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जामिया हिंसा मामले में बेल के बाद भी जेल में ही रहेगा शरजील इमाम, दिल्ली दंगे से जुडे़ 3 अन्य मामलों में है आरोपित

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार (9 दिसंबर) को राजधानी स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में भड़काऊ भाषण देने और दंगा भड़काने के मामले में आरोपी शरजील इमाम को जमानत दे दी। हालाँकि, जमानत के बावजूद वह बाहर नहीं आ सकेगा और फिलहाल वह जेल में ही रहेगा, क्योंकि फरवरी 2019 में दिल्ली में हुई हिंसा से संबंधित तीन अन्य मामलों में भी उसे आरोपित बनाया गया है। बता दें कि शरजील इमाम के भड़काऊ भाषण की वजह से दिसंबर 2019 में विश्वविद्यालय के बाहर हिंसा हुई थी।

पिछले साल 23 फरवरी से 26 फरवरी के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर हुई हिंदू विरोधी हिंसा में हुई थी। इस दौरान लगातार भड़काऊ भाषण दिए जाते रहे थे। दिल्ली पुलिस का दावा है कि इस हिंसा के पीछे एक बहुत बड़ी साजिश थी, जिसके कारण 53 लोग मारे गए थे।

अप्रैल 2020 में दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम पर देशद्रोह का आरोप लगाते हुए कहा था कि उसके भाषण ने लोगों के बीच दुश्मनी बढ़ाई, जिसके कारण जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय क्षेत्र में दंगे हुए। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपनी जाँच में पाया कि शरजील इमाम ने जामिया यूनिवर्सिटी के साथ-साथ अलीगढ़ विश्वविद्यालय में भी भड़काऊ भाषण दिया था।

गौरतलब है कि इससे पहले देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद शरजील इमाम को इलाहबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में जमानत दी थी। यह जमानत अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में CAA कानून के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में मिली थी। शरजील इमाम ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में 16 दिसंबर 2019 को भाषण दिया था। तब अलीगढ़ पुलिस ने उसके खिलाफ देशद्रोह के तहत केस दर्ज किया था। शरजील इमाम फ़िलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। हालाँकि उस समय भी बेल मिलने के बावजूद उसे जेल में ही रहना पड़ा था।

इस दौरान उच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि शरजील इमाम ने किसी को भी हथियार उठाने या हिंसा करने के लिए नहीं कहा। शरजील इमाम के बयान से कोई हिंसा नहीं हुई। हाईकोर्ट ने आगे कहा था कि शरजील इमाम के बयान से कोई हिंसा नहीं हुई। हाईकोर्ट ने कहा कि पुष्ट आरोप और बयान से होने वाले दुष्प्रभाव को लेकर जाँच की जा सकती है। 

बता दें कि ये मामला ‘अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ में 16 जनवरी, 2020 को शरजील इमाम द्वारा ‘नागरिकता संशोधन कानून (CAA)’ के विरोध में आयोजित एक कार्यक्रम में दिए गए भड़काऊ बयान का था। इस मामले में उनके खिलाफ ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा-124A (देशद्रोह), 153A (दो समूहों के बीच वैमनस्य पैदा करना), 153B (राष्ट्रीय अखंडता के खिलाफ दिया गया बयान), 505(2) (विभिन्न समुदायों दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन की पत्नी कैरी ने दिया बच्ची को जन्म, इसी साल मई में हुई थी शादी

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की पत्नी कैरी ने गुरुवार (9 दिसंबर 2021) को लंदन के एक अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया। इसको लेकर दंपति ने घोषणा की, “माँ और बेटी दोनों बहुत ही अच्छे हैं। दंपति शानदार एनएचएस मैटरनिटी टीम को उनके देखभाल और समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं।”

रिपोर्ट के मुताबिक, बोरिस जॉनसन (57) की पत्नी कैरी (33) को यह दूसरी संतान पैदा हुई है। इससे पहले कैरी ने पिछले साल 29 अप्रैल को अपने बेटे विल्फ्रेड को जन्म दिया था। उस दौरान कोरोना का संक्रमण काफी तेज था और बोरिस जॉनसन कोरोना संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हुए थे। जबकि, दोनों ने इसी साल मई के महीने में शादी की थी।

अभी तक नवजात बच्ची के नाम को सीक्रेट रखा गया है। लेकिन विल्फ्रेड के जन्म के समय उनका विल्फ्रेड लॉरी निकोलस जॉनसन नाम उन डॉक्टरों के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने बोरिस जॉनसन का कोविड ट्रीटमेंट किया था। फिलहाल, बोरिस जॉनसन के पिता बनने पर सबसे पहले लेबर मिनिस्टर सर कीर स्टारर ने दंपति को बधाई दी।

बोरिस जॉनसन की दूसरी शादी है ये

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की इससे पहले भी दो बार शादी हो चुकी है। उनकी दूसरी पत्नी मरीना व्हीलर से उन्हें चार संतानें हैं। मरीना व्हीलर पेशे से वकील हैं। वहीं कैरी की ये दूसरी संतान है, जबकि बोरिस जॉनसन की ये सातवीं संतान है। इससे पहले कैरी का इसी साल गर्भपात हो गया था और इसका खुलासा उन्होंने खुद किया है। कैरी कहती हैं कि उस घटना से उनका दिल टूट गया था। एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए कैरी ने कहा था कि वो अब फिर से एक ‘रेनबो’ बेबी की उम्मीद कर रही हैं।

साभार: इंस्टाग्राम

क्रिसमस पार्टी विवाद पर माँगी माफी

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ब्रिटिश संसद में उस विवादास्पद वीडियो के लिए माफी माँगी है, जिसमें उनके कर्मचारी पिछले साल कोविड -19 लॉकडाउन के दौरान डाउनिंग स्ट्रीट पर एक क्रिसमस पार्टी का मजाक उड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को कथित तौर पर तब शूट किया गया था जब देश कोविड -19 संकट से जूझ रहा था और उत्सवों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

जॉनसन ने कहा कि वह आईटीवी द्वारा मंगलवार देर रात जारी किए गए वीडियो से नाराज हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें बार-बार आश्वासन दिया गया था कि कोई पार्टी आयोजित नहीं की गई थी।

अतिसंवेदनशील कोचीन शिपयार्ड में नौकरी कर रहा था अफगान, असम से बनवाया था अवैध कागजात, खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हुए

केरल के कोच्चि में अति सुरक्षित क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मजदूर की नौकरी करने वाले अफगानिस्तान के एक नागरिक की गिरफ्तारी के बाद जाँच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस एवं खुफिया एजेंसियों की पूछता में पता चला है कि अफगानिस्तान के नागरिक अब्बास खान उर्फ इदगुल ने फर्जी दस्तावेज बनवाकर खुद को भारतीय नागरिक दिखाया और कोचीन शिपयार्ड में ठेका मजदूर के रूप में नौकरी हासिल की।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, जाँच में एजेंसियों को पता चला कि अब्बास ने सबसे पहले फर्जी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट बनवाई थी। इसके लिए उसने असम के एक व्यक्ति को 20,000 रुपये दिए थे। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर उसने आधार कार्ड और पैन कार्ड भी बनवाया था। इन कागजात के आधार पर खुद को भारतीय नागरिक दिखाकर हाई सिक्योरिटी जोन में काम कर रहा था।

अब्बास ने इसके लिए अपने एक रिश्तेदार से संपर्क किया था। उसके रिश्तेदार ने असम के रहने वाले 32 वर्षीय अबू बकर सिद्दीकी से संपर्क किया था। अबू बकर ने उसके लिए इस सर्टिफिकेट का प्रबंध किया था। बाद में एजेंसियों ने अबू बकर कर गिरफ्तार कर लिया और उसे इस मामले में पाँचवें आरोपी के रूप में पेश किया गया। इस मामले में अबू बकर को 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, 20 नवंबर को उसे सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई।

इस मामले को लेकर पुलिस ने बताया, “अब्बास ने आधार और पैन कार्ड बनवाने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया और अपने चाचाओं की मदद से थेवारा में रहने लगा। जुलाई 2019 में उसे एक ठेकेदार के जरिए कोचीन शिपयार्ड में नौकरी हासिल कर ली।”

दरअसल, अब्बास मेडिकल वीजा पर अफगानिस्तान से भारत पहुँचा था। उसकी माँ असम की रहने वाली और उसने एक अफगानी व्यक्ति से निकाह करने के बाद अफगानिस्तान चली गई थी। अब्बास वहाँ पिछले 20 से अधिक वर्षों से रह रहा था। लेकिन साल 2019 में वह भारत आ गया और खुद को भारतीय नागरिक बताकर यहीं काम करने लगा।

हालाँकि, एजेंसियों को इस मामले अब्बास के किसी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के सबूत नहीं मिले हैं। अबूबकर द्वारा अब्बास को भारत में रहने की व्यवस्था करने के बाद सुरक्षा एजेंसियों उसके गतिविधियों की लेकर जाँच कर रही थी। वहीं, खुफिया विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले की विस्तृत जाँच जारी है। अधिकारी का कहना है कि बांग्लादेश और म्यांमार के अवैध प्रवासियों को यह गिरोह फर्जी कागजात के आधार पर पैन कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज दिलाने का काम करता है।

CDS बिपिन रावत के पार्थिव शरीर को ले जा रही एंबुलेंस पर रास्ते भर बरसे फूल, लगते रहे ‘भारत माता की जय’ के नारे

देशभक्ति का कोई अलग लिबास नहीं होता। वे भाव ही होते हैं जो गाहे-बगाहे महसूस कराते हैं कि आपको अपने राष्ट्र से कितना प्रेम है। कल जब तमिलनाडु में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ तो यही भाव जगह-जगह देखने को मिले। लोगों की प्रार्थना इस बात का सबूत थीं कि उनके मन में देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के लिए कितना सम्मान है।

दुर्भाग्यवश वो प्रार्थनाएँ अनसुनी रह गईं और क्रैश के कारण हुई 13 मौतों ने देश को सन्न कर दिया। लेकिन, आम जन में अपने सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना जगी रही। नतीजन, जब सीडीएस जनरल समेत सभी सैन्य अधिकारियों का शव रास्ते से ले जाया जा रहा था तो सैंकड़ों की भीड़ इकट्ठा हुई और जोर-जोर से ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगे।

सामने आई वीडियोज में देख सकते हैं कि जिस गाड़ी में सभी सैन्य अधिकारियों के शव थे, उसके सुलूर एयरबेस पर पहुँचते ही कैसे लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। लोग चिल्ला-चिल्ला कर ‘भारत माता की जय’ कहने लगे। इस दौरान गाड़ियों पर इतने फूल बरसाए गए कि जब एंबुलेंस वहाँ से निकल गई तो रास्ते पर जगह-जगह फूल बिखरे पड़े थे।

वीडियो में देख सकते हैं कि कई दूरी तक सैंकड़ों की तादाद में लोगों का जमावड़ा लगा था। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक पंक्ति में खड़े थे। यहाँ कोई वीआईपी कैटेगरी नहीं थी। हर किसी के जुबान पर वीर वणक्कम-वीर वणक्कम ही था। साड़ी पहनकर खड़ी महिलाएँ भी सैन्य अधिकारियों के शवों को सैल्यूट कर रही थीं और उस वाहन पर फूल बरसा रही थीं जिसमें सैन्य अधिकारियों का शव था।

यहाँ कौन कितना पढ़ा-लिखा था और किस वर्ग से है….ये किसी को नहीं मालूम। लेकिन वीडियो देखकर ये पता चलता है कि जो एक चीज वहाँ खड़े हर व्यक्ति में सामान्य थी वो उनकी देशभक्ति है- जो किताबी बातें सीखने से नहीं आती। इसका प्रभाव ऐसा ही होता है कि जब एहसास हो तो आँख में आँसू आ जाते हैं और आवाज अपने आप बुलंद होकर भारत माँ की जय-जयकार करने लगती है। समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा साझा इस वाकये की वीडियो ने कई लोगों को भाव-विभोर किया है। यूजर्स इसे देखने के बाद उन सभी लोगों को सलाम कर रहे हैं जिन्होंने अपनी देशभक्ति दिखाने के लिए इस तरीके को चुना। 

मोदी और हिंदुओं से घृणा, भारत से नफरत… CDS बिपिन रावत की मौत का ‘मजाक’ इसी मानसिकता से

तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे से पूरा देश सकते में आ गया है। किसी को यकीन ही नहीं है कि भारत के चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ बिपिन रावत (CDS Bipin Rawat) समेत 14 लोगों को लेकर उड़ान भरने वाला Mi-17 सच में क्रैश हुआ और अब उन 14 लोगों में 13 लोग हमारे बीच नहीं हैं। इस दुर्घटना ने हर किसी को सन्न कर दिया है। पूरा देश शोक में है। अफसोस, इस दुख की घड़ी में भी कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें ये खुशी मनाने का समय लग रहा है। दुख की बात ये है कि इस सूची में पूर्व सैन्यकर्मियों से लेकर मीडियाकर्मी और सामान्य यूजर्स सभी शामिल हैं।

बुधवार (8 दिसंबर 2021) को जैसे ही हेलीकॉप्टर क्रैश की खबर आई, उसके बाद कई मामले ऐसे देखे गए, जब सीडीएस बिपिन रावत का नाम मृतकों की सूची में देख इन लोगों ने जमकर ठहाके लगाए। कुछ ने खबरों पर ‘हाहा’ रिएक्ट करके अपनी खुशी का प्रदर्शन किया तो किसी ने समय से पहले ही सीडीएस को ‘RIP’ लिख दिया। दुर्घटना का शिकार 14 लोगों के लिए दुआ करना तो दूर इस पूरी घटना को कॉन्ग्रेस की पत्रकार ने ‘डिवाइन इंटरवेंशन’ करार दिया। 

अब यहाँ ये सोचने वाली बात है कि आखिर सैनिकों से नफरत करने वाले, उनकी मृत्यु पर खुशी मनाने वाले, नाचने-गाने वाले… ये सारे लोग कौन हैं? आखिर इन्हें उन लोगों से क्या समस्या है जो देश की सुरक्षा के लिए, यहाँ के नागरिकों के लिए अपनी जान देने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। समस्या की जड़ तक जाएँगे तो समझेंगे-जानेंगे कि भारत के ‘सीडीएस’ की मृत्यु देश के कट्टरपंथी और सेकुलरवादी लोगों के लिए जश्न मनाने का अवसर क्यों है और इससे ‘मोदी सरकार’ कैसे जुड़ी है।

आगे बढ़ने से पहले ये जानना जरूरी है कि साल 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद देश की सेना के लिए बनने वाली हर अच्छी-बुरी राय के पीछे कहीं न कहीं ‘मोदी’ शब्द काम कर रहा था और यही हाल अभी भी है। ऐसे में साल 2019 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद का ऐलान किया गया। घोषणा हुई कि पीएम मोदी की सरकार ने CDS का एक नया पद बनाने का फैसला किया है, जो भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों का प्रमुख होगा। अब जाहिर है ये सीडीएस का पद मोदी सरकार का ऐलान था तो इसका सीधा कनेक्शन ‘मोदी आर्मी’ से जोड़ा गया और यहीं से शुरू हुआ नफरत का सिलसिला… घृणा के इस पूरे क्रम में कई कारकों ने काम किया:

मोदी घृणा

साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सत्ता संभालने के बाद देश का सेकुलर और कट्टर धड़ा बिदक चुका था। जो छवि नरेंद्र मोदी की पीएम बनने पहले से थी, वही छवि पीएम बनने के बाद भी कायम रही। उनका हिंदू धर्म के प्रति झुकाव, संस्कृति और सभ्यता से लगाव, सबका साथ-सबका विकास का दृष्टिकोण कट्टरपंथियों को अखरने लगा। इस बीच कश्मीर को लेकर जो विचार मोदी सरकार लगातार कर रही थी उसने तो पड़ोसी मुल्क तक में हलचल मचा दी थी, तो देश में बैठे अलगाववादी कैसे न भड़कते। 

साल 2016-17 के बाद से यदि याद करें को कश्मीर मामले पर सेना को नेगेटिव शेड में दिखाने का कार्य शुरू हो चुका था। सोशल मीडिया पर खून से लथपथ लोगों की तस्वीरें दिखाकर ये बातें फैलाई जा रही थीं कि कश्मीर में सेना की कार्रवाई अमानवीय है और बड़े ही चालाक ढंग से इस बात को छिपाया जा रहा था कि जिनके खिलाफ सेना सख्त हुई है, वो कोई ‘भटके हुए नौजवान’ नहीं बल्कि पत्थरबाज हैं। इतना ही नहीं विदेशी मीडिया ने भी सेना के खिलाफ लिखना शुरू कर दिया था।

‘भारत के विचार से नफरत’

किसी भी राष्ट्र की सीमा को सुरक्षित रखने का दारोमदार वहाँ की सेना पर होता है, लेकिन जब देश में रहने वाले कुछ लोग देश को बचाने के नाम पर ‘देश की सेना’ के विरोध में उतर आते हैं तो उनकी मंशा समझना ज्यादा मुश्किल भरा नहीं होता। आज समय-समय पर कुछ लोग ‘लोकतंत्र बचाने’ के नाम पर हल्ला करते हुए दिखते हैं। फिर चाहे वो जेएनयू की ‘आजादी’ वाली गैंग हो या फिर कश्मीर में आर्टिकल 370 बहाल करने की माँग करने वाले कट्टरपंथी… इन सबकी समस्या केंद्र सरकार से है, उनकी विचारधारा से है, उनके समर्थकों से है और देश की बहुसंख्यक आबादी यानी कि हिंदुओं से है।

सीडीएस बिपिन रावत के प्रति जो नफरत दुर्घटना के बाद देखने को मिली… वो भी इसी घृणा का एक विस्तृत रूप है। कई मौकों पर सीडीएस द्वारा दिए गए बयान इस बात को साबित करते हैं कि उनकी पहली प्राथमिकता अपना देश और देश के सैनिक थे। उन्होंने इस बात को साफ कहा हुआ था कि यदि कोई उनके जवानों पर पत्थर मारता है तो वह अपने सैनिकों से मरने को नहीं कह सकते। उनके इसी मुखर रवैये ने उन्हें सेकुलरों में ‘मोदी आर्मी का एक सिपाही’ बना दिया था और हिंदू धर्म के प्रति लगाव के कारण वो कट्टरपंथियों के निशाने पर थे।

भारत एक और विचारधारा अनेक

साल 2014 के बाद वाले भारत में विचारधाराओं का दबदबा देश में सबसे अधिक देखने को मिला। एक ओर मोदी सरकार थी, जिनके सत्ता में आने से हिंदुओं में ‘हिंदुत्व’ की भावना को प्रबल होते देखा जा रहा था और दूसरी ओर वामपंथ जमा कट्टरपंथ का झोल था, जो अपने आप को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिए और हिंदुओं को नीचा दिखाने के लिए ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ वाले फैक्टर पर काम कर रहा था। 

सोशल मीडिया पर वामपंथी ये दर्शाने में आज तक लगे हैं कि जो कोई भी हिंदुत्व के समर्थन में आता है, उनका इंसानियत से कोई सरोकार नहीं है। उनकी यही कोशिशें उन्हें देश की सेना से नफरत करवाती हैं। उदाहरण के लिए जब कभी भी भारतीय सेना पड़ोसी मुल्क पर कोई कार्रवाई करती है तो उनसे सबूत माँगे जाते हैं, जब शांति बहाल करने के लिए सख्त कदम उठाती है तो उन्हें बर्बर कहा जाता है और अंत में जब सैनिक देश को बचाते-बचाते बलिदान हो जाते हैं तो उनकी मृत्यु का भी मखौल उड़ाया जाता है।

ये विचारधाराओं का ही खेल है, जो देश के वामपंथी विदेशों में देश की सेना को क्रूर दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ते और उनसे सवाल-जवाब करते हैं।

सबका अपना राष्ट्रवाद

मोदी सरकार के आने के बाद देश में एक शब्द जो बच्चे-बच्चे के मुँह से सुनने को मिलता है, वो शब्द ‘राष्ट्रवाद’ का है। नौजवानों के बीच देश और देश की राजनीति को लेकर जो रूचि जागी है, उसके पीछे का कारण यही है कि देश और देश की महत्ता को समझाने में मोदी सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। जब बच्चा-बच्चा ‘देशप्रेम’ पर चर्चा करने लगा तो देश की अखंडता की बातें स्वभाविक तौर पर होने लगीं। 

ऐसी स्थिति उन लोगों के लिए खतरनाक थी, जिन्होंने देश को तोड़ने के सपने देखे थे। जिनका मकसद सैनिकों को हमेशा नकारात्मक दिखाने का था। जिनकी कोशिश अराजकता फैलाने की थी। नतीजन ये सभी लोग आंदोलन के नाम पर सड़कों पर उतरे। शरजील इमाम जैसे लोग सीएए और एनआरसी के विरोध में सड़कों पर आए और ‘खालिस्तानी किसान’ आंदोलन के नाम पर खुलेआम अपना प्रोपगेंडा फैलाते दिखाई दिए। जब सुरक्षाबलों ने इन्हें रोकने का प्रयास किया तो अपने-अपने तरीके से उन्हें बर्बर दिखाने की कोशिश हुई।

चीन के साथ करीबी रिश्ते

साल 2020 में चीन के साथ LAC पर हुए विवाद के बाद सोशल मीडिया पर उन लोगों का ताँता लग गया, जिन्हें ये साबित करना था कि कैसे भारतीय सेना और चीनी फौज की झड़प में गलती भारत सरकार की है। इस लिस्ट में देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस ने भी सरकार के विरोध में माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बाद में पता चला कि कैसे इन सब लोगों का कारोबार चीन के जरिए चल रहा था और कैसे मोदी सरकार के फैसले ने उस पर विराम लगा दिया। इसी बीच उस डील का खुलासा हुआ जो 2005-06 में राजीव गाँधी फाउंडेशन (Rajeev Gandhi Foundation) और चीन के बीच हुई थी। जहाँ इस फाउंडेशन को चीनी दूतावास और चीन की ओर से 3 लाख डॉलर बतौर चंदे के रूप में मिले थे।

मोदी से घृणा, हिंदुओं से घृणा, भारत के विकास से नफरत, भारतीयों के विचार तक से नफरत की सीमा तक असहमति… जो लॉबी इन चीजों में लिप्त है, सोचिए वो राष्ट्रवाद या भारत/इंडिया के आदर्श को कैसे फलता-फूलता देख सकता है? यह लॉबी कौन है, सोशल मीडिया के दौर में सबको स्पष्ट पता है। यह भी पता है सबको कि इस लॉबी के लिए पैसा ही भगवान है, सत्ता इनके लिए वंशवाद से बढ़ कर कुछ नहीं। देश इनके लिए वोटरों का एक झुंड है, जो जीता दे तो कुर्सी हथिया लीजिए… हरा दे तो लोकतंत्र की हत्या का राग छोड़िए।

CDS बिपिन रावत समेत सेना के अन्य लोगों के पार्थिव शरीर ला रही एंबुलेंस का एक्सीडेंट, कई पुलिसवालों को चोट

CDS बिपिन रावत का शव लेकर तमिलनाडु से दिल्ली ले जाने एयरपोर्ट के लिए निकली कई एम्बुलेंस में से एक रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में कई पुलिसवालों को चोट आई है। हालाँकि हादसा बड़ा नहीं था, लिहाजा कोई गंभीर घायल नहीं हुआ। 

यह हादसा मद्रास रेजिमेंटल सेंटर और सुलूर एयरबेस के रास्ते में मेट्टूपलयम के पास हुआ। CDS जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य मृतकों के पार्थिव शरीर सुलूर एयरबेस से गुरुवार (9 दिसंबर 2021) शाम तक दिल्ली के लिए एयरलिफ्ट करा दिया जाएगा।

गुरुवार सुबह पार्थिव शरीर वेलिंग्टन से मद्रास रेजिमेंटल सेंटर ले जाया गया। वहाँ से पार्थिव शरीर सुलूर एयरबेस ले जाए जा रहे थे, तभी एम्बुलेंस का संतुलन बिगड़ गया और वह पहाड़ी से जा टकराई। हालाँकि इस हादसे में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।

बता दें कि तमिलनाडु के कुन्नूर में 8 दिसंबर की दोपहर हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था। इसमें CDS रावत सहित 13 लोगों की मौत हो गई। शुक्रवार को मिलिट्री सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार होगा।  

क्या अंशुल सक्सेना ने मुस्तफा रियाज बनकर CDS बिपिन रावत के बलिदान पर गालियाँ दी? जानिए इस प्रोपेगेंडा का सच

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) के बलिदान होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग उन्हें गालियाँ दे रहे हैं और जश्न मना रहे हैं। इसी तरह के कई सारे मैसेज व्हाट्सएप पर तेजी से वायरल किए जा रहे हैं। इसमें दावा किया जा रहा है कि draxler_77 नाम वाले ट्विटर यूजर ने अपना नाम बदलकर अंशुल सक्सेना से मुस्तफा रियाज कर लिया और 8 दिसंबर को भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद दिवंगत सीडीएस बिपिन रावत के निधन के बाद जमकर गालियाँ दी।

व्हाट्सएप मैसेज में लिखा है, “याद है कैसे एक संघी ने कोहली की बेटी को गाली दी थी? फिर वही हुआ। संघी अंशुल सक्सेना ने नाम बदलकर मुस्तफा रियाज (लेकिन अपना यूजर नाम बदलना भूल गया।) कर लिया और जनरल रावत को गाली दी! संघी कितना नीचे गिरेगा?”

गुमराह करता व्हाट्सएप मैसेज

हालाँकि, जब आप करीब से व्हाट्सएप पर फॉरवर्ड हुए मैसेज को देखेंगे तो उससे कुछ और ही कहानी का पता चलता है। इसे चेक करने पर पता चला है कि उक्त नाम को बदलकर हिंदू से मुस्लिम नहीं, बल्कि इसे हिंदू नाम दिया गया था। यानि कि इसे पहले के मुस्लिम नाम मुस्तफा रियाज से बदलकर अंशुल सक्सेना किया गया था। आरोपित यूजर ने ट्विटर के अपने बायो में लिखा था कि वह हैदराबाद का रहने वाला है और उस्मानिया यूनिवर्सिटी में पढ़ता/पढ़ा है।

खास बात ये है कि इस यूजर ने अंशुल सक्सेना नाम रखने से पहले पिछले साल 2020 में अपना नाम ‘लक्ष्य भाविन’ कर लिया था, लेकिन कुछ समय के बाद उसने अपनी पूरी प्रोफ़ाइल को ही हटा दिया था। उक्त यूजर की प्रोफ़ाइल के कैशे की जाँच करने पर जानकारी मिली कि उसकी लोकेशन पाकिस्तान के पेशावर में थी। उसमें उसका नाम ‘ThePukhtunLad’ था।

गूगल कैच/ट्विटर

और अधिक खोजबीन करने पर उसका एक ट्वीट मिला, जिससे उसने अपने बारे में बताया था। इसमें लिखा था, “मैं युसुफजई जनजाति से हूँ और एक बार मेरे दादाजी ने मुझसे कहा था कि हम बनी इजरायली हैं।”

गूगल कैच/ट्विटर

इसी तरह से इसी साल 12 फरवरी 2021 को आईपीएस अधिकारी पंकज नैन ने पंचकुला में भूकंप के बारे ट्वीट किया था। इस पर रिप्लाई करते हुए draxler_77 यूजर ने ट्वीट किया, “यहाँ पाकिस्तान के पेशावर भी है।” उसके इन ट्वीट्स से ये बात तो स्पष्ट हो जाती है कि draxler_77 पाकिस्तानी है, जिसने अपना लोकेशन चेंज कर लिया और अपना नम बदलकर दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत का मजाक उड़ाया और गाली दी।

गूगल कैच/ट्विटर

नेटिजन्स ने जब इस मामले को उठाया तो हैदराबाद पुलिस ने इस पर स्वत: संज्ञान लिया। पुलिस के एक्शन लेते ही आईडी निष्क्रिय हो गई।

साभार: ट्विटर

अपराधों को व्हाइटवॉश कर रहे इस्लामिस्ट

हाल ही में भारतीय टीम पाकिस्तान से टी20 वर्ल्ड कप मैच में हार गई थी। इसके बाद एक यूजर ने सभी सोशल मीडिया पर विराट कोहली की बेटी को रेप के धमकी दी थी। शुरू में माना गया कि वो एक इस्लामिस्ट था, लेकिन बाद में मुंबई पुलिस ने मामले में रामनागेश अलीबाथिनी (23) नाम के युवक को हैदराबाद से गिरफ्तार किया। ऐसा इसलिए हुआ कि मामले की शिकायत मुंबई में दर्ज की गई थी।

अब उस घटना का इस्तेमाल इस्लाम को मानने वालों के अपराधों को व्हाइटवॉश करने के लिए किया जा रहा है। लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि रामनागेश अलीबाथिनी ‘संघी’ था या आरएसएस-भाजपा का समर्थक। ठीक इसी तरह से इस मामले में भी व्हाट्सएप चैटों से खुलासा हुआ है कि सीडीएस रावत को गाली देने के लिए एक हिंदू व्यक्ति ने अपना नाम बदलकर मुस्लिम कर लिया था। लेकिन वास्तव में आईडी संभवत: पाकिस्तान के रहने वाले व्यक्ति की है। इस प्रकार यह दावा कि एक हिंदू ने अपना नाम बदलकर मुस्लिम कर लिया और सीडीएस रावत को गाली दी, गलत है।

CDS रावत के लिए गाली से भी गंदी बात, अब डोभाल की बारी का कर रहे इंतजार: ऐसे अट्टहास कर रहे जेहादी-लेफ्ट-लिबरल

भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु होने पर कई असामाजिक तत्वों ने खुशी जाहिर की है। सोशल मीडिया पर इन हरकतों के स्क्रीनशॉट वायरल हो रहे हैं। इन मामलों में अब पुलिस ने गिरफ्तारियाँ शुरू कर दी हैं। राजस्थान के टोंक में जावाद खान एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया गया है। जावाद खान ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से लिखा था, “जहन्नुम जाने से पहले ही जिंदा जल गया”। इसके साथ उसने जनरल रावत का फोटो भी शेयर किया था। जनरल रावत का नाम लिखने से पहले जावाद ने MF शब्द का प्रयोग किया था।

भाजपा नेता लक्ष्मीकांत भरद्वाज ने इस संबंध में शिकायत की थी। पुलिस के मुताबिक, “अमर्यादित टिप्पणी करने वाले व्यक्ति जावाद खान पुत्र अब्दुल नक्की खान जाति साहबजादा मुसलमान, उम्र 21 वर्ष, निवासी राज टॉकीज के पास नजरबाग रोड, टोंक को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिस पर कठोरतम विधिक कार्यवाही की जाएगी।”

एक अन्य मामले में IIT दिल्ली ने दिवंगत जनरल रावत पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में अपने एक छात्र के खिलाफ जाँच शुरू की है। आरोपित का नाम राम प्रबहरन है। उसने ट्वीट में लिखा था, “दोस्तों, वो होमोफोबिक कूड़ेदान का पीस मर गया”। इसके साथ उसने जश्न की इमोजी डाली थी। इस मामले में IIT दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर वी रामगोपाल राव ने जाँच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है। ट्वीट में राव ने कहा, “मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि दुख की इस घड़ी में कोई इतना संवेदनहीन हो सकता है।”

वहीं, जयपुर के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अजय सिंह जेठू का भी एक कथित फेसबुक स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। उसमें लिखा है, “CDS अपनी वाइफ को लेकर सेना के हेलीकॉप्टर से कहाँ तफरी कर रहे थे। चॉपर कोई दहेज़ में मिला हुआ था। इस स्क्रीनशॉट पर भी जयपुर पुलिस को टैग करके कार्रवाई की माँग हो रही है।

कर्नाटक के बेंगलुरु में लॉ के एक छात्र तीर्थराज धर के खिलाफ भी पुलिस में शिकायत की गई है। तीर्थराज धर ने सोशल मीडिया पर CDS जनरल रावत के मामले को लेकर पीएम मोदी पर व्यंग किया है। बंगलुरु पुलिस ने साइबर सेल को आगे की कार्रवाई के लिए निर्देश दिए हैं।

अपनी प्रोफ़ाइल में अखिलेश यादव की कवर फोटो लगाने वाले गुजरात के शिवाभाई अहीर ने अपने फेसबुक पोस्ट में आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने लिखा है, “पुलवामा द्रोही मनोहर पर्रिकर, सेना प्रमुख बिपिन रावत के बाद अब डोभाल की बारी।” इसी के साथ उसने हँसी वाली एक इमोजी भी डाली है। हरियाणा भाजपा IT सेल के प्रभारी अरुण यादव ने इस स्क्रीनशॉट और लिंक को शेयर करते हुए कार्रवाई की माँग की है।

378 दिन बाद किसान आंदोलन खत्म, SKM का ऐलान: दिल्ली बॉर्डर से उखड़ने लगे टेंट, 11 दिसंबर को खाली होंगे सभी मोर्चे

दिल्ली की सीमाओं पर पिछले काफी दिनों से चल रहा किसानों का आंदोलन ख़त्म हो गया। संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन ख़त्म करने की घोषणा की है। किसान जल्दी ही दिल्ली के बॉर्डर से अपने घर की ओर वापसी करेंगे।

दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक के बाद किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, “हमने अपना आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया है। हम 15 जनवरी को समीक्षा बैठक करेंगे। अगर सरकार अपने वादे पूरे नहीं करती है, तो हम अपना आंदोलन फिर से शुरू कर सकते हैं।”

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 11 दिसंबर को मोर्चे खाली होंगे। इस दिन दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसान लौटेंगे। केंद्र सरकार की तरफ से मिले पत्र के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने यह फैसला किया। घोषणा से पहले एक किसान ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा था, ”हम अपने घरों के लिए निकलने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला संयुक्त किसान मोर्चा करेगा।”

इन मुद्दों पर बनी सहमति

MSP : केंद्र सरकार कमेटी बनाएगी, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि लिए जाएँगे। अभी जिन फसलों पर MSP मिल रही है, वह जारी रहेगी। MSP पर जितनी खरीद होती है, उसे भी कम नहीं किया जाएगा।

केस वापसी : हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार केस वापसी पर सहमत हो गई है। दिल्ली और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के साथ रेलवे द्वारा दर्ज केस भी तत्काल वापस होंगे।

मुआवजा : मुआवजे पर भी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में सहमति बन गई है। पंजाब सरकार की तरह ही यहाँ भी 5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा। किसान आंदोलन में 700 से ज्यादा किसानों की मौत हुई है।

बिजली बिल : बिजली संशोधन बिल को सरकार सीधे संसद में नहीं ले जाएगी। पहले उस पर किसानों के अलावा सभी संबंधित पक्षों से चर्चा होगी।

प्रदूषण कानून : प्रदूषण कानून को लेकर किसानों को सेक्शन 15 से आपत्ति थी। जिसमें किसानों को कैद नहीं, लेकिन जुर्माने का प्रावधान है। इसे केंद्र सरकार हटाएगी।

ऐसे बनी सहमति

केंद्र सरकार ने इस बार सीधे संयुक्त किसान मोर्चा की 5 मेंबरी हाईपावर कमेटी से मीटिंग की। हाईपावर कमेटी के मेंबर बलबीर राजेवाल, गुरनाम चढ़ूनी, अशोक धावले, युद्धवीर सिंह और शिवकुमार कक्का नई दिल्ली स्थित ऑल इंडिया किसान सभा के ऑफिस पहुँचे, जहाँ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के अफसर भी जुड़े। सबसे बड़ा पेंच केस पर फँसा था, जिसे तत्काल वापस लेने पर केंद्र राजी हो गया।

HS पनाग के बचाव में कूदे ‘लिबरल्स’, अभिनेत्री गुल पनाग के पिता ने जनरल रावत की मौत पर किया था असंवेदनशील ट्वीट

जब पूरा देश CDS (चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ) जनरल बिपिन रावत की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहा था, तब लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग ने उनकी मृत्यु की बात ट्वीट कर दी थी। बता दें कि HS पनाग अभिनेत्री गुल पनाग के पिता है। उन्होंने बुधवार (8 दिसंबर, 2021) को दोपहर 2:52 बजे ‘RIP General Bipin Rawat’ ट्वीट कर दिया था। उस समय CDS बिपिन रावत की मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई थी। शाम को भारतीय वायुसेना ने उनके निधन की पुष्टि की। उस समय तक अस्पताल में उनका इलाज चलने की बात ही कही जा रही थी। 

तब से, पनाग को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आधिकारिक शब्द का इंतजार नहीं करने और सोशल मीडिया पर जल्दबाजी दिखाने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। ट्विटर पर कई लोगों ने पनाग को उनके असंवेदनशील ट्वीट के लिए फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या जल्दी थी। वह हेलिकॉप्टर में सवार 14 यात्रियों के परिवारों के लिए थोड़ी संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखा सके, जो शायद किसी खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हों। पनाग और अन्य लोगों द्वारा किए गए बेशर्म और असंवेदनशील ट्वीट्स ने केवल यह उजागर किया कि कैसे कुछ लोग अपने व्यक्तिगत पूर्वाग्रह को राष्ट्रीय हित से ऊपर रखते हैं।

लेखक और स्तंभकार सलिल त्रिपाठी पनाग के समर्थन में आगे आए और सभी से ‘अच्छे जनरल’ (हालाँकि वे लेफ्टिनेंट जनरल के पद से रिटायर्ड हुए) से माफी माँगने को कहा। उन्होंने कहा, “क्या वे सभी लोग जिन्होंने आज सरकार द्वारा त्रासदी की घोषणा करने से पहले सीडीएस रावत को श्रद्धांजलि देने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल पनाग को गाली दी थी और उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाया था, अब अच्छे जनरल से माफी माँगेंगे?”

साभार: ट्विटर

एक अन्य नाचीज नाम के ट्विटर यूजर ने भी इस पर असहमति व्यक्त की और ट्वीट किया, “मैं पूरी तरह से ट्रोलिंग के खिलाफ हूँ, लेकिन इसके बारे में आधिकारिक बयान देने से पहले इतने संवेदनशील मामले में ट्वीट करना अनुचित नहीं है, खासकर तब जब वह एक ऐसे संगठन से ताल्लुक रखता है जहाँ पदानुक्रम (hierarchy) और प्रोटोकॉल का इतनी सख्ती से पालन किया जाता है।”

साभार: ट्विटर

त्रिपाठी ने फिर से पनाग का समर्थन किया और कहा कि पनाग और स्वर्गीय बिपिन रावत एक दूसरे को जानते थे और वह कुछ जानते थे, यह सही कि उन्होंने ‘दुख और संवेदना व्यक्त की’। किसी तरह, पनाग का पक्ष लेना पनाग के साथ अच्छा नहीं हुआ, और वह बातचीत में शामिल हो गया और दावा किया कि इस खबर पर किसी का एकाधिकार नहीं है।

साभार: ट्विटर

हालाँकि पनाग का पक्ष लेना त्रिपाठी के लिए ही मुसीबत बन गया। वह बहस में शामिल हो गया और दावा किया कि इस खबर पर किसी का एकाधिकार नहीं है।

साभार: ट्विटर

इसके बाद पनाग ने अपने ट्वीट का बचाव किया। उन्होंने कहा, “क्या आप हमेशा ऐसा करते हैं? अपनी खुद की टाइमलाइन जाँचें। सूचना के इस युग में समाचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है। IAF ने खुद ट्वीट किया कि वह 13:53 बजे दुर्घटनाग्रस्त हेलिकॉप्टर में सवार थे। मैंने एक घंटे बाद RIP ट्वीट किया।”

साभार: ट्विटर

त्रिपाठी ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की और उनसे कहा कि वह उनकी तरफ है, दूसरी तरफ नहीं। उन्होंने कहा, “लेफ्टिनेंट जनरल पनाग, आपने जो किया, उन्हें कहने के आपके अधिकार का मैं समर्थन कर रहा हूँ। आपकी वफादारी के बारे में बेतुके संदर्भों सहित आपको मिले दुर्व्यवहार से मैं स्तब्ध था। वास्तव में, यह वही है जो भारत को विभाजित कर रहा है, आपने गौरव के साथ भारत की रक्षा की है।”

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पनाग ने त्रिपाठी के स्पष्टीकरण को स्वीकार किया और इसके लिए ‘खेद’ प्रकट किया। उल्लेखनीय है कि हेलिकॉप्टर दुर्घटना में जनरल रावत और अन्य के दुखद निधन पर असंवेदनशील और अपमानजनक ट्वीट साझा करने वालों में पनाग, एक अन्य कर्नल बलजीत बख्शी, नेशनल हेराल्ड के संपादक एशलिन मैथ्यू जैसे कई व्यक्ति, कुछ पूर्व-सेना अधिकारी शामिल थे। .