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दलित बच्चों को खाने में गौमांस, पढ़ने के लिए बाइबल… इनकार पर दबाते थे गला: 48 घंटों में एसपी से NCPCR ने माँगा जवाब

मध्य प्रदेश के सागर जिले में दलित समाज के नाबालिग बच्चों पर धर्मान्तरण के दबाव और उन्हें जबरन गौमांस (बीफ, Beef) खिलाने और जबरन बाइबल पढ़ाने की घटना सामने आई है। यह मामला श्यामपुरा के सेवाधाम आश्रम का है। अब इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने पुलिस अधीक्षक सागर को कार्रवाई के आदेश देते हुए 48 घंटों के भीतर जवाब माँगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेंट फ्रांसिस सेवाधाम के खिलाफ कैंट थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई है। शिकायतकर्ता भाई-बहन हैं, जो वहाँ लगभग 18 महीने से रह रहे थे। गौमांस न खाने और बाइबिल ने पढ़ने पर उन्होंने अपने साथ उत्पीड़न होने की बात कही है।

पीड़ित बच्चों के पिता देशराज ने इसकी शिकायत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में की थी। इस मामले में आयोग ने कहा है कि सागर जिले से मिली शिकायत को बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 13 के नियमानुसार लिया गया है। इसमें बच्चों ने पिता से पिटाई की भी बात बताई है।

एक स्थानीय पोर्टल द सूत्र के मुताबिक, “बच्चे दलित समाज (अनुसूचित जाति) के हैं। शिकायत के बाद बच्चों को स्कूल से निकाल कर उनके पिता को सौंप दिया गया है। यह सेवाधाम कैंट थाना के बरारू इलाके में आता है। यहाँ सूअर का भी मांस खिलाया जाता है। मांस सेवाश्रम के अंदर ही काटा जाता है। बच्चों को लॉकेट पहना कर चर्च ले जाया जाता है। कुछ भी इनकार करने पर गर्दन तक दबा दी जाती है।”

इस मामले पर स्थानीय हिन्दू समाजसेवी ओंकार सिंह के मुताबिक, “पहले इसी स्थान के फादर रोजन पर धर्मान्तरण के आरोप लग चुके हैं। तब 70 बच्चों के नाम के आगे धर्म के स्थान पर क्रिश्चियन लिख दिया गया था और इन सभी 70 बच्चों के पिता के नाम के आगे एक ही व्यक्ति का नाम था – रोशन क्रिश्चन। इस मामले में जाँच समिति बनाई गई थी, जिसने अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं की। सेवाधाम आश्रम के संचालन की मान्यता साल भर पहले ही रद्द हो चुकी है। इसकी लीज भी बहुत पहले समाप्त हो गई है।”

सागर जिले के एडिशनल SP विक्रम सिंह के अनुसार गौमांस खिलाने और धर्मान्तरण के लिए प्रेरित करने की शिकायत पर बच्चों और उनके पिता के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। मामले की जाँच की जा रही है। जाँच के बाद जो कुछ भी निकल कर सामने आएगा, उस पर नियमानुसार करवाई की जाएगी।

गौरतबल है कि इससे पहले भी सागर जिले में एक हिन्दू युवक को उसी के ससुराल वालों ने पत्नी पाने के बदले ईसाई बनने का दबाव बनाया था। इसी के साथ कुछ दिन पहले विदिशा जिले के एक स्कूल में धर्मान्तरण की शिकायत पर हिन्दू संगठनों ने हंगामा किया था।

गुरुग्राम में जहाँ मुस्लिमों ने किया खुद मना, वहाँ फिर पहुँची नमाजियों की भीड़: अब सभी 37 जगहों पर नमाज का कर रहे दावा

गुरुग्राम में विभिन्न जगहों पर खुले में नमाज पढ़ने का मामला अभी तक शांत नहीं है। आज (10 दिसंबर 2021) ऑपइंडिया के पास कुछ वीडियोज आई हैं जिसमें शुक्रवार की नमाज खुले में अदा करने के लिए मुस्लिम समूह के लोग हिंदुओं से बहस कर रहे हैं।

वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट

एक वीडियो से पता चल रहा है कि ये सेक्टर 44 की है। जहाँ हिंदू कह रहे हैं, “हमारे धर्म में लिखा है कि गोवर्धन पूजा पर सब इकट्ठा होकर उसे बनाएँगे, लेकिन हम फिर भी ये नहीं करते हैं, तुम भी जगह लो और वहाँ बैठकर नमाज पढ़ो।” वहीं मुस्लिम संगठनों का कहना है कि प्रशासन से बात कर रहे हैं, अगर जगह मिल गई तो पढ़ेंगे। अन्य लोग पूछ रहे हैं कि प्रशासन कहाँ से जगह ले आएगा।

एक वीडियो सेक्टर थाना 29 की है। इस वीडियो को बनाने वाला व्यक्ति बता रहा है कि मना करने के बावजूद मुस्लिम समुदाय के लोग खुले में नमाज पढ़ रहे हैं और पुलिस वहाँ मौजूद है। वीडियो में दिख रहा है कि नमाज सड़क के बिलकुल ऊपर पढ़ी जा रही थी।

गुरुग्राम में नमाज

अगली वीडियो में मुस्लिम नमाज की तैयारी करते हुए बीच सड़क पर दिखे। इसी तरह सेक्टर 44 में चल रही नमाज की तैयारी पर सामने आई वीडियो में बताया जा रहा है कि प्रशासन ने मौके से पहुँच कर सभी लोगों को अलग कर दिया है। वहाँ मौजूद हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच 100 मीटर का फासला रखा गया है।

एक वीडियो सेक्टर 37 की है। इसमें सीडीएस जनरल बिपिन रावत को श्रद्धांजलि देते हुए एक युवक ने बताया कि उस इलाके में नमाज नहीं पढ़ने दी गई है। नाकाबंदी करके उन्हें रोका गया है। वहीं अन्य वीडियो में संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के अध्यक्ष महावीर भारद्वाज ने मौके पर पहुँचकर नमाजियों को समझाने की भी कोशिश की। उन्होंने कहा कि नमाज अदा करने के लिए प्वाइंट बदल दिया गया है। ऐसे में उन लोगों पर केस भी हो सकता है। उन पर समुदाय के लोगों को समझाने का दारोमदार है इसलिए वह समझाने आए हैं।

बता दें कि कई जगह पर आपसी सहमति से नमाज पढ़ने से मना होने के बावजूद भी मुस्लिम समुदाय के लोग भीड़ लेकर उसी जगह नमाज पढ़ने बैठे, ऐसे में हिंदू संगठनों ने चेताया कि अगर ये जारी रहा तो जो केस किए जाएँगे उनके लिए यही लोग जिम्मेदार होंगे। इससे पहले मुस्लिम एकता मंच ने सभी 37 जगहों (जिन्हें 2018 में चिन्हित किया गया था) पर नमाज पढ़ने का ऐलान किया था।

CDS बिपिन रावत की हेलीकॉप्टर दुर्घटना की जाँच के लिए IAF की ‘ट्राई सर्विस कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी’, कहा- मृतकों की गरिमा के लिए अटकलों से बचें

सीडीएस बिपिन रावत (Bipin Rawat) के हेलिकॉप्टर क्रैश मामले की जाँच के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) ने ट्राई सर्विस कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का गठन किया है। इसको लेकर इंडियन एयरफोर्स ने ट्वीट किया, “भारतीय वायुसेना ने 08 दिसंबर 21 को हुए दुखद हेलीकॉप्टर दुर्घटना के कारणों की जाँच के लिए एक ट्राई-सर्विस कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का गठन किया है। जाँच तेजी से पूरी की जाएगी और तथ्यों को सामने लाया जाएगा। तब तक मृतकों की गरिमा का सम्मान करते हुए बेबुनियाद अटकलों से बचना चाहिए।”

इस बीच शुक्रवार (10 दिसंबर 2021) को सीडीएस बिपिन रावत का अंतिम संस्कार दिल्ली कैंट के बरार स्क्वायर श्मशान गृह में किया जाएगा। इससे पहले गुरुवार (9 दिसंबर 2021) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम केंद्रीय मंत्रियों और नेताओं ने वीरगति प्राप्त नायकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी थी।

गौरतलब है कि सीडीएस बिपिन रावत 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कोयंबटूर से सुलूर के लिए एक आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान कुन्नूर में उनका हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था। हादसे के वक्त विमान में सीडीएस के साथ उनकी पत्नी मधुलिका रावत, ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, एनके गुरसेवक सिंह, एनके जितेंद्र कुमार, लांसनायक विवेक कुमार, लांसनायक बीसाई तेजा, हवलदार सतपाल समेत 14 लोग सवार थे। इनमें से 13 लोगों की मृत्यु हो गई थी, जबकि इस दुर्घटना में बचे एकमात्र अधिकारी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज चल रहा है।

तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलिकॉप्टर क्रैश की घटना के बाद रक्षा मंत्रालय ने ट्राई सर्विस इन्क्वायरी का गठन का ऐलान किया था। इसके साथ ही एयरफोर्स के ऑफिसर ट्रेनिंग कमांड के कमांडर एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में मामले की जाँच के आदेश दिए गए है। मानवेंद्र सिंह के पास विभिन्न प्रकार से विमान उड़ाने का 6,600 से अधिक घंटे का अनुभव है।

जबरन नसबंदी कर उइगर मुस्लिमों का नरसंहार कर रहा चीन: ब्रिटिश ट्रिब्यूनल ने कहा- राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आदेश के बिना ये संभव नहीं

चीन (China) में उइगर मुस्लिमों (Uighur muslims) पर सरकारी अत्याचार की लंबी कहानी है। वहाँ मुस्लिमों को सुधारने के नाम पर शेल्टर बनाए गए हैं, जिनमें उइगर लोगों को तरह-तरह की प्रताड़ना दी जाती है। इन्हें दाढ़ी रखने और कुरान पढ़ने से रोका जाता है। इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की आलोचना होती रही है। अब ब्रिटेन (britain) के एक ट्रिब्यूनल ने कहा है कि चीन अपने पश्चिमी प्रांत शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों का ‘नरसंहार’ (Genocide) कर रहा है।

ब्रिटेन स्थित एक इंडिपेंडेंट ट्रिब्यूनल ने उइगर मुस्लिमों को लेकर चीन पर गंभीर आरोप लगाया है। उइगर ट्रिब्यूनल के हेड और प्रमुख मानवाधिकार वकील सर जेफ्री नाइस क्यूसी ने कहा कि चीन की सरकार उइगर मुस्लिमों की आबादी को कम करने के लिए उन पर जबरन जन्म नियंत्रण और नसबंदी नीतियों को लागू कर रही है, जो एक नरसंहार है। लंदन स्थित नागरिक स्वतंत्रता के अधिकारों के लिए बने ‘उइगर ट्रिब्यूनल’ ने इसे मुस्लिमों या दूसरे समुदायों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध करार दिया है।

मानवाधिकार वकील नाइस ने इस मामले को लेकर कहा, “न्यायाधिकरण इन तथ्यों से परिचित है कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना शिनजियांग में उइगरों के एक महत्वपूर्ण हिस्से को नष्ट करने के इरादे से जन्म को रोकने के उपायों को लागू करके नरसंहार किया है।” उल्लेखनीय है नाइस वही वकील हैं, जिन्होंने युद्ध अपराधों और नरसंहार पर सर्बिया के पूर्व राष्ट्रपति स्लोबोडेन मिलोसेविक के लिए अभियोजन पक्ष का नेतृत्व किया था।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस तरह की योजना को सर्वोच्च स्तर पर बनाए बिना किसी देश में इस तरह का दमन नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने शिनजियांग में 300 से 400 की संख्या में शेल्टर होम बना रखे हैं। इन सुधार केंद्रों में अवैध तरीके से करीब एक मिलियन (10 लाख) उइगर मुस्लिमों को कैद किया गया है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यह अपनी तरह का अल्पसंख्यकों की सबसे बड़ी नजरबंदी है।

उइगरों के खिलाफ हिंसा में शी जिनपिंग का हाथ

हाल ही में कुछ दस्तावेज लीक हुए थे, जिनमें इस बात का खुलासा किया गया था कि उइगर मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पार्टी के कई बड़े नेता सीधे तौर पर शामिल हैं। कम्युनिस्ट पार्टी का बहुत ही सीक्रेट 317 पन्नों का दस्तावेज लीक हुआ था। इससे पता चला कि 2013-14 में चीन में हुए आतंकी हमलों के आरोप उइगर मुस्लिमों पर लगाए गए, जिसके बाद मुस्लिमों पर अत्याचार का निर्णय लिया गया।

शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों पर क्रूरता की जिम्मेदारी कम्युनिस्ट नेता चेंग कांगो को दी गई थी। उन्होंने 2017 के एक भाषण में कहा था कि जिन्हें घेरने की जरूरत है, उन्हें घेरा ही जाना चाहिए। उइगर मुस्लिमों को कैंप में भेजे जाने के फैसले को इससे जोड़ कर देखा जा रहा है। एक अन्य भाषण में शी जिनपिंग ने कट्टरवाद को ज़हर बताते हुए कहा था कि बुराई को हटाने और ठीक करने के लिए सही दवा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

‘भोजपुरी भाषा का प्रयोग वर्जित’ वाला स्कूल बोर्ड देख कर भड़के खेसारी लाल यादव, पूछा- काहे हो?

भोजपुरी फिल्मों के जाने-माने एक्टर खेसारी लाल यादव एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। इस बार वो अपने एक ट्वीट की वजह से चर्चा में हैं। दरअसल उन्होंने एक तस्वीर के साथ ट्वीट किया है। इसमें एक स्कूल का बोर्ड लगा है। 

इस तस्वीर में लिखा है, “सूचना : विद्यालय परिसर में भोजपुरी भाषा का प्रयोग वर्जित है।” इस फोटो को शेयर करते हुए खेसारी लाल यादव ने भोजपुरी में सवाल करते हुए लिखा है – “काहे हो” (क्यों)। इसके साथ उन्होंने गुस्से वाला इमोजी भी लगाया है।

खेसारी लाल यादव के इस ट्वीट के वायरल होते ही लोगों ने प्रतिक्रियाएँ देनी शुरू कर दीं। एक यूजर ने इस पर कमेंट करते हुए लिखा, “कहाँ का स्कूल है। प्रिंसिपल पर तुरंत कार्रवाई हो।”

रिजवान अंसारी ने लिखा, “काहे कि हमनी के खुद अपना भाषा के कदर ना कइनी सन केतना लोग बोले ला? सब केहू हिन्दी इंगलिस के पीछे पागल हो गइल बा और भोजपुरी पीछे छूट गइल ओकरा बाद त सबके पता बा।” (क्योंकि हमें खुद अपनी भाषा की कद्र नहीं है। सब कोई हिंदी इंगलिश के पीछे पागल हो गए हैं और उसके बाद का तो सबको पता ही है।)

निम्मी सिंह ने लिखा, “काहे अइसन का बात भइल की भोजपुरी भाषा ना बोलल जाई, जवन लिखले बा ओकर सच में दिमाग खराब हो गईल बा।” (क्यों ऐसी क्या बात हो गई कि भोजपुरी भाषा नहीं बोली जाएगी। जिसने ऐसा लिखा है, उसका दिमाग सच में खराब हो गया है।)

प्रवीण राय ने लिखा, “स्कूल विदेश में बा। इसकी मान्यता तुरंत रद्द हो, जब हर स्टेट में अपनी अपनी भाषा है तो फिर भोजपुरी से काहे हिल त बाड़ जा।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “भोजपुरी भाषा से ही हम बोलना शुरु करते हैं। कैसे इसे छोड़ सकते हैं, जिसको अच्छा नहीं लगता वे ना बोलें, मुझे अच्छा लगता है और यही बोलते हैं। यहाँ तो अब जैसे रिवाज़ चलता आ रहा जिससे शुरुआत करते हैं, उसी को भूल जाते हैं।”

वहीं विशाल कुमार राव ने लिखा, “जातिवाद बढ़ाओगे तो बैन तो होगा ही… केवल जाति पे गाना गाते हो… तुम एक भी गाना बता दो ना अपना जो अपने बेटी के साथ सुन सकते हो।”

गुरुग्राम में सभी 37 जगहों पर नमाज के लिए मुस्लिम संगठन एकजुट, हिन्दू संगठनों ने की विरोध की घोषणा

गुरुग्राम में नमाज विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की खबरें आखिरकार निराधार साबित हुई है। एक बार फिर से नमाज प्रकरण पर हिन्दू संगठन और नमाजी आमने-सामने हैं। मुस्लिम एकता मंच ने जहाँ सभी 37 जगहों (जिन्हें 2018 में चिन्हित किया गया था) पर नमाज पढ़ने का एलान किया है, वहीं हिन्दू संघर्ष समिति ने इसके विरोध की घोषणा की है। इस बीच पुलिस ने भी सभी विवादित स्थलों पर अपनी तैनाती बढ़ा दी है। साथ ही कानून के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

गौरतलब है कि पिछले 3 महीने से यह विवाद आए दिन उठ रहा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हिन्दू पक्ष के महावीर भारद्वाज ने कहा है कि किसी भी हाल में अब खुले में नमाज नहीं पढ़ने दी जाएगी। मुख्य रूप से सेक्टर-47, 12 ए, सेक्टर-18 के पार्क और सेक्टर-37 में टकराव की स्थिति पैदा होती रही है।

पिछले शुक्रवार को सेक्टर 37 में खुले में नमाज का विरोध कर रहे हिन्दू संगठन के दर्जन भर लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। इस मामले में दिनेश ठाकुर को जेल भी भेजा गया था, जिनकी जमानत अभी तक नहीं हो पाई है। दिनेश ठाकुर भारत माता वाहिनी नाम का संगठन चलाते हैं और खुले में नमाज का लम्बे समय से विरोध कर रहे हैं।

गुरुग्राम इमाम एसोशिएशन के सुलह के फॉर्मूले को नकारने वाले गुरुग्राम मुस्लिम एकता मंच के हाजी शहज़ाद खान ने प्रशासन से सुरक्षा की माँग की है। DCP पश्चिम दीपक साहरण के अनुसार:

“जो भी कानून तोड़ेगा, उस से सख्ती से निबटा जाएगा। सभी थानों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नमाज वाले स्थानों पर बड़ी संख्या में फोर्स लगाई जाएगी।”

ऑपइंडिया ने इस मामले की जानकारी के लिए हिन्दू संघर्ष समिति गुरुग्राम के पदाधिकारी रितुराज अग्रवाल से सम्पर्क किया। उन्होने बताया कि मुस्लिम समाज के एक समूह के साथ हुए समझौते को तोड़ कर अल्ताफ और शहज़ाद का समूह आज (शुक्रवार, 10 दिसंबर 2021) फिर उन सभी स्थानों पर नमाज पढ़ना चाहता है, जहाँ विवाद है। इसकी जानकारी पुलिस को दे दी गई है। ये पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि उन सभी सार्वजानिक स्थानों पर नमाज न हों। रितुराज अग्रवाल ने अपनी रखते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। रितुराज ने आगे बताया:

“गुरुग्राम में नमाज पढ़ने के लिए 50 किलोमीटर दूर मेवात से मुस्लिमों को बुलाया जाता है। इसके हमारे पास सबूत भी हैं। लगभग 18 साल पहले स्कूटर से चलने वाला हाजी शहज़ाद खान अब स्कॉर्पिओ से चलता है। ऐसी ही हरकतें कर के उसने गुरुग्राम में पहले भी एक मुस्लिम की टोपी उछालने की अफवाह को तूल दिया था। जबकि उसमें कोई सच्चाई नहीं थी। अगर सहमति के बाद भी शहज़ाद और अल्ताफ का समूह आज सार्वजानिक स्थलों पर नमाज पढ़ता है तो प्रशासन की ये जिम्मेदारी है कि उन्हें गिरफ्तार करें। अल्ताफ गुरुग्राम मुस्लिम काउंसिल नाम का संगठन चलाते हैं और शहज़ाद मुस्लिम एकता मंच।”

इस पूरे मामले की जानकारी के लिए जब DCP पश्चिम गुरुग्राम के ऑफिस में फोन मिलाया गया तब उनका फोन उठाया नहीं गया, कोई जवाब मिल नहीं सका। साथ ही अल्ताफ का फोन भी उठाया नहीं गया। शहज़ाद खान का फोन बंद आया।

पंजाब में कॉन्ग्रेसी सरकार का ‘अनोखा’ लोकतंत्र: शिक्षकों की आवाज दबाने के लिए CM चन्नी की सभा में बजाया जाएगा DJ

पंजाब में आम आदमी की सरकार होने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के कानों तक अपनी माँगों को लेकर आवाज उठाने वाले प्रदर्शनकारियों की आवाज न पहुँचे, इसके लिए पंजाब पुलिस डीजे का सहारा लेगी। पंजाब के पुलिस आईजी (विशेष सुरक्षा) ने इसके लिए सभी पुलिस कमिश्नर को बकायदा पत्र भी लिखा है।

बता दें कि पंजाब में शिक्षक 7वें यूजीसी आयोग को लागू करने की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और राज्य ने उनके मुद्दों को हल करने का एक नया तरीका खोज लिया है और वह तरीका है, उनकी आवाज को दबा देना।

इस आदेश को कॉन्ग्रेस नेता सुनील झाकर ने ट्विटर पर साझा किया। झाकर ने आदेश को साझा करते हुए लिखा, “यह सच नहीं हो सकता! लोकतंत्र का अपमान और मजाक।”

पंजाब के आईजी का आदेश गुरमुखी में लिखा हुआ है। एक ट्विटर यूजर ने इसका अनुवाद शेयर किया, जिसकी पुष्टि ऑपइंडिया ने भी पुष्टि की है। आदेश के सब्जेक्ट में लिखा है, “माननीय मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में।”

इस पत्र में कहा गया है, “ऐसा देखने में आता है कि पंजाब के मुख्यमंत्री का जब भी आपके जिलों के किसी कार्यक्रम में होता है तो मुख्यमंत्री के रास्ते में दो अलग-अलग संगठन ऊँची-ऊँची आवाज में नारेबाजी करते हैं। इसलिए भविष्य में जब भी मुख्यमंत्री आपके जिले के किसी कार्यक्रम में आएँ तो उन जगहों पर डीजे लगा दिए जाएँ, जहाँ ये दो संगठन अपनी माँगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं। डीजे पर गुरबाणी शबद या धार्मिक गीत चलाए जाएँ, ताकि उनकी आवाज सुनाई न दे।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले इस तरह का फरमान कभी भी जारी नहीं किया गया। अब यह पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस आदेश को पहले झाकर ने शेयर किया, इसके बाद भाजपा नेता अमित मालवीय ने इसे साझा किया। उन्होंने पंजाब के सीएम से पूछा कि वह विरोध करने वाले शिक्षकों की आवाज दबाने के बजाय उनसे बात क्यों नहीं करते।

उल्लेखनीय है कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के शिक्षक पिछले कई महीनों से कई माँगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पंजाब के 184 कॉलेजों में ‘टोटल एजुकेशन बंद’ है। यहाँ के शिक्षक 7वें यूजीसी आयोग के प्रावधानों को राज्य में लागू कराने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पंजाब सरकार के खिलाफ शिक्षकों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। अगले साल पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए शिक्षकों ने भी अपनी माँगों को लेकर संघर्ष तेज कर दिया है।

पंचतत्व में विलीन हुए ब्रिगेडियर एलएस लिड्डर, नम आँखों से पत्नी ने दी विदाई, बेटी ने कहा- ‘पापा- मेरे हीरो’

तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हुए सीडीएस बिपिन रावत समेत 13 लोगों को आज (दिसंबर 10, 2021) अंतिम विदाई दी जा रही है। पार्थिव शरीर के पास खड़ा हर व्यक्ति भावुक है। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह ने भी सैन्य अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी।

जानकारी के मुताबिक, जनरल बिपिन रावत का पार्थिव शरीर शुक्रवार को बेस हॉस्पिटल से उनके आवास लाया गया। यहाँ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी समेत तमाम नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं कि अंतिम विदाई के समय माहौल कितना गमगीन था। एक वृद्ध महिला कैसे सीडीएस को श्रद्धांजलि देते हुए फूट-फूट कर रो रही है।

सीडीएस जनरल रावत के साथ दुर्घटना का शिकार होने वाले सभी सैन्य अधिकारियों में से ब्रिगेडियर एल. एस. लिड्डर का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया है। सामने आई तस्वीरों में उनकी पत्नी के आँख में आँसू और हाथों में तिरंगा साफ देखा जा सकता है। इससे पहले ब्रिगेडियर की पत्नी ने ताबूत को चूमकर उनके पार्थिव शरीर को फूल अर्पित किया था और देर तक उससे लिपट कर रोती रहीं थीं।

ब्रिगेडियर एलएस लिड्डर की बेटी ने जहाँ उन्हें अपना हीरो और बेस्ट फ्रेंड बताया। वहीं अंतिम विदाई देने के बाद उनकी पत्नी गातिका लिड्डर ने कहा, “हमें उन्हें हँसते हुए एक अच्छी विदाई देनी चाहिए। जिंदगी बहुत लंबी है, अब अगर भगवान को ये ही मंजूर है तो हम इसके साथ ही जीएँगें, वो एक बहुत अच्छे पिता थे, बेटी उन्हें बहुत याद करेगी। ये एक बहुत बड़ा नुकसान है।”

गौरतलब है कि 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हादसे में 13 लोगों की जान चली गई। इस दुर्घटना में देश ने अपने पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत को भी खो दिया। अब इसी हादसे के मद्देनजर भारतीय वायुसेना ने ट्राई-सर्विस कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का गठन किया है। ट्वीट में वायुसेना ने अपने ट्वीट में कहा है कि मामले की जाँच तेजी से पूरी की जाएगी और तथ्यों को सामने लाया जाएगा। तब तक, मृतक की गरिमा का सम्मान करने के लिए, बेबुनियाद अटकलों से बचा जा सकता है।

माँ की आँखों का इलाज कराने से पहले ही दुनिया छोड़ गए विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान, 31 साल पर इस बार बहनों ने बाँधी थी राखी

तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार (8 दिसंबर 2021) को भारतीय वायुसेना का हेलीकॉप्टर Mi-17V5 क्रैश हो गया था। इस हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) और उनकी पत्नी मधुलिका रावत (Madhulika Rawat) समेत 13 लोगों की जान चली गई थी। इस हेलीकॉप्टर को आगरा के रहने वाले वायुसेना के विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान (Prithivi Singh Chauhan) उड़ा रहे थे। 

विंग कमांडर के 75 वर्षीय पिता सुरेंद्र सिंह चौहान ने जब हेलीकॉप्टर क्रैश की खबर सुनी तो वह अपने बेटे के लिए चिंतित हो गए। उन्होंने तुरंत अपने बेटे पृथ्वी सिंह चौहान को फोन किया। बेटे का फोन बंद होने पर पिता के दिल की धड़कनें और तेज हो गईं। उन्होंने मुंबई में रहने वाली अपनी सबसे बड़ी बेटी शकुंतला तोमर को फोन किया और उससे कहा कि वह इस दुर्घटना से जुड़ी सभी जानकारी उनसे साझा करे।

इसके बाद शकुंतला ने तुरंत पृथ्वी सिंह चौहान की पत्नी कामिनी को फोन किया, जिसने उन्हें बताया कि वह हेलीकॉप्टर में हैं। कुछ घंटों के बाद परिवार को पृथ्वी सिंह चौहान के निधन की सूचना मिली। पृथ्वी सिंह के चाचा यशपाल सिंह (57) ने कहा, ”वह (सुरेंद्र सिंह) हेलिकॉप्टर क्रैश से संबंधित जानकारी के लिए लगातार न्यूज चैनलों को देख रहे थे। शाम को जैसे ही शकुंतला ने अपने पिता को भाई की मौत की सूचना दी तो वह सकते में आ गए।”

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, 42 वर्षीय विंग कमांडर के निधन की खबर सुनते ही आगरा के शरण नगर स्थित उनके घर पर नेताओं, रिश्‍तेदारों और पड़ोसियों के साथ बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटने लगी। गुरुवार (9 दिसंबर 2021) को उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी उनके परिवार वालों से मिलने पहुँचे थे।

चाचा यशपाल ने बताया कि पृथ्वी अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। वह अपने पाँच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। पृथ्वी अपने माता-पिता के बेहद करीब थे और उनसे हर दिन फोन पर बात किया करते थे। आखिरी बार उन्होंने तीन दिन पहले अपनी 70 वर्षीय माँ सुशीला से लंबी बातचीत की थी।

उनके चाचा ने बताया, “पृथ्वी ने अपनी माँ से फोन पर कहा था कि आगरा के सैन्य अस्पताल (military hospital) में उनकी आँखों के इलाज के लिए उसने एक डॉक्टर से बात की है। उसने अपनी माँ को भरोसा दिलाया था कि वह जल्द ही ठीक हो जाएँगी, लेकिन बेटे के निधन की खबर सुनने के बाद से पृथ्वी की माँ सदमे में हैं।”

अपने छह भाइयों के साथ आगरा में बेकरी का बिजनेस करने वाले यशपाल सिंह चौहान ने आगे बताया, ”पृथ्वी हमारे परिवार में इकलौता सदस्य था, जो सरकारी नौकरी कर रहा था। उसने परिवार के अन्य बच्चों को भी भारतीय वायुसेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। वह मिलनसार था। सबका दिल जीतने की कला उसमें थी। वह हमारे परिवार के लिए एक प्रेरणा था।” परिवार के सदस्यों ने बताया कि मध्य प्रदेश के रीवा में सैनिक स्कूल से एनडीए में चयनित होने के बाद पृथ्वी सिंह चौहान वर्ष 2000 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग हैदराबाद में थी।

पृथ्वी सिंह चौहान ने वर्ष 2007 में कामिनी से शादी की थी। उनकी एक बेटी आराध्या (12) और एक बेटा अविराज (6) है। वे आखिरी बार इस साल अगस्त में रक्षा बंधन के मौके पर आगरा में अपने घर आए थे। इस दौरान वह लगभग 15 दिनों तक यहाँ रहे। उनके चाचा ने बताया कि पृथ्वी सिंह अपनी बहनों से बहुत प्यार करते थे, लेकिन वे रक्षा बंधन पर नहीं मिल पाते थे। इस बार 31 साल बाद वे सभी रक्षा बंधन पर एकजुट हुए थे।

यीशु धाम चर्च में धर्मान्तरण का शांतिपूर्ण विरोध… हिन्दू समूहों के लिए मीडिया क्यों लिख रहा ‘बदमाश’ और ‘हमला’ जैसे शब्द?

हरियाणा के रोहतक में एक बार फिर से धर्मान्तरण की एक खबर पर हिंदूवादी समूह सक्रिय हो उठे। उनके द्वारा चर्च में जा कर पड़ताल की जाने लगी। मौके पर भीड़ जमा होता देख पुलिस ने बिना अनुमति जमा लोगों को हटा दिया। घटनास्थल पर फोर्स की तैनाती कर दी गई है।

प्रशासन की जाँच में वहाँ धर्मान्तरण की जानकारी सही नहीं पाई गई। इसके बाद बिना अनुमति चल रहे कार्यक्रम को रुकवा दिया गया। हालाँकि कुछ मीडिया हाउस ने इस मामले की रिपोर्टिंग में चर्च पर हमला और बदमाश जैसे शब्द प्रयोग किए। जब ऑपइंडिया ने इस पूरे प्रकरण की जमीनी पड़ताल की, तब सच्चाई थोड़ा हट कर पाई गई। घटना 9 दिसंबर (गुरुवार) की है।

यह घटना रोहतक के संजय नगर कॉलोनी की है। हिंदू जागरण मंच हरियाणा ने इस मामले को अपने ट्विटर पर शेयर किया है। शेयर की गई तस्वीरों में आप यीशु धाम चैरिटेबल ट्रस्ट के बैनर-पोस्टर को देख सकते हैं। ट्वीट में लिखा गया है:

“यह घटना रोहतक के संजय नगर कॉलोनी की है। यहाँ के यीशु धाम चर्च में गरीब लोगों को लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन कराने व पाखंड फैलाने वाले चर्च को प्रांत सह-संपर्क प्रमुख सुनील, विधि विभाग रोहतक अशोक व अन्य कर्मठ कार्यकर्तागणों ने बंद कराया व धर्म परिवर्तन को लेकर शिकायत दी!”

इस घटनाक्रम पर रोहतक के डिप्टी कमिश्नर मनोज कुमार ने बयान दिया है। उनके मुताबिक, “हमें धर्मान्तरण के संभावना की शिकायत मिली थी। हमने जाँच करवाई तो ऐसा कुछ नहीं पाया। आपसी विवाद न हो इसके लिए हमने एहतियाहन पुलिस बल को भी तैनात कर दिया था। आयोजन के लिए इजाजत नहीं ली गई थी प्रशासन से। इसी वजह से उनके आयोजन को बर्खास्त करवा दिया गया है। किसी भी प्रकार का कोई टकराव नहीं हुआ। सब कुछ सौहार्दपूर्ण रूप से सम्पन्न हुआ। हम मुस्तैद हैं। न पहले ऐसा हुआ था और न ही आज ऐसा कुछ हुआ। आगे भी ऐसा नहीं होने देंगे। यहाँ कोई धर्मान्तरण न हुआ है और न ही होगा। किसी भी प्रकार की कोई भी जबरदस्ती किसी के साथ भी नहीं होने दी जाएगी।”

एक स्थानीय न्यूज चैनल ने इस पूरी घटना को ग्राउंड से कवर किया है। उस वीडियो में दोनों पक्षों की प्रशासनिक अधिकारियों से नोक-झोंक देखने को मिल रही है। प्रशासनिक अधिकारी दोनों पक्षों को समझाते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। हिन्दू पक्ष की तरफ से कई साधु-संत विरोध में उतरे थे। मौके पर SDM और DSP मौजूद थे।

मौके पर मौजूद सहायक पादरी ने मीडिया को बताया, “धर्मान्तरण की बात गलत है। हम किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं करते। हम सेवा का काम करते हैं। इस से पहले कोई विरोध नहीं हुआ जबकि यहाँ 6 साल से सभा चल रही है। यहाँ आने वालों की अपनी आस्था है। हम यहाँ लगातार सभा करते हैं। एक दिन पहले शाम को स्थानीय SHO आए थे। उन्होंने बताया कि आपके कार्यक्रम के विरोध में शिकायत आई है। शिकायत में उन्होंने धर्म परिवर्तन होना बताया। उन्होंने शिकायतकर्ता का नाम नहीं बताया। लेकिन बताया जा रहा है कि यह शिकायत विश्व हिन्दू परिषद के मनीष ग्रोवर की थी। विरोध करने वाले अधिकतर बाहरी लोग हैं। इसमें से कई लोग राजनैतिक मंशा रखते हैं। जब संविधान हर धर्म को मानने और अपनाने की छूट देता है तो यह छूट हमें क्यों नहीं? हमें प्रचार-प्रसार में कोई रोक-टोक न की जाए।”

ध्यान देने लायक बात यह भी है कि अपने वीडियो बयान में सहायक पादरी ने विरोध की बात जरूर की पर कहीं भी हमला जैसा शब्द नहीं कहा है। फिर तथाकथित मीडिया गिरोह के लोग किस आधार पर खबर में “हमला” और “बदमाश” जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं, यह समझने के लिए रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं।

बता दें कि धर्मांतरण की मिली सूचना पर विरोध में महामंडलेश्वर अनुभूतानन्द सूर्यवंशी भी शामिल थे। उन्होंने बताया, “हमें जानकारी मिली थी कि ईसाई धर्म वालों यहाँ दलित, पिछड़े और कमजोर वर्ग के लोगों को बुला कर और बहला-फुसला कर उनका धर्मान्तरण का इरादा बनाए थे। जबरदस्ती गरीबों को पैसे और सेहत का लालच दिया जा रहा है। इनका (ईसाइयों) कार्यक्रम था। हम उस धर्मान्तरण कार्य के विरोध में आए हैं। इस कार्यक्रम को हम किसी भी हालत में नहीं होने देंगे। शांति से काम हो रहा है। हम प्रशासन का धन्यवाद भी करते हैं।”

NBT में प्रकाशित खबर का शीर्षक

इस घटना की रिपोर्टिंग में नवभारत टाइम्स ने विरोध कर रहे हिन्दू संगठनों के लिए ‘बदमाश’ शब्द का प्रयोग किया। इस बात को लेकर रोहतक DC के पूरे बयान में कहीं भी आधिकारिक रूप से ‘बदमाश’ जैसा शब्द नहीं आया। इसी के साथ ऑपइंडिया ने पुलिस अधीक्षक रोहतक से सवाल किया कि क्या किसी पुलिस अधिकारी ने विरोध करने वालों को ‘बदमाश’ शब्द से सम्बोधित किया है? तो SP रोहतक का जवाब था – “नहीं”

ANI ने भी अपने ट्वीट में ‘बदमाश’ शब्द का प्रयोग किया

ANI ने भी विरोध कर रहे हिन्दू संगठनों के लिए ‘बदमाश’ शब्द का प्रयोग किया।