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‘वो बच्चे हैं… जोश में आए और काम हो गया’ : श्रीलंकाई मैनेजर के ‘हत्यारों’ के बचाव में उतरे Pak के रक्षा मंत्री

पाकिस्तान में ‘ईशनिंदा’ का आरोप लगा कर एक श्रीलंकाई नागरिक की सरेआम निर्मम हत्या कर दी गई और अब वहाँ के रक्षा मंत्री हमलावरों का ये कहकर बचाव कर रहे हैं कि जिन्होंने फैक्ट्री मैनेजर को जिंदा जलाया वो बच्चे हैं और जोश में आकर उन्होंने ये सब किया है। उनके मुताबिक अगर वो भी जोश में हों तो ऐसी गलती कर दें।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बिगड़े बोल

प्रियांथा कुमारा की हत्या मामले में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री परवेज खटक ने कहा, “बच्चे हैं, बड़े होते हैं, इस्लामी दीन है, सोच ज्यादा है, जोश में आ जाते हैं, इसका ये मतलब नहीं कि ‘ये’ किया तो ‘ये’ हो गया। ये हर किसी की अपनी सोच है। वहाँ पर लड़के इकट्ठा हुए। उन्होंने इस्लाम का नारा लगाया कि ये इस्लाम के ख़िलाफ़ काम है। जज्बे में आ गए। काम हो गया अचानक। इसका ये मतलब नहीं है सब कुछ बिगड़ गया है।”

आगे खटक कहते हैं, “प्लीज आप लोगों को समझाएँ ज़रा। नौजवान हैं, जज्बे में आते हैं। दीन में मैं भी जज्बे में आऊँगा तो मैं भी गलत करूँगा। इसका मतलब ये नहीं है कि पाकिस्तान तबाही की तरफ जा रहा है।”

रक्षा मंत्री आगे पत्रकार से पूछते हैं, “आप जब कॉलेज में थे जज्बा था आप में? था। ये न कहें जब (जवानी में) हम पागल होते थे, जब हम जवान होते थे, कुछ भी करने को तैयार होते थे। लेकिन जैसे-जैसे बढ़े हमने महसूस किया कि जो जज्बा है वो हमें संभाल के रखना है। बच्चों का होता है कि लड़ाइयाँ भी होती हैं, कत्ल भी हो जाते हैं, इसका मतलब ये है कि हुकूमत की गलती है।”

अपनी सरकार पर लग रहे इल्जामों से छुटकारा पाने के लिए रक्षा मंत्री ने सारा ठीकरा पत्रकारों पर फोड़ दिया। वह बोले, “आप लोग हर चीज हुकूमत पर डालते हैं- आप ये सोच क्यों नहीं बदलते। आप मुझसे सवाल करते हैं। आप लोग सामने आएँ। आपके एंकर आएँ, सबको दीन की बातें बताएँ। लेकिन आप लोग सिर्फ विज्ञापन लेते हैं, पैसे कमाते हैं…न दीन की बातें करते हैं न तालीम की बात करते हैं और न सेहत की बात करते हैं। बस सिर्फ पैसा ही कमाना होता है। “

सियालकोट में श्रीलंकाई नागरिक को जिंदा जलाया

3 दिसंबर को पाकिस्तान के सियालकोट में श्रीलंकाई नागरिक प्रियांथा कुमारा को जला कर मार डाला गया। इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने उनके ऊपर आरोप मढ़ा था कि उन्होंने एक ऐसे कागज को कूड़े में फेंका जिस पर हुसैन लिखा था।

प्रियांथा द्वारा की गई इस कथित ईशनिंदा के बदले उनके ऊपर सैंकड़ों कट्टरपंथियों ने हमला बोला। सामने आई वीडियोज में गुस्साई भीड़ को ‘नारा ए तकबीर’ और ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ के नारे लगाते हुए सुना गया। इसके अलावा प्रियांथा कुमारा को जला कर मार डालने के दौरान कट्टरपंथी अन्य कई नारे भी लगा रहे थे, जिसमें से एक नारा था, “गुस्ताख-ए-नबी की एक ही साज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा।”

हत्यारों ने कबूला जुर्म

श्रीलंकाई नागरिक की पाकिस्तान में हत्या के बाद ट्विटर पर हामिद मीर ने एक वीडियो शेयर की। इसमें प्रियांथा को मारने वाले कट्टरपंथी कह रहे थे,  “हुसैन लिखे कागज़ को फाड़ कर कूड़ेदान में फेंकना हमसे बर्दाश्त नहीं हुआ।” हत्यारों ने कहा, “हमने अपने साथियों से कहा कि ये गलत हुआ है। हमने अपने मैनेजमेंट से बात की। हम सब मिल कर इकट्ठे हुए और उस पर तेल डाल कर जला दिया। जो भी ऐसा करेगा, हमारे रसूल के नाम पर तो जान भी कुर्बान है। हमारे हदीस में लिखा है कि जो भी नबियों की शान में गुस्ताखी करेगा, उसका सिर तन से जुदा कर दिया जाएगा।”

छावनी सी अयोध्या, राम राज्य सी व्यवस्था और एक साधु… 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में क्या-कैसे हुआ, एक महंत की जुबानी

6 दिसंबर 1992 की सुबह भी अयोध्या में सब कुछ सामान्य ही था। किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ घंटों में ही राम जन्मभूमि पर खड़े ढाँचे का मलबा भी नहीं बचेगा। उस दिन जो कुछ हुआ वह चमत्कार था…

यह कहना है संत ब्रजमोहन दास का। वे राम-लखन-विश्वामित्र विश्राम आश्रम के महंत हैं। यह आश्रम बिहार के मधुबनी जिले के बिशौल गाँव में स्थित है। 2001 से इस आश्रम के महंत की जिम्मेदारी का निवर्हन कर रहे संत ब्रजमोहन दास मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से संबंध रखते हैं। महंत ब्रजमोहन दास कहते हैं, “अब मेरी आयु 55-56 के करीब है। 1992 में मैं युवा साधु था। कुछ समय पहले ही दीक्षा लेकर गृहस्थाश्रम का त्याग किया था। नवंबर में ही अयोध्या जी पहुँच गया था। हनुमानगढ़ी में रहता था।”

ऑपइंडिया को उन्होंने बताया, “अयोध्या में कारसेवा का ऐलान विश्व हिंदू परिषद (VHP) की ओर से हो चुका था। हमलोगों को लगता था कि प्रतीकात्मक कार्यक्रम होगा। 6 दिसंबर को तय जगह पर पूजा-अर्चना होगी।” उनके अनुसार 6 दिसंबर के करीब 15 दिन पहले से ही अयोध्या में कारसेवकों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। पूरे अयोध्या में जिधर देखिए लोग ही नजर आ रहे थे और हर ​बीतते दिन के साथ संख्या बढ़ती जा रही थी। ऐसा नहीं था कि बाहर से आने वाले सारे लोग कारसेवक ही थे। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी भी थे। 6 दिसंबर से एक सप्ताह पहले ही अयोध्या जी ऐसी लग रही थी, जैसे कोई छावनी हो। पुलिस की बात छोड़िए कितने केंद्रीय बल अयोध्या में मौजूद थे उसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता। सादी वर्दी में भी सुरक्षाकर्मी थे। इसी तरह उस समय अयोध्या में मौजूद कारसेवकों की संख्या का भी अनुमान लगाना कठिन है।

लगता था कोई बचकर नहीं जा पाएगा

महंत ब्रजमोहन दास बताते हैं कि 1990 में जब कारसेवकों पर फायरिंग हुई थी मैं अयोध्या में नहीं था। लेकिन लोग चर्चा कर रहे थे कि उस समय से कहीं ज्यादा सुरक्षाकर्मी और व्यवस्था कड़ी थी। हमें समझ नहीं आ रहा था कि एक तरफ इतने लोग आ रहे हैं, दूसरी तरफ इतने सुरक्षाकर्मियों को भर दिया है तो क्या होगा। इतने सुरक्षाकर्मी थे कि यदि 90 जैसी कोई बात उस समय हुई होती तो शायद ही कोई अयोध्या से जीवित निकल पाता। हम जैसे युवा साधु कभी-कभी सुरक्षाकर्मियों से पूछ भी लेते थे- मान लीजिए पब्लिक आती है, जन्मभूमि पर जाना चाहती है और वहाँ कुछ करना चाहती है तो आदेश मिलने पर आप गोली चला देंगे? ज्यादातर वे जवाब नहीं देते। पर कभी-कभी कोई सुरक्षाकर्मी कहता था- हम कोई गैर थोड़े हैं। अब उस वक्त देखेंगे क्या आदेश मिलता है। फिलहाल हमलोगों को यहाँ भेज दिया गया है। लेकिन कोई आदेश नहीं है कि क्या करना है। महंत बताते हैं कि ऐसा लगता था कि जिस तरह अयोध्या में रहने वाले हम जैसे लोग अधीर थे कि 6 दिसंबर को क्या होगा, उसी तरह की स्थिति सुरक्षाकर्मियों की भी थी।

व्यवस्था ऐसी जैसे राम राज्य हो

महंत बताते हैं कि अयोध्या आने वाले कारसेवकों के लिए विहिप और अन्य हिंदुवादी संगठनों की तरफ से बहुत बेहतर व्यवस्था की गई थी। कारसेवकपुरम, आश्रमों और अन्य जगहों पर भोजन की व्यवस्था थी। कतार में लेकर भोजन लीजिए और ग्रहण करिए। कारसेवकों के ठहरने के लिए टेंट लगाए गए थे। आश्रमों में कंबल पड़े थे। जिसे जरूरत हो जाइए और उठाकर ले आइए। भोजन ट्रकों में भरकर अयोध्या के बाहर से भी आ रहे थे। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन पर संघ और आश्रम के लोग लगे थे कि बाहर से आने वाले लोगों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो। किसी चीज की कोई कमी नहीं। ​कहीं कोई रोक टोक नहीं। इतने लोग होने के बावजूद कोई अव्यवस्था नहीं। ऐसा लगता था कि जैसे राम राज्य हो।

जगह-जगह धरपकड़ फिर भी लोग आते ही जा रहे थे

महंत ब्रजमोहन दास बताते हैं कि जैसे-जैसे 6 दिसंबर की तारीख करीब आने लगी खबर आने लगी कि सरकार ने ट्रेन पर रोक लगा दी है। रास्ते में कारसेवकों की गिरफ्तारी हो रही है। उनको रखने के लिए स्कूलों को वैकल्पिक जेल में तब्दील कर दिया गया था। फिर भी लोगों के अयोध्या आने का सिलसिला रुक नहीं रहा था। कोई अपने साधन से आ रहा था तो कोई बस से तो कोई ट्रेन से। लोग कई-कई किलोमीटर पैदल चलकर, प्रशासन से बच-बचाकर पहुँच रहे थे। चारों दिशाओं से लगातार कारसेवकों का जत्था आता जा रहा था।

भाषा नहीं समझ आती पर जयघोष की ऊर्जा अद्भुत

महंत बताते है कि बड़ी संख्या में कारसेवक दक्षिण भारत से भी आए थे। इनमें माताओं-बहनों की संख्या भी काफी थी। वे कहते हैं, “हमें उनकी भाषा समझ नहीं आती थी। लेकिन स्टेशन पर उतरते ही उनके जयघोष की जो ऊर्जा होती थी, वह अद्भुत थी। हर कोई उनके जोश को देखकर हैरान रह जाता। पूरे अयोध्या में उनके जोश की चर्चा थी। कई बार तो उन्हें इस पर संयम रखने को भी कहना पड़ता था।”

5 दिसंबर 1992 को अयोध्या का माहौल

म​हंत ब्रजमोहन दास बताते हैं कि एक दिन पहले भी अयोध्या का माहौल देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि 6 दिसंबर को ऐसा कुछ होगा। किसी ने नहीं सोचा था कि कारसेवक जन्मभूमि की ओर जा पाएँगे। अयोध्या का माहौल किसी मेले की तरह था। कहीं कारसेवक तो कहीं सुरक्षाकर्मी। कहीं जयघोष लग रहा है तो कहीं भोजन के लिए कतार लगी है। सब कुछ एकदम सामान्य था। बाजार भी खुले थे। लोगों की दिनचर्या सामान्य ही थी। कोई डर का माहौल नहीं था। चारों तरफ केवल उत्साह दिख रहा था।

…और 6 दिसंबर 1992 को चमत्कार हो गया

महंत बताते हैं कि 6 दिसंबर 1992 की सुबह भी सामान्य थी। पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार ही तैयारियाँ चल रही थी। प्रशासन ने जन्मभूमि की तरफ जाने वाले सारे रास्ते मोटे-मोटे बल्लियों और कँटीले तारों से बंद कर रखा था। यह घेरा भी कई राउंड का था। किसी भी तरह वहाँ नहीं पहुँचा सकता था। सुरक्षाकर्मियों की एक बस हनुमानगढ़ी के पास खड़ी थी। उसके भीतर सुरक्षाकर्मी नहीं थे। मैं नहीं जानता कि वे साधु कौन थे। देखने में एकदम दुबले-पतले से। वे उस बस में चढ़ गए और स्टेयरिंग सँभाल ली। अचानक से बस को तेजी से जन्मभूमि की ओर लेकर चल पड़े। बस बल्लियों को तोड़ते हुए आगे बढ़ रही थी। पीछे-पीछे भीड़ भी चल पड़ी जो देखते-देखते अनियंत्रित हो गई।

मौके पर ही बन गए तीन दल

महंत ब्रजमोहन दास ने बताया, “जब कुछ कारसेवक विवादित ढाँचे पर चढ़ गए तो मौके पर ही रणनीति बनाते हुए तीन दल तैयार किए गए। एक दल विवादित ढाँचे की ओर बढ़ा। दूसरे दल को लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई। तीसरे दल के जिम्मे था यदि प्रशासन कोई कार्रवाई करती है, फायरिंग करती है तो उससे निपटते हुए लोगों की सुरक्षा करनी।” यह पूछे जाने पर कि इस रणनीति को तैयार करने वाले कौन थे, वे बताते हैं, “सब कुछ मौके पर अचानक से हुआ। इसमें कोई चर्चित व्यक्ति शामिल नहीं था। सभी सामान्य कारसेवक थे। एक-दूसरे को जानते भी नहीं थे।” वे बताते हैं कि साधु के बस को लेकर आगे बढ़ने के चार से पाँच घंटे के भीतर ही ढाँचे का मलबा तक नहीं बचा था।

आज भी वह दृश्य याद आता है तो अचंभित रह जाता हूँ

महंत कहते हैं, “उस दिन कुछ पल पहले जन्मभूमि पर एक ढाँचा खड़ा था और अगले कुछ क्षण में एक रोड़ी भी नहीं बची थी। जन्मभूमि तक लोगों को पहुँचने से रोकने के लिए जो कँटीले तार लगाए गए थे वह इतने तेज थे कि शरीर के जिस हिस्से से संपर्क हो उसे काट दे। आप विश्वास नहीं करेंगे। लेकिन मैंने वह देखा है। आज भी वह दृश्य याद आता है तो अचंभित रह जाता हूँ। कारसेवकों ने नंगे हाथों से उन तारों को उखाड़ फेंका था। ऐसा हुआ था आज भी भरोसा नहीं होता।”

जब यह सब हो रहा था सुरक्षाकर्मी कहाँ थे?

महंत के अनुसार उस दिन सुरक्षाकर्मियों की हालत वैसी ही हो गई थी जैसी भगवान कृष्ण के जन्म के समय कारागार के पहरेदारों की हो गई थी। उनकी स्थिति देखकर लग रहा था कि उन्हें उम्मीद नहीं थी ऐसा कुछ होगा। प्रशासन बेसुध था। उन्होंने ढाँचे के चारों तरफ एक किलोमीटर का जो घेरा बल्लियों और कँटीले तारों से बना रखा था, उन्हें उम्मीद नहीं रही होगी कि कोई एक क्षण में उसके पार निकल जाएगी।

प्रभु कृपा क्या होती है, उससे पूछिए जो उस दिन अयोध्या में था

महंत बताते हैं कि बिना अस्त्र-शस्त्र के ढाँचा तोड़ना, बल्लियों और कँटीले तारों के घेरे को हटा देना असंभव था। यदि प्रशासन अपने संसाधनों से उस घेरे को हटाता तो उसे महीनों लगते। वे बताते हैं कि कारसेवक फिर धीरे-धीरे वहीं लौट गए जहाँ से आए थे। तब एक युवा साधु रहे महंत भी करीब एक महीने बाद अयोध्या से वृंदावन के लिए निकल गए थे। उनके अनुसार, “6 दिसंबर को जो कुछ हुआ उसके बाद से उत्साह और खुशी पूरे अयोध्या में साफ दिख रही थी। चमत्कार क्या होता है, प्रभु कृपा क्या होती है यह वही बता सकता है जो उस दिन अयोध्या में मौजूद था।”

‘पिता को 15 टुकड़ों में काटा, बैग में भरकर झेलम किनारे फेंका’: USA में पल्लवी जोशी ने दुनिया को बताया कश्मीरी पंडितों का दर्द

कश्मीरी पंडितों पर 90 के दशक में क्या कुछ गुजरी थी, इसके बारे में दुनिया को अमेरिका की धरती से कश्मीर फाइल्स के अभिनेत्री पल्लवी जोशी ने बताया। उन्होंने अमेरिका के लोकतंत्र का मंदिर कहे जाने वाले कैपिटल हिल में भी सम्बोधन दिया। एक्ट्रेस ने कहा कि फिल्म के लिए जब उन्होंने पीड़ितों का इंटरव्यू लेना शुरू किया तो उन्हें एक पीड़ित ने बताया कि कश्मीर में उसके पिता के 15 टुकड़े कर दिए गए थे।

एक्ट्रेस ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए बताया, “हम सभी ने एक फिल्म बनाने का फैसला किया और इसी बीच विवेक (अग्निहोत्री) यूएस की यात्रा पर आए। जब वो वापस लौटे तो बोले हम कश्मीर पर फिल्म बनाने जा रहे हैं। मैंने पूछा कश्मीर पर क्या? उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित पर हम फिल्म बनाने जा रहे हैं। इसके बाद विवेक ने कश्मीरी पंडितों के बारे में स्टोरीज को बताया। हमने उस पर रिसर्च शुरू किया। इससे हमें कश्मीरी पंडितों के उन हालातों के बारे में पता चला, जिसे उन्होंने झेला था।”

पल्लवी ने कहा, “हम लोग पीड़ितों के परिवारों और उन लोगों से मिले, जिन्होंने इस नरसंहार को झेला था। डॉ सुरेंदर कौर ने हमें अमेरिका आकर कश्मीरी पंडितों से मिलने को कहा। फिल्म के लिए हमने बड़े स्तर पर कश्मीरी पंडितों का इंटरव्यू लेने का निर्णय लिया। मुझे मेरा पहला इंटरव्यू याद है। जब हम एक घर में इंटरव्यू लेने के लिए गए तो महिला ने बताया कि मेरे पिता को 15 टुकड़ों में काटा गया था और उन्हें एक बैग में भरकर झेलम नदी के किनारे फेंक दिया गया था। हमने हर दिन 4-5 इंटरव्यू लिया। यह बहुत ही भयानक था। लोगों ने बहुत कुछ सहा था। मैंने विवेक से कहा कि मैं तो ये नहीं कर पाऊँगी। लेकिन ये हमारे रिसर्च का हिस्सा था और हमने इसे किया।”

अभिनेत्री ने कहा कि सारा रिसर्च करने के बाद हमने ये निर्णय लिया कि हम इसे जरूर करेंगे। इसलिए नहीं कि ये हमारा प्रोजेक्ट है, बल्कि इसलिए कि 30 साल पहले क्या हुआ इसके बारे हम बता सकें। हमने दुनिया को कश्मीर की सच्चाई दिखाने का निर्णय लिया। जब हम फिल्म बना रहे थे तो उसमें आया हर सीन सच्ची घटनाओं पर आधारित है। हम उन कश्मीरी परिवारों के जज्बे को सलाम करते हैं, जिसे उन्होंने हमें बताया।

गौरतलब है कि इससे पहले फिल्म निर्देश विवेक अग्निहोत्री ने कैपिटल हिल में भाषण देते हुए अमेरिका को आइना दिखाया था कि पश्चिमी देशों ने कश्मीर को मंनोरजन और रियलिटी शो का स्थल बना दिया है।

विदेश जा रही जैकलीन फर्नांडीस को एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने रोका, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने जारी किया है ‘लुकआउट नोटिस’

तिहाड़ जेल में बैठकर 200 करोड़ रुपए की वसूली करने के आरोपित महाठग सुकेश चंद्रशेखर से रिश्ते का खामियाजा बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीस को भुगतना पड़ रहा है। रविवार (5 दिसंबर) को विदेश जा रहीं जैकलीन को इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने मुंबई एयरपोर्ट पर रोक दिया और उन्हें घर वापस भेज दिया। सुकेश चंद्रशेखर के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, जैकलीन फर्नांडीस एक शो के लिए विदेश जा रही थीं। सारी तैयारी करने के बाद जब वह एयरपोर्ट पहुँचीं तो अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। एय़रपोर्ट अथॉरिटी ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनके खिलाफ निकाले गए लुकआउट सर्कुलर के बारे में उन्हें बताया। इसके साथ ही इसकी जानकारी ईडी के अधिकारियों को भी दी। सूत्रों के मुताबिक, जैकलीन से एक बार फिर पूछताछ हो सकती है।

इसके पहले प्रवर्तन निदेशालय ने जैकलीन को सुकेश चंद्रशेखर मामले में पूछताछ के लिए कई बार बुलाया था। जैकलीन समन के बावजूद ईडी के समक्ष कई बार पेश नहीं हुई थीं। इसके बाद ईडी ने जैकलीन के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करते हुए कहा था कि जब तक इस मामले की जाँच जारी है, तब तक जैकलीन देश से बाहर नहीं जा सकती हैं। इस केस में ईडी जैकलीन से लगभग 7 घंटे तक पूछताछ कर चुकी है।

जैकलीन के खिलाफ यह नोटिस 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जारी किया गया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में 7,000 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। इसमें सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी मारिया पॉल समेत 6 लोगों को आरोपित बनाया है। इसके अलावा, जाँच एजेंसी ने चार्जशीट में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन और नोरा फतेही का नाम भी शामिल किया है।

हालाँकि, जैकलीन इस केस में खुद को पीड़ित बताती हैं, लेकिन हाल ही में सुकेश चंद्रशेखर के साथ सामने आईं उनकी तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयाँ करती हैं। इस बात को भी ईडी ने अपनी चार्जशीट में दोहराया है। ईडी ने बताया है कि जेल से बाहर आने के बाद सुकेश चंद्रशेखर ने चेन्नई के लिए फ्लाइट ली। फ्लाइट से वह चेन्नई गया और वहाँ एक फाइव स्टार होटल में जैकलीन से मिला।

आरोप-पत्र में यह भी कहा गया है कि पहली बार सुकेश और जैकलीन की इसी साल जनवरी में मुलाकात हुई थी। सुकेश ने एक्ट्रेस को 10 करोड़ रुपए के गिफ्ट दिए। इनमें गहने, हीरे समेत 52 लाख रुपए का घोड़ा और 36 लाख की पर्शियन बिल्ली भी शामिल है।

UAE में खुले में नमाज पर ₹20000 जुर्माना: ‘द गार्डियन’ के लिए मुस्लिम पीड़ित और हिन्दू गुंडे, सड़कों को बता रहा ‘नमाज साइट्स’

हरियाणा के गुरुग्राम में पिछले कई दिनों से सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पढ़े जाने का विरोध हो रहा है। सड़क जाम कर के सैकड़ों की संख्या में नमाज पढ़ने वाले मुस्लिम मीडिया की नजर में पीड़ित हैं, वहीं परेशानी होने के कारण विरोध करने वाले स्थानीय लोग ‘हिन्दू कट्टरवादी’। ‘द गार्डियन’ ने तो सरकारी स्थलों को ‘नमाज साइट्स’ घोषित कर दिया है और हिन्दुओं पर ‘फूट डालने’ का आरोप लगा दिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान कह रहा है कि गुरुग्राम अब ‘धार्मिक युद्धक्षेत्र’ बन गया है।

इस लेख में स्थानीय लोगों को ‘हिन्दू राष्ट्रवादी भीड़’ घोषित करते हुए बताया गया है कि वो सामान्यतः भगवा वस्त्रों में रहते हैं। साथ ही ‘जय श्री राम’ और देशभक्ति के नारों को भी कट्टरवादी बता कर पेश किया गया है। इस लेख में ‘द गार्डियन’ ये मान रहा है कि ये कार पार्किंग की जगह है, लेकिन उसे एक दशक से भी अधिक समय से यहाँ जुमे की नमाज पढ़े जाने से कोई दिक्कत नहीं। लेकिन, स्थानीय लोग विरोध करें तो दिक्कत है। इस पर भी अफ़सोस जाहिर किया गया है कि 15 लाख की जनसंख्या वाले इस शहर में ‘सिर्फ 13’ मस्जिद हैं।

साथ ही बिना किसी सबूत के ये भी दावा कर दिया गया है कि मुस्लिम अगर अपनी जमीन पर भी नई मस्जिद बनाते हैं तो इसमें बाधा पैदा की जाती है। गर्व से बताया गया है कि ‘मुस्लिम मजदूर’ कई किलोमीटर की दूरी पर जाने की बजाए ‘खाली जगहों’ पर नमाज पढ़ने का विकल्प अपनाते हैं। बताया गया है कि 108 जगहों पर नमाज के लिए प्रशासन ने उन्हें अनुमति दी। मुस्लिमों के हवाले से बताया गया है कि जगह की कमी के कारण वो ‘खुले में’ नमाज पढ़ने को विवश हैं।

सबसे पहले तो ‘द गार्डियन’ को ये जवाब देना चाहिए कि सरकारी जमीन ‘नमाज साइट्स’ कब से बन गई? क्या अगर किसी खाली जमीन पर कोई नमाज पढ़ दे तो वो ‘नमाज साइट’ बन जाएगा? सड़क, पार्किंग, स्कूल के मैदान, सोसाइटी के प्लेग्राउंड्स और सरकारी जमीनें – ये सब ‘नमाज साइट्स’ कब और कैसे बन गए? नमाज क्या घर में नहीं पढ़ी जा सकती, जो ‘खुले में नमाज पढ़ने की विवशता’ की बात की जा रही है? ऐसा तो नहीं है कि सारे मुस्लिम बेघर हैं।

अब हम आपको UAE के बारे में बताते हैं, जहाँ का आधिकारिक मजहब ही इस्लाम है और वहाँ की 90% जनसंख्या सुन्नी मुस्लिम है। यहाँ पर सड़क किनारे नमाज पढ़ने और जुर्माने का भी प्रावधान है। इसके लिए Dh 1000 (20,484 रुपए) का जुर्माना देना पड़ सकता है। अबुधाबी पुलिस ने इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया। क्योंकि इससे ट्रैफिक की समस्या बढ़ जाती है। जब इस्लामी मुल्कों में इस पर प्रतिबंध है, फिर लगभग 80% जनसंख्या वाले ‘धर्मनिरपेक्ष’ भारत में इसकी उम्मीद कैसे की जा सकती है कि सरकारी जमीनें नमाज के हवाले कर दी जाएँ?

लेकिन नहीं, ‘द गार्डियन’ का तथ्यों से कोई लेनादेना नहीं है। आरोप लगाया जा रहा है कि कुल्हाड़ी और लकड़ी के डंडे लेकर ‘हिन्दू भीड़’ जमा हो रही है, जबकि अब तक गुरुग्राम में इसे लेकर हिन्दुओं ने हिंसा नहीं की है, उलटा वो ही गिरफ्तार हुए हैं और उन पर ही अत्याचार किए गए। ‘अल्लाहु अकबर’ बोल कर सैकड़ों का गला काट देना ऐसे मीडिया संस्थाओं के लिए ठीक है, विरोध प्रदर्शन हिन्दुओं का हो तो गलत। बताया गया है कि किस तरह मुस्लिम भीड़ ‘सिर झुका कर शांतिपूर्ण तरीके से’ नमाज पढ़ती है।

अगर इसी लेख में हिन्दुओं के बयान देखें तो कारण साफ़ हो जाता है। क्षेत्र में अचानक अनजान लोगों की भीड़ आने से अपने परिवार और लड़कियों को लेकर वो दहशत में हैं। वो बताते हैं कि कैसे कुछ मुस्लिमों के पास से पुलिस ने हाल ही में एके-47 राइफल बरामद की। यही नहीं, ‘द गार्डियन’ ने घोषणा कर दी है कि खुले में नमाज पढ़ना मुस्लिमों का ‘सामाजिक अधिकार’ है। फिर लिबरल गिरोह की तरह पूरे भारत में हिन्दू-मुस्लिम विभाजन के लिए 2014 में भाजपा के केंद्र में सत्ता में आने और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से जोड़ दिया गया है, भले 800 वर्षों तक इस्लामी आक्रांताओं ने हिन्दुओं पर अत्याचार किए हों।

आज भी भारत इस्लामी आतंक से पीड़ित है और कश्मीर में आतंकी अक्सर नागरिकों को निशाना बनाते रहते हैं। मुंबई से लेकर दिल्ली तक बम ब्लास्ट इस्लामी आतंकियों ने ही किए। गुरुद्वारे में सिखों ने मुस्लिमों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी, इसका भी जिक्र है। जबकि ‘प्रकाश परब’ के कारण ऐसा संभव ही नहीं हो पाया था। लिखा है कि ये सिर्फ नमाज को लेकर नहीं है, बल्कि मुस्लिमों को समाज से अलग-थलग करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

कुछ दिनों पहले ‘द प्रिंट’ ने भी इसी तरह की हरकत की थी। इसमें प्रोफेसर हिलाल अहमद ने ‘सर्वधर्म समभाव’ पर विश्वास करने की बड़ी-बड़ी बातें करते तो की थीं, लेकिन साथ ही अल्लाह को सर्वशक्तिमान बताते हुए इस बात का जवाब नहीं दिया था कि हिन्दू हनुमान चालीसा पढ़ दे तो ये ‘बाधा’ और मुस्लिम भीड़ सड़क पर नमाज पढ़े तो ये ‘प्रार्थना’ कैसे हुई? उनका कहना था कि वो चलती हुई ट्रेन में, व्यस्त गलियों में, अस्पतालों में और यहाँ तक कि कई सक्रिय हिन्दू मंदिरों में भी नमाज पढ़ चुके हैं। उन्हें इस पर गर्व है। वो इसे अपनी उपलब्धि बताते हैं।

अंत में उन लोगों का जिक्र भी आवश्यक है, जो कहते हैं कि उनका घर मुस्लिमों के नमाज पढ़ने के लिए हाजिर है, क्योंकि बाहर हिन्दू उन्हें ‘परेशान कर रहे’। उनसे बस एक सवाल है कि अगर नमाज घर में ही पढ़ना होता तो क्या ये लोग सड़क पर उतरते? वो अपने घरों में नहीं पढ़ लेते? असली उद्देश्य तो सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति पर कब्ज़ा कर अपना दबदबा दिखाने का है, प्रशासन को झुकाने का है और हिन्दुओं को नीचा दिखाने का है। ये लोग अपने घरों को मस्जिद क्यों नहीं बना देते? बेशक घर में नमाज पढ़ने बुलाइए मुस्लिमों को, लेकिन घर को ही मस्जिद बना देना बेहतर विकल्प नहीं होगा?

‘सपा रामभक्तों पर गोली और आतंकियों पर से मुकदमे वापस लेती थी’: CM योगी ने कहा- अब यहाँ दंगाई के साथ कोरोना भी शांत हो जाता है

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (5 दिसंबर) को चंदौली में कहा कि प्रदेश में अब दंगाई और उपद्रवी ही नहीं, कोरोना भी शांत भी हो जाता है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये रामभक्तों पर गोलियाँ चलवा सकते हैं और आज भाजपा पौराणिक स्थलों का निर्माण करा रही है। आज प्रदेश में माफिया और अपराधियों की इतनी जुर्रत नहीं कि वे व्यापारियों या बेटियों पर आँख उठाकर भी देख सकें।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि सत्ता में रहने हुए समाजवादी पार्टी की सरकार ने राम भक्तों पर गोलियाँ चलवाईं, लेकिन राम जन्मभूमि पर हमला करने वाले आतंकवादियों की पैरवी करते हुए उनके खिलाफ दायर मुकदमों को वापस लिया था। यही थी प्रदेश की सपा सरकार। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास बहुत पहले हो जाना चाहिए था, बुआ-बबुआ (अखिलेश यादव और मायावती) की जोड़ी क्या कर रही थी। इन्होंने केवल अपना विकास किया।

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में सपा की चार बार सरकार रही, लेकिन प्रदेश का विकास करने के बजाय सरकार भ्रष्टाचार में डूबी रही। आज प्रदेश में अगर कोई माफिया किसी व्यापारी को सताने की कोशिश करता है तो बुलडोजर चलवा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसी माँ-बेटी की तरफ आँख उठाकर भी देखने की कोशिश की तो उसकी छाती पर बुलडोजर चलवा दिया जाएगा।

अखिलेश पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इन्होंने सिर्फ अपने परिवार का विकास किया। उन्होंने कहा कि परिवार की परिभाषा अखिलेश नहीं समझते, उनके लिए 25 करोड़ की जनता उनका परिवार है। उन्होंने कहा, जिनके लिए अपना परिवार ही पूरा प्रदेश था, वे लोग सिर्फ परिवार का विकास करते थे। हमारे लिए प्रदेश की 25 करोड़ जनता ही परिवार है। परिवार की इस परिभाषा को अगर अखिलेश यादव समझे होते तो परिवार ना होने का मेरे ऊपर आक्षेप ना करते।”

दरअसल, बांदा में बुधवार (1 दिसंबर) को अखिलेश यादव ने कहा था, ”हम सबने देखा जब लॉकडाउन लगाया गया तब कैसे प्रवासी मजदूर घर के लिए पैदल निकले। कई लोगों की मौत तक हो गई, लेकिन भाजपा सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया। यह दर्द वही समझ सकता है, जिसका परिवार हो। जिसका परिवार ही नहीं, वह परिवार वालों की परवाह क्यों करेगा?”

इस दौरान सीएम योगी ने चंदौली जिले के सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र में 30 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसमें रामगढ़ स्थित बाबा कीनाराम आश्रम के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण भी शामिल है। दो महीने पहले बाबा कीनाराम के नाम से स्थापित मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। अब इसका सुंदरीकरण की योजना का शुभारंभ किया गया।

अखिलेश यादव के विधायक ने पुलिस अधिकारी का गला पकड़ा, जम कर धक्का-मुक्की: CM योगी के दौरे से पहले सपा नेताओं की गुंडागर्दी

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति तेज हो गई है। लेकिन इसी के साथ प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी भी सामने आ गई है। रविवार (5 दिसंबर 2021) को चंदौली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दौरे से पहले सपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस के साथ नोकझोंक और मारपीट की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चंदौली के रामगढ़ स्थित बाबा कीनाराम की जन्मस्थान में 30 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का शिलान्यास करने के लिए आने वाले थे। लेकिन, सीएम के आने से पहले ही सपा के पूर्व सांसद रामकिशन यादव और सकलडीहा से सपा के विधायक प्रभु नारायण सिंह के साथ सैकड़ों की संख्या में सपा कार्यकर्ताओं ने पहले सड़क मार्ग को रोका और बाद में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के इरादे से निकल पड़े।

इस बीच जब सपाइयों की भीड़ अखिलेश जिंदाबाद के नारे लगाते हुए लक्ष्मड़गढ़ पहुँची तो वहाँ पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इससे गुस्साए सपाइयों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। विधायक प्रभु नारायण सिंह और सकलडीहा के सीओ अनिरुद्ध सिंह के बीच जमकर तू-तू-मैं-मैं हुई।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सपा के कार्यकर्ता पुलिसवालों को धक्का मारकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। वहीं पुलिस उन्हें पीछे धकेल रही है। इसी बीच सपा विधायक प्रभु नारायण सिंह ने सीओ अनिरुद्ध सिंह का गला पकड़ लिया और उन्हें झकझोरने लगे। हालात बिगड़ता देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया। इसके बाद तो सपा के कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। विधायक ने जिलाधिकारी से बात कर सीओ का ट्रांसफर भी करवाने की कोशिश की।

सपा कार्यकर्ताओं की गुंडई पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सीधे अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि अखिलेश यादाव यूपी की जनता से यह कहते नहीं थक रहे हैं कि ‘आ रहा हूँ’। क्या आप यूपी में गुंडाराज और माफियाराज ले के आना चाहते हैं। अनुराग ठाकुर ने कहा, “पिटाई के पर्यायवाची सपाई।”

एबीपी गंगा की रिपोर्ट के मुताबिक, सपा के कार्यकर्ता पहले से पुलिस को उकसाने की योजना बनाकर आए थे। वीडियो में भी देखा जा सकता है कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता ही जबरन धक्का-मुक्की कर रहे हैं।

तस्वीरों से आसानी से समझा जा सकता है कि सपाइयों ने ही पुलिस को उकसाया था।

‘अपनी बेटी बेच दो, हमलोग काफी पैसे देंगे’: UK की महिलाओं को लालच दे रहे मिडिल-ईस्ट मुस्लिमों के कुछ समूह

साउथ यॉर्कशायर पुलिस ने जानकारी दी है कि एक महिला जब अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने जा रही थी तो मिडिल-ईस्ट के 3 लोगों ने उनसे संपर्क किया और लड़की को ख़रीदीने के लिए एक बड़ी धनराशि की पेशकश की। ये ये घटना बुधवार (1 दिसंबर, 2021) को बातेमूर रोड में सुबह के 8:20 बजे हुई। इसके बाद महिला बुरी तरह डर गई और स्कूल की तरफ भाग निकली। मिडिल-ईस्ट के तीनों मुस्लिमों ने उसका पीछा भी किया। जिसने रुपए ऑफर किए, उसकी उम्र 40 वर्ष के करीब रही होगी और स्ट्राइप्स वाली हूडी पहन रखी थी।

साथ ही उसने अपने चेहरे को भी ढक रखा था। महिला अपनी बेटी को लेकर ‘लोअर मीडो स्कूल’ जा रही थी। इसी दौरान उक्त व्यक्ति अपने दो साथियों के साथ वहाँ आ धमका और उसने रुपए निकाल कर महिला से उसकी बेटी को बेच डालने की पेशकश की। महिला ने इससे साफ़ इनकार कर दिया। पुलिस को उस गाड़ी का नंबर नहीं पता चल सका, जिससे ये आरोपित आए थे। हालाँकि, महिला ने उस गाड़ी के हुलिये को लेकर पुलिस को जानकारी दी है।

बता दें कि यूनाइटेड किंगडम में इस तरह की ये पहली घटना नहीं है। पिछले महीने डोनकास्टर में भी इसी तरह की घटना सामने आई थी। वहाँ की पुलिस ने बताया था कि टाउन सेंटर स्थित प्राइमार्क दुकान में एक महिला से कुछ लोगों ने उनकी बेटी को बेचने के बदले बड़ी धनराशि देने का लालच दिया था। ये घटना 12 नवंबर, 2021 को शाम के 4 बजे हुई थी। महिला और उसकी बेटी का वो लोग पीछा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने बच्ची को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ भी की और उन्हें असहज महसूस कराया।

‘किसानों की तरह बलिदान देने के लिए तैयार रहें’: फारूक अब्दुल्ला ने 370 की वापसी के लिए लोगों को भड़काया, कहा – पर्यटन बढ़ना सब कुछ नहीं

मोदी सरकार ने जब से तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया है तभी से जम्मू-कश्मीर के नेताओं को अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए आशा की एक किरण नजर आने लगी है। कृषि कानून की वापसी के बाद जिस तरह से कश्मीरी नेता बयान देते हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि इन नेताओं को यह लगने लगा है कि वो भी एक दिन 370 को फिर से बहाल करवा लेंगे। इसी क्रम में रविवार (5 दिसंबर 2021) को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि जिस तरह से 700 किसानों के बलिदान के बाद केंद्र को कृषि कानूनों को निरस्त करना पड़ा है, उसी तरह से केंद्र द्वारा छीने गए अपने अधिकारों को वापस पाने के लिए हमें भी ‘बलिदान देने’ के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

फारूक अब्दुल्ला ने हजरतबल में अपने अब्बू शेख अब्दुल्ला की पुण्यतिथि के मौके पर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हर नेता और कार्यकर्ता को गाँव और इलाके के लोगों के संपर्क में रहना होगा। उन्होंने कहा कि ये याद रखना चाहिए कि हमने राज्य को अनुच्छेद 370 और 35A देने का वादा किया है और इसके लिए हम कोई भी बलिदान देने के लिए तैयार हैं।

इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटन बढ़ने के बयान पर बिना नाम लिए अब्दुल्ला ने कहा कि ‘क्या पर्यटन बढ़ना ही सबकुछ’ है। आपने 50,000 नौकरियों का जो वादा किया था उसका क्या? अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर ये भी आरोप लगाया कि जो लोग नौकरियों पर थे उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने सरकार पर मीडिया की आवाज को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर कोई इनके खिलाफ आवाज उठाता है तो ये उसे जेल में बंद कर देते हैं।

महबूबा ने भी अलापा था 370 का राग

इससे पहले 19 नवंबर 2021 को जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान किया था तो पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने केंद्र के फैसले का स्वागत करते हुए इशारों में अनुच्छेद 370 को फिर से बहाल करने की माँग की थी।

जिस श्रीलंका से पाकिस्तान को मिली 35,000 आँखें, उसी के नागरिक को ज़िंदा जलाया: श्रीलंका का 40% कॉर्निया डोनेशन Pak को ही मिला

पाकिस्तान में श्रीलंकाई नागरिक प्रियंथा कुमारा की ज़िंदा जला कर की गई भीड़ द्वारा हत्या का मामला अभी तूल पकड़ा हुआ है। इसे लेकर दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल है। श्रीलंकाई मृतक की पत्नी ने उन्हें मासूम बताते हुए न्याय की गुहार लगाई है। ईशनिंदा का आरोप लगा कर जिस तरह से श्रीलंका के प्रियंथा कुमारा को प्रताड़ित किया गया और उनकी हड्डियाँ तोड़ डाली गईं, इस घटना से सभी हैरान हैं। इन सबके बीच ये भी जानने लायक है कि श्रीलंका के नेत्रदान का सबसे ज्यादा फायदा पाकिस्तान ही उठाता रहा है।

1967 से लेकर अब तक श्रीलंका द्वारा दान में दिए गए 35,000 कॉर्निया पाकिस्तनि नागरिकों को मिले हैं। डॉक्टर नियाज़ बरोही ने इसकी जानकारी दी है, जो पाकिस्तान के सबसे बड़े नेत्र रोग विशेषज्ञों (Ophthalmology) में से एक हैं। वो पकिस्तान के ‘श्रीलंका आई डोनेशन सोसाइटी’ के सदस्य भी हैं। लेकिन, आजकल डॉक्टर बरोही काफी दुःखी हैं क्योंकि सियालकोट में मॉब लिंचिंग की घटना ने उनके दिमाग पर गहरा असर डाला है। इस्लामी कट्टरपंथियों की इस करतूत का पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है।

उनका कहना है कि देश के कई लोगों की तरह वो भी दुःखी हैं, क्योंकि हमारा सिर शर्म से झुका हुआ है। कराची के प्रसिद्ध ‘स्पेनचेर आई हॉस्पिटल’ के के मुखिया रहे डॉक्टर बरोही ने अब तक कई कॉर्निया ट्रांसप्लांट करने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने जानकारी दी कि श्रीलंका अब तक दुनिया को 83,200 कॉर्निया दान में दे चुका है। इसमें सबसे ज्यादा फायदा पाकिस्तान को मिला है, क्योंकि इसने कुल डोनेशंस का 40% प्राप्त किया है। ‘समा डिजिटल’ से बात करते हुए उन्होंने ये बात कही।

उन्होंने आँकड़े गिनाते हुए बताया कि 1967 से लेकर अब तक ‘लंका आई डोनेशन सोसाइटी’ ने पाकिस्तान को 35,000 कॉर्निया दान में दिया है। ये भी जानने लायक बात है कि पाकिस्तान के ‘स्पेंसर आई हॉस्पिटल’ में मुल्क का पहना कॉर्निया ट्रांसप्लांट हुआ था, जिसे डॉक्टर एमएच रिजवी ने किया था। ये कॉर्निया भी श्रीलंका ने ही दान में दिया था। उन्होंने सियालकोट के घटना की निंदा करते हुए कहा कि श्रीलंका ने भले ही हमें दान में हजारों आँखें दी हों, लेकिन हम अपनी दृष्टि खो चुके हैं।

बता दें कि प्रियंथा कुमारा पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में एक गारमेंट फैक्ट्री में बतौर जनरल मैनेजर कार्यरत थे। पाकिस्तान के कट्टरवादी इस्लामी संगठन ‘तहरीक-ए-लब्बैक’ ने ने फैक्ट्री में हमला कर के भी तोड़फोड़ मचाई। पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में हुई इस घटना को लेकर इमरान खान की सरकार और कार्रवाई का दबाव है। अब तक इस मामले में आतंकवाद की धाराओं में 900 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिसमें से 235 को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। इनमें से 13 मुख्य आरोपित हैं।