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लंदन से भारत वापस आएगी 8वीं सदी की माँ योगिनी की प्रतिमा, सालों पहले यूपी के इस गाँव से हो गई थी चोरी

उत्तर प्रदेश के लोखरी गाँव के एक मंदिर से 1979 से 1982 के बीच चोरी करके अवैध तरीके से लंदन स्मगल कर ले जाई गई बकरी के सिर वाली योगिनी देवी की मूर्ति आखिरकार फिर से देश को वापस मिलने जा रही है। योगिनी देवी की यह मूर्ति 8वीं सदी की बताई जा रही है। मूर्ति में देवी का सिर बकरी का है।

गार्जियन की रिपोर्ट में बताया गया है कि बकरी के सिर वाली देवी की मूर्ति इंग्लिश कंट्री गार्डेन में मिली थी। उस पर काई की मोटी परत जमी हुई थी। फिलहाल अब इस मूर्ति को लंदन में भारतीय उच्चायोग को सौंपा जाएगा। भारत से चोरी कर हजारों मील दूर लंदन में बेचने के लिए ले जाई गई इस मूर्ति को इसी क्षेत्र में काम करने वाले एक विशेषज्ञ क्रिस्टोफर मारिनेलो ने ढूँढा था। इसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया जाना चाहिए कि उन्होंने भारतीय संस्कृति की प्रतीक देवी की मूर्ति को फिर से ढूँढा। उन्होंने इसको लेकर कहा, “इस टुकड़े को सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि भगवान माना जाता है।”

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दुनिया के सबसे बड़े नीलामीकर्ताओं में से एक सोथबी ने 1988 में बकरी के सिर वाली देवी की मूर्ति को बेचने के लिए रखा था। इसके अलावा 1997 में भी पूर्व पत्रकार पीटर वॉटसन की पुस्तक ‘सोथबीज: इनसाइड’ में इस लूटी गई मूर्ति के बारे में जानकारी दी गई थी।

इसमें पत्रकार ने बहुत ही गुप्त तरीके से भारतीय डीलरों के बारे में बताया था। इसमें डीलरों ने दावा किया था कि उन्होंने लंदन में सोथबी को कई सारी वस्तुएँ बेची थी। हालाँकि, वस्तुओं की नीलामी करने वाले की विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की थी। कई बार उस पर प्राचीन भारतीय धार्मिक स्थलों से लूट को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगे थे। इस मूर्ति के दोबारा मिलने पर खुशी जताते हुए विशेषज्ञ विजय कुमार ने कहा, “यह अनूठी मूर्ति है। उसे ढूँढना एक सपना रहा है। मैंने अपनी आशा ही छोड़ दी थी।”

मूर्ति को लेकर विजय कुमार ने कहा कि हालाँकि ये स्पष्ट नहीं है, लेकिन जितना मैं जानता हूँ ने इसे अपनी नीलामी से बाहर ही रखा था। शॉकिंग बात ये है कि उन लोगों ने इसके बारे में इसको ले जाने वाले तक को नहीं बताया था और न ही 1998 में इस केस की जाँच के दौरान जब वाटसन ने इसकी कहानी को बताया तो उस दौरान भी मेट्रोपॉलिटन पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी गई। विशेषज्ञ के मुताबिक, ये मूर्ति चोरी की गई वस्तुओं में शामिल किए जाने के 20 साल बाद तक लंदन में रही।

गुरुग्राम के कॉमेडी शो के पोस्टर से मुनव्वर फारूकी और वरुण ग्रोवर के नाम हटाए गए, हिंदूफोबिक टिप्पणी के लिए कुख्यात है फारूकी

गुरुग्राम के एयरिया मॉल में 17 से 19 दिसंबर तक होने वाले शो के लिए ‘गुड़गाँव कॉमेडी फेस्टिवल‘ ने रविवार (5 दिसंबर 2021) को विवादास्पद एवं कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी और वरुण ग्रोवर को अपने शो के पोस्टर से बाहर कर दिया है। तीसरे दिन के लाइन-अप के लिए निशांत सूरी ने उनकी जगह ले ली है। पहले, हर दिन के लिए तीन कॉमेडियन लाइन में थे, लेकिन अब अंतिम दिन में केवल दो कॉमेडियन को रखा गया है।

एयरिया मॉल ने दो विवादास्पद हस्तियों और कथित कॉमेडियन के बिना कॉमेडी फेस्टिवल का नया पोस्टर शेयर किया। (साभार: एयरिया मॉल / इंस्टाग्राम)

हालाँकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मुनव्वर फारूकी और वरुण ग्रोवर को फेस्टिवल से हटाया गया है या फिर वे खुद बाहर हुए हैं। इससे पहले अपने शो के दौरान स्टैंड-अप कॉमेडी करने के नाम पर हिंदू घृणा फैलाने वाला मुनव्वर फारूकी खासा विवादों में रह चुके हैं। देश भर में उनके कई शो कैंसिल हो चुके हैं। फारूकी दो बार कॉमेडी से रिटायरमेंट लेने की घोषणा भी कर चुके हैं। हालाँकि, दोनों बार वामपंथी और लिबरल लोगों का समर्थन प्राप्त होने के बाद वह कॉमेडी की दुनिया में वापस आ गए।

कॉमेडी फेस्टिवल के हाल ही में बदले गए पोस्टर में आखिरी दिन के स्लॉट में बदलाव किया गया है। आयोजकों ने निशांत सूरी को इसमें शामिल किया है, जबकि फारूकी और ग्रोवर पोस्टर से गायब हैं। दूसरे कलाकार अतुल खत्री तीसरे दिन बने हुए हैं। दाईं ओर लगे पोस्टर में यह अंतर साफ देखा जा सकता है।

एयरिया मॉल के गुड़गाँव कॉमेडी फेस्टिवल ने मुनव्वर फारूकी और वरुण ग्रोवर को बाहर कर दिया। लेफ्ट साइड के पोस्टर में दोनों कॉमेडियन शामिल थे। राइट साइड के पोस्टर में उनकी जगह निशांत सूरी ने ली है। (साभार : शुभेंदु/ट्विटर)

मुनव्वर फारूकी के शो क्यों बंद किए गए?

गुजरात के रहने वाले मुनव्वर फारूकी एक कथित कॉमेडियन और विवादास्पद शख्सियत हैं। उन पर भगवान राम और माता सीता के लिए अपमानजनक शब्दों के प्रयोग के आरोप हैं। इसके अलावा, उन्होंने उन 59 निर्दोष श्रद्धालुओं का भी मजाक उड़ाया, जिन्हें अयोध्या में कार सेवा से लौटने के दौरान 2002 में गोधरा में जिंदा जला दिया गया था।

इस साल जनवरी में फारूकी को गिरफ्तार किया गया था और लगभग एक महीने तक जेल में रहना पड़ा था। इसके बाद जब उसे रिहा किया गया तो उसने ऐलान किया कि वह कॉमेडी छोड़ सकते हैं, लेकिन यह सिर्फ पीआर स्टंट ही निकला। बाद में फारूकी ने डोंगरी टू नोवेयर नाम से शो शुरू किया, जिसे विहिप, बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों द्वारा उसके खिलाफ दायर शिकायतों के बाद रद्द कर दिया गया था।

इसके बाद लगभग 12 शो कैंसिल होने के बाद फारूकी ने अपना टूर रद्द कर दिया और अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि शो के बार-बार रद्द होने के कारण वह कॉमेडी छोड़ देंगे। हालाँकि, मशहूर हस्तियों, वामपंथी झुकाव वाली मीडिया और कथित बुद्धिजीवियों का उन्हें पर्याप्त समर्थन मिला। दिलचस्प बात यह है कि कॉमेडी नहीं करने की घोषणा के बाद भी फारूकी 17 दिसंबर को एयरिया मॉल में परफॉर्मेंस देने के लिए तैयार थे।

वरुण ग्रोवर पर लग चुका है #metoo का आरोप

फेस्टिवल से हटाए गए एक अन्य कॉमेडियन वरुण ग्रोवर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लग चुका है। 2018 में बीएचयू में उनके कॉलेज की जूनियर होने का दावा करने वाली एक लड़की ने उन पर metoo का आरोप लगाया था। लड़की ने कहा था कि ग्रोवर ने एक नाटक के लिए ऑडिशन के बहाने उसका यौन उत्पीड़न किया था। एक और विवादास्पद व्यक्ति, जो अपमानजनक टिप्पणियों के लिए जाना जाता है, वो है अतुल खत्री। यह अभी भी शो में कॉमेडियन की लिस्ट में बना हुआ है।

पाकिस्तानी ने खरीदा 14 मंजिला जहाज, वहाँ के सबसे बड़े बंदरगाह पर भी इतनी बड़ी फैसिलिटी नहीं… अब तोड़ डालेगा

पाकिस्तान के एक बिजनेसमैन ने 14 मंजिला क्रूज जहाज खरीद लिया। अब वो बिजनेसमैन अहमदुल्ला खान परेशान है। थक-हार कर पानी वाले इतने बड़े जहाज को अब वो तोड़वा देगा।

कराची में पाकिस्तान का सबसे बड़ा बंदरगाह है। लेकिन यह इतना बड़ा नहीं है कि 14 मंजिला क्रूज जहाज यहाँ पर पार्क किया जा सके। मतलब कुछ पाकिस्तानियों के पास पैसा तो है लेकिन देश की गरीबी के कारण वो इन पैसों से अमीरी का फील नहीं ले पाते हैं!

न्यू चॉइस एंटरप्राइजेज नाम का एक कंपनी है पाकिस्तान में। इसी के मालिक हैं अहमदुल्ला खान। वही जिन्होंने 14 मंजिला क्रूज जहाज Antares Experience (पहले नाम था – Celestyal Experience और उससे पहले Costa Romantica) खरीद तो लिया लेकिन अब इसे तोड़ डालेंगे। खड़ा करने की जगह ही नहीं है!

अहमदुल्ला खान की कंपनी मूल तौर पर पानी वाले जहाजों को काटने-तोड़ने का बिजनेस ही करती है। शुरुआत में वो 14 मंजिला जहाज को खरीदे थे काटने-तोड़ने के लिए ही। फिर इरादा बदल गया, जब उस जहाज का शानदार कंडीशन देखा तो। मन में लड्डू फूटे कि उसे शानदार होटल (एकदम पर्यटक आकर्षण माफिक) बनाया जाए।

बिजनेस मन से चलता नहीं, इसलिए पहुँच गए पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉरपोरेशन के पास। बंदरगाह पर 14 मंजिला जहाज की पार्किंग के लिए। लेकिन देश के सबसे बड़े बंदरगाह में इतने बड़े क्रूज जहाज के लिए कोई जगह आवंटित नहीं की जा सकी।

फोटो साभार: न्यू चॉइस एंटरप्राइजेज

अहमदुल्ला खान का दिल टूट गया। अब इटली से खरीदे गए इस शानदार पानी वाले जहाज को काटने-तोड़ने के लिए गदानी शिप-ब्रेकिंग यार्ड में ले जाया गया है।

38 साल के अमजद ने 6 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या की, शव को बक्से में छुपाए रखा: दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को दी सूचना

उत्तर प्रदेश के हापुड़ से छह साल की बच्ची से रेप करने के बाद उसकी हत्या करने का शर्मनाक मामला सामने आया है। इस घटना को बच्ची का 38 वर्षीय पड़ोसी अमजद ने ही अंजाम दिया है। घर से दुर्गंध आने के बाद मामले का खुलासा हुआ। बच्ची गुरुवार (2 दिसंबर 2021) की शाम को अपने घर से लापता हुई थी और शनिवार (4 दिसंबर) को उसका शव अमजद के घर के बक्से से बरामद किया गया। आरोपी नशे का आदी बताया जाता है और उसने अपना अपराध कबूल कर लिया है।

एएसपी सर्वेश मिश्रा ने बताया कि स्थानीय लोगों ने बताया कि लड़की के पड़ोस वाले घर से उन्हें दुर्गंध आ रही है। इस सूचना के बाद पुलिस उस घर पर गई, लेकिन वहाँ ताला लगा हुआ था। नियमानुसार ताला खुलवाया गया। इसके बाद फील्ड यूनिट के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। तब हमें वहाँ एक बक्से के अंदर उस 6 वर्षीय बच्ची का शव मिला हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या यह भी एक बलात्कार का मामला है, उन्होंने कहा कि इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम के परिणामों के आधार पर ही की जा सकती है। पुलिस ने आरोपित की पहचान 38 वर्षीय अमजद के रूप में की है, जिसने अपना अपराध कबूल कर लिया है। पुलिस ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

एएसपी मिश्रा के अनुसार, लड़की गुरुवार को कुछ खरीदने के लिए घर से निकली थी, तभी मौका पाकर आरोपित बच्ची को बहला फुसलाकर 50 मीटर की दूरी पर स्थित अपने घर ले गया। उन्होंने कहा कि आरोपित मजदूरी करता है। उसने बच्ची का यौन उत्पीड़न करने के बाद उसकी हत्या कर दी। घटना के समय अमजद की पत्नी और दो बच्चे घर पर नहीं थे।

बताया जा रहा है कि जब लड़की घर नहीं लौटी तो उसके परिवार ने शुक्रवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपित को त्रिलोकीपुरम इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है, जो हापुड़ नगर पुलिस थाने के अंतर्गत आता है। वह नशे का आदी है। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है।

कृषि बिलों की वापसी के बाद बैंकों के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन करेंगे राकेश टिकैत, ट्वीट कर कहा- देश में साझा आंदोलन की जरूरत

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत अब बैंकों के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन करने के मूड में हैं। बैंकों के निजीकरण के खिलाफ बोलते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है। उन्होंने ट्वीट कर संकेत दिया कि वह अब नए मुद्दे को लेकर मोदी सरकार को घेरने वाले हैं।

राकेश टिकैत ने शनिवार (4 दिसंबर 2021) को देर रात अपने एक ट्वीट में लिखा, “हमने आंदोलन की शुरुआत में आगाह किया था कि अगला नंबर बैंकों का होगा। नतीजा देखिए, 6 दिसंबर को संसद में सरकारी बैंकों के निजीकरण का बिल पेश होने जा रहा है। निजीकरण के खिलाफ देश भर में साझा आंदोलन की जरूरत है।” राकेश टिकैत ने अपने ट्वीट के साथ हैशटैग StopPrivatization का इस्तेमाल किया है। 

गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार कई विधेयक पेश कर चुकी है और कई बिल को पेश करने की योजना है। इसी क्रम में अब मोदी सरकार सोमवार (6 दिसंबर 2021) को बैंकों के निजीकरण से संबंधित बिल संसद में पेश कर सकती है। बिल आने से पहले ही राकेश टिकैत ने आंदोलन करने का संकेत दे दिया है।

बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर 16 और 17 दिसंबर को बैंकों में दो दिन की देशव्यापी हड़ताल की जाएगी। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस नौ सरकारी बैंकों के यूनियन का संयुक्त मंच है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस का कहना है कि सरकार संसद के मौजूदा सत्र में बैंकिंग सुधार विधेयक पारित कराना चाहती है, जिससे निजीकरण का रास्ता साफ हो जाए। यूनाइटेड फोरम इस बिल का विरोध करने के लिए आंदोलन के तहत धरना प्रदर्शन कर रहा है।

फोरम का कहना है, “हम देश में कर्मचारी एवं जन समर्थित बैंकिंग नीतियों के साथ देश के आर्थिक विकास से जुड़ी नीतियों के समर्थक हैं न कि बैंकों के निजीकरण किए जाने के। इसीलिए बैंक कर्मचारियों का यह आंदोलन जारी है।” हड़ताल से संबंधित नोटिस यूनाइटेड फोरम ने भारतीय बैंक संघ को दे चुका है।

बता दें कि तीनों कृषि कानूनों के रद्द होने के बाद भी किसानों का आंदोलन जारी है। केंद्र सरकार चाहती है कि किसान धरना छोड़कर वापस अपने घर चले जाएँ। वहीं किसान MSP, मुआवजे और अपने ऊपर लगे केस वापस लेने की माँग पर अड़े हैं। सयुंक्त किसान मोर्चा (SKM) ने शनिवार (4 दिसंबर 2021) को किसानों की बैठक बुलाई। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि MSP कानून बनने तक किसान आंदोलन खत्म नहीं होगा।

मीडिया को जानकारी देते हुए बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने घोषणा की कि संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों के विरोध के भविष्य की योजनाओं के बारे में सभी निर्णय लेने के लिए 5 सदस्यीय समिति को अंतिम रूप दिया है। 5 सदस्यीय समिति के सदस्यों में किसान नेता अशोक धवले, गुरनाम सिंह चादुनी, शिव कुमार काका, युद्धवीर सिंह और बलबीर सिंह रावल शामिल हैं। एसकेएम के अनुसार, एमएसपी पर कानून, बिजली संशोधन विधेयक और लखीमपुर खीरी मामले जैसे कई मुद्दों को हल करने के लिए सुलझाने की जरूरत है।

6 दिसंबर को ईदगाह मस्जिद में ‘जलाभिषेक’ के ऐलान के बाद मथुरा छावनी में तब्दील: शहर में धारा-144, पैरामिलिट्री-PAC तैनात, 4 FIR दर्ज

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा एक बार फिर से चर्चा में है। वजह है हिंदू संगठनों द्वारा 6 दिसंबर को मथुरा स्थित शादी ईदगाह मस्जिद में जलाभिषेक का एलान। इस ऐलान को देखते हुए प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए शहर में धारा-144 लगा दी गई है और 4 अलग-अलग एफआईआर भी दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये एफआईआर सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने के मामले में गोविंदनगर और कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। इसके अलावा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद की ओर जाने वाले मार्गों के लिए स्पेशल ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई है। मस्जिद की ओर जाने वाले प्रवेश मार्गों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मथुरा के सीओ सिटी को दी गई है। सीओ अभिषेक तिवारी का कहना है कि असामाजिक तत्वों को रोकने के लिए हर तरह से सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता किया गया है। मथुरा के हर मुख्य प्वाइंट्स पर फोर्सेज तैनात हैं।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “6 दिसंबर को देखते हुए पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। इसके लिए पूरे शहर को 4 सुपर जोन, 4 जोन और 8 सेक्टर में बाँटा गया है। करीब 143 प्वाइंट्स पर पिकेट ड्यूटी डिप्लॉय की गई है। शहर में पैरा मिलिट्री, रैपिड ऐक्शन फोर्स (आरएएफ), पीएसी की कंपनियाँ तैनात की गई हैं। इसके अलावा, ड्रोन कैमरे और जहाँ सीसीटीवी कैमरे नहीं थे वहाँ अस्थायी कैमरे लगवाकर निगरानी की जा रही है।”

गौरतलब है कि अखिल भारतीय हिंदू महासभा, श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण न्यास, नारायणी सेना और श्रीकृष्ण मुक्ति दल समेत चार हिंदूवादी संगठनों ने शाही ईदगाह मस्जिद में 6 दिसंबर को जलाभिषेक करने का एलान किया है, जिसके के कारण इस तरह की सुरक्षा व्यवस्थाएँ की गई है। वहीं, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा ने प्रशासन से मस्जिद परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करने की इजाजत माँगी है। हालाँकि, प्रशासन ने इन संगठनों को अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

इससे पहले यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि अयोध्या और काशी में भव्य मंदिर निर्माण जारी है और मथुरा की तैयारी है। ट्विटर पर उन्होंने इसके साथ ही ‘जय श्रीराम’, ‘जय शिव शम्भू’ और ‘जय श्री राधे-कृष्ण’ का टैग भी लगाया था।

जिन्हें Pak में ज़िंदा जला डाला, उनकी पत्नी ने लगाई न्याय की गुहार: पोस्टमॉर्टम से खुलासा – कई हड्डियाँ टूटी हुई, जलाने से पहले किया टॉर्चर

पाकिस्तान में शुक्रवार (3 दिसंबर, 2021) श्रीलंका के प्रियंथा कुमार दियवदना की ज़िंदा जला कर हत्या कर दी गई, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। अब मृतक की पत्नी ने पाकिस्तान और श्रीलंका, दोनों देशों की सरकारों से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि उनके पति एक मासूम व्यक्ति थे। प्रियंथा कुमारा पाकिस्तान की एक फैक्ट्री में काम करते थे, जहाँ उन पर ईशनिंदा का आरोप लगा कर दिनदहाड़े उन्हें सार्वजनिक रूप से ज़िंदा जला दिया गया।

वहाँ वो एक गारमेंट फैक्ट्री में बतौर जनरल मैनेजर कार्यरत थे। पाकिस्तान के कट्टरवादी इस्लामी संगठन ‘तहरीक-ए-लब्बैक’ ने ने फैक्ट्री में हमला कर के भी तोड़फोड़ मचाई। पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में हुई इस घटना को लेकर इमरान खान की सरकार और कार्रवाई का दबाव है। अब तक इस मामले में आतंकवाद की धाराओं में 900 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिसमें से 235 को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। इनमें से 13 मुख्य आरोपित हैं।

मृतक की पत्नी ने कहा कि उन्हें उनके पति की मॉब लिंचिंग के बारे में ख़बरों से पता चला और बाद में इंटरनेट पर भी उन्हें ये घटना दिखी। उन्होंने इसे क्रूर हत्या बताते हुए कहा कि उनके पति एक निर्दोष इंसान थे। उन्होंने अपने दो बच्चों के लिए न्याय की गुहार लगाते हुए हत्यारों को सज़ा दिलाने की माँग की है। कोलम्बो से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मृतक के घर पर श्रीलंका के मंत्री नमन राजपक्षे और प्रसन्ना राणातुंगा भी पहुँचे। प्रियंथा कुमारा ने ‘यूनिवर्सिटी ऑफ परदेनिया’ से स्नातक किया था।

वो लाहौर से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सियालकोट में ‘राजको इंडस्ट्रीज’ नामक फैक्ट्री में कार्यरत थे, जो गारमेंट्स और स्पोर्ट्सवियर बनाती है। श्रीलंका की सरकार ने घटना की निंदा करते हुए उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान की सरकार इस मामले में उचित कार्रवाई करेगी। जलाने से पहले उन्हें घसीटा भी गया था और भीड़ ने उनकी पिटाई भी की थी। इसके बाद भीड़ ने वजीराबाद रोड को जाम कर दिया था। इसी तरह अप्रैल 2017 में ईशनिंदा का आरोप लगा कर एक यूनिवर्सिटी छात्र मशाल खान की मॉब लिंचिंग हुई थी।

पाकिस्तान में इस तरह की घटनाएँ नई नहीं हैं। पंजाब प्रान्त में ही 2014 में कुरान के अपमान का आरोप लगा कर एक ईसाई कपल को ज़िंदा जला दिया था। श्रीलंकाई नागरिक प्रियंथा कुमारा की हत्या से पहले लाठी-डंडों और लात-घूसों से उन्हें पीटने वालों में अधिकतर फैक्ट्री के मजदूर ही थे। पोस्टमॉर्टम में पता चला कि उनके शरीर की कई हड्डियाँ टूट गई थीं। बताया जा रहा है कि वो अनुसाशन प्रिय थे, इसीलिए कुछ मजदूर उनसे नाराज़ थे। उन्होंने कुछ ही दिनों पहले खराब काम को लेकर एक मजदूर को नसीहत दी थी।

बता दें कि एक वीडियो में हत्यारों ने कहा था, “हमने अपने साथियों से कहा कि ये गलत हुआ है। हमने अपने मैनेजमेंट से बात की। हम सब मिल कर इकट्ठे हुए और उस पर तेल डाल कर जला दिया। जो भी ऐसा करेगा, हमारे रसूल के नाम पर तो जान भी कुर्बान है। हमारे हदीस में लिखा है कि जो भी नबियों की शान में गुस्ताखी करेगा, उसका सिर तन से जुदा कर दिया जाएगा।” एक अन्य ने कहा था, “मोहम्मद कलाम नाम है मेरा। फरहान, मोहम्मद फरहान। पेपर पर हुसैन लिखा था। उसने लेकर फाड़ दिया। फाड़ कर डस्टबिन में डाल दिया।”

‘पिछली सरकार के 100+ अधिकारियों की तालिबान ने की हत्या’: HRW रिपोर्ट के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने दी कार्रवाई की चेतावनी

अफगानिस्तान में तालिबान शासन शुरू होने के साथ ही पिछली सरकार के समर्थकों और अधिकारियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा किया गया है कि अफगानिस्तान में तालिबान ने पिछली सरकार के 100 से अधिक अधिकारियों और सैनिकों की या तो हत्या कर दी या उन्हें गायब कर दिया। इस रिपोर्ट के बाद अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर पश्चिमी देशों ने कड़ा रुख अपनाते हुए तालिबान को चेतावनी दी है।

क्या कहती है ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट

ह्यूमन राइट्स वॉच ने 30 नवंबर 2021 को अफगानिस्तान में मानवाधिकार पर अपनी रिपोर्ट जारी की थी। 25 पन्नों की इस रिपोर्ट में ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ ने दावा किया है कि अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने के साथ ही तालिबान के लड़ाकों ने अब तक 100 से अधिक पूर्व अधिकारियों की या तो हत्या कर दी या फिर उन्हें गायब कर दिया है। पिछली सरकार में कार्यरत रहे आर्म्ड फोर्सेज के जवानों द्वारा तालिबानी लड़ाकों से माफी माँगने के बाद भी उनके खिलाफ लगातार एक्शन लिया जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, किन-किन लोगों को टार्गेट करना है, इसके लिए तालिबानी लड़ाके पिछली सरकार के रोजगार रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहाँ के हालात इतने बुरे हैं कि पिछली सरकार से जुड़ा कोई भी व्यक्ति खुद को सुरक्षित नहीं मान रहा है। यही नहीं, नंगरहार में आईएसआईएस का समर्थन करने वालों पर भी हमले किए जा रहे हैं।

यूरोपीय देशों का कड़ा रुख

तालिबान की इस हरकत पर यूरोपीय यूनियन और अन्य पश्चिमी देशों ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को कड़ी चेतावनी दी है और कहा है कि इन मामलों की जाँच होनी चाहिए। इन देशों ने तालिबान से स्पष्टीकरण भी माँगा है। चेतावनी देते हुए इन देशों ने कहा कि हत्याओं पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो वे कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे।

अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के साथ 21 देशों ने ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी कर कहा, “हम रेखांकित करते हैं कि कथित कार्रवाइयाँ गंभीर मानवाधिकारों के हनन को दिखाती हैं और तालिबान की घोषित माफी का खंडन करती हैं। हम तालिबान से अफगान सुरक्षा बलों के पूर्व सदस्यों और पूर्व सरकारी अधिकारियों के लिए माफी को प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान करते हैं।”

जिन देशों ने ये बयान जारी किया है उनमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, कनाडा, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, जापान, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, उत्तरी मैसेडोनिया, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड, यूनाइटेड किंगडम और यूक्रेन शामिल हैं।

पालघर में बरामद हुआ 21018 किलो बीफ, तमिलनाडु से महाराष्ट्र में हो रही थी सप्लाई: दो गिरफ्तार

महाराष्ट्र पुलिस ने पालघर के कासा इलाके से शनिवार (4 दिसंबर 2021) को 21,018 किलोग्राम बीफ जब्त किया, जिसकी कीमत 20.6 लाख रुपए बताई जा रही है। इसके अलावा पुलिस ने बीफ को एक कंटेनर ट्रक में तमिलनाडु से ठाणे ले जा रहे 37 वर्षीय कोलिंचिनाथ राजेंद्र वनियार और 36 वर्षीय रंजीत कुमार गणेशन को भी गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपित तमिलनाडु के अरियालुर के रहने वाले हैं।

वरिष्ठ निरीक्षक अजय वसावे ने एक बयान में कहा कि गुप्त सूचना के आधार पर जिला ग्रामीण पुलिस ने पालघर में मुंबई-अहमदाबाद राजमार्ग पर घोल गाँव में जाल बिछाया और एक कंटेनर ट्रक को रोका। जब इसकी जाँच की गई तो पुलिस ने पाया कि तमिलनाडु से बीफ महाराष्ट्र में ले जाया जा रहा था। अधिकारी ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों ने खेप के बारे में फर्जी बयान दिया था और भागने की कोशिश की थी, लेकिन वे पकड़े गए।

अधिकारी ने आगे बताया कि कंटेनर ट्रक के मालिक आरोपित कोलिंचिनाथ राजेंद्र वनियार (37), रंजीत कुमार गणेशन (36) के अलावा मामले से जुड़े अन्य लोगों पर भारतीय दंड संहिता, पशु क्रूरता अधिनियम और महाराष्ट्र पशु संरक्षण अधिनियम से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बता दें कि इस साल सितंबर में इस तरह की दो घटनाएँ सामने आई थीं। पहली घटना 6 सितंबर को दर्ज की गई थी, जिसमें मुंबई के एक एनजीओ की शिकायत के आधार पर पुलिस ने लगभग 100 टन अवैध बीफ और भैंस का मांस जब्त किया था। इसी महीने की 27 तारीख को दूसरा मामला सामने आया था। महाराष्ट्र के कलवा में 8,000 किलोग्राम गोमांस जब्त किया गया था। मामले में रईस अहमद सलाम कुरैशी और अब्दुल अहमद नसीम खान नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

LOC के पास रखी गई शारदा मंदिर की आधारशिला, भूमि पूजन में बड़ी संख्या में जुटे लोग: शोध केंद्र भी बनेगा, POK में है शारदा पीठ

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में स्थित शारदा पीठ मंदिर की तीर्थयात्रा शुरू करने के लिए अभियान चला रही सेव शारदा कमेटी (SSC) ने LOC के पास तीतवाल गाँव में एक शोध केंद्र के साथ ही माता शारदा देवी मंदिर की आधारशिला रखी।

टीटवाल जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में स्थित है और शारदा पीठ इस गाँव से मुश्किल से 40 किमी दूर स्थित है। 3 दिसंबर को यहाँ भूमि पूजन के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे। इसने उनकी आशा को फिर से जगा दिया कि देर-सबेर हिंदू इस मंदिर में जा सकेंगे और माँ शारदा की पूजा कर सकेंगे।

मंत्रोच्चारण के बीच पवित्र जल को एलओसी पर किशन गंगा नदी में विसर्जित किया गया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की वक्फ विकास समिति के अध्यक्ष और भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य दरखशन अंद्राबी ने मंदिर की आधारशिला रखी।

SSC के प्रमुख रविंदर रैना पंडिता ने फोन पर ऑपइंडिया को बताया, “हम देवी शारदा का मंदिर बनाएँगे। साथ ही यहाँ शारदा लिपि के प्रचार-प्रसार, शारदा पीठ पर शोध, हिंदुत्व और संबंधित विषयों पर अध्ययन का एक केंद्र भी होगा। यह भक्तों के पीठ को फिर से खोलने के हमारे अंतिम उद्देश्य की दिशा में एक कदम है।”

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने मंदिर और अनुसंधान और शिक्षा केंद्र के निर्माण के लिए तीतवाल गाँव का चयन क्यों किया, रविंदर रैना ने कहा कि प्राचीन काल से तीतवाल शारदा पीठ की तीर्थयात्रा का एक पारंपरिक मार्ग था और यहाँ शारदा पीठ की आगे की यात्रा के लिए एक बेस कैंप था।

POK स्थित शारदा पीठ

उन्होंने कहा कि मंदिर के दर्शन के लिए कई रास्ते थे। लेकिन तीतवाल सबसे महत्वपूर्ण था। उन्होंने कहा, “यहाँ एक बार एक धर्मशाला और गुरुद्वारा था जहाँ भक्त अपनी आगे की यात्रा के लिए आते और ठहरते थे। जमीन समतल करने के दौरान हमें जले हुए लकड़ी के लट्ठे मिले। लोगों ने कहा कि गहरी खुदाई से धर्मशाला के अवशेष मिल सकते हैं। हम यहाँ गुरुद्वारा भी बनाएँगे।” उन्होंने बताया कि उनकी संस्था ने धर्मशाला की 0.25 एकड़ भूमि को पुनः प्राप्त कर लिया है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि शारदा पीठ देवी के 18 महाशक्ति पीठों में से एक है। आज वह शारदा पीठ पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में है और वहाँ जाने की अनुमति किसी को नहीं है। एक समय ऐसा भी था जब बैसाखी पर कश्मीरी पंडित और पूरे भारत से लोग तीर्थाटन करने शारदा पीठ जाते थे। आज वह शारदा पीठ उस क्षेत्र में है जिसे पाकिस्तान आज़ाद कश्मीर कहता है। आज़ाद कश्मीर मीरपुर मुज़फ्फ़राबाद का क्षेत्र है जो जम्मू कश्मीर राज्य का अंग है।

शारदा पीठ का उल्लेख सर्वप्रथम नीलमत पुराण में मिलता है। इसके अतिरिक्त कल्हण ने राजतरंगिणी में लिखा है कि सम्राट ललितादित्य के समय में शारदा विश्वविद्यालय में बंगाल के गौड़ समुदाय के लोग शारदा पीठ आते थे। संस्कृत समूचे कश्मीर की भाषा थी और शारदा विश्वविद्यालय में 14 विषयों की पढ़ाई होती थी। शारदा विश्वविद्यालय में ही देवनागरी से भिन्न शारदा लिपि का जन्म हुआ था।