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‘ये PM मोदी के सुशासन की जीत, परिवारवाद-वंशवाद को जनता ने सबक सिखाया’: प्रचंड जीत के बाद पहली बार सामने आए CM योगी

उत्तर प्रदेश चुनाव में बड़ी जीत सुनिश्चित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहली बार कैमरे के सामने आए और उन्होंने भाजपा के अन्य सटी नेताओं के साथ होली भी खेली। इस दौरान उनके साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधा मोहन सिंह और ‘निषाद पार्टी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद भी मौजूद थे। इस दौरान ‘यूपी में हम फिर से भगवा लहराएँगे’ गाने के बीच नेतागण थिरकते हुए नजर आए।

उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य नेताओं को मिठाई खिलाई। लखनऊ स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में जीत का जश्न मनाया गया। सीएम योगी ने कार्यकर्ताओं की तरफ फूल-माला उछाल कर उनका अभिवादन स्वीकार किया। ‘हर हर महादेव’ का नारा भी लगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ज़िंदाबाद के नारे भी लगे। पीएम मोदी पहले भी कह चुके हैं कि इस बार भाजपा की जीत के साथ ही होली 10 दिन पहले ही शुरू हो जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम्’ के नारे के साथ अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि पीएम मोदी के यशस्वी नेतृत्व में आज पूरे देश के अंदर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भाजपा की प्रचंड बहुमत से सरकार बन रही है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के विकास और सुशासन को एक बार फिर से जनता जनार्दन ने अपना आशीर्वाद दिया है। उन्होंने पीएम मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या के मामले में देश का सबसे बड़ा राज्य है, जिस कारण विशेष रूप से पूरे देश-दुनिया की निगाहें इधर थीं। उन्होंने इस दौरान ‘अपना दल (एस)’ और ‘निषाद पार्टी’ जैसी भाजपा की सहयोगी दलों का भी जिक्र किया। उन्होने इस प्रचंड बहुमत के लिए यूपी की जनता को आभार देते हुए कहा कि वो पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का भी अभिनन्दन करते हैं, जिनके नेतृत्व में आज भाजपा को अपने सहयोगी दलों के सात सरकार बनाने का अवसर प्राप्त हुआ है।

सीएम योगी ने कहा कि सात चरणों में हुए यूपी विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए और मतगणना को लेकर कई दिनों से जो भ्रामक दुष्प्रचार चलाए जा रहे थे, उसे जनता ने दरकिनार करते हुए NDA पर भरोसा जताया। उन्होंने चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराने के लिए चुनाव आयोग के अलावा पुलिस-प्रशासन को भी ‘हृदय से धन्यवाद’ दिया। उन्होंने कहा कि इन सभी ने कोरोना महामारी के बावजूद चुनाव को संपन्न कराया।

उन्होंने कहा, “हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं, जिन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थापना और विकास के लिए अपना पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश को पूरा समय दिया। देश के सबसे बड़े राज्य में भाजपा को प्रचंड बहुमत प्राप्त हुआ है। हमारे राष्ट्रवाद, विकास और सुशासन के मॉडल को यूपी की 25 करोड़ जनता ने आशीर्वाद दिया है। हमें इसे स्वीकार आमजनों की आकाँक्षाओं के अनुरूप ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विकास’ के हिसाब से आगे बढ़ाना होगा।”

उन्होंने कहा कि भाजपा की ‘डबल इंजन’ की सरकार ने 5 वर्षों में राज्य में सुरक्षा का माहौल बनाया, विकास के कार्यक्रमों को मजबूती से आगे बढ़ाया और गरीब कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया। बकौल सीएम योगी, इसका परिणाम जनता ने जातिवाद, परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति को तिलांजलि देते हुए भाजपा को जीत देकर दिलाई है। उन्होंने का कि कोरोना के दौरान भी बिना रुके-थके भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं को पीएम मोदी का साथ मिला।

उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी जैसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता के नेतृत्व में जो काम शुरू किया, वो चलता रहेगा। 2 करोड़ लोगों को घर, 45 लाख को आवास, 10 करोड़ लोगों को 5 लाख का बीमा कवर, 15 करोड़ गरीबों को कोरोना संकट में घर तक राशन – ये सब ‘डबल इंजन’ की सरकार ने किया। जब हम कोरोना और भ्रष्टाचार से लड़ रहे थे, तब ये लोग भाजपा के खिलाफ साजिश रचने का काम कर रहे थे। जनादेश ने उन सबको सबक दिखा कर उनकी बोलती बंद करने का काम किया है।”

सीएम योगी ने कहा कि हमें एक बार फिर से साबित करना है कि जनादेश की जिम्मेदारी पर हम फिर से खरा उतरें। उन्होंने इस बात की भी तारीफ की कि कैसे महिलाओं और बहन-बेटियों ने आगे आकर भाजपा को बहुमत दिलाया। उन्होंने कहा कि भाजपा इतिहास बनाने जा रही है और नरेंद्र मोदी जैसे नेता के नेतृत्व में ही इस तरह का बहुमत प्राप्त होता है। उन्होंने प्रदेश स्वतंत्र देव सिंह और दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा के साथ-साथ गठबंधन स्थित संजय निषाद और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों को भी धन्यवाद दिया। ‘जय श्री राम’ के नारे में साथ उन्होंने सम्बोधन का समापन किया।

फतवा वाले देवबंद में फिर खिला कमल, हिंदुओं के पलायन के लिए बदनाम कैराना से सपा के नाहिद हसन जीते

सहारनपुर की देवबंद से एक बार फिर बीजेपी जीतने में कामयाब रही है। वहीं कैराना से सपा के नाहिद हसन फिर से जीते हैं। देवबंद सीट से भारतीय जनता पार्टी के बृजेश सिंह को 93890 (38.77%) वोट मिले है। सपा के कार्तिकेय राणा 86786 (35.83%) वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। इस सीट से बहुजन समाज पार्टी के चौधरी राजेंद्र सिंह 52732 (21.77%) वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे हैं। दारुल उलूम से जुड़े मदनी परिवार के उमेर मदनी को महज 3500 (1.45%) वोट मिले हैं। देवबंद का दारुल उलूम अपने फतवों को लेकर जाना जाता है।

चुनाव परिणाम देवबंद, साभार – निर्वाचन आयोग

2017 में भी बृजेश सिंह इसी सीट से 102244 (44%) वोट पा कर जीते थे। तब उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के माजिद अली को हराया था। माजिद अली को 72844 (32%) वोट मिले थे। तब समाजवादी से माविया अली ने दावेदारी ठोंकी थी, जिन्हें 55385 (24%) वोट मिले थे।

कैराना से भाजपा की हार

शामली की कैराना सीट से एक बार फिर से समाजवादी पार्टी के नाहिद हसन ने 100648 (53.5%) वोट हासिल कर जीत दर्ज की है। उन्होंने भाजपा की प्रत्याशी मृगांका सिंह को लगातार दूसरी बार हराया है। मृगांका को 82963 (44.1%) वोट मिले हैं। तीसरे स्थान पर बसपा के राजेंद्र रहे जिन्हे 1683 वोट मिल पाए। कैराना हिंदुओं के पलायन को लेकर बदनाम रहा है। हालाँकि योगी सरकार के जमाने में कई परिवारों ने दोबारा से यहाँ वापसी की है।

परिणाम कैराना विधानसभा, साभार – निर्वाचन आयोग

साल 2017 में इस सीट से सपा प्रत्याशी नाहिद हसन ने 98830 (47.26%) वोट पा कर जीत दर्ज की थी। तब सपा और कॉन्ग्रेस का गठबंधन था। वहीं दूसरे नंबर पर रहीं भाजपा प्रत्याशी मृगांका को 77668 (37.14%) वोट प्राप्त हुए थे। रालोद के अनिल कुमार 19,992 (9.56%) वोट पा कर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार नाहिद हसन को चुनाव से ठीक पहले जेल जाना पड़ा था। माना जा रहा है कि कड़े मुकाबले में उन्हें इसका लाभ मिला है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। बहुमत का आँकड़ा 202 है। बीजेपी इस बार भी बहुमत प्राप्त करती दिख रही है। 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटें जीती थी। उसे 39.67% मत मिले थे। कॉन्ग्रेस और सपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। सपा को 21.82% वोट के साथ 47 तो कॉन्ग्रेस को 6.25% वोटों के साथ 7 सीटें मिली थी। 22.23% वोट हासिल करने के बावजूद बसपा 19 सीटों पर सिमट गई थी। अन्य के खाते में 5 सीटें गई थी। उससे पहले 2012 में सपा और 2007 के विधानसभा चुनावों में बसपा को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ था।

उत्तराखंड में जीत रही बीजेपी: 6000 वोटों से हारे सीएम पुष्कर सिंह धामी, कॉन्ग्रेस के हरीश रावत को भी 16000 वोटों से मिली मात

उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों (Uttarakhand Assembly Election-2022) के लिए मतगणना लगातार जारी है। रुज्ञानों से ये स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में भाजपा दोबारा से सरकार बना रही है, लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) प्रदेश की खटीमा सीट से चुनाव हार गए हैं। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत (Harish Rawat) भी लालकुआँ विधानसभा सीट से चुनाव हार गए हैं। उन्हें भाजपा के उम्मीदवार मोहन सिंह बिष्ट ने करीब 16000 वोटों के बड़े अंतर से पटखनी दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खटीमा विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस के भुवन कापड़ी ने 6000 वोटों के अंतर से हराया। लेकिन बावजूद इसके बीजेपी ने प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया है। चुनाव आय़ोग के मुताबिक, बीजेपी पहाड़ी राज्य में 47 सीटों पर आगे चल रही है। जीत का ये आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है। यहाँ कॉन्ग्रेस केवल 19 सीटों पर सिमटती दिख रही है। जबकि 2 सीटें खबर लिखे जाने तक अन्य के खाते में जाती दिख रही हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में 2017 में जब बीजेपी की सरकार बनी तो उस दौरान त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था। लेकिन उनकी कार्यशैली से पार्टी में अंदरूनी तौर पर विरोध के स्वर उठे, जिसके बाद चार साल बाद त्रिवेंद्र रावत की जगह तीरथ रावत को सीएम बनाया गया। हालाँकि, उनकी बयानबाजियों ने पार्टी असहज स्थिति में ला दिया। ऐसा प्रतीत होने लगा था कि राज्य में बीजेपी 20 सीटों तक सिमट सकती है। इन हालातों से निपटने के बाद तीसरी बार पुष्कर सिंह धामी को सीएम बनाया। हुआ भी यही कि 8 महीने के अथक परिश्रम के बाद धामी ने बीजेपी को फिर से फाइट में ला दिया। बहरहाल अब उनके चुनाव हारने के बाद इस बात का सवाल खड़ा हो गया है कि राज्य के अगले सीएम कौन होंगे? इस बात का पता तो चुनाव के बाद ही पता चल सकेगा।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीट है। बहुमत के लिए 36 सीटें चाहिए। इस बार 65.10 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2017 के विधानसभा चुनावों (65.56) से थोड़ा ही कम है।

विजयी उम्मीदवार अब मना सकेंगे जश्न, चुनाव आयोग ने हटाया कोरोना के कारण लगा प्रतिबंध: पर निर्देशों का करना होगा पालन

5 राज्यों में चल रहे विधासभा चुनाव की मतगणना के बीच चुनाव आयोग ने विजय जुलूस पर लगी पाबंदी हटा ली है। कोरोना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ये नए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार ये निर्णय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर के लिया गया है। नए नियम के अनुसार अब जीते प्रत्याशियों को जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रबंधन संस्थाओं के दिशा निर्देशों का पालन करना होगा। यह निर्णय 10 मार्च, 2022 (गुरुवार) को लिया गया है।

चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए पत्र के मुताबिक, “चुनाव आयोग ने 8 जनवरी 2022 को उत्तर प्रदेश, पंजाब, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों की घोषणा की थी। तब कोरोना की गंभीरता को देखते हुए विजय जुलूस के लिए गाइडलाइन जारी की गई थी। अब कोविड की स्थिति में काफी सुधार हुआ है।”

गौरतलब है कि 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम में भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में काफी मजबूत स्थिति में चल रही है। इन सभी राज्यों में भाजपा द्वारा सरकार बनाने का दावा किया जा रहा है। पंजाब में आम आदमी पार्टी स्पष्ट बहुमत की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है।

‘बुलडोजर’ की हवा में बाहुबलियों की भी हालत टाइट, हार रहा है मुख्तार अंसारी का बेटा भी

उत्तर प्रदेश में वोटों की गिनती जारी है। एक बार फिर से भाजपा बहुमत के साथ सरकार बनाती दिख रही है। अब तक आए रूझान से साफ है कि इस बार यूपी के चुनावों में बाहुबली और उनके परिवार से जुड़े लोग वैसी छाप नहीं छोड़ पाए हैं जैसा पिछले कई चुनावों में लगातार दिखा था।

अब्बास अंसारी

मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी मऊ सदर विधानसभा सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (Suheldev Bharatiya Samaj Party) के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। फिलहाल वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अशोक सिंह से करीब 9 हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं। बता दें कि मऊ सदर सीट मुख़्तार अंसारी की परंपरागत सीट रही है। मुख्तार अंसारी इस सीट से जेल में रहते हुए भी चुनाव जीतते रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में अब्बास अंसारी बसपा के टिकट पर घोसी सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे और उनकी हार हुई थी। इस बार भी अभी तक सामने आए रुझानों में अब्बास अंसारी हार की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

राजा भैया

राजा भैया प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से चुनाव मैदान में हैं। राजा भैया आगे चल रहे हैं। उनकी जीत भी करीब तय दिख रही। लेकिन पिछले चुनावों की तरह वह जीत की मार्जिन का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने में इस बार कामयाब होते नहीं दिख रहे।

मल्हनी सीट पर धनंजय सिंह का हाल

धनंजय सिंह मल्हनी सीट पर पीछे चल रहे हैं। धनंजय सिंह जेडीयू के टिकट पर मैदान में हैं तो सपा से पूर्व कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव दोबारा मैदान में उतरे हैं। बीजेपी ने इस सीट पर पूर्व सांसद डॉक्टर केपी सिंह और कॉन्ग्रेस ने पुष्पा शुक्ला तो बसपा ने शैलेंद्र यादव को मैदान में उतारा है। 

जेल से ही चुनाव लड़ रहे विधायक विजय मिश्रा 

भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा से लगातार चार बार के विधायक बाहुबली विधायक विजय मिश्रा इस बार जेल से चुनावी मैदान में हैं। आगरा जेल में बंद विधायक विजय मिश्रा प्रगतिशील मानव समाज पार्टी से प्रत्याशी हैं। बीजेपी ने विपुल दुबे, सपा ने रामकिशोर बिंद, बसपा ने उपेंद्र सिंह और कॉन्ग्रेस ने सुरेश चंद्र मिश्रा को प्रत्याशी बनाया है। अभी तक की मतगणना में विजय मिश्रा तीसरे नंबर पर चल रहे हैं हैं। भाजपा समर्थित निषाद पार्टी के उम्मीदवार विपुल दुबे पहले नंबर पर हैं। 

फूलपुर पवई सीट पर रमाकांत यादव का हाल

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में सपा की असल परीक्षा होनी है, लेकिन जिले में सभी की निगाहें फूलपुर पवई सीट पर है। 2017 में इस सीट पर बीजेपी से अरुणकांत यादव विधायक बने थे, लेकिन इस बार उनके पिता पूर्व सांसद रमाकांत यादव सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। रमाकांत यादव को 50855 वोट मिला है। जबकि बीजेपी प्रत्याशी को 36664 वोट मिला है।

पिंडरा सीट पर बाहुबली अजय राय

वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट पर भाजपा विधायक अवधेश सिंह दूसरी बार मैदान में हैं। लेकिन इस सीट पर सबकी निगाहें कॉन्ग्रेस प्रत्याशी बाहुबली अजय राय को लेकर टिकी हुई हैं। अजय राय को अवधेश सिंह ने 2017 में हरा दिया था। बीजेपी के अवधेश कुमार सिंह 38710 वोटों के साथ पहले नंबर पर हैं, जबकि अजय राय तीसरे नंबर पर हैं।

गोरखपुर शहरी क्षेत्र में 1 लाख से भी अधिक वोटों से जीते CM योगी आदित्यनाथ, चंद्रशेखर ‘रावण’ की जमानत जब्त

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर शहरी विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख से भी अधिक वोटों से जीत दर्ज की है। वहीं उनके खिलाफ ‘आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम)’ से चुनाव लड़ रहे चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ़ ‘रावण’ की जमानत जब्त हो गई है। गोरखपुर ही सीएम योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि रही है और यहीं के गोरखनाथ मंदिर के वो महंत भी हैं। भाजपा की जीत के बाद राज्य में उनका फिर से मुख्यमंत्री बनना तय है।

उधर नोएडा में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह ने 1.79 लाख वोटों से जीत दर्ज कर के अब तक के सारे रिकॉर्ड्स ध्वस्त कर दिया है। इससे पहले ये रिकॉर्ड महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और NCP नेता अजीत पवार के नाम था, जिन्होंने 1.65 लाख मतों से जीत दर्ज की थी। उन्हें 2 लाख से भी अधिक वोट प्राप्त हुए। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी यहाँ पंकज सिंह ने ही जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में भी पंकज सिंह ने 1,62,417 (64.29%) वोट पाकर इतिहास रच दिया था।

वहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस की खस्ता हालत पर तंज कसा है। प्रियंका गाँधी के लिए उन्होंने कहा, “राजनीतिक विशेषज्ञों के लिए ये रूचि का विषय होगा कि प्रियंका जी यूपी में कॉन्ग्रेस में जान फूँकने आई थीं और पूरी पार्टी को ही फूँक कर चली गईं।” केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि ये सब पीएम मोदी और उनकी योजनाएँ के साथ यूपी में यशस्वी नेतृत्व देने वाली योगी आदित्यनाथ की सरकार के कारण ही संभव हुआ है। उन्होंने दावा किया कि साल 2024 में एक बार फिर से पीएम मोदी की ही सरकार बनेगी। इसके बाद उन्होंने प्रियंका गाँधी को लेकर अपनी टिप्पणी दी।

‘पार्टी में जान फूँकने आई थीं, पार्टी फूँक कर चली गईं’ : प्रियंका गाँधी पर स्मृति ईरानी का तंज, बोलीं- 2024 में भी जीतेंगे

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में 276 सीटों पर आगे चल रही भारतीय जनता पार्टी की जीत अब साफ हो गई है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनेताओं में खुशी का माहौल है। इसी क्रम में मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी एबीपी न्यूज से जुड़ीं। उन्होंने अपनी पार्टी की जीत की वजह मातृशक्ति और कानून व्यवस्था को लेकर उठाए कदमों को बताया। साथ ही प्रियंका गाँधी पर भी तंज कसा।

स्मृति ईरानी ने प्रियंका गाँधी के लिए कहा, “राजनीतिक विशेषज्ञों के लिए ये रूचि का विषय होगा कि प्रियंका जी यूपी में कॉन्ग्रेस में जान फूँकने आई थीं और पूरी पार्टी को ही फूँक कर चली गईं।”

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि ये सब पीएम मोदी और उनकी योजनाएँ के साथ यूपी में यशस्वी नेतृत्व देने वाली योगी आदित्यनाथ की सरकार के कारण ही संभव हुआ है। उन्होंने दावा किया कि साल 2024 में एक बार फिर से पीएम मोदी की ही सरकार बनेगी। इसके बाद उन्होंने प्रियंका गाँधी को लेकर अपनी टिप्पणी दी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में 403 सीट पर मुकाबला हो रहा है। सत्ता बनाने के लिए किसी भी दल को कम से कम 202 सीट चाहिए और भाजपा अकेले यहाँ बहुमत का आँकड़ा पार करते हुए 276 सीट हासिल कर चुकी है। वही समाजवादी पार्टी की झोली में 120 सीटें, बसपा में 4, कॉन्ग्रेस में 2 सीट आती दिख रही है। कॉन्ग्रेस का ये हाल तब है जब उन्होंने राज्य में हाथरस से लेकर किसान आंदोलन तक के मुद्दे पर राजनीति करने का कोई मौका नहीं छोड़ा।

याद दिला दें कि साल 2017 में भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ 312 सीट हासिल की थी। उन्हें 39.6 फीसद वोट प्राप्त हुए थे। वहीं राहुल गाँधी और अखिलेश यादव साथ आने के बाद भी सत्ता नहीं हासिल कर पाए थे। पिछले चुनावों में सपा को 21.82 फीसद वोट मिले थे जबकि कॉन्ग्रेस को 6.25 % वोटो के साथ 7 सीट मिल पाई थी। इसी तरह मायावती की बसपा को सिर्फ 18 सीटों पर संतुष्ट होना पड़ा था। मालूम हो कि साल 2017 में चुनावों के दौरान जिन्हें भाजपा ने धूल चटाई वह 2012 और 2007 के चुनावों में स्पष्ट बहुमत से सरकार में आए थे।

1.80 लाख वोटों से जीत कर राजनाथ सिंह के बेटे ने नोएडा में रचा इतिहास, देश में अब तक की सबसे बड़ी विधानसभा जीत

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह ने 1.79 लाख वोटों से जीत दर्ज कर के अब तक के सारे रिकॉर्ड्स ध्वस्त कर दिया है। इससे पहले ये रिकॉर्ड महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और NCP नेता अजीत पवार के नाम था, जिन्होंने 1.65 लाख मतों से जीत दर्ज की थी। उन्हें 2 लाख से भी अधिक वोट प्राप्त हुए।

2017 के विधानसभा चुनाव में भी यहाँ पंकज सिंह ने ही जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में पंकज सिंह ने 1,62,417 (64.29%) वोट पाकर इतिहास रच दिया था। वहीं उनके सामने सपा के सुनील चौधरी को तब 58,401 (23.12%) वोटों से संतोष करना पड़ा था। वहीं बसपा के रविकांत मिश्रा 27,365 (10.83%) वोटों पर सिमट कर रह गए थे। वहीं इस बार बसपा के रामकृपाल शर्मा वोटों पर ही अटके हुए हैं।

कॉन्ग्रेस ने इस सीट से पँखुड़ी पाठक को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वो भी 6031 वोटों पर फ़िलहाल अटकी हुई हैं। बता दें कि पंकज सिंह की लीड फ़िलहाल इस उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सबसे बड़ी लीड है। पूरे उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहाँ भाजपा फ़िलहाल 255 सीटों पर आगे चल रही है और दूसरे नंबर पर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी 113 सीटों पर आगे चल रही है। तीसरे नंबर पर राष्ट्रीय लोक दल (RLD) है, जिसे 9 सीटें आ रही हैं।

बता दें कि इस चुनाव में रालोद का सपा के साथ गठबंधन है। कॉन्ग्रेस को इस चुनाव में खास फायदा होता नहीं दिख रहा है और वो 2 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं बसपा 3 सीटों पर लीड में है।

कठमुल्ला.. आलिया-मालिया-जमालिया… ‘2024 भूल जाए विपक्ष, 2029 की तैयारी करे’: निराश राना अय्यूब ने भारत को बता दिया ‘नैतिक रूप से भ्रष्ट’

उत्तर प्रदेश सहित चार राज्यों में भाजपा की बड़ी जीत के बाद अब कट्टर इस्लामी गिरोह के पत्रकारों को भी खासी निराशा हो रही है। इस सूची में नया नाम राना अय्यूब का जुड़ा है, जिन्होंने ट्विटर के माध्यम से लिखा, “मुझे लगता है कि हमें इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा कि 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे पता चल चुके हैं। विपक्षी दलों को 2029 के लिए तैयारी शुरू करने की ज़रूरत है।” राना अय्यूब ने इस ट्वीट पर रिप्लाइज ऑफ कर के रखा है।

बता दें कि भाजपा उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत हासिल कर रही है और बाकी के चार राज्यों गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में भी उसी की सरकार बनती दिख रही है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने दावा किया कि पाँच राज्यों के चुनाव में आए नतीजों का विश्लेषण करने पर जो मुख्य बातें पता चलती हैं, वो काफी भ्रम में डालने वाली हैं। उन्होंने AAP का विरोध करती हुई एक ट्वीट को भी आगे बढ़ाया, जिसमें अरविंद केजरीवाल की पार्टी को सत्ता के लिए मुस्लिमों का विरोधी बताया गया है।

उन्होंने AAP का विरोध करते हुए एक अन्य ट्वीट को भी रीट्वीट किया, जिसमें कहा गया था कि राजधानी में सरकार चला रही इस पार्टी के लिए अब दिल्ली में प्रदूषण के लिए कोई बहाना नहीं होगी। राना अय्यूब ने लिखा, “कृपया मुझे ये नहीं कहिए कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण ने इस चुनाव में कोई भूमिका नहीं निभाई। केंद्रीय गृह मंत्री ने ‘कठमुल्ला, आलिया-मालिया-जमालिया’ जैसी बातें की। फाँसी पर लटके मुस्लिमों की तस्वीर वायरल की गई। ये एक बड़ा फैक्टर है।”

देश पर ही गुस्सा निकाल रही हैं राना अय्यूब

राना अय्यूब ने खुद के ही बयान वाले एक ट्वीट को आगे बढ़ाया। इसमें लिखा है, “जैसा कि राना अय्यूब ने कहा था, एक नैतिक रूप से भ्रष्ट राज्य में वायरस के लिए मारने को बचा ही क्या है?” उधर आरफा खानुम शेरवानी अब इस बात पर शो कर रही हैं कि जिस तरह का ‘आक्रोश’ लोगों में था, वो नतीजों में परिलक्षित नहीं हो रहा है। उन्होंने नया नैरेटिव फैलाया कि ‘योगी बनाम मोदी’ की प्रतियोगिता का क्या मकसद है?

‘रूस-यूक्रेन युद्ध अल्लाह का कहर’: आतंकी संगठन ISIS ने कहा- मुस्लिम इससे दूर रहें, यह काफिरों का खात्मा कर देगा

रूस औऱ यूक्रेन के बीच जब से युद्ध शुरू हुआ था, उसके बाद से बड़े पैमाने पर तबाही मची हुई है। अब इस मामले में कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस (ISIS) ने भी अपना प्रोपेगेंडा वॉर चालू कर दिया है। ISIS ने इस युद्ध को लेकर कहा कि यह युद्ध अल्लाह को न मानने वाले (काफिरों का), इस्लाम के दुश्मनों का खात्मा कर देगा।

आतंकी संगठन ने अपने वीकली अखबार अल-नाबा द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में युद्ध के हालात को ‘पश्चिम के खिलाफ अल्लाह का कहर’ करार दिया है। इसमें लिखा गया, “रूस औऱ यूक्रेन के बीच जिस तरह का खूनी युद्ध आज हो रहा है वो अल्लाह का अजाब है। इसका कुरान में भी जिक्र किया गया है।” इसमें आगे कहा गया, “चाहे यह युद्ध लंबा हो या छोटा, लेकिन रूसी-यूक्रेनी युद्ध अपराधी देशों के बीच अगले युद्धों का आगाज है। ये जो मौतों और विनाश की छोटी सी तस्वीर दिखाई दे रही है ये उन हालातों की बानगी है, जिसमें बड़े भयावह युद्ध होते हैं।”

आईएसआईएस के अल नाबा न्यूज लेटर का स्क्रीनशॉट

ISIS लिखता है, “क्रूसेड बनाम क्रूसेडर का युद्ध तो अभी अपने पहले चरण में है। या अल्लाह इन युद्धों को जारी रख और इनके दिलों में खौफ भर दे।” आतंकी संगठन का दावा है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का बड़ा ही भयानक परिणाम होगा। यहीं नहीं इस्लामिक संगठन का मानना है कि इस युद्ध को लेकर किसी को चौकने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह तो अमेरिका की ‘समर्थन और नियंत्रण’ की नीति का परिणाम है। ये युद्ध पूर्वी यूरोप के देशों पर अपना अधिपत्य जमाने में लगे अमेरिका और रूस के बीच जद्दोजहद का अंजाम है।

गौरतलब है कि सीरिया में जब गृहयुद्ध चल रहा था तो उस दौरान रूस के साथ ही यूक्रेन भी आईएसआईएस के खिलाफ लड़ रहा था। उस वक्त रूस सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद का समर्थन किया था, जबकि यूक्रेन उस वैश्विक गठबंधन का हिस्सा था जिसने सीरिया में आतंकी संगठन को हराया था।

वहीं आईएसआईएस ने मुस्लिमों से इस युद्ध में हिस्सा नहीं लेकर पूरी तरह से तबाही की कामना की है। खास बात ये है कि रूस ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए चेचन्या के मुस्लिम लड़ाकों को तैयार किया था, लेकिन इस्लामिक संगठन ने उसे ‘इस्लाम के खिलाफ जाती मिलिशिया’ करार दिया है। बता दें कि यूक्रेन के खिलाफ रूस ने 24 फरवरी 2022 को मिलिट्री ऑपरेशन का ऐलान किया था। अब इस युद्ध के 15 दिन बीत चुके हैं।