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‘चलती ट्रेन में महिला का अंडरगारमेंट्स निकाल कर सूँघा, फिर छाती पर रख लिया’: महाराष्ट्र में NCB अधिकारी गिरफ्तार

महाराष्ट्र में रेलवे पुलिस ने एनसीबी के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया है। इस अधिकारी पर एक महिला ने चलती ट्रेन में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। जिस ट्रेन में छेड़छाड़ को लेकर मामला दर्ज हुआ है वह हैदराबाद-पुणे के बीच चलती है। गिरफ्तारी के बाद आरोपित के खिलाफ आपीसी की धारा 354 के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान दिनेश चव्हाण के रुप में हुई है। दिनेश चव्हाण एनसीबी में पुलिस अधीक्षक (SP) रैंक के अधिकारी हैं। आरोपित अधिकारी को परली रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। परली रेलवे स्टेशन औरंगाबाद रेलवे यूनिट के तहत आता है।

औरगंबाद एसपी (जीआरपी), एम पाटिल ने बताया कि दिनेश चौहान पर आरोप है कि उन्होंने ट्रेन में महिला को गलत तरीके से छुआ। इसके बाद उन्होंने महिला के बैग से उनके अंडरगार्मेंट्स निकाल लिए तथा उसे सूँघने के बाद अपने सीने पर रख लिया। 

पुलिस ने बताया कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (A) यौन प्रताड़ना और धारा 509 (किसी महिला की शील भंग करने की कोशिश करना) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक दिनेश चव्हाण हैदराबाद से पुणे की ओर लौट रहा था। वह हैदराबाद कोर्ट के एक मामले में जारी सुनवाई में शामिल होने गया था और पुणे लौट रहा था। जिस कंपार्टमेंट में वह यात्रा कर रहा था वहीं एक 25 साल की महिला भी यात्रा कर रही थी। महिला ने बताया कि एनसीबी के अधिकारी ने उसे गलत तरीके से छूने की कोशिश की। महिला ने बताया कि वह एनसीबी अधिकारी की हरकतों से परेशान हो गई और शोर मचाना शुरू कर दिया। जिसके बाद मौके पर कई यात्री पहुँच गए। तब जाकर मामला कंट्रोल में हुआ।

दिनेश की गिरफ्तारी के बाद एनसीबी मुंबई में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि आरोपित एनसीबी में तैनात है, लेकिन पिछले आठ महीनों से चव्हाण मानसिक परेशानी से जूझ रहा है जिसके चलते वह ज्यादातर समय छुट्टी पर ही था। अधिकारी ने कहा कि चव्हाण एनसीबी की हालिया किसी ऑपरेशन का हिस्सा नहीं था।    

कॉन्ग्रेस ने जिसे बताया ‘नौटंकी’, उससे बन गए 11 करोड़ शौचालय: झाड़ू के बहाने ‘दलित कार्ड’ खेल रही पार्टी याद करे अक्टूबर 2014

आज की भारतीय राजनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इर्दगिर्द घूमती है। उन पर लगे आरोप, उनके बयान, उनकी प्रतिक्रियाएँ, उनके सम्बोधन, उनके भाषण, उन्हें लेकर विपक्षी नेताओं के आपत्तिजनक शब्द। लेकिन, चुनाव प्रचार की प्रक्रिया में उनकी ही नकल उतारने की कोशिश होती है। लेकिन, इस दौरान प्रियंका गाँधी जैसे नेता झाड़ू पकड़ने से पहले भूल जाते हैं कि मोदी हर चीज राजनीति के लिए नहीं करते।

प्रियंका गाँधी ने झाड़ू पकड़ी है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव आ रहे हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए धुआँधार प्रचार कर रहीं प्रियंका गाँधी ने लॉकअप में झाड़ू क्या थामा, अब ये उनके हाथ से निकल ही नहीं रहा है। पंजाब के बाद अब उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस की ‘दलित सियासत’ चालू है। झाड़ू से अभी क्या-क्या होना है, देखा जाएगा। लेकिन, क्या इन लोगों को याद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना किसी चुनाव के झाड़ू पकड़ी थी?

अब याद कीजिए 2 अक्टूबर, 2014 को। देश में आम चुनाव हो चुके थे और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने 6 महीने भी नहीं हुए थे। तभी उन्होंने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ लॉन्च कर दिया था। बाद में चम्पारण की एक रैली में उन्होंने ‘सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह’ का नारा दिया। इसका किसी चुनाव से कोई लेनादेना नहीं था क्योंकि इसके बाद इसके कई चरण लॉन्च हुए और अब इस साल नया मिशन लॉन्च किया गया है, जिससे शहरों से कचरे के ढेर हटाए जाएँगे।

प्रियंका गाँधी लखीमपुर खीरी जा रही थीं। रास्ते में उन्हें गिरफ्तार किया गया और एक लॉकअप में रखा गया। गेस्ट हाउस के उस कमरे में उन्होंने झाड़ू लगाई। कॉन्ग्रेस नेताओं ने जम कर इस वीडियो को शेयर किया। शेयर तो कुछ भाजपा वालों ने भी किया, लेकिन वीडियो के उस एडिटेड वर्जन में प्रियंका गाँधी कॉन्ग्रेस के चुनाव चिह्न हाथ छाप को ही बुहार कर साफ़ करते दिख रही हैं। खैर, ये मजाक की बात की।

अब प्रियंका गाँधी ने लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित एक दलित बस्ती में झाड़ू लगाई और वाल्मीकि मंदिर में पूजा की। वैसे भी चुनाव आते ही दोनों भाई-बहनों का मंदिर-मंदिर घूमना आम हो जाता है। इस बार तो कॉन्ग्रेस ने ये भी बताया है कि प्रियंका गाँधी नवरात्र का व्रत रख रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले तीन दशक से निराहार नवरात्र व्रत रखते आए हैं, जब वो चुनावी राजनीति का सक्रिय हिस्सा नहीं थे, तभी से।

खैर, वाल्मीकि समुदाय को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए पैंतरे आजमा रही कॉन्ग्रेस ने कभी अनुच्छेद-370 को हटाने की पहल नहीं की, जिसके कारण जम्मू कश्मीर के वाल्मीकि समुदाय के लोगों को मैला ढोने को विवश होना पड़ता था और उन्हें भारत का नागरिक तक नहीं माना जाता था। मोदी सरकार ने जब उन्हें अधिकार दिए, तब यही कॉन्ग्रेस इसका विरोध कर रही थी। CAA के माध्यम से दलितों को अधिकार मिले, तब तभी पार्टी इसके विरोध में थी।

फिर अब ये यूपी चुनाव से पहले कैसा ‘दलित प्रेम’ जग आया? आज जो पार्टी झाड़ू लगाने को सादगी का प्रतीक और प्रियंका गाँधी के झाड़ू लगाने पर मजाक व विरोध को दलितों का अपमान बता रही है, क्या अब वो बताएगी कि उसके नेताओं ने प्रधानमंत्री का अपमान क्यों किया था, जब उन्होंने झाड़ू पकड़ी थी? पार्टी ने इसे एक तिकड़म बताया था, हथकंडा करार दिया था। केरल में पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीएम सुधीरण ने कहा था कि ऐसा कुछ सभी दलों व मुख्यमंत्रियों को बुला कर किया जाना चाहिए था, वरना ये तो ‘नौटंकी’ है।

यहाँ तक कि जब तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘स्वच्छ भारत मिशन’ चैलेंज स्वीकार कर लिया था, तब उनके खिलाफ भी कॉन्ग्रेस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया था। ये कैसा झाड़ू प्रेम? स्वच्छता का विरोध करने वाली ये पार्टी आज झाड़ू पर सियासत कर रही? अब आपको जानना चाहिए कि पीएम मोदी ने झाड़ू पकड़ी तो देश में उसका असर क्या हुआ।

‘स्वच्छ भारत अभियान’ के पहले चरण में ही 10.71 करोड़ शौचालयों का निर्माण भारत सरकार द्वारा किया गया। अगर विपक्षी नेताओं या मोदी विरोधियों को लगता है कि ये सब क्षणिक था, तो उन्हें जानना चाहिए कि 2021-22 में भी अब तक 6,16,336 शौचालय बन चुके हैं। इसी का नतीजा है कि 6.03 लाख गाँव खुले में शौच से मुक्त हुए। ये आँकड़े गवाह हैं इस बात के कि चुनावी तिकड़म और जमीन पर वास्तविक काम में बड़ा अंतर होता है।

जरा प्रियंका गाँधी ये भी तो बताएँ कि उनकी पार्टी के शासन वाले राजस्थान में सफाईकर्मियों का क्या हाल है। बीकानेर का ही उदाहरण ले लीजिए। जहाँ 2800 सफाईकर्मियों की जरूरत है, वहाँ इस शहर में मात्र 1661 पद ही स्वीकृत हैं। कई बड़े बाबुओं ने अपनी कोठियों पर इन्हें लगा रखा है। उन्हें अलग-अलग कामों में लगा दिया गया है। इसी तरह पंजाब के तरनतारन में 150 सफाईकर्मियों का भविष्य दाँव पर है, क्योंकि उन्हें स्थायी नहीं किया जा रहा। ये सभी हाल की ही खबरें हैं।

इसीलिए, झाड़ू पकड़ने से ज्यादा जरूरी है कि उसका उद्देश्य क्या है। आज चुनाव में झाड़ू चलाने वाली प्रियंका गाँधी के पार्टी के नेताओं को जब याद दिलाया जाएगा कि उनके नेताओं ने कैसे पीएम मोदी के ‘स्वच्छता अभियान’ का विरोध किया था, तब उन्हें इसका अंदाज होगा कि ‘दोहरा रवैया’ क्या होता है। नकल करना आसान है, लेकिन कहावत है कि कभी-कभी इसमें शक्ल भी बिगड़ जाती है। वैसे भी ये पूरा चुनाव ‘दादी की शक्ल’ पर ही लड़ा रहा रहा कॉन्ग्रेस द्वारा।

अलकायदा आतंकी अब्बास, करीम और सुलेमान NIA कोर्ट में दोषी करार: मैसूर बम ब्लास्ट मामले में 5 साल बाद आया फैसला

मैसूर कोर्ट ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने शुक्रवार (अक्टूबर 8, 2021) को तीन आरोपितों को दोषी ठहराया है। 2016 के मैसूर कोर्ट में हुए विस्फोट मामले में कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए तीनों आतंकी अल कायदा से जुड़े हैं और ये सभी तमिलनाडु के निवासी हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट में जाँच एजेंसी के हवाले से ये जानकारी दी गई है।

बता दें कि साल 2016 में कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी मैसूर में स्थानीय कोर्ट परिसर के पब्लिक टॉयलेट में जोरदार धमाका हुआ था। दोषियों, नैनार अब्बास अली उर्फ लाइब्रेरी अब्बास, एम सैमसन करीम राजा उर्फ करीम उर्फ अब्दुल करीम और दाऊद सुलेमान ने मैसूर के चामराजपुरम इलाके के जिला अदालत परिसर में सार्वजनिक शौचालय के अंदर बम रखा था। उस वक्त कोर्ट की कार्रवाई चल रही थी। धमाके की वजह से लोगों को चोटें आईं थी। धमाके से खिड़की के शीशे टूट गए। शहर के सभी भीड़-भाड़ वाले इलाके में चौकसी बढ़ा दी गई थी।

इस धमाके से सुरक्षा एजेंसियों के काम करने के तरीके पर सवाल उठे थे। क्योंकि, जिस वक्त कोर्ट परिसर में धमाका हुआ, उसी वक्त मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के बेटे राकेश सिद्धरमैया की अंत्येष्टि हो रही थी और इस में शामिल होने राज्य के सभी वीवीआईपी मैसूर में मौजूद थे। इनमें पुलिस प्रमुख से लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश तक शामिल थे। बताया जाता है कि कड़ी सुरक्षा की वजह से उस जगह पर धमाका करने का मौका उन्हें नहीं मिला था और ऐसे में विस्फोटक को कोर्ट परिसर में फेंक दिया गया।

मामला मूल रूप से 1 अगस्त 2016 को मैसूर शहर के लक्ष्मीपुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। बाद में गृह मंत्रालय के आदेश पर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने फिर से मामला दर्ज किया और जाँच को अपने हाथ में ले लिया। .

एनआईए की जाँच से पता चला है कि मैसूर कोर्ट में बम विस्फोट बेस मूवमेंट के सदस्यों द्वारा किए गए पाँच बम विस्फोटों की श्रृंखला में से एक था, जो आतंकवादी समूह अल-कायदा से जुड़ा एक संगठन है।

एनआईए ने कहा कि दोषियों ने 7 अप्रैल 2016 को चित्तौड़ कोर्ट (नेल्लोर, आंध्र प्रदेश) में बम विस्फोट को भी अंजाम दिया था। इसके बाद 15 मई, 2016 को केरल के कोल्लम कोर्ट में, 12 सितंबर, 2016 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर कोर्ट में और 1 नवंबर, 2016 को केरल के मल्लापुरम कोर्ट में धमाके को अंजाम दिया था।

एनआईए की जाँच में यह भी पता चला कि नैनार अब्बास अली और दाऊद सुलेमान ने जनवरी 2015 में अल-कायदा और उसके नेता ओसामा बिन लादेन की विचारधारा से प्रेरित होकर तमिलनाडु में बेस मूवमेंट का गठन किया था।

‘ऐ अँधेरे देख ले, तेरा मुँह काला हो गया’: RJD के स्टार प्रचारक से हटाए गए ‘तेजू भैया’ ने माँ-दीदी को लेकर कही ये बात, समर्थक दुःखी

बिहार में दो विधानसभा सीटों पर उप चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। हैरत की बात ये है कि इस सूची में पार्टी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव को जगह नहीं दी गई है। जबकि खुद लालू और तेजस्वी का नाम इस सूची में शामिल है। 20 नेताओं की इस सूची से राबड़ी देवी और मीसा भारती को भी बाहर रखा गया है।

तेज प्रताप यादव ने इस सूची की तस्वीर ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, “ऐ अँधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया। माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया…मेरा नाम रहता ना रहता माँ और दीदी का नाम रहना चाहिए था…इस गलती के लिए बिहार की महिलाएँ कभी माफ नहीं करेगीं, दशहरा में हम माँ की ही अराधना करतें हैं ना जी…” इसके बाद उन्होंने रोने वाला इमोजी बनाया है।

तेज प्रताप के इस ट्वीट पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कुछ यूजर्स उनके साथ हमदर्दी दिखा रहे हैं तो कुछ मजे ले रहे हैं। सागर ने लिखा, “बहुत गलत हुआ है भाई, इन लोगों ने लालू जी को दिल्ली में कैद कर दिया है और पार्टी में अपनी मनमानी कर रहे हैं। आप अपनी अलग पार्टी बनाओ। एक बिहारी होने के नाते आपको पूरा समर्थन रहेगा। आपके आवाज में लालू जी की झलक है भाई।”

नीलाम्बर मिश्र ने लिखा, “बीबी के बाद पार्टी ने भी लात मार दी क्या???”

अनंत ने लिखा, “अरे तेज प्रताप भैया इतना काहे सब सह के पार्टी में रह रहे हो, जल्दी से कॉन्ग्रेस ज्वाइन करो या लालू राबड़ी मोर्चा को आगे बढ़ाओ, पूरा समर्थन रहेगा जब तक आप पीएम ना बनो!”

मनीषा जैन लिखती हैं, “जहाँ एक तरफ तो कई पार्टियों पर विदेशी महिलाओं ने कब्जा कर लिया हो और अपने लड़के के लिये पूरी पार्टी दाँव पर लगा दी हो, वैसे में एक पूर्व मुख्यंमत्री और विदुषी महिला का ऐसा घोर अपमान और उसके विद्वान बेटे की ऐसी उपेक्षा??? घोर निन्दनीय!!”

हिमांशु शेखर ने लिखा, “वैसे भी आपकी किस्मत सही नहीं चल रही है पहले मैडम भाग गई फिर आपके उम्मीदवार को पार्टी ने नकार दिया और आज प्रचार करने से रोक लगा दिए। गजब बेइज्जती हो रही है।”

एक यूजर ने लिखा, “बिहार की जनता सोच रही थी कि लालू को बुढ़ापे में जेल हुआ भयंकर बीमारी हुआ, फिर भी वो मरा नहीं, अब समझे, क्योंकि लालू ने इतना पाप किया है कि अपने जीते जीते जब तक पाप से कमाया धन बर्बाद नहीं हो जाएगा तब तक लालू मरेगा नहीं। अब लालू के सत्यानाश का समय शुरू हो चुका है।”

रागिनी शुक्ला लिखती हैं, “लुगाई भी गई और पार्टी भी गई…. तेजप्रताप यादव को RJD से बाहर कर दिया गया है पार्टी का चिन्ह लालटेन भी नही नही कर सकेंगे इस्तेमाल।”

एक यूजर ने लिखा, “लालू प्रसाद के बाद अगर सही में कोई काबिलियत इंसान हैं तो वो आप हो। हम सब आपको और सिर्फ आपको ही RJD के मुखिया के तौर पर देखना चाहते हैं। चाहे कुछ भी हो जाए भैया हिम्मत मत हारना। संघर्ष करना आपके खून में बचपन से ही है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “क्षुब्ध हूँ तेजू भैया। आप बड़े थे, लालू जी के उत्तराधिकारी आप थे पर खुशी से आपने कुर्सी छोड़ी छोटे भाई के लिए। तेजस्वी को इस बलिदान का सम्मान करना चाहिए था लेकिन उसने निरंतर आपके विरुद्ध षड्यंत्र रचे। आलम यह है की अब पार्टी तक में आपकी जगह नहीं! दुखी हूँ भैया। मन व्याकुल है।”

राव संजय यादव ने लिखा, “गांधारी का श्राप यदुवंशियों का पीछा नहीं छोड़ रहा पहले मुलायम – लालू , अखिलेश – शिवपाल , भूपेंद्र यादव – राव इंद्रजीत और अब तेजस्वी – तेज प्रताप और अपने आस पास देखो ज्यादा से ज्यादा आहिर आपस में लड़ते में रहते हैं। इस तेजू को देखो ये भी अपने विनाश की ओर जा रहा है।”

राजद के इस फैसले को तेज प्रताप के लिए पहला बड़ा झटका माना जा रहा है। पहले स्टार प्रचारकों की सूची में तेज प्रताप का नाम तेजस्वी के नाम के तुरंत बाद हुआ करता था। कहा जा रहा है कि यह निर्णय राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी और जगदानंद सिंह के साथ हुए तेज प्रताप के विवाद के चलते लिया गया है। ये दोनों नेता भी स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर हैं।

तेज प्रताप को राजद की स्टार प्रचारकों की सूची से बाहर रखने के बाद सियासी अटकलों का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक राम ने कहा था कि तेज प्रताप कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करेंगे। कुशेश्वरस्थान से अशोक राम के बेटे उम्मीदवार हैं। अब देखना यह है कि तेज प्रताप क्या फैसला लेते हैं।

‘जमानत याचिका सुनवाई के लायक नहीं’: आर्यन खान को नहीं मिली जमात, NCB ने कहा – सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका

क्रूज ड्रग्स मामले में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की किला कोर्ट में लगाई गई जमानत की अर्ज़ी खारिज हो गई है। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आरएम नेर्लिकर ने आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। किला कोर्ट ने कहा कि उसे जमानत याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं है। 

कोर्ट ने दो अन्‍य आरोपितों अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा की जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि तीनों आरोपितों आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा की जमानत याचिका सुनवाई के लायक नहीं हैं। आर्यन के वकील को अब बेल के लिए सेशन कोर्ट का रुख करना होगा। इसका मतलब अभी आर्यन खान को जेल में ही रहना होगा। गुरुवार (7 अक्टूबर, 2021) को मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। 

किला कोर्ट में इनकी जमानत याचिका पर शुक्रवार को दोपहर करीब 12.45 बजे सुनवाई शुरू हुई थी, जो 2.15 बजे तक चली। ब्रेक के बाद दोपहर 3 बजे सुनवाई दोबारा शुरू हुई। जाँच एजेंसी और बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद किला कोर्ट ने शाम 5 बजे जमानत की याचिका खारिज कर दी।

इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान आर्यन के वकील सतीश मानशिंदे ने अदालत में कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट के पास जमानत देने का अधिकार है। मानशिंदे ने कहा कि यदि अदालत के पास रिमांड देने का अधिकार है तो जमानत देने का अधिकार भी कोर्ट की शक्तियों में निहित है। आर्यन की ओर से मानशिंदे ने कहा, “मेरे (आर्यन खान) पास या मेरे बैग में कोई सामग्री नहीं मिली है। किसी भी साजिश का खुलासा करने के लिए एक भी सामग्री नहीं है।” 

आर्यन के वकील सतीश मानेशिंदे ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट के पास जमानत देने का अधिकार है। मजिस्ट्रेट एक आरोपित को रिहा करने के लिए सक्षम है यदि कथित अपराध के लिए सजा मौत या आजीवन कारावास नही है।

दूसरी ओर, एनसीबी की ओर से पेश हुए ASG अनिल सिंह ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है जहाँ 17 लोगों की संलिप्तता है। उनके कनेक्शन, संलिप्तता की जाँच प्रारंभिक चरण में है। जमानत देने पर गवाहों के साथ हस्तक्षेप होगा। ये प्रभावशाली व्यक्ति हैं। सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना है। जाँच के दौरान हमें काफी सामग्री मिली है। इस स्टेज पर जमानत जैसी सुरक्षा जाँच में बाधा बन सकती है।

ASG अनिल सिंह ने कहा, “इनके व्हॉट्सऐप चैट कुछ जानकारी सामने आई है। आर्यन और अरबाज आर्यन के निवार ‘मन्नत’ पर एकत्र हुए। वहाँ से एक ही कार में गए थे। यह संयोग नहीं हो सकता। हमने ऑर्गेनाइजर और सप्लायर्स को गिरफ्तार कर लिया है। चैट से यह भी पता चला है कि दोनों लंबे समय से ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि गोवा जा रहे क्रूज पर तीन अक्टूबर को की गई छापेमारी के दौरान आर्यन खान, मुनमुन धमेचा और अरबाज मर्जेंट को एनसीबी ने गिरफ्तार किया था जबकि बाकी पाँच अन्य आरोपितों को अगले दिन गिरफ्तार किया गया था। आरोपितों से पूछताछ के आधार पर एनसीबी ने ड्रग पैडलर समेत अन्य लोगों को पकड़ा है।

जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर पकड़ाई ₹125 करोड़ की हेरोइन, मूँगफली के तेल में छिपा कर हो रही थी तस्करी

मूँगफली के तेल की खेप में छिपा कर मुंबई लाई गई हेरोइन की बड़ी खेप को राजस्व ख़ुफ़िया निदेशालय (DRI) ने नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) से बरामद किया है। इस सिलसिले में DRI ने नवी मुंबई से 62 वर्षीय व्यापारी जयेश संघवी को गिरफ्तार किया है। यह घटना 4 अक्टूबर 2021 (मंगलवार) की बताई जा रही है।

पकड़ी गई हेरोइन हेरोइन मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट पर एक कंटेनर में छिपा कर रखी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पकड़ी गई हेरोइन की अंतराष्ट्रीय बाज़ार में लगभग 125 करोड़ कीमत आँकी गई है। आरोपित जयेश यह तस्करी किसी और के व्यापारिक कोड पर कर रहा था।

मिली जानकारी के अनुसार DRI टीम को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर हेरोइन की बड़ी खेप आने की गुप्त सूचना थी जिसके आधार पर टीम को पोर्ट पर पूरी सतर्कता और सावधानी से तैनात किया गया था। शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन खान की क्रूज़ यात्रा के दौरान ड्रग्स पार्टी पर हुई कार्रवाई बीच नशे के अवैध कारोबार पर यह एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।

इस मामले में आरोपित व्यापारी जयेश संघवी को स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act 1985) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया था, जिसे विस्तृत पूछताछ के लिए न्यायालय ने 11 अक्टूबर तक DRI की हिरासत में भेज दिया है।

प्रकरण से संबंधित कंटेनर संदीप ठक्कर और वैभव द्वारा आयातित (Import) बताया जा रहा है जिनका कार्यालय मुंबई के मस्जिद बंदर इलाके में बताया जा रहा है। ठक्कर के अनुसार वह आरोपी जयेश के साथ लगभग 15 वर्ष से काम कर रहा था और जयेश ने ईरान से 10000 रुपए प्रति कंसाइनमेंट सामान लाने की बात कही थी। संदीप ठक्कर के अनुसार जयेश का कार्य उनके विश्वास को तोड़ने जैसा है।

इससे पहले जुलाई – 2021 में इसी जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह से राजस्व ख़ुफ़िया विभाग द्वारा ही दो हजार करोड़ रुपए की हेरोइन की खेप पकड़ी गई थी जो ईरान से ही लाई गई थी। हेरोइन की इस खेप को सड़क मार्ग से पंजाब भेजने की तैयारी थी जिसकी जाँच में DRI ने पंजाब के तरण तारण निवासी सप्लायर प्रभजीत सिंह को गिरफ्तार किया था। 

जुमे की नमाज के समय अफगानिस्तान के शिया मस्जिद में धमाका, 100 की मौत: और खूनी हुई तालिबान और ISIS की जंग

उत्तरी अफगानिस्तान के कुंदुज प्रांत में स्थित एक शिया मस्जिद में ब्लास्ट हुआ है, जिसमें कम से कम 100 लोगों के मारे जाने की खबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है। दोस्त मोहम्मद ओबैदा ने कहा कि ब्लास्ट में अधिकतर लोग मारे गए हैं। यह हमला किसने किया इस बात की पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि यह हमला इस्लामिक स्टेट मिलिटेंट्स ने किया है।

इस घटना को लेकर कुंदुज सेंट्रल अस्पताल के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अब तक हमें अपने अस्पताल में 35 शव मिले हैं और 50 से अधिक घायल हुए हैं।” हालाँकि, फिलहाल मृतकों के आँकड़े लगातार बदल रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) द्वारा संचालित एक अन्य अस्पताल में कम से कम 15 लोगों के शव मिले हैं। वहीं तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने पहले कहा था कि कुंदुज में हमारे शिया हमवतन की एक मस्जिद में विस्फोट होने पर अज्ञात संख्या में लोग मारे गए और घायल हुए। उन्होंने ये भी बताया कि यह वारदात राजादीन बांदर के खान अबाद कस्बे में हुई थी।

इसी नाम के एक प्रांत की राजधानी कुंदुज के स्थानीय लोगों ने एएफपी को बताया कि विस्फोट शुक्रवार की नमाज के दौरान एक शिया मस्जिद में हुआ। शुक्रवार का दिन मुस्लिमों के लिए काफी अहम होता है। एक स्थानीय व्यवसायी जल्माई आलोकजई ने भयानक दृश्यों का वर्णन करते हुए कहा, “मैंने 40 से अधिक शव देखे हैं।”

रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान का अफगानिस्तान पर शासन शुरू होने के साथ ही वहाँ इस्लामिक स्टेट खुरासान सक्रिय हो गया है। बीते कुछ समय में जिहादी संगठन ने कई हमले किए हैं। आईआईएस-के तालिबान को निशाना बनाकर हमले कर रहा है। बीते दिनों तालिबान पर हुए हमले की जिम्मेदारी उसने ली थी।

‘वेलकम बैक एयर इंडिया… जेआरडी होते तो बेहद खुश होते’: रतन टाटा का इमोशनल पोस्ट, सरकार को भी कहा शुक्रिया

कर्ज में डूबी सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया की घर वापसी की खबरों पर आधिकारिक मुहर लग गई है। स्पाइसजेट को पीछे छोड़ते हुए टाटा संस ने इसकी बोली जीत ली है। टाटा ग्रुप को एयर इंडिया की कमान मिली है। कंपनी ने सबसे बड़ी बोली लगाई। वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाली डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सचिव तुहिन कांत पांडे ने बताया है कि मंत्रियों की समिति ने एयर इंडिया के लिए विजेता बोली को मंजूरी दी है। टाटा संस ने एयर इंडिया के लिए 18,000 करोड़ रुपए की विजेता बोली लगाई। 

DIPAM के सचिव ने बताया कि एयर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप ने 18,000 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी। एयर इंडिया का 15300 करोड़ रुपए का कर्ज टाटा चुकाएगी और बकाया 2700 करोड़ सरकार को देगी। एयर इंडिया पर 31 अगस्त तक 61,560 करोड़ रुपए का कर्ज था। इसमें 15300 करोड़ रुपए टाटा संस चुकाएगी, जबकि बाकी के 46,262 करोड़ रुपए AIAHL (Air India asset holding company) भरेगी। 

तुहिन कांत पांडे ने कहा कि लेनदेन दिसंबर 2021 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। डील में एयर इंडिया की जमीन और इमारतों सहित किसी भी नॉन एसेट (जैसे- भूमि और भवन) को नहीं बेचा जाएगा। कुल कीमत 14,718 करोड़ रुपए की ये संपत्ति सरकारी कंपनी AIAHL के हवाले कर दी जाएँगी। सरकार की शर्तों के मुताबिक सफल बोली लगाने वाली कंपनी टाटा को एयर इंडिया के अलावा सब्सिडरी एयर इंडिया एक्सप्रेस का भी शत प्रतिशत नियंत्रण मिलेगा। वहीं, एआईएसएटीएस में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी पर कब्जा होगा।

बता दें कि एआईएसएटीएस प्रमुख भारतीय हवाईअड्डों पर कार्गो और जमीनी स्तर की सेवाओं को उपलब्ध कराती है। विनिवेश नियमों के मुताबिक टाटा को एयर इंडिया के घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लैंडिंग की मंजूरी मिलेगी।

एयर इंडिया की करीब 68 साल बाद घर वापसी पर समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने रतन टाटा ने इमोशनल पोस्ट किया है। ‘वेलकम बैक, एयर इंडिया’ का ट्वीट करते हुए उन्होंने एक नोट भी अटैच किया है। साथ ही 1932 में इस विमानन सेवा की शुरुआत करने वाले विजनरी बिजनेसमैन जेआरडी टाटा का एयर इंडिया के साथ एक फोटो भी शेयर किया है।

रतन टाटा ने अपने पोस्ट में कहा है, “एयर इंडिया का बोली जीतना टाटा ग्रुप के लिए काफी अच्छी खबर है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि एयर इंडिया को फिर से खड़ा करने के लिए मेहनत की जरूरत होगी। उम्मीद है कि यह फैसला एविएशन इंडस्ट्री में टाटा ग्रुप की मौजूदगी के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराएगा।”

उन्होंने लिखा है कि एक समय था जब जेआरडी के नेतृत्व में एयर इंडिया दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइंस थी। टाटा के पास मौका है कि एयर इंडिया को ये पहचान दोबारा दिलाए। यदि आज जेआरडी टाटा होते तो बेहद खुश होते। उन्होंने कहा कि वे सरकार के भी शुक्रगुजार हैं कि उसने हाल में कई इंडस्ट्री को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने की नीति अपनाई है।

उल्लेखनीय है कि एयर इंडिया की शुरुआत 1932 में जेआरडी टाटा ने की थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इसकी सेवाएँ बंद की गई थी। दोबारा 1946 में जब इसकी सेवा बहाल हुई तो नाम टाटा एयरलाइंस से बदलकर एयर इंडिया लिमिटेड हो गया। देश स्वतंत्र होने के बाद एयर इंडिया की 49 फीसदी भागीदारी सरकार ने ले ली थी। इसके बाद 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।

बदली नहीं आतंकियों और कश्मीरी नेताओं की सोच, बना रखा है वही माहौल: एक खास विचारधारा का विस्तार है J&K की आतंकी घटनाएँ

कश्मीर में पिछले कुछ दिनों में आतंकवाद की कई घटनाएँ हुईं जिनमें गैर-मुस्लिमों की हत्या की गई। अब तक अलग-अलग हमलों में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा पिछले 5 दिनों में कुल 7 लोगों की हत्या कर दी गई। सबसे ताजा आतंकी हमले में स्कूल के एक हिंदू अध्यापक और एक सिख अध्यापिका की हत्या की गई। इससे पहले एक स्थानीय व्यापारी माखन लाल बिंद्रू और बिहार के एक स्ट्रीट हॉकर, बिरेंदर पासवान की हत्या की गई थी।

अचानक हुए इन आतंकवादी हमलों ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ केंद्र सरकार को सकते में डाल दिया है। जहाँ एक ओर आतंकवादी संगठन और उनके समर्थक तथाकथित कश्मीरियत को वापस लाने के लिए खुश हो रहे होंगे। कश्मीर में अचानक हो रहे इन आतंकवादी हमलों का क्या कारण हो सकता है? प्रश्न यह भी है कि ये हमले क्या 2019 से पहले होने वाले हमलों से अलग हैं? इससे पहले पंचायत चुनावों में भाग लेने वाले लोगों पर हमले हुए थे और कुछ लोगों की हत्या भी कर दी गई थी।

अब अचानक इस तरह के हमलों का बढ़ जाना यह दिखाता है कि स्थानीय और विदेशी आतंकवादी लगातार सामान्य होती प्रशासनिक व्यवस्था और जनजीवन से विचलित हैं और अपनी तरफ से हर कोशिश करके सामान्य व्यवस्था में अशांति फैलाना चाहते हैं। कश्मीर को लेकर आतंकवादियों और स्थानीय राजनेताओं की सोच में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है। राजनीतिक दलों और नेताओं ने अभी भी लगभग वही माहौल बनाकर रखा है जो वे पहले यह कहते हुए बनाकर रखते थे, कि; 370 कोई नहीं हटा सकता।

अब अंतर बस इतना है कि ये नेता अब कहते फिरते हैं कि 370 की बहाली होगी। हत्या की इन घटनाओं पर घाटी के नेताओं के बयान और राजनीतिक हालात को लेकर उनके बयान मेल ही नहीं खाते। माखन लाल बिंद्रू की हत्या पर जिन फारुख अब्दुल्ला ने यह कहा कि; इन हत्यारों ने हमारे बिंद्रू को मार डाला, उन्हीं अब्दुल्ला का पुराना बयान देखा जाए तो वे यह कहते हुए ललकारते हैं कि; ये क्या सोचते हैं? बाहर से लोगों को लाकर बसाएँगे और हम चुप रहेंगे?

फारुख अब्दुल्ला जैसे विचार महबूबा मुफ़्ती भी रखती हैं। वे पहले से ही ललकारती रही हैं कि कोई तिरंगा उठाने वाला नहीं मिलेगा। अब यह क्या केवल संयोग है कि स्कूल के सिख प्रिंसिपल और हिंदू टीचर की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस समारोह में तिरंगा फहराया था? रिपोर्ट के अनुसार स्कूल के तमाम अध्यापक और अध्यापिकाओं के पहचान पत्र देखने के बाद मुसलमान अध्यापकों को जाने का आदेश दिया गया और मारने के लिए केवल इन दोनों को चुना गया।

एक रिपोर्ट के अनुसार, ISIS ने घाटी में बिरेंदर पासवान की हत्या की जिम्मेदारी ली है पर जिम्मेदारी लेने की घोषणा आजकल कितनी महत्वपूर्ण है, इसका अंदाज़ा इसबात से लगाया जाए कि मुकेश अंबानी के घर के नीचे जेलेटिन की क्षणों से भरी जो गाड़ी मिली थी उसकी जिम्मेदारी जैश-उल-हिंद नामक किसी आतंकवादी संगठन ने ली थी। इन हत्याओं और आतंकी हमलों को लोग अपनी-अपनी तरह से पेश करेंगे, आलोचना करेंगे, विश्लेषण करेंगे या कुछ तो इन्हें न्याय संगत ठहराते पाए जाएँगे।

अभी तक मीडिया और राजनीति के एक वर्ग ने इन हत्याओं का उद्देश्य घाटी की तथाकथित हिंदू-मुस्लिम एकता में दरार पैदा करना बताया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस की एक प्रवक्ता ने तो इनके पीछे उन भावनाओं को जिम्मेदार ठहराया है जो 370 के हटने के बाद हिंदुत्ववादी लोगों ने दिखाई थीं। सोशल मीडिया पर दी जानेवाली प्रतिक्रियाएँ हम सब को आश्चर्यचकित करने की क्षमता रखती हैं पर यह भी सच है कि घाटी और उसके बाहर के भी कुछ लोग इन हत्याओं को पहले घटी किसी न किसी घटना को आगे रखकर उचित ठहरा सकते हैं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

पिछले दो वर्षों से घाटी में जो बदलाव हुए हैं वे अपनी जगह हैं ही पर निकट भविष्य में जो बदलाव होने जा रहे हैं वे भी महत्वपूर्ण हैं। करीब चार दशकों के बाद जम्मू कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है। इसके परिणाम भी जल्द ही आएँगे। विशेषज्ञों का अनुमान यह है कि डेमोग्राफी का असर यह रहेगा कि जम्मू क्षेत्र में विधानसभा क्षेत्रों में बदलाव आएगा। घाटी में हिंदुओं की लगातार हो रही वापसी केवल आतंकवादियों के लिए चिंता का विषय नहीं है।

तमाम व्यक्तियों और संस्थाओं को खुद के भविष्य के लिए किसी न किसी तरीके का खतरा दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में कई लोगों की शिनाख्त करके उन्हें सरकारी नौकरियों से निकाला गया है। इन सब बातों का साझा असर एक से अधिक रूपों में दिखाई दे रहा है और ये हत्याएँ उन्हीं में से एक रूप है। केंद्र सरकार घाटी से बाहर खदेड़ दिए गए जिन हिंदुओं को वापस बसाना चाहती है या जिन्हें अब तक वापस लाया गया है उनके लिए परिस्थितियाँ आसानी से सामान्य नहीं होंगी।

यह सरकार के प्रयासों पर निर्भर करेगा कि वो इनके लिए क्या-क्या कर सकती है। देखा जाए तो सरकार के प्रयास किसी न किसी के लिए हमेशा अधूरे रहते हैं पर हम सब को यह समझने की भी आवश्यकता है कि घाटी में अपना सब कुछ वापस पाने के लिए संघर्ष करना होगा और कीमत भी देनी होगी। यह बात देश के किसी अन्य कोने में बैठकर लिखना या बोलना सरल है पर सच यही है कि सम्पूर्ण स्वतंत्रता की कीमत चुकाए बिना घाटी में रहने और वापस सबकुछ पाना कम से कम शुरुआती दिनों में असंभव होगा।

मस्जिद, मजार, कब्र से मुक्त हुआ प्रयागराज का चंद्रशेखर आजाद पार्क: हाई कोर्ट ने सभी अवैध निर्माण हटाने के दिए थे आदेश

प्रयागराज स्थित चंद्रशेखर आजाद पार्क में अतिक्रमण को हटाने के लिए दिए गए इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश का असर दिखने लगा है। कोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) को जिला प्रशासन के बुलडोजर ने पार्क में अवैध तरीके से बनाई गई मस्जिद, मजार, कब्र समेत कई अवैध ढाँचों को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन ने पार्क में 1975 के बाद बनाए गए सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया है।

प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा गुरुवार दोपहर को शुरू की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुक्रवार की सुबह तक जारी रही। इस दौरान प्रशासन ने करीब 3 मजारों और 14 कब्रों को तोड़ दिया। जिन मजारों को ध्वस्त किया गया वे एक पुरानी मजार के बगल में बने थे। प्रयागराज विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन के इस अभियान के तहत पार्क में ज्ञान वृक्ष मंदिर के आगे बने अवैध निर्माण को भी ध्वस्त कर दिया गया और साथ में एक मस्जिद को तोड़ दिया गया। कब्जा हटाने के बाद प्रशासन ने वहाँ पर तीन-तीन फीट के पौधे लगा दिए हैं।

पार्क में स्थित हिंदुस्तान एकेडमी और लेडीज क्लब के अतिक्रमण को भी हटा दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान को अंजाम देने के लिए पाँच टीमें गठित की गई थीं। प्रयाग संगीत समिति, हिंदुस्तानी एकेडमी, गंगानाथ झा संस्थानों के परिसरों में भी अवैध निर्माण हुए थे, जिन्हें अब मुक्त करा लिया गया है।

गौरतलब है कि इस मामले में जितेंद्र सिंह नाम के शख्स ने अधिवक्ता हरि शंकर जैन के माध्यम से याचिका दायर की थी। 23 फरवरी को दाखिल याचिका में कहा गया था कि पूरे पार्क को कब्रिस्तान में बदला जा रहा है। याचिका में कहा गया था कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग पार्क की जमीन पर कब्जा करने के लिए कृत्रिम कब्रें बना रहे हैं। पार्क क्षेत्र में एक इमारत को मस्जिद में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए प्रशासन को सभी अवैध निर्माण हटाकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।