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‘RSS आतंकवादी, तबाह कर देंगे’: महिला डॉक्टर ने बताया Pak की जीत का जश्न मनाने वालों को बेनकाब करने पर कैसे धमकाया

टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की हार के बाद देश में जश्न मनाने के कई वीडियो और पोस्ट सामने आ चुके हैं। ऐसा ही एक वीडियो कश्मीर से सामने आया था। इसमें मेडिकल कॉलेज के कुछ छात्र पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाते देखे गए थे। इस घटना को उजागर करने को लेकर महिला डॉक्टर मोनिका लांगे (Monika Langeh) और एमीबीबीएस की छात्रा अनन्या जामवाल को धमकी मिल रही है।

रिपब्लिक टीवी से बातचीत में डॉक्टर मोनिका लांगे ने बताया, “हाल ही में भारत-पाकिस्तान मैच के बाद मुझे एक वीडियो मिला, जिसे देखने के बाद मुझे काफी गुस्सा आया और मैंने उस सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जो वायरल हो गया। इसके वायरल होने के बाद देश विरोधी तत्वों का पर्दाफाश हो गया। उसके बाद मुझे और अनन्या जामवाल जो कि फाइनल ईयर की छात्रा हैं को देश विरोधी तत्व धमकी दे रहे हैं। मैं आपको बता नहीं सकती कि हमें किस तरह की धमकियाँ मिल रही हैं।”

मोनिका ने बताया, “उन लोगों ने मुझे RSS आतंकवादी करार दिया। मुझ पर ये आरोप लगाया जा रहा है कि मैंने अपने वीडियो में उकसाने वाली बातें कही हैं। उन लोगों ने आरोप लगाया है कि मैंने ही अनन्या को ऐसा करने के लिए उकसाया है। लेकिन, हमें ये रोक नहीं सकते हैं। यही वो समय है जब देशद्रोहियों को एक्सपोज किया जा सकता है। हमें अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। हम इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं, क्योंकि सारा देश और सारा मीडिया हमारे साथ खड़ा है।”

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने इस मामले में पुलिस से संपर्क किया था? मोनिका ने कहा, “हाँ पुलिस अधिकारियों ने भी हमें कॉल किया था। उन्होंने हमें हमारी सुरक्षा का आश्वासन भी दिया है। लेकिन मैं ये कहना चाहती हूँ कि इस तरह की धमकियाँ हमें रोक नहीं सकती हैं। विशेषकर अनन्या को सुरक्षा का भरोसा दिया गया है। SKIMS के कुछ छात्रों ने उसका कैरियर तबाह करने की धमकी दी थी।”

मोनिका के मुताबिक, इस तरह की धमकियों के मामले में सरकार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। अनन्या केवल 21 साल की हैं, लेकिन देश विरोधी तत्वों के खिलाफ वो मेरे साथ खड़ी हुई। इतना ही नहीं देश विरोधी तत्वों के खिलाफ आवाज उठाने से कई बुद्धिजीवी भी मोनिका को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले SKIMS मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस की छात्रा अनन्या जामवाल ने इन देश विरोधी तत्वों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी, जिसके बाद उन्हें धमकियाँ दी गई थीं। अनन्या को आरएसएस चरमपंथी करार दिया गया।

सोशल मीडिया पर इस केस के कारण नाराज कट्टरपंथी गैर मुस्लिमों, गैर कश्मीरियों को निशाना बनाने के साथ एक छात्रा की फोटो शेयर करके उस पर पुलिस मुखबिर होने का इल्जाम मढ़ रहे हैं और आरएसएस को आतंकी समूह कह रहे हैं। कश्मीर रिपोर्ट के पत्रकार अब्दुल्ला गाजी ने कई ट्वीट किए और अनन्या जामवाल को टैग करते हुए दावा किया कि वो पुलिस की मुखबिर हैं और SKIMS छात्रों पर हुई FIR और UAPA लगवाने की मुख्य दोषी। ट्वीट में उसने बताया कि इनकी पहचान आरएसएस सदस्य और कार्यकर्ता अनन्या जामवाल के तौर पर हुई हैं। वह एक बाहरी डोगरा हैं जो कि इसी कॉलेज से मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई कर रही हैं।

आतंकी संगठन यूएलएफ ने कहा था, “हम ऐसे तत्वों को चेतावनी दे रहे हैं क्योंकि हम जानते हैं कि ये कौन हैं। 48 घंटों का समय दिया जाता है कि माफी माँग लें। वरना अंजाम भुगतना होगा…हम इन्हें पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि ये किसी गैर कश्मीरी गतिविधि में शामिल न हों। वरना हम ये फर्क नहीं करेंगे कि कौन क्या है। जिन भी गैर स्थानीय कर्मचारी और छात्रों ने डॉक्टर और छात्रों की थाना सौरा, करण नगर..में शिकायत दी है उन्हें चेतावनी दी जा रही है। हम सब देख रहे हैं। बाद में इल्जाम मत देना जो कहर तुम पर बरपेगा।”

फेसबुक बना Meta, क्या है मेटावर्स? जानिए ART आधारित इस तकनीक से कितनी बदल जाएगी आपकी सोशल दुनिया

फेसबुक इंक (फेसबुक कंपनी का पहले का नाम) ने अपना नाम बदलकर अब मेटा (Meta) कर लिया है। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि इससे आपके वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम या फेसबुक अकॉउंट पर कोई असर होने वाला है? तो क्या इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी अब मेटा नाम से ही जाना जाएगा? तो इसका जवाब है नहीं। फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने पेरेंट कंपनी का नाम बदलकर गुरुवार (28 अक्टूबर, 2021) को मेटा कर दिया है। ऐसे में फेसबुक इंक के अंडर आने वाले फेसबुक, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम के नाम वही बने रहेंगे, जो हैं।

फेसबुक ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सिलसिलेवार ट्वीट कर इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “जिन ऐप्स- इंस्टाग्राम, मैसेंजर और वॉट्सऐप- को हमने बनाया है, उनके नाम वहीं रहेंगे।” विभिन्न एप और तकनीकों को इस नए ब्रांड के तहत लाया जाएगा। हालाँकि कंपनी अपना कारपोरेट ढाँचा नहीं बदलेगी।

सोशल नेटवर्क के रूप में स्थापित अपनी पहचान को एक व्यापक और अलग रूप देने के लिए, साथ ही वर्चुअल रिएलिटी तकनीक (ART) पर आधारित कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट को दर्शाने के लिए फेसबुक ने यह कदम उठाया है। CEO मार्क जकरबर्ग (Mark Zuckerberg) ने गुरुवार को कंपनी के ऑगमेंटेड रियल्टी कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अपने एक प्रेजेंटेशन में कहा, “आज हम सोशल मीडिया कंपनी के रूप में जाने जाते हैं लेकिन हमारा डीएनए उस कंपनी का है, जो लोगों को जोड़ने के लिए टेक्नोलॉजी बनाती है। मेटावर्स, सोशल नेटवर्किंग की तरह ही अगला फ्रंटियर है। अब से, हम मेटावर्स-फर्स्ट होने जा रहे हैं, फेसबुक-फर्स्ट नहीं।”

मार्क जकरबर्ग का कहना है कि कंपनी का नाम बदले जाने के बाद भी हमारा मिशन वही रहेगा, जो है यानी विश्व भर के लोगों को साथ लाना। हमारे ऐप्स औ उनके ब्रांड नहीं बदल रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें फेसबुक को नए नाम का सुझाव पूर्व सिविक इंटीग्रिटी चीफ समिध चक्रवर्ती ने दिया था। वहीं आलोचकों का यह भी कहना है कि यह फेसबुक पेपर्स से दस्तावेज लीक होने से उत्पन्न विवाद से ध्यान भटकाने का एक प्रयास हो सकता है।

खैर जो भी हो, फिलहाल फेसबुक ने मेटावर्स के कारण अपना नाम बदला है। मेटावर्स (Metaverse) की बात करें तो यह वर्चुअल कंप्यूटर जनरेटेड स्पेस है, जहाँ पर लोग एक-दूसरे के साथ आसानी से जुड़े रह सकते हैं। यह स्पेस वर्चुअल रियलिटी तकनीक (ART) पर आधारित है। वहीं मार्क जुकरबर्ग का कहना है कि मेटावर्स के आने से यूजर्स को बहुत फायदा होगा। इसमें यूजर्स को पेरेंटल कंट्रोल जैसे लेटेस्ट फीचर्स का सपोर्ट दिया जाएगा। इसके अलावा वर्चुअल स्पेस में यूजर्स का निजी डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा।

जानकारी के लिए बता दें कि ‘मेटावर्स’ शब्द ‘मेटा’ और ‘वर्स’ से बना है। इसका अर्थ होता है ब्रह्मांड से परे। इस शब्द का उपयोग आमतौर पर इंटरनेट के भविष्य की अवधारणा का वर्णन करने के लिए किया जाता है। यह कथित आभासी ब्रह्मांड 3D से जुड़ा हुआ है। सबसे पहले 1992 में साइंस फिक्शन लेखक नील स्टीफेंसन ने अपने उपन्यास स्नो केश में ‘मेटावर्स’ शब्द का इस्तेमाल किया था। यहाँ यह जानना मजेदार है कि आधुनिक विज्ञान के कई शब्द उपन्यासों से ही आए हैं जैसे ‘रोबोट’ 1920 के ‘कैरेल कापेक’ नाटक से आया है तो विलियम गिब्सन की एक किताब से ‘साइबर स्पेस’ शब्द आया है। ऐसे ही और भी कई उदाहरण हैं।

फेसबुक की दृष्टि में, इस नए तकनीक के माध्यम से लोग वर्चुअल वातावरण में प्रवेश करके इकट्ठा होंगे और कम्युनिकेट करेंगे, चाहे वे बोर्डरूम में सहकर्मियों के साथ बात कर रहे हों या दुनिया के दूर-दराज के इलाकों में दोस्तों के साथ घूम रहे हों। इसके लिए फेसबुक ने पहले ही एक मीटिंग सॉफ्टवेयर लॉन्च कर दिया था। हॉरिज़न वर्करूम्स (Horizon Workrooms) नाम का ये सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए है। बता दें, इसे ऑक्युलस वीआर हैडसेट्स (Oculus VR headsets) के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। ये मीटिंग के लिए ऐसा एन्वायरमेंट बनाता है कि पहली बार में यकीन कर पाना मुश्किल होता है।

इस बारे में विशेषज्ञों की बात करें तो मेटावर्स टेक्नोलॉजी को करीब से देखने और समझने वाली एनालिस्ट विक्टोरिया पेट्रॉक (Victoria Petrock) कहती हैं, “इस इन्वायरमेंट में ऑनलाइन लाइफ जैसे कि मीटिंग, शॉपिंग और सोशल मीडिया इंटरेक्शन तक सब संभव है। वे कहती हैं कि ये लोगों से जुड़ने की अगली पीढ़ी की क्रांति है, जिसमें लोग बिलकुल वैसी ही वर्चुअल जिंदगी जिएँगे, जैसी वे फिजिकली जीते हैं।”

चलिए अब संक्षेप में मेटावर्स भी समझते हैं, मेटावर्स पर बात करते हुए क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में सीनियर लेक्चरर निक केली कहते हैं, “इंसान ने ऑडियो स्पीकर से लेकर टेलीविजन तक कई तकनीक और उपकरण विकसित किए हैं। इन सारे आविष्कारों को हम अपनी इन्द्रियों से महसूस कर सकते हैं। भविष्य में इंसान छूने और गंध जैसी इंद्रियों के लिए भी उपकरण विकसित करेगा। इन्हीं प्रौद्योगिकियों को व्यक्त करने के लिए मेटावर्स नामक यह शब्द गढ़ा गया है। यह वर्चुअल दुनिया और भौतिक दुनिया के मेल को बताता है।”

आने वाले समय में जब इंटरनेट हमारी जिंदगी का और भी ज्यादा अहम हिस्सा बन जाएगा तो तमाम काम मेटावर्स में होंगे। मेटावर्स अर्थात एक तरह का वर्चुअल इन्वायरमेंट, जिसके भीतर आप जा सकें, न कि सिर्फ स्क्रीन पर देखकर ही प्रतिक्रिया दें। जहाँ दूर-दूर (यहाँ तक कि दूसरे देशों में) बैठे लोग एक-दूसरे से जुड़ी वर्चुअल कम्यूनिटीज़ में आपस में मिल पाएँ, काम कर पाएँ या फिर कोई गेम खेल पाएँ। यह सब संभव हो सकता है वर्चुअल रियलिटी हैडसेट्स (Virtual Reality Headsets), ऑगमेंटेड रियलिटी ग्लासेज़ (Augmented Reality Glasses), स्मार्टफोन्स और अन्य आधुनिक उपकरणों के माध्यम से।

कहने का मतलब यह है कि वह सब कुछ जो आप करना चाहते हैं आप मेटावर्स के जरिए कर पाएँगे। आप किसी वर्चुअल कॉन्सर्ट में जा पाएँगे। ऑनलाइन ट्रिप पर या आर्टवर्क बना और देख पाएँगे, डिजिटल कपड़े ट्राई करने के साथ-साथ खरीद भी पाएँगे। वर्क-फ्रॉम-होम तो और भी सामान्य सी बात हो जाएगी। घर में बैठकर भी आप ऐसा महसूस करेंगे जैसे कि आप ऑफिस में बैठे हैं। कभी भी मीटिंग हो सकेगी और मीटिंग में बैठे लोगों को लगेगा कि एक कमरे में बैठकर पूरा डिस्कशन चल रहा है।

हालाँकि, अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तविक जीवन की पूरी तरह से नकल करने वाला एक सच्चा मेटावर्स किस हद तक संभव है या इसे पूरी तरह विकसित होने में अभी और कितना समय लगेगा। पर ब्लॉकचैन-आधारित मेटावर्स में कई प्लेटफ़ॉर्म अभी भी ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) और वर्चुअल रियलिटी (वीआर) तकनीक विकसित कर रहे हैं जो उपयोगकर्ताओं को स्पेस में इंट्रैक्ट होने का मौका देगा।

अंत में यही कि फेसबुक इंक ने सिर्फ नाम ही नहीं बदला है बल्कि मेटा के रूप में लोगों को नए रोजगार के विकल्प भी उपलब्ध कराए हैं। कंपनी खुद करीब 10 हजार नौकरियाँ उपलब्ध कराएगी। ये नौकरियाँ मेटावर्स की वर्चुअल दुनिया बनाने में मदद करेगी। इसके अलावा भी कई दूसरे माध्यमों से हजारों नौकरियाँ जेनेरेट होंगी।

13 साल की नाबालिग को शादीशुदा शाहिद ने प्रेमजाल में फँसाया, शादी के नाम पर ले गया अपने साथ, फिर निकाह का बनाने लगा दबाव

उत्तर प्रदेश के कानपुर से लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि बाबूपुरवा में शाहिद नाम के एक शादीशुदा व्यक्ति ने पहले नाबालिग को अपने प्यार के जाल में फँसाया, फिर उस पर निकाह करने लिए दबाव बनाने लगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबूपुरवा खटिकाना में रहने वाले और मजदूरी करने वाले परिवार के पड़ोस में 4 साल पहले शाहिद नाम का एक शख्स रहता था।

निकाह करने के बाद वह अपनी पत्नी के साथ मछरिया में रहने लगा, लेकिन उसका यहाँ आना-जाना लगा रहता था। शाहिद ने पत्नी से तलाक होने की बात कहकर पड़ोसी की 13 साल की बेटी को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। चार दिन पहले उसने किशोरी को घर में अकेला देखकर उसे शादी का झाँसा दिया और फिर उसे भगा कर अपने घर ले गया। इसके बाद वह नाबालिग पर निकाह के लिए दबाव बनाने लगा। उसने किशोरी से यह भी कहा था कि इसके लिए तुम्हें धर्मांतरण करने की जरूरत नहीं है।

वहीं, लड़की के परिवार वाले चार दिन से रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाने और चौकी के चक्कर काट रहे हैं। मामले की जानकारी होने पर बजरंग दल के कार्यकर्ता थाने पहुँचे व कार्रवाई की माँग को लेकर हंगामा किया। इसके बाद कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपित शाहिद को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने नाबालिग को बरामद कर लिया।

किशोरी ने पुलिस को बताया कि शाहिद ने पहले शादी करने की बात कही थी और नाबालिग से कहा था कि उसे धर्मांतरण करने की जरूरत नहीं है, लेकिन बीते दो दिनों से वह निकाह करने के लिए दबाव बना रहा था। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि आरोपित शाहिद का उसकी पहली पत्नी से तलाक नहीं हुआ है। थाना प्रभारी देवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि किशोरी को मेडिकल जाँच के लिए भेजा गया है और शिकायत के आधार पर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

टेनिस स्टार लिएंडर पेस और अभिनेत्री नफीसा अली TMC में शामिल, गोवा पहुँची ममता बनर्जी ने तीन मंदिरों के किए दर्शन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गोवा के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। गोवा पहुँचते ही ममता एक्शन मोड में नजर आ रही हैं। टीएमसी प्रमुख गोवा पहुँच कर तीन मंदिरों में दर्शन के बाद पार्टी विस्तार के काम में लग गईं। शुक्रवार (29 अक्टूबर 2021) को ममता बनर्जी ने नफीसा अली और मृणालिनी देशप्रभु को तृणमूल कॉन्ग्रेस जॉइन करवाई। इसके अलावा टेनिस के स्टार खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भी टीएमसी का दामन थामा है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गोवा की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन का व्यस्त कार्यक्रम है। इसमें तीन प्रतिष्ठित मंदिरों का दौरा, मछुआरों और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ बातचीत और मीडिया सम्मेलन शामिल है। बता दें कि ममता राज्य के तृणमूल कॉन्ग्रेस पदाधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगी।

ममता ने शुक्रवार को मर्दोल में श्री महालसा नारायणी मंदिर, प्रियोल में मंगुशी मंदिर और कुंडिम में तपोभूमि मंदिर के दर्शन किए। दरअसल महालसा नारायणी मंदिर और मंगुशी मंदिर दक्षिण गोवा में पोंडा के दो लोकप्रिय स्थल हैं। वहीं तपोभूमि मंदिर श्री दत्ता पद्मनाभ पीठ का गढ़ है, जो गोवा में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जाति भंडारी समाज की आध्यात्मिक सीट है।

ममता बनर्जी गोवा ऐसे समय में पहुँची हैं जब कुछ महीने बाद यहाँ विधानसभा चुनाव होने हैं। गोवा पहुँची तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कहा कि मछली और फुटबॉल दो चीजें हैं जो बंगाल और गोवा को जोड़ती हैं। उन्होंने कहा कि वह राज्य में केंद्र की ‘दादागिरी’ नहीं चलने देंगी। हालाँकि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि न तो वह राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए आई हैं और न ही गोवा की मुख्यमंत्री बनने के लिए।

अपने दौरे के दूसरे दिन ममता ने गोवा की राजधानी पणजी में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। यहाँ पार्टी नेताओं से उन्होंने कहा, “मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखती हूँ, मैं एकता में विश्वास करती हूँ, मेरा मानना है कि भारत हमारी मातृभूमि है। अगर बंगाल मेरी मातृभूमि है, तो गोवा भी मेरी मातृभूमि है। मैं बिल्कुल आपकी बहन की तरह हूँ, मैं यहाँ सत्ता हथियाने नहीं आई हूँ।”

उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी गुरुवार (28 अक्टूबर) को गोवा पहुँचीं। डैबोलिम एयरपोर्ट पहुँचते ही उनका स्वागत काले झंडे और ‘जय श्री राम’ के नारे के साथ किया गया। कुुछ लोगों ने ‘ममता बनर्जी गो बैक’ के नारे भी लगाए। हालाँकि पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटा दिया। बता दें कि उनके दौरे से पहले गोवा में कई जगहों पर ‘जय श्रीराम’ का पोस्टर देखा गया था। बीजेपी ने इस पोस्टर को लगाने के पीछे अपनी संलिप्तता से इनकार किया था।

‘आज ही निकालो, 5 दिन से न सोया-न खाया हूँ’: अरबाज मर्चेंट के पिता ने बताया जेल में बेटे और आर्यन खान का हाल

बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्रूज ड्रग्स केस में गुरुवार (28 अक्टूबर 2021) को आर्यन खान को जमानत दे दी थी। उनके साथ अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धामीचा को भी जमानत मिली है। अब इनके जेल से बाहर निकलने में कागजी औपचारिकताएँ शेष हैं। इनके वकीलों ने शुक्रवार शाम तक इनके बाहर निकलने की उम्मीद जताई है।

इससे पहले शुक्रवार सुबह अरबाज मर्चेंट के पिता असलम आर्थर रोड जेल के बाहर देखे गए। पेशे से वकील असलम ने मीडिया से बात करते हुए जेल में बंद अपने बेटे और उनके दोस्त आर्यन खान का हाल बताया। उन्होंने कहा, “मैं यहाँ (आर्थर रोड जेल) तीसरी बार आया हूँ। मैंने उससे लगभग 20 मिनट तक बात की और कहा कि वो आज या कल बाहर आ जाएगा। उसने मुझे आज ही जेल से बाहर निकालने को कहा और फिर बताया कि जेल से बाहर आने की खुशी में वह 5 दिनों से न सोया है और न खाया है।”

उन्होंने यह भी बताया कि आर्यन भी जेल से बाहर निकलने का बेहद उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। असलम ने कहा, “जब मैंने अरबाज को बताया कि उसे जमानत मिल गई है वह बेहद खुश और भावुक हो गया।” गौरतलब है कि आर्यन खान को जमानत मिलने के बाद से बॉलीवुड में खुशी का माहौल है। तमाम सेलेब्रिटीज ट्वीट कर कर अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं। सोनू सूद से लेकर स्वरा भास्कर तक ने आर्यन को बेल मिलते ही ट्वीट किया। सोनू सूद ने लिखा, “समय जब न्याय करता है, तब गवाहों की जरूरत नहीं होती।” गायक मिका सिंह ने कहा, “आर्यन खान और अन्य आरोपितों को जमानत मिलने पर बधाई। मैं बहुत खुश हूँ कि आखिरकार बच्चा वापस आ गया। शाहरुख खान भगवान के घर में देर है अंधेर नहीं। आपने भाईचारे में बहुत योगदान दिया है।”

बता दें कि आर्यन खान को 3 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट में उन्हें बेल मिलने से पहले उनकी याचिका मजिस्ट्रेट कोर्ट और विशेष एनडीपीएस कोर्ट में खारिज की गई थी। 

जम्मू-कश्मीर में बलिदानियों के नाम पर स्कूल, सड़कें और इमारत: 108 नाम की पहली सूची तैयार

जम्मू-कश्मीर में जल्द ही स्कूलों, सड़कों और इमारतों के नाम सुरक्षाबलों के उन जवानों के नाम पर रखे जाएँगे, जो आतंकवादियों से लड़ते हुए बलिदान हो गए। इसके साथ ही वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाले सैन्यकर्मियों, प्रमुख साहित्यकारों और कलाकारों के नाम पर भी स्कूलों, सड़कों और इमारतों के नाम रखे जाएँगे।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 108 व्यक्तियों की एक सूची तैयार की है, जिनके नाम पर ‘पब्लिक यूटिलिटी स्ट्रक्चर’ के नाम रखे जाएँगे। सूची में अधिकांश नाम सुरक्षाबलों के हैं। इनमें पुलिसकर्मी और सेना के जवान भी शामिल हैं, जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

गुरुवार (28 अक्टूबर 2021) को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में बैठक की। इस दौरान उन्होंने भारत सरकार के ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के हिस्से के रूप में ‘बलिदानियों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों’ के नाम पर स्कूलों, सड़कों और इमारतों के नाम की पहल को मंजूरी दी।

एक प्रवक्ता ने कहा, “केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा और विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके तहत, जम्मू-कश्मीर के बलिदानी और ​जीवित दिग्गजों के नाम पर बुनियादी ढाँचे का नाम रखा जाएगा।”

सूची में नामित लोगों में दिवंगत सहायक उप-निरीक्षक मोहम्मद अकबर भी शामिल हैं, जिन्होंने साल 2014 में उरी के मोहरा में एक सैन्य शिविर पर आतंकवादियों के हमले में अपनी जान गँवा दी थी। इस हमले में कई सैनिक और पुलिसकर्मी भी मारे गए थे।

इसके अलावा साल 2009 में कुपवाड़ा में घुसपैठियों के खिलाफ एक ऑपरेशन में मारे गए पैराट्रूपर शब्बीर अहमद मलिक को भी इसमें शामिल किया गया है। वहीं, सूचीबद्ध नामों में जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री डिवीजन के नायब सूबेदार चुन्नी लाल भी शामिल हैं, जो 24 जून, 2007 को कुपवाड़ा जिले में एक आतंक विरोधी अभियान में वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

37 जगहों पर खुले में नमाज, रोहिंग्याओं को भी भीड़ के लिए बुलाया: विरोध कर रहे 30 हिंदुओं को उठा ले गई गुरुग्राम पुलिस

हरियाणा के गुरुग्राम में शुक्रवार को खुले में जुमे की नमाज को लेकर हिन्दू संगठनों सहित स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है। पिछले पाँच सप्ताह से जारी विरोध के बाद भी समाधान न निकलने से हिन्दू-मुस्लिमों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। वहीं पुलिस ने कुल 37 जगहों पर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी है। जिसके विरोध में हिन्दू महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में लोग आज पाँचवें सप्ताह भी भजन-कीर्तन और नारेबाजी करते हुए सड़क पर निकल आए। विरोध करने की कड़ी में गुरुग्राम के सेक्टर-12-ए इलाके में पहुँचे हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों को गुरुग्राम पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 30 बताई जा रही है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समूहों ने नूंह और पटौदी से अधिक लोगों को ‘समर्थन’ के लिए बुलाया है। हालाँकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि नूंह और पटौदी के मुसलमानों ने वास्तव में गुरुग्राम में मौजूद हैं या नहीं। नूंह मेवात में है और कथित तौर पर हाल के दिनों में बड़ी संख्या में वहाँ रोहिंग्याओं को बसाया गया है। मेवात में वही जगह हैं जो अपनी आपराधिक गतिविधियों के कारण अक्सर ‘मिनी पाकिस्तान’ के रूप में जाना जाता है।

मुस्लिम एकता मंच के अध्यक्ष हाजी शहजाद खान ने कहा, “अगर वे (हिंदू समूह) नारे लगाते हैं, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। हम कानून-व्यवस्था की स्थिति को खराब नहीं करना चाहते हैं, लेकिन अगर वे हमें निशाना बनाते हैं, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “हम कोई टकराव और संघर्ष नहीं चाहते हैं, हम दूसरी जगह स्थानांतरित होने के लिए तैयार हैं बशर्ते प्रशासन शांति की गारंटी दे सके।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज शांतिपूर्वक जुमे की नमाज की अदायगी के लिए 500 पुलिस के जवान पाँच जगहों पर तैनात हैं। ये फैसला हिन्दू संगठनों की तरफ से जारी विरोध को देखते हुए लिया गया है ऐसा पुलिस ने अपने बयान में जानकारी दी। विरोध के समर्थन में स्थानीय आबादी भी उठ खड़ी हुई है और पिछले दो हफ्तों से नमाज की जगहों पर भजन-कीर्तन, हनुमान चालीसा के पाठ से लगातार विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय ने पाँच जगहों पर अदा की जानेवाली नमाज के लिए खासतौर पर पुलिस सुरक्षा की माँग की थी। उन जगहों में डीएलएफ फेज-3, सेक्टर-12 ए, सेक्टर 14, सेक्टर 56 और सेक्टर 47 शामिल हैं।

पुलिस कमिश्नर केके राव ने कहा, “इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की तरफ से स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद पुलिस सुनिश्चित करेगी कि व्यवस्था में किसी तरह की रुकावट न आए।” उन्होंने बताया कि पुलिस को सख्ती से नमाज के दौरान खलल पैदा करनेवाले शरारती तत्वों पर पेश आने का आदेश दिया गया है। जिस वजह से पुलिस प्रर्दशनकारियों को हिरासत में ले रही है।

बता दें कि, 2018 में जिला प्रशासन ने जुमे की नमाज अदा करने के लिए 37 जगहों को चिह्नित किया था, जिसके बाद ट्रैफिक जाम सहित कई परेशानियों से जूझते हिंदूवादी संगठनों ने कई बार विरोध किया लेकिन हल नहीं निकला। इस साल भी हिन्दुओं ने इस फैसले के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है और सितंबर में सेक्टर 47 में जुमे की नमाज का विरोध तेज हो गया। जो बाद में सेक्टर-12 से होते हुए सभी खुले में नमाज वाली जगहों के विरोध का रूप लेता जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, क्षेत्र के स्थानीय लोगों के अलावा, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि जैसे हिंदू समूहों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नमाज के वक्त खुले इलाके में भारी भीड़ जमा हो जाती है, जिससे मुख्य मार्ग जाम हो जाता और यातायात बाधित होता है। इसके अलावा, सार्वजनिक स्थान पर नमाज अदा करने पर इलाके में रहने वाले लोगों की आवाजाही भी बाधित हो जाती है।

पूर्व सीएजी विनोद राय ने संजय निरुपम से माँगी माफी तो 2G और कोयला घोटाले में कॉन्ग्रेस समर्थकों ने पार्टी को दिया ‘क्लीन चिट’

पूर्व नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) विनोद राय ने संजय निरुपम से बिना शर्त माफी माँगी है। उन्होंने यह माफी निरुपम का नाम उन सांसदों में शामिल करने के लिए माँगी है, जिन्होंने 2G स्पेक्ट्रम आवंटन मामले से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम बाहर करने के लिए उन पर दबाव बनाया था। इस मामले में संजय निरुपम ने विनोद राय के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिसके बाद माफी माँगते हुए विनोद राय ने कहा कि उन्होंने गलती से निरुपम का नाम लिया था। राय ने पटियाला हाउस में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष एक हलफनामे में यह बात कही।

हालाँकि, इस माफी को कॉन्ग्रेस समर्थकों, नेताओं और ट्रोल्स ने खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और कॉन्ग्रेस को आवंटन घोटाले में ‘क्लीन चिट’ मिली थी। उन्होंने आगे माफी का इस्तेमाल यह आरोप लगाने के लिए किया कि 2G आवंटन घोटाला हुआ ही नहीं था। अन्ना हजारे और विनोद राय ने देश को गुमराह किया था।

विनोद राय द्वारा माफी माँगने पर कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी संजय निरुपम को ट्विटर के जरिए बधाई दी। उन्होंने ट्वीट किया, “उन्हें (विनोद राय) को अपनी काल्पनिक 2G और कोयला ब्लॉक आवंटन रिपोर्ट के लिए भी राष्ट्र से माफी माँगनी चाहिए।”

इस बीच कॉन्ग्रेस के ट्रोल रचित सेठ ने लोगों को याद दिलाया कि विनोद राय और अन्ना हजारे ने देश को नुकसान पहुँचाया। दरअसल, वह यह कहना चाह रहे थे कि 2G स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले पर विनोद राय की रिपोर्ट ने ‘देश को नुकसान पहुँचाया’, क्योंकि वह रिपोर्ट झूठी थी।

एक अन्य कॉन्ग्रेस ट्रोल ने कहा कि क्या राष्ट्र को गुमराह करने के लिए विनोद राय की ‘बिना शर्त माफी’ पर्याप्त नहीं है। यहाँ तक ​​कि उन्होंने कैग रिपोर्ट को ‘राष्ट्र-विरोधी कृत्य’ करार दिया।

कॉन्ग्रेस नेताओं, ट्रोल्स और समर्थकों ने ऐसे सैकड़ों ट्वीट्स किए। इसमें विनोद राय द्वारा संजय निरुपम से माफी का इस्तेमाल करते हुए दावा किया कि 2G घोटाला हुआ ही नहीं था। इसके साथ ही इस माफी ने कॉन्ग्रेस और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को बरी कर दिया।

हालाँकि, ऐसे कई सवाल भी खड़े हुए हैं। मसलन क्या विनोद राय की माफी कॉन्ग्रेस को दोषमुक्त करती है? क्या इसका मतलब यह है कि वास्तव में कॉन्ग्रेस सांसदों ने उन पर मनमोहन सिंह का नाम रिपोर्ट से हटाने के लिए दबाव नहीं डाला?

माफी में क्या कहा विनोद राय ने

पूर्व सीएजी विनोद राय ने साल 2014 में अपनी पुस्तक के विमोचन के मौके पर बार-बार ये कहा था कि 2G स्पेक्ट्रम आवंटन की रिपोर्ट से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम हटाने के लिए कॉन्ग्रेस के कई सांसदों ने उन पर दबाव बनाया था। अपने हलफनामे में राय ने कहा, “मैंने संजय निरुपम के खिलाफ विशेष रूप से 2014 में अपनी पुस्तक ‘नॉट जस्ट ए अकाउंटेंट: द डायरी ऑफ द नेशन्स कॉन्साइंस कीपर’ के लॉन्च के बाद कुछ बयान दिए थे। मैंने महसूस किया है कि मैंने अनजाने में और गलत तरीके से संजय निरुपम का नाम उन सांसदों में से एक के रूप में उल्लेख किया था, जिन्होंने मुझ पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम को 2G स्पेक्ट्रम आवंटन पर सार्वजनिक लेखा समिति और संयुक्त संसदीय समिति की बैठकों के दौरान सीएजी रिपोर्ट से बाहर रखने के लिए दबाव डाला था।”

राय ने निरुपम और उनके शुभचिंतकों को उनके कमेंट के कारण हुई पीड़ा के लिए भी माफी भी माँगी। संजय निरुपम के वकील आरके हांडू ने कहा, “विनोद राय मामले में बरी हो गए हैं। संजय निरुपम ने उनकी माफी स्वीकार कर ली और निरुपम का बयान दर्ज करने के बाद मामले का निपटारा कर दिया गया।”

क्या विनोद राय की माफी से कुछ बदलेगा?

विनोद राय के माफी माँगने के बाद कॉन्ग्रेस के ट्रोल और नेता अब खुलकर सामने आ गए हैं। इनका मानना है कि संजय निरुपम का नाम लेने के लिए विनोद राय की माफी का मतलब है कि पूरी 2G स्पेक्ट्रम आवंटन रिपोर्ट बेकार थी, जबकि सच्चाई इससे अलग है।

विनोद राय ने अपने माफीनामे में कहा, “मैंने महसूस किया है कि मैंने अनजाने में और गलत तरीके से संजय निरुपम के नाम का उल्लेख उन सांसदों में से एक के रूप में किया था, जिन्होंने मुझ पर 2G के मुद्दे पर लोक लेखा समिति और संयुक्त संसदीय समिति की बैठकों के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम सीएजी रिपोर्ट से बाहर रखने के लिए दबाव डाला था।”

इससे ये स्पष्ट है कि राय ने माफी केवल गलती से निरुपम का नाम लेने के लिए माँगी थी। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं कहा कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का नाम घोटाले की रिपोर्ट से बाहर रखने के लिए कॉन्ग्रेस के अन्य सांसदों ने उन पर दबाव नहीं डाला। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में घोटाले के अपने निष्कर्षों को वापस लेने के बारे में भी कुछ नहीं कहा। जो रिपोर्ट उन्होंने प्रस्तुत की थी उसमें घोटाले का विवरण दिया गया था।

इसलिए, यह समझ से परे है कि कॉन्ग्रेस इसे 2G घोटाले और कोयला घोटाले में मनमोहन सिंह और कॉन्ग्रेस दोनों का ‘क्लीन चिट’ कैसे मान रही है। इसका मतलब यह भी नहीं है कि अन्य कॉन्ग्रेसी सांसदों ने मनमोहन सिंह को रिपोर्ट से बाहर करने के लिए उन पर दबाव नहीं डाला।

दिलचस्प बात यह है कि 2017 में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 2G स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामलों में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और द्रमुक सांसद कनिमोझी समेत सभी आरोपितों को बरी कर दिया था। प्रवर्तन निदेशालय के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सभी 19 आरोपितों को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था, जो 2G घोटाला मामले के दायरे में आता है। फिर भी कॉन्ग्रेस और उससे सहानुभूति रखने वाले पत्रकारों ने कॉन्ग्रेस को दोषमुक्त करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया और दावा किया कि 2G घोटाला हुआ ही नहीं था।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में कहा था कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार द्वारा 2G स्पेक्ट्रम का आवंटन ‘गैर-कानूनी’ था और वह सत्ता के मनमाने प्रयोग का एक उदाहरण था। इसके बाद ही उसने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल के दौरान 11 कंपनियों को 10 जनवरी 2008 को या उसके बाद आवंटित सभी 122 दूरसंचार लाइसेंस रद्द कर दिए थे।

इस मामले में यह ठीक वैसा ही है, जैसा कि आरोपी के छूटने पर यह कह दिया जाय कि हत्या तो हुई ही नहीं। कहने का तात्पर्य यह है कि एक व्यक्ति का नाम गलती से शामिल हो गया तो दूसरे ने भी गलत नहीं किया। पूर्व सीएजी विनोद राय ने आँकलन किया था कि 2G घोटाला 1.76 लाख करोड़ रुपए का था। लेकिन कॉन्ग्रेस चाहती है कि हम विश्वास करें कि वास्तव में किसी ने घोटाला नहीं किया था। इस घटना से इस बात को आसानी से समझा जा सकता है कि अपनी भ्रष्ट छवि को चमकाने के लिए कॉन्ग्रेस कितनी बेताब है।

दिल्ली कॉन्ग्रेस की टीम में सिख विरोधी दंगों के आरोपित जगदीश टाइटलर को जगह, सोनिया गाँधी ने किया नियुक्त

1984 के सिख विरोधी दंगों के आरोपित जगदीश टाइटलर को प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी में स्थायी सदस्य के तौर पर जगह दी गई है। कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने टाइटलर को प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी में शामिल किया है। टाइटलर के साथ ही पूर्व प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष जेपी अग्रवाल, पूर्व राष्ट्रीय महासचिव जनार्दन द्विवेदी और पूर्व केंद्रीय मंत्रियों कपिल सिब्बल, अजय माकन और कृष्णा तीरथ को भी जगह दी गई है।

टाइटलर का नाम 1984 के सिख विरोधी दंगो के सिलसिले में सामने आया था। जगदीश टाइटलर पर आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने 1984 में लोगों को सिख विरोधी दंगों के दौरान भड़काया था। अब बीजेपी आईटी सेल के इंचार्ज अमित मालवीय ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा है।

अमित मालवीय ने ट्वीट करते हुए कहा, “सोनिया गाँधी ने जगदीश टाइटलर को दिल्ली प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के 37 स्थायी आमंत्रित सदस्यों में से एक के रूप में नियुक्त किया है, जो कॉन्ग्रेस प्रायोजित 1984 के सिख नरसंहार के आरोपित हैं। सिखों की जान कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए मायने नहीं रखती? क्या पंजाब सुन रहा है?”

वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस कदम को लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “भारतीयों, विशेषकर सिख और पंजाबी समुदाय के सदस्यों की भावनाओं को एक बार फिर आहत करने के लिए कॉन्ग्रेस पर शर्म आती है। जगदीश टाइटलर 1984 के सिख दंगों के आरोपित हैं। कॉन्ग्रेस पीड़ितों को न्याय दिलाने में विफल रही, अपराधियों को पुरस्कृत किया।”

बता दें कि गुरुवार (28 अक्टूबर 2021) को अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने दिल्ली कॉन्ग्रेस में 37 स्थायी आमंत्रितों को नियुक्त किया। एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने नियुक्ति आदेश जारी किया। दिल्ली कांग्रेस कार्यकारी समिति में अब 87 सदस्य हैं। सिख विरोधी दंगों में आरोपों का सामना करने वाले जगदीश टाइटलर दूसरे बड़े कॉन्ग्रेस नेता थे। उनके अलावा सज्जन कुमार पर भी यह दाग लगा था। सज्जन कुमार को अदालत ने दंगों में शामिल होने के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनाई है और फिलहाल वह जेल में हैं। 

जगदीश टाइटलर की बात करें तो सीबीआई ने उनके मामले में 2007, 2009 और 2014 में क्लोजर रिपोर्ट फाइल की थी। लेकिन दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। सिख विरोधी दंगों में अपने पति को खोने वालीं लखविंदर कौर की अर्जी पर अदालत ने यह फैसला सुनाया था। अदालत ने सीबीआई को मामले की जाँच जारी रखने का आदेश दिया था।

सील कर दिया गया वह कॉलेज, जहाँ फीस के पैसे नहीं होने पर 5 गाय देकर हो जाती थी इंजीनियरिंग की पढ़ाई

बिहार के बक्सर जिले का एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज जो अपने अनोखे शुल्क मॉडल को लेकर काफी मशहूर था, उसे बैंक का कर्ज नहीं चुका पाने के कारण बंद कर दिया गया है। आपको जानकार शायद हैरानी होगी, लेकिन यह सच है कि बक्सर के ‘विद्यादान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट कॉलेज’ में 4 साल के बीटेक कोर्स के लिए 5 गायें देकर भी फीस भरी जा सकती थी।

साल 2010 में इस कॉलेज का सेटअप बक्सर के अरियाव गाँव में किया गया था। इसे डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिकों एसके सिंह और अरुण कुमार वर्मा सहित सेवानिवृत्त और सेवारत पेशेवरों के एक समूह ने आगे बढ़ाने का काम किया था। इसमें बेंगलुरू स्थित डॉक्टर मयूरी श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता लाल देव सिंह और चार्टर्ड अकाउंट प्रदीप गर्ग का भी योगदान था।

जब ये कॉलेज खुला तो ये पटना के आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय से संबंधित संस्थान था। लेकिन कुछ समय बाद यह कॉलेज अपनी फीस को लेकर चर्चा में आया, जब इसने फीस की जगह गाय लेने का विकल्प दिया। इस अनूठे फीस विकल्प ने लिए अरियाव के साथ आसपास के गाँवों में हलचल पैदा कर दी थी। इसके तहत बीटेक के पहले वर्ष में 2 गायें और बाद के 3 वर्षों में एक-एक गाय ली जाती थी। ये विकल्प उन लोगों के लिए था, जो सालाना 72,000 रुपए फीस नहीं दे सकते थे।

लेकिन अब इस कॉलेज के 300 से अधिक छात्रों का भविष्य अनिश्चित है, जिनमें से अधिकांश आस-पास के गाँवों से हैं। बैंक ने 5.9 करोड़ रुपए का लोन ना चुका पाने पर कॉलेज को सील कर दिया है। VITM के प्रमोटर एस के सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हम में से कुछ, जिनमें DRDO के पूर्व वैज्ञानिक, डॉक्टर और चार्टर्ड अकाउंट शामिल हैं, मेरे गाँव में इस संस्थान को खोलने का विचार लेकर आए। यह बक्सर और वाराणसी के बीच एकमात्र इंजीनियरिंग कॉलेज है।”

वहीं, कॉलेज चलाने वाले विद्यादान सोसायटी के प्रमुख एसके सिंह ने बताया, “बैंक ऑफ इंडिया की पटना कॉरपोरेट शाखा ने 2010 में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए कॉलेज को शुरुआत में 4.65 करोड़ रुपए का लोन दिया था। सिंह ने कहा कि बाद में इसने 2011 में 10 करोड़ रुपए का एक और लोन मंजूर किया था, लेकिन कभी भी राशि जारी नहीं की गई।”

उन्होंने कहा, “हमने विधिवत जमानत राशि जमा कर दी है, जिसकी कीमत 15 करोड़ रुपए है।” इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि हमें कभी भी 10 करोड़ रुपए का टॉप-अप लोन नहीं दिया गया है। इसकी वजह से हमें काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इसके बावजूद हमने 2012 तक ईएमआई (4.65 करोड़ रुपए के लोन पर) और 2013 में कुछ अतिरिक्त राशि का भुगतान किया। लेकिन अंडर-फाइनेंसिंग को देखने की बजाए, बैंक ने ऋण वसूली शुरू कर दी है और कॉलेज को सील कर दिया है। इसके चलते वीआईटीएम में नामांकित सैकड़ों छात्रों के करियर दॉंव पर लग गया है।

पटना में बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जोनल मैनेजर राजेंद्र सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि हम लोन रिकवरी के लिए डीलिंग करते हैं और इसी वजह से हमने वीआईटीएम को बंद किया है।