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CDS रावत को ‘वॉर क्रिमिनल’ कहने वाली कश्मीरी शिक्षिका सब्बा हाजी अब जेल से बाहर: दुबई में पैदा हुई, भारतीय होने पर शर्मिंदगी

हाल ही में दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) को इंस्टाग्राम पर ‘वॉर क्रिमिनल’ कहने वाली कश्मीर के एक स्कूल की पूर्व निदेशक सब्बा हाजी को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। हालाँकि, यह पहली बार नहीं था, जब सब्बा ने इस तरह के शब्दों का प्रयोग किया हो। वह लंबे समय से भारत और भारतीय सैनिकों के खिलाफ जहर उगलती रही हैं। वर्ष 2010 में हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित लेख में उसने कहा था कि वह खुद को भारतीय कहने पर सम्मानित महसूस नहीं करती हैं। यहाँ तक कि वह अपने आपको भारत से जोड़कर देखना भी पसंद नहीं करती हैं।

उसने कहा था, “मैं 28 साल की हूँ। आज भी जब भी मुझे फॉर्म में अपनी राष्ट्रीयता भरना पड़ता है, तो मैं ‘इंडियन’ लिखने से पहले काफी कई बार सोचती हूँ। इस एक बात को लेकर लगभग 20 सालों से मुझे पीड़ा होती रही है, क्योंकि जब मैं 8 साल की थी, तो मुझे पता चला कि जम्मू-कश्मीर राज्य हमारे लिए किसी दलदल से कम नहीं है।” उसने वर्ष 2010 के लेख में कहा था, “मेरे परिवार के सदस्य और यहाँ के छोटे बच्चे भारत के प्रति अपनी नाराजगी जताते हैं। कश्मीर में कोई भी अपने बच्चों को ‘आजादी’ मंत्रों और सत्ता के खिलाफ जाना नहीं सिखाता है। मैंने बचपन में जाने-अनजाने में अपने परिवार और आस-पास के लोगों से जो महसूस किया था, वही अपने जेहन में बिठा लिया। ठीक वैसे ही जैसे मुझे खुद को भारत का निवासी बताने में हिचकिचाहट होती है।”

ट्विटर पर पाकिस्तान का समर्थन करने वाली हाजी ने कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन वह दुबई में पैदा हुई और कश्मीरियों के बीच पली-बढ़ी हैं। वह कश्मीर में अपनी छुट्टियाँ बिताने के लिए आती थीं और वहाँ बिताए गए समय के दौरान उन्होंने महसूस किया कि पूरे क्षेत्र के ​लोगों में भारत के खिलाफ नफरत है। भारत सरकार और उसके सुरक्षाबलों ने यहाँ के नागरिकों के दैनिक जीवन को बहुत प्रभावित किया है, जिसे हम समझ नहीं सकते।”

उसने यह भी दावा किया था कि कैसे कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा पुरुषों को उठाया जा रहा था और महिलाओं की निगरानी की जा रही थी। उनका कहना है कि उस वक्त महिलाओं और पुरुषों का अचानक से गायब हो जाना, कर्फ्यू, यातनाएँ देना, मौत और दुख का अंधेरा काल था। फिर उसने ‘हिंसक उग्रवादियों’ के बारे में बात की और कहा कि वे ज्यादातर गैर-कश्मीरी थे। हालाँकि, उन्होंने यह उल्लेख नहीं किया कि उन्हें पाकिस्तान द्वारा समर्थन दिया गया था, जो लंबे समय से घाटी में आतंकवाद को पोषित कर रहा है।

इसके बाद 1990 के दशक के अंत में कश्मीरी हिंदुओं के पलायन के बारे में बोलते हुए उसने बताया कि कैसे भारत और पाकिस्तान ने इस दौरान बड़ी भूमिका निभाई थी। इनमें वह कश्मीरी भी शामिल थे, जिन्होंने धमकी और दबाव के चलते आंदोलन को सांप्रदायिक रूप देने का समर्थन किया। भारत के बारे में वह कैसा महसूस करती हैं, इस बारे में सब्बा ने कहा था कि वह भारतीय इतिहास, संस्कृति, रंग, भोजन, भाषा, त्योहारों से प्यार करती हैं, लेकिन यह वह चेहरा है, जो भारत में लोग जानते हैं। इससे इतर वह वो है ही नहीं जिसे कश्मीर के लोग देखते हैं। इस दौरान वह कश्मीर को इस तरह से संदर्भित करती हैं, जैसे कि वह भारत से अलग हो। भारत के स्वतंत्रता सेनानियों की अलगाववादियों से तुलना करते हुए उन्होंने कहा था, “हमें सबसे ज्यादा दुख इस बात से पहुँचता है कि आपके भगत सिंह एक शहीद हैं, जबकि नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक उग्र राष्ट्रवादी हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि मैं ना तो भारतीय हूँ और ना ही पाकिस्तानी हूँ। हाजी ने कहा था कि अधिकांश कश्मीरी वास्तव में मानते हैं कि हम भारत या पाकिस्तान का हिस्सा हैं ही नहीं। कश्मीर में ‘स्वतंत्रता आंदोलन’ यही सब कुछ है। उन्होंने तब उल्लेख किया कि कैसे पिछली पीढ़ी ने हथियार उठाए थे, युवा पीढ़ी जो शिक्षित है वह कैसे अतीत की भूलों से सीखी है।

हाजी ने इस लेख में कहा था, “जहाँ तक पाकिस्तान का सवाल है, पाकिस्तान के बारे में मैंने केवल किताबों में पढ़ा है। इसके अलावा मैं इसके बारे में अपने पाकिस्तानी दोस्तों, पीटीवी और उनके टीवी शो को देखने के बाद जान पाई हूँ। मैं कभी पाकिस्तान नहीं गई। हालाँकि, मुझे यहाँ जाना अच्छा लगेगा। मैं उनकी क्रिकेट टीम से भी प्यार करती हूँ। यह पाकिस्तान के प्रति मेरा लगाव ही है।”

वह बताती हैं कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है, यही वजह है नहीं तो वह भारत की राष्ट्रीयता नहीं अपनाती। उसने लिखा, “अधिकांश कश्मीरी स्वाभाविक रूप से अध्ययन या काम करने के लिए भारत आते हैं। तो ऐसा कहना कि अगर हम भारत के खिलाफ हैं तो हम यहाँ क्यों आते हैं इसका कोई औचित्य नहीं है। यह मुझसे वैसा ही पूछने जैसा है कि मेरे पास भारतीय पासपोर्ट क्यों है? अगर कोई विकल्प होता तो मैं शायद ही इसे लेती।”

अपना पक्ष रखते हुए उसने तब दावा किया था कि किसी कश्मीरी का भारत विरोधी रुख अपनाने का मतलब यह नहीं है कि वह पाकिस्तान समर्थक ही हो और कृपया, पाकिस्तानी कहकर कश्मीरी आंदोलन को बढ़ावा ना दें। हम इसे स्वीकार नहीं करते हैं। उसने जनमत संग्रह का आह्वान करते हुए कहा, “हमें अपना जनमत संग्रह दें, जिसका वादा संयुक्त राष्ट्र के शासन के तहत किया गया था। इसका ‘लोकतंत्र’ के विचार से लेना-देना है, एक ऐसा विचार जिस पर भारतीयों को बहुत गर्व है। खुद से लिया गया निर्णय वही है, जो हम चाहते हैं।”

अपने निजी ब्लॉग पर उन्होंने 2015 में एक और पोस्ट लिखी थी, जिसमें वह अनुच्छेद-370 को लागू करने के ​खिलाफ थीं। कश्मीरी एकजुट क्यों नहीं होंगे के सवाल का जवाब देते हुए कि उन्होंने कहा, “आपको यह समझना चाहिए कि कश्मीरियों के जबरन एकीकरण का यह विचार वास्तव में वहाँ की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। इसे हर मौके पर दोहराया जाता है और ये कश्मीरियों को अपना बनाने के लिए कुछ नहीं करते हैं।”

उसने कहा कि भले ही वह 90 के दशक में कश्मीर में पली-बढ़ी नहीं थी, लेकिन बड़े होने के दौरान घाटी में दो महीने की छुट्टी में उन्होंने जो कुछ भी देखा, उससे आहत हो जाती हैं। हर बार कोई ना कोई कश्मीर में हिंसा कहता है, तो हम यहाँ किस हिंसा की बात कर रहे हैं। हमें उसे समझने की जरूरत है। मुझे संदेह है कि आपको बच्चों को ‘आतंकवादियों’ के रूप में याद करने के बहुत सारे मामले मिले होंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें आतंकवादी कहा जाता है। उन्होंने कहा, “मैं कहूँगी कि हर कश्मीरी परिवार में हम सबके बीच एक आतंकवादी है। उनके बढ़ते कदमों से कश्मीर वर्षों को बर्बाद हो रहा है। ये लोगों के दैनिक जीवन में हस्तक्षेप कर रहा है, जिससे उनका जीवन भी प्रभावित हो रहा है।”

यह स्वीकार करने के बाद कि कश्मीर में अधिकांश परिवारों में कम से कम एक व्यक्ति ‘आतंकवादी’ के रूप में बड़ा हो रहा है। उसने कहा, “कश्मीरी बच्चों में सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ के प्रति खासा नाराजगी देखी गई है। लेकिन आपको कश्मीर में 90 के दशक में बड़े हो रहे बच्चों के बीच आक्रोश और गुस्से की अनगिनत कहानियाँ मिलेंगी, जहाँ वे या तो व्यक्तिगत रूप से या फिर सेना, बीएसएफ सीआरपीएफ की पूछताछ और कार्रवाई से पूर्वाग्रह में हैं। इसके अलावा वे सुरक्षा बलों को अपने घर में घुसकर अपने परिवार के सदस्यों (पुरुषों, महिलाओं, बूढ़े, जवान) को उनके सामने पीटना, फर्नीचर तोड़ना, घर में तोड़फोड़ करना, बच्चों के प्रमाण पत्र, किताबें आदि फाड़ देने से भीतर से प्रभावित हुए हैं। उसने अपने ब्लॉग में कहा था, ” कश्मीर में आपके अपने पड़ोस में कुछ मीटर की दूरी पर तलाशी ली जा रही होती थी। लोगों को कार्रवाई के लिए बुलाया जा रहा होता था, कर्फ्यू का पालन करना, अपमानित होने के अलावा उन्हें कई चीजों का सामना करना पड़ता था।”

सब्बा ने कहा था कि कैसे कश्मीर में बच्चों के लिए भारत केवल वर्दी में अत्याचार करता है। उन्होंने कहा, “भारत में नेताओं और छाती पीटने वाले देशभक्तों द्वारा स्थानीय मीडिया, प्रेस, लेखकों और बुद्धिजीवियों के माध्यम से कश्मीरियों की कोसा जाता है। उनको भारत विरोधी बताकर अपमानित किया जाता है।”

इस साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक शख्स ने उनसे फोन करके पूछा था कि क्या उनके स्कूल में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया है, तो सब्बा आगबबूला हो जाती हैं। उन्होंने इस पर कहा कि यह क्या ‘बकवास’ है। इस सवाल से नाराज सब्बा हाजी ने उस शख्स को जवाब दिया कि आज रविवार था इसलिए झंडा नहीं फहराया गया। इसके बाद उसने बिना किसी सबूत के कहा कि इस कॉल के पीछे भारत सरकार का हाथ था।

सब्बा हाजी के ट्वीट्स

उनके ट्वीट से तो ऐसा ही लगता है कि कश्मीर में एक स्कूल की निदेशक स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय ध्वज फहराना ही नहीं चाहती थी। यह वास्तव में चिंता का विषय है, क्योंकि वह ऐसी स्थिति में हैं, जहाँ वह बच्चों को देश के प्रति अच्छे संस्कार देने में सक्षम हैं। बच्चे देश का भविष्य हैं, जब तक उन्हें सही राह पर नहीं लाया लाएगा, वे गुमराह होते रहेंगे और इसका परिणाम कश्मीर को भुगतना पड़ता रहेगा।

RSS नेताओं की हत्या की साजिश में जुटा पाकिस्तान का ISI, ड्रोन के जरिए यूपी में हथियार डिलीवरी का प्लान: जानिए क्या है K-2

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेताओं को मारने की ISI की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। साजिश को अंजाम देने लिए पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ने पंजाब के अपराधियों को मिलाया गया है। हमले के लिए हथियारों को उत्तर प्रदेश ले जा कर डिलीवरी के आदेश भी मिले हैं। हथियारों को ड्रोन के जरिये भेजा जा रहा है। इसके पीछे सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश बताया जा रहा है।

Z न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें यह जानकारी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से मिली है। पंजाब, UP और मणिपुर में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में इन अलर्ट के बाद RSS से जुड़े नेताओं की सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है। से जुड़े जानकारों के मुताबिक संघ से जुड़े नेताओं पर हमले करने के पीछे सबसे बड़ी वजह यह भी हो सकती है कि इससे उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल खराब कर दंगे कराए जा सके। इस तैयारी का मुख्य उद्देश्य साम्प्रदायिक माहौल बना कर दंगे करवाना बताया जा रहा है।

यह रिपोर्ट मैक (मल्टी एजेंसी सेंटर) को भी भेजी गई है। जम्मू कश्मीर के बाद अब ISI पंजाब के कुछ अराजक तत्वों को अपने स्लीपर सेल बनाने में लगी हुई है। इस नेटवर्क में वह पैसे के बदले हथियार भी सप्लाई कर रही है। इस आतंकी प्लान को पाकिस्तान ने K-2 नाम दिया है। ISI की नजर खालिस्तान समर्थको पर है। वो इन्हें अपने एजेंट के रूप में प्रयोग करना चाहती है। इन्हें बाकायदा आतंकी समूहों में भर्ती करवाने की साजिश भी रची जा रही है।

इस समस्या से निबटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय पंजाब में जॉइन्ट काउंटर ऑपरेशन सेंटर स्थापित करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस टीम में NIA, IB और रॉ के साथ पंजाब पुलिस के लोग भी होंगे। सुरक्षा एजेंसियों की मुख्य चिंता चुनावी समय में हो रहीं बड़ी सभाएं हैं। इसमें भीड़ के बीच आतंकी की पहचान करना और साथ में सुरक्षा को सुनिश्चित करने की रणनीति पर सुरक्षा एजेंसियाँ काम भी कर रहीं हैं।इसी सप्ताह BSF ने पंजाब से लगी पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फिरोजपुर में के पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया था।

‘गोवा न भारतीयता को भूला और न भारत गोवा को’: मुक्ति दिवस पर PM मोदी ने शहीदों को याद किया, कहा- पर्रिकर गोवा के सच्चे सपूत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 19 दिसम्बर (रविवार) को गोवा के दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री के पहुँचते ही राज्य के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। पीएम मोदी यहाँ पर आज़ादी के अमृत महोत्सव में शामिल होने पहुँचे हैं। आज गोवा मुक्ति दिवस भी है। आज ही के दिन गोवा को पुर्तगालियों के कब्जे से मुक्त कराया गया था।

आज गोवा के पुर्तगाल से आज़ादी के 60 वर्ष पूरे हुए हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने शहीद स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके साथ ही उन्होंने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “हम गोवा के बहादुर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को कभी नहीं भुला सकते।”

भारत के सशस्त्र बलों द्वारा 19 दिसम्बर 1961 को गोवा को पुर्तगालियों से मुक्त करवाया गया था। तब से हर वर्ष आज के दिन गोवा मुक्ति दिवस मनाया जाता है। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आज दोपहर में पणजी के मीरामार की फ्लाई पास्ट देखी। इसी के साथ वहाँ आयोजित जलयान परेड में भी प्रधानमंत्री ने शिरकत की।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता सेनानियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने गोवा में कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी।

गोवा के डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में मोदी का जोरदार स्वागत किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा, “गोवा एक ऐसे समय में पुर्तगालियों के अधीन आया था, जब देश के दूसरे बड़े भूभाग में मुगलों की सल्तनत थी। सदियों की उठा-पटक के बीच न गोवा कभी अपनी भारतीयता को भूला और न भारत कभी गोवा को भूला। यह एक ऐसा रिश्ता है, जो समय के और सशक्त हुआ है। गोवा मुक्ति का संग्राम एक ऐसी अमर ज्योति है, जो हजारों झंझावातों को झेल कर भी प्रदीप्त रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “वीर शिवाजी और संभाजी के नेतृत्व में मराठाओं के लगातार संघर्ष तक गोवा के लिए लगातार प्रयास हुए। हर किसी के तरफ से हुआ। गोवा से पहले देश आजाद हो चुका था। देश अधिकांश लोगों को अपने अधिकार मिल चुके थे। लेकिन लोगों ने मुक्ति और स्वराज के लिए कभी आंदोलन को थमने नहीं दिया। उन्होंने भारत की आजादी के इतिहास में सबसे लंबे समय तक आजादी की लौ को जलाकर रखा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि भारत मानवता की रक्षा करने वाला विचार है, एक परिवार है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री ने गोवा की स्वतंत्रता संघर्ष में 31 वीरों के बलिदान को याद किया। उन्होंने प्रदेश के दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को गोवा का महान सपूत बताते हुए उन्हें नमन किया और कहा कि उन्होंने अंतिम साँस तक गोवा की तरक्की के लिए प्रयास किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गोवा में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हम वीज़ा नियमों को और अधिक सरल कर रहे हैं। गोवा की सरकार ने भी कई विकास कार्यों को करवाया है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत आज एक बड़े विजन के साथ काम कर रहे हैं। आज गोवा में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। यहाँ टेक्निकल शिक्षा की तरफ छात्रों का रुझान बढ़ा है। गोवा ने मेक इन इंडिया और सबका साथ सबका विकास संकल्प को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।” मोदी ने गोवा को 75 साल स्वतंत्रता के पूरा होने तक एक बड़ा लक्ष्य रखने का आह्वान किया।

बेअदबी नहीं, चोरी करने गया था… गुरुद्वारा में भीड़ ने मार डाला: कपूरथला के SSP ने बताई पूरी बात, दर्ज होगा मर्डर का केस

कपूरथला के निजामपुर गुरुद्वारा (Kapurthala Nizampur Gurudwara) में भीड़ ने जिस युवक का मार डाला, वो चोरी करने आया था… न कि बेअदबी करने। कपूरथला के एसएसपी हरकमलप्रीत सिंह खख ने यह जानकारी दी है।

कपूरथला के एसएसपी हरकमलप्रीत सिंह खख के अनुसार आरोपित युवक (जिसे भीड़ ने मार डाला) ने जो जैकेट पहनी थी, वो गुरुद्वारा के सेवादारों की थी। एसएसपी ने इस तर्क के अलावा मौके पर पहुँच कर गुरुद्वारा में रखे श्री गुरु ग्रंथ साहिब से छेड़छाड़ नहीं होने का भी जायजा लिया।

कपूरथला के एसएसपी हरकमलप्रीत सिंह खख ने बताया कि अभी तक पुलिस ने जो भी जाँच की है, उसके अनुसार मृत युवक के चोरी करने का ही मामला सामने आया है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब से बेअदबी नहीं की गई है। इसलिए आरोपित युवक की हत्या में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया जाएगा।

वीडियो वायरल होने के कारण भीड़ के आगे पुलिस बेबस

“लोगों ने वीडियो वायरल पर वीडियो डाल दी थी। इसके कारण भीड़ जमा हो गई। श्री गुरु ग्रंथ साहिब से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है – पुलिस ने लोगों को यह समझाने की बहुत कोशिश की। लेकिन धार्मिक भावना और गुस्से में लोगों ने युवक की हत्या कर दी। युवक की हत्या करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।”

बच्चों के आईडी कार्ड गले में, वो भी चोरी वाले

गुरुद्वारा में मार डाले गए युवक के गले में से 1-2 आई कार्ड मिले हैं। ये दो बच्चों के आई कार्ड थे, दोनों चोरी हुए थे। मृत युवक इन आईडी कार्ड को अपने गले में डाले हुए था। कपूरथला के एसएसपी हरकमलप्रीत सिंह खख ने बताया कि मृत युवक के पार्थिव शरीर को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

जो जानकारी पहले आ रही थी

कपूरथला में सिख भीड़ ने एक व्यक्ति को गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी का आरोप लगा पीट-पीट कर मार डाला। यह घटना अमृतसर वाली घटना के कुछ ही घंटों बाद रविवार (19 दिसंबर, 2021) को हुई। गाँव वालों का कहना था कि उसने ‘निशान साहिब (सिख ध्वज)’ की बेअदबी की है।

आरोपित को मारने से पहले वहाँ की भीड़ का कहना था कि वो आरोपित को पुलिस को नहीं सौंपेंगे। निजामपुर के ग्रामीणों ने सिख संगठनों को इस मामले में बुलाया था और उनके द्वारा ही फैसला करने की बात कह रहे थे।

2 दिन में ₹116 करोड़ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के साथ अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा’ ने मचाया धमाल, 2021 की सारी बॉलीवुड फ़िल्में पीछे

अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ ने वर्ल्ड वाइड बॉक्स ऑफिस पर मात्र 2 दिनों में 100 करोड़ रुपए से अधिक का कलेक्शन कर के धमाल मचा दिया है। फिल्म ने जहाँ पहले दिन 57.83 करोड़ बटोरे, वहीं दूसरे दिन फिल्म ने 36.79 करोड़ रुपए की कमाई की। अन्य कलेक्शंस मिला दें तो इस तरह से मात्र दो दिनों में अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 100 करोड़ के पार पहुँच गया है। ट्रेड एनालिस्ट रमेश बाला ने इसकी पुष्टि की है।

फिल्म समीक्षकों ने अंदाज़ा लगाया है कि रविवार को छुट्टियाँ होने के कारण फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और बढ़ सकता है। आगे क्रिसमस की छुट्टियाँ भी हैं, ऐसे में सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। हॉलीवुड की फिल्म ‘स्पाइडर मैन: नो वे होम’ भी इसके साथ ही रिलीज हुई है और उससे ‘पुष्पा’ को कड़ी टक्कर मिल रही है, लेकिन इसके बावजूद इसका बॉक्स ऑफिस कलेक्शंस शानदार रहा है। फिल्म ने अक्षय कुमार की ‘सूर्यवंशी’ के रिकार्ड्स भी तोड़ दिए हैं।

न सिर्फ बॉक्स ऑफिस, बल्कि अपने साथी फ़िल्मी हस्तियों से भी इस फिल्म के लिए अल्लू अर्जुन को काफी प्रशंसा मिल रही है। उन्होंने ये भी बताया है कि इस फिल्म में उनके किरदार में सुपरस्टार रजनीकांत का भी प्रभाव है। अब जब फिल्म ने मात्र 2 दिनों में 116 करोड़ रुपए से भी अधिक का कारोबार कर लिया है, इसने अमेरिका में भी 1.3 मिलियन डॉलर (9.88 करोड़ रुपए) का कलेक्शन कर लिया है। फिल्म में सामंथा का आइटम नंबर भी काफी पसंद किया जा रहा है।

दक्षिण के सिनेमा में इतिहास बना चुकी प्रभाष की फिल्म ‘बाहुबली 2’ पहले दिन 100 करोड़ रुपए की कमाई करने में कामयाब हुई थी। ऐसे में 200 करोड़ के बजट में बनी ‘पुष्पा’ का 450 करोड़ रुपए के बजट में बनी ‘बाहुबली 2’ को पीछे छोड़ना सपने जैसा होगा। भव्यता और कमाई के मामले में एसएस राजमौली की फिल्म भारत में बनने वाली सर्वाधिक बजट की फिल्मों के लिए एक बेंचमार्क है, जिसने हर आयु वर्ग के लोगों को अपना दीवाना बनाया। ‘बाहुबली 2’ की दमदार कहानी, शानदार अभिनय, बेहतरीन गाने और जबरदस्त डायलॉग आज भी दर्शकों को दिलों-दिमाग पर छाए हुए हैं।

शादी के बाद कैटरीना कैफ ने की पूजा, नए घर में गृह प्रवेश के लिए पहुँचे विक्की के मम्मी-पापा भी: देखें VIDEO

बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ ने शादी के बाद अपने पति विक्की कौशल के साथ नए घर में प्रवेश किया है। इसके पहले घर में गृह प्रवेश की पूजा गई, जहाँ उनके परिजन भी मौजूद रहे। नवदंपत्ति ने मुंबई के जुहू में यह मकान लिया है। गृह प्रवेश रविवार (19 दिसम्बर) को होना बताया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक पंडित को घर में जाते देखा जा सकता है। इसी के बाद पूजा और गृह प्रवेश का अनुमान लगाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम के बाद उनके परिजनों को कार से बाहर निकलते देखा गया। वीडियो में विक्की के माता-पिता कार की पिछली सीट पर बैठे थे। विक्की के पिता ने सफेद शर्ट पहन रखी थी। विक्की की माँ ने पीले रंग की सलवार कमीज पहनी थी।

ET टाइम्स की एक खबर के मुताबिक, कैटरीना और विक्की मिल कर पहली बार एक कमर्शियल वीडियो की शूटिंग करने जा रहे हैं। यह वीडियो स्वास्थ्य उत्पादों से संबंधित है। इसी के साथ कैटरीना कैफ की टाइगर 3 की शूटिंग भी जल्द होगी। इस फिल्म में अभिनेता सलमान खान हैं।

बेंगलुरु में शो रद्द, अब कोलकाता में परफॉर्म करेंगे कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी, ₹799 का टिकट: इससे पहले किया था कॉमेडी छोड़ने का ऐलान

हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाने वाले कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में नए शो की घोषणा की है। हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने वाले स्टैंडअप कॉमेडियन को पिछले महीने बेंगलुरु में शो कैंसल करना पड़ा था। हिन्दू संगठनों के विरोध के कारण उन्हें पिछले कुछ शो को कैंसल करना पड़ा था। हालाँकि, अब जनवरी 2021 में कोलकाता में उनका शो प्रस्तावित है। तेलंगाना सरकार में मंत्री KTR ने उन्हें हैदराबाद में भी शो करने के लिए आमंत्रित किया है।

मुनव्वर फारुकी ने शनिवार (18 दिसंबर, 2021) को सोशल मीडिया के जरिए ये घोषणा की। ‘धंधो (Dhandho)’ नाम के इस 2 घंटे के शो के लिए टिकट भी बुक होने शुरू हो गए हैं। ये शो 16 जनवरी, 2021 को होगा। ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म ‘BookMyShow’ के अनुसार, टिकट के दाम 799 रुपए रखे गए हैं और ये जल्दी-जल्दी बिक रही है। इससे पहले बेंगलुरु में 600 टिकट बिकने के बावजूद 29 वर्षीय कॉमेडियन को अपना शो कैंसल करना पड़ा था।

मुनव्वर फारुकी ने दावा किया है कि उनके 12 शो कैंसल करने पड़े हैं। उन्होंने कॉमेडी शोज न करने की भी एक तरह से घोषणा कर दी थी। उन्होंने लिखा था, “मेरा नाम मुनव्वर फारुकी है। और अब समय हो गया है, आप सब एक अच्छे ऑडिएंस थे। गुड बाय। अब मेरा हो गया।” इसके बाद बहुतों ने अंदाज़ा लगाया था कि मुनव्वर फारुकी ने कॉमेडी करियर को अलविदा कह दिया है। इंदौर में उनके खिलाफ एक FIR भी दर्ज की गई थी और हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप लगे थे।

इससे पहले तेलंगाना (Telangana) के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के बेटे और राज्य के नगर प्रशासन और शहरी विकास मंत्री केटी रामाराव (KT Rama Rao) ने विवादास्पद एवं कथित स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी और कुणाल कामरा के बेंगलुरु में शो रद्द होने बाद उन्हें हैदराबाद आकर शो करने का निमंत्रण दिया। रामाराव (केटीआर) ने कहा, “हम हैदराबाद में अभी कॉमेडियन्स का स्वागत करते हैं। वे यहाँ आकर परफॉर्मेंस दे सकते हैं। शो कर सकते हैं। राज्य सरकार बहुत सहिष्णु (very tolerant) है।”

‘टैलेंट का कोई धर्म नहीं होता’: इमरान हाशमी संग किसिंग सीन पर पाकिस्तानी अभिनेत्री हुमैमा खान, बोली- फैसला ले लिया तो ले लिया

भारतीय अभिनेता इमरान हाशमी के साथ एक किसिंग सीन के बाद सोशल मीडिया में आ रहे रिएक्शन पर पाकिस्तानी अभिनेत्री हुमैमा मलिक ने जवाब दिया है। हुमैमा ने कहा है, “मेरी पहली फिल्म का नाम ‘बोल’ था। उस फिल्म में मेरा रोल ऐसी महिला का था, जो अपना घूँघट भी नीचे नहीं कर सकती थी। इसके बाद अगली फिल्म में मुझे अपने सहयोगी अभिनेता के साथ किसिंग सीन करना पड़ा। इसके लिए मैंने खुद को काफी मजबूत किया था। मेरा मानना है कि टैलेंट का कोई धर्म नहीं होता। वह बस एक रोल था।”

अपने बयान में हुमैमा ने आगे कहा, ‘मैं हमेशा से एक बिंदास लड़की रही हूँ। मैं सब कुछ अपने दम पर करती आई हूँ। 14 साल की उम्र से ही मैंने काम शुरू कर दिया था। मुझे अपने परिवार सँभालना था। इस सीन को करने का मैंने एक बार फैसला ले लिया तो दोबारा उस पर विचार नहीं किया।”

34 वर्षीया पाकिस्तानी अदाकारा हुमैमा ने आगे बताया, “जब मैंने एक बार डांसर का रोल किया था, तब मेरे खिलाफ लोगों में बहुत गुस्सा था। मैंने इस रोल के लिए काफी तैयारी की थी। यह पाकिस्तान की संस्कृति के खिलाफ है। इस रोल को करने से पहले फिल्म के डायरेक्टर मुझे कई बारों में ले गए थे। वहाँ मैंने बार डांसरों के हाव-भाव देखे। यह एक बेहद कठिन काम है। मेरे मन में उन डांसरों के लिए भी काफी सम्मान है।”

गौरतलब है कि साल 2014 में इमरान हाशमी के साथ हुमैमा मलिक ने फिल्म ‘राजा नटवरलाल’ में काम किया था। इस फिल्म में इन दोनों के अलावा परेश रावल, दीपक तिजोरी और प्राची शाह जैसे कलाकार थे। उस समय फिल्म के एक किसिंग सीन पर कुछ लोगों ने एतराज जताया था।

‘#@ला सत्यनारायण भगवान का नाम भी नहीं सुने थे, ब्राह्मण ह₹!मी आकर माँगते हैं पैसा’: पूर्व CM जीतन राम माँझी का वीडियो वायरल

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी ने सत्यनारायण कथा को भला-बुरा कहते हुए ब्राह्मणों के लिए गालियों का प्रयोग किया है। बता दें कि ‘हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM)’ के संस्थापक जीतन राम माँझी की पार्टी बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राज्य सरकार में साझीदार है। माँझी के बेटे संतोष सुमन बिहार सरकार में सिंचाई के साथ-साथ SC-ST कल्याण विभाग में मंत्री हैं। बिहार में उनकी पार्टी के 4 विधायक हैं, जिसमें खुद माँझी ने इमामगंज से जीत दर्ज की थी।

अब उनका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, जिस पर लोग कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसमें वो कहते हैं, “1956 में मरने से पहले बाबा आंबेडकर मरने से पहले हिन्दू धर्म में नहीं थे। वो बौद्ध धर्म में गए, फिर उनकी मृत्यु हुई। उन्होंने कहा था कि हिन्दू धर्म कई खराब धर्म है। माफ़ कीजिएगा, आजकल हमारे गरीब तबके में भी धर्म की परायणता ज्यादा आ रही है। सत्यनारायण पूजा का नाम हमलोग नहीं जानते थे, लेकिन आजकल ‘%%ला’ हमारे टोले में हर जगह सत्यनारायण भगवान की पूजा होती है।”

माँझी ने आगे कहा, “इतना भी शर्म-लाज नहीं लगता हमलोगों का कि पंडित ‘ह₹!मी’ आते हैं और कहते हैं कि हम खाना नहीं खाएँगे, हमें नकद दक्षिणा ही दे दीजिए।” उन्होंने एक कार्यक्रम में सार्वजनिक मंच से इस तरह की भाषा का प्रयोग किया। जबकि वहाँ मौजूद लोग उनके इस भाषण पर आपत्ति जताने की बजाए तालियाँ बजाते रहे। जीतन राम माँझी की पार्टी बिहार में सत्ताधारी राजग गठबंधन का हिस्सा है। हाल ही में शराबबंदी को लेकर भी उन्होंने कहा था कि दलित समाज को इसका दंश झेलना पड़ रहा, जबकि 60% बड़े लोग रात में शराब पीते हैं।

HAM पार्टी भी अब डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान का कहना है कि माँझी के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जीतन राम माँझी का वो मतलब नहीं था, बल्कि वो तो ये कहना चाह रहे थे कि ब्राह्मण दलित के घर में जाते हैं और उनके यहाँ खाना नहीं खाते, लेकिन पैसे लेते हैं। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक मिथिलेश तिवारी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि माँझी सठिया गए हैं।

उन्होंने HAM सुप्रीमो से इस बयान को लेकर तत्काल सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगने की माँग करते हुए कहा कि ऐसा न होने पर ब्राह्मण समाज आगे आंदोलन करेगा और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी इस बयान को दुखद बताते हुए कहा कि ये भारतीय संविधान के मूल से बिलकुल अलग है और किसी समाज को इस तरह से आहत करना गलत है। इससे पहले माँझी श्रीराम को काल्पनिक और वाल्मीकि को उनसे ‘कई गुना बड़ा संत’ बता चुके हैं।

हालाँकि, बयान पर विवाद और वीडियो वायरल होने के बाद जीतन राम माँझी ने माफ़ी माँगते हुए कहा है कि उन्होंने उस शब्द का प्रयोग अपने समाज के लिए किया था, ब्राह्मणों के लिए नहीं। बिहार के सड़क एवं परिवहन मंत्री और भाजपा नेता नितिन नबीन सिन्हा ने माँझी को वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि वो ऐसे विवादित बयान न दें। राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि भाजपा-RSS की गोद में बैठ कर उनकी भाषा ऐसी हो गई है। ‘राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा, परशुराम सेवा संस्थान’ के प्रवक्ता रजनीश कुमार तिवारी ने इस बयान के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।

‘शौहर का पहली बीवी से समान व्यवहार नहीं करना कुरान के खिलाफ, मुस्लिम महिलाओं के लिए यह तलाक का आधार’: केरल HC

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में कुरान का हवाला देते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जिस महिला का शौहर दूसरा निकाह करता है और पहली बीवी को समान अधिकार देने में विफल रहता है, तो उस महिला को इस आधार पर तलाक मिलना चाहिए।

जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक और जस्टिस सोफी थॉमस की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, “पहली बीवी के साथ वैवाहिक संबंधों को निभाने से इनकार करना कुरान के खिलाफ है, जो पहली बीवी के साथ समान व्यवहार पर जोर देता है। यदि शौहर एक से अधिक निकाह करता है तो ऐसी परिस्थितियों में भी उसे पहली बीवी को सभी अधिकार देने होंगे। वह इससे इनकार नहीं कर सकता। अगर इसका उल्लंघन होता है तो महिला को इस आधार पर तलाक लेने का अधिकार है।”

अदालत ने आगे कहा कि मुस्लिम तलाक अधिनियम की धारा 2 (8) (F) के अनुसार, महिला को तलाक की अनुमति तब दी जानी चाहिए, जब शौहर दूसरा निकाह होने के बाद पहली बीवी की उपेक्षा कर रहा हो। वह कुरान के नियमों का पालन नहीं कर रहा हो। ऐसे शौहर द्वारा याचिकाकर्ता को दो साल से ज्यादा समय तक संरक्षण नहीं देना तलाक देने के लिए पर्याप्त आधार है।

अदालत ने यह फैसला थालास्सेरी (Thalassery) की रहने वाली एक मुस्लिम महिला की याचिका पर सुनाया है, जिसमें उसने अपने शौहर से तलाक की माँग की थी। उसका कहना है कि उसके शौहर ने दूसरा निकाह किया है और वह उससे अलग रहता है। थालास्सेरी फैमिली कोर्ट में उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद उसने इस मामले को केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

उस व्यक्ति ने याचिकाकर्ता से वर्ष 1991 में निकाह किया था, जिससे उसके तीन बच्चे भी हैं। महिला ने 2019 में तलाक के लिए याचिका दायर की थी। वह 2014 से अपने पति से अलग रह रही है। तलाक के लिए महिला ने अपनी याचिका में मुस्लिम मैरिज एक्ट 1939 की धारा 2(ii), 2(iv) और 2(viii) के तहत तलाक लेने का आधार बताया था। दलीलों के दौरान धारा 2(viii)(f) का भी इस दौरान उल्लेख किया गया था।

वहीं, महिला के शौ​हर का दावा है कि इस अवधि के दौरान वह उसे सहायता प्रदान करता रहा है। हालाँकि, अदालत ने इस तथ्य को सर्वोपरि माना है कि वे सालों से अलग रह रहे हैं, जो यह दिखाता है कि पहली बीवी के साथ उसके द्वारा समान व्यवहार नहीं किया जाता है। पहली बीवी के साथ नहीं रहना और अपने वैवाहिक कर्तव्यों को पूरा करने में विफल रहना कुरान में कही गई बातों का उल्लंघन है, जिसके आधार पर केरल हाईकोर्ट ने पहली बीवी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे तलाक देने को कहा है।