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अयोध्या डीएम आवास का बोर्ड भगवा से हुआ हरा, सोशल मीडिया में तस्वीर वायरल: जानिए क्या कह रहे IAS नीतीश कुमार

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बीच ही अयोध्या में जिलाधिकारी नीतीश कुमार के आवास के बोर्ड का रंग बदल दिया गया है। जिलाधिकारी का यह बोर्ड जहाँ पहले भगवा हुआ करता था और वहीं आज अचानक बोर्ड को हरा कर दिया गया। जिसे लेकर सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग तरह-तरह की अफवाहें फैला रहे हैं। इधर बोर्ड का रंग बदलते देर नहीं हुई कि सरकार बदलने की अफवाह उड़ने लगी और सोशल मीडिया पर सपा समर्थकों और नेताओं द्वारा तस्वीरें शेयर की जाने लगीं तो प्रशासन के कान खड़े हो गए।

क्या है मामला

दरअसल, डीएम आवास इस समय अस्थाई रूप से पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस में शिफ्ट हो गया है, क्योंकि डीएम आवास जर्जर हो जाने कारण उसकी मरम्मत हो रही है। लेकिन यहाँ चर्चा का विषय यह है कि जिस समय डीएम आवास पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस में शिफ्ट हुआ था, उस समय बोर्ड का रंग भगवा रखा गया था लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि बोर्ड का रंग बदल कर हरा कर दिया गया। अब इसे ही लेकर चुनाव समाप्त होने से पहले ही कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। सपा के नेता इसे योगी सरकार की विदाई कह कर प्रचारित कर रहे हैं। जिसके कुछ स्क्रीनशॉट आप यहाँ देख सकते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों का स्क्रीनशॉट

बता दें कि साल पहले यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद ही डीएम आवास के साथ बसों व सरकारी कार्यालयों के बोर्ड भगवा रंग के कर दिए गए थे। इसके पहले अखिलेश सरकार के दौरान सरकारी रंग लाल व हरा में बदला गया था। ऐसे में बिना सत्ता परिवर्तन के रंगों की सियासत के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कुछ लोग इसे सत्ता में बैठे पुराने लोगों की शरारत भी बता रहे हैं।

रंग बदले जाने पर ऑपइंडिया ने की डीएम से बात

बोर्ड के रंग बदलने को लेकर डीएम नीतीश कुमार ने ऑपइंडिया को फोन पर बताया कि हमारा आवास इस समय पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस में अस्थाई रूप से है, जिसका बोर्ड अचानक पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने हरा रंग कर दिया। डीएम ने आगे बताया कि उनकी नजर भी वायरल हो रहे कई पोस्ट पर गई है। जिसके बारे में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि पीडब्ल्यूडी की कलर नीति के तहत ही बोर्ड का रंग बदला गया है। सभी डाक बंगलों व विभागीय बोर्ड हरे रंग के किए जा रहे हैं। डीएम आवास के डाक बंगले का बोर्ड का रंग भी उसी के तहत बदला गया है।

हालाँकि, डीएम नीतीश कुमार भी यहाँ पशोपेश की अवस्था में नजर आ रहे हैं और इस रंग परिवर्तन के लिए पीडब्ल्यूडी को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि जब प्रदेश में चुनाव चल रहे हों, अभी दो चरण मतदान के बाकी हैं, ऐसे में डीएम आवास के बोर्ड का रंग बदलना कितना जायज था? ऐसे नाजुक वक्त में पीडब्ल्यूडी विभाग ने ऐसा कदम क्यों उठाया? अब देखना यह है कि ऐसे कदम पर क्या चुनाव आयोग संज्ञान लेकर कोई एक्शन लेता है?

गौरतलब है कि सिविल लाइंस में स्थित जिलाधिकारी के मूल आवास को अब तोड़ दिया गया है। लगभग चार महीने पूर्व जिलाधिकारी का आवास बस स्टेशन के सामने स्थित पीडब्ल्यूडी का डाक बंगला बना दिया गया। तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज कुमार झा का आवास जब यहाँ शिफ्ट हुआ तो जिलाधिकारी के आवास का बोर्ड भगवा रंग का था।

जानिए उस बीमारी के बारे में, जिसने ले ली माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्य नडेला के जवान बेटे की जान: ऐसे हो सकता है बचाव, ये हैं लक्षण

माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला (Satya Ndela) के बेटे जैन नडेला (Zain Ndella) की मौत हो गई है। जैन की उम्र 26 साल थी। जैन जन्म के बाद से ही सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) से पीड़ित थे। माइक्रोसॉफ्ट ने अपने एक्सीक्यूटिव स्टाफ को एक ईमेल के जरिए इस बात की जानकारी दी। 

जैन का इलाज चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल में चल रहा था। जैन की मौत के बाद हॉस्पिटल के सीईओ जेफ स्पेरिंग ने बोर्ड से एक मैसेज में कहा, “जैन को म्यूजिक की पसंद के लिए याद किया जाएगा। उनकी शानदार मुस्कान से हर उस इंसान को खुशी मिलती थी, जो उनसे प्यार करते थे।” ऐसे में आइए जानते हैं क्या है सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy)। विस्तार से जानते हैं इस बीमारी के बारे में- 

क्या है सेरेब्रल पाल्सी

सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क और माँसपेशियों से जुड़ी एक समस्या होती है। यह बच्चों में होने वाला एक ऐसा न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर होता है, जिससे मरीज की चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित होती है। इससे बच्चों के मस्तिष्क और माँसपेशियों के पर जन्म से पहले या बाद भी असर पड़ जाता है। ये बीमारी संक्रामक नहीं होती है। यह मस्तिष्क में हुए किसी डैमेज के कारण होती है। इस बीमारी के लक्षण सभी में अलग-अलग नजर आते हैं। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) द्वारा हाल ही में जनसंख्या-आधारित अध्ययन के अनुसार, सेरेब्रल पाल्सी प्रति 1,000 बच्चों में से लगभग 4 में इसके लक्षण नजर आते हैं।

सेरेब्रल पाल्सी के कारण: सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क के असामान्य विकास या विकासशील मस्तिष्क को नुकसान के कारण होता है। यह आमतौर पर बच्चे के जन्म से पहले होता है, लेकिन यह जन्म के समय या उसके तुरंत बाद भी हो सकता है। कई मामलों में, इसका कारण अज्ञात होता है। सेरेब्रल पाल्सी के संभव कारणों में ये शामिल हैं- 

  • गर्भावस्था की शुरुआत में संक्रमण जो विकासशील भ्रूण को प्रभावित करते हैं।
  • भ्रूण के विकासशील मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति सही से ना हो पाना। 
  • प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे के दिमाग में रक्तस्राव।
  • भ्रूण को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन ना मिल पाना।
  • मोटर वाहन दुर्घटना में या गिरने से शिशु के सिर में चोट लगना।
  • गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के आसपास सूजन होना। 

सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण

सेरेब्रल पाल्सी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग नजर आते हैं। किसी-किसी में इस बीमारी का असर पूरे शरीर में देखने को मिलता है जबकि कुछ लोगों में यह बीमारी शरीर के कुछ हिस्सों को ही प्राभावित करती है। आइए जानते हैं इस बीमारी के लक्षणों के बारे में-

  • माँसपेशियों में खिंचाव होना। 
  • माँसपेशियों में सिकुड़न होना।
  • शरीर का एक हिस्सा दूसरे के मुकाबले कम उपयोग कर पाना।
  • खाना खाने या निगलने में तकलीफ होना।
  • बोलने में कठिनाई या शब्द काफी मुश्किलों से निकल पाना।
  • अत्यधिकतर लार का आना।
  • घुटनों को अंदर की तरफ मोड़कर चलना।
  • चलने में कठिनाई होना।
  • माँसपेशियों में संतुलन की कमी।

बच्चे के जन्म से पहले महिलाओं को रखना चाहिए किन बातों का ध्यान

अधिकतर मामलों में सेरेब्रल पाल्सी को रोका नहीं जा सकता है लेकिन इसका पता लगाकर इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। ऐसे में कुछ कदम उठाकर आप इस बीमारी की जटिलताओं को कम कर सकते हैं।

गर्भवती महिलाएँ रखें अपना ख्याल

बच्चे को सेरेब्रल पाल्सी के खतरे से बचाने के लिए माँ का स्वस्थ रहना काफी जरूरी होता है। जरूरी होता है कि गर्भावस्था के दौरान महिला अपने खानपान का खास ख्याल रखें और खुश रहे। 

टीकाकरण का रखें खास ध्यान

गर्भावस्था क दौरान महिलाओं को कई तरह के टीकाकरण लगाए जाते हैं जो उनके और होने वाले बच्चे की सेहत के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में टीकाकरण का खास ख्याल रखें। 

डिलीवरी से पहले और शुरुआत में रखें ख्याल

प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर के पास नियमित जाँच के लिए जाएँ। नियमित जाँच से आपको और भी कई तरह की समस्याओं का पहले से पता चल जाता है जिसे समय पर ठीक किया जा सकता है। 

‘तिरंगे के कारण हम ज़िंदा हैं’: यूक्रेन से लौटी छात्रा के परिवार ने PM मोदी को दिया धन्यवाद, कहा – ’24 घंटे में सरकार ने लिया एक्शन’

यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों को वापस निकालने के लिए भारत सरकार ‘ऑपरेशन गंगा’ चला रही है, जिसके तहत अब तक एक दर्जन फ्लाइट्स वहाँ से नागरिकों को लेकर वापस आई है। यूक्रेन के 4 पड़ोसी देशों में चार केंद्रीय मंत्रियों को भेजा गया है, ताकि बेहतर समन्वय के साथ उन छात्रों को वापस निकाला जा सके। साथ ही यहाँ पहुँचने वाले छात्रों का भी स्वागत केंद्रीय मंत्री कर रहे हैं। हमने यूक्रेन से वापस आई एक ऐसी ही छात्रा से जाना कि वहाँ क्या स्थिति है और भारतीय दूतावास कैसे मदद कर रहा है।

हमने बात की आगरा के दयालबाग स्थित राहुल विहार में रहने वाले कृष्णवीर सिंह सिकरवार की पत्नी साक्षी सिकरवार से, जो रविवार (27 फरवरी, 2022) को यूक्रेन से दिल्ली लौटी हैं। पिता कृष्णवीर सिंह सिकरवार ने बताया कि जैसे ही पता चला कि यूक्रेन में हमला हुआ है, घर में सबकी हालत काफी खराब हो गई थी। उन्होंने बताया कि परिवार वालों को बेटी की काफी चिंता होने लगी थी। इसके बाद परिवार ने आगरा के जिलाधिकारी से संपर्क किया, जिन्होंने इस बार को भारतीय दूतावास में रखा।

कृष्णवीर सिंह सिकरवार ने बताया कि इसके बाद त्वरित कार्यवाही हुई और 24 घंटे के भीतर उनकी बेटी के बाद आधिकारिक सन्देश पहुँच गया कि उन्हें वहाँ से भारत वापस लाया जाएगा। इसके बाद साक्षी को यूक्रेन से रेस्क्यू किया गया। कृष्णवीर सिंह सिकरवार ने कहा, “भारतीय दूतावास और मेरी बेटी जिस यूनिवर्सिटी में पढ़ रही हैं, उन दोनों का समन्वय इतना अच्छा रहा कि तुरंत सब कुछ हो गया। हमें इसकी बहुत ख़ुशी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय दूतावास ने हमारी परेशानी को इतनी जल्दी समझा।”

बता दें कि साक्षी पश्चिमी यूक्रेन में स्थित ऊजहोरोद शहर के ‘Uzhhorod National University (ऊजहोरोद नेशनल यूनिवर्सिटी)’ में पढ़ाई करती हैं। कृष्णवीर सिंह सिकरवार ने बताया कि पहली ही फ्लाइट में उनकी बेटी वापस आ गई थीं। पिता ने बताया, “हालात तो दिन पर दिन बिगड़ ही रहे थे। जब मेरी बेटी वापस आ गई तो घर पर ख़ुशी का माहौल था। उसके लौटने के बाद से ही घर पर आने-जाने वालों का ताँता लगा हुआ है हालचाल जानने के लिए।”

उन्होंने कहा कि बेटी से मिलने की जो ख़ुशी है, उसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी उनकी बेटी वापस आ पाएगी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘गंगा मिशन’ के कारण ही ये संभव हो पाया। उन्होंने कहा कि वो भारतीय दूतावास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न सिर्फ धन्यवाद देते हैं, बल्कि इस प्रयास के लिए उन्हें सैल्यूट भी करते हैं। साक्षी के घर में उनके माता-पिता के अलावा एक बड़े भाई भी हैं।

साक्षी के बड़े भाई हिमांशु सिकरवार इटली से एमएस करने के बाद आगरा में नौकरी कर रहे हैं। वहीं साक्षी सिकरवार ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि जहाँ वो रह थी, तब वहाँ पर हमले हो रहे थे और धुआँ-धुआँ हो जाता था। कब कौन सा हमला हो जाए और कहाँ बम गिर जाए, इसका कोई पता नहीं था। साक्षी के अन्य भारतीय दोस्त भी वहाँ से लौट चुके हैं और उनका कहना है कि इंडियन एम्बेसी और यूनिवर्सिटी ने पूरी मदद की। साक्षी को सीमा पार कर के हंगरी में घुसना पड़ा।

साक्षी ने बताया कि सीमा पार करने के लिए आपके पास उचित दस्तावेजों का होना ज़रूरी था, वरना वहाँ से निकलने में दिक्कतें आ रही थीं। यूक्रेन-हंगरी सीमा पर काफी भीड़ थी और छात्रों को लाइन में लगना पड़ा था। साक्षी ने बताया कि सीमा पर पूरी प्रक्रिया ख़त्म करने में 4 घंटे लग गए थे और तब तक वो लोग बस में बैठे हुए थे। साक्षी ये भी बताती हैं कि भारतीयों के साथ यूक्रेन की सेना या पुलिस का ठीक व्यवहार था। हाँ, जहाँ भोजन-पानी की दिक्कतें हैं, वहाँ भारतीयों के साथ लूटपाट भी हुई हैं।

आगरा लौटीं साक्षी सिकरवार का हुआ स्वागत, परिवार ने पीएम मोदी को दिया धन्यवाद (फोटो साभार: दैनिक जागरण/अभिषेक सक्सेना)

साक्षी सिकरवार ने बताया, “हमारा भारतीय होना और हमारे पास राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का होना हमारे लिए बहुत ही अच्छी चीज मानी गई। वहाँ पाकिस्तान, बांग्लादेशी और नाइजीरियन से लेकर कई बाहर के पढ़ने वाले छात्र हैं, लेकिन भारतीयों को वहाँ से निकलने में आसानी हुई। भारतीय झंडे को देख कर हमें तंग नहीं किया जा रहा था। हमें ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा और वहाँ पहुँचने के बाद फ्लाइट में ले जाया गया। जिनकी फ्लाइट देर से थी, उनके लिए ठहरने और खाने-पीने की भी व्यवस्था की गई।”

भारतीय छात्रों का कहना है कि यूक्रेन में उनकी गाड़ी पर भारतीय ध्वज देख कर उन्हें तंग नहीं किया गया और तब उन्हें और अच्छे से इसकी अहमियत समझ आई। MBBS की छात्रा साक्षी के अन्य दोस्त पोलैंड सीमा पर भी गए थे, जहाँ से लूटपाट और मारपीट की भी खबरें आईं। उनका कहना है कि गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) और स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर जिस झंडे को हम मात्र 5 रुपए में खरीदते हैं और फिर फेंक देते हैं, उसकी वजह से हम आज ज़िंदा हैं और अपने घरों पर हैं।

भारत सरकार यूक्रेन से अपने लोगों को निकालने को लेकर गंभीर है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत भी हुई है। रूस पर अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने कई प्रतिबंध लगाए हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने उन्हें ‘वॉर क्रिमिनल’ करार दिया है। भारतीय छात्रों को एम्बेसी ने खारकीव तुरंत छोड़ने की सलाह दी है। उन्हें कहा गया है कि गाड़ी न मिले तो वो पैदल ही पश्चिम की तरफ निकलें। भोजन-पानी के लिए एम्बेसी व्यवस्था कर रहा है।

यूक्रेन में सेना नहीं भेजेंगे, लेकिन रूस को उसके मन की नहीं करने देंगे… ये अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन हैं या मेरी सहेली डॉली!

हम रूस से लड़ने के लिए अपनी सेना यूक्रेन में नहीं भेजेंगे। लेकिन रूस को उसके मन की नहीं करने देंगे। रूस पर अमेरिका आर्थिक प्रतिबंध लगा रहा है। हमने रूस के झूठों का मुकाबला सच से किया है…

यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध (Russia Ukraine War) के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इसी तरह की बातें देश को संबोधित (State of the Union address) करते हुए कही। बाइडेन को सुनते हुए मुझे डॉली की बड़ी याद आ रही थी। डॉली का न तो यूक्रेन से लेना-देना है और न रूस से। वह न तो अमेरिका से नाता रखती और न यूक्रेन के उन कथित दोस्तों से जो युद्ध से पहले उसके साथ जीने-मरने की कसमें खा रहे थे।

डॉली मेरी स्कूल की सहेली है। डॉली और अमेरिका जैसी सहेली/दोस्त आप सब की जिंदगी में भी जरूर होंगे, भले उनका नाम कुछ और हो। ऐसे दोस्त आप में हवा खूब भरते हैं, पर जरूरत के वक्त कहीं नजर नही आते। अमेरिका-यूक्रेन की दोस्ती पर बात करने से पहले डॉली के साथ मेरे एक अनुभव के बारे में जान लीजिए।

मैं स्कूल में ही थी जब मैंने ये पहली बार ये अनुभव किया। तबीयत खराब होने के कारण मैं स्कूल की छुट्टी पर थी और मेरा नाम एक टॉपिक पर बोलने के लिए आगे दे दिया गया था, जिस पर मैं बिलकुल तैयार नहीं थी। तबीयत सुधरने के बाद जब क्लास मेरी एंट्री हुई तो मालूम चला कि मेरी ही सहेली ने उस प्रोजेक्ट में नाम दिया है जिसे प्रेजेंट भी करना है। मैंने सवाल किए तो सहेली ने जवाब दिया कि और लड़कियाँ भी होंगी, इतनी बड़ी कोई बात नहीं है। मैं बेचैन रही। फिर भी इस बात की तसल्ली थी कि और लोग भी साथ होंगे, वो संभाल लेंगे। टीचर आई और सबसे अलग-अलग सवाल शुरू हुए। मैं चुप। मेरी बारी आई तो टूटा-फूटा जितना आता था उसी में अपना जवाब दिया। ये जवाब पर्याप्त नहीं थे। मगर मैं क्या करती। ऐसी स्थिति में थी कि न उससे निकल सकती थी और न ही बिन तैयारी प्रेजेंट करने क्यों पहुँची इस पर जवाब दे सकती थी। जो मुझसे हुआ उस समय किया, मगर उसके बाद एक बात समझ गई कि किसी के उकसावे में आकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन तब तक नहीं करना चाहिए जब तक आप पूरी तरह तैयार न हों, दूसरे का सहयोग एक अतिरिक्त सहायता या विकल्प होती है, उसके बल पर मैदान में नहीं कूदा जाता।

कुछ ऐसा ही हो रहा इस समय यूक्रेन के साथ। यूक्रेन, जिसे अमेरिका ने एक ऐसा दोस्त बनकर ठगा, जो सामान्य दिनों में तो कंधे पर हाथ रखक आपके लिए जान देने के दावे कर देता है, मुसीबत के समय कॉल करने की सलाह देता है, मगर जब आप उसपर विश्वास करके हकीकत में सहायता माँगते हैं,  तब वो उस वक्त तक घरघुसरा बन रहता है कि जब तक आपका सार्वजनिक तौर पर मजाक न उड़ जाए।

पिछले कुछ दिनों से यूक्रेन में जो कुछ भी हो रहा है उसे समझने का इससे बेहतर उदाहरण और कुछ नहीं है। मध्य फरवरी से शुरू हुई जुबानी जंग ने एक हफ्ता पहले जब यूक्रेन में सैन्य संघर्ष का रूप धारण किया तो अमेरिका भौचक्का रह गया। उसे शायद यकीन नहीं था कि यूक्रेनी सीमा पर खड़े 1 लाख सैनिक यूक्रेन के अंदर आकर न केवल यूक्रेन में कार्रवाई कर सकते हैं बल्कि अमेरिका का कद भी दुनिया के सामने बौना बना सकते हैं।

याद करिए आज से एक हफ्ते पहले अमेरिका के वो बयान जब वो लगातार यूक्रेन को आश्वासन दे रहा था कि अगर रूस ने ऐसा कुछ भी किया तो अमेरिका आगे आकर उनका साथ देगा। हालाँकि, जब हकीकत में ये हुआ तो अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन का सबसे पहले बयान आया कि रूस-यूक्रेन के बीच में उनके सैनिक नहीं भिड़ेंगे। अमेरिका का इस तरह सीधे हाथ पीछे करना यूक्रेन को छलने जैसा था क्योंकि इसी अमेरीका ने उन्हें नाटो सेना की मदद देने का विश्वास दिलाया जो रूस का विकराल रूप देखते ही पिछड़ गए।

यहाँ मालूम हो कि अमेरिक ने यूक्रेन को रूस के खिलाफ़ तब उकसाया जब वो अच्छे से जानता था कि सैन्य ताकत में रूस और अकेले यूक्रेन का कोई मुकाबला नहीं है। उनके पास न तो इतने हथियार थे और न ही इतने सैनिक कि वो अकले भिड़ें। मगर फिर भी अमेरिका का समर्थन पाकर यूक्रेन कभी भी युद्ध के नाम पर पीछे नहीं हटे। जब बात बिगड़ी तो मदद तो दूर की बात हैं अमेरिका ने यूक्रेनी राष्ट्रपति को देश छोड़ने का प्रस्ताव भेजा, जिस पर गुस्सा जाहिर करते हुए राष्ट्रपति जेलेंसकी ने कहा कि उन्हें हथियार चाहिए, न कि कोई सवारी। उन्होंने साफ कहा कि वो देश छोड़कर कहीं नहीं जाएँगे और यही रहेंगे। 

अमेरिका को हो रही अपने मजबूत होने की खुशी

मंगलवार को भी यूक्रेन के नाम पर खेली गई अमेरिका की चाल का खुलासा हुआ। जब बाइडेन ने खुद बताया कि कैसे वो इस युद्ध में इसलिए चुप हैं क्योंकि रूस को कमजोर होता देखना चाहते हैं। आज अमेरीकी राष्ट्रपति बाइडेन के शब्द पुतिन के लिए ये थे कि जब तक कोई तानाशाह अपने हमले की कीमत नहीं चुकाता तब तक वो अराजकता पैदा करता है जब इतिहास लिखा जाएगा तो यूक्रेन के ख़िलाफ़ पुतिन का युद्ध रू को और कमजोर और दुनिया को मजबूत करेगा।

हैरानी इस बात की है जब पूरी दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के खतरे को टालने की प्रार्थना कर रही है तब अमेरिका न केवल ये कामना कर रहे हैं कि रूस लड़ लड़ कर कमजोर हो जाएँ बल्कि इस वक्त वो अपने देश के भविष्य का रोडमैप दिखा रहे हैं। वे ये मानकर चल रहे हैं कि युक्रेन में जो तबाही मच रही है उसमें रूस कमजोर पड़ रहा है। बाइडेन को ये नहीं ध्यान कि इस हमले में कितने बेगुनाह मारे जा रहे हैं। वो अब भी सिर्फ इन ख्यालों में हैं अमेरीकी और यूरोप ने रूस को आर्थिक पीड़ा दी है वो सिर्फ रूस के नीचे होने की एक शुरुआत है।

आपको शायद ये बातें अजीब लगें कि जिस रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को हिला दिया उसका बाइडेन पर इतना भी असर नहीं दिख रहा । वो तो इस युद्ध के परिणामों से खुश होते  और अपने देश की जनता को ये बताते नजर आए कैसे उन्होंने कि 6.5 मिलियन से अधिक रोजगार उन्होंने सृजित किए हैं। उनका झुकाव इस ओर ज्यादा है कि रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद उसकी मद्रा रूबल औंधे मुँह गिरी और अमेरिकी डॉलर के 41 फीसद तक नीचे आ गया।

यूक्रेन-रूस जंग

यहाँ ये बात मालूम रहे कि अमेरिका जहाँ यूक्रेन को छलकर इस पूरे युद्ध संतुष्ट होते दिख रहे हैं। वहीं रूस का ध्यान अभी इस ओर है ही नहीं। उनका पक्ष शुरुआत से साफ था कि वो नहीं चाहते यूक्रेन नाटो का हिस्सा बने। जबकि अमेरिका के नेतृत्व में चल रहा नाटो लगातार यूक्रेन को समर्थन देने की बातें करता है। ऐसे में रूस भड़का और भारी सैन्य शक्ति के साथ बॉर्डर पर जा खड़ा हुआ। 24 फरवरी को उन्होंने यूक्रेन में घुसकर अपनी कार्रवाई शुरू की और सैन्य ठिकानों को निशाना बना शुरू किया। आज 7 वें दिन तक दोनों देशों के बीच ये जंग जारी है। बीच-बीच में वार्ता की खबरें आती हैं लेकिन वो बेनतीजा होती हैं। रूस जहाँ नाटो, क्रीमिया और सैन्य शक्ति को लेकर अपनी बात मनवाने का प्रयास करता है वही यूक्रेन भी अपनी जिद्द पर अड़ा हुआ है।

असल में ये डॉली और अमेरिका जैसे ही दोस्त होते हैं, जिनके साथ को ‘आई लव यू, बट ऐज ए फ्रेंड’ जैसा माना जाता है।

यूक्रेन में एक और भारतीय छात्र की मौत, दो दिन में दूसरी घटना: इस्केमिक स्ट्रोक से पीड़ित थे पंजाब के चंदन जिंदल

रूस औऱ यूक्रेन (Russia-Ukraine War) में हो रहे महायुद्ध के बीच यूक्रेन के विनित्स्या में बुधवार (2 मार्च, 2022) को एक और भारतीय छात्र की मौत (Death) हो गई है। उसका नाम चंदन जिंदल (22) है। उसे इस्केमिक स्ट्रोक आया था। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

चंदन जिंदल भारत में पंजाब के बरनाला के रहने वाले थे औऱ वो यूक्रेन के विनित्स्या स्थित नेशनल पाइरोगोव मेमोरियल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, जिंदल को जब इस्केमिक स्ट्रोक आया तो तुरंत ही उन्हें विनित्स्या के इमरजेंसी अस्पताल (कीवस्का स्ट्रीट 68) में भर्ती कराया गया था। जहाँ उनकी मौत हो गई। इस मामले में चंदन के पिता ने भारत सरकार को पत्र लिखकर उनके बेटे के शव को वापस लाने के लिए मदद माँगी है।

चंदन चार साल से यूक्रेन में रह रहे थे। पिछले महीने 2 फरवरी 2022 को ही वो बीमार हो गए थे तब उनकी सर्जरी भी हुई थी। इसके बाद भारत से उनके पिता शीश कुमार और चाचा कृष्ण कुमार 7 फरवरी 2022 को उनकी देखभाल करने के लिए यूक्रेन गए थे।

गौरतलब है कि हाल ही में यूक्रेन में रह रहे कर्नाटक के छात्र अपने भूखे दोस्तों की भूख मिटाने के लिए खाना लाने के लिए बंकर से बाहर निकले थे औऱ रूसी सैनिकों ने उन्हें गोली मार दी। वो खार्कीव में रह रहे थे और जल्द ही यूक्रेन छोड़ना चाहते थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक नवीन चाहते तो वो यूक्रेन से कब का निकल चुके होते, लेकिन उन्होंने वहाँ रुक कर अपने जूनियर सहयोगियों को पहले निकालने का विकल्प चुना था।

यहाँ उल्लेखनीय है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के कारण सारी फ्लाइट को सस्पेंड किया गया है औऱ आसपास के देशों के जरिए भारत लगातार अपने छात्रों को वहाँ से निकालने में लगा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन को ऑपरेशन गंगा नाम दिया है। और अपने कई मंत्रियों को इस काम में लगाया है।

सुबह होते ही शराब पीने लगता था पूनम पांडे का शौहर सैम अहमद, दिन-रात पीटता था: कंगना के Lock Upp में हुआ खुलासा

कंट्रोवर्सी क्वीन पूनम पांडे (Poonam Pandey) इन दिनों ‘कंगना रनौत की जेल’ में कैद हैं। कंगना (Kangna Ranaut) के शो ‘लॉकअप’ में पूनम पांडे ने अपनी शादी के डार्क सीक्रेट्स शेयर किया। पूनम ने अपने एक्स हसबैंड सैम अहमद बॉम्बे (Sam Ahmed Bombay) की करतूत सबको बताई। साथ ही यह भी खुलासा किया कि वो ब्रेन हैमरेज का शिकार हुई थीं।

पूनम ने बताया कि कैसे सैम बॉम्बे उन्हें पीटा करते थे। एक्ट्रेस ने दावा किया कि सैम काफी कंट्रोलिंग थे। वे उन्हें किसी भी रूम में अकेले रहने की इजाजत नहीं देते थे। घर में अपना फोन तक इस्तेमाल नहीं करने देते थे। 

ये पूरी बातचीत तब शुरू हुई जब करणवीर बोहरा पूनम पांडे से पूछते हैं कि क्या उन्होंने सच में सैम बॉम्बे से प्यार किया था? तब जाकर पूनम अपनी जिंदगी के अनसुने राज खोलती हैं। वे सैम बॉम्बे की शराब पीने की लत के बारे में बताती हैं।

पूनम पांडे ने कहा, “हाँ, मैंने सैम बॉम्बे से प्यार किया था। अभी भी मैं उनसे नफरत नहीं करती हूँ। मैं बस उन्हें पसंद नहीं करती। कोई भी नहीं चाहेगा कि ऐसा उनके साथ हो। किसे पीटा जाना पसंद होगा। मेरा घर चार मंजिला है। प्राइवेट गार्डन है, प्राइवेट टैरेस है। मेरे पास सब कुछ है। बड़ा घर है। अगर मैं एक कमरे में होती थी तो मुझे वहाँ रहने की इजाजत नहीं थी। वो मुझसे पूछते थे क्यों तुम उस कमरे में हो?”

उन्होंने आगे कहा, “वे चाहते थे मैं उनके साथ उसी कमरे में रहूँ, जहाँ वो चाहते थे। जब मैं उन्हें कहती थी कि मुझे खुद के साथ थोड़ा वक्त चाहिए, खुली हवा चाहिए, मैं टैरेस पर जाना चाहती हूँ तो मुझे इसकी इजाजत नहीं थी।” पूनम पांडे ने कहा कि कई बार उन्होंने अपने कुत्तों को प्यार करने के चलते भी पति से मार खाई है। उन्हें इस हद तक पीटा गया कि उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया था। उन्होंने कहा, “अगर मैं अपने डॉगी से प्यार करती हूँ और उसके साथ सोती हूँ तो वो मुझे कहते मैं उनसे ज्यादा अपने डॉगी से प्यार करती हूँ।”

करणवीर ने जब पूनम से पूछा कि कितने समय से वे घरेलू हिंसा झेल रही थीं। इससे बाहर निकलने में उन्हें कितना वक्त लगा? जवाब में पूनम ने कहा, “मैं काफी समय से कोशिश कर रही थी। ये पिछले 4 सालों से हो रहा है। सैम ने मेरे साथ बस 1 बार मारपीट नहीं की, मेरी ब्रेन इंजरी (अपने सिर के बाएँ तरफ इशारा करते हुए) अभी तक ठीक नहीं हुई है, क्योंकि वो मुझे उसी जगह पर बार-बार पीटते थे। मैं लोगों के सामने मेकअप, ग्लॉस लगाती थी और हँसती थी। मैं उनके सामने काफी कूल बनती थी।”

इस दौरान पायल रोहतगी ने जब पूछा कि वह आखिर उन्हें क्यों पीटता था तो पूनम ने कहा कि उन्हें आज तक नहीं पता। पूनम पांडे ने कहा, “अगर कोई इंसान सुबह 10 बजे से शराब पीना शुरू कर देता है और देर रात तक पीता रहता है और रात में आपको बचाने के लिए कोई नहीं है तो आप क्या कर सकते हैं। स्टाफ तक डर कर भाग जाता था।”

1 साल में टूटी थी शादी

आपको बता दें कि पूनम ने सितंबर 2020 में अपने लॉन्ग टर्म बॉयफ्रेंड और निर्माता सैम बॉम्बे से शादी की थी। नवंबर 2021 में सैम को घरेलू हिंसा के आरोप में मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। हालाँकि इसके पहले भी वह कई बार उन पर घरेलू शोषण और छेड़छाड़ के आरोप लगा चुकी थीं।

यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने के लिए रूस बनाएगा ‘मानवीय गलियारा’: रसियन राजदूत ने की मोदी सरकार की तारीफ, भारत के स्टैंड को सराहा

यूक्रेन और रूस में बढ़ते संघर्ष के बीच रूसी राजदूत डेनिस अलिपोव (Denis Alipov) ने बयान दिया है कि रूस यूक्रेन से भारतीय छात्रों की सुरक्षित निकासी के लिए मानवीय गलियारा बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि रूस भारतीय छात्रों की सुरक्षित निकासी के लिए भारत सरकार के आग्रह पर पूरा सहयोग कर रहा है। हम एक ऐसा सुरक्षित पैसेज बनाने में लगे हैं जिससे भारतीय छात्रों को यूक्रेन से रूस में सुरक्षित लाया जा सके। भारत में रूसी राजदूत नामित डेनिस अलीपोव ने बुधवार (2 मार्च, 2022) को ये जानकारी दी।

अलीपोव ने एक वर्चुअल ब्रीफिंग में मीडिया को बताया कि रूसी पक्ष को उम्मीद है कि मानवीय गलियारा को जितनी जल्दी हो सके बनाया जाए ताकि इन संघर्ष क्षेत्रों में फँसे भारतीयों को रूसी क्षेत्र में ले जाया जा सके। उन्होंने कहा कि रूसी पक्ष यूक्रेन में सैन्य अभियानों को जल्द से जल्द रोकने का इरादा रखता है क्योंकि यह स्थिति दोनों देशों के लिए एक ‘त्रासदी’ है।

साथ ही रूस के राजदूत अलीपोव ने भारतीय छात्र की मृत्यु पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और छात्र के परिवार और भारतीय राष्ट्र के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन में गोलाबारी में मारे गए भारतीय छात्र के मौत की जाँच करेगा। उन्होंने कहा कि रूस पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष क्षेत्रों में फँसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी के लिए ‘मानवीय गलियारा’ बनाने के लिए काम कर रहा है और खारकीव में एक भारतीय छात्र की मौत की जाँच करेगा।

बता दें कि मंगलवार (1 मार्च, 2022) को 21 वर्षीय मेडिकल छात्र नवीन शेखरप्पा की मौत के बाद पूर्वी यूक्रेन में खारकीव, सुमी और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में फँसे 4,000 भारतीयों को निकालना मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। मोदी सरकार ने वायुसेना को भी ऑपरेशन गंगा के तहत भारतीयों को निकालने के मिशन पर लगाया है।

रूसी राजदूत डेनिस अलिपोव ने भारत के तारीफ में कहा, “हम भारत के आभारी हैं कि भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक संतुलित रुख अपनाया है। हम उम्मीद करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र में भविष्य में भी भारत इसी तरह का स्टैंड लेगा। दरअसल भारत इस मामले की जटिलता को अच्छे से समझता है। इसलिए भारत ने बहुत ही संतुलित रुख अपनाया है।”

भारतीयों को निकालने का अभियान जारी

भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का प्रयास युद्धस्तर पर जारी है। ऑपरेशन गंगा के तहत नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट पहुँचे हुए हैं और छात्रों की सुरक्षित वापसी की वह स्वयं निगरानी कर रहे हैं। आज बुखारेस्ट में हेनरी कोंडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उन्होंने भारतीय छात्रों के साथ बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी छात्रों को निकाला जा रहा है और भारत वापस लाया जाएगा।

वहीं केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुखारेस्ट में फ्लाइट से भारत लौट रहे छात्रों के परिवार से फोन पर बात की। जिसकी तस्वीरें भी सामने आ रही हैं।

गौरतलब है कि यूक्रेन से रोमानिया के बुखारेस्ट शहर आए कई भारतीय छात्रों ने बताया कि चेकपॉइंट्स से सुरक्षित निकलने में तिरंगे ने उनकी काफी मदद की। जिन गाड़ियों पर तिरंगा लगा था, उन्हें बिल्कुल भी रोका नहीं जा रहा है। यहाँ तक कि कुछ पाकिस्तानी और तुर्की के छात्रों ने भी यूक्रेन से निकलने के लिए तिरंगे की मदद ली।

आपको बता दें ऑपरेशन गंगा के तहत भारतीय छात्रों को यूक्रेन से बाहर निकाला जा रहा है। इन छात्रों के लिए यूक्रेन के पड़ोसी देश रोमानिया, स्लोविया और पोलैंड से विशेष फ्लाइट्स उड़ाई जा रही हैं। इस काम में एयर इंडिया, स्पाइसजेट और इंडिगो के विमान भी लगे हुए हैं। इनका सारा खर्च मोदी सरकार उठा रही है।

‘मैं तो एक योगी हूँ, मुख्यमंत्री के रूप में राजधर्म का शपथ लिया है परिवार का नहीं’: बहन की संघर्ष भरी जिंदगी देख भावुक हुए CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अपनी बहन की गरीबी और उनके संघर्ष को देखकर और भावुक हो गए। उनकी आँखें डबडबा आईं और गला रुँध गया। परिवार की मदद पर उन्होंने कहा कि वे एक योगी हैं और मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने राजधर्म का शपथ लिया है, परिवार का नहीं।

दरअसल, इंडिया टीवी के एक स्पेशल शो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए थे। उस दौरान शो के होस्ट रजत शर्मा उनसे प्रदेश की राजनीति को लेकर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के महासचिव राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) अपनी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) को चुनाव में ला सकते हैं तो वो ऐसा क्यों नहीं कर सकते। इस दौरान उनकी बहन के कुछ फोटो स्क्रीन पर चलाए गए, जिनमें वह मवेशियों को चारा खिलाते हुए और एक बेहद छोटी-सी दुकान चलाती नजर आ रही हैं।

रजत शर्मा ने कहा कि आपकी बहन कई किलोमीटर घर से चलकर आती हैं। एक चाय की दुकान चलाती है, प्रसाद की दुकान चलाती हैं। आपको नहीं लगता कि सब अपने परिवार का ध्यान रखते हैं, आप भी थोड़ा ध्यान रखते। इस पर भावुक होते हुए सीएम योगी ने भरी आँखों और रुँधे गले से उन्होंने कहा, मैं तो एक योगी हूँ। मुझे पूरे प्रदेश का ध्यान रखना होता है। एक मुख्यमंत्री के रूप में मैंने राजधर्म की शपथ ली है, अपने परिवार की नहीं। मेरे लिए पूरे उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोग ही मेरा परिवार है। मैं उनके सुख-दुख में सहभागी हूँ।”

परिवार का दर्द नहीं समझने के आरोप पर सीएम योगी ने कहा कि एक संन्यासी का काम लोक-कल्याण करना होता है। राजनीति में आने का मकसद लोक-कल्याण है। कुछ लोगों के लिए परिवार का मतलब सिर्फ सैफई खानदान है। उन्होंने कहा, ”उनके (अखिलेश परिवार) के लिए उनका परिवार प्रचार कर रहा है, मेरे लिए मेरा परिवार (यूपी की जनता) प्रचार कर रहा है। मैं तो जनता के बीच जाने की एक औपचारिकता निभा रहा हूँ। मेरे लिए यहाँ (गोरखपुर की) पब्लिक स्वयं चुनाव लड़ रही है। यहाँ तो हमारे कार्यकर्ता स्वयं योगी बनकर वोट मांग रहे हैं।” उन्होंने कहा कि गोरखपुर उनकी कर्मभूमि है और वहाँ के लोग उनका चुनाव लड़ रहे हैं।

बता दें कि सीएम योगी का परिवार बेहद गरीबी में जीवन-यापन करता है। उनकी इकलौती बहन शशि देवी अपने ससुराल ऋषिकेश के कोठार गाँव में पति पूरन सिंह पयाल के साथ चाय की दुकान चलाती हैं। उनकी एक दुकान नीलकंठ मंदिर के पास है और दूसरी भुवनेश्वरी मंदिर (पार्वती मंदिर) के पास है। इन दुकानों में चाय, पकौड़ी और प्रसाद मिलता है। शशि के तीन बच्चे हैं- एक बेटा और दो बेटियाँ। सीएम योगी 7 भाई-बहन हैं और अपने माता-पिता की 5वीं संतान हैं। उनका एक भाई शैलेंद्र मोहन भारतीय सेना में सूबेदार हैं।

सीएम योगी ने 22 साल की उम्र में घर-बार छोड़ कर संन्यास धारण कर लिया था। उनके घर का नाम अजय सिंह बिष्ट था। घर छोड़ने के बाद वह गोरखपुर आ गए और गोरखनाथ पीठ के तत्कालीन महंत अवैद्यनाथ महाराज के सान्निध्य में दीक्षा प्राप्त कर संन्यासी बन गए। उसके बाद उनका नाम योगी आदित्यनाथ हो गया। उसके बाद वह पीठ के महंत और बाद में गोरखपुर से सांसद बने। अब वे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।

शादीशुदा हिन्दू महिला को फाँसने के लिए फैजान बन गया ‘मोनू’, 6 महीने तक करता रहा बलात्कार: इस्लामी धर्मांतरण न करने पर मारपीट

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अलीगढ़ (Aligarh) से लव जिहाद (Love Jihad) और धर्मान्तरण (Religious Conversion) की कोशिश करने का मामला प्रकाश में आया है। जहाँ फैजान नाम के मुस्लिम आरोपित ने मोनू बनकर हिंदू महिला को झूठे प्रेम जाल में फँसाया और फिर उसके साथ 6 महीने तक शादी की झाँसा देकर रेप करता रहा। इस मामले में पीड़िता ने रेप, धमकी और मारपीट समेत कई अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला अलीगढ़ के क्वार्सी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक मोहल्ले का है। पीड़िता यहीं की रहने वाली है। वो शादीशुदा है। उसकी शादी चार साल पहले बुलंदशहर के एक व्यक्ति के साथ ही हुई थी। शादी के कुछ दिनों तक तो ठीक रहा, लेकिन धीरे-धीरे पति और पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर अनबन शुरू हो गई। इसके बाद वो पति को छोड़कर मायके (अलीगढ़) आ गई।

इस बीच जून 2021 में वो कोतवाली अतरौली स्थित अपने ननिहाल गई थी, जहाँ पर उसकी मुलाकात आरोपित फैजान से हुई। पहली मुलाकात के दौरान ही उसने पीड़िता से झूठ बोलते हुए उसे अपना नाम मोनू बताया। धीरे-धीरे दोनों की पहचान हुई और वो वक्त के साथ दोस्ती में बदल गई। इस बीच मोनू बने फैजान ने पीड़िता को बताया कि वो उससे शादी करना चाहता है। यही झाँसा देकर उसने पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। उसके साथ हम बिस्तर होते वक्त बड़ी ही चालाकी से आरोपित ने उसका अश्लील वीडियो बना लिया।

6 महीने तक करता रहा रेप

इस बीच मोनू बनकर फैजान लगातार 6 महीने तक उसके साथ रेप करता रहा। लेकिन जब पीड़िता ने उससे शादी करने की बात कही तो वो इससे साफ मुकर गया। यहीं नहीं आरोपित ने अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का दबाव भी बनाया। फैजान और उसके भाई अली ने धर्मान्तरण नहीं करने पर पीड़िता को हत्या की धमकी भी दी। इसके बाद पीड़िता ने इस मामले में थाने में केस दर्ज कराया। महिला थाने की प्रभारी निरीक्षक सरिता द्विवेदी के मुताबिक, फैजान और अली दोनों ही अतरौली के बड़ी मस्जिद इलाके के रहने वाले हैं।

रूस यूक्रेन युद्ध के बीच चर्चा में पुतिन की ‘गलफ्रेंड’: जुड़वा बच्चों को जन्म देकर हो गई थीं गायब, गोल्ड मेडल जीते, सांसद भी बनीं

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच, रुसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) की कथित गर्लफ्रेंड बताई जा रही अलीना मराटोव्ना काबेवा (Alina Maratovna Kabaeva) एक बार फिर चर्चा में हैं। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता 38 वर्षीय अलीना काबेवा को कथित रूप से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की की लंबे समय से चली आ रही प्रेमिका बताया जा रहा है। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि वह पुतिन के जुड़वा बच्चों की माँ हैं। जो एक रूसी राजनीतिज्ञ, मीडिया मैनेजर और एक सेवानिवृत्त रिदमिक जिमनास्ट हैं।

हालाँकि, मीडिया की नज़रों से वह लम्बे समय से गायब हैं लेकिन अभी उनकी फिर से चर्चा है और उनके बारे में कई बातें और अफवाहें सोशल मीडिया पर सामने आ रही हैं। 2021 के एक रिपोर्ट में उनके आखिरी बयान के हिसाब से उन्होंने दो जुड़वा बच्चों की माँ बनने का दावा किया गया था।

कौन हैं अलीना काबेवा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अलीना काबेवा का जन्म 12 मई, 1983 को उज़्बेकिस्तान में हुआ था, जो उस समय सोवियत संघ का हिस्सा था, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, काबेवा एक खेल परिवार में पली-बढ़ी। उनके पिता मराट कबायव (Marat Kabayev) एक पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी थे। वहीं उन्हें आखिरी बार ढाई साल पहले देखा गया था। उनके बारे में मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अलीना 2005 के अपने अलगाव तक वह रसियन पुलिसमैन डेविड मुसोलिनी (David Museliani ) के साथ इंगेज थीं।

वहीं पिछले सात साल में पुतिन की कथित गर्लफ्रेंड के दावे के साथ उनके तीन बच्चों की माँ बनने की भी चर्चा है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि ऐसी अफवाहों को रूसी एजेंसी क्रेमलिन के साथ वेरीफाई करना असंभव है लेकिन ऐसी चर्चाओं का इसलिए भी बल मिलता है क्योंकि रूस के मॉस्को में 2008 एक अलीना को पुतिन की मिस्ट्रेस बताने पर एक आउटलेट को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था। ऐसा स्पेक्टेटर की रिपोर्ट में दावा किया गया था।

गौरतलब है कि अलीना ने तीन साल की उम्र में, काबेवा ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए अपने खेल करियर शुरूआत की थी, और अपनी किशोरावस्था में पहुँचते-पहुँचते लयबद्ध जिमनास्टिक में एक उभरता हुआ सितारा बन गई थीं। यहाँ तक कि उन्होंने 2004 के एथेंस खेलों में स्वर्ण और 2000 में सिडनी में कांस्य पदक जीता। काबेवा 2 ओलंपिक पदक, 14 विश्व चैम्पियनशिप पदक और 21 यूरोपीय चैम्पियनशिप पदक के साथ सबसे सफल जिमनास्ट में से एक हैं।

राजनीतिक करियर की शुरुआत

अलीना काबेवा जिम्नास्टिक से सेवानिवृत्त होने पर, राजनीति में अपना करियर शुरू किया। वह संयुक्त रूस पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए 2007 और 2014 के बीच रूसी संसद की सदस्य भी थीं।

संसद में अपने समय के दौरान, उन्होंने कई विवादास्पद कानूनों के लिए मतदान किया, जिसमें रूसी समलैंगिक प्रोपेगेंडा कानून भी शामिल है, जो नाबालिगों के बीच “गैर-पारंपरिक यौन संबंधों से जुड़े प्रोपेगेंडा को दंडनीय अपराध बनाता है।

वहीं सितंबर 2014 में, काबेवा ने सबसे बड़े रूसी मीडिया समूह, नेशनल मीडिया ग्रुप के अध्यक्ष के रूप में एक पद स्वीकार किया था।

पुतिन की गर्लफ्रेंड होने के दावे को मिली हवा

काबेवा को पहली बार 69 वर्षीय पुतिन से 2008 में जोड़ा गया था, जब मीडिया टाइकून और केजीबी के पूर्व जासूस अलेक्जेंडर लेबेदेव (Alexander Lebedev) द्वारा संचालित एक मास्को समाचार पत्र द्वारा इसकी सूचना दी गई थी। बता दें कि रूसी राष्ट्रपति ने 2013 में अपनी पत्नी ल्यूडमिला को तलाक दे दिया।

काबेवा – जिसे “रूस की पहली मिस्ट्रेस” कहा गया। उन्होंने इस बात से इनकार करने के लिए यह दावा भी किया कि वह रूसी राष्ट्रपति की सिर्फ साथी है, लेकिन इससे भी इन अफवाहों को नहीं रोका जा सका कि यह जोड़ी एंगेज्ड है, विवाहित है और यहाँ तक ​​​​कि इनका एक गुप्त परिवार भी है। वहीं 2016 में, काबेवा एक अंगूठी पहने हुए सार्वजनिक रूप से दिखाई दीं, जिसे वह कैमरों से छिपाने की कोशिश करती दिखीं।

अलीना को एक दुर्लभ टीवी साक्षात्कार के दौरान फिर से अंगूठी पहने हुए देखा गया था, जहाँ वह क्रेमलिन के मजबूत व्यक्ति के साथ अपने कथित संबंधों पर कोई नया प्रकाश डालने में विफल रही, जिसके नाम का जिक्र नहीं किया गया था।

वहीं यह भी कहा जा रहा है कि फरवरी 2017 में, काबेवा ने मॉस्को में एक जिमनास्टिक टूर्नामेंट में अपनी शादी की अंगूठी दिखाते हुए एक बार फिर पब्लिक रूप से दिखीं थी। जिसके महीनों बाद काबेवा ने इटली में एक आउटिंग पर शादी की अंगूठी के दिखाकर रूसियों को फिर से चिढ़ाया था।