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‘जैसा बोया, वैसा काटा’: Scroll की वामपंथी लेखिका जेनेसिया अल्वेस ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले को ठहराया सही

वामपंथी पोर्टल स्क्रॉल की लेखिका और स्तंभकार जेनेसिया अल्वेस ने शनिवार (16 अक्टूबर 2021) को बंगलादेश में इस्कॉन मंदिर और हिंदुओं पर हुए हमलों को सही ठहराया है। स्तम्भकार जेनेसिया अल्वेस ने ट्वीट कर के लिखा – ‘जैसा तुमने बोया’।

जेनेसिया अल्वेस का ट्वीट

अल्वेस ने यह ट्वीट इस्कॉन के उस ट्वीट को quote करते हुए लिखा है, जिसमें बांग्लादेश के नोआखली में मंदिर और भक्तों पर निर्दयता से हुए हमले की जानकारी दी गई थी। दरअसल, बांग्लादेश के धार्मिक संगठनों ने मुस्लिम बहुल बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से हिंदुओं की सुरक्षा की माँग की थी।

हालाँकि अल्वेस ने पूरे वाक्य ‘जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे’ के एक हिस्से ‘जैसा बोया” को लिखकर हिन्दुओं पर हुए इस क्रूर हमले को सही ठहराया है और इससे ये संकेत मिलता है कि बांग्लादेश में हिंदुओं को इसलिए मारा जा रहा है, क्योंकि ‘उन्होंने ऐसे ही बोया था’। यह पूरा वाक्य ‘जैसा तुम बोओगे, वैसा ही काटोगे’ मूल रूप से बाइबिल में है। इस में प्रतिशोध और परिणाम भोगने को लेकर कहा गया है।

अल्वेस के ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स भड़क गए। यूजर्स ने ‘द स्क्रॉल’ की स्तंभकार से सवाल-जवाब शुरू कर दिया। कई लोगों का प्रश्न था कि इस्कॉन मंदिर और हमले के शिकार हिंदू भक्तों ने ऐसा क्या बोया था, जो उनके साथ क्रूरता की गई?

विवाद बढ़ने के घंटों बाद अल्वेस ने इस पर सफाई दी। अपने ‘स्पष्टीकरण’ वाले ट्वीट में उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर किए गए ट्वीट के कारण उन्हें ‘नफरत’ का सामना करना पड़ रहा है।

अपनी सफाई में उन्होंने भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत का दावा किया। उन्होंने बताया कि बंगलादेश में हो रही हिंसा उसी का परिणाम है। अल्वेस के अनुसार, बंगलादेश में हिंदुओं के विरुद्ध हो रही हिंसा भारत में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हो रही हिंसा का ‘आँख के बदले आँख’ जैसा है।

इस प्रकार स्क्रॉल और द स्वैडल की स्तंभकार ने बंगलादेश में विजयदशमी मनाते हिन्दुओं पर इस्लामी भीड़ के हमले को उचित ठहराया। इसके लिए उन्होंने अपना संदर्भ भी दिया। कुछ समय बाद अल्वेस ने विवादित ट्वीट को डिलीट कर दिया। हालाँकि, अल्वेस के पॉडकास्ट अकाउंट ने अपना समर्थन दिया और ‘अंधभक्तों’ के चेहरे उजागर करने की बात कही।

Thursday Bitches द्वारा ये ट्वीट अब डिलीट कर लिया गया है

बंगलादेश में इस्कॉन पर हमला

15 अक्टूबर 2021 दिन शुक्रवार को विजयादशमी के दिन बांग्लादेश के चटगांव डिवीजन के नोआखली जिले में लगभग 400-500 इस्लामी चरमपंथियों की उन्मादी और हिंसक भीड़ ने इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) के मंदिर पर हमला किया। इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई थी। यह हमला फेसबुक से फैलाई गई एक अफवाह के बाद शुरू हुआ।

इस अफवाह में दुर्गा पूजा पंडाल में ‘कुरान का अपमान’ करने की बात फैलाई गई थी। इसके बाद हिन्दुओं और उनके पूजा स्थलों पर हमले के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। बंगलादेश के चाँदपुर इलाके में पथराव किया गया और दुर्गा पूजा पंडाल में घुसकर मूर्तियों को तोड़ा गया। हिन्दुओं के परिवारों को भी कई जगहों पर निशाना बनाया गया।

बांग्लादेश के फेनी जिले में स्थिति भयावह: इस्लामी भीड़ का एक साथ कई मंदिरों पर हमला, दर्जनों हिंदू घायल

बांग्लादेश में मंदिरों और हिंदू अल्पसंख्यकों पर क्रूर अत्याचार लगातार जारी है। इसकी वजह से वहाँ का अल्पसंख्यक समुदाय बेहद डरा हुआ है। बांग्लादेश में हिंदुओं के मानवाधिकारों को लेकर मुखर संस्था ‘बांग्लादेश हिंदू यूनिटी काउंसिल’ (बीएचयूसी) की रिपोर्ट के अनुसार, ईशनिंदा के झूठे आरोपों को लेकर हिंदू समुदाय के खिलाफ चल रही हिंसा के बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने देश के चटगाँव डिवीजन के फेनी जिले में एक बार फिर से अल्पसंख्यकों पर हमला किया है।

बीएचयूसी ने शनिवार (16 अक्टूबर, 2021) रात एक ट्वीट में कहा, ”नोआखली के बाद इस बार फेनी में। फेनी की स्थिति बहुत तनावपूर्ण है, तीन-तरफा झड़पें हुईं, मंदिर पर हमले, कई घायल।”

बांग्लादेश हिंदू यूनिटी काउंसिल ने 14 सेकंड का एक वीडियो क्लिप भी साझा किया है। इसमें कट्टरपंथी इस्लामवादियों को सड़कों पर तबाही मचाते हुए देखा जा सकता है। लाठियों से लैस उन्मादी भीड़ बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गई और फिर फेनी जिले में हिंदूओं और हिंदू मंदिरों पर एक साथ हमला किया। इसमें काले रंग के कपड़े पहने और सफेद रंग की टोपी लगाए शख्स हाथों में लाठी लिए लोगों को मारने के लिए उनके पीछे भागते हुए दिखाई दे रहा है।

कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने फेनी जिले में फैलाया आतंक

BDNews24 ने बताया कि कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने फेनी जिले में हिंदू समुदाय पर हमला किया है। यह हमला इस्लामी कट्टरपंथियों ने बांग्लादेश के चटगाँव डिवीजन के चाँदपुर, कुमिला और नोआखली जिलों में दुर्गा पंडालों और हिंदू मूर्तियों की तोड़फोड़ को लेकर प्रदर्शन कर रहे हिंदूओं के खिलाफ किया है। शनिवार को शाम 4:30 बजे से 11:30 बजे के बीच किए गए हमले के दौरान, मंदिरों को लूट लिया गया और तोड़फोड़ की गई।

कथित तौर पर बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अध्यक्ष, शुकदेब नाथ तपन पर जोयकाली मंदिर के पास इस्लामी भीड़ द्वारा हमला किया गया था। हिंदू समुदाय उक्त मंदिर से पुराने ढाका-चटगाँव हाईवे के ट्रंक रोड तक मार्च निकालने की तैयारी कर रहा था। ट्रंक रोड बारा मस्जिद के पास जमा हुए इस्लामवादियों ने हिंदुओं पर लाठियों और ईंटों से हमला किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने फेनी शहर में एक बड़ी टीम तैनात की। उन्होंने अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले भी दागे।

प्रभारी अधिकारी (फेनी मॉडल पुलिस स्टेशन) निजामउद्दीन के अनुसार, झड़पों के दौरान 40 से अधिक लोग घायल हो गए। इसके बाद उन्हें फेनी जनरल अस्पताल ले जाया गया। शुकदेब के मुताबिक, जिला प्रशासन ने बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीएफ) और रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) को भेजने में समय लिया। हमलावरों ने कालीपाल में एक यात्री वाहन को आग लगा दी, ​क्रूड बम फेंके, एक दमकल की गाड़ी में तोड़फोड़ की और जोयकाली, जगन्नाथबाड़ी, कालीबाड़ी मंदिर और गाजीगंज आश्रम जैसे हिंदू मंदिरों पर हमला किया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी की स्टूडेंट विंग की छात्रा जिसका नाम शिबिर है, वो भी अपराधियों में शामिल थी। अवामी लीग और उसकी स्टूडेंट विंग बांग्लादेश छात्र लीग के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने हमलावरों का विरोध करने की कोशिश की। इंस्पेक्टर मोनिर हुसैन (फेनी मॉडल पुलिस स्टेशन) ने कहा, “हमें दुकानों में तोड़फोड़ की रिपोर्ट मिली है। हम इस पर काम कर रहे हैं।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर 13 अक्टूबर की रात हिंदुओं द्वारा कथित रूप से कुरान का अपमान करने का आरोप लगाते हुए एक फेसबुक पोस्ट वायरल की थी। इसके बाद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा बड़े पैमाने पर और लगभग पूरे बांग्लादेश में फैल गई, जो अभी भी जारी है। इस हिंसा के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने कई दुर्गा पंडालों में तोड़फोड़ की और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को खंडित कर दिया। कट्टरपंथी यहीं नहीं रूके, उन्होंने इलाके के मंदिरों के साथ-साथ हिंदुओं के घरों और दुकानों में भी लूटपाट की और उसके बाद आग के हवाले कर दिया। चार दिन बाद शनिवार (16 अक्टूबर) को भी हिंदुओं के खिलाफ देश के कई हिस्सों में हिंसा जारी रही।

‘दक्षिण एशिया में एक बड़ा इस्लामी एजेंडा’: कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने हिंदुओं की टारगेट किलिंग पर जताई चिंता

देश भर में और पड़ोसी देशों में गैर-मुस्लिमों को लगातार टारगेट किया जा रहा है और उनकी हत्याएँ की जा रही हैं। इन हत्याओं ने केंद्र सरकार की चिंताएँ बढ़ा रखी हैं। इस बीच कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने रविवार (17 अक्टूबर 2021) को कहा कि दक्षिण एशिया में एक बड़ा इस्लामिक एजेंडा काम कर रहा है, जो गैर-मुस्लिमों को लगातार निशाना बना रहा है। तिवारी ने कश्मीर और बांग्लादेश में हिंदुओं पर टारगेटेड अटैक को आपस में जुड़ा हुआ बताया।

कॉन्ग्रेस नेता ने ट्वीट किया, “क्या कश्मीर में हो रही गैर-मुसलमानों की हत्याएँ, बांग्लादेश में हो रही हिंदुओं की हत्या और पुंछ में 9 जवानों की शहादत के बीच कोई लिंक है? शायद ऐसा है। दक्षिण एशिया में एक बड़ा इस्लामिक एजेंडा काम कर रहा है।” इसके साथ ही मनीष तिवारी ने दो लिंक्स भी शेयर किए। इनमें से पहला बांग्लादेश के नोआखली में इस्कॉन मंदिर पर कट्टरपंथियों के हमले और बर्बरता से जुड़ा था। और दूसरा जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा मारे गए दो लोगों को लेकर था।

गौरतलब है कि बांग्लादेश के नोआखाली इलाके में जुमे की नमाज के बाद 200 कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं के इस्कॉन मंदिर पर हमला कर श्रद्धालु पार्थ दास की बर्बरता से हत्या कर दी। इस्कॉन ने अपने बयान में बताया था कि पार्थ का शव मंदिर के पास तालाब में तैरता मिला। वहीं, इस्‍कॉन से जुड़े राधारमण दास ने ट्वीट कर बताया कि पार्थ को बुरी तरह से पीटा गया था और जब उनका शव मिला तो शरीर के अंदर के हिस्से गायब थे।

यही नहीं, कट्टरपंथियों मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के दौरान हिंदू समुदाय के एक परिवार की पूरी महिलाओं के साथ बलात्कार को अंजाम दिया। पहले कट्टरपंथियों ने माँ का रेप किया, फिर उसकी बेटी का और फिर भतीजी का। भतीजी की उम्र सिर्फ 10 साल है।

वहीं, जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में शनिवार को आतंकियों गोल-गप्पे बेचने वाले बिहार के एक दूसरे शख्स अरविंद कुमार साह की गोली मारकर हत्या कर दी। वहीं, पुलवामा में यूपी के सगीर अहमद की हत्या कर दी गई।

फिलहाल आतंकियों के सफाए के लिए जम्मू-कश्मीर में सेना ने ऑपरेशन क्लीन लॉन्च किया है। इसके तहत इस महीने अब तक 11 आतंकियों को मारा गया गया है।

‘काबा में पैगंबर मुहम्मद ने तोड़ डाली थी 360 मूर्तियाँ, उनके ही रास्ते पर चल रहे उन्हें मानने वाले’: बांग्लादेश के हालात पर लेखिका ने किया याद

बांग्लादेश में हिन्दुओं, उनके मंदिरों और प्रतिष्ठानों पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले का दौर जारी है। पहले दुर्गा पूजा के दौरान कई पंडालों को तबाह कर दिया गया, उसके बाद इस्कॉन के परिसर में घुस कर भक्तों के साथ मारपीट की गई। अब तक आधा दर्जन से अधिक हिन्दू मारे जा चुके हैं। इसी बीच भारत में रह रहीं बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इस घटना की तुलना पैगम्बर मुहम्मद के समयकाल से की है।

तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “पैगम्बर मुहम्मद ने काबा में पेगन समुदाय की 360 मूर्तियों को खंडित कर दिया था। उनका अनुसरण करने वाले उनके ही नक्शेकदम पर चल रहे हैं।” सुधारवादी लेखिका ने कहा कि बांग्लादेश में जिहाद रोकने का उपाय है कि सभी मदरसों, मस्जिदों, वाज़ महफ़िलों और इज्तेमा को पूर्णरूपेण बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में दो ही तरह के मुस्लिम होते हैं – जिहादी और प्रो जिहादी।

‘खान एकेडमी’ पर प्रकाशित इस्लाम के इतिहास के अनुसार, पैगम्बर मोहम्मद को सन् 620 में मक्का से बाहर निकाल दिया गया था और उन्होंने यथ्रीब में शरण ली थी। उसे ही आज मदीना के नाम से जानते हैं। 629-30 ईश्वी में उनकी वापसी के बाद ये जगह इस्लाम की एक पवित्र स्थल बन गई। इस्लामी युग से पहले काबा में काला पत्थर और पेगन समुदाय की कई मूर्तियाँ थीं। इसमें लिखा है कि पैगम्बर मुहम्मद ने काबा को इन मूर्तियों से ‘साफ़’ कर दिया।

इसमें ये भी बताया गया है कि मूर्तियों से काबा को ‘साफ’ कर के पैगम्बर मुहम्मद ने ‘इब्राहिम के एकेश्वरवाद’ की स्थापना की। माना जाता है कि एंजेल गेब्रियल ने उस काले पत्थर को इब्राहिम को दिया था और इसीलिए इस्लाम में उसका विशेष महत्व है। पैगम्बर मुहम्मद अपने निधन के समय सन् 632 में अंतिम बार मक्का आए थे। आज भी दुनिया भर के मुस्लिम हज के लिए मक्का-मदीना की यात्रा करते हैं।

‘द मॉर्गन’ पर उस तस्वीर का विवरण दिया गया है, जिसमें पैगम्बर मुहम्मद के दादा काबा के उस पत्थर के सामने सिर झुका रहे हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे पैगम्बर मुहम्मद से पहले काबा में 360 मूर्तियाँ हुआ करती थीं, लेकिन पैगम्बर मुहम्मद ने उन सभी को तोड़े जाने का आदेश दिया। तस्लीमा नसरीन ने इसी घटना को याद करते हुए आज बांग्लादेश में खंडित की जा रही प्रतिमाओं से जोड़ा है।

बता दें कि हाल ही में

बांग्लादेश के नोआखाली इलाके में जुमे की नमाज के बाद 200 कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं के इस्कॉन मंदिर पर हमला कर इस्कॉन श्रद्धालु पार्थ दास की बर्बरता से हत्या कर दी। इस्कॉन ने अपने बयान में बताया कि पार्थ का शव मंदिर के पास तालाब में तैरता मिला। वहीं इस्‍कॉन से जुड़े राधारमण दास ने ट्वीट कर बताया कि पार्थ को बुरी तरह से पीटा गया था कि जब उनका शव मिला तो शरीर के अंदर के हिस्से गायब थे।

TMC विधायक मदन मित्रा ने दी कलाई काटने की धमकी, ममता को दुर्गा और राज्यपाल को बता चुके हैं कुत्ता

पश्चिम बंगाल के कमरहटी विधानसभा क्षेत्र के सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के विधायक और राज्य के पूर्व खेल मंत्री मदन मित्रा हाथ काटने की धमकी देकर एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। मित्रा ने उत्तर 24 परगना के कमरहटी क्षेत्र में आने वाले एक खेल के मैदान पर कब्जा करने को लेकर भू-माफियाओं को कलाई काटने की धमकी दी है। इसके पहले वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को देवी दुर्गा बता चुके हैं और राज्य के राज्यपाल जगदीप धनखड़ की तुलना कुत्ते से कर चुके हैं।

मित्रा ने कलाई काटने की धमकी फेसबुक लाइव पर दी। टीएमसी विधायक शनिवार को फेसबुक लाइव में कहा था, “यह मेरी अंतिम चेतावनी है। अगर उन्होंने (भू-माफिया) जमीन पर एक अंगुली भी रखने की कोशिश की तो मैं उनकी कलाई काट डालूँगा।”

उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोग टीएमसी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि वे मुझे डरा-धमका या खरीद लेंगे तो यह उनकी गलतफहमी है। अगर उन्होंने जरूरत पड़ी तो मैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास जाऊंगा और उन्हें बताऊंगा कि कुछ लोग पार्टी के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।” 


उन्होंने कहा है कि कुछ लोग बेलघरिया इलाके में मेघनाद मठ पर एक अपार्टमेंट बनाने की कोशिश कर रहे हैं और पार्टी को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान पर अवैध निर्माण की कोशिश की जा रही है। सांसद सौगत राय के साथ मिलकर वह इस मैदान का सौंदर्यीकरण करना चाहते थे।

उन्होंने चेताया कि जो जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं, उन तीनों के नाम उन्हें पता हैं और वे सभी उनकी नजर में हैं। उन्होंने कहा कि वे उन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएँगे और जरूरत पड़ी तो इस जमीन के लिए जनआंदोलन भी शुरू करेंगे। 

वहीं, नैहाटी से टीएमसी विधायक पार्थ भौमिक ने मित्रा का समर्थन किया। व्यापक जनसमर्थन वाले नेता होने के कारण मित्रा बच्चों के खेलने के अधिकारों को छिनने के कारण व्यथित हैं। हालाँकि, भौमिक ने यह भी कहा कि उन्हें किसी की कलाई काटने जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना।

भौमिक को जवाब देते हुए मित्रा ने कलाई काटने पर माँगी ली। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे शब्दों को वापस लेता हूँ, क्योंकि मैं समझता हूँ। हम सत्ताधारी पार्टी हैं और हमें कुछ संयम दिखाना चाहिए, लेकिन ऐसे लोग केवल ऐसी भाषा समझते हैं। बेलघरिया में भू-माफिया भौमिक के निर्वाचन क्षेत्र की तुलना में अधिक खतरनाक हैं। बेलघरिया में 63 बड़े जलाशय थे, लेकिन भू-माफियाओं ने ऐसे 30 जलाशयों को भर दिया है और उन पर अपार्टमेंट का निर्माण कर दिया।”

वहीं, कमरहटी के पूर्व विधायक मानस मुखर्जी ने कहा कि अगर खेल के मैदान के लिए मित्रा जन आंदोलन शुरू करते हैं तो वह हर तरह उनकी मदद करेंगे।

गौरतलब है कि मदन मित्रा अपने विवादस्पद बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। बयान देने में कभी-कभी अपनी सीमारेखा को पार करते हुए दूसरे की भावनाओं को ठेस पहुँचा देते हैं। अभी हाल ही में उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना देवी दुर्गा से की थी। सौगत रॉय के साथ मित्रा की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, जिसमें वे सीएम ममता बनर्जी की मूर्ति को फिनिशिंग टच देते हुए दिखाई दे रहे थे।

इसके पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं। टीएमसी के विधायक ने 21 जून 2021 को कहा था, ”जगदीप धनखड़ (राज्यपाल) जहाँ भी जाता है, वहाँ उसे काले झंडे दिखाए जाते हैं। अगर यह एक फिल्म का सीन होता, तो एक भौंकने वाला काला कुत्ता दिखाया जाता।”

इसी साल जनवरी में मित्रा ने परशुराम और देवी सीता के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी कर हिंदुओं की भावना को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया था। मित्रा ने कहा था कि परशुराम कभी भी बिना बीफ के खाना नहीं खाते थे और सीता उनके लिए स्वयं बीफ पकाती थीं।

काटेंगे-मारेंगे और दिखाएँगे भी… फिर करेंगे जिम्मेदारी की घोषणा: आखिर क्यों पाकिस्तानी कानून को दिल में बसा लिया निहंग सिखों ने?

सिंघु-कुंडली बॉर्डर पर पंजाब के दलित मजदूर लखबीर सिंह की जिस कारण और जिस तरह से हत्या की गई, वह सबने देखा। सब इसलिए देख पाए क्योंकि हत्या का न केवल वीडियो बनाया गया बल्कि उसे जारी भी किया गया। ऐसा करने का उद्देश्य चाहे जो हो पर इसका परिणाम यह हुआ कि हत्यारे जिस सोच को लेकर न्याय के लिए लड़ने का दावा कर रहे हैं, वह पूरी दुनिया के सामने है। लखबीर सिंह के मृत शरीर के पोस्टमॉर्टम से यह खुलासा हुआ कि उसके शरीर पर 37 घाव थे।

सवा लाख से एक लड़ाने का दावा करने वाले एक से अधिक लोगों ने गुरु ग्रन्थ साहिब की रक्षा के लिए एक कमजोर की निर्मम हत्या कर दी।

हत्या का वीडियो बनाना और उसे जारी करना क्या सामान्य घटना है? फिलहाल तो ऐसा नहीं दिखाई देता। इस घटना को अलग-अलग लोग अपने-अपने तरीके से पेश करेंगे। वीडियो बनाने और उसे जारी करने को लेकर कुछ कयास लगाए जाएँगे और कुछ कयासों के लगाए जाने का अभिनय किया जाएगा। इन कयासों में से कुछ का उद्देश्य अप्रत्यक्ष रूप से इस निर्मम हत्या को उचित ठहराने का या किए गए अपराध की भीषणता को कम करना होगा। दरअसल मीडिया की जानी पहचानी ‘प्रतिभाओं’ में से तमाम लोग इस काम पर लग भी गए हैं। निहंग कौन हैं जैसे विषय पर निबंध लिखा जा रहा है। पत्रकारों द्वारा महीनों तक जिन्हें किसान बताकर पेश किया गया, अब उन्हें किसानों से अलग और निर्दयी हत्यारा बताया जा रहा है।

इन सब के बीच जो प्रश्न अभी तक अनुत्तरित रह गया है वो यह है कि; धर्म की रक्षा के नाम पर किसी निरीह की हत्या करना और उसका वीडियो जारी करने की घटना ने देश में क्या नए ट्रेंड को जन्म नहीं दिया? अभी तक वीडियो जारी करने का यह काम इस्लामी आतंकी संगठन करते आए थे। पिछले कई वर्षों में ISIS जैसे संगठनों द्वारा ऐसा किया गया। तो क्या अब इसे भारत में भी सामान्य बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है?

दूसरा प्रश्न यह है कि क्या अब गैर-इस्लामी संगठन भी अपराध करके उसकी जिम्मेदारी की घोषणा करने लगेंगे? जिस तरह की घोषणाएँ ये निहंग सिख न केवल इस हत्या के पश्चात बल्कि पहले से करते रहे हैं, वे क्या दर्शाती हैं? इन्होंने बड़े साफ़ तौर पर कहा है कि धर्म का अपमान करने वालों की हत्या ये खुद करेंगे। यह घोषणा क्या राकेश टिकैत की उस बात का विस्तार नहीं है, जिसमें उन्होंने लखीमपुर खीरी में ‘किसानों’ द्वारा निहत्थे भाजपा कर्मियों को पीट-पीट कर मारे जाने को सही ठहराया था?

अमृतसर के एक गाँव में लखबीर सिंह की हत्या करने वालों में से एक निहंग नारायण सिंह को उसके गाँव वालों ने फूलों और रुपए की मालाएँ पहनाईं और उसके समर्थन में नारे लगाए। यह ट्रेंड क्या कहता है? ऐसा तो हम अभी तक पाकिस्तान में देखते आए थे। पत्रकार तवलीन सिंह के पूर्व पति और पाकिस्तानी पंजाब के पूर्व गवर्नर सलमान तासीर की हत्या करने वाले उनके बॉडीगार्ड मुमताज कादरी को लोगों का कुछ ऐसा ही समर्थन मिला था। कादरी ने तासीर की हत्या पाकिस्तान के ब्लासफेमी लॉ पर उनके विचारों की वजह से की थी। इसी तरह पाकिस्तान में ही एक सिक्यॉरिटी गार्ड द्वारा अपने बैंक मैनेजर की हत्या इसी ब्लासफेमी के लिए की गई तो उसे भी लोगों का समर्थन मिला था।

प्रश्न यह है कि नारायण सिंह को जिस तरह से समर्थन मिला है, वह क्या भारत में एक नए ट्रेंड की शुरुआत है? क्या कोई आज यह कह सकता है कि निकट भविष्य में यह दोहराया नहीं जाएगा? क्या यह महज संयोग है कि पाकिस्तान की तरह ‘किसान’ आंदोलन की जगह पर भी हुई हत्या का कारण तथाकथित तौर पर ईशनिंदा है?

क्या इनसे यह कहने वाला कोई नहीं कि इनके आराध्य को कुछ कह देना इतना बड़ा अपराध नहीं कि उस व्यक्ति की ऐसी निर्मम हत्या कर दी जाए? आपका भगवान इतना कमजोर नहीं कि कोई कुछ भी करके या कह के उनका अपमान कर सकता है जैसी बात कह कर हिंदुओं को अहिंसा की सीख देने वाले बड़ी आसानी से इन अपराधों के साथ जोड़ी गई तथाकथित ब्लासफेमी को सही ठहराने के लिए पाताल तक जाने के लिए तैयार मिलेंगे।

जल्दी-जल्दी में भारतीय किसान यूनियन ने जिस तरह से हत्या करने वाले इन निहंग सिखों से खुद को अलग किया है, वह देखने लायक है। किसान यूनियन द्वारा किए जा रहे तथाकथित आंदोलन से यही निहंग सिख अपने ढाई सौ घोड़ों के साथ दिसंबर 2020 में ही जुड़े थे और तब से साथ हैं पर आज किसान यूनियन को अचानक याद आया कि उसका इनसे कोई लेना-देना नहीं है। वर्षों से सार्वजनिक जीवन में रहने वाले योगेंद्र यादव जैसे नेता बड़ी आसानी से यूनियन को इन निहंग सिखों से अलग कर लेते हैं। वे ऐसा कर सकते हैं क्योंकि उनसे प्रश्न पूछने वाले को गोदी मीडिया या आईटी सेल वाला बताकर चुप करा दिया जाएगा। वे ऐसा इसलिए कर सकते हैं क्योंकि उनकी सहायता के लिए लोग आगे आ चुके हैं और इस हत्या के पीछे आसानी से किसी सरकारी साज़िश की बात करके सारा दोष सरकार पर मढ़ने की कोशिश शुरू कर चुके हैं।

किसी विपक्षी नेता के घर इनकम टैक्स का छापा हो, प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई हो, आर्यन खान की गिरफ्तारी हो, किसी बंदरगाह पर ड्रग का पकड़ा जाना हो या फिर ‘किसानों’ के आंदोलन में किसी निरीह की हत्या हो, इकोसिस्टम इन सब के पीछे साजिश की बात बड़ी आसानी से कर लेता है। पाकिस्तान में बात-बात पर इस्तेमाल किया जाने वाले शब्द साज़िश का अचानक भारत में इतना व्यापक इस्तेमाल क्या महज संयोग है? यदि ऐसा है तो कहना पड़ेगा कि अचानक संयोगों का मौसम आ गया है।

सरकार को भी स्वीकार करने की आवश्यकता है कि जिस विकास और अर्थव्यवस्था को आगे रखकर वो अभी तक इस ‘किसान’ आंदोलन के प्रति उदासीन रही है, उसी विकास और अर्थव्यवस्था को इस आंदोलन से बड़े स्तर पर हानि हो रही है और यह एक उद्योग, व्यापार और व्यवसाय चलाने वाले एक बड़े समुदाय के विरुद्ध कुछ लोगों द्वारा किया गया अन्याय है। सरकार आतंरिक सुरक्षा के तमाम पहलुओं को निश्चित तौर पर एक आम नागरिक से अधिक समझती है पर एक आम नागरिक यह भी चाहता है कि न्याय केवल होना नहीं चाहिए बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। सरकार के विरुद्ध अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग फ्रंट खोल दिए गए हैं पर यह भी सच है कि सरकार का प्रभुत्व कायम रहे, यह सुनिश्चित करना भी सरकार का ही कर्तव्य है।

डीजल डाल कर जला दिया दलित लखबीर का शव, चेहरा तक नहीं देखने दिया परिजनों को: ग्रामीणों ने किया बहिष्कार

दिल्ली की सिंघु सीमा पर चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में निहंग सिखों ने दलित लखबीर सिंह की बेरहमी से हत्या कर दी थी। उनका गला रेत कर शव को लटका दिया गया था। बगल में उनके दाहिने हाथ को काट कर टाँग दिया गया था। उनके शरीर पर जख्म के 37 निशान थे। अमृतसर के निहंग डेरे में एक हत्या आरोपित को नोटों की माला पहना कर सम्मानित भी किया गया। अब इस मामले में पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार पर संवेदनहीनता के आरोप लग रहे हैं।

माजरा कुछ यूँ है कि दलित लखबीर सिंह के शव का अंतिम संस्कार आनन-फानन में पुलिस की मौजूदगी में कर दिया गया, जिसमें सिर्फ परिवार के लोग ही मौजूद रहे। चीमा कलाँ गाँव का भी कोई व्यक्ति इसमें शामिल नहीं हुआ। लखबीर सिंह पंजाब के तरनतारन के रहने वाले थे। यहाँ तक कि अंतिम संस्कार के दौरान अरदास के लिए किसी सिख ग्रंथी को भी नहीं बुलाया गया। पत्नी जसप्रीत कौर, सास सविंदर कौर, बहन राज कौर और तीन नाबालिग बेटियों सहित 12 परिजन वहाँ उपस्थित रहे।

गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी के आरोप के कारण गाँव के लोग लखबीर सिंह का अंतिम संस्कार वहाँ नहीं होने देना चाह रहे थे। परिवार के किसी सदस्य को कोई भी धार्मिक रस्म अदा नहीं करने दी गई। भारी संख्या में जवान वहाँ एम्बुलेंस से शव लेकर शनिवार (16 अक्टूबर, 2021) को शाम पौने 7 बजे पहुँचे। शव पॉलीथिन में बंद था। परिजनों को चेहरा तक नहीं दिखाया गया। बिना पॉलीथिन उतारे शव को जला दिया गया।

इतना ही नहीं, लकड़ियाँ तुरंत आग पकड़े और सब कुछ जल्दी-जल्दी में निपट जाए, इसके लिए डीजल का इस्तेमाल किया गया। भाजपा आईटी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित मालवीय ने कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए लिखा, “35 वर्षीय दलित सिख लखबीर सिंह, जिनकी हत्या कर दी गई थी, उनका रात के अंधेरे में मोबाइल टॉर्च की रोशनी से आनन-फानन में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके परिवार को उनके बेटे का अंतिम दर्शन भी नहीं करने दिया गया।”

अमित मालवीय ने सवाल दागा कि कॉन्ग्रेस शासित पंजाब में मरे हुए की कोई इज्जत नहीं, सिर्फ इसलिए कि वह एक दलित था? इस मामले में अब तक 4 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, लखबीर सिंह का शव पहुँचने से पहले ही लकड़ियाँ व्यवस्थित कर दी गई थीं और श्मशान घाट लाए जाने के 10 मिनट के भीतर सारी प्रक्रियाएँ निपटा दी गईं। इस दौरान मोबाइल फोन के प्रकाश में काम निपटाया गया।

‘सत्कार कमिटी’ के सदस्यों ने कहा था कि वो सिख धार्मिक रीति-रिवाज से शव का अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे। पंचायत और ग्रामीणों ने भी इसके फैसले को माना। गाँव के लोगों को अंतिम संस्कार में जाने से मना कर दिया गया। वहीं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला ने पंजाब के DGP से कहा है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया न होने देने वाले ग्रामीणों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि ये SC/ST एक्ट के विरुद्ध है, क्योंकि ग्रामीणों ने एक दलित का अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। उन्होंने पंजाब के DGP से इस मामले का संज्ञान लेने को कहा है। विजय सांपला ने कहा कि इस तरह की क्रूरता और अत्याचार उन्होंने ISIS और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों द्वारा किए जाते हुए सुना है, लेकिन हमारे देश में इस तरह की चीजें होना दिल तोड़ने वाला है। उन्होंने पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी से रिपोर्ट भी तलब की है।

बता दें कि लाठी-डंडों के अलावा कई धारदार हथियारों से लखबीर सिंह पर बहुतों बार प्रहार किया गया था। ज़्यादा खून बहने की वजह से उन्होंने दम तोड़ा था। ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ इस घटना से पल्ला झाड़ रही है। आरोपित नारायण सिंह को निहंगों के डेरे पर सम्मानित किया गया था। पीड़ित परिवार ने इस मामले में उच्च-स्तरीय जाँच की माँग की है। खेतिहर मजदूर परिवार का कहना है कि ईश्वर से डरने वाले लखबीर सिंह धार्मिक ग्रन्थ की बेअदबी के बारे में सोच भी नहीं सकते। 

धर्मांतरण रैकेट को ₹100+ करोड़ की विदेशी (अमेरिका और इंग्लैंड से भी) फंडिंग: UP ATS की जाँच तेज, कोर्ट को दिया सबूत

अवैध धर्मांतरण के दुनिया भर में फैले रैकेट की जड़ों को खंगाल रही उत्तर प्रदेश ATS ने अहम सबूत जुटाए हैं। इस मामले में उत्तर प्रदेश के आरोपितों के नेटवर्क खाड़ी देशों के अलावा अमेरिका और इंग्लैंड से भी जुड़े मिले हैं। इन आरोपितों को अवैध धर्मांतरण के लिए पैसे हवाला रैकेट से पहुँचाए जाते रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्रकरण की जाँच कर रही UP ATS ने अब तक 100 करोड़ से भी अधिक अवैध फंडिंग के सबूत जुटा लिए हैं। पकड़े गए आरोपितों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल करते हुए ATS अब तक 89 करोड़ रुपये की फंडिंग की जानकारी भी दे चुकी है।

UP ATS के आरोप पत्र के अनुसार इस पूरे गिरोह का सरगना मौलाना उमर गौतम है, जिसे ब्रिटिश संस्था अल-फला ट्रस्ट से 57 करोड़ की फंडिंग हुई थी। यह पैसा हवाला और अन्य माध्यमों से भेजा गया था। इस आरोप पत्र में कुल 4 अभियुक्तों का जिक्र किया गया है। बाकी 3 आरोपित अवैध धर्मांतरण रैकेट के मुखिया मौलाना उमर गौतम के साथी और सहयोगी हैं।

मौलाना उमर गौतम अवैध धर्मांतरण के लिए पैसा ‘अल-हसन एजुकेशनल एंड वेलफेयर फाउंडेशन’ में मँगाया करता था। मौलाना उमर गौतम को पैसे भेजने वाले स्रोतों ने ही एक अन्य मौलाना कलीम सिद्दीकी को भी 22 करोड़ रुपए भेजे थे। यह पैसे मौलाना कलीम सिद्दीकी के ट्रस्ट ‘जामिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट’ में ट्रांसफर किए गए थे।

इसी रैकेट से जुड़े वडोदरा के रहने वाले सलाहुद्दीन को भी पैसे भेजे गए थे। सलाहुद्दीन की संस्था अमेरिकन फेडरेशन ऑफ मुस्लिम ऑफ इंडियन ओरिजिन है। इस संस्था को 5 वर्षों में लगभग 28 करोड़ रुपए मिले थे। सलाहुद्दीन ने ये पैसे उमर गौतम को दे दिए थे।

एक रिपोर्ट के अनुसार उमर गौतम ने भेजे गए पैसे का 60 प्रतिशत हिस्सा ही धर्मांतरण पर खर्च किया। कलीम सिद्दीकी ने नोएडा, मुजफ्फरनगर समेत कई जगहों पर जमीन खरीदा था। बाद में उसे कम दाम में अपने ही करीबियों को बेच दिया था। इस जमीन को उसने ट्रस्ट के नाम पर खरीदा था।

ATS की पूछताछ में आरोपित खर्च किए गए पैसे की जानकारी नहीं दे पाए। ATS द्वारा पकड़े गए आरोपितों के बैंक खातों में अमेरिका, इंग्लैंड व अन्य खाड़ी देशों से हवाला के जरिए पैसे ट्रांसफर हुए हैं। ट्रांसफर हुआ यह अवैध धन करोड़ों में है, जिसकी जाँच जारी है।

ATS की पूछताछ में आरोपित अपनी कमाई के स्रोतों के बारे में भी नहीं बता पाए हैं। जाँच एजेंसी के अनुसार इन पैसों को आरोपितों द्वारा अपने व्यक्तिगत कार्यों में भी खर्च किया गया है। हवाला से मिली इस फंडिंग से अपने लिए चल अचल सम्पत्तियाँ खरीदी गईं हैं। गिरफ्तार हुए 2 आरोपितों के कनेक्शन आतंकी समूह अल क़ायदा से भी बताए जा रहे हैं।

केरल में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित: 18 लोगों की मौत, दर्जनों लापता

केरल में लगातार जारी भारी बारिश की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं दर्जनों लोग लापता बताए जा रहे हैं।

दक्षिण और मध्य केरल में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं की वजह से हालात बिगड़ने के बाद भारतीय नौसेना ने मोर्चा संभाला है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आपातकालीन बैठक के बाद मीडिया को यह जानकारी दी है।

सीएम विजयन ने कहा, ”हमने आर्मी, नेवी, एयरफोर्स से मदद माँगी है। प्रभावित जिलों में रिलीफ कैंप लगा दिए गए हैं। बारिश के कारण सबसे अधिक कोट्टायम, इडुक्की, पठानमथिट्टा जिले प्रभावित हुए हैं। इन जगहों पर कई गाँव और कस्बे बाकी जगहों से कट से गए हैं।”

केरल के सीएम ने आगे कहा, “24 घंटे का अलर्ट देखा जाना चाहिए और जलस्रोतों के करीब रहने वाले सभी लोगों को बहुत सतर्क रहना होगा और किसी को भी पानी में नहीं जाना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों या अन्य स्थानों पर यात्रा करने से बचें, जहाँ बारिश हो रही है और भूस्खलन की संभावना है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इडुक्की जिले के थोडुपुझा के पास पानी का बहाव तेज होने के कारण वहाँ एक कार बह गई। कुछ घंटों बाद स्थानीय लोगों ने कार से दो लोगों का शव बरामद किया।

बारिश के मद्देनजर अधिकारियों ने 6 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है, जबकि अन्य 6 जिले ऑरेंज अलर्ट पर हैं और दो जिले येलो अलर्ट पर हैं। बताया जा रहा है कि राज्य के सभी 14 जिलों में भारी बारिश हो रही है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कोट्‌टायम के कुट्टिकल में फँसे परिवारों को एयरलिफ्ट करने के लिए नौसेना से सहायता माँगी थी।

बता दें कि केरल में बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान कोट्टायम, पठानमथिट्टा और इडुक्की जिलों में हुआ है। इडुक्की में पीरुमेदु में 270 मिमी की रिकॉर्ड बारिश हुई।

गाजियाबाद में चिकन पॉइंट नाम का ढाबा, रोटियों पर थूक कर सेंकता तमीजउद्दीन… वीडियो वायरल, हुआ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में एक ढाबे पर रोटियों में थूक लगा कर बनाते हुए वीडियो वायरल हुआ है। आरोपित का नाम तमीज़उद्दीन बताया जा रहा है। इस मामले की शिकायत हिन्दू रक्षा दल ने पुलिस में की है। आरोपित की हरकतों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामला शनिवार (16 अक्टूबर 2021) का बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गाज़ियाबाद में भाटिया मोड़ पर पंचवटी अहिंसा वाटिका नाम की मार्केट है। इसी में चिकन पॉइंट नाम की दुकान काफी समय से चल रही है। आरोपित तमीज़उद्दीन इसी ढाबे में तंदूर पर रोटियाँ बनाने का काम करता है। आरोपित तमीज़उद्दीन बिहार के किशनगंज जिले का निवासी है।

यह वीडियो 1-2 दिन पुराना बताया जा रहा है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद हिंदू रक्षा दल के प्रदेश संयोजक गौरव सिसौदिया अपने साथियों के साथ ढाबे पर पहुँचे। शिकायतकर्ताओं के अनुसार आरोपित से जब ऐसा करने की वजह पूछी गई तब उसने अभद्रता की।

लंबी बहस के बाद हिन्दू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने ढाबे को बंद करवा दिया। ढाबे के संचालक शादाब और साहिल हैं। शिकायतकर्ता गौरव सिसोदिया के अनुसार 59 सेकेंड का वीडियो उनको शनिवार (16 अक्टूबर 2021) को मिला था। इसी के बाद वो अपने साथियों के संग ढाबे पर पहुँचे थे।

गाजियाबाद पुलिस ने इस प्रकरण में अपने आधिकारिक हैंडल से जवाब दिया है। गाज़ियाबाद पुलिस के अनुसार – “प्रकरण में थाना कोतवाली पर अभियोग पंजीकृत कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।”

इस घटना की जानकारी जब ऑप इंडिया ने इंस्पेक्टर कोतवाली गाजियाबाद से ली तो उन्होंने आरोपित तमीज़उद्दीन की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। मिली तहरीर के आधार पर FIR धारा 269 और 270 में दर्ज हुई है। पुलिस के अनुसार जाँच के दौरान जो भी अन्य तथ्य प्रकाश में आएँगे उनके आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले के विवेचक सिविल लाइंस चौकी इंचार्ज ने भी बताया कि विवेचना जारी है।