क्रूज ड्रग्स केस में फँसे बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान समेत 8 आरोपितों को अदालत ने गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा दिया था। इसके तुरंत बाद आर्यन ने जमानत अर्जी दाखिल की थी, जिसकी कोर्ट में सुनवाई जारी है।
7 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान वकील सतीश मानशिंदे ने बताया कि आखिर आर्यन खान के साथ क्रूज पार्टी में शामिल होने से ठीक एक दिन पहले क्या-क्या हुआ था। मानशिंदे के अनुसार, आर्यन खान को पार्टी में ग्लैमर का तड़का डालने के लिए वीवीआईपी गेस्ट के रूप में बुलाया गया था। आर्यन को उनके दोस्त प्रतीक ने आयोजकों को जानने वाले एक शख्स से मिलवाया था, जिन्होंने खान को आमंत्रित किया था।
आर्यन की ओर से उनके वकील ने कहा, “प्रतीक मेरा (आर्यन खान) दोस्त है। उसने मुझे किसी ऐसे शख्स से मिलवाया जो आयोजकों के संपर्क में था। उन्होंने कहा कि मुझे वीवीआईपी के तौर पर आमंत्रित किया जाएगा। मैं सिर्फ ग्लैमर में चार चाँद लगाने के मकसद से क्रूज पर गया था। वहाँ पर 1,300 लोग थे मगर उन्होंने केवल 17 को गिरफ्तार किया है।”
मानशिंदे ने कहा कि प्रतीक और आर्यन के बीच के मोबाइल चैट से इसकी पुष्टि की जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्रतीक, अरबाज मर्चेंट का भी दोस्त है। बता दें कि आर्यन के साथ अरबाज मर्चेंट भी क्रूज पर पार्टी करते हुए पकड़ा गया था और फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
उन्होंने आगे आर्यन की तरफ से कहा, “मैं क्रूज टर्मिनल पहुँचा, जहाँ अरबाज भी था। मैं उन्हें जानता था तो हम दोनों ही शिप की ओर एक साथ बढ़े। मैं जैसे ही वहाँ पहुँचा, NCB ने मेरे से पूछा कि क्या मैं ड्रग्स कैरी कर रहा हूँ? मैंने कहा नहीं। उन्होंने मेरे बैग की तलाशी ली, इसके बाद मुझे चेक किया, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला।” तो क्या अरबाज मर्चेंट की किसी भी हरकत से आर्यन वाकिफ नहीं थे, इस पर सतीश की तरफ से कहा गया, “मैं यह नहीं कह रहा कि अरबाज मेरा दोस्त नहीं है, लेकिन मैं उसकी किसी भी हरकत से वाकिफ नहीं था। वह तो खुद कह रहा है कि वह अकेले आया था।”
गौरतलब है कि बीते दिनों NCB ने आर्यन सहित 11 लोगों को ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया था। इनमें उनके दोस्त अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा का भी नाम शामिल है। खुफिया जानकारी के आधार पर एनसीबी की एक टीम ने अपने क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े के नेतृत्व में 2 अक्टूबर की शाम को गोवा जाने वाले ‘कॉर्डेलिया क्रूज़’ पर छापा मारा था। इस छापेमारी में कुछ लोगों के पास से नशीले पदार्थ बरामद किए थे। एनसीबी का कहना है कि छापेमारी में 13 ग्राम कोकीन, पाँच ग्राम एमडी (मेफोड्रोन), 21 ग्राम चरस और एक्स्टेसी की 22 गोलियाँ एवं 1.33 लाख रुपए नकद जब्त किए गए थे।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में चल रही जाँच में एक पूर्व कॉन्ग्रेस सांसद के भतीजे के साथी से भी पूछताछ हुई। इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर है। वायरल वीडियो में पुलिस एक घायल व्यक्ति से उसका नाम, पता और अन्य जानकारी ले रही है। जहाँ वह अपना नाम बताते हुए कह रहा है कि वो कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व सांसद अखिलेश दास के भतीजे के साथ काम करता है और लखनऊ के चारबाग का निवासी है।
पूरी हिंसा मामले में जिस समय प्रोपगेंडा फैलाने का काम अपने चरम पर था तब कॉन्ग्रेसी पत्रकारों ने एक क्रॉप वीडियो शेयर की थी, ताकि वह अपना एजेंडा चला सकें। रोहिणी सिंह समेत तमाम पत्रकारों द्वारा शेयर की गई वीडियो में व्यक्ति सिर्फ ये बताता सुनाई पड़ रहा था कि थार को तेजी में लाया गया और उससे लोग कुचले गए। लेकिन जहाँ उसने ये बताया था कि वो कॉन्ग्रेस नेता के भतीजे का साथी है, उस भाग को पूरा काट दिया गया।
एनडीटीवी ने तो इस वीडियो को लेकर अपना प्रोपगेंडा एक अलग स्तर पर पहुँचा दिया। एनडीटीवी ने वायरल वीडियो से संबंधित एक रिपोर्ट पोस्ट की और अपने शीर्षक में कहा कि व्यक्ति ने हिंसा प्रभावित क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री के बेटे की उपस्थिति के बारे में बताया जबकि वह कॉन्ग्रेस नेता के भतीजे का नाम ले रहा था।
एनडीटीवी ने अपने आप ही मान लिया कि व्यक्ति यूपी के मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को ‘भैया’ कह रहा था जबकि सच यह है कि युवक अपनी वीडियो में अंकित दास को भैया कहकर संबोधित कर रहा था।
एनडीटीवी की भ्रांमक हेडलाइन
दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट ट्विटर पर 6 अक्टूबर को सुबह 11:28 पर शेयर हुई थी। उससे थोड़ी पूर्व एनडीटीवी ने वीडियो डाली थी जहाँ एंकर वायरल वीडियो के बारे में बात कर रही थीं और उस वीडियो को भी दिखाया जा रहा था। हालाँकि इसमें एनडीटीवी ने बड़ी बेशर्मी से कॉन्ग्रेस नेता का नाम छिपाने के लिए वहाँ ऑडियो डिस्टर्ब कर दिया।
वीडियो के 00:46 सेकेंड पर, जब वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कहता है कि एक कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व सांसद का भतीजा फॉर्च्यूनर कार चला रहा था, NDTV ने ऑडियो में डिस्टर्बेंस जोड़ा ताकि नाम सुनाई न दे। वीडियो में उस जगह बीप को जोड़ा जाता है जहाँ वह अंकित दास का नाम लेता है। बस टिकर में लिखा होता है कि आदमी का दावा है कि फॉर्च्यूनर पूर्व कॉन्ग्रेस सांसद के भतीजे से संबंधित है।
मालूम हो कि ये वही वीडियो है जिसे रोहिणी सिंह समेत तमाम पत्रकारों ने शेयर किया था। हो सकता है कि इन कॉन्ग्रेसी पत्रकारों ने ऐसा इसलिए भी किया हो कि जब कोई व्यक्ति ऑडियो सुन या देख रहा होता है तो वो तेज-तेज स्क्रीन से हटने वाले टिकर पर ध्यान नहीं देता।
अब एक बात यहाँ स्पष्ट हो कि हर मीडिया संस्थान के पास अपनी संपादकीय स्वतंत्रता होती है। मीडिया संस्थान ये फैसला कर सकता है कि उन्हें कौन सी खबर कौन से एंगल से कवर करनी है और कौन सी नहीं। लेकिन मीडिया को मैनिपुलेट करना किसी भी कीमत पर संपादकीय स्वतंत्रता का हिस्सा नहीं माना जाता।
वीडियो में एनडीटीवी ने जानबूझकर एक नाम छिपाने के लिए आवाज में बीप की ध्वनि को जोड़ा। अब इसके पीछे यही मंशा हो सकती है कि वो चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस नेता के भतीजे का नाम छिपाकर भाजपा नेता के बेटे का नाम दर्शकों तक पहुँचाना चाहते हों। एनडीटीवी ने जिस तरह से वीडियो को लेकर मैनिपुलेट किया है वो मीडिया के नाम पर किया गया अनैतिक काम है।
बता दें कि अंकित दास को पूर्व कॉन्ग्रेस सांसद अखिलेश दास का भतीजा बताया जाता है जो मनमोहन सिंह सरकार में जनवरी 2006 से मई 2008 तक इस्पात मंत्री थे। वह मई 1993 से नवंबर 1996 तक लखनऊ के मेयर भी रहे।
आशीष मिश्रा की तलाश में यूपी पुलिस
इस पूरे मामले में जब से अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष का नाम उछला है तभी से वह नजर नहीं आए हैं। यूपी पुलिस ने केंद्रीय मंत्री के घर के बाहर नोटिस लगाया है। उनका नाम लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में दर्ज एफआईआर में है। उन्हें आज 10 बजे क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने को कहा गया था। उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 147, 148, 149,279, 338, 304ए, 302, 120बी के तहत केस दर्ज हुआ है।
लखीमपुर खीरी हिंसा और कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम
3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी में भाजपा कार्यकर्ताओं की गाड़ी पर ‘किसानों’ ने पथराव किया था। जिसके बाद गाड़ी के शीशे टूटे और ड्राइवर से गाड़ी का कंट्रोल छूट गया। नतीजन गाड़ी भीड़ पर चढ़ गई और प्रदर्शनकारी मारे गए। घटना में कुल 8 लोगों के मरने की खबर है। इस घटना के बाद से कॉन्ग्रेसी समर्थक लगातार सारी हिंसा का ठीकरा भाजपा कार्यकर्ताओं पर फोड़ रहे हैं और उन कार्यकर्ताओं की बात तक नहीं हो रही जिनकी बुरी तरह लिंचिंग की गई और बाद में वीडियो वायरल आई।
घटना के बाद जहाँ यूपी प्रशासन हिंसा को कंट्रोल करने के लिए प्रयासरत था, वहीं मामले का राजनीतिकरण करने के लिए राकेश टिकैत ने ये तक कह दिया था कि जो कार्यकर्ता मारे गए उन्हें मुआवजा नहीं मिलना चाहिए क्योंकि वह बर्बर थे। हालाँकि, जब कॉन्ग्रेस नेता के नाम वाली वीडियो प्रकाश में आई तो पूरे इकोसिस्टम ने कोशिश की कि किसी तरह इस ऐसे फैलाया जाए कि सारा इल्जाम भाजपा पर लगे और कॉन्ग्रेस पर सवाल न उठें।
तथ्य यह है कि लखीमपुर खीरी में पहले प्रदर्शनकारियों ने काफिले पर हमला किया, इसके बाद गाड़ी अनियंत्रित हुई और 4 प्रदर्शनकारियों की जान गई। इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं को मारा गया। स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेसी तंत्र इस बात को पता लगाने में दिलचस्पी नहीं रखता कि हिंसा को किसने भड़काया या लिंचिंग में शामिल कौन था। उन्हें बस अजय मिश्रा और आशीष मिश्रा को फँसाना है क्योंकि इससे उन्हें यूपी चुनाव में मदद होगी।
जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए गए 2 साल से भी अधिक बीत चुके हैं। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने और अतिरिक्त सख्ती के कारण आतंकी उस समय किसी अप्रिय घटना को अंजाम नहीं दे पाए। सभी अलगाववादियों और पाकिस्तान परस्त कश्मीरी नेताओं को पहले ही नजरबंद कर दिया गया था। लेकिन, घाटी में अब हिन्दुओं और सिखों की हत्याओं का दौर फिर से शुरू हो गया है। इस बीच हमें फारूक अब्दुल्ला के एक बयान को भी याद करना चाहिए।
84 वर्षीय फारूक अब्दुल्ला ‘जम्मू एंड कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC)’ के अध्यक्ष हैं। उनके पिता जम्मू कश्मीर के ‘प्रधानमंत्री’ रह चुके हैं। वो खुद राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने भी बतौर मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा किया था। ऐसे में इतने बड़े नेता द्वारा दिए गए बयान हल्के में नहीं लिए जाने चाहिए। उनके जिस बयान का हम जिक्र कर रहे हैं, वो उन्होंने अनुच्छेद-370 के निरस्त होने से 4 महीने पहले अप्रैल 2019 में दिया था।
उन्होंने कहा था, “वो समझते हैं कि बाहर से लाएँगे, बसाएँगे और हम सोते रहेंगे? हम इसका मुकाबला करेंगे। अनुच्छेद-370 को कैसे ख़त्म करोगे? अल्लाह की कसम खा कर कहता हूँ, अल्लाह को ये मंजूर नहीं होगा। हम इनसे आज़ाद हो जाएँ। करें, हम भी देखते हैं। देखता हूँ फिर कौन इनका झंडा खड़ा करने के लिए तैयार होगा।” कुछ इसी तरह का बयान पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने भी दिया था कि इसके बाद जम्मू कश्मीर में कोई तिरंगा उठाने वाला भी न बचेगा।
#WATCH F Abdullah: Bahar se laenge, basaenge,hum sote rahenge?Hum iska muqabala karenge,370 ko kaise khatam karoge?Allah ki kasam kehta hun,Allah ko yahi manzoor hoga,hum inse azad ho jayen.Karen hum bhi dekhte hain.Dekhta hun phir kon inka jhanda khada karne ke liye taiyar hoga. pic.twitter.com/hrxoh9ECOY
अब जब कश्मीर फिर से गैर-मुस्लिमों का कत्लेआम शुरू हो गया है, फारूक अब्दुल्ला का ये धमकी भरा बयान याद आ रहा है। पिछले 5 दिन में जम्मू कश्मीर में 7 हत्याएँ हुई हैं। बौखलाए आतंकियों ने गुरुवार (7 अक्टूबर, 2021) को एक महिला सिख शिक्षक और एक हिन्दू शिक्षक की हत्या कर दी। 6 हत्याएँ शहर में हुई हैं। लोगों को 90 का दशक याद आ रहा, जब वहाँ के पंडितों का नरसंहार हुआ था। उन्हें घाटी छोड़नी पड़ी थी।
जम्मू कश्मीर के लोगों के बीच जनसांख्यिकी बदलाव का डर बैठाया जा रहा है और उन्हें कहा जा रहा है कि हिन्दुओं के यहाँ आने से वो असुरक्षित महसूस करेंगे। अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद इस्लामी आतंकियों का मनोबल बढ़ा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने NSA अजीत डोभाल सहित अन्य अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक भी बुलाई। इसमें CRPF BSF के मुखिया भी शामिल हुए।
ताज़ा घटनाओं की बात करें तो 2 अक्तूबर को राजधाइ श्रीनगर के चट्टाबल के रहने वाले माजिद अहमद गोजरी की आतंकियों ने हत्या कर दी। इसी दिन एसडी कॉलोनी बटमालू में मोहम्मद शफी डार को गोलियों से भून डाला गया। 5 अक्टूबर को लोकप्रिय दवा कारोबारी माखन लाल बिंदरू की हत्या हुई। इसके कुछ ही देर बाद बिहार के महादलित चाट विक्रेता वीरंजन पासवान की हत्या हुई। उसी दिन बांदीपोरा में मोहम्मद शफी लोन को मार डाला गया।
फिर दो शिक्षकों को मौत के घाट उतार दिया गया। वही फारूक अब्दुल्ला अब घड़ियाली आँसू बहा रहे हैं। उन्होंने मशहूर कश्मीरी पंडित हस्ती माखन लाल बिंदरू के इंदिरा नगर स्थित आवास का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की, जिन्हें मार डाला गया था। उन्होंने बिंदरू को नेकदिल इंसान बताते हुए कहा कि वो सबकी मदद करते थे। हत्यारों को उन्होंने शैतान करार दिया और पीड़ित परिवार से आग्रह किया कि वो कश्मीर छोड़ कर न जाएँ।
दुर्गापूजा को लेकर अपना विवादित दिशा-निर्देश वृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) ने वापस ले लिया है। भेदभावपूर्ण और अतार्किक बताते हुए इन निर्देशों का लोग विरोध कर रहे थे। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी बुधवार (6 अक्टूबर 2021) को इसको लेकर नाराजगी दिखाई थी।
दरअसल, कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने का हवाला देते हुए BBMP ने कहा था दुर्गा प्रतिमा की ऊँचाई 4 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही त्योहार के दौरान ड्रम के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
Karnataka | Idol size shall not exceed more than 4 feet; 1 idol should be installed per ward with permission of respective Jt Commissioner of zone. Asscn shall not allow more than 50 people at a time during prayers: Bruhath Bengaluru Mahanagara Pallike guidelines for Durga Puja pic.twitter.com/Yt8xFjb2yc
BBMP ने दिशा-निर्देशों में मूर्ति स्थापित करने से पहले उसे सैनिटाइज करने को कहा गया था, जिसका भक्तों ने कड़ा विरोध किया। विरोध पर संज्ञान लेते हुए बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कड़ी आपत्ति जताते हुए BBMP के मुख्य आयुक्त को दुर्गा पूजा नियमों पर फिर से विचार करने के लिए एक पत्र लिखा था।
I spoke to @BBMPCOMM & asked him to revisit Durga Pooja rules which are discriminatory, arbitrary & illogical.
He assured me that these rules will be reviewed forthwith & sentiments of devotees will be given utmost importance.
बीजेपी सांसद ने इसको लेकर ट्वीट किया, “मैंने BBMP के मुख्य आयुक्त से बात की और उनसे दुर्गा पूजा को लेकर जारी भेदभावपूर्ण, मनमाने और अतार्किक दिशा-निर्देशों पर फिर से विचार करने को कहा। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि इनकी तत्काल समीक्षा की जाएगी और भक्तों की भावनाओं को ख्याल रखा जाएगा।”
सूर्या ने अपने पत्र में नौकरशाही में व्याप्त औपनिवेशिक सोच और हिंदू त्योहारों को लेकर पूर्वाग्रह का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा, “मूर्ति के आकार के संबंध में लगाए गए प्रतिबंध बिना किसी तार्किक प्रासंगिकता के लिए गए प्रतीत होते हैं। यह किसी भी व्यक्ति की समझ से परे है कि मूर्ति का आकार कोविड-19 वायरस के प्रसार से कैसे संबंधित है।”
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या का बीबीएमपी को पत्र (साभार: ट्विटर)
उन्होंने आगे लिखा, “यह बेहद खेदजनक है कि प्रशासन केवल हिंदू समुदाय के उत्सव के दौरान इस तरह के कठोर और मनमाने नियम लागू करता है और अन्य मजहबों के उत्सवों के दौरान आंखें मूँद लेता है।” सूर्या ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “नौकरशाही में यह सोचने की एक सामान्य प्रवृत्ति है कि हिंदू त्योहारों पर किसी भी तरह के प्रतिबंध लगाना ठीक है। यह एक औपनिवेशिक सोच है। 2014 के बाद जागृत हिंदू ऐसे प्रयासों का विरोध करते हैं।”
There is a general tendency in sections of the bureaucracy to think that it’s OK to put any and every kind of restrictions on Hindu festivals. This is a colonial relic.
Post 2014, the awakened Hindu resists such attempts. This colonialism must end too. https://t.co/BU5YMSbdxH
विरोध और भाजपा सांसद के पत्र के बाद BBMP आयुक्त गौरव गुप्ता ने आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। गुप्ता ने गुरुवार को बेंगलुरु में विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों के साथ बैठक के बाद यह निर्णय लिया। उन्होंने बताया, “सार्वजनिक स्थानों पर दुर्गा मूर्ति की 4 फीट ऊँचाई का प्रतिबंध हटा दिया गया है। अब से ‘पुष्पांजलि’ और ‘संधि’ पूजा व ढोल जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों को भी प्रार्थना अनुष्ठानों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है।”
अरुणाचल प्रदेश के तवांग में कुछ दिन पहले चीन के फौजियों की घुसपैठ को भारतीय सेना ने नाकाम करके बड़ी सफलता हासिल की थी। न्यूज 18 की एक्सक्लूसिव खबर में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया कि चीन के 200 फौजी तिब्बत के रास्ते भारत में घुसे और खाली बंकरों को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया। इसके बाद भारतीय सेना ने उनमें से कुछ सैनिकों को हिरासत में भी ले लिया।
घटना पिछले हफ्ते LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) के करीब बुम ला और यांग्त्से के सीमा दर्रे के बीच हुई थी। जहाँ चीनी घुसपैठ का भारतीय सैनिकों ने जमकर कड़ा विरोध किया और कुछ PLA सैनिकों को अपनी हिरासत में भी ले लिया।
न्यूज 18 को सरकारी सूत्र ने जानकारी दी कि मामले को बाद में स्थानीय सैन्य कमांडरों के स्तर पर सुलझाया गया। चीनी सैनिकों को रिहा कर दिया गया और स्थिति सामान्य हुई। पूरी घटना पर अभी सेना की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। लेकिन, रक्षा और सुरक्षा सूत्रों ने समाचार साइट को बताया कि भारतीय सुरक्षा बलों को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
? EXCLUSIVE | India Foils Chinese Incursion in Arunachal Pradesh, Temporarily Detains Chinese Troops, No Damage to Indian Defences
खबर में बताया गया है कि भारत-चीन सीमा का औपचारिक रूप से सीमांकन नहीं किया गया है। दोनों देशों की सीमा रेखा परसेप्शन पर आधारित है जिसमें अंतर बताया जा रहा है। दोनों देश अपनी-अपनी धारणा के मुताबिक वहाँ गश्त लगाते हैं। फिर दोनों देशों के बीच किसी तरह की असहमति या टकराव का प्रोटोकॉल के हिसाब से शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाता है।
इससे पहले उत्तराखंड के बाराहोती इलाके में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के करीब 100 जवानों ने एलएसी का उल्लंघन किया था। वह 30 अगस्त को भारतीय सीमा में घुसे थे लेकिन फिर चले भी गए थे। अब इलाके में भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवान तैनात हैं।
मालूम हो कि क्षेत्र में चीनी घुसपैठ कोई नई बात नहीं है। 2016 में, 200 से अधिक चीनी सैनिकों ने यांग्त्से में एलएसी के भारतीय क्षेत्र में कथित तौर पर घुसपैठ की थी, लेकिन उस समय भी वो कुछ घंटों में वापस चले गए थे। उससे पहले 2011 में, चीनी सैनिकों ने एलएसी के भारतीय हिस्से में 250 मीटर लंबी दीवार को तोड़ने की कोशिश की थी और इसे क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसके बाद भारत ने चीन के सामने विरोध भी दर्ज कराया था।
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें कुछ लोग लाठियों से एक व्यक्ति की बुरी तरह पिटाई करते दिख रहे हैं। यह वीडियो कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान की बताई जा रही। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह घटना बीकानेर-नोखा मार्ग पर गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) को हुई। पिट रहे शख्स की पहचान कॉन्ग्रेस नेता मेघ सिंह के तौर पर हुई है। वे नोखा देहात कॉन्ग्रेस अध्यक्ष हैं।
घटना का वीडियो शेयर करते हुए राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने ट्वीट किया है, “नोखा, राजस्थान का ये विडियो देखकर रूह काँप जाएगी। राजस्थान से ढोंग करने यूपी जाने वाले कॉन्ग्रेसियो, देखो तुम्हारे शासित राज्य को तुमने क्या बना दिया।”
नोखा , राजस्थान का ये विडियो देखकर रूह काँप जाएगी ।
राजस्थान से ढोंग करने यूपी जाने वाले कांग्रेसियों , देखो तुम्हारे शासित राज्य को तुमने क्या बना दिया ? pic.twitter.com/9MDPJriChZ
शहज़ाद पूनावाला ने ट्वीट करते हुए कहा है, “बीकानेर का यह नज़ारा, राजस्थान में आम बन चुका है। दिनदहाड़े ऐसी घटनाएँ जो मजबूर कर देती हैं यह पूछने के लिए कि क़ानून व्यवस्था कहाँ है? परंतु लिंचिंग पर बड़ा ज्ञान देनेवाली मंडली आज पूर्ण तरीक़े से ख़ामोश है!”
बीकानेर का यह नज़ारा, राजस्थान में आम बन चुका है । दिन दहाड़े ऐसी घटनाएँ जो मजबूर कर देती है यह पूछने के लिए की क़ानून व्यवस्था कहाँ है ?
नोखा से BJP विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने कॉन्ग्रेस नेता पर हुए हमले को निंदनीय बताया है। साथ ही कहा है कि कॉन्ग्रेस शासन में अपराधियों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि खुद कॉन्ग्रेसी नेता ही हमले का शिकार हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार वायरल वीडियो हिम्मटसर गाँव का है, जो बीकानेर-नोखा राजमार्ग पर पड़ता है। यहाँ देशनोक में करणी माता के दर्शन कर लौट रहे मेघ सिंह की कार को बोलेरो सवार हमलावरों ने पहले टक्कर मारकर रोका फिर उन्हें बाहर खींच उनकी पिटाई शुरू कर दी।
मेघ सिंह को लाठी-डंडों से तब तक पीटा गया जब तक वे बेसुध नहीं हो गए। उनके सिर, कमर और पैरों को बार-बार निशाना बनाया गया। बुरी तरह से घायल कॉन्ग्रेस नेता को स्थानीय बागड़ी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर देखते हुए उन्हें पीबीएम अस्पताल के ट्रामा सेंटर में रेफर कर दिया गया।
हमलावरों ने पीट पीटकर मेघ सिंह के दोनों पैर तोड़ दिए। ये भी बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो खुद हमलावरों ने दहशत फैलाने के लिए बनाया। रिपोर्ट के अनुसार कॉन्ग्रेस नेता के वाहन को भी निशाना बनाया गया। बीच-बचाव को आए उनके भाई माल सिंह और बेटा जीतू सिंह भी घायल हो गया। हमले की वजह पुरानी रंजिश बताई जा रही है।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस द्वारा मजरूब मेघसिंह को अस्पताल पहुंचा उपचार करवाया जहां से ईलाज हेतु पीबीएम अस्पताल रेफर किया गया। वीडियो फुटेज के आधार पर हरीसिंह, बृजलाल, गुलाबसिंह, रामकुमार, पृथ्वीराज की पहचान की जा चुकी है,अन्य व्यक्तियों की पहचान व तलाश जारी है@Rajendra4BJP
ऑप इंडिया को स्थानीय पुलिस ने बताया कि पारिवारिक विवाद में यह घटना अंजाम दी गई। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस प्रयास कर रही है। आरोपितों की पहचान हरी सिंह, बृजलाल, गुलाब सिंह, रामकुमार और पृथ्वीराज के तौर पर हुई है।
इस्लामी धर्मान्तरण रैकेट की जाँच कर रही उत्तर प्रदेश ATS ने गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) को बड़ी कार्रवाई करते हुए मौलाना कलीम सिद्दीकी के सहयोगी सरफराज अली जाफरी को गिरफ्तार किया। उसे अमरोहा जिले से गिरफ्तार किया गया। वह भारत के ‘सबसे बड़े धर्मांतरण सिंडिकेट’ चलाने के आरोपित मौलाना कलीम सिद्दीकी के साथ मिलकर काम कर रहा था और 2016 से ही इसमें लिप्त था।
पश्चिमी यूपी के सबसे बड़े मौलवियों में से एक मौलाना कलीम सिद्दीकी को पिछले महीने ही ATS ने गिरफ्तार किया था। ATS के आईजी जीके गोस्वामी ने खुलासा किया कि मौलाना सिद्दीकी से पूछताछ के दौरान सरफराज अली जाफरी के बारे में जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा, “मौलाना कलीम सिद्दीकी के ग्लोबल पीस सेंटर में जाफरी काम करता था। वह रिवर्ट, रिहैब और दावा व्हाट्सएप ग्रुप का भी मेंबर था। इसी के जरिए उसके गिरोह के लोगों ने धार्मिक नफरत फैलाने के साथ ही लोगों को लालच देकर उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया।”
ATS के मुताबिक, धर्म परिवर्तन के रैकेट में शामिल जाफरी जामिया नगर का रहने वाला है। वह कथित तौर पर कलीम सिद्दीकी के ग्लोबल पीस सेंटर के कामकाज देखता था। इसके अलावा समाज सेवा की आड़ में लोगों का धर्मान्तरण कराने वाले नई दिल्ली स्थित ह्यूमैनिटी फॉर ऑल ऑर्गनाइजेशन को भी संचालित करता था।
विदेशों से फंडिंग
रिपोर्ट्स से यह बात सामने आई है कि ये लोग धर्मान्तरण करने वाले लोगों को काम दिलाने में मदद करने का वादा करते थे। इसके लिए जाफरी को मौलाना सिद्दीकी से फंडिंग मिलती थी। उसके सेलफोन की जाँच से पता चला है कि गैरकानूनी धर्मान्तरण की गतिविधियों के लिए उसे विदेशों से भी फंडिंग मिलती थी। अधिकारियों का कहना है कि अब तक गिरफ्तार किए गए सभी आरोपितों पर उत्तर प्रदेश धर्मान्तरण निषेध अधिनियम, 2020 और भारतीय दंड संहिता के तहत आरोप तय किए गए हैं।
मौलाना के ठिकानों पर भी हुई थी छापेमारी
मौलाना कलीम सिद्दीकी के कई ठिकानों पर उत्तर प्रदेश ATS ने पिछले दिनों छापेमारी की थी। जाँच एजेंसी ने दिल्ली में मौलाना सिद्दीकी और उसके सहयोगियों की दो आवासीय और दो व्यावसायिक संपत्तियों की तलाशी 5 अक्टूबर 2021 को ली थी। ATS द्वारा जारी एक प्रेस नोट के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में कई स्थानों पर की गई छापेमारी से डेस्कटॉप, टैबलेट और दस्तावेज जब्त किए गए। नई दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में स्थित सिद्दीकी के आवास के साथ-साथ उसके संगठनों ग्लोबल पीस सेंटर और वर्ल्ड पीस ऑर्गनाइजेशन समेत अब्दुल रहमान के घर पर छापे मारे गए थे।
गौरतलब है कि यूपी ATS ने इस साल जून में उमर गौतम और उसके सहयोगी की गिरफ्तारी करने के बाद धर्म परिवर्तन रैकेट की जाँच शुरू की थी। दोनों अपने अन्य सहयोगियों के साथ इस्लामिक दावा सेंटर (IDC) नामक संगठन चला रहे थे। लोगों को शादी, नौकरी, पैसे का लालच देकर धर्मांतरण में लगे थे। इतना ही नहीं उमर गौतम पर दिव्यांग बच्चों को मानव बम बनाने का भी आरोप है। जाँच में गौतम और उसके साथियों को मिली अवैध विदेशी फंडिंग का भी खुलासा हुआ था।
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में इस बार सीआरपीएफ कर्मियों को निशाना बनाया गया। गुरुवार (अक्टूबर 7, 2021) को मोंघल ब्रिज के पास 2 संदिग्ध एक बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ी से जा रहे थे, जब सुरक्षाबल ने उन्हें रोकना चाहा तो गाड़ी में बैठे दोनों लोगों ने उन पर फायरिंग की और उसके बाद वहाँ से गाड़ी नाका पार्टी की तरफ दौड़ा दी। जवानों को अपनी आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी, जिसके कारण गाड़ी में बैठे एक संदिग्ध की मौत हो गई और ड्राइवर वहाँ से भागने में सफल रहा।
CRPF troops at a naka party at Monghal Bridge in Anantnag tried to intercept a suspected vehicle without number plate but it rushed towards the naka party. Troops fired upon in self-defence & one person died. The driver managed to escape: Kashmir IG Vijay Kumar pic.twitter.com/A1CNgNpzqN
सुरक्षाबल, फरार ड्राइवर की खोज में जुटे हैं। फिलहाल उन्हें वो गाड़ी मिली है जिसे बिना नंबर प्लेट नाका पार्टी की ओर लाया गया। इसके फ्रंट पर लिखा है- “मुस्लिम फॉरएवर।” टीवी9 की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में आधिकारिक सूत्रों ने जानकारी दी है कि गुरुवार को 40 जवानों ने मोंघल ब्रिज पर नाका लगाया। इस दौरान वहाँ से जाने वाली एक सिल्वर स्कॉर्पियों को रुकने के लिए कहा गया। लेकिन वो नियम तोड़ते हुए आगे बढ़ गया। इसी के बाद सीआरपीएफ ने फायरिंग की और एक संदिग्ध की मौत हो गई।
Troops fired upon in self-defence in which one person died. But the driver of the vehicle managed to escape from the spot. Identification & credentials of the deceased person are being verified. Probe underway: Jammu & Kashmir Police
गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में आतंकी लगातार अपना खौफ दोबारा कायम करने की कोशिशों में जुटे हैं। इस बार उनके निशाने पर केवल कश्मीरी पंडित और हिंदू नहीं हैं, बल्कि इस बार वो सिखों को भी अपना निशाना बना रहे हैं। गुरुवार की ही घटना है जब श्रीनगर के गवर्नमेंट ब्यॉज हायर सेकेंडरी स्कूल के अंदर घुसकर आतंकियों ने आईडी कार्ड देखने के बाद 2 शिक्षकों की गोली मारकर हत्या कर दी। इनकी पहचान स्कूल की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद के रूप में हुई।
इससे पहले भी मंगलवार को तीन अलग-अलग स्थानों पर तीन व्यक्तियों को मौत के घाट उतारा गया था। पहला हमला एक फार्मेसी कारोबारी के ऊपर हुआ था। दूसरा अटैक मदीन साहिब में एक स्ट्रीट हॉकर पर था और तीसरा हमला बांदीपोरा जिला में हुआ था, जहाँ आतंकियों ने एक आम नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि घाटी में जो आम नागरिकों पर हमले हो रहे हैं वो पूरी तरह से जम्मू-कश्मीर में दहशत फैलाने के लिए किए जा रहे हैं। निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है ताकि लोगों का आपस में भाईचारा खत्म हो सके। उन्होंने इन लगातार होते हमलों पर दुख जताया और बताया कि पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी है।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार (7 अक्टूबर 2021) को लखीमपुर खीरी में केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा के घर के बाहर नोटिस चिपका कर उनके बेटे आशीष मिश्रा को पुलिस के सामने पेश होने को कहा है। आशीष पर लखीमपुर में प्रदर्शनकारी किसानों पर गाड़ी चढ़ाने का आरोप है और उनके खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज है।
नोटिस में मिश्रा को 8 अक्टूबर को सुबह 10 बजे रिजर्व पुलिस लाइन, जनपद खीरी स्थित क्राइम ब्रांच के ऑफिस में पेश होने के लिए कहा गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि आशीष मिश्रा पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 279, 338, 304 ए, 302 और 120बी के तहत केस दर्ज किया गया है। लखीमपुर खीरी हिंसा में आठ लोगों की जान गई है। ऐसे में पुलिस ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पुलिस के सामने पेश होकर अपने बचाव में लिखित, मौखिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश करने के लिए कहा गया है।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा टेनी के लखीमपुर खीरी स्थित आवास के बाहर नोटिस चस्पा कर उनके बेटे आशीष मिश्रा को लखीमपुर खीरी में हिंसा के सिलसिले में 8 अक्टूबर को पेश होने को कहा है। pic.twitter.com/Crsbam8LOd
पुलिस ने यह नोटिस घटना के बाद आशीष मिश्रा के लापता होने की खबरों के बाद लगाया है। वहीं, गुरुवार (7 अक्टूबर) को को पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए दो लोगों की पहचान आशीष के करीबी लवकुश राणा और आशीष पांडे के रूप में हुई है।
लखीमपुर खीरी में हुई हिंसक घटना के संदर्भ में 2 आरोपियों लवकुश और आशीष पांडेय को गिरफ़्तार किया गया है: उत्तर प्रदेश पुलिस
किसान इस बात पर जोर दे रहे हैं कि घटना के समय आशीष मिश्रा मौके पर मौजूद थे और जिस कार से दो प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी, उस कार को आशीष मिश्रा ही चला रहे थे। वहीं, उनके पिता का कहना है कि आशीष उस दिन मौके पर मौजूद ही नहीं थे।
इससे पहले शनिवार को हुई इस घटना में पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में कहा गया था कि प्रदर्शन कर रहे किसानों को टक्कर मारने वाली कार में आशीष मिश्रा बैठे थे। जगजीत सिंह नाम के व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में कहा गया था कि वो घटना ‘पूर्व नियोजित’ थी, जिसके लिए मंत्री और उनके बेटे ने ही ‘साजिश रची’ थी।
वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र शर्मा के मुताबिक, इस मामले की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने 9 सदस्यों की Monitoring Team का गठन किया है। इसके अलावा, जाँच में नामजद आरोपित आशीष मिश्रा के अलावा 6 आरोपियों की पहचान हुई है, जिनमें तीन आरोपितों की किसानों ने मौके पर पीट पीटकर हत्या कर दी थी और दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।
लखीमपुर खीरी मामले में @Uppolice ने जांच के लिये 9 सदस्यों की Monitoring Team का गठन किया है। इसके अलावा जांच में नामज़द आरोपी आशीष मिश्रा के अलावा 6 आरोपियों की पहचान हुयी जिसमें तीन आरोपियों की किसानों ने मौके पर पीट पीटकर हत्या की और दो आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया है। pic.twitter.com/htca5F0Gpm
लखीमपुर खीरी की हिंसा को कॉन्ग्रेस पार्टी ने बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया था। बताया जा रहा है कि विरोध कर रहे किसानों ने पहले भाजपा कार्यकर्ताओं के काफिले पर हमला किया, जिसके बाद एक वाहन ने कथित तौर पर नियंत्रण खो दिया और दो किसानों को टक्कर मार दी। इससे आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने वाहन पर हमला कर दिया, उसमें आग लगा दी और कार में सवार लोगों के साथ मारपीट की। इस हिंसा में दो भाजपा कार्यकर्ताओं, एक पत्रकार और ड्राइवर की मौत हो गई। हिंसा में दो और किसानों की मौत की खबर आई थी।
लखीमपुर खीरी में जो कुछ भी हुआ उसे लेकर राजनीतिक चालें घटना के अगले क्षण से ही आरंभ हो गई थीं। शायद इसलिए क्योंकि ऐसी किसी घटना की प्रतीक्षा में बैठे राजनीतिक दल और ‘किसान’ एक क्षण भी जाया करना नहीं चाहते थे। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के पुत्र को ‘किसानों’ को कुचलने वाली कार का चालक बताने से लेकर, मंत्री के त्यागपत्र और भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा तथाकथित तौर पर गोली चलाने के आरोप तक, सबकुछ आनन-फानन में किया जाना इस बात को दर्शाता है कि विपक्ष और ‘किसान’ पहले से मान कर चल रहे हैं कि क्या कहा जाना है और जो कहा जाना है उससे जरा भी पीछे नहीं हटना है, बिना इस बात की परवाह किए कि फिलहाल उपलब्ध सबूत क्या कहते हैं।
लगता है जैसे विपक्ष, ‘किसान’ और उनके समर्थन में उतरा इकोसिस्टम यह चाहते हैं कि उन्होंने जो परिणाम घोषित कर दिए हैं, सरकार उनके अनुसार सबूत दे। मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सीधे-सीधे नकार देना और क्या दर्शाता है? बिना जाँच के यह घोषणा कर देना कि कार केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का पुत्र चला रहा था और फिर इस दावे को सही साबित करने के लिए बचकाना तर्क और वीडियो क्रॉप करके सबूत बनाना क्या बताता है?
अपने दावे के मुताबिक़ बिना किसी जाँच के लोगों की गिरफ्तारी की माँग चाहे जितनी तर्कहीन लगे पर लोग उसपर अड़े हुए हैं। कुछ मृतकों के परिवार वाले यदि कहते हैं कि इस घटना से राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास न किया जाए तो बड़े आराम से यह आरोप लगा दिया जा रहा है कि सरकार मृतकों के परिवार वालों पर दबाव डाल रही है।
शरद पवार के अनुसार; यह घटना जलियांवाला बाग़ जितनी बड़ी घटना है। पाँच दशक से अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय पवार जब यह कहते हैं तो वे जरा भी नहीं सोचते कि क्या कह रहे हैं? कि; वे जो कह रहे हैं उसका क्या असर हो सकता है? वे यह भी याद नहीं करते कि यदि यह घटना जलियाँवाला बाग़ जितनी बड़ी घटना है तो अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने कितने जलियाँवाला बाग किए? उन्हें याद नहीं रहता कि उनके दल ने ‘सहकारिता’ को आगे रखकर किसानों का कितना भला किया है? पाँच दशकों से अधिक के अपने राजनीतिक जीवन में पवार की छवि एक किसान नेता की रही है पर यह कहते हुए वे भूल जाते हैं कि मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में महाराष्ट्र में किसानों के साथ क्या-क्या हुआ है।
कॉन्ग्रेस के नेता जब कहते हैं कि; किसानों का नरसंहार हुआ है तो उन्हें यह याद नहीं रहता कि नरसंहार क्या होता है? हर एक व्यक्ति का जीवन कीमती है और किसी भी परिस्थिति में इस तरह से एक भी भारतीय की मृत्यु नहीं होनी चाहिए पर ऐसी घटना को नरसंहार बताते समय कॉन्ग्रेसी भूल जाते हैं कि राजनीतिक दल के नेताओं या विचारकों को ही नहीं बल्कि एक आम भारतीय को भी पता है कि नरसंहार क्या होता है। एक आम भारतीय जानता है कि 1984 में जो सिखों के साथ हुआ उसे नरसंहार कहते हैं, महात्मा गाँधी की हत्या के बाद जो महाराष्ट्र के ब्राह्मणों के साथ हुआ उसे नरसंहार कहते हैं, जो अयोध्या और गोधरा में कारसेवकों के साथ हुआ था उसे नरसंहार कहते हैं।
राजनीतिक फायदे के लिए लखीमपुर खीरी की घटना को नरसंहार कहा जाना कहाँ तक उचित है? यदि जवाब माँगना है तो पूरी घटना को आगे रखकर सरकार से जवाब क्यों नहीं माँगा जा रहा? भाजपा के जो कार्यकर्ता मारे गए उनके प्रति किसी के मन में संवेदना क्यों नहीं है? ‘किसानों’ द्वारा उनकी हत्या किस तरह की है, वह सबके सामने है पर कोई एक नेता या राजनीतिक दल ऐसा नहीं है जो कहे कि उसे पूरी घटना से क्षोभ है। राजनीतिक दलों का क्षोभ केवल ‘किसानों’ की मृत्यु तक सीमित है। लगता है ‘किसानों’ के अलावा जो लोग मारे गए वे भारतीय थे ही नहीं और उनके प्रति संवेदना प्रकट करने के लिए किसी और देश के राजनीतिक दल या नेता आएँगे।
जो इस अमानवीय नरसंहार को देखकर भी चुप है, वो पहले ही मर चुका है।
राजस्थान में किसानों पर लाठीचार्ज, पायलट और गहलोत द्वारा एक दूसरे पर राजनीतिक लाठीचार्ज या पंजाब और छत्तीसगढ़ में पार्टी में अंदरूनी सत्ता संघर्ष का हल कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा लखीमपुर खीरी में खोजा जा रहा है। यह काम राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस ही कर सकती है। पंजाब कॉन्ग्रेस (पता नहीं इस समय किसकी है) ने घोषणा की है कि दस हज़ार गाड़ियों वाला काफिला लखीमपुर खीरी की ओर चलेगा। दस हज़ार गाड़ियों के काफिले का असर राष्ट्रीय राजमार्गों पर क्या होगा? इस तथाकथित पॉलिटिकल मास्टर स्ट्रोक के परिणाम स्वरूप आम भारतीय को होने वाले कष्ट के बारे कौन जवाबदेह होगा?
‘किसानों’ ने पिछले दस महीने से दिल्ली और उसके आस-पास के लोगों के लिए कौन सी परिस्थितियाँ पैदा कर दी हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। अब वैसी ही परिस्थितियाँ विपक्षी दल पैदा करना चाहते हैं या पहले से उत्पन्न हुई परिस्थितियों में अपना योगदान देना चाहते हैं। उद्देश्य बिलकुल साफ़ है; चुनाव से पहले केंद्र और राज्य सरकार की छवि खराब की जाए।
ऐसी घटनाओं से राजनीतिक लाभ उठाना एक बात है और इनके आड़ में रहकर अराजकता पैदा करने की कोशिश और बात है। कॉन्ग्रेस पार्टी और उसका इकोसिस्टम इस समय लखीमपुर खीरी की घटना के आड़ में अराजकता पैदा करना चाहते हैं। यह राजनीतिक विरोध का कौन सा रूप है जहाँ एक राजनीतिक दल सब कुछ अपने अनुसार चाहता है? लाभ कितना होगा वह तो समय बताएगा पर कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेताओं का रवैया गैर जिम्मेदाराना है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक परंपराओं को ध्वस्त करने की प्रक्रिया में एक और कदम है।