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VHP नेता मुकेश सोनी की हत्या में यूनुस अंसारी गिरफ्तार, प्रिंस खान की अभी भी फरार: झारखण्ड की हेमंत सरकार ने दी मात्र ₹20 हजार की मदद

झारखंड की राजधानी राँची में विश्व हिन्दू परिषद (VHP) नेता मुकेश सोनी की हत्या मामले में एक आरोपित यूनुस अंसारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं दूसरे फरार आरोपित प्रिंस खान की तलाश तेज कर दी गई है। गिरफ्तारी की पुष्टि 19 दिसम्बर (रविवार) को राँची के पुलिस अधीक्षक देहात नौशाद आलम ने एक प्रेसवार्ता के दौरान की है। मुकेश सोनी की हत्या बुधवार (15 दिसम्बर) को गोली मार कर की गई थी।

मीडिया से बात करते हए SP देहात नौशद आलम ने बताया, “मुकेश सोनी खेलारी प्रखंड के बजरंग दल के सक्रिय कार्यकर्ता थे। उनकी हत्या दुकान बंद कर के घर आने के दौरान कर दी गई थी। यह हत्या बाईपास रोड पर हुई थी जो जंगल का मार्ग है। यह बेहद सनसनीखेज मामला था जिसका सीनियर SP ने संज्ञान ले कर SIT का गठन किया था। मृतक के पिता के बयान पर ही केस दर्ज हुआ था। इस बयान में यूनुस अंसारी और प्रिंस खान का नाम आया था। SIT टीम ने यूनुस अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है।”

SP नौशाद आलम ने आगे बताया, “यूनुस अंसारी के द्वारा घटनास्थल पर जो मोबाईल प्रयोग किया गया था उसे बरामद कर लिया गया है। हमने कई अन्य महत्वपूर्ण सबूत भी जमा किए हैं। इन्हें अदालत के आगे पेश किया जाएगा। अभी यूनुस के साथ प्रिंस खान को पकड़ा नहीं जा सका है। हमें आशा है कि उसकी भी गिरफ्तारी जल्द कर ली जाएगी। इतनी बड़ी घटना का कारण जो अभी सामने आया है वो मुकेश और यूनुस के बीच पहले का विवाद है। यूनुस अंसारी ने कोई घर बनवाया था जिसे मुकेश की ही शिकायत पर गिरा दिया गया था।”

SP ने आगे बताया, “कुछ समय पहले अवैध हथियारों के लेन-देन मामले में यूनुस फरार हो गया था। उस समय भी हमने अपराध संख्या 94 / 21 के तहत केस दर्ज किया था। आरोपितों को शक था कि उनके गलत कामों की जानकारी मुकेश सोनी ने ही पुलिस को दी होगी। इन्हे खुद को पकड़वाने का शक और पुरानी दुश्मनी दोनों सामूहिक रूप से मुकेश सोनी के हत्या की वजह बनी। इस मामले में प्रिंस ही आरोपित है या कोई और भी है, इस पर हम कड़ी नजर बनाए हुए हैं। उन सभी तक जल्द से जल्द पहुँचने के प्रयास जारी हैं।”

ऑपइंडिया ने मृतक मुकेश के भाई सागर सोनी से बात की। सागर ने बताया, “जिस जगह मेरे भाई मुकेश की हत्या हुई है वहीं थोड़ी दूर पर पकड़े गए आरोपित यूनुस अंसारी के चाचा का घर भी हैं। इस घटना में कोई तीसरा आरोपित भी सुनने में आ रहा है। उसके नाम का खुलासा अभी नहीं किया जा रहा। SHO फ़रीद आलम भ्र्ष्ट अधिकारी है। हमारी शिकायतों के बाद भी उस पर कार्रवाई हुई है या नहीं इसकी जानकारी हमें नहीं है। DSP अनिमेष जी हमारी पूरी मदद कर रहे हैं। हमारे घर केवल भाजपा और हिन्दू संगठनों के लोग आए। भाजपा विधायक समरीलाल ने हमारे घर को ₹25 हजार की आर्थिक सहायता दी। सरकारी सहायता के नाम पर ब्लॉक से मात्र ₹20 हजार मिले हैं। हम किसी भी हाल में झुकने वाले नहीं हैं।”

ऑपइंडिया ने राँची के सीनियर पुलिस अधीक्षक के मोबाईल पर फोन मिलाया तो फोन उनके टेलीफोन ड्यूटी अधिकारी ने उठाया। उन्होंने बताया कि किसी भी कार्रवाई या अपडेट की जानकारी केवल SP साहब ही दे सकते हैं जो अभी विधानसभा की ड्यूटी में हैं।

10 साल की जेल और हजारों से लेकर लाखों का जुर्माना: कर्नाटक में पेश होगा धर्मांतरण विरोधी बिल, जानें ड्राफ्ट की खास बातें

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम और हिमाचल प्रदेश के बाद अब कर्नाटक सरकार भी धर्मांतरण के खिलाफ सख्ती करने जा रही है। बता दें कि कर्नाटक सरकार विधानसभा में धर्मांतरण विरोधी बिल (Karnataka Anti Conversion Bill) पेश करने वाली है। इसका ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसके तहत कर्नाटक में धर्मांतरण कराने पर 3 से लेकर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही धर्मांतरण के आरोपित पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।

जानिए क्या है बिल में

मौजूदा ड्राफ्ट के अनुसार, कर्नाटक के धर्मांतरण विरोधी बिल में गैरकानूनी रूप से वयस्क व्यक्ति का धर्मांतरण कराने के दोषी व्यक्ति को 3 साल से लेकर 5 साल तक की सजा और 25 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। वहीं किसी नाबालिग, महिला या एससी और एसटी वर्ग के लोगों का गैरकानूनी रूप से धर्मांतरण के दोषी व्यक्ति को 3 साल से लेकर 10 साल तक की सजा और 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। 

सजा का प्रावधान

इसके अलावा बड़ी संख्या में एक साथ लोगों का धर्मांतरण गैरकानूनी रूप से कराने वाले व्यक्ति को 3 साल से लेकर 10 साल तक सजा का प्रावधान है और उस पर एक लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं कोर्ट के आदेश के बाद दोषी व्यक्ति को पीड़ित को 5 लाख रुपए तक का हर्जाना भी देना पड़ सकता है। हालाँकि, विधानसभा में पेश होने के बाद इस पर चर्चा होगी और इसमें कुछ बदलाव भी हो सकते हैं।

धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले देनी होगी सूचना

नए बिल के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसकी प्रक्रिया भी थोड़ी लंबी की गई है। सबसे पहले धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले जिलाधिकारी को सूचित करना होगा। इसके बाद जिलाधिकारी इसकी जाँच कराएँगे और जाँच के बाद सब कुछ ठीक होने पर अपनी सहमति देंगे।  इसके बाद व्यक्ति को धर्मांतरण के बाद 30 दिन के भीतर डिक्लेरेशन भी देना होगा। प्रस्तावित कानून में आगे कहा गया है कि कोई भी संस्था या संगठन यदि उल्लंघन करता है, उसे भी सज़ा दी जाएगी।

पीड़ितों के लिए मुआवजे का प्रवधान

प्रस्तावित कानून में कहा गया है कि आरोपित शख्स को पीड़ित को पाँच लाख रुपए तक का मुआवजा देना पड़ सकता है। वहीं अवैध धर्मांतरण के एकमात्र उद्देश्य के लिए किए गए विवाह के मामले में, विवाह को पारिवारिक न्यायालय द्वारा अमान्य घोषित कर दिया जाएगा। यदि कोई पारिवारिक न्यायालय नहीं हैं, तो ऐसे मामलों की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र वाला न्यायालय भी ऐसे विवाहों को अमान्य घोषित कर सकता है। बता दें कि इसे गैर-जमानती कैटेगरी में रखा गया है।

पीड़ित के रिश्तेदार दर्ज करा सकते हैं FIR

प्रस्तावित कानून के तहत, कोई भी पीड़ित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई, बहन, या कोई अन्य व्यक्ति, जिनका खून का रिश्ता हो वो ऐसे धर्मांतरण की FIR दर्ज करा सकता है, जो धारा-3 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

कोई अखाड़ा में फरियाने की चुनौती दे रहा तो कोई हरमोनियम लेकर बैठने की: भोजपुरी सिनेमा में पवन सिंह और खेसारी के बीच क्या चल रहा?

भोजपुरी सिनेमा में फ़िलहाल इंडस्ट्री के दो बड़े सितारों पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के बीच जुबानी जंग चल रही है। ये दोनों ही अभिनेता के साथ-साथ गायक भी हैं। अब खेसारी लाल यादव ने अपने प्रतिद्वंद्वी पवन सिंह को ‘अखाड़ा में फरियाने’ की चुनौती दे डाली है। दोनों के समर्थक गायकों के बीच भी लड़ाई चल रही है और गाने व बयान के जरिए एक-दूसरे पर निशाना साधा जा रहा है। असल में ये सब रितेश पांडेय द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो से शुरू हुआ।

इस वीडियो के आधार पर आरोप लगाया गया कि खेसारी लाल यादव ने इंडस्ट्री के नए गायकों का अपमान किया है। रितेश पांडेय ने उनकी मानसिकता को घटिया बताते हुए कहा था कि आप छोटों को इस नजरिए से देखते हैं, जो ठीक नहीं है। इस वीडियो में प्रमोद प्रेमी, कलुआ और और रितेश को लेकर खेसारी ने कहा था कि इनकी औकात 5 लाख से ज्यादा की नहीं है। यही बात पवन सिंह को भी खटक गई और उन्होंने एक स्टेज शो में सरेआम कह दिया कि जिसको जहाँ जाना है जाए, वो उन जगहों से पहले ही आ चुके हैं।

उन्होंने कह दिया कि कुछ लोग काफी घमंड में रहते हैं, लेकिन 5000 रुपए में कहीं भी गाना गाने को तैयार रहते हैं। इस दौरान उन्होंने कुछ भद्दे इशारे भी कर डाले। इसके बाद खेसारी लाल यादव कहने लगे कि उनके नाम से ही पवन सिंह को दिक्कत है। उन्होंने पवन सिंह पर दारू पीकर बयान देने के आरोप भी लगा डाले। उन्होंने कह दिया कि दारू पीकर जाना अच्छी बात नहीं है। इस दौरान पवन सिंह की एक्स गर्लफ्रेंड अक्षरा सिंह ने भी इंडस्ट्री को दो सुपरस्टारों मनोज तिवारी और रवि किशन से सीखने की सलाह दी।

दिनेश लाल यादव निरहुआ ने इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि हम सभी आपस में काफी प्रेम करते हैं और विभिन्न कार्यक्रमों में एक-दूसरे से मिलते-जुलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि खेसारी की आदत है कि जब भी वो पवन सिंह से मिलते हैं तो अपनी संपत्ति के बारे में बातें करते हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री काजल राघवानी ने इंडस्टी में अश्लीलता फैलने की बातें करते हुए कहा कि अभिनेत्रियों को जिस तरह से मजबूर किया जाता है, वो तकलीफ देने वाला है।

दोनों भोजपुरी फ़िल्मी हस्तियों के बीच झगड़े की असली वजह उनके ‘ईगो’ का टकराव ही नजर आ रहा है। पवन सिंह ने सही समय पर जवाब देने की बात करते हुए कहा कि भोजपुरी इंडस्ट्री सबके सामूहिक प्रयासों से आगे बढ़ रही है, जबकि कच लोग केवल बड़बड़ाना जानते हैं। पवन सिंह ने माफ़ी भी माँगी और कहा कि बर्दाश्त की भी एक सीमा होती है। उन्होंने कहा कि कलाकारों की कोई जाति नहीं होती और किसी को मिलियन व्यूज मिलते हैं तो उन्हें ख़ुशी होती है। उन्होंने खेसारी को हारमोनियम लेकर साथ बैठने की चुनौती दी, ताकि पता चले कि कौन कितना गाता है।

पाकिस्तानी नाव से ₹400 करोड़ की 77 किलोग्राम हेरोइन जब्त, 6 गिरफ्तार : तटरक्षक बल और गुजरात ATS की संयुक्त कार्रवाई

गुजरात एटीएस ने सोमवार (20 दिसंबर 2021) को 400 करोड़ रुपए की हेरोइन ले जा रही एक पाकिस्तानी नाव का भंडाफोड़ किया है। इसके साथ ही पाकिस्तान की मछली पकड़ने वाली नाव से छह सदस्यों को गिरफ्तार भी किया गया है।

गुजरात के डिफेंस पीआरओ के अनुसार, भारतीय तटरक्षक बल ने गुजरात एटीएस के साथ एक संयुक्त अभियान में ‘अल हुसैनी’ नाम की एक पाकिस्तानी मछली पकड़ने वाली नाव को भारतीय जलक्षेत्र में पकड़ा है, जिसमें चालक दल के छह सदस्य थे। उन्होंने बताया कि करीब 400 करोड़ रुपए की 77 किलोग्राम हेरोइन भी जब्त की है। नाव को आगे की जाँच के लिए गुजरात के कच्छ जिले में जखाऊ तट पर लाया गया है।

इस साल की शुरुआत में अप्रैल में तटरक्षक बल और एटीएस ने इसी तरह का एक अभियान चलाया था और कच्छ के जखाऊ तट के पास भारतीय जलक्षेत्र से आठ पाकिस्तानी नागरिकों को नाव में लगभग 150 करोड़ रुपए की 30 किलोग्राम हेरोइन ले जाते हुए पकड़ा था। पिछले महीने, एटीएस ने गुजरात के मोरबी जिले में एक निर्माणाधीन घर से लगभग 600 करोड़ रुपए की ड्रग्स की खेप जब्त की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नौका के जरिए भारत में हेरोइन की बड़ी खेप की डिलीवरी होनी थी।

बता दें कि कच्छ के मुंद्रा बंदरगाह पर अधिकारियों ने पहले बताया था कि इस साल सितंबर में राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने भारत में हेरोइन की सबसे बड़ी खेप का भंडाफोड़ किया था। उन्होंने उस दौरान दो कंटेनरों से लगभग 3,000 किलोग्राम ड्रग्स जब्त की थी, जो अफगानिस्तान से आई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 21,000 करोड़ रुपए बताई गई थी।

‘हेमा मालिनी के गाल जैसी सड़कें नहीं तो इस्तीफा’: महाराष्ट्र सरकार के मंत्री के बयान का राउत ने किया बचाव, कहा- ‘यह उनका सम्मान है’

महाराष्ट्र (Maharashtra) के जलापूर्ति मंत्री गुलाबराव रघुनाथ पाटिल ( Gulabrao Raghunath Patil) ने अभिनेत्री और भाजपा सांसद हेमा मालिनी (Hema Malini) को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने जलगाँव जिले की सड़कों की तुलना हेमा मालिनी के गाल से की है। मंत्री का कहना है कि अगर जिले की सड़कें हेमा मालिनी के गाल की तरह चिकनी नहीं हुई तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। लेकिन बाद में विवाद बढ़ने के बाद उस पर माफी भी माँग ली।

रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसेना (Shivsena) के वरिष्ठ नेता और राज्य के जलापूर्ति और स्वच्छता मंत्री गुलाबराव रघुनाथ पाटिल शनिवार (11 दिसंबर 2021) को उत्तरी महाराष्ट्र में अपने जिले में बोडवाड़ नगर पंचायत चुनाव के लिए एक चुनावी सभा में शामिल हुए थे। उसी दौरान उन्होंने यह आपत्तिजनक टिप्पणी की। उनके इस कमेंट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल, अपने भाषण के दौरान मंत्री विपक्ष पर निशाना साधते हुए यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में सड़कों की स्थिति बहुत ही अच्छी है।

पाटिल ने पूर्व भाजपा (BJP) नेता एकनाथ खडसे (Eknath khadse) की ओर इशारा करते हुए कहा, “जो 30 साल से विधायक हैं, वे मेरे निर्वाचन क्षेत्र में आएँ और सड़कें देखें। अगर वे हेमा मालिनी के गाल की तरह नहीं हैं, तो मैं इस्तीफा दे दूँगा।”

हालाँकि, विवाद बढ़ने के बाद शिवसेना नेता ने अपने बयान के लिए माफी माँगी है। उन्होंने धुले में पत्रकारों से बात करते हुए सफाई दी कि अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुँची है तो मैं इसके लिए माफी माँगता हूँ। मेरा उद्देश्य कुछ और था।

वहीं इस मामले में महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर (Rupali Chakankar) ने टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए मंत्री को सार्वजनिक तौर पर माफी माँगने को कहा है। इसके साथ ही उन्होंने कानूनी कार्रवाई की भी चेतावनी दी।

मंत्री के बयान को जस्टिफाई करने की कोशिश

गुलाबराव पाटिल के बयानों से मचे सियासी बवाल के बीच शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत (Shiv Sena MP Sanjay Raut) ने मंत्री के बयान को जस्टिफाई करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “इस तरह की तुलना पहले भी हो चुकी है। यह हेमा मालिनी का सम्मान है। इसलिए इसे नकारात्मक रूप से न देखें। इससे पहले लालू यादव ने भी ऐसा ही उदाहरण दिया था। हम हेमा मालिनी का सम्मान करते हैं।”

उद्धव सरकार के मंत्री के बयान को अधिक तवज्जो नहीं देते हुए बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि इसकी शुरुआत कई साल पहले लालू यादव (Lalu Yadav) ने की थी। इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। हालाँकि, उन्होंने इस पर माफी की माँग से इनकार कर दिया।

कैटरीना कैफ (Katina Kaif) पर भी किया था कमेंट

पिछले महीने नवंबर 2021 में राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने कहा था कि हेमा मालिनी अब बूढ़ी हो गई हैं, इसीलिए कैटरीना कैफ के गाल जैसे सड़कें बननी चाहिए। उन्होंने ‘लोक निर्माण विभाग (PWD)’ के चीफ इंजीनियर से कहा कि हमारे गाँव में सड़कें एकदम कैटरीना कैफ (Katina Kaif) के गाल जैसी बननी चाहिए।

अमृतसर और कपूरथला में मारे गए युवकों के खिलाफ केस दर्ज, धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप: हत्या वाली FIR से मुकरी पुलिस

अमृतसर और कपूरथला में बेअदबी के आरोप में सिख भीड़ द्वारा दो लोगों की मॉब लिंचिंग के मामले में अब तक हत्या का मामला दर्ज नहीं किया गया है। कपूरथला वाले मामले में रविवार (19 दिसंबर, 2021) को पंजाब पुलिस की तरफ से IG गुरिंदर सिंह ढिल्लो और SSP एचपीएस खख ने पहले हत्या का केस दर्ज किए जाने की जानकारी दी, लेकिन बाद में मुकर गए। उन्होंने FIR नंबर तक बताते हुए कहा कि 4 नामजद और 100 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।

हालाँकि, अब सामने आ रहा है कि दोनों मृतकों के खिलाफ ही IPC 295 (किसी समुदाय द्वारा पवित्र मानी जाने वाली वस्तुओं या उपासना स्थल को नष्ट करने की कोशिश कर के धार्मिक भावनाएँ भड़काना) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। कपूरथला वाली पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 45 मिनट के दौरान अधिकारियों को 8 बार फोन कॉल्स आए और वो अपना बयान बदलते चले गए। IG के पास 5 और SSP के पास 3 फोन कॉल्स आए। निजामपुर मोड़ में डेरा चलाने वाले ने भी पुलिस को बयान किया है कि कपूरथला गुरुद्वारा में युवक चोरी के इरादे से आया था।

जबकि सिख भीड़ ने आरोप लगाया कि बेअदबी की गई और ‘निशान साहिब’ का अपमान किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने इस मामले में सरकारी कर्मियों को ड्यूटी से रोकने और उन्हें जान से मारने की कोशिश करने का मामला भी दर्ज किए जाने की बात बताई थी। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया को खँगाला जा रहा है, जिसको माध्यम बना कर सारा मामला भड़काया गया। पुलिस ने मृतक के बारे में बताया कि वो प्रवासी मजदूर लग रहा था। बाद में पुलिस कहने लगी कि हत्या का कोई केस दर्ज नहीं हुआ है।

ये भी जानने लायक बात है कि अब तक अमृतसर और कपूरथला में मारे गए दोनों युवकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। प्रशासन ये पता लगा रहा है कि कहीं दोनों एक-दूसरे को जानते तो नहीं थे और ये कोई साजिश का हिस्सा तो नहीं। आधार कार्ड डेटाबेस से दोनों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी हों या फिर विपक्षी शिअद, सभी इसमें साजिश की बू देख रहे हैं। पिछले 8 साल में कथित बेअदबी के 100 मामले सामने आए हैं।

‘गुजरात की सभी मस्जिदों से उतरे भोंपू’: हिंदुओं के विरोध के बाद अंबाजी की हवनशाला में लाउडस्पीकर के उपयोग पर लगा प्रतिबंध वापस

हिंदू समाज के लोगों द्वारा विरोध दिखाने के बाद अंबाजी प्रशासन ने मंदिर के हवनशाला में लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध लगाने वाले आदेश को वापस ले लिया है। शनिवार (18 दिसंबर 2021) को कच्छ संत समाज अध्यक्ष योगी देवनाथ ने ट्विटर पर इस संबंध में ट्वीट करके इस विरोध प्रदर्शन के बारे में बताया था।

योगी देवनाथ द्वारा शेयर किए गए प्रशासन के पत्र में लिखा था कि अंबाजी मंदिर की हवनशाला में ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए लाउडस्पीकरों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, क्योंकि इससे आसपास के लोगों को परेशानी हो रही थी। पत्र के साथ किए गए ट्वीट में योगी देवनाथ ने कहा था कि अगर आदेश वापस नहीं लिया गया तो गुजरात की सभी मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों को बंद कर दिया जाएगा।

प्रशासन द्वारा 18 दिसंबर को जारी पत्र में कहा गया था कि जिस हवनशाला में लाउडस्पीकर हैं वहाँ कई याज्ञनिक कार्य और अन्य समारोह भक्तों द्वारा किए जाते हैं। इन लाउडस्पीकर्स के कारण नजदीकी ग्रामीणों को दिक्कत होती है। इसके अलावा यह अंबाजी मंदिर कार्यालय के हर कार्य में भी परेशानी देते हैं इसलिए तत्काल प्रभाव से यहाँ लाउडस्पीकर बैन किया जाता है।

हालाँकि हिंदू समाज की नाराजगी के बाद मंदिर प्रशासन ने अपने आदेश को वापस ले लिया। दिव्य भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार हवनशाला में 14 स्थान हैं जहाँ हवन/यज्ञ किए जा सकते है। ऐसे में वहाँ कई यज्ञ होते थे और एक साथ कई यज्ञ होने से समस्या उत्पन्न होती थी।

बता दें कि 18 दिसंबर को लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया गया। हालाँकि, आक्रोश के बाद जब हिंदू समुदाय ने कहा कि इससे उनकी भावनाएँ आहत हो रही हैं, तो लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध लगाने का आदेश वापस ले लिया गया। हवन करते समय कोई व्यवधान न हो, इसके लिए वक्ताओं की संख्या कम करने का निर्णय लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि अंबाजी मंदिर, गुजरात के बनासकांठा क्षेत्र में हिंदुओं के लिए एक तीर्थ स्थान है। ये 51 शक्तिपीठों में से एक है। हर साल लाखों तीर्थयात्री मंदिर में आते हैं। इस मंदिर का हर पूर्णिमा और नवरात्रि में विशेष महत्व होता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, सभी शक्तिपीठ देवी सती के देह त्यागने के बाद अस्तित्व में आए थे। जब दुःख और पीड़ा से भरे भगवान शिव ने उनके शरीर को हाथों में ले लिया और पूरे ब्रह्मांड में घूमते रहे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से शरीर को टुकड़ों में काट दिया ताकि वे पृथ्वी पर गिरें और लोग उससे प्रार्थना कर सकें। देवी सती के हृदय का एक हिस्सा अंबाजी में गिरा और वहीं पर ये मंदिर है।

मोहल्ला क्लिनिक ने बच्चों को दिया प्रतिबंधित सिरप 16 बच्चे बीमार, 3 की मौत: बीजेपी ने घेरा, कहा- ‘केजरीवाल के हाथों में लगा खून’

दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक से मिले एक कफ़ सिरप के साइड इफेक्ट की वजह से 16 बच्चे बीमार हुए और इनमें से 3 बच्चों की मौत हो गई। इन सभी को दिल्ली के कलावती शरण अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस मामले की जाँच रिपोर्ट में डिस्ट्रोमेथोर्फन (Dextromethorphan) कफ सिरप का मामला सामने आया।

वहीं जाँच रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार के डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने दिल्ली सरकार के डीजीएचएस को निर्देश दिया है कि वह सभी मोहल्ला क्लीनिक और डिस्पेंसरी को नोटिस जारी कर बताए कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को डिस्ट्रोमेथोर्फन सिरप प्रिसक्राइब नहीं करे।

केंद्र सरकार के निर्देश

इस घटना के बाद भारत सरकार के DGHS (डायरेक्टर जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेस) ने दिल्ली सरकार को एक पत्र भेजा है। जिसमें दवा के साइड इफ़ेक्ट को देखते हुए इसे वापस लेने के आदेश भी दिए गए हैं। बता दें कि इस दवा का निर्माण ओमेगा फार्मास्युटिकल ने किया है।

एक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ का कहना है, “यह दवा कफ के लिए बनाई गई है। इसका साइड इफेक्ट बेहोशी के रूप में सामने आ रहा है। यह साइड इफेक्ट कई बच्चों में गंभीर नहीं पाया गया। संभव यह भी है कि दवा दूषित रही हो। कोई और कारण भी हो सकता है। इस पर गहन जाँच और उचित कार्रवाई की जरूरत है।”

भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस घटना के बाद मोहल्ला क्लिनिक के डाक्टरों को अयोग्य कहा है। उन्होंने कहा, “केजरीवाल के हाथों में खून लगा है। जो सीरप दिया गया वो 4 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए होता है।”

‘स्कूल में मुझे धक्का दिया, हिजाब हटा दिया’: मुस्लिम छात्रा ने ‘हेट क्राइम’ का मचाया हल्ला, पुलिस जाँच में नहीं मिले सबूत

अमेरिका के वर्जीनिया स्थित फेयरफैक्स हाई स्कूल की एक मुस्लिम छात्रा द्वारा लगाया गया हेट क्राइम का आरोप निराधार पाया गया है। सिटी ऑफ़ फेयरफैक्स पुलिस विभाग की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि छात्रा द्वारा हिजाब हटाने का आरोप मनगढ़ंत है। इसका कोई सबूत नहीं मिला है।

बता दें कि स्कूल की एक मुस्लिम छात्रा ने आरोप लगाया था कि कुछ छात्रों के समूह ने उसे धक्का दिया और उसका हिजाब हटा दिया। इससे उसके बाल दिखने लगे। इसके बाद सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि उसके ऊपर नस्लीय टिप्पणी भी की गई। पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मामले की जाँच जारी है।

पुलिस ने शनिवार (18 दिसंबर 2021) को जारी एक बयान में कहा, “जाँच से पता चला है कि किसी भी छात्र द्वारा कोई नस्लीय टिप्पणी नहीं की गई थी।” सिटी ऑफ़ फेयरफैक्स पुलिस डिपार्टमेंट की प्रेस रिलीज के अनुसार, छात्रा ने पुलिस को बताया कि उसका हिजाब हटाया गया था। कई सोशल मीडिया साइटों पर विवाद के दौरान नस्लीय टिप्पणी करने की बात कही जा रही है। यह झूठी है।

हालाँकि, छात्रा के वकील ने पुलिस के बयान को खारिज कर दिया है। अमेरिकन-अरब एंटी डिस्क्रिमिनेशन कमिटी के लीगल एवं पॉलिसी डायरेक्टर अबेद अयूब ने कहा, “हम सिटी ऑफ़ फेयरफैक्स पुलिस विभाग के फैसले से पूरी तरह असहमत हैं। कई गवाहों ने इस बात की पुष्टि की है कि विवाद के दौरान पीड़ित का हिजाब जबरन हटाया गया था। गवाहों ने पीड़ित के इस बयान की भी पुष्टि की कि कक्षा में छात्र नस्लवादी और इस्लामोफोबिक चित्रण में लगे हुए थे और उस पर हमले से पहले नस्लवादी टिप्पणी की थी। इसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ कई बार साझा किया गया था।”

वहीं काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस के राष्ट्रीय संचार निदेशक इब्राहिम हूपर का कहना है कि भले ही नस्लीय गालियों का इस्तेमाल नहीं किया गया हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह हेट क्राइम नहीं था। बता दें कि मुस्लिम छात्रा के द्वारा हिजाब हटाने और छात्रों के समूह के द्वारा परेशान करने की बात सामने आने बाद गुरुवार को सैकड़ों छात्रों ने फेयरफैक्स स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया था और न्याय की माँग की थी।

ऐश्वर्या राय बच्चन को ED ने पूछताछ के लिए बुलाया, 3 बार समन के बावजूद नहीं हुईं पेश: पनामा पेपर्स लीक से जुड़ा है मामला

पनामा पेपर्स (Panama Papers Leak) से जुड़े मामले में अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन (Aishwarya Rai Bachchan) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समन भेजा है। हालाँकि ऐश्वर्या राय बच्चन आज ईडी के सामने पेश नहीं होंगी। उन्होंने इस बाबत ईडी मुख्यालय को पत्र लिख कर सूचित किया है। 

बता दें कि ईडी ने FEMA के तहत एश्वर्या राय (Aishwarya Rai Bachchan) को नोटिस जारी किया और उन्हें पूछताछ के लिए ईडी मुख्यालय आने के लिए समन दिया था। जानकारी के मुताबिक ईडी ने पहले भी दो बार ऐश्वर्या राय को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन दोनों ही बैर उन्होंने नोटिस को स्थगित करने की गुजारिश की थी। उन्होंने यह गुजारिश पनामा पेपर्स लीक की जाँच कर रही स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम के समक्ष की थी। 

क्या है मामला?

मामले की शुरुआत साल 2016 में तब हुई जब पनामा लॉ फर्म के 11.5 करोड़ टैक्स के डॉक्यूमेंट इंटरनेट पर लीक हो गए और दुनिया भर में इसे लेकर बवाल मच गया। दुनिया भर के कई बड़ी हस्तियों के नाम इसमें शामिल थे। भारत के करीब 500 लोगों के नाम इसमें शामिल थे। इसी मामले में अमिताभ बच्चन व उनके परिवार का नाम भी सामने आया। जानकारी के मुताबिक अमिताभ बच्चन को 4 कंपनियों का डायरेक्टर बनाया गया था। इसमें से तीन बहामास मे थी और एक वर्जिन आईलैंड्स में थी। इसी मामले में बच्चन परिवार पर जाँच जारी है।

पनामा पेपर्स की लिस्ट में जिन लोगों का नाम है उन पर टैक्स की हेराफेरी का आरोप है। जिसको लेकर टैक्स अथॉरिटी जाँच में जुटी हैं। इस मामले में ऐश्वर्या राय को पहले एक कंपनी का डायरेक्टर बनाया गया था। बाद में उन्हें कंपनी का शेयर होल्डर डिक्लेयर कर दिया गया था।