केरल के त्रिशूर जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है। यहाँ शादी के एक दिन बाद लापता हुई महिला मदुरै में अपनी प्रेमिका के साथ मिली, जबकि पति को दिल का दौरा पड़ गया। यह अजीब घटना सोमवार (2 नवंबर 2021) को सामने आई। बताया जा रहा है कि पुलिस ने छह दिन की लंबी जाँच के बाद मदुरै से त्रिशूर के चेरपू के पास पझुविल में रहने वाली 23 वर्षीय महिला को उसकी प्रेमिका के साथ पकड़ा।
नवविवाहित महिला को जब उसके परिवार में वापस लाया गया, तो उसने खुलासा किया कि वह शादी से पहले ही अपनी प्रेमिका के साथ भाग जाना चाहती थी, लेकिन अपने माता-पिता से सोने के आभूषण लेने के लिए वह शादी का इंतजार कर रही थी।
त्रिशूर के चावक्कड़ (Chavakkad) के मूल निवासी पति ने शादी के एक दिन बाद यानी 25 अक्टूबर को लापता होने के बाद पुलिस में पत्नी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, पति-पत्नी चेरपू में एक कर्मिशयल बैंक देखने आए थे। बैंक विजिट के दौरान महिला ने अपने पति से मोबाइल फोन लिया और उसे अपने दोस्त से मिलने के बाद थोड़ी देर में वापस आने का वादा किया। इसके बाद वह टू व्हीलर लेकर उसके सामने से निकल गई और वापस नहीं लौटी।
पुलिस ने बताया कि पति ने शाम 5 बजे तक बैंक में इंतजार किया और बाद में उसने थाने में शिकायत दर्ज कराई। जाँच में पता चला कि महिला ने अपनी प्रेमिका के साथ उस दिन त्रिशूर से चेन्नई के लिए ट्रेन का टिकट बुक किया था, लेकिन इसके बजाए, दोनों ने बस से कोट्टायम की यात्रा की और अगले दिन चेन्नई के लिए ट्रेन में सवार हो गए। चेन्नई से दोनों मदुरै गईं और फिर वहाँ एक होटल में रुकीं।
पुलिस ने आगे बताया उन्होंने वहाँ एक दिन बिताया, लेकिन बाद में रेलवे स्टेशन पर खड़े टू व्हीलर को शिफ्ट करने के लिए त्रिशूर वापस लौट आईं। इसके बाद दोनों टू व्हीलर पर सवार होकर एर्नाकुलम गईं और वहाँ 10 दिनों का एडवांस भुगतान करके फिर से मदुरै की यात्रा की।
जाँच में यह भी सामने आया है कि लड़कियों ने मदुरै में कपड़ों की दुकान में नौकरी करके अपना जीवन बिताने की योजना बनाई थी। दिलचस्प बात यह है कि महिला की प्रेमिका भी नवविवाहित थी। वह भी शादी में मिले सोने के आभूषणों को लेकर घर से भागकर आई थी।
दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के 12 कॉलेजों के शिक्षकों को पाँच महीने से वेतन न दिए जाने का आरोप मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर लगा है। प्रोफेसर राकेश सिन्हा ने इस सम्बन्ध में उन्हें पत्र लिखा है और उनके घर के बाहर धरने का भी ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शुभकामनाएँ देते हैं, लेकिन इसी समय उनकी आँखों में 2000 परिवारों की बुझी हुई दीवाली भी है। राकेश सिन्हा ने बुधवार (3 नवंबर, 2021) को ये पत्र लिखा।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेज जो दिल्ली सरकार के अंतर्गत आते हैं, उन्हें पिछले 4-5 महीनों से वेतन नहीं मिला है। उन्होंने उदाहरण के लिए रूप में महाराजा अग्रसेन कॉलेज के 116 शिक्षकों, 75 कर्मचारियों और 7 सेवानिवृत्त लोगों का जिक्र किया। उन्होंने जानकारी दी कि दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज के 122 शिक्षकों और 80 कर्मचारियों को क्रमशः 4 एवं 3 महीने से वेतन नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ये AAP सरकार का उच्च शिक्षा पर सीधा प्रहार है।
प्रोफेसर व राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने अपने पत्र में लिखा है, “कॉलेजों को मृतप्राय कर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल निजी शिक्षण संस्थानों की मदद कर रहे हैं। आपकी सरकार ये सब सोचे-समझे साजिश के तहत कर रही है। राजगुरु कॉलेज को 3 वर्ष से भवन के रखरखाव के रुपए नहीं मिले हैं। दिल्ली सरकार के विज्ञापनों को देख कर लग रहा है कि आप लोगों का दर्द का उपहास उड़ा रहे हैं। आपकी संवेदनशीलता मर चुकी है, वरना आप 2000 परिवारों को अँधेरे में रहने और अपने हक़ से वंचित होने को बाध्य नहीं करते।”
दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेज,जो दिल्ली सरकार के अंतर्गत हैं,के शिक्षक एवं कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है। @ArvindKejriwal जी को इन परिवारों की दीपावली की भी चिंता नहीं है।विज्ञापन के लिए पैसे पर वेतन के लिए फंड की कमी !6 नवम्बर मेरा उनके घर पर मेरा सांकेतिक धरना। pic.twitter.com/RG9pLqokng
राकेश सिन्हा ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्होंने पिछले साल भी राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया था, परन्तु जिनका जनतंत्र में ही विश्वास नहीं है वो सदन में कही गई बातों की क्या परवाह करेंगे? उन्होंने अपील की कि जल्द ही इन कॉलेजों के बकाया फंड को जारी किया जाए और भविष्य में नियमित वेतन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने ऐलान किया कि त्वरित कदम नहीं उठाए गए तो वो 6 नवंबर, 2021 को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर सांकेतिक धरना देंगे। उन्होंने कहा कि ‘केजरीवाल की संवेदनहीनता’ को वो जगाने की कोशिश करेंगे।
बता दें कि ‘दिल्ली गवर्नमेंट टीचर्स एसोसिएशन (DGTA)’ भी दिल्ली सरकार द्वारा फंडेड कॉलेजों के शिक्षकों को समय पर वेतन न मिलने से नाराज़ है। साथ ही कॉलेजों को ग्रांट देने का जो उन्होंने वादा किया था, उसे भी पूरा नहीं किया गया है। DUTA ये मामला UGC के समक्ष भी था चुका है। त्योहारों के मौसम में रुपए न मिलने के कारण शिक्षकों के परिवारों को खासी परेशानी हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि वो पहले से ही कोरोना की मार झेल रहे हैं।
छोटी दीपावली के मौके पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ आज (3 नवंबर 2021) अयोध्या पहुँचे हैं। दरअसल अयोध्या में आज भव्य दीपोत्सव का आयोजन है। आज शाम सरयू घाट पर आज 9 लाख दीयों से जगमगाएगा। वहीं जिले भर में 12 लाख दीये जलाए जाएँगे। सीएम योगी ने अयोध्या पहुँच कर दीपोत्सव कार्यक्रम का निरीक्षण किया। उन्होंने अयोध्या में दिवाली समारोह में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता का किरदार निभाने वाले कलाकालों को माला पहनाई। इस साल दीपोत्सव कार्यक्रम में 3-D होलोग्राफिक शो और प्रोजेक्शन मैपिंग भी होगी।
12 लाख दीयों को जलाकर दीपमाला पूरे जगत को प्रकाशित कर रही है, ये केवल एक विश्व रिकॉर्ड नहीं है बल्कि पूरे विश्व को भगवान राम की मर्यादा का संदेश है: अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जी.किशन रेड्डी https://t.co/yUoSs1LNXS
दीपोत्सव समारोह के निरीक्षण के दौरान सीएम योगी के साथ केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी भी मौजूद रहे। दोनों ने अयोध्या में होने वाले दीपोत्सव समारोह से पहले निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ऐलान किया कि 2030 तक अयोध्या दुनिया की सबसे बड़ी पर्यटक नगरी बन जाएगी। उन्होंने कहा कि हिंदी और हिंदू ने हमें एक-दूसरे से जोड़ा है, राम मंदिर आंदोलन हमारे लिए सीख है।
#WATCH उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में भगवान राम और माता सीता का किरदार निभा रहे कलाकारों का सांकेतिक राजतिलक किया। pic.twitter.com/pwg5pCKSTo
अयोध्या में 5वें दीपोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। आज सुबह श्रीराम के अयोध्या आगमन को प्रतीकात्मक रूप में दिखाया गया। इस दौरान अयोध्या में भव्य शोभा यात्रा निकली गई। रामायण कार्निवल थीम पर 11 रथों वाली झाँकी निकाली गई। भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या पहुँचे। उन्हें हेलीपैड से रामकथा पार्क तक रथ से लाया गया। इस दौरान भगवान राम का राज्याभिषेक सीएम योगी ने किया। आज शाम को दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान पूरा सरयू घाट रोशनी से जगमगाएगा। राम की पैड़ी से जुड़े 32 घाट पर करीब 9 लाख दीप जलेंगे। इस दीयों को घाट पर बिछाने का काम पूरा हो चुका है।
हमारी सरकार ने अयोध्या में दीपोत्सव कार्यक्रम 5 वर्ष पहले शुरू किया था और तब से लगातार ये आयोजन अपनी नई ऊंचाईयों को छूता दिखाई दे रहा है। राम जन्म भूमि में भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ पर्यटन की ढेर सारी संभावनाएं बन के आई हैं, उन संभावनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी:UP CM pic.twitter.com/kUTBJXhFXV
इसके अलावा अयोध्या के राम कथा पार्क में रामायण चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। इस दौरान सीएम योगी समेत तमाम अतिथि वहाँ मौजूद रहे। सीएम योगी ने कहा, “हमारी सरकार ने अयोध्या में दीपोत्सव कार्यक्रम 5 वर्ष पहले शुरू किया था और तब से लगातार ये आयोजन अपनी नई ऊँचाईयों को छूता दिखाई दे रहा है। राम जन्म भूमि में भव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ पर्यटन की ढेर सारी संभावनाएँ बढ़ी हैं।” इसके साथ ही अयोध्या में आज 50 कल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। इसकी कुल लागत 661 करोड़ रुपए है।
उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में 661 करोड़ रुपये की 50 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। pic.twitter.com/7UxKYu7aqt
दीपोत्सव को लेकर रामनगरी में इस बार खासा उत्साह नज़र आ रहा है। पूरी अयोध्यानगरी और उसके मंदिर पिछले कई दिनों से रोशनी में जगमगा रहे हैं। आज लगभग 9 लाख दीयों की जगमगाहट पूरी दुनिया देखेगी। पर्यटन विभाग की ओर से रामजन्मभूमि परिसर समेत हनुमानगढ़ी, कनक भवन, दशरथ राजमहल, भरतकुंड, दशरथ समाधि स्थल व मखभूमि समेत सभी सार्वजनिक महत्व के स्थलों पर तीन लाख दीये जलाने का इंतजाम किया गया है। इन दीयों को जलाने के लिए अलग-अलग टीमें भी गठित की गई हैं।
माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर का दोगलापन एक बार फिर से उभर कर सामने आ गया है। दोगलेपन का ताजा शिकार ऑपइंडिया को बनाया गया है। मंगलवार, 2 नवंबर 2021 को ट्विटर ने Elle विवाद पर ऑपइंडिया द्वारा प्रकाशित एक संपादकीय कार्टून को हटा दिया। इसे हटाने के पीछे ट्विटर ने प्राइवेसी पॉलिसी के उल्लंघन का तर्क दिया है।
उक्त कार्टून को पहले ही ट्विटर ने हाइड कर दिया था, लेकिन बाद में ऑपइंडिया को कार्टून को हटाने के लिए मजबूर किया गया। ऑपइंडिया के अकाउंट को भी बंद कर दिया गया है। इस कारण से 14 घंटे से अधिक समय से आधिकारिक हैंडल से कोई ट्वीट नहीं किया जा सका है। हमने इस मुद्दे को ट्विटर के साथ उठाया, लेकिन ट्विटर की इस पर क्या प्रतिक्रिया होगी, इसको लेकर हमारा अनुमान उतना ही है, जितना कि आपका।
आप देखिए न 25 अक्टूबर 2021 को केरल में पहली बार गैर-हलाल रेस्तरां खोलने वाली महिला पर कथित तौर पर इस्लामवादियों द्वारा हमला किया गया था। उसे दूसरी ब्रांच नहीं खोलने के लिए भी धमकाया गया था। हालाँकि, अब केरल पुलिस ने कथित रूप से तुशारा अजीत नाम की उस महिला और उसके पति को ‘फर्जी आरोप लगाने’ के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
इस्लाम में गैर-हलाल खाना ‘हराम’ (अनुमति नहीं) है। हलाल के तहत जानवर को मारने की पूरी प्रक्रिया में केवल मुस्लिम ही शामिल हो सकते हैं और उस दौरान बिस्मिल्लाह का उच्चारण करना आवश्यक है। इस तरह, यह उन लोगों का आर्थिक बहिष्कार है, जो मुस्लिम नहीं हैं, क्योंकि हलाल खाद्य उद्योग में सिर्फ मुस्लिमों ही शामिल हो सकते हैं।
उपरोक्त कार्टून फैशन पत्रिका एली द्वारा अपने इंस्टाग्राम पेज पर साझा किए गए कार्टून की प्रतिक्रिया में था। कई नेटिजन्स ने दिवाली उत्सव के लिए साझा किए गए एली के विज्ञापनों और क्रिएटिव पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी अस्वीकृति व्यक्त की थी।
इनमें से कई ब्रांडों में उदास दिखने वाले मॉडल ऐसे घूर रहे थे, जैसे कि उन्हें उन्हें खाने की बीमारी है और वे अपने जीवन के विकल्पों पर सवाल उठा रहे हैं। इसको देखकर नेटिजन्स अपसेट थे, क्योंकि हिंदू त्योहार रोशनी, खुशी, हँसी और प्रसन्नता का त्योहार है। इस दिन लोग लोग नए कपड़े पहनते हैं, आभूषण, उपहार, मिठाई खरीदते हैं, दीये जलाते हैं, लक्ष्मी और भगवान राम का घर में स्वागत करते हुए रँगोली बनाते हैं। यह उत्सव का समय होता है। ऐसे समय में जब दुनिया चीन में कथित रूप से उत्पन्न कोरोना के कहर से धीरे-धीरे उबरने की कोशिश कर रही है, ऐसा लगता है कि उदास दिखने वाली ये मॉडल जीवंतता को खत्म कर रही हैं।
नीचे आप Elle का वो कार्टून देख सकते हैं जो उसने अपने इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट किया था। यह उन हिंदुओं को चित्रित करता है जो नहीं चाहते हैं कि दीवाली विरोधी कुछ नेटिजन्स की वजह से उनके त्योहार को ‘हिंसक’ प्रस्तुत किया जाए।
Elle की इंस्टाग्राम पोस्ट
मुगलों और दीवाली का रोमांटिककरण इसे हल्के ढंग में प्रस्तुत करने का बकवास मात्र है। मुगलों द्वारा हिंदू मंदिरों को नष्ट और लूटे जाने और बर्बर लोगों द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन के पर्याप्त ऐतिहासिक विवरण उपलब्ध हैं। यह बताता है कि हमारे त्योहार इसलिए नहीं बचे कि मुगलों ने इसे शानदार बनाया, बल्कि मुगल तो भारत से हिंदुओं और हिंदुत्व को पूरी तरह नष्ट करना चाहते थे।
बावजूद इसके ‘भगवा आतंक’ को चित्रित करने के लिए इन्हें मुफ्त पास मिलता है, लेकिन अगर आप इस्लामवादियों के असली रंग दिखाते हैं तो आप एक इस्लामोफोबिया से ग्रसित माने जाते हैं। एक महिला द्वारा गैर-हलाल रेस्तरां खोलने के लिए कट्टरपंथियों द्वारा हमले का आरोप लगाना ‘फर्जी समाचार’ के रूप में लेबल किया जाता है और इस पर रिपोर्टिंग करना ‘अभद्र भाषा’ है, लेकिन हिंदुओं की निंदा न केवल सामान्य है, बल्कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ दिखने के लिए प्रोत्साहित भी की जाती है।
जब इस बड़ी टेक कंपनी की बात आती है तो कट्टरपंथी इस्लामिस्ट के चरमपंथी बर्ताव के बारे में कहने पर आपको हेट स्पीच के दायरे में डाल दिया जाता है। इसीलिए ऑपइंडिया के संपादकीय कार्टून को ट्विटर पर ‘पॉलिसी वॉयलेशन’ के लिए फ्लैग किया जाता है और हमारा अकाउंट लॉक कर दिया जाता है, क्योंकि एक महिला इस्लामवादियों के हमले की बात कहती है और उम्माह के कारण आईएसआईएस के टॉयलेट टिश्यू को रोल करने वाले उसे झूठा बताते हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी हिंदुओं का मजाक उड़ाया था
हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब बिग टेक ने उम्माह के साथ अपनी एकजुटता दिखाने के लिए अपने घुटने टेके हैं। भारत के प्रति NYTimes के नस्लवादी रवैये को भी याद रखने की आवश्यकता है।
2014 में भारत मंगलयान मिशन के तहत पहले प्रयास में मंगल पर पहुँचने वाला दुनिया का पहला देश था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संरक्षण में सितंबर 2014 भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए ऐतिहासिक था। रोस्कोस्मोस (रूस), नासा (यूएसए) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (22 यूरोपीय सदस्य राज्यों) के बाद भारत की इसरो चौथी अंतरिक्ष एजेंसी थी, जो मंगलयान (मंगल ग्रह की कक्षा) के साथ मंगल पर पहुँची थी।
इस मिशन की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि यह सबसे किफायती मंगलयान था। इसे लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। भारत ने इस मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया था, क्योंकि चीन और जापान अपने मंगल मिशन में असफल रहे थे। लेकिन, NYTimes ने क्या किया? हैरानी की बात है कि इसने एक नस्लवादी संपादकीय कार्टून प्रकाशित किया।
न्यूयॉर्क टाइम्स का नस्ली कार्टून
कार्टून में धोती-पगड़ी पहने और बगल में भैंस लिए नंगे पाँव वाला एक आदमी ‘एलीट स्पेस क्लब’ के दरवाजे पर दस्तक देता नजर आ रहा है। तो ठीक है ना F*ck you, NYTimes और तुम्हारे कुलीन क्लब को। भले ही हँगामे के बाद तुमने माफी माँग ली हो।
हैरानी की बात यह है कि किसी ने इसे सेंसर नहीं किया और न ही उसे नस्लवादी कहा। इसी साल जुलाई में तो यह एक कदम आगे बढ़कर यह दुष्प्रचार के लिए हिंदू-विरोधी, मोदी-विरोधी उम्मीदवार को नौकरी के लिए खोजने लगा। अपने विज्ञापन में न्यूयॉर्क टाइम्स का विशिष्ट उद्देश्य उन उम्मीदवारों से अपील था, जो केंद्र सरकार के खिलाफ लिख सकें और एक ऐसे अभियान में योगदान दे सकें, जिसे केवल शासन परिवर्तन ऑपरेशन कहा जा सकता है।
खास बात यह है कि भारतीयों और उसमें भी हिंदुओं के खिलाफ इसके नस्लवाद को वैधता और स्वीकृति मिलती है। लेकिन अगर कोई तथाकथित शांतिपूर्ण समुदाय के बारे में थोड़ा असहज सच कहता है तो उसे ‘नफरत करने वाला’ करार दिया जाता है।
अफसोस की बात है कि यह नस्लवादी, अभिजात्य अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन घरानों के लिए कोई अनोखी बात नहीं है। भारत में तथाकथित उदारवादी भी हिंदुओं पर नफरत फैलाने के लिए काल्पनिक परिदृश्यों को अपनाते हैं, क्योंकि यह ‘सुरक्षित’ है और सभी हिंदू नेटिजन्स ऑनलाइन ही अपना गुस्सा जताते हैं। हिंदुओं का यह गुस्सा ही पूरे हिंदू समुदाय को असहिष्णु के रूप में चित्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया को मसाला देता है।
डिक्शनरी में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है धर्म और धार्मिक विचारों के प्रति उदासीन, अस्वीकृति या बहिष्कार, लेकिन यहाँ भारत में ‘धर्मनिरपेक्षता’ का एक त्वरित उदाहरण है। इसी तरह से एक ‘व्यंग्यवादी कार्टूनिस्ट’ सतीश आचार्य हैं। वह सत्ता से सच कहना तो पसंद करे हैं, लेकिन वह खुद की आलोचना सहन नहीं कर सकते। इसी साल जुलाई में जब भारत वैक्सीनेशन कार्यक्रम को तेज कर रहा था तो उस दौरान आचार्य ने यह बताने की कोशिश की थी कि भारत में वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट ज्यादातर हिंदुओं में है।
अपने कार्टून में आचार्य ने एक व्यक्ति को नर्स से पूछते हुए दिखाया कि टीके का ‘गोत्र’ क्या है, क्योंकि वह इसे अपनी कुंडली से मिलाना चाहता है। यह काफी मनोरंजक है, क्योंकि टीका लगवाने के दौरान किसी भी हिंदू से इस तरह के अनुरोध के बारे में कभी किसी ने नहीं सुना होगा। हालाँकि, एक समुदाय का एक वर्ग ऐसा भी है, जो वैक्सीन लेने में केवल इसके निर्माण के तरीके के कारण हिचकिचाहट दिखा रहा है। हालाँकि, आचार्य ने उन लोगों का मजाक नहीं उड़ाया जो टीकों के लिए हलाल का दर्जा चाहते थे। कोई भी शार्ली हेब्दो नहीं बनना चाहता।
हलाल वैक्सीन
इस्लामोफोबिया के रूप में असली इस्लामी आतंक का मुकाबला करने के लिए ‘हिंदू तालिबान’ और ‘हिंदू आतंक’ की कहानी बनाने का इन पर जबरदस्त दबाव है। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता यह तभी मान्य है, जब आतंकवादी इस्लामवादी हों। अन्य धर्म के लोगों द्वारा किए गए अपराधों के लिए अपनी धर्मनिरपेक्ष साख को बनाए रखने के लिए पूरे समुदाय को बदनाम किया जाता है।
यहीं पर ट्विटर जैसी बिग टेक कंपनियाँ इस कहानी को आगे प्रमोट करने में मदद करती हैं। अपने त्योहारों के सार्थकता के सवाल पर ऑनलाइन हिंदुओं के एक समूह द्वारा नाराजगी व्यक्त करने पर उन्हें असहिष्णु दंगाई के रूप में दोषी महसूस कराया जाता है, भले ही उन्होंने एक पत्थर भी ना फेंका हो और न ही एक भी ‘काफिर’ का सिर काटा गया हो।
जम्मू-कश्मीर में लेक एंड वाटरवेज डेवलपमेंट अथॉरिटी (LAWDA: Lakes and Waterways Development Authority) नाम का एक संगठन था। अब इसका नाम बदल दिया गया है। LAWDA की जगह नया नाम रखा गया है – लेक कंजरवेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (LCMA: Lake Conservation and Management Authority)
जम्मू-कश्मीर सरकार ने LAWDA का नाम बदल कर नया नाम LCMA रखने की इस प्रक्रिया को बुधवार (3 नवंबर 2021) को अंजाम दिया। यह प्रक्रिया जम्मू कश्मीर विकास अधिनियम, 1970 (1970 का अधिनियम XIX) की धारा 3 की उप-धारा (1) के तहत की गई।
आपको बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने LAWDA का नाम बदलने अथवा उसमें संशोधन करने की माँग की थी। सिंघवी ने अपनी माँग के संबंध में ट्वीट कर बताया था कि इसका संक्षिप्त नाम ‘कुछ और ही’ लगता है।
अभिषेक मनु सिंघवी के ट्वीट के बाद LAWDA शब्द वायरल हुआ था जबकि संगठन का पूरा नाम वास्तव में ‘जम्मू और कश्मीर झील और जलमार्ग विकास प्राधिकरण’ है। इसलिए, प्राधिकरण का संक्षिप्त रूप JKLAWDA होना चाहिए। दिलचस्प यह है कि संगठन की वेबसाइट LAWDA शब्द का उपयोग नहीं करती है। हालाँकि, संगठन का फेसबुक पेज पर इसे LAWDA लिखा गया है।
पत्थरबाजों और उपद्रवियों पर नकेल कसने के लिए मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार नए कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत संपत्तियों को नुकसान पहुॅंचाने वालों से ही सरकार वसूली करेगी। इसके लिए निजी एवं लोक संपत्ति नुकसान निवारण एवं वसूली अधिनियम जल्द लाए जाने की जानकारी बुधवार (3 नवंबर 2021) को राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दी। ऐसे मामलों के निपटारे के लिए अधिनियम के तहत ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा।
MP Govt is bringing ‘Prevention of Loss of Public and Private Property and Recovery of Damages Act’. Claim Tribunal will be formed for recovery of damages from those who pelt stones&damage govt/pvt properties. It’ll be formed as per location of the incident: MP HM Narottam Mishra pic.twitter.com/VvbZkj38gy
गृहमंत्री ने सिलसिलेवार ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है, “अब पत्थरबाजी, धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों के दौरान निजी एवं शासकीय संपति को नुकसान पहुँचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस संबंध में सार्वजनिक और प्राइवेट नुकसान की रोकथाम और नुकसान की वसूली के लिए अधिनियम लाया जाएगा। घटनास्थल के हिसाब से जुर्माने की रकम का आकलन किया जाएगा।”
उन्होंने आगे बताया कि इसमें सेवानिवृत्त डीजी स्तर के अधिकारी, सेवानिवृत्त आईजी स्तर के अधिकारी और सेवानिवृत्त सचिव शामिल होंगे। ट्रिब्यूनल के पास सिविल कोर्ट की शक्तियाँ होंगी। कलेक्टर ट्रिब्यूनल को सरकारी संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी देंगे और मालिक खुद निजी संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी देंगे।
निजी एवं लोक संपत्ति नुकसान निवारण एवं वसूली अधिनियम में क्लेम ट्रिब्यूनल के माध्यम से मौजूदा प्रावधानों को और सख्त किया जा रहा है।
बता दें कि क्लेम ट्रिब्यूनल के पास भू-राजस्व संहिता के तहत कई शक्तियाँ होंगी। इससे एक महीने के भीतर मामले का निस्तारण कर दिया जाएगा। किसी भी मामले की अपील केवल हाई कोर्ट में की जा सकेगी। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी उपद्रवियों पर सख्ती के लिए इस तरह के कदम उठा चुकी है।
कुछ ही समय में पूरे बॉलीवुड में अपनी जगह बना लेने वाली सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान अक्सर अपनी चुलबुली बातों की वजह मीडिया में चर्चा में रहती हैं। अभी हाल में उन्होंने हार्पर बाजार इंडिया को एक इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने अपने माता-पिता से जुड़ी एक बात बताई, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है, लेकिन सारा के ख्याली पुलाव ऐसे हैं कि उन्हें सुन किसी को भी हँसी आ जाए।
सारा ने इंटरव्यू में खुलासा किया कि जब वे बच्ची थीं तब उन्हें लगता था कि उनके माता-पिता गंदे लोग हैं। सैफ की फिल्म ओंकारा और अमृता सिंह की फिल्म कलयुग देखने के बाद वो मानने लगीं थी कि उनके पापा गाली देने वाले आदमी हैं और उनकी माँ तो सच में पोर्न साइट चलाती हैं।
Harper’s Bazaar India से बातचीत में सारा अली खान ने कहा, “ओंकारा और कलयुग देखने के बाद मैं काफी परेशान हो गई थी। मुझे लगता था कि मेरे पेरेंट्स गलत इंसान हैं। (हँसते हुए) तब मैं काफी छोटी थी। मैं सोचती थी कि मेरे पिता गंदी-गंदी भाषा बोलते हैं और माँ पोर्न साइट चलाती हैं। ये हँसी में नहीं था। उसी साल उन दोनों को बेस्ट एक्टर नॉमिनेशन मिला था, मैं सोचती थी कि ये सब क्या है।”
बता दें कि सारा अली खान सिर्फ 9 साल की थीं जब अमृता और सैफ एक दूसरे से अलग हुए। उन्होंने बताया कि उनके माँ-बाप का अलग होना इतना भी मुश्किल नहीं था। दोनों आज खुश हैं और पॉजिटिव स्पेस में हैं। वह कहती हैं, “मैं अपनी माँ को हँसते हुए, मजाक करते हुए, हरकतें करते हुए देखती हूँ, जो कि कई समय से गायब था। उन्हें ऐसे देखना बहुत सुकून दायक है।” उल्लेखनीय है कि सारा अली खान सोशल मीडिया पर अपने भाई इब्राहिम अली खान के साथ नॉक-नॉक जोक्स के लिए फेमस हैं। वो अक्सर हिंदी में तुकबंदी के प्रयास भी वीडियो में करती रहती हैं। आने वाले समय में वो डायरेक्टर आनंद एल राय की अतरंगी रे में नजर आएँगी।
गुजरात के सूरत जिले से चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के एक पेट्रोल पंप में पेट्रोल भरवाने के बहाने आए दो असामाजिक तत्वों ने वहाँ आग लगाने की कोशिश की। इसी कोशिश में 2 आरोपितों ने पेट्रोल टैंक पर एक जलता हुआ पटाखा फेंक दिया। हालाँकि, राहत की बात यह रही कि इससे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ।
સુરતમાં પેટ્રોલ પંપ સળગાવી દેવાનો નિષ્ફળ પ્રયાસ કરાયો. બે અજાણ્યા યુવકો પેટ્રોલ પુરાવા આવ્યા અને પેટ્રોલ પંપ પર ફટાકડા ફોડીને ભાગી ગયા. pic.twitter.com/klUQeBCDE9
रिपोर्ट के मुताबिक, यह वारदात सूरत जिले के राधे पेट्रोल पंप पर हुई। यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। इसमें स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि वहाँ स्कूटर पर सवार होकर दो लोग पेट्रोल भरवाने के लिए आते हैं। वो पेट्रोल भरवाते हैं और जैसे ही वहाँ से जाने लगे तो उनमें से पीछे बैठे आरोपित ने पटाखा वहीं पर फेंक दिया।
वीडियो फुटेज में ये भी देखा जा सकता है कि पेट्रोल पंप (पीली जैकेट) में स्कूटर लाने वाला व्यक्ति पेट्रोल भरकर पीछे की सीट पर शिफ्ट हो गया और भागने से पहले उसी ने इस वारदात को अंजाम दिया। हालाँकि, इससे पहले कि पटाखे में ब्लास्ट होता पंप के कर्मियों ने तुरंत उसे पाइप से दूर फेंक दिया। इस तरह से बड़ा हादसा टल गया। अगर पटाखा पाइप के पास फटता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
पेट्रोल पंप पर पटाखे फोड़े। साभार: News18 गुजराती
थाने में शिकायत दर्ज
इस घटना के बाद पेट्रोल पंप के प्रबंधक मोतीलाल चौधरी ने आरोपित के खिलाफ उमरा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने लोगों के जीवन को खतरे में डालने के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 285, 286, 336 और 114 के तहत मामला दर्ज किया है।
वाहन का नंबर सीसीटीवी कैमरे में कैद साभार: News18 गुजराती
बताया जा रहा है कि सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए बदमाशों की गाड़ी के नंबर के आधार पर पुलिस ने उन्हें तलाश कर लिया है और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपित की पहचान मोहम्मद इरफान कुरैशी के तौर पर हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन जिलों के अधिकारियों के साथ अलग से बैठक की, जहाँ कोरोना टीकाकरण का औसत कम है। उन्होंने महत्वपूर्ण सलाह दिए और मदद का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि दीवाली के कारण मुख्यमंत्रियों की व्यस्तताएँ समझ सकते हैं, लेकिन फिर भी उनकी उपस्थिति को लेकर वो आभारी हैं। उन्होंने कहा कि ये उन मुख्यमंत्रियों की प्रतिबद्धता को दिखाता है और इससे उन जिलों के अधिकारियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जहाँ कोरोना टीकाकरण का औसत कम है।
उन्होंने कहा कि आज आशा वर्कर्स से लेकर मेडिकल कर्मचारियों ने सुदूर इलाकों में भी कोरोना वैक्सीन पहुँचाई है। उन्होंने चेताया कि बीमारी और दुश्मन को कभी कम नहीं आँकना चाहिए, इसीलिए 100 करोड़ टीकाकरण के बाद अब हमें ढीला नहीं पड़ना है। उन्होंने कहा कि हमने नए-नए तरीके और तक़रीबों से टीकाकरण को सफल बनाया। उन्होंने जिलों को नए इनोवेटिव तरीकों और तकनीकों से टीकाकरण की प्रक्रिया में जान डालने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जहाँ शत-प्रतिशत टीकाकरण हुआ है, वहाँ भी कई चुनौतियाँ थीं।
उन्होंने कहा कि अब टीकाकरण से जुड़ा कई महीनों का अनुभव हमारे पास है और आशा वर्कर्स ने भी इस अज्ञात दुश्मन से लड़ने की लड़ाई सीख ली है। उन्होंने है गाँव, गाँव के मोहल्लों और कहीं 4 घर बाकी रह गए तो वो 4 घर – हमें अंत तक ध्यान देना है। उन्होंने कैम्प लगा कर और अलग-अलग रणनीति बना कर गाँव-कस्बों तक टीकाकरण पहुँचाने की सलाह दी। इसके लिए उन्होंने NCC-NSS के साथियों की मदद लेने को कहा और कहा कि महिला अधिकारी खास तौर पर वैक्सीनेशन में जी-जान से जुटी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस में जो महिलाएँ हैं, उन्हें भी एक सप्ताह के लिए इस कार्य में लगाया जाए तो परिणाम बेहतर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अफवाह और लोगों का भ्रम इसके मार्ग में बड़ी चुनौती है, लेकिन जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे तो पाएँगे कि कुछ कंसन्ट्रेटेड क्षेत्रों तक ही ये सीमित रहेगा। उन्होंने इस प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को जोड़ने, उनके वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डालने और धर्मगुरुओं से भी मदद लें। उन्होंने कहा कि सभी धर्मगुरु कोरोना टीकाकरण के हिमायती हैं और इसका विरोध नहीं करते।
उन्होंने बताया कि पोल फ्रांसिस से वेटिकन में उनकी अच्छी मुलाकात हुई और धर्मगुरु लोगों का संदेश टीकाकरण के मामले में जनता तक पहुँचाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को टीकाकरण सेंटर तक पहुँचाने पर अब तक जोर था, अब ‘हर घर टीका, घर-घर टीका’ नारे के साथ इसमें जुटना है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से उन जिलों के सफल मॉडल को अपनाएँ, जो आपके अनुकूल हो और जहाँ सफल टीकाकरण हुआ हो।
उन्होंने ऐसे अधिकारियों से सलाह लेने को कहा, जिन्होंने अपने क्षेत्रों में सफलतापूर्वक वैक्सीनेशन किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे जिलों से सीखना चाहिए कि वहाँ क्या तकनीक अपनाई गई। उन्होंने कहा कि आदिवासियों-वनवासियों को कोरोना टीके लगाने के लिए समाज के सम्मानित साथियों का साथ और सहयोग इस मामले में एक बड़ा फैक्टर है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे बिरसा मुंडा की जयंती आएगी तो माहौल बनाना है कि उनको श्रद्धांजलि के रूप में हम सब वैक्सीन लगवाएँगे।
उन्होंने कोरोना टीकाकरण से भावनात्मक चीजें जोड़ने की सलाह दी। उन्होंने याद दिलाया कि कई जगह ऐसे गीत बनाए गए हैं, जिनसे जागरूकता फैलाई जा रही है। उन्होंने पहली के साथ-साथ दूसरी डोज लगाने पर भी ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा कि लोगों को लगने लगता है कि जल्दी क्या है, लगा लेंगे। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े देशों में कोरोना खतरा पैदा कर रही है, हमारे देश में हम ये स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि हर राज्य को एडवांस में बताया जा रहा है कि अगले एक महीने में कितनी वैक्सीन दी जाएगी, जिससे उन्हें टारगेट की योजना बनाने में आसानी हो।
उन्होंने कहा, “आप वो दिन याद कीजिए, जब आपकी सरकारी सेवा का पहला दिन था। जिले के अधिकारी कल्पना करें, वो अपने प्रशिक्षण के बाद किस भावना और जज्बा के साथ सरकारी सेवा में आए थे। इससे आपके भीतर कुछ अच्छा करने, नया करने और समाज के वंचितों को अपना जीवन समर्पित करने का इससे बड़ा कोई अवसर नहीं होगा। इस भाव के साथ आपके साझा प्रयास से आपके जिलों में कोरोना टीकाकरण की स्थिति सुधर जाएगी। ‘हर घर दस्तक’ देकर टीका लगाएँ। देश के लोग भी खुद टीका लगवाने के अलावा रोज कुछ लोगों को टीका लगाने के लिए प्रेरित करें।”
छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेस विधायक शैलेष पांडेय ने बिलासपुर के कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर पर राजद्रोह का केस करने की माँग अपनी ही पार्टी के राज्य सरकार से की है। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इस संबंध में पत्र लिखा है। इसमें मित्तर पर राजद्रोह के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तुरंत हटाने की माँग की गई है। मामला राज्योत्सव के आयोजन से जुड़ा है। कॉन्ग्रेस विधायक का आरोप है कि कलेक्टर ने जन प्रतिनिधियों को अपमानित करने का काम किया है।
मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में पांडेय ने कहा है कि बिलासपुर कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का लगातार अपमान कर रहे हैं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि बिलासपुर जिले के प्रशासनिक अमले के मुखिया होने के नाते कलेक्टर ने बिलासपुर में आयोजित राज्योत्सव के कार्यक्रम में उनके (विधायक के) और महापौर, सभापति और जिला पंचायत अध्यक्ष के नाम का उल्लेख निमंत्रण-पत्र में नहीं किया और ना ही उन्हें विधिवत आमंत्रित किया। जबकि बिलासपुर के पड़ोसी जिलों में सभी जनप्रतिनिधियों को ससम्मान आमंत्रित किया गया था। पांडेय ने आरोप लगाया कि बिलासपुर कलेक्टर के तानाशाही रवैए के कारण बिलासपुर में सरकार और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का अपमान किया गया है।
उन्होंने कहा कि कलेक्टर बिलासपुर द्वारा किया गया यह कार्य जनता और सरकार का अपमान है जो कि राजद्रोह की श्रेणी में आता है। विधायक ने कलेक्टर मित्तर को तत्काल बिलासपुर से हटाने और उनके खिलाफ राजद्रोह की कार्रवाई करने की माँग उठाई है। उन्होंने पत्र में लिखा, “बिलासपुर कलेक्टर सारांश मित्तर आपकी (सीएम) सरकार और निर्वाचित प्रतिनिधियों का लगातार अपमान कर रहे हैं। आपके निर्देश के अनुसार, 1 नवंबर (छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस) पर सभी जिला मुख्यालयों में राज्योत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया था और राज्य सरकार ने व्यक्तियों की सूची भेजी थी जो समारोह के मुख्य अतिथि होने थे जबकि शेष अतिथियों का चयन संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा किया जाना था।”
शैलेश पांडेय द्वारा सीएम भूपेश बघेल को लिखा गया पत्र (साभार: सोशल मीडिया)
उन्होंने आगे कहा, “सत्तारूढ़ दल के विधायक को यहाँ समारोह में (अतिथि के रूप में) आमंत्रित नहीं किया गया था। यहाँ तक कि विपक्षी दल के विधायकों को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए था। मेयर, जिला पंचायत के अध्यक्ष जैसे अन्य जन प्रतिनिधियों को भी निमंत्रण पत्र (समारोह के अतिथि के रूप में) में उनके नाम का उल्लेख करके आमंत्रित नहीं किया गया था।” पांडेय ने कहा कि कलेक्टर ने आम लोगों को निमंत्रण पत्र भेजकर जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और अपमान किया है और कलेक्टर का यह कृत्य लोगों और सरकार का अपमान है और यह राजद्रोह की श्रेणी में आता है।
उल्लेखनीय है कि एक नवंबर को छत्तीसगढ़ का राज्य स्थापना दिवस था। इस मौके पर सभी जिलों में इसको लेकर कार्यक्रम होना था। चीफ गेस्ट कौन बनेगा ये लिस्ट शासन द्वारा सभी जिलो में भेजी गई थी। वहीं जिले में दूसरे गेस्ट का सलेक्शन कलेक्टर को करना था। विधायक ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस के दिन सरकार और विपक्ष के विधायकों को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरे जिलों में जनता के प्रतिनिधियों को सम्मान के साथ आमंत्रित किया गया, लेकिन यहाँ नहीं। बता दें कि संसदीय सचिव और मोहला-मानपुर के विधायक इंद्रशाह मंडावी बिलासपुर में राज्योत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे और उनके अलावा, निमंत्रण कार्ड पर किसी अन्य व्यक्ति का उल्लेख अतिथि के रूप में नहीं किया गया था।