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करीना कपूर खान के नाम पर पोर्शे कार, केरल में नकली एंटीक डीलर के पास मिली: पिता का नाम, पता सब हिरोइन की

बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान के नाम पर रजिस्टर एक कार केरल के फेक एंटीक डीलर के पास मिली है। ये कार 2007 मॉडल पोर्शे बॉक्सस्टर है। कार की रजिस्ट्री में एड्रेस और पिता का नाम भी लिखा हुआ है और ये जानकारी भी करीना से जुड़ी हुई ही है। पिछले साल इसे डीलर के पास से जब्त किया गया था। अब इसे चेरथला थाना परिसर में रखा गया है। करीना के नाम वाली कार के अलावा मोनसन मावुंकल नामक डीलर के पास से 20 अन्य लग्जरी गाड़ी भी मिली थी।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने जब्त की गई कार के रजिस्टर्ड डॉक्यूमेंट्स को चेक किया जहाँ पिता के नाम पर रणधीर कपूर का नाम लिखा है। मुंबई के पते में हिल रोड, बांद्रा लिखा गया है। अब ये बात स्पष्ट नहीं है कि रजिस्ट्री में नाम बदले बिना मोनसन ने कैसे वाहन की कस्टडी ली।

केरल के चेरथला के मोनसन मावुंकल ने मशहूर हस्तियों, राजनेताओं और शीर्ष पुलिस सहित कई लोगों को ठगने के लिए सुर्खियाँ बटोरी हुई हैं। उस पर आरोप है कि वो प्राचीन वस्तुओं की आड़ में लोकल चीजों का प्रदर्शन करता था।

उसने दावा किया हुआ था कि उसके पास यहूदा के 30 चांदी पीस हैं। इसके अलावा टीपू सुल्तान के शाही सिंहासन का भी कुछ है। वह बताता है भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम नियमों के कारण उसके विदेशी बैंक खाते में 2.6 लाख करोड़ रुपए फँस गए हैं। उसकी मानें तो उसे प्राचीन वस्तुओं के बदले बहुत ज्यादा पैसा आया था।

52 साल के मावुंकल की गिरफ्तारी याकूब पुराइल, अनूप वी अहमद, सलीम एडाथिल, एम टी शमीर, सिद्दीकी पुराइल और शैनिमोन द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद हुई है। उन्होंने साल 2017 में इस पर 10 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था।

बता दें कि पिछले महीने, बेंगलुरू में परिवहन विभाग के अधिकारियों ने 10 से अधिक लक्जरी कारों को जब्त किया था, जिसमें रोल्स रॉयस, फेरारी और पोर्श जैसे ब्रांड शामिल थे। हैरानी वाली बात यह है कि इनमें से एक का नाम मेगास्टार अमिताभ बच्चन के नाम दर्ज है। दरअसल, अमिताभ बच्चन ने कुछ साल पहले अपनी रोल्स रॉयस फैंटम बेची थी जो उन्हें फिल्म निर्माता विधु विनोद चोपड़ा ने उपहार में दी थी। सूत्रों के मुताबिक, बच्चन ने 2019 में 3.5 करोड़ रुपए की फैंटम को बेंगलुरु के बिजनेसमैन यूसुफ शरीफ या स्क्रैप बाबू को बेच दिया। वह बेंगलुरु में उमराह डेवलपर्स नाम की एक रियल एस्टेट कंपनी चलाते हैं।

अमरिंदर सिंह का ऐलान- कॉन्ग्रेस में नहीं रहूँगा, पर पत्ते पूरे नहीं खोले: अमित शाह के बाद अब NSA अजीत डोभाल से मिले ‘कैप्टन’

इस वक्त पंजाब की राजनीति पर देशभर की नजरे टिकी हुईं हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के एक दिन बाद यानी गुरुवार (सितंबर 30, 2021) को पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से मुलाकात की। अमरिंदर सिंह ने डोभाल से यह मुलाकात ऐसे समय में की है जब पंजाब में राजनीतिक संकट का दौर जारी है। पार्टी की पंजाब इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफा देने के बाद कॉन्ग्रेस की कलह दिल्ली तक पहुँच गई है। इसके बाद अमरिंदर सिंह के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जाने लगी थीं। जिससे पर्दा खुद उनके एक जवाब ने हटा दिया है।

अमरिंदर सिंह ने कहा है कि वह बीजेपी में शामिल नहीं होंगे लेकिन कॉन्ग्रेस में भी नहीं रहूँगा। एक टीवी चैनल से बातचीत में अमरिंदर सिंह ने कहा, “अभी तक मैं कॉन्ग्रेस में हूँ लेकिन कॉन्ग्रेस में नहीं रहूँगा। मेरे साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए था।”

अहम मानी जा रही है दोनों के बीच यह मुलाकात

हालाँकि, अब तक यह पता नहीं चल सका है कि कैप्टन और डोभाल के बीच क्या चर्चा हुई, लेकिन अमरिंदर सिंह और अजित डोभाल की यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि पंजाब से लगते पाकिस्तान बॉर्डर को लेकर चर्चा हो सकती है क्योंकि पूर्व सीएम ने हाल में ही नवजोत सिंह सिद्धू पर हमला बोलते हुए कहा था कि सिद्धू की इमरान खान और पाकिस्तानी सेना के प्रमुख कमर बाजवा से गहरी दोस्ती है और अगर उन्हें पंजाब में किसी भी बड़े पद पर रखा जाता है तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सही नहीं होगा। वह सिद्धू को सीएम नहीं बनने देंगे।

कैप्टन अमरिंदर ने बुधवार को की थी अमित शाह से मुलाकात

गौरतलब है कि कैप्टन अमरिंदर बुधवार (सितंबर 29, 2021) को गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के लिए उनके घर पहुँचे थे। दोनों के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई। माना जा रहा था कि शाह ने अमरिंदर से भाजपा में शामिल होने पर चर्चा की। इस बीच कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अमरिंदर सिंह दिल्ली में कॉन्ग्रेस के बागी जी-23 गुट के नेताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं। ऐसी कई अटकलों पर आज उनके एक बयान से फिलहाल विराम लग गया है लेकिन ऐसा भी लग रहा है जैसे उन्होंने अभी अपने सारे पत्ते नहीं खोले हैं।

वहीं अमरिंदर सिंह के मीडिया सलाहकार ने बताया कि पूर्व सीएम ने अमित शाह से मिलकर किसानों से जुड़े मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कृषि कानूनों को लेकर जारी प्रदर्शन पर बात हुई। कैप्टन ने शाह से जल्द से जल्द इन कानूनों को वापस लेकर एमएसपी लागू करने की माँग उठाई। इसके अलावा पंजाब में अलग-अलग फसल उगाने पर जोर देने की भी अपील की।

उल्लेखनीय है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में पार्टी से अपमानित होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस आलाकमान से कह दिया कि वो अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने राजभवन जाकर पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद उन्होंने राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी पर भी तीखा हमला बोला था।

इधर मंगलवार (28 सितम्बर, 2021) को पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद से नवजोत सिद्धू ने 72 दिन बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अमरिंदर सिंह ने सिद्धू के इस्तीफे को नाटक करार देते हुए कहा कि सिद्धू पंजाब जैसे संवदेनशील राज्य के योग्य नहीं हैं।

टिहरी डैम पर बनी अवैध मस्जिद हटाई गई: लंबे समय से हो रहा था विरोध, नेटिजन्स ने की थी उत्तराखंड के CM धामी से कार्रवाई की माँग

आखिरकार प्रशासन ने उत्तराखंड के टिहरी बाँध के पास बनी अवैध मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। बीते कई दिनों से टिहरी गढ़वाल जिला इस अवैध मस्जिद को लेकर चर्चा में था। स्थानीय लोग और हिंदू संगठन इसे हटाने की माँग कर रहे रहे थे। ताजा जानकारी के अनुसार 30 सितंबर 2021 को अधिकारियों ने खंड-खाला कोटि कॉलोनी में बनी इस अवैध मस्जिद को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस अवैध मस्जिद के कारण लोगों को होने वाली समस्याओं को ऑपइंडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ता अक्षत बिलजवान ने ऑपइंडिया बातचीत में कहा कि कवरेज के कारण अवैध मस्जिद पर देशव्यापी हंगामा हुआ और अंत में प्रशासन ने इसे हटाने का फैसला किया। इस मामले में ऑपइंडिया की खबर के बाद सोशल मीडिया पर हैशटैग #RemoveTehriMosque ट्रेंड करने लगा था। नेटिजन्स ने अवैध मस्जिद को हटाने के लिए स्थानीय लोगों की माँग को और अधिक आवाज दी। त्वरित कार्रवाई के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग भी किया।

आज (30 सितंबर 2021) मस्जिद तोड़ने की कार्रवाई शुरू होने की जानकारी अक्षत ने ऑपइंडिया को फोन कर दी। उन्होंने कार्रवाई का वीडियो भी साझा किया, जिसमें पिछले 20 सालों से बने अस्थायी ढाँचे को हटाया जा रहा। सरकारी जमीन पर कब्जा कर खड़े किए गए इस ढाँचे का स्थानीय लोग लंबे वक्त से विरोध कर रहे थे।

एक वीडियो मैसेज में अक्षत ने बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच समेत सभी हिंदू संगठनों को इस मामले में समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने अवैध मस्जिद पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को धन्यवाद भी दिया। अक्षत ने कहा, “मैं क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय को भी धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उन्होंने अवैध ढाँचे को हटाने में सहयोग किया।”

जानिए क्या है मामला

2000 के दशक की शुरुआत में बाँध बनाने वाली कंपनी जेपी ने मुस्लिम मजदूरों के लिए एक अस्थायी मस्जिद का निर्माण किया था। परियोजना के पूरी होने के बाद कंपनी और मजदूर चले गए, लेकिन अस्थायी मस्जिद को जस का तस रहने दिया। इस अवैध ढाँचे को हटाने के लिए पहले भी स्थानीय नेताओं, हिंदू संगठनों और लोगों ने कई बार आवाज उठाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अक्षत ने इस मामले में कहा था, “हर शुक्रवार को सैकड़ों मुसलमान यहाँ नमाज अदा करने आते हैं। नमाज अदा करने के बाद ज्यादातर लोग सड़क पर ही बैठ जाते हैं। पास में ही एक कॉलेज है और इस सड़क से अक्सर मोहल्ले की महिलाएँ गुजरती हैं। खासकर शुक्रवार को इलाके में उत्पीड़न के अनगिनत मामले सामने आए हैं, जहाँ सौ से ज्यादा मुस्लिम सड़क के किनारे बैठे रहते हैं। हमने कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।”

मस्जिद को हटाने की माँग के लिए सितंबर 2021 के पहले सप्ताह में अक्षत और हिंदू संगठनों के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने मस्जिद के खिलाफ फिर से विरोध शुरू किया। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन और जमीन के मालिक पर्यटन विभाग ने पहले ही निरीक्षण कर अवैध मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इस क्षेत्र को दूसरे सभी अवैध ढाँचों को पहले ही हटा दिया गया था, लेकिन मस्जिद को नहीं हटाया गया था।

दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय लोगों की माँग के खिलाफ मस्जिद प्रशासन ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग में अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद याचिका पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने स्थानीय अधिकारियों को तलब किया और कार्रवाई पर रोक लग गई। 25 सितंबर को एसडीएम ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और वादा किया कि जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि ये जमीन पर्यटन विभाग की है और उसने मस्जिद को अवैध घोषित कर रखा है। हालाँकि, एसडीएम ने इस बात पर भी जोर दिया था कि चूँकि इस मामले में अल्पसंख्यक आयोग भी शामिल था, इसलिए स्थानीय लोगों को इसे हटाने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

ऑपइंडिया में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्तर पर नेटिजन्स द्वारा उठाया गया था। सवाल पूछा गया कि राज्य अल्पसंख्यक आयोग एक अवैध ढाँचे को हटाने की उचित प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश क्यों कर रहा है।

केरल के मलप्पुरम में मुस्लिम बच्ची का निकाह, ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ने हिंदू बालिका की तस्वीर से किया गुमराह

‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ (TNIE) ने 20 सितंबर 2021 को केरल के मलप्पुरम में एक मुस्लिम लड़की के बाल विवाह की रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें उसने गुमराह करती हुई प्रतीकात्मक इमेज का इस्तेमाल किया। TNIE की एक रिपोर्ट के अनुसार, शौहर के साथ ही उसके अम्मी-अब्बू और एक काजी के खिलाफ इस निकाह को करवाने के मामले में केस दर्ज किया गया है।

काजी शरिया कोर्ट का मजिस्ट्रेट है और वो वहाँ शादी में शामिल होने के लिए गया था। इससे ये सिद्ध होता है कि यह निकाह या मुस्लिम विवाह था। जबकि, TNIE की रिपोर्ट में जिस तरह की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था, उसमें बिंदी लगाए हुए नाबालिग हिंदू लड़की को माला के साथ दिखाया गया है जैसे कि यह एक हिंदू बाल विवाह था।

उल्लेखनीय यह है कि इसी मामले पर 19 सितंबर 2021 को TNIE ने जो रिपोर्ट प्रकाशित की थी, उसमें उसने इस बात का उल्लेख किया था कि निकाह करने वाले दंपति ‘अल्पसंख्यक समुदाय’ से थे। उस रिपोर्ट में भी प्रतीकात्मक तस्वीर एक ‘हिंदू’ की थी, जो पाठकों को गुमराह कर रही थी।

साभार: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

केरल में बाल विवाह का मामला

बाल-विवाह की यह घटना 18 सितंबर 2021 को केरल के मलप्पुरम जिले के करुवरकुंडू में हुई थी। रिपोर्टों से पता चलता है कि लड़की की उम्र 17 साल थी और वह कक्षा 12वीं की छात्रा थी। इस मामले में पुलिस ने काजी, शौहर और उसके अम्मी-अब्बू सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। उसके बाद अगले दिन पुलिस ने लड़की का बयान दर्जकर मामले की जाँच शुरू कर दी।

करुवरकुंडु पुलिस स्टेशन के निरीक्षक मनोज परायट्टा ने कहा कि उन्होंने बाल विवाह निषेध अधिनियम-2006 के तहत मामला दर्ज किया था। उन्होंने कहा, “बाल विवाह एक गंभीर अपराध है जिसमें पाँच साल की कैद या 10 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। शादी के लिए उकसाने वालों के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इसके तहत विवाह में शामिल होने वाले मेहमान, कैटरर्स और वीडियोग्राफर तक शामिल हैं।”

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, बाल विवाह के मामलों में सबूत जुटाना काफी मुश्किल होता है। उन्होंने कहा, “सामान्यतया इस तरह के विवाह गुपचुप तरीके से किए जाते हैं। इसमें लोग फोटों नहीं खींचते और इलाका विशेष के लोग सबूतों को देकर जाँच में सहयोग नहीं करते हैं। फिर भी हम इस मामले को गंभीरता से लेकर मामले की जाँच करेंगे और दोषियों को अधिकतम सजा दिलाने की कोशिश करेंगे, ताकि इस तरह के मामले दोबारा न हों।”

केरल का मलप्पुरम जिला मुस्लिम बहुल क्षेत्र है जो इस तरह के बाल विवाह के लिए कुख्यात रहा है। यहाँ 2017 में अधिकारियों ने ऐसी दस शादियों को रोका था और वहीं 2016 में करुवरकुंडु से सटी मुथेदम पंचायत में ऐसी 12 शादियों को रोक दिया गया था।

तस्वीरों से गुमराह कर रहा मेन स्ट्रीम मीडिया

यह बहुत ही आम बात हो चुकी है कि अपराध में मुस्लिम समुदाय के लोगों के शामिल होने के बावजूद देश की मेन स्ट्रीम मीडिया लगातार हिंदू समुदाय को बदनाम करने वाली प्रतीकात्मक तस्वीरों का इस्तेमाल करती है। इस तरह की प्रतीकात्मक तस्वीरों में अक्सर हिंदू धर्म से जुड़े ग्राफिक्स का इस्तेमाल किया जाता है, भले ही इसमें मुस्लिम समुदाय का ही कोई क्यों न शामिल हो। ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं, जहाँ हंगामे के बाद मीडिया घरानों ने अपनी प्रतीकात्मक तस्वीरों को ही बदल दिया था।

इसी साल जुलाई 2021 में एक युवती को धोखा देने के आरोप में महाराष्ट्र पुलिस ने एक मौलवी ‘बाबा करीम खान बंगाली’ को गिरफ्तार किया था। लेकिन मेन स्ट्रीम की मीडिया ने उसे ‘तांत्रिक’ करार दे दिया। उसी महीने उत्तर प्रदेश के अमरोहा में भी एक मौलवी अफजल मलिक और उसके सहयोगियों ने नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप किया था। उसे भी ‘सेक्युलर मीडिया’ की रिपोर्ट में ‘तांत्रिक‘ करार दिया। जबकि ‘तांत्रिक’ शब्द तंत्र-मंत्र की साधना करने वाले से जुड़ा है। इस शब्द का इस्तेमाल कर प्रायः नाम छिपाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जाती है।

अक्सर देखा जाता है कि प्रतीकात्मक तस्वीरें हिंदुओं की ही इस्तेमाल की जाती हैं, जिससे पाठक गुमराह हो जाता है और उसे लगता है कि हो न हो अपराधी हिंदू ही होगा।

5 कैब ड्राइवर, नाम: आसिफ, नवाज, सलमान… 20 साल की युवती को घेर कर छेड़ा, ₹5 लाख माँगे

कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में 20 वर्षीय युवती के यौन शोषण का मामला सामने आया है। आरोपित कैब ड्राइवर हैं। इनकी पहचान आसिफ, नवाज पाशा, लियाकत पाहा, राशिद और सलमान खान के तौर पर हुई है। आसिफ, नवाज, राशिद और लियाकत हंडेनहल्ली के तथा सलमान मरासंडरा का रहने वाला है।

रिपोर्ट के अनुसार इनलोगों पर रिश्तेदार के सामने युवती से छेड़खानी का आरोप है। विरोध करने पर इनलोगों ने पीड़िता से 5 लाख रुपए की डिमांड की। पीड़िता के अनुसार वह शनिवार (25 सितंबर 2021) दोपहर अपने एक रिश्तेदार के साथ कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स लेने होसकोटे के पास गई थी। इसी दौरान आरोपितों ने उन दोनों को घेरकर धमकाना शुरू कर दिया। उनसे कहा कि उन्होंने उनका वीडियो बनाया है। यदि 5 लाख रुपए नहीं दिए तो सोशल मीडिया पर इसे वायरल कर देंगे। पीड़िता के मिन्नतें करने के बावजूद आरोपित उसे धमकाते रहे।

कथित तौर पर आरोपितों ने पीड़िता को कार से बाहर निकाल उसके साथ छेड़खानी की। इसी दौरान कुछ चरवाहे मौके पर आ गए और आरोपित भाग निकले। इसके बाद पीड़िता ने थाने पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के मुताबिक IPC की धारा 504, 384, 354,149 के तहत केस दर्ज कर मामले की पड़ताल की जा रही है।

कुछ स्थानीय समाचार वेबसाइटों रिपोर्टों में बताया गया है कि पीड़िता एकांत में अपने प्रेमी से मिल रही थी। इसी दौरान पाँचों आरोपित आ गए। उन्होंने लड़की की फोटो खींच कर उसके साथ जबरदस्ती और ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी।

गौरतलब है कि तेलंगाना के भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने कुछ समय पहले कैब ड्राइवरों के एक गैंग DJX के बारे में खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि ‘दरगाह जिहाद शहादत कमेटी’ नाम से संचालित होने वाले इस गैंग ने बाकायदा पूरी प्लानिंग के साथ उन सैकड़ों हिंदुओं का कत्ल कर दिया जिन्हें पता ही नही था कि वो टैक्सी नहीं बल्कि मौत की सवारी करने जा रहे हैं।

देखिए हैदराबाद BJP विधायक टी राजा सिंह का DJX पर खुलासा

तालिबान ने भाई का गला रेता, पर नहीं झुके अमरुल्लाह सालेह: अफगानिस्तान की निर्वासित सरकार बनाई, होंगे कार्यवाहक राष्ट्रपति

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार को चुनौती देने के लिए कथिततौर पर अमरुल्लाह सालेह की अगुवाई में निर्वासित सरकार का गठन हुआ है। सालेह इस सरकार के कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाए गए हैं। उन्होंने अभी तक नॉर्दर्न एलायंस के साथ मिलकर पंजशीर से तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ था।

स्विट्जरलैंड में अफगान दूतावास द्वारा जारी एक बयान के हवाले से, खामा प्रेस न्यूज एजेंसी ने बताया अमरुल्लाह सालेह के नेतृत्व वाली निर्वासित सरकार अफगानिस्तान में एकमात्र ‘वैध सरकार’ है। तालिबान की ओर इशारा करते हुए कहा गया कि कोई भी अन्य सरकार वैध सरकार को स्थानांतरित नहीं कर सकती।

बयान में बताया गया कि अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद निर्वासित सरकार का गठन लंबे परामर्श के बाद हुआ है ताकि तालिबान को चुनौती दी जा सके।निर्वासित सरकार सालेह के नेतृत्व में काम करेगी। वह कार्यपालिका और न्यायपालिका को साथ लेकर चलेंगे।

मालूम हो कि इस बयान में अमरुल्लाह सालेह के अलावा और किसी सदस्य के बारे में नहीं बताया गया है। लेकिन, ये पता है कि काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद अमरुल्लाह सालेह अफगान के कुछ रक्षा बलों के साथ पंजशीर चले गए थे और वहीं से तालिबान का विरोध कर रहे थे।

अशरफ गनी प्रशासन के राजनीतिक नेताओं द्वारा जारी बयान में यह भी कहा गया है कि अफगानिस्तान इस्लामिक गणराज्य के सभी दूतावास और वाणिज्य दूतावास दिन-प्रतिदिन के संचालन को जारी रखेंगे।

बता दें कि अफगानिस्तान को लेकर यह निर्णय उस समय सुनाया गया है जब तालिबानी सरकार को बने करीबन एक माह होने वाला है। तालिबानी सरकार का नेतृत्व मुल्ला अखुंद कर रहे हैं। इसके अलावा कई ऐसे आतंकी भी सरकार का हिस्सा हैं जिन्हें ओबामा सरकार में छोड़ा गया था। कुछ दिन पहले तालिबान ने अमरुल्लाह सालेह के बड़े भाई रोहुल्ला को तड़पा-तड़पा कर मार डाला था। उन्हें कोड़े मारते हुए उनका गला रेता गया था।

‘भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करें, मुस्लिम-ईसाइयों को न हो वोट का अधिकार’: सरयू में जल समाधि का ऐलान करने वाले संत कौन

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित तपस्वी छावनी के संत जगद्गुरु परमहंस आचार्य महाराज ने बुधवार (29 सितंबर 2021) को भारत सरकार से देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की माँग की। इसके लिए उन्होंने 2 अक्टूबर 2021 की डेडलाइन दी है। उन्होंने कहा, “मेरी माँग है कि 2 अक्टूबर तक भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित कर दिया जाए, नहीं तो मैं 2 अक्टूबर को महात्मा गाँधी की जयंती पर दोपहर 12 बजे सरयू नदी में जल समाधि ले लूँगा।” साथ ही उन्होंने मोदी सरकार से मुस्लिमों और ईसाइयों की राष्ट्रीयता समाप्त करने की माँग भी की है।

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “अगर भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया गया तो संविधान, अदालतें, मानवता और भारतीय संस्कृति सभी ठीक उसी तरह से खत्म हो जाएँगे, जैसे कभी भारत का हिस्सा रहे पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश आदि देशों में हुआ है।” उन्होंने कहा कि हिंदुओं के लिए भारत ही एकमात्र राष्ट्र बचा है और अगर भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया गया तो हिंदुओं का अस्तित्व ही मिट जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो हिंदुओं के साथ सनातन धर्म का भी अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, इसलिए केंद्र सरकार से राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की माँग की है।

संत का कहना है कि केंद्र सरकार को धारा 368 के तहत संविधान में संशोधन कर मुस्लिमों और ईसाइयों से वोट देने का अधिकार छीन लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “मोदी जी बहुत बड़े-बड़े काम कर रहे हैं तो भाजपा के पास संविधान में संशोधन करने और भारत को एक हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए धारा 368 का उपयोग करने की शक्ति भी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हिंदुओं को पूरे देश में वैसे ही मारा जाएगा जैसे पश्चिम बंगाल में लाखों हिंदुओं की हत्याएँ की जा रही हैं।”

परमहंस आचार्य ने कहा, “अगर भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया गया तो 4 बीवियाँ और 40 बच्चे पैदा करने वाले ये लोग पूरे देश में वही करेंगे, जो कश्मीर में हुआ था। कहाँ जाएँगे हिंदू? साधु परंपरा के अनुरूप मैंने खुद के कफन की पूजा कर ली है। अब अगर सरकार भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं करती है, तो मैं इस कफन को पहनकर 2 अक्टूबर को जल समाधि ले लूँगा।” उन्होंने ये भी बताया कि एकअक्टूबर को अयोध्या में हिंदू संगठन ‘हिंदू सनातन धर्म संसद’ का आयोजन कर रहे हैं। संत ने ये भी कहा, “सरकार को भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना होगा। यह या तो मेरे जीते जी होगा या फिर मरने के बाद होगा। लेकिन यह होने वाला है।”

इससे पहले परमहंस आचार्य इसी मुद्दे पर 15 दिन के आमरण अनशन पर चले गए थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद उन्होंने अनशन तोड़ा था। अयोध्या के संत समुदाय ने घोषणा की है कि वे जगद्गुरु परमहंस आचार्य महाराज की माँग का समर्थन करने के लिए ‘हिंदू सनातन धर्म संसद’ आयोजित करेंगे।

भवानीपुर में ममता की किस्मत का फैसला कर रहे वोटर, BJP प्रत्याशी प्रियंका टिबरेवाल ने कहा- बूथ कैप्चरिंग की कोशिश कर रहे TMC विधायक

पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा सीट पर मतदान शुरू होने के साथ ही हिंसा की खबरें मीडिया में आने लगी। तृणमूल कॉन्ग्रेस की ममता बनर्जी को टक्कर देने मैदान में उतरी भाजपा प्रत्याशी प्रियंका टिबरेलवाल ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा पर वोटिंग मशीन कैप्चर करने का आरोप मढ़ा है। उनका कहना है कि मित्रा ने वोटिंग मशीन बंद की, क्योंकि वह बूथ पर कब्जा करना चाहते हैं।

इससे पहले भाजपा प्रत्याशी प्रियंका टिबरेाल ने मतदान केंद्र पहुँच कहा था, “हम निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कर रहे हैं। सुरक्षा तैनाती बहुत महत्वपूर्ण है। मैं आज क्षेत्र के मतदान केंद्रों का दौरा करूँगी। राज्य सरकार अभी डरी हुई है।”

बता दें कि भवानीपुर के उपचुनावों पर सबकी नजर इसलिए भी बनी हुई हैं क्योंकि यहाँ के चुनावों में हुई जीत/हार पर ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने उनके सामने टिबरेवाल को उतारा, जिन्होंने 2014 में भाजपा ज्वाइन की थी।

बता दें कि टिबरेवाल पेशे से वकील हैं और बंगाल में चुनाव में हुई हिंसा के बाद चुनाव बाद हिंसा के मामलों में दायर याचिका में याचिकाकर्ताओं में से एक हैं, जिनके कारण कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मामलों में सीबीआई और एसआईटी जाँच का आदेश दिया है।

उल्लेखनीय है कि आज पश्चिम बंगाल के भवानीपुर के अलावा समसेरगंज और जंगीरपुर; ओडिशा के पिपली में भी उपचुनाव के लिए वोटिंग है। इस बीच वोटिंग शुरू होने से कुछ घंटे पहले समसेरगंज में बम फेंके जाने के मामले में टीएमसी नेता अनारुल हक को गिरफ्तार किया गया।

कोलकाता पुलिस ने एक आदेश में कहा, “किसी भी मतदान केंद्र के 200 मीटर के दायरे में 5 या इससे अधिक लोगों को एकत्र होने की अनुमति नहीं होगी। पत्थर, हथियार, पटाखे या अन्य विस्फोटक सामग्री लाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।” पुलिस ने बताया कि भवानीपुर में 38 स्थानों पर पुलिस चौकियाँ बनाई गई हैं। भवानीपुर उपचुनाव के लिए एक अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के अलावा चार संयुक्त पुलिस आयुक्त, 14 उपायुक्त और इतने ही सहायक आयुक्त तैनात किए गए हैं।

बंद हुआ दिल्ली का अकीला रेस्टोरेंट, बिना लाइसेंस के चल रहा था: ‘साड़ी स्मार्ट ड्रेस नहीं’ वाले Video से चर्चा में आया था

दिल्ली के अंसल प्लाजा का अकीला (Aquila) रेस्टोरेंट बंद हो गया है। यह बगैर लाइसेंस के चल रहा था। यह रेस्टोरेंट पिछले दिनों साड़ी विवाद को लेकर सुर्खियों में था। एक महिला पत्रकार ने दावा किया था कि साड़ी में होने के कारण रेस्टोरेंट के कर्मचारियों ने उन्हें प्रवेश देने से इनकार कर दिया और उनके साथ बदसलूकी की। इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया में रेस्टोरेंट को काफी विरोध झेलना पड़ा था।

रिपोर्ट के अनुसार अकीला रेस्टोरेंट ने जरूरी हेल्थ सर्टिफिकेट भी नहीं ले रखा था। साउथ दिल्ली म्युनिसिपल कार्पोरेशन (SMDC) ने बुधवार (29 सितंबर 2021) को बताया कि लाइसेंस नहीं होने के कारण रेस्टोरेंट को 48 घंटे के भीतर बंद करने का आदेश दिया गया था। 24 सितंबर को इस संबंध में नोटिस जारी किया गया था। उससे पहले 21 सितंबर को स्वास्थ्य निरीक्षक ने इस रेस्टोरेंट की जाँच की थी। उस दौरान पाया गया था कि रेस्टोरेंट बिना लाइसेंस के चल रहा है और इसने सरकारी जमीन पर कब्जा भी कर रखा है। दैनिक जागरण के अनुसार यह रेस्टोरेंट कागजों में सील होने के बावजूद चल रहा था।

नगर निगम नोटिस का रेस्टोरेंट प्रबंधन ने 27 सितंबर को जवाब दिया। इसमें लाइसेंस नहीं होने की बात स्वीकार करते हुए रेस्टोरेंट को बंद कर देने की जानकारी दी गई। बुधवार को दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की बैठक में भी इस रेस्टोरेंट का मुद्दा उठा था। साड़ी विवाद का हवाला देते हुए रेस्टोरेंट पर जुर्माना लगाने की माँग की गई थी।

एनबीटी को एसडीएमसी के महापौर मुकेश सूर्यन ने बताया, “अकीला नाम का रेस्टोरेंट बिना वैध लाइसेंस के चल रहा था। उसे हमने बंद करने का नोटिस जारी किया था। अब वह बंद हो गया है। हम डीएमसी (दिल्ली नगर निगम) अधिनियम के तहत जुर्माना सहित अन्य कार्रवाई की संभावना पर भी गौर कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में अकीला रेस्टोरेंट का स्टाफ, पत्रकार अनीता चौधरी से कहता दिखा था कि साड़ी स्मार्ट आउटफिट नहीं है, इसलिए वो उसे पहनने वालों को अपने यहाँ अनुमति नहीं देते। वीडियो वायरल होने के बाद रेस्टोरेंट की ओछी मानसिकता की कड़ी आलोचना की गई। महिला पत्रकार ने बताया था कि 19 सितंबर को अपनी बेटी का जन्मदिन मनाने जब वे इस रेस्टोरेंट में गईं तो यह घटना हुई।

इसके बाद इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करते हुए रेस्टोरेंट ने अपने व्यवहार के लिए माफी माँगी थी। उसने महिला पत्रकार पर मारपीट का भी आरोप लगाया था। अकीला ने अपनी सफाई में कहा था कि वह भारतीय संस्कृति का सम्मान करती है। हमेशा से आधुनिक से लेकर परंपरागत, हर स्टाइल के ग्राहकों का स्वागत करती रही है।

‘पब्लिक प्लेस-पब्लिक का पैसा, फिर जाति बताना जरूरी?’: हाई कोर्ट ने पूछा, सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा की नामकरण पट्टिका ढकने का आदेश

मध्य प्रदेश में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा पर उनके नाम के साथ ‘गुर्जर’ जोड़ने पर शुरू हुआ विवाद अब हाई कोर्ट में है। कोर्ट ने केस में एक समिति बनाते हुए आदेश दिया है कि जब तक जाँच समिति रिपोर्ट नहीं देती तब तक नेम प्लेट को ढके रखा जाए। साथ ही क्षत्रिय और गुर्जर समाज के लोगों बीच उठे विवाद को शांत करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 20 अक्टूबर को होगी।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक जाँच समिति को गठित कर यह जाँच करने का आदेश दिया है कि क्या सार्वजिनक स्थान पर (पब्लिक फंड से) स्थापित की गई राष्ट्रीय नायक की प्रतिमा को उससे जुड़ी जाति के साथ संदर्भित किया जा सकता है।

कोर्ट ने ग्वालियर शहर में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा स्थापना के बाद उपजे विवाद पर सुनवाई के दौरान यह समिति गठित की। यह पूरा विवाद क्षत्रिय समाज और गुजर्रों के बीच का है। जज शील नागू और जज आनंद पाठक के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने राहुल साहू द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि देश के नागरिकों का यह कर्तव्य है कि राष्ट्रीय नायक को राष्ट्रीय नायक बने रहने दिया जाए और उन्हें धर्म, जाति, समुदाय या कोई भी समूह के नाम पर पेश किया जाए।

केस में सुनवाई के बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि 4 सदस्यीय समिति गठित की जाए जिसमें जिसमें आयुक्त ग्वालियर संभाग अध्यक्ष तथा पुलिस महानिरीक्षक, ग्वालियर रेंज समिति के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करें। उक्त समिति में गुर्जर समाज का एक प्रतिनिधि तथा क्षत्रिय समाज का एक प्रतिनिधि भी सम्मिलित होगा। 

कोर्ट ने कहा है कि जब तक ये समिति अपनी रिपोर्ट नहीं जमा करती तब तक सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा पर से नाम को ढका रखा जाए और केवल उनकी प्रतिमा ही लोगों के नजर में आए ताकि लोग उनके साहस और शौर्य से प्रेरणा ले सकें। आगे यह मामला 20 अक्टूबर को सुना जाएगा। कोर्ट ने दोनों समुदाय के बुजुर्गों से अपील की है कि वो अपने समुदाय के युवाओं को सम्राट की वीरता, चरित्र, प्रतिबिंबित महिमा के बारे में बताएँ।

बता दें कि ये पूरा विवाद सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के साथ जोड़े गए ‘गुर्जर’ शब्द पर है, जिसे देख क्षत्रिय समाज के लोग भड़क गए थे और सारा विवाद शुरू हुआ था। प्रशासन का तर्क है कि नगर निगम ने जो प्रस्ताव पारित किया था उस पर मिहिर भोज ही लिखा है। इस केस में बीच में खबर आई थी कि कुछ अज्ञात लोगों ने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने का भी प्रयास किया जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की गई थी।