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कोविड पॉजिटिव हुईं करीना कपूर खान और अमृता अरोड़ा, कोरोना दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर जम के कर रही थी पार्टियाँ

बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान और अमृता अरोड़ा कोरोना पॉजिटिव पाई गई हैं। इन दोनों ने पिछले दिनों कोरोना दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर के कई पार्टियाँ अटेंड की थी। अब आपस में ‘बेस्ट फ्रेंड्स’ मानी जाने वाली इन दोनों ही अभिनेत्रियों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। अब ‘बृहन्मुम्बई महानगरपालिका (BMC)’ ने इन दोनों के संपर्क में आने वाले सभी लोगों को निर्देश दिया है कि वो RT-PCR टेस्ट कराएँ। करीना कपूर खान और अमृता अरोड़ा अक्सर साथ में देखी जाती हैं।

हालाँकि, इस सम्बन्ध में दोनों अभिनेत्रियों ने कुछ आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। पिछले दिनों दोनों ने कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स साझा किए थे, जिसमें ‘गर्ल गैंग’ की पार्टी हो रही थी। इन पार्टियों में दोनों साथ दिखाई दी थीं। बता दें कि करीना कपूर इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ को लेकर भी व्यस्त हैं, जिसमें आमिर खान मुख्य अभिनेता हैं। फरवरी 2021 में ही करीना कपूर ने अपने दूसरे बच्चे को भी जन्म दिया। गर्भ-धारण पर उनकी एक पुस्तक भी बाजार में आई है।

इसी तरह पिछले महीने अभिनेता अमित साध कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर अपने क्वारंटाइन होने की बात बताई थी। इसी तरह दक्षिण के बड़े अभिनेता कमल हासन हाल ही में कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के बाद उन्हें कुछ ही दिनों पहले छुट्टी मिली है। काजोल की बहन तनीषा मुखर्जी के भी कोरोना पॉजिटिव होने की खबर आई थी। करीना कपूर ने हाल ही में अपने एक अनाम प्रोजेक्ट के लिए एकता कपूर और हंसल मेहता से भी हाथ मिलाया है।

जहाँ तक ‘कितने दूर, कितने पास (2002)’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाली अमृता अरोड़ा की बात है, उन्हें पिछली बार ‘कुछ तो है तेरे-मेरे दरमियाँ (2015-16)’ नामक टीवी सीरियल में देखा गया था। 2009 में ‘एक थो चांस’ के बाद से वो किसी भी फिल्म में दिखाई नहीं दी हैं। MTV में बतौर VJ अपना करियर शुरू करने वाली अमृता अरोड़ा ने 2009 में शकील लडक से शादी (पहले ईसाई विवाह, फिर निकाह) की थी। अज़ान और रेयान नामक उनके दो बेटे भी हैं।

नेहरू के नाम पर यूनिवर्सिटी है तो वैक्सीन सर्टिफिकेट पर PM मोदी की तस्वीर से क्या दिक्कत: केरल HC

केरल हाईकोर्ट में पिछले दिनों एक याचिका दायर की गई थी जिसमें इस बात की शिकायत थी कि आखिर को-विन सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो क्यों दिखती है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पी वी कुन्हीकृष्णन ने पूछा कि आखिर एक सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की फोटो होने से क्या दिक्कत है। कोर्ट ने कहा कि जब जवाहर लाल नेहरू के नाम पर यूनिवर्सिटी हो सकती है तो वैक्सीन सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की फोटो होना क्यों गलत है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अजीत जॉय ने दलील दी कि पर्सनल वैक्सीन सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की फोटो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसके साथ ही पीएम मोदी की फोटो मतदान के उनके स्वतंत्र विकल्प का उल्लंघन है। इन दलीलों को सुनने के बाद जज ने कहा, “मुझे समझ नहीं आ रहा… हमें अपने पीएम पर गर्व करना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “वह हमारे प्रधामंत्री हैं, किसी और देश के प्रधानमंत्री नहीं। उन्हें हमारे वोटों से सत्ता मिली है। सिर्फ इसलिए क्योंकि राजनीतिक मतभेद हैं, आप इसे चुनौती नहीं दे सकते… आपको पीएम पर शर्म क्यों आती है? 100 करोड़ लोगों को इससे समस्या नहीं है तो आपको क्यों है। हर किसी के अलग राजनीतिक मत होते हैं, लेकिन फिर भी वो हमारे पीएम हैं। आप न्यायपालिका का समय बर्बाद कर रहे हैं।”

जब याचिकाकर्ता ने ये दलील दी कि दूसरे देश के वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर कोई तस्वीर नहीं है तब जज ने कहा, “शायद उन्हें अपने पीएम पर गर्व नहीं होगा, लेकिन हमें हैं। आपको गर्व करना चाहिए कि वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर पीएम की फोटो है।” इस पर याचिकाकर्ता ने कहा, “कोई गर्व करेगा या नहीं ये उसकी निजी इच्छा है।”

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी का उदाहरण दिया और कहा कि आप पीएम के नाम वाले संस्थान में काम करते हैं। आखिर आप यूनिवर्सिटी से नाम हटाने को क्यों नहीं कहते। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सारे सवाल-जवाब के बाद कहा कि वह खुले दिमाग से दलीलों को विस्तार से पढ़ेगा और तय करेगा कि क्या इस मामले में कोई गुंजाइश है।

गंगा में ‘अलकनंदा क्रूज’ से संत रविदास घाट तक पहुँचे PM मोदी और CM योगी: अहिल्याबाई और आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पर चढ़ाए पुष्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी में गंगा नदी में ‘अलकनंदा क्रूज’ में सवार होकर भ्रमण किया। इस दौरान आसपास हजारों की संख्या में पक्षी विचरण कर रहे थे। पीएम मोदी ने इस दौरान हाथ हिला कर लोगों का अभिवादन भी स्वीकार किया। ललिता घाट से ‘अलकनंदा क्रूज’ चली, जो धीरे-धीरे गंगा घाट की तरफ आगे बढ़ी। इस दौरान घाटों की हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। अस्सी और मणिकर्णिका से लेकर दशाश्वमेव तक, वाराणसी में कई घाट हैं।

आधे घंटे से भी अधिक समय तक दोनों नेताओं ने ‘अलकनंदा क्रूज’ में यात्रा की। इस दौरान वहाँ सुरक्षा व्यवस्था भी काफी कड़ी रही। बता दें कि अब तक कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी का दौरा किया है। उन्होंने गंगा में घूमते हुए ही आसपास के विकास परियोजनाओं का भी अवलोकन किया और उनके बारे में जाना। वीडियो में आप देख सकते हैं कि गंगा नदी का पानी भी काफी स्वच्छ नजर आ रहा है। ‘अलकनंदा क्रूज’ से दोनों ही नेता संत रविदास घाट पर पहुँचे।

बता दें कि संत रविदास ने ही ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ वाली कहावत कही थी।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर का उद्घाटन: जानिए दिन भर क्या-क्या हुआ

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में कई विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर भी पुष्प अर्पित की, जिनका वाराणसी के जीर्णोद्धार में अहम योगदान था। वाराणसी में नए कॉरिडोर के तहत कई भवन बनाए गए हैं, जिनका पीएम मोदी ने निरीक्षण किया। पीएम मोदी ने पूरे परिसर का दौरा किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पर भी श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। ये प्रतिमा मंदिर परिसर में गंगा नदी के पास स्थापित की गई है। यहाँ आदि शंकराचार्य, भारत माता और अहिल्याबाई होल्कर – ये तीन प्रतिमाएँ हैं। आदिगुरु की ‘गंगा स्तुति’ काफी लोकप्रिय है। कहते हैं भगवान शिव ने उन्हें काशी में दर्शन देकर केदारनाथ जाने को कहा था। ऊपर से पीएम मोदी ने गंगा नदी तट का अवलोकन किया। दिव्यांगों के दर्शन के लिए अलग से एस्कलेटर बनेंगे।

इस दौरान आसपास अपने-अपने छतों पर खड़े लोग भी उन्हें देख रहे थे। इसके बाद पीएम मोदी अपनी गाड़ी से ललिता घाट की तरफ पहुँचे। इसके बाद उन्होंने लंका घाट से अलकनंदा क्रूज की तरफ प्रस्थान किया। ये वो जगह है, जहाँ माँ गंगा उत्तरवाहिनी, अर्थात अर्ध-चंद्राकर हो जाती है। कहा जाता है कि गंगासागर में जाने से पहले भगवान शिव से मिलने के लिए माँ गंगा ने ऐसा किया। वीडियो में ऊपर आप इन नए निर्माणों को देख सकते हैं। पीएम मोदी ने इससे पहले श्रम साधकों के साथ बैठ कर प्रसाद भी ग्रहण किया।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ मौजूद साधु-संतों, नेताओं और आम जनता को सम्बोधित करते हुए कहा कि वो हमारे कारीगर, हमारे सिविल इंजीनयरिंग से जुड़े लोग, प्रशासन के लोग, वो परिवार जिनके यहाँ घर थे सभी का मैं अभिनंदन करते हैं। उन्होंने इन सबके साथ यूपी सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम परियोजना को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे आततायियों ने इस नगरी पर आक्रमण किए, इसे ध्वस्त करने के प्रयास किए! औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। उन्होंने कहा कि जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की, जिसने संस्कृति को कट्टरता से कुचलने की कोशिश की! लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है। बकौल पीएम मोदी, यहाँ अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं! अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारी एकता की ताकत का अहसास करा देते हैं। और अंग्रेजों के दौर में भी, हेस्टिंग का क्या हश्र काशी के लोगों ने किया था, ये तो काशी के लोग जानते ही हैं।

उन्होंने कहा, “काशी शब्दों का विषय नहीं है, संवेदनाओं की सृष्टि है। काशी वो है- जहाँ जागृति ही जीवन है! काशी वो है- जहाँ मृत्यु भी मंगल है! काशी वो है- जहां सत्य ही संस्कार है! काशी वो है- जहाँ प्रेम ही परंपरा है।बनारस वो नगर है जहाँ से जगद्गुरु शंकराचार्य को श्रीडोम राजा की पवित्रता से प्रेरणा मिली, उन्होंने देश को एकता के सूत्र में बांधने का संकल्प लिया। ये वो जगह है जहाँ भगवान शंकर की प्रेरणा से गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस जैसी अलौकिक रचना की।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “यहीं की धरती सारनाथ में भगवान बुद्ध का बोध संसार के लिए प्रकट हुआ। समाजसुधार के लिए कबीरदास जैसे मनीषी यहाँ प्रकट हुए। समाज को जोड़ने की जरूरत थी तो संत रैदास जी की भक्ति की शक्ति का केंद्र भी ये काशी बनी। काशी अहिंसा, तप की प्रतिमूर्ति चार जैन तीर्थंकरों की धरती है। राजा हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा से लेकर वल्लभाचार्य, रामानंद जी के ज्ञान तक चैतन्य महाप्रभु, समर्थगुरु रामदास से लेकर स्वामी विवेकानंद, मदनमोहन मालवीय तक कितने ही ऋषियों, आचार्यों का संबंध काशी की पवित्र धरती से रहा है।”

पीएम मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के चरण यहाँ पड़े थे। रानी लक्ष्मी बाई से लेकर चंद्रशेखर आज़ाद तक, कितने ही सेनानियों की कर्मभूमि-जन्मभूमि काशी रही है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद, मुंशी प्रेमचंद, पंडित रविशंकर, और बिस्मिल्लाह खान जैसी प्रतिभाओं को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस स्मरण को कहाँ तक ले जाया जाए। पीएम मोदी ने वाराणसी में कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण, भारत को एक निर्णायक दिशा देगा, एक उज्जवल भविष्य की तरफ ले जाएगा। ये परिसर, साक्षी है हमारे सामर्थ्य का, हमारे कर्तव्य का। अगर सोच लिया जाए, ठान लिया जाए, तो असंभव कुछ भी नहीं।

बकौल पीएम मोदी, हर भारतवासी की भुजाओं में वो बल है, जो अकल्पनीय को साकार कर देता है। हम तप जानते हैं, तपस्या जानते हैं, देश के लिए दिन रात खपना जानते हैं। चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, हम भारतीय मिलकर उसे परास्त कर सकते हैं। आज का भारत अपनी खोई हुई विरासत को फिर से सँजो रहा है। यहां काशी में तो माता अन्नपूर्णा खुद विराजती हैं। उन्होंने खुशी जताई कि काशी से चुराई गई माँ अन्नपूर्णा की प्रतिमा, एक शताब्दी के इंतजार के बाद अब फिर से काशी में स्थापित की जा चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लिए जनता जनार्दन ईश्वर का ही रूप है, हर भारतवासी ईश्वर का ही अंश है, इसलिए वो कुछ माँगना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने लिए नहीं, हमारे देश के लिए तीन संकल्प चाहते हैं- स्वच्छता, सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लिए निरंतर प्रयास। उन्होंने कहा कि गुलामी के लंबे कालखंड ने हम भारतीयों का आत्मविश्वास ऐसा तोड़ा कि हम अपने ही सृजन पर विश्वास खो बैठे। पीएम मोदी ने कहा, “आज हजारों वर्ष पुरानी इस काशी से, मैं हर देशवासी का आह्वान करता हूँ- पूरे आत्मविश्वास से सृजन करिए, इनोवेट करिए, इनोवेटिव तरीके से करिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “तीसरा एक संकल्प जो आज हमें लेना है, वो है आत्मनिर्भर भारत के लिए अपने प्रयास बढ़ाने का। ये आजादी का अमृतकाल है। हम आजादी के 75वें साल में हैं। जब भारत सौ साल की आजादी का समारोह बनाएगा, तब का भारत कैसा होगा, इसके लिए हमें अभी से काम करना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान वहाँ मौजूद लोगों को सम्बोधित किया। उन्होंने इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के भव्य स्वरूप को जनता को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभी मैं बाबा के साथ साथ नगर कोतवाल कालभैरव जी के दर्शन करके भी आ रहा हूँ, देशवासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूँ। काशी में कुछ भी खास हो, कुछ भी नया हो, उनसे पूछना आवश्यक है। मैं काशी के कोतवाल के चरणों में भी प्रणाम करता हूँ।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पुराणों में कहा गया है कि जैसे ही कोई काशी में प्रवेश करता है, सारे बंधनों से मुक्त हो जाता है। भगवान विश्वेश्वर का आशीर्वाद, एक अलौकिक ऊर्जा यहाँ आते ही हमारी अंतर-आत्मा को जागृत कर देती है उन्होंने कहा कि आप यहाँ जब आएंगे तो केवल आस्था के दर्शन नहीं करेंगे। आपको यहाँ अपने अतीत के गौरव का अहसास भी होगा। कैसे प्राचीनता और नवीनता एक साथ सजीव हो रही हैं, कैसे पुरातन की प्रेरणाएँ भविष्य को दिशा दे रही हैं, इसके साक्षात दर्शन विश्वनाथ धाम परिसर में हम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने काशी में मौजूद साधु-संतों और लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्वनाथ धाम का ये पूरा नया परिसर एक भव्य भवन भर नहीं है, ये प्रतीक है, हमारे भारत की सनातन संस्कृति का! ये प्रतीक है, हमारी आध्यात्मिक आत्मा का! ये प्रतीक है, भारत की प्राचीनता का, परम्पराओं का! भारत की ऊर्जा का, गतिशीलता का। उन्होंने कहा कि पहले यहाँ जो मंदिर क्षेत्र केवल तीन हजार वर्ग फीट में था, वो अब करीब 5 लाख वर्ग फीट का हो गया है। अब मंदिर और मंदिर परिसर में 50 से 75 हजार श्रद्धालु आ सकते हैं। यानि पहले माँ गंगा का दर्शन-स्नान, और वहाँ से सीधे विश्वनाथ धाम।

पीएम मोदी ने कहा, “काशी तो काशी है! काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है। जहां गंगा अपनी धारा बदलकर बहती हों, उस काशी को भला कौन रोक सकता है? आज भगवान शिव का प्रिय दिन सोमवार है। आज विक्रम संवत 2078 मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, एक नया इतिहास रच रही है। हमारा सौभाग्य है कि हम इस तिथि के साक्षी बन रहे हैं। मैं आज अपने हर उस श्रमिक भाई-बहन का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिसका पसीना इस भव्य परिसर के निर्माण में बहा है। कोरोना के विपरीत काल में भी, उन्होंने यहां पर काम रुकने नहीं दिया। मुझे अभी अपने इन श्रमिक साथियों से मिलने का, उनका आशीर्वाद लेने का सौभाग्य मिला है।”

उन्होंने कहा, “जब मैं बनारस आया था तब एक विश्वास लेकर आया था, विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों पर था। आज हिसाब-किताब का समय नहीं है। तब कुछ ऐसे लोग भी थे जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे कि कैसे होगा, नहीं होगा, ये मोदी जी जैसे बहुत आकर गए। मुझे बहुत आश्चर्य होता था, लेकिन ये जड़ता बनारस की नहीं थी, वो राजनीति थी। लेकिन काशी तो, काशी है। काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है। जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है।”

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व का सबसे लोकप्रिय नेता बताया। उन्होंने ‘नमामि शमीशान निर्वाण रूपं’ के साथ अपनी बात की शुरुआत की। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश धर्म के अलावा राज्यपाल आनंदबेन पटेल भी मौजूद थीं। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि आज माँ गंगा प्रफुल्लित हैं, काशी के कोतवाल भैरव आह्वादित हैं और बाबा विश्वनाथ की कृपा हम पर बरस रही है।

उन्होंने कहा कि ये काशी का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहाँ से सांसद बना कर भेजा गया। उन्होंने कहा कि सभी संत प्रधानमंत्री नरेंद्र के स्वागत के लिए आह्वादित हैं, क्योंकि हजारों वर्ष की तपस्या आज सच हो रही है। उन्होंने कहा कि 1777-80 के बीच में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने बाबा विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में योगदान दिया, महाराजा रंजीत सिंह ने भी इसके लिए काम किया और आज पूज्य संत जनों ने आज अपनी आँखों से इसे भव्य और दिव्य बनते हुए देखा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ककाशी विश्वनाथ मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद परिसर में पौधारोपण किया। बता दें कि हिन्दू धर्म में वनस्पति को देवी मानते हैं। इसके बाद पीएम मोदी ने उन श्रमजीवियों पर पुष्प वर्षा की, जिनकी मेहनत से काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण संपन्न हुआ है। उन श्रमिकों को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं भूले और उनसे बातें की। उन पर फूल बरसाए। साथ ही उनमें से कइयों से बात कर के हालचाल और नाम-पता भी पूछा।

इसके बाद उन्होंने सभी श्रमिकों के साथ बैठ कर फोटो भी खिंचवाई। इस दौरान हर-हर महादेव का उद्घाटन होता था। इस दौरान पुरोहितों ने उन्हें भेंट भी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ धाम मंदिर का एक स्वरूप भी उन्हें भेंट किया।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे। गंगा में डुबकी लगाने के बाद उन्होंने कलश में जल भरा, जिसके बाद मंदिर पहुँच कर आचार्यों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से काशी विश्वेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने गंगाजल, बेलपत्र और पुष्प लेकर पूजा-अर्चना की। जहाँ पुरोहित घंटी बजा रहे थे, वहीं पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ की आरती की। इस दौरान विश्व के कल्याण के लिए भी प्रार्थना की गई।

काशी में भगवा विश्वनाथ धाम कॉरिडोर में वहाँ के लोगों का भी कम योगदान नहीं है। वहाँ निर्माण के दौरान लगभग 500-600 घर हटाने पड़े, जिसके लिए लोगों ने स्वेच्छा से योगदान दिया और कोई केस-मुकदमा के बिना ही ये कार्य सफल हुआ। इसके उद्घाटन के लिए सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा की पूजा की। इसके बाद वो कपड़े बदल कर कलश में जल लेकर विश्वनाथ मंदिर पहुँचे, जहाँ जलाभिषेक किया।

जलाभिषेक के लिए जाते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुर्ता-धोती पहन रखी थी और एक गमछा रखा हुआ था। इस दौरान डमरू बजाते हुए पुरोहितों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान लगातार भक्ति गाने बज रहे थे और मंत्रोच्चार हो रहा था। इस दौरान सुरक्षा की काफी कड़ी व्यवस्था है और आसपास के सभी ऊँची जगहों पर पुलिस तैनात थी। बाबा विश्वनाथ धाम मंदिर में आचार्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भगवान शिव की पूजा संपन्न कराई।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा में डुबकी लगाई और जलाभिषेक किया। इस दौरान पीएम मोदी को लाल वस्त्रों में नदी में डुबकी लगा कर मंत्रोच्चार करते हुए देखा गया। इस दौरान उन्होंने अपने हाथों में माला और लोटा ले रखा था। इसके बाद पीएम मोदी ने मंदिर में जाकर अंजलि दी। मुख्य मंदिर परिसर में नया गलियारा बनाया गया है, जहाँ दीवारों में भगवा शिव से सम्बंधित श्लोक और इतिहास लिखा हुआ है।

इस दौरान पूरे काशी को सजाया गया है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग वहाँ उपस्थित थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उत्तर प्रदेश मत्रिमंडल के कई सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल हैं। कहा जाता है कि काशी में ही भगवान विष्णु ने भी तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान शिव के मस्तक हिलाने के कारण उनके कान से जो कर्णिका गिरी, उसे ही मणिकर्णिका कहा गया। काशी में ‘आनंद वन’ भी है, जिसके बारे में भगवान शिव ने कहा था कि ऐसी जगह विश्व में कहीं और नहीं होगी।

चोरी की कारों को खपाने के लिए कुख्यात मेरठ का सोतीगंज मार्केट बंद, हाजी इकबाल और हाजी गल्ला की संपत्ति कुर्क

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने चोरी की गाड़ियों काटने के लिए कुख्यात मेरठ जिले के सोतीगंज मार्केट को बंद करा दिया। इस बाजार में दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य हिस्सों से चोरी की गई कारों को लाया और काट दिया जाता था और उसके कल-पुर्जों को बेच दिया जाता है। पुलिस ने यह कार्रवाई इस तरह के अवैध काम करने वाले दो सरगनाओं- हाजी इकबाल और हाजी गल्ला की पहचान पर उस पर कार्रवाई के बाद की है। प्रशासन ने इन दोनों माफियों पर कार्रवाई करते हुए करोड़ों की सम्पत्ति कुर्क की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चोरी की कारों को स्क्रैप करने का यह अवैध कारोबार यहाँ 1990 के दशक में शुरू हुआ था। शुरुआत में यहाँ सिर्फ कबाड़ की दुकानें थीं, लेकिन समय के साथ यहाँ घरों के अंदर गोदाम बनते गए और शुरू हो गया चोरी की कारों का बाजार। इस बाजार में अब 300 से अधिक दुकानें हैं, जहाँ 1,000 से अधिक लोग काम करते हैं। व्यापारियों का कहना है कि वहाँ के एसएचओ ने अगले आदेश तक सभी दुकानों को बंद रखने का निर्देश दिया है। यूपी पुलिस ने यह कार्रवाई रविवार (12 दिसंबर 2021) को की।

इस मामले में मेरठ जिले के एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने कहा, “हमने बाजार में 100 दुकानों की पहचान की है, जो अवैध व्यापार में शामिल हैं। जब तक वे स्टॉक विवरण जमा नहीं करते, हम उन तक किसी भी सामान को पहुँचने ही नहीं देंगे।”

पुलिस ने किया फ्लैग मार्च

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में शांति व्यवस्था भंग ना पहुँचे इसके लिए प्रशासन ने कई कदम उठाएँ हैं। इसी के तहत रविवार को दोपहर में 200 से अधिक पुलिसकर्मियों ने इलाके में फ्लैग मार्च किया और शांति भंग करने की कोशिश करने वालों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी।

सोतीगंज के प्रमुख कबाड़ी

सोतीगंज के प्रमुख कबाड़ियों में हाजी गल्ला, हाजी इकबाल, हाजी आफताब, मुस्ताक, मन्नू उर्फ मईनुद़्दीन, हाजी मोहसिन, सलमान उर्फ शेर, राहुल काला, सलाउद्दीन आदि शामिल हैं। इन कबाड़ियों के खिलाफ 2,500 से अधिक केस दर्ज हैं। इसमें से 37 कबाड़ी ऐसे हैं, जिनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज हैं।

काशी में बने कई विशिष्ट भवन, दर्शन के लिए दिव्यांगों-बुजुर्गों को विशेष सुविधाएँ: PM मोदी ने श्रमिकों के साथ ग्रहण किया प्रसाद

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में कई विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर भी पुष्प अर्पित की, जिनका वाराणसी के जीर्णोद्धार में अहम योगदान था। वाराणसी में नए कॉरिडोर के तहत कई भवन बनाए गए हैं, जिनका पीएम मोदी ने निरीक्षण किया। पीएम मोदी ने पूरे परिसर का दौरा किया।

वाराणसी में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई भवन बनाए गए हैं, जहाँ उन्हें विशेष सुविधाएँ मिलेंगी। गंगा नदी के चैनल की तरफ कई विशिष्ट भवन बनाए गए हैं। इस दौरान उन्होंने फिर से गंगा नदी के किनारों का दौरा किया और विकास परियोजनाओं को देखा। इस दौरान सीएम योगी उन्हें लगातार बताते रहे कि आम लोग दर्शन के लिए कैसे आएँगे और दिव्यांगों के लिए क्या खास व्यवस्थाएँ हैं। गंगा नदी के किनारे बनी नई सीढ़ियों से उतर कर दोनों नेताओं ने अवलोकन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पर भी श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। ये प्रतिमा मंदिर परिसर में गंगा नदी के पास स्थापित की गई है। यहाँ आदि शंकराचार्य, भारत माता और अहिल्याबाई होल्कर – ये तीन प्रतिमाएँ हैं। आदिगुरु की ‘गंगा स्तुति’ काफी लोकप्रिय है। कहते हैं भगवान शिव ने उन्हें काशी में दर्शन देकर केदारनाथ जाने को कहा था। ऊपर से पीएम मोदी ने गंगा नदी तट का अवलोकन किया। दिव्यांगों के दर्शन के लिए अलग से एस्कलेटर बनेंगे।

इस दौरान आसपास अपने-अपने छतों पर खड़े लोग भी उन्हें देख रहे थे। इसके बाद पीएम मोदी अपनी गाड़ी से ललिता घाट की तरफ पहुँचे। इसके बाद उन्होंने लंका घाट से अलकनंदा क्रूज की तरफ प्रस्थान किया। ये वो जगह है, जहाँ माँ गंगा उत्तरवाहिनी, अर्थात अर्ध-चंद्राकर हो जाती है। कहा जाता है कि गंगासागर में जाने से पहले भगवान शिव से मिलने के लिए माँ गंगा ने ऐसा किया। वीडियो में ऊपर आप इन नए निर्माणों को देख सकते हैं। पीएम मोदी ने इससे पहले श्रम साधकों के साथ बैठ कर प्रसाद भी ग्रहण किया।

जानिए आज काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान क्या-क्या हुआ

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ मौजूद साधु-संतों, नेताओं और आम जनता को सम्बोधित करते हुए कहा कि वो हमारे कारीगर, हमारे सिविल इंजीनयरिंग से जुड़े लोग, प्रशासन के लोग, वो परिवार जिनके यहाँ घर थे सभी का मैं अभिनंदन करते हैं। उन्होंने इन सबके साथ यूपी सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम परियोजना को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे आततायियों ने इस नगरी पर आक्रमण किए, इसे ध्वस्त करने के प्रयास किए! औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। उन्होंने कहा कि जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की, जिसने संस्कृति को कट्टरता से कुचलने की कोशिश की! लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है। बकौल पीएम मोदी, यहाँ अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं! अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारी एकता की ताकत का अहसास करा देते हैं। और अंग्रेजों के दौर में भी, हेस्टिंग का क्या हश्र काशी के लोगों ने किया था, ये तो काशी के लोग जानते ही हैं।

उन्होंने कहा, “काशी शब्दों का विषय नहीं है, संवेदनाओं की सृष्टि है। काशी वो है- जहाँ जागृति ही जीवन है! काशी वो है- जहाँ मृत्यु भी मंगल है! काशी वो है- जहां सत्य ही संस्कार है! काशी वो है- जहाँ प्रेम ही परंपरा है।बनारस वो नगर है जहाँ से जगद्गुरु शंकराचार्य को श्रीडोम राजा की पवित्रता से प्रेरणा मिली, उन्होंने देश को एकता के सूत्र में बांधने का संकल्प लिया। ये वो जगह है जहाँ भगवान शंकर की प्रेरणा से गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस जैसी अलौकिक रचना की।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “यहीं की धरती सारनाथ में भगवान बुद्ध का बोध संसार के लिए प्रकट हुआ। समाजसुधार के लिए कबीरदास जैसे मनीषी यहाँ प्रकट हुए। समाज को जोड़ने की जरूरत थी तो संत रैदास जी की भक्ति की शक्ति का केंद्र भी ये काशी बनी। काशी अहिंसा, तप की प्रतिमूर्ति चार जैन तीर्थंकरों की धरती है। राजा हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा से लेकर वल्लभाचार्य, रामानंद जी के ज्ञान तक चैतन्य महाप्रभु, समर्थगुरु रामदास से लेकर स्वामी विवेकानंद, मदनमोहन मालवीय तक कितने ही ऋषियों, आचार्यों का संबंध काशी की पवित्र धरती से रहा है।”

पीएम मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के चरण यहाँ पड़े थे। रानी लक्ष्मी बाई से लेकर चंद्रशेखर आज़ाद तक, कितने ही सेनानियों की कर्मभूमि-जन्मभूमि काशी रही है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद, मुंशी प्रेमचंद, पंडित रविशंकर, और बिस्मिल्लाह खान जैसी प्रतिभाओं को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस स्मरण को कहाँ तक ले जाया जाए। पीएम मोदी ने वाराणसी में कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण, भारत को एक निर्णायक दिशा देगा, एक उज्जवल भविष्य की तरफ ले जाएगा। ये परिसर, साक्षी है हमारे सामर्थ्य का, हमारे कर्तव्य का। अगर सोच लिया जाए, ठान लिया जाए, तो असंभव कुछ भी नहीं।

बकौल पीएम मोदी, हर भारतवासी की भुजाओं में वो बल है, जो अकल्पनीय को साकार कर देता है। हम तप जानते हैं, तपस्या जानते हैं, देश के लिए दिन रात खपना जानते हैं। चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, हम भारतीय मिलकर उसे परास्त कर सकते हैं। आज का भारत अपनी खोई हुई विरासत को फिर से सँजो रहा है। यहां काशी में तो माता अन्नपूर्णा खुद विराजती हैं। उन्होंने खुशी जताई कि काशी से चुराई गई माँ अन्नपूर्णा की प्रतिमा, एक शताब्दी के इंतजार के बाद अब फिर से काशी में स्थापित की जा चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लिए जनता जनार्दन ईश्वर का ही रूप है, हर भारतवासी ईश्वर का ही अंश है, इसलिए वो कुछ माँगना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने लिए नहीं, हमारे देश के लिए तीन संकल्प चाहते हैं- स्वच्छता, सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लिए निरंतर प्रयास। उन्होंने कहा कि गुलामी के लंबे कालखंड ने हम भारतीयों का आत्मविश्वास ऐसा तोड़ा कि हम अपने ही सृजन पर विश्वास खो बैठे। पीएम मोदी ने कहा, “आज हजारों वर्ष पुरानी इस काशी से, मैं हर देशवासी का आह्वान करता हूँ- पूरे आत्मविश्वास से सृजन करिए, इनोवेट करिए, इनोवेटिव तरीके से करिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “तीसरा एक संकल्प जो आज हमें लेना है, वो है आत्मनिर्भर भारत के लिए अपने प्रयास बढ़ाने का। ये आजादी का अमृतकाल है। हम आजादी के 75वें साल में हैं। जब भारत सौ साल की आजादी का समारोह बनाएगा, तब का भारत कैसा होगा, इसके लिए हमें अभी से काम करना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान वहाँ मौजूद लोगों को सम्बोधित किया। उन्होंने इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के भव्य स्वरूप को जनता को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभी मैं बाबा के साथ साथ नगर कोतवाल कालभैरव जी के दर्शन करके भी आ रहा हूँ, देशवासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूँ। काशी में कुछ भी खास हो, कुछ भी नया हो, उनसे पूछना आवश्यक है। मैं काशी के कोतवाल के चरणों में भी प्रणाम करता हूँ।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पुराणों में कहा गया है कि जैसे ही कोई काशी में प्रवेश करता है, सारे बंधनों से मुक्त हो जाता है। भगवान विश्वेश्वर का आशीर्वाद, एक अलौकिक ऊर्जा यहाँ आते ही हमारी अंतर-आत्मा को जागृत कर देती है उन्होंने कहा कि आप यहाँ जब आएंगे तो केवल आस्था के दर्शन नहीं करेंगे। आपको यहाँ अपने अतीत के गौरव का अहसास भी होगा। कैसे प्राचीनता और नवीनता एक साथ सजीव हो रही हैं, कैसे पुरातन की प्रेरणाएँ भविष्य को दिशा दे रही हैं, इसके साक्षात दर्शन विश्वनाथ धाम परिसर में हम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने काशी में मौजूद साधु-संतों और लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्वनाथ धाम का ये पूरा नया परिसर एक भव्य भवन भर नहीं है, ये प्रतीक है, हमारे भारत की सनातन संस्कृति का! ये प्रतीक है, हमारी आध्यात्मिक आत्मा का! ये प्रतीक है, भारत की प्राचीनता का, परम्पराओं का! भारत की ऊर्जा का, गतिशीलता का। उन्होंने कहा कि पहले यहाँ जो मंदिर क्षेत्र केवल तीन हजार वर्ग फीट में था, वो अब करीब 5 लाख वर्ग फीट का हो गया है। अब मंदिर और मंदिर परिसर में 50 से 75 हजार श्रद्धालु आ सकते हैं। यानि पहले माँ गंगा का दर्शन-स्नान, और वहाँ से सीधे विश्वनाथ धाम।

पीएम मोदी ने कहा, “काशी तो काशी है! काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है। जहां गंगा अपनी धारा बदलकर बहती हों, उस काशी को भला कौन रोक सकता है? आज भगवान शिव का प्रिय दिन सोमवार है। आज विक्रम संवत 2078 मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, एक नया इतिहास रच रही है। हमारा सौभाग्य है कि हम इस तिथि के साक्षी बन रहे हैं। मैं आज अपने हर उस श्रमिक भाई-बहन का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिसका पसीना इस भव्य परिसर के निर्माण में बहा है। कोरोना के विपरीत काल में भी, उन्होंने यहां पर काम रुकने नहीं दिया। मुझे अभी अपने इन श्रमिक साथियों से मिलने का, उनका आशीर्वाद लेने का सौभाग्य मिला है।”

उन्होंने कहा, “जब मैं बनारस आया था तब एक विश्वास लेकर आया था, विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों पर था। आज हिसाब-किताब का समय नहीं है। तब कुछ ऐसे लोग भी थे जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे कि कैसे होगा, नहीं होगा, ये मोदी जी जैसे बहुत आकर गए। मुझे बहुत आश्चर्य होता था, लेकिन ये जड़ता बनारस की नहीं थी, वो राजनीति थी। लेकिन काशी तो, काशी है। काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है। जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है।”

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व का सबसे लोकप्रिय नेता बताया। उन्होंने ‘नमामि शमीशान निर्वाण रूपं’ के साथ अपनी बात की शुरुआत की। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश धर्म के अलावा राज्यपाल आनंदबेन पटेल भी मौजूद थीं। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि आज माँ गंगा प्रफुल्लित हैं, काशी के कोतवाल भैरव आह्वादित हैं और बाबा विश्वनाथ की कृपा हम पर बरस रही है।

उन्होंने कहा कि ये काशी का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहाँ से सांसद बना कर भेजा गया। उन्होंने कहा कि सभी संत प्रधानमंत्री नरेंद्र के स्वागत के लिए आह्वादित हैं, क्योंकि हजारों वर्ष की तपस्या आज सच हो रही है। उन्होंने कहा कि 1777-80 के बीच में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने बाबा विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में योगदान दिया, महाराजा रंजीत सिंह ने भी इसके लिए काम किया और आज पूज्य संत जनों ने आज अपनी आँखों से इसे भव्य और दिव्य बनते हुए देखा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ककाशी विश्वनाथ मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद परिसर में पौधारोपण किया। बता दें कि हिन्दू धर्म में वनस्पति को देवी मानते हैं। इसके बाद पीएम मोदी ने उन श्रमजीवियों पर पुष्प वर्षा की, जिनकी मेहनत से काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण संपन्न हुआ है। उन श्रमिकों को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं भूले और उनसे बातें की। उन पर फूल बरसाए। साथ ही उनमें से कइयों से बात कर के हालचाल और नाम-पता भी पूछा।

इसके बाद उन्होंने सभी श्रमिकों के साथ बैठ कर फोटो भी खिंचवाई। इस दौरान हर-हर महादेव का उद्घाटन होता था। इस दौरान पुरोहितों ने उन्हें भेंट भी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ धाम मंदिर का एक स्वरूप भी उन्हें भेंट किया।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे। गंगा में डुबकी लगाने के बाद उन्होंने कलश में जल भरा, जिसके बाद मंदिर पहुँच कर आचार्यों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से काशी विश्वेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने गंगाजल, बेलपत्र और पुष्प लेकर पूजा-अर्चना की। जहाँ पुरोहित घंटी बजा रहे थे, वहीं पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ की आरती की। इस दौरान विश्व के कल्याण के लिए भी प्रार्थना की गई।

काशी में भगवा विश्वनाथ धाम कॉरिडोर में वहाँ के लोगों का भी कम योगदान नहीं है। वहाँ निर्माण के दौरान लगभग 500-600 घर हटाने पड़े, जिसके लिए लोगों ने स्वेच्छा से योगदान दिया और कोई केस-मुकदमा के बिना ही ये कार्य सफल हुआ। इसके उद्घाटन के लिए सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा की पूजा की। इसके बाद वो कपड़े बदल कर कलश में जल लेकर विश्वनाथ मंदिर पहुँचे, जहाँ जलाभिषेक किया।

जलाभिषेक के लिए जाते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुर्ता-धोती पहन रखी थी और एक गमछा रखा हुआ था। इस दौरान डमरू बजाते हुए पुरोहितों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान लगातार भक्ति गाने बज रहे थे और मंत्रोच्चार हो रहा था। इस दौरान सुरक्षा की काफी कड़ी व्यवस्था है और आसपास के सभी ऊँची जगहों पर पुलिस तैनात थी। बाबा विश्वनाथ धाम मंदिर में आचार्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भगवान शिव की पूजा संपन्न कराई।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा में डुबकी लगाई और जलाभिषेक किया। इस दौरान पीएम मोदी को लाल वस्त्रों में नदी में डुबकी लगा कर मंत्रोच्चार करते हुए देखा गया। इस दौरान उन्होंने अपने हाथों में माला और लोटा ले रखा था। इसके बाद पीएम मोदी ने मंदिर में जाकर अंजलि दी। मुख्य मंदिर परिसर में नया गलियारा बनाया गया है, जहाँ दीवारों में भगवा शिव से सम्बंधित श्लोक और इतिहास लिखा हुआ है।

इस दौरान पूरे काशी को सजाया गया है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग वहाँ उपस्थित थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उत्तर प्रदेश मत्रिमंडल के कई सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल हैं। कहा जाता है कि काशी में ही भगवान विष्णु ने भी तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान शिव के मस्तक हिलाने के कारण उनके कान से जो कर्णिका गिरी, उसे ही मणिकर्णिका कहा गया। काशी में ‘आनंद वन’ भी है, जिसके बारे में भगवान शिव ने कहा था कि ऐसी जगह विश्व में कहीं और नहीं होगी।

काशी कॉरिडोर से छलका फारूक अब्दुल्ला का ‘दर्द’, कहा- मोदी को दूसरे धर्मों को भी तवज्जो देनी चाहिए

वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोमवार (13 दिसंबर) को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक का दर्द छलक आ गया है। उन्होंने कहा कि यह बात है, लेकिन प्रधानमंत्री को दूसरे धर्मों को भी तवज्जो देना चाहिए, क्योंकि वे एक धर्म के नहीं बल्कि पूरे भारत के प्रधानमंत्री हैं। इसके साथ ही फारूक ने भारत विभाजन को ऐतिहासिक भूल बताने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी समर्थन किया।

भारत के बँटवारे को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इसका नुकसान सिर्फ कश्मीरियों को ही नहीं, बल्कि पूरे देश के मुस्लिमों को भुगतना पड़ा है। उन्होंने कहा कि अगर यह मुल्क एक होता तो ताकत भी रहती, मुश्किलें भी नहीं पैदा होती और देश में भाईचारा भी रहता। फारूक ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के झगड़े के कारण देश में धार्मिक तनाव बढ़ता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और वाराणसी में आयोजित भव्य कार्यक्रम को फारूक अब्दुल्ला ने बधाई देते हुए इसे अच्छी बात बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को दूसरे धर्मों को भी तवज्जो देना चाहिए, क्योंकि वो सिर्फ एक धर्म के नहीं पूरे भारत के प्रधानमंत्री हैं। भारत में बहुत सारे धर्म हैं।

बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि ये भव्य धाम भक्तों को अतीत के गौरव का एहसास कराएगा। उन्होंने कहा, “पहले यहाँ जो मंदिर क्षेत्र केवल 3,000 वर्ग फीट में था, वो अब करीब 5 लाख वर्ग फीट का हो गया है। अब मंदिर और मंदिर परिसर में 50 से 75 हजार श्रद्धालु आ सकते हैं। यानी पहले माँ गंगा का दर्शन-स्नान और वहाँ से सीधे विश्वनाथ धाम।”

हिंदू और हिंदुत्व को लेकर राहुल गाँधी द्वारा दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कोई धर्म बुरा नहीं होता है, इंसान बुरे होते हैं। उन्होंने कहा कि वो उम्मीद करेंगे कि हिंदू असली हिंदू बने और अपने धर्म का पालन करें।

राजनाथ सिंह ने कही थी यह बात

गौरतलब है कि 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की जीत के उपलक्ष्य में आयोजित ‘स्वर्णिम विजय पर्व’ को संबोधित करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि इस युद्ध ने दिखा दिया कि ब्रिटिश शासन से आजादी के समय धर्म के नाम पर भारत का विभाजन एक ऐतिहासिक गलती थी। राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान का जन्म धर्म के नाम पर हुआ था, इसके बावजूद वह एक नहीं रह सका। बता दें कि 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की हार के बाद बांग्लादेश के रूप में एक अलग देश का उदय हुआ था।

सवाल: कोई जावेद अख्तर से पूछे इस्लाम में नंगापन… उर्फी का जवाब: न इस्लाम से लेना-देना, न जावेद से

बिग बॉस ओटीटी में आकर मशहूर हुईं उर्फी जावेद अक्सर अपने लुक्स के कारण चर्चा में रहती हैं। अभी हाल में उन्होंने बिकनी में एक फोटोशूट कराया था जिस पर सोशल मीडिया यूजर्स ने काफी प्रतिक्रिया दी। इसी क्रम में एक निदा नाम की यूजर ने उनकी तस्वीर को इस्लाम और जावेद अख्तर से जोड़ा, जिस पर एक्ट्रेस ने नाराज होकर करारा जवाब दिया।

दरअसल निदा ने लिखा था, “कोई जावेद अख्तर से पूछो न इस्लाम में नंगेपन की अनुमति है कि नहीं…।” इसी ट्वीट के जवाब में उर्फी ने उसे क्रम में बताया कि कैसे उनका न जावेद अख्तर से लेना-देना है और न ही इस्लाम से। उन्होंने लिखा, 

“अ- मैं जावेद अख्तर की पोती नहीं हूँ। ब- मेरी च्वाइस मेरी अपनी हैं, मेरे दादा की इच्छाओं पर नहीं, चाहे वो जो भी हों। स- इस्लाम में तो सोशल मीडिया पर भी होना अलाउ नहीं है, तो प्लीज अपनी आईडी फौरन डिलीट करो। ड- मैं इस्लाम फॉलो नहीं करती, लेकिन तुम करती हो।”

बता दें कि अपनी फैशन चॉइस के चलते सुर्खियों में रहने वाली उर्फी जावेद ने हाल के इंटरव्यू में खुलासा किया था कि मुस्लिम रूढ़िवादी परिवार में अपनी पसंद का कुछ भी करने की अनुमति नहीं थी। लिहाजा आजादी के लिए वे घर से भाग गईं। उर्फी जावेद ने ई-टाइम्स से बातचीत में कई राज से पर्दा भी उठाया था। इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि पहले दिन की शूटिंग के बाद जब उन्हें अश्लील दृश्य करने के लिए मजबूर किया गया, तो उनके मन में आत्महत्या के ख्याल आए थे। उर्फी ने अगले दिन शूटिंग पर जाने से इनकार कर दिया तो निर्माता ने उन्हें जेल भेजने की धमकी दी और उनसे 40 लाख रुपए की माँग की थी।

‘कोई औरंगजेब यहाँ आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं’: काशी में PM मोदी ने आक्रांताओं के अत्याचार को किया याद, कहा – इस देश की मिट्टी अलग

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ मौजूद साधु-संतों, नेताओं और आम जनता को सम्बोधित करते हुए कहा कि वो हमारे कारीगर, हमारे सिविल इंजीनयरिंग से जुड़े लोग, प्रशासन के लोग, वो परिवार जिनके यहाँ घर थे सभी का मैं अभिनंदन करते हैं। उन्होंने इन सबके साथ यूपी सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम परियोजना को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे आततायियों ने इस नगरी पर आक्रमण किए, इसे ध्वस्त करने के प्रयास किए! औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। उन्होंने कहा कि जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की, जिसने संस्कृति को कट्टरता से कुचलने की कोशिश की! लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है। बकौल पीएम मोदी, यहाँ अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं! अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारी एकता की ताकत का अहसास करा देते हैं। और अंग्रेजों के दौर में भी, हेस्टिंग का क्या हश्र काशी के लोगों ने किया था, ये तो काशी के लोग जानते ही हैं।

उन्होंने कहा, “काशी शब्दों का विषय नहीं है, संवेदनाओं की सृष्टि है। काशी वो है- जहाँ जागृति ही जीवन है! काशी वो है- जहाँ मृत्यु भी मंगल है! काशी वो है- जहां सत्य ही संस्कार है! काशी वो है- जहाँ प्रेम ही परंपरा है।बनारस वो नगर है जहाँ से जगद्गुरु शंकराचार्य को श्रीडोम राजा की पवित्रता से प्रेरणा मिली, उन्होंने देश को एकता के सूत्र में बांधने का संकल्प लिया। ये वो जगह है जहाँ भगवान शंकर की प्रेरणा से गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस जैसी अलौकिक रचना की।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “यहीं की धरती सारनाथ में भगवान बुद्ध का बोध संसार के लिए प्रकट हुआ। समाजसुधार के लिए कबीरदास जैसे मनीषी यहाँ प्रकट हुए। समाज को जोड़ने की जरूरत थी तो संत रैदास जी की भक्ति की शक्ति का केंद्र भी ये काशी बनी। काशी अहिंसा, तप की प्रतिमूर्ति चार जैन तीर्थंकरों की धरती है। राजा हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा से लेकर वल्लभाचार्य, रामानंद जी के ज्ञान तक चैतन्य महाप्रभु, समर्थगुरु रामदास से लेकर स्वामी विवेकानंद, मदनमोहन मालवीय तक कितने ही ऋषियों, आचार्यों का संबंध काशी की पवित्र धरती से रहा है।”

पीएम मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के चरण यहाँ पड़े थे। रानी लक्ष्मी बाई से लेकर चंद्रशेखर आज़ाद तक, कितने ही सेनानियों की कर्मभूमि-जन्मभूमि काशी रही है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद, मुंशी प्रेमचंद, पंडित रविशंकर, और बिस्मिल्लाह खान जैसी प्रतिभाओं को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस स्मरण को कहाँ तक ले जाया जाए। पीएम मोदी ने वाराणसी में कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण, भारत को एक निर्णायक दिशा देगा, एक उज्जवल भविष्य की तरफ ले जाएगा। ये परिसर, साक्षी है हमारे सामर्थ्य का, हमारे कर्तव्य का। अगर सोच लिया जाए, ठान लिया जाए, तो असंभव कुछ भी नहीं।

बकौल पीएम मोदी, हर भारतवासी की भुजाओं में वो बल है, जो अकल्पनीय को साकार कर देता है। हम तप जानते हैं, तपस्या जानते हैं, देश के लिए दिन रात खपना जानते हैं। चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, हम भारतीय मिलकर उसे परास्त कर सकते हैं। आज का भारत अपनी खोई हुई विरासत को फिर से सँजो रहा है। यहां काशी में तो माता अन्नपूर्णा खुद विराजती हैं। उन्होंने खुशी जताई कि काशी से चुराई गई माँ अन्नपूर्णा की प्रतिमा, एक शताब्दी के इंतजार के बाद अब फिर से काशी में स्थापित की जा चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लिए जनता जनार्दन ईश्वर का ही रूप है, हर भारतवासी ईश्वर का ही अंश है, इसलिए वो कुछ माँगना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने लिए नहीं, हमारे देश के लिए तीन संकल्प चाहते हैं- स्वच्छता, सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लिए निरंतर प्रयास। उन्होंने कहा कि गुलामी के लंबे कालखंड ने हम भारतीयों का आत्मविश्वास ऐसा तोड़ा कि हम अपने ही सृजन पर विश्वास खो बैठे। पीएम मोदी ने कहा, “आज हजारों वर्ष पुरानी इस काशी से, मैं हर देशवासी का आह्वान करता हूँ- पूरे आत्मविश्वास से सृजन करिए, इनोवेट करिए, इनोवेटिव तरीके से करिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “तीसरा एक संकल्प जो आज हमें लेना है, वो है आत्मनिर्भर भारत के लिए अपने प्रयास बढ़ाने का। ये आजादी का अमृतकाल है। हम आजादी के 75वें साल में हैं। जब भारत सौ साल की आजादी का समारोह बनाएगा, तब का भारत कैसा होगा, इसके लिए हमें अभी से काम करना होगा।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर का उद्घाटन: जानिए इससे पहले के घटनाक्रम के बारे में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान वहाँ मौजूद लोगों को सम्बोधित किया। उन्होंने इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के भव्य स्वरूप को जनता को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभी मैं बाबा के साथ साथ नगर कोतवाल कालभैरव जी के दर्शन करके भी आ रहा हूँ, देशवासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूँ। काशी में कुछ भी खास हो, कुछ भी नया हो, उनसे पूछना आवश्यक है। मैं काशी के कोतवाल के चरणों में भी प्रणाम करता हूँ।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पुराणों में कहा गया है कि जैसे ही कोई काशी में प्रवेश करता है, सारे बंधनों से मुक्त हो जाता है। भगवान विश्वेश्वर का आशीर्वाद, एक अलौकिक ऊर्जा यहाँ आते ही हमारी अंतर-आत्मा को जागृत कर देती है उन्होंने कहा कि आप यहाँ जब आएंगे तो केवल आस्था के दर्शन नहीं करेंगे। आपको यहाँ अपने अतीत के गौरव का अहसास भी होगा। कैसे प्राचीनता और नवीनता एक साथ सजीव हो रही हैं, कैसे पुरातन की प्रेरणाएँ भविष्य को दिशा दे रही हैं, इसके साक्षात दर्शन विश्वनाथ धाम परिसर में हम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने काशी में मौजूद साधु-संतों और लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्वनाथ धाम का ये पूरा नया परिसर एक भव्य भवन भर नहीं है, ये प्रतीक है, हमारे भारत की सनातन संस्कृति का! ये प्रतीक है, हमारी आध्यात्मिक आत्मा का! ये प्रतीक है, भारत की प्राचीनता का, परम्पराओं का! भारत की ऊर्जा का, गतिशीलता का। उन्होंने कहा कि पहले यहाँ जो मंदिर क्षेत्र केवल तीन हजार वर्ग फीट में था, वो अब करीब 5 लाख वर्ग फीट का हो गया है। अब मंदिर और मंदिर परिसर में 50 से 75 हजार श्रद्धालु आ सकते हैं। यानि पहले माँ गंगा का दर्शन-स्नान, और वहाँ से सीधे विश्वनाथ धाम।

पीएम मोदी ने कहा, “काशी तो काशी है! काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है। जहां गंगा अपनी धारा बदलकर बहती हों, उस काशी को भला कौन रोक सकता है? आज भगवान शिव का प्रिय दिन सोमवार है। आज विक्रम संवत 2078 मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, एक नया इतिहास रच रही है। हमारा सौभाग्य है कि हम इस तिथि के साक्षी बन रहे हैं। मैं आज अपने हर उस श्रमिक भाई-बहन का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिसका पसीना इस भव्य परिसर के निर्माण में बहा है। कोरोना के विपरीत काल में भी, उन्होंने यहां पर काम रुकने नहीं दिया। मुझे अभी अपने इन श्रमिक साथियों से मिलने का, उनका आशीर्वाद लेने का सौभाग्य मिला है।”

उन्होंने कहा, “जब मैं बनारस आया था तब एक विश्वास लेकर आया था, विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों पर था। आज हिसाब-किताब का समय नहीं है। तब कुछ ऐसे लोग भी थे जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे कि कैसे होगा, नहीं होगा, ये मोदी जी जैसे बहुत आकर गए। मुझे बहुत आश्चर्य होता था, लेकिन ये जड़ता बनारस की नहीं थी, वो राजनीति थी। लेकिन काशी तो, काशी है। काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है। जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है।”

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व का सबसे लोकप्रिय नेता बताया। उन्होंने ‘नमामि शमीशान निर्वाण रूपं’ के साथ अपनी बात की शुरुआत की। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश धर्म के अलावा राज्यपाल आनंदबेन पटेल भी मौजूद थीं। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि आज माँ गंगा प्रफुल्लित हैं, काशी के कोतवाल भैरव आह्वादित हैं और बाबा विश्वनाथ की कृपा हम पर बरस रही है।

उन्होंने कहा कि ये काशी का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहाँ से सांसद बना कर भेजा गया। उन्होंने कहा कि सभी संत प्रधानमंत्री नरेंद्र के स्वागत के लिए आह्वादित हैं, क्योंकि हजारों वर्ष की तपस्या आज सच हो रही है। उन्होंने कहा कि 1777-80 के बीच में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने बाबा विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में योगदान दिया, महाराजा रंजीत सिंह ने भी इसके लिए काम किया और आज पूज्य संत जनों ने आज अपनी आँखों से इसे भव्य और दिव्य बनते हुए देखा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ककाशी विश्वनाथ मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद परिसर में पौधारोपण किया। बता दें कि हिन्दू धर्म में वनस्पति को देवी मानते हैं। इसके बाद पीएम मोदी ने उन श्रमजीवियों पर पुष्प वर्षा की, जिनकी मेहनत से काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण संपन्न हुआ है। उन श्रमिकों को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं भूले और उनसे बातें की। उन पर फूल बरसाए। साथ ही उनमें से कइयों से बात कर के हालचाल और नाम-पता भी पूछा।

इसके बाद उन्होंने सभी श्रमिकों के साथ बैठ कर फोटो भी खिंचवाई। इस दौरान हर-हर महादेव का उद्घाटन होता था। इस दौरान पुरोहितों ने उन्हें भेंट भी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ धाम मंदिर का एक स्वरूप भी उन्हें भेंट किया।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे। गंगा में डुबकी लगाने के बाद उन्होंने कलश में जल भरा, जिसके बाद मंदिर पहुँच कर आचार्यों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से काशी विश्वेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने गंगाजल, बेलपत्र और पुष्प लेकर पूजा-अर्चना की। जहाँ पुरोहित घंटी बजा रहे थे, वहीं पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ की आरती की। इस दौरान विश्व के कल्याण के लिए भी प्रार्थना की गई।

काशी में भगवा विश्वनाथ धाम कॉरिडोर में वहाँ के लोगों का भी कम योगदान नहीं है। वहाँ निर्माण के दौरान लगभग 500-600 घर हटाने पड़े, जिसके लिए लोगों ने स्वेच्छा से योगदान दिया और कोई केस-मुकदमा के बिना ही ये कार्य सफल हुआ। इसके उद्घाटन के लिए सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा की पूजा की। इसके बाद वो कपड़े बदल कर कलश में जल लेकर विश्वनाथ मंदिर पहुँचे, जहाँ जलाभिषेक किया।

जलाभिषेक के लिए जाते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुर्ता-धोती पहन रखी थी और एक गमछा रखा हुआ था। इस दौरान डमरू बजाते हुए पुरोहितों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान लगातार भक्ति गाने बज रहे थे और मंत्रोच्चार हो रहा था। इस दौरान सुरक्षा की काफी कड़ी व्यवस्था है और आसपास के सभी ऊँची जगहों पर पुलिस तैनात थी। बाबा विश्वनाथ धाम मंदिर में आचार्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भगवान शिव की पूजा संपन्न कराई।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा में डुबकी लगाई और जलाभिषेक किया। इस दौरान पीएम मोदी को लाल वस्त्रों में नदी में डुबकी लगा कर मंत्रोच्चार करते हुए देखा गया। इस दौरान उन्होंने अपने हाथों में माला और लोटा ले रखा था। इसके बाद पीएम मोदी ने मंदिर में जाकर अंजलि दी। मुख्य मंदिर परिसर में नया गलियारा बनाया गया है, जहाँ दीवारों में भगवा शिव से सम्बंधित श्लोक और इतिहास लिखा हुआ है।

इस दौरान पूरे काशी को सजाया गया है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग वहाँ उपस्थित थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उत्तर प्रदेश मत्रिमंडल के कई सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल हैं। कहा जाता है कि काशी में ही भगवान विष्णु ने भी तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान शिव के मस्तक हिलाने के कारण उनके कान से जो कर्णिका गिरी, उसे ही मणिकर्णिका कहा गया। काशी में ‘आनंद वन’ भी है, जिसके बारे में भगवान शिव ने कहा था कि ऐसी जगह विश्व में कहीं और नहीं होगी।

‘3000 Sq फ़ीट का मंदिर परिसर अब 5 लाख वर्ग फ़ीट का हो गया’: काशी में बोले PM मोदी – ये भारत की सनातन संस्कृति का प्रतीक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान वहाँ मौजूद लोगों को सम्बोधित किया। उन्होंने इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के भव्य स्वरूप को जनता को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभी मैं बाबा के साथ साथ नगर कोतवाल कालभैरव जी के दर्शन करके भी आ रहा हूँ, देशवासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूँ। काशी में कुछ भी खास हो, कुछ भी नया हो, उनसे पूछना आवश्यक है। मैं काशी के कोतवाल के चरणों में भी प्रणाम करता हूँ।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पुराणों में कहा गया है कि जैसे ही कोई काशी में प्रवेश करता है, सारे बंधनों से मुक्त हो जाता है। भगवान विश्वेश्वर का आशीर्वाद, एक अलौकिक ऊर्जा यहाँ आते ही हमारी अंतर-आत्मा को जागृत कर देती है उन्होंने कहा कि आप यहाँ जब आएंगे तो केवल आस्था के दर्शन नहीं करेंगे। आपको यहाँ अपने अतीत के गौरव का अहसास भी होगा। कैसे प्राचीनता और नवीनता एक साथ सजीव हो रही हैं, कैसे पुरातन की प्रेरणाएँ भविष्य को दिशा दे रही हैं, इसके साक्षात दर्शन विश्वनाथ धाम परिसर में हम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने काशी में मौजूद साधु-संतों और लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्वनाथ धाम का ये पूरा नया परिसर एक भव्य भवन भर नहीं है, ये प्रतीक है, हमारे भारत की सनातन संस्कृति का! ये प्रतीक है, हमारी आध्यात्मिक आत्मा का! ये प्रतीक है, भारत की प्राचीनता का, परम्पराओं का! भारत की ऊर्जा का, गतिशीलता का। उन्होंने कहा कि पहले यहाँ जो मंदिर क्षेत्र केवल तीन हजार वर्ग फीट में था, वो अब करीब 5 लाख वर्ग फीट का हो गया है। अब मंदिर और मंदिर परिसर में 50 से 75 हजार श्रद्धालु आ सकते हैं। यानि पहले माँ गंगा का दर्शन-स्नान, और वहाँ से सीधे विश्वनाथ धाम।

पीएम मोदी ने कहा, “काशी तो काशी है! काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है। जहां गंगा अपनी धारा बदलकर बहती हों, उस काशी को भला कौन रोक सकता है? आज भगवान शिव का प्रिय दिन सोमवार है। आज विक्रम संवत 2078 मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, एक नया इतिहास रच रही है। हमारा सौभाग्य है कि हम इस तिथि के साक्षी बन रहे हैं। मैं आज अपने हर उस श्रमिक भाई-बहन का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिसका पसीना इस भव्य परिसर के निर्माण में बहा है। कोरोना के विपरीत काल में भी, उन्होंने यहां पर काम रुकने नहीं दिया। मुझे अभी अपने इन श्रमिक साथियों से मिलने का, उनका आशीर्वाद लेने का सौभाग्य मिला है।”

उन्होंने कहा, “जब मैं बनारस आया था तब एक विश्वास लेकर आया था, विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों पर था। आज हिसाब-किताब का समय नहीं है। तब कुछ ऐसे लोग भी थे जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे कि कैसे होगा, नहीं होगा, ये मोदी जी जैसे बहुत आकर गए। मुझे बहुत आश्चर्य होता था, लेकिन ये जड़ता बनारस की नहीं थी, वो राजनीति थी। लेकिन काशी तो, काशी है। काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है। जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है।”

काशी विश्वनाथ धाम मंदिर का उद्घाटन: इससे पहले क्या-कुछ हुआ

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व का सबसे लोकप्रिय नेता बताया। उन्होंने ‘नमामि शमीशान निर्वाण रूपं’ के साथ अपनी बात की शुरुआत की। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश धर्म के अलावा राज्यपाल आनंदबेन पटेल भी मौजूद थीं। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि आज माँ गंगा प्रफुल्लित हैं, काशी के कोतवाल भैरव आह्वादित हैं और बाबा विश्वनाथ की कृपा हम पर बरस रही है।

उन्होंने कहा कि ये काशी का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहाँ से सांसद बना कर भेजा गया। उन्होंने कहा कि सभी संत प्रधानमंत्री नरेंद्र के स्वागत के लिए आह्वादित हैं, क्योंकि हजारों वर्ष की तपस्या आज सच हो रही है। उन्होंने कहा कि 1777-80 के बीच में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने बाबा विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में योगदान दिया, महाराजा रंजीत सिंह ने भी इसके लिए काम किया और आज पूज्य संत जनों ने आज अपनी आँखों से इसे भव्य और दिव्य बनते हुए देखा।

उन्होंने कहा कि आप अनुमान कर सकते हैं कि काशी में बाबा विश्वनाथ धाम का निर्माण अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के क्रम में ही अगली प्रक्रिया है। उन्होंने कुंभ के आयोजन से लेकर योग को विश्व स्तर पर स्थापित करने के प्रयासों के लिए पीएम मोदी का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने इसी काशी में आकर अपनी पीड़ा व्यक्ति की थी और यहाँ की तंग गलियों व गंदगी को देख कर व्यथित हुए थे, लेकिन अब उनके सपने को सच किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ककाशी विश्वनाथ मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद परिसर में पौधारोपण किया। बता दें कि हिन्दू धर्म में वनस्पति को देवी मानते हैं। इसके बाद पीएम मोदी ने उन श्रमजीवियों पर पुष्प वर्षा की, जिनकी मेहनत से काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण संपन्न हुआ है। उन श्रमिकों को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं भूले और उनसे बातें की। उन पर फूल बरसाए। साथ ही उनमें से कइयों से बात कर के हालचाल और नाम-पता भी पूछा।

इसके बाद उन्होंने सभी श्रमिकों के साथ बैठ कर फोटो भी खिंचवाई। इस दौरान हर-हर महादेव का उद्घाटन होता था। इस दौरान पुरोहितों ने उन्हें भेंट भी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ धाम मंदिर का एक स्वरूप भी उन्हें भेंट किया।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे। गंगा में डुबकी लगाने के बाद उन्होंने कलश में जल भरा, जिसके बाद मंदिर पहुँच कर आचार्यों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से काशी विश्वेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने गंगाजल, बेलपत्र और पुष्प लेकर पूजा-अर्चना की। जहाँ पुरोहित घंटी बजा रहे थे, वहीं पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ की आरती की। इस दौरान विश्व के कल्याण के लिए भी प्रार्थना की गई।

करीब आधे घंटे तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आचार्यों के साथ बाबा विश्वनाथ की पूजा-अर्चना की। अंत में क्षमा प्रार्थना भी की गई। कुर्ता-धोती और रुद्राक्ष पहने प्रधानमंत्री पूजा के बाद पुरोहितों के साथ बातें करते भी नजर आए।इस दौरान पुरोहितों ने कहा कि ये आपकी धर्म परायणता का परिणाम है कि ये कार्य हो रहा है। हालाँकि, पीएम मोदी ने इसके जवाब में कहा कि सब कुछ महादेव ही कराते हैं और उनकी इच्छा से ही ये सब हो रहा है। पूजा संपन्न होने के बाद पीएम मोदी हलके अंदाज़ में नजर आए।

काशी में भगवा विश्वनाथ धाम कॉरिडोर में वहाँ के लोगों का भी कम योगदान नहीं है। वहाँ निर्माण के दौरान लगभग 500-600 घर हटाने पड़े, जिसके लिए लोगों ने स्वेच्छा से योगदान दिया और कोई केस-मुकदमा के बिना ही ये कार्य सफल हुआ। इसके उद्घाटन के लिए सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा की पूजा की। इसके बाद वो कपड़े बदल कर कलश में जल लेकर विश्वनाथ मंदिर पहुँचे, जहाँ जलाभिषेक किया।

जलाभिषेक के लिए जाते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुर्ता-धोती पहन रखी थी और एक गमछा रखा हुआ था। इस दौरान डमरू बजाते हुए पुरोहितों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान लगातार भक्ति गाने बज रहे थे और मंत्रोच्चार हो रहा था। इस दौरान सुरक्षा की काफी कड़ी व्यवस्था है और आसपास के सभी ऊँची जगहों पर पुलिस तैनात थी। बाबा विश्वनाथ धाम मंदिर में आचार्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भगवान शिव की पूजा संपन्न कराई।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा में डुबकी लगाई और जलाभिषेक किया। इस दौरान पीएम मोदी को लाल वस्त्रों में नदी में डुबकी लगा कर मंत्रोच्चार करते हुए देखा गया। इस दौरान उन्होंने अपने हाथों में माला और लोटा ले रखा था। इसके बाद पीएम मोदी ने मंदिर में जाकर अंजलि दी। मुख्य मंदिर परिसर में नया गलियारा बनाया गया है, जहाँ दीवारों में भगवा शिव से सम्बंधित श्लोक और इतिहास लिखा हुआ है।

इस दौरान पूरे काशी को सजाया गया है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग वहाँ उपस्थित थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उत्तर प्रदेश मत्रिमंडल के कई सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल हैं। कहा जाता है कि काशी में ही भगवान विष्णु ने भी तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान शिव के मस्तक हिलाने के कारण उनके कान से जो कर्णिका गिरी, उसे ही मणिकर्णिका कहा गया। काशी में ‘आनंद वन’ भी है, जिसके बारे में भगवान शिव ने कहा था कि ऐसी जगह विश्व में कहीं और नहीं होगी।

मोदी का ‘अनुभव’ ही उनकी ताकत… मैंने ये किसी दूसरे राजनेता में नहीं देखा : प्रशांत किशोर

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपने हालिया इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। इंटरव्यू में जब उनसे प्रधानमंत्री मोदी की यूएसपी (अलग खासियत) के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जो कोई भी भारत जैसे देश का प्रधानमंत्री बनता है उस पर वैसे भी बहुत सी ताकत होती हैं लेकिन अगर पीएम मोदी की केवल एक दो यूएसपी की बात की जाए, तो वो उनका अनूठा अनुभव है

किशोर ने बताया, “अगर आप उनके पिछले 50 साल के करियर को देखें तो उन्होंने 15 साल बतौर आरएसएस प्रचारक गुजारे हैं। ये सामाजिक परिवेश में जनता को समझने, बातचीत करने, उनके साथ जुड़ने का सबसे अच्छा अवसर था। फिर, जब वे भाजपा में थे, तब उन्होंने 15 साल राजनीतिक आयोजक के रूप में बिताए। उन्होंने राजनीतिक व्यवस्था के प्रबंधन, तैयारी, संगठनात्मक मुद्दों को इस तरह से संभाला जैसे संभालना चाहिए।”

प्रशांत किशोर ने कहा, “और फिर वह 15 साल मुख्यमंत्री रहे और अब प्रधानमंत्री। ये 45 साल का अनुभव वाकई भारत में अलग है… मैं किसी अन्य राजनेता के बारे में नहीं सोच सकता जिसके पास जमीनी स्तर पर समाज की समझ, राजनीतिक संगठन चलाने और सरकार चलाने के मामले में इस तरह का मिश्रित अनुभव है।”

चुनावी रणनीतिकार किशोर ने इस बात को कहा कि पीएम मोदी का विशाल राजनीतिक अनुभव उन्हें मतदाताओं की इच्छाओं और महत्वकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करता है। किशोर ने कहा कि वह अपने 40-45 साल के अनुभवों के कारण ‘दूसरे अनुमान (सेकंड गेस)’ लगाने में सक्षम होते हैं।

वह बोले, “प्रधानमंत्री एक अच्छे श्रोता हैं। यह चीज उन्हें सभी दृष्टिकोणों से लाभ उठाने में लाभ देता है। वह अभी भी गलती कर सकते हैं और उन्होंने कई गलती की भी हैं। लेकिन इसे मैं उनके लिए फायदे की तरह आँकूंगा।”

कॉन्ग्रेस से लगभग जुड़ गए थे प्रशांत किशोर

बता दें कि इस इंटरव्यू में किशोर ने इस बात का खुलासा भी किया कि वो पिछले दो साल से कॉन्ग्रेस नेतृत्व के संपर्क में थे, लेकिन बंगाल चुनाव के बाद ये बेहद गहरा होता गया। उन्होंने कहा कि वो कॉन्ग्रेस को लगभग ज्वाइन कर ही चुके थे कि उन्हें एहसास हुआ कि साथ रहना दोनों पक्षों के लिए उलटा हो सकता है।

अपनी बात कहते हुए उन्होंने इस बात को स्पष्ट नहीं किया कि आखिर किन कारणों से वह कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि कोई भी अपने दम पर गाँधी परिवार या कॉन्ग्रेस नेतृत्व को सलाह नहीं दे सकता। किशोर ने कहा कि पार्टी ने उनसे पूछा और उन्होंने उन्हें वही बताया जो उन्हें सही लगा।