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‘3500 रुपए/महीने दे रही मोदी सरकार, 10वीं पास बेरोजगार करें 31 अक्टूबर तक फॉर्म भर कर भेजें’ – Fact Check

सोशल मीडिया पर एक मैसेज तेज़ी से वायरल हो रहा है कि मोदी सरकार ने बेरोजगारों को 3500 रुपए का मासिक भत्ता देने का निर्णय लिया है। इसमें लिखा है कि ‘प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना’ के तहत प्री-रजिस्ट्रेशन चालू है और सभी युवा बेरोजगारों को इसके तहत 3500 रुपए प्रति महीने का भत्ता दिया जाएगा। साथ ही इसके बाद एक लिंक भी सर्कुलेट हो रहा है, जिसे क्लिक करने को कहा जा रहा है।

संदेश में बताया जा रहा है कि प्री-रजिस्ट्रेशन का फॉर्म भरने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। इसमें आवेदन शुल्क शून्य लिखा है और 18 से 40 वर्ष तक के सभी दसवीं पास लोगों को इसके लिए पात्र बताया गया है। इस मैसेज में 31 अक्टूबर, 2021 को इस फॉर्म को भर कर जमा कराने की अंतिम तारीख़ बताई जा रही है। साथ ही जिस वेबसाइट का पता है, वो किसी ब्लॉग का है। व्हाट्सएप्प के माध्यम से ऐसे मैसेज फॉरवर्ड किए जा रहे हैं।

फिर उसमें जो रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुल रहा है, उसमें आवेदनकर्ता का नाम, पिता/पति का नाम, उम्र और राज्य जैसी जानकारियाँ माँगी जा रही हैं। इतना ही नहीं, वेबसाइट खोलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ ‘सबका साथ, सबका विकास’ स्लोगन भी लिखा है और दावा किया गया है कि 2021 में 10 करोड़ से अधिक लोगों और 50 करोड़ परिवारों को इसका लाभ मिलेगा। देखने में ये एक सरकारी वेबसाइट प्रतीत हो, ऐसी कोशिश की गई है।

अब आपको बताते हैं कि इस मैसेज की सच्चाई क्या है। दरअसल, केंद्र सरकार ‘प्रधानमंत्री बेरोजगारी भत्ता’ नाम की कोई योजना चलाती ही नहीं है, ऐसे में इसके तहत रुपए मिलने या फिर इसका आवेदन फॉर्म आने का कोई सवाल ही नहीं उठता। ये किसी की खुराफात है। PIB ने सावधान करते हुए बताया है, “ये दावा फर्जी है। धोखाधड़ी से सावधान रहें। ऐसे फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहें और संदिग्ध वेबसाइटों पर पंजीकरण न करें।”

साथ ही ‘पत्र सूचना कार्यालय (PIB)’ ने लोगों को आगाह किया है कि वो SMS, ईमेल या किसी भी अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से साझा किए जा रहे इस तरह के संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। चेताया गया है कि इस तरह के लिंक्स पर क्लिक करने से आपके साथ धोखाधड़ी हो सकती है। PIB ने अपने फैक्ट-चेक में इस दावे को फर्जी पाया है। हमें भी किसी सरकारी वेबसाइट पर ऐसी किसी भी योजना का जिक्र नहीं मिला।

आजादी के लिए मणिपुर के 22 सेनानियों ने काटी थी कालापानी की सजा, गृहमंत्री अमित शाह ने दिया सम्मान, अंडमान का माउंट हैरियट अब हुआ माउंट मणिपुर

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार (16 अक्टूबर 2021) को कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह स्थित कालापानी में माउंट हैरियट का नाम बदलकर माउंट मणिपुर किया जाएगा। पोर्ट ब्लेयर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह कदम अंडमान की सेल्युलर जेल में सज़ा काट चुके मणिपुर के स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने के लिए उठाया गया है।

इस जनसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में मणिपुर का महत्वपूर्ण योगदान था, लेकिन इसके बाद भी इस राज्य को उचित सम्मान नहीं मिल पाया। इसलिए केंद्र सरकार ने इस चोटी का नाम मणिपुर के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। इसी के साथ मणिपुर सरकार उस स्थान पर एक स्मारक भी बनवाएगी।

अमित शाह ने कहा, “1857 की क्रांति के दौरान और 1891 में पूरे पूर्वोत्तर में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में मणिपुर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। स्वाधीनता के संघर्ष में मणिपुर ने कभी हार नहीं मानी और वहां के लोग लड़ते रहे। उस समय में मणिपुर एकमात्र ऐसा राज्य था जिसने अपना खुद का संविधान लागू किया था। मणिपुर में स्वतंत्रता के संघर्ष के नायक युवराज टिकेंद्रजीत और जनरल थंगल को इंफाल के फ़िदा में सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था। अंग्रेजों को लगा कि ऐसा कर के उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को कुचल दिया है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाद में महाराजा कुलचंद्र ध्वज सिंह और 22 स्वतंत्रता सेनानियों को कालापानी भेजा गया। उन सभी को यहाँ माउंट हैरियट पर रखा गया था। आज उनकी याद में हम माउंट हैरियट का नाम माउंट मणिपुर रख कर उनके योगदान का सम्मान करना चाहते हैं”।

साल 1891 में एंग्लो-मणिपुर युद्ध के बाद मणिपुर के महाराजा कुलचंद्र सिंह और 22 सेनानियों को सेलुलर जेल में कैद किया गया था। इसे कालापानी के नाम से भी जाना जाता है। राजा के भाई और सैन्य कमांडर टिकेंद्रजीत सिंह को युद्ध के बाद ब्रिटिश द्वारा उनके 4 अन्य सहयोगियों के साथ फाँसी दे दी गई थी।

तब महाराजा कुलचंद्र को महारानी के साम्राज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ने के आरोप में लेफ्टिनेंट कर्नल सेंट जॉन मिशेल की अध्यक्षता में एक विशेष आयोग के आगे पेश किया गया था। उनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया गया। इसी के साथ उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश के राधाकुंड भेज दिया गया जहाँ, 1934 में उनकी मृत्यु हो गई थी।

हर वर्ष 13 अगस्त को मणिपुर के लोग अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष में अपनी जान देने वाले सेनानियों की याद में देशभक्ति दिवस मनाते हैं। माउंट हैरियट का नाम माउंट मणिपुर करने का मकसद 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध में मणिपुर के वीर योद्धाओं के बलिदान का सम्मान करना है।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, “यह नामकरण महाराजा कुलचंद्र और कालापानी की सज़ा काटने वाले मणिपुर के अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को एक योग्य श्रद्धांजलि है”। इस निर्णय के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया है।

इसी के साथ मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने आगे बताया कि केंद्र सरकार अंडमान निकोबार द्वीप के माउंट मणिपुर में एक स्मारक बनाने में मणिपुर सरकार की सहायता करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि इसके लिए अंडमान सरकार और मणिपुर सरकार के बीच लीज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया भी चल रही है।

पैसे के लिए किडनी बेचो, सोशल मीडिया पर कैंपन भी… फिर गैंगरेप: केरल से धराए मानव अंग तस्कर शमशाद, महमूद, सैफू

केरल के वायनाड जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते पुलिस ने तीन युवकों को निजी अस्पताल के पास एक फ्लैट में महिला के साथ बलात्कार के आरोप में सुल्तान बाथेरी से गिरफ्तार किया गया था। इनकी पहचान कक्कथु परम्बिल निवासी शमशाद वायनाड, मेनकाठ के फासल महमूद और चेमेनकोडे के सैफू रहमान उर्फ शादिक के रूप में की गई ​थी।

पुलिस जब इस मामले की तह तक गई तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। दरअसल, अब तक पुलिस जिसे बलात्कार का मामला मान कर तहकीकात कर रही थी, वह तो कुछ और ही निकला। पुलिस ने अब संदेह जताया है कि इन आरोपितों के संबंध मानव अंगों का व्यापार करने वाले माफिया से हो सकते हैं। दरअसल, उन तीनों ने सोची-समझी साजिश के तहत उस महिला से पैसा कमाने के लिए एक योजना बनाई थी। इसके लिए आरोपियों ने सोशल मीडिया पर एक कैंपन भी शुरू किया था।

पुलिस के अनुसार, वायनाड जिले के सुल्तान बाथेरी का रहने वाला शमशाद एक महीने पहले महिला को बहला-फुसलाकर उसकी किडनी बेचने के लिए उसे शहर के एक निजी अस्पताल में लेकर गया था। हालाँकि, जब डॉक्टर ने यह बताया कि उसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हैं तो आरोपियों ने सोशल मीडिया पर उसकी बीमारी के जरिए पैसा कमाने की युक्ति बनाई। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन फंडरेजिंग कैंपेन चलाया। बाद में 26 सितंबर को शमशाद उसे कोच्चि ले गया और वहाँ महिला को नशीला जूस पिलाने के बाद बेहोश कर दिया। इसके बाद तीनों ने महिला के साथ कथित रूप से बलात्कार किया।

पुलिस ने ऐसे साक्ष्य जुटाए

पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले थोवरिमाला में कक्कथु परम्बिल के रहने वाले 24 वर्षीय शमशाद वायनाड को गिरफ्तार किया था, जो एक चैरिटी वर्कर होने का दावा करता है। बाद में उसके साथी 23 वर्षीय फासल महमूद और 26 वर्षीय सैफू रहमान उर्फ ​​शादिक को भी गिरफ्तार किया गया था ।

तीनों आरोपितों को पुलिस हिरासत में लेने वाली जाँच टीम अस्पताल और उस होटल से साक्ष्य जुटाने के लिए कोच्चि ले गई, जहाँ वे पीड़िता को लेकर गया था। पीड़िता को इससे पहले इन स्थानों पर ले जाया गया था। सबूत इकट्ठा करने के दौरान पुलिस ने पाया कि शमशाद द्वारा पहले दिया गया बयान गलत था। उसने पुलिस को बताया था कि महिला होटल के कमरे में अकेली आई थी, लेकिन जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखा तो पाया कि वह पीड़िता के साथ होटल गया था। होटल स्टाफ ने भी इसकी पुष्टि की।

मनोरमा से ऑनलाइन बात करते हुए पीड़िता ने उन्हें अपनी आपबीती बताई। उसने बताया कि आरोपित ने वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए उससे संपर्क किया था, ताकि उसके बच्चों का खर्च पूरा हो सके। उसने पीड़िता को 3 लाख रुपये में अपनी किडनी बेचने के लिए भी मना लिया था। जब वह नहीं मानी तो आरोपित ने अंत में उसे 5 लाख रुपए का प्रलोभन दिया। उसके बाद वह आरोपित के साथ कोच्चि के एक अस्पताल में आई थी। लेकिन वहाँ डॉक्टर ने महिला को डायबिटिक होने के कारण उसे किडनी डोनेशन की इजाजत नहीं दी। इससे शमशाद आगबबूला हो गया।

हद तो तब हो गई जब शमशाद ने इसके बाद भी म​हिला को नहीं छोड़ा। इसके बाद वे तुरंत वायनाड लौट आए। पहली एर्नाकुलम यात्रा के दौरान आरोपित ने महिला से 18,000 रुपए लिए, जो उसे सोने की अंगूठी बेचकर मिले थे। हालाँकि, इसके बाद शमशाद ने महिला को उसके स्वास्थ्य का हवाला देते हुए लोगों से ऑनलाइन धन जुटाने प्रलोभन दिया। शमशाद ने महिला से उसका डेबिट कार्ड भी छीन लिया और उसमें से 30,000 रुपए भी निकाल लिए जो उसे दूसरों से मिले थे।

पुलिस ने मनोरमा ऑनलाइन को बताया कि आरोपित मानव अंगों (organ mafia racket) की तस्करी करता था। ये कोच्चि और उसके आसपास के इलाके में बहुत एक्टिव हैं। पुलिस ने अब इस मामले में एक और जाँच शुरू कर दी है। आरोपितों में से एक ‘स्नेहादानम’ नामक धर्मार्थ संगठन (charitable organisation) का पदाधिकारी भी है।

‘और गिरफ़्तारी की बात मत करो, वरना सरेंडर करने वाले साथियों को भी छुड़ा लेंगे’: निहंगों की पुलिस को धमकी, दलित लखबीर को बताया ‘दुष्ट’

सोनीपत के सिंघु बॉर्डर पर ‘किसान आंदोलन’ में कई निहंग सिख जत्थेबंदी बैठे हुए हैं। निहंग सिखों ने ही दलित लखबीर सिंह की बेरहमी से हत्या की थी। इस मामले में भगवंत सिंह और गोबिंदप्रीत सिंह के आत्मसमर्पण के बाद निहंगों ने स्पष्ट कर दिया है कि वो अब अपने किसी साथी का सरेंडर नहीं करवाएँगे। साथ ही धमकाया कि उनके और साथियों को पकड़ने की कोशिश की गई तो जिन्हें पकड़ा गया है, उन्हें भी छुड़ा लाएँगे।

‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए निहंग बाबा राजा राम सिंह ने कहा कि प्रशासन हमसे अब और गिरफ्तारियाँ न माँगे। शनिवार (16 अक्टूबर, 2021) की शाम निहंग जत्थेबंदियों ने सिंह बॉर्डर पर डेरा बना कर बैठक की। बाबा अमनदीप सिंह ने कहा कि बाबा राजा राम सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को यही सजा मिलेगी और इस मुद्दे पर निहंग जत्थेबंदियाँ कोई समझाैता नहीं करेंगी।

2015 के बाद से पंजाब व अन्य राज्यों में गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी की घटनाएँ बढ़ने की बात करते हुए बाबा राजा राम सिंह ने कहा कि हमारे साथियों को मजबूरन सज़ा देनी पड़ी, क्योंकि किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि 2015 से अब तक न्याय मिल जाता तो उन्हें कानून हाथ में नहीं लेना पड़ता। उन्होंने दलित लखबीर की हत्या को हालात को देख कर की गई कार्रवाई बताते हुए कहा कि भाजपा किसानों को कुचल दे तो ठीक और हम सज़ा दें तो सवाल, ये नहीं चलेगा।

उन्होंने दलित लखबीर सिंह को ‘दुष्ट’ करार देते हुए कहा कि उसे सही सज़ा दी है, वरना आगे न जाने वो क्या-क्या करता। उन्होंने कहा कि उसे किसी जाति-धर्म से न जोड़ा जाए। निहंग बाबा राम सिंह ने मायावती की बसपा को ‘ब्राह्मणों की पार्टी’ करार दिया। बता दें कि मायावती ने लखबीर की हत्या पर सवाल उठाए थे। निहंगों ने बसपा को ‘भाजपा के चट्टे-बट्टे’ में गिनते हुए कहा कि सतीश चंद्र मिश्रा ही आजकल बसपा हैं और वो ब्राह्मण हैं।

उधर शिरोमणि पंथ अकाली बुड्ढा दल के जत्थेदार अमान सिंह शुक्रवार को धमकी दी कि अगर कोई बेअदबी करता है तो गुरू की फौजें ऐसा ही करती हैं। अमान सिंह का कहना है कि गुरू की फौजों का यही कर्तव्य है। अमान सिंह ने कहा था कि अगर किसानों का प्रदर्शन चलेगा निहंग उनकी सुरक्षा करेंगे। अगर पुलिस किसानों पर कार्रवाई करेगी तो हम उनकी सुरक्षा करेंगे। उन्होंने पिछले साल वाली बात दोहराते हुए कहा कि हम किसानों और पुलिस के बीच की दीवार हैं।

सब इंस्पेक्टर अफसर अली, बीवी नजमा (5 महीने की गर्भवती)… नहीं दे पाया तलाक तो स्कॉर्पियो से कुचल कर मार डाला, हुआ गिरफ्तार

हरियाणा के रेलवे पुलिस में तैनात सब इंस्पेक्टर अफसर अली पर अपनी बीवी की हत्या करवाने का आरोप है। मौत के समय सब इंस्पेक्टर की बीवी नज़मा 5 माह की गर्भवती थी। यह घटना हरियाणा के यमुनानगर की है। आरोपित की गिरफ्तारी 16 अक्टूबर 2021 (शनिवार) को की गई है।

आरोपित की गिरफ्तारी की पुष्टि यमुनानगर पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से की है। पुलिस ने लिखा है – “जिला की अपराध शाखा-1 की टीम को मिली बड़ी कामयाबी। 5 महीने की गर्भवती पत्नी की योजनाबद्ध तरीके से हत्या करवाने वाला रेलवे पुलिस में तैनात उपनिरीक्षक गिरफ्तार। जिसकी पहचान मुरादाबाद के गाँव जफराबाद वासी अफसर अली के रूप में हुई।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपित अफसर अली उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का रहने वाला था और नज़मा उत्तर प्रदेश के ही बरेली में रहती थी। रेलवे पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर तैनात अफसर अली की मृतका नज़मा से पहली बार फेसबुक पर जान-पहचान हुई थी। कुछ समय बाद दोनों की मुलाक़ात भी होने लगी। जल्द ही दोनों में संबंध भी बन गए। इसके बाद अफसर अली नज़मा से पीछा छुड़ाने की कोशिश करने लगा।

नज़मा पुलिस में शिकायत न करे, इसके चलते अफसर अली ने मजबूरन उससे निकाह किया। दोनों का निकाह 2019 में हुआ। शुरू में अफसर अली नज़मा तो तीन तलाक दे कर पीछा छुड़ाने के चक्कर में था। इसी बीच तीन तलाक क़ानून आ जाने के कारण वो अपने इस इरादे में सफल नहीं हो पाया।

कुछ समय बाद ही अफ़सर अली नज़मा को प्रताड़ित करने लगा। धीरे धीरे दोनों के बीच मनमुटाव हो गया। लगातार प्रताड़ना के बाद नजमा के परिजनों ने अफसर अली की शिकायत महिला थाने में की। अफसर अली ने बात को न बढ़ाते हुए समझौता कर लिया। इस के बाद अफसर अली नजमा को लेकर पृथ्वी नगर फरकपुर में रहने लग गया था।

मृतका नजमा के भाई मोहम्मद इदरीश ने मीडिया से बात की। उसने बताया, “शादी के बाद से ही अफसर अली दहेज की माँग करने लगा था। उसे मकान बेच कर 12 लाख रुपये दिए भी गए गए थे। इस बीच वो दूसरी शादी करना चाह रहा था। दूसरी शादी में उसको 50 लाख रुपए मिलने थे। इसी के साथ वो नज़मा की शिकायत के बाद इंस्पेक्टर पद से डिमोट कर के सब इंस्पेक्टर बना दिया गया था। इसी वजह से उसने मेरी बहन को मार डाला।”

नज़मा की हत्या के लिए अफसर अली ने पूरी तैयारी की। उसने पूरी सोची-समझी घटना को दुर्घटना का रुप देने की कोशिश की। अपनी योजना में उसने अपने चचेरे भाई को भी शामिल कर लिया। योजना को अंजाम देने के लिए अफसर अली ने नज़मा को बाहर घुमाने ले जाने के लिए तैयार किया। बाहर पहले से ही तैयार उसके चचेरे भाई ने स्कॉर्पियो गाड़ी नज़मा पर चढ़ा दी। बुरी तरह से घायल नज़मा को अस्पताल ले जाया गया। वहाँ पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

यमुनानगर पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने इस मामले की जाँच क्राइम ब्राँच को सौंपी। क्राइम ब्राँच ने मामले को सुलझाते हुए खुलासा कर दिया और मुख्य आरोपी सब इंस्पेक्टर अफसर अली को गिरफ्तार कर लिया। इस खुलासे की सबसे बड़ी कड़ी वो वाहन बना, जिस से नज़मा को ठोकर मारी गई। वह वाहन आरोपित अफसर अली के गाँव की ही निकली।

आखिरकार आरोपित सब इंस्पेक्टर ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस आरोपित सब इंस्पेक्टर का अदालत से रिमांड लेगी। पुलिस के अनुसार इस केस से जुड़े अन्य आरोपितों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

CPI(M) सरकार ने महादेव मंदिर पर जमाया कब्ज़ा, ताला तोड़ घुसी पुलिस: केरल में हिन्दुओं का प्रदर्शन, कइयों ने की आत्मदाह की कोशिश

श्रद्धालुओं के भारी विरोध के बावजूद केरल की CPI(M) सरकार ने कन्नूर में स्थित मत्तनूर महादेव मंदिर का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। केरल में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की सरकार ने मालाबार देवस्वोम बोर्ड के माध्यम से इस मंदिर का प्रबंधन और प्रशासन अपने हाथों में लिया। बुधवार (13 अक्टूबर, 2021) को भारी संख्या में पुलिस बल के साथ अधिकारी यहाँ पहुँचे और मंदिर का नियंत्रण अपने हाथों में लिया।

श्रद्धालु इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने अधिकारियों को रोकने की भरपूर चेष्टा की, लेकिन अधिकारीगण किसी तरह मंदिर परिसर का ताला तोड़ कर भीतर घुसने में कामयाब रहे। कई श्रद्धालुओं ने मंदिर व उसकी संपत्ति पर सरकारी कब्जे के विरोध में वहीं पर आत्मदाह का भी प्रयास किया, लेकिन केरल पुलिस ने किसी तरह उन्हें वहाँ से पकड़ के हटाया। भक्तों ने केरल सरकार पर समृद्ध मंदिरों की संपत्ति पर कब्जे का आरोप लगाया।

हिन्दू श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि मालाबार देवस्वोम बोर्ड के अधिकारियों के साथ-साथ सत्ताधारी वामपंथी दलों के कई कार्यकर्ता भी साथ आए थे, जिन्होंने जबरन मंदिर परिसर में घुस कर बोर्ड लगा दिया। बताया जा रहा है कि इसके लिए पहले से कोई नोटिस नहीं दी गई थी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस बाबत पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है, इसीलिए सरकार की ये कार्यवाही गलत है।

उक्त मंदिर 1970 की दशक में खुद ही काफी बुरी स्थिति में हुआ करता था। लेकिन, भक्तों ने इस मंदिर को समृद्ध बनाया। स्थानीय लोगों ने इस मंदिर के पुनरुद्धार में बड़ी भूमिका निभाई। मालाबार देवस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि मंदिर के कर्मचारियों को काफी कम रुपया मिल रहा है और केरल में इस तरह की चीजों की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने मंदिर को परंपरा और आस्था का स्थल बताया।

मुरली ने कहा कि उन्होंने यहाँ के कर्मचारियों से बात की है और पता चला है कि उन्हें मात्र 13,000 रुपए प्रति महीने मिलते हैं, जबकि मंदिर इससे कहीं अधिक देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि बोर्ड के संरक्षण में इस समस्या को सुलझाया जाएगा। एक्टिविस्ट राहुल ईश्वर ने कहा कि भारत भले 1947 में आज़ाद हो गया हो, मंदिरों को स्वतंत्रता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि सन् 1812 का अंग्रेजों वाला सिस्टम अब तक चला आ रहा, जब उन्होंने लोगों को दबाने के लिए मंदिरों का प्रबंधन ब्रिटिश सरकार के हाथों में दे दिया गया था।

उन्होंने कहा कि मुस्लिमों और ईसाईयों की तरह हिन्दुओं को ही उनके धर्मस्थल के नियंत्रण, प्रबंधन और प्रशासन का अधिकार मिलना चाहिए। बता दें कि केरल में सभी मंदिरों को कोचीन, त्रावणकोर, मालाबार और गुरुवायुर बोर्ड्स के जरिए सरकार ही नियंत्रित करती है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के अलावा सद्गुरु जग्गी वासुदेव भी मंदिरों की मुक्ति के लिए आंदोलन चलाते रहे हैं। उत्तरी केरल में स्थित इस मंदिर पर राज्य सरकार पिछले एक दशक से कब्ज़ा जमाने पर तुली थी।

हिन्दू संगठनों ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ और ‘हिन्दू आइका वेदी’ ने इसके विरोध में एक सप्ताह लंबे विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। मंदिर प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आपत्ति दर्ज कराएगा। मंदिर कमिटी के अध्यक्ष सीएच मोहनदास ने कहा कि सरकार द्वारा एकपक्षीय ढंग से मंदिर पर कब्ज़ा जमाया गया है। मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्त कराने के लिए दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही सुनवाई चल रही है।

‘NCB के सामने आर्यन खान ने पकड़े कान’ – मीडिया रिपोर्ट में ‘कोई भी गलत काम नहीं करूँगा’ के अलावे यह बात भी

हिंदी सिनेमा में काम करने वाले वाले शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान इन दिनों मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं। इस बीच उनसे जुड़ी एक खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि आर्यन जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की हिरासत में थे, तब एजेंसी द्वारा उनकी काउंसलिंग की गई थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसलिंग के दौरान आर्यन ने NCB के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े से वादा किया, ”मैं अच्छा इंसान बन कर अच्छे काम करूँगा। गरीबों के कल्याण के लिए काम करूँगा, जिससे एक दिन आपको मुझ पर गर्व होगा।”

क्रूज ड्रग्स पार्टी केस में गिरफ्तार 23 वर्षीय आर्यन ने काउंसलिंग के दौरान NCB को यह भी भरोसा दिलाया कि जेल से बाहर आने के बाद वह कोई भी गलत काम नहीं करेंगे, जिससे उनका नाम खराब हो।” बताया जा रहा है कि NCB के समीर वानखेड़े के साथ NGO वर्कर्स ने भी आर्यन की काउंसलिंग की थी।

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आर्यन खान ने NCB के सामने कान भी पकड़े। मीनाक्षी श्रीयान नाम की पत्रकार ने भी ट्वीट कर लिखा – “NCB की काउंसलिंग में आर्यन खान ने पकड़े कान, कहा- जेल से बाहर आने के बाद नहीं लगाऊँगा ड्रग्स को हाथ, गरीबों की करूँगा सेवा।”

दरअसल, शाहरुख और उनकी बीवी गौरी खान अपने बेटे की गिरफ्तारी के बाद से बेहद परेशान हैं। लाख कोशिशों के बाद भी वह अपने बेटे को जेल से निकालने में कामयाब नहीं हो पाए। माँ गौरी बेटे को लेकर काफी चिंतित हैं। यही कारण है कि उन्हें आर्यन के लिए भगवान की शरण में जाना पड़ा। उन्होंने बेटे की घर वापसी के लिए नवरात्रि में मन्नत भी माँगी थी।

बता दें कि मुंबई की स्पेशल NDPS कोर्ट ने 14 अक्टूबर को आर्यन की जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। आर्यन खान को एनसीबी ने 2 अक्टूबर को मुंबई से गोवा जा रहे जहाज में ड्रग्स पार्टी के दौरान छापेमारी कर गिरफ्तार किया था। इसके बाद से ही आर्यन खान जेल में है।

इस मामले की अगली सुनवाई 20 अक्टूबर को होगी। आर्यन खान को आर्थर रोड जेल में 956 कैदी नंबर दिया गया है। इसके अलावा, आर्यन को जेल की कैंटीन से खाना खाने के लिए उनके परिवार ने 11 अक्टूबर को 4500 रुपए भेजे थे। जेल के नियमों के अनुसार, एक कैदी को एक महीने में सिर्फ 4500 रुपए का मनी ऑर्डर पाने की इजाजत है।

पंजाब के किसानों को परेशान मत कीजिए, इंदिरा गाँधी को गँवानी पड़ी है जान’: शरद पवार ने PM मोदी को दी चेतावनी, परिणाम बुरे होंगे

राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने शनिवार (16 अक्टूबर 2021) को नरेंद्र मोदी सरकार को पंजाब के किसानों को परेशान नहीं करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने पंजाब को ‘परेशान’ करने के कारण अपनी जान गंवा चुकी हैं। इसलिए केंद्र को तथाकथित किसानों के आंदोलन को यह ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए कि अधिकांश प्रदर्शनकारी इसी सीमावर्ती राज्य से हैं।

शरद पवार ने यह बयान महाराष्ट्र के पिंपरी में मीडिया से बात करते हुए दिया। उन्होंने कहा, “भारत ने पंजाब को परेशान करने की कीमत चुकाई है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अपना जीवन खो दिया।”

एनसीपी चीफ ने आगे कहा, “केंद्र सरकार को मेरी सलाह है कि पंजाब के किसानों को परेशान न करें, क्योंकि यह एक सीमावर्ती राज्य है। पंजाब के किसान बहुत बेचैन हैं और परेशान हैं। अगर आप सीमावर्ती राज्य के किसानों और लोगों को और अधिक परेशान करेंगे तो इसके दूसरे परिणाम भी होंगे।” पवार ने कहा कि पंजाब के सिख और हिंदू दोनों किसान देश में खाद्यान्न उत्पादन में योगदान दे रहे हैं।

पंजाब के प्रदर्शनकारियों के प्रति सहानुभूति जताते हुए शरद पवार ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षा संबंधी कई मुद्दों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पवार के मुताबिक, “ऐसी चीजों का अनुभव महाराष्ट्र जैसे राज्यों में रहने वाले व्यक्तियों को नहीं होता है। इसलिए, जब बलिदान करने वाला व्यक्ति कुछ माँगों के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहा है और लंबे समय तक बैठा है तो उस पर ध्यान देना राष्ट्र की आवश्यकता है। मैं एक दो बार इस प्रदर्शन का दौरा कर चुका हूँ। कृषि कानूनों पर केंद्र का रुख तर्कसंगत नहीं है।”

पवार ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब कथित किसानों का आंदोलन स्थल अराजकता फैलाने और मासूम नागरिकों की हत्या केंद्र बन गए हैं। ऐसा लगता है कि जैसे इन सब के जरिए अलगाववादी खालिस्तानी आंदोलन को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है। उनके बयान से कई लोगों को ऐसा लग रहा है कि शरद पवार किसानों के विरोध के नाम पर फैलाई जा रही अराजकता और हिंसा का बचाव कर रहे हैं। इसीलिए उन्होंने यह कहा कि अगर केंद्र सरकार इस मामले में कोई कार्रवाई करती है तो जैसा इंदिरा गाँधी के साथ हुआ, वैसे ही गंभीर परिणाम होंगे।

उल्लेखनीय है कि अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में शरण लिए हुए खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले को खत्म करने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार के लिए पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी ने इजाजत दी थी। इसके बाद ही 31 अक्टूबर 1984 को उनके दो सिख बॉडीगीर्ड ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद भारत में बड़े पैमाने पर सिख विरोधी दंगे भड़क उठे। उन दंगों का नेतृत्व कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने किया था।

कुछ दिनों पहले भी कुंडली बॉर्डर पर किसानों के विरोध के दौरान निहंग सिखों द्वारा एक दलित व्यक्ति लखबीर सिंह को तालिबानी शैली में पीट-पीट कर मार डाला गया था। इससे पहले उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भी ऐसी ही हिंसा देखने को मिली थी, जहाँ आठ लोगों की जान चली गई थी। प्रदर्शनकारियों ने इस साल की शुरुआत में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान दिल्ली में हिंसा और अराजकता का प्रदर्शन किया था। ऐसी हत्याओं और अराजकता पर विपक्ष चुप रहा और ऐसा लगता है कि इस तरह के अक्षम्य कृत्यों का बचाव करने के लिए खुले तौर पर प्रयास किए गए हैं।

बीजेपी ने किया विरोध

भाजपा ने हत्या वाली टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा है कि शरद पवार ने जानबूझकर यह बयान दिया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता राम कदम ने कहा, “यह वरिष्ठ नेता शरद पवार का एक बेहद भयावह बयान है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि उनके जैसे बड़े नेता ने जानबूझकर यह बयान दिया है। यह और कुछ नहीं बल्कि सिख समुदाय और किसानों को भड़काने की कोशिश है। यह प्रधानमंत्री के जीवन के लिए एक गंभीर खतरा है।”

गौरतलब है कि एनसीपी महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार का हिस्सा है। शरद पवार अक्सर केंद्र पर भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच के नाम पर महाराष्ट्र सरकार को अस्थिर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते रहते हैं।

सिद्धू ने सोनिया गाँधी को लिखा पत्र, पंजाब में कृषि कानून लागू नहीं करने सहित चुनावी घोषणा पत्र के लिए माँगा समय

पंजाब कॉन्ग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी के घोषणा-पत्र में शामिल करने 13 सूत्रीय एजेंडा पेश करने के लिए एक बैठक की माँग की है। सिद्धू ने सोनिया गाँधी के साथ व्यक्तिगत मुलाकात की माँग करते हुए कहा कि यह ‘पुनरुत्थान और छुटकारे के लिए’ पंजाब का आखिरी मौका है। सिद्धू ने यह पत्र शुक्रवार (15 अक्टूबर) को लिखा था, जिसे रविवार को उन्होंने ट्वीट किया।

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लिखे पत्र में सिद्धू ने मुख्य तौर पर पंजाब मॉडल, बेअदबी के मामलों में न्याय, पंजाब में ड्रग्स का खतरा, कृषि मुद्दा, रोजगार के अवसर, रेत खनन और पिछड़े वर्गों के कल्याण से संबंधित मुद्दों का जिक्र किया है। कॉन्ग्रेस नेता ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को पंजाब में लागू नहीं करने की माँग की है।

सिद्धू चाहते हैं कि पंजाब सरकार कृषि कानून को मानने से इनकार कर दे। इसके अलावा उन्होंने फल, सब्जी, तिलहन और दलहन को एमएसपी के रेट पर खरीदने की माँग की है। नवजोत सिंह सिद्धू ने राज्य में 24 घंटे सस्ती बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी मुद्दा उठाया।

गौरतलब है कि सिद्धू ने 28 सितंबर को पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था और अपना इस्तीफा ट्विटर पर पोस्ट किया था। वो केवल 72 दिन ही इस पद पर टिक पाए थे। उन्होंने कहा था कि समझौते करने से व्यक्ति का चरित्र खत्म हो जाता है।

इससे पहले उन्होंने इसी हफ्ते दिल्ली में राहुल गाँधी से मुलाकात की थी। सिद्धू की गाँधी से मुलाकात एआईसीसी मुख्यालय में एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और रावत से मुलाकात के एक दिन बाद हुई। सिद्धू की गाँधी से मुलाकात के दौरान रावत भी मौजूद थे। बैठक से बाहर निकलते हुए सिद्धू ने मीडिया से कहा था, “मुझे जो भी चिंताएँ थीं, मैंने उन्हें राहुल जी के साथ साझा किया। उन सभी चिंताओं को सुलझा लिया गया है।” इसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफा भी वापस ले लिया।

राम ‘छोकरा’, लक्ष्मण ‘लौंडा’ और ‘सॉरी डार्लिंग’ पर नाचते दशरथ: AIIMS वाले शोएब आफ़ताब का रामायण, Unacademy से जुड़ा है

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें रामायण का मजाक उड़ाया जा रहा है। ये सामने नहीं आया है कि ये वीडियो कब का है, लेकिन कहा जा रहा है कि 2020 में NEET की परीक्षा में पूरे भारत में पहला रैंक लाने वाले शोएब आफताब इसके वीडियो होस्ट हैं। वो ऑनलाइन शैक्षिक प्लेटफॉर्म Unacademy से भी जुड़े हुए हैं। जिस वीडियो को लेकर विवाद है, उसे दिल्ली AIIMS के छात्रों ने शूट किया है।

वायरल वीडियो में तब के दृश्य का मजाक उड़ाया गया है, जब रावण की बहन सूर्पनखा वनवास काट रहे राम और लक्ष्मण के पास पहुँचती है। वीडियो में इस दौरान राम के किरदार को कहते हुए दिखाया गया है, “अगर तुझे इतनी ही ठरक है तो तू मेरे भाई लक्ष्मण के पास चला जा।” नाक काटे जाने के बाद सूर्पनखा इस वीडियो में लक्ष्मण को ‘अबे ओ लौंडे’ कहते हुए दिखाया गया है। लोग इस एक्ट का विरोध कर रहे हैं।

वीडियो में राम ‘बाहुबली’ के डायलॉग से प्रेरित ये डायलॉग बोलते हैं, “लक्षमण, लड़कों को छेड़ने वाली लड़कियों की नाक नहीं काटते, काटते हैं उसकी गर्दन।” इसके बाद प्रतीकात्मक रूप से राम को सूर्पनखा की गर्दन काटते हुए दिखाया गया है और भीड़ ठहाके लगाती है। इसके बाद एक व्यक्ति कहना दिखाई देता है, “नमस्कार, मैं रवीश कुमार। आज अमेजॉन के जंगल में राम नाम के एक लौंडे ने सूर्पनखा का ख़त्म कर दिया।”

इसके बाद रावण ये पूछते हुए दिख रहा है कि कौन नया ‘छोकरा’ आ गया है? रावण को इसमें भोजपुरी में कहते हुए दिखाया गया है कि उसकी (राम की) ‘लुगाई (पत्नी)’ को उठा लो। एक अन्य दृश्य में मंथरा को कैकयी से कहते हुए दिखाया गया है, “तेरी तो इज्जत दारू-पानी के चखने से भी कम रह जाएगी।” कैकयी कहती है, “मैंने गलत निर्णय ले लिया। मुझे अपने कॉलेज वाले बंदे के साथ भाग जाना चाहिए था।”

इतना ही नहीं, रामायण के इस कथित एक्ट में राजा दशरथ को ‘सॉरी डार्लिंग’ गाने पर कान पकड़ के नाचते हुए भी दिखाया गया है। कैकयी कहती है, “अगर तुमने मेरे दो वचन नहीं माने तो मेरे कमरे में तुम्हारी नो एंट्री।” साथ ही इसमें राम को अमेज़ॉन जंगल भेजने की बात की जाती है। राजा दशरथ को इस वीडियो में अजोबोग़रीब हरकतें करते हुए दिखाया गया है। नाटक के दौरान लोग लगातार हँस भी रहे होते हैं।

शोएब आफताब यूट्यूब पर ‘AIIMS Insider’ नाम का एक चैनल भी चलाता है। इसके जरिए वो NEET व अन्य मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को सलाह देता है। साथ ही Unacademy के जरिए वो कोचिंग भी पढ़ाता है। यूट्यूब पर उसके 49,000 सब्सक्राइबर्स भी हैं। इस दौरान वो नैनीताल जैसी जगहों की यात्रा कर के वीलॉग भी शूट करता है। साथ ही क्रिकेट मैच के वीडियोज भी डालता है।