम यूपी में तलाश रहे है, मगर मैं यहाँ बैठा हूँ पलायन करने के लिए, मुझसे कोई नहीं मिल रहा। मैं इसी देश में मरूँगा, वो लोग और थे जो कराची चले गए।”

नोएडा से बड़ी जीत की तरफ बढ़ रहे हैं राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह, यूपी चुनाव की सबसे बड़ी लीड: कॉन्ग्रेस की पँखुड़ी पाठक चौथे नंबर पर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित नोएडा विधान सभा क्षेत्र पर भी सभी की नजर थी, क्योंकि यहाँ से केंद्रीय रक्षा मंत्री एवं भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह चुनाव लड़ रहे थे। भाजपा के पंकज सिंह नोएडा में एक बड़ी जीत की तरफ बढ़ रहे हैं और उनकी लीड 68,000 से भी अधिक की हो गई है। जहाँ उन्हें 90,000 के आसपास वोट मिले हैं, वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के सुनील चौधरी 21,000 से भी पीछे हैं।

2017 के विधानसभा चुनाव में भी यहाँ पंकज सिंह ने ही जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में पंकज सिंह ने 1,62,417 (64.29%) वोट पाकर इतिहास रच दिया था। वहीं उनके सामने सपा के सुनील चौधरी को तब 58,401 (23.12%) वोटों से संतोष करना पड़ा था। वहीं बसपा के रविकांत मिश्रा 27,365 (10.83%) वोटों पर सिमट कर रह गए थे। वहीं इस बार बसपा के रामकृपाल शर्मा 6000 वोटों पर ही अटके हुए हैं।

कॉन्ग्रेस ने इस सीट से पँखुड़ी पाठक को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वो भी 6031 वोटों पर फ़िलहाल अटकी हुई हैं। बता दें कि पंकज सिंह की लीड फ़िलहाल इस उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सबसे बड़ी लीड है। पूरे उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहाँ भाजपा फ़िलहाल 255 सीटों पर आगे चल रही है और दूसरे नंबर पर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी 113 सीटों पर आगे चल रही है। तीसरे नंबर पर राष्ट्रीय लोक दल (RLD) है, जिसे 9 सीटें आ रही हैं।

बता दें कि इस चुनाव में रालोद का सपा के साथ गठबंधन है। कॉन्ग्रेस को इस चुनाव में खास फायदा होता नहीं दिख रहा है और वो 2 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं बसपा 3 सीटों पर लीड में है।