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परिवार की इच्छा से कश्मीर में ही वीरेंद्र पासवान का अंतिम संस्कार: श्रीनगर मेयर ने बताया- प्रशासन ने दिया पूरा सहयोग

बिहार के भागलपुर के रहने वाले स्ट्रीट वेंडर वीरेंद्र पासवान की मंगलवार (अक्टूबर 5, 2021) को श्रीनगर के लाल बाजार में इस्लामी आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। उनका अंतिम संस्कार बुधवार (अक्टूबर 6, 2021) को श्रीनगर में किया गया। यह अंतिम संस्कार वीरेंद्र के परिजनों की सहमति से हुई है। बताया गया कि परिवार ने कश्मीर में ही अंतिम संस्कार करने की बात कही, क्योंकि वे उन्हें बिहार के भागलपुर ले जाने में सक्षम नहीं थे।

मृतक और उसके परिवार को भागलपुर ले जाने के लिए आवश्यक व्यवस्था नहीं करने पर प्रशासन की निंदा की गई। हालाँकि, श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने कहा कि जिला प्रशासन ने वीरेंद्र के परिजनों को उसका पार्थिव शरीर बिहार में उसके पैतृक गाँव में पहुँचाने के लिए पूरी मदद का यकीन दिलाया था। प्रशासन ने उन्हें हवाई जहाज की टिकटें भी नि:शुल्क प्रदान करने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया और कहा कि वह उसकी अंत्येष्टि यहीं कश्मीर में करेंगे। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार यहीं पर किया गया।

न्यूज 18 नेटवर्क के संपादक, शालिन्दर वांगू ने कहा कि परिवार ने श्रीनगर में शव का अंतिम संस्कार करने के लिए इसलिए चुना क्योंकि शव को पटना तक ले जाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वो पटना एयरपोर्ट से भागलपुर तक शव को ले जाने में सक्षम नहीं थे।

वीरेंद्र पासवान सात बच्चों के पिता हैं। उनकी पाँच बेटियों और दो बेटे हैं। उनके भाई और समुदाय के स्थानीय लोगों ने दाह संस्कार में भाग लिया। इस बीच, जिला मैजिस्ट्रेट श्रीनगर मोहम्मद एजाज असद ने दिवंगत वीरेंद्र पासवान की पत्नी पुतुल देवी को 1.25 लाख रुपए की अनुग्रह राशि का चेक तत्काल मदद के लिए प्रदान किया। इसमें 1 लाख रुपए की राशि SDRF के तहत दी गई है और 25 हजार रुपए रेड क्रॉस फंड से दिए गए हैं।

जिला मजिस्ट्रेट मोहम्मद एजाज असद ने कहा कि दिवंगत के परिजनों को और भी आर्थिक मदद दी जाएगी। इस संदर्भ में सभी आवश्यक औपचारिकताओं को अगले कुछ दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। पासवान की हत्या के तुरंत बाद, दो शिक्षक भी मारे गए, जिनमें से एक हिंदू और दूसरा सिख था। 

इधर कोरोना गाइडलाइन के हिसाब से मन रही नवरात्रि, उधर ‘तमंचे पर डिस्को’ डांस कर रहे आरिफ मिंडी के गुर्गे: देखिए Video

कोरोना संक्रमण के कारण राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए प्रतिबंधों के बीच गुजरात के सूरत से एक डांस पार्टी का वीडियो सामने आया है। इसमें कुख्यात आरिफ मिंडी गैंग के कई लोग नाचते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि किसी लड़की के बर्थडे के दौरान ये डांस पार्टी भगतलाव (भगत झील) क्षेत्र में आयोजित हुई थी। सोशल मीडिया पर इस पार्टी के कई वीडियो 2-3 दिन से वायरल हैं। वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे कोरोना गाइडलाइन्स की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।

एक ओर जहाँ राज्य में कोरोना गाइडलाइन को लेकर इतने सख्त निर्देश हैं कि नवरात्रि में रात 12 बजे के बाद गरबा खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहीं असामाजिक तत्व खुलेआम नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। वीडियो में ‘तमंचे पर डिस्को’ गाने पर लड़कियों के साथ डांस किया जा रहा है। इसके अलावा नोटों की बारिश भी साफ देखी जा सकती है। गौर से देखें तो रुस्तमपुर का कुख्यात जफर गोल्डन भी इसमें दिखाई पड़ रहा है।

देख सकते हैं कि पार्टी के नशे में सब ऐसे चूर हो रखे हैं कि किसी को इस बात से मतलब नहीं है कि उनके इर्द-गिर्द छोटे बच्चे भी हैं और वे भी अश्लील डांस पार्टी का हिस्सा बन रहे हैं। वे वहाँ हवा में उछाले जा रहे पैसों को जमीन से उठा रहे हैं।

बता दें कि सूरत के नानपुरा खंडेरवपुरा में आरिफ मिंडी कुख्यात गैंग कुछ दिन पहले युवा कॉन्ग्रेस के महासचिव अफजल रंगूनी पर तलवार से हमला करने के चलते चर्चा में आया था। खबरों के मुताबिक, पार्किंग को लेकर हुए विवाद में 4-5 लोग घायल हुए थे। बाद में दोनों पक्षों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज हुई थी।

1000 कश्मीरी पंडितों को वापस मिली उनकी संपत्ति, हटाया जा रहा स्थानीय मुस्लिमों का कब्ज़ा: आतंकियों के बौखलाहट का कारण यही?

जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने एक बार फिर से हिन्दुओं और सिखों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि ये आतंकी बौखलाए हुए हैं और अनुच्छेद-370 हटने व जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद वो कोई बड़ा हमला नहीं कर पाए, इसीलिए अब इस तरह की कायराना हरकतों को अंजाम दे रहे हैं। लोगों को 1990 का दशक याद आ रहा, जब कश्मीरी पंडितों को वहाँ से भगा दिया गया था और उनकी संपत्तियों को कब्जा लिया गया था।

तब से कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी की तरह रहते आए हैं। उस जमाने में उनका नरसंहार भी हुआ था और महिलाओं की इज्जत लूटी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सत्ता संभालते ही कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे। अब कश्मीरी पंडितों की उन संपत्तियों को वापस छुड़ाया जा रहा है, जिन पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने कब्जा कर रखा है। पिछले 30 वर्षों में पहली बार ऐसा प्रयास हो रहा है।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, पिछले महीने जारी किए गए एक सरकारी पोर्टल के माध्यम से कश्मीरी पंडितों को ये सुविधा दी गई है कि वो देश में कहीं भी रह रहे हों, कश्मीर में अपनी संपत्ति पर कब्जे की शिकायत दायर कर सकते हैं। अब तक ऐसी 1000 शिकायतों पर कार्रवाई हो चुकी है। कई मामलों में धोखाधड़ी से जमीन हड़पने की बात पता चली है। ऐसी हजारों शिकायतें आई हैं, जिनमें से 1000 तो अकेले अनंतनाग में हैं।

जम्मू कश्मीर में पंडितों को वापस मिल रही उनकी जमीन: ‘दैनिक भास्कर’ में प्रकाशित खबर (साभार)

एक मामला तो ऐसा था, जहाँ एक कश्मीरी पंडित की 5 एकड़ जमीन कब्जा ली गई थी। भू-माफिया भी जम्मू कश्मीर में खासे सक्रिय हैं। हिन्दुओं के अलावा सिखों का भी पलायन हुआ था, ऐसे में उनकी संपत्तियों पर भी अवैध कब्जे हैं। अधिकतर मामलों में कब्ज़ा करने वाले पड़ोसी ही हैं। कुछ ऐसे बड़े-बड़े मकान हैं, जो खाली पड़े हुए हैं। सैकड़ों मकान खंडहर भी हो चुके हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि घाटी में लौट रहे कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

अख़बार ने हालिया कार्रवाई के कई उदाहरण भी गिनाए हैं। अनंतनाग में गुलाम रसूल ने एक कश्मीरी पंडित की जमीन हथिया रखी थी, जिसे शिकायत मिलने के 1 सप्ताह के भीतर छुड़ाया गया। एक रैना परिवार की जमीन पड़ोसी मोहम्मद इस्माइल ने ही कब्जा रखी थी, जिसे उसके असली मालिकों को सौंपा जा रहा है। एक कौल परिवार की 6.5 कनाल जमीन मोहम्मद शबीर के कब्जे में थी। कई मामलों में खेती के लिए मिली जमीनें मुस्लिमों ने हथिया ली।

तय हुआ था कि उपज का एक हिस्सा जमीन के मालिकों को भी मिलता रहेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ऐसे मामलों में अब बकाया वसूली की भी तैयारी चल रही है। इसी तरह राजधानी श्रीनगर में 660 शिकायतें आईं, जिनमें से 390 का समाधान कर दिया गया। शोपियाँ में 400 में से 113 शिकायतों का निपटारा हो चुका है। बताया जाता है कि ऐसे 62,000 परिवार हैं, जिन्हें कश्मीर छोड़ना पड़ा था।

‘भारत के PM चाहें तो हमारा क्रिकेट समाप्त हो जाएगा’: रमीज राजा ने बताया- असल में किसके पैसे से चल रहा PCB

पाकिस्तान की सीनेट की स्थायी समिति की बुधवार (6 अक्टूबर 2021) को बैठक हुई। इसमें पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन रमीज राजा ने आशंका जताई कि अगर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहें तो वे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पतन का कारण बन सकते हैं। राजा ने इस तथ्य का खुलासा किया कि पीसीबी को 50 फीसदी फंडिंग आईसीसी करता है, जबकि खुद आईसीसी की 90 फीसदी फंडिग इंडियन मार्केट से होती है। राजा ने कहा, “एक तरह से भारत के कारोबारी घराने पाकिस्तान का क्रिकेट बोर्ड चला रहे हैं।”

उन्होंने आगे टिप्पणी की, “कल को अगर भारतीय प्रधानमंत्री फंडिंग रोकने का फैसला करते हैं तो पीसीबी समाप्त हो जाएगा।” हाल ही में न्यूजीलैंड और इंग्लैंड की अंतरराष्ट्रीय पुरुष क्रिकेट टीम द्वारा पाकिस्तान के साथ खेलने से इनकार करने की घटना का भी जिक्र रमीज राजा ने किया। राजा ने कहा, “उन्होंने 2 मिनट में पैक किया और चले गए। ऐसा इसलिए है, क्योंकि उन्हें पाकिस्तान में कोई दिलचस्पी नहीं है और इसका कारण यह है कि हमारी अर्थव्यवस्था सही नहीं है।”

जब राजा से आईसीसी में पाकिस्तान के योगदान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का आईसीसी में कोई भी योगदान नहीं है।

राजा ने कराची के कारोबारियों से की बात

इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में कराची के व्यापारिक समुदाय से रमीज राजा ने बात की थी। उन्होंने उनसे पाकिस्तान को क्रिकेट की दुनिया का एक महाशक्ति बनाने में मदद करने की अपील की थी। पीसीबी प्रमुख ने कहा, “हमारा क्रिकेट अभी आईसीसी की फंडिंग पर निर्भर है। जब मैं बही-खातों को देखता हूँ तो बहुत डर जाता हूँ क्योंकि इसमें स्थानीय कारोबारियों का योगदान कम होता है।”

न्यूजीलैंड पर बना रहा दबाव

न्यूजीलैंड की टीम द्वारा सुरक्षा का हवाला देते हुए पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने से इनकार करने के बाद अब पाकिस्तान फिर से उस पर दौरे को रिशेड्यूल करने का दबाव बना रहा है। राजा ने उसी ब्रीफिंग में कहा कि एक हफ्ते में अच्छी खबर होगी। उन्होंने कहा, “मैंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष को कड़े शब्दों में एक पत्र लिखा है, जिसमें मैंने उल्लेख किया है कि आईसीसी पश्चिमी ब्लॉक की राजनीतिक शाखा बन गई है और केवल एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी बनकर रह गई है।”

18+ वाले 71% फीसदी भारतीयों को टीके की पहली खुराक, कोरोना के 5 लाख मामलों से हर रोज निपटने को अब तैयार: नीति आयोग

कोरोना वायरस संकट के बीच देश में टीकाकरण अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। 18 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों के लिए कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध होने के छह महीने के भीतर देश की 71 प्रतिशत वयस्क आबादी को टीके की कम से कम एक खुराक मिल गई है। इसके अलावा 27 फीसदी लोगों ने टीके के सभी डोज ले लिए हैं।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने गुरुवार (अक्टूबर 2021) को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि देश में वैक्सीन की कमी की समस्या को कम किया गया है और लोगों से पूरी तरह से टीकाकरण कराने का आग्रह किया। कोरोना की दूसरी डोज शुरू होने के साथ अब तक 93 करोड़ से अधिक लोगों को टीके लग चुके हैं। पॉल के मुताबिक, खुद को ‘पूरी तरह से सुरक्षित’ करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भविष्य की तैयारियों को लेकर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने प्रतिदिन 5 लाख मामलों से निपटने की तैयारी की है। साथ ही स्पष्ट किया तैयार होने का अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में कोविड-19 संक्रमण में इतनी अधिक तेजी आएगी। डॉ. पॉल ने कहा, “अब कोरोना मामलों की संख्या कम है, लेकिन तैयारी पूरी है। हमारी तैयारी मजबूत, निरंतर और दैनिक आधार पर सक्षम है।”

डॉ. पॉल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यों के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में COVID-19 रोगियों के लिए 8.36 लाख अस्पताल में बेड उपलब्ध हैं। आज की हालत यह है कि कोरोना केयर सेंटर में करीब एक मिलियन (9,69,885) अतिरिक्त आइसोलेशन बेड हैं। उन्होंने बताया कि कुल 4.86 लाख ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड और 1.35 लाख आईसीयू बेड उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा, “लगभग 1,200 PSA ऑक्सीजन प्लांट अभी काम कर रहे हैं। देश में ऐसा कोई जिला नहीं है, जहाँ ऐसा प्लांट न हो। देश भर में लगभग 4,000 PSA संयंत्र स्थापित किए जाएँगे।”

PM मोदी ने गुजरात में 18 PSA ऑक्सीजन संयंत्रों का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम के जरिए गुजरात में 18 PSA ऑक्सीजन संयंत्रों का उद्घाटन किया। जिन जगहों पर प्लांट का उद्घाटन किया गया, उनमें भरूच, पाटन, पालनपुर, थरद, खेड़ब्रह्मा, भिलोदा, मनसा, वडनगर, गोधरा, संतरामपुर, गरुड़ेश्वर, न्यू सिविल अस्पताल- सूरत, एसएमआईएमईआर अस्पताल-सूरत, सोला सिविल और गाँधीधाम शामिल है। गुजरात सीएसआर प्राधिकरण द्वारा राजपिपला, झालोद और मोरबी में स्थापित नए PSA ऑक्सीजन संयंत्रों का उद्घाटन भी प्रधानमंत्री द्वारा वर्चुअली किया गया।

‘उत्पादन में 10 गुना की बढ़ोतरी’

गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) को PM मोदी ने 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में PM CARES की फंडिंग से बनाए गए कुल 35 नए PSA ऑक्सीजन संयंत्रों का उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन 10 गुना बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित एम्स में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने स्वास्थ्यकर्मियों को देश को ऑक्सीजन संकट से उबारने में मदद करने के लिए उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को श्रेय दिया।

पीएम मोदी ने कहा, “भारत वर्तमान में कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है, जो हमारे लोगों और सरकार के बीच किसी भी विपदा का मुकाबला करने के लिए कड़ी मेहनत, समर्पण और एकता को दर्शाता है।” उन्होंने बताया कि देश को जल्द ही पीएम केयर्स फंड से 4000 ऑक्सीजन प्लांट मिल सकेंगे।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “कोरोना से निपटने के लिए इतने कम समय में बुनियादी ढाँचे के निर्माण की भारत की क्षमता हमारे दृढ़ संकल्प, सेवा और एकजुटता का प्रतीक है।” कोरोना की टेस्टिंग क्षमता पर बात करते हुए पीएम ने कहा, “कोरोना के इस संकट के बीच इकलौती टेस्टिंग प्रयोगशाला से 3000 परीक्षण प्रयोगशालाओं तक की हमारी यात्रा कुछ भी हासिल करने की हमारी क्षमता को दर्शाती है।”

विदेशी पर्यटकों के लिए खुला देश

15 अक्टूबर से केंद्र सरकार ने विदेशियों को पर्यटकों को वीजा जारी करने की शुरुआत करने का फैसला किया है। हालाँकि, एक महीने के लिए पर्यटकों को केवल चार्टर्ड फ्लाइट से ही भारत में आने की इजाजत मिलेगी। वहीं शेड्यूल्ड कॉमर्शियल फ्लाइट के जरिए भारत आने वालों को 15 नवंबर तक इंतजार करना पड़ेगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, “विभिन्न इनपुट पर विचार करने के बाद MHA (गृह मंत्रालय) ने 15 अक्टूबर 2021 से चार्टर्ड उड़ानों से भारत आने वाल लोगों के लिए वीजा देना शुरू करने का फैसला किया है।” इस बीच, भारत में बीते 24 घंटे के दौरान 22,431 नए कोरोनो वायरस के मामले सामने आए, 318 लोगों की मौत हुई है। इसमें से सबसे अधिक मामले केरल के हैं।

‘उसे राक्षसों ने मार डाला… वह वीडियो कभी नहीं भूलूँगी’: दो माँ जिनके बेटों को लखीमपुर खीरी में ‘किसानों’ ने मार डाला

लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर 2021 को तथाकथित ‘किसानों’ द्वारा मारे गए दो लोगों के परिवार के सदस्यों ने उनके साथ की गई क्रूरता के बारे में बताया है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, हरिओम मिश्रा (जिन्हें ‘किसानों’ द्वारा बेरहमी से पीट-पीट कर मार डाला गया था) की बहन ने घटना को याद करते हुए बताया कि कैसे हरिओम का शव देख कर परिजन टूट गए थे। हरिओम का शव सोमवार (4 अक्टूबर 2021) को घर लाया गया था।

हरिओम मिश्रा, बीजेपी सांसद अजय मिश्रा के बेटे आशीष के ड्राइवर थे। वह आशीष के साथ करीब पाँच साल से काम कर रहे थे। हरिओम परसेहरा गाँव के रहने वाले थे। उनके दो छोटे भाई-बहन हैं, उनकी माँ का नाम निशा और उनके पिता का नाम राधे श्याम है, वह मानसिक और शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हैं। राधेश्याम के काम न कर पाने के कारण परिवार हरिओम की कमाई पर निर्भर था।

हरिओम की बहन माहेश्वरी ने बताया कि उनका भाई दो-तीन दिन पहले काम पर गया था। माहेश्वरी रोते हुए कहती हैं, “मुझे कुछ नहीं पता कि उनके साथ क्या हुआ। उन्हें किसानों ने मार डाला।” हरिओम की माँ ने दुख जताते हुए कहा, “उसके साथ जो हुआ वह क्रूर और अमानवीय था। उसे राक्षसों ने मार डाला।” निशा विलाप करते हुए कहती हैं कि वह अपने मृत बेटे के शव को कैसे देख सकती हैं, जो 3 अक्टूबर को तथाकथित किसानों के क्रोध का शिकार हो गया।

वह वीडियो कभी नहीं भूलूँगी: श्याम सुंदर निषाद की माँ

वहीं एक अन्य पीड़ित श्याम सुंदर निषाद (30) की माँ ने कहा कि उनके बेटे की मौत की खबर मिलने से पहले ही घटना का वीडियो उनके पास पहुँच गया। श्याम सुंदर निषाद के परिवार को उसकी मौत का पता तब चला जब उन्हें व्हाट्सएप पर ‘किसानों’ की भीड़ द्वारा उसकी पिटाई का वीडियो मिला। श्याम सुंदर निषाद जिले के सिंघी क्षेत्र में भाजपा के ‘मंडल मंत्री’ थे।

निषाद की माँ फूलमती कहती हैं कि वह कभी भी उस वीडियो को नहीं भूल पाएँगी। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे के आसपास लोग जमा हैं। उसके शरीर से खून बह रहा है, वह दया की भीख माँग रहा है, लेकिन लोग उससे सवाल कर रहे हैं।” फूलमती ने कहा कि नाराज ‘किसानों’ ने निषाद से सवाल किया कि क्या उन्हें मिश्रा ने भेजा था। उसके मना करने के बावजूद लोग उससे पूछते रहे कि क्या उसे जानबूझकर ‘एक्सीडेंट’ करने के लिए भेजा था। वह दया की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसानों ने उसकी एक न सुनी।

फूलमती ने पुष्टि की कि उनका बेटा निषाद एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता था और सांसद (मिश्रा) के गाँव में एक दंगल कार्यक्रम के लिए गया था। परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य को खोने के बाद निषाद के 52 वर्षीय पिता बालक राम को उनकी दो बेटियों की चिंता हो रही है। इनमें से एक की उम्र 3 साल और एक की 7 महीने है। उन्होंने कहा, “सरकार ने 45 लाख रुपए का चेक दिया है, लेकिन हम न्याय चाहते हैं। जिसने भी उसे मारा है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।”

‘दादा…दादा छोड़ दो’, निषाद का जान की भीख माँगता वीडियो वायरल

हिंसक दुर्घटना के बाद निषाद का वीडियो सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया था। उनका चेहरा खून से लथपथ था और उनकी आँखों में मौत का खौफ साफ तौर पर देखा जा सकता था। वे स्तब्ध और हिंसक भीड़ के अत्यधिक दबाव में थे। वीडियो में स्थिति साफ दिख रही थी।

उनकी अंतिम चीखें दिल दहला देने वाली थी। इससे हमारे-आपके रोंगटे भले खड़े हो जाएँ, लेकिन ‘किसान आंदोलनकारियों’ को जान की भीख माँग रहे एक निर्दोष पर जरा भी तरस नहीं आई। उसकी मॉब लिंचिंग कर दी गई। उनसे ‘किसान आंदोलनकारियों’ की भीड़ जबरन ये कबूल करने का दबाव बना रही थी कि वो ये बोलें कि मंत्री ने उन्हें किसानों को मारने के लिए भेजा है। भाजपा कार्यकर्ता श्याम सुंदर निषाद बार-बार ‘दादा… दादा, छोड़ दो’ की गुहार लगा रहे थे, लेकिन गुंडों का दिल नहीं पसीजा। उनसे जबरन कबूलवाया जा रहा था कि वो किसानों पर गाड़ी चढ़ाने आए हैं। वे हाथ जोड़ गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन उनकी एक न सुनी गई। श्याम सुंदर निषाद के भाई संजय निषाद ने भी ऑपइंडिया से बात की और बताया कि 3 अक्टूबर को क्या हुआ था।

राकेश टिकैत के खिलाफ कार्रवाई की माँग की

7 अक्टूबर को, ऑपइंडिया ने बताया कि हरिओम के परिवार के सदस्यों ने हिंसा के लिए विपक्षी नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। इसके अलावा उनके परिवार के सदस्यों ने राकेश टिकैत को ‘आतंकवादियों का नेता’ कहा। हरिओम के परिजनों ने बीकेयू नेता को तथाकथित किसानों द्वारा पीट-पीट कर मार डालने वाले चारों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए टिकैत के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

इस बीच, एक अन्य मृतक शुभम मिश्रा के चाचा ने भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदर्शनकारियों पर हमला किए जाने के दावे झूठे हैं। उन्होंने कहा, ‘भाजपा कार्यकर्ताओं ने किसी पर हमला नहीं किया। आतंकवादियों (प्रदर्शनकारियों) ने पथराव करना शुरू किया था।”

‘अब तक उठाए गए क़दमों से संतुष्ट नहीं’: लखीमपुर खीरी हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट, हरीश साल्वे ने दिया भरोसा – सुरक्षित रहेंगे सबूत

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में शुक्रवार (8 सितंबर, 2021) को सुनवाई हुई। एक दिन पहले सर्वोच्च न्यायालय ने यूपी पुलिस को निर्देश दिया था कि वो इस मामले में अब तक की कार्रवाई से अवगत कराए, जैसे आरोपितों के बारे में और गिरफ्तारियों को लेकर। अब इस मामले की सुनवाई 20 अक्टूबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो राज्य की पुलिस द्वारा उठाए गए क़दमों से संतुष्ट नहीं है।

वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने यूपी पुलिस की तरफ से पेश होकर सुप्रीम कोर्ट को अब तक की कार्रवाई के बारे में बताया, साथ ही ‘स्टेटस रिपोर्ट’ भी दायर की गई। उन्होंने बताया कि अगली सुनवाई से पहले इस मामले में और कदम उठाए जाएँगे, बल्कि किसी अन्य सरकारी एजेंसी से मामले की जाँच पर भी विचार किया जाएगा। साल्वे ने भरोसा दिलाया कि वो सबूतों की सुरक्षा के लिए लखनऊ में उच्चाधिकारियों से बात करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो ज्यादा डिटेल में फिलहाल नहीं जाना चाहता। अब छुट्टियों के बाद इस मामले की सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBI भी इस मामले का समाधान नहीं है, जिसका कारण आपको पता है। साथ ही कहा कि मामले की संवेदनशीलता के कारण हम कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। साथ ही उत्तर प्रदेश के DGP को आदेश दिया कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ न हो। सुप्रीम कोर्ट ने हरीश साल्वे से कहा कि हम आपका सम्मान करते हैं।

इस दौरान ‘टाइम्स नाऊ’ के एक ट्वीट का मुद्दा भी उठा, जिसमें दावा किया गया था कि मुख्य न्यायाधीश ने एक पीड़ित परिवार से मुलाकात की है। हालाँकि, उन्होंने सुनवाई के दौरान इस पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। साल्वे ने कहा कि ट्वीट्स में हम सब की आलोचना हो रही है। इस पर CJI ने कहा कि बात ट्वीट्स की नहीं है, ये सोचिए कि मैं दिल्ली में हूँ और लखनऊ में उनलोगों से कैसे मिल सकता हूँ?

यूपी पुलिस ने कोर्ट को बताया कि आशीष मिश्रा को एक और नोटिस दिया गया है और उन्हें कल पेश होने को कहा गया है। इस दौरान ये भी बताया गया कि किसी भी व्यक्ति की मौत गोली लगने से नहीं हुई है, जैसा कि आरोप लगाया गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ऐसा कुछ सामने नहीं आया। CJI ने पूछा कि क्या इस तरह के आरोपों पर अन्य आरोपितों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार होता है? उन्होंने पूछा कि गोली न लगने से मौत की पुष्टि हुई है, तो क्या आरोपित को हिरासत में न लिए जाने का यही आधार है?

‘सभी बच्चे ट्राई करते हैं… दिव्या भारती संग मैंने भी ली थी’: सलमान खान की Ex, आर्यन खान के लिए दे रही दलील

बॉलीवुड के किंग खान का बेटा आर्यन खान जबसे ड्रग्स केस में अरेस्ट हुआ है तभी से बड़े-बड़े कलाकर उसके समर्थन में बयान जारी कर रहे हैं। इसी क्रम में सलमान खान की एक्स गर्लफ्रेंड सोमी अली ने भी आर्यन के लिए बड़ा पोस्ट किया। सोमी ने आर्यन की गिरफ्तारी पर दुख जताते हुए कहा कि बच्चे को घर जाने दिया जाए। उनके मुताबिक, कोई संत नहीं होता। उन्होंने खुद ने भी दिव्या भारती के साथ ड्रग्स लिया था।

सोमी ने लिखा, “किस बच्चे ने ड्रग्स के साथ प्रयोग नहीं किया होगा? ये सब बंद कीजिए और इस बच्चे को जाने दीजिए। ड्रग्स वैश्यावृत्ति की तरह है, ये कभी खत्म नहीं होगा। इसलिए इन दोनों को ही अपराध की श्रेणी से हटा देना चाहिए। बच्चे तो बच्चे ही हैं, ये इसका उदाहरण है। कोई संत नहीं होता। मैं जब 15 साल की थी तब गांजा ट्राई किया था और ‘आंदोलन’ की शूटिंग के दौरान एक बार फिर से दिव्या भारती के साथ लिया था। मुझे उसका कोई पछतावा नहीं है।”

उनके मुताबिक न्यायिक प्रणाली आर्यन का इस्तेमाल करके अपनी बात सही साबित करना चाहता है। वह कहती हैं यह बच्चा बिना मतलब में परेशानी झेल रहा है। कैसा रहेगा अगर जूडिशल सिस्टम रेप और मर्डर करने वालों को पकड़े। 

वह कहती हैं, “यूएस 1971 से ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है फिर भी यहाँ जो लेना चाहता है उसे आसानी से मिल जाती है। शाहरुख और गौरी के लिए मेरा दिल टूटने लगता है। मेरी दुआएँ उनके साथ हैं। आर्यन तुमने कुछ गलत नहीं किया। न्याय होगा बच्चे।”

यहाँ बता दें कि सोमी अली पिछले दिनों अपने कई दावों के चलते चर्चा में थीं। उन्होंने खुलासा किया था कि कैसे ‘मैंने प्यार किया’ फिल्म देखने के बाद वो ताजमहल देखने का बहाना बनाकर पाकिस्तान से भारत आ गईं और सोचा था कि वो सलमान से शादी करेंगी। इसके बाद उन्होंने ये भी बताया था कि बॉलीवुड में उनका कई निर्देशकों ने शोषण करने का प्रयास किया था, क्योंकि वो जानते थे कि सोमी एक बुरे रिश्ते से गुजर रही हैं।

कश्मीर में आम लोगों को मार रहे हैं ‘हाइब्रिड टेररिस्ट’, जानिए कैसे करते हैं काम: आतंकियों के सफाए के लिए अमित शाह ने भेजे एक्सपर्ट्स

जम्मू-कश्मीर में हाल के समय में आतंकियों द्वारा आम नागरिकों को निशाना बनाने के कई मामले सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की शह पर हाइब्रिड आतंकी (Hybrid Terrorists) इन हमलों को अंजाम दे रहे हैं। इधर शिक्षकों की हत्या के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आतंकियों के सफाए के लिए आतंकवाद विरोधी विशेषज्ञों की टीम कश्मीर भेजी है। यह टीम स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर काम करेगी।

आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फोर्स के ‘हाइब्रिड आतंकियों’ ने ही गुरुवार (7 अक्तूबर 2021) को श्रीनगर के ईदगाह इलाके के सरकारी स्कूल पर हमला कर एक हिन्दू और एक सिख शिक्षक की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक लम्बी बैठक कर अर्धसैनिक बलों से आतंकियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के लिए कहा। साथ ही तपन डेका की अगुवाई में एक्सपर्ट्स की एक टीम भी घाटी में भेजी गई है। हमलवारों के साथ साजिशकर्ताओं से भी निपटने का टास्क इस टीम को दिया गया है। 1988 बैच के IPS अफसर तपन डेका इस से पहले असम में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के विशेष डायरेक्टर की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

शीर्ष सरकार सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया है कि हालिया हत्याओं को हाइब्रिड आतंकियों ने अंजाम दिया है। इन्हें पार्ट टाइम आतंकी भी कहते हैं। ये आतंकी सामान्य लोगों की तरह जिंदगी जीते हैं। इशारा मिलने पर आम नागरिकों को छोटे हथियार से निशाना बनाते हैं और फिर अपनी सामान्य जिंदगी जीने लगते हैं। इसके कारण ये लंबे समय से एजेंसियों की नजर में आने से बचे रहते हैं। छोटे हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना और छिपाना भी आसान होता है।

हमले में प्रयुक्त पिस्टल जैसे छोटे हथियारों को लेकर सुरक्षा अधिकारियों को शक है कि उन्हें सीमा पार से पाकिस्तान ने ड्रोन से गिराया होगा। IG विजय कुमार ने कहा है कि आतंक के इस नए रूप को अभियान चला कर जल्द ही खत्म किया जाएगा। उनके अनुसार सुरक्षा बलों के कठोर एक्शन के बाद आतंकियों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है और अब उन्होंने आम नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

अनाथ मुस्लिम बच्ची की ‘गॉडमदर’ भी थीं सुपिंदर कौर: सिख शिक्षिका की अंतिम यात्रा में उमड़ा हुजूम, आतंकियों ने मारी थी गोली

जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने जिन दो शिक्षकों की गुरुवार (7 सितंबर, 2021) को हत्या कर दी, उनमें से एक प्रधानाध्यापिका सुपिंदर कौर भी थीं। सुपिंदर कौर की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया। आतंकियों ने दोनों शिक्षकों की आईडी देख कर उन्हें मारा था, क्योंकि वो नॉन-मुस्लिम थे। इस हत्याकांड के बाद हिंदुओं और सिखों में आक्रोश का माहौल है। ये श्रीनगर के ईदगाह स्थित बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाते थे।

अंतिम यात्रा के दौरान जम कर पाकिस्तान विरोधी नारे भी लगे, जिसकी शह पर कश्मीर में आतंकियों का मनोबल बढ़ा है और जहाँ से इस्लामी आतंकियों को फंडिंग की जाती है। सुपिंदर कौर के अलावा एक अन्य मृत शिक्षक दीपक चंद की भी अंतिम यात्रा निकाली गई। इन दोनों को मीटिंग रूम से घसीटते हुए लाया गया था और फिर मार डाला गया था। कश्मीर में 5 दिन में हुई 7 हत्याओं में से 6 राजधानी श्रीनगर में ही हुई है।

सुपिंदर कौर के बारे में ये भी पता चला है कि वो काफी नेकदिल महिला थीं और अपने वेतन का अधिकतर हिस्सा जरूरतमंद मुस्लिमों पर खर्च करती थीं। 46 वर्षीय कौर के पड़ोसियों ने बताया है कि वो एक अनाथ मुस्लिम बच्ची का भी पालन-पोषण कर रही थीं। उनके पड़ोसी शौकत अहमद डार का कहना है कि वो अपने वेतन का आधा से अधिक हिस्सा जरूरतमंद मुस्लिमों पर खर्च करती थीं। वो उसका पूरा खर्च उठा रही थीं।

शौकत ने बताया कि शुरू में बताया कि उन्होंने सुपिंदर कौर से कहा था कि वो बच्ची को कहीं रखने में उनकी मदद कर दें, लेकिन उन्होंने अपने वेतन में से 20,000 रुपए मदद की पेशकश कर दी। बाद में वो खुद बच्ची को अपने यहाँ रख कर उसका पूरा खर्च उठाने लगीं और पालन-पोषण करने लगीं। आलोचीबाग में उनका घर था। सुपिंदर कौर का 6 साल का बेटा और 11 साल की बेटी है। कौर के अंतिम संस्कार में सिखों ने न्याय की माँग की।

मुस्लिम पड़ोसी के अनुसार, कौर और उनके पति रामरश सिंह जब भी अपने बच्चों के लिए कुछ खरीदते थे, तो उनके बेटे के लिए भी वो चीज ले आते थे। मुस्लिम पड़ोसी के साथ उनके पति सुबह टहलने भी जाते थे। शौकत ने बताया कि उनके मैनेजर बनने व प्रमोशन के बाद सुपिंदर कौर ने खुश होकर पड़ोसियों में मिठाइयाँ बाँटी थीं, वो उतना करती थीं जितना अपनी बहन भी न करती हो। स्कूल जाने से पहले वो रोज खिड़की खटखटा कर उन्हें बता देती थीं कि वो जा रही हैं।

ताज़ा घटनाओं की बात करें तो 2 अक्तूबर को राजधाइ श्रीनगर के चट्टाबल के रहने वाले माजिद अहमद गोजरी की आतंकियों ने हत्या कर दी। इसी दिन एसडी कॉलोनी बटमालू में मोहम्मद शफी डार को गोलियों से भून डाला गया। 5 अक्टूबर को लोकप्रिय दवा कारोबारी माखन लाल बिंदरू की हत्या हुई। इसके कुछ ही देर बाद बिहार के महादलित चाट विक्रेता वीरंजन पासवान की हत्या हुई। उसी दिन बांदीपोरा में मोहम्मद शफी लोन को मार डाला गया।