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हृतिक से तलाक के बाद J&K वाले अली के भाई के साथ रिलेशनशिप में सुजैन खान? गोवा में साथ की पार्टी, अब अभिनेता ने कहा – सिर्फ दोस्त

बॉलीवुड में इन दिनों अभिनेता अर्सलान गोनी और इंटीरियर डिजाइनर सुजैन खान की दोस्ती की खूब चर्चा चल रही है। फिल्मों में भले ही अर्सलान गोनी को अच्छी शुरुआत नहीं मिली हो, लेकिन वो OTT पर अपने काम को लेकर संतुष्ट हैं। बता दें कि सुजैन खान बॉलीवुड अभिनेता हृतिक रोशन की पूर्व पत्नी हैं। 2014 में इन दोनों का तलाक हो गया था। दोनों के दो बच्चे भी हैं। हालाँकि, इसके बाद भी कुछ मौकों पर हृतिक रोशन और सुजैन खान को साथ में देखा गया था।

अब कुछ मीडिया ख़बरों में दावा किया जा रहा है कि अर्सलान गोनी और सुजैन खान ‘दोस्त से ज्यादा’ हैं। अक्टूबर में गोवा में सुजैन खान के जन्मदिन की पार्टी में अर्सलान गोनी की मौजूदगी ने इन अटकलों को और बल दिया है। दोनों ने फ़िलहाल अपने रिश्ते की पुष्टि नहीं की है। हालाँकि, इन अटकलों पर अर्सलान गोनी का कहना है कि सोशल मीडिया पर चलने वाला मजाक उड़ाना एक नियमित चीज है और अक्टूबर में हुई बर्थडे पार्टी बस दोस्तों के साथ एक ‘गेट टुगेदर’ है।

उन्होंने कहा, “हर कोई अपने दोस्तों की जन्मदिन की पार्टी अटेंड कर सकता है। क्या ये सही नहीं है? लोग तो हमेशा अटकलें लगाते रहते हैं और हमें पता है कि इससे कैसे निपटना है। हम इन चीजों पर ध्यान ही नहीं देते। सुजैन खान और मैं एक अच्छे दोस्त हैं। हमारे एक कॉमन दोस्त के यहाँ हम मिले थे। इसके बाद हम लोगों में तुरंत ही दोस्ती हो गई। हम अपने अन्य दोस्तों के साथ बाहर घूमने जाते हैं। वो एक बहुत ही अच्छी व्यक्ति हैं।” उन्होंने रिश्ते की बातों को नकार दिया।

बता दें कि 2017 में ‘जिया और जिया’ के साथ बॉलीवुड में कदम रखने वाले अर्सलान गोनी की उस फिल्म को बनने में ढाई वर्ष लगे थे। ऊपर से ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई। इस फिल्म में उनके साथ कल्कि कोचलिन और ऋचा चड्ढा ने भी काम किया था। इस पर अर्सलान गोनी का कहना है कि इस प्रोफेशन में धैर्य ही सब कुछ है, क्योंकि कइयों को तो मौका भी नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में OTT और ज्यादा विकसित होगा।

बता दें कि अक्टूबर में अर्सलान गोनी ने सुजैन खान को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते समय इंस्टाग्राम पर उनके साथ अपनी तस्वीर डाली थी और उन्हें ‘डार्लिंग’ कह कर सम्बोधित किया था। साथ ही उन्होंने लिखा था कि उनके जीवन में आने वाली वो ‘बेस्ट हार्ट’ वाली व्यक्ति हैं। उन्होंने इस तस्वीर को भी काफी अच्छा बताया था। गोवा टूर से वापस मुंबई लौटते हुए एयरपोर्ट पर इन दोनों की तस्वीर भी वायरल हुई थी। जम्मू कश्मीर के एक मुस्लिम परिवार में जमे अर्सलान, टीवी अभिनेता अली गोनी के भाई हैं।

हनुमान के हाथ में मोबाइल, राम के साथ ‘फ्लर्ट’: कैरी मिनाटी के ‘हिंदूफोबिक’ वीडियो कंटेंट पर उखड़े यूजर्स, यूट्यूबर ने माफी माँग सीन को हटाया

हिंदू आस्थाओं का मजाक उड़ाना आज आम बात हो गई है। इसी क्रम में लोकप्रिय यूट्यूब चैनल ‘कैरी मिनाटी‘ उर्फ अजय नागर ने भी एक वीडियो के जरिए हिंदू आस्था को चोट पहुँचाने की कोशिश की। हालाँकि, जब विवाद बढ़ा तो कैरी ने शनिवार (4 दिसंबर 2021) को यह करते हुए माफी माँग ली कि उनका इरादा किसी को चोट पहुँचाना नहीं था।

इस मामले में कैरी ने एक इंस्टाग्राम स्टोरी में कहा, “हलाँकि किसी की भावनाओं को चोट पहुँचाने का मेरा इरादा नहीं था, फिर भी मैंने देखा है कि हमारे कुछ फैन्स ने मेरे लेटेस्ट वीडियो के एक खास हिस्से को पसंद नहीं किया। उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए मैंने वीडियो के उस हिस्से को हटा दिया है।”

कैरी मिनाटी की इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

उल्लेखनीय है कि कैरी मिनाटी ने यूट्यूब पर ‘MeTube’ स्पेस नामक एक वीडियो अपलोड किया था, जिसके बाद यूट्यूबर पर हिंदू विरोधी कॉमेडी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था। विवादित वीडियो में देखा जा सकता है कि भगवान हनुमान का रोल निभा रहे व्यक्ति को एक फिल्म के सेट पर फोन का इस्तेमाल करने के लिए एक लड़की द्वारा डाँटते हुए दिखाया गया था। इसके बाद भगवान हनुमान का रोल निभाने वाले व्यक्ति को भगवान राम का रोल निभा रहा व्यक्ति बाहर जाने के लिए कहता है। इससे उस व्यक्ति के चेहरे पर असंतुष्टि के भाव स्पष्ट नजर आते हैं।

इसके अलावा, इसमें एक लड़की को भगवान राम का अभिनय कर रहे व्यक्ति के साथ छेड़खानी करते दिखाया गया है। वीडियो में लड़की पूछती है, “तुम बाद में क्या कर रहे हो?” इस वीडियो से कैरी को फॉलो करने वाले उनके हिंदू फॉलावर्स की भावनाओं को ठेस पहुँची। बाद में लोगों ने कैरी को हिंदू देवी-देवताओं के कैरेक्टर का मजाक नहीं बनाने की सलाह दी।

गौरतलब है कि हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने से पहले इसी साल सितंबर में महिलाओं पर अपमानजनक टिप्पणी कर उनकी भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामले में कैरी मिनाटी के खिलाफ दिल्ली के सिविल लाइंस थाने में एक केस भी दर्ज किया गया था।

एक सैनिक समेत 13 की मौत, मजदूरों के पिकअप वैन पर गोलीबारी के आरोप: नागालैंड में भड़की हिंसा, अमित शाह ने कहा – जाँच होगी

नागालैंड के मोन जिले में ओटिंग और तिरु गाँव के बीच के इलाके में हुई गोलीबारी में 13 लोगों की मौत हो गई है, जिसमें भारतीय सेना का एक जवान भी शामिल है। ये घटना शनिवार (4 दिसंबर, 2021) की शाम को हुई। एक अधिकारी ने बताया कि दिहाड़ी मजदूरों का एक समूह एक कोयले की खदान से ओटिंग गाँव में लौट रहा था। वो लोग एक पिकअप वैन में थे। आरोप है कि सैनिकों ने उन पर गोलीबारी की। कई घंटों तक जब वो नहीं लौटे तो उनके गाँव के कुछ लोग उन्हें खोजने के लिए निकले।

इस दौरान उन मजदूरों के शव पिकअप वैन में ही पड़े रहे। इसके बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए और उन्होंने सुरक्षा बलों की दो गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। स्थिति फ़िलहाल नियंत्रण में है और मौके पर पुलिस तैनात है। ‘असम राइफल्स’ ने बताया कि उस क्षेत्र में उग्रवादियों की गतिविधियों को लेकर मिली विश्वसनीय ख़ुफ़िया सूचना के बाद एक अभियान चलाने की योजना बनी थी। इस घटना और इसके बाद हुई घटनाओं को लेकर ‘असम राइफल्स’ ने खेद भी प्रकट किया है।

‘असम राइफल्स’ ने ये भी जानकारी दी है कि 13 ज़िंदगियों के चले जाने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और उच्च-स्तर पर इसकी जाँच की जा रही है। साथ ही आश्वस्त किया गया है कि कानून के हिसाब से इस मामले में उचित करवाई की जाएगी। जहाँ सेना के एक जवान की मौत हुई है, कई अन्य घायल भी हुए हैं। प्रतिबंधित आतंकी संगठन NSCN (K) के ‘युंग ऑन्ग’ गुट के वहाँ सक्रिय होने की सूचना मिली थी। बता दें कि ये आतंकी संगठन म्यांमार में स्थित है और भारत में अपनी गतिविधियों को अंजाम देता है।

नागालैंड के मोन जिले की सीमा भी म्यांमार से लगती है। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताते हुए मृतकों के परिवार को सांत्वना दी और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने इस मामले की जाँच के लिए एक उच्च-स्तरीय SIT के गठन की घोषणा करते हुए कहा कि वहाँ के कानून के हिसाब से न्याय होगा। उन्होंने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी दुःख जताते हुए जाँच का आश्वासन दिया है।

असम के कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि इस गोलीबारी के पीछे का सच उजागर होना चाहिए। TMC की नेता सुष्मिता देव ने इसे चिंताजनक बताते हुए जुलाई में असम-मिजोरम सीमा विवाद हिंसा को याद किया और कहा कि अब तक उसका कारण सामने नहीं आया है। मेघायल के मुख्यमंत्री कोर्नाड संगमा ने भी इस घटना पर दुःख जताया है। नागालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री टीआर जेलिआंग ने जाँच समिति के गठन की माँग करते हुए इसे ‘नरसंहार’ करार दिया।

दीमापुर में स्थित भारतीय सेना के III कॉर्प्स मुख्यालय ने जानकारी दी है कि कई सैनिक भी इसमें बुरी तरह घायल हुए हैं। कोन्याक समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘कोन्याक यूनियन’ ने कहा कि मजदूरों की गाड़ी पर घात लगा कर सैनिकों ने गोलीबारी की। ‘ईस्टर्न नागालैंड पीपल्स आर्गेनाईजेशन (ENPO)’ ने इस घटना को लेकर विरोध जताते हुए राजधानी कोहिमा के पास किसामा में चल रहे वार्षिक हॉर्नबिल फेस्टिवल से उन 6 ट्राइब्स को वापस ले लिया है, जिनका वो प्रतिनिधित्व करता है।

विनोद दुआ की प्रणय रॉय को धमकी: NDTV के बवाल में मारने-खत्म करने से लेकर हिम्मत/अंडकोष तक का जिक्र

पत्रकार विनोद दुआ के निधन के बाद, कुछ लोगों ने, खासकर मीडिया से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त किया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। कुछ ने यह भी बताया कि वह अब तक के सबसे महान पत्रकारों में से एक थे। इन्हीं में से एक थे NDTV के चीफ प्रणय रॉय।

कई लोगों ने यह साझा करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया कि कैसे वे रॉय और दुआ द्वारा टेलीविजन स्क्रीन पर राजनीतिक विश्लेषण देख कर बड़े हुए।

हालाँकि, इन सबके साथ विनोद दुआ के निधन के बाद 2013 का एक स्क्रीनशॉट भी वायरल हो रहा है।

साभार: विनोद दुआ की फेसबुक टाइमलाइन (2013)

‘मैं उन्हें मार दूँगा’

जून 2013 में, विनोद दुआ ने प्रणय रॉय पर हमला करने के लिए फेसबुक का सहारा लिया और उन पर एक राजनीतिक पत्रकार के रूप में उनका करियर बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा था, “इस आदमी ने मुझे धोखा दिया है और मैं अपना बदला लूँगा।” उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट किया था, “मुझे विश्वास है, उन्हें मारने का समय आ गया है… मुझे कुछ महीने लग सकते हैं लेकिन मैं उन्हें मार दूँगा… इंडियन ब्रॉडकास्टिंग के ये चोर। हमारे द्वारा वित्त पोषित।” हालाँकि यह स्पष्ट नहीं था कि दुआ का मतलब उन्हें शब्दों से मारना था या वाकई में वो उन्हें मार डालना चाहते थे।

विनोद दुआ ने तब कहा कि उन्होंने रॉय पर एक वीकेंड राजनीतिक कार्यक्रम तैयार करने का भरोसा किया था, जिसका उनसे वादा किया गया था। हालाँकि रॉय ने उनका विश्वास तोड़ दिया, उन्हें धोखा दिया। उन्होंने कहा कि वह इसे सार्वजनिक रूप से इसलिए बता रहे हैं क्योंकि रॉय के निजी सचिव हन्ना भी उनका फोन नहीं उठा रहे थे। उन्होंने कहा, “आपने ही मुझे अपने साथ काम करने के लिए आमंत्रित किया था।” आगे दुआ ने कहा कि उन्होंने कभी भी अपने ‘आउटफिट’ के लिए काम करने के लिए नहीं कहा। उन्होंने पोस्ट में लिखा था, “चूँकि आपने मेरे करियर को डिजाइन नहीं किया है, इसलिए मैं आपको अपना अंत नहीं करने दूँगा।”

उन्होंने पोस्ट किया था, “जब भी आपके पास बॉल्स (हिंदी का शब्दानुवाद अंडकोष) / हिम्मत होगा, हम आमने-सामने मिलेंगे प्रणय रॉय। वरना हम टीवी पर मेरे राजनीतिक करियर को खत्म करने की कोशिश करने के लिए आपसे संपर्क करेंगे।”

आपको बता दें कि 1980 के दशक में विनोद दुआ ने प्रणय रॉय के साथ दूरदर्शन पर चुनावी विश्लेषण शुरू किया था। बताया जा रहा है कि वह 2004 में एनडीटीवी ज्वाइन किए थे, लेकिन वह राजनीतिक शो के बजाय फूड शो को होस्ट करते थे। प्रणय रॉय ने भी उसी समय करियर की शुरुआत की थी, लेकिन वह मीडिया के जाने-माने नाम थे, जबकि दुआ उसी ‘आउटफिट’ में सिर्फ एक अंशकालिक सलाहकार थे। उस समय दुआ और रॉय के बीच लड़ाई ने काफी कौतूहल और मनोरंजन का माहौल बना दिया था।

2013 में ट्विटर पर दुआ का मेल्टडाउन

अगस्त 2013 तक, यह बिल्कुल स्पष्ट था कि मोदी लहर आ रही है और 2014 के आम चुनाव एक पत्रकार के रूप में कवर करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक होंगे। ‘जायके का सफर’ के मेजबान शायद अब तक के सबसे महान चुनावों का हिस्सा नहीं होने से नाराज थे। तब वो प्रणय रॉय पर जमकर बरसे और उन पर उनका करियर बर्बाद करने का आरोप लगाया। इसके तुरंत बाद, उन्होंने NDTV से अपना जुड़ाव समाप्त कर लिया, जहाँ वे एक ‘अंशकालिक सलाहकार’ थे।

हालाँकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि दुआ को फेसबुक पर मेल्टडाउन से पहले या बाद में एनडीटीवी से निकाल दिया गया। आखिरकार, फरवरी 2014 में, आम चुनावों के ठीक बीच में दुआ राघव बहल के नेटवर्क 18 में शामिल हो गए थे।

विनोद दुआ और पाखंड

विनोद दुआ के निधन पर उनकी बेटी मल्लिका ने कहा – अब वो स्वर्ग में मेरी माँ के साथ घूमेंगे-गाएँगे। हालाँकि शायद खुद विनोद दुआ स्वर्ग में यकीन नहीं करते थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर विनोद दुआ बोले थे कि ये हमारे देश का पाखंड है कि किसी के देहांत के बाद उसे महापुरुष बना दिया जाता है। और तो और, ये वही विनोद दुआ थे, जिन्होंने गोधरा में ट्रेन में जलाकर मार डाले गए राम भक्तों को लेकर उपहास किया था।

चेतावनी के बावजूद JNU में बाबरी पर आधारित विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग, सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई की तैयारी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में वामपंथी छात्र संघ ने शनिवार (4 दिसंबर 2021) को बाबरी मस्जिद पर आधारित विवादित डॉक्यूमेंट्री ‘राम के नाम’ की स्क्रीनिंग की। इसके बाद जेएनयू प्रशासन आयोजकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के स्क्रीनिंग रोकने की नोटिस को ताक पर रखते हुए शनिवार रात 9:30 बजे न सिर्फ फिल्म की स्क्रीनिंग की, बल्कि इसको देखने के लिए सैकड़ों छात्रों को परिसर में एकत्रित भी किया। स्क्रीनिंग के दौरान कोई माहौल ना बिगड़े इसको लेकर सिक्योरिटी बड़ी संख्या में मौजूद थी।

एसएफआई ने शुक्रवार (3 दिसंबर 2021) को इस कार्यक्रम के पैम्फलेट वितरित किए थे। इसके बाद जेएनयू प्रशासन ने शनिवार को एक नोटिस जारी कर चेतावनी दी थी। नोटिस में कहा गया था कि छात्रों के एक समूह द्वारा परिसर में ‘राम के नाम’ डाक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने की सूचना मिली है। छात्रों ने इस तरह के किसी भी कार्यक्रम की पूर्व अनुमति विश्वविद्यालय प्रशासन से नहीं ली है। नोटिस में कहा गया कि इस कार्यक्रम से शांति भंग और सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगड़ सकता है। इसलिए इस कार्यक्रम को तत्काल रद्द कर दें।

जेएनयू प्रशासन की नोटिस और चेतावनी के बावजूद छात्र संघ ने इस विवादित कार्यक्रम को तय समय पर ही आयोजित किया। जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की अध्यक्ष आइशी घोष ने फेसबुक पर वीडियो के माध्यम से कहा था कि कार्यक्रम को रद्द नहीं किया जाएगा और वह तय समय पर ही आयोजित किया जाएगा। वहीं, स्क्रीनिंग के बाद अब जेएनयू प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही है।

जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की अध्यक्ष आइशी घोष ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा था कि उन्होंने यूनियन हॉल में ‘राम के नाम’ की स्क्रीनिंग निर्धारित की है। आइशी ने कहा, “आरएसएस-भाजपा के कठपुतली लोग जो इस यूनिवर्सिटी में बैठे हैं, इनको इस बात से दिक्कत है कि यह डॉक्यूमेंट्री बीजेपी की सच्चाई को दिखाता है। ये जो राइटविंग फंडामेंटलिस्ट लोग हैं, जो देश की कम्यूनल हारमनी को खराब करना चाहते हैं, उसकी सच्चाई को दिखाता है, ना कि कम्यूनल हारमनी को बिगाड़ता है। जेएनयूएसयू किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा। यह कार्यक्रम होगा और हम जेएनयू छात्र समुदाय से इस डॉक्यूमेंट्री को देखने के लिए रात नौ बजे बड़ी संख्या में एकत्र होने का अनुरोध करते हैं।”

बता दें कि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी का विवादों से पुराना नाता रहा है। यह पहली बार नहीं है, जब राम के नाम पर जेएनयू ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की हो। इससे पहले भी वह कई बार ऐसा कर चुका है। जिसकी स्क्रीनिंग के लिए वामपंथी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति लेना भी जरूरी नहीं समझा पर वह बाबरी मस्जिद पर आधारित विवादित डॉक्यूमेंट्री पिक्चर है। इसमें बाबरी विध्वंस और विध्वंस के बाद मारे जा रहे अल्पसंख्यकों के प्रोपेगेंडा को दिखाया गया है।

‘तुम हिंदुओं को मार क्यों नहीं देते’ – पाकिस्तान के शिक्षक मुस्लिम छात्रों को पढ़ाते हैं, पत्रकार ने सुनाई आपबीती

एक पाकिस्तानी पत्रकार ने शुक्रवार (3 दिसंबर 2021) को खुलासा किया कि कैसे उसके देश के शैक्षणिक संस्थानों में हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है। ईशनिंदा के आरोप में श्रीलंकाई नागरिक की निर्मम हत्या के बाद पत्रकतार की यह प्रतिक्रिया सामने आई है।

‘Tellings with Imran Shafqat’ प्रोग्राम के दौरान एक पैनलिस्ट ने पाकिस्तान में सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में दी जानी वाली तालीम पर सवाल उठाए। इसके साथ ही शिक्षकों के असहिष्णु और कट्टर व्यवहार पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हमारे बच्चों को स्कूलों में क्या पढ़ाया जा रहा है? जब मेरे बच्चे स्कूल से घर लौटते हैं, तो मुझसे अजीबोगरीब सवाल पूछते हैं। एक दिन मेरे बेटे ने पूछा कि अब्बू क्या पाकिस्तान में हिंदू भी हैं। मैंने उसे अपने हिंदू दोस्त के बारे में बताया। फिर उसने मुझसे बताया कि स्कूल में मेरे टीचर कह रहे थे आपके सिंध में अगर हिंदु हैं तो आप उन्हें मार क्यों नहीं देते।”

पाकिस्तानी पत्रकार का कहना है कि उसके बेटे को स्कूल में पढ़ाया जाता है, ”अगर सिंध में हिंदू हैं तो आप लोग उन्हें मार क्यों नहीं देते।” यह सुनकर पत्रकार दंग रह जाता है। स्कूल में हिंदुओं के खिलाफ फैलाई जा रही नफरत को लेकर उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल से भी बात की।

पत्रकार ने आगे कहा, “इन स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली तालीम नफरत से भरी हुई है। इससे वे क्या सीखेंगे? हमें इस पर नजर रखना होगा कि उन्हें क्या सिखाया जा रहा है। ये सब 40-50 वर्षों से चला आ रहा है। इस पर खुलकर बात भी नहीं ​की जा सकती है।”

सियालकोट मॉब लिंचिंग मामला और उसके बाद

लाहौर से 100 किलोमीटर दूर सियालकोट में शुक्रवार (3 दिसंबर 2021) को एक श्रीलंकाई व्यक्ति प्रियंता कुमारा को ​ईशनिंदा के आरोप में इस्लामी भीड़ ने पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। इसके बाद उन्हें जिंदा जला दिया गया। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें इस्लामी भीड़ को ‘नारा ए तकबीर’ और ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ के नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही साजा, सर तन से जुदा सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए थे।

पाकिस्तानी इस्लामवादियों ने जिस शख्स की हत्या की, वो सियालकोट में राजको इंडस्ट्रीज के जीएम थे। राजको वह कंपनी है, जिसने विश्व कप के लिए पाकिस्तान टी-20 टीम के लिए क्रिकेट जर्सी और गियर बनाया था। श्रीलंकाई सरकार के राजनयिक दबाव के बाद पाकिस्तान को उन इस्लामवादियों पर कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिन्होंने प्रियंता कुमारा की हत्या की।

पुलिस मुख्य आरोपित फरहान इदरीस को गिरफ्तार कर चुकी है, जो वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा था। सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस इस जघन्य अपराध में शामिल सैकड़ों लोगों को पकड़ने में सफल रही। भीड़ को भड़काने के आरोप में शनिवार (4 दिसंबर) को पुलिस ने दूसरे आरोपित तल्हा को भी गिरफ्तार कर लिया।

इस्लामी आतंकियों का मक्का मस्जिद पर कब्जा… ‘दुखी’ कट्टरपंथियों ने तोड़ा श्री भाग्यलक्ष्मी मंदिर, कॉन्ग्रेसी सरकार रही थी चुप

42 साल पहले नवंबर के महीने में सऊदी अरब की एक घटना ने हैदराबाद में कट्टरपंथी भीड़ को भड़का दिया था। ये वो घटना थी, जिसमें सलाफी समूह ने इस्लाम की सबसे पवित्र जगह मक्का की मस्जिद को अपने कब्जे में ले लिया था। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 20 नवंबर 1979 और इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से साल 1400 का पहला दिन। उस दिन मक्का मस्जिद में देश-विदेश से आए हजारों हज यात्री शाम के समय नमाज का इंतजार कर रहे थे।

करीब 400 से 500 हथियारबंद लोगों ने सभी नमाज अता करने आए लोगों को अपने काबू में कर लिया। इन हथियारबंद लोगों में कई औरतें और बच्चे भी थे। अल कुओंताय्बी नाम के आन्दोलन से जुड़े हुए इन हमलावरों ने मक्का शहर के बड़े मस्जिद पर कब्जा उस समय कर लिया, जब सऊदी बिन लादेन ग्रुप मस्जिद में कुछ मरम्मत का काम कर रही थी। इस से पहले की हमलावर टेलिफोन के तार काट पाते, उनके एक कर्मचारी ने बाहर इस बात की सूचना पहुँचा दी। दुनिया जान गई थी कि कुछ भयंकर होने वाला है।

हमलावरों ने एक साजिश के तहत कई बंधकों को मस्जिद के बाहर निकाल दिया और बाकी के बंधकों को अपने कब्ज़े में लेकर अंदर बंद रहे। अब बाहर कोई नहीं समझ पा रहा था कि अंदर कितने बंधक और कितने हमलावर मौजूद हैं। ऐसे माहौल में मदद के लिए पाकिस्तानियों से भी मदद माँगी गई। मगर कई दिन तक पाकिस्तानी कमांडो भी कुछ नहीं कर पाए।

आखिर में फ़्रांसिसी कमांडो का एक दस्ता Groupe d’Intervention de la Gendarmerie Nationale (GIGN) मक्का आया। चूँकि मक्का में गैर मुस्लिमों को घुसने की इज़ाजत नहीं होती तो पहले एक छोटे से आयोजन में तीन कमांडो ने धर्म परिवर्तन किया। फिर गैस के गोले अंदर फेंके गए, अंदर के चैम्बर में से हमलावरों को खुली जगह में आना पड़ा। दीवारों में ड्रिल कर के अन्दर अब बम फेंक दिए गए। फिर आगे की कार्रवाई में मस्जिद आजाद करवाया जा सका।

हालाँकि यह घटना घटी सऊदी अरब में, लेकिन इसका सीधा असर देखने को मिला भारत के शहर हैदराबाद में। काबा पर हमले के विरोध में MIM (अब यही AIMIM है) ने 23 नवंबर 1979 को हैदराबाद बंद का आह्वान किया। इस मामले में, भले ही हिंदू काबा के कब्जे में शामिल नहीं थे, हिंदुओं और हिंदू मंदिरों पर हमले हुए। जब हिंदू दुकानदारों ने बंद का विरोध किया तो मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने चारमीनार से सटे श्री भाग्यलक्ष्मी मंदिर पर हमला किया और उसे अपवित्र किया। मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिंदू दुकानों में भी आग लगा दी। यह दंगा तकरीबन 10 दिन तक चलता रहा।

जानकारी के मुुताबिक दिवाली नजदीक आ रही थी, तो कई हिंदू दुकानदारों ने MIM से अनुरोध किया कि उन्हें अपनी दुकानें खुली रखने की अनुमति दी जाए। इसके परिणामस्वरूप झड़पें हुईं और भाग्यलक्ष्मी मंदिर पर हमला किया गया। माँ लक्ष्मी की मूर्ति तोड़ दी गई।

यह दंगा तब तक चलता रहा, जब तक कि सऊदी अरब ने मस्जिद पर फिर से कब्जा नहीं कर लिया और इसमें कोई हैरत की बात नहीं है कि दंगों के बाद तत्कालीन सीएम चेन्ना रेड्डी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने एमआईएम दंगाइयों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। दंगों के दौरान दर्ज किए गए सभी मामलों को भी बाद में बंद कर दिया गया।

श्री भाग्यलक्ष्मी मंदिर माँ लक्ष्मी का मंदिर है और चारमीनार के दक्षिण-पूर्वी मीनार से सटा है। मंदिर का अस्थाई ढाँचा बांस-तिरपाल और टिन से निर्मित है, जिसकी पिछली दीवार चारमीनार की ही एक मीनार है। श्री भाग्यलक्ष्मी मंदिर का मौजूदा ढाँचा भी वहाँ कब से है, इसके बारे में कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन, कहते हैं कि यहाँ कम से कम 1960 की दशक से तो जरूर पूजा-अर्चना हो रही है।

थूक लगा रोटी बना रहा था नौशाद, बच्चे के बनाए वीडियो से धराया: मेरठ की पुलिस हिरासत में ले कर रही जाँच

उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक बार फिर थूक लगाकर रोटी बनाने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र में आंबेडकर रोड स्थित लक्ष्मीनगर में गुरुवार (2 दिसंबर 2021) को सगाई समारोह था, जिसमें तंदूर पर एक युवक थूक लगाकर रोटी बना रहा था। इसी बीच एक बच्चे ने उसका वीडियो बना लिया और शुक्रवार (3 दिसंबर 2021 ) को अपने परिजनों को दिखाया। परिजनों ने वीडियो देखने के बाद ठेकेदार को फोन कर आरोपित को बुलाने को कहा। आरोपित युवक और ठेकेदार के मौके पर पहुँचने के बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना देकर बुलाया। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर दोनों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में नौशाद नाम का युवक रोटी बना रहा है। वह रोटी पर बार-बार थूक लगा रहा था। एक बच्चे ने उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। आरोपित नौशाद कैथवाड़ी रोहटा का रहने वाला है। वहीं, कंकरखेड़ा इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सक्सेना कहना है कि ​रोटी में थूक लगाकर सगाई समारोह में परोसने की शिकायत मिली है। आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि इस साल मेरठ में थूक लगाकर रोटी बनाने का यह दूसरा मामला है। इससे पहले फरवरी 2021 में एक शादी समारोह में थूक लगा कर रोटी बनाने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया गया था। उस आरोपित का नाम नौशाद उर्फ़ सुहैल था। इस मामले में ‘हिन्दू जागरण मंच’ के सचिन सिरोही ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। 

पूरे साल भर की बात करें तो (जो शिकायत होने के बाद मीडिया की रिपोर्ट में छपी) 9 महीने में 9 लोग रोटी पर थूक लगा कर सेंकते हुए पकड़े गए। इन 9 लोगों और कुछ मामले में इनसे संबंधित लोगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया, कार्रवाई की।

नए ट्विटर CEO को ‘बनिया’ बता कर ‘ब्राह्मणों के प्रभुत्व को हिलाने वाला’ कह रहे दिलीप मंडल, पहले ब्राह्मण जान लिबरलों ने दी थी गाली

जैक डोर्सी के ट्विटर से इस्तीफा देने के बाद भारतीय मूल के पराग अग्रवाल को ट्विटर के सीईओ के रूप में नियुक्त किया गया। उनकी नियुक्ति के साथ ही भारत में लेफ्ट-लिबरलों ने उनकी जाति को लेकर उन्हें गाली दी थी। लेफ्ट-लिबरलों, दलित कार्यकर्ताओं और श्वेत वर्चस्ववादियों ने अग्रवाल को ब्राह्मण समझकर उन्हें निशाना बनाया था। लेकिन अब जब उन्हें पता चल गया है कि वह ब्राह्मण नहीं हैं, तो वे उनका ऐसे व्यक्ति के रूप में स्वागत कर रहे हैं, जिन्होंने ट्विटर पर ‘ब्राह्मण वर्चस्व’ को तोड़ा है।

द प्रिंट के हिंदी संस्करण पर प्रकाशित एक लेख में, प्रोफेसर दिलीप मंडल ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर शीर्ष पद पाने के लिए पराग अग्रवाल की सराहना करते हुए कहा कि वह आईआईटी में ब्राह्मणों के प्रभुत्व को हिलाने वाले अकेले नहीं हैं। गॉसिप वेबसाइट मिसमालिनी की संस्थापक मालिनी अग्रवाल के एक ट्वीट का हवाला देते हुए (जिसमें उन्होंने कहा था कि यह बनिया पावर का एक उदाहरण है) दिलीप मंडल ने दावा किया कि बनिया के ट्विटर सीईओ बनने के बाद बनिया पावर एक हकीकत है।

दिलीप मंडल ने यह दावा तब किया जब मालिनी अग्रवाल ने अपने जातिवादी ट्वीट को हटा दिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से आलोचना के बाद इसके लिए माफी माँगी। उन्होंने आगे दावा किया कि उन्हें ट्वीट को हटाने के लिए मजबूर किया गया था क्योंकि भारत में केवल ब्राह्मण या ठाकुर ही अपनी जातियों पर गर्व का प्रदर्शन करते हैं और जब अन्य जातियों के लोग अपनी जाति की पहचान पर गर्व करते हैं, तो यह अटपटा लगता है।

दिलीप मंडल का कहना है कि पराग अग्रवाल का शिखर पर जाना कोई संयोग नहीं है और बनिया पेशेवरों ने हाल के वर्षों में आईटी और आईटी से संबंधित क्षेत्रों में अच्छी सफलता हासिल की है। उन्होंने दावा किया कि यह क्षेत्र कभी ब्राह्मणों का प्रभुत्व था जो अब ढहने वाला है। मंडल ने आगे दावा किया कि भारत की आईटी क्रांति मुख्य रूप से दूसरी या तीसरी पीढ़ी की शिक्षित उच्च जातियों के नेतृत्व में थी, और उनमें से अधिकांश ब्राह्मण थे।

प्रिंट लेख में, दिलीप मंडल ने दावा किया कि ज्ञान, पावर, इंजीनियरिंग शिक्षा आदि सब कुछ में ब्राह्मणों का प्रभुत्व था और अब बनिया समुदाय उन्हें उन क्षेत्रों में चुनौती दे रहा है।

उल्लेखनीय है कि हालाँकि दिलीप मंडल खुशी के साथ नाच रहे हैं कि ब्राह्मण नहीं एक बनिया पराग अग्रवाल ट्विटर का सीईओ बन गया, जबकि सच यह है कि अग्रवाल उस SC/ST समुदाय से नहीं हैं जैसा मंडल समझ रहे हैं। अग्रवाल एक व्यापारिक समुदाय है जो व्यापार और अपनी संपत्ति में विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है और उन्हें ‘उत्पीड़ित’ समुदाय के रूप में नहीं माना जाता है। राजस्थान के अग्रवाल (पराग अग्रवाल के मूल राज्य) उच्च जाति के हैं और वे सामान्य श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, ब्राह्मणों के समान श्रेणी में।

इसलिए, यह स्पष्ट नहीं है कि एक दलित कार्यकर्ता इस बात से खुश क्यों है कि आईआईटी और आईटी इंडस्ट्री में एक उच्च जाति दूसरी उच्च जाति की जगह ले रही है। वह बनिया समुदायों की एक विस्तृत श्रृंखला से भ्रमित हो सकते हैं, क्योंकि कुछ बनिया समुदाय, विशेष रूप से पूर्वी भारत में, अनुसूचित जाति के अंतर्गत आते हैं और वे पश्चिमी भारत के बनिया की तरह अमीर नहीं हैं।

यह भी मजेदार है कि जैक डोर्सी की जगह पराग अग्रवाल के आने से दिलीप मंडल खुश हैं, क्योंकि उन्हें अभी तक ब्राह्मणों पर जैक डर्सी के विचार शायद ज्ञात नहीं हैं। बता दें जैक का ब्रह्मणों के प्रति घृणास्पद नजरिया था। 2018 में अपनी भारत यात्रा के दौरान, उन्होंने एक तख्ती के साथ तस्वीरें खिंचवाई थीं, जिस पर लिखा था, “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता को तोड़ो।”

गौरतलब है कि इससे पहले 2019 में दिलीप मंडल ने ट्विटर पर जातिवादी होने का आरोप लगाया था क्योंकि उन्हें वेरिफाइड ब्लू टिक नहीं दिया गया था। उन्होंने ट्विटर इंडिया के तत्कालीन प्रमुख मनीष माहेश्वरी को कथित तौर पर दलितों के साथ अन्याय करने और उनके ट्विटर हैंडल को वेरिफाइड त नहीं करने के लिए जातिवादी कट्टर कहा था। लेकिन जब ट्विटर ने उनकी अकाउंट को वेरिफाई कर दिया तो उन्होंने ट्विटर पर सभी को ‘समान दर्जा’ मिलने की बात कहते हुए इसे हटाने की माँग की थी।

‘जिन्ना के सपनों को ना जीएँ ओवैसी, भारत में 1947 दोबारा नहीं आएगा’: भड़के गिरिराज सिंह, उपेंद्र कुशवाहा बोले- जबरदस्ती नहीं गवा सकते ‘वंदे मातरम’

बिहार विधानसभा के समापन सत्र में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायकों द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने और पार्टी के विधायक अख्तरुल इमान द्वारा इसे सदन में गाने का विरोध करने पर राजनीति गरमा गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह और जेडीयू संसदीय दल के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने इस पर अपनी प्रति​क्रिया व्यक्त की है।

गिरिराज सिंह ने असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि AIMIM के मुखिया ही जब ऐसे हैं तो उनके विधायकों से क्‍या उम्‍मीद की जा सकती है। उन्होंने ओवैसी पर बरसते हुए आगे कहा कि वे तो जिन्‍ना के सपनों को लेकर भारत में भ्रम और विभेद फैला रहे हैं, लेकिन उन्‍हें पता होना चाहिए कि 1947 भारत में दोबारा नहीं आने वाला है। एक सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रगीत देश की आत्‍मा में बसा है। लोगों ने तो यह भी कहा था कि राम मंदिर नहीं बनेगा, लेकिन वह बना।

वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान के राष्ट्रगीत नहीं गाने पर कहा, ”अगर कोई नहीं बोलता है तो आप जबरदस्ती नहीं बोलवा सकते हैं। किसी के राष्ट्रगीत गाने से वह बड़ा देशभक्त नहीं हो जाता है।”

इससे पहले राष्ट्रगीत को लेकर AIMIM विधायक की टिप्पणी पर बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि इमान की हरकत देशद्रोह की श्रेणी में आती है और उनके खिलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए। 

बता दें कि इस बार बिहार विधानसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने सत्र के पहले दिन राष्ट्रगान (जन गण मन) और आखिरी दिन राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) गाने की परंपरा शुरू की। इसको लेकर AIMIM नेता अख्तरुल इमान ने आपत्ति जताई। मीडिया से बातचीत में इमान ने स्पीकर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर कहाँ लिखा है कि राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य है। वह कहते हैं कि राष्ट्रगीत पर कई आपत्तियाँ हैं और ऐसे सदन में जो सबकी सहमति से चल रहा हो, वहाँ ऐसी रिवायत को कायम करना ये बिल्कुल ठीक नहीं है।