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PFI के नेताओं के विदेशों में बार और रेस्टोरेंट, ED की छापेमारी में कई संपत्तियों के मिले सबूत, संगठन पर बैन लगाने वर्षों से हो रही माँग

देश विरोधी गतिविधियों के लिए कुख्यात पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई कार्रवाई में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पीएफआई के नेताओं और पदाधिकारियों के केरल स्थित चार ठिकानों पर बुधवार (8 दिसंबर) की गई छापेमारी में उनके विदेशों में बीयर बार और रेस्टोरेंट सहित कई संपत्तियाँ के ठोस प्रमाण मिले हैं। इस दौरान पीएफआई के सदस्यों ने छापेमारी में बाधा डालने का प्रयास किया, लेकिन केंद्रीय पुलिस बल (सीआरपीएफ) की मौजूदगी के कारण वे इसमें सफल नहीं हो सके।

ईडी ने बताया कि पीएफआई के सदस्य शफीक पेयथ के घर, पीएफआई के मलाप्पुरम में पेरमपादप्पु के डिविजनल अध्यक्ष बीपी अब्दुल रजाक, एर्नाकुलम के मुवाट्टुपुझा में पीएफआई नेता एमके अशरफ उर्फ तमर अशरफ के मुन्नार के मनकुलम स्थित मुन्नार विला विस्टा परियोजना परिसर पर छापेमारी की गई। इस दौरान एजेेंसी को कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, विदेश से धन प्राप्त करने और विदेश में संपत्ति रखने के सबूत मिले।

ईडी ने बताया कि छापेमारी में बरामद किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि मुन्नार विला विस्टा परियोजना सहित केरल में विभिन्न परियोजनाओं के जरिए पीएफआई मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त है। ईडी ने अपने बयान में कहा, “पीएफआई के नेताओं द्वारा अबू धाबी में बार और रेस्टोरेंट सहित विदेश में संपत्तियाँ जमा करने के मामले संज्ञान में आए हैं। इसकी जाँच की जा रही है।”

दरअसल पीएफआई के खिलाफ ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जाँच कर रही है। पीएफआई पर समाज में उन्माद फैलाने और देश विरोधियों गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में सीएए विरोधी प्रदर्शनों की आड़ में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में भी इसकी भूमिका सामने आई थी। विरोध को उकसाने, सरकार के खिलाफ मुस्लिमों को भड़काने, सिमी से नजदीकी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों के कारण पीएफआई और इसकी राजनीतिक इकाई एसडीपीआई सरकारी एजेंसियों के रडार पर है।

इस पर केरल में हत्याएँ करने, हथियार रखने, बम बानने से संबंधित दस्तावेज मिले थे। इसके बाद इस पर अलकायदा जैसे इस्लामिक आतंकी संगठनों के साथ संबंध होने के आरोप लगे। इतना ही नहीं, केरल सहित दक्षिण भारत में लव जिहाद को बढ़ावा देने के भी इस आरोप लगे हैं। कट्टरपंथ को बढ़ावा देने और इसकी देश विरोधी गतिविधियों देेखते हुए साल 2012 से ही इस पर प्रतिबंध लगाने की माँग उठ रही है।

पीएफआई खुद को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाला संगठन बताता है। इस संगठन की जड़ें केरल के कालीकट में और मुख्यालय नई दिल्ली में है। नवभारत टाइम्स के अनुसार, दिल्ली के गोकुलपुरी स्थित जन्नते मस्जिद के प्रेसिडेंट खुर्शीद अंसारी का कहना है कि किसी भी मुसलमान के लिए शराब या उसका कारोबार वर्जित है। उन्होंने कहा कि शराब का बिजनस इस्लाम में बिल्कुल हराम है।

क्या आपने गंगा स्नान के दौरान PM मोदी के ‘लीरम फी’ पर ध्यान दिया? गदगद मणिपुर के CM ने कहा – अभिभूत हूँ

काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर का उद्घाटन करने के लिए वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को माँ गंगा में डुबकी भी लगाई। इस दौरान क्या आपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंगोछे पर ध्यान दिया? ये मणिपुर का वस्त्र है, जिसे ‘लीरम फी’ कहते हैं। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि वो ये देख कर अभिभूत हैं कि इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर का पारम्परिक ‘लीरम फी’ अंगोछा पहना है।

बता दें कि मणिपुर उन राज्यों में से है, जहाँ 2022 में चुनाव भी होने हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि तथाकथित राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावों से जोड़ कर देखेंगे। लेकिन, सच्चाई ये है कि उत्तर-पूर्व के पारंपरिक परिधानों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुराना लगाव है और पिछले कई मौकों पर उन्होंने इन्हें पहना है। जब पीएम मोदी ने कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ली थी, तब उन्होंने असम का पारंपरिक अंगोछा पहना हुआ था। ऐसे में उत्तर-पूर्वी राज्यों से उनका लगाव पुराना है।

हाल ही में ABP-C Voter का एक सर्वे भी आया, जिसमें बताया गया कि मणिपुर में भाजपा सत्ता में वापसी करेंगी और उसे 38% वोट शेयर प्राप्त होने का अनुमान है। इस सर्वे में कॉन्ग्रेस को 34% और और NPF को को 9% वोट मिलने का अनुमान है। वहीं 19% वोट ‘अन्य’ के खाते में जाने का अनुमान लगाया गया है। सर्वे की मानें तो 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भाजपा को 29-33 सीटें मिलेंगी और कॉन्ग्रेस 23-27 सीटों पर सिमट जाएगी। NPF को 2-6 सीटों का अनुमान लगाया गया है।

बता दें कि उत्तर-पूर्व में हाल ही में नागालैंड में हुई हिंसा की एक घटना के कारण उग्रवाद फिर से भड़काने की कोशिश की जा रही है। नागालैंड में भी उस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है और AFSPA के खिलाफ कुछ संगठन सड़क पर हैं। इसके बाद भारतीय सेना पर हमला भी किया गया था और जम कर हिंसा हुई थी। एन बिरेन सिंह ने कहा कि ये धर्म नहीं, बल्कि हर के जाति के सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में हमलोगों को बुलाना सम्मान की बात है।

काशी में विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर का उद्घाटन: जानिए दिन भर क्या-क्या हुआ

काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर का उद्घाटन करने पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाम को गंगा आरती में हिस्सा लिया। उससे पहले उन्होंने ‘विवेकानंद क्रूज’ पर अन्य अतिथियों के साथ बातचीत की। इस दौरान पूरे घाट पर असंख्य दीप जलते रहे और आसपास के इलाके को झालरों से सजाया गया था। रात के समय काशी विश्वनाथ मंदिर का गर्भगृह और उसका शिखर देखते ही बन रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में इससे पहले भी कई बार गंगा आरती के साक्षी बने हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विवेकानंद क्रूज’ पर सवार होकर काशी के कई घाटों के सौंदर्य को रात के समय देखा। ‘अस्सी घाट’ पर माँ गंगा की महा आरती हुई। गंगा आरती का पूरा वीडियो यहाँ देखें:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी में गंगा नदी में ‘अलकनंदा क्रूज’ में सवार होकर भ्रमण किया। इस दौरान आसपास हजारों की संख्या में पक्षी विचरण कर रहे थे। पीएम मोदी ने इस दौरान हाथ हिला कर लोगों का अभिवादन भी स्वीकार किया। ललिता घाट से ‘अलकनंदा क्रूज’ चली, जो धीरे-धीरे गंगा घाट की तरफ आगे बढ़ी। इस दौरान घाटों की हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। अस्सी और मणिकर्णिका से लेकर दशाश्वमेव तक, वाराणसी में कई घाट हैं।

आधे घंटे से भी अधिक समय तक दोनों नेताओं ने ‘अलकनंदा क्रूज’ में यात्रा की। इस दौरान वहाँ सुरक्षा व्यवस्था भी काफी कड़ी रही। बता दें कि अब तक कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी का दौरा किया है। उन्होंने गंगा में घूमते हुए ही आसपास के विकास परियोजनाओं का भी अवलोकन किया और उनके बारे में जाना। वीडियो में आप देख सकते हैं कि गंगा नदी का पानी भी काफी स्वच्छ नजर आ रहा है। ‘अलकनंदा क्रूज’ से दोनों ही नेता संत रविदास घाट पर पहुँचे।

बता दें कि संत रविदास ने ही ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ वाली कहावत कही थी।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में कई विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर भी पुष्प अर्पित की, जिनका वाराणसी के जीर्णोद्धार में अहम योगदान था। वाराणसी में नए कॉरिडोर के तहत कई भवन बनाए गए हैं, जिनका पीएम मोदी ने निरीक्षण किया। पीएम मोदी ने पूरे परिसर का दौरा किया।

वाराणसी में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई भवन बनाए गए हैं, जहाँ उन्हें विशेष सुविधाएँ मिलेंगी। गंगा नदी के चैनल की तरफ कई विशिष्ट भवन बनाए गए हैं। इस दौरान उन्होंने फिर से गंगा नदी के किनारों का दौरा किया और विकास परियोजनाओं को देखा। इस दौरान सीएम योगी उन्हें लगातार बताते रहे कि आम लोग दर्शन के लिए कैसे आएँगे और दिव्यांगों के लिए क्या खास व्यवस्थाएँ हैं। गंगा नदी के किनारे बनी नई सीढ़ियों से उतर कर दोनों नेताओं ने अवलोकन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पर भी श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। ये प्रतिमा मंदिर परिसर में गंगा नदी के पास स्थापित की गई है। यहाँ आदि शंकराचार्य, भारत माता और अहिल्याबाई होल्कर – ये तीन प्रतिमाएँ हैं। आदिगुरु की ‘गंगा स्तुति’ काफी लोकप्रिय है। कहते हैं भगवान शिव ने उन्हें काशी में दर्शन देकर केदारनाथ जाने को कहा था। ऊपर से पीएम मोदी ने गंगा नदी तट का अवलोकन किया। दिव्यांगों के दर्शन के लिए अलग से एस्कलेटर बनेंगे।

इस दौरान आसपास अपने-अपने छतों पर खड़े लोग भी उन्हें देख रहे थे। इसके बाद पीएम मोदी अपनी गाड़ी से ललिता घाट की तरफ पहुँचे। इसके बाद उन्होंने लंका घाट से अलकनंदा क्रूज की तरफ प्रस्थान किया। ये वो जगह है, जहाँ माँ गंगा उत्तरवाहिनी, अर्थात अर्ध-चंद्राकर हो जाती है। कहा जाता है कि गंगासागर में जाने से पहले भगवान शिव से मिलने के लिए माँ गंगा ने ऐसा किया। वीडियो में ऊपर आप इन नए निर्माणों को देख सकते हैं। पीएम मोदी ने इससे पहले श्रम साधकों के साथ बैठ कर प्रसाद भी ग्रहण किया।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ मौजूद साधु-संतों, नेताओं और आम जनता को सम्बोधित करते हुए कहा कि वो हमारे कारीगर, हमारे सिविल इंजीनयरिंग से जुड़े लोग, प्रशासन के लोग, वो परिवार जिनके यहाँ घर थे सभी का मैं अभिनंदन करते हैं। उन्होंने इन सबके साथ यूपी सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम परियोजना को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे आततायियों ने इस नगरी पर आक्रमण किए, इसे ध्वस्त करने के प्रयास किए! औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। उन्होंने कहा कि जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की, जिसने संस्कृति को कट्टरता से कुचलने की कोशिश की! लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है। बकौल पीएम मोदी, यहाँ अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं! अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारी एकता की ताकत का अहसास करा देते हैं। और अंग्रेजों के दौर में भी, हेस्टिंग का क्या हश्र काशी के लोगों ने किया था, ये तो काशी के लोग जानते ही हैं।

उन्होंने कहा, “काशी शब्दों का विषय नहीं है, संवेदनाओं की सृष्टि है। काशी वो है- जहाँ जागृति ही जीवन है! काशी वो है- जहाँ मृत्यु भी मंगल है! काशी वो है- जहां सत्य ही संस्कार है! काशी वो है- जहाँ प्रेम ही परंपरा है।बनारस वो नगर है जहाँ से जगद्गुरु शंकराचार्य को श्रीडोम राजा की पवित्रता से प्रेरणा मिली, उन्होंने देश को एकता के सूत्र में बांधने का संकल्प लिया। ये वो जगह है जहाँ भगवान शंकर की प्रेरणा से गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस जैसी अलौकिक रचना की।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “यहीं की धरती सारनाथ में भगवान बुद्ध का बोध संसार के लिए प्रकट हुआ। समाजसुधार के लिए कबीरदास जैसे मनीषी यहाँ प्रकट हुए। समाज को जोड़ने की जरूरत थी तो संत रैदास जी की भक्ति की शक्ति का केंद्र भी ये काशी बनी। काशी अहिंसा, तप की प्रतिमूर्ति चार जैन तीर्थंकरों की धरती है। राजा हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा से लेकर वल्लभाचार्य, रामानंद जी के ज्ञान तक चैतन्य महाप्रभु, समर्थगुरु रामदास से लेकर स्वामी विवेकानंद, मदनमोहन मालवीय तक कितने ही ऋषियों, आचार्यों का संबंध काशी की पवित्र धरती से रहा है।”

पीएम मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के चरण यहाँ पड़े थे। रानी लक्ष्मी बाई से लेकर चंद्रशेखर आज़ाद तक, कितने ही सेनानियों की कर्मभूमि-जन्मभूमि काशी रही है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद, मुंशी प्रेमचंद, पंडित रविशंकर, और बिस्मिल्लाह खान जैसी प्रतिभाओं को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस स्मरण को कहाँ तक ले जाया जाए। पीएम मोदी ने वाराणसी में कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण, भारत को एक निर्णायक दिशा देगा, एक उज्जवल भविष्य की तरफ ले जाएगा। ये परिसर, साक्षी है हमारे सामर्थ्य का, हमारे कर्तव्य का। अगर सोच लिया जाए, ठान लिया जाए, तो असंभव कुछ भी नहीं।

बकौल पीएम मोदी, हर भारतवासी की भुजाओं में वो बल है, जो अकल्पनीय को साकार कर देता है। हम तप जानते हैं, तपस्या जानते हैं, देश के लिए दिन रात खपना जानते हैं। चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, हम भारतीय मिलकर उसे परास्त कर सकते हैं। आज का भारत अपनी खोई हुई विरासत को फिर से सँजो रहा है। यहां काशी में तो माता अन्नपूर्णा खुद विराजती हैं। उन्होंने खुशी जताई कि काशी से चुराई गई माँ अन्नपूर्णा की प्रतिमा, एक शताब्दी के इंतजार के बाद अब फिर से काशी में स्थापित की जा चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लिए जनता जनार्दन ईश्वर का ही रूप है, हर भारतवासी ईश्वर का ही अंश है, इसलिए वो कुछ माँगना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने लिए नहीं, हमारे देश के लिए तीन संकल्प चाहते हैं- स्वच्छता, सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लिए निरंतर प्रयास। उन्होंने कहा कि गुलामी के लंबे कालखंड ने हम भारतीयों का आत्मविश्वास ऐसा तोड़ा कि हम अपने ही सृजन पर विश्वास खो बैठे। पीएम मोदी ने कहा, “आज हजारों वर्ष पुरानी इस काशी से, मैं हर देशवासी का आह्वान करता हूँ- पूरे आत्मविश्वास से सृजन करिए, इनोवेट करिए, इनोवेटिव तरीके से करिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “तीसरा एक संकल्प जो आज हमें लेना है, वो है आत्मनिर्भर भारत के लिए अपने प्रयास बढ़ाने का। ये आजादी का अमृतकाल है। हम आजादी के 75वें साल में हैं। जब भारत सौ साल की आजादी का समारोह बनाएगा, तब का भारत कैसा होगा, इसके लिए हमें अभी से काम करना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान वहाँ मौजूद लोगों को सम्बोधित किया। उन्होंने इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के भव्य स्वरूप को जनता को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभी मैं बाबा के साथ साथ नगर कोतवाल कालभैरव जी के दर्शन करके भी आ रहा हूँ, देशवासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूँ। काशी में कुछ भी खास हो, कुछ भी नया हो, उनसे पूछना आवश्यक है। मैं काशी के कोतवाल के चरणों में भी प्रणाम करता हूँ।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पुराणों में कहा गया है कि जैसे ही कोई काशी में प्रवेश करता है, सारे बंधनों से मुक्त हो जाता है। भगवान विश्वेश्वर का आशीर्वाद, एक अलौकिक ऊर्जा यहाँ आते ही हमारी अंतर-आत्मा को जागृत कर देती है उन्होंने कहा कि आप यहाँ जब आएंगे तो केवल आस्था के दर्शन नहीं करेंगे। आपको यहाँ अपने अतीत के गौरव का अहसास भी होगा। कैसे प्राचीनता और नवीनता एक साथ सजीव हो रही हैं, कैसे पुरातन की प्रेरणाएँ भविष्य को दिशा दे रही हैं, इसके साक्षात दर्शन विश्वनाथ धाम परिसर में हम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने काशी में मौजूद साधु-संतों और लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्वनाथ धाम का ये पूरा नया परिसर एक भव्य भवन भर नहीं है, ये प्रतीक है, हमारे भारत की सनातन संस्कृति का! ये प्रतीक है, हमारी आध्यात्मिक आत्मा का! ये प्रतीक है, भारत की प्राचीनता का, परम्पराओं का! भारत की ऊर्जा का, गतिशीलता का। उन्होंने कहा कि पहले यहाँ जो मंदिर क्षेत्र केवल तीन हजार वर्ग फीट में था, वो अब करीब 5 लाख वर्ग फीट का हो गया है। अब मंदिर और मंदिर परिसर में 50 से 75 हजार श्रद्धालु आ सकते हैं। यानि पहले माँ गंगा का दर्शन-स्नान, और वहाँ से सीधे विश्वनाथ धाम।

पीएम मोदी ने कहा, “काशी तो काशी है! काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है। जहां गंगा अपनी धारा बदलकर बहती हों, उस काशी को भला कौन रोक सकता है? आज भगवान शिव का प्रिय दिन सोमवार है। आज विक्रम संवत 2078 मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, एक नया इतिहास रच रही है। हमारा सौभाग्य है कि हम इस तिथि के साक्षी बन रहे हैं। मैं आज अपने हर उस श्रमिक भाई-बहन का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिसका पसीना इस भव्य परिसर के निर्माण में बहा है। कोरोना के विपरीत काल में भी, उन्होंने यहां पर काम रुकने नहीं दिया। मुझे अभी अपने इन श्रमिक साथियों से मिलने का, उनका आशीर्वाद लेने का सौभाग्य मिला है।”

उन्होंने कहा, “जब मैं बनारस आया था तब एक विश्वास लेकर आया था, विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों पर था। आज हिसाब-किताब का समय नहीं है। तब कुछ ऐसे लोग भी थे जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे कि कैसे होगा, नहीं होगा, ये मोदी जी जैसे बहुत आकर गए। मुझे बहुत आश्चर्य होता था, लेकिन ये जड़ता बनारस की नहीं थी, वो राजनीति थी। लेकिन काशी तो, काशी है। काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है। जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है।”

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व का सबसे लोकप्रिय नेता बताया। उन्होंने ‘नमामि शमीशान निर्वाण रूपं’ के साथ अपनी बात की शुरुआत की। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश धर्म के अलावा राज्यपाल आनंदबेन पटेल भी मौजूद थीं। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि आज माँ गंगा प्रफुल्लित हैं, काशी के कोतवाल भैरव आह्वादित हैं और बाबा विश्वनाथ की कृपा हम पर बरस रही है।

उन्होंने कहा कि ये काशी का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहाँ से सांसद बना कर भेजा गया। उन्होंने कहा कि सभी संत प्रधानमंत्री नरेंद्र के स्वागत के लिए आह्वादित हैं, क्योंकि हजारों वर्ष की तपस्या आज सच हो रही है। उन्होंने कहा कि 1777-80 के बीच में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने बाबा विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में योगदान दिया, महाराजा रंजीत सिंह ने भी इसके लिए काम किया और आज पूज्य संत जनों ने आज अपनी आँखों से इसे भव्य और दिव्य बनते हुए देखा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ककाशी विश्वनाथ मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद परिसर में पौधारोपण किया। बता दें कि हिन्दू धर्म में वनस्पति को देवी मानते हैं। इसके बाद पीएम मोदी ने उन श्रमजीवियों पर पुष्प वर्षा की, जिनकी मेहनत से काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण संपन्न हुआ है। उन श्रमिकों को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं भूले और उनसे बातें की। उन पर फूल बरसाए। साथ ही उनमें से कइयों से बात कर के हालचाल और नाम-पता भी पूछा।

इसके बाद उन्होंने सभी श्रमिकों के साथ बैठ कर फोटो भी खिंचवाई। इस दौरान हर-हर महादेव का उद्घाटन होता था। इस दौरान पुरोहितों ने उन्हें भेंट भी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ धाम मंदिर का एक स्वरूप भी उन्हें भेंट किया।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे। गंगा में डुबकी लगाने के बाद उन्होंने कलश में जल भरा, जिसके बाद मंदिर पहुँच कर आचार्यों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से काशी विश्वेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने गंगाजल, बेलपत्र और पुष्प लेकर पूजा-अर्चना की। जहाँ पुरोहित घंटी बजा रहे थे, वहीं पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ की आरती की। इस दौरान विश्व के कल्याण के लिए भी प्रार्थना की गई।

काशी में भगवा विश्वनाथ धाम कॉरिडोर में वहाँ के लोगों का भी कम योगदान नहीं है। वहाँ निर्माण के दौरान लगभग 500-600 घर हटाने पड़े, जिसके लिए लोगों ने स्वेच्छा से योगदान दिया और कोई केस-मुकदमा के बिना ही ये कार्य सफल हुआ। इसके उद्घाटन के लिए सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा की पूजा की। इसके बाद वो कपड़े बदल कर कलश में जल लेकर विश्वनाथ मंदिर पहुँचे, जहाँ जलाभिषेक किया।

जलाभिषेक के लिए जाते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुर्ता-धोती पहन रखी थी और एक गमछा रखा हुआ था। इस दौरान डमरू बजाते हुए पुरोहितों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान लगातार भक्ति गाने बज रहे थे और मंत्रोच्चार हो रहा था। इस दौरान सुरक्षा की काफी कड़ी व्यवस्था है और आसपास के सभी ऊँची जगहों पर पुलिस तैनात थी। बाबा विश्वनाथ धाम मंदिर में आचार्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भगवान शिव की पूजा संपन्न कराई।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा में डुबकी लगाई और जलाभिषेक किया। इस दौरान पीएम मोदी को लाल वस्त्रों में नदी में डुबकी लगा कर मंत्रोच्चार करते हुए देखा गया। इस दौरान उन्होंने अपने हाथों में माला और लोटा ले रखा था। इसके बाद पीएम मोदी ने मंदिर में जाकर अंजलि दी। मुख्य मंदिर परिसर में नया गलियारा बनाया गया है, जहाँ दीवारों में भगवा शिव से सम्बंधित श्लोक और इतिहास लिखा हुआ है।

इस दौरान पूरे काशी को सजाया गया है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग वहाँ उपस्थित थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उत्तर प्रदेश मत्रिमंडल के कई सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल हैं। कहा जाता है कि काशी में ही भगवान विष्णु ने भी तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान शिव के मस्तक हिलाने के कारण उनके कान से जो कर्णिका गिरी, उसे ही मणिकर्णिका कहा गया। काशी में ‘आनंद वन’ भी है, जिसके बारे में भगवान शिव ने कहा था कि ऐसी जगह विश्व में कहीं और नहीं होगी।

‘मृत्यु की कामना…’: PM मोदी के लिए अखिलेश यादव का ‘आखिरी समय’ वाला बयान, लोगों ने कहा – गिद्ध के कोसने से गाय नहीं मरती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने वाराणसी (Varanasi) में आज (सोमवार, 13 दिसंबर 2021) काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi Vishwanath corridor) का उद्घाटन किया। लेकिन दूसरी ओर समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इटावा में प्रधानमंत्री को लेकर विवादित बयान देते हुए कहा कि बनारस रहने के लिए अच्छी जगह है। आखिरी समय में वहीं रहा जाता है। उनके इस बयान के बाद सियासी बवाल होना तय था। बीजेपी उनपर जमकर निशाना साध रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अखिलेश यादव सोमवार को इटावा के सैफई में थे। यहाँ जब उनसे पीएम मोदी के वाराणसी दौरे को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एक महीना क्या 3 महीने तक बनारस में रहें। वो जगह रहने के लिए अच्छी है। आखिरी समय में वहीं रहा जाता है। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

अखिलेश के बयान पर दिल्ली (Delhi) से भाजपा नेता कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) ने ट्वीट किया, “गिद्धों के कोसने से गाय नहीं मरा करती अखिलेश बाबू। मोदी जी के साथ महादेव का, भारत माता का और हर सच्चे देशभक्त का आशीर्वाद है, तुम्हारी बददुआएँ ऐसे नहीं करने वाली।”

वहीं मुंबई (Mumbai) में भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नाखुआ (Suresh Nakhua) ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उनके संस्कारों पर सवाल उठाया। उन्होंने ट्वीट किया, “जो व्यक्ति अपने पिता को अपमानित कर सकता है, उसके लिए किसी की भी मृत्यु की कामना करना कोई बड़ी बात नहीं।”

सपा प्रमुख के बेतुके बयान पर भाजपा कार्यकर्ता प्रीती गाँधी (Preeti Gandhi) ने सोशल मीडिया के जरिए हमला किया। उन्होने ट्वीट किया, “अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के लिए मृत्यु की कामना करके @yadavakhilesh ने अपने स्तर का प्रमाण दिया है। राष्ट्र की समृद्ध संस्कृति को पुनर्जीवित करने का पावन कार्य कर रहे प्रधानमंत्री मोदी के लिए ऐसे घिनौने विचारों वाले व्यक्ति को मुख्यमंत्री पद का दावा करने का कोई हक नहीं है!”

भाजपा प्रवक्ता शहजाद जयहिंद (Shehjad jaihind) ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा, “जिनकी मानसिकता और कार्य औरंगजेब वाली हो-उनसे इसी भाषा की उम्मीद है…जो अपने पिता का सम्मान न कर पाए वो किसी और की क्या करेंगे।”

गौरतलब है कि अखिलेश यादव के इस बयान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मृत्यु की कामना’ के तौर पर देखा जा रहा है।

सुनसान इलाका देख ऑटो चालक जावेद और रहमान ने 16 साल की नाबालिग से किया गैंगरेप, जान से मारने की धमकी देकर हुए फरार

छत्तीसगढ़ के रायपुर में ऑटो चालक जावेद और रहमान अली को 16 साल की एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। घटना शुक्रवार (10 दिसंबर) की है। नाबालिग लड़की की शिकायत पर पुलिस ने पॉक्सो ऐक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को लड़की कहीं जाने के लिए घर से निकली थी। वह जाकर ऑटो में बैठ गई। उस ऑटो में दोनों आरोपी पहले से बैठे हुए थे। लड़की को ऑटो में अकेला बैठाकर देखकर आरोपी उसे ले जाने लगे। जब लड़की ने अन्य सवारियों को बैठाने के बारे में पूछा तो आरोपियों ने कहा उसमें देरी होगी और उसे जल्दी छोड़ देंगे।

आरोपी नाबालिग को लेकर कमल विहार चले गए। सुनसान सड़कें और इलाका देखकर आरोपी उससे छेड़छाड़ करने लगे। लड़की ने जब विरोध किया तो उसे जान से मारने की धमकी देकर पास के खाली पड़े प्लॉट में ले जाकर बारी-बारी से दुष्कर्म किया। कमल विहार नई बसावट वाला सुनसान इलाका है। यहाँ की सड़कें आमतौर पर खाली रहती हैं।

दुष्कर्म करने के बाद आरोपी नाबालिग को पचपेड़ा के पास छोड़कर भाग गए। इस दौरान उन्होंने शिकायत करने पर लड़की और उसके परिवार वालों को जान से मारने की धमकी दी और फिर भाग गए। वहाँ से लड़की 3 किलोमीटर दूर स्थित अपने घर तक किसी तरह पहुँची। घर पहुँचकर उसने अपने परिजनों को सारी बात बताई। इसके बाद परिजन उसे लेकर थाने पहुँचे।

शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपियों का मोबाइल नंबर और ऑटो को ट्रैस करना शुरू कर दिया। आरोपियों की जानकारी मिलते ही पुलिस उनके घरों में दबिश देकर दबोच लिया। रायपुर पुलिस कोतवाली थाने की पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने बताया कि वे दोनों लड़की को पहले से जानते थे।

पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस ने दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी जावेद और रहमान अली को कोर्ट में पेश किया, जहाँ दोनों को जेल भेज दिया गया।

‘दीन का काम करता है तबलीगी जमात’: सऊदी अरब ने लगाया प्रतिबंध तो नाराज़ हुआ दारुल उलूम देवबंद, कहा – किया जा रहा बदनाम

दारुल उलूम देवबंद ने इस्लामिक मिशनरी आंदोलन तबलीगी जमात (tablighi Jamat) को ‘आतंकवाद का प्रवेश द्वार’ बताते हुए उस पर प्रतिबंध लगाने के सऊदी अरब सरकार के फैसले का विरोध किया है। देवबंद के मुख्य मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने सऊदी अरब से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि इससे मुस्लिमों के लिए गलत संदेश जाएगा।

यह पहली बार है जब देवबंद के इस्लामिक मदरसा ने सऊदी सरकार की खुलेआम निंदा की है। नोमानी ने तबलीगी जमात पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। साथ ही दावा किया कि जमात दीन (विश्वास) फैलाने का काम करने का काम करता है। इसके साथ ही देवबंद ने सऊदी सरकार के फैसले को पश्चिमी देशों की साजिश करार दिया है। उसका आरोप है कि जमात को बदनाम किया जा रहा है।

वहीं इस मामले में दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मुख्यालय ने इस मामले में कहा है कि सऊदी का निर्णय प्रभावशाली पश्चिमी ताकतों के द्वारा लिया गया है, जो कि रियाद की मुस्लिम उम्मा से सदियों पुराने जुड़ाव को खत्म करना चाहता है। तब्लीगी जमात के प्रवक्ता समीरुद्दीन कासमी ने अपने सदस्यों का बचाव किया और कहा कि हमारा आतंकवाद से कोई सम्बन्ध नहीं है।

100 पहले आया अस्तित्व में

देवबंद के मोहतमिम अब्दुल कासिम नोमानी का कहना है कि दारुल उलूम के उस्ताद रहे हजरत मौलाना हसन के शिष्य मौलाना मोहम्मद इलयास ने 100 साल पहले तबलीगी जमात की स्थापना की थी।

सऊदी सरकार का फैसला

गौरतलब है कि 11 दिसंबर 2021 को सऊदी अरब ने तबलीगी जमात और दाबा को ‘आतंकवाद का द्वार’ करार देते हुए अपने यहाँ की मस्जिदों के मौलानाओं को शुक्रवार को दिए जाने वाले उपदेश के दौरान इन दोनों संगठनों के बारे में जनता को चेताने को कहा था। सऊदी के इस्लामिक मंत्रालय ने तबलीगी जमात को समाज के लिए खतरा माना है।

वाराणसी में भव्य गंगा आरती के साक्षी बने PM मोदी, ‘शिव दीपोत्सव’ पर जगमग हुई काशी

काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर का उद्घाटन करने पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाम को गंगा आरती में हिस्सा लिया। उससे पहले उन्होंने ‘विवेकानंद क्रूज’ पर अन्य अतिथियों के साथ बातचीत की। इस दौरान पूरे घाट पर असंख्य दीप जलते रहे और आसपास के इलाके को झालरों से सजाया गया था। रात के समय काशी विश्वनाथ मंदिर का गर्भगृह और उसका शिखर देखते ही बन रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में इससे पहले भी कई बार गंगा आरती के साक्षी बने हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विवेकानंद क्रूज’ पर सवार होकर काशी के कई घाटों के सौंदर्य को रात के समय देखा। ‘अस्सी घाट’ पर माँ गंगा की महा आरती हुई। गंगा आरती का पूरा वीडियो यहाँ देखें:

जानिए आज काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान क्या-क्या हुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी में गंगा नदी में ‘अलकनंदा क्रूज’ में सवार होकर भ्रमण किया। इस दौरान आसपास हजारों की संख्या में पक्षी विचरण कर रहे थे। पीएम मोदी ने इस दौरान हाथ हिला कर लोगों का अभिवादन भी स्वीकार किया। ललिता घाट से ‘अलकनंदा क्रूज’ चली, जो धीरे-धीरे गंगा घाट की तरफ आगे बढ़ी। इस दौरान घाटों की हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। अस्सी और मणिकर्णिका से लेकर दशाश्वमेव तक, वाराणसी में कई घाट हैं।

आधे घंटे से भी अधिक समय तक दोनों नेताओं ने ‘अलकनंदा क्रूज’ में यात्रा की। इस दौरान वहाँ सुरक्षा व्यवस्था भी काफी कड़ी रही। बता दें कि अब तक कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी का दौरा किया है। उन्होंने गंगा में घूमते हुए ही आसपास के विकास परियोजनाओं का भी अवलोकन किया और उनके बारे में जाना। वीडियो में आप देख सकते हैं कि गंगा नदी का पानी भी काफी स्वच्छ नजर आ रहा है। ‘अलकनंदा क्रूज’ से दोनों ही नेता संत रविदास घाट पर पहुँचे।

बता दें कि संत रविदास ने ही ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ वाली कहावत कही थी।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में कई विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर भी पुष्प अर्पित की, जिनका वाराणसी के जीर्णोद्धार में अहम योगदान था। वाराणसी में नए कॉरिडोर के तहत कई भवन बनाए गए हैं, जिनका पीएम मोदी ने निरीक्षण किया। पीएम मोदी ने पूरे परिसर का दौरा किया।

वाराणसी में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई भवन बनाए गए हैं, जहाँ उन्हें विशेष सुविधाएँ मिलेंगी। गंगा नदी के चैनल की तरफ कई विशिष्ट भवन बनाए गए हैं। इस दौरान उन्होंने फिर से गंगा नदी के किनारों का दौरा किया और विकास परियोजनाओं को देखा। इस दौरान सीएम योगी उन्हें लगातार बताते रहे कि आम लोग दर्शन के लिए कैसे आएँगे और दिव्यांगों के लिए क्या खास व्यवस्थाएँ हैं। गंगा नदी के किनारे बनी नई सीढ़ियों से उतर कर दोनों नेताओं ने अवलोकन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा पर भी श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। ये प्रतिमा मंदिर परिसर में गंगा नदी के पास स्थापित की गई है। यहाँ आदि शंकराचार्य, भारत माता और अहिल्याबाई होल्कर – ये तीन प्रतिमाएँ हैं। आदिगुरु की ‘गंगा स्तुति’ काफी लोकप्रिय है। कहते हैं भगवान शिव ने उन्हें काशी में दर्शन देकर केदारनाथ जाने को कहा था। ऊपर से पीएम मोदी ने गंगा नदी तट का अवलोकन किया। दिव्यांगों के दर्शन के लिए अलग से एस्कलेटर बनेंगे।

इस दौरान आसपास अपने-अपने छतों पर खड़े लोग भी उन्हें देख रहे थे। इसके बाद पीएम मोदी अपनी गाड़ी से ललिता घाट की तरफ पहुँचे। इसके बाद उन्होंने लंका घाट से अलकनंदा क्रूज की तरफ प्रस्थान किया। ये वो जगह है, जहाँ माँ गंगा उत्तरवाहिनी, अर्थात अर्ध-चंद्राकर हो जाती है। कहा जाता है कि गंगासागर में जाने से पहले भगवान शिव से मिलने के लिए माँ गंगा ने ऐसा किया। वीडियो में ऊपर आप इन नए निर्माणों को देख सकते हैं। पीएम मोदी ने इससे पहले श्रम साधकों के साथ बैठ कर प्रसाद भी ग्रहण किया।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ मौजूद साधु-संतों, नेताओं और आम जनता को सम्बोधित करते हुए कहा कि वो हमारे कारीगर, हमारे सिविल इंजीनयरिंग से जुड़े लोग, प्रशासन के लोग, वो परिवार जिनके यहाँ घर थे सभी का मैं अभिनंदन करते हैं। उन्होंने इन सबके साथ यूपी सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम परियोजना को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे आततायियों ने इस नगरी पर आक्रमण किए, इसे ध्वस्त करने के प्रयास किए! औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। उन्होंने कहा कि जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की, जिसने संस्कृति को कट्टरता से कुचलने की कोशिश की! लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है। बकौल पीएम मोदी, यहाँ अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं! अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारी एकता की ताकत का अहसास करा देते हैं। और अंग्रेजों के दौर में भी, हेस्टिंग का क्या हश्र काशी के लोगों ने किया था, ये तो काशी के लोग जानते ही हैं।

उन्होंने कहा, “काशी शब्दों का विषय नहीं है, संवेदनाओं की सृष्टि है। काशी वो है- जहाँ जागृति ही जीवन है! काशी वो है- जहाँ मृत्यु भी मंगल है! काशी वो है- जहां सत्य ही संस्कार है! काशी वो है- जहाँ प्रेम ही परंपरा है।बनारस वो नगर है जहाँ से जगद्गुरु शंकराचार्य को श्रीडोम राजा की पवित्रता से प्रेरणा मिली, उन्होंने देश को एकता के सूत्र में बांधने का संकल्प लिया। ये वो जगह है जहाँ भगवान शंकर की प्रेरणा से गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस जैसी अलौकिक रचना की।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “यहीं की धरती सारनाथ में भगवान बुद्ध का बोध संसार के लिए प्रकट हुआ। समाजसुधार के लिए कबीरदास जैसे मनीषी यहाँ प्रकट हुए। समाज को जोड़ने की जरूरत थी तो संत रैदास जी की भक्ति की शक्ति का केंद्र भी ये काशी बनी। काशी अहिंसा, तप की प्रतिमूर्ति चार जैन तीर्थंकरों की धरती है। राजा हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा से लेकर वल्लभाचार्य, रामानंद जी के ज्ञान तक चैतन्य महाप्रभु, समर्थगुरु रामदास से लेकर स्वामी विवेकानंद, मदनमोहन मालवीय तक कितने ही ऋषियों, आचार्यों का संबंध काशी की पवित्र धरती से रहा है।”

पीएम मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के चरण यहाँ पड़े थे। रानी लक्ष्मी बाई से लेकर चंद्रशेखर आज़ाद तक, कितने ही सेनानियों की कर्मभूमि-जन्मभूमि काशी रही है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद, मुंशी प्रेमचंद, पंडित रविशंकर, और बिस्मिल्लाह खान जैसी प्रतिभाओं को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस स्मरण को कहाँ तक ले जाया जाए। पीएम मोदी ने वाराणसी में कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण, भारत को एक निर्णायक दिशा देगा, एक उज्जवल भविष्य की तरफ ले जाएगा। ये परिसर, साक्षी है हमारे सामर्थ्य का, हमारे कर्तव्य का। अगर सोच लिया जाए, ठान लिया जाए, तो असंभव कुछ भी नहीं।

बकौल पीएम मोदी, हर भारतवासी की भुजाओं में वो बल है, जो अकल्पनीय को साकार कर देता है। हम तप जानते हैं, तपस्या जानते हैं, देश के लिए दिन रात खपना जानते हैं। चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों ना हो, हम भारतीय मिलकर उसे परास्त कर सकते हैं। आज का भारत अपनी खोई हुई विरासत को फिर से सँजो रहा है। यहां काशी में तो माता अन्नपूर्णा खुद विराजती हैं। उन्होंने खुशी जताई कि काशी से चुराई गई माँ अन्नपूर्णा की प्रतिमा, एक शताब्दी के इंतजार के बाद अब फिर से काशी में स्थापित की जा चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लिए जनता जनार्दन ईश्वर का ही रूप है, हर भारतवासी ईश्वर का ही अंश है, इसलिए वो कुछ माँगना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो अपने लिए नहीं, हमारे देश के लिए तीन संकल्प चाहते हैं- स्वच्छता, सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लिए निरंतर प्रयास। उन्होंने कहा कि गुलामी के लंबे कालखंड ने हम भारतीयों का आत्मविश्वास ऐसा तोड़ा कि हम अपने ही सृजन पर विश्वास खो बैठे। पीएम मोदी ने कहा, “आज हजारों वर्ष पुरानी इस काशी से, मैं हर देशवासी का आह्वान करता हूँ- पूरे आत्मविश्वास से सृजन करिए, इनोवेट करिए, इनोवेटिव तरीके से करिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “तीसरा एक संकल्प जो आज हमें लेना है, वो है आत्मनिर्भर भारत के लिए अपने प्रयास बढ़ाने का। ये आजादी का अमृतकाल है। हम आजादी के 75वें साल में हैं। जब भारत सौ साल की आजादी का समारोह बनाएगा, तब का भारत कैसा होगा, इसके लिए हमें अभी से काम करना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान वहाँ मौजूद लोगों को सम्बोधित किया। उन्होंने इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के भव्य स्वरूप को जनता को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभी मैं बाबा के साथ साथ नगर कोतवाल कालभैरव जी के दर्शन करके भी आ रहा हूँ, देशवासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूँ। काशी में कुछ भी खास हो, कुछ भी नया हो, उनसे पूछना आवश्यक है। मैं काशी के कोतवाल के चरणों में भी प्रणाम करता हूँ।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पुराणों में कहा गया है कि जैसे ही कोई काशी में प्रवेश करता है, सारे बंधनों से मुक्त हो जाता है। भगवान विश्वेश्वर का आशीर्वाद, एक अलौकिक ऊर्जा यहाँ आते ही हमारी अंतर-आत्मा को जागृत कर देती है उन्होंने कहा कि आप यहाँ जब आएंगे तो केवल आस्था के दर्शन नहीं करेंगे। आपको यहाँ अपने अतीत के गौरव का अहसास भी होगा। कैसे प्राचीनता और नवीनता एक साथ सजीव हो रही हैं, कैसे पुरातन की प्रेरणाएँ भविष्य को दिशा दे रही हैं, इसके साक्षात दर्शन विश्वनाथ धाम परिसर में हम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने काशी में मौजूद साधु-संतों और लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्वनाथ धाम का ये पूरा नया परिसर एक भव्य भवन भर नहीं है, ये प्रतीक है, हमारे भारत की सनातन संस्कृति का! ये प्रतीक है, हमारी आध्यात्मिक आत्मा का! ये प्रतीक है, भारत की प्राचीनता का, परम्पराओं का! भारत की ऊर्जा का, गतिशीलता का। उन्होंने कहा कि पहले यहाँ जो मंदिर क्षेत्र केवल तीन हजार वर्ग फीट में था, वो अब करीब 5 लाख वर्ग फीट का हो गया है। अब मंदिर और मंदिर परिसर में 50 से 75 हजार श्रद्धालु आ सकते हैं। यानि पहले माँ गंगा का दर्शन-स्नान, और वहाँ से सीधे विश्वनाथ धाम।

पीएम मोदी ने कहा, “काशी तो काशी है! काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है। जहां गंगा अपनी धारा बदलकर बहती हों, उस काशी को भला कौन रोक सकता है? आज भगवान शिव का प्रिय दिन सोमवार है। आज विक्रम संवत 2078 मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, एक नया इतिहास रच रही है। हमारा सौभाग्य है कि हम इस तिथि के साक्षी बन रहे हैं। मैं आज अपने हर उस श्रमिक भाई-बहन का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूँ जिसका पसीना इस भव्य परिसर के निर्माण में बहा है। कोरोना के विपरीत काल में भी, उन्होंने यहां पर काम रुकने नहीं दिया। मुझे अभी अपने इन श्रमिक साथियों से मिलने का, उनका आशीर्वाद लेने का सौभाग्य मिला है।”

उन्होंने कहा, “जब मैं बनारस आया था तब एक विश्वास लेकर आया था, विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों पर था। आज हिसाब-किताब का समय नहीं है। तब कुछ ऐसे लोग भी थे जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे कि कैसे होगा, नहीं होगा, ये मोदी जी जैसे बहुत आकर गए। मुझे बहुत आश्चर्य होता था, लेकिन ये जड़ता बनारस की नहीं थी, वो राजनीति थी। लेकिन काशी तो, काशी है। काशी तो अविनाशी है। काशी में एक ही सरकार है। जिनके हाथों में डमरू है, उनकी सरकार है।”

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम मंदिर कॉरिडोर के उद्घाटन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व का सबसे लोकप्रिय नेता बताया। उन्होंने ‘नमामि शमीशान निर्वाण रूपं’ के साथ अपनी बात की शुरुआत की। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश धर्म के अलावा राज्यपाल आनंदबेन पटेल भी मौजूद थीं। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि आज माँ गंगा प्रफुल्लित हैं, काशी के कोतवाल भैरव आह्वादित हैं और बाबा विश्वनाथ की कृपा हम पर बरस रही है।

उन्होंने कहा कि ये काशी का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यहाँ से सांसद बना कर भेजा गया। उन्होंने कहा कि सभी संत प्रधानमंत्री नरेंद्र के स्वागत के लिए आह्वादित हैं, क्योंकि हजारों वर्ष की तपस्या आज सच हो रही है। उन्होंने कहा कि 1777-80 के बीच में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने बाबा विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में योगदान दिया, महाराजा रंजीत सिंह ने भी इसके लिए काम किया और आज पूज्य संत जनों ने आज अपनी आँखों से इसे भव्य और दिव्य बनते हुए देखा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ककाशी विश्वनाथ मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद परिसर में पौधारोपण किया। बता दें कि हिन्दू धर्म में वनस्पति को देवी मानते हैं। इसके बाद पीएम मोदी ने उन श्रमजीवियों पर पुष्प वर्षा की, जिनकी मेहनत से काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण संपन्न हुआ है। उन श्रमिकों को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं भूले और उनसे बातें की। उन पर फूल बरसाए। साथ ही उनमें से कइयों से बात कर के हालचाल और नाम-पता भी पूछा।

इसके बाद उन्होंने सभी श्रमिकों के साथ बैठ कर फोटो भी खिंचवाई। इस दौरान हर-हर महादेव का उद्घाटन होता था। इस दौरान पुरोहितों ने उन्हें भेंट भी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ धाम मंदिर का एक स्वरूप भी उन्हें भेंट किया।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे। गंगा में डुबकी लगाने के बाद उन्होंने कलश में जल भरा, जिसके बाद मंदिर पहुँच कर आचार्यों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से काशी विश्वेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने गंगाजल, बेलपत्र और पुष्प लेकर पूजा-अर्चना की। जहाँ पुरोहित घंटी बजा रहे थे, वहीं पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ की आरती की। इस दौरान विश्व के कल्याण के लिए भी प्रार्थना की गई।

काशी में भगवा विश्वनाथ धाम कॉरिडोर में वहाँ के लोगों का भी कम योगदान नहीं है। वहाँ निर्माण के दौरान लगभग 500-600 घर हटाने पड़े, जिसके लिए लोगों ने स्वेच्छा से योगदान दिया और कोई केस-मुकदमा के बिना ही ये कार्य सफल हुआ। इसके उद्घाटन के लिए सोमवार (13 दिसंबर, 2021) को वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा की पूजा की। इसके बाद वो कपड़े बदल कर कलश में जल लेकर विश्वनाथ मंदिर पहुँचे, जहाँ जलाभिषेक किया।

जलाभिषेक के लिए जाते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुर्ता-धोती पहन रखी थी और एक गमछा रखा हुआ था। इस दौरान डमरू बजाते हुए पुरोहितों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान लगातार भक्ति गाने बज रहे थे और मंत्रोच्चार हो रहा था। इस दौरान सुरक्षा की काफी कड़ी व्यवस्था है और आसपास के सभी ऊँची जगहों पर पुलिस तैनात थी। बाबा विश्वनाथ धाम मंदिर में आचार्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भगवान शिव की पूजा संपन्न कराई।

काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए वाराणसी पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ गंगा में डुबकी लगाई और जलाभिषेक किया। इस दौरान पीएम मोदी को लाल वस्त्रों में नदी में डुबकी लगा कर मंत्रोच्चार करते हुए देखा गया। इस दौरान उन्होंने अपने हाथों में माला और लोटा ले रखा था। इसके बाद पीएम मोदी ने मंदिर में जाकर अंजलि दी। मुख्य मंदिर परिसर में नया गलियारा बनाया गया है, जहाँ दीवारों में भगवा शिव से सम्बंधित श्लोक और इतिहास लिखा हुआ है।

इस दौरान पूरे काशी को सजाया गया है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग वहाँ उपस्थित थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उत्तर प्रदेश मत्रिमंडल के कई सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल हैं। कहा जाता है कि काशी में ही भगवान विष्णु ने भी तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान शिव के मस्तक हिलाने के कारण उनके कान से जो कर्णिका गिरी, उसे ही मणिकर्णिका कहा गया। काशी में ‘आनंद वन’ भी है, जिसके बारे में भगवान शिव ने कहा था कि ऐसी जगह विश्व में कहीं और नहीं होगी।

इटली की कंपनी के 3 बैग, फ्रेंच कंपनी के जूते और हीरे की ईयर रिंग: जैकलीन फर्नांडिस को तिहाड़ी सुकेश से मिले ये गिफ्ट्स, ED का खुलासा

सुकेश चंद्रशेखर और 200 करोड़ रुपए की रंगदारी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को लेकर कई खुलासे हुए हैं। इस चार्टशीट के मुताबिक रंगदारी मामले के मास्टरमाइंड सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन को करीब 10 करोड़ रुपए के गिफ्ट दिए थे। सुकेश ने जैकलीन को एक विदेशी घोड़ा, गुच्ची के तीन डिजाइनर बैग, शेनल और गुच्ची (Gucci) के कपड़े, लुई वीटॉन (Louis Vuitton) के शूज, दो डायमंड ईयररिंग, मल्टीस्टोन ईयररिंग और दो हरमेस ब्रेसलेट गिफ्ट किए थे, जिनकी कीमत करोड़ों रुपए में हैं।

इसके अलावा सुकेश ने उन्हें एक मिनी कूपर कार भी गिफ्ट की थी, जो उन्होंने वापस कर दी थी। सुकेश ने जैकलीन के जीजा वारेन फर्नांडिस के अकाउंट में भी 15,00,000 रुपए ट्रांसफर किए थे, जो ऑस्ट्रेलिया में रहता है। जैकलीन ने बताया कि इसके अलावा सुकेश ने जैकलीन को 15 लाख रुपए कैश भी भेजे थे।

ईडी की चार्ज शीट के अनुसार, जैकलीन फर्नांडिस ने 30 अगस्त और 20 अक्टूबर को रंगदारी मामले में जो अपना बयान दर्ज करवाया था, उसमें उन्होंने स्वीकार किया कि सुकेश ने उन्हें करोड़ों के गिफ्ट दिए थे। पूछताछ के दौरान जैकलीन ने बताया कि वह श्रीलंका की रहने वाली है और उसके माता-पिता बहरीन में रहते हैं। सुकेश चंद्रशेखर दिसंबर जनवरी साल 2021 से लगातार फोन कॉल कर संपर्क करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जैकलीन ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जैकलिन के मेकअप आर्टिस्ट शान से सुकेश चंद्रशेखर ने फोन कॉल पर संपर्क किया और खुद को एक बड़ा गवर्नमेंट ऑफिशियल बताया।

पिंकी ईरानी नाम की महिला ने जैकलीन के मेकअप आर्टिस्ट से सुकेश की मुलाकात करवाई। यही वो महिला है जो सुकेश के कहने पर ब्रांडेड कंपनी के शोरूम्स में जाया करती थी और वीडियो कॉल के जरिए वहाँ से जैकलीन के लिए लाखों के महँगे गिफ्ट खरीदा करती थी।

गौरतलब है कि सुकेश ने बिजनेस मैन बनकर जैकलीन को अपने जाल में फँसाया था। इसी कारण से प्रवर्तन निदेशालय ने जैकलीन को पूछताछ के लिए बुलाया था। वो तिहाड़ जेल से स्पूफिंग के जरिए जैकलीन को कॉल करता था। इसके अलावा उन्हें महँगे गिफ्ट, फूल और चॉकलेट भेजता था। प्रवर्तन निदेशालय के पास उसके दो दर्जन से भी अधिक कॉल्स के रिकॉर्ड मौजूद हैं।

बता दें कि चंद्रशेखर और उनकी पत्नी पॉल के खिलाफ 200 करोड़ रुपए से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। आरोप पत्र में दावा किया गया था कि चंद्रशेखर ने जैकलीन को कई महँगे उपहार दिए थे। चंद्रशेखर पर फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रवर्तक शिविंदर मोहन सिंह की पत्नी अदिति सिंह समेत कुछ लोगों से भी धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। इसी महीने ईडी ने 5 दिसंबर को जैकलीन को मुंबई हवाई अड्डे पर विदेश जाने से रोक दिया था।

लड़कों से करना था फ्लर्ट, बेटी की आईडी चुराकर कॉलेज में माँ ने ले लिया एडमिशन: दो साल तक करती रही डेट

अमेरिका के मिसौरी में एक महिला ने कॉलेज के लड़कों से फ्लर्ट करने के लिए अपनी बेटी का कुछ इस तरह से इस्तेमाल किया कि सुनकर हर कोई हैरान है। दरअसल, 48 वर्षीय महिला ने अपनी ही बेटी का आईडी कार्ड चुरा कर ना केवल कॉलेज में एडमिशन लिया, बल्कि कॉलेज के यंग लड़कों के साथ डेट भी किया। इतना ही नहीं, अपनी बेटी के आईडी कार्ड की मदद से उसने लाखों रुपए का लोन और वित्तीय सहायता भी ले लिया।

‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ में छपी खबर के मुताबिक, इस महिला का नाम लौरा ऑग्लेस्बी है। उसकी उम्र 48 वर्ष है। लौरा ऑग्लेस्बी ने सुनियोजित तरीके से इस काम को अंजाम दिया। अपने प्लान के जरिए उसने सरकार और आसपास के लोगों तक को चकमा दे दिया। साल 2016 में लौरा ने यह सब करना शुरू किया और दो साल तक यह सिलसिला चलता रहा, लेकिन इस महिला का फर्जीवाड़ा आखिरकार पकड़ा गया। जब उसकी चोरी पकड़ी गई तो 25,000 डॉलर (19 लाख रुपए) का जुर्माना लगा और साथ के साथ जेल की भी सजा हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लौरा नाम की इस महिला ने बेटी की आईडी कार्ड चुराकर साउथ वेस्ट बेपिस्ट यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया। इसके लिए महिला ने बेटी की सोशल सिक्युरिटी कार्ड का इस्तेमाल किया था। यही नहीं, इस महिला ने ड्राइविंग लाइसेंस भी अपनी बेटी के नाम पर ले लिया।

लौरा ने कॉलेज में एडमिशन लेने के बाद एक 20 वर्षीय लड़के को डेट करना शुरू कर दिया। महिला ने उसे अपनी उम्र 22 साल बताती थी। इसके बाद लौरा ने स्नैपचैट पर भी बेटी के नाम पर फर्जी अकाउंट बना लिया। यही नहीं, वह अपनी बेटी की तरह ही ड्रेसअप भी करने लगी। यंग लड़कों को डेट करने के लिए लॉरा हैवी मेकअप का सहारा लेती थी। पकड़े जाने से पहले तक लॉरा माउंटेन व्यू में एक कपल के साथ रहती थी। उसने उन दोनों को अपने झाँसे में ले लिया था। महिला ने कपल को बताया था कि वह एक बुरे रिलेशनशिप से निकलकर आई है।

आरोपित महिला ने अपनी बेटी की आईडी का इस्तेमाल करते हुए करीब 5 लाख रुपए का लोन लिया था। जब इस फ्रॉड का भंडाफोड़ हुआ, तब लौरा इस बात से इनकार करती रही। लेकिन जैसे ही सख्ती बरती गई, उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। कोर्ट ने लौरा को इस हरकत के लिए करीब 18 लाख रुपए वापस लौटाने के साथ-साथ 5 साल तक की कैद की सजा सुनाई है।

पेन किलर ज्यादा लेने से साइड इफेक्ट हो गया था: ‘शराब पी कर एंकरिंग’ वाले Video पर दीपक चौरसिया

सीडीएस जनरल बिपिन रावत की हेलीकॉप्टर हादसे में हुई मृत्यु की खबर पढ़ते हुए न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया का जो वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर सामने आया उसने एंकर की छवि को खासा धूमिल किया। कई लोगों ने इस वीडियो को देख उनका मजाक उड़ाया और कई ने सवाल खड़े किए कि आखिर पत्रकारिता किस ओर जा रही है। अब इन्हीं सवालों और आलोचनाओं के बीच दीपक चौरसिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से जवाब जारी किया है।

अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि जो दिख रहा है वो हकीकत नहीं है। वह लिखते हैं, “आप सभी को वीडियो देखकर जो लग रहा है वो पूरा सच नहीं है। सच ये है कि मेरे घर में शादी थी और बारात में ज्यादा डांस करने के कारण मेरे घुटने की पुरानी चोट दर्द देने लगी। शो चूँकी जिस मसले पर था उसे मैं छोड़ना नहीं चाहता था और शो पूरी तरह से ठीक जाए इसलिए मैंने पेन किलर खा ली। आपको बता दूँ मेरे घुटने में हेयरलाइन फ़्रैक्चर है।”

उन्होंने कहा, “मेरी गलती ये थी कि पेन किलर ज्यादा मात्रा में लेने से साइड इफेक्ट होता है, ये बात मुझे नहीं पता थी। इसलिए पेन किलर खाकर मेरी तकलीफ कम होने की बजाए बढ़ गई। वीडियो देखकर तरह तरह की बातें बनाई गई, जो सच नहीं है। मुझे पत्रकारिता में 25 साल से ज्यादा हो चुके हैं। इसलिए मुझे किसी से पत्रकारिता के एथिक्स सीखने की जरूरत नहीं है।”

आगे उन्होंने अपने चाहने वालों से माफी माँगी और उन लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनकी चिंता की। इसके बाद उन्होंने अपने दर्शकों से प्यार और सहयोग की भी कामना की।

गौरतलब है कि दीपक चौरसिया ‘देश की बहस’ नाम से एक शो करते हैं। यह शो प्राइम टाइम पर 8:30 बजे न्यूज़ नेशन पर आता है। 9 दिसंबर को जब सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत अन्य सैन्य अधिकारियों का शव दिल्ली लाया जा रहा था, तब उन्होंने इस शो को होस्ट किया था। इस दौरान उनकी जुबान कंट्रोल में नहीं थीं। वह क्या बोल रहे थे कुछ नहीं पता चल रहा था। ऐसी स्थिति में उन्हें शो से हटा दिया गया और देखने वालों ने माना कि उन्होंने पीने के बाद शो को होस्ट किया। उन पर आरोप भी लगे थे कि वो शराब पीने के बाद सीडीएस को श्रद्धांजलि दे रहे थे।

राहुल गाँधी का ‘हिंदूवाद’ बन रहा कॉन्ग्रेस की गले का फाँस: ओवैसी ने हिंदुत्व के लिए ग्राउंड तैयार करने का आरोप लगाया, मजीद मेमन ने कहा- अब वे सेक्युलर नहीं

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा हिंदू और हिंदुत्व को परिभाषा करना गले का फाँस गया है। हिंदुत्ववादियों को सत्ता से बाहर कर हिंदुओं को सत्ता में लाने वाले के उनके बयान पर सियासत तेज हो गई है। उनके बयान के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राहुल गाँधी पर आरोप लगाया कि अब वे बहुसंख्यकवाद की फसल काटना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत हिंदुओं का नहीं, बल्कि यहाँ रहने वाले सभी लोगों का देश है। वहीं, एनसीपी नेता माजिद मेमन ने कहा राहुल गाँधी अब सेक्युलर नहीं रहे।

राहुल के बयान पर ओवैसी ने ट्वीट किया, “राहुल और कॉन्ग्रेस हिंदुत्व के लिए ग्राउंड तैयार कर रहे हैं। अब वे बहुसंख्यकवाद की फसल काटना चाहते हैं। हिंदुओं को सत्ता में लाना 2021 का सेक्युलर एजेंडा है, वाह। भारत सब भारतीयों का है। अकेले हिंदुओं का नहीं है। भारत सभी मत-मतांतरों को मानने वालों और नहीं मानने वालों का भी देश है।”

वहीं, महाराष्ट्र एनसीपी के नेता और पूर्व सांसद माजिद मेमन ने भी राहुल गाँधी पर ट्विटर के जरिए निशाना साधा और आरोप लगाया कि राहुल अब सेक्युलर नहीं रहे। मेमन ने ट्वीट किया, “क्या राहुल गाँधी हिंदूराज वापस लाने का वादा करते हैं? उसका क्या मतलब है? वह अब धर्मनिरपेक्षता और भारत में सभी धर्मों के लोगों के समान अधिकारों में विश्वास नहीं रखते हैं।”

रिपब्लिक टीवी को मेमन ने कहा कि वो हिंदुत्व की आलोचना करना चाहते थे। इस मुद्दे पर बोलते हुए ईर्ष्या में उन्होंने कह दिया कि मुझे हिंदुत्व राज नहीं, मुझे हिंदू राज चाहिए। वो भूल गए हैं कि जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी, बाबा साहेब अम्बेडकर समेत जिन नेताओं को वो फॉलो करते हैं, वो सभी धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करते थे। एनसीपी नेता के मुताबिक, भारत में एक धर्म का राज हो ही नहीं सकता है। इसलिए राहुल गाँधी के इन वादों की आलोचना होगी।

राहुल गाँधी का बयान

रविवार (12 दिसंबर 2021) को राजस्थान के जयपुर में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गाँधी ने कहा था कि हिंदू और हिंदुत्ववादी में फर्क होता है। मैं हिंदू हूँ, लेकिन हिंदुत्ववादी नहीं। उन्होंने ये भी कहा था कि आज केंद्र में जो सरकार बैठी है वो हिंदुत्ववादी है। उसे सत्ता से बाहर कर हिंदुओ को सत्ता में लाना है। यह हिंदुओं का देश है, हिंदुत्ववादियों का नहीं। गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने खुले तौर पर पहली बार ये माना है कि भारत हिंदुओं का देश है।

बहरहाल जब उनके बयान पर बवाल मचा तो राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने राहुल के बयान को जस्टिफाई करने की कोशिश की।

उन्होंने ट्वीट किया, “सत्य, अहिंसा, प्यार, भाईचारा और सहिष्णुता को मानने वाला व्यक्ति हिंदू है। हिंदू किसी से नफरत नहीं करते और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। हिन्दुत्ववादी हिंसा, असहिष्णुता और घृणा फैलाने में भरोसा रखते हैं। हिंदू और हिन्दुत्ववादी में वही अंतर है, जो गाँधीजी और गोडसे में था।”