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SC के जस्टिस अब्दुल नजीर ने भारतीय न्याय व्यवस्था की वकालत की, कहा- औपनिवेशिक व्यवस्था में न्याय माँगी नहीं, उसके लिए गुहार लगाई जाती है

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एस अब्दुल नजीर ने प्राचीन भारतीय न्याय प्रणाली की वकालत की है। उन्होंने रविवार (26 दिसंबर 2021) को अखिल भारतीय अधिवक्ता महासंघ के राष्ट्रीय परिषद के एक कार्यक्रम में कहा कि कानून के छात्रों को औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकालने के लिए जरूरी है कि उन्हें मनु, चाणक्य व बृहस्पति की विकसित की गई न्याय प्रणाली के बारे में पढ़ाया जाए।

देश में मौजूदा न्याय प्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि औपनिवेशिक न्याय व्यवस्था भारत की जनता के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने कहा कि अब समय की माँग है कि न्याय व्यवस्था का भारतीयकरण किया जाए।

जस्टिस नजीर ने कहा कि यह बड़ा काम है और इसमें समय भी काफी लगेगा, लेकिन भारतीय समाज, विरासत और संस्कृति के अनुरूप न्याय व्यवस्था को ढालने के लिए यह काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा न्याय प्रणाली की लगातार उपेक्षा और विदेशी व औपनिवेशिक न्याय प्रणाली से चिपके रहना राष्ट्रीय हितों और संविधान के उद्देश्यों के लिए घातक है।  

जस्टिस नजीर ने कहा कि भारत में कानून के शासन और संसदीय लोकतंत्र का भविष्य काफी हद तक हमारे भावी वकीलों और न्यायाधीशों की क्षमता, समझदारी और देशभक्ति पर निर्भर करता है। ऐसे वकील और जज भारत की सामाजिक धरती से ही विकसित होंगे और इसके सामाजिक वातावरण से विकसित होंगे।

उन्होंने कहा कि महान वकील और न्यायाधीश पैदा नहीं होते हैं, लेकिन उचित शिक्षा और महान कानूनी परंपराओं से बने होते हैं, जैसे मनु, कौटिल्य, कात्यायन, बृहस्पति, नारद, पराशर, याज्ञवल्क्य और प्राचीन भारत के अन्य कानूनी दिग्गज थे। उनके ज्ञान की निरंतर उपेक्षा और विदेशी औपनिवेशिक कानूनी प्रणाली का पालन संविधान के लक्ष्यों और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है।

उन्होंने प्राचीन भारतीय न्याय प्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन कानूनी व्यवस्था में राजा को भी कानून के सामने झुकना पड़ता था। उनके परिजनों या यहाँ तक कि राजा के खिलाफ भी न्याय की माँग की जा सकती थी। प्राचीन भारतीय न्याय व्यवस्था में न्याय माँगने की बात निहित थी, लेकिन इसके उलट ब्रिटिश न्याय व्यवस्था में न्याय की गुहार की जाती है, न्याय के लिए प्रार्थना की जाती है और जजों को ‘लॉर्डशिप’ या ‘लेडीशिप’ कहा जाता है। न्यायाधीश ने कहा कि न्याय कोई अनुग्रह नहीं है, यह जनता का अधिकार है और इसका सम्मान होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय न्याय व्यवस्था में विवाह एक सामाजिक दायित्व है, जिसका निर्वाह हर किसी को करना है। लेकिन पाश्चात्य न्याय प्रणाली में विवाह एक ऐसी साझेदारी बना दिया गया है, जिसमें हर कोई जितना वसूल सकता है, वसूलने करने की कोशिश करता है। जस्टिस नजीर ने कहा कि आधुनिक समय में तलाक इसलिए बढ़ रहे हैं कि विवाह में कर्तव्य की पूरी उपेक्षा की जा रही है।

‘पश्चिमी आक्रांता चाहते थे वैदिक युग को नीचा दिखाना’: आर्य-द्रविड़ थ्योरी को सबूतों से नकारता IIT खड़गपुर का कैलेंडर, चिढ़े वामपंथी

वामपंथी इतिहासकारों ने भारतीयों को, खासकर हिन्दुओं को नीचा दिखाने के लिए एक झूठी थ्योरी गढ़ी। उन्हें बाहरी होने का एहसास कराने के लिए कहा गया कि आर्य बाहर से आए थे और द्रविड़ यहाँ के मूल निवासी थे। इस्लामी आक्रांताओं का बचाव करने के लिए हजारों पन्नों की हजारों पुस्तकें लिखने वाले इन इतिहासकारों को अब विज्ञान भी गलत ठहराता है, जिन्होंने हिन्दुओं में खुद के प्रति ही हेय भाव भरने के लिए ईरान से आर्यों के आने और यहाँ के नगरों का विध्वंस करने की कहानी गढ़ी।

अब IIT खड़गपुर ने अपना 2022 का जो कैलेंडर जारी किया है, उसमें आर्य-द्रविड़ थ्योरी के सारे सबूतों को संकलित किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे आर्यन इन्वेजन थ्योरी एक मिथ है, ये झूठ है। इसमें तस्वीरों के जरिए हर महीने नई-नई जानकारी देकर भारत के इतिहास की बात की गई है। वैज्ञानिक और ऐतिहासिक सबूतों के साथ-साथ हिन्दू साधु-संतों व दार्शनिकों के उद्धरण भी पेश किए गए हैं। आइए, हम आपको बताते हैं कि इस कैलेंडर में क्या है। वामपंथी इस कैलेंडर से चिढ़े हुए हैं।

आर्य-द्रविड़ थ्योरी (Aryan Invasion Theory Myth) का खंडन करता IIT खड़गपुर का कैलेंडर

जनवरी 2022 के कैलेंडर में कैलाश पर्वत का चित्र है और इसे भारत का एक पवित्र जगह बताया गया है। बताया गया है कि कैलाश पर्वत का जो ग्लेशियर है, वो ऐसी महत्वपूर्ण नदियों का स्रोत रहा है जिसके किनारे भारत की कई सभ्यताएँ फली-फूलीं। 7000 ईसा पूर्व से पहले, जिसे ‘Pre Harrapan’ भी कहते हैं, सिंधु घाटी सभ्यता वाली सिंधु नदी का स्रोत भी यही है। 1000 इसा पूर्व में हड़प्पा के बाद की सभ्यता भी यही पनपी। वहीं पूर्व में भारत की सबसे लम्बी ब्रह्मपुत्र नदी का स्रोत भी इसी कैलाश पर्वत का ग्लेशियर रहा।

ऋग्वेद में सिंधु की कई सहायक नदियों का भी जिक्र है, जिनके स्रोत मध्य-पूर्वी हिमालय में स्थित शिवालिक की पहाड़ियाँ हैं। पूर्वी हिमालय से लेकर पश्चिमी नदी घाटी तक ये नदियाँ हैं – व्यास, झेलम, चेनाब, रावी और सतलुज। पूर्वी साँपो नदी (Sanpo River) ही वो जगह है, जहाँ एक खास प्रकार के जंगली घोड़े (Proto-Paleolithic Riwoche Horses) के पाए जाने की बात कही जाती है। इसे ‘आर्य आक्रमण’ काल के पहले पाए जाने की बात कही जाती है।

अगर हम सिंधु से और पूर्व की तरफ गंगा-गोमती-घाघरा सभ्यता पनपी। ऋग्वेद के आठवें मंडल में गोमती नदी का भी जिक्र है। ऋग्वेद में 1.8.8 संख्या श्लोक को देखिए – ‘ए॒वा ह्य॑स्य सू॒नृता॑ विर॒प्शी गोम॑ती म॒ही। प॒क्वा शाखा॒ न दा॒शुषे॑॥’, जिसमें गोमती नदी का जिक्र है। ऋषियों के निवास स्थान के रूप में लोकप्रिय रहा जंगल ‘नैमिषारण्य’ इसी नदी के किनारे बसा हुआ था। उपनिषदों में इसका जिक्र है। ऐतिहासिक लक्ष्मणपुर (उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ) और इसके आसपास ये स्थित रहा था।

IIT खड़गपुर का अध्ययन इस बात की ओर इशारा करता है कि कैसे अंग्रेजी इतिहासकारों ने भारतीय प्राचीन सभ्यता के पूर्वी और पश्चिमी छोर को नज़रअंदाज़ किया। उन्होंने 2000 ईसा पूर्व से पहले की वैदिक सभ्यता को नीचा दिखाने के लिए उन्होंने यूरेशिया के मैदानों से आर्यों के आने की बात कही। इसका परिणाम ये हुआ कि सिंधु घाटी सभ्यता के पुरातत्व अध्ययन में गड़बड़ी हुई। उन्होंने ये कह दिया कि आर्य ने बाहर से आकर द्रविड़ों को मारा और यहाँ कब्ज़ा कर लिया।

इसके बाद आ जाते हैं फरवरी महीने पर। फरवरी 2022 के कैलेंडर में क्या जानकारी दी गई है, अब इसे समझिए। इसमें पवित्र स्वस्तिक चिह्न के सहारे समय के चक्र और पुनर्जन्म को समझाया गया है। स्वस्तिक का पैटर्न नॉन-लीनियर है और साइक्लिक है। आगे का भविष्य की तरफ इशारा करता है और पीछे का भूतकाल की तरफ का। ऋग्वेद के 7.1.20 के “नू मे॒ ब्रह्मा॑ण्यग्न॒ उच्छ॑शाधि॒ त्वं दे॑व म॒घव॑द्भ्यः सुषूदः। रा॒तौ स्या॑मो॒भया॑स॒ आ ते॑ यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥” श्लोक में स्वस्तिक का जिक्र आता है।

पूरा वैदिक विज्ञान के मूल में ही है समय, अंतरिक्ष और कारणों का पता करना। कार्य सम्बन्धी सिद्धांत परस्पर निर्भरता के सिद्धांत पर आधारित है, जो कि किसी भी कार्य के ‘फ्लो और वैल्यू’ के एक्शन-रिएक्शन पर आधारित होता है। इसका परिणाम पुनर्जन्म के रूप में निकलता है, जिसे कॉस्मिक स्तर पर एक शरीर से आत्मा का निकल कर दूसरे शरीर में जाना कहते हैं (Transmigration & Metempsychosis), जिसे ‘जन्मांतरवाद’ नाम दिया गया है।

इसके लिए ऋग्वेद अग्नि के जीवन सिद्धांत का उदाहरण भी देता है। भारतीय आध्यात्मिकता ही गुरुवाद और अवतारवाद पर आधारित है। वहीं पश्चिमी जगह के लिए भारतीय आध्यात्मिक का रहस्य ज्ञान एक अनजान चीज है, जिसमें वो कभी उतरे ही नहीं। मध्य-पूर्व दुनिया के साहित्य में भी ये चीज गायब है। इसीलिए, आर्यों के आक्रमण वाली थ्योरी को भारतीय कॉस्मोलॉजी नकारती है। मार्च महीने के कैलेंडर में स्पेस-टाइम और कार्य के सिद्धांत को समझाया गया है।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि सिंधु घाटी सभ्यता के जो सील मिले हैं, वो आर्य ऋषियों द्वारा प्रतिपादित किए गए ‘योग-क्षेम’ के सिद्धांत से मिलता-जुलता है। ऋग्वेद (10.167.1) में ‘योगक्षेम विषय कर्म’ और फिर 7.36 में ‘योगेभी कर्मभिः’ का जिक्र है। 5.81.1 में योग को और अच्छे से समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे योगी अपने मन एवं बुद्धि पर नियंत्रण रखते हैं। ‘होने और हो रहे (धार्यते आईटीआई धर्मः)’ के जरिए कॉस्मोलॉजी की वास्तविकता का भान कराया गया है।

चिंतन, ध्यान और सारी चीजों से ऊपर उठ जाने को योग समाधि नाम दिया गया है। इसे प्राप्त करने वाले ही योगी है। ये ‘कृष्ण (अंधकार)’ है। योग को सभी वैदिक कर्मकांड का मुख्य लक्ष्य माना गया है। इसी तरह ‘शुक्ल (उजाला)’ का भी सिद्धांत है। क्षेम या तंत्र उसे कहा गया है, जहाँ योगी को परम ज्ञान मिल जाता है और वो महायोगी हो जाता है। सप्तर्षि इसे प्राप्त कर चुके हैं। यूरोप और यूरेशिया के आक्रांताओं को ये चीजें पता नहीं थीं। आर्य आक्रमण थ्योरी यहाँ भी गलत साबित होती है।

इसी तरह ‘नॉन-लीनियर फ्लो’ और ‘चेंज’ का जो वैदिक सिद्धांत है, वो भी सिंधु घाटी सभ्यता से मिलता है। ऋग्वेद और पूरा का पूरा यजुर्वेद ही ‘क्रिया (Flow)’ को एक साइक्लिक चेंज के रूप में परिभाषित करता है। व्यक्तिगत स्तर पर ये विकास की प्रक्रिया के रूप में बताए गए हैं और कॉस्मिक स्तर पर ये प्रक्रियाएँ होती हैं। मौसम के चक्र को भी इससे जोड़ा गया है। चीन के दर्शन में भी ये सिद्धांत है। भारतीय ऋषियों ने चतुष्कोणीय बदलावों की व्यवस्था दी।

उन्होंने ऋतु चक्र को 6 भागों में बाँटा। उन्होंने बाकी 4 ऋतुओं के अलावा शरद ऋतु और मॉनसून को भी परिभाषित किया। ये मौसम और संस्कृति का भारतीय इकोसिस्टम है। वेदों में जीवन के सिद्धांत को ‘एक श्रृंग’ से भी जोड़ा गया है, जो बौद्ध धर्म में भी मिलता है और सिंधु घाटी से मिले एक सींग वाले जानवर की सील भी इसी ओर इशारा करता है। अगर कोई आर्य बाहर से आया, तो उसे इन चीजों का भान नहीं था। ये बताता है कि आर्य-द्रविड़ वाली थ्योरी गलत थी।

मई 2020 के IIT खड़गपुर के कैलेंडर में स्वामी विवेकानंद का एक उद्धरण है, इसी विषय को लेकर। उन्होंने कहा था कि विदेशी विद्वान ये कहते हैं कि बाहरी भूमि से आर्य यहाँ आए और यहाँ के मूलनिवासियों की जमीनें छीन लीं, उन्हें अपने अधीन कर के भारत में बस गए – ये बेतुका है, मूर्खता भरी बातें हैं। उन्होंने इस पर दुःख जताया था कि हमारे छात्रों को इतना बड़ा झूठ फैलाया जा रहा है और भारतीय विद्वान इसकी काट नहीं खोज रहे। उन्होंने पूछा था कि वेद के किस सूक्त में ऐसा लिखा है कि आर्य बाहर से आए?

उन्होंने पूछा कि ये कहाँ लिखा है कि आर्यों ने भारत में आकर यहाँ के नगरों को तबाह किया? उन्होंने सवाल किया था कि इस तरह की बेतुकी बातें करने वालों को इससे क्या फायदा होता है? उन्होंने कहा था कि रामायण ठीक से पढ़ने वाला इस तरह का झूठ नहीं फैला सकता। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत में बने रहने के लिए यूरोपीय ताकतें ऐसा कर रही हैं। उन्होंने बताया था कि आर्यों का हमेशा लक्ष्य रहा है कि सभी को खुद के स्तर तक लेकर आएँ, खुद से भी ऊपर उठाएँ।

उन्होंने कहा था कि जहाँ यूरोप में मजबूर हमेशा विजेता बन कर रहते हैं और कमजोर हमेशा दुर्बल बन कर, बल्कि भारत भूमि में सारे नियम-कानून पिछड़ों के लिए बने हैं। मई के कैलेंडर में ‘द मैट्रिक्स’ के बारे में बात करते हुए इसे कॉस्मिक क्रियाकलापों का गर्भाशय बताया गया है। यही बात सिंधु घाटी की कलाकृतियों में भी प्रतिलक्षित होती है। ऋग्वेद का सूक्त 1.164.46 विविधता में एकता के सिद्धांत को आगे बढ़ाता है, ‘यम’ के रूप में मृत्यु के सिद्धांत का भी प्रतिपादन किया गया।

देवी सूक्त (10.145) और रात्रि सूक्तम (10.127) कॉस्मो के निर्माण और विनाश को लेकर शुक्ल-कृष्ण के सिद्धांत को आगे बढ़ाता है। हमेशा से आर्य ऋषियों ने दिव्य शक्ति को बिना शर्त प्रेम के रूप में देखा। वेदों में ‘आदित्य’ और ‘इला, सरस्वती और भारती’ के रूप में प्रतिबिम्बों का विवरण भी उस समय दिया गया था। आचार्य अवनीन्द्रनाथ ठाकुर का ‘भारत माता’ का सिद्धांत इसी प्राचीन क्रम को आगे बढ़ाता है। जबकि पश्चिम में देशों को पितृसत्तात्मक रूप से देखा जाता रहा है, इसीलिए बाहर से कोई आर्य आया रहता तो उसकी सोच भी यही रहती।

जून महीने के कैलेंडर में वैदिक साहित्य में मिले एक सींग वाले घोड़े और हड़प्पा में एक सींग वाले जानवर की तुलना की गई है। रामायण में ऋष्यश्रृंगा की चर्चा है, जिनका जन्म हिरन के सींग से हुआ था। सिंधु घाटी सभ्यता में भी एक सींग वाले जानवर की चर्चा है, जिसे शक्ति, और उसके सींग को ईश्वर के तलवार का प्रतीक माना गया है। यूनिकॉर्न का सिद्धांत ईसाई और चीन में भी था। ये भारत से बाकी जगह फैला था, बाहर से यहाँ नहीं आया। जुलाई महीने के कैलेंडर में बताया गया है कि कैसे पाश्चात्य अध्ययन ने शिव को गैर-आर्य देवता बताने की कोशिश की, जबकि वेदों में उनका जिक्र है।

अगस्त महीने के कैलेंडर में ‘Oscillation’ के सिद्धांत के प्रतीक अश्विनीयों की चर्चा की गई है। उनके बारे में लिखा था कि वो मधु देते हैं, जिससे मृत्यु पास भी नहीं फटकती। एशिया पैसिफिक और प्राचीन ग्रीस में भी इसी तरह दो देवताओं के साथ रह कर विचरण करने वाला सिद्धांत सामने आया। आधुनिक विज्ञान भी इस ‘Duality’ की बात करता है। मनुष्य के दिमाग के भी ‘Analytical’ और ‘Intuitive’ वाले दो हिस्से हैं। सितम्बर महीने के कैलेंडर में बताया गया है कि कैसे महर्षि अरविन्द ने भी सिद्धांत को नकार दिया है।

असल में जो पुर्तगाली और ब्रिटिश आक्रांता थे, वो भारतीय और यूरोपीय भाषा में कई समान शब्दों को लेकर अचंभित थे। इसीलिए, उन्होंने एक इंडो-यूरोपियन लैंग्वेज सिस्टम के विकास का निर्णय लिया और बुद्ध से पहले आर्य के आक्रमण की सिद्धांत रखी। उन्होंने लिखा कि भारत पर दूसरी बार 17वीं शताब्दी में उससे एक ‘ऊँची शक्ति’ ने आक्रमण किया। भारतीय, ग्रीक और लैटिन भाषाओं में समानता को लेकर अंग्रेजी विद्वान थॉमस स्टीफेंस ने भी अपने भाई को गोवा से एक पत्र सन् 1583 में लिखा था।

अक्टूबर महीने के कैलेंडर में बताया गया है कि कैसे पाश्चात्य विद्वान ये साबित करने को बेताब थे कि संस्कृति, और ज्ञान-विज्ञान का फ्लो पश्चिम से पूर्व की तरफ हुआ। नवंबर के कैलेंडर में मैक्स मुलर, आर्थर दे गोबिनायउ और हॉस्टन स्टीवर्ट चैंबरलेन नामक तीन अंग्रेजी स्कॉलरों के विवरण हैं, जिन्होंने आर्य-द्रविड़ थ्योरी को आगे बढ़ाया। आर्य शब्द को यूरोप ने जैसे परिभाषित किया, वही आगे चल कर कत्लेआम का कारण बना और हिटलर ने इसी परिभाषा के आधार पर खून बहाया।

क्या एलियन का चल गया पता? NASA ने लोगों को ईश्वर की रचना और एलियन पर स्टडी के लिए 24 धर्मशास्त्रियों की नियुक्ति की

ब्रह्मांड के रहस्यों की खोज में लगी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने दूसरे ग्रहों के प्राणियों के अस्तित्व को लेकर 24 धर्मशास्त्रियों को अपने अभियान में शामिल करने का फैसला लिया है। हालाँकि, इन धर्मशास्त्रियों को अंतरिक्ष में नहीं भेजा जाएगा, लेकिन इस बात में इनका सहयोग लिया जाएगा कि अगर एलियन (Alien) के अस्तित्व का प्रमाण मिल जाता है तो पृथ्वी के लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा और वे ईश्वर और संसार की संरचना को लेकर उनका दृष्टिकोण किस तरह प्रभावित होगा।

एजेंसी ने अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित प्रिंस्टन विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर थियोलॉजिकल इंक्वायरी (CTI)’ के अपने कार्यक्रम में भाग लेने के लिए 24 धर्मशास्त्रियों को नियुक्त किया है। इस सेंटर को नासा ने साल 2014 में 1.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान दिया था। सीटीआई का मुख्य काम धर्मशास्त्रियों, वैज्ञानिकों, विद्वानों और नीति-निर्माताओं को एक साथ मिलकर ‘वैश्विक सरोकारों’ पर सोचने और उस सोच को लोगों तक पहुँचाने के लिए एक माध्यम के रूप में काम करना है।

साल 2016 में शुरू हुए इस प्रोग्राम का उद्देश्य उन सवालों का जवाब देना है, जो मानव जाति को आरंभ से ही रहस्य के घने कोहरे में छिपा कर रखा है। जैसे कि जीवन क्या है? जिंदा रहने का क्या मतलब है? मनुष्य और परग्रही जीवों (एलियन) के बीच की रेखा का निर्धारण किस आधार पर होना चाहिए? ब्रह्मांड में दूसरी जगहों पर जीवन की कितनी संभावनाएँ हैं? आदि आदि।

ब्रह्मांड में जीवन की संभावनाओं पर विस्तृत शोध के लिए नासा के दो रोवर मंगल ग्रह पर उपस्थित हैं। बृहस्पति और शनि की जानकारियाँ जुटाई जा रही हैं। क्रिसमस के दिन (25 दिसंबर) को जेम्स वेब टेलीस्कोप को लॉन्च किया गया है, जो ब्रह्मांड में आकाशगंगा, तारे और ग्रह निर्माण की प्रक्रिया के अध्ययन करने में बेहद सहायक होगा। यह ब्रह्मांड के उन कोनों को भी देखने में सक्षम है, जो अब तक असंभव था। ऐसे में एजेंसी द्वारा धर्मशास्त्रियों की नियुक्ति का मतलब कुछ ऐसा है, जिससे ब्रह्मांड में एलियन के अस्तित्व को स्वीकार करना आवश्यक हो जाता है।

ऑक्सफ़ोर्ड से जैव रसायन में डॉक्टरेट और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में धर्मशास्त्री तथा पादरी डॉ एंड्रयू डेविसन इन 24 धर्मशास्त्रियों में शामिल हैं। नासा ने ‘एस्ट्रोबायोलॉजी के सामाजिक प्रभाव’ नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जो 2015 से 2018 तक चला था। डेविसन ने 2016 से 2017 तक इस प्रोग्राम में भाग लिया था। इन्होंने इस विषय पर कई शोध किए हैं।

डेविसन का मानना ​​​​है कि इस पृथ्वी से बाहर जीवन की संभावना बलवती होती जा रही है। उन्होंने अपनी किताब ‘एस्ट्रोबायोलॉजी एंड क्रिश्चियन डॉक्ट्रिन’ में सवाल किया है कि क्या भगवान ब्रह्मांड में कहीं और जीवन बना सकते थे? उन्होंने कहा है कि इस आकाशगंगा में 100 अरब से अधिक तारे और ब्रह्मांड में 100 अरब से अधिक आकाशगंगाएँ हैं। इसलिए पृथ्वी के अलावा भी ब्रह्मांड में जीवन हो सकता है।

वेटिकन वेधशाला के प्रमुख और पोप बेनेडिक्ट के वैज्ञानिक सलाहकार 45 वर्षीय जेसुइट पादरी जोस गेब्रियल फ्यून्स ने कहा था, “मेरी राय में यह संभावना (अन्य ग्रहों पर जीवन की) मौजूद है।” वहीं, साल 2008 में वेटिकन के मुख्य खगोलशास्त्री का कहना था कि ईश्वर में विश्वास करने और ‘दूसरे ग्रहों पर रहने वाले’ लोगों के अस्तित्व की संभावना के बीच कोई विरोध नहीं है। उन्होंने कहा था कि वे संभवत: मनुष्यों से अधिक विकसित हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि बृहस्पति ग्रह के बर्फीले चंद्रमा यूरोपा की सतह के नीचे महासागर हैं, जो जीवन की ओर संकेत करते हैं। वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि शुक्र के बादलों में रोगाणु होते हैं। वहीं, इसी साल दिसंबर में मंगल ग्रह का चक्कर लगा रहे ट्रैस गैस ऑर्बिरेटर (TGO) को मंगल पर काफी मात्रा में पानी का पता चला है। यह पानी मंगल ग्रह के कैनियन में है और सतह के नीचे है। मंगल का यह जलस्रोत लगभग 45 हजार स्क्वायर किलोमीटर में फैला हुआ है। 

‘यूपी में 9 से 90 km हो गई मेट्रो की लम्बाई’: कानपुर में बोले PM मोदी – योगी राज में अपराधी खुद जमानत रद्द करा के जा रहे जेल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (28 दिसंबर, 2021) को कानपुर मेट्रो रेल सेवा का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने IIT गेट मेट्रो स्टेशन से लेकर गीता नगर मेट्रो तक की सैर भी की। बता दें कि कानपुर मेट्रो का अभी काम चल ही रहा है और इसके पहले हिस्से का उद्घाटन हुआ है। फ़िलहाल मेट्रो रेल का 32 किलोमीटर का सिस्टम तैयार किया गया है। 11,000 करोड़ रुपए में तैयार हो रही ये परियोजना भारत में सबसे तेज़ी से तैयार होने वाला मेट्रो रेल प्रोजेक्ट भी है।

कानपुर शहर की भीड़भाड़ और ट्रैफिक से ये मेट्रो रेल लोगों को मुक्ति दिलाएगा। इसके लिए दो कॉरिडोर की अनुमति दी गई थी। इसमें पहले कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ, जो IIT से लेकर मोतीझील तक जाती है और 9 किलोमीटर की है। जनवरी 2022 से यहाँ परिचालन भी शुरू हो जाएगा। 15 नवंबर, 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्माण कार्यों का शुभारंभ किया था। इसी महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन भी किया था।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज मंगलवार है और पनकी वाले हनुमान जी के आशीर्वाद से यूपी के विकास में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज न सिर्फ कानपुर को मेट्रो कनेक्टिविटी मिली है, बल्कि बीना रिफाइनरी से भी कानपुर अब कनेक्ट हो गया है। पीएम मोदी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में जो डबल इंजन की सरकार चल रही है, वो बीते कालखंड में समय का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई में जुटी है। हम डबल स्पीड से काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार जिस काम का शिलान्यास करती है उसे पूरा करने के लिए हम दिन रात एक कर देते है। साथ ही ध्यान दिलाया कि कैसे कानपुर मेट्रो का शिलान्यास हमारी सरकार ने किया, हमारी सरकार इसका लोकार्पण भी कर रही है। उन्होंने बताया कि ठीक इसी तरह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास हमारी सरकार ने किया, हमारी ही सरकार ने इसका काम पूरा किया। पीएम मोदी ने बताया कि साल 2014 से पहले यूपी में जितनी मेट्रो चलती थी, उसकी कुल लंबाई थी 9 किलोमीटर। साल 2014 से लेकर 2017 के बीच मेट्रो की लंबाई बढ़कर हुई कुल 18 किलोमीटर।

वहीं आज कानपुर मेट्रो को मिला दें तो यूपी में मेट्रो की लंबाई अब 90 किलोमीटर से ज्यादा हो चुकी है। उन्होंने कहा कि दशकों तक हमारे देश में ये स्थिति रही कि एक हिस्सा का तो विकास हुआ, दूसरा पीछे ही छूट गया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि राज्यों के स्तर पर, समाज के स्तर पर इस असमानता को दूर करना उतना ही जरूरी है। पीएम मोदी ने दावा किया कि इसलिए हमारी सरकार सबका साथ-सबका विकास के मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि डबल इंजन की सरकार यूपी की जरूरतों को समझते हुए, दमदार काम कर रही है।

प्रधानमंत्र ने कहा, “यूपी के करोड़ों घरों में पहले पाइप से पानी नहीं पहुँचता था। आज हम हर घर जल मिशन से, यूपी के हर घर तक साफ पानी पहुँचाने में जुटे हैं। डबल इंजन की सरकार पूरी ईमानदारी से, पूरी जवाबदेही के साथ यूपी को विकास की नई ऊँचाई पर पहुँचाने के लिए काम कर रही है। डबल इंजन की सरकार बड़े लक्ष्य तय करना और उन्हें पूरा करना जानती है। कौन सोच सकता था कि यूपी में बिजली के उत्पादन से लेकर ट्रांसमिशन तक में सुधार हो सकता है।”

पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि यूपी में पहले जो सरकारें रहीं, उन्होंने माफियावाद का पेड़ इतना फैलाया कि उसकी छाँव में सारे उद्योग-धंधे चौपट हो गए। उन्होंने कहा कि अब योगी जी की सरकार, कानून व्यवस्था का राज वापस लाई है, जिससे यूपी में अब निवेश भी बढ़ रहा है और अपराधी अपनी जमानत खुद रद्द करवा कर जेल जा रहे हैं।

‘मोदी-योगी का हिंदू राष्ट्र नहीं बनने दूँगा’: कॉन्ग्रेस नेता राशिद खान की धमकी, रखा था रिजवी का सिर काटने पर ₹25 लाख का ईनाम

तेलंगाना के कॉन्ग्रेस विधायक राशिद खान (Rashed Khan) ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस बार उन्होंने देश के हिंदू राष्ट्र बनने को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) पर निशाना साधा है। राशिद खान ने इन पर तंज कसते हुए कहा है कि इनका ‘भारत को हिंदू राष्ट्र’ बनाने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।

राशिद खान ने कहा कि वह भारत को हिंदू राष्ट्र नहीं बनने देंगे। उन्होंने कहा, “जब तक मैं जिंदा हूँ, भारत को हिंदू राष्ट्र नहीं बनने दूँगा। नरेंद्र मोदी, (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, आरएसएस, विहिप और बजरंग दल कभी भी भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाने के अपने सपनों को साकार नहीं कर पाएँगे।”

राशिद खान की टिप्पणी पर भाजपा नेता और तेलंगाना के विधायक टी राजा सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राशिद खान जैसे लोगों ने हमें हिंदू राष्ट्र के सपने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया है। टी राजा सिंह ने कहा, “भारत एक हिंदू राष्ट्र बनने के लिए तैयार है और राशिद खान जैसे लोग हमें इस सपने की दिशा में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करते हैं।”

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों यूपी शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी के इस्लाम छोड़ कर हिंदू धर्म अपनाने पर भी कॉन्ग्रेस नेता राशिद खान ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने ऐलान किया था कि जो भी शख्स जितेंद्र नारायण त्यागी बने रिज़वी का गला काटकर लाएगा, उसे वह 25 लाख रुपए का इनाम देंगे। 

उन्होंने कहा था कि वसीम रिजवी ने हिंदू धर्म में परिवर्तित होकर ‘इस्लाम का अपमान’ किया है। तेलंगाना कॉन्ग्रेस के नेता फिरोज खान उनसे से भी दो कदम आगे निकल गए। फिरोज खान ने इस्लाम के कथित अनादर के लिए वसीम रिजवी के सिर पर 50 लाख रुपए का अलग इनाम देने की घोषणा की। इससे पहले राशिद खान ने वसीम रिजवी के खिलाफ तेलंगाना में बंद का आह्वान किया था और इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद के नाम पर उनका सिर काटने की बात कही थी।

प्रशांत भूषण सहित 76 वकीलों ने धर्म संसद के भाषण पर CJI को लिखा, यही लोग लगातार हिंदुओं के खिलाफ ‘हेट क्राइम’ पर साधते हैं चुप्पी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के 76 वकीलों ने 17 और 19 दिसंबर को दिल्ली (हिंदू युवा वाहिनी द्वारा) और हरिद्वार (यति नरसिंहानंद) में धर्म संसद के दौरान दिए गए भाषणों को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एनवी रमना को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में कथित आरोप लगाया है कि धर्म संसद के दो अलग-अलग आयोजनों में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है। इस पर संज्ञान लिया जाए।

पत्र लिखने वालों में प्रशांत भूषण, सलमान खुर्शीद और दुष्यंत दवे भी शामिल हैं। उन्होंने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120बी, 121ए, 124ए, 153ए, 153बी, 295ए और 298 के तहत ‘दोषी व्यक्तियों’ के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।

पत्र में कहा गया है कि इन भाषणों में ना केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है, बल्कि खुलेआम एक पूरे समुदाय की हत्या के लिए आह्वान किया गया है। इस प्रकार ये भाषण न केवल हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा हैं, बल्कि लाखों मुस्लिम नागरिकों के जीवन को भी खतरे में डालते हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना को पत्र लिखकर उनसे इन भाषणों पर स्वत: संज्ञान लेने की माँग की गई थी, जबकि पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी थी। इसके बावजूद इन वकीलों ने दिल्ली और हरिद्वार के आयोजनों में किए गए कथित घृणास्पद भाषण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय को पत्र लिखा।

यहाँ हैरान करने वाली बात यह है कि जिस तेजी से वकीलों ने शीर्ष न्यायालय का रुख किया है और उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए उन्हें इन चुनिंदा घटनाओं के योग्य माना, यह उनके विवेक पर प्रश्न खड़े करता है।

जब ‘धर्म संसद‘ में दिए गए भाषणों के वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहे थे, उसी दौरान सोशल मीडिया पर एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के रैलियों में भड़काऊ भाषण के वीडियो भी सामने लगे।

वायरल वीडियो में एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी को कहते सुना जा सकता है, “मैं पुलिस वालों को बता देना चाहता हूँ कि वो याद रखें कि न तो योगी हमेशा मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे और न ही मोदी हमेशा प्रधानमंत्री। हम मुस्लिम समय को देख कर चुप हैं। पर ध्यान रहे कि हम कुछ भूलने वाले नहीं हैं। हमें तुम्हारा अन्याय याद रहेगा। अल्लाह अपनी ताकत से तुम्हे बर्बाद करेगा। इंशाल्लाह हम याद रखेंगे और समय भी बदलेगा। तब तुम्हे बचाने कौन आएगा जब योगी अपने मठ और मोदी हिमालय में चले जाएँगे? याद रहे, हम नहीं भूलने वाले।”

ओवैसी का यह आपत्तिजनक बयान 12 दिसंबर को कानपुर की एक सभा में दिया गया था। लेकिन जिन वकीलों ने ‘धर्म संसद’ मामले में शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप करने के लिए तेजी दिखाई। उन्होंने ओवैसी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को पत्र नहीं लिखा। बहुसंख्यकों के खिलाफ किए गए कई अन्य नफरत भरे भाषणों इसी तरह आसानी से नजरअंदाज कर दिया गया और उनको शीर्ष अदालत के समक्ष लाना योग्य नहीं माना।

कोरोना की चपेट में आए BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली, साल में दूसरी बार पहुँचे अस्पताल

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान व वर्तमान में बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली सोमवार (27 दिसंबर 2021) को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती हुए हैं। ये जानकारी न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से देते हुए बताया कि गांगुली की हालत स्थिर है।

रिपोर्ट बताती है कि बीसीसीआई अध्यक्ष कोविड के हल्के लक्षणों से पीड़ित थे। उन्होंने आरटीपीसीआर टेस्ट कराया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद एहतियात के तौर पर सोमवार को देर रात उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

सूत्रों ने बताया, “उन्हें कल रात वुडलैंड्स नर्सिंग होम ले जाया गया। उन्हें दवा दी गई और फिलहाल उनकी हालत स्थिर है।” अब आगे उनका ब्लड सैंपल ओमिक्रोन वैरिएंट टेस्ट करने के लिए भेजा जाएगा। अस्पताल की एमडी व सीईओ डॉ रुपाली बासु ने बताया कि उन्हें मोनोक्लोनल एंटी-बॉडी कॉकटेल थेरेपी दी गई है और वर्तमान में वो स्थिर हैं।

24 दिसंबर को सौरव गांगुली ने बांग्ला सुपरस्टार और टीएमसी सांसद देव की नई फिल्म ‘टॉनिक’ के प्रीमियर को अटेंड किया था। वहाँ उन्हें नुसरत जहां, यश दासगुप्ता, बाबुल सुप्रियो, टीएमसी विधायक मदन मित्रा और अन्य जैसी हस्तियों के साथ देखा गया था।

मालूम हो कि इस वर्ष में ये दूसरी बार है जब सौरव गांगुली को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इससे पहले वो वुड्सलैंड अस्पताल में ही दिल का दौरा पड़ने के बाद भर्ती हुए थे। बाद में उन्हें राइट कोरोनरी एंजियोप्लास्टी कराने के बाद छुट्टी दे दी गई। हालाँकि 20 दिन बाद उनके दोबारा दर्द शुरू हुआ और फिर उनकी एंजियोप्लास्टी हुई।

गौरतलब है कि इस समय देश में ओमिक्रोन वेरिएंट के कुछ 578 मामले आ गए हैं। दिल्ली में ये गिनती 142 है, महाराष्ट्र में 141। वहीं कोरोना केसों की बात करें तो मात्र 24 घंटे में 6 हजार से ज्यदा कोविड केस आए हैं। इसी के साथ देश में कोविड के सक्रिय केस 75 हजार पार पहुँच गए हैं।

जहाँ 8 साल की ‘नूरी’ के साथ हुई थी दरिंदगी, जहाँ रेप करते पकड़े गए थे तौफीक और अहमद; उसी मुंबई में अब कुत्ते का लिंग काटा

मुंबई के अँधेरी (पश्चिम) के कापसवाड़ी इलाके से जानवर के साथ क्रूरता का एक मामला सामने आया है। 25 दिसंबर 2021 की रात अज्ञात अपराधी ने एक कुत्ते का लिंग (Penis) काट दिया। खून से लथपथ कुत्ते को परेल के बॉम्बे SPCA पशु अस्पताल ले जाया गया। कुत्ते की जान बचाने के लिए आपातकालीन ऑपरेशन किया गया।

महाराष्ट्र में पशु कल्याण कानूनों की देखरेख के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त पशु अधिकारी डॉ. नंदिनी कुलकर्णी ने कहा, “यह बहुत चौंकाने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक युवा स्ट्रीट डॉग का किसी ने लिंग काट दिया। यह शायद उस समय हुआ जब वह इस क्षेत्र में संभोग (Mating) कर रहा था। मैंने मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य के पशुधन विभाग से मामले की और जाँच करने को कहा है।”

मामले में पशुपालन विभाग के उपायुक्त और मुंबई जिला एसपीसीए के सदस्य सचिव डॉ. शैलेश पेठे ने औपचारिक रूप से डीएन नगर पुलिस को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत अपराध दर्ज करने के लिए पत्र लिखा है। वहीं भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के मानद जिला पशु कल्याण अधिकारी मितेश जैन ने मामले में सीसीटीवी फुटेज चेक कर सबूत इकट्ठा करने के लिए कहा है।

इस बीच, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिख कर इस घटना की जाँच का आदेश देने का अनुरोध किया है। कार्यकर्ताओं ने यह भी दोहराया है कि पशु क्रूरता के मामलों में कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए PCA एक्ट 1960 में संशोधन किया जाए। बता दें कि मौजूदा कानून के तहत पशु क्रूरता का दोषी पाया जाने वाला कोई भी व्यक्ति केवल 50 रुपए का जुर्माना देकर छूट सकता है।

उल्लेखनीय है कि मुंबई में कुत्ते के साथ अमानवीयता की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले मुंबई के पवई स्थित गैलेरिया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 8 साल की ‘नूरी’ नाम के मादा कुत्ते के साथ दरिंदगी की घटना अंजाम दी गई थी। बदमाशों ने उसके गुप्तांग में 11 इंच की लकड़ी डाल दी थी। इसी तरह सांताक्रुज कलीना में तौफीक अहमद ने कुतिया के साथ रेप की वारादात को अंजाम दिया था। वहीं अँधेरी वेस्ट के जुहू में अहमद शाह नाम के शख्स ने मादा कुत्ते के साथ बलात्कार किया था।

कोरोना से लड़ाई के लिए आ गई 2 और वैक्सीन, 1 गोली भी: CDSO ने दी मंजूरी, जानिए क्या है Covovax और Corbevax

भारत में कोविड वैरिएन्ट ओमीक्रोन की मौजूदगी से जंग के बीच कोरोना के दो और वैक्सीन को भी मंजूरी मिल गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSO) ने Covid-19 के टीकों कोवोवैक्स (Covovax ) और कोर्बिवैक्स (Corbevax) और एंटी-वायरल दवा मोलनुपिरवीर (Anti-viral drug Molnupiravir) को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। 

बता दें कि स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने सिलसिलेवार ट्वीट्स में देश को बधाई देते हुए बताया, “मोलनुपिरवीर एक एंटीवायरल दवा है जो देश में 13 कंपनियों द्वारा कोविड-19 के वयस्क रोगियों के इलाज के लिए आपातकालीन स्थिति में प्रतिबंधित उपयोग के लिए निर्मित की जाएगी।”

मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि कोर्बिवैक्स वैक्सीन भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित RBD प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन है। इसे हैदराबाद स्थित फर्म बायोलॉजिकल-ई द्वारा बनाया गया है। यह भारत में विकसित तीसरा वैक्सीन है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि नैनोपार्टिकल वैक्सीन, कोवोवैक्स का निर्माण पुणे स्थित फर्म सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा ही किया जाएगा।

बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने कोवोवैक्स के लिए अनुमति माँगी थी जिसके लिए एसआईआई ने आपात स्थिति में सीमित उपयोग के लिए कोवोवैक्स के मार्केटिंग की मंजूरी के लिए अक्टूबर में डीसीजीआई को एक आवेदन दिया था।

गौरतलब है कि भारत की पहली दोनों स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोविडशील और कोवाक्सिन की खुराकें यहाँ के व्यस्क लोगों में बड़े स्तर पर लग चुकी है। इसके अलावा भारत में रूस की स्पुतनिक वी और अमेरिकी कंपनी फाइजर की कोरोना वैक्सीन भी लोग लगवा रहे हैं। इसके अलावा जायडस कैडिला वैक्सीन को भी मंजूरी दी जा चुकी है।  

पिता जिस गुरुद्वारे का सेवादार वहीं बेटे ने की बेअदबी, कटार का भी अनादर: पंजाब के मुक्तसर की घटना, हंगामे के बाद युवक गिरफ्तार

पंजाब के मुक्तसर जिले से गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवक धर्मग्रंथ को मूल स्थान से उठाकर आँगन में रखकर उसका अनादर किया। युवक गुरुद्वारे के ही सेवादार का बेटा अर्शदीप सिंह है और वह मानसिक रूप से बीमार बताया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुद्वारा के प्रबंधकों ने दबाए रखा, लेकिन रात में जब स्थानीय लोग विरोध में गुरुद्वारा पहुँचे तो मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

घटना मुक्तसर जिले के मलोट सब-डिविजन के एनाखेरा गाँव की है। यहाँ स्थित बाबा भिंडी चंद गुरुद्वारा हाल ही में खुला है। गुरुद्वारा के ग्रंथी गुरुसेवक सिंह ने बताया कि वह रोजाना की तरह नितनेम करने के बाद अपने कमरे में चले गए। गुरुद्वारा में दो कमरे बने हैं। इसी दौरान यहाँ के सेवादार संतोख सिंह का लगभग 22 साल का बेटा अर्शदीप सिंह सोमवार (27 दिसंबर) सुबह 9 बजे गुरुद्वारा आया था। वह गुरुग्रंथ साहिब को उठाकर बाहर लेकर चला गया और वहाँ रखे कटार का भी अनादर किया।

ग्रंथी ने बताया कि युवक को ऐसा करते देखा तो उसके पिता ने उसे पकड़ लिया और धर्मग्रंथ को लाकर उसके मूल स्थान पर प्रतिष्ठित कर दिया। पिता का कहना है कि उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है और वह पहले भी आत्महत्या करने की कोशिश कर चुका है। बताया जाता है कि युवक खुद भी गुरुद्वारे में आकर सेवा करता था।

हालाँकि गाँव वालों को अर्शदीप सिंह की मानसिक हालात को लेकर शंका जाहिर की है और घटना की विस्तृत जाँच की माँग की है। वहीं, मलोट के डीएसपी जसपाल सिंह ढिल्लन ने बताया कि घटना की जानकारी पुलिस को 12 घंटे बाद दी गई। पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।

यह गुरुद्वारा हाल ही में बना है और 15 दिन पहले ही यहाँ गुरुग्रंथ साहिब का प्रकाश किया गया है। यह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (SGPC) के अंतर्गत नहीं आता और यह बाबा बिधि चंद निहंग सिंह दल के अधीन संचालित होता है। नए बने होने के कारण यहाँ सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हैं।

बताते चलें कि पिछले कुछ दिनों से पंजाब में गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएँ लगातार आ रही हैं। पिछले दिनों निजामपुर गाँव के एक गुरुद्वारे में निशान साहिब की बेइज्जती का आरोप लगाकर एक युवक की हत्या कर दी गई। वहीं, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में बेअदबी का आरोप लगाकर एक शख्स की पिटाई कर दी गई थी।