मध्य प्रदेश के इंदौर से फिल्मी अंदाज में 40 तोला सोना और लाखों रुपए ठगने का मामला सामने आया है। राज महल कॉलोनी में रहने वाले डॉ. गणेश उदासी ने पुलिस में ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में तीन ठग डॉक्टर के पास मरीज बनकर आए थे। इनमें से एक ने डॉक्टर से बीमार होने की बात कही। शातिर ठग डॉक्टर को अपने जाल में फँसाने के लिए तीन दिन तक लगातार क्लिनिक पर आते रहे। डॉक्टर का विश्वास जीतने के बाद उन लोगों ने डॉक्टर से कहा कि उनके पास पुराने जेवरात हैं और उन्हें इस समय पैसों की सख्त जरूरत है। ठगों ने डॉक्टर से उसे बेचवाने के लिए कहा। इसके बाद डॉक्टर ने उन लोगों की मदद करने के लिए उसे अपने परिचित के पास बिकवा देने की बात कही।
ठगों ने डॉक्टर से कहा कि उनके पास करीब एक किलो सोने के पतरे हैं। पतरे बिकने में दिक्कत आएगी, लेकिन जेवर आसानी से बिक जाएँगे। ठगों ने यह भी कहा कि यदि एक किलो सोना के बदले आधा भी मिल जाए तो काम हो जाएगा। यह सुनकर डॉक्टर के मन में लालच आ गया। इसके बाद डॉक्टर ने उनका सोना लेकर खुद पैसे देने की बात कही।
ठगों से डॉक्टर ने असली सोना समझकर नकली सोना ले लिया और उसके बदले में अपने घर में रखा 40 तोला सोने का जेवर और 11 लाख कैश दे दिए। ठगों ने कहा कि जब यह बिक जाए तो आप अपना सोना वापस ले लेना। डॉक्टर को भी कहाँ पता था कि वह जिन पर विश्वास कर रहा वही उससे विश्वासघात करेंगे। बस फिर क्या था ठगों के हाथों में जैसे ही असली सोना आया वह उसे लेकर फरार हो गए।
जब डॉक्टर को पता चला कि वह ठगी का शिकार हो गया है, तो उसने नकली सोने के जेवरों की जाँच कराई। जाँच में वह सोना नहीं पीतल निकला। टीआई का कहना है कि आरोपितों ने पीतल के जेवरात पर सोने की पाॅलिश कर रखी थी। पुलिस इन लोगों का पता लगाने में जुट गई है।
अयोध्या में भव्य दीपोत्सव मनाया गया। अयोध्या 12 लाख दीयों से जगमग हुई। राम की पैड़ी पर 9 लाख दीये जलाए गए, अयोध्या के बाकी हिस्सों में 3 लाख दीये जलाए गए। इससे भगवान श्रीराम का धाम आज गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हो गया।
यूपी के पर्यटन विभाग और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से अयोध्या में दीपोत्सव 2021 के दौरान दीये के सबसे बड़े प्रदर्शन के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान बनाया।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से अयोध्या में दीपोत्सव 2021 के दौरान दीयों का सबसे बड़ा प्रदर्शन करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। pic.twitter.com/9X8K8elc1e
सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, “धर्मनगरी श्री अयोध्या जी में माँ सरयू का तट अलौकिक प्रकाश से जीवंत हो उठा है। सत्य, स्नेह एवं जगत कल्याण की भावना से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आज सर्वाधिक दीपों के प्रज्ज्वलन का विश्व रिकॉर्ड बना है। यह रिकॉर्ड प्रभु श्री राम के भक्तों की आस्था एवं विश्वास का सुफल है।”
धर्मनगरी श्री अयोध्या जी में माँ सरयू का तट अलौकिक प्रकाश से जीवंत हो उठा है।
सत्य, स्नेह एवं जगत कल्याण की भावना से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आज सर्वाधिक दीपों के प्रज्ज्वलन का विश्व रिकॉर्ड बना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दियों को लेकर जानकारी साझा करते हुए कहा, “आज हमने 9 लाख दीप राम की पैड़ी और 3 लाख दीप अयोध्या के मठ और मंदिरों में जगमगाए हैं। इससे भी बड़ी संख्या में दीप जगह-जगह जले हैं।”
आज हमने 9 लाख दीप राम की पैड़ी और 3 लाख दीप अयोध्या के मठ और मंदिरों में जगमगाए हैं। इससे भी बड़ी संख्या में दीप जगह-जगह जले हैं: अयोध्या में सरयू घाट पर दीपोत्सव कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री #Diwalipic.twitter.com/Y2qzSGPac4
भगवान राम की इस नगरी की सुंदरता सभी का मनमोह रही है। सरयू नदी के किनारे लाखों दीये एक साथ जगमगा रहे हैं। इस कार्यक्रम के दौरान शानदार आतिशबाजी भी हुई और लेजर शो का भी आयोजन किया गया।
बता दें कि सरयू घाट पर अद्भुत और भव्य नजारा देखने को मिल रहा है। शाम होते ही रंग बिरंगी लाइटों से घाट जगमगाने लगा। साथ ही जोरदार आतिशबाजी समेत कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई केंद्रीय मंत्री अयोध्या में मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुसम्ही जंगल स्थित वनटाँगिया गाँव जंगल तिकोनिया नम्बर 3 में हर साल दीपावली मनाते हैं। गोरखपुर में स्थित यह एक ऐसा गाँव है, जहाँ ‘योगी बाबा’ के नाम पर दीप जलाए जाते हैं। इस गाँव के लोगों को दिवाली का बेसब्री इंतजार रहता है। इस बार मुख्यमंत्री योगी इस गाँव के लोगों के साथ दिवाली मनाएँगे। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिलाधिकारी विजय किरण आनंद, सीडीओ इंद्रजीत और अन्य विभाग के अधकारियों ने जंगल तिनकोनिया नंबर तीन वनटांगिया गाँव का दौरा किया।
इस गाँव में ‘योगी बाबा’ के नाम पर दीये जलाने की कुछ ऐसी परंपरा है कि लोग कहते हैं कि बाबा (सीएम योगी) नहीं आएँगे तो दीये नहीं जलाए जाएँगे। करीब 25 साल पहले क्षेत्र के सांसद और गोरक्ष पीठाधीश्वर के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वनटाँगियों के साथ दिवाली मनाने की परंपरा शुरू की थी। यह परंपरा आज भी जारी है और मुख्यमंत्री की दिवाली मनाने की शुरुआत इस बस्ती से ही होती है।
वनटाँगिया के लोगों को वंचितों में भी वंचित माना जाता है। यह समुदाय 100 साल से भी अधिक समय तक उपेक्षित और बदहाल रहा। इसे समाज के मुख्यधारा से जोड़ने और इनके विकास के लिए किये गए कार्यों का श्रेय योगी आदित्यनाथ को जाता है। इन लोगों के विकास के लिए मुख्यमंत्री योगी ने जमीनी स्तर से काम किये हैं। यही कारण है कि इस दिवाली में भी प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान अपने संरक्षक का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लोग सीएम योगी के स्वागत के लिए गाँव को सजाने-सँवारने में जुटे हैं।
वनटाँगिया की कहानी ब्रिटिश काल से शुरू होती है। जब अंग्रेज रेल पटरियाँ बिछा रहे थे, उस समय जंगलों से साखू के पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई हुई। इसके एवज में अंग्रेजों ने साखू ने के नए पौधों को रोपने और उनकी देखरेख करने के लिए गरीब और भूमिहीन लोगों को जंगल में बसाया। साखू के जंगल को बसाने के लिए बर्मा (म्यांमार) की ‘टाँगिया विधि’ का इस्तेमाल किया गया था। इसलिए इनलोगों का नाम वनटाँगिया पड़ गया।
वर्ष 1918 में वनटाँगियों की कुसम्ही जंगल के 5 इलाकों- जंगल तिनकोनिया नम्बर 3, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी और चिलबिलवा में बस्तियाँ बसीं। इसी के आसपास महराजगंज के जंगलों में भी अलग-अलग स्थानों पर इनके 18 गाँव बसे। आजादी के बाद इस समुदाय का जीवन पहले जैसा ही रहा और इन्हें देश की नागरिकता तक नहीं मिली। इन्हें जंगल में झोपड़ी के अलावा किसी अन्य निर्माण की भी इजाजत नहीं थी। पेड़ के पत्तों को तोड़कर बेचने और मजदूरी के सिवाय इनके पास जीवकोपार्जन के लिए कोई अन्य साधन नहीं था। इसके अलावा, वन विभाग की तरफ से बेदखली की कार्रवाई का भी डर बना रहता था।
जब 1998 में योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से पहली बार सांसद बने, तब वनटाँगिया समुदाय की हालत पर संज्ञान लिया। वनटांगियों को नक्सली बनाने के दिशा में लगे देशद्रोही तत्वों पर लगाम लगाने के लिए उन्होंने इन बस्तियों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने का संकल्प लिया। इस काम में उनके नेतृत्व वाली महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद ने अग्रणी भूमिका निभाई। परिषद द्वारा संचालित एमपी कृषक इंटर कॉलेज और एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ और गोरखनाथ मंदिर की तरफ से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ अस्पताल की मोबाइल मेडिकल सेवा इसके आगे आई। शिक्षा और चिकित्सा के लिए तिनकोनिया नम्बर 3 वनटांगिया गांव में वर्ष 2003 में शुरू की गई सेवा 2007 तक परिलक्षित होने लगी।
वर्ष 2009 में जंगल तिकोनिया नम्बर 3 में योगी आदित्यनाथ के सहयोगी वनटाँगिया बच्चों के लिए एस्बेस्टस शीट डालकर एक अस्थायी स्कूल का निर्माण कर रहे थे। इस दौरान वन विभाग ने इसे अवैध बताकर एफआईआर दर्ज कर दी। आज यह स्कूल हिंदू विद्यापीठ के नाम से जाना जाता है। इसी साल से मुख्यमंत्री योगी ने वनटाँगियों के साथ दिवाली मनाने की परंपरा शुरू की, जो आज भी जारी है।
मोदी सरकार ने दीवाली पर नागरिकों को बड़ा तोहफा दिया है। पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई गई है, जिससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। केंद्र सरकार ने बुधवार (3 नवंबर, 2021) को पेट्रोल पर 5 रुपए और डीजल पर 10 रुपए एक्ससीडे ड्यूटी घटाने का निर्णय लिया। डीजल पर पेट्रोल से ज्यादा एक्साइज ड्यूटी इसीलिए घटाई गई है, ताकि किसानों को खेती के मौसम में राहत मिल सके। कृषि कार्यों में डीजल का ईंधन के रूप में काफी इस्तेमाल किया जाता है।
साथ ही राज्यों को भी कहा गया है कि वो पेट्रोल-डीजल पर VAT घटा कर आम लोगों को राहत दें। केंद्र सरकार ने बताया है कि पेट्रल-डीजल पर दी गई राहत गुरुवार, यानी दीवाली के दिन से ही लागू हो जाएगी। बाजार कंपनियों ने भी बुधवार को पेट्रोल और डीजल के दाम आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया। फ़िलहाल दिल्ली में पेट्रोल का दाम 110.04 रुपए है, वहीं डीजल 98.42 रुपए प्रति लिटर है। वहीं मुंबई में पेट्रोल के दाम 115.85 और डीजल के दाम 106.62 रुपए प्रति लिटर है।
On eve of #Diwali, Government of India announces excise duty reduction on petrol and diesel. Excise duty on Petrol and Diesel to be reduced by Rs 5 and Rs 10 respectively from tomorrow pic.twitter.com/peYP1fA4gO
सभी मेट्रो शहरों में मुंबई में ही पेट्रोल-डीजल का मूल्य सबसे ज्यादा है। केंद्र ने कहा है कि आज के इस निर्णय से अर्थव्यवस्था की साईकल को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार ने किसानों की भी तारीफ की है, जिनकी मेहनत के कारण अर्थव्यवस्था टिकी रही और कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान भी वो काम में लगे रहे। रबी मौसम में किसानों को अब बड़ी राहत मिलेगी। वैश्विक स्तर पर हाल ही में कच्चे तेल के दाम काफी बढ़े हैं, जिसका असर भारत में भी हुआ था।
अयोध्या में भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने गरीबों के मुफ्त अनाज की योजना नवंबर से बढ़ाकर होली तक कर दी है। अब गरीबों को 1 किलो खाद्य तेल, 1 किलो दाल और 1 किलो नमक भी मुफ्त में दिया जाएगा।
मुफ्त राशन वाली योजना को होली तक बढ़ाया जाएगा। 15 करोड़ लोग हर महीने इसका लाभ लेंगे। अंत्योदय कार्ड धारक को राशन में 35 किलो चावल, गेहूं के साथ-साथ दाल, तेल और नमक भी मिलेगा। अंत्योदय कार्ड धारक को हर महीने चीनी भी मिलेगीः मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath#DeepotsavInAyodhyapic.twitter.com/lLx7HA1P7N
पहले से सरकार गरीबों के लिए मुफ्त अनाज योजना चला रही है, जिसमें प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज दिया जाता है। इसका लाभ 15 करोड़ लोग हर महीने ले सकेंगे। सीएम ने कहा कि अंत्योदय कार्ड धारक को राशन में 35 किलो चावल, गेहूँ के साथ-साथ दाल, तेल और नमक भी मिलेगा। अंत्योदय कार्ड धारक को हर महीने चीनी भी मिलेगी।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत मई से नवंबर माह तक निःशुल्क राशन वितरित किया जाना है।
किंतु कोरोना अभी समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए @UPGovt ने निर्णय लिया है कि इस योजना को हम होली तक लेकर जाएंगे।
बता दें कि कोरोना काल के दौरान शुरू हुए राशन वितरण में 122 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न बाँटा गया। यूपी सरकार की ओर से 2339556.740 मीट्रिक टन व पीएमजीकेएवाई में 9853889.085 मीट्रिक टन राशन बाँटा जा चुका है। प्रदेश में करीब 33705755 राशन कार्ड धारक हैं। प्रदेश सरकार ने 80 हजार कोटेदारों के माध्यम से राशन हर गरीब व बेसहारा लोगों तक राशन पहुँचाने का काम किया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत चार चरणों में राशन वितरण किया गया।
इसमें प्रथम चरण में अप्रैल से जून 2020 में 140603565 लाभार्थियों को 2085003 मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया गया। इसी तरह दूसरे चरण में जुलाई से नवंबर 2020 में 3536373.863 मीट्रिक टन गेहूँ व चावल का वितरित किया गया। तीसरे चरण मई व जून 2021 में 14 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 1413984.816 मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया गया। सरकार की ओर से जुलाई से अक्तूबर में अब तक 96 प्रतिशत लाभार्थियों तक फ्री राशन पहुँचाने का काम किया। चार महीने में सरकार की ओर से 2818527.091 मीट्रिक टन खाद्यान्न लोगों तक पहुँचाया।
31 साल पहले रामभक्तों और कार सेवकों पर चलाई गई थी गोलियाँ
दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 31 साल पहले अयोध्या में रामभक्तों और कार सेवकों पर गोलियाँ चलाई गई थीं। जय श्रीराम का जाप करना और राम मंदिर के समर्थन में आवाज उठाना आपराध माना जाता था। उन्होंने कहा कि अगली बार जब कार सेवा होगी, तो भगवान राम और भगवान कृष्ण के भक्तों पर गोलियों की नहीं बल्कि फूलों की बारिश की जाएगी। राम मंदिर निर्माण को लेकर सीएम योगी ने कहा कि 2023 तक पूरा कर मंदिर का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
भारत की कोरोना कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंजूरी दे दी है। अब इस कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल दुनिया भर में हो सकेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेक्निकल एडवाइजरी समूह की ओर से यह सिफारिश सिर्फ 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए की गई है। बताया जा रहा है कि डब्ल्यूएचओ के टेक्निकल एडवाइजरी समूह (TAG) ने भारत बायोटेक की इस वैक्सीन के लिए इमरजेंसी यूज लिस्टिंग (EUL) की सिफारिश कर दी थी। इसके बाद संगठन ने यह फैसला लिया।
Glad to see one more vaccine, #Covaxin, being granted WHO emergency use listing. The more products we have to fight #COVID19, the better: WHO DG Tedros Adhanom Ghebreyesus pic.twitter.com/t6czetH2OT
दरअसल, टीएजी एक स्वतंत्र सलाहकार पैनल है, जो डब्लूएचओ को सिफारिशें प्रदान करता है। यह बताता है कि क्या EUL प्रक्रिया के तहत किसी कोरोना वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दी जा सकती है या नहीं? विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने बयान में कहा, ”डब्ल्यूएचओ द्वारा दुनियाभर के नियामक विशेषज्ञों से बने तकनीकी सलाहकार समूह ने यह निर्धारित किया है कि कोवैक्सीन टीका कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए संगठन के मानकों को पूरा करता है। इस वैक्सीन का लाभ जोखिम से कहीं अधिक है और वैक्सीन का उपयोग दुनिया भर में किया जा सकता है।”
Technical Advisory Group of WHO recommends Emergency Use Listing status for Bharat Biotech’s Covaxin: Sources
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने डब्ल्यूएचओ से आपात इस्तेमाल की अनुमति मिलने पर बधाई देते हुए ट्वीट किया, ”यह समर्थ नेतृत्व की निशानी है, यह मोदी जी के संकल्प की कहानी है, यह देशवासियों के विश्वास की जुबानी है, यह आत्मनिर्भर भारत की दिवाली है। मेड-इन-इंडिया वैक्सीन को इमरजेंसी यूज लिस्टिंग (EUL) प्रदान करने के लिए डब्ल्यूएचओ का धन्यवाद।”
यह समर्थ नेतृत्व की निशानी है, यह मोदी जी के संकल्प की कहानी है, यह देशवासियों के विश्वास की ज़ुबानी है, यह आत्मनिर्भर भारत की दिवाली है।
Thanking @WHO for granting emergency use listing ( EUL) to Made-in-India #Covaxin
वहीं, भारत बायोटेक ने कहा कि डब्ल्यूएचओ से मान्यता मिलने के बाद देश अब कोवैक्सीन के आयात और प्रशासन के लिए अपनी नियामक अनुमोदन प्रक्रियाओं में तेजी ला सकते हैं।
उत्तर प्रदेश स्थित राम की नगरी अयोध्या में भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर लिखा, ‘दीप विकास का, उजियारा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का’। अयोध्या राममय है। बुधवार (3 नवंबर 2021) को 5वें दीपोत्सव पर सरकार अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ेगी।
पूरे अयोध्या में 12 के दीप के साथ सरयू के किनारे राम की पौड़ी से जुड़े 32 घाट पर करीब 9.51 लाख दीप जलाए जा रहे हैं। वालंटियर्स को 30 मिनट में दीपों को जलाना है। इसे गिनीज बुक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। उधर, CM योगी माँ सरयू की आरती कर रहे हैं।
केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि अयोध्या विश्व के सर्वाधिक पर्यटन वाली नगरी में से एक बनेगी। यहाँ जल्द ही भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर तैयार होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव से पहले कहा कि 30 अक्टूबर 1990 और 2 नवंबर 1990 को अयोध्या में राम भक्तों पर गोलियाँ चलाई गई थीं। तब ‘जय श्रीराम’ बोलना और राम मंदिर की बात करना अपराध होता था, लेकिन लोकतंत्र की ताकत कितनी मजबूत होती है कि जो 31 वर्ष पहले राम भक्तों पर गोलियाँ चला रहे थे, वे आज जनता की ताकत के सामने झुके हैं।
सीएम योगी ने कहा, “अब लगता है कि अगर आप कुछ वर्ष और इस तरह से ले चले तो वे और उनका खानदान लाइन में खड़े होते दिखाई देंगे। अगली कारसेवा जब होगी तब गोली नहीं चलेगी, तब रामभक्तों, कृष्णभक्तों पर पुष्प वर्षा होगी। यही लोकतंत्र की ताकत है।”
सीएम ने कहा कि पहले प्रदेश का पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री पर खर्च होता था, आज मंदिरों के पुननिर्माण और सुंदरीकरण पर खर्च हो रहा है। जिनको कब्रिस्तान प्यारा था, वो जनता का पैसा वहाँ लगाते थे और जिन्हें धर्म, संस्कृति प्यारी है, वो धर्म-संस्कृति के उत्थान के लिए उस पैसे का उपयोग कर रहे हैं।
दीपोत्सव कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में 661 करोड़ रुपये की 50 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
सीएम योगी ने इस दौरान कहा, “अयोध्या अब एक नई सांस्कृतिक नगरी के रूप में दुनिया के अंदर छानी चाहिए। दुनिया की कोई ताकत 2023 तक अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण को नहीं रोक सकती।” वहीं, वियतनाम, केन्या, त्रिनिदाद और टोबैगो के राजदूतों ने भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के किरदार निभाने वाले कलाकारों का राजतिलक किया।
पेट्रोल-डीजल के महँगे दामों से आम आदमी की जेब पर खासा असर पड़ा है, लेकिन अब आपको इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि बिहार के होनहार युवाओं ने एक अनोखा फॉर्मूला ईजाद किया है। उन्होंने प्लास्टिक कचरे से ईंधन तैयार किया है। इससे ना केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य को भी खराब होने से बचाया जा सकेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के मुजफ्फरपुर के युवाओं की एक टीम ने कूड़े में फैंके जाने वाले प्लास्टिक से पेट्रोल और डीजल तैयार किया है। मुजफ्फरपुर के खरौना गाँव में इसका एक प्लांट 2 नवंबर से शुरू हो गया है। इस प्लांट पर 8 युवाओं की टीम ने मिलकर प्लास्टिक कचरे से बायो पेट्रोल और डीजल बनाने का काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस टीम का नेतृत्व भारतीय सांख्यिकी संस्थान के छात्र आशुतोष मंगलम कर रहे हैं। उनके साथ इस टीम में शिवानी, सुमित कुमार, अमन कुमार और मोहम्मद हसन आदि शामिल हैं। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर 2019 में इस टेक्नोलॉजी का ट्रायल किया था और सफलता मिलने पर 2020 में इसका पेटेंट कराया।
इस प्लांट में एक लीटर बायो डीजल तैयार करने की लागत 62 रुपए आएगी। वहीं बात करें इसकी बिक्री तो यह 70 रुपए प्रति लीटर पर की जा सकेगी। ये यूनिट रोजाना 200 किग्रा प्लास्टिक कचरे से 175 लीटर बायो पेट्रोल-डीजल तैयार करेगी। प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल और डीजल बनाने की इस प्रोसेस का पेटेंट ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी के नाम पर है।
बता दें कि केंद्र सरकार की योजना पीएमईजीपी (PMEGP) के तहत 25 लाख रुपए लोन लेकर ये फैक्टरी खोली गई है। जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक पीके सेना ने कहा कि इस इकाई की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की जा चुकी है। एमडीएम गणेश दत्त शर्मा ने बताया कि अनुदानित ब्याज पर इकाई खोलने के लिए लोन उपलब्ध कराया गया है। इससे कई लोगों को रोजगार मिलेगा।
भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में दीवाली के कार्यक्रमों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जनसभा को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि पाँच वर्ष पहले जब अयोध्या में दीपोत्सव की चर्चा सामने आई थी, तो अयोध्या में ही आज के दिन ये आयोजन नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार ने तय किया कि अगर अयोध्या को उसकी नई पहचान दिलवानी है, तो दीपोत्सव कार्यक्रम उसका एक माध्यम बनेगा। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा “मुझे याद है कि 2017, 2018, 2019 में भी एक ही नारा गूँज रहा था- ‘योगी जी एक काम करो, मंदिर का निर्माण करो’ – मैं तब भी कह रहा था कि मंदिर निर्माण के लिए आधारशिला तैयार की जा रही है। 31 साल पहले अयोध्या में क्या हो रहा था? 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को रामभक्तों पर बर्बर तरीके से गोलियाँ चलाई गई थीं। बर्बर लाठीचार्ज हो रहा था। तब ‘जय श्रीराम’ बोलना अपराध माना जा रहा था।”
सपा पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग 31 साल पहले रामभक्तों पर गोलियाँ चला रहे थे, वो आपकी ताकत के आगे झुके हैं। उन्होंने तंज कसा कि अब लगता है कि अगर कुछ और वर्ष आप इसी तरीके से ले चले, तो अगली कारसेवा के लिए वो और उनका पूरा खानदान लाइन में लगा होगा। सीएम योगी ने कहा, “आप देखना कि अगर अगली कारसेवा होगी, तो गोली नहीं चलेगी। रामभक्तों व कृष्णभक्तों पर पुष्पों की वर्षा होगी”
सीएम योगी ने आगे कहा, “पिछली सरकारों में ये पैसा कब्रिस्तान की दीवार बनाने में खर्च होता था, आज मंदिरों के पुनर्निर्माण और सुंदरीकरण पर खर्च हो रहा है। जिन्हें कब्रिस्तान प्यारा था, वो जनता का पैसा वहाँ लगाते थे। जिन्हें धर्म और संस्कृति प्यारी है, वो पैसा उनके उत्थान के लिए लगा रहे हैं। अयोध्या में जब भव्य श्रीराम मंदिर बनेगा, उसके साथ ही अयोध्या देश व दुनिया की सबसे अच्छी धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी होगी। पहले लोग बोलते थे, परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। 31 साल पहले हुआ था, वह मंजर कोई रामभक्त और कोई अयोध्यावासी उसे कभी भूल नहीं सकता है।”
सीएम योगी ने कहा कि सबसे बड़ा है श्रीराम की मर्यादा के अनुरूप धैर्य, जिससे हमें सफलता मिली है। मुख्यमंत्री ने याद किया कि उन्होंने 2019 के कार्यक्रम में भी मैंने यही अनुरोध किया था कि धैर्य के साथ इंतजार करिए, अयोध्या में वह सब होगा जो आपकी भावनाएँ हैं। कई बड़े ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुफ्त राशन वाली योजना को होली तक बढ़ाया जाएगा। 15 करोड़ लोग हर महीने इसका लाभ लेंगे। साथ ही अंत्योदय कार्ड धारक को राशन में 35 किलो चावल, गेहूँ के साथ-साथ दाल, तेल और नमक भी मिलेगा।
उन्होंने ऐलान किया कि अंत्योदय कार्ड धारक को हर महीने चीनी भी मिलेगी। सीएम ने याद दिलाया कि लोकतंत्र की ताकत कितनी मज़बूत होती है कि जो 31 वर्ष पहले राम भक्तों पर गोलियाँ चला रहे थे वो आज आपकी ताकत के सामने झुके हैं। इस कार्यक्रम को उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी सम्बोधित किया। बता दें कि आज शाम सरयू घाट पर आज 9 लाख दीयों से जगमगाएगा। वहीं जिले भर में 12 लाख दीये जलाए जाएँगे। सीएम योगी ने अयोध्या पहुँच कर दीपोत्सव कार्यक्रम का निरीक्षण किया।
पाँच दिवसीय हिंदू त्योहार तिहार के दूसरे दिन नेपाल के हिंदू भगवान भैरव के साथ जानवरों के जुड़ाव का जश्न मनाने के लिए कुत्तों की पूजा करते हैं। इस दिन पूजा करने वाले कुत्तों को माला पहनाते हैं और उन्हें तिलक लगाते हैं। इन कुत्तों को माँस, दूध, अंडे समेत उनके पसंदीदा भोजन कराया जाता है। इस दिन कुत्तों के खिलाफ किसी भी तरह के अपमानजनक कार्य में शामिल होना मना होता है। नेपालियों के बीच यह त्योहार बहुत प्रसिद्ध है। इसे दुनिया भर के आप्रवासी नेपाली भी मनाते हैं। इसके अलावा, कैनाइन अधिकारियों और आवारा कुत्तों को सम्मानित किया जाता है।
इस त्योहार से जुड़ी दो पौराणिक मान्यताएँ हैं। मान्यता है कि कुत्ते भगवान भैरव की सवारी हैं और भगवान को प्रसन्न करने के लिए कुत्ते की पूजा की जाती है। किंवदंतियों के अनुसार, मृत्यु के देवता भगवान यम के पास श्यामा और शरवर नाम के दो कुत्ते हैं, जो नरक के द्वार की रखवाली करते हैं। उपासकों का मानना है कि कुकुर तिहार के दौरान कुत्तों की पूजा करने से वे नरक की यातनाओं से उन्हें बचा लेंगे। यह मृत्यु को सकारात्मक तरीके से देखने में भी मदद करता है।
We have a festival called “Tihar” in Nepal, where we worship all kind of animals and goddesses. Today is “kukur tihar” where we show gratitude and love towards dogs make them eat delicious treats. ?? So happy kukur tihar to everyone from a fellow Nepalese army ????? pic.twitter.com/J87jlc1KIJ
इसके अलावा, महाभारत की कथा के अंतिम सर्ग में कुत्ते और मनुष्य के बीच संबंधों का उल्लेख किया गया है। कथा के अनुसार, एक कुत्ता पांडवों के साथ स्वर्ग की यात्रा पर गया था। द्रौपदी सहित सभी पांडव यात्रा पूरी नहीं कर सके और केवल युधिष्ठिर और कुत्ता ही स्वर्ग के द्वार पर पहुँचे। जब इन्द्र देव उन्हें स्वर्ग के द्वार पर लेने के लिए आए तो युधिष्ठिर ने कुत्ते को भी अपने साथ स्वर्ग जाने देने के लिए कहा। इस पर इन्द्रदेव ने यह कहते हुए मना कर दिया कि हर कोई स्वर्ग को प्राप्त नहीं कर सकता।
इसके बाद युधिष्ठिर ने यह कहते हुए स्वर्ग जाने से इनकार कर दिया कि कुत्ता ही उनके सुख और दुख का साथी था। इसलिए वह अपने जीवन के अंत में कुत्ते को नहीं छोड़ सकते। किसी भी परिस्थिति में निस्वार्थता और धार्मिकता की भावना के प्रति समर्पण से प्रसन्न होकर कुत्ते को स्वर्ग में प्रवेश करने की अनुमति दी गई। कहानी में कहा गया है कि कुत्ता वास्तव में स्वयं धर्म के देवता थे, जिन्होंने युधिष्ठिर के कुत्ते को अपने साथ स्वर्ग ले जाने की प्रतिज्ञा पर दृढ़ होने के बाद अपना असली रूप दिखाया। मान्यता यह है कि युधिष्ठिर के साथ स्वर्ग में कुत्ते के रूप में भगवान यम थे।
साभार: स्टोरी पिक
काग तिहार – होती है कौवे की पूजा
तिहार त्योहार के दौरान कौवे और काग की भी पूजा की जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि कौवे को भगवान यम का दूत माना जाता है। तिहार त्योहार के पहले दिन इनकी पूजा की जाती है, जिसे काग तिहार के नाम से भी जाना जाता है। त्योहार के दौरान कौवे को माँस और अनाज सहित भोजन दिया जाता है।
काग तिहार। साभार: Lordshivasdevotee.com
इसके अलावा, हिंदू धर्म में कौवे को पितरों का भी दूत माना जाता है। 16 दिनों तक चलने वाले हिंदू श्राद्ध परंपरा के दौरान पितरों की पूजा की जाती है। इस दौरान कौवे को खाना दिया जाता है। पितृ पक्ष में दुनिया भर के हिंदू अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं।
कुत्तों को सबसे पहले नेपाल में पालतू बनाया गया होगा
कुत्तों और नेपाल के लोगों के बीच आपसी बंधन हमें वापस उस प्वाइंट पर ले जाता है, जहाँ कुत्तों को सबसे पहले इंसानों ने पालतू बनाया था। एबीसी साइंस के अनुसार, एक आनुवंशिक अध्ययन से पता चला है कि कुत्तों को मध्य एशिया, वर्तमान में नेपाल और मंगोलिया में, सबसे पहले पालतू बनाया गया होगा।
साभार: न्यूज 18
कॉर्नेल विश्वविद्यालय में एडम बॉयको के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने 540 से अधिक गाँव के कुत्तों के साथ 165 नस्लों के लगभग 4,600 शुद्ध नस्ल के कुत्तों में 1,85,800 से अधिक आनुवांशिक चिह्नों का अध्ययन किया। यह अध्ययन 38 देशों में किया गया था। वैज्ञानिकों ने इसे “दुनिया भर में कैनाइन आनुवांशिक विविधता का अब तक का सबसे बड़ा सर्वेक्षण” माना है। वैज्ञानिकों ने कहा था, “हमें इस बात के पुख्ता सबूत मिलते हैं कि कुत्तों को मध्य एशिया के वर्तमान नेपाल और मंगोलिया के पास पालतू बनाया जाता था।”
नेपाल भूकंप बचाव कार्यों में कुत्तों की भूमिका
2015 में नेपाल में विनाशकारी भूकंप आया था, जिसमें शहर का शहर मलबे में तब्दील होने लगा था। उस दौरान कुत्ते गुमनाम नायक बनकर उभरे थे। बचाव कार्यों के दौरान विशेष डॉग इकाइयों को तैनात किया गया था, जो मलबे के नीचे जीवित पीड़ितों को खोजने में मदद करते थे।