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‘ब्राह्मण-क्षत्रिय #$%@..चोट्टा, मुसलमान ही हमारे असली वोटर’: अखिलेश यादव के MLA अबरार अहमद ने दी गाली, देखें वीडियो

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में आए दिन राजनीतिक दलों की बयानबाजियाँ सुनने को मिल रही हैं। इसी बीच सुल्तानपुर की इसौली विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक अबरार अहमद ब्राह्मणों और क्षत्रियों को गाली देकर विवादों में हैं। अबरार अहमद ने ​कहा, ”चुनाव जीतने के लिए हमें ब्राह्मणों और क्षत्रियों के वोट की जरूरत नहीं। ब्राह्मण-क्षत्रिय चोर हैं।”

इसे पार्टी का दोहरा मापदंड ही कहेंगे। एक तरफ अखिलेश यादव दावा करते हैं कि उनकी पार्टी ब्राह्मणों की हितैषी है, वहीं दूसरी तरफ सपा के विधायक अबरार अहमद ब्राह्मण-क्षत्रिय को चोट्टा कह रहे हैं। क्या आपको ब्राह्मण का वोट नहीं चाहिए इस सवाल के जवाब में अबरार ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज को गाली देकर अपमानित करते हैं और कहते हैं, “नहीं हमको इनका वोट नहीं चाहिए। मुसलमान ही हमारे वास्तविक वोटर्स हैं। ये सब $%@..चोट्टा है।”

सपा नेता के इस बयान पर ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज से जुड़े संगठनों ने सड़क पर मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी के नेता ओम प्रकाश पांडेय ने इस मामले को लेकर पुलिस से शिकायत की है। वहीं सोशल मीडिया पर लोगों में अबरार के बयान को लेकर काफी आक्रोश है।

रिंकू शर्मा नाम के एक यूजर ने लिखा, ”अगर सपा का ब्राह्मण प्रेम छलावा नहीं है तो समाज पर अमर्यादित टिप्पणी करने वाले अपनी पार्टी के विधायक पर कार्रवाई करे। मुँह में दाँत नहीं पेट में आंत नहीं चले हैं ब्राह्मण क्षत्रिय को चोर बोलने वाले।”

बता दें कि यूपी में ब्राह्मणों को रिझाने के लिए सभी राजनीतिक दल पुरजोर कोशिशों में लगे हुए हैं। परशुराम की मूर्ति लगवाई जा रही है। ब्राह्मणों के प्रबुद्ध सम्मेलन कराए जा रहे हैं। वहीं अबरार अहमद अखिलेश यादव की उस राय को नकार रहे हैं, जिसमें एसपी अध्यक्ष ने बार-बार कहा था कि वो ही ब्राह्मणों के सच्चे हिमायती हैं।

‘कॉन्ग्रेस ने इन्हें क्या नहीं दिया… और ये BJP की दलाली कर रहे’: सिब्बल पर भड़के कॉन्ग्रेसी, किया विरोध प्रदर्शन, लोगों ने कहा- ‘यही पतन का कारण’

कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी हाई कमान पर सवाल उठाए जाने के कारण पार्टी कार्यकर्ता सिब्बल से नाराज हैं। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता चांदनी चौक में सिब्बल के घर के बाहर इकट्ठा होकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं। उनके हाथों में प्लेकार्ड हैं जिस पर लिखा है, ‘कपिल सिब्बल जल्दी ठीक हो जाओ।’ इसके अलावा वह राहुल गाँधी जिंदाबाद-जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पार्टी ने सिब्बल को कैबिनेट मंत्री बनाया, अहम भूमिका दी, लेकिन उन्होंने पार्टी के लिए कुछ नहीं किया। सिब्बल पर यह भी आरोप मढ़े गए कि वह आम कार्यकर्ताओं से बात नहीं करते और उनका मतदाताओं से कोई संपर्क नहीं है।

एक नाराज कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ने कहा, “वह सुधारों की बात नहीं करते, वह भाजपा की दलाली करते हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने भी कपिल सिब्बल पर निशाना साधा। माकन ने कहा, पार्टी में हर किसी  की सुनवाई होती है। सोनिया गाँधी ने यह सुनिश्चित किया था कि कपिल सिब्बल संगठनात्मक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बनें। उन्होंने सिब्बल और जी-23 कॉन्ग्रेस नेताओं को सलाह दी कि उन्हें उस संगठन को नीचा नहीं दिखाना चाहिए जिसने उन्हें एक पहचान दी है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के इस बर्ताव को देखने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया आ रही है। शांतनु ठाकुर कहते हैं, “कॉन्ग्रेस के पतन का यही कारण है कि वहाँ अब चिंतन और मनन नहीं हो रहा है और जो इसकी सलाह दे वो द्रोही करार दिया जाता है। पूर्ण रूपेण पर्सनल प्रॉपर्टी बना दी गई है कॉन्ग्रेस।”

दीपक पहल, कपिल सिब्बल का पक्ष लेते हुए कहते हैं, “वह नीचा नहीं दिखा रहे बस सही कार्रवाई करने को बोल रहे हैं। कॉन्ग्रेस अपना अध्यक्ष चुनने में सक्षम नहीं है। अब तीन साल से ज्यादा हो गए हैं तो कोई कैसे मानेगा ये अपना अध्यक्ष चुनेंगे।”

कॉन्ग्रेस पर चौतरफा सकंट: पंजाब के बाद अब छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, आलाकमान से मिलने दिल्ली पहुँचे 13 विधायक

कॉन्ग्रेस पार्टी इस समय चौतरफा संकट से घिरी हुई है। इसका कारण कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में मची सियासी उथल-पुथल है। दरअसल, पंजाब के बाद अब छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बदलने की खबरें जोरों पर हैं। छत्तीसगढ़ में सीएम भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के कॉन्ग्रेस आलाकमान से मिलने के बाद अब छत्तीसगढ़ के 13 विधायक दिल्ली पहुँचे हैं। इन्होंने भी हाईकमान से मिलने का समय माँगा है। बताया जा रहा है कि ये विधायक भूपेश बघेल के करीबी हैं।

विधायक बृहस्पत सिंह इन विधायकों का नेतृत्व कर रहे हैं। बृहस्पत सिंह ने नई दुनिया को बताया कि कुछ विधायक छत्तीसगढ़ सदन में रुके हैं और कुछ विधायक निजी होटल में रुके हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल टीएस सिंहदेव का नाम लिए बिना बृहस्पत ने कहा कि किसी एक व्यक्ति को खुश करने के लिए कॉन्ग्रेस के 70 विधायकों का भविष्य दॉँव पर नहीं लगाया जा सकता है। कॉन्ग्रेस आलाकमान देश के अन्य राज्यों में जो भी बदलाव कर रही है, उसमें छत्तीसगढ़ मॉडल को अपनाने की शर्त रखी जा रही है। ऐसे में प्रदेश में बदलाव की कोई संभावना नहीं है।

चर्चा है कि छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस दो गुटों में बँट गई है। टीएस सिंहदेव का धड़ा आलाकमान से ढाई साल वाला वादा पूरा करने का दबाव बना रहा है। उनके समर्थक राज्य में मंत्री पद से इस्तीफा देने की बात कह चुके हैं, जबकि, भूपेश बघेल अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

वहीं, पंजाब में सियासी संकट के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री व कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने बुधवार (सितंबर 29, 2021) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते पार्टी को आइना दिखाया। कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाने की माँग करते हुए सिब्बल ने पार्टी हाईकमान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मैं आपसे उन कॉन्ग्रेसियों की ओर से बोल रहा हूँ जिन्होंने पिछले साल अगस्त में कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी और सेंट्रल इलेक्शन कमेटी को पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए पत्र लिखा था और हम अभी तक इसका इंतजार कर रहे हैं।”

इस मुद्दे पर पार्टी के वरिष्ठ नेता आपस में उलझ गए हैं। कपिल सिब्बल द्वारा आलाकमान पर सवाल उठाने के बाद उन पर अजय माकन ने पलटवार किया है। माकन ने सिब्बल पर खुलकर हमला बोलते हुए याद दिलाया कि किस तरह उन्हें कॉन्ग्रेस ने पहचान दिलाई। माकन ने कहा कि संगठनात्मक पृष्ठभूमि का नहीं होने के बावजूद सोनिया गाँधी ने कपिल सिब्बल को केंद्र सरकार में मंत्री बनवाया था।

बता दें कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिं​ह ने पार्टी में चल रहे सियासी घमासान के बीच बुधवार (29 सितंबर 2021) शाम को गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। गृहमंत्री के आवास पर यह बैठ​क लगभग 45 मिनट चली। इसको लेकर मीडिया में कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही अमरिंदर सिंह भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

धर्मांतरण का दबाव, धमकी, पैसों का लालच: IAS इफ्तिखारुद्दीन के Viral वीडियो देख सीटीएस बस्ती के अध्यक्ष ने तोड़ी चुप्पी

धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने वाली वीडियो वायरल होने के बाद IAS इफ्तिखारुद्दीन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। लोग सामने आकर बता रहे हैं कि कानपुर के पूर्व कमिश्नर रह चुके इफ्तिखारुद्दीन उनसे धर्मांतरण की बात करते थे। ताजा जानकारी के अनुसार, कल्याणपुर स्थित राजकीय उन्नयन बस्ती के पूर्व अध्यक्ष निर्मल कुमार त्यागी ने ये आरोप लगाया है।

त्यागी ने बताया कि इफ्तिखारुद्दीन ने बस्ती को उजाडऩे की धमकी देकर सैकड़ों परिवारों के धर्मांतरण की कोशिश की थी। उनके मुताबिक, इस बस्ती को अंग्रेजों द्वारा बसाया गया था। वहाँ करीब 600 परिवार हैं और आबादी करीब 5 हजार है। साल 2016 में अक्टूबर में अचानक एक दिन तत्कालीन कमिश्नर इफ्तिखारुद्दीन का काफिला बस्ती पहुँचा और बस्ती वालों को बताया गया कि उन्हें बस्ती खाली करनी होगी, क्योंकि इस जमीन का इस्तेमाल मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए किया जाना है। 

पूर्व अध्यक्ष के मुताबिक जब कमिश्नर वापस जाने लगे तो उन्होंने समिति के लोगों से कार्यालय में आकर मिलने को कहा। दो दिन बाद वह कमिश्नर कार्यालय में उनसे मिलने गए। उन लोगों ने कमिश्नर को प्रार्थना पत्र दिया और गुहार लगाई कि वो लोग गरीब हैं उनकी बस्ती को न उजाड़ा जाए। अगर ऐसा हुआ तो उन लोगों का जीवन संकट में आ जाएगा।

त्यागी कहते हैं कि जब बस्ती वालों ने ज्यादा अनुरोध किया तो कमिश्नर ने उन्हें लालच दिया कि अगर धर्मांतरण करवा लिया तो उन्हें खूब पैसे भी मिलेंगे। साथ में अलग से बस्ती भी मिलेगी। त्यागी की मानें तो जिस समय उन्हें ये धर्मांतरण का लालच दिया जा रहा था उसी दौरान उनके साथ मौजूद एक आदमी ने सबको इस्लाम से जुड़ा साहित्य बाँटना शुरू कर दिया।

इसके बाद कई दिनों तक बस्ती में इस ऑफर को लेकर बातचीत हुई। बाद में स्थानीय लोगों ने तय किया कि वो अपना धर्म परिवर्तन नहीं करेंगे और अपनी शिकायत लेकर अदालत पहुँचे, जिसके बाद उनके ऊपर से बस्ती हटाए जाने का डर खत्म हुआ। लेकिन चीजें यहीं नहीं रुकीं। चौबेपुर का एक मोइनुद्दीन बस्ती वालों के संपर्क में आकर उनसे धर्मांतरण की बात करता रहा, जब किसी ने कोई सुनवाई नहीं की, तो वहाँ आना भी छूट गया।

दैनिक जागण की रिपोर्ट के अनुसारमेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि राजकीय उन्नयन बस्ती में मेट्रो के कारिडोर-2 के लिए कास्टिंग यार्ड बनाने की योजना थी। जाँच के बाद पता चला कि बस्ती को खाली नहीं कराया जा सकता तो फैसला बदल दिया गया।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों  उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के वरिष्ठ IAS इफ्तिखारुद्दीन के 3 वीडियोज वायरल हुए हैं, जिसमें वो कथित रूप से मंडलायुक्त पद पर तैनाती के दौरान सरकारी आवास में मुस्लिम कट्टरपंथियों को बुलाकर धर्म-परिवर्तन को बढ़ावा देने वाले पाठ पढ़ा रहे हैं। उन पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस्लामी कट्टरता को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं। ‘मठ मंदिर समन्वय समिति’ ने इस बाबत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की है।

वीडियो में एक अन्य मौलाना कहता है, “पूरे दुनिया के इंसानों को बताओ इस्लाम को आगे बढ़ाओ। अभी पिछले दिनों पंजाब के एक भाई ने इस्लाम कबूल किया तो मैंने उन्हें दावत नहीं दी थी। मैंने कहा कि इस्लाम कबूल करने की वजह क्या थी, तो उन्होंने कहा कि मेरी बहन की मौत। जब उसे जलाया तो वो कपड़े जल गए और वो निर्वस्त्र हो गई। फिर मुझे लगा मेरी बेटी भी है। कल को उसे भी लोग ऐसे ही देखेंगे। इसीलिए, मुझे इस्लाम से अच्छा कोई मजहब नहीं लगा और मैंने कबूल कर लिया।”

गृहमंत्री अमित शाह से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह, 45 मिनट चली बैठ​क, भाजपा में शामिल होने के साथ ही ये हैं कयास

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर अंर्तकलह जारी है। पार्टी में चल रहे सियासी घमासान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार (29 सितंबर 2021) शाम को गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। गृहमंत्री के आवास पर यह बैठ​क लगभग 45 मिनट चली।

इस बैठक को लेकर मीडिया में कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही कोई बड़ा कॉन्ग्रेसी नेता भाजपा में शामिल हो सकता है। चर्चा है कि भाजपा अमरिंदर को राज्यसभा के रास्ते सरकार में ला सकती है। या फिर उन्हें कृषि मंत्री का पद दिया जा सकता है।

दूसरी ओर कैप्टन के करीबी सूत्रों ने मीडिया में बताया कि दोनों नेताओं की मुलाकात में किसानों के मुद्दे को लेकर बातचीत हुई है। दरअसल, मंगलवार (28 सितंबर 2021) को दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए अमरिंदर सिंह ने दावा किया था कि उनका कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी कैप्टन को सही तरीके से इस्तेमाल करने की रणनीति पर विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें पार्टी में शामिल कराकर एक चेहरे के रूप में पेश करना उचित रहेगा, या कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में एक नए राजनीतिक दल का गठन हो और भाजपा उसका बाहर से सपोर्ट करे, इस संभावना पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

आपको याद दिला दें कि अमरिंदर सिंह को हाल ही में अपमानित होकर मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। उन्होंने कॉन्ग्रेस आलाकमान से कहा था कि वो अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके बाद उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू पर बड़ा हमला किया था। सिद्धू को एंटी नेशनल बताते हुए उन्होंने एलान किया था कि वो उन्हें पंजाब का CM नहीं बनने देंगे। सिद्धू को जीतने से रोकने के लिए मजबूत कैंडिडेट उतारेंगे। वहीं, उन्होंने राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को अनुभवहीन तक बता दिया था। इसके अलावा कैप्टन ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अजय माकन और केसी वेणुगोपाल पर भी हमला किया था।

अमरिंदर सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था, ”प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी मेरे बच्चे जैसे हैं। कोई चीज ऐसे नहीं खत्म होनी चाहिए। मैं आहत हूँ।” उन्होंने कहा था कि राहुल और प्रियंका अनुभवी नहीं हैं। उनके सलाहकार उन्हें गुमराह कर रहे हैं। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि वो सियासत में नई पारी शुरू सकते हैं।

बता दें कि कैप्टन का इससे पहले साल 2017 में कॉन्ग्रेस हाईकमान से टकराव हुआ था। तब कैप्टन ने जाट महासभा बनाकर कॉन्ग्रेस काे चुनौती दी थी। कैप्टन ने बाद में इसका खुलासा किया था कि वो भाजपा में जाने का मन बना चुके थे।

मुख्य सचिव पर CHC की टिप्पणियाँ ममता और अफसरशाही पर चोट, इस पर ‘मीडिया गिरोह’ की चुप्पी में छिपी है गहरी साजिश

मंगलवार (28 सितंबर) को कलकत्ता उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों की बेंच ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदेश के मुख्य सचिव के बारे में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि; मुख्य सचिव ने एक लोक सेवक की तरह नहीं बल्कि सत्ताधारी दल (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के सेवक की तरह काम किया। यह जनहित याचिका सायन बनर्जी ने मुख्य सचिव एच के द्विवेदी द्वारा चुनाव आयोग से किये गए उस अनुरोध के खिलाफ की थी जिसमें मुख्य सचिव द्विवेदी ने चुनाव आयोग से भवानीपुर विधानसभा उप चुनाव की प्रक्रिया को जल्दी निपटाने की सिफारिश की थी।

चुनाव आयोग को की गई अपनी सिफारिश में मुख्य सचिव ने कहा था कि यदि चुनाव जल्दी न कराए गए तो संवैधानिक संकट आ जाएगा। अपनी दलील के समर्थन में मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को बताया था कि शहर में COIVID-19 संकट और बाढ़, दोनों नियंत्रण में थे।

वैसे तो न्यायालय ने इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया पर सुनवाई की प्रक्रिया में मुख्य सचिव के बारे में बेंच की टिप्पणियाँ राज्य में ब्यूरोक्रेसी और प्रशासन व्यवस्था के बारे में बहुत कुछ कहती है। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि; मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग से प्रदेश में COVID-19 और बाढ़ को लेकर जो कुछ भी कहा वह भ्रामक था।

अपनी टिप्पणी में न्यायलय ने आगे कहा कि राज्य सरकार द्वारा COVID-19 सम्बंधित प्रतिबंध अपने 15 सितंबर के आदेश (संख्या 753/IX-ISS/2M-22/2020) के द्वारा 30 सितंबर तक बढ़ाने का अर्थ ही यह था कि प्रदेश में महामारी पर काबू नहीं पाया जा सका था। साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि; प्रदेश में बाढ़ की समस्या को लेकर भी मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को गुमराह किया क्योंकि यह सबको पता है कि प्रदेश में इस वर्ष सामान्य से अधिक वर्षा हुई है।

उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव के बारे में जो टिप्पणी की है, उसे अखबारों और टीवी समाचारों की रिपोर्ट में जगह तो मिली पर उसे लेकर इकोसिस्टम में व्याप्त चुप्पी साफ़ सुनाई देती है। कारण साफ़ है। मुख्य सचिव के बारे में न्यायालय की इस टिप्पणी को मीडिया और विशलेषकों द्वारा जानबूझकर महत्वहीन बना देना शायद सेक्युलर रणनीति का अहम पहलू है क्योंकि ये ऐसी सरकार के मुख्य सचिव के विरुद्ध है जिसके नेतृत्व से निकट भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति में अपने लिए स्थान बनाकर केंद्र सरकार और नरेंद्र मोदी से लड़ने और उन्हें हराने की आशा की जा रही है। ऐसे में लिबरल-सेक्युलर विचारकों के हित में है कि वे न्यायालय की ऐसी टिप्पणियों को अपनी कोशिशों से नेपथ्य में रखे किसी लॉकर में बंद कर दें।

न्यायालय द्वारा मुख्य सचिव के बारे में की गई टिप्पणियाँ हमें वर्तमान मुख्य सचिव से ठीक पहले जो मुख्य सचिव थे उनकी भी याद दिलाती हैं। यह भी याद दिलाती हैं कि प्रधानमंत्री के प्रदेश के दौरे पर उन्होंने किस तरह से एक अफसर के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया था। उसके परिणामस्वरूप जो कुछ भी हुआ वह न केवल राजनीति का विषय रहा बल्कि उसके बाद कैसे इस्तीफा दिलवाकर उन्हें मुख्यमंत्री ने अपना सलाहकार नियुक्त कर लिया था। यह राज्य के सत्ताधारी दल, उसके नेतृत्व और उसके द्वारा अफसरशाही पर समग्र नियंत्रण की कहानी कहता है।

उच्च न्यायालय की इन टिप्पणियों को यदि हाल के विधानसभा चुनाव परिणामों के पश्चात हुई हिंसा और उसपर राज्य प्रशासन की कार्रवाई करने (या न करने) के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो ये और महत्वपूर्ण हो जाती हैं। चुनाव परिणामों के पश्चात हुई हिंसा, बलात्कार और हत्या की घटनाओं पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और उच्च न्यायालय के आदेश, प्रदेश सरकार और उसके प्रशासन की मंशा और कार्यशैली के बारे में संदेश देते हैं।

ऐसे में यह आवश्यक है कि इन टिप्पणियाँ पर बहस होनी चाहिए क्योंकि ऐसा करना दीर्घकालीन लोकतंत्र और उसके सुधार का रास्ता खोल सकता है। पर यदि उस बहस को केवल इसलिए रोक दिया जाएगा क्योंकि ऐसा करने से भविष्य की संभावित राजनीतिक लड़ाई पर बुरा असर होगा, तब लोकतंत्र में सुधार पश्चिम बंगाल जैसे राज्य के लिए हमेशा चुनौती बना रहेगा। दशकों तक बहस से बचते-बचते ही राज्य ने चुनावी हिंसा को प्रदेश की राजनीति का अभिन्न अंग बना दिया है।

करीबी भी छोड़ रहे कॉन्ग्रेस का साथ, हम भी ‘जी हुजूर-23’ नहीं: पंजाब क्राइसिस के बीच अध्यक्ष विहीन पार्टी को सिब्बल ने दिखाया आइना

पूर्व केंद्रीय मंत्री व कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने बुधवार (सितंबर 29, 2021) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए एक बार फिर पार्टी अध्यक्ष को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने जल्द से जल्द CWC बैठक बुलाने की माँग करते हुए कहा कि ये दुर्भाग्य है कि कॉन्ग्रेस के पास कोई अध्यक्ष नहीं है।

कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाने की माँग करते हुए सिब्बल ने पार्टी हाईकमान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मैं आपसे उन कॉन्ग्रेसियों की ओर से बोल रहा हूँ जिन्होंने पिछले साल अगस्त में कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी और सेंट्रल इलेक्शन कमेटी को पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए पत्र लिखा था और हम अभी तक इसका इंतजार कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “इंतजार की भी एक हद होती है। हम कब तक इंजतार करेंगे। हम सिर्फ एक मजबूत संगठनात्मक ढाँचा चाहते हैं। कुछ बात होना चाहिए। CWC में किसी भी मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। पंजाब के हालातों पर चर्चा होनी चाहिए। हम किसी के खिलाफ नहीं है। हम पार्टी के साथ हैं, लेकिन फैक्ट ये है कि हमारी पार्टी का कोई चुना हुआ अध्यक्ष नहीं है।”

सिब्बल ने कॉन्ग्रेस के अध्यक्षविहीन होने पर भारी मन से दुख प्रकट किया और कहा कि प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी को दिल्ली से कंट्रोल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “‘मैं बहुत भारी मन से यहाँ आया हूँ। मैं उस पार्टी का हिस्सा हूँ जिसका गौरवशाली इतिहास रहा है। फिलहाल जो स्थिति है, उसे नहीं देख सकते। हम चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और आज पार्टी जिस स्थिति में है, उसे वहाँ नहीं होना चाहिए।”

कपिल सिब्बल ने कहा कि वो उन नेताओं में से नहीं है जो पार्टी छोड़ कर चले जाएँ लेकिन वह इस चीज को विडंबना बताते हैं कि कभी केंद्रीय नेतृत्व के करीब रहने वाले नेताओं ने अब पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस के लोग हमें छोड़कर चले गए हैं वो वापस आ जाए क्योंकि कॉन्ग्रेस ही ऐसी विचारधारा है जो इस देश की बुनियाद है जिसके आधार पर हमारी रिपब्लिक बनी थी। पार्टी ही उसको बरकरार कर सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि एक सीमावर्ती राज्य (पंजाब) जहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ ऐसा हो रहा है, इसका क्या मतलब है? इससे ISI और पाकिस्तान को फायदा है। कॉन्ग्रेस को सुनिश्चित करना चाहिए कि वे एकजुट रहें। अगर किसी को दिक्कत है तो वो पार्टी के वरिष्ठ नेता से चर्चा करें।

उल्लेखनीय है कि कपिल सिब्बल उन 23 नेताओं में से हैं जिन्होंने पिछले वर्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिखा था और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का चुनाव कराने की माँग की थी। पंजाब कॉन्ग्रेस के हालातों पर कपिल सिब्बल ने कहा, “कॉन्ग्रेस में अब कोई निर्वाचित अध्यक्ष नहीं है। हम नहीं जानते कि पार्टी के निर्णय कौन ले रहा है।” वह बोले, “हम जी-23 हैं, निश्चित रूप से जी हुज़ूर-23 नहीं हैं। पार्टी के सामने हम मुद्दों को उठाते रहेंगे।”

कपिल सिब्‍बल ने कहा, “हम शीर्ष नेतृत्‍व से बात करते रहेंगे। अपनी माँगों को दोहराना जारी रखेंगे।” सिब्बल ने कॉन्ग्रेस नेतृत्व से कहा, “कॉन्ग्रेस कार्य समिति की बैठक तत्काल बुलाई जाए ताकि इस पर चर्चा की जा सके कि पार्टी में क्या हो रहा है।”

‘सड़क पर नमाज हिंदू-मुस्लिम की सहमति से…’ – गुरुग्राम पुलिस ने डिलीट किया ट्वीट, BJP नेता ने CM खट्टर के आदेश को करवाया याद

गुरुग्राम में नमाज को लेकर विवाद हुआ। पब्लिक प्लेस पर नमाज क्यों हो – विवाद का कारण यही था। इस तरह के मामले में पुलिस विवाद की जाँच करती है और सुलझाती है। यहाँ उल्टा हो गया। खुद गुरुग्राम पुलिस फँस गई। फँसी एक ट्वीट के चक्कर में। पहले ट्वीट देख लेते हैं।

गुरुग्राम पुलिस का ट्वीट, यह स्क्रीनशॉट है क्योंकि ट्वीट डिलीट कर दिया गया है

मतलब पुलिस खुद बता रही है कि पब्लिक प्लेस पर नमाज हो रही है, दोनों पक्ष (हिंदू-मुस्लिम) सहमत हैं। खैर, पब्लिक प्लेस के मामले में पक्षों की सहमति वाला तर्क कानूनन होता तो गुरुग्राम पुलिस को अपना ट्वीट डिलीट नहीं करना पड़ता।

अवैध अतिक्रमण को नमाज़ के रूप में अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सही बताने वाली गुरुग्राम पुलिस का अजीब उत्तर किसी के गले नहीं उतरा। राष्ट्रव्यापी बेइज्जती के बाद गुरुग्राम पुलिस को अपना वह ट्वीट डिलीट करना पड़ा।

वहीं इस मामले पर हरियाणा भाजपा के प्रवक्ता रमन मालिक ने गुरुग्राम पोलिस को खट्टर सरकार के स्टैंड से अवगत कराते हुए पुराना सरकारी आदेश जारी किया। उन्होंने ट्वीट किया, “@DC_गुरुग्राम आपको गुरुग्राम पुलिस से जवाब माँगना चाहिए #Sector47 में नमाज़ के मामले में उनकी प्रतिक्रिया पर। मैंने आपको इस मामले में अपनी शिकायत और प्रश्न मेल कर दिए हैं। मई 2018 में ही CM खट्टर ने कहा था, धार्मिक स्थलों पर ही धार्मिक क्रियाकलाप होने चाहिए।”

ज्ञात हो कि पिछले कुछ समय से सार्वजनिक स्थल पर नमाज़ियों के अवैध कब्ज़े का गुरुग्राम की जनता ने मुखर विरोध किया है। बार-बार समझाए जाने के बाद भी कब्जाधारियों के न सुधरने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस से शिकायत करते हुए सवाल किया कि हिंदू त्यौहारों पर प्रशासन द्वारा थोपे जाने वाले प्रतिबंध और सख्ती इनके (नमाजियों) मामले आने पर कहाँ चली जाती है?

पुलिस और पब्लिक की इस बहस का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और इस पूरे प्रकरण में पुलिस को स्पष्टीकरण देना पड़ा। स्पष्टीकरण में गुरुग्राम पुलिस ने लिखा:

“सार्वजनिक स्थानों पर ‘नमाज’ के स्थान हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा आपसी समझ के बाद तय किए गए हैं और यह जगह उनमें से एक है। सांप्रदायिक सद्भाव और शांति बनाए रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और हम इसे सुनिश्चित करेंगे।”

गुरुग्राम पुलिस के इस ट्वीट पर विरोध की झड़ी लग गई। आखिरकार गुरुग्राम पुलिस ने वो ट्वीट डिलीट कर दिया पर उसका स्क्रीनशॉट अभी तक वाद-विवाद का केंद्र बना हुआ है। ट्वीट को डिलीट करना हालाँकि गुरुग्राम पुलिस को राहत न दे पाई।

एडवोकेट अभिषेक शर्मा द्वारा दायर RTI

सड़क पर अतिक्रमण कर के मज़हबी गतिविधि चलाने को आपसी समझौता बताने वाले जवाब पर हिंदू आईटी सेल के एडवोकेट अभिषेक शर्मा ने RTI दायर कर दी। उन्होंने गुरुग्राम पुलिस से RTI के माध्यम से प्रश्न किया है कि पुलिस पूर्व में अतिक्रमण कर के नमाज़ पढ़ने वालों पर लिए गए एक्शन का ब्यौरा दे और यदि सार्वजनिक स्थलों पर नमाज़ आपसी सहमति से हो रही तो ये समझौता कब हुआ?

एडवोकेट अभिषेक शर्मा द्वारा दायर RTI

इस संबंध में ऑपइंडिया से बात करते हुए हिंदू आईटी सेल के संस्थापक सदस्यों में से एक अक्षित सिंह ने बताया कि 2018 के अपने आदेश में मद्रास हाई कोर्ट ने पब्लिक प्लेस पर नमाज जैसी गतिविधियों को गैरकानूनी बताया था।

फिलहाल ये कहना गलत नहीं होगा कि गुरुग्राम पुलिस के लिए उनका किया गया एक ट्वीट गले की फाँस बन चुका है। इस पूरे मामले का सबसे रोचक पहलू ये है कि सोशल मीडिया की सनसनी बन चुका ये मामला अराजनैतिक रूप में आम जनमानस व पुलिस के मध्य चल रहा है।

यहाँ यह भी जानना उचित होगा कि अवैध अतिक्रमण से होने वाली नमाज़ के चलते ही इससे पूर्व भी गुरुग्राम में अप्रैल 2018, मई 2018, अगस्त 2018, नवम्बर 2018, दिसंबर 2019 और मार्च 2021 में तनाव फैल चुका है। अब तो लोग प्रशासन से इतने नाराज हो चुके हैं कि नमाज की प्रतिक्रिया में ‘सड़कों पर हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर दें क्या?’ जैसे सवाल पूछ रहे हैं।

मोदी सरकार की पीएम पोषण योजना: 11 लाख से अधिक स्कूलों के करोड़ों छात्रों को भरपेट भोजन, ₹1.31 लाख करोड़ होंगे खर्च

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (29 सितंबर 2021) को कैबिनेट की बैठक ली। इस दौरान सरकार ने कई फैसले लिए। इसी में से एक पीएम पोषण स्कीम रही। सरकार ने इस योजना को मंजूरी दे दी है। अब से इसके तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 11.2 लाख से अधिक सरकारी स्कूलों के बच्चों को अगले पाँच साल तक फ्री में भरपेट भोजन प्रदान किया जाएगा। कैबिनेट मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अनुराग ठाकुर ने सरकार के इस फैसले के बारे में जानकारी दी।

क्या है पीएम पोषण योजना

केंद्र सरकार द्वारा पीएम पोषण योजना को मंजूरी दी गई है। ये योजना बिल्कुल मिड डे मील की तरह ही है। इसके तहत भी सरकारी स्कूलों में बच्चों को मुफ्त में दिन का खाना दिया जाएगा। ताकि उन्हें कुपोषण जैसी समस्याओं से बचाने में मदद मिल सके। इसके लिए मोदी सरकार पाँच साल में 1.31 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस योजना के तहत मिड डे मील के अलावा भी बहुत कुछ जोड़ा जाएगा। इसी कारण इसका खर्च 1,31,000 करोड़ रुपए किया गया है।

खत्म हो जाएगी मिड डे मील योजना

केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम पोषण योजना के अस्तित्व में आने के बाद अब मिड डे मील योजना समाप्त हो जाएगी औऱ उसकी जगह पर पीएम पोषण स्कीम के तहत बच्चों को दिन का भोजन प्रदान किया जाएगा।

केंद्र और राज्य मिलकर इस योजना का खर्च वहन करेंगे

पीएम पोषण योजना का खर्च वहन केंद्र और राज्य दोनों मिलकर करेंगे। हालाँकि, इन सब के बावजूद केंद्र सरकार की देयता इसमें सर्वाधिक ही रहेगी। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के मुताबिक, पीएम पोषण योजना के तहत केंद्र 60 फीसदी तो राज्य 40 फीसदी का योगदान देंगें। हालाँकि, पहाड़ी राज्यों में यह अनुपात 90:10 का होगा। वहीं गेहूँ और चावल की सारी सप्लाई का जिम्मा केंद्र सरकार का होगा। इससे राज्यों को फायदा होगा। उन्हें अधिक भार नहीं सहना पड़ेगा। इसके अलावा 11,20,000 से ज्यादा स्कूलों के करोड़ों छात्रों को इसका लाभ मिलेगा।

लश्कर आतंकी अली बाबर ने खोली पाकिस्तान की पोल, बताया कैसे पाक सेना और ISI ने ट्रेनिंग देकर कराई घुसपैठ: देखें वीडियो

भारत में पकड़े गए 19 वर्षीय आतंकवादी अली बाबर ने पाकिस्तान की पोल खोल दी है। कैमरे के सामने आतंकी बाबर ने खुलासा किया कि उसे पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने ट्रेनिंग दी थी।

अली बाबर ने कबूला है कि वह पाकिस्तान से हथियार सप्लाई करने भारत आया था। उसे भारत आने के लिए ISI ने लालच दिया था और पाकिस्तानी सेना ने ट्रेनिंग दी थी। उसने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उसे उसकी माँ के इलाज के लिए 25,000 रुपए की जरूरत थी। मुझे उन्होंने भारत आने के लिए 20 हजार रुपए एडवांस दिए थे। इसके अलावा मेरे परिवार को 30 हजार रुपए दिए थे।

बाबर ने कहा, “पाकिस्तानी सेना के बिना कोई भी आतंकवादी आईएसआई में नहीं घुस सकता। हमें आईएसआई द्वारा फायर आर्म्स और ट्रेनिंग दी गई थी। हमें मिशन के लिए जाने के लिए कहा गया था, मुझे लश्कर द्वारा भर्ती किया गया था। पाक सेना द्वारा घुसपैठ के लिए कुल 6 आतंकियों को लॉन्च किया गया था। ज्यादातर निर्देश पाकिस्तानी सेना के जवानों ने दिए थे।”

आतंकवादी ने कहा कि भारतीय सेना ने उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया है। वहीं, पाकिस्तान की सेना गलत सूचना फैलाकर युवाओं का ब्रेनवॉश कर रही है। वह हिंसा और अपने निजी फायदे के लिए जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों की मदद कर रही है।

आतंकी के मुताबिक उन्हें बताया गया था कि इस्लाम खतरे में है। उसने बताया, “मैं गरीब और गुमराह था। मैं एक लड़के से मिला जो लश्कर-ए-तैयबा का था। मेरे पिता की मृत्यु के बाद मैंने काम करना शुरू कर दिया। मेरी एक बड़ी बहन है और मेरे भाई की मृत्यु हो गई है।”

बाबर ने आगे कहा कि पाकिस्तानी सेना के गड़ी हबीबुल्ला मुजफ्फरबाद स्थित खैबर कैंप में फरवरी 2019 में उसे तीन हफ्ते की ट्रेनिंग दी गई थी। इस दौरान कुल 9 पाकिस्तानी लड़कों को उसके साथ ट्रेनिंग दी गई थी। सभी को कश्मीर में जिहाद के लिए तैयार किया गया था। पाकिस्तानी सेना के एक सूबेदार ने मिलिट्री ट्रेनिंग दी। इसके बाद 2021 में एक रिफ्रेशर ट्रेनिंग कोर्स कराया गया था।

बता दें कि आतंकी पिछले 10 दिन से उरी के पास मौजूद एक नाले में छिपा था। मंगलवार (28 सितंबर 2021) को सुरक्षाबलों ने उसे जिंदा पकड़ा था। उसके पास से AK-47 राइफल और चीन-पाकिस्तान निर्मित कई ग्रेनेड बरामद हुए हैं। जीओसी 19 इन्फैंट्री डिवीजन के मेजर जनरल वीरेंद्र वत्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया था कि एलओसी पर सेना ने 18 सितंबर को अभियान शुरू किया था। इसमें छह घुसपैठियों का एनकाउंटर हुआ था। इनमें से चार बाड़ के दूसरी तरफ थे, जबकि दो भारतीय क्षेत्र की तरफ आ गए थे। इनमें से एक को ढेर कर दिया गया, जबकि दूसरे को जिंदा पकड़ा गया।