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ऊँचाई से पत्थर और हथियार फेंक रहे थे चीनी, फिर भी चौकी स्थापित की और अंत तक डटे रहे: कर्नल संतोष बाबू को ‘महावीर चक्र’

चीन के साथ गलवान घाटी युद्ध में बलिदान हुए कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी और माँ ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से ये सम्मान प्राप्त किया। कर्नल बिकुमाला संतोष बाबू को ‘शत्रु से मुकाबला करते हुए असाधारण वीरता के प्रदर्शन’ के लिए ये सम्मान मिला। वो ‘बिहार रेजिमेंट’ की 16वीं बटालियन का हिस्सा थे। ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ के दौरान पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में वो बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में तैनात थे।

सम्मान दिए जाने के समय उद्घोषक ने बताया, “कर्नल बिकुलाला संतोष बाबू को शत्रु का मुकाबला करने के लिए एक चौकी स्थापित करने का चुनौतीपूर्ण कार्य सौंपा गया। उन्होंने एक सशक्त योजना से दुश्मन द्वारा बाधा उत्पन्न किए जाने के बावजूद अपनी सैन्य टुकड़ी को संगठित किया और इस कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस चौकी पर मोर्चा संभालते समय नजदीकी ऊँचाइयों से भारी मात्रा में पत्थरबाजी के अल्वा शत्रु द्वारा तीक्ष्ण हथियारों से किए गए आक्रमण का भी कड़ा मुकाबला करना पड़ा।”

आगे जानकारी दी गई कि भारी संख्या में उपस्थित शत्रु सैनिकों की हिंसक और आक्रामक कार्यवाही का मुँहतोड़ जवाब देते हुए इस शूरवीर अधिकारी ने भारतीय सैन्य टुकड़ी को वापस भेजने के शत्रु के निरंतर प्रयासों को विफल कर दिया। बताया गया कि शत्रु के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद युद्ध जैसी चुनौतीपूर्व परिस्थिति में कर्नल संतोष बाबू ने अद्वितीय साहस एवं अद्भुत संयम के साथ अपने बटालियन का उत्कृष्ट नेतृत्व किया।

राष्ट्रपति भवन में हुए कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि स्वयं से पहले राष्ट्र एवं सच्ची सेवा भावना के साथ आखिरी साँस तक मोर्चे पर डटे रह कर अपने सैनिकों में अद्भुत प्रेरणा एवं प्रोत्साहन का संचार करते हुए अंततः उन्होंने राष्ट्रसेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इस दौरान उनकी ‘अनुकरणीय नेतृत्व क्षमता’ और ‘अद्वितीय कर्तव्यपरायणता’ का भी उदाहरण दिया गया। उनकी पत्नी बिकुमाला संतोषी और माँ बिकुमाला मंजुनाथ ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों ये सम्मान प्राप्त किया।

घर से भैंस चुराकर ले जा रहे थे सद्दाम और जुम्मन, उसवीर ने विरोध किया तो गौ तस्करों ने सिर में मारी गोली

उत्तर प्रदेश के कासगंज में पिछले दिनों कुछ गौ तस्करों ने उसवीर यादव नाम के एक स्थानीय युवक की हत्या कर दी। युवक की गलती बस इतनी थी कि उसने तस्करों को चोरी करने से रोका था। मगर, तस्करों ने बदले में उसकी जान ही ले ली। अब तस्कर पुलिस की गिरफ्त में हैं। इनकी पहचान सद्दाम और जुम्मन के तौर पर हुई है।

स्वराज्य की रिपोर्ट के मुताबिक, उसवीर के चचेरे भाई गोविंद ने 16-17 नवंबर की रात घटित इस घटना के बारे में बताया। वह बोले, “मैं चरपाई पर उसवीर के पास सो रहा था। करीब 12 बजे, हमें हमारे पड़ोसी जगदीश की आवाज आई। वह चिल्ला रहा था कि चोर हमारी भैंस ले जा रहा है।”

इस आवाज को सुनने के बाद जब उसवीर और बाकी लोग चोर को पकड़ने गए तो चोर ने उसवीर के सिर में गोली मार दी। साथ वालों ने जल्दी से जल्दी उसवीर को अस्पताल में ले जाने का इंतजाम किया मगर वह बीच रास्ते में दम तोड़ चुका था।

रिपोर्ट के मुताबिक, उसवीर 6 भाई-बहनों में सबसे बड़ा लड़का था। उससे बड़ी एक बहन थी जिसकी शादी हो गई थी। वहीं दो भाई और बहन स्कूल में पढ़ रहे थे और घर पर काम करते थे। गोविंद बताते हैं कि उसवीर एक साल से ज्यादा वक्त से दिल्ली में किराए पर रह रहा था और वहीं काम करता था। वह घर पर लगातार रुपए भेजता था।

गोविंद के मुताबिक उसवीर अपने घर में आय का मुख्य स्त्रोत था क्योंकि उसके पिता अब बुजुर्ग हो रहे हैं। उसकी हत्या से जुड़े मामले को कासगंज सिकंदरपुर वैश्य पुलिस थाने में दर्ज किया गया है। 17 नवंबर को इस संबंध में पुलिस ने अपने ट्विटर पर भी बताया था।

उनके मुताबिक आरोपितों को पकड़ने में चार टीमें जुटी थीं। 20 नवंबर को पता चला कि एक मुठभेड़ के बाद कासगंज पुलिस ने इन भैंस चोरों को पकड़ लिया है और दोनों आरोपितों ने उसवीर को मारने की बात कबूली है। इनके पास से 2 भैंस, कुछ कारतूस, बाइक और दो बंदूक बरामद हुई थी। इन दोनों की पहचान सद्दाम और जुम्मन के तौर पर हुई थी। ये पकड़े जाने वाले दिन भी किसी घटना को अंजाम देने जा रहे थे। इनका एक साथी अब भी फरार बताया जा रहा है है।

उल्लेखनीय है कि ये कोई पहली घटना नहीं है जब किसी गौ तस्कर ने पकड़े जाने पर स्थानीय या फिर पुलिस पर गोली चलाई हो। इससे पहले हरियाणा के मेवात से ऐसी घटनाएँ सामने आई थी। इसके अलावा यूपी में भी अक्सर पता चलता रहता है कि कैसे जब पुलिस गौ तस्करों को पकड़ने आगे बढ़ती है तो वो उन पर गोली चला देते है

शादीशुदा ताहिर ने दलित लड़की को फँसाया, धमकी देकर करता था रेप: गर्भवती हुई तो दवा दे दी, मौत

महाराष्ट्र के अहमदनगर से लव जिहाद की एक घटना सामने आई हैं। जहाँ आरोपित सईद ताहिर बेग ने एक 20 साल की हिंदू दलित लड़की को प्यार के जाल में फँसा कर उसके साथ बलात्कार किया और पीड़िता के गर्भवती होने पर जान से मारने की धमकी दी।

पीड़ित परिवार के मुताबिक सईद बेग पीड़िता को धमकी देकर उसका रेप करता था। जिसके चलते पीड़िता महार जाति की सोनाली विधाते 4 महिने की प्रेग्नेंट हो गई थी। जिसके बाद पीड़िता ने अपने परिवार को सब कुछ बता दिया। कहा जा रहा है कि जिससे डरकर सईद बेग ने पीड़िता को बाजार से खरीदकर गर्भ गिराने की कुछ दवाईयाँ खिला दी। जिसके चलते हॉस्पिटल में उपचार के दौरान 17 नवंबर को पीड़िता की जान चली गई। सईद बेग पहले से ही शादी-शुदा बताया जा रहा है। सुदर्शन न्यूज़ की रिपोर्ट में कहा जा रहा है उसने पहले भी दो शादियाँ की थी।

वहीं पीड़ित परिवार और हिंदू संगठनों के दबाव में आकर अब महाराष्ट्र पुलिस ने गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। और आरोपित सईद ताहिर बेग को गिरफ्तार भी कर लिया है।

ऑपइंडिया ने मृतका की माँ से जब संपर्क किया तो उन्होंने बताया, “मुझे बताया गया फूड पॉइज़न की शिकायत है और वो मर गई। मैं अंतिम संस्कार में गई तो वहाँ आस-पास के लोग बात कर रहे थे कि वह पेट से थी। तब मैंने अपनी ननद के बेटे से पूछा तो उसने कहा कि ताहिर के साथ इसका रिश्ता था। फिर मैंने ताहिर के खिलाफ पुलिस में शिकायत की।”

मृतका कि माँ ने यह भी बताया, “आरोपित ताहिर को पुलिस ने पकड़ कर जेल भेज दिया है। मुझे पुलिस पूरा सपोर्ट कर रही है। सामाजिक संगठनों ने भी मेरा साथ दिया है।” उन्होंने कहा कि दलित संगठनों ने इस मामले में कार्रवाई की माँग की है।

सुदर्शन न्यूज़ ने भी इस घटना को रिपोर्ट किया है। मामले में ऑपइंडिया के पास भी पीड़ित पक्ष का बयान और FIR की कॉपी है।

पैसे और जमीन का लालच, जेल भिजवाने की धमकी: सपा सरकार में मौलवियों ने बना दिया था मुस्लिम, 26 लोगों ने की घर-वापसी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 6 परिवारों के 26 लोगों ने हिन्दू धर्म में घर-वापसी की है। प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान इन्हें रुपए का लालच देकर मुस्लिम बनाया गया था। बघरा ब्लॉक के योग साधना आचार्य यशवीर महाराज आश्रम की देखरेख में घर-वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। इन सभी ने कुछ वर्ष पूर्व ही इस्लाम मजहब अपनाया था। हवन-यज्ञ कराने के बाद इन सभी की शुद्धिकरण की प्रक्रिया की गई, जिसके बाद ये सभी पुनः हिन्दू धर्म में सम्मिलित हुए।

इस प्रक्रिया के दौरान सभी परिवारों के सदस्यों के गले में फूलों की माला पहनाई गई और गंगा जल का आचमन कराकर जनेऊ धारण कर उनका वापस हिन्दू धर्म में स्वागत किया गया। वहाँ मौजूद साधु-संतों ने गायत्री मंत्र और ‘ॐ’ के उच्चारण का जाप कराकर उनका शुद्धिकरण कराया। उत्तर प्रदेश में महंत योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद से कई लोगों ने हिन्दू धर्म में घर-वापसी की है। इन लोगों का भी मुल्ला-मौलवियों ने इस्लामी धर्मांतरण करा दिया था।

सोमवार (22 नवंबर, 2021) की सुबह शुद्धिकरण और घर-वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। सनातन धर्म की परंपरा से पूरी प्रक्रिया संपन्न की गई। इन सभी को न सिर्फ कलाई में कलेवा बाँधा गया, बल्कि विधिवत जनेऊ भी पहनाया गया। आर्य समाज मंदिर के स्वामी यशवीर सिंह महाराज ने बताया, “जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब कुछ मुल्ला-मौलवियों ने मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत और रामपुर समेत कई जिलों में घूम-घूम कर गरीब तबके के हिंदू परिवारों पर दबाव बनाया था और उन्हें जबरन इस्लाम अपनाने को मजबूर किया था।”

उन्होंने जानकारी दी कि जब इन लोगों ने इसका विरोध किया था तो इन्हें डराया-धमकाया गया था। मुस्लिम न बनने की सूरत में हिन्दू परिवारों को जेल तक भेजने की धमकी दी गई थी। लेकिन, अब इन सभी ने हिन्दू धर्म में घर-वापसी करने का फैसला लिया। ये सभी परिवार सहारनपुर के रहने वाले हैं। इन्हें इस्लामी धर्मांतरण के लिए पैसे से लेकर जमीन तक का लालच दिया गया था। नजमा से सोनिया बनीं एक महिला ने बताया कि उन्हें हिन्दू धर्म में वापस आकर काफी अच्छा महसूस हो रहा है।

लगभग 25 वर्ष पूर्व इन परिवारों ने इस्लाम मजहब अपनाया था। उससे पहले ये सभी हिन्दू ही थे। आरिफ से सिद्धार्थ बने युवक ने बताया कि वापस अपने घर आकर अच्छा लग रहा है। खुद इन लोगों ने स्वीकार किया कि बहला-फुसला कर इन्हें मुस्लिम बनाया गया था। इन सभी को लाल धागे में ‘ॐ’ का चिह्न पहनाया गया। यशवीर महाराज ने कहा कि अब जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, ऐसे लोगों का स्वाभिमान जाग रहा है और अपने मत में वो वापस आ रहे हैं।

जिन्होंने धर्मांतरण किया, उनके पूर्व के नाम हैं – असगर, नजमा, आरिफ, गुलफसा, समीर, अजमद, समीना, ईयाना, सलीम, अकीला, समीर, बिल्लाद, शाहिस्ता, इमराना, जास्मिन, आलिया, इलीना, अख्तर, शाहिस्ता, इराना, नाजरीन, नासिरन, गुलाफसा, शकीना, अहमद और नदीम। अब इन्हें नए नाम दिए गए हैं – महेंद्र, शारदा, सिद्धार्थ, सोनिया, अभय, आयुष, साक्षी, सोनाक्षी, अजय, सुशीला, अनिल, अनिरुद्ध, सुनीता, अनिता, वंदना, पूजा, प्रतिमा, प्रदीप, सपना, सविता, जया, प्रीति, सुमन, कविता, कृष्णा और कुलदीप।

कृष्ण भक्ति की ऐसी लगन… सरकार ने अर्जी ठकुराई तो दोबारा VRS के लिए लिखा पत्र: IG भारती अरोड़ा की ‘इच्छा’ पर अब CM लेंगे फैसला

हरियाणा के अंबाला रेंज की आईजी भारती अरोड़ा ने एक बार फिर सरकार को पत्र लिखकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) की माँग की है। खास बात यह है कि इस बार प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज ने इस IPS अधिकारी की इच्छा को पूरा करने के लिए आवेदन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के पास भेज दिया है। आईजी भारती अरोड़ा ने दूसरी बार इस संबंध में पत्र लिखा है। इससे पहले उन्होंने 24 जुलाई को डीजीपी को पत्र भेज प्रभु श्रीकृष्ण की साधना करने की इच्छा जाहिर करते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति माँगी थी। लेकिन उस समय उनका आवेदन विज ने स्वीकार नहीं किया था। उन्होंने इसे यह कहते हुए लौटा दिया था कि वे बेहतरीन अफसर हैं और उनकी सेवाओं की प्रदेश को जरूरत है।

गृहमंत्री अनिल विज ने दूसरी बार आईजी की ओर से मिले वीआरएस आवेदन की जानकारी देते हुए कहा, “उन्होंने दूसरी बार आवेदन भेजा है। भारती अरोड़ा अच्छी अफसर हैं, लेकिन हम उन्हें जबरन रोक नहीं सकते। इसलिए हमारी तरफ से उनका आवेदन सीएम के पास भेज दिया गया है। वहाँ से मुहर लगते ही उनकी वीआरएस पक्की हो जाएगी।” विज ने यह भी कहा कि कृष्ण भक्ति मार्ग पर जाने का उनका व्यक्तिगत मामला है, जिसमें हम दखल नहीं दे सकते।

मालूम हो कि भारती की रिटायरमेंट 10 साल बाद यानी 2031 में होनी थी। 1998 बैच की आइपीएस भारती अरोड़ा ने अपने 23 साल के करियर में राजकीय रेलवे पुलिस में एसपी, अंबाला एसपी, कुरुक्षेत्र एसपी, राई स्पो‌र्ट्स कांप्लेस में प्रिंसिपल, करनाल रेंज के आइजी जैसे पदों पर सेवा दी है। उनकी सेवानिवृत्ति 31 मार्च 2031 को निर्धारित है।

बता दें कि उनकी शादी हरियाणा कैडर के ही आईपीएस विकास अरोड़ा से हुई है। साल 2007 में 18 फरवरी को समझौता एक्सप्रेस में बम ब्लास्ट हुआ था, उसमें जाँच के दौरान उनकी अहम भूमिका थी। वह उस समय वह हरियाणा राजकीय रेलवे पुलिस में एसपी थीं। इसके अलावा वह जहाँ-जहाँ एसपी या आईजी रहीं, उनकी कार्यशैली प्रभावित करने रही। हाल ही में प्रदेश में अवैध रूप से लोगों को विदेश भेजने के मामले की जाँच को भी उन्होंने ही अंजाम दिया था।

एक मुस्लिम परिवार का डर, हिंदू परिवार को लिखना पड़ा- यह मकान बिकाऊ है: ग्रेटर नोएडा का मामला, पुलिस ने बताया- आपसी झगड़ा

दिल्ली से कुछ ही दूरी पर स्थित ग्रेटर नोएडा के हल्दौनी गाँव में एक हिंदू परिवार पलायन को मजबूर हो गया है। घर की दीवार पर लिख दिया गया है, “यह मकान बिकाऊ है: एक समुदाय के कारण पलायन को मजबूर।” यहाँ भी यह समुदाय एक मुस्लिम परिवार ही है। जब से यह तस्वीर वायरल हुई है मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बता दें कि कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश के ही कैराना, मेरठ सहित कई दूसरी मुस्लिम बहुल जगहों से भी इसी तरह के कई मामले सामने आए थे, तब यह मामला भी खूब सुर्खियों में था।

दरअसल, इस मामले में हिन्दू परिवार का आरोप है कि एक समुदाय के लोग (मुस्लिम परिवार) हमें डरा-धमका रहे हैं। झगड़े की वजह पाँच महीने पहले जून में गाड़ी टकराने की घटना से हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, तब रोडरेज के मामले में रोहित और अमन के बीच झगड़ा और मारपीट हुआ था। दोनों युवक अलग-अलग समुदाय के है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद से ही दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी चली आ रही है। वहीं पुलिस का कहना है कि आपसी दुश्मनी के कारण दोनों पक्ष एक दूसरे पर बढ़ा-चढ़ाकर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते है।

इस विवाद पर पुलिस कमिश्नरेट गौतम बुद्ध नगर के हैंडल से ट्वीट कर कहा गया, “दोनों पक्षों में माह जून, 2021 में घटित घटना की मुकदमेबाजी को लेकर विवाद है। दोनों पक्ष पेशबंदी में एक दूसरे पर बढ़ा चढ़ाकर आरोप लगाते रहते हैं। दोनों पक्षों के मध्य शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा- 107/116 दंड प्रक्रिया संहिता की कार्रवाई की जा चुकी है।”

वहीं अब रोहित के परिवार ने अपने घर की दीवार पर लिखवा दिया, “यह मकान बिकाऊ है। एक समुदाय के कारण वह पलायन करने को मजबूर है।” जिले के कई लोगों ने सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड कर पीड़ित हिन्दू परिवार की मदद की गुहार लगाई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईकोटेक तीन कोतवाली प्रभारी भुवनेश शर्मा ने भी बताया, “पाँच महीने से दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा है। रोडरेज को लेकर पूर्व में मारपीट हुई थी। मामले की गहनता से जाँच की जा रही है। किसी पक्ष को यदि कोई दिक्कत है तो पुलिस से शिकायत करनी चाहिए।”

वहीं ऑपइंडिया ने इस मामले में जब पीड़ित परिवार से संपर्क साधा तो कुछ और मामले भी निकलकर सामने आए। पीड़ित परिवार का कहना है, “सही है इस झगड़े की शुरुआत इसी साल जून में हुई थी। तब हमारे परिवार के बेटे को एक मुस्लिम ने बेवजह मारा था।” उन्होंने FIR की कॉपी भी हमें भेजा है। वहीं उनका कहना है कि आरोपित जब जेल से छूट कर आया तो उसने 2 दिन पहले ही हमारे परिवार पर फिर से हमला किया।

इसके साथ ही पीड़ित परिवार ने पिछले सालों की कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया, “साल 2019 में भी एक अन्य मुस्लिम परिवार ने मेरे पिता को गालियाँ और धमकी दी थी।” पीड़ित परिवार का कहना है, “उस कॉलोनी में करीब 100 से अधिक मुस्लिम परिवारों के बीच 3 से 4 हिन्दू परिवार ही रहते हैं।”

वहीं पीड़ित परिवार की तरफ से यह भी कहा जा रहा है कि हमने तंग आकर दोबारा मकान बिकाऊ है, लिखा है।

‘जन्नत में अल्लाह देते हैं बड़े-बड़े स्तनों वाली महिलाएँ, हूर को पेशाब-शौच नहीं लगती’: केरल के मौलाना पर मीडिया रिपोर्ट

केरल में मौलाना ईपी अबूबकर कासमी के एक भाषण के बाद विवाद खड़ा हो गया है। मलयालम में इस्लामी भाषण देने वाले ईपी अबूबकर कासमी मुस्लिम होने के फायदा गिना रहे थे। इसी दौरान उन्होंने ये भी बताया कि मुस्लिमों को जन्नत में क्या-क्या मिलता है। इस दौरान वो कह बैठे कि जन्नत में ‘बड़े-बड़े स्तनों वाली महिलाएँ’ मिलती हैं। महिलाओं के लिए इस तरह आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के बाद उनका विरोध हो रहा है। ईपी अबूबकर कासमी के भाषण सोशल मीडिया पर कई मुस्लिम सुनते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि जन्नत में शराब की नदियाँ बहती हैं और बड़े-बड़े बँगलों के साथ-साथ बाग़-बगीचे की सुविधा भी मिलती है। उन्होंने दावा किया कि अल्लाह के जन्नत में जो महिलाएँ होती हैं, वो न तो पेशाब करती हैं और न ही उन्हें शौच करने की कभी ज़रूरत पड़ती है। उन्होंने दावा किया कि जन्नत जाने वाले मुस्लिमों को वहाँ की ‘हूरों’ की गोद में बैठने का सौभाग्य प्राप्त होता है। महिला विरोधी बयानों के कारण मौलाना भले विवादों में हो, लेकिन केरल के नेता इस पर अब भी प्रतिक्रिया नहीं दे रहे।

‘ऑर्गनाइजर’ की खबर के अनुसार, मौलाना ने कहा, “अगर जन्नत में जाने वाले किसी मुस्लिम को बड़े-बड़े स्तनों वाली महिलाओं की ज़रूरत होगी, तो अल्लाह उन्हें उनकी पसंद के हूर देते हैं। जन्नत में अल्लाह ने शराब की एक नदी बना रखी है, जिसमें वहाँ रहने वालों को तैरने की पूरी अनुमति है। वहाँ पर शराब पीने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, क्योंकि अल्लाह ने ही शराब की नदी का निर्माण किया है।” बता दें कि सामान्यतः इस्लाम में शराब को हराम माना जाता है और इसे न पीने की सलाह दी जाती है।

मौलाना ईपी अबूबकर ने ये भी बताया कि जन्नत में मुस्लिमों को शराब की दुकानों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें नहीं लगानी पड़ती हैं, क्योंकि सब कुछ मुफ्त में मिलता है और उसकी मात्रा असीमित होती है। उन्होंने ये अजोबोग़रीब दावा कर दिया कि जन्नत की हूर के पास सोचने-समझने की ताकत भी नहीं होती। हालाँकि, उम्मीद कम ही है कि महिला विरोधी बयानों के बावजूद केरल की वामपंथी CPI(M) सरकार कुछ कार्रवाई करेगी, क्योंकि इसका मुस्लिम तुष्टिकरण का लंबा इतिहास रहा है।

RSS वर्कर की हत्या में PFI का सदस्य गिरफ्तार, केरल पुलिस ने अब तक पहचान का नहीं किया है खुलासा

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ता ए संजीत की हत्या के मामले में केरल पुलिस ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। उसे सोमवार (22 नवंबर 2021) को पलक्कड़ जिले के मंबरम से पकड़ा गया। हालाँकि, पुलिस ने अभी तक उसकी पहचान का खुलासा नहीं किया है।

जिला पुलिस प्रमुख आर विश्वनाथ ने पलक्कड़ में मीडियाकर्मियों को बताया कि पीएफआई का गिरफ्तार सदस्य सीधे तौर पर हत्या में शामिल था। उसकी पहचान गुप्त रखी गई है, क्योंकि अभी जाँच के एक हिस्से के रूप में शिनाख्त परेड किया जाना बाकी है। अन्य दोषियों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

इससे पहले, दिवंगत संजीत की पत्नी ने कहा था कि वह उन लोगों की पहचान कर सकती है, जिन्होंने 15 नवंबर को उसी के सामने उसके 27 वर्षीय पति की हत्या कर दी थी। कथित तौर पर, पुलिस ने सोमवार को जाँच के दौरान तीन लोगों को हिरासत में लिया था।

आरएसएस और बीजेपी ने आरोप लगाया था कि संजीत की दिनदहाड़े हत्या के पीछे इस्लामिक संगठन पीएफआई की राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के सदस्यों का हाथ है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने इस मामले को लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। उन्होंने उनसे संजीत की हत्या की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) से कराने की माँग की थी।

अमित शाह को लिखे पत्र में सुरेंद्रन ने कहा था कि राज्य में 50 आरएसएस-भाजपा कार्यकर्ताओं को इस्लामवादियों ने मार डाला है, जिनमें से दस पिछले पाँच वर्षों में मारे गए हैं। वहीं, एसडीपीआई ने सभी आरोपों को गलत बताया था।

केरल में आरएसएस कार्यकर्ता संजीत की हत्या

केरल के पलक्कड़ में 15 नवंबर 2021 को आरएसएस कार्यकर्ता ए संजीत की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हत्या का इल्जाम एसडीपीआई के बदमाशों पर लगा था। खबरों के मुताबिक, संजीत पत्नी के साथ बाइक से जा रहे थे। तभी गुंडों ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। संजीत की पत्नी ने रिपब्लिक वर्ल्ड से बातचीत में कहा था कि उनके पति को उनकी आँखों के सामने जानबूझकर मारा गया था। वो लोग चाहते थे वे इस हत्या को देखें। उन्होंने कहा था, “उन लोगों ने मुझे पकड़ा और पीछे ले गए। इसके बाद मेरे सामने उन्होंने उन पर तलवार से वार किया। उस समय बहुत सारे लोग वहाँ थे। कई कार, कई स्कूटर और स्कूल बस भी वहाँ थी। उन पाँचों का मुँह भी नहीं ढका था।”

बच्चों में ‘वॉल्टन मॉडल’ से प्रॉपर्टी बाँटेंगे मुकेश अंबानी? ₹16 लाख करोड़ का है कारोबार, 20 साल पहले भाई से हुआ था विवाद

एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी का ध्यान अब अपनी विरासत पर है। उन्होंने अपने उत्तराधिकार को लेकर फैसले पर विचार करना शुरू कर दिया है। संपत्ति और कारोबार को बच्चों के बीच कैसे बाँटा जाए, इसे लेकर वो दुनिया भर के तमाम फॉर्मूलों का अध्ययन कर रहे हैं। वॉल्टन से लेकर कोच परिवार तक का अध्ययन कर वो देख रहे हैं कि दुनिया के अरबपतियों ने कैसे अपने उत्तराधिकार बाँटे कि विवाद भी नहीं हुआ और ये न्यायसंगत भी रहा।

मुकेश अंबानी का साम्राज्य 208 बिलियन डॉलर (15.50 लाख करोड़ रुपए) का है, ऐसे में ज़रूरी है कि इसका बँटवारा अच्छे से किया जाए। धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद जिस तरह से मुकेश और अनिल अंबानी में कारोबार के बँटवारे को लेकर विवाद हुआ था, वो नहीं चाहते कि उनके बच्चे उसी अनुभव से गुजरें। इसीलिए, एक खास उम्र तक वो बँटवारा कर देना चाहते हैं। क्योंकि उत्तराधिकार के संघर्ष के कारण बड़े-बड़े कारोबार तबाह हुए हैं और कारोबारी परिवार अलग-थलग हुए हैं।

हालिया उदाहरणों को देखते हुए मुकेश अंबानी को वॉलमार्ट नामक कंपनी का संचालन करने वाली वॉल्टन परिवार का फॉर्मूला ज्यादा पसंद आया है। कहा जा रहा है कि मुकेश अंबानी अपने परिवार की संपत्तियों को एक ट्रस्ट की तरह संस्था बना कर संचालन का दायित्व देने की योजना पर काम कर रहे हैं, जो रिलायंस ग्रुप का भी प्रबंधन करेगी। ‘मिंट’ और ‘ब्लूमबर्ग’ ने सूत्रों के हवाले से ये खबर चलाई है। बता दें कि आधिकारिक रूप से कहीं से इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।

मुकेश अंबानी की योजना है कि नई संस्था में उनके और उनकी पत्नी नीता अंबानी के अलावा उनके दोनों बेटे और एक बेटी, इन सभी के स्टेक्स होंगे। साथ ही इसमें मुकेश अंबानी के कुछ करीबी लोग भी शामिल होंगे, जो वर्षों से उनके सलाहकार हैं। हालाँकि, प्रबंधन और प्रतिदिन के कारोबार का कार्य बाहरी प्रोफेशनल लोग ही रहेंगे और परिवार का इसमें दखल कम रहेगा। रिलायंस का साम्राज्य आज रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल से लेकर टेलीकम्युनिकेशन, ई-कॉमर्स और ग्रीन एनर्जी तक फैला हुआ है।

एशिया के कई ऐसे अरबपति कारोबारी हैं, जो ढलती उम्र के कारण संपत्ति और कारोबार के बँटवारे की समस्या से जूझ रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इनमें से अधिकतर कारोबार खड़े हुए थे। फिर उनके परिवार ने इसे आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। आज ऐसे अरबपति कारोबारियों की तीसरी-चौथी पीढ़ी तैयार हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंबानी परिवार कैसे अपनी संपत्ति व कारोबार का बँटवारा करता है, इस पर अन्य लोगों की भी नजर है। 94 बिलियन डॉलर (7 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति वाले मुकेश अंबानी ने फ़िलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है।

विशेषज्ञ कह रहे हैं कि कोरोना महामारी के बाद कई अरबपति कारोबारी और चिंता में हैं कि आगे के लिए पहले से सोचना शुरू कर दिया जाए। उत्तराधिकार के बँटवारे के लिए क्लाइंट्स की संख्या अचानक से बढ़ गई है। हालाँकि, मुकेश अंबानी अब भी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, लेकिन अब उनके बेटे-बेटी ऊपरी तौर पर ज्यादा दिखाई देते हैं। जून में शेयरधारकों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने जता दिया था कि उनके 30 वर्षीय जुड़वाँ बेटे-बेटी आकाश और ईशा, और 26 वर्षीय अनत कंपनी में बड़ा किरदार अदा करने वाले हैं।

उन्होंने कहा था कि उन्हें आकाश, ईशा और अनंत के नेतृत्व में रिलायंस की समृद्ध विरासत को संभालने वाली अगली पीढ़ी को लेकर उन्हें कोई शक नहीं है। बता दें कि 1992 में वॉलमार्ट के संस्थापक सैम वॉल्टन के निधन के बाद वॉल्टन परिवार में संपत्ति और कारोबार का जिस तरह से बँटवारा हुआ, उससे मुकेश अंबानी खासे प्रेरित हैं। आज भी वॉलमार्ट समूह आसमान की ऊँचाइयाँ छू रहा है। ‘हर्म्स फैशन एम्पायर’ चलाने वाला डुमास परिवार और जॉनसन कंपनी चलाने वाला परिवार भी अपनी अगली पीढ़ी को आगे कर चुका है।

वॉल्टन परिवार ने इस सम्बन्ध में जो तरीका अपनाया था, उसके तहत सैम वॉल्टन ने अपने जीवित रहते ही 1988 में डेविड ग्लास को CEO बना दिया था। उससे पहले वही कंपनी के CEO हुआ करते थे। दुनिया के इस सबसे अमीर परिवार ने खुद को बोर्ड तक सीमित कर लिया और बाकी ऑपरेशन्स प्रोफेशनल्स संभालते रहे। वॉलमार्ट के बोर्ड में सैम के बेटे रॉब और भतीजे स्टुअर्ट को शामिल किया गया। साथ ही उनकी पोती के पति ग्रेग पेनर को 2015 में अरकांसस स्थित कंपनी बेंटोनविल्ले का चेयरमैन बनाया गया।

हालाँकि, इसके लिए इस परिवार की आलोचना भी हुई थी कि अपने प्रभाव का इस्तेमाल आकर के वो शेयरधारकों से ऊपर खुद ही सारे पद ले रहे हैं। लेकिन, इस परिवार के कई अन्य सदस्यों को वॉलमार्ट से अलग फिलैंथ्रॉपी और अन्य कंपनियों में पद दिए गए। उन्हें निवेश की जिम्मेदारी सौंपी गई। सैम ने अपने निधन से 40 वर्ष पूर्व 1953 में ही उत्तराधिकार की तैयारी शरू कर दी थी, जो उनके चार बेटों एलाइस, रॉब, जिम और जॉन में बँटी। अब भी ये परिवार वॉलमार्ट का 47% हिस्सा अपने पास रखे हुए है।

इस परिवार का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञ कहते हैं कि इतनी बड़ी कंपनी का आधा हिस्सा अपने पास रखने का अर्थ है कि जिन मैनेजर्स को वो हायर करते हैं, वो जानते हैं कि असली सत्ता कहाँ पर है। हालाँकि, वॉलमार्ट कहता है कि वो स्वतंत्र विचारों को कंपनी में जगह देने को प्राथमिकता देता है। बता दें कि 2002 में रिलायंस भी इसी समस्या में फँसा हुआ था, जब धीरूभाई अंबानी का निधन हुआ। उस समय मुकेश चेयरमैन और अनिल वाईस चेयरमैन हुआ करते थे और साथ काम कर रहे थे।

लेकिन, इसके बाद कंपनी के विस्तार के दौरान दोनों भाइयों में नाराज़गी बढ़ती गई। एक को लगता था कि दूसरा बिना पर्याप्त विचार-विमर्श किए निर्णय ले रहा है। अनिल अंबानी ने जब एक पॉवर जनरेशन प्रोजेक्ट की घोषणा की तो मुकेश अंबानी नाराज़ हो गए क्योंकि उनसे इस सम्बन्ध में राय नहीं ली गई थी। जबकि अनिल की शिकायत थी कि निवेशकों की संस्था में मुकेश ने अपनी मनमानी चलाई। अनिल अंबानी ने एक बार रिलायंस के वित्तीय स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।

उनके द्वारा चलाई जा रही सब्सिडियरी के डायरेक्टर्स ने उनके समर्थन में इस्तीफा तक दे डाला। शीरूभाई के निधन के 3 वर्ष बाद उनकी पत्नी और अंबानी भाइयों की माँ कोकिलाबेन को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। 2005 में हुए समझौते में अनिल को टेलीकम्युनिकेशंस, एसेट मैनेजमेंट, मनोरंजन और पॉवर जनरेशन वाला कारोबार मिला, जबकि मुकेश को रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, तेल-गैस और टेक्सटाइल्स का। विशेषज्ञ कहते हैं कि उत्तराधिकार के मामले में ये एक बेहद बुरा समझौता और अनुभव साबित हुआ।

जिसके घर डिनर, जिसे बताया सामान्य ऑटो ड्राइवर, वह AAP का कार्यकर्ता निकला: केजरीवाल की ‘ऑटो पॉलिटिक्स’ का सच

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर 22 नवंबर को जो एक खबर हर जगह चर्चा में रही वो ये कि वो एक ऑटो वाले के निमंत्रण पर उसके घर खाने पर गए। उनके साथ इस दौरान भगवंत मान और हरपाल सिंह चीमा भी थे। अब किसी को भी ये सब सुनकर सीएम केजरीवाल के साथ एक जुड़ाव महसूस हो सकता है कि वाकई आम आदमी पार्टी का नेतृत्व करने वाले केजरीवाल आम आदमी से जुड़ते हैं। लेकिन इस बीच आपको ये बता दें कि जिस ऑटो ड्राइवर ने केजरीवाल को मीटिंग के दौरान बुलाया वो कोई सामान्य ऑटो चालक नहीं था। उसका संबंध आम आदमी से था। कैसे? आइए बताएँ…

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें ऑटो चालक के भाई महेंद्र कुमार तिवारी ने खुद बताया कि वो AAP से जुड़े हैं और हमेशा पार्टी प्रोग्राम में शामिल होते रहते हैं। उनकी तरह दिलीप भी AAP के प्रोग्राम में जाते रहते हैं।

इसके अलावा दिलीप की वीडियो को भी यदि ध्यान से देखें तो वो बकायदा इमोशनल बैकग्राउंड म्यूजिक, तरह-तरह के एडिटिंग इफेक्ट्स के साथ शेयर की गई है। इसमें ये दिखाने का प्रयास हुआ है कि कैसे केजरीवाल आम आदमी के डिनर ऑफर को स्वीकारते हैं और बाद में उसके घर जाते हैं।

इस दौरान केजरीवाल दिलीप के पूरे परिवार के साथ फोटो खिंचाते हैं और मीडिया से बात करते हुए बताते हैं कि आज वह दिलीप के घर खाने पर आए थे और भविष्य के लिए उन्होंने दिलीप को निमंत्रण दिया है कि वो जब दिल्ली आएँ तो उनके घर खाने पर जरूर आएँ। 

बता दें कि पंजाब भवन में आम आदमी पार्टी की पंजाब ईकाई के साथ बैठक में दिलीप ने केजरीवाल को खाने के लिए निमंत्रण दिया था जिसे सीएम द्वारा स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने बस पूछा, “क्या मैं अपने साथ हरपाल सिंह चीमा और भगवंत मान को ला सकता हूँ?” जिसपर दिलीप ने ‘हाँ’ कहा और इच्छा जाहिर की कि वो उन्हें (सीएम केजरीवाल को) अपने ऑटो में बैठाकर घर तक ले जाना चाहते हैं। इसके बाद रात का डिनर ऑटो चालक के घर हुआ और सीएम ने कहा कि खान बिलकुल वैसा है जैसा वह खाते हैं। कम मसाले वाला।

उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने अपने नेताओं और तमाम ऑटो व टैक्सी यूनियन को लुधियाना में बैठक के लिए बुलवाया था। इस दौरान उन सबने दिल्ली सीएम के सामने अपनी परेशानी रखी। उन्होंने बताया कि कैसे उनको आरटीए, ट्रैफिक पुलिस और पंजाब पुलिस द्वारा तंग किया जाता है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि उनके ऊपर हजारों रुपए का चालान किया जाता है। इस बैठक में केजरीवाल ने उनसे अपील की कि वह अपने ऑटो पर पोस्टर लगाकर उनका प्रचार करें ताकि पंजाब चुनावों में उनकी सत्ता आए और वो सारी समस्याओं का निवारण कर सकें।