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‘गाँधी के लिए हुई FIR, मुस्लिमों के लिए नहीं’: ओवैसी ने ‘धर्म संसद’ पर उठाए सवाल, कहा- कॉन्ग्रेस के बिना सम्मेलन मुमकिन ही नहीं

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हुई ‘धर्म संसद’ को लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने धर्म संसद में मुस्लिमों के लिए कही गई बातों पर कॉन्ग्रेस द्वारा आपत्ति न जताने और शिकायत दर्ज नहीं कराने का आरोप लगाया है। ओवैसी ने महात्मा गाँधी को अपशब्द कहे जाने पर सम्मेलन छोड़कर जाने वाले महंत राम सुंदर को लेकर भी टिप्पणी की।

एआईएमआईएम चीफ ने सोशल मीडिया पर धर्म संसद को नरसंहारी सम्मेलन कहा और इसके लिए कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में महात्मा गाँधी के खिलाफ कही गई बातों का विरोध हुआ। एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन मुस्लिमों के खिलाफ जो कुछ कहा गया उसकी अनदेखी की गई।

असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “राम सुंदर छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग के अध्यक्ष हैं और इनका कैबिनेट रैंक है। ये धर्म संसद के मुख्य संरक्षक थे। सम्मेलन कॉन्ग्रेस के बिना मुमकिन ही नहीं था। राम सुंदर के संरक्षण में ना सिर्फ गाँधी जी को गाली दी, बल्कि ये भी कहा कि इस्लाम का मक़सद राष्ट्र पर कब्जा करना है। जब कालीचरण यह भाषण दे रहा था तो दर्शकों के बीच कॉन्ग्रेस नेता प्रमोद दुबे, भाजपा नेता सच्चिदानंद उपासने और नंदकुमार साय भी मौजूद थे। किसी ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी।”

ओवैसी ने लिखा, “25 दिसंबर को यात्रा निकाली गई थी और 26 को धर्म संसद हुआ था। 25 की कलश यात्रा में कॉन्ग्रेस विधायक विकास उपाध्याय और कॉन्ग्रेस के प्रमोद दुबे (रायपुर नगर सभापति) ने शिरकत की। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह भी मौजूद थे।”

उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस के कैबिनेट मिनिस्टर रैंक के नेता के संरक्षण में हिंदू राष्ट्र, मुसलमानों का नरसंहार, लव जिहाद की बातें हुईं। एफ़आईआर सिर्फ़ गाँधी जी वाले बयान पर दर्ज हुई है। क्या हम ये समझें की हमारे नरसंहार की बात चिंताजनक नहीं है?”

ओवैसी ने कहा, “राहुल गाँधी को सम्मेलन से दूर रखा गया, ये निंदनीय है। क्या हम ये समझें की हिंदू बनाम हिंदुत्व वाली बातें बस जुमला थीं? बघेल जी उत्तर प्रदेश में धरना दे सकते हैं, लेकिन धर्म के नाम पर उनके अपने राज्य में क्या हो रहा है? सब इस रेस में लगे हैं कि “सबसे बड़ा हिन्दू कौन?”

बता दें कि रविवार (26 दिसंबर 2021) को रायपुर में एक ‘धर्म संसद’ में महात्मा गाँधी के लिए अपशब्द कहने वाले कालीचरण महाराज के खिलाफ आयोजकों में से एक रायपुर नगरनिगम के सभापति और कॉन्ग्रेस नेता प्रमोद दुबे की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के 76 वकीलों ने 17 और 19 दिसंबर को दिल्ली (हिंदू युवा वाहिनी द्वारा) और हरिद्वार (यति नरसिंहानंद) में धर्म संसद के दौरान दिए गए भाषणों को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एनवी रमना को पत्र लिखा। उन्होंने पत्र में कथित आरोप लगाया कि धर्म संसद के दो अलग-अलग आयोजनों में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है। इस पर संज्ञान लिया जाए।

केरल के पुलिसकर्मी पीके अनस ने इस्लामी कट्टरपंथी संगठन SDPI से साझा की RSS कार्यकर्ताओं की निजी जानकारी, सस्पेंड

केरल पुलिस के एक सिविल पुलिस अधिकारी पीके अनस को पुलिस डेटाबेस से आरएसएस (RSS) कार्यकर्ताओं की संवेदनशील और निजी जानकारी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं को लीक करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीमन्नूर पुलिस स्टेशन के सीपीओ (Civil Police Officer) पीके अनस को बुधवार (29 दिसंबर 2021) को एक आंतरिक जाँच के बाद सस्पेंड कर दिया गया। जाँच में पाया गया है कि अनस ने PFI के इस्लामी कट्टरपंथी संगठन SDPI के प्राइवेट चैट ग्रुप में आरएसएस कार्यकर्ताओं की संवेदनशील जानकारी साझा की थी।

बस कंडक्टर पर हमले के मामले में SDPI कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद यह जानकारी सामने आई थी कि CPO पीके अनस उनके संपर्क में था। इसके बाद CPO अनस का इडुक्की मुख्यालय में ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन आज विस्तृत जाँच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद उसे केरल पुलिस बल से सस्पेंड कर दिया गया।

साभार: टाइम्स नाउ

मालूम हो कि एसडीपीआई के 6 कार्यकर्ताओं ने 2 दिसंबर 2021 को इडुक्की जिले के थोडुपुझा में मधुसूदन नाम के एक बस कंडक्टर के साथ मारपीट की थी। एसडीपीआई हमलावरों ने मधुसूदन पर फेसबुक पर सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील पोस्ट शेयर करने का आरोप लगाया था। जिला पुलिस प्रमुख आर विश्वनाथ ने मीडियाकर्मियों को बताया कि बस कंडक्टर के साथ मारपीट मामले में गिरफ्तार एसडीपीआई कार्यकर्ताओं में से एक सीधे तौर पर हत्या में शामिल है। उसने एक व्यक्ति को तलवार से काट दिया था।

बता दें कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या छह हो गई है, जिसमें दो पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्य भी शामिल हैं। एसडीपीआई पीएफआई का राजनीतिक मोर्चा है, जो एक प्रतिबंधित संगठन है। पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

भगवान शिव के लिए अपशब्द, हवन का अपमान, सज्जाद बन गया ‘रामायण का राम’: ‘अतरंगी रे’ में ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा? इसीलिए नाराज़ हैं हिन्दू

आनंद एल राय की फिल्म ‘अतरंगी रे’ (Atrangi Re) में अक्षय कुमार (Akshay Kumar), सारा अली खान (Sara Ali Khan) और दक्षिण के स्टार धनुष (Dhanush) मुख्य किरदार में हैं। इस फिल्म के कई दृश्यों में हिन्दू देवी-देवताओं और धर्मग्रंथों का अपमान किया गया है, जिससे लोग आक्रोशित हैं। भगवान शिव और हनुमान जी को लेकर अपशब्दों का प्रयोग किया गया है, तो रामायण की भी आपत्तिजनक व्याख्या की गई है। फिल्म में हिन्दू लड़की और मुस्लिम लड़के वाले एंगल डाल कर ‘लव जिहाद’ को भी बढ़ावा दिया गया है।

सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ ‘Boycott Atrangi Re’

आइए, हम आपको बताते हैं कि फिल्म के किन दृश्यों से लोगों को आपत्ति है और क्यों हिन्दू इस फिल्म से नाराज़ हैं। फिल्म के एक दृश्य में सारा अली खान कहती हैं, “हनुमान जी का प्रसाद समझे हैं, जो कोई भी हाथ फैलाएगा और हम मिल जाएँगे? शिव जी जा धतूरा हैं हम, मुँह से जाएँगे तो पिछवाड़े से निकलेंगे।” इस दृश्य में जिस तरह से हनुमान जी और भगवान शिव के साथ ‘पिछवाड़ा’ शब्द का प्रयोग किया गया है, उससे लोग नाराज़ नजर आ रहे हैं।

एक अन्य दृश्य में सारा अली खान धनुष से कहती हैं, “हिन्दू ठाकुर लड़की, और वो कटाई मियाँभाई लौंडा, इसे कहते हैं लव स्टोरी।” इस डायलॉग से साफ़ है कि हिंदू लड़की और मुस्लिम लड़के वाले एंगल को बढ़ावा दिया गया है, जिस कारण ‘लव जिहाद’ की अधिकतर घटनाएँ होती हैं और हिन्दू लड़कियों को इस कारण प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में उनकी लाश तक मिलती है। क्या इसकी जगह कोई मुस्लिम लड़की “मैं मुस्लिम लड़की और वो विराट हिन्दू” किसी फिल्म में बोल सकती हैं?

वहीं फिल्म के एक अन्य दृश्य में अक्षय कुमार का किरदार, जिसका नाम ‘सज्जाद’ है, वो मुहर्रम में अपने शरीर पर चाबुक से वार करते हुए दिखता है। इसके बाद सारा अली खान भी अपने घर में आकर अपने शरीर पर चाबुक मारने लगती है। वो उस जगह पर जाती है, जहाँ उसकी नानी हवन कर रही होती है और अपने शरीर पर ताबड़तोड़ चाबुक दे मारती है। ये भी जान लीजिए कि हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाली बुजुर्ग महिला को ही फिल्म का विलेन दिखाया गया है।

फिल्म के एक अन्य दृश्य में सज्जाद खुद को ‘श्रीराम’ बताता है और दक्षिण भारत के हिन्दू का किरदार निभा रहे धनुष को ‘रावण’। इसके बाद वो इस कहानी की तुलना ‘रामायण के शुरू होने’ से करता है। फिल्म में लड़की का मरा हुआ अब्बू ही उसे उसके ‘काल्पनिक बॉयफ्रेंड’ के रूप में दीखता है, जिससे लोगों को आपत्ति है। साथ ही बिहार का भी मजाक बनाया गया है। वहाँ की भाषा को आपत्तिजनक तरीके से पेश किया गया है। दक्षिण भारत की तमिल भाषा को कॉमेडी के रूप में पेश किया या है।

फिल्म ‘अतरंगी रे’ की समीक्षा: जानिए फिल्म में क्या दिखाया गया है

‘अतरंगी रे’ में अक्षय कुमार, धनुष और सारा अली खान जैसे बड़े अभिनेता हैं। अक्षय कुमार ने ‘सज्जाद’ का किरदार निभाया है इसमें। जबकि सारा अली खान हिन्दू लड़की ‘रिंकू’ होती हैं। जैसा कि आरा अली खान खुद इस फिल्म में कहती हैं, वो ‘सूर्यवंशी ठाकुर’ होती हैं, जिनका भगवान राम के वंश से सीधा ताल्लुक है। अब एक हिन्दू ठाकुर परिवार को दिखाया गया तो उसे क्रूर बताना ज़रूरी हो जाता है। उस घर की महिलाएँ हो या पुरुष, सबका क्रूर और ‘प्यार से घृणा करने वाला’ होना ज़रूरी है।

बिहार का परिवार होता है, इसीलिए यहाँ थोड़ी बदनामी बिहार की भी हो जाए तो फिल्म में और मसाला लग जाता है। इसीलिए, ‘जबरिया शादी’ का कॉन्सेप्ट लाया गया है। रिंकू के परिवार वाले जबरन उसकी शादी एक तमिल लड़के से कर देते हैं, जिसे बाँध कर लाया जाता है। अब शुरू होता है तमिल भाषा का मजाक बनाना। तमिल बोलते विशु (जिसका असली नाम तमिल में कुछ लंबा सा है और रिंकू बोलती है कि ये भगवान वाला नाम है, इसीलिए धरती वाला नाम बताओ) को एक कॉमिक कैरेक्टर की तरह पेश किया गया है।

फिल्म का सबसे बड़ा सस्पेंस ये होता है कि रिंकू जिस काल्पनिक लड़के से पूरी फिल्म प्यार कर रही होती है और अपनी बॉयफ्रेंड समझ रही होती है, वो उसके अब्बा होते हैं। फ्लैशबैक में पता चलता है कि इस शादी से रिंकू की माँ (जिसके किरदार में वो खुद हैं) के परिवार वाले इस शादी से खुश नहीं थे और जादूगर सज्जाद को ज़िंदा जला कर मारने के लिए उन्होंने साजिश रची। फिर जादू दिखाते हुए बच्ची रिंकू के सामने ही सज्जाद आग से जल कर मर जाता है।

स्पष्ट है, जलाने वाले वही ‘भगवान श्रीराम के वंशज सूर्यवंशी ठाकुर’ हैं और मरने वाला एक मुस्लिम जिसने एक हिन्दू लड़की से शादी कर ली। नैरेटिव ये है कि मुस्लिम पीड़ित है और हिन्दू अपराधी। गुंडे भगवान की पूजा न करें, चंदन न लगाएँ और भगवान का नाम न लें तो भला वो बॉलीवुड के विलेन कैसे हुए? इसीलिए रिंकू के परिवार वालों को भी हवन वगैरह करते हुए दिखाया गया है। रिंकू बार-बार घर से भागती है, लेकिन उसकी नानी जबरन उसकी शादी करवा देती है।

पीयूष जैन ने 2 तहखानों में छुपाए थे करोड़ों रुपए, घरवालों को भी नहीं थी भनक: रेड पूरा होने पर अधिकारी ने बताया क्या-क्या हुआ बरामद

कानपुर के इत्र कारोबारी पीयूष जैन (Piyush Jain) के कन्नौज (Kannauj) स्थित आवास पर छापेमारी (Raid) अब खत्म हो चुकी है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम कारोबारी के पैतृक घर से वापस चली गई है। डीजीजीआई टीम के साथ मौजूद रहे एक अधिकारी ने बताया कि पीयूष जैन के कन्नौज स्थित घर में जमीन के नीचे बंकर बनाए गए थे और वहाँ भी कैश रखे गए थे।

पाँच दिन की छापेमारी में डीजीजीआई टीम के साथ रहे चश्मदीद अमित दुबे ने कहा, “बहुत मुश्किल के बाद जमीन के नीचे बने दो बंकरों से कैश बरामद हुआ था। परिवार के लोगों को भी इसकी कोई जानकारी नहीं थी।”

डीजीजीआई के एडिशनल डायरेक्टर जाकिर हुसैन ने बताया, “हमने अपना पंचनामा पूरा कर लिया है। यहाँ मिला सोना हमने डीआरआई को सौंप दिया है। इसके अलावा 19 करोड़ रुपए की नकदी मिली है, जिसे एसबीआई में डिपॉजिट कराया गया है।” उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के मुताबिक यह अब तक की सबसे बड़ी कैश बरामदगी है।

बता दें कि कानपुर कोर्ट ने कारोबारी पीयूष जैन को करोड़ों रुपए की कर चोरी और अघोषित संपत्ति के मामले में सोमवार (27 दिसंबर 2021) को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। रविवार (26 दिसंबर 2021) की रात को गिरफ्तार करने के बाद पीयूष जैन को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने सोमवार को पेश किया गया था। इत्र कारोबारी के आवास पर छापेमारी में 284 करोड़ रुपए से अधिक का कैश, 26 किलोग्राम सोना और 600 किलोग्राम चंदन की लकड़ी बरामद हुई थी।

सूत्रों के अनुसार, जैन ने बताया है कि उसके घर से बरामद किए गए 284 करोड़ रुपए नकद उसके पूर्वजों द्वारा छोड़े गए सोना को बेचकर जमा किया है। उसका कहना है कि उसके पूर्वजों ने 400 किलो सोना छोड़ा था। अधिकारी के अनुसार, सोना बेचने का कारण पूछने पर पीयूष ने बताया कि व्यापार के लिए नकदी की आवश्यकता थी।

नाखून उखाड़े, कील ठोंकी, नंगा किया: डायन बता स्कॉटलैंड में मार डाले गए 2500, एक्ट हटा पर 285 साल बाद भी इल्जाम कायम

सदियों पहले स्कॉटलैंड में कुछ औरतों को डायन और कुछ पुरुषों को जादू-टोना करने वाला कहकर उन्हें मारने का जघन्य अपराध हुआ। कभी उनके नाखून उखाड़े गए, कभी गला घोंटा गया तो कभी उन्हें जिंदा जलाया गया। तमाम प्रताड़नाओं को सहने के बाद सैंकड़ों पीड़ितों ने दम तोड़ा और कई गिरफ्तार हुए। अब सदियों बाद ‘द विचिस ऑफ स्कॉटलैंड’ नामक समूह ने ये माँग उठाई है कि उन पीड़िताओं पर लगे ‘डायन होने के’ इल्जामों को खत्म किया जाना चाहिए। इस संबंध में इस समूह ने स्कॉटलैंड संसद तक अपनी याचिका दी है, जिसे समर्थन भी मिला है।

डेलीमेल की रिपोर्ट के अनुसार, सन् 1590 में जिलीस डनकन नामक एक गरीब लड़की की चीखों ने सबको दहला दिया था। मगर, एडिनबर्ग के पूर्व में स्थित एक शहर ट्रानेंट के अधिकारी और उसकी टीम को उस लाचार लड़की पर दया नहीं आई। उन्होंने उस पर जादू-टोना करने वाली डायन होने का इल्जाम मढ़ा और फिर उंगली मोड़ने वाले औजार से उसकी उंगली कुचल डाली। फिर उसे रस्सी से बांधा गया और नंगा करके शरीर को छील दिया गया। उसके साथ ये बर्बरता करने वालों ने अपनी क्रूरता को जायज ठहराने के लिए दावा किया था कि गिलिन के गले में शैतान का निशान था।

मौजूदा जानकारी बताती है कि स्कॉटलैंड में एक समय में डायन बताकर या जादू-टोना करने वाले कहकर, करीब 4000 लोगों (84% महिलाएँ) को गिरफ्तार किया गया था और इनमें 2500 से ज्यादा की हत्या कर दी गई थी। ये पूरा आँकड़ा 1563 से 1736 के बीच का है। ये वहीं अंतराल है जब विचक्राफ्ट एक्ट स्कॉटलैंड में अस्तित्व में आया और बाद में उसे वापस ले लिया गया। इस एक्ट के आने के पीछे की वजह थी किसी अनहोनी का किसी दूसरे पर इल्जाम मढ़ा जा सके।

इस एक्ट के तहत तमाम लोग मारे गए। एक बुजुर्ग महिला एग्नेस सैंपसन को लेकर बताया जाता है कि उन्हें नींद की समस्या थी जिसकी वजह से उनकी मति भ्रमित हो जाती थी। अधिकारियों ने इस बुजुर्ग को भी गिरफ्तार किया और इन्हें होने वाली हैलुसिनेशन की समस्या को सबूत के तौर पर पेश किया कि वो डायन हैं। बाद में उन्हें कोठरी में बंद करके दीवार से चिपका कर रखा गया। साथ ही उनके मुँह में चार नुकीले काँटे डाले गए।

एक डॉ जॉन थे जो पेशे से स्कूल मास्टर थे उन्हें भी जादू टोना करने के आरोप में पकड़ा गया था। इसके बाद उन्हें नाखून नोच दिए गए और उनकी जगह लोहे की कील घुसा दी गई। बाद में उंगली तोड़ने वाले औजार से उनकी उंगली भी कुचल दी गई और पैर को ऐसे जूतों में फंसा दिया गया जिसे पिंडली की हड्डियों को कुचलने के लिए डिजाइन किया गया था। ये तीनों बर्बरता साल 1591 की बाते हैं जिनके शरीर को भीड़ के सामने कैसलहिल में जलाया गया। इनके अलावा ऐसे कई लोग थे जिन्हें जिंदा जला दिया गया।

19 महीने, 1000 गाँव… और ढूँढ निकाला अपनी ‘मृत’ पत्नी को: ये बॉलीवुड की ‘राम लीला’ नहीं, चारधाम यात्रा की सच्ची ‘विजेंद्र-लीला’ है

आज हम आपको राजस्थान के अजमेर के रहने वाले बुजुर्ग विजेंद्र सिंह राठौड़ और उनकी धर्मपत्नी लीला की प्रेम कहानी बता रहे हैं, जो अनोखी सी है। एक ट्रेवल एजेंसी में कार्यरत रहे विजेंद्र सिंह राठौड़ की पत्नी ने 2013 में उनसे चारधाम यात्रा के लिए आग्रह किया था। ट्रेवेल एजेंसी के ही एक टूर का केदारनाथ यात्रा पर जाना प्रस्तावित था। इसके बाद ये दोनों भी वहाँ के लिए चल निकले। केदारनाथ वो पहुँच भी गए, जहाँ उन्होंने एक लॉज में ठहरने का इंतजाम किया।

जहाँ उनकी पत्नी लीला लॉज में रुकी हुई थी, विजेंद्र कुछ काम से बाहर गए हुए थे। यही वो समय था, भारत ने पिछले कुछ दशकों के सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा को झेला। उत्तराखंड में बाढ़ और बारिश का कहर मच गया। बाढ़ का पानी केदारनाथ भी आ पहुँचा। जहाँ ये दोनों रुके हुए थे, वहाँ भी स्थिति अलग नहीं थी। सब सब कुछ थोड़ा शांत हुआ तो विजेंद्र जल्दी से उस लॉज की तरफ भागे, जहाँ उनकी पत्नी रुकी हुई थीं। लेकिन, वहाँ लगभग सब कुछ पानी के साथ बह चुका था।

किसी अनहोनी की आशंका से विजेंद्र सिंह राठौड़ भी डर गए। तरह-तरह के ख्याल उनके मन में आने लगे। लेकिन, उन्होंने अपने मन में ठान लिया कि लीला जीवित हैं और वो उन्हें खोज कर ही दम लेंगे। उनके पास पर्स में पत्नी की एक तस्वीर थी, जिसे वो हमेशा पास में रखते थे। ऐसे समय में जब चारों तरफ कई लोगों ने अपनों को खो दिया था और लाशें बिखरी पड़ी थीं, विजेंद्र सिंह राठौड़ का मन ये मैंने के लिए तैयार नहीं था कि उनकी पत्नी नहीं रहीं।

सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ राहत कार्यों में जुटी हुई थी और विजेंद्र सिंह राठौड़ अपनी पत्नी की खोज में। वो लोगों से तस्वीर दिखा-दिखा कर पूछ रहे थे कि क्या उन्होंने इस महिला को देखा है। कहीं से सकारात्मक जवाब नहीं मिल रहा था। घर में उनके बच्चे भी किसी अनहोनी की आशंका से भयभीत थे, जिन्हें फोन से उन्होंने ये जानकारियाँ दी थीं। सेना के अधिकारियों तक से संपर्क किया, लेकिन पानी में बहने की बात ही सामने आ रही थी। बेटी ने भी लगभग मान लिया था की माँ नहीं रहीं, लेकिन विजेंद्र ने उसे डाँटा और कहा कि वो जीवित हैं।

सरकार की तरफ से उनके घर फोन भी आया कि लीला मर चुकी हैं और उन्हें मुआवजा दिया जा रहा है, लेकिन उन्होंने इस मुआवजे को लेने से भी इनकार कर दिया। सरकारी दस्तावेजों में वो भले ही मृत थीं, लेकिन विजेंद्र सिंह राठौड़ के मन में नहीं। उन्होंने उत्तराखंड के कई इलाके छान मारे उनकी तलाश में। 19 महीनों में उन्होंने 1000 से अधिक गाँव छान मारे। वो 27 जनवरी, 2015 का दिन था जब एक गाँव में अचानक एक राहगीर ने तस्वीर देख कर कहा कि उसने इस महिला को देख रखा है।

उसने बताया कि ये महिला गाँव में ही घूमती रहती हैं और उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं लगती है। उस गाँव में एक चौराने के कोने में उन्हें उनकी पत्नी बैठी हुई मिलीं। काफी देर तक वो उनका हाथ पकड़ कर रोते रहे। लीला उन्हें पहचान तक नहीं पा रही थीं। 12 जून, 2013 को वो उन्हें अपने घर ले गए। 19 महीने बाद परिवार के साथ उनका पुनर्मिलन हुआ। बॉलीवुड की ‘राम-लीला’ की कहानी के दौर में ये ‘विजेंद्र-लीला’ की कहानी एक अलग सी है, अनोखी है।

‘द बेटर इंडिया’ ने सिद्धार्थ सिंह द्वारा शब्दों में पिरोई गई इस सच्ची घटना की कहानी को ट्विटर पर साझा किया है, जिसे खूब पसंद किया जा रहा है। 2017 में ही खबर आई थी कि बॉलीवुड के निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर इस प्रेम कहानी पर फिल्म भी बनाने जा रहे हैं। विजेंद्र की दृढ इच्छाशक्ति और पत्नी से प्रेम के वो कायल हो गए। उस समय आमिर खान के इसमें मुख्य किरदार अदा करने की बात सामने आई थी, लेकिन ये प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका। 19 महीने और 1000 गाँवों में की गई इस खोज को सचमुच परदे पर दिखाना एक कठिन टास्क होगा।

PM मोदी की कानपुर रैली में फसाद की सपा ने रची थी साजिश, BJP कार्यकर्ताओं को उकसा कर भड़काई जानी थी हिंसा: CCTV फुटेज से पर्दाफाश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की उत्तर प्रदेश के कानपुर में रैली (Kanpur News) में बवाल कराने के लिए रची गई साजिश का पुलिस ने खुलासा किया है। बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने रैली के लिए जुटे भाजपा कार्यकर्ताओं को भड़का कर हिंसा कराने के लिए हमले की साजिश रची थी। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने भाजपा नेता की गाड़ी पर हमले का वीडियो वायरल होने के बाद मामले की तहकीकात की और इसके लिए सीसीटीवी फुटेज जुटाए। पुलिस ने समाजवादी पार्टी के पाँच नेताओं को साजिश रचने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

पुलिस के अनुसार, कानपुर में पीएम की रैली से कुछ देर पहले कानपुर के नौबस्ता-हमीरपुर रोड के बंबा चौराहे पर सपा नेता प्रधानमंत्री की रैली का विरोध करते हुए उनका पुतला फूँक रहे थे। उनका कहना था कि कानपुर मेट्रो की नींव उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रखी थी और प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन कर रहे हैं।

इसी दौरान विरोध प्रदर्शन की जगह एक कार पहुँचती है, जिसमें भाजपा का बैनर पोस्टर लगा था। इस कार को देखकर सपा कार्यकर्ता उसमें तोड़फोड़ करने लगते हैं। इसमें सपा छात्र सभा के राष्ट्रीय सचिव सचिन केसरवानी भी शामिल रहते हैं। इस घटना का वीडियो भी बनाया जाता है और उसे वायरल कर दिया जाता है। पुलिस ने जाँच में पाया कि यह कार सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व जिला सचिव और सपा नेता अंकुर पटेल की है और उसने अपनी गाड़ी पर भाजपा का झंडा लगाया था। पुलिस ने बताया कि इस तोड़फोड़ का उद्देश्य रैली में पहुँचे भाजपा के कार्यकर्ताओं को भड़काना था, ताकि हिंसा फैलाई जा सके।

हालाँकि पुलिस की मुस्तैदी से किसी अप्रिय घटना को होने से पहले ही रोक दिया गया। पुलिस ने नौबस्ता थाने में सपा नेताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं में तीन नामजद और छह अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। साथ ही कुछ अज्ञात लोगों के नाम भी इसमें दर्ज हैं। वहीं, हिंसा फैलाने और उपद्रव करने के आरोप में पुलिस ने सपा के पाँच कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही पुलिस ने गाड़ी को भी जब्त किया है।

पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने बताया कि जब वायरल वीडियो की जाँच की गई तो साजिश की हकीकत सामने आ गई। इस साजिश में सपा नेता सचिन केसरवानी, निकेश यादव और अंकुर पटेल के नाम सामने आए हैं। आरोपितों के खिलाफ बवाल, शांति भंग करने का प्रयास, संपत्ति को नुकसान साजिश रचने सहित कई आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी उपद्रवियों को चिह्नित कर लिया गया है।

गौरतलब है कि मंगलवार (28 दिसंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कानपुर में मेट्रो का उद्घाटन किया था। इस दौरान एक रैली का भी आयोजन किया गया था। इसमें प्रधानमंत्री के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल थे। इस रैली के शुरू होने से पहले सपा नेताओं ने यह साजिश रची थी।

भरुच धर्मान्तरण केस में समद, शब्बीर, अब्दुल्ला फेफड़ावाला सहित 5 के खिलाफ अरेस्ट वारंट, 37 आदिवासी परिवारों को बनाया था मुस्लिम

गुजरात (Gujrat) की भरूच पुलिस ने भरूच में सामूहिक धर्मान्तरण (Religious conversion) मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए जिला अदालत से पाँच मुख्य आरोपितों के खिलाफ अरेस्ट वारंट हासिल कर लिया है। आमोद निवासी अब्दुल समद मोहम्मद उर्फ ​​दाऊद सुलेमान पटेल (बेकरीवाला), शब्बीर मोहम्मद पटेल (बेकरीवाला), हसन ईशा पटेल (हसन तितली), इस्माइल याकूब उर्फ ​​इस्माइल अछोड़वाला (मौलवी) और भरूच के ही नबीपुर के रहने वाले अब्दुल्ला आदम फेफड़ावाला के खिलाफ कोर्ट ने CRPC की धारा 70 के अंतर्गत के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

15 नवंबर 2021 को इन सभी के खिलाफ आमोद पुलिस स्टेशन में प्रवीण वसावा की शिकायत पर केस दर्ज किया गया था, जिसमें 9 आरोपितों पर लालच देकर 37 आदिवासी परिवारों का धर्मान्तरण कराने का आरोप लगा गया था। बहरहाल, वारंट जारी होने के बाद अब पुलिस आरोपितों को समन और लुक आउट सर्कुलर जारी कर सकती है।

धर्मान्तरण के मामले में 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जबकि 4 लोग अभी भी बाहर घूम रहे हैं। वहीं पाँचवाँ आरोपित अब्दुल्ला फेफड़ावाला फरार है और उसके लंदन में होने की सूचना है। इन पाँचों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया है।

CRPC की धारा 70 के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी होने के कारण इस मामले में आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अब पूरे राज्य की पुलिस की मदद ले सकती है। अगर ये पुलिस की पहुँच से बाहर रहते हैं तो CRPC की धारा 82 के तहत इन्हें फरार घोषित कर सपत्ति को जब्त किया जा सकेगा।

क्या है भरूच धर्मान्तरण का मामला

15 नवंबर 2021 को भरूच के आमोद पुलिस स्टेशन पार्ट ए में दलित समुदाय से आने वाले प्रवीण वसावा की शिकायत पर गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 4, 5, 4-G और आईपीसी की धारा 120 (B), 153 (B) (C), 506 (2), 153A (1), 295 (K), 466, 467, 468, 471 और एट्रोसिटी एक्ट की धारा 3 (2) (5-A), 3 (2) (5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 धारा 84 -C के तहत 9 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जिन 9 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई उनमें शब्बीर बेकरीवाला (आमोद), समाज बेकरीवाला (आमोद), अब्दुल अजीज पटेल (कांकरिया, आमोद), यूसुफ पटेल (कांकरिया, आमोद), अयूब बरकत पटेल (कांकरिया, आमोद), हसन टिसली (अछोद, आमोद) , फेफड़ावाला हाजी अब्दुल्ला, इस्माइल अछोड़वाला उर्फ ​​डेलावाला (मौलवी) (अछोद, आमोद) और इब्राहिम पटेल (कांकरिया, आमोद) शामिल हैं।

प्रवीण वसावा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपितों ने हिंदू वसावा आदिवासियों को नौकरी, पैसे और बेहतर भविष्य का लालच देकर साल 2018 में धर्मान्तरण करवा दिया था। FIR के मुताबिक, आरोपितों ने लोगों को इस राष्ट्रव्यापी धर्मान्तरण के रैकेट की शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देते हुए कहा था कि वो लोग कश्मीर और पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं।

FIR के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 9 में से चार आरोपित अब्दुल अजीज पटेल, यूसुफ पटेल, अयूब बरकत पटेल और इब्राहिम पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा 6 अन्य याकूब इब्राहिम शंकर, रिजवान महबूब पटेल, ठाकोरभाई गिरधरभाई वसावा, साजिदभाई अहमदभाई पटेल, युसूफ वली हसन पटेल और अयूब बशीरभाई पटेल को भी गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपितों ने विदेशों से चंदा लेकर 14 लाख रुपए जुटाए थे। इसमें से 7 लाख रुपए रिजवान पटेल ने बहरीन के इस्माइल से जमा किए थे। भरूच के पुलिस उपाधीक्षक MP भोजानी ने कहा कि जाँच के दौरान यह पता चला है कि याकूब शंकर और रिजवान पटेल ने 14 लाख रुपए एकत्र किए थे, जिसका उपयोग एक इबादतगाह (मस्जिद) बनाने और इस्लाम कबूल करने वाले लोगों में बाँटने के लिए किया गया था। इस तरह की धर्मांतरण गतिविधियों के लिए भरूच जिला कलेक्टर से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।

भोजानी ने आगे कहा कि ठाकोर भाई गिरधर भाई वसावा ने आदिवासी परिवारों को इस्लाम में धर्मांतरित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जंबूसर के अयूब बशीर पटेल गाँव में मोहम्मदी मस्जिद का सदस्य है और नए धर्मांतरित आदिवासियों को इस्लाम के बारे में सिखाने के लिए वहाँ ले जाता है।

वहीं, साजिद और युसूफ अछोड़वाला गाँव के बैतुलमाल ट्रस्ट के सदस्य हैं और सलाउद्दीन शेख ने उन्हें 3.71 लाख रुपए का चंदा दिया था। इस साल अक्टूबर में वडोदरा शहर पुलिस के विशेष जाँच दल (SIT) ने पाया कि शहर स्थित अमेरिकन फेडरेशन ऑफ मुस्लिम्स ऑफ इंडियन ओरिजिन (AFMI) ने ‘विस्थापित’ बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों के लिए गाजियाबाद के नजदीक 400 फ्लैटों के निर्माण सहित अन्य गतिविधियों के लिए हवाला के जरिए फंड भेजा था।

उस पर भारत-नेपाल सीमा के पास मौलवियों को फंडिंग करने का भी आरोप है। शेख AFMI के ट्रस्टियों में से एक हैं। कुछ साल पहले मुंबई में इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक से प्रभावित होकर शेख ने ट्रस्ट की शुरुआत की थी। उसका नाम उत्तर प्रदेश के सामूहिक धर्म परिवर्तन रैकेट में भी सामने आया था। इस रैकेट के प्रमुख संदिग्धों में उमर गौतम है।

वहीं लंदन में माने जा रहे हाजी फेफड़ावाला पर वडोदरा में साल 2019 में भड़काऊ भाषण देने और 2002 में हुए गोधरा कांड के मामले में दगे करवाने के भी आरोप हैं। 2003 में उसने 125 डोनर ढूँढने की बात कही थी। जिसके जरिए वह लंदन से मुस्लिमों को पैसा भेजने वाला था।

उक्त कार्यक्रम में सलाहुद्दीन शेख और उमर गौतम भी शामिल थे, जो कि यूपी एटीएस द्वारा हवाला और धर्मान्तरण रैकेट चलाने के मामले में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। माना जा रहा है कि बीते 18 सालों में फेफड़ावाला ने भारत को 150 करोड़ रुपए से अधिक का दान दिया है।

Bose साउंड सिस्टम से लेकर Piaget लेडीज वॉच तक: क्या आप जानते हैं 101 खास तोहफे अपने साथ ले गए थे मनमोहन सिंह

क्या आपको पता है कि 10 साल भारत के प्रधानमंत्री रहे डॉक्टर मनमोहन सिंह देश-विदेश से मिले कई तोहफे अपने साथ ले गए थे? आइए, आपको पूरा माजरा बताते हैं। मई 2014 में इस सम्बन्ध में एक RTI दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि देश-विदेश से मिले जो तोहफे/पारितोषिक डॉक्टर मनमोहन सिंह अपने साथ ले गए, उसकी जानकारी दी जाए। साथ ही इस एक दशक में उनके द्वारा अर्जित की गई धनराशि (वेतन-भत्तों समेत) के सम्बन्ध में भी जानकारी माँगी गई थी।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने ‘सूचना के अधिकार’ के तहत दायर की गई RTI का जवाब देते हुए बताया था कि प्रधानमंत्री को केवल विदेशों से मिले तोहफों के बारे में ही जानकारी उपलब्ध है। साथ ही एक नियम का हवाला देते हुए बताया गया कि इन तोहफों के स्रोतों के नाम नहीं बताए जा सकते हैं, अर्थात ये किन देशों की सरकारों व हस्तियों से मिले। 30 जून, 2013 तक उन्हें विदेश से मिले गिफ्ट्स के सम्बन्ध में सूचनाएँ संकलित की गई थीं। इनमें जो प्रमुख हैं, उनके बारे में हम आपको बताते हैं।

फरवरी 2008 में उन्हें चाँदी से बनी नाव की एक प्रतिकृति मिली थी, जिसकी कीमत 8000 रुपए थी। 2008 के अगस्त और सितम्बर में मिली 5-5 हजार रुपए की कालीनें, जनवरी 2009 में मिली 9000 रुपए की एक कालीन, अगस्त 2009 5000 रुपए की एक क्लॉइजन चिलबो, सितम्बर 2009 में 4000 रुपए की एक पत्थर की आकृति, मई 2010 में 4000 रुपए की सुनहरे रंग की प्रतिमा, उसी महीने मिली 5000 रुपए के एक बगीचे और फूलों की तस्वीर और अप्रैल 2004 में चीनी-मिट्टी की वस्तुओं का 5000 रुपए का सेट शामिल है।

इन तोहफों में नवंबर 2012 में मिला एक कालीन भी शामिल है, जिसकी कीमत 30,000 रुपए थी। इसके अलावा जून 2011 में मिला 4000 रुपए का टी-सेट, मार्च 2012 में 5000 रुपए की माँ सरस्वती की तस्वीर, इसके अगले महीने मिला 5000 रुपए का सैमसंग का डिजिटल कैमरा, उसी साल जून में मिला 4500 रुपए का मोती का हार, इसके 3 महीने बाद मिला 4000 रुपए का फूलदान का जोड़ा और उसी महीने मिली इतने की ही एक कालीन, सितम्बर 2012 में मिला 4500 रुपए का एक डिनर सेट और जून 2013 में मिला 4800 रुपए का चीनी-मिट्टी का बना फूलदान का एक जोड़ा शामिल है।

जानकारी सामने आई थी कि बोस कंपनी के एक म्यूजिक सिस्टम से लेकर पागेट के एक लेडीज वॉच तक, डॉक्टर मनमोहन सिंह 101 खास विदेशी तोहफे अपने साथ ले गए। हालाँकि, इस सम्बन्ध में ज्यादा जानकारियाँ देने से PMO ने इनकार कर दिया था। बरेली के एक अधिवक्ता द्वारा दायर की गई RTI के जवाब में पता चला था कि ‘Foreign Contribution (Acceptance or Retention of Gifts or Presentations) Regulations 1978’ और ‘Foreign Contribution (Acceptance or Retention of Gifts or Presentations) Rules 2012’ के तहत उन्हें ये तोहफे अपने पास रखने की अनुमति है।

बोस का जो स्पीकर म्यूजिक साउंड सिस्टम प्रधानमंत्री रहते डॉक्टर मनमोहन सिंह को तोहफे में मिला था, उसकी कीमत 20,000 रुपए थी, जबकि पागेट लेडीज रिस्ट वॉच 35,000 रुपए का था। एक कालीन तो 30,000 रुपए का भी था। उन्हें मिले तोहफों की कीमत 300 रुपए से शुरू होक अधिकतम 35,000 रुपए थी। यूपीए के 10 वर्षों के दौरान जब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी रिमोट कंट्रोल की सरकार चला रही थी, उस दौरान मनमोहन सिंह ही प्रधानमंत्री थे।

जैसे सोनिया गाँधी के इशारे पर PM रहते चलते थे मनमोहन, वैसे ही CM चन्नी को चलाना चाहते हैं सिद्धू: इंटरव्यू में बताया पंजाब में चाहते क्या हैं

मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केंद्र में 10 साल तक यूपीए की सरकार चली। आरोप लगते रहे हैं कि बतौर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस सरकार के केवल मुखौटे थे। पीछे से सरकार कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी चलाती थीं। अब पंजाब में भी ऐसा ही कुछ करने की तमन्ना कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot singh siddhu) रखते हैं। वे चाहते हैं कि बतौर मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit singh channi) वैसे ही उनके इशारे पर चलें, जैसे सोनिया के इशारे पर प्रधानमंत्री रहते मनमोहन सिंह चला करते थे।

सिद्धू की यह ख्वाहिश ऐसे वक्त में सामने आई है जब कॉन्ग्रेस आलाकमान ने पंजाब में मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं घोषित करने का फैसला किया है। राज्य में नए साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं और आलाकमान का यह फैसला सिद्धू के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। एक इंटरव्यू में सिद्धू ने कहा है कि प्रधानमंत्री रहते मनमोहन सिंह तब की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से हर मसले पर चर्चा करते थे। उनकी बात माना करते थे। पंजाब कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष होने के कारण वे भी ऐसी ही उम्मीद चन्नी से रखते हैं।

दैनिक भास्कर के अरविंद श्रीवास्तव को दिए इंटरव्यू में सिद्धू ने खुद को ईमानदार बताते हुए कहा कि उनकी लड़ाई इस सिस्टम से है और ये व्यवस्था तब तक सही से काम नहीं करेगी, जब तक कि नैतिकता, किरदार और एजेंडे को फॉलो नहीं किया जाएगा। जब सिद्धू से विक्रम मजीठिया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 2017 के चुनाव के दौरान बेअदबी और ड्रग्स सबसे बड़े मुद्दे थे। लेकिन चुनाव के बाद उनके अलावा किसी और ने इस मुद्दे को नहीं उठाया।

सिद्धू ने किसान आंदोलन (Farmers protest) का समर्थन करने औऱ अब किसानों के चुनाव लड़ने को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ना सभी का अधिकार है। लेकिन अब किसानों को भी अपना एजेंडा बताना होगा। जैसे तीनों कृषि कानूनों की वापसी से क्या किसानी सुधर गई? आत्महत्या रुकी या नहीं और व्यापारियों को कैसे साथ लेकर चलेंगे।

इसके साथ ही कॉन्ग्रेस नेता ने पुलिस को लेकर दिए गए अपने विवादित बयान को लेकर भी माफी माँगी। उन्होंने कहा कि इससे अगर पुलिस की इमेज खराब होती है तो वे इसके लिए माफी माँगते हैं। बता दें कि सिद्धू ने सुल्तानपुर लोधी में MLA नवतेज चीमा को लेकर बयान देते हुए कहा था कि अगर वह एक खंगारा मारे तो थानेदार पेंट गीली कर देगा।

पंजाब चुनाव में कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरा बनाए जाने को लेकर सिद्धू ने कहा कि इसका फैसला चुनाव बाद विधायक करेंगे। गौरतलब है पार्टी आलाकमान ने पंजाब में सीएम चेहरा घोषित नहीं करने का फैसला किया है। कॉन्ग्रेस नेतृत्व स्पष्ट कर चुका है कि विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा, ताकि पंजाब में सभी धर्मों और जाति के मतदाताओं के बीच अपनी पैठ स्थापित की जा सके। पार्टी आलाकमान ने यह भी कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को जाट नेता, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को दलित चेहरे और सुनील जाखड़ को हिंदू चेहरे के रूप में चुनावी मैदान में उतारा जाएगा।