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‘मुस्लिम NDTV वालों के जीजा-जमाई हैं’: हिंदू-विरोधी रूख को लेकर गुरुग्राम के नाराज हिंदुओं ने की खिंचाई, नमाज वाली जगह किया हवन

हरियाणा के गुरुग्राम के सेक्टर-37 स्थित एक सार्वजनिक स्थान पर बीते 19 नवंबर को नमाज पढ़ने के लिए गए मुस्लिमों ने वहाँ क्रिकेट खेल रहे खांडसा गाँव के लड़कों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की थी। इसके विरोध में खांडसा गाँव के लोगों ने हिंदू संगठनों के साथ मिलकर उसी स्थान पर हवन किया है। इस बीच मुस्लिमों को इस काम को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों ने एनडीटीवी चैनल के खिलाफ भी नारेबाजी की।

स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने इससे जुड़ा एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है, जिसमें नाराज हिंदुओं को मुस्लिमों के खिलाफ प्रेम प्रदर्शित करने और हिंदुओं के खिलाफ घृणा फैलाने के लिए न्यूज चैनल NDTV की आलोचना करते हुए सुना जा सकता है। वीडियो में एक स्थानीय व्यक्ति कह रहा है, “ये एनडीटीवी वाले एक बार भी वसीम रिजवी के पास नहीं गए। ओवैसी हिंदुओं को गाली बकता है, एनडीटीवी वाले उसके पास उसके पास नहीं गए, क्योंकि एनडीटीवी वालों के लिए सारे मुसलमान उनके लिए जीजा और जमाई हैं।”

NDTV पत्रकार ने हिंदुओं को बदनाम करने की थी कोशिश

गुरुग्राम के खांडसा गाँव में हिंदुओं का गुस्सा एनडीटीवी के पत्रकार मोहम्मद ग़ज़ाली के 15 अक्टूबर के ट्वीट का परिणाम प्रतीत होता है। इस ट्वीट में उन्होंने हिंदुओं को बदनाम करने और सार्वजनिक स्थान पर नमाज़ के नाम पर किए गए उपद्रव को सही ठहराने की कोशिश की थी। दरअसल, मुस्लिमों द्वारा गुरुग्राम में सार्वजनिक स्थान पर नमाज पढ़ने के विरोध में हिंदुओं ने शांतिपूर्ण विरोध किया था। इसके कुछ घंटों के बाद एनडीटीवी के पत्रकार ने हिंदू विरोधी ट्वीट किए थे।

ट्वीट में मोहम्मद ग़ज़ाली ने कहा था, “ये वाला ग्रुप सुबह पार्क में अलोम विलोम (योग) करते हुए ऑक्सीजन के साथ ज़हर भी ख़ूब उगलते हैं।” इस ट्वीट के जरिए ग़ज़ाली ने सार्वजनिक स्थान पर मुस्लिमों की नमाज पर आपत्ति करने के लिए हिंदुओं पर तंज कसा था। खास बात यह है कि मोहम्मद गजाली को क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने वाले अपने धर्म के लोगों के व्यवहार में कहीं कोई गलत नहीं दिखा।

युवाओं के साथ दुर्व्यवहार के बाद ग्रामीणों ने मुस्लिमों को किया आगाह

इस बीच गुरुग्राम के खांडसा गाँव के लोगों और हिंदू संगठनों ने उसी मैदान में हवन किया, जहाँ गाँव के लोगों का मुस्लिमों द्वारा नमाज अदा करने के मामले को लेकर हाथापाई हुई थी। 19 नवंबर को सेक्टर 37 के स्थानीय लोगों ने शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए सार्वजनिक मैदान पर मुस्लिमों के एकत्र होने का विरोध किया था।

यह मैदान खांडसा गाँव में स्थित है। स्थानीय लोग न सिर्फ गाड़ियाँ लगाने के लिए इसका उपयोग करते हैं, बल्कि इलाके के युवा यहाँ क्रिकेट खेलते हैं। आरोप है कि नमाज पढ़ने पहुँची मुस्लिम भीड़ ने इस मैदान में क्रिकेट खेल रहे लड़कों के साथ बदतमीजी की थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सार्वजनिक मैदान पर वो किसी भी प्रकार का अवैध कब्ज़ा नहीं होने देंगे। जब मुस्लिम भीड़ नमाज पढ़ने आई तो वहाँ क्रिकेट खेल रहे लड़कों ने अपने गाँव के सार्वजनिक मैदान को खाली करने से इनकार कर दिया। लोगों का कहना था कि सार्वजनिक जगहों पर नमाज से स्थानीय लोगों और यात्रियों को परेशानी होती है।

हंगामा होने के बाद सेक्टर-10 और सेक्टर-37 के लोग वहाँ पहुँचे। इसके बाद दोनों पक्ष थाने पहुँचे, जहाँ पुलिस ने समझौता कराने की कोशिश की। हालाँकि, इसके बाद मुस्लिमों को नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी गई। लेकिन, स्थानीय युवकों ने स्पष्ट कह दिया है कि सार्वजनिक मैदान में वो अगले जुमे से नमाज नहीं पढ़ने देंगे।

सिलवासा के मदरसे में मौलवी शेख मोहम्मद तारिक ने नाबालिग छात्रा से किया रेप, खानी-पानी के बिना दो दिनों तक बंधक बनाकर रखा

दादरा नगर हवेली के सिलवासा स्थित एक मदरसा के छात्रावास में रहकर पढ़ने वाली नाबालिग लड़की ने मदरसे के मौलवी पर हॉस्टल में ही रेप करने का आरोप लगाया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित मौलवी शेख मोहम्मद तारिक को पॉस्को एक्ट के तहत करवाई करते हुए गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता की उम्र 17 साल है। वहीं, मौलवी की बीवी ने अपने शौहर को बेगुनाह बताया है। मौलवी की बीवी का कहना है कि अगर आरोप साबित हो गए तो वह शौहर से तलाक ले लेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्रा मदरसे के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती थी। इसी दौरान मौलवी ने उसे धमकी देकर उसका रेप किया। छात्रा ने अपने परिजनों को बीमारी का बहाना बनाकर फोन किया और मदरसे में बुलाया। परिजनों के पहुँचने के बाद उसने घटना के बारे में जानकारी दी। परिजनों ने मौलवी की शिकायत पुलिस में की, जिसके बाद पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल टेस्ट करवाया। रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हो जाने के बाद मौलवी को गिरफ्तार कर लिया गया।

घटना के बाद आक्रोशित होकर मौलवी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है। वही, घटना सामने आने के बाद इस बात की भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि मौलवी ने छात्रावास की अन्य लड़कियों का भी यौन शोषण तो नहीं किया है। आमतौर पर इस तरह की घटनाओं को लोक-लाज की वजह से दबा दिया जाता है।

पीड़िता के पिता ने बताया, “मेरी नाबालिग बेटी मदरसे 40 वर्षीय मौलवी की बेटी जैसी है। वह मदरसे में ज्ञान लेने गई थी। मेरी बेटी का ही मन था कि उसे आलिमा पढ़ना है। इसीलिए मैंने उसका नाम यहाँ लिखवाया था। दुष्कर्म के बाद मेरी बेटी को 2 दिन कैद रखा गया। उसको खाना-पानी नहीं दिया गया।”

पीड़िता के पिता ने आगे बताया, “मौलवी ने CCTV कैमरे बंद कर दिए थे। वहाँ पर बंगाल के बच्चे भी पढ़ते हैं, लेकिन मौलवी ने उन सबकी छुट्टी कर दी थी। मेरे पास मौलवी की तरफ से प्रेशर आया, लेकिन मैंने किसी की भी बात सुनने से इंकार कर दिया। मैं इन्साफ के लिए पहले कानून के पास जाऊँगा।”

पीड़िता की माँ ने कहा कि जब वह अपनी बेटी से मिलने के लिए गईं तो उनसे झूठ बोला गया कि कुछ भी नहीं हुआ है। आरोपित के लिए फाँसी की सजा की माँग करते हुए उन्होंने कहा, “मेरी बेटी ने ही मुझे मौलवी की करतूतों के बारे में बताया। मेरी बेटी इस मदरसे में 4 साल से पढ़ रही थी। मदरसे की बाकी लड़कियों पर दबाव डाल दिया गया है कि कोई गवाही नहीं देगा। जो गवाही देगी वो फँस जाएगी।”

इस घटना पर जानकारी देते हुए सिलवासा के SP हरेश्वर स्वामी ने बताया कि आरोपित मौलाना उत्तर दिनहाजपुर जिला पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। अपराध संख्या 229/2021 में धारा 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए मौलवी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

बढ़ता आरक्षण हो, समान नागरिक संहिता या… कुछ और: संविधान दिवस बनेगा विमर्शों का कारण, पिछले 7 सालों में PM मोदी ने दी है सही दिशा

आज संविधान दिवस है। वैसे तो वर्ष 1949 में आज के दिन ही संविधान को देश द्वारा अपनाया गया था पर संविधान दिवस आज मात्र सातवीं बार मनाया जा रहा है। वर्ष 2015 में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने पहली बार 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था और तब से हर वर्ष 26 नवंबर के दिन संविधान दिवस मनाया जा रहा है। इस बात से कम लोग ही असहमत होंगे कि ऐसी नई परम्पराएँ एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए गर्व का विषय होती है। ये परम्पराएँ किसी भी लोकतंत्र के परिष्कृत होने में सहायक सिद्ध होती हैं तथा लंबे समय तक राष्ट्र, नागरिक, शासन और प्रशासन को संस्थाओं और परम्पराओं का महत्व समझाती हैं।

संविधान दिवस इस वर्ष भी मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने देश के संविधान और लोकतंत्र पर अपनी बात रखते हुए राजनीतिक दलों को पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही परिवार द्वारा चलाए जाने को लोकतंत्र के लिए एक चुनौती बताते हुए इस पर चिंता व्यक्त की। ऐसे कहने वाले प्रधनमंत्री मोदी न तो पहले व्यक्ति हैं और न ही आखिरी। कई वर्षों से देश में इसे लेकर बहस चल रही है और आगे भी होगी। किसी भी राजनीतिक दल का केवल परिवार द्वारा चलाया जाने के पक्ष और विपक्ष में केवल तर्क ही नहीं कुतर्क देने का भी चलन है। पर क्या भविष्य में संविधान दिवस का महत्व केवल इस बात से आँका जाएगा कि राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर क्या कहा?

किसी भी राष्ट्र का संविधान उस राष्ट्र के शासन और प्रशासन के लिए दिशा निर्देश देता है। राष्ट्र के राजनीतिक दलों को कैसे चलाया जाए, इसका निर्णय उन दलों के अपने संविधान और उन्हें बनाने वाले दल के नेताओं पर निर्भर करता है। एक राजनीतिक दल को चलाने के लिए बनाया और स्वीकार किया गया राजनीतिक दर्शन और सम्बंधित राजनीतिक सिद्धांत यह तय करते हैं कि सत्ता पर काबिज होने के पश्चात ये दल संविधान और संविधान द्वारा सुझाए गए राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों को किस दृष्टि से देखते हैं, किस हद तक स्वीकार करेंगे और देश, राज्य या स्थानीय निकायों को चलाने की उनकी महत्वाकांक्षा के फलित होने पर संविधान की मर्यादा का पालन किस स्तर तक करेंगे।

संविधान का पालन भारतीय लोकतंत्र में सत्ताधारी या सत्ता की आकांक्षा रखने वाले राजनीतिक दलों के लिए पहली शर्त है। ऐसे में 26 जनवरी 1950 से संविधान लागू होने के पश्चात सत्ताधारी दलों ने संविधान की मर्यादा का कितना पालन किया यह प्रश्न उठता रहेगा। इस विषय को लेकर जब भी राजनीतिक विमर्श होगा, न केवल यह प्रश्न उठाया जाएगा बल्कि सत्ताधारी दलों के अपने राजनीतिक आचरण को लेकर तमाम और प्रश्न उठेंगे। स्वतंत्रता मिलने के पश्चात सबसे अधिक समय तक जो राजनीतिक दल सत्ता में रहा, उसका मूल्यांकन न केवल सबसे लंबे समय तक चलेगा बल्कि ऐसा करते हुए संविधान विशेषज्ञ और आम भारतीय कठोर भी रहेगा। राजनीति के ‘जानकारों’ के बारे में यही बात पक्के तौर पर नहीं कही जा सकती।

विमर्शों से सहमति या असहमति अपनी जगह पर हमें यह स्वीकार करने की आवश्यकता है कि भविष्य में लंबे समय तक संविधान दिवस हर वर्ष विमर्शों का कारण बनेगा। प्रश्न उठेंगे और उचित उत्तर न मिलने पर इन प्रश्नों को और जोर से उठने से रोकना लगभग असंभव होगा। भारतीय राजनीति का वर्तमान काल लोकतांत्रिक भारत की यात्रा के मूल्यांकन का काल है और हर मूल्यांकन की शुरुआत प्रश्नों से ही होती है। ऐसे में संविधान में वर्णित राज्य के लिए नीति निर्देशक सिद्धांत हों या फिर उनके पालन का स्तर, संविधान की प्रस्तावना या अनुच्छेदों में संवैधानिक या असंवैधानिक बदलाव हो या संविधान को ही सीधे तौर नकारने की ऐतिहासिक घटनाएँ, हर विषय पर प्रश्न उठेंगे। यही कारण है कि गणतंत्र दिवस के साथ-साथ संविधान दिवस का भी महत्व भविष्य में बढ़ेगा।

यह पूछा जाएगा कि लंबी बहस के पश्चात संविधान सभा द्वारा प्रस्तावना में स्वतंत्र भारत के विशेषण के रूप में जिन शब्दों को शामिल न करने का निर्णय लिया गया था, उन्हीं शब्दों को आपातकाल के दौरान बिना किसी बहस के संविधान के 42वें संशोधन के नाम पर कैसे शामिल कर लिया गया? यह गंभीर प्रश्न है और इसे किसी राजनीतिक दल की सड़ चुके आतंरिक लोकतंत्र की तरह नकारा नहीं जा सकेगा। संविधान की जिस प्रस्तावना के कभी न बदले जाने को लेकर संविधान सभा निश्चिन्त थी, उसे इतनी आसानी से क्यों और कैसे बदल दिया गया? इस प्रश्न के उत्तर में धर्मनिरपेक्षता के प्रति संविधान सभा की अलिखित मंशा को आगे रखकर हाथ झाड़ लेना संभव न होगा। यह विमर्श अब धर्मनिरपेक्षता को लेकर संविधान सभा के फैसले और धर्म को लेकर भारत के ऐतिहासिक चरित्र की बार-बार बात करने से आगे जाएगा।

जब ऐसे विमर्श होंगे तब आरक्षण को लेकर संविधान निर्माताओं की लिखित योजना के साथ क्या हुआ और क्यों हुआ, इस प्रश्न से मुँह मोड़ पाना संभव न होगा। राज्य के नीति निर्धारण में समान नागरिक संहिता को लेकर क्या लिखा गया था और उसे लेकर पिछले सात दशकों में क्या हुआ उस पर विमर्श होगा। हाल में विभिन्न न्यायालयों द्वारा सरकार से समान नागरिक संहिता बनाने को लेकर कहा गया है। यह वर्तमान सरकार पर निर्भर करता है कि वह क्या करती है पर न्यायालयों के इस निर्देश के परिणामस्वरूप उठने वाला विमर्श वर्तमान सरकार की भूमिका तक सीमित नहीं रहेगा।

कम होने की जगह लगातार बढ़ता गया आरक्षण हो या समान नागरिक संहिता लागू न कर पाना, संविधान की प्रस्तावना से छेड़-छाड़ हो या आपातकाल, यह सब कुछ देश में शासन की गुणवत्ता का दस्तावेज है। विमर्शों का कोई अंतिम या लिखित निष्कर्ष निकले यह आवश्यक नहीं पर विमर्श हो यह आवश्यक है क्योंकि वर्तमान काल भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र की यात्रा के मूल्यांकन का काल है।

कश्मीर में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के कमांडर हाजी आरिफ को मार गिराया, 2018 के बैट हमले में इस पूर्व पाक सैनिक की थी अहम भूमिका

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान और उसके द्वारा पाले गए आतंक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सुरक्षाबलों ने 26 नवंबर 2021 (शुक्रवार) को हाजी आरिफ नाम के एक आतंकी को एनकाउंटर में ढेर कर दिया। खबर लिखे जाने तक एनकाउंटर जारी है और सुरक्षाबलों ने आरिफ के दो अन्य साथियों को चारों तरफ से घेर रखा है। हाजी आरिफ बीते कई सालों से पाकिस्तानी आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराने का काम कर रहा था। इस काम में पाकिस्तानी स्पेशल फोर्स और पाक रेंजर्स उसका साथ देते थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षाबलों द्वारा ढेर किया गया हाजी आरिफ पहले पाकिस्तानी आर्मी में हुआ करता था। उसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एलओसी से सटे इलाके में पाकिस्तान की सरकार ने उसे जमीन दे रखी है। एलओसी से सटे पाकिस्तान के धारकुंडी खुरैटा सेक्टर स्थित लॉन्च पैड का उसे कमांडर बनाया गया था।

भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सुरक्षाबलों को एलओसी के पास पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ के गुप्त सूचना मिली थी। सुरक्षाबलों को जानकारी मिली थी कि तीन से पाँच आतंकी भारतीय सीमा में घुसपैठ करने वाले हैं। सूचना के आधार पर भिंबर गली और उसके आसपास के इलाकों में घेराबंदी की गई। आतंकी जैसे यहाँ पहुँचे, दोनों ओर से फायरिंग होने लगी। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को ढेर कर दिया। बाद में उसकी पहचान हाजी आरिफ के तौर पर हुई।

हाजी आरिफ के आतंकियों से गहरे संबंध

पाकिस्तानी आर्मी का हिस्सा रहे हाजी आरिफ के आतंकियों से काफी अच्छे संबंध थे। इसका फायदा उठाने के लिए उसे लॉन्च पैड की जिम्मेदारी दी गई थी। हाजी आरिफ को एलओसी के इलाकों की हर गली और दर्रों की अच्छी जानकारी थी। साल 2018 में नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान के कुख्यात बॉर्डर ऐक्शन टीम (बैट) टीम की कार्रवाई में भी हाजी आरिफ का हाथ बताया जाता है। आरिफ ने ही पाकिस्तानी बैट टीम को गाइड किया था। इतना ही नहीं, हाजी आरिफ दूसरों के बच्चों का ब्रेनवॉश कर उन्हें भारत के खिलाफ जिहाद के लिए उकसाता था।

पंजाब में धर्मान्तरण को बढ़ावा न दें मुख्यमंत्री, फूँक से कोई ठीक होता तो कोरोना में कई पादरी क्यों मरे? – VHP जिलाध्यक्ष ने चन्नी को बताया ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन’

पंजाब में धर्मान्तरण की बढ़ रही गतिविधियों के खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद ने 26 नवम्बर 2021 (शुक्रवार) को राज्य के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चेतावनी दी। VHP ने मुख्यमंत्री चन्नी पर धर्मान्तरण की गतिविधियों को बढ़ावा देने से बाज आने के लिए कहा। साथ ही ईसाई मिशनरियों को भी चेतावनी दी। परिषद ने हिन्दू-सिखों को धन्यवाद भी दिया, जिनके विरोध के चलते मोगा के चंगाई सभा में मुख्यमंत्री नहीं गए।

विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय संयुक्त सचिव डॉ सुरेंद्र जैन के मुताबिक, मिशनरियों द्वारा धोखे से धर्मान्तरण करवाना हिंदू-सिखों की आस्थाओं के साथ खिलवाड़ है। यह एक साजिश है, जिसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मोगा की चंगाई सभा में मुख्यमंत्री का मुख्य अतिथि के रूप में जाने का निर्णय उनके पद और गरिमा के अनुरूप नहीं था। गुरुओं की पवित्र भूमि पर इस तरह के कार्यक्रम का विरोध करने वाले अभिनन्दन के पात्र हैं। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि हिन्दू और सिख चंगाई सभाओं की आड़ में धर्मान्तरण की साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे।

विहिप ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि चंगाई सभा कानून अपराध है। विज्ञप्ति के अनुसार, कुछ शब्दों के उच्चारण करके इस सभा में लोगों को ठीक कर दिया जाता है तो कोरोना के करोड़ों मरीजों को क्यों नहीं ठीक किया जाता। कोरोना से पादरी क्यों मरे? धोखे के आयोजन में मुख्य अतिथि बनकर मुख्यमंत्री मिशनरियों की साजिश में साझेदार बन रहे हैं। भोले-भाले लोगों को धर्मान्तरित करने वाली चंगाई सभाओं का पूरे देश में बहिष्कार होना चाहिए। अवैध धर्मान्तरण ही भारत का विभाजन के लिए जिम्मेदार है। कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में अशांति का कारण भी धर्मान्तरण ही है। विहिप ने धर्मांतरण के खिलाफ केंद्र और सभी राज्यों की सरकारों से कठोर कानून बनाने की भी माँग की।

ऑपइंडिया ने विश्व हिन्दू परिषद के मोगा जिलाध्यक्ष श्रीम शर्मा से बात की। उन्होंने बताया कि 25 नवम्बर 2021 को बड़ी संख्या में VHP कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन को अवैध धर्मान्तरण के विरुद्ध चेतावनी दी थी। इसमें पास्टर बजिंदर सिंह भी शामिल था, जो इस रैकेट का मुखिया है। इस से पहले भी बजिंदर सिंह के मोगा कार्यक्रम को रद्द करवाने के लिए प्रशासन को ज्ञापन दिया गया था। ज्ञापन में कहा गया था कि पास्टर का कार्यक्रम केवल हिन्दुओं और सिखों का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए आयोजित किया जा रहा है।

श्रीम शर्मा ने चन्नी को क्रिप्टो क्रिश्चियन बताया। उन्होंने कहा कि चन्नी पास्टर बजिंदर सिंह के साथ कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे जिस पर हत्या, बलात्कार और लोगों को धर्मान्तरित करने के केस दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में चन्नी, सोनू सूद और पंजाब के कई अन्य बड़े नेताओं के आने की खबर सुनकर हैरान रह गए थे।

दक्षिण अफ्रीका में मिला मल्टीपल म्यूटेशन वाला कोविड वैरिएंट, यूरोप में बिगड़े हालात: भारत सख्त निगरानी के साथ तैयारियों में जुटा

कोरोना वायरस के नए वैरिएंट से एक बार फिर पूरी दुनिया चिंता में आ गई है। जब कई देशों में कोविड के मामले अब कम होने शुरू हो गए थे, तब फिर एक नए वैरिएंट ने हर किसी को डरा दिया है। ये नया वैरिएंट साउथ अफ्रीका में पाया गया है। कहा जा रहा है कि ये काफी तेजी से फैलता है और इसका म्यूटेशन 30 से अधिक बार हो चुका है। इस वैरिएंट को B.1.1.529 नाम दिया गया है।

क्या होता है वेरिएंट?

किसी भी वायरस का एक जेनेटिक कोड होता है। कोरोना वायरस अपना रूप बदलने वाला वायरस है। यह जब एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जाता है तो कई बार अपने रूप में परिवर्तन करता है। इस परिवर्तन के दौरान वायरस या तो पहले से अधिक खतरनाक हो जाता है या फिर पहले से कमजोर पड़ जाता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि वायरस जब शरीर के अंदर अपनी फोटो कॉपी बनाता है तो कई बार एक फोटोकॉपी पहली वाली से थोड़ी अलग हो जाती है। इसे इसका नया वेरिएंट कहा जाता है। वेरिएंट्स को दो कैटेगरी में बाँटा गया है, पहला है वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट और दूसरा है वेरिएंट ऑफ कंसर्न। साउथ अफ्रीका वाले कोरोना वेरिएंट को ज्‍यादा संक्रामक और घातक माना जा रहा है।

इस वैरिएंट को लेकर पूरी दुनिया सतर्क है। भारत सरकार ने भी सभी राज्यों को मुस्तैद रहने के लिए कहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड के नए वैरिएंट से प्रभावित मुल्कों से आ रहे लोगों की स्क्रीनिंग के निर्देश जारी किए। भारत आने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कोरोना जाँच कराई जाएगी। हाल ही में वीजा पाबंदी में ढील और इंटरनैशल ट्रैवल में छूट दी गई थी, ऐसे में इसको लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। रैपिड टेस्टिंग पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है।

लगातार म्यूटेट हो रहे इस वैरिएंट ने WHO के साथ वैज्ञानिकों की भी टेंशन बढ़ा दी है। 30 से अधिक बार म्यूटेशन यानी रूप बदलना सबसे खतरे की बात है। दूसरी लहर में डेल्टा और डेल्टा प्लस वैरिएंट इसी तरह म्यूटेट होकर जानलेवा साबित हुआ था। सबसे चिंता की बात यह है कि मौजूदा वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ कारगर है या नहीं, इसकी स्टडी की जा रही है। इसमें वक्त लग सकता है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि तब तक यह वैरिएंट कहर ना बरपाना शुरू कर दे।

क्या है केंद्र सरकार की तैयारी?

सरकार के निर्देश के अनुसार जो भी लोग इन देशों से भारत आएँगे, उन्हें एक सख्त स्क्रीनिंग से गुजरना पड़ेगा। ये सब इसलिए होगा क्योंकि अफ्रीका के उन देशों को ‘एट रिस्क’ वाली कैटेगरी में रखे जाने की तैयारी है। सरकार की इस पूरी सतर्कता के पीछे वजह भी वाजिब है। दूसरी लहर में कोरोना वायरस ने भारत में जमकर कहर मचाया था और कोरोना डेल्टा वैरिएंट को इसका सबसे बड़ा जिम्मेदार माना गया। यूरोप और बाकी देशों में कहर बरपा रहे डेल्टा वैरिएंट के डर से कई भारतीय अपने मुल्क लौट आए थे। एयरपोर्ट पर कहीं ना कहीं टेस्टिंग में चूक हुई थी और फिर धीरे-धीरे इस वैरिएंट ने गदर काटा था। ऐसे में इस बार केंद्र सरकार विशेष सतर्कता बरत रही है।

WHO ने बुलाई बड़ी बैठक

इस बीच WHO की Technical Advisory Group ने अहम बैठक बुलाई है। WHO का कहना है कि इस वैरिएंट पर अभी और रिसर्च करने की जरूरत है। सबसे जरूरी है कि अधिक से अधिक लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाएँ, ताकि इससे मुकाबला किया जा सके।

इसके अलावा ये भी बताया गया है कि कोरोना के इस वैरिएंट को भी एक ग्रीक नाम दिया जाएगा। जैसे डेल्टा, एल्फा नाम रखे गए हैं, साउथ अफ्रीका वैरिएंट को भी एक नाम दिया जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वैरिएंट में मल्टी म्यूटेशंस की ताकत है, इसलिए यह चिंता की बात है। अब इसकी भी जाँच हो रही है कि कोविड वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ कितना कारगर है।

यह है चिंता की सबसे बड़ी बात

इस नए वैरिएंट को लेकर ज्यादा चिंता इसलिए भी है क्योंकि अभी तक ये नहीं पता है कि ये कितनी तेजी से फैल सकता है। जो जानकारी सामने आई है वो सिर्फ इस वैरिएंट के म्यूटेशन को लेकर है। KRISP की डायरेक्टर De Oliveira बताती हैं कि इस नए वैरिएंट के कई असाधारण म्यूटेशन देखने को मिले हैं। उनके मुताबिक अब तक 30 से ज्यादा म्यूटेशन दिख चुके हैं। दूसरे वैरिएंट की तुलना मे ये ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला दिख रहा है।

डायरेक्टर ने इस बात पर भी जोर दिया है कि अभी भी वैक्सीन ही कोरोना के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। ये नहीं पता है कि वैक्सीन नए वैरिएंट पर कितनी असरदार है, लेकिन अभी दुनिया के सामने ज्यादा विकल्प नहीं हैं। इस वैरिएंट के खिलाफ दूसरे मुल्कों ने भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

कोरोना के नए वेरिएंट से शेयर बाजार धड़ाम

इससे शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है। इससे निवेशकों को नुकसान हुआ। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बिकवाली से सेंसेक्स 1687.94 अंकों (2.87 फीसदी) की भारी गिरावट के साथ 57,107.15 पर बंद हुआ। निफ्टी की बात करें, तो यह 509.80 अंक यानी 2.91 फीसदी लुढ़का और 17,026.45 के स्तर पर बंद हुआ। इससे निवेशकों को 7.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 722.43 अंक (1.23 फीसदी) नीचे 58,072.66 पर खुला था। वहीं एनएसई का निफ्टी 223.90 अंकों या 1.28 फीसदी की गिरावट के साथ 17,312.40 पर खुला था।

ब्रिटेन और इजरायल ने उठाए ये कदम

ब्रिटेन और इजरायल ने साउथ अफ्रीका, बोत्सवाना और चार अन्य अफ्रीकी देशों से फ्लाइट पर पाबंदी लगा दी है। ऑस्ट्रेलिया ने भी इन देशों से आ रहे यात्रियों को लेकर नियम कड़े कर दिए हैं।

बेंगलुरू समेत कर्नाटक के कई जिलों में सुनाई दी रहस्यमयी आवाज, घर की खिड़कियाँ हिलीं: सुपर सोनिक बूम की आशंका

कर्नाटक के बेंगलुरू समेत कई जिलों में शुक्रवार (26 नवंबर 2021) की दोपहर रहस्मयी तरीके से बहुत ही तेज आवाज सुनाई दी। इसके बाद चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया। इस घटना को लेकर राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएसएनडीएमसी) ने बताया कि फिलहाल कहीं पर भूकंप के कोई संकेत नहीं नजर आ रहे हैं। वहीं पुलिस ने इसे सुपरसोनिक बूम करार दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरू में यह घटना सुबह 11.50 से 12.15 बजे के बीच हेमीगेपुरा, केंगेरी, ज्ञानभारती, राजराजेश्वरी नगर और कग्गलीपुरा में हुई। वहाँ के लोगों ने तेज आवाज के झटके को महसूस किया।

इस घटना को लेकर KSNDMC के निदेशक ने एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया था, “हेमीगेपुरा, केंगेरी, ज्ञानभारती, राजराजेश्वरी नगर और कागलीपुरा व बेंगलुरु के स्थानीय निवासियों को आज 26 नवंबर 2021 को सुबह 11.50 बजे से दोपहर 12.15 बजे के बीच हल्के कंपन और तेज साउंड सुनाई दिया। उस अवधि के दौरान किसी भी तरह के भूकंपीय संकेतों को जानने के लिए हमारी भूकंपीय वेधशालाओं से डेटा का विश्लेषण किया गया था। सीस्मोग्राफ स्थानीय झटके / भूकंप के कोई संकेत नहीं दिखाते हैं।”

घटना के बाद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए हालात के बारे में बात की। कुछ उपयोगकर्ताओं ने कहा कि दरवाजे और खिड़कियाँ काँपने लगे थे। लोगों ने यह भी सवाल किया कि क्या यह एक और सोनिक बूम था।

गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब बेंगलुरू में इस तरह की रहस्यमयी आवाज सुनने को मिली है। इससे पहले इसी साल जुलाई में भी दक्षिण बेंगलुरू में रहस्यमयी तरीके से तेज आवाज को सुना गया था। वह आवाज इतनी तेज थी के लोगों के घरों के खिड़की के शीशे तक टूट गए थे। उससे पहले पिछले साल मई 2020 में भी बेंगलुरू में इसी तरह की आवाज सुनाई दी थी। काफी समय के बाद पता चला कि यह रहस्यमयी आवाज भारतीय वायुसेना के परीक्षण की उड़ान थी। इस दौरान फाइटर प्लेन ने आवाज की गति से भी तेज रफ्तार से उड़ान भरी थी, जिससे ऐसी आवाज उत्पन्न हुई थी।

2 दिसंबर को नातिन की शादी है, कॉन्ग्रेस नहीं दे रही किराया: थक-हार कर बुजुर्ग ने पुलिस से लगाई फरियाद

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक बुजुर्ग ने किराए के लिए पुलिस से फरियाद लगाई है। राजमन राय का कहना है कि 2019 में कॉन्ग्रेस ने उनका मकान कार्यालय बनाने के लिए किराए पर लिया था। लेकिन कई महीनों से किराया नहीं मिलने के कारण बकाया राशि करीब तीन लाख 90 हजार रुपए हो गया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार 2 दिसंबर को उनकी नातिन की शादी होनी है। इसके बावजूद कॉन्ग्रेस नेता उनकी गुहार नहीं सुन रहे हैं। उनकी बातों से ऐसा लगता है कि किराया देने की उनकी नीयत नहीं है। राजमन राय के अनुसार उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू के कहने पर अपना मकान पार्टी को किराए पर दिया था। राजघाट थाने में दी गई अपनी शिकायत में उन्होंने लल्लू और गोरखपुर की जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान को आरोपित किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जुबानी विवाद से शुरू हो कर अब यह मामला पुलिस तक जा पहुँचा है। इंस्पेक्टर राजघाट रणधीर मिश्रा ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। पीड़ित के अनुसार उन्होंने अपना मकान गोरखपुर की कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान को 15 हजार रुपए प्रतिमाह के भाड़े पर दिया था। लेकिन, निर्मला पासवान ने राजमन राय के आरोपों को नकार दिया है। उनका कहना है कि किराए का कोई मामला नहीं है।

वहीं, राय का कहना है कि कॉन्ग्रेस की जिलाध्यक्ष अब एग्रीमेंट नहीं होने की बात कह रही हैं। मैंने उन्हें विश्वास पर अपना मकान दिया था। UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने पीड़ित का वीडियो राहुल गाँधी को ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है, “गोरखपुर के बुजुर्ग राजमन राय जी का किराया मत मारिए, दे दीजिए, नैतिकता नाम की कोई चीज़ बची है?”

पीड़ित मकान मालिक का नाम राजमन राय है। यह मकान गोरखपुर के टीपी नगर में स्थित है। राजमन राय के मुताबिक 25 अक्टूबर 2019 को निर्मला पासवान ने उनसे लोकसभा चुनाव तक के लिए कार्यालय खोलने के लिए मकान माँगा था। सचिन जायसवाल और अरुण शुक्ल के आगे 15 हजार रुपए प्रति माह भाड़ा देना तय हुआ था। जब उन्होंने गारंटी माँगी तब निर्मला पासवान ने प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू से फोन पर बात करा दी थी। लगभग माह भर पहले प्रियंका गाँधी की रैली के बाद राय ने किराया नहीं मिलने के कारण इस दफ्तर पर ताला लगा दिया था। कार्यालय का सामान अपने कब्ज़े में लेते हुए कहा था कि किराया मिलने पर ही लौटाएँगे।

इन आरोपों पर कॉन्ग्रेस की जिलाध्यक्ष का कहना है कि उन्हें अपने खिलाफ तहरीर दिए जाने की जानकारी नहीं है। वे पुलिस जाँच में पूरा सहयोग करने की बात कह रहीं। उनका कहना है कि मकान मालिक के साथ कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ था। ऐसे में उन पर आरोप क्यों लग रहा है ये उनकी समझ से परे है।

‘मुस्लिमों में योग गुनाह, मौलवी फतवा निकाल देगा’: सूर्य नमस्कार का Video शेयर कर ट्रोल हुईं करीना कपूर

बॉलीवुड एक्‍ट्रेस करीना कपूर अपने दूसरे बच्‍चे के जन्‍म के बाद अपनी फिटनेस के लिए जमकर वर्कआउट कर रही हैं। वजन घटाने और फिट रहने के लिए करीना ने 108 बार सूर्य नमस्‍कार कर रही हैं। करीना ने सूर्य नमस्‍कार करते हुए अपना वीडियो शेयर किया।

वीडियो में करीना अपने घर पर सूर्य नमस्कार करती नजर आ रही हैं। उन्होंने ब्लैक पैंट के साथ पिंक क्रॉप टॉप पहना हुआ है और उनके बाल करीने से बँधे हुए हैं। उन्होंने 108 बार सूर्य नमस्कार किया। वीडियो को शेयर करते हुए, करीना ने लिखा, “108 बार सूर्य नमस्कार किया। मैं आज रात पंपकिन पाई खाने के लिए तैयार हूँ।”

वीडियो पर कमेंट कर कई यूजर्स ने उनकी तारीफ की है, तो कुछ ने उन्हें धर्म की वजह से ट्रोल किया है। एक यूजर लिखा, “मुस्लिम में योग करना गुनाह है। मत करो खुले में, वरना कोई मौलवी फतवा निकाल देगा।” किसी को उनके सूर्य नमस्कार में खामी नजर आई तो किसी ने 108 बार सूर्य नमस्कार करने पर सवाल उठाए। वहीं कुछ यूसर्ज उनको ट्रोल करते हुए सूर्य नमस्‍कार ना करने की सलाह दे रहे हैं।

साभार: Kareena kapoor instagram

एक अन्य ने लिखा कि भाई अब फतवा जारी होगा इसके लिए।

साभार: Kareena kapoor instagram
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एक यूजर ने लिखा कि मुस्लिम दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते हैं। हमें ये सब करने की जरूरत नहीं है।

साभार: Kareena kapoor instagram
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करीना ने इंस्टाग्राम पर योग के पोज में अपनी एक तस्वीर भी शेयर की है। फोटो के कैप्शन में लिखा है, “कभी इतना बेहतर महसूस नहीं किया।” वहीं काम की बात करें, तो करीना अगली बार अद्वैत चंदन की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ में आमिर खान के साथ दिखाई देंगी।

यह फिल्म टॉम हैंक्स और रॉबिन राइट के अभिनय से सजी 1994 की हॉलीवुड फिल्म ‘फॉरेस्ट गंप’ की हिंदी रीमेक है। आमिर और करीना की फिल्म कोरोना महामारी के कारण देरी से रिलीज हो रही है। यह फिल्म बैसाखी के मौके पर 14 अप्रैल 2022 को रिलीज होगी। पहले, फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ को क्रिसमस 2020 के मौके पर रिलीज करने की योजना थी।

करीना कपूर खान ने प्रेग्नेंसी पर एक किताब भी रिलीज की थी, जिसमें उन्होंने अपनी पहली और दूसरी प्रेग्नेंसी के बारे में लोगों को बताया है। बेबो ने 16 अक्टूबर 2012 को सैफ अली खान से शादी की थी। इस कपल के दो बेटे हैं – तैमूर अली खान और जहाँगीर अली खान।

‘चाचा (लखवी) ने कहा था जब तक जिंदा रहना मारते रहना’: पढ़िए नार्को टेस्ट में कसाब से क्या हुए थे सवाल, क्या दिया था जवाब

आज मुंबई के दुर्भाग्यपूर्ण आतंकी हमले की 13वीं बरसी है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में साल 2008 में आज ही के दिन यानी 26 नवंबर को पाकिस्तान से समंदर के जरिए देश में घुसे लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने हमला कर 60 घंटे से अधिक समय तक मुंबई में आतंक का खेल खेला। इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 18 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे।

इस हमले को अंजाम देने वाले 9 आतंकियों को ढेर कर दिया गया, लेकिन एक आतंकी आमिर अजमल कसाब को जिंदा पड़ लिया गया। इस वारदात का सच उगलवाने के लिए जब उसका नार्को टेस्ट किया गया तो पता चला कि पाकिस्तान में बैठे उसके आका उसके जैसे गरीब परिवार के लोगों का ब्रेनवॉश कर इस्लामिक जिहाद की आग में झोंक देते हैं।

आइए पढ़ते हैं आमिर अजमल कसाब ने नार्को टेस्ट के दौरान क्या कहा था:-

प्रश्न: चाचा (जकी-उर-रहमान) किस गाँव के रहने वाला है?

उत्तर: मुझे नहीं पता कि वह कहाँ रहता है, लेकिन उसका अपना स्पेशल ऑफिस है। वह वहीं से आता था। इसके बारे में वह किसी को नहीं बताता था।

प्रश्न: तुम्हें मुंबई जाने के लिए किसने तैयार किया?

उत्तर: मुझे मेरे अब्बू ने बोला था। उन्होंने मुझसे कहा, “हम बहुत गरीब हैं, तुम भी दूसरों की तरह ही पैसा कमाओगे। यह मुश्किल नहीं है। हमें पैसे मिलेंगे और हमारी गरीबी दूर हो जाएगी। तुम्हारे भाई-बहनों की भी शादी होगी। तुम भी दूसरों की तरह खुश रहोगे।”

प्रश्न: तुम्हारे परिवार में कौन-कौन हैं?

उत्तर: अम्मी, खाला (बहन)।

प्रश्न: तुम्हारी अम्मी का क्या नाम है?

उत्तर: नूर इलाही, वो करीब 40 साल की हैं।

प्रश्न: वो क्या करती हैं?

उत्तर: वो घरेलू औरत हैं।

प्रश्न: तुम्हारे अब्बू क्या करते हैं?

उत्तर: वह लाहौर में काम करते हैं। उनका नाम आमिर शाबान कसाब है। उनकी उम्र करीब 45 साल है। वह लाहौर में फेरी लगाने का काम करते हैं।

प्रश्न: तुम कितने भाई हो?

उत्तर: हम तीन भाई हैं। पहला है अफजल कसाब और उसकी पत्नी का नाम साफिया है। वह 25 साल का है। उसके दो बच्चे हैं। एक लड़का और एक लड़की। लड़के का नाम आदिल है और वह 7 साल का है। लड़की हाल ही में पैदा हुई थी। मैं उसका नाम नहीं जानता।

प्रश्न: तुम्हें अपने भाई की बेटी का नाम क्यों नहीं पता?

उत्तर: मेरे भाई और उसकी पत्नी के बीच कुछ विवाद है। वे साथ नहीं रहते। वह अपनी अम्मी के साथ रहती है।

प्रश्न: तुमने कितनी पढ़ाई की है?

उत्तर: मैंने चौथी कक्षा तक पढ़ाई की है।

प्रश्न: तुमने स्कूल जाना कब बंद किया?

उत्तर: मैंने साल 2000 में स्कूल छोड़ दिया। तब से मैं मजदूर के रूप में काम कर रहा था। फिर मैं लाहौर गया और वहाँ भी मजदूरी करने लगा। मैं मोहल्ला तोहिदाबाद, गली नं. 54, मकान नं. 12 में रहता था।

प्रश्न: वहाँ कितने समय तक रहे?

उत्तर: 5 साल। 2000 से 2005 तक। मुझे मेरे काम के लिए अच्छी कीमत नहीं दी जा रही थी। मेरे अब्बू ने मुझे बताया कि हम बहुत गरीब हैं। उन्होंने ही मुझे लश्कर के आदमियों से मिलवाया था।

प्रश्न: तुम्हारे अब्बू (आमिर कसाब) और चाचा (लखवी) एक-दूसरे को कैसे जानते थे?

उत्तर: वे एक दूसरे को मेरे गाँव से जानते थे।

प्रश्न: क्या वो (लखवी) तुम्हारे गाँव गया था?

उत्तर: हाँ, मेरे गाँव के साथ ही दीपलपुर में भी उनका ऑफिस है। वे वहाँ पर लोगों को बुलाते थे, जैसे मेरे अब्बू को बुलाया था। उन्होंने मुझे बताया कि यह बहुत कठिन काम है। यह बहुत सम्मानजनक है। उन्होंने कहा था, बेटा तू जा, तेरी दरिद्रता दूर हो जाएगी। सम्मान मिलेगा।

प्रश्न: वह लोगों को कैसे बुलाता था?

उत्तर: वह लोगों को बताते थे कि यह एक जिहाद है। यह पाक और साहस वाला काम है। यह अल्लाह का काम है और इससे सम्मान मिलेगा। तुम खूब पैसे कमाओगे और तुम्हारी गरीबी दूर होगी।

प्रश्न: तुमने कितने दिनों तक ट्रेनिंग ली थी?

उत्तर: करीब तीन महीने।

प्रस्न: ट्रेनिंग कहाँ हुई?

उत्तर : मनसेहरा शहर के पास ही एक गाँव है बटाल, वहीं ट्रेनिंग हुई।

प्रश्न: कितने लोगों ने ट्रेनिंग ली थी?

उत्तर: ट्रेनिंग के दौरान हमारे बैच में करीब 24-25 लोग थे।

प्रश्न: आज का काम (26/11) खत्म करने के बाद कहाँ जाने वाले थे?

उत्तर: हमारा मरना तय था।

प्रश्न: कैसे?

उत्तर: वह (लखवी) कहते थे तुम स्वर्ग जाओगे। मैंने खुद से कहा यहाँ से भागो, ये सही नहीं लगता।

प्रश्न: तुमने कितने लोगों पर गोलियाँ चलाईं?

उत्तर: मुझे नहीं पता।

प्रस्न: तुमने कितनी गोलियाँ चलाईं?

उत्तर: पता नहीं। शायद दो-ढाई मैगजीन।

प्रश्न: तुमने कितने लोगों को मारा?

उत्तर: मुझे नहीं पता। बस गोली चलाता रहा।

प्रस्न: तुम्हें किसे मारने के लिए कहा गया था?

उत्तर: आम लोगों को।

प्रश्न: ऐसा करते रहने की तुम्हारी कब तक योजना थी?

उत्तर: वह (लखवी) कहा करते थे, जब तक तुम जीवित हो, मारते रहो, मारते रहो।

प्रश्न: कितने लोग साथ आए थे?

उत्तर: और भी थे, लेकिन हम दो लोगों के आँखों पर पट्टी बँधी थी। फिर हमें नाव से उतरने को कहा गया।

प्रश्न: भारत में तुम्हारा साथ कौन दे रहा था?

उत्तर: मुझे नहीं पता। उन्होंने हमें नहीं बताया।

प्रश्न: तो तुम सभी यहाँ जिहाद के लिए आए थे?

उत्तर: (रोते हुए) क्या जिहाद साहब!

प्रश्न: जिन लोगों की मौत हुई वो भी तुम्हारी तरह ही गरीब थे? तुम्हारे जैसे ही लोग मरे?

उत्तर: (रोते हुए) हाँ। अल्लाह मुझे कभी माफ नहीं करेंगे।

प्रश्न: इससे पहले तुमने कहाँ पर हमला किया था?

उत्तर: कहीं नहीं, यह मेरा पहला ऑपरेशन है।

प्रस्न: उन लोगों ने तुम्हारे लिए क्या किया है?

उत्तर: उन्होंने मेरे परिवार को एक बड़ी रकम देने का वादा किया था। वे शायद मेरे परिवार को लाखों रुपए देंगे।

प्रश्न: पैसा कौन देगा?

उत्तर: चाचा पैसे देंगे। उनकी लंबी दाढ़ी है। उनकी उम्र करीब 40-45 साल है। वह जिहादी हैं। वो सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के लिए अफगानिस्तान गए थे।

प्रश्न: उसने तुम्हें क्या बताया?

उत्तर: वो बहुत व्यस्त रहते हैं, लेकिन जब भी आते थे तकरीर देते थे। वो हमसे कहते थे, तुम मुसलमान हो, ये इंसानियत नहीं है। वो लोग तुम्हारे लोगों को मार रहे हैं। उन्होंने ही तुम्हें गरीब बना दिया है।

प्रश्न: जिहाद क्या है? उन्होंने तुम्हें जिहाद के बारे में क्या बताया था?

उत्तर: मुझे नहीं पता। उन्होंने हमें नहीं बताया। उन्होंने हमें केवल बताया था कि यह जन्नत का रास्ता है।

प्रश्न: निर्दोषों को मारने के लिए पैसों के अलावा और क्या कारण था?

उत्तर: कुछ नहीं सर, गरीबी सबसे बड़ा कारण है। अगर किसी व्यक्ति के पास खाने के लिए कुछ नहीं है, पहनने के लिए कुछ नहीं है तो वह कुछ भी कर सकता है।

प्रश्न: तुम्हारी ट्रेनिंग कितने दिनों तक चली?

उत्तर: सबसे पहले नए रंगरूटों को एक महीने की ट्रेनिंग दी जाती थी। फिर परिपक्व लड़कों के लिए अधिक प्रशिक्षण होता है। फिर उन्हें और तीन महीने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

प्रश्न: और?

उत्तर: वो तैयार हैं। इसके बाद कहा जाता था, अब जाओ, मारो। इतना ही।

प्रश्न: तुम्हारी ट्रेनिंग एक साल पहले हुई थी। तुमने एक साल तक क्या किया?

उत्तर: अंत में उसने मुझे कराची भेज दिया। मछली पकड़ने में इस्तेमाल होने वाले लॉन्च में मैं कराची आया था। मुझे लगा कि अब मुझे नौकरी मिल गई है। मुझे ऐसा कुछ नहीं पता था। पैसा घर भेजा जा रहा था। कोई तनाव नहीं था। अब्बू कहते थे बेटा बहुत अच्छा काम करेगा? उन्हें इसकी जरूरत है।

प्रश्न: निर्दोष लोगों की हत्या के अपराध के बारे में क्या?

उत्तर: उन्होंने कहा कि अगर तुम्हें पैसा और प्रसिद्धि चाहिए तो कुछ करना होगा।

प्रश्न: मुंबई कैसे पहुँचे?

उत्तर: हम अजीजाबाद के पास ट्रॉलर में चढ़े थे। हमें बोहरो से एक कार में बोर्डिंग पॉइंट पर लाया गया।

प्रश्न: हमले की योजना कब बनाई गई थी?

उत्तर: हमले की प्लानिंग 26 नवंबर 2008 से एक महीने पहले बनी थी।

प्रश्न: मीटिंग के बारे में बताओ?

उत्तर: इस्माइल और मुझे बुलाया गया था। हमें बताया गया कि सम्मानजनक काम का वक्त आ गया है। मुंबई में हमें हमारे टारगेट की सीडी दिखाई गई थी।

प्रश्न: सीडी में क्या था?

उत्तर: उन्होंने हमें वह रास्ता दिखाया, जिससे हमें जाना था। हमें आजाद मैदान के रास्ते वीटी स्टेशन (सीएसटी स्टेशन) की तस्वीरें दिखाई गईं। हमें बताया गया कि ताज होटल रास्ते में होगा।

प्रश्न: इस्माइल का क्या काम था?

उत्तर: अगर रास्ते में कोई समस्या थी तो उसे इसका ध्यान रखना चाहिए था, क्योंकि वह हम दोनों में बड़ा था।

प्रश्न: मुंबई पर हमला करने वाले सभी आतंकवादियों के नाम बताओ?

उत्तर: फरदुल्लाह, काशा, उमर, इस्माइल, अब्दुर रहमान सीनियर, सोहैब, अब्दुर रहमान जूनियर, ओमैर, अली और मैं (आमिर अजमल कसाब)।

प्रश्न: तुम कब हमला करने वाले थे? यही तारीख चुनने के पीछे क्या कारण था?

उत्तर: हमें हमले की तारीख और समय दिया गया था। अगर हम सुबह पहुँचते हैं तो उन्होंने हमें 10 से 11 के बीच हमला करने के लिए कहा था। अगर हम रात में पहुँचते तो रात 11 बजे तक हमला कर देना था।

प्रश्न: 11 के बाद क्या?

उत्तर: कुछ नहीं, हम मरने वाले थे।

प्रश्न: तुमने मुंबई में मिशन कब शुरू किया?

उत्तर: मुझे याद नहीं है, लेकिन 23 या 24 नवंबर होना चाहिए। हम सभी को एक महीने से अधिक समय तक अजीजाबाद में एक सीक्रेट जगह पर रखा गया था। ऐसा मिशन को गुप्त रखने के लिए किया गया था।

प्रश्न: पाकिस्तान से जिस ट्रॉलर पर सवार होकर आए उसका नाम क्या था?

उत्तर: यह अल-हुसैनी था और इसके मालिक चाचा (जकी-उर-रहमान लखवी) थे।

प्रश्न: वो (चाचा) कहाँ रहते हैं?

उत्तर: मनसेहरा। हम केवल उनके ऑफिस के बारे में जानते थे। वो ट्रेनिंग सेंटर के हेड थे।

प्रश्न: चाचा तुम्हारे साथ कितनी दूर गए थे?

उत्तर: वो तब तक हमारे ही साथ थे, जब तक हम दूसरी नाव पर नहीं चढ़े। यह पाकिस्तान में समुद्र के बीच में कहीं था।

प्रश्न: क्या भारतीय ट्रॉलर का ड्राइवर पाकिस्तानी था?

उत्तर: नहीं, वह एक भारतीय था। उसने किसी से बात नहीं की। उसका स्वभाव काफी गंभीर था।

प्रश्न: तुम्हें किसे मारने का आदेश दिया गया था?

उत्तर: कोई खास नहीं। सिर्फ आम लोग। जब हम वहाँ पहुँचे तो हमें लगा कि यह काम बहुत ही मुश्किल है, इसलिए हमने भागने का फैसला किया।

प्रश्न: पुलिस की गाड़ी तुम्हें कैसे मिली?

उत्तर: पास में ही गाड़ी खड़ी थी। गाड़ी के अंदर मौजूद पुलिस अधिकारी हम पर गोली चला रहे थे। मैं नीचे गिर गया, लेकिन इस्माइल ने उनकी हत्या कर दी और मुझे गाड़ी के अंदर खींच लिया।

प्रश्न: तुमसे किस चीज की माँग करने को कहा गया था?

उत्तर: चाचा द्वारा माँग की जानी थी।

प्रश्न: तुम कितने हैंडग्रेनेड्स ले जा रहे थे?

उत्तर: हम सभी 8 हैंड ग्रेनेड ले जा रहे थे। इस्माइल के पास भी 8 ग्रेनेड थे। सभी को 8 ग्रेनेड दिए गए। केवल एक टीम को अधिक गोला-बारूद दिया गया। अब्दुर रहमान और अली की टीम के पास ज्यादा गोलियाँ लगी थीं।