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‘खालिस्तानी आतंकियों को जूती तले कुचला.. मच्छरों की तरह मसल डाला…’: कंगना रनौत पर मुंबई में FIR, सिख समूह ने की थी शिकायत

एक सिख समूह की शिकायत के बाद मुंबई में अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध FIR दर्ज की गई है। उन पर आपत्तिजनक बयान देकर सिखों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगा है। 47 वर्षीय अमरजीत सिंह संधू के अलावा ‘दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी (DSGMC)’ और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता भी शिकायतकर्ताओं में शामिल थे। कंगना रनौत द्वारा इंस्टाग्राम पर दिए गए एक बयान की प्रति भी पुलिस को सौंपी गई है, जिसके आधार पर FIR हुई।

कंगना रनौत का ये फेसबुक पोस्ट अभी भी मौजूद है, “आज भले ही खालिस्तानी आतंकी केंद्र सरकार पर दबाव बना कर अपनी बात मनवा रहे हों। लेकिन, हमें एक महिला को नहीं भूलना चाहिए। एकमात्र महिला प्रधानमंत्री, जिन्होंने इनको अपनी जूती के नीचे कुचल दिया था। ये कोई मायने नहीं रखता कि देश को उनके कारण कितना दुःख झेलना पड़ा लेकिन उन्होंने अपने जीवन की कीमत पर उन्हें मच्छरों की तरह मसल डाला – लेकिन देश के टुकड़े नहीं होने दिए।”

इस पोस्ट के साथ उन्होंने इंदिरा गाँधी की तस्वीर भी डाली है और लिखा, “यहाँ तक कि इंदिरा गाँधी की हत्या के कई दशकों बाद आज भी ये इनके नाम से काँपते हैं। इनको वैसा ही गुरु चाहिए। खालिस्तानी आंदोलन के फिर जीवित होने के साथ ही, इंदिरा गाँधी की कहानी आज और भी ज़्यादा प्रासंगिक है। जल्द ही आपके सामने लेकर आ रही हूँ – इमरजेंसी।” FIR में कहा गया है कि इस बयान से सिख धर्म, सिख समुदाय और उनकी आस्थाओं का अपमान हुआ है।

DSGMC का कहना है कि कंगना रनौत ने जानबूझ कर एक इरादे के तहत ‘किसान आंदोलन’ को खालिस्तानी बना कर पेश किया और सिख समुदाय को ‘खालिस्तानी आतंकी’ कहा। साथ ही 1984 में हुए सिख नरसंहार को लेकर भी उनके बयान पर भी सिखों ने आपत्ति जताई है। IPC की धारा-295A (किसी धर्म की पवित्र चीजों या आस्था का अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। खार पुलिस थाने के सीनियर इंस्पेक्टर गजना काबदुले ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है।

34 वर्षीय अभिनेत्री के खिलाफ FIR दर्ज करवाने वालों में DSGMC के पूर्व अध्यक्ष और शिअद नेता मनजिंदर सिंह सिरसा और जसपाल सिंह सिद्धू भी शामिल हैं। कंगना रनौत फ़िलहाल अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ के बैनर तले बन रही फिल्म ‘टीकू वेड्स शेरू’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और अवनीत कौर मुख्य भूमिकाओं में हैं। कंगना का कहना है कि वो फिल्म के सेट पर एक ‘वर्कर’ की तरह काम कर रही हैं, जो काफी तृप्ति देने वाला है।

केरल के हिंदुओं-ईसाइयों को कट्टरपंथी का तमगा… ‘थूक वाले होटलों’ या इस्लामी रूढ़ियों पर सवाल से दिक्कत क्यों?

खाने में थूका गया हो या थूके जाने जैसा कुछ वीडियो में दिख रहा हो… क्या आप उस खाने को खाएँगे? उत्तर नहीं में ही आएगा, अगर आप इंसान हैं तो।

दिल्ली, गुड़गाँव, गाजियाबाद, मेरठ के थूक वाले वायरल वीडियो के बाद अब केरल के लोगों ने “थूक वाले होटलों/रेस्टॉरेंट” आदि से दूरी बनानी शुरू कर दी है। यह ट्रेंड तब पता चला जब केरल के लोग ‘Thuppal Shawarma’ से लेकर ‘Thuppal Biriyani’ जैसे कॉमेंट्स करके ऐसे होटलों/रेस्टॉरेंट के बायकॉट की बात कर रहे हैं।

Thuppal का मतलब होता है थूक। Shawarma मतलब मोटा-मोटी चिकेन रोल कह सकते हैं। Biriyani मतलब बिरयानी। ऐसे होटल जिनके मालिक मुस्लिम हैं, उनके सोशल मीडिया पोस्ट या उनसे संबंधित वीडियो के नीचे केरल के लोग ‘Thuppal Shawarma’ से लेकर ‘Thuppal Biriyani’ जैसे कॉमेंट्स कर रहे हैं।

हाल के दिनों में तंदूरी नान या रोटियों को भट्ठी में डालने से पहले उस पर थूकते हुए (या थूके जाने जैसा प्रतीत होते) कई वीडियो वायरल हुए हैं। पुलिस ने इस संबंध में कई लोगों को हिरासत में भी लिया है। ऐसे में अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहना कोई गुनाह नहीं। केरल के लोग वही कर रहे हैं। या यूँ कहें कि एक कदम आगे बढ़ कर खुद को सुरक्षित कर रहे हैं तो अतिश्योक्ति नहीं।

The News Minute की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल के कट्टरपंथी ईसाई और हिंदू समूहों ने “खाने में थूक” के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है। इन समूहों ने वॉट्सऐप पर किस जिले में, यहाँ तक कि किस एरिया में कौन-कौन से “थूक मुक्त होटल (spit-free hotels)” हैं, उसकी सूची भी शेयर कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह सूची होटल के मालिकों से उनके यहाँ काम करने वाले लोगों और उनके धर्म के बारे में पूछ कर तैयार की जा रही है। एक फूड वीडियो ब्लॉगर और उसके वीडियो पर आ रहे कॉमेंट्स की भी चर्चा इस रिपोर्ट में की गई है।

इस रिपोर्ट के साथ लेकिन 2 दिक्कत है। पहली दिक्कत यह कि खाने में थूकने (या थूकते दिखने वाले) वाले वीडियो का बचाव किया गया है। बताया गया है कि कुछ मौलवी-मौलाना थूकते नहीं हैं खाने में बल्कि मुँह से हवा फूँकते हैं। फर्जीवाड़ा फैलाने वाले AltNews का सहारा भी इसके लिए लिया गया है। हालाँकि रिपोर्ट यह बताने में चूक जाता है कि अगर ऐसा है तो सड़क किनारे किसी ढाबे में रोटी सेंकता एक आम इंसान उसे भट्ठी में डालने से पहले उस पर थूकता या मुँह से हवा क्यों फेंकता है? क्या मौलवी-मौलाना ही ढाबे में नौकरी करते हैं?

रिपोर्ट की दूसरी समस्या है भाषा। पढ़िए जरा – “दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान को किसी हिंदू संगठन ने नहीं बल्कि कट्टरपंथी ईसाई समूहों ने शुरू किया था। ‘सोल्जर्स ऑफ क्रॉस Soldiers of Cross‘ जैसे फेसबुक पेज केरल के ऐसे होटलों की सूची शेयर कर रहे हैं, जो “थूक मुक्त भोजन (spit-free food)” परोसते हैं। इन सूचियों में हिंदुओं या ईसाइयों के स्वामित्व वाले होटल शामिल हैं।”

मतलब खाने में थूकना (या इनके अनुसार मुँह से हवा फूँकना) कट्टरपंथ नहीं है… बल्कि खुद को स्वस्थ रखने के लिए अपने आस-पास की चीजों पर नजर रखना कट्टरपंथ है। वामपंथी मीडिया जो पहले हिंदुओं को टार्गेट करती थी, अब उनके निशाने पर ईसाई भी आ गए हैं… सिर्फ इसलिए क्योंकि इन ईसाइयों को भी अपने को स्वस्थ रखने की चिंता है। शायद इसलिए भी क्योंकि अब जो ईसाई “थूक मुक्त भोजन (spit-free food)” की मुहिम चला रहे हैं, वो लव-जिहाद के खिलाफ भी आवाज उठा चुके हैं। आश्चर्य यह कि खाने वाली इस रिपोर्ट में भी लव-जिहाद का जिक्र है… शब्दों से थोड़ा खेल कर। रिपोर्ट में लव-जिहाद को एक “बदनाम कैंपेन” घोषित करते हुए इसे भाजपा और कट्टरपंथी ईसाई समूहों से जोड़ा गया है।

कुल मिलाकर The News Minute की यह रिपोर्ट कहती है – इस्लाम या मुस्लिमों के रूढ़िवादी तौर-तरीकों पर चुप रहिए… वरना कट्टरपंथी का तमगा थमा दिया जाएगा। लव जिहाद को लेकर जो हिंदू समूह बोलते थे, बोलते हैं… सब कट्टरपंथी हैं। इसी लाइन पर अगर ईसाई समूह भी बोलेंगे तो वो भी कट्टरपंथी कह दिए जाएँगे। भले ही लव जिहाद को लेकर केरल की हाई कोर्ट ने भी राज्य सरकार को आदेश दिया हो… क्या पता ऐसे लिबरल मीडिया समूह आने वाले दिनों में किसी रिपोर्ट में कोर्ट को ही कट्टरपंथी ना बोल दें।

ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, त्रिपुरा में निकाय चुनाव पर रोक लगाने से किया इनकार

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (23 नवंबर 2021) को त्रिपुरा निकाय चुनाव स्थगित करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनावों के लिए प्रचार आज शाम 4 बजे खत्म हो जाएगा। चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मतदान 25 नवंबर को और मतगणना 28 नवंबर को है। चुनाव स्थगित करना अंतिम विकल्‍प होता है।

कोर्ट ने यह भी कहा, ”हमारा विचार है कि चुनाव स्थगित करने से पहले, टीएमसी (TMC) द्वारा व्यक्त की गई आशंका के मद्देनजर त्रिपुरा सरकार को निर्देश जारी करें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नगरपालिका चुनाव के शेष चरण शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से हों।”

अदालत ने आदेश दिया है कि DGP और IGP लॉ एंड ऑर्डर बुधवार (24 नवंबर 2021) को राज्य चुनाव आयोग से अर्धसैनिक बलों को लेकर बैठक करेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार से आग्रह कर और सुरक्षा बल तैनात किए जाएँगे, ताकि त्रिपुरा में चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण हो।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, त्रिपुरा हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने आज तृणमूल कॉन्ग्रेस की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान TMC की ओर से पेश हुए वकील जयदीप गुप्ता ने शीर्ष न्यायालय को कुछ तस्वीरें दिखाई, उन्‍होंने कहा कि त्रिपुरा में गंभीर स्थिति है। पुलिस वहाँ मौजूद है, लेकिन कुछ कर नहीं रही है। पत्रकार की पिटाई की गई है। नारे लगाने के लिए पार्टी की सदस्य शायनी घोष के खिलाफ FIR दर्ज की गई। पीड़ित होने के बावजूद हत्या के प्रयास के आरोप का सामना करना पड़ रहा है।

जयदीव गुप्ता ने आगे कहा कि वहाँ के लोग हमला कर रहे हैं और पुलिस इधर-उधर देख रही है। TMC ने अपनी अवमानना याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को बावजूद त्रिपुरा में चुनावों के दौरान हालात खराब हो रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट त्रिपुरा के अफसरों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करे।

इसको लेकर अदालत ने आदेश दिया, “याचिकाकर्ताओं द्वारा एक गंभीर शिकायत व्यक्त की गई है कि एफआईआर दर्ज करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है, प्रतिवादी इस अदालत के समक्ष दर्ज की गई शिकायतों का एक सारणीबद्ध विवरण प्रस्तुत करेंगे, जो प्राथमिकी दर्ज की गई है, जो कार्रवाई की गई है और जो गिरफ्तारियाँ की गई हैं।” अदालत इस मामले पर 25 नवंबर तक त्रिपुरा सरकार से अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा है।

‘वो मुझे दुःख नहीं देता, केवल हँसाता है’: पति से तलाक के बाद महिला ने कुत्ते से की थी शादी, घुटने के बल बैठ किया था प्रपोज

अपने पति के साथ तलाक के बाद कुत्ते से शादी करने वाली अमांडा रोजर्स नामक यूके की महिला ने कहा है कि वो अब पहले से कहीं ज्यादा खुश हैं। महिला ने घुटने के बल बैठ कर कुत्ते को प्रोपोज़ भी किया। शेबा नामक कुत्ते के बारे में अमांडा रोजर्स ने बताया कि वो हमेशा से उनके साथ रहा है और जब वो अच्छा नहीं महसूस करती हैं तो वो उन्हें दिलासा देता है। उन्होंने कहा कि ये कुत्ता उन्हें हँसाता भी है। उन्होंने कहा कि उन्हें एक लाइफ पार्टनर से इससे अधिक कुछ नहीं चाहिए।

महिला ने बताया, “मैंने एक घुटने के बल पर बैठ कर अपने कुत्ते को प्रपोज किया। उसने अपनी पूँछ हिला कर हाँ में जवाब दिया। मैं जब छोटी थी तभी से एक परफेक्ट शादी की ड्रेस पहनने का सपना देखती थी। मैंने शादी समारोह के लिए इसे खुद को डिजाइन किया। वो दिन काफी खुशनुमा था। मैंने शादी से भी ज्यादा एन्जॉय किया। मैंने उसे किस देकर शादी को पक्का किया और अतिथियों ने जश्न मनाया। ये मेरे लिए एक बेहद ही खास क्षण था। लेकिन, मुझे पता है कि कानूनी रूप से शेबा के साथ मेरी शादी वैध नहीं है।”

महिला ने कहा कि शेबा उनके जीवन में जो स्थान रखता है, उसका जश्न मनाने के लिए वो एक अच्छा दिन था। ‘The Sun’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, महिला ने कहा कि शेबा ने कभी उन्हें दुःख नहीं पहुँचाया है और हमेशा उन्हें खुश रखता है। लंदन के ब्रिक्सटन की रहने वाली अमांडा रोजर्स ने आईटीवी के शो ‘द मॉर्निंग’ में हिस्सा लेकर अपनी अजीबोगरीब हरकतों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जब वो कुत्ता 2 सप्ताह का था, तभी उन्हें उससे प्यार हो गया था।

महिला ने कहा कि अलग-अलग तरह के प्यार होते हैं, ऐसे में शेबा के लिए उनका प्यार काफी गहरा है। 2014 में दिए गए इस इंटरव्यू में महिला ने बताया था कि जब तक उनका कुत्ता नहीं चाहेगा, कोई पुरुष उनके बैडरूम में नहीं आ सकता है। अमांडा ने कुत्ते के साथ अगस्त 2012 में ही एक कार्यक्रम के दौरान धूमधाम से शादी की थी, जिसमें 200 अतिथि शामिल थे। अब ये खबर फिर से वायरल हो रही है। उससे पहले अमांडा का अपने पति से तलाक हो गया था। वो शादी कुछ ही महीने चली थी।

बल्लभगढ़ के ‘अवैध मजार’ में मिली सेक्स वर्धक, वशीकरण की दवाएँ, वाशरूम में देवी-देवताओं की तस्वीरें: मौलवी गफ्फार गिरफ्तार

फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में पंचायत भवन की जमीन पर बने एक अवैध मजार से सेक्स और स्त्रियों को वश में करने सहित कई तरह की दवाएँ बरामद हुई हैं। स्थानीय लोगों के पास शिकायत थी कि मजार के टॉयलेट में हिन्दू-देवी देवताओं की तस्वीरें लगी हैं। जब लोग वहाँ पहुँचे तो उन्हें नशीली सेक्सवर्धक दवाओं के साथ, इस्लामी किताबें और कई आपत्तिजनक वस्तुएँ बरामद हुईं। जिससे लोग उस अवैध मजार को हटाने के लिए धरना-प्रदर्शन करने लगे।

हिन्दू संगठनों द्वारा जारी प्रदर्शन को देखते हुए फरीदाबाद पुलिस ने वहाँ पहुँचकर स्थिति सँभालने की कोशिश की। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने फरीदाबाद न्यूज़ से बात करते हुए बताया कि पंचायत भवन की जमीन पर बने अवैध मजार के अंदर इस्लामी किताबें, बच्चा पैदा करने वाली, स्त्री को वश में करने, वशीकरण, ताबीज सहित कई दवाइयों के साथ कई दर्जन हिन्दू महिलाओं के नंबर और तस्वीरें भी मिली हैं। लोगों ने बताया कि जहाँ वाशरूम है वहाँ हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें भी लगी हुई हैं।

वहीं विरोध प्रदर्शन के दौरान वहाँ इकट्ठे लोगों ने रिपोर्टर को बताया कि मजार के मौलवी का नाम अब्दुल गफ्फार है लेकिन हिन्दू महिलाओं को बहकाने के लिए वह अपना नाम बबली बताता है। गौरतलब है कि बल्लभगढ़ के इस मजार के बाहर जो बोर्ड लगा है उस पर ‘बाबा भूरेशाह की दरगाह’ लिखा है।

हिन्दू संगठनों के विरोध को देखते हुए फरीदाबाद पुलिस ने मजार के अंदर मौजूद मौलवी को अपने साथ ले गई। वहीं हिन्दू संगठनों ने प्रशासन से माँग की कि जल्द से जल्द इस अवैध मजार को तोड़कर वहाँ एक मंदिर बनाया जाए। फरीदाबाद न्यूज़ ने पूरे मामले को कवर किया है। यहाँ आप देख सकते हैं कि कैसे लोग मजार से बरामद सामग्रियों को दिखाते हुए ऐसे समाज विरोधी अवैध गतिविधियों को रोकने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं स्थानीय लोगों में भी इस घटना के सामने आने से आक्रोश देखा गया है।

असम में ईसाइयों ने शिवलिंग और त्रिशूल को किया अपवित्र, बरगद को काटा: हिंदू संगठनों ने कार्रवाई के लिए डीसी को सौंपा ज्ञापन

हिंदू रक्षा दल और हिंदू छात्र संघ के सदस्यों ने सोमवार (22 नवंबर, 2021) को कछार में उपायुक्त कार्यालय को एक ज्ञापन सौंपकर असम के कटिगोरा के महादेवटीला में एक हिंदू धार्मिक स्थल को अपवित्र करने वाले खासी ईसाई समुदाय के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। सौंपे गए ज्ञापन में हिन्दू संगठनों ने भविष्य में इस तरह के कामों को दोबारा दोहराने से बचने के लिए शिवलिंग और त्रिशूल को पहले की तरह स्थापित करते हुए लोहे की रेलिंग से घेरने की माँग की।

बता दें कि जैसे ही यह खबर एक स्थानीय दैनिक स्थानीय समाचार पत्र में छपी, खबर ने हिंदू बहुल जिले में काफी आक्रोश पैदा कर दिया। खासी समुदाय, जिनमे ज़्यादातर लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया है, कछार जिले के उत्तर में बरेल पहाड़ियों की तलहटी में रहता है। स्थानीय हिंदुओं के आरोपों के अनुसार, खासी लोगों ने हाल ही में एक बरगद के पेड़ को काट दिया और उस स्थान को अपवित्र कर दिया जहाँ अब 100 से अधिक वर्षों से शिवलिंग की पूजा की जाती थी। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि खासी लोगों ने स्थानीय मणिपुरी हिंदुओं को उस स्थान पर फिर कभी पूजा करने के लिए नहीं लौटने की चेतावनी भी दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय मणिपुरी हिन्दू वहाँ पीढ़ियों से शिवलिंग की पूजा करते आ रहे हैं और हाल के दिनों में लगातार धर्मांतरण रैकेट के खतरे का सामना कर रहे हैं। हिंदू संगठनों ने खासी समुदाय के उपद्रवियों के इस तोड़फोड़ को इन पहाड़ियों से हिंदू धर्म के अंतिम कुछ निशान मिटाने और जबरदस्ती ईसाई धर्म स्थापित करने का प्रयास करार दिया है।

हिंदू रक्षा दल और हिंदू छात्र संघ ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर खासी समुदाय के अपराधियों को पकड़ने और शिवलिंग और त्रिशूल को फिर से स्थापित करने और हिंदुओं को उनके धार्मिक अधिकारों के तहत पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए फिर से पूजा शुरू करवाने की माँग की। ज्ञापन में कहा गया है कि अगर प्रशासन शिवलिंग को फिर से स्थापित करने और दोषियों को एक महीने के अंदर पकड़ने में विफल रहता है, तो वे बरेल रेंज की तलहटी में हिंदू धर्म को सुरक्षित करने के लिए अपने दम पर हस्तक्षेप करेंगे। हिन्दू संगठनों का कहना है कि हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक इसे वापस बहाल नहीं कर दिया जाता।

भगवान शिव की खंडित मूर्ति, धड़ गायब कर टाँग दिया ISIS का झंडा: आतंकी संगठन ने देवताओं के ध्वंस की दी धमकी

आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) की प्रोपेगेंडा पत्रिका ‘वॉयस ऑफ हिंद (VOH)’ का नया संस्करण आया है। इसका जो कवर जारी किया गया है, उस पर भगवान शिव की कंप्यूटरजनित खंडित मूर्ति है। इसके नीचे लिखा है- ‘इट्स टाइम टू ब्रेक फॉल्स गॉड (यह झूठे देवताओं के ध्वंस का समय है)’। खंडित मूर्ति के शीर्ष पर आईएसआईएस का झंडा भी लगा है।

सोशल मीडिया में इस कवर के वायरल होने के बाद नेटिजन्स चिंता जता रहे हैं। कवर पर जो मूर्ति लगी है, वह कर्नाटक के मुरुदेश्वर शिव मंदिर में स्थापित भगवान शिव की मूर्ति से मिलती-जुलती है। कर्नाटक के कुमटा से बीजेपी के विधायक दिनकर केशव शेट्टी ने भी इस कवर की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट से इसकी तस्वीर साझा करते हुए सरकार से कार्रवाई की माँग की है।

कन्नड़ में लिखे अपने पोस्ट में शेट्टी ने कहा है, “सोशल मीडिया से मुझे यह पता चला है कि आतंकी संगठन आईएसआईएस की एक पत्रिका ‘वॉयस ऑफ हिंद’ ने मुरुदेश्वर मंदिर की शिव प्रतिमा का ध्वंस करने का ऐलान किया है। हिंदू मंदिरों की सुरक्षा और संवर्धन हमारी पार्टी के प्रमुख सिद्धांतों में से है। इस तरह की धमकियों पर कार्रवाई करने में हमारा रक्षा तंत्र मजबूत और सशक्त है। फोन पर गृह मंत्री को भी इससे अवगत कराया गया है। जल्द ही मुरुदेश्वर मंदिर में अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।”

वॉयस ऑफ हिंद और भारत सरकार की कार्रवाई

आईएसआईएस समर्थक मीडिया आउटलेट ‘अल किताल’ और ‘जुनुदल खिलाफत अल-हिंद’ ने फरवरी 2020 में वॉयस ऑफ हिंद को लॉन्च किया था। सितंबर 2021 में ‘द प्रिंट’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को पता चला था कि यह पत्रिका पाकिस्तान और बांग्लादेश में एक ‘कॉल सेंटर टाइप सेटअप’ में तैयार की जा रही है।

शुरुआत में ऐसा माना गया था कि इस पत्रिका की शुरुआत अफगानिस्तान से हुई है। लेकिन बाद में तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से यह बात पता चली कि इसके लिंक दक्षिण कश्मीर से हैं। द प्रिंट की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस पत्रिका का संपादन पाकिस्तान में किया जाता है। इसके लिए कंटेंट तैयार करने वाले मालदीव और बांग्लादेश से हैं।

एनआईए ने जुलाई 2021 में अनंतनाग से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान उमर निसार, तनवीर अहमद भट और रमीज अहमद लोन के तौर पर की गई। इन पर युवाओं के बीच प्रोपेगेंडा सामग्री प्रचारित करने का आरोप था। वीओएच को फेक ऑनलाइन पहचान के साथ प्रसारित किया जा रहा था। वास्तविक पहचान छिपाने के वीपीएन का इस्तेमाल हो रहा था। जाँच में भारतीय मोबाइल नंबरों और उन ऑनलाइन फर्जी खातों के बीच लिंक मिले थे। एनआईए ने बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण जैसे मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, एसडी कार्ड आदि जब्त करने की बात कही थी, जिसका इस्तेमाल पत्रिका के प्रसार में हो रहा था।

एनआईए ने अगस्त 2021 में कर्नाटक के भटकल से आईएसआईएस के एक प्रमुख ऑपरेटिव को गिरफ्तार किया था। उसकी पहचान जुफरी जवाहर दामुदी उर्फ अबू हाजीर अल बद्री के तौर पर हुई थी। अमीन जुहैब नाम के एक अन्य आतंकवादी को भी गिरफ्तार किया गया था। ये गिरफ्तारियाँ वीओएच पत्रिका से जुड़ी जाँच के सिलसिले में ही हुई थी। इसी तरह अक्टूबर 2021 में एनआईए ने आतंकी संगठन के प्रोपेगेंडा मैग्जीन के प्रकाशन के सिलसिले में कश्मीर में कई जगहों पर छापे मारे थे।

‘वो दुष्ट पहाड़ी राजा मूर्तिपूजक, मैं मूर्तिभंजक हूँ’: गुरु गोविंद सिंह ने की थी मुगलों को गद्दी दिलाने में सहायता – किताबों में पूरा इतिहास

सिख और हिन्दुओं के इतिहास की बात करते हुए इससे पहले हमने आपको बताया था कि किस तरह गुरु नानक के बेटे ही अपने पिता से अलग रास्ते पर चले थे और उन्होंने ‘उदासी संप्रदाय’ की स्थापना की। दूसरे लेख में हमने जाना कि मिर्जा राजा जय सिंह और उनके बेटे राम सिंह ने औरंगजेब से गुरु तेग बहादुर की रक्षा की। जय सिंह ने अपनी हवेली दान में दे दी, जिसे आज ‘गुरुद्वारा बँगला साहिब’ कहते हैं। अब हम बात करेंगे कि गुरु गोविंद सिंह के हिन्दुओं से कैसा रिश्ता था और उन्होंने खुद को क्यों ‘मूर्तिभंजक’ कहा था।

आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि गुरु गोविंद सिंह ने कभी औरंगजेब की प्रशंसा की थी। जब गुरु के बच्चों को दीवार में ज़िंदा चुनवा दिया गया था और मुग़ल इस भ्रम में थे कि उन्होंने गुरु गोविंद सिंह को मार डाला है, उस दौरान वो दीने नाम के एक गाँव में अपने एक श्रद्धालु के यहाँ ठहरे हुए थे। वो वेश बदल कर घूम रहे थे। इसी गाँव से उन्होंने औरंगजेब को एक खत भेजा, जिसे ‘फतेह-पत्र’ या फिर ‘जफरनामा’ के नाम से भी जाना जाता है। ये पत्र औरंगजेब के दरबार में पहुँचा भी था।

ज़फरनामा में गुरु गोविंद सिंह ने खुद को बताया है मूर्तिभंजक (वरिष्ठ सिख इतिहासकार जेएस ग्रीवाल की पुस्तक Guru Gobind Singh (1666–1708): Master of the White Hawk से साभार)

डॉक्टर महीप सिंह अपनी पुस्तक ‘गुरु गोविंद सिंह: एक युग व्यक्तित्व‘ में लिखते हैं कि इस पत्र में उन्होंने औरंगजेब की प्रशंसा करते हुए उसे वीर योद्धा और ‘चतुर राजनीतिज्ञ’ बताया था। लेकिन, साथ ही उसे अधार्मिक बता कर उसकी निंदा भी की थी। उन्होंने लिखा है कि औरंगजेब की मौत के बाद जब दिल्ली में गद्दी का संघर्ष शुरू हुआ तो गुरु गोविंद सिंह ने बहादुर शाह का साथ दिया और उसके बादशाह बनने के बाद वो उसके साथ दोस्त बन कर रहते थे, उसकी यात्राओं पर भी साथ जाते थे।

बहादुर शाह को बादशाह बनाने में गुरु गोविंद सिंह ने की थी मदद

कहते हैं, कि इस पत्र को पढ़ कर औरंगजेब को ग्लानि हुई थी और उसने गुरु गोविंद सिंह से मिलने की इच्छा प्रकट की। हालाँकि, गुरु गोविंद सिंह जब दिल्ली के लिए निकले तो रास्ते में ही उन्हें मुग़ल बादशाह की मौत का समाचार प्राप्त हुआ। उस समय गद्दी का कानूनी अधिकारी बहादुर शाह अफगानिस्तान का सूबेदार था, जिसका फायदा उठाते हुए मुहम्मद आजम ने गद्दी पर कब्ज़ा कर लिया। बहादुर शाह उस समय पंजाब में कत्लेआम मचाता हुआ आगे बढ़ रहा था।

फ़ारसी का एक कवि नंदलाल गुरु गोविंद सिंह का मित्र था। अपनी पुस्तक ‘देश-धर्म के रक्षक गुरु गोविंद सिंह‘ में जसविंदर कौर बिंद्रा लिखते हैं कि बहादुर शाह ने कवि नंदलाल के माध्यम से गुरु से सहायता माँगी और उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। उसने गुरु का आशीर्वाद माँगते हुए भरोसा दिलाया था कि वो सत्ता संभालते ही उनके साथ हुए अत्याचारों का न्याय करेगा। उन्होंने भाई धर्म सिंह के साथ 200-250 लड़ाकू सिखों का एक जत्था बहादुर शाह की सहायता के लिए भी भेजा।

बहादुर शाह ने अपने भाई को मार गिराया और उसके बाद सत्ता पर काबिज हुआ। इसके बाद उसने सहायता हेतु धन्यवाद करने के लिए सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह को आगरा निमंत्रित किया। माता साहिब कौर के साथ वो आगरा पहुँचे और मुग़ल बादशाह का आतिथ्य स्वीकार किया। इसी दौरान का एक लोकप्रिय वाकया है जब दरबार में गुरु की बादशाह की नजदीकी के कारण ईर्ष्या से भरे एक मुस्लिम दरबारी ने गुरु गोविंद सिंह से कुछ चमत्कार दिखाने की जिद कर डाली।

इस पर गुरु गोविंद सिंह ने कहा, “बादशाह बहादुर शाह स्वयं एक कारामात हैं। जब चाहें, किसी बड़े से बड़ा को नीचा दिखा सकते हैं और नीचे से नीचे को भी ऊँचा उठा सकते हैं। ताकतवर को मिट्टी में मिला सकते हैं। क्या यह करामात नहीं है?” हालाँकि, जब वो बार-बार जिद करने लगा तो गुरु गोविंद सिंह ने अपनी तलवार निकाली और उसे ‘चमत्कार’ दिखाने के लिए आगे बढ़े, लेकिन उसने तुरंत माफ़ी माँग ली। हालाँकि, गुरु गोविंद सिंह ने मराठों के विरुद्ध बादशाह की लड़ाई में हिस्सा लेने से साफ़ इनकार कर दिया था।

गुरु गोविंद सिंह ने खुद को बताया था ‘मूर्तिभंजक’

अब वापस लौटते हैं गुरु गोविंद सिंह द्वारा औरंगजेब को भेजे गए पत्र पर। इस पत्र में उन्होंने औरंगजेब से पूछा था कि वो पहाड़ी सरदारों का साथ क्यों दे रहा है? पहाड़ी सरदार हिन्दू थे और मूर्तिपूजा करते थे। वहीं गुरु गोविंद सिंह ने खुद को ‘मूर्तिभंजक (बुतशिकन)’ बताया। गुरु गोविंद सिंह ने कई बार खुद को मूर्तिपूजा का विरोधी बताया था और ‘पत्थरों की पूजा’ का विरोध किया था। उनका कहना था कि ईश्वर इन पत्थरों में नहीं रहता है। उनका कहना था कि ईश्वर को जाए बिना ही अधिकतर लोग अलग-अलग कर्मकांडों में व्यस्त हैं।

पहाड़ी राजाओं से युद्ध को लेकर भी उन्होंने यही दलील देते हुए कहा था कि वो ‘दुष्ट मूर्तिपूजक’ हैं, जबकि मैं एक मूर्तियों को खंडित करने वाला हूँ। ‘ज़फरनामा’ के 95वें पद्य में उन्होंने ये बात कही है। असल में यर पत्र उन्होंने औरंगजेब को इसीलिए लिखा था, क्योंकि उसने वादा कर के धोखा दिया था। उसने गुरु और उनके परिवार को सुरक्षित निकलने का वचन दिया था, लेकिन ‘चमकूर के युद्ध’ में मुग़ल फ़ौज गुरु गोविंद सिंह को खोज रही थी, ताकि उनका सिर बादशाह को पेश किया जाए।

यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्दर्न लोवा में इतिहास के प्रोफेसर लुइस ई फेनेश की पुस्तक ‘The Sikh Zafar-namah of Guru Gobind Singh: A Discursive Blade in the Heart of the Mughal Empire’ का एक अंश

इस धोखे की उन्होंने औरंगजेब को याद दिलाई थी। हालाँकि, कई लोग ‘दशम ग्रन्थ’, जिसका हिस्सा ‘जफरनामा’ है, उसकी रचना को लेकर सवाल भी खड़े करते हैं और कहते हैं कि ये गुरु गोविंद सिंह के जीवनकाल के बाद अस्तित्व में आया, ऐसे में इस पर संदेह है कि उन्होंने ही इसकी रचना की थी। कहते हैं कि इस पत्र को पाने के बाद औरंगजेब ने वजीर खान को आदेश दिया था कि वो गुरु को तंग न करे। कई लोग इसे गुरु गोविंद सिंह की चतुर कूटनीति का हिस्सा भी मानते हैं।

गुरु गोविंद सिंह की सेना ने हिन्दू पहाड़ी राजाओं से युद्ध के बाद उन्हें खासा नुकसान पहुँचाया था। इसमें से कुछ ऐसे थे जिन्होंने उन्हें उनके पिता के बलिदान के बाद शरण दी थी। इसीलिए, ये कहना बिलकुल गलत है कि सिखों ने केवल हिन्दुओं की रक्षा के लिए ही तलवार उठाए थे। लेखक कोएंराल्ड एल्स्ट कहते हैं कि गुरु गोविंद सिंह ने मुगलों से तभी युद्ध किया, जब उन्हें मजबूरी में करना पड़ा। उनका कहना है कि इसमें ‘हिंदुत्व को बचाने’ जैसी कोई बात नहीं थी।

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‘चचा जान और अब्बा जान वाले सुन लें, माहौल खराब किया तो…’ : ओवैसी के ‘शाहीनबाग धमकी’ के बाद CM योगी ने चेताया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असदुद्दीन ओवैसी को खुली चेतावनी दी है। सीएम योगी ने कहा है कि अगर राज्य में दोबारा से सीएए के नाम पर भावनाएँ भड़काने की कोशिश हुई तो इस बार उनसे सख्ती से निपटा जाएगा।

कानपुर में बूथ अध्यक्ष सम्मेलन के दौरान पहुँचे योगी आदित्यनाथ ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा, “आज मैं चेतावनी दूँगा उस व्यक्ति को जो यहाँ पर सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के तहत भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहा है।”

वह बोले, “चचा जान और अब्बा जान के अनुयायी सावधान होकर सुन लें, अगर प्रदेश में भावनाओं को भड़काकर माहौल खराब करोगे तो उत्तर प्रदेश सरकार सख्ती के साथ निपटना जानती है।”

सीएम योगी ने ओवैसी को सपा का एजेंट बताया और कहा कि वह सिर्फ भावना भड़काने आए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश को लेकर कहा कि अब राज्य को दंगों के कारण नहीं बल्कि दंगामुक्त होने के कारण पहचाना जाता है। जनता ने विकास और नए भारत, नए उत्तर प्रदेश का संकल्प लिया है। प्रदेश में दंगा और माफियाओं की सरकार नहीं है। माफियाओं पर बुलडोजर चलाने वाली सरकार है।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे प्रदेश 2017 से पहले दंगों के लिए जाना जाता था। उन्होंने कहा कि प्रदेश में परिवारवादी, जातिवादी, वंशवादी सोच के लोगों ने न केवल सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न किया, बल्कि अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस क्षेत्र के विकास को भी बाधित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी।

ओवैसी के शब्द

बता दें कि एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में कहा था, “मैं पीएम मोदी और बीजेपी से सीएए को कृषि कानूनों की तरह वापस लेने की अपील करता हूँ क्योंकि ये संविधान के खिलाफ है। अगर वे एनपीआर और एनआरसी पर कानून बनाएँगे तो हम सड़कों पर उतरेंगे और यहाँ एक और शाहीन बाग बनेगा।”

झरना ने सेक्स से इनकार किया, चांद आलम ने गला रेत मार डाला: अपने हत्यारे को छोड़ सूरज से की थी दोस्ती

दिल्ली पुलिस को एक महिला की लाश मिलती है। लाश प्लास्टिक से ढकी हुई थी, गला कटा हुआ था। रविवार (21 नवंबर 2021) को पुलिस ने लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और जाँच में जुट गई।

पुलिस की जाँच में पता चला कि मृतक महिला का नाम झरना है। हत्या से एक रात पहले झरना के कॉल डिटेल निकालने पर यह मालूम हुआ कि किसी चांद आलम नाम के व्यक्ति के साथ वो थी।

पुलिस के अनुसार दोनों के बीच सेक्स को लेकर झगड़ा हुआ। चांद आलम जबरदस्ती झरना के साथ सेक्स करना चाह रहा था और इनकार करने पर कैंची से गला रेत कर मार डाला। पुलिस ने चांद आलम को दिल्ली के ओखला इलाके से गिरफ्तार कर लिया है।

37 साल की झरना और 26 साल का चांद आलम 2015 में दिल्ली-फरीदाबाद बॉर्डर पर स्थित पुल प्रहलादपुर इलाके में एक कंपनी में काम करने के दौरान मिले थे। तब इन दोनों की दोस्ती भी हो गई थी, साथ समय बिताते थे। हालाँकि कुछ समय पहले झरना ने चांद आलम से दोस्ती तोड़ कर सूरज नाम के शख्स के साथ दोस्ती कर ली थी। इसी बात को लेकर चांद आलम गुस्से में था, झरना को मारने के लिए प्लान बनाना शुरू कर दिया था।

पुलिस के सामने चांद आलम ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वो झरना से 21 नवंबर 2021 को बदरपुर बस स्टॉप पर मिला। इसके बाद वो उसे ओखला के रेलवे ट्रैक के पास एक सुनसान क्वार्टर में ले गया। यहीं पर वो जबरदस्ती सेक्स करना चाहा, इनकार करने पर चांद ने झरना के ही बैग से कैंची निकाल कर उसका गला रेत डाला।

झरना के मरने के बाद चांद आलम ने लाश को प्लास्टिक की थैली से ढक दिया। उसके मोबाइल को भी तोड़ कर फेंक दिया। हत्या में इस्तेमाल कैंची और खून से सने कपड़ों को उसने एक नाले में फेंक दिया और वहाँ से भाग गया। हालाँकि फोन रिकॉर्ड के कारण पकड़ा गया।

दिल्ली पुलिस के अनुसार मृतक महिला झरना शादीशुदा थी और उसके 2 बच्चे भी हैं। आरोपित चांद आलम भी शादीशुदा है।

मुस्लिम प्रेमी, हिंदू प्रेमिका

चांद आलम और झरना की ऊपर वाली खबर अपने तरह की अकेली नहीं है। मुस्लिम प्रेमी और हिंदू प्रेमिका वाली ऐसी तमाम खबरों (जो खबर बनती हैं, जो नहीं बन पाती हैं या तो पब्लिश नहीं हुई या वो हिंदू लड़की अत्यंत खुशकिस्मत होती है) का अंत हिंदू प्रेमिका की मृत्यु पर जाकर ही होता है या फिर उसके साथ तरह-तरह के दुर्व्यवहार कर उसे छोड़ दिया जाता है।

हिंदू प्रेमी, मुस्लिम प्रेमिका

यह सामान्य नहीं है। लेकिन भारत का समाज विविधताओं वाला है, कुछ मुस्लिम लड़कियाँ खुल कर जीने का ख्वाब लिए हिंदू लड़कों को पसंद करने लगती हैं। इनका अंत क्या होता है, जानते हैं? हिंदू लड़कों को मार दिया जाता है, बीच सड़क पीट दिया जाता है – कभी अंकित का गला सरेआम काट दिया जाता है, कभी आलोक का शव लटका मिलता है, कभी मुस्लिम गर्लफ्रेंड के सामने ही माँ-बहन की गाली देकर बीच सड़क पीटा जाता है।