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राजस्थान में दो कारोबारियों पर IT रेड, ₹300 करोड़+ की अघोषित आय का खुलासा, पीयूष जैन से भी बड़ा मामला

कानपुर के इत्र व्यापारी पीयूष जैन का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि आयकर विभाग ने विद्युत उपकरण निर्माण और कर्ज देने के कारोबार से जुड़े राजस्थान के दो समूहों पर छापेमारी में 300 करोड़ रुपए की बेहिसाबी आय का पता लगाया है। सीबीडीटी ने मंगलवार (28 दिसंबर 2021) को यह जानकारी दी। ये छापेमारी 22 दिसंबर को मारे गए और जयपुर, मुंबई तथा हरिद्वार में स्थित दो अज्ञात समूहों के करीब 50 परिसरों में तलाशी ली गई।

इसमें से एक समूह इलेक्ट्रिकल स्विच, वायर, एलईडी, रियल एस्टेट और राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड में होटल बिजनेस से जुड़ा है। वहीं दूसरा समूह जयपुर और उसके आसपास के शहरों में उधार पर पैसे देने का धंधा करता है। छापेमारी में कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डाटा मिले हैं।   

टैक्सबेल इनकम छिपाने के लिए फर्जी बिल

इलेक्ट्रिकल स्विच, वायर, एलईडी, रियल एस्टेट कारोबार के जुड़े समूह के खिलाफ जाँच में पता लगा है कि ये ग्रुप सामानों को बेच रहा जिसका लेखा जोखा रेग्युलर बुक ऑफ अकाउंट में रिकॉर्ड नहीं किया जा रहा था। जाँच में ये भी पता लगा कि अपना टैक्सेबल इनकम कम दिखाने के लिए ये लोग फर्जी खर्च दिखा रहे थे, जिससे कम टैक्स देना पड़े। नगद में बेचे गए सामानों का कैश रसीद बरामद किया गया है। इस समूह के खिलाफ इनकम टैक्स विभाग ने 150 करोड़ रुपए आय का पता लगाया है। जिस व्यापारी के खिलाफ जाँच की गई उसने 55 करोड़ रुपए के अघोषित आय होने की बात को स्वीकार करते हुए उस पर टैक्स भुगतान करने की बात कही है।

ऊँचे ब्याज पर नगद में उधार का धंधा

उधार पर पैसे देने वाले समूह के खिलाफ जाँच में टैक्स विभाग को पता लगा है कि ये समूह नगद में ऊँचे ब्याज दरों पर उधार देने का काम करता था। इस समूह ने लोन देने या फिर उस पर ब्याज से होने वाले कमाई का खुलासा अपने इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं किया है। इस समूह के खिलाफ जाँच में भी 150 करोड़ रुपए के अघोषित आय का पता लगा है। छापेमारी में अभी तक इनकम टैक्स विभाग ने 17 करोड़ रुपए के नगद और ज्वेलरी को जब्त किया है। विभाग की जाँच आगे भी जारी है।

पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग ठिकानों में आईटी विभाग और ईडी की ओर से लगातार छापेमारियाँ शुरू की गई है। इन छापेमारियों में कुछ बड़ी मछलियाँ भी पकड़ी गई हैं। बता दें कि कानपुर और कन्नौज में पीयूष जैन के घर छापा मारा गया था। कारोबारी के घर से करीब 194.45 करोड़ रुपए से ज्यादा नकदी, 23 किलो सोना, 600 किलो चंदन का तेल बरामद हुआ था। जैन की काली कमाई की पोल 4 ट्रकों ने खोल दी, जिन पर तंबाकू और पान मसाले लदे थे। यही ट्रक पीयूष जैन को डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की रडार पर ले आया।

हाल ही में आयकर विभाग ने महाराष्ट्र के नासिक, धुले और नंदुरबार में अलग-अलग ठिकानों पर भी छापेमारी की है। इस छापेमारी में 240 करोड़ तक की प्रॉपर्टी और कैश बरामद हुए। इनमें से 6 करोड़ कैश, 5 करोड़ के गहने शामिल हैं। इतनी संपत्ति और कैश कैसे जमा किए गए? अब तक इन घोटालों पर किसी का ध्यान कैसे नहीं गया, यह सवाल उठ रहे हैं।

कर्नाटक में 9 लोगों के परिवार ने अपनाया हिन्दू धर्म, 40 साल पहले पिता ने अपना लिया था ईसाई मजहब : VHP ने कराई घर-वापसी

कर्नाटक के भद्रावती स्थित अंतरगंगे गाँव में ईसाई परिवार के 9 सदस्यों ने ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में घर-वापसी की और हिन्दू धर्म अपना लिया। ये सभी 9 लोग एक ही परिवार के हैं। 55 वर्षीय जयशीलन ने बताया कि वो मूल रूप से तमिलनाडु से हैं लेकिन 7 दशक पहले उनके पूर्वजों ने कर्नाटक के भद्रावती में बसने का फैसला लिया था। पेशे से टेलर जयशीलन ने कहा कि उनके पिता एलुमलाई एक दिहाड़ी मजदूर थे। वो एक माइन में काम करते थे।

ये माइन ‘विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील लिमिटेड (VISL)’ को कच्चे धातु (Ore) की सप्लाई करता था। 40 वर्ष पहले उनके पिता ने ईसाई मजहब अपना लिया था, लेकिन अब इस परिवार ने वापस हिन्दू धर्म में आने का निर्णय लिया है। उन्होंने रविवार (26 दिसंबर, 2021) को ये बातें कही। जयशीलन का कहना है कि उनका जन्म तभी हो गया था, जब उनके पिता धर्मांतरित नहीं हुए थे। ऐसे में उन्होंने अपना धर्म बचपन से हिन्दू ही बनाए रखा। अब वो औपचारिक रूप से हिन्दू धर्म में आ गए हैं।

जयशीलन ने बताया, “मेरे पिता ने सरकारी रिकार्ड्स में मेरे दो बेटों के नाम ईसाई के रूप में दर्ज करा दिया। लेकिन, 10 वर्ष पहले मेरे पिता की मृत्यु हो गई और इसके बाद से ही हमलोगों ने हिन्दू धर्म को मानना शुरू कर दिया था। हालाँकि, हमें अब तक ऐसा कोई मंच नहीं मिला जिसके माध्यम से हम हिन्दू धर्म में वापस घर-वापसी कर सकें। इसीलिए, मैंने भद्रावती में ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के अपने दोस्तों से संपर्क किया।” भद्रावती के VHP नेता एच रामप्पा मौके पर मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि जयशीलन और उनके परिवार ने स्वेच्छा से हिन्दू धर्म में घर-वापसी की है। उन्होंने कहा कि हमने तो बस इस कार्य में उनकी मदद की है। VHP नेता ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में कई और लोग हिन्दू धर्म में घर-वापसी की।

राजस्थान में अंतिम संस्कार की हो रही थी तैयारी, सुसाइड नोट से पता चला गैंगरेप हुआ: बुआ के देवर ने दोस्तों संग दिया घटना को अंजाम

राजस्थान (Rajasthan) के बाड़मेर से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ गैंगरेप से आहत 16 साल की एक नाबालिग लड़की ने बदनामी के डर से पंखे से लटक कर रविवार (28 दिसंबर) की रात आत्महत्या (Suicide) कर ली। गैंगरेप के बारे में परिवार वालों को तब पता चला, जब वे उसके अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। उस दौरान मृतका के कपड़ों से उन्हें सुसाइड नोट मिला, जिसमें उसने मौत के कारणों का खुलासा किया था।

सुसाइड नोट में लिखा था, ”मैं मरने जा रही हूँ। मेरी चीजें किसी को मत देना। मैं मरना नहीं चाहती हूँ, लेकिन क्या करूँ? लोग मेरे पापा को सुनाएँगे। मेरे सपने अभी अधूरे हैं। महेंद्र और उसके दोस्त ने मुझे धोखे से बाहर बुलाया। मेरी बदनामी हो गई। मेरे मम्मी और पापा को कोई सुनाना मत। पापा मुझे माफ कर देना। मेरे कपड़े और सारी चीजें सही जगह पर रख देना। मैंने कुछ गलत नहीं किया है।” मृतका ने नोट में एक बार फिर लिखा, “पापा-मम्मी मुझे माफ करना… आपकी बेटी। मेरे मरने का कारण महेंद्र और उसका दोस्त है।”

सुसाइड नोट पढ़कर परिजनों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। इसके बाद पुलिस ने मृतका के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया और दो आरोपितों के खिलाफ गैंगरेप और पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

परिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपित मृतका की बुआ का देवर और उसका (देवर का) दोस्त है। दोनों वारदात को अंजाम देने के बाद से फरार हैं। पुलिस के मुताबिक, नाबालिग से महेंद्र सिंह (24) और एक नाबालिग ने रविवार को रेप किया। किसी को बताने पर उसे बदनाम करने की धमकी भी दी।

‘हत्या के प्रयास के झूठे केस में बेटे नितेश को फँसा रही है महाराष्ट्र सरकार’: गिरफ्तारी की आशंका पर बोले केंद्रीय मंत्री नारायण राणे

केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नारायण राणे ने मंगलवार (28 दिसंबर) को कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर उनके बेटे और भाजपा विधायक नितेश राणे को झूठे केस में फँसाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि वे इससे डरने वाले नहीं हैं।

हत्या के प्रयास के एक मामले में नितेश राणे की संभावित गिरफ्तारी की अटकलों के बीच नारायण राणे महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। नितेश राणे सिंधुदुर्ग जिले के कंकावली सीट से भाजपा के विधायक हैं। उन्होंने कहा कि शिव सेना, राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकंपा) और कॉन्ग्रेस की गठबंधन वाली महा विकास अघाड़ी सरकार अपने नेताओं के घोटालों को छुपाने के लिए ये सब कर रही है।

राणे ने कहा कि यह साजिश सिंधुदुर्ग जिला सहकारी बैंक के चुनाव के पूर्व रची गई है, ताकि सहकारी बैंक के चुनाव में जीत हासिल कर महा विकास अघाड़ी के नेताओं द्वारा की गई अनियमिताओं को छिपाया जा सके। राणे ने सवाल किया कि सिंधुदुर्ग जिले में राज्य के पुलिस महानिदेशक समेत शीर्ष पुलिस अधिकारी क्यों डेरा डाले हुए हैं?

साल 2005 में शिवसेना छोड़ भाजपा में शामिल हुए राणे ने कहा कि नितेश राणे को भारतीय दंड विधान (IPC) की धारा 307 के तहत उनके बेटे को हत्या के प्रयास के झूठे केस में फँसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिकार्यकर्ता को कुछ चोटें आई हैं, लेकिन नितेश उस दौरान वहाँ मौजूद भी नहीं थे। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने कुछ नहीं किया है।

बता दें कि नितेश पर एक शख्स पर हत्या के प्रयास के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में याचिका भी दायर की है। दरअसल, संतोष परब नाम के एक व्यक्ति ने नितेश के खिलाफ हमले की शिकायत दर्ज कराई थी।

बता दें कि शिवसेना के नेताओं का आरोप है कि राज्य के पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे को देखकर नितेश राणे ने ‘म्याऊँ… म्याऊँ…’ की आवाज निकाली थी। इसको लेकर शिवसेना के विधायक सदन में राणे को निलंबित करने की माँग कर रहे थे। सोमवार (27 दिसंबर) को राज्य के विधानसभा में शिवसेना के विधायक सुहास कांडे ने इस मुद्दे को उठाया था।

‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ कार्यक्रम में होर्डिंग वालों से भिड़े कॉन्ग्रेसी, जमकर चली कुर्सियाँ: वीडियो वायरल, लोगों ने जमकर लिए मजे

उत्तर प्रदेश के आगरा में कॉन्ग्रेस की ओर से आयोजित ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ कार्यक्रम के दौरान मारपीट हो गई। कार्यक्रम स्थल के बाहर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता की होर्डिंग वालों से कहासुनी हो गई। इसके बाद कार्यकर्ता को पीट दिया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और होर्डिंग लगाने वालों के बीच जमकर कुर्सियाँ चलीं। इससे अफरातफरी मच गई। बाद में थाने पर दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। 

गौरतलब है कि शहर के सूरसदन प्रेक्षागृह में सोमवार को कॉन्ग्रेस द्वारा ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ कार्यक्रम में आयोजित किया गया। इसमें महिला कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेटा डिसूजा और कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अलका लांबा ने महिलाओं से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम के दौरान सूरसदन प्रेक्षागृह के मुख्य द्वार पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता की होर्डिंग वालों से कहासुनी हो गई। 

इसके बाद कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता को पीट दिया गया। इस दौरान जमकर कुर्सियाँ चलीं। बीच-बचाव कराने पहुँचे शहर अध्यक्ष देवेंद्र चिल्लू के सिर में भी कुर्सी लग गई। शहर कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता आईडी श्रीवास्तव ने बताया कि शहर अध्यक्ष के सिर में कुर्सी लगी पर उनके कोई चोट नहीं आई। इंस्पेक्टर हरीपर्वत ने बताया कि दोनों पक्षों में होर्डिंग लागने को लेकर लेनदेन पर कहासुनी हुई थी, समझौता हो गया है। 

सोशल मीडिया पर लोगों ने लिए मजे

इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसे लेकर बीजेपी नेता सहित आम सोशल मीडिया यूजर्स जमकर मजे ले रहे हैं।

इस वीडियो को सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने शेयर करते हुए लिखा, “कार्यक्रम ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ का था लेकिन आगरा में आपस में ही लड़ पड़े कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता।”

बीजेपी कार्यकर्ता गौरव तिवारी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए ट्वीट किया, “प्रियंका गाँधी के नारे “लड़की हूँ लड़ सकती हूँ” के बाद राहुल गाँधी ने दिया लड़कों को नारा कॉन्ग्रेस के लड़के हैं, कहीं भी कुर्सी तोड़ सकते हैं।”

एक यूजर ने लिखा, इस घटना के बाद नया नारा – “कॉन्ग्रेसी हैं, लड़ते रहते हैं”

‘गाँधी ने एक लाठी भी खाई? शिवाजी-प्रताप-चाणक्य को बनाओ राष्ट्रपिता’: FIR पर बोले कालीचरण महाराज – फाँसी दे दो, माफ़ी नहीं माँगूँगा

कालीपुत्र कालीचरण महाराज ने रायपुर धर्म संसद में महात्मा गाँधी के खिलाफ बयान देने पर स्पष्टीकरण जारी किया है। अपने YouTube चैनल पर जारी किए गए वीडियो में ‘ॐ काली’ के साथ अपनी बात शुरू करते हुए उन्होंने कहा है कि महात्मा गाँधी के लिए कहे गए अपशब्दों का उन्हें कोई पश्चाताप नहीं है। उन्होंने पूछा कि महात्मा गाँधी ने हिन्दुओं के लिए किया ही क्या है? उन्होंने बताया कि किस तरह 14 वोट प्रधानमंत्री पद के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल को मिले, लेकिन शून्य वोट वाले जवाहरलाल नेहरू को पीएम बना कर उन्होंने वंशवाद फैलाया।

उन्होंने कहा कि अगर सरदार पटेल के हाथों में भारत की सत्ता गई होती तो हमारा देश आज जगद्गुरु होता और अमेरिका से भी आगे होता, लेकिन जनता के साथ विश्वासघात हुआ। उन्होंने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे प्रतिभावान लोगों को कॉन्ग्रेस में इसी कारण काम करने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि ‘साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल, दे दी आज़ादी हमें बिना खडग बिना ढाल’ गाना लिखने वाले को जूती मारने चाहिए। उन्होंने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को याद करते हुए पूछा कि क्या इन्होंने देश के लिए कुछ नहीं किया?

उन्होंने बताया कि किस तरह जिन क्रांतिकारियों को फाँसी पड़ी, जिनमें 80% सिख दे, ये गाना लिखने वालों ने उन्हें श्रेय नहीं दिया। उन्होंने पूछा कि क्या कभी महात्मा गाँधी ने एक लाठी भी खाई? उन्होंने कहा कि गाँधी चाहते तो भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फाँसी रुकवा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। कालीपुत्र कालीचरण महाराज ने गाँधी का तिरस्कार करने की बात करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने अपनी लाश पर भारत का बँटवारा होने की बात कही थी, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश बन गया।

उन्होंने कहा, “जान बँटवारा हुआ, तब गाँधी ज़िंदा थे। बँटवारे के दंगे में लाखों हिन्दुओं-सिखों को काट डाला गया। 27 लाख हिन्दुओं का नरसंहार हुआ ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के दिन जिन्ना द्वारा। पाकिस्तान की ट्रेनों से बोर के बोर भर कर हिन्दुओं की लाशें और महिलाओं के सामूहिक बलात्कार के बाद स्तन काट कर भेजे जा रहे थे। गाँधी अनशन कर रहे थे कि पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपए दो। जब दंगा पीड़ित सिखों ने ठंड में मस्जिदों का श्री लिया, तब उन्हें बाहर निकाल कर मुस्लिमों को मस्जिदें सौंपने के लिए गाँधी ने अनशन किया। इसीलिए, मैं नफरत करता हूँ गाँधी से।”

उन्होंने कहा कि ‘गजवा-ए-हिन्द’ के तहत भारत के इस्लामीकरण के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश को जोड़ने वाले हजारों वर्ग किलोमीटर का कॉरिडोर मुस्लिमों ने माँगा और उसे देने के लिए भी गाँधी अनशन करने वाले थे। उन्होंने बताया कि जब स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने हिन्दू वर्ण व्यवस्था को तोड़ कर एक होने की बात कही तो गाँधी ने नकार दिया। उन्होंने कहा कि बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने संस्कृत को राष्ट्रभाषा घोषित करने की बात कही, तब गाँधी ने इसके लिए अनशन नहीं किया।

कालीपुत्र कालीचरण महाराज ने पूछा कि जो राष्ट्र करोड़ों वर्षों से है, उसका राष्ट्रपिता कोई 200 वर्ष पहले आया व्यक्ति कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्र का पिता बनाना अनिवार्य ही है तो छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, आचार्य चाणक्य या महाराणा प्रताप को बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी के महापुरुषों को बनाना है तो राष्ट्र को एक करने वाले सरदार पटेल को बनाया जाना चाहिए, जिन्होंने छोटे-छोटे रियासतों को एक कर के टुकड़ों में बँटे देश को एक किया।

कालीपुत्र कालीचरण महाराज ने कहा, “अगर पाकिस्तान-बांग्लादेश को भारत में कॉरिडोर मिल जाता तो हिंदुस्तान कब का मुस्लिम बन गया होता। महात्मा नाथूराम गोडसे को कोटि-कोटि धन्यवाद है। उनके चरणों में साष्टांग प्रणाम है। उन्होंने अपना बलिदान देकर हिंदुस्तान को मुस्लिम बनने से बचा लिया। ‘गजवा-ए-हिन्द’ फेल कर दिया। सच बोलने की सज़ा मृत्यु है तो स्वीकार है। वीरों ने कुल के लिए बलिदान दे दिया तो मेरे जैसे करोड़ों कालीचरण धर्म के लिए मर सकते हैं। हम हिंदुत्व के लिए मृत्युदंड पाने के लिए भी तैयार हैं।”

बता दें कि छत्तीसगढ़ में संत कालीचरण महाराज के विरुद्द केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने महात्मा गाँधी को लेकर एक धर्म संसद में अपमानजनक बातें कहीं। ये धर्म संसद 26 दिसंबर 2021 को रायपुर के रावण भाटा मैदान में आयोजित की गई थी। उन्होंने मोहनदास करमचंद गाँधी का नाम लेकर उनकी हत्या का जायज ठहराया था। साथ ही गोडसे को नमन किया था। उन्होंने मंच से कॉन्ग्रेस नेताओं की आलोचना करते हुए हिंदू नेता चुनने की बात भी श्रोताओं से कही थी। इसके अलावा उन्होंने इस्लाम को लेकर कहा कि इस्लाम का मकसद राजनीति के जरिए देश पर कब्जा करने का था।

समाजवादी पार्टी की डिक्शनरी में ‘A फॉर आतंक, B ‘भाई-भतीजावाद’, सी- ‘करप्शन’ और..’ अमित शाह हरदोई में विपक्ष पर बरसे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने मंगलवार (28 दिसंबर 2021) को उत्तर प्रदेश के हरदोई (Hardoi) में एक रैली को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का ‘ABCD’ अलग है। उनके लिए ए का मतलब ‘अपराध और आतंक’, बी का मतलब ‘भाई-भतीजावाद’, सी का मतलब ‘करप्शन’ और डी का मतलब ‘दंगा’ है।

गृहमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर कानपुर के कारोबारी पीयूष जैन से संबंध होने का आरोप भी लगाया, जिसके आवास से छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपए और सोना बरामद हुआ था। हरदोई के जीआईसी मैदान में ‘भारत माता की जय’ के नारे से अपने संबोधन की शुरुआत करने वाले अमित शाह ने कहा कि बीजेपी अगले चुनाव में 300 से ज्यादा सीटें जीतकर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाएगी। ये विजय सपा, बसपा का सूपड़ा साफ करने वाली विजय होगी।

उन्होंने वहाँ मौजूद लोगों से सवाल पूछते हुए आगे कहा, “15 साल तक उत्तर प्रदेश में SP, BSP को राज करने का मौका दिया या नहीं। विकास हुआ क्या? गुंडे भागे थे क्या? गरीबों को अनाज मिलता था क्या? ये लोग विकास नहीं कर सकते। जैसे इत्र वाले के घर से 250 करोड़ रुपए मिले हैं, ऐसा भ्रष्टाचार ही ये कर सकते हैं।”

अनुच्छेद 370 के बारे में बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस इसे निरस्त करने का विरोध करती है। साथ ही उन्होंने कहा, “विपक्ष ताने मारता था की मंदिर वहीं बनाएँगे, लेकिन तिथि नहीं बताएँगे। 2019 में मोदी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी और 5 अगस्त को भूमि पूजन कराया। सपा, बसपा और कॉन्ग्रेस कितना भी जोर लगा लें, पर मंदिर अब बनने से कोई नहीं रोक सकता।”

‘मालेगाँव ब्लास्ट में योगी और RSS नेताओं का नाम लेने के ATS ने विवश किया’: बयान से मुकरा गवाह, कहा- परिवार को फँसाने दी गई थी धमकी

साल 2008 में महाराष्ट्र के मालेगाँव बम विस्फोट मामले में एक गवाह ने एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) पर प्रताड़ित करने और इस मामले कुछ लोगों को फँसाने के लिए उनके लिए के दबाव बनाने का आऱोप लगाया है। गवाह ने मंगलवार (28 दिसंबर 2021) को विशेष एनआईए अदालत को बताया कि मामले की जाँच कर रही एटीएस ने उसे बहुत प्रताड़ित किया और उत्तर प्रदेश के वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ और आरएसएस के चार लोगों का नाम लेने के लिए मजबूर किया था।

कोर्ट में अपने पूर्व के बयान से मुकरते हुए गवाह ने एटीएस पर ही आरोप लगाए हैं। गवाह ने मंगलवार को मुंबई की विशेष एनआईए अदालत को बताया कि एटीएस ने उसे उठाया और सात दिन तक बंद रखा। इस दौरान उसे प्रताड़ित किया गया और उसके परिवार को भी फँसाने की धमकी दी गई। गवाह ने बताया कि एटीएस ने उसे भाजपा के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ के अलावा आरएसएस के इंद्रेश कुमार, देवधर, काकाजी और स्वामी असीमानंद का नाम लेने के लिए मजबूर किया था। 

उस समय एटीएस के सामने गवाह ने बयान किया था कि वह ‘स्वामी शंकराचार्य’ (सुधाकर द्विवेदी) से नासिक में मिला था, जिन्होंने कथित तौर पर ‘हिंदुत्ववाद’ का उल्लेख किया था और हिंदुओं के साथ अन्याय होने की बात भी कही थी। बता दें कि मालेगाँव केस में अब तक 218 लोगों की गवाही हुई है, जिसमें से 13 गवाह अपने बयानों से मुकर चुके हैं।

बता दें कि इससे पहले अगस्त महीने में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के खिलाफ बयान देने वाला गवाह मुकर गया था, जिसके बाद स्पेशल एनआईए अदालत ने उसे पक्षद्रोही करार दिया था। लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित के अलावा इस मामले के अन्य आरोपित भोपाल से भाजपा की लोकसभा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, अजय रहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी है। ये सभी जमानत पर हैं और गैर-कानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) और अन्य के प्रावधानों के तहत मुकदमे का सामना कर रहे हैं। 

गौरतलब है कि सितंबर 2008 में मालेगाँव की एक मस्जिद के पास हुए बम धमाकों में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में बाँधे गए विस्फोटक से धमाके को अंजाम दिया गया था। एटीएस ने इस मामले में शुरुआती जाँच की थी। तीन साल बाद 2011 में इस केस को एनआईए के पास ट्रांसफर किया गया था। मालेगाँव धमाका मामले में अब एनआईए की स्पेशल कोर्ट सुनवाई कर रही है।

‘बंद करो दूसरो पर अपना मजहब थोपना’: इस्लाम को न मानने वाली उर्फी जावेद ने की तालिबान के पतन की कामना

इंटरनेट सेंसेशन उर्फी जावेद (Urfi Javed) अपने बोल्ड अंदाज और बेबाक बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहती हैं। इस्लाम को ना मानने वाली ‘बिग बॉस’ ओटीटी की एक्स कंटेस्टेंट ने इस बार तालिबान (Taliban) की आलोचना करते हुए उसके पतन की कामना की है। अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के काबिज होने से वह खासा नाराज हैं।

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद से वहाँ के नागरिक डर के साये में जीने को मजबूर हैं। उनकी आजादी छिन गई है। खासतौर पर महिलाएँ घुट-घुटकर जीने को मजबूर हैं। तालिबान ने अब नया नियम निकाला है। इसके तहत अकेली महिलाओं का लॉन्ग डिसटेंस रोड ट्रिप बैन कर दिया गया है। उर्फी ने तालिबान के इस फैसले की निंदा करते हुए मंगलवार (28 दिसंबर 2021) को अपनी इंस्टा स्टोरी में लिखा, “तालिबान का जल्दी पतन होने की कामना करती हूँ। दूसरों पर अपना मजहब थोपना बंद करें।”

साभार: उर्फी जावेद इंस्टाग्राम

इससे पहले भी उर्फी जावेद जबरन दूसरों पर अपना मजहब थोपने वाले मस्लिमों को करारा जवाब दे चुकी हैं। इन दिनों वह हिंदू धर्म को समझने के लिए भगवद गीता को पढ़ रही हैं। उनका कहना है कि वह मुस्लिम धर्म में भरोसा नहीं करती हैं। पिछले दिनों उर्फी जावेद ने एक इंटरव्यू में कहा था, “मैं एक मुस्लिम लड़की हूँ और मुझे सोशल मीडिया पर सबसे अधिक मुस्लिम लोगों द्वारा ही ट्रोल किया जाता है। वो मुझे आपत्तिजनक कमेंट करते हैं। कहते हैं कि मैं इस्लाम की छवि खराब कर रही हूँ। वो मुझसे नफरत करते हैं, क्योंकि मुस्लिम पुरुष चाहते हैं कि महिलाएँ उनके बनाए एक दायरे के भीतर ही रहें।”

उन्होंने कहा था, “वे अपने समुदाय की सभी महिलाओं को कंट्रोल में करना चाहते हैं। इस वजह से मैं इस्लाम को नहीं मानती। वे मुझे इसलिए भी ट्रोल करते हैं, क्योंकि मैं उनके अनुसार कपड़े नहीं पहनती, उनके अनुसार अपने मजहब का पालन नहीं करती।”

बता दें कि जब उर्फी से पूछा गया कि क्या आप कभी अपने समुदाय के किसी व्यक्ति से निकाह करेंगी, अगर आपको उससे प्यार हो जाए तो। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था, “मैं कभी मुस्लिम लड़के से निकाह नहीं करूँगी। मैं इस्लाम में विश्वास नहीं करती और मैं किसी भी मजहब का पालन नहीं करती, इसलिए मुझे परवाह नहीं है कि मैं किससे प्यार करती हूँ। हम जिससे चाहें उससे निकाह कर सकते हैं।”

पहले ‘मैं हिंदुत्ववादी नहीं हूँ’, अब महात्मा गाँधी पर बदजुबानी: रायपुर ‘धर्म संसद’ की पटकथा कॉन्ग्रेस की लिखी?

हाल के दिन में हिंदुओं के नाम पर तीन बड़े कार्यक्रम हुए हैं। पहला- चित्रकूट का हिंदू एकता महाकुंभ, दूसरा- हरिद्वार का धर्म संसद और तीसरा- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित धर्म संसद। आश्चर्यजनक तौर पर चित्रकूट महाकुंभ की मीडिया में उतनी चर्चा नहीं हुई, जितना हल्ला अन्य दो जगहों पर हुए धर्म संसद को लेकर हो रहा है। ऐसा नहीं है कि चित्रकूट का आयोजन फीका था। जगद्गुरु तुलसी पीठाधीश्वर पद्म विभूषण स्वामी रामभद्राचार्य की पहल पर आयोजित इस महाकुंभ के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत थे। श्रीश्री रविशंकर, साध्वी ऋतंभरा, स्वामी चिदानंद सरस्वती, आचार्य लोकेश मुनि, रमेश भाई ओझा जैसे संतों का जमावड़ा था। लाखों लोग जुटे थे। मोहन भागवत ने मंच से बकायदा धर्मांतरण रोकने और लोगों की घर वापसी करवाने की शपथ दिलाई थी। लव जिहाद सहित उन तमाम चुनौतियों के खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया था, जिनसे हिंदू मुकाबिल हैं।

बावजूद इसके वामपंथी नैरेटिव वाली मीडिया और सोशल मीडिया ने चित्रकूट के हिंदू एकता महाकुंभ को तवज्जो क्यों नहीं दी? मोटे तौर पर इसका एक ही कारण समझ आता है कि इससे उन सभी खतरों पर बात होने लगती जिनसे हिंदू जूझ रहे हैं। इस्लामी कट्टरपंथ और ईसाई मिशनरियों के प्रपंच पर चर्चा होने लगती।

लेकिन चित्रकूट पर खमोश रहा यही जमात ‘धर्म संसद’ पर खूब हल्ला कर रहा है और इसका इस्तेमाल ‘डरा हुआ मुसलमान’ नैरेटिव को हवा देने के लिए कर रहा है। यह बताने की कोशिश कर रहा है कि हिंदू उन्मादी हैं और मुस्लिम प्रताड़ित। यह भी अजीब संयोग है कि कॉन्ग्रेस शासित छत्तीसगढ़ में आयोजित जिस ‘धर्म संसद’ में महात्मा गाँधी पर कथित बदजुबानी हुई, उसके आयोजकों में भी कॉन्ग्रेसी शामिल हैं। मंच पर विराजमान लोगों की भी कॉन्ग्रेस से करीबी रही है। कथित बदजुबानी में शामिल और उसका विरोध करने वाले, दोनों खेमे भी कॉन्ग्रेस के करीब बताए जाते हैं। इस मामले में अभी तक जिन दो राज्यों (छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र) में एफआईआर हुई है, वहाँ की सत्ता में भी कॉन्ग्रेस है। सबसे दिलचस्प यह है कि इसकी आड़ लेकर सवाल पूछने वाले भी कॉन्ग्रेसी ही हैं।

यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है, “धर्म संसद का आयोजन कॉन्ग्रेस का था। उसके वरिष्ठ लोग ही आयोजन में सक्रिय भूमिका में थे। फिर इसमें भाजपा का नाम घसीटना बिल्कुल उचित नहीं है। यह कॉन्ग्रेस की अंदरुनी राजनीति का नतीजा है।” ध्यान देने वाली बात यह है कि न तो रमन सिंह ने और न बीजेपी के किसी नेता ने, न तो गाँधी पर टिप्पणी को जायज बताया है और न ऐसा करने वाले का बचाव किया है।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह भी कॉन्ग्रेस के उस स्क्रिप्ट का हिस्सा है जिसके तहत उसके पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा था- मैं हिंदू हूँ हिंदुत्ववादी नहीं। यह भी जगजाहिर है कि संत कालीचरण जिन्होंने गाँधी पर टिप्पणी की है, वे भय्यूजी महाराज के करीबी रह चुके हैं। भय्यूजी महाराज इंदौर के एक संत थे। 2018 में उन्होंने खुद को गोली मार आत्महत्या कर ली थी। जाँच में यह बात सामने आई थी कि निजी और पारिवारिक जीवन की परेशानियों से तंग आकर उन्होंने ये कदम उठाया था। लेकिन उस वक्त कॉन्ग्रेस ने इसके लिए मध्य प्रदेश की तत्कालीन सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि बीजेपी उन पर अपने लिए काम करने का दबाव डाल रही थी, जिसकी वजह से वे मानसिक तनाव में थे। इस मामले की सीबीआई जाँच की भी कॉन्ग्रेस ने माँग की थी। कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तो यहाँ तक कह दिया था कि भय्यूजी महाराज ने उनको फोन कर बताया था कि वे नर्मदा में शिवराज सरकार द्वारा हो रहे अवैध खनन से चिंतित हैं। उन्हें मुँह बंद रखने के लिए मंत्री पद का ऑफर दिया गया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था।

इसी तरह संत कालीचरण के बयान के बाद मंच छोड़ने वाले महंत रामसुंदर दास भी कॉन्ग्रेस के करीबी बताए जाते हैं। वे दूधाधारी मठ के महंत हैं। 10 साल कॉन्ग्रेस से विधायक रहे हैं। फिलहाल छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ अक्सर सरकारी कार्यक्रमों में नजर आते हैं। महंत रामसुंदर दास के अलावा कॉन्ग्रेस विधायक विकास उपाध्याय और रायपुर नगर निगम के सभापति प्रमोद दुबे भी इस ‘धर्म संसद’ के आयोजकों में शामिल थे।

जाहिर है इस आयोजन से कॉन्ग्रेस के कनेक्शन को लेकर रमन सिंह और उन तमाम लोगों के सवालों को केवल राजनीतिक विरोधी होने के कारण खारिज किया जा सकता। यह भी सार्वजनिक तथ्य है कि मुस्लिमों की तुष्टिकरण के लिए इसी कॉन्ग्रेस ने ‘भगवा आतंकवाद’ गढ़ा था। राष्ट्रीय राजनीति में नरेंद्र मोदी के अभ्युदय, अपनी दुर्गति और दशकों तक उपेक्षित रहे हिंदू आवाजों को जगह मिलने से बौखलाई कॉन्ग्रेस आज भी हिंदुओं को बदनाम करने के तमाम प्रपंच रचती रहती है। यह हमने अयोध्या के राम मंदिर को लेकर भी देखा। काशी विश्वनाथ धाम के कॉरिडोर पर भी देखा है। रायपुर ‘धर्म संसद’ के साथ भी जितने संयोग एक साथ दिख रहे हैं, उससे इसे भी कॉन्ग्रेस की उस रणनीति से अलग देखने का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता, जिसका एक सूत्री एजेंडा हर उस चीज को बदनाम करना है, जिससे हिंदू या उनके प्रतीक चिह्न जुड़े हो। क्या यह भी संयोग है कि आज जिस पार्टी के रायपुर ‘धर्म संसद’ से इतने कनेक्शन निकल रहे हैं, कभी उसके ही नेता ने कहा था- लोग लड़की छेड़ने मंदिर जाते हैं?