कोर्ट की कार्यवाही के दौरान तंबाकू चबाना एक गवाह को महँगा पड़ गया। कोर्ट ने उस पर 100 रुपए का जुर्माना लगाया है। मामला मुंबई का है। मुंबई की एक कोर्ट में वकील शाहिद आजमी की हत्या मामले में सुनवाई चल रही थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में गवाही देने के लिए गवाह जब कोर्ट पहुँचा तो उसके मुँह में तंबाकू भरा हुआ था। वह तंबाकू चबाते हुए गवाही दे रहा था। मुँह में तंबाकू होने की वजह से उसकी बातें साफ तौर पर समझ नहीं आ रही थीं। इस पर कोर्ट ने आपत्ति जताई और 100 रुपए का जुर्माना लगा दिया।
कोर्ट के आपत्ति जताने पर अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि गवाह गरीब परिवार से है और कोर्ट की कार्यवाही से भलीभाँति वाकिफ नहीं है। हालाँकि, कोर्ट अभियोजन पक्ष के इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुआ और कहा कि ऐसा लगता है कि उसे अदालती प्रक्रिया से कोई सरोकार नहीं है।
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को दिल्ली पहुँचने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा टिकरी बॉर्डर पर लगभग 10 महीने पहले की गई बैरिकेडिंग को अब हटाया जा रहा है। उम्मीद है यह रास्ता जल्द ही आवागमन के लिए खुल जाएगा। इसके साथ ही गाजीपुर बॉर्डर को भी खोलने की तैयारी हो रही है।
#WATCH | Police barricading being removed from Ghazipur (Delhi-Uttar Pradesh) border where a farmers’ agitation against the three farm laws is ongoing. pic.twitter.com/0rLUZvIuMW
इसको लेकर दिल्ली पुलिस की डीसीपी (ईस्ट) प्रियंका कश्यप ने बताया कि सेक्टर 2 और 3 में NH9 खुल रहा है। जल्द ही NH24 भी खोल दिया जाएगा। पुलिस का कहना है कि बातचीत के बाद किसानों के साथ सहमति बनने के बाद किसानों के बाद दोनों बॉर्डर के इमरजेंसी रूट खोल दिए जाएँगे।
This is Sector 2 and 3. It is NH9, we are opening that. NH 24 will also be opened: DCP (East), Delhi, Priyanka Kashyap pic.twitter.com/DUkiU6AhKs
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “”सरकार की तरफ़ से आदेश है इसलिए हम बैरिकेडिंग हटाकर रास्ता खोल रहे हैं।” दरअसल, किसानों द्वारा धरने के कारण बंद किये गए रास्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। इस दौरान ये बात सामने आई थी कि रास्ता बंद होने की वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद किसानों ने कहा था कि रास्ता उन्होंने बन्द नहीं किया है, बल्कि दिल्ली पुलिस ने किया है।
दिल्ली की सीमा के नज़दीक गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों के धरना स्थल पर लगे बैरिकेडिंग को पुलिस ने हटाया।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “सरकार की तरफ़ से आदेश है इसलिए हम बैरिकेडिंग हटाकर रास्ता खोल रहे हैं।” pic.twitter.com/wuhCPxEOX1
दिल्ली पुलिस की टीम ने जेसीबी की सहायता से रास्ते को साफ किया। सीमेंट से बनाया गया एक बैरिकेड हटा दिया गया है। इसके साथ ही सड़क के बीच लगाई गईं कीलों को भी हटवा दिया गया है। बॉर्डर खोलने के पीछे सुप्रीम कोर्ट को निर्देश को मुख्य वजह माना जा रहा है। 21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसानों को प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन अनिश्चितकाल के लिए सड़कें ब्लॉक नहीं की जा सकतीं।
#WATCH | Removal of Police barricading at Tikri (Delhi-Haryana) border underway. The barricading is also being removed from Ghazipur (Delhi-Uttar Pradesh) border.
Farmers’ agitations against the three farm laws have been going on at these borders. pic.twitter.com/GrC3G7Vnze
उधर दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना का कहना है कि पुलिस रास्ता खोलने के लिए पुलिस तैयार है, लेकिन किसानों को इस बात का वादा करना होगा कि किसी प्रकार की अराजकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस और किसानों के बीच पूरी तरह से समझौता नहीं हो जाता तब तक रास्ता बंद ही रहेगा।
वहीं, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा, “पीएम ने कहा था कि किसान कहीं भी फसल बेच सकते हैं। अगर सड़कें खुली रहीं तो हम अपनी फसल बेचने के लिए संसद भी जाएँगे। पहले हमारे ट्रैक्टर दिल्ली जाएँगे। हमने रास्ता नहीं रोका है। सड़क जाम करना हमारे विरोध का हिस्सा नहीं है।”
PM had said that farmers can sell crops anywhere. If roads are open, we’ll also go to Parliament to sell our crops. First, our tractors will go to Delhi. We haven’t blocked the way. Blocking road is not part of our protest: Rakesh Tikait, BKU leader in Ghazipur pic.twitter.com/v9y0ER4uDK
वहीं, सिंघु बॉर्डर पर रास्ता खुलने को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है। दरअसल, गुरुवार को निहंग सिखों ने बैठक के बाद बताया कि वे सिंघु बॉर्डर नहीं जाएँगे। वे यहीं रहेंगे और अपने हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे। निहंग सिखों ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेता यह कह रहे हैं कि निहंग यहाँ से चले जाएँ, लेकिन वे ना तो किसी नेता के कहने पर आए हैं और ना ही किसी के कहने पर यहाँ से जाएँगे।
दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के आरोपितों के मोबाइल में मिले डाटा को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। मोबाइल डाटा में न्यूड फोटो और पोर्न वीडियोज भी मिले हैं। इसे देखते हुए दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि आरोपितों के मोबाइल फोन से जुटाए गए डाटा सह आरोपितों को नहीं दिए जा सकते हैं। गुरुवार (28 अक्टूबर 2021) को यह निर्देश देते हुए अदालत ने कहा कि इससे निजता का अधिकार प्रभावित होगा।
दिल्ली की कड़कड़डूमा सेशन कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने इस मामले की सुनवाई की। सीआरपीसी की धारा 207 के तहत आरोपितों ने डाटा साझा किए जाने की अपील की थी। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार जज रावत ने कहा, मोबाइल डाटा किसी भी अन्य आरोपितों या उनके वकीलों को देना संभव नहीं है। इस प्रकार की तस्वीरें और वीडियो साझा किए जाने पर यह आरोपितों के निजी जीवन पर प्रभाव डालेगी। उन्होंने आगे कहा, “अदालत के सामने दो सीलबंद लिफाफे पेश किए गए। इसमें मोबाइल फोन से ली गई तस्वीरें थीं। इनमें नग्न तस्वीरें, निजी अंतरंग क्षण और आरोपितों द्वारा खुद से बनाए गए अश्लील वीडियो हैं।”
अब इस मामले में सुनवाई 23 नवंबर को होगी। इससे पहले सुनवाई के दौरान एसपीपी अमित प्रसाद ने अदालत को बताया कि गोपनीयता की वजह से सीआरपीसी की धारा 207 के तहत आरोपितों को मोबाइल फोन से मिला डाटा नहीं दिया जा सकता है। वहीं आरोपितों की ओर से पेश वकीलों का तर्क था कि उन्हें मोबाइल से मिले डाटा की जरूरत होगी क्योंकि वे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 10 सितंबर को इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान नताशा नरवाल और देवांगना कलीता के वकील ने कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को साझा किए जाने की याचिका पर दिल्ली पुलिस ने अब तक जवाब नहीं दिया है, जबकि इस संबंध में अप्रैल में ही याचिका दायर की गई थी। गुरुवार को डाटा शेयर करने पर रोक लगाते हुए अदालत ने ये भी स्पष्ट किया कि मोबाइल फोन से मिले सारे डाटा पोर्नोग्राफिक ही नहीं हैं।
दिल्ली दंगों के मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद, जेएनयू की छात्रा नताशा नरवाल, देवांगना कलीता, जामिया कोर्डिनेशन कमेटी की सदस्य सफूरा जरगर, आम आदमी पार्टी के पार्षद रहे ताहिर हुसैन सहित 13 आरोपित हैं। इन पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज है। इनमें सफूरा जरगर, आसिफ इकबाल तान्हा, देवांगना कलीता और नताशा नरवाल को जमानत मिल चुकी है। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2020 के दंगों के दौरान 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हो गए थे।
रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशूहर पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर को पीटीवी (PTV) ने बैन कर दिया है। उन्हें ‘असभ्य’ बता लाइव शो से बाहर करने वाले एंकर नोमान नियाज पर भी पाकिस्तान के सरकारी टीवी ने एक्शन लिया है। चैनल ने जाँच पूरी होने तक दोनों को ऑफ एयर करने का फैसला किया है।
हालाँकि, लाइव शो से निकाले जाने के बाद शोएब अख्तर ने इस्तीफा दे दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, पीटीवी ने फैसला लिया है कि इस मामले की जाँच पूरी होने तक दोनों किसी भी शो में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। माना जा रहा है कि इस मामले की जाँच कर रही कमेटी ने ही दोनों को हटाने की सिफारिश की है।
इस मामले में शोएब अख्तर ने पीटीवी के फैसले को हास्यास्पद करार दिया है। द नेशन के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, “वैसे यह प्रफुल्लित करने वाला है। मैंने दुनिया भर में 220 मिलियन पाकिस्तानियों और अरबों लोगों के सामने इस्तीफा दिया था। पीटीवी पागल है या क्या? वे कौन होते हैं मुझे ऑफ एयर करने वाले?”
Well thats hilarious. I resigned in front of 220 million Pakistanis & billions across the world. Is PTV crazy or what? Who are they to off air me? https://t.co/514Mk0c64e
दरअसल, बीते मंगलवार (26 अक्टूबर 2021) को टी20 विश्व कप 2021 में न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच मैच खेला गया, जिसमें पाकिस्तान ने जीत हासिल की। इसी के बाद पीटीवी के विशेष प्रसारण ‘गेम ऑन है’ के दौरान अख्तर और नियाज के बीच बहस हो गई। हुआ ये कि शो के होस्ट नियाज ने अख्तर से पूछा कि क्या पाकिस्तान ने न्यूजीलैंड के खिलाफ चेजिंग में कोई गड़बड़ी की है। लेकिन अख्तर उनकी इन बातों से सहमत नहीं हुए और एंकर के सवाल को नजरअंदाज कर दिया और तेज गेंदबाज हारिस रउफ के बारे में बात करने लगे।
अख्तर ने पूर्व टेस्ट तेज गेंदबाज की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह वह व्यक्ति है जो सभी श्रेय का हकदार है। यह लाहौर कलंदर्स था जिसने हमें हारिस रऊफ दिया।” नजरअंदाज किए जाने से चिढ़े नियाज ने अख्तर पर बदतमीजी का आरोप लगाया और उन्हें शो छोड़ने के लिए कहा। नियाज ने कहा, “आप थोड़े असभ्य हो रहे हैं। मैं ये नहीं कहना चाहता, लेकिन अगर आप अधिक स्मार्ट हो रहे हैं तो आप जा सकते हैं। मैं इसे ऑन एयर कह रहा हूँ।” इससे पहले कि अख्तर जवाब दे पाते नियाज ने ब्रेक ले लिया। हालाँकि, इसके बाद जब फिर से शो शुरू हुआ तो अख्तर ने अपना इस्तीफा दे दिया।
मलेशिया के कोर्ट ऑफ अपील (COA) ने दो नाबालिग बच्चों के धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले में क्वालालम्पुर हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। इस मामले में बच्चों का धर्मांतरण उनके पिता की सहमति के बगैर मॉं ने बौद्ध से इस्लाम में करवा दिया था। तीन साल पहले हाई कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था, जिस पर बुधवार (27 अक्टूबर 2021) को सीओए ने भी मुहर लगा दी। अदालत ने एक बार फिर से यह परिभाषित किया है कि धर्म परिवर्तन के मामले में संघीय संविधान के पैरेंट्स शब्द माता-पिता दोनों को संदर्भित करता है, न कि उनमें से केवल एक को।
सीओए ने एम इंदिरा गाँधी मामले में संघीय अदालत के ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया। इस मामले में पिता द्वारा बच्चों के इस्लामी धर्मांतरण को शीर्ष अदालत ने गैरकानूनी घोषित कर दिया था।
तीन जजों की खंडपीठ ने सर्वसम्मति से क्वालालम्पुर उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। 27 अक्टूबर को कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “हमारा मानना है कि उच्च न्यायालय के जज और कोर्ट ऑफ अपील की पीठ एम इंदिरा गाँधी मामले में संघीय न्यायालय के फैसले से बँधी हुई है। इस मामले में फैसले को चुनौती दी की वजह नहीं दिखती। अपील में दम नहीं है। लिहाजा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा दिए गए फैसले को बरकरार रखा जाता है।” इस मामले में माँ और नाबालिगों की पहचान जाहिर नहीं की गई है।
इस मामले में जन्म से बौद्ध महिला ने 2015 में इस्लाम कबूल कर लिया था। इसके ठीक अगले साल ही उसने उसने अपने दो बच्चों को उनके पिता की सहमति के बिना रजिस्ट्रार के पास ले जाकर उनका भी धर्मान्तरण करवा दिया। दोनों बच्चों में एक 13 साल का लड़का और दूसरी 9 साल की लड़की है। दोनों फिलहाल अपने पिता के पास हैं, जो कि पेशे से व्यापारी हैं और उनकी आस्था बौद्ध धर्म से जुड़ी है।
दोनों बच्चों के धर्मांतरण के खिलाफ उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। 16 अक्टूबर 2018 को क्वालालम्पुर उच्च न्यायालय ने माना कि पिता की सहमति के बिना ही बच्चों का इस्लामी धर्मांतरण किया गया। जबकि जनवरी 2018 में फेडरल कोर्ट की पाँच सदस्यीय पीठ ने इंदिरा गाँधी मामले में कहा था कि नाबालिग के धर्मांतरण में माता-पिता दोनों की सहमति जरूरी है। इस फैसले को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने बच्चों का धर्मांतरण रद्द कर दिया। इस फैसले को कोर्ट ऑफ अपील में चुनौती दी गई थी।
इंदिरा गाँधी केस
एम इंदिरा गाँधी मामले में फेडरल कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक माना जाता है। यह फैसला बच्चों के एकतरफा धर्मांतरण को गैरकानूनी घोषित करने के मामले से जुड़ा था। इस मामले में एक हिंदू व्यक्ति 11 मार्च 2009 को धर्मान्तरण कर इस्लाम कबूल कर लिया था। इसके बाद उसी साल उसने 2 अप्रैल को अपने तीन बच्चों का भी धर्मान्तरण करवा दिया। धर्मांतरण करने वाले इस व्यक्ति का विवाह 1993 में एम इंदिरा गाँधी नाम की हिंदू महिला से हुआ था। लेकिन धर्मान्तरण हिंदू माँ की सहमति के बिना ही करवाया गया।
इसे इंदिरा गाँधी ने चुनौती दी और 2013 में इपोह हाईकोर्ट ने बच्चों का धर्मांतरण खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा था कि नाबालिग बच्चों के धर्म परिवर्तन के लिए माता-पिता दोनों की सहमति जरूरी है। 2015 में अपीली अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि इस्लाम में धर्मान्तरण से संबंधित मामलों पर दीवानी अदालतों का कोई अधिकार नहीं है।
इस फैसले के खिलाफ एम इंदिरा गाँधी ने मलेशिया के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में अपीली अदालत के आदेश को पलट दिया। अदालत ने कहा था कि नाबालिगों के धर्म परिवर्तन के लिए माता-पिता दोनों की सहमति जरूरी है। हालाँकि, मलेशिया की कोर्ट ने भले ही इंदिरा गाँधी के पक्ष में फैसला सुना दिया, लेकिन धर्मान्तरण के बाद से लापता हुई उनकी बड़ी बेटी प्रसन्ना आज तक नहीं मिली। वह उसकी तलाश ही कर रही हैं।
कॉमेडी के नाम पर हिन्दू धर्म और देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने वाले मुनव्वर फारुकी का मुंबई में होने वाला कार्यक्रम रद्द हो गया है। इसके बाद से उसके समर्थक सिद्धांत मोहिते को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। सैफरन थिंक टैंक (Saffron Think Tank) के संस्थापक मोहिते कथित कॉमेडियन की हिंदूफोबिया के खिलाफ मुखर रहे हैं। धमकी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस सुरक्षा की माँग करते हुए पत्र लिखा है।
मुंबई में 29, 30 और 31 अक्टूबर को फारुकी का शो होना था। इसके विरोध में मोहिते के कैंपेन का ये असर हुआ कि वृहन्नमुंबई नगरपालिका (BMC) ने ‘प्रशासनिक वजहों’ से फारुकी का शो रद्द कर दिया। मोहिते ने उसके शो के विरोध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य सुरक्षा एजेसियों को पत्र लिखा था। पत्र के साथ फारुकी की हिंदू विरोधी स्टैंडअप कॉमेडी के क्लिप भी साझा किए गए थे। 15 अक्टूबर के अपने पत्र में मोहिते ने बताया था कि कैसे कॉमेडी के नाम पर वह हिंदू धर्म का अपमान करता है, लिहाजा उसे शो की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
बीएमसी द्वारा शो रद्द किए जाने के बाद फारुकी के समर्थक मोहिते को निशाना बनाते हुए कैंपेन चला रहे हैं। उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। दिलचस्प यह है कि एक तरफ मोहिते को फारुकी यह भरोसा दिला रहा है कि वह अपने प्रशंसकों से ऐसा नहीं करने को कहेगा, दूसरी ओर वह यह भी कह रहा है कि ‘प्रशंसक कई बार भावुक हो जाते हैं’।
I have filed a legal complaint at Amboli Police Station against Munawar Faruqui’s fans who have given me death threats.
I have also requested @mumbaipolice to provide me Police Protection asap.
I will continue fighting for protection of Hindu Dharma, no matter whatever happens pic.twitter.com/SvBs1CxyQI
इससे पहले फारुकी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट करते हुए लिखा था, “मुंबई में 29, 30, 31 अक्टूबर 2021 को होने वाले शो रद्द कर दिए गए हैं। दर्शकों की सुरक्षा मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है। मैं नहीं चाहता कि मेरे दर्शक मेरे अनुभव से गुजरें।”
बता दें कि फारूकी के लगातार हिन्दू-देवी देवताओं का मजाक बनाने के कारण उसका व्यापक स्तर पर विरोध कई हिन्दू संगठनों द्वारा शुरू किया गया था, जिन्होंने #GoBackMunawar को ट्रेंड कराना शुरू कर दिया था। कई वीडियो शेयर कर लोगों ने देश को बताया कि कॉमेडियन के सभी शो ‘हिंदू विरोधी’ थे और उसके शो का कंटेंट हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली सामग्री से भरा है।
इससे पहले सूरत में मुनव्वर फारुकी के ‘कॉमेडी’ शो के आयोजन से कार्यक्रम के आयोजक 2जोकर्स एंटरटेनमेंट के हटने के बाद उसका पूरा गुजरात दौरा ही रद्द कर दिया गया था। फारुकी के शो सूरत, अहमदाबाद और वडोदरा में क्रमशः 1, 2 और 3 अक्टूबर को होने वाले थे।
गौरतलब है कि मार्च 2020 में YouTube पर अपलोड किए गए एक वीडियो में मुनव्वर फारुकी ने 2002 के गोधरा नरसंहार का मज़ाक उड़ाया, जहाँ अयोध्या से लौट रहे 58 हिंदुओं को मुस्लिम भीड़ ने जिंदा जला दिया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुई क्लिप में उसे कॉमेडी के नाम पर मजाक उड़ाते हुए देखा जा सकता है। उसपर अपने ‘कॉमेडी’ शो के नाम पर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का भी आरोप है। जिसे मध्य प्रदेश के इंदौर में जनवरी 2021 में मुनरो कैफे में आयोजित किया गया था।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मेरठ के ऑटो चोरी सिंडिकेट के सरगना हाजी गल्ला उर्फ हाजी नईम की अब तक 10 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। शनिवार (23 अक्टूबर, 2021) को ही मेरठ पुलिस ने जिलाधिकारी के आदेश पर हाजी गल्ला के 4 करोड़ 10 लाख रुपए के आलीशान बंगले को जब्त किया है। इसके साथ ही उसकी आठ बड़ी दुकानों को भी सीज करने के साथ-साथ उसके सभी बैंक खाते सील कर दिए गए। इससे पहले बुधवार (20 अक्टूबर, 2021) को पुलिस ने हाजी गल्ला के दो आवासों और एक गोदाम को जब्त किया था।
6. The biggest junkyard owner of this gang, Haji Naeem alias Haji Galla, was arrested, his Rs 4 crore bungalow was auctioned, his eight big shops were confiscated and all his bank accounts were frozen.
हालाँकि, मेरठ पुलिस को लगता है कि यह तो सिर्फ कुछ हिस्सा है। हाजी गल्ला के पास अभी भी यूपी में करोड़ों की बेनामी संपत्ति है। जाँच का नेतृत्व कर रहे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूरज राय ने कहा, “हम इस बिंदु पर आँकड़ा नहीं दे सकते कि गल्ला के पास कितनी संपत्ति है, लेकिन अभी भी सोतीगंज मार्केट में दुकानें और कैंट क्षेत्र में 1,200 वर्ग गज जमीन जैसी कई संपत्तियाँ हैं, जो उसके नाम पर नहीं हैं, लेकिन हमें लगता है कि वो उनसे जुड़ा हुआ है। हम उसकी बेनामी संपत्तियों की भी जाँच कर रहे हैं।”
हाजी गल्ला की संपत्तियों को मेरठ पुलिस ने किया जब्त
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार ने मेरठ के सोतीगंज कबाड़ी बाजार में 32 कबाड़खानों की जाँच शुरू की है, जो हाजी गल्ला उर्फ हाजी नईम से जुड़े माने जाते हैं। रिपोर्ट से पता चलता है कि मेरठ में हाजी गल्ला के चोरी के कार को काटकर स्क्रैप बनाने के बिजनेस में सहायता कर रहे कुख्यात स्क्रैप डीलरों के खिलाफ गैंगस्टर ऐक्ट लगाया गया है।
इस मामले में मेरठ पुलिस द्वारा गहन छापेमारी की गई और और कुर्की का वारंट जारी किया गया। इसके साथ ही उस पर 25,000 रुपए का इनाम रखा गया। इसकी वजह से हिस्ट्रीशीटर हाजी गल्ला और उनके चार बेटों को 7 अक्टूबर को अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
हाजी गल्ला की गिरफ्तारी के बाद मेरठ पुलिस ने सोतीगंज कबाड़ी बाजार के 32 कबाड़खानों पर गुपचुप तरीके से नजर रखनी शुरू कर दी, जो चोरी की गाड़ियों को काटने का काम करते थे। इस संबंध में पुख्ता सबूत इकट्ठा किए गए और पाया गया कि उन्होंने अवैध रूप से लगभग 48 अरब रुपए की संपत्ति बनाई है। जुटाए गए सबूतों के आधार पर मेरठ पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
all these junkies dt supplied auto parts all over India were all Muslims. The #Yogi govt secretly kept an eye on 32 junkyards of Meerut’s Sotiganj Kabadi Bazar who used to cut stolen vehicles, complete evidence was collected & it was found dt they have illegally made property ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेरठ के कुख्यात सोतीगंज मार्केट में हाजी गल्ला का परिवार चोरी के वाहनों का कारोबार दशकों से चला रहा है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब जैसे कई राज्यों से विशेष रूप से एनसीआर-दिल्ली से कारें यहाँ लाई जातीं और उन्हें कुछ ही देर में काट दी जातीं। हाजी गल्ला ने एक कार मैकेनिक के रूप में काम की शुरुआत की थी और जल्द ही देश के सबसे बड़े कार चोरी गिरोह का सरगना बन बैठा।
15 मिनट में कारों को काटने की कला में महारत हासिल करने के बाद उनका गिरोह बदनाम हो गया। माना जाता है कि एनसीआर से मेरठ तक एक कार लाने में भले ही 3 घंटे लग जाते हैं, लेकिन उसे वह 15 मिनट में बिना किसी निशान के गायब कर देता था। कारों के लाभकारी उपकरणों को दुकानों में बेचा दिया जाता था, जबकि अन्य सामान को दूसरे वाहनों में लगा दिया जाता था। 70 वर्षीय गल्ला और उसके चार बेटे दशकों से इस अवैध लेकिन बेहद आकर्षक कार-ब्रेकिंग बिजनेस को चला रहे थे। राष्ट्रीय राजमार्ग 58 हाजी गल्ला के ऑपरेशन का लाइफलाइन था।
पिछली सरकार में अपने मजबूत राजनीतिक संबंध के कारण हाजी गल्ला पुलिस से बच गया: मेरठ पुलिस
गल्ला पिछले 15 साल से पुलिस को चकमा दे रहा था। पुलिस ने बताया कि इससे पहले कई बार यह हिस्ट्रीशीटर उनके हत्थे चढ़ा था, लेकिन पिछली सरकार में अपने मजबूत राजनीतिक संबंधों के कारण वह गिरफ्तारी से बच जाता था।
मेरठ पुलिस ने हाजी गल्ला के कबाड़खाने पर छापा मारा
पुलिस के अनुसार, गल्ला के खिलाफ कार्रवाई 27 फरवरी को शुरू हुई, जब उसके बेटे मोहम्मद शादाब ने शहर के ही उसके प्रतिद्वंद्वी स्क्रैप डीलर अरमान अहमद पर गोलियाँ चला दीं। इस घटना में अजय कुमार नाम का एक दर्शक घायल हो गया, इसके कारण शहर में सांप्रदायिक हालात बिगड़ गए। गल्ला को अंततः 6 अक्टूबर की देर रात सोतीगंज में उसके घर के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। उस वक्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी ने उस पर 25,000 रुपए का इनाम घोषित किया था।
12 साल तक फरार रहने के बाद उसे पहली बार फरवरी 2015 में पकड़ा गया था। हालाँकि, उसके राजनीतिक संबंधों के कारण तत्काल रिहाई हो गई। गल्ला देश के उत्तरी राज्यों में संचालित ऑटो चोरी सिंडिकेट में शामिल होने के लिए कुख्यात है। उस पर 2006 में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगा था।
सर्किल ऑफिसर सतपाल अंतिल के अनुसार, गल्ला के खिलाफ हत्या सहित कुल 27 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से कुछ दिल्ली में ही रजिस्टर्ड हैं। मेरठ एसएसपी मंजिल सैनी ने कहा कि हत्याकांड में उसकी गिरफ्तारी हो गई है। उसकी अन्य अवैध गतिविधियों और उनके खिलाफ दर्ज पिछले मामलों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
भारत-पाकिस्तान मैच के बाद पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करने वाले 3 कश्मीरी छात्रों की आज कोर्ट में पेशी के दौरान पिटाई कर दी गई। यूपी के आगरा के आरबीएस कॉलेज के इन तीनों छात्रों को वकीलों ने थप्पड़ ही थप्पड़ मारे। इस दौरान वकील जोर-जोर से भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे बुलंद करते भी दिखाई दिए।
नवभारत टाइम्स द्वारा जारी वीडियो में देखा जा सकता है कि छात्रों के सामने वकील ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद-पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे हैं और साथ में ‘भारत माता की जय’ के नारे बुलंद कर रहे हैं। वहीं पुलिस उन छात्रों को बचाते हुए जीप में बैठा रही है लेकिन वकील शांत नहीं हो रहे।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करने के आरोप में आगरा के राजा बलवंत सिंह इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी कॉलेज (RBS) ने इन तीन कश्मीरी छात्रों को निलंबित करते हुए कार्रवाई की थी। इनकी पहचान- अरशद यूसुफ, इनायत अल्ताफ और शौकत अहमद के तौर पर हुई थी।
इसके बाद भाजयुमो के प्रांतीय नेता गौरव सिंह राजावत और महानगर अध्यक्ष शैलू पंडित की तहरीर पर केस दर्ज किया गया था। आगरा (सिटी) के एसपी विकास कुमार ने बताया, “छात्रों पर पाकिस्तान की प्रशंसा करने वाली चैट साझा करने का आरोप लगाया गया है। जगदीशपुरा थाने में लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है।”
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने टी20 विश्व कप मैच में 24 अक्टूबर, 2021 को भारतीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान से हारने के बाद पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के आरोप में 27 अक्टूबर, 2021 को 5 जिलों में 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। प्रशासन की तरफ से इस तरह देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ देशद्रोह (रासुका) के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश भेज दिए गए हैं।
UP Police have booked 7 people in 5 districts and taken 4 people in custody for allegedly raising pro-Pak slogans or celebrating Pakistan's victory over India in the T20 Cricket World Cup match that took place on Oct 24: CMO pic.twitter.com/o1ceq5L7ED
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के डाउनटाउन में भी पाकिस्तान की जीत पर मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने नारेबाजी करते हुए 24-25 अक्टूबर की रात में पाकिस्तान के समर्थन में जश्न मनाए थे। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ UAPA की धारा 13 और आईपीसी की धारा 105ए और 505 के तहत मामला दर्ज किया था।
त्रिपुरा पुलिस ने राज्य के पानीसागर स्थित एक मस्जिद में आगजनी और तोड़फोड़ के दावों को झूठा करार दिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में सोशल मीडिया में शेयर की जा रहीं तस्वीरों और वीडियो का राज्य में हुई घटना से कोई संबंध नहीं है।
पुलिस द्वारा स्पष्टीकरण जारी करने के बावजूद कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने इस मसले पर ट्वीट कर कहा, “त्रिपुरा में हमारे मुसलमान भाइयों पर क्रूरता हो रही है। हिंदू के नाम पर नफरत व हिंसा करने वाले हिंदू नहीं, ढोंगी हैं। सरकार कब तक अंधी-बहरी होने का नाटक करती रहेगी?”
त्रिपुरा में हमारे मुसलमान भाइयों पर क्रूरता हो रही है। हिंदू के नाम पर नफ़रत व हिंसा करने वाले हिंदू नहीं, ढोंगी हैं।
सरकार कब तक अंधी-बहरी होने का नाटक करती रहेगी? #TripuraRiots
बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए लिखा, “सिर्फ मुस्लिमों के लिए ट्वीट क्यों? सभी धर्मों के लिए क्यों नहीं? बांग्लादेश पर फेविकोल पी लिया था क्या? कश्मीर पर? लखबीर पर? त्रिपुरा पुलिस कह रही है कुछ नहीं हुआ और आप पूरे देश में झूठ फैलाने लग गए। कॉन्ग्रेस पार्टी में कभी कोई ‘हमारे हिन्दू भाई’ क्यों नहीं लिखता?”
सिर्फ मुस्लिमों के लिए ट्वीट क्यों ? सभी धर्मों के लिए क्यों नहीं ?
बंगलादेश पर फेविकोल पी लिया था क्या ? कश्मीर पर ? लखबीर पर ?
त्रिपुरा पुलिस कह रही है कुछ नहीं हुआ और आप पूरे देश में झूठ फैलाने लग गए
वहीं, भूषण लाल भट्ट लिखते हैं, “पश्चिम बंगाल में, कश्मीर में जब हिंदुओं को मारा जा रहा था, काटा जा रहा था, लोग पलायन कर रहे थे तो क्या मुँह में दही जमी थी। कैसे-कैसे जानवर हैं कॉन्ग्रेस में।”
पश्चिम बंगाल में कश्मीर में जब हिंदुओं को मारा जा रहा था काटा जा रहा था, लोग पलायन कर रहे थे तो क्या मुंह में दही जमाए थी। कैसे कैसे जानवर है कांग्रेस में
आयुषी राणा लिखती हैं, “हे इंदिराजी के पौत्र ओर सोनिया जी के सुपुत्र, केवल एक कम्युनिटी से इतना प्यार? अभी कश्मीर में हिन्दुओं की आईडी कार्ड देख देखकर कर हत्याएँ हो रही थीं, तब आप लोग फेवीकोल पीकर बैठे थे?”
हे इंदिराजी के पौत्र ओर सोनिया जी के सुपुत्र केवल एक कम्युनिटी से इतना प्यार ? अभी कश्मीर में हिन्दुओं की आई डी कार्ड देख देखकर कर हत्याएं हो रही थी तब आप लोग फेवीकोल पीकर बैठे थे ?
एक अन्य यूजर ने लिखा, “दिखा दिया औकात राहुल मियां। हिन्दू होने का नाटक करते हो तुम। तुम कभी भी हिन्दू नहीं हो सकता है। कश्मीर का हिन्दू या बंगाल का हिन्दू याद नहीं आया तुमको। कितना जुल्म किया मुसलमान सब हमारे हिन्दू भाइयों पर। कहाँ थे तब तुम।”
दिखा दिया औकात राहुल मियां । हिन्दू होने का नाटक करतो हो तुम । तुम कभी भी हिन्दू नहीं हो सकता है । कश्मीर हिन्दू या बंगाल का हिन्दू याद नहीं आया तुमको कितना जुल्म किया मुसलमान सब हमारे हिन्दू भाईयों को काहां था तब तुम ???
ट्विटर यूजर सुनील लिखते हैं, “यही तुम्हारे असली भाई हैं। जब हिंदुओं पर अत्याचार होता है तो तुम्हारे जैसे लोग फेवीकोल पी लेते हैं। नकली हिंदू के नाते भी तुमसे एक ट्वीट नहीं किया जाता, चाहे बंगाल की घटनाएँ हों चाहे हाल में ही हुई जम्मू कश्मीर की घटनाएँ और दलितों की चिंता तो केवल बीजेपी शासित राज्यों में ही होती है।”
यही तुम्हारे असली भाई है जब हिंदुओं पर अत्याचार होता है तो तुम्हारे जैसे लोग फेवीकोल पी लेते हैं नकली हिंदू के नाते भी तुमसे एक ट्वीट नहीं किया जाता चाहे बंगाल की घटनाएं हो चाहे हाल में ही हुई जम्मू कश्मीर की घटनाएं और दलितों की चिंता तो केवल बीजेपी शासित राज्यों में ही होती है
बता दें कि त्रिपुरा पुलिस ने पानीसागर में मस्जिद पर हमले, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अफवाह बताया है। इस संबंध में सोशल मीडिया पर फेक वीडियो डालने वालों पर FIR भी दर्ज की गई है। यह जानकारी त्रिपुरा पुलिस के IGP (लॉ एन्ड आर्डर) सौरभ त्रिपाठी ने 28 अक्टूबर 2021 (गुरुवार) को दी। यहाँ बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई हालिया हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने रैली निकाली थी। इसके बाद से मस्जिद को निशाना बनाए जाने का दावा किया जा रहा था।
विश्वकप टी 20 मैच में भारत की हार का जश्न मनाने वाली एक और सरकारी कर्मी के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई जम्मू के राजौरी जिला स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्टॉफ साफ़िया मजीद के विरुद्ध हुई है। साफिया मजीद यहाँ ऑपरेशन थियेटर की टेक्नीशियन के तौर पर तैनात थीं।
J&K: Government Medical College, Rajouri terminates services of OT technician, Safiya Majeed, on complaint that she put up a WhatsApp status celebrating India’s defeat against Pakistan in the recent T-20 World Cup match; order says she displayed disloyalty towards the nation
24 अक्टूबर 2021 ( रविवार) को भारत की हार के बाद सफिया मजीद ने अपने व्हाट्स एप स्टेट्स पर पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाता वीडियो डाला था। थोड़ी ही देर में यह स्टेट्स वायरल हो गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मामले का संज्ञान डीएसपी मुख्यालय राजौरी के साथ मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने भी लिया। जाँच के बाद आखिरकार साफ़िया मजीद को बर्खास्त करने का फैसला किया गया। यह आदेश GMC राजौरी के प्रिंसिपल बृज मोहन ने दिए हैं।
साफिया मजीद के बर्खास्तगी आदेश में कहा गया गया है कि, “विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से डीएसपी मुख्यालय, राजौरी के संज्ञान में एक वायरल वीडियो आया है। इस वीडियो का संबंध मिस साफिया मजीद से है जो जीएमसी और एएच में ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत हैं। वीडियो से लग रहा है कि साफ़िया मजीद ने टी -20 विश्व कप 2021 में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय क्रिकेट टीम की हार की ख़ुशी अपने व्हाट्सएप स्टेट्स पर जाहिर की है। यह एक राष्ट्र विरोधी गतिविधि है और राष्ट्र के प्रति विश्वासघात के समान है।”
आदेश में कहा गया है कि संस्थान के किसी भी कर्मचारी को देश के विरुद्ध इस प्रकार के कृत्यों की छूट नहीं दी जा सकती है। बताया जा रहा है कि 21 अक्टूबर 2021 (गुरुवार) को सफिया मजीद 5 दिनों की छुट्टी ले कर गईं थीं। लेकिन पाँच दिनों के बाद भी वो ड्यूटी पर वापस नहीं लौटी हैं। बिना पूर्व सूचना के इस तरह के कृत्य को भी कर्तव्यों में घोर अनुशासनहीनता माना गया है। इस आधार पर साफिया मजीद को 27 अक्टूबर 2021 (बुधवार) को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
आदित्य राज कौल ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पत्र शेयर करते हुए उसे सफिया मजीद की बर्खास्तगी का पत्र बताया है।
In Jammu & Kashmir’s Rajouri the Government Medical College Principal has terminated services of a technician Miss Safiya Majeed for disloyalty towards nation after she celebrated Pakistan victory against India in the recent cricket match. pic.twitter.com/ppx58kPOIZ