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‘कहीं मैं मास्टरबेशन तो नहीं कर रही – बाथरूम में झाँक कर देखता था बॉयफ्रेंड’: लड़का से लड़की बनीं सायशा ने बताया

फिल्म एक्ट्रेस कंगना रनौत का रियलिटी शो लॉक अप लगातार सुर्खियों में हैं। कंगना के शो में हाल ही में पूनम पांडे और अंजली अरोड़ा के बाद सायशा शिंदे ने भी अपनी पर्सनल लाइफ की ट्रैजडी को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि वो एक लड़के के साथ रिलेशन में थी, जिसने मेरा शोषण किया था। सायशा शिंदे कहती हैं कि जब भी वो बाथरूम जाती थीं, तो उनका ब्वॉयफ्रेंड बाथरूम के अंदर झाँकता था।

सायशा शिंदे सेक्स चेंज कराने से पहले एक लड़का थीं और उनका नाम स्वप्निल था। कंगना के लॉक अप में सायशा ने अपने साथ हुई बर्बरता के बारे में बताते हुए कहा कि रिलेशनशिप में मेरे साथ केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक दुष्कर्म किया गया, जो एक अलग लेवल का है। उन्होंने कहा, “वो मुझे ऐसा फील करवाता था, जैसे कि मैं कोई गंदगी हूँ।”

सायसा कहती हैं कि उनका ब्वॉयफ्रेंड उनके दरवाजे के बाहर इस इंतजार में रहता था कि किसी को मैं धोखा दूँगी और वो मुझे पकड़ लेगा औऱ उसे मेरे खिलाफ इस्तेमाल करेगा। हद तो तब हो गई कि वो पाइपलाइन पर चढ़ जाता था और वहीं से मेरे बाथरूम में झाँककर ये देखता था कि मैं मास्टर** कर रही हूँ ताकि वो इसे मेरे खिलाफ इस्तेमाल कर सके।

इस मामले से हैरान एक्ट्रेस पायल रोहतगी ने पूछा, “आप मास्ट*** क्यों नहीं कर सकती?” इस पर सायशा कहती हैं कि मैं उस वक्त सेक्स नहीं करना चाहती थी। उस दौरान मुझे लगा था कि शायद वो सही था, क्योंकि मैं उस रिश्ते में कभी खुश नहीं थी। फिजिकली तो मैं बिल्कुल भी खुश नहीं थी। मैं अंदर से महिला थी, जो कि एक समलैंगिक पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बना रही थी।

सायसा 15 साल की थीं, तभी उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि अंदर से एक एक महिला हैं। बाद में 40 साल की उम्र में उन्होंने सर्जरी करवा ली। सायशा फेमस फैशन डिजायनर हैं।

‘AAP’ नहीं जीत रही पंजाब! चुनाव आयोग ने बताया आम आदमी पार्टी के ‘शॉर्टकट’ में क्या है लोचा

पंजाब विधानसभा चुनावों के बीच आम पाठक के तौर पर आप आम आदमी पार्टी के लिए ‘AAP’ शब्द का प्रयोग मीडिया साइट्स पर देख ही रहे होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पंजाब विधानसभा में जीत की ओर तेजी से आगे बढ़ती केजरीवाल की इस Aam Admi Party की शॉर्ट फॉर्म AAP नहीं, बल्कि AAAP है। दिलचस्प बात ये है कि इस संबंध में कभी जानकारी पार्टी ने खुद भी नहीं दी और न ही इससे जुड़ी कोई सूचना पढ़ने को मिलती है। मगर यदि निर्वाचन आयोग की साइट पर जाएँ तो पता चलेगा कि वहाँ हमेशा से ही आम आदमी पार्टी के लिए AAP नहीं आम AAAP प्रयोग होता आया है।

साल 2020 में दिल्ली चुनावों के वक्त टाइम्स ऑफ इंडिया के विश्वा मोहन ने इस बाबत सवाल उठाया था। उन्होंने पूछा था कि आम आदमी पार्टी के लिए निर्वाचन आयोग ने ट्रिपल ‘ए’ का प्रयोग क्यों किया है। क्या ये दिल्ली चुनवावों में कौन जीत रहा है उसे दर्शाता है?

इसी सवाल के जवाब में भारतीय निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता ने कहा था, “शॉर्ट फॉर्म में ट्रिपल A कोई चूक नहीं है। इसी शब्द का प्रयोग साल 2015 के चुनावों के वक्त किया गया था।” उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि आम आदमी पार्टी से पहले ही एक पार्टी ने इस नाम को अपने लिए पंजीकृत करवाया था जबकि आम आदमी पार्टी का पंजीकरण 2013 में हुआ था। उस पार्टी का नाम बता दें आवामी आमजन पार्टी थी जो भारतीय निर्वाचन आयोग में 3 जनवरी 2011 को पंजीकृत हुई थी।

गौरतलब है कि सिर्फ मीडिया, सोशल मीडिया ही नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी खुद भी दल की शॉर्ट फॉर्म aap ही लिखता आया है। चाहे उनके कार्यालय हों, प्रेस कॉन्फ्रेंस हो, मेनिफेस्टो हो। हर जगह आपको उनके चुनाव चिह्न झाड़ू के साथ aap लिखा दिखाई देगा। ये पार्टी साल 2012 में गठित हुई थी और 2013 में इसे निर्वाचन आयोग ने पंजीकृत किया था। पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल हैं जो दिल्ली में सरकार बनाने के बाद अपनी पार्टी को पंजाब तक पहुँचा चुके हैं।

पाँचों राज्यों में बुरी तरह हार रही कॉन्ग्रेस ने शुरू किया EVM का रोना, कार्यकर्ता का विरोध प्रदर्शन: सपा भी उठा चुकी है सवाल

पाँचो चुनावी राज्यों में मतगणना जारी है। रूझानों के मुताबिक पंजाब, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड और गोवा में कॉन्ग्रेस पिछड़ गई है, जिसके बाद कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता सड़क पर ईवीएम के खिलाफ उतर गए हैं। उन्होंने दिल्ली में पार्टी कार्यालय के बाहर ईवीएम का विरोध किया। चुनाव आयोग के ताजा आधिकारिक रुझानों के अनुसार पार्टी सभी पाँच राज्यों में पीछे चल रही है।

बता दें कि पिछले कई दिनों से एक बार फिर ईवीएम के मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साध रहा है। 7 फरवरी को आखिरी चरण का चुनाव खत्म होने के बाद एग्जिट पोल जारी किए गए, जिसमें समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश में करारी हार मिल रही थी। वहीं कॉन्ग्रेस से पंजाब की सत्ता छीनती हुई दिखाई दी, जिसके बाद अखिलेश यादव ने जमकर हमला बोला था।

शुरुआती रुझान के मुताबिक बीजेपी उत्तर प्रदेश में इतिहास रचने जा रही है। मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी एक बार फिर से बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है। बीजेपी ने यहाँ रुझानों में बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया है। उधर उत्तराखंड में भी एक बार फिर से बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है। जबकि पंजाब में आम आदमी पार्टी ने कॉन्ग्रेस का सफाया करते हुए अपनी जीत लगभग तय कर ली है।

उधर मणिपुर में भी बीजेपी ने कॉन्ग्रेस पर अच्छी खासी बढ़त बना ली है। वहीं गोवा में बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच काँटे की टक्कर चल रही है। ताज़ा रुझान के मुताबिक बीजेपी को अब तक यहाँ 17 सीटों पर बढ़त हासिल है। जबकि कॉन्ग्रेस 16 सीटों पर आगे चल रही है। टीएमसी और आम आदमी पार्टी को भी 2-2 सीटों पर बढ़त हासिल है। कुल मिला कर कॉन्ग्रेस गोवा में 11, मणिपुर में 3, पंजाब में 18, यूपी में 3 और उत्तराखंड में 24 सीटों पर आगे है।

‘राजस्थान मर्दों का प्रदेश रहा है यार… रेप के मामले में हम नंबर वन पर…’ – कॉन्ग्रेसी गहलोत सरकार के मंत्री ने हँसते हुए सदन में कही यह बात

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार है। अशोक गहलोत वहाँ के मुख्यमंत्री हैं। वो आए दिन महिला सुरक्षा और कानूनों की बातें तो करते हैं, लेकिन वास्तविकता पर नजर डाला जाए तो जमीनी हकीकत कुछ और ही बयाँ करती है। रेप के मामले में राजस्थान देश में नंबर वन पर काबिज है।

रेप के मामले में राजस्थान के टॉप पर होने का आँकड़ा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NRCB) का है, मीडिया का नहीं। हाल के दिनों में प्रदेश में कई जगह बड़ी संख्या में नाबालिग लड़कियों, मूक-बधिर के साथ रेप की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। ये घटनाएँ प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती हैं।

राजस्थान सरकार ने विधानसभा में ये स्वीकार किया है कि राजस्थान रेप के मामले में देश में नंबर वन पर है। विधानसभा के अंदर महिलाओं के साथ होने वाली ज्यादती पर हँसते हुए संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल कहते हैं:

“रेप के मामले में हम नंबर वन पर हैं, अब ये रेप के मामले क्यों हैं? कहीं न कहीं गलती है। वैसे भी राजस्थान मर्दों का प्रदेश रहा है यार, उसका क्या करें?”

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि इतना कहते ही धारीवाल हँसने लगते हैं और उनके साथ ही पूरी सदन हँसने लगती है। हद तो ये थी कि उस दौरान महिलाओं को लेकर इतने असंवेदनशील तरीके से भाषण देते वक्त किसी भी कॉन्ग्रेसी ने उन्हें टोका तक नहीं।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के 2020 के आँकड़ों के मुताबिक, एक साल में राजस्थान में 5310 महिलाएँ दरिंदगी का शिकार हुई थीं। जबकि इस मामले में उत्तर प्रदेश 2769 केस के साथ दूसरे और 2339 केस के साथ मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर था।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में 1,11,549 महिला अपराधों के ऐसे केस दर्ज किए गए थे, जिनमें महिला पर उनके पति या रिश्तेदारों ने ही अत्याचार किए थे। इसी दौरान अपहरण के 62,300 मामले रजिस्टर हुए थे। शील भंग के 85,392 मामले और रेप की कोशिश के 3,741 मामले दर्ज किए गए थे। इसके अलावा 2020 के दौरान देश भर में एसिड हमले के 105 मामले दर्ज किए गए थे।

NCW ने दी कार्रवाई की चेतावनी

धारीवाल की संवेदहीन टिप्पणी पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, “राजस्थान सरकार में ऐसे मंत्री हैं, इसलिए राज्य की महिलाएँ भीषण लैंगिक अपराधों को झेल रही हैं और पुलिस कुछ नहीं कर रही है। ऐसे मंत्री होंगे तो राज्य की महिलाएँ कैसे सुरक्षित महसूस करेंगी? एनसीडब्ल्यू धारीवाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।”

राजस्थान में महिलाओं/बच्चियों के खिलाफ अपराध का है इतिहास

राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराधों का लंबा इतिहास रहा है। पिछले साल दिसंबर में ही अलवर में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल समेत 9 दरिंदों ने नाबालिग से गैंगरेप किया। इसी तरह से जनवरी 2022 में भी एक मूक-बधिर नाबालिग के साथ गैंगरेप किया गया। उसके शरीर पर नुकीली हथियार से वार किए गए थे। ऐसे ही एक अन्य मामले में भरतपुर के चिकसाना गाँव में 5 साल की बच्ची से दरिंदगी की गई। बाद में पीड़ित के परिवार पर राजीनामे के लिए इतना दबाव बनाया गया कि उन्हें ही गाँव भी छोड़ना पड़ा।

क्या 5वीं बार 300+ का रिकॉर्ड बनाएगा यूपी, रूझानों में BJP बहुमत के पार: कई मिथक तोड़ते दिख रहे हैं CM योगी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है। रूझानों में बीजेपी बहुमत के नंबर को पार कर चुकी है। खबर लिखे जाने तक चुनाव आयोग ने 397 सीटों के रूझान जारी किए थे। इनमें से 249 पर बीजेपी आगे थी। इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण सीट गोरखपुर की है, जहाँ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ रहे हैं। खबर लिखे जाने वे आगे चल रहे थे। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव करहल से उम्मीदवार हैं, करहल में तीसरे राउंड की गिनती के बाद वे 17000 वोटों से आगे चल रहे हैं।

​2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 312 सीटें मिली थी। इन चुनावों में जो सवाल सबसे ज्यादा पूछा गया वह यह है कि क्या बीजेपी फिर 300 सीटें पार करने में कामयाब रहेगी। इस बार ज्यादातर एग्जिट पोल में बीजेपी इस नंबर के पास पहुंचती नहीं दिखी थी। यदि अंतिम नतीजों में बीजेपी 300 के नंबर को पार करने में कामयाब रही तो यह नया रिकॉर्ड होगा।

कब-कब बना 300 प्लस का रिकार्ड

2017 के विधानसभा चुनाव में 403 सीटों में से 312 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के अपने चुनावी इतिहास में सबसे ज्यादा सीटें पाई थी। उत्तर प्रदेश विधानसभा में 300 से ज्यादा सीटें लाने का करिश्मा इससे पहले भी हो चुका है। आजादी के बाद 1951 में हुए सबसे पहले विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 413 सीटों में से 388 सीट पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी। 25 जून 1975 में भारत में आपातकाल की घोषणा हुई थी, 21 मार्च 1977 को आपातकाल हटाया गया। आपातकाल के बाद 1977 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी ने 352 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस की स्थिति बहुत खराब हो गई थी। साल 1980 में कॉन्ग्रेस फिर से मजबूत हुई और 309 सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की

उत्तर प्रदेश की सत्ता में बीजेपी की वापसी सुनिश्चित होते ही राज्य की राजनीति से जुड़े कई मिथक भी टूट जाएँगे। बीते डेढ़ दशक में जो भी राज्य का मुख्यमंत्री बना है वह विधानसभा के बजाय विधान परिषद का सदस्य रहा है। पहले मायावती, फिर अखिलेश यादव और पिछली बार योगी आदित्यनाथ ने इसी परंपरा का निर्वाह किया था। इसी तरह माना जाता रहा है कि जो नेता मुख्यमंत्री रहते नोएडा जाता है उसकी कुर्सी सुरक्षित नहीं रहती। सीएम योगी अपने कार्यकाल में करीब 40 बार नोएडा आए थे।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। बहुमत का आँकड़ा 202 है। 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटें जीती थी। उसे 39.67% मत मिले थे। कॉन्ग्रेस और सपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। सपा को 21.82% वोट के साथ 47 तो कॉन्ग्रेस को 6.25% वोटों के साथ 7 सीटें मिली थी। 22.23% वोट हासिल करने के बावजूद बसपा 19 सीटों पर सिमट गई थी। अन्य के खाते में 5 सीटें गई थी। उससे पहले 2012 में सपा और 2007 के विधानसभा चुनावों में बसपा को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ था।

‘EVM में किसी प्रकार का छेड़छाड़ संभव नहीं, सभी प्रत्याशियों के सामने किया जाता है सील’: मुख्य चुनाव आयुक्त ने आरोपों को नकारा

एक देश एक चुनाव (One Nation One Election) की माँग को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सुशील चंद्र ने ‘अच्छी सलाह’ बताया है। उन्होंने बताया कि इसको लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि यदि ऐसा होता है तो इसके लिए चुनाव आयोग सक्षम और तैयार है। CEC का यह बयान 10 मार्च (गुरुवार) को सामने आया है।

वहीं दूसरी तरफ EVM पर उठ रहे सवालों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने भी जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि EVM में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ संभव ही नहीं है। EVM को सभी राजनैतिक प्रत्याशियों की मौजूदगी में सील किया जाता है। वाराणसी में हुई गलतफहमी के पीछे ADM को दोषी पाया गया क्योंकि उन्होंने सभी प्रत्याशियों को इसकी जानकारी नहीं दी थी। ADM को सस्पेंड कर दिया गया है। पार्टी के सभी सदस्यों को बाद में सील EVM की गिनती करवाई गई और वो सभी संतुष्ट थे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने आगे आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों के बारे में वोटरों को आगाह करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बारे में बताया। इसके लिए ‘Know your Candidate’ एप पर सभी प्रत्याशियों की पूरी जानकारी डाली गई। कुल लगभग 6900 उम्मीदवारों में 1600 आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं।

अपने आगे के बयान में CEC ने कहा, “इस बार पोलिंग स्टेशनों को संभालने के लिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई थी। इसके लिए वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।

250 सीटों पर आगे चल रही है BJP, 12 सीटों के रुझान आने अब भी बाकी: लखीमपुर खीरी में भी BJP का डंका, रायबरेली से अदिति सिंह आगे

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की 18वीं विधानसभा के चुनाव के लिए मतगणना जारी है। शुरुआती रुझान में भाजपा ने बहुमत के आँकड़े को पार कर लिया है। बीजेपी 250 सीटों पर आगे है, सपा को 101 सीटों पर बढ़त मिली है। बसपा 8 और कॉन्ग्रेस 4 सीटों पर आगे चल रही है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ (Yogi Adityanath) गोरखपुर शहर सीट पर 8363 वोटों से आगे चल रहे हैं। सपा की सुभावती गुप्‍ता पिछड़ गई हैं। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) करहल सीट से लीड कर रहे हैं, जबकि भाजपा से बागी होकर सपा का दामन थामने वाले स्‍वामी प्रसाद मौर्य फाजिलनगर विधानसभा सीट पर पिछड़ गए हैं।

रायबरेली में भाजपा की अदिति सिंह आगे चल रही हैं। अदिति सिंह को 17,228 (53.15%) वोट मिले हैं। दूसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी के राम प्रताप यादव हैं। उन्हें 11306 वोट मिले। तीसरे स्थान पर कॉन्ग्रेस के डॉ. मनीष चौहान को 1417 वोट मिले हैं। वहीं बसपा को 888 वोट मिले।

लखीमपुर खीरी जिले की 8 विधानसभा सीटों में से 6 पर बीजेपी आगे चल रही है। 2 सीटों पर सपा प्रत्‍याशी लीड कर रहे हैं। प्रयागराज में भाजपा के हर्षवर्धन बाजपेई आगे चल रहे हैं और सपा के संदीप यादव पिछड़ गए हैं। अलीगढ़ में बीजेपी जहाँ 5 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, वहीं समाजवादी पार्टी के प्रत्‍याशी 2 सीटों पर आगे चल रही है। गोंडा विधानसभा की 7 में से 5 सीटों पर भाजपा प्रत्‍याशी आगे चल रहे हैं। दो सीटों पर सपा उम्‍मीदवार लीड कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। बहुमत का आँकड़ा 202 है। 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटें जीती थी। उसे 39.67% मत मिले थे। कॉन्ग्रेस और सपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। सपा को 21.82% वोट के साथ 47 तो कॉन्ग्रेस को 6.25% वोटों के साथ 7 सीटें मिली थी। 22.23% वोट हासिल करने के बावजूद बसपा 19 सीटों पर सिमट गई थी। अन्य के खाते में 5 सीटें गई थी। उससे पहले 2012 में सपा और 2007 के विधानसभा चुनावों में बसपा को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ था।

मुस्लिम डॉक्टर ने सर्जरी कर लगाया था सुअर का दिल, 2 महीने में ही डेविड की हो गई मौत

जनवरी माह में अमेरिका के जिस व्यक्ति को सुअर का दिल लगाया गया था उस व्यक्ति की मौत हो गई है। मृतक का नाम डेविड बेनेट था। उनकी मौत मंगलवार (8 मार्च) को हुई। उसका इलाज यूनिवर्सिटी आफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर में हुआ था। बेनेट का इलाज करने वाले डॉक्टर का नाम मुहम्मद मोहिउद्दीन है। इस ट्रांसप्लांट के बाद डॉक्टर को अपने परिवार से ही भारी विरोध का सामना करना पड़ा था।

बता दें कि डॉक्टर मोहिउद्दीन ने यह सफल ट्रांसप्लांट 7 जनवरी 2022 (शुक्रवार) को किया था। मानव शरीर में किसी जानवर का दिल सफलतापूर्वक लगाने की यह पहली घटना थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाज के मात्र 2 महीने बाद ही बेनेट की हालत बिगड़ने लगी थी। फ़िलहाल उनकी मौत की सही वजह अभी तक नहीं बताई गई है। मौत के समय बेनेट की उम्र 57 साल की थी।

इलाज के बाद बेनेट धीरे – धीरे स्वस्स्थ हो रहे थे। पिछले महीने वायरल हुए एक वीडियो में उनको फुटबाल का मैच देखते हुए भी देखा गया था। बेनेट ने सर्जरी से पहले कहा था, “मैं जीना चाहता हूँ। मेरे पास हार्ट ट्रांसप्लांट एकमात्र विकल्प था। मेरी सर्जरी अँधेरे में तीर चलाने जैसी है लेकिन यही मेरी अंतिम इच्छा थी।” सर्जरी से पहले कई माह तक बेनेट बाईपास मशीन के सहारे जिन्दा थे।

गौरतलब है कि सुअर का दिल लगाने की सर्जरी में मुख्य भूमिका निभाने वाले डॉ मोहिउद्दीन ने अपने ही परिवार द्वारा खुद को अपमानित किए जाने की बात स्वयं स्वीकारी थी। तब उन्होंने कहा था’ “मेरे अपने ही घर में मेरे विरोध का कारण परिवार वालों की आस्था है। मेरी परवरिश पाकिस्तान के कराची शहर में हुई है। सुअर शब्द आते ही मेरे घर में हंगामा शुरू हो जाता था। मेरी माँ गरारे करने लगती थी। इस दौरान काफी शोर – शराबा मचता था। इसलिए सूअर के अंग को प्रयोग करना मेरे लिए बहुत कठिन काम था। उसे इंसान के शरीर में लगाने में मुझे बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा।”

पंजाब: शुरुआती रूझानों में AAP का डंका, चन्नी-सिद्धू- कैप्टेन सब पीछे; भगवंत मान के घर जश्न शुरू

पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए मणगणना शुरू होने के बाद सभी सीटों पर रुझान आने लगे हैं। अभी तक दिखाए जा रही वोटों की गिनती के मुताबिक राज्य में आम आदमी पार्टी का बोल बाला हो चुका है। वहाँ आप 88 सीटों पर लीड कर रही है। वहीं कॉन्ग्रेस 13 सीट के साथ जीतती दूर-दूर तक नहीं दिख रही है।

भगवंत मान के घर अभी से जश्न मनना शुरू है जबकि कॉन्ग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी चमकौर साहिब और भदौड़ दोनों जगहों से अपने प्रतिद्वंदियों से पीछे चल रहे हैं। आप के भगवंत मान धूरी में 13,482 वोटों से आगे हैं, जबकि कॉन्ग्रेस उम्मीदवार दलवीर सिंह गोल्डी को पहले दौर की मतगणना में 4,762 वोट मिले हैं।

अभी तक की जानकारी के अनुसार, पटियाला सीट पर खड़े कैप्टेन अमरिंदर सिंह 9,600 वोट पाकर आम आदमी पार्टी प्रत्याशी अजीत पाल सिंह कोहली से पीछे हैं जिनके हिस्से अभी तक 19802 वोट आ चुके हैं । इसी तरह मोगा सीट पर कॉन्ग्रेस की ओर से उतारी गईं सोनू सूद की बहन मालविका भी अपने क्षेत्र में AAP प्रत्याशी अमनदीप कौर से बहुत पीछे चल रही हैं। मालविका को यहाँ 4,490 वोट अभी तक प्राप्त हुए हैं। क्षेत्र में यहाँ मालविका तीसरे स्थान पर हैं जबकि अकाली दल की बरजिंदर सिंह बराड़ दूसरे स्थान पर हैं। अमृतसर सीट पर अपनी किस्मत आजमाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू भी इस समय आम आदमी पार्टी जीवनज्योत से पीछे हो रखे हैं।

पंजाब चुनाव

पंजाब के विधानसभा चुनावों में 117 सीटों पर इस बार 72 फीसदी मतदान हुए। यहाँ किसी भी दल को सत्ता में आने के लिए 59 सीटों की जरूरत है। पिछले साल के चुनावों की बात करें तो पंजाब में एग्जिट पोल से उलट परिणाम आए थे। उस समय सत्ता में बैठी अकाली दल जहाँ 18 सीटों पर सिमट गई थी। वहीं कॉन्ग्रेस ने प्रदेश में 10 साल बाद सरकार बनाई थी और उन्हें 77 सीटें मिली थी। वहीं आम आदमी पार्टी जिसे 2022 चुनावों में जीतते हुए दिखाया जा रहा है उस पार्टी ने साल 2017 में 20 सीटें हासिल की थी। साल 2012 में कॉन्ग्रेस ने 46 सीट हासिल की थी और अकाली-भाजपा के हिस्से 68 सीट आई थी। इसके अलावा बता दें कि पिछले वर्ष राज्य में जहाँ 74 फीसद वोट डले थे वहीं इस बार 72 फीसद वोट डले हैं।

उत्तराखंड: रुझानों में BJP बहुमत के पार, CM धामी और कॉन्ग्रेस के हरीश रावत चल रहे हैं पीछे

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है। रुझानों में बीजेपी ने बहुमत हासिल कर लिया है। हालाँकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी खटीमा सीट से पीछे चल रहे हैं। वे इस सीट से 2 बार के विधायक हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस के सीएम चेहरा हरीश रावत भी लाल कुआँ सीट से पीछे चल रहे हैं। राज्य में 60 सीटों पर रुझान आ गए हैं। बीजेपी 37 और कॉन्ग्रेस 18 पर आगे चल रही है, जबकि 5 सीटों पर बसपा समेत अन्य पार्टी के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं।

फोटो साभार: ECI

इन सीटों पर है भाजपा की भाजपा की बढ़त

मंगलौर में बसपा प्रत्याशी सरवत करीम अंसारी दो राउंड की गिनती में करीब 1130 वोटों से आगे चल रहे हैं। यहाँ कॉन्ग्रेस से काजी निजामुद्दीन चुनाव लड़ रहे हैं। कैंट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी सविता कपूर दो हजार मतों से आगे चल रही हैं। सल्ट विधानसभा सीट पर भाजपा 175 से, जागेश्वर में 700 से भाजपा आगे, अल्मोड़ा में 170 से भाजपा आगे, द्वाराहाट में 550 से और रानीखेत में 400 वोट से भजपा आगे है।

उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीट है। बहुमत के लिए 36 सीटें चाहिए। इस बार 65.10 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2017 के विधानसभा चुनावों (65.56) से थोड़ा ही कम है। निर्वाचन आयोग ने 8 जनवरी को चुनावों का ऐलान किया था। 14 फरवरी को मतदान हुआ, जिसमें हरिद्वार में सबसे ज्यादा 67.58 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं नामांकन की बात करें तो पूरे प्रदेश में 750 प्रत्याशियों ने नामांकन किया, जिसमें देहरादून में सबसे ज्यादा प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया। देहरादून जिले की 10 सीटों में कुल 144 लोगों ने नामांकन दाखिल किया। इसी तरह हरिद्वार जिले की 11 सीटों पर 131, उधमसिंह नगर की 9 सीटों पर कुल 89 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया। वहीं सबसे कम नामांकन चंपावत जिले में देखने को मिला यहाँ 3 विधानसभा सीटों को मिलाकर कुल 16 ही प्रत्याशी मैदान में खड़े हैं।