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आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धामेचा की कस्टडी बढ़ी: 7 अक्टूबर तक रहेंगे NCB की हिरासत में, नहीं मिली बेल

मुंबई क्रूज ड्रग्स मामले में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को 7 अक्टूबर 2021 तक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की हिरासत में भेज दिया गया है।

आर्यन खान की व्हाट्सएप चैट में पैसों की लेनदेन का खुलासा भी हुआ है। चैट में सामने आया है कि उन्होंने बैंक ट्रांजैक्शन के लिए कैश की माँग की है। कुछ चैट 21 जुलाई की हैं तो कुछ पुरानी हैं। चैट्स में गाँजे के बारे में बात हुई है। प्रॉसिक्यूशन ने मजिस्ट्रेट को यह चैट्स दिखाई भी है।

इस दौरान मजिस्ट्रेट ने एनसीबी से आर्यन की कस्टडी को लेकर सवाल किया। इस पर एनसीबी ने कहा कि उन्हें आर्यन खान की कस्टडी की जरूरत इसलिए है, क्योंकि वह पता लगाना चाहते हैं कि उन्हें पार्टी में क्यों बुलाया गया था और वह किन केबिन में रुके थे। इस पर आर्यन के वकील सतीश मानशिंदे ने कहा, ”आर्यन खान को शिप में ड्रग्स बेचने की जरूरत नहीं है। वह शिप में क्यों गए थे इस मामले में एनसीबी का कोई काम नहीं। आर्यन चाहे तो पूरा शिप खरीद सकते हैं।”

बता दें कि शनिवार को मुंबई के समुद्री क्रूज पर चल रही एक ड्रग्स पार्टी में एनसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में नशीला पदार्थ जब्त किए और 10 लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धामेचा भी शामिल हैं। यह जहाज मुंबई से गोवा जा रहा था। एक पुख्ता टिप मिलने के बाद मुंबई जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े और अन्य एनसीबी अधिकारी जहाज में आम यात्रियों की तरह सवार हुए और ऑपरेशन को अंजाम दिया था।

‘आर्यन खान है बॉलीवुड का अगला सुपरस्टार, SRK भक्तों की औकात से बाहर’: समर्थन में आए फैंस, Pak से भी ट्वीट्स

ड्रग्स और रेव पार्टी में NCB द्वारा आर्यन खान की गिरफ़्तारी के बाद शाहरुख़ खान के फैंस उनके समर्थन में सोशल मीडिया में ट्रेंड चला रहे हैं। फैंस सोशल मीडिया पर लगातार ‘I Stand With SRK’ ट्रेंड कराते रहे। उन्होंने शाहरुख़ खान की फैमिली तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि ये एक सुंदर परिवार है और उनके बच्चे काफी अच्छे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शाहरुख़ खान की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई जा रही है।

एक फैन ने उनका डायलॉग शेयर करते हुए लिखा, “हवाओं से थोड़े न हिलने वाला हूँ मैं।”

वहीं शाहरुख़ खान के कुछ फैंस ने सलमान खान से माफ़ी भी माँगी और कहा कि हमने हमेशा आपको ट्रोल किया, लेकिन आप शाहरुख़ के अच्छे दोस्त हैं। बता दें कि सलमान खान रात को शाहरुख़ खान से मिलने पहुँचे थे।

कादरी शोएब नाम के एक व्यक्ति ने आर्यन खान की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “वो बॉलीवुड के अगले सुपरस्टार हैं। घृणा करने वाले याद रखें, हम यहाँ राज करने आए हैं।”

वहीं कुछ लोगों ने आर्यन खान की तब की तस्वीरें शेयर की, जब NCB उन्हें कार से लेकर जा रही थीं। फैंस ने कहा कि इसमें वो हँस रहे हैं, जो हेटर्स के लिए काफी है। उन्होंने कहा कि आर्यन खान अपने से घृणा करने वालों पर हँस रहे हैं।

जावेद अख्तर के खिलाफ मुंबई में FIR, तालिबान के साथ RSS की तुलना बनी मुसीबत: ये है मामला

गीतकार जावेद अख्तर का विवादों से गहरा और पुराना नाता है। अपनी बयानबाजी की वजह से वे अक्सर विवादों में फँसते रहते हैं। एक बार फिर कुछ ऐसा ही हुआ हैं। बीते दिनों जावेद अख्तर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ टिप्पणी की थी, जिसके बाद अब वह कानूनी पचड़े में फँस गए हैं। आरएसएस के खिलाफ बयानबाजी करने के चलते सोमवार (4 अक्टूबर, 2021) को जावेद अख्तर पर एफआईआर दर्ज करवाई गई है। 

दरअसल, मुंबई के वकील संतोष दुबे ने जावेद अख्तर के खिलाफ मुलुंड पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करवाई है। मुलुंड पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने कहा, “भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (मानहानि की सजा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।” जावेद अख्तर ने पिछले महीने अपने एक इंटरव्यू में आरएसएस के खिलाफ बयान दिया था। उन्होंने आरएसएस की तालिबान और हिंदू चरमपंथियों के बीच समानताएँ बताई थीं। उनके इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

वकील ने कहा, “मैंने पहले जावेद अख्तर को कानूनी नोटिस भेजा था और उनसे अपनी टिप्पणी पर माफी माँगने को कहा था, लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहे। अब मेरी शिकायत पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।”

वकील ने की थी 100 करोड़ रुपए हर्जाने की माँग

इससे पहले, वकील संतोष दुबे ने दावा किया था कि अगर जावेद अख्तर ‘बिना शर्त लिखित माफी’ माँगने और नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर जवाब देने में विफल हुए तो वह उनसे 100 करोड़ रुपए हर्जाने के रूप में माँगते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराएँगे। वकील का दावा था कि इस तरह की बयानबाजी करके जावेद अख्तर ने भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत अपराध किया है।

जावेद अख्तर ने अपने बयान में ये कही थी बात

जानकारी के लिए बता दें कि जावेद अख्तर ने कुछ समय पहले ही एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने आरएसएस के खिलाफ खुलकर अपने विचार रखे थे। 3 सितंबर 2021 को एनडीटीवी के एक शो में अख्तर ने कहा था, “RSS, VHP और बजरंग दल का समर्थन करने वालों की मानसिकता भी तालिबान जैसी ही है।” उन्होंने कहा, “जिस तरह तालिबान एक मुस्लिम राष्ट्र बनाने की कोशिश कर रहा है। उसी तरह कुछ लोग हमारे सामने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पेश करते हैं।” जावेद अख्तर ने आगे कहा, “इन लोगों की मानसिकता एक जैसी है। तालिबान हिंसक हैं। जंगली है। उसी तरह RSS, VHP और बजरंग दल का समर्थन करने वाले लोगों की मानसिकता एक जैसी है।”

‘जल्लादों ने वामपंथी तरीके से की हत्याएँ, ये किसान नहीं राजनीतिक दलों के लोग’ – लखीमपुर खीरी हिंसा पर भारतीय किसान संघ

देश के सबसे बड़े किसान संगठनों में से एक ‘भारतीय किसान संघ’ ने लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा है कि इसमें लिप्त लोग किसान नहीं थे। ‘भारतीय किसान संघ’ ने स्पष्ट कहा है कि ये विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग थे, जिन्होंने वामपंथी तरीकों से इस घटना को अंजाम दिया। संगठन ने कहा कि जिस तरह से लाठी-डंडों से पीट-पीट कर लोगों की निर्मम हत्या की गई, ऐसा काम किसान नहीं कर सकते।

‘भारतीय किसान संगठन’ ने कहा, “कानून हाथ में लेना, सरेआम हत्याएँ कराना… ऐसा लगता है जैसे प्रोफेशनल लोगों ने, जल्लादों ने ये कार्य किया हो। इस घटना की जितनी निंदा की जाए, कम है। इस प्रकार के कृत्यों में लिप्त लोगों को कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए। हम माँग करते हैं कि इस घटना की निष्पक्ष जाँच करा के जल्द से जल्द मृतकों के परिजनों को न्याय मिले। हम मृतकों के परिजनों के साथ संवेदना प्रकट करते हैं।”

लखीमपुर खीरी हिंसा पर ‘भारतीय किसान संघ’ का बयान

वहीं योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 20 घंटों के भीतर पीड़ितों से बात कर के स्थिति को संभाल लिया, जिससे यहाँ गिद्धदृष्टि लगाए नेताओं को भी निराशा हाथ लगी है। बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की योजना थी और कई विपक्षी नेताओं समेत एक्टिविस्ट्स भी यहाँ पहुँच रहे थे, लेकिन प्रशासन ने स्थिति संभाल लिया। नेताओं को यहाँ आने से रोका गया, ताकि तनाव न बढ़े। FIR भी की गई। मृतकों के आश्रितों के लिए मुआवजे की घोषणा हुई।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में RAF और SSB की दो-दो कंपनियों की तैनाती 6 अक्टूबर तक रहेगी। किसान नेताओं के साथ प्रशासन ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के समझौते का ऐलान किया। दिल्ली-NCR की सीमाएँ पहले ही बंद कर दी गई थीं। सपा समर्थकों ने राज्य भर में हिंसा की, लेकिन लखीमपुर खीरी में उन्हें टपने नहीं दिया गया। अभी भी वरिष्ठ अधिकारी वहाँ मौजूद हैं।

‘लखीमपुर जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता’: तीनों कानूनों पर रोक, मामला अदालत में तो फिर प्रदर्शन क्यों?’ SC की तल्ख टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (अक्टूबर 4, 2021) को किसान महापंचायत नाम के संगठन की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब लखीमपुर खीरी जैसी घटनाएँ हो जाती हैं तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता। किसान महापंचायत ने शीर्ष अदालत से माँग की थी कि उसे दिल्ली के जंतर-मंतर पर सत्याग्रह करने की अनुमति दी जाए। इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है। 

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि वह इस बात की जाँच करेगा कि प्रदर्शन करने का हक मूल अधिकार है या नहीं। इसके साथ ही अदालत की बेंच ने किसानों के आंदोलन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब कानून लागू ही नहीं हुए तो विरोध किस बात का। 

जस्टिस एमएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “एक ओर आप कोर्ट में याचिका दायर कर इंसाफ माँगने आए हैं और दूसरी ओर विरोध प्रदर्शन भी जारी है। राजस्थान हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर रखी है आपने।” कोर्ट ने सवाल किया, “जब मामला अदालत में है तो आप प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अगर याचिकाकर्ता की ओर से कानून को एक कोर्ट मे चुनौती दी गई है तो फिर क्या मामला अदालत में लंबित रहते हुए विरोध प्रदर्शन की इजाजत दी जा सकती है? प्रदर्शन की इजात माँगने का क्या औचित्य नहीं है?”

पीठ ने कहा, “अब आप एक रास्ता चुनें। कोर्ट का, संसद का या सड़क पर प्रदर्शन का।” इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि वो कानून वापस नहीं लेगी। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा, “बातचीत के रास्ते खुले हैं। कोर्ट में याचिका भी है। अब इनको तय करना है कि इन्हें क्या करना है।”

आगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमने तीनों कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगा रखी है। कुछ भी लागू नहीं है। तो किसान किस बारे में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं? अदालत के अलावा और कोई भी कानूनों की वैधता तय नहीं कर सकता। जब किसान अदालत में कानूनों को चुनौती दे रहे हैं तो सड़क पर प्रदर्शन क्यों?”

इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में लखीमपुर खीरी में हुई घटना का भी जिक्र हुआ। कोर्ट में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया कि लखीमपुर खीरी में हिंसा हुई, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई। इस तरह विरोध नहीं हो सकता। इस पर कोर्ट ने कहा, “जब आंदोलन के दौरान कोई हिंसा होती है। सार्वजनिक संपत्ति नष्ट होती है तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता। जान और माल की हानि होती है तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता।” इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “जब मामला पहले से ही अदालत में है तो लोग सड़कों पर नहीं उतर सकते।” इस मामले में अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। इस बीच यूपी सरकार ने लखीमपुर खीरी में इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया है। 

कोरोना से मरने वालों के परिजनों को मिलेगा ₹50,000 का मुआवजा: केंद्र सरकार की बात पर SC ने लगाई मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 अक्टूबर 2021) को केंद्र सरकार की योजना पर मुहर लगाते हुए कोरोना वायरस से मरने वालों के परिजनों को 50,000 रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया। शीर्ष न्यायालय ने इसको लेकर एक विस्तृत गाइडलाइन भी जारी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ”ये मुआवजा राज्यों की अनुग्रह राशि देने की अन्य योजना से अलग होगा। ये मुआवजा भविष्य में होने वाली मौतों पर भी लागू होगा। इसका भुगतान राज्य आपदा राहत कोष से होगा।”

अदालत ने कहा कि लाभार्थी का पूरा विवरण इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडिया में प्रकाशित किया जाए। आदेश में यह भी कहा गया है कि मृतक के परिजनों को 50,000 रुपए की राशि का भुगतान हर हाल में किया जाएगा और यह विभिन्न परोपकारी योजनाओं के तहत केंद्र और राज्य द्वारा भुगतान की गई राशि से अलग होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि ये मुआवजा आवेदन जमा करने और मृत्यु का कारण COVID-19 के रूप में प्रमाणित होने के 30 दिनों के भीतर दिया जाए। कोई भी राज्य इस आधार पर 50,000 रुपए का लाभ देने से इनकार नहीं कर सकता। इसके अलावा कोरोना होने के बाद 30 दिनों के भीतर खुदकुशी करने वालों को भी यह मुआवजा मिलेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से हुई मौत के लिए मुआवजे की घोषणा पर मोदी सरकार की सराहना की थी। कोर्ट ने कहा था कि विपरीत परिस्थितियों में भारत जो कर दिखाया, वैसा और कोई देश नहीं कर सका। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि COVID-19 के कारण मरने वालों के परिजनों को राज्य सरकारों से 50,000 रुपए का मुआवजा मिलेगा।

इस पर न्यायमूर्ति शाह ने कहा था, “आज हम बहुत खुश हैं। यह पीड़ित लोगों के लिए कुछ सांत्वना होगी। सरकार सब कुछ कर रही है… हमें खुशी है कि पीड़ित व्यक्ति के आँसू पोंछने के लिए कुछ किया जा रहा है। हमें इस तथ्य का नोटिस लेना होगा कि भारत सरकार ने जो किया है, कोई अन्य देश नहीं कर सकता।”

तालिबान ने किया ISIS-K के ठिकाने पर हमला, कई आतंकियों को मार गिराया: काबुल में मस्जिद के बाहर हुए धमाके का लिया बदला

तालिबान ने आतंकवादी संगठन आईएसआईएस-खुरासान (ISIS-K) के ठिकानों पर बदले की कार्रवाई की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान ने सोमवार (4 अक्टूबर 2021) को कहा कि उसके सुरक्षाबलों ने मस्जिद पर धमाके के कुछ घंटे बाद ही काबुल में इस्लामिक स्टेट के ठिकाने पर हमला किए और कई आतंकियों को मार ​गिराने का दावा किया है।

तालिबान ने अपने बयान में आगे कहा कि हमारे सुरक्षाबलों ने उत्तरी काबुल में खैर खाना के पड़ोस में इस्लामिक स्टेट के एक आपरेशन सेंटर पर कार्रवाई की है। हालाँकि, उन्होंने अभी तक यह नहीं बताया है कि इस मिलिट्री ऑपरेशन में कितने आईएस आतंकी मारे गए हैं।

दरअसल, अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में रविवार (3 अक्टूबर 2021) को ईदगाह मस्जिद में तालिबानी नेता और प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद की माँ की प्रार्थना सभा में लोग इकट्‌ठा हुए थे। उसी दौरान मस्जिद के गेट के नजदीक बम धमाका किया गया। इसमें कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई थी।

कारी सईद खोस्ती ने इन मौतों की पुष्टि की है। हालाँकि, इस हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन तालिबान का मानना है कि इसके पीछे ISIS-K का हाथ हो सकता है, क्योंकि उसने अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के एक महीने के अंदर तालिबान के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं।

तालिबान के आधिकारिक प्रवक्ता बिलाल करीमी ने कहा कि तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। बिलाल ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि हमले में तालिबान के सुरक्षाबलों को नुकसान नहीं पहुँचा है। हमले में मारे गए नागरिक मस्जिद के दरवाजे के बाहर खड़े थे। इस पर जाँच जारी है।

मुस्लिम भीड़ ने ‘हिन्दू ध्वज’ उखाड़ कर फेंका, चले लाठी-डंडे, हुई पत्थरबाजी: देखती रही छत्तीसगढ़ पुलिस, माँ कर्मा चौक को लेकर बवाल

छत्तीसगढ़ के कवर्धा से एक वीडियो सामने आया है, जिसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू ध्वज को उखाड़ कर फेंक दिया, फिर उसका अपमान किया। कबीरधाम जिले में हुई इस घटना के दौरान हिन्दू व मुस्लिम समाज में झड़प भी हुई। जब हिन्दू ध्वज उखाड़ के फेंका जा रहा था और भीड़ उसका अपमान कर रही थी, तब वहाँ कुछ पुलिसकर्मी भी तमाशबीन बन कर खड़े थे।

रास्ते पर बता कर इस ध्वज को हटाने की कोशिश हुई। एक अधिकारी ने इस बाबत जानकारी दी, “रविवार (3 अक्टूबर, 2021) को लोगों के साथ शांति समिति की बैठक की गई थी। इसमें आने वाले त्योहारों के मद्देनजर शांति-सद्भाव बनाए रखने के लिए लोहारा चौक से धार्मिक झंडे हटाने को कहा था। दोनों पक्ष इसके लिए तैयार हो गए थे, लेकिन मौके पर दोनों समुदायों कुछ युवक पहुँच गए और उपद्रव हो गया।”

मौके पर पुलिस के अतिरिक्त बल पहुँचे, जिसके बाद स्थिति को शांत किया गया। पुलिस का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और मौके पर भारी संख्या में जवानों की तैनाती भी की गई है। CrPc की धारा-144 भी इलाके में लागू कर दी गई है। लेकिन, अभी तक इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। बताया जाता है कि विवादित स्थल पर हिन्दू और मुस्लिम, दोनों समुदाय के लोग अपना झंडा लगाना चाहते थे।

दोनों समुदायों में अब भी तनाव का माहौल है। एक स्थानीय पत्रकार ने बताया कि पहले मौखिक रूप से झगड़ा शुरू हुआ, लेकिन बाद में पत्थरबाजी भी होने लगी। पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। कलक्टर ने बताया कि CCTV फुटेज देख कर अराजक तत्वों को चिह्नित करने व उनकी गिरफ़्तारी का आदेश दिया गया है। 5 साल पहले इसी जगह पर भारत माता की तस्वीर फाड़ दी गई थी, जिसके बाद तनाव व्याप्त हो गया था।

ये घटना माँ कर्मा चौक पर हुई। मान्यता है कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को पाला था, इसीलिए हिन्दुओं की इस जगह में विशेष आस्था है। यहाँ हिन्दुओं का ध्वज भी लगा हुआ था। मुस्लिमों ने अपने आयोजन के कारण वहाँ अपना झंडा भी लगा दिया। फिर ध्वज फाड़ दिया गया और पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। पुलिस दोनों पक्षों का आवेदन लेकर मामले की जाँच कर रही है। कई लोग घायल भी हुए हैं।

तनाव इतना ज्यादा है कि आज शहर में सभी शैक्षिक संस्थानों को बंद कर के रखा गया है। आज होने वाली जिला प्रशासन ने एक दिन की छुट्टी का आदेश जारी किया। सभी ऑनलाइन व ऑफलाइन परीक्षाओं को निरस्त कर दिया गया है। पुलिस यहाँ फ्लैग मार्च कर रही है। आंगनबाड़ी केंद्र व कॉलेज तक बंद हैं। भाजपा नेता ने पुलिस की ख़ुफ़िया विभाग को फेल बताते हुए कहा कि वो स्थिति को संभाल नहीं सकी।

‘कपड़े उतरेंगे, अंडरवियर पहन लेना’: पाकिस्तानी क्रिकेटर ने US की उड़ान के लिए ‘SSSS’ स्टैंप के साथ शेयर किया बोर्डिंग पास, लोगों ने लिए जमकर मजे

पाकिस्तानी क्रिकेटर उमर अकमल ने हाल ही में ट्विटर पर संयुक्त राज्य अमेरिका की अपनी उड़ान के बोर्डिंग पास के साथ अपनी तस्वीरें साझा कीं। अकमल ने कहा कि वह पर्सनल मीटिंग के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा कर रहे हैं और उन्होंने अपने समर्थकों से उनकी सफलता के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया।

अकमल ने तस्वीरों के साथ ट्वीट किया, “मैं कुछ पर्सनल मीटिंग के लिए अमेरिका जा रहा हूँ। अगर सब कुछ ठीक रहा तो मुझे कुछ समय के लिए वहाँ रहना पड़ सकता है! मैं चाहता हूँ कि मेरे सभी शुभचिंतक और फैंस दुआ करें, जैसा कि वो हमेशा से करते रहे हैं।” 

हालाँकि, ट्विटर पर बोर्डिंग पास की तस्वीर पोस्ट करने के तुरंत बाद एक सोशल मीडिया यूजर ने देखा कि अकमल के बोर्डिंग पास पर “SSSS” प्रिंट है। यूजर ने ट्वीट किया, “आपको वहाँ पहुँचने पर एक्स्ट्रा स्क्रीनिंग के लिए चिह्नित किया गया है और आपको कम-से-कम कुछ घंटों तक रुकना पड़ा होगा- आशा है कि यह अच्छा रहा।”

उमर अकमल के बोर्डिंग पास पर लगे ‘SSSS’ स्टैंप पर सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रिया

उमर अकमल के ट्वीट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर मजे लिए और प्रतिक्रियाएँ दी। उनका कहना था कि अमेरिका जाते समय अतिरिक्त सुरक्षा से गुजरना अब पाकिस्तानियों के लिए आम बात हो गई है।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि शायद इसी वजह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए व्यक्तिगत तौर पर अमेरिका नहीं गए, क्योंकि उन्हें न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर जाँच का डर था। इसलिए उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए इसमें हिस्सा लिया।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने कहा कि अकमल की संयुक्त राज्य अमेरिका में तलाशी ली जाएगी। उसने लिखा, “कपड़े उतरेंगे।”

एक ट्विटर यूजर ने उमर अकमल को यह कहते हुए अंडरगारमेंट्स पहनने की सलाह दी कि न्यूयॉर्क एयरपोर्ट का इतिहास अच्छा नहीं है। यूजर ने लिखा, “अंडरवियर पहन लेना। न्यूयॉर्क एयरपोर्ट का इतिहास ठीक नहीं है।”

बोर्डिंग पास पर ‘SSSS’ का क्या अर्थ है और इसका क्या कारण है?

SSSS (Secondary Security Screening Selection or Secondary Security Screening Selectee) संयुक्त राज्य अमेरिका में अपनाया गया एक एयरपोर्ट सुरक्षा उपाय है, जिसमें अतिरिक्त निरीक्षण के लिए चुनिंदा यात्रियों को शामिल किया जाता है। जिन यात्रियों को सेकेंडरी स्क्रीनिंग के लिए चुना जाता है, उनके बोर्डिंग पास पर ‘SSSS’ प्रिंट होता है। इससे यह संकेत दिया जाता है कि उक्त यात्री की अतिरिक्त जाँच की आवश्यकता है।

ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से यात्रियों को SSSS लिस्ट में डाला जा सकता है। एक आर्टिकल के अनुसार, यात्रियों को अतिरिक्त सुरक्षा जाँच के लिए चुने जाने के कारणों में से एक उनके असामान्य या अजीब यात्रा कार्यक्रम है, जिसमें अंतिम मिनट में बुक की गई उड़ानें, अंतरराष्ट्रीय एकतरफा टिकट, ‘हाई-रिस्क’ देशों में होने वाली यात्रा शामिल है। पाकिस्तान के अधिकांश इस्लामिक आतंकी संगठनों के साथ घनिष्ठ संबंध होने के कारण, यह पूरी तरह से संभव है कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ‘हाई-रिस्क’ देशों में सूचीबद्ध हों। अन्य कारणों में वन-वे टिकट की बुकिंग, नकद में खरीदे गए टिकट, अतीत का आपराधिक रिकॉर्ड, हवाईअड्डे पर सुरक्षा से संबंधित अपराध का आरोप लगाया जाना या अतीत में प्रतिबंधित सामग्री या हथियार ले जाना शामिल हैं।

यूएस सेकेंड्री स्क्रीनिंग के लिए चिह्नित किए जाने पर एयरपोर्ट पर क्या होता है?

एक बार जब परिवहन सुरक्षा प्रशासन (TSA) के अधिकारी को बोर्डिंग पास पर ‘SSSS’ अंकित मिलता है, तो वह यात्री को लाइन से बाहर निकलने और सेकेंडरी स्क्रीनिंग के लिए कहता है। यात्री के अनुपालन और इससे गुजरने की तत्परता के आधार पर अतिरिक्त स्क्रीनिंग में आमतौर पर 10 से 30 मिनट लगते हैं।

‘SSSS’ स्टैंप वाले यात्रियों को आमतौर पर मेटल डिटेक्टर से गुजरने और फिर वापस आने के लिए कहा जाता है। उन्हें अपने जूते और बेल्ट हटाने के लिए कहा जाता है। उन्हें फुल-बॉडी स्कैनर से गुजरने के लिए भी कहा जाता है। उसके बाद, उन्हें शारीरिक तलाशी से भी गुजरना पड़ता है। इसके लिए यात्री प्राइवेट जगह चुन सकते हैं।

जो लोग अपने साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे फोन, लैपटॉप, घड़ियाँ ले जाते हैं, उन्हें आमतौर पर उन सभी को ऑन करने के लिए कहा जाता है, जिसके बाद टीएसए एजेंट उनमें से किसी की जाँच करते हैं।

फिर, एक विस्फोटक और नशीले पदार्थों का संपर्क स्कैन भी होता है, जिसमें यात्रियों के कपड़े, सामान, बेल्ट, जूते और अन्य सामानों पर एक कॉटन/फैब्रिक/ पेपर के स्वाब को रगड़ना और नशीले पदार्थों के संपर्क का पता लगाने के लिए इसे ION स्कैनर के तहत स्कैन करना शामिल है।

अंत में, टीएसए अधिकारी या सुरक्षा अधिकारी द्वारा बोर्डिंग पास पर एक स्टिकर चिपकाया जाएगा, जो बताता है कि यात्री की अतिरिक्त सुरक्षा जाँच पूरी हो चुकी है। एक बार जब सुरक्षा अधिकारी अपने निरीक्षण से संतुष्ट हो जाते हैं और कुछ भी गलत नहीं पाते हैं तो यात्रियों को सुरक्षा क्षेत्र से जाने की अनुमति दी जाती है।

‘हथकड़ी लगाओ और ले चलो’: सुबह में बोली थीं प्रियंका गाँधी, अब लगा रही हैं झाड़ू, लखीमपुर जा रहे दूसरे नेता भी UP पुलिस की हिरासत में

लखीमपुर खीरी में ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ की गुंडई के बाद विपक्ष ने उत्तर प्रदेश को राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा इस मामले पर राजनीतिक रोटियाँ सेंकने में जुट गए हैं। इसी बीच कॉन्ग्रेस महासचिव का एक वीडियो सोशल मीडिया तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो सीतापुर जिले के PAC गेस्ट हाउस का है, जहाँ प्रियंका गाँधी वाड्रा झाड़ू लगाती हुई दिखाई दे रही हैं।

अखिलेश यादव और प्रियंका गाँधी को हिरासत में लिया

दरअसल, विपक्षी नेता प्रशासन के मना करने के बावजूद लखीमपुर जाकर किसानों से मिलना चाहते हैं। रोके जाने पर अखिलेश यादव लखनऊ में सड़क पर ही धरने पर बैठ गए थे, जिसके बाद उनको हिरासत में लिया गया। वहीं, इससे पहले कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा को हिरासत में लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसमें वह यूपी पुलिस की कार्रवाई को बाधित करती हुई दिखाई दीं।

धारा-144 लगने के बावजूद वह कुछ लोगों के साथ लखीमपुर खीरी जाने वाली थीं। इस दौरान वह सीतापुर जिले की पुलिस पर चिल्लाते हुए कह रही हैं, ”आप एक अरेस्ट का वारंट निकालो, मुझे हथकड़ी पहनाओ और ले चलो, मुझे बिल्कुल मंजूर है। बताओ मुझे किस आधार पर रोक रहे हो।” इसके बाद पुलिस ने सोमवार (4 अक्टूबर 2021) सुबह प्रियंका को हिरासत में लिया गया था। अब वह सीतापुर जिले के साफ सुधरे PAC Guest House में झाड़ू लगा रही हैं।

इसके अलावा, लखीमपुर घटना के जरिए खुद को लाइम लाइट लाने वाले अन्य नेताओं को भी यूपी पुलिस ने हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि लखीमपुर खीरी जा रहे प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के नेता शिवपाल सिंह यादव को लखनऊ पुलिस ने इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा पर हिरासत में लिया। वहीं, AAP नेता संजय सिंह को भी वहाँ जाने से रोका गया है।

लखीमपुर खीरी में धारा-144

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी के अलावा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंजाब के उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के भी लखीमपुर पहुँचने की खबरें सामने आई हैं। वहीं, ‘भारतीय किसान मोर्चा’ के प्रवक्ता राकेश टिकैत भी वहाँ पहुँचे हैं और कहा है कि कार्रवाई न होने तक मृतकों का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। 8 लोगों की मौत के बाद से ‘किसान प्रदर्शनकारी’ धरने पर हैं। सोमवार (4 अक्टूबर, 2021) को सुबह साढ़े 4 बजे ही राकेश टिकैत वहाँ पहुँच गए थे और उन्होंने एक गुरुद्वारे में बैठक भी की। इस दौरान आगे की रणनीति बनाई गई। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष का नाम FIR में डालने की माँग की गई है। फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए लखीमपुर खीरी में धारा-144 लगा दी गई है।

आशीष मिश्रा समेत 14 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

जानकारी के मुताबिक, आशीष मिश्रा समेत 14 लोगों के खिलाफ हत्‍या, आपराधिक साजिश और बलवा सहित कई धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई है। बहराइच नागपाड़ा के जगजीत सिंह की शिकायत पर तिकुनिया थाने में मामला दर्ज किया गया है। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि लखीमपुर खीरी की घटना को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री गंभीर हैं और अधिकारियों की टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने शांति व्यवस्था बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि सरकार अपना काम कर रही है और इस मामले को राजनीतिक तूल देने की जरूरत नहीं है।

‘किसान प्रदर्शनकारियों’ ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला बोला

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में रविवार (3 अक्टूबर 2021) को ‘किसान प्रदर्शनकारियों’ ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला बोल दिया था। इस घटना में 8 लोगों की मौत हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर दुःख प्रकट करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा है कि सरकार इसकी तह तक जाएगी और जाँच के बाद इसमें शामिल तत्वों को बेनकाब करेगी। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

बता दें कि इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें किसान प्रदर्शनकारी’ लाठी-डंडे लेकर लोगों को पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं। तथाकथित ‘किसानों’ का कहना है कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे ने जबरदस्ती ‘आंदोलनकारियों’ के ऊपर गाड़ी चढ़ा कर उन्हें कुचल दिया।