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‘पुण्यात्मा नहीं थे CDS बिपिन रावत’ – हाई कोर्ट में केरल सरकार की वकील ने 5 पॉइंट लिख कर ऐसे किया अपमान

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के निधन के बाद से शुरू हुआ लेफ्ट-लिबरलों का जश्न मनाने का सिलसिला अभी तक समाप्त नहीं हुआ है। इस्लामी कट्टरपंथी और इनके समर्थक इसके लिए समय-समय पर नई-नई वजहें लेकर सामने आते हैं। अब इसमें केरल सरकार की स्थायी वकील रेशमा रामचंद्रन भी शामिल हो गई हैं। वह सुप्रीम कोर्ट की वकील भी हैं।

एक फेसबुक पोस्ट में, रेशमा रामचंद्रन ने जनरल बिपिन रावत के पुण्यात्मा नहीं होने के कई कारण बताए और उन पर कई आरोप लगाए। केरल बीजेपी ने इस पोस्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है और माँग की है कि सीएम उन्हें सरकारी पद से बर्खास्त करें।

रेशमा रामचंद्रन का फेसबुक पोस्ट

जनरल रावत की मृत्यु की पुष्टि के बाद कल पोस्ट की गई बेहद आपत्तिजनक पोस्ट में, केरल सरकार के वकील ने दावा किया कि जनरल बिपिन रावत को संवैधानिक अवधारणा को दरकिनार करते हुए पहले संयुक्त रक्षा प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था।

इसके बाद उन्होंने मृतक जनरल के बारे में आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने मेजर लीतुल गोगोई को आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए सम्मानित किया था, जिन्होंने अन्य पत्थरबाजों को रोकने के लिए एक कश्मीरी पत्थरबाज को जीप के सामने बाँध दिया था।

केरल सरकार की स्थायी वकील रेशमा रामचंद्रन ने यह भी उल्लेख किया कि जनरल बिपिन रावत ने विकलांगों को पेंशन पाने के लिए खुद को विकलांग कहने के खिलाफ सैनिकों को चेतावनी दी थी और उनका मानना था कि लड़ाकू भूमिकाओं में महिलाएँ कपड़े बदलते समय पुरुषों के झाँकने की शिकायत कर सकती हैं।

रेशमा रामचंद्रन ने आरोप लगाया कि बिपिन रावत ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शनकारियों के विरोध में तीक्ष्ण टिप्पणी की थी। इन कारणों को बताते हुए लेफ्टिस्ट एडवोकेट ने कहा कि मृत्यु किसी व्यक्ति को पवित्र नहीं बनाती है।

रामचंद्रन के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेता एडवोकेट एस सुरेश ने कहा कि वह देशद्रोही हैं, जिनमें इंसानियत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह उनकी मृत्यु के बाद देश के सर्वोच्च सैनिक का अपमान है और माँग की कि केरल सरकार को उन्हें उच्च न्यायालय में सरकारी वकील के पद से हटा देना चाहिए।

कुतुब मीनार में हिंदू-जैन मंदिर वाली याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा – अतीत की गलतियाँ वर्तमान में शांति भंग का आधार नहीं

दिल्ली की साकेत अदालत ने कुतुब मीनार में 27 हिंदू और जैन मंदिरों को बनाए जाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए जो तर्क दिया वो है – “अतीत में की गई गलतियाँ वर्तमान या भविष्य की शांति को भंग करने का आधार नहीं हो सकतीं।”

पूजा स्थल अधिनियम 1991 के प्रावधानों के उल्लंघन को देखते हुए और सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 (ए) के तहत याचिका खारिज की गई। साकेत अदालत की सिविल जज नेहा शर्मा ने कहा:

“भारत का इतिहास सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा है। इस पर कई राजवंशों का शासन रहा। सुनवाई के दौरान, वादी के वकील ने राष्ट्रीय शर्म के मुद्दे पर जोरदार तर्क रखे। किसी ने भी इनकार नहीं किया है कि अतीत में गलतियाँ की गई थीं, हालाँकि इस तरह की गलतियाँ हमारे वर्तमान और भविष्य की शांति भंग करने का आधार नहीं हो सकतीं हैं।”

9 दिसंबर 2021 को अदालत ने यह भी कहा कि अगर सरकार के द्वारा एक बार किसी स्मारक को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया तो लोग इस बात पर जोर नहीं दे सकते कि उस स्थान को वास्तव में सक्रिय रूप से धार्मिक चीजों के लिए उपयोग किया जाना चाहिए।

अदालत का फैसला (और जो तर्क इस फैसले के पीछे रखे गए) सोशल मीडिया पर लोगों को रास नहीं आया।

एक ने पूछा – “इससे शांति कैसे भंग होगी?” दूसरे ने तो न्यायिक व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए। इस शख्स ने तर्क के साथ अपनी बात रखी – “मेरा मानना था कि न्यायिक व्यवस्था पिछली गलतियों और जिनके साथ अन्याय हुआ है, उसे न्याय दिलाना है। सवाल पूछते हुए उसने यह तक कह दिया कि सभी दाखिल केसों (हर केस तो किसी पुराने विवाद के कारण ही दाखिल किया जाता है) को खारिज कर क्यों नहीं दिया जाता है?”

साकेत अदालत के फैसले पर सोशल मीडिया में यूजर्स के रिएक्शन

एक सोशल मीडिया यूजर ने मंदिर-मस्जिद की बात करते हुए लिखा – “मंदिर शांति भंग करते हैं। मस्जिद प्यार और सौहार्द्र बढ़ाते हैं। आप जरूर मजाक कर रहे हैं।” एक यूजर ने कोर्ट से यह तक पूछ दिया कि उन्हें यह क्यों लगता है कि मुस्लिम कोर्ट के दूसरे फैसले से दंगे-फसाद पर उतर आएँगे? कुछ यूजर्स ने कोर्ट के इस फैसले पर आपत्तिजनक भाषा का भी प्रयोग किया है, जिसे हम यहाँ प्रकाशित नहीं कर सकते हैं।

पिछले साल 9 दिसंबर 2020 को अदालत में कुतुब मीनार के भीतर मंदिर होने की बात कहते हुए वहाँ हिन्दुओं को पूजा का अधिकार दिलाने हेतु याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि कुतुब मीनार के भीतर ही हिन्दू और जैन मंदिर परिसर स्थित है।

दायर की गई याचिका में कहा गया था कि कुतुब के अंदर 27 मंदिर हुआ करते थे, जिनमें मुख्य रूप से जैन तीर्थंकर ऋषभदेव के अलावा भगवान विष्णु प्रमुख रूप से स्थापित हैं। और इन्हीं मंदिरों को तोड़ कर ही मस्जिद का निर्माण किया गया। इन दोनों के अलावा भगवान गणेश, शिव, माँ पार्वती, और हनुमान सहित अन्य देवी-देवताओं के कुल 27 मंदिर होने की बात कही गई थी।

अदालत में दायर याचिका में माँग की गई थी कि इन सभी मंदिरों और प्रतिमाओं को न सिर्फ पुनः स्थापित किया जाए, बल्कि हिन्दुओं को ‘पूजा के अधिकार’ के तहत कुतुब मीनार परिसर में नियमित कर्मकांड और पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए।

CDS रावत की मौत पर गालीबाज गुजराती सपा समर्थक गिरफ्तार… तमिलनाडु सरकार ने देश की बात करने वाले को भी कर लिया अरेस्ट

सीडीएस बिपिन रावत की मौत को लेकर आपत्तिजनक बयान देने वाले गुजरात के शिवाभाई अहीर को गिरफ्तार कर लिया गया है। अहीर ने अपने आपत्तिजनक पोस्ट में कहा था, “पुलवामा द्रोही मनोहर पार्रिकर और सेना प्रमुख बिपिन रावत के बाद अब डोभाल की बारी है।” इस विवादित ट्वीट के मामले में हरियाणा बीजेपी के प्रवक्ता अरुण यादव ने आरोपित के खिलाफ शिकायत की थी।

इस मामले में कार्रवाई करते हुए अहमदाबाद पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने आरोपित शिवाभाई अहीर को गिरफ्तार कर लिया है। शिवाभाई अहीर सपा समर्थक है।

इस खबर के उलट चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत की हेलिकॉप्टर क्रैश में मौत को लेकर तमिलनाडु के एक ट्यूबर ने डीएमके सरकार पर सवाल खड़े किए तो उसके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। यूट्यूबर मरिधास ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर क्रैश को लेकर राज्य की डीएमके सरकार पर सवाल उठाया तो प्रशासन को नागवार गुजरा।

मरिधास ने इस हादसे में साजिश की आशंका जताते हुए अलगाववादी ताकतों को रोकने के लिए देश के लोगों से साथ आने की अपील की थी। उन्होंने एक अलग ट्वीट में लिखा था कि सीडीएस रावत की मौत का डीएमके और डीके समर्थकों ने मजाक उड़ाया था।

पुलिस ने मरिधास पर आईपीसी की कई धाराओं के अंतर्गत उन पर मुकदमा दर्ज किया है और पूछताछ के लिए हिरासत में ले ली है। वहीं, भाजपा समर्थक पुलिस थाने पहुँचकर मरिधास को हिरासत में लेने का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया।

चीनी कब्जे को लेकर झूठ फैलाने वाले स्वामी को सरकार पर भरोसा नहीं, CDS बिपिन रावत हेलिकॉप्टर क्रैश की जाँच SC से कराने की माँग की

भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) मोदी सरकार के कट्टर आलोचक हैं और आए दिन वो सरकार के कार्यों पर सवाल उठाते रहते हैं। इसको लेकर उनकी किरकिरी भी होती रहती है। अब स्वामी ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत (Bipin rawat) के हेलीकॉप्टर क्रैश मामले में साजिश की आशंका व्यक्त की है। सरकार ने सीडीएस रावत की मौत की जाँच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित की है, लेकिन भाजपा सांसद चाहते हैं कि इस मामले की जाँच सरकार या उसकी एजेंसियों के बजाय सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश करें।

दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में स्वामी ने कहा, “मैं इस मामले में सवाल खड़ा नहीं कर रहा हूँ। मेरा कहना है कि सेना के एक बड़े अधिकारी की हेलिकॉप्टर क्रैश में मौत हुई है, वो भी अपने देश में। वो एक सरकारी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे और उसका पायलट भी मिलिट्री से ही था। इसलिए मिलिट्री पर कोई दबाव नहीं आना चाहिए।”

स्वामी को आशंका है कि सेना पर दबाव बनाकर कहीं तथ्यों को दबा न दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस मामले की जाँच ऐसे व्यक्ति से करवानी चाहिए, जो न तो सेना से हो और न ही सरकार से। उनकी नजर मेें वो सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ही हो सकते हैं। अपनी बातों को बल देने के लिए स्वामी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या के मामले का उदाहरण दिया और कहा कि कैनेडी की हत्या के बाद उनकी मौत की जाँच का जिम्मा अमेरिका के चीफ जस्टिस को दिया गया था।

भाजपा सांसद का कहना है कि जनता सच जानना चाहती है और इसके लिए इंतजार कर रही है। उन्होंने सरकार द्वारा गठित जाँच कमेटी पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि कमेटी की रिपोर्ट अगर जनता स्वीकार कर लेती है तो फिर उनके बोलने का कोई मतलब नहीं रहेगा।

चीनी कब्जे पर झूठ बोल देश को स्वामी ने किया गुमराह

मोदी सरकार के कैबिनेट में जगह नहीं मिलने की नाराजगी के कारण स्वामी आए दिन मोदी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करते रहते हैं। वो अपने भ्रामक ट्वीट के जरिए देश को गुमराह करते हैं। इसी कड़ी में हाल ही में उन्होंने हाल ही में ट्विटर पर अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ को लेकर झूठ फैलाया था। उन्होंने दावा किया था कि अरुणाचल प्रदेश में चीन मैकमोहन रेखा को पार कर चुका है। उसने राज्य में तीन जगहों पर घुसपैठ किया है। इस दौरान स्वामी ने अरुणाचल प्रदेश के भाजपा सांसद तापिर गाओ का संदर्भ दिया था।

हालाँकि, तापिर गाओ ने स्वामी के झूठ का पर्दाफाश करते हुए कहा था, “मैं सुब्रमण्यम स्वामी से संसद के सेंट्रल हाल में 2 दिसंबर को 10:35 बजे मिला। तब उन्होंने मुझसे चीनी घुसपैठ के बारे में पूछा। मैंने उन्हें बताया कि 1962 में चीन ने दो से तीन जगहों पर कब्जा कर लिया था। तब कॉन्ग्रेस का शासन था, लेकिन कोई ताजा घुसपैठ नहीं हुई है। मोदी सरकार के बाद से चीन ने किसी स्थान पर कब्जा नहीं किया है। दुर्भाग्य से उन्होंने मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया।” गाओ ने स्वामी पर उनकी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया था।

पालम एयरपोर्ट पहुँचा सैन्यकर्मियों का पार्थिव शरीर, पीएम मोदी ने CDS रावत समेत सभी वीरों को दी श्रद्धांजलि

तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद आज (9 दिसंबर) सभी 13 मृतकों के शव पालम एयरपोर्ट पर लाए गए। इस दौरान सीडीएस जनरल बिपिन रावत की बेटियाँ भी वहाँ मौजूद थीं। ताबूत में माता-पिता का शव देखकर उनकी आँख से आँसू बहने लगे। वहीं अन्य सैन्य कर्मियों के परिजन भी मौके पर भावुक हो गए।

सभी सैन्यकर्मियों के पार्थिव शरीर दिल्ली पहुँचने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल पालम एयरबेस पहुँचे। आगे पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पालम एयरपोर्ट पहुँचकर इन 13 हुतात्माओं को श्रद्धांजलि दी। एएनआई द्वारा जारी तस्वीरों में पीएम मोदी आँख बंद करके, सिर झुका कर श्रद्धांजलि देते दिख रहे हैं।

सामने आई जानकारी के मुताबिक, आम नागरिक सीडीएस बिपिन रावत को सीडीएस कारज मार्ग स्थित उनके आवास पर कल सुबह 11 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक श्रद्धांजलि दे सकते हैं। 

वहीं सैन्य कर्मियों के लिए दोपहर 12.30 से 1.30 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। इसके बाद पार्थिव शरीर को दिल्ली कैंट बराड़ स्क्वायर में अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाएगा। इससे पहले इन शवों को तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने श्रद्धांजलि दी थी।

बता दें कि बुधवार को हुई दुर्घटना पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि Mi 17 हेलिकॉप्टर ने सुबह 11:48 पर सुलूर से उड़ान भरी। इसे 12:15 पर वेलिंगटन में लैंड करना था, लेकिन 12:08 मिनट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। इस दौरान लोगों ने आवाज सुनी तो मौके पर पहुँचे और तुरंत ही रेस्क्यू शुरू किया। 

हेलिकॉप्टर में सवार 14 में से 13 लोगों की मृत्यु हो गई। इनमें सीडीएस बिपिन रावत एवं उनकी पत्नी मधुलिका रावत भी शामिल थीं। जनरल बिपिन रावत वेलिंगटन के डिफेंस कॉलेज के छात्रों से बातचीत के लिए अपने एक शेड्यूल्ड कार्यक्रम पर थे।

गौरतलब है कि वायुसेना के 25 अधिकारियों की टीम ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत के क्रैश हुए  M 17 हेलिकॉप्टर का ब्लैक बॉक्स बरामद हुआ है। माना जा रहा है कि इसकी जाँच से हादसे की वजह का पता चलने में आसानी होगी। दुर्घटनास्थल पर वायुसेना के विंग कमांडर आर भारद्वाज के नेतृत्व में जाँच चल रही है।

क्या सच में खत्म हो गया है गुरुग्राम में नमाज पर विवाद? मीडिया की खबरों और वर्तमान हालातों पर ऑपइंडिया की खास पड़ताल

गुरुग्राम में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने को लेकर उत्पन्न हुए विवाद के बीच कुछ मीडिया समूहों ने खबर दी कि अब सब कुछ सामान्य हो गया है। खबरों के मुताबिक, हिन्दू समूहों और मुस्लिम संगठनों में समझौता हो गया है। इस मामले में गुरुग्राम के प्रशासनिक अधिकारियों के बयानों का भी हवाला दिया गया। लेकिन, जब ऑपइंडिया ने इस पूरे घटनाक्रम की जमीनी पड़ताल की तब सच कुछ और ही निकल कर सामने आया।

NDTV ने गुरुग्राम DC के हवाले से कहा था कि अब गुरुग्राम में सार्वजनिक जगहों पर नमाज़ नहीं होगी। हिंदू और मुस्लिम संगठनों के साथ प्रशासन की बैठक के बाद यह तय हुआ है।

NDTV की खबर

TV9 ने नमाज़ की 18 जगहों पर हिन्दू-मुस्लिम दोनों को राजी बताया था और सिर्फ 6 सार्वजनिक जगहों पर नमाज की इजाजत की बात कही थी।

TV9 भारतवर्ष की खबर

न्यूज़ 18 ने इसे ‘अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा, बताते हुए इसके समापन की खबर दी थी। साथ ही इस पर सहमति बन जाने की बात कही थी।

News18 हिंदी की खबर

इस मामले की जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने सबसे पहले गुरुग्राम के DC के कार्यालय में सम्पर्क किया। DC गुरुग्राम के स्टाफ ने फोन उठाया और DC के व्यस्त होने की बात कही। कुछ समय बाद फोन एक अन्य अधिकारी को ट्रांसफर किया गया। उन्होंने बताया कि समझौते की कोई भी आधिकारिक प्रेसनोट या लिखित कॉपी DC ऑफिस से जारी नहीं की गई है।

इसके बाद ऑपइंडिया ने गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर कार्यालय में सम्पर्क किया। वहाँ भी फोन उठाने वाले अधिकारी/कर्मचारी ने बताया कि नमाज़ से संबंधित कोई भी फैसला उनके कार्यालय द्वारा नहीं हुआ है। इसी के साथ उन्होंने बताया कि इस मामले में गुरुग्राम पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान भी जारी नहीं किया गया है।

इस फैसले में सबसे ज्यादा नाम गुरुग्राम इमाम संगठन का चर्चित हुआ था। उसके लेटरपैड पर बाकायदा उन स्थानों के नाम दिए गए थे, जहाँ वो नमाज़ के लिए जगह की तलाश कर रहे थे। जब इस संगठन के सदर (मुखिया) मौलाना शामून कासफ़ी को सम्पर्क किया गया तब उन्होंने व्यस्त होने की बात कही। इसी समूह के सचिव मौलाना अरशद मिफ्ताही से जब बात की गई तो उन्होंने बताया, “हमारे सदर (मुखिया) से हम नाराज हैं। मैंने गुरुग्राम इमाम संगठन को छोड़ दिया है। हम इस संगठन की किसी भी सहमति या समझौते से इत्तेफाक नहीं रखते। हम ही नहीं हमारे तमाम मुस्लिम भाई भी नाराज हैं। मैं अपनी कौम के साथ खड़ा हूँ और कौम का फैसला इस समझौते के खिलाफ है।”

मौलाना अरशद मिफ्ताही ने आगे बताया, “हम सिर्फ 5 जगहों पर ही नमाज़ पढ़ने में इत्तेफाक नहीं रखते। ऐसा फैसला करने वाले महज चंद लोग हैं। लेटर पर मेरे दस्तखत पहले जबरदस्ती करवाए गए। जब मैंने इनकार कर दिया, तब मेरे दस्तखत उन्होंने खुद इस्तेमाल किए। मेरे साथ गुरुग्राम इमाम एसोसिएशन के लोगों ने बड़ी बदतमीजी की है। इन्हें RSS ने हाईजैक कर लिया है। 3 भाई मिलकर ये इमाम एसोसिएशन चला रहे। ये संगठन मुस्लिमों की नुमाइंदगी नहीं करता, बल्कि ये उनके खुद के घर का संगठन है।”

गुरुग्राम इमाम एसोसिएशन के फैसले के विरोध में DC ऑफिस पर जमा मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि

नमाज़ प्रकरण में हिन्दू संगठनों द्वारा बार-बार विरोध में लिए जाने वाले नाम हाजी मोहम्मद शहज़ाद से ऑपइंडिया ने बात की। शहज़ाद ‘मुस्लिम एकता मंच’ नाम का संगठन चलाते हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी सूरत में मुस्लिम गुरुग्राम इमाम एसोसिएशन और हिन्दू संगठनों द्वारा किए गए समझौते पर राजी नहीं हैं। गुरुग्राम इमाम एसोसिएशन को बाहरी लोगों का समूह बताते हुए शहज़ाद ने कहा, “ये संघ (RSS) के इशारे पर चलने वाले लोग हैं। वो तमाम लोग सिर्फ DC साहब को अपनी बात बताने गए थे। उन्होंने उनकी बात भर सुन ली थी। गुरुग्राम इमाम एसोसिएशन एक परिवार भर का समूह है। इन्होंने मुस्लिमों को ब्लैकमेल किया है।”

हाजी मोहम्मद शहज़ाद ने आगे बताया, “गुरुग्राम इमाम एसोसिएशन द्वारा लिए गए फैसले के खिलाफ हम कई मुस्लिम संगठनों ने फिर से DC ऑफिस जाकर अपनी आपत्ति और विरोध दर्ज करवाया है। इमाम संगठन द्वारा लिया गया फैसला हमारे लिए 6 दिसंबर के बाबरी गिराने जैसा ही काला दिन है। फैसला लेने वाले मुस्लिम संगठनों के साथ कोई भी स्थानीय नागरिक नहीं था। वो सब बाहरी लोग थे। इस संगठन ने बस अपनी राजनैतिक रोटी सेंकने का काम किया है। हमसे जुड़ा गुरुग्राम का कोई भी निवासी इस फैसले से सहमत नहीं है। फैसला लेने वाला खुर्शीद राज़ दूसरा वसीम रिज़वी बनने की फिराक में है। हम गुरुग्राम में कोई दूसरा वसीम रिज़वी नहीं बनने देंगे।”

इन बयानों को देखते हुए कहा जा सकता है कि कथित समझौता सिर्फ स्थाई नहीं है। इसमें प्रशासन की भी कोई भूमिका नहीं है और ना ही अधिकारियों की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान दिया गया है। गुरुग्राम इमाम एसोसिएशन द्वारा जारी पत्रों पर भी किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं।

‘इमरान खान के छोटे भाई… देश ने रत्न खोया है, श्रद्धांजलि दे दोगे तो बाजवा बुरा नहीं मानेगा’: CDS बिपिन रावत को लेकर सिद्धू की चुप्पी पर भड़के नेटिजन्स

देश ने अपने जांबाज बेटों को खोया है, लेकिन अमूमन हर मुद्दे पर ट्वीट करने वाले पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की उंगलियाँ शांत हैं। उन्होंने सीडीएस बिपिन रावत समेत 13 वीर सपूतों को अभी तक श्रद्धांजलि नहीं दी है, लेकिन याद रखने वाली बात यह है कि कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के जन्मदिन पर सिद्धू ने आज (गुरुवार, 9 दिसंबर 2021) बधाई जरूर दी।

माँ भारती के वीर सपूतों के बलिदान होने पर सिद्धू की चुप्पी और पार्टी प्रेसिडेंट के जन्मदिन पर बधाई वाले ट्वीट के बाद नेटिजन्स का गुस्सा भड़क गया है। यूजर्स उन्हें पाकिस्तान प्रेमी और वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान खान का सच्चा छोटा भाई बता रहे हैं।

अमीरा नाम की ट्विटर यूजर ने सिद्धू पर निशाना साधते हुए कहा, “कल चुप्पी और आज चापलूसी? प्राथमिकता स्पष्ट है। क्या आपका व्यवहार देश में नए सिखों का प्रतिनिधित्व करता है?”

@Mourinhojose01 ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को ‘बिन पेंदी का लोटा’ करार दिया। नेटिजन ने सलाह कि अगर सिद्धू सीडीएस बिपिन रावत के लिए श्रद्धांजलि के दो शब्द लिख देंगे तो पाकिस्तान आर्मी के चीफ जनरल बाजवा बुरा नहीं मानेंगे। उल्लेखनीय है कि सिद्धू पिछली बार जब पाकिस्तान के दौरे पर गए थे तो उन्हें जनरल कमर जावेद बाजवा की तारीफ और उनसे हाथ मिलाया था।

एक अन्य नेटिजन रिशव खंडेलवाल ने सिद्धू की प्राथमिकताओं को बखूबी गिनाया। यूजर ने कहा, “जनरल बिपिन रावत के जाने पर एक भी शब्द नहीं। न ही बिपिन रावत की पत्नी समेत उन 11 भाइयों के लिए एक भी शब्द। जीवन मरण की लड़ाई लड़ रहे भाई के लिए कोई प्रार्थना नहीं। सारा प्यार, सारी खुशी। सब कुछ बाजवा और कॉन्ग्रेस के लिए।”

अंकुर सिंह नाम के यूजर ने सिद्धू को इमरान खान का छोटा भाई करार दिया और उन्हें याद दिलाया कि इस देश ने अपना रत्न खोया है। यूजर ने लिखा, “इमरान खान के छोटे भाई सिद्धू देश ने आभूषण खोया है और अभी तक आपने कोई संवेदना व्यक्त नहीं की, लेकिन राजमाता को जन्मदिन की शुभकामना जरूर दे दी। इससे पता चलता है कि ना तो आप अच्छे क्रिकेटर थे, ना अच्छे TV जगत के कलाकार, ना अच्छे नेता और ना ही अच्छे देशभक्त। शर्म करो।”

गौरतलब है कि सीडीएस जनरल बिपिन रावत का हेलीकॉप्टर बुधवार (8 दिसंबर) को तमिलनाडु में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में जनरल रावत और उनकी पत्नी समेत 13 लोग वीरगति को प्राप्त हो गए।

₹10,000 करोड़ की ‘सरयू नहर परियोजना’ और 30 लाख किसानों को लाभ: 4 दशकों से लंबित प्रोजेक्ट पर योगी सरकार का काम, PM करेंगे उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 दिसंबर 2021 को ‘सरयू नहर परियोजना’ का उद्घाटन करने वाले हैं। ऐसे में गुरुवार (दिसंबर 9, 2021) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका निरीक्षण करने हेलीकॉप्टर से बहराइच पहुँचे। यहाँ उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट से 9 जिलों के 30 लाख किसानों को लाभ पहुँचेगा।

उन्होंने बताया कि सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना 4 दशकों से अधिक समय से लंबित थी। अब प्रधानमंत्री मोदी आगामी 11 दिसंबर को इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इससे 9 जनपदों के लगभग 30 लाख किसान लाभान्वित होंगे, साथ ही यह परियोजना प्रदेश के सर्वांगीण विकास में सहायक बनेगी।

सीएम योगी ने ट्वीट कर बताया, “₹10,000 करोड़ लागत की ‘सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना’ से 6,227 गाँवों की लगभग 15 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। कृषि एवं कृषक उत्थान को समर्पित ‘सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना’ विकास के नए मानक स्थापित करेगी।”

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बहराइच, श्रावस्ती एवं बलरामपुर से गोरखपुर तक जाने वाली 318 किमी लंबी सरयू नहर परियोजना का बलरामपुर से उद्घाटन करने वाले हैं। ये योजना पूर्वांचल में बाढ़ एवं सूखे की समस्या से निपटने में मददगार साबित हो सकती है।

इसका निर्माण वर्ष 1972 से ही शुरू हो गया था। लेकिन इस पर अधिकांश काम 2017 के बाद हुआ। 11 दिसंबर को जब पीएम परियोजना का लोकार्पण करेंगे तो 11 दिसंबर को श्रावस्ती के राप्ती बैराज का आठों शटर खोले जाएँगे। यह पानी सीधे नदियों को जोड़ते हुए आगे बढ़ेगा।

‘रोहित रौब नहीं झाड़ते, वो वही करते हैं जो टीम के लिए बेस्ट होता है’: कोहली की जगह रोहित को कप्तान बनाए जाने पर बोले रवि शास्त्री

भारतीय क्रिकेट टीम में बीसीसीआई (BCCI) ने बड़ा बदलाव करते हुए रोहित शर्मा (Rohit sharma) को वनडे और टी-20 टीम की कप्तानी सौंप दी है। इससे पहले विराट कोहली (Virat kohli) को वनडे टीम की कप्तानी से इस्तीफा देने के लिए बोर्ड ने 48 घंटे का वक्त दिया था, लेकिन जब कोहली की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला तो बीसीसीआई ने उनसे कप्तानी छीनते हुए रोहित शर्मा के नाम की घोषणा कर दी। विराट अभी भी टेस्ट टीम के कप्तान रहेंगे।

हालाँकि, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की चयन समिति ने जो जानकारी दी, उसमें कोहली की बर्खास्तगी को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है। चयन समिति के बयान में केवल इतना कहा गया कि अब से रोहित शर्मा टी-20 और वनडे मैचों में टीम की बागडोर संभालेंगे। दक्षिण अफ्रीका के दौरे से इसकी शुरुआत होगी। इस दौरे में तीन टेस्ट और तीन वनडे मैच खेले जाएँगे। 26 दिसंबर से इसकी शुरुआत होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, विराट कोहली के नेतृत्व की अपनी एक अलग ही कहानी है। वह आक्रामक तरीके से फैसले लेने के लिए जाने जाते रहे हैं। ‘कैप्टन कूल’ महेंद्र सिंह धोनी के विपरीत विराट ने तेजतर्रार कैप्टन के तौर पर अपनी शुरुआत की। लेकिन, अब मैनेजमेंट को महसूस होने लगा था कि अगले विश्वकप (2023) की तैयारी के लिए कोहली का जाना ही सही है। कहा जाता है कि विराट कोहली साल 2023 तक टीम की कमान अपने हाथ में रखना चाहते थे।

रवि शास्त्री ने रोहित शर्मा की तारीफ में पढ़े कसीदे

रोहित शर्मा के टीम का कप्तान बनते ही भारतीय टीम के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री (Ravi Shashtri) ने उनकी तारीफ की है। ‘द वीक’ को दिए इंटरव्यू में शास्त्री ने शर्मा की कप्तानी और उनकी बैटिंग स्टाइल की खूब सराहना की। शास्त्री ने कहा, “रोहित किसी पर रौब नहीं झाड़ते। वो वही करते हैं, जो टीम के लिए सबसे अच्छा होता है। वह टीम में मौजूद सभी संसाधनों का अच्छे से फायदा उठाना जानते हैं।”

शास्त्री ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि किस तरह से रोहित और कोहली दोनों दुनिया के दो ऑल-फॉर्मेट बल्लेबाज बने थे। शास्त्री ने कहा, “हम एक जैसी मानसिकता वाले दो लोग हैं। हमारे पास एक जैसा वेबलेंथ है। 2014 में जब मैं पहली बार आया, तब केवल एक बड़ा खिलाड़ी था- महेंद्र सिंह धोनी। वहाँ और कौन था? सुपरस्टार मटेरियल कौन था? शायद विराट और शायद रोहित शर्मा।”

‘मैं इतना कमाता हूँ कि देश के लिए थोड़ा सा खर्च कर सकूँ’: अहमदाबाद में मोची ने दी CDS रावत को भावभीनी श्रद्धांजलि, तस्वीर वायरल

भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी समेत 13 लोगों का बुधवार (8 दिसंबर 2021) को तमिलनाडु के कुन्नूर में विमान हादसे में निधन हो गया। जब से उनके दुखद हेलिकॉप्टर दुर्घटना की खबर आई, तब से हर तरफ से श्रद्धांजलि दी जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद में नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन के पास एक फुटपाथ पर साधारण से मोची के श्रद्धांजलि देने के तरीके ने सोशल मीडिया पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया

@right_monk_ नाम के ट्विटर यूजर ने अहमदाबाद की सड़कों से एक मोची की तस्वीर शेयर की। उन्हें फुटपाथ पर जूते ठीक करते हुए देखा गया। उन्होंने अपनी अस्थाई दुकान के पास भगवा कपड़े से ढकी कुर्सी पर सीडीएस बिपिन रावत की तस्वीर लगाई थी। जनरल की तस्वीर के चारों ओर एक माला डाली गई थी। उसकी तस्वीर के सामने मोची ने सैनिक को श्रद्धांजलि देने के लिए कुछ फूल और अगरबत्ती जलाई थी।

ट्विटर यूजर के मुताबिक, बिपिन रावत के भाई ने इस पर गौर किया और मोची से पूछा कि उसने इस पर कितना खर्च किया है क्योंकि वह इसके लिए भुगतान करना चाहते हैं, लेकिन मोची ने इनकार कर दिया और गुजराती में जवाब दिया, “मैं इतना कमाता हूँ कि मैं अपने देशवासियों के लिए थोड़ा सा खर्च कर सकता हूँ। “

मोची के इस भावना को सोशल मीडिया पर काफी सराहना मिल रही है। एक तरफ ऐसे लोग हैं, जो इस तरह के छोटे-छोटे कामों से भी देश के लिए अपने प्यार का इजहार कर रहे हैं, और दूसरी तरफ, इस्लामवादियों और तथाकथित ‘कुलीनों’ का एक झुंड है, जो सीडीएस बिपिन रावत की मौत पर अपनी नफरत दिखाने से परहेज नहीं करते हैं।

दरअसल, उस समय भी जब हेलीकॉप्टर में मौजूद लोगों की स्थिति या घायलों या मृतकों की संख्या पर कोई पुष्टि नहीं हुई थी, कई व्यक्ति, पनाग, कर्नल बलजीत बख्शी, नेशनल हेराल्ड के संपादक एशलिन मैथ्यू जैसे कुछ पूर्व-सेना अधिकारी और कई अन्य लोगों ने हेलिकॉप्टर दुर्घटना में जनरल रावत और अन्य के दुखद निधन पर बेतुके और असंवेदनशील ट्वीट पोस्ट किए थे।

Mi 17 हेलिकॉप्टर ने सुबह 11:48 पर सुलूर से उड़ान भरी। इसे 12:15 पर वेलिंगटन में लैंड करना था, लेकिन 12:08 मिनट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। इस दौरान लोगों ने आवाज सुनी तो मौके पर पहुँचे और तुरंत ही रेस्क्यू शुरू किया। हेलिकॉप्टर में सवार 14 में से 13 लोगों की मृत्यु हो गई। इनमें सीडीएस बिपिन रावत एवं उनकी पत्नी मधुलिका रावत भी शामिल थीं। जनरल बिपिन रावत वेलिंगटन के डिफेंस कॉलेज के छात्रों से बातचीत के लिए अपने एक शेड्यूल्ड कार्यक्रम पर थे।

जनरल रावत और उनकी पत्नी मधुलिका के पार्थिव शरीर को शुक्रवार सुबह 11 बजे 3 कामराज मार्ग पर उनके सरकारी आवास पर ले जाया जाएगा। दोपहर करीब दो बजे तीनों सेनाओं के सैन्य बैंड शवों को धौला कुआँ स्थित बराड़ श्मशान घाट तक ले जाएँगे। अंतिम संस्कार शाम 4 बजे निर्धारित है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज संसद में घोषणा की थी कि सीडीएस का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा।